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कौन जात हो… बिहार ने शुरू की गिनती: ₹500 करोड़ करेगा खर्च, दो चरणों में होगा पूरा; जानें सब कुछ

बिहार में राजद (RJD) और जदयू (JDU) का गठबंधन सरकार बनते ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) जातीय गणना कराने पर सहमति व्यक्ति कर दी थी। इसका काम बिहार में आज शनिवार (7 जनवरी 2023) से शुरू हो गया है। जातीय गणना की माँग RJD विपक्ष में रहते हुए लंबे समय से करती आ रही थी।

500 करोड़ रुपए खर्च कर दो चरणों में गिनती

नीतीश कुमार की विवादास्पद जाति आधारित जनगणना पर 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सरकार दो चरणों में इस जनगणना को पूरा करेगी। पहले चरण में 7 जनवरी से 21 जनवरी तक किया जाएगा। इस दौरान राज्य के सभी घरों की संख्या की गणना की जाएगी।

इसका दूसरा चरण मार्च में शुरू किया जाएगा। इस दौरान सभी जातियों, उप-जातियों और धर्मों के लोगों से संबंधित आँकड़ें एकत्र किए जाएँगे। इस दौरान गणना करने वाले लोग उन सभी लोगों की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी दर्ज करेंगे।

पंचायत से जिला स्तर तक के इस आठ स्तरीय सर्वेक्षण में एक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डेटा डिजिटल रूप से एकत्र किया जाएगा। इस ऐप में स्थान, जाति, परिवार में लोगों की संख्या, उनके पेशे और वार्षिक आय के बारे में प्रश्न होंगे।

जनगणना करने वाले लोगों में शिक्षक, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, मनरेगा (MNREGA) या जीविका कार्यकर्ता शामिल हैं। इन लोगों को जनगणना से संबंधित कार्यों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने 15 दिसंबर 2022 से प्रशिक्षण देने के लिए व्यवस्था की थी।

OBC के आँकड़े जुटाने के लिए भारी-भरकम राशि खर्च

बिहार सरकार भाजपा की अगुवाई वाली NDA गठबंधन से अलग होने के बाद अलग राह पर है। इसके पहले केंद्र की भाजपा सरकार ने जातीय जनगणना कराने से इनकार कर दिया था। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने साल 2021 में संसद में कहा था कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को छोड़कर कोई भी जाति आधारित जनगणना नहीं होगी।

बता दें कि आजादी के बाद से भारत में अब तक सात बार जनगणना हो चुकी है। इन सबमें केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित आँकड़े प्रकाशित किए हैं। हालाँकि, हर दस साल पर होने वाली इस जनगणना में आँकड़े हर जाति और धर्म के इकट्ठे किए जाते रहे हैं।

सन 1931 की जनगणना में ओबीसी की आबादी 52 फीसदी आँकी गई थी। केंद्र में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने साल 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना कराई थी, लेकिन जाति के आँकड़े जारी नहीं किए गए थे।

उधर, बिहार विधानसभा ने जातिगत जनगणना के पक्ष में साल 2018 और 2019 में सर्वसम्मति से दो प्रस्ताव पारित किए। जून 2022 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बिहार में एक सर्वदलीय बैठक हुई थी, जिसमें भाजपा सहित सभी दलों ने जातिगत जनगणना कराने पर सहमति दी।

अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए कोई मैकेनिज्म नहीं

हालाँकि, सर्वदलीय बैठक में भाजपा ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इस जातीय गणना में अवैध बांग्लादेशी मुस्लिमों और घुसपैठिए रोहिंग्या मुस्लिमों को बाहर रखना होगा। इसका लाभ उन्हें किसी भी तरह नहीं मिलना चाहिए। इसके अलावा, उच्च जाति वाले मुस्लिम खुद को निम्न जाति का बताकर इसका लाभ ना ले सकें, यह भी सरकार को सुनिश्चित करना होगा।

हालाँकि, बिहार की नीतीश सरकार के पास इन अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए कोई मैकेनिज्म नहीं है। यहाँ तक कि केंद्र सरकार ने जब राष्ट्रीय पंजीयन रजिस्टर (NRC) को देश भर में लागू करने की बात कही, तब वोट बैंक को देखते हुए नीतीश कुमार ने इसे लागू करने से साफ मना कर दिया था।

सीएम नीतीश कुमार ने कहा दरभंगा में हायाघाट ब्लॉक के चंदनपट्टी में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय में एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि बिहार में NRC लागू नहीं किया जाएगा। बता दें कि मिथिलांचल और सीमांचल, बिहार में सबसे अधिक अवैध घुसपैठियों के निवास वाला क्षेत्र है।

जातीय जनगणना के जरिए 2024 लोकसभा की तैयारी

दरअसल, जातिगत जनगणना की माँग करने वालों का तर्क है कि ST, SC को उनकी आबादी के आधार पर आरक्षण दिया गया था, लेकिन OBC के मामले में ऐसा नहीं है। उनका कहना है कि कोटा को संशोधित करने की जरूरत है और इसके लिए जाति आधारित जनगणना की जरूरत है।

बिहार सरकार का तर्क है कि इन आँकड़ों का इस्तेमाल वह जनोपयोगी नीतियों को बनाने में करेगी। हालाँकि, बिहार सरकार का यह आँकड़ा पूरी तरह राजनीतिक साबित होता है। बिहार सरकार ने यह भी कहा था कि जातिगत आँकड़ों के अभाव में गैर-एसटी/एसटी से अलग अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सही जनसंख्या का पता नहीं चल पा रहा है।

बता दें कि बिहार में कभी चिर प्रतिद्वंद्वी रहे राजद के लालू प्रसाद यादव और जदयू के नीतीश कुमार की राजनीति ही अन्य पिछड़ा वर्ग पर टिकी हुई है। जहाँ राजद के लिए अहीर प्रमुख वोट बैंक हैं, वहीं जदयू के लिए कुर्मी। अगर OBC के सही आँकड़े सामने आते हैं तो इन दोनों दलों को अपनी राजनीतिक गोटियाँ सेट करने में मदद मिल जाएगी।

दरअसल, नीतीश कुमार केंद्र में खुद को देखने के लिए लालायित हैं। ऐसे में बिहार में जातिगत जनगणना कराकर वे 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे राजनीतिक एजेेंडे के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं। इससे भाजपा को थोड़ा बहुत नुकसान भी हो सकता है।

1990 के दशक में लागू हुआ था मंडल कमीशन

बता दें कि साल 1990 के दशक में प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व वाली जनता दल की सरकार ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट को लागू करते हुए OBC आरक्षण को लागू किया था। इस समय भाजपा जनता दल सरकार के साथ गठबंधन में थी। चुनाव से पहले ही उन्होंने इसे लागू करने का वादा किया था और सरकार बनते ही इस पर काम शुरू कर दिया था।

उस दौरान वीपी सिंह ने तर्क दिया था कि सरकारी नौकरियों में एक ही जाति के वर्चस्व को तोड़ने और सबको समान अवसर देने के लिए मंडल कमीशन लागू किया गया है। हालाँकि, कमीशन की सिफारिशें लागू होते ही भाजपा ने अपना समर्थन वापस ले लिया था और देश भर में राम मंदिर के लिए रथयात्रा की शुरुआत की थी।

18 साल की उम्र में फाँसी पर चढ़ने वाले क्रांतिकारी: सावरकर भाइयों से प्रेरित हुए तो धधकी आज़ादी वाली आग, छद्म ‘वैदिक’ अंग्रेज कलक्टर को उतारा था मौत के घाट

यह उन दिनों की बात है जब भारत की राजनीति में दो मुख्य विचारधाराएँ उभर रही थीं। जहाँ कॉन्ग्रेस अपने प्रस्तावों के द्वारा भारतवासियों के लिए अधिक से अधिक अधिकारों की माँग कर रही थी, और वहीं क्रांति की मशाल जलाए कुछ जाँबाज क्रांतिदूत अलग ही मन बनाए बैठे थे। इन दीवाने युवकों का मानना था कि सशस्त्र विद्रोह के ज़रिये ही अंग्रेज़ों की सत्ता उखाड़ी जा सकती है। आगे चलकर जब अंग्रेज़ सरकार हिन्दू और मुस्लिमों में मतभेद पैदा करने के लिए 1905 में ‘बंगाल का विभाजन’ करती है तो सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन को इससे और भी बल मिलता है।

महाराष्ट्र में ‘अभिनव भारत’ नाम का युवकों का संगठन बनता है और वे अखाड़ों के माध्यम से वे क्रांति की भावना फैलाने में जुट जाते हैं। ‘वीर’ विनायक दामोदर सावरकर और उनके भाई गणेश सावरकर इस संगठन के प्रमुख व्यक्ति थे। आंदोलन से प्रभावित हो एक युवक अनंत लक्ष्मण कन्हेरे भी इस मंडली में सम्मिलित हो जाता है। आंदोलन के चलते अब सावरकर पर कड़ी नज़र रखी जाने लगी थी। सावरकर के लंदन प्रवास के अंतिम दिनों में भारत में उनके परिवार पर अंग्रेजों ने कहर ढा रखा था।

परिवार विपत्तियों का पहाड़ टूटा पड़ रहा था। एक अंग्रेज़ अधिकारी जैक्सन क्रांतिकारियों के ऊपर नज़र रखता था। वह लोगों से मराठी में बात करने के अलावा उनसे संस्कृत के बारे में भी अक्सर चर्चा करता था। वह लोगों को यह कहकर फुसलाता था कि वो पूर्व जन्म में वैदिक-साक्षर ब्राह्मण था। इसी जैक्सन की वजह से बाबासाहब को नवम्बर माह में गिरफ़्तार किया गया था। दोष उनका सिर्फ इतना ही था कि उन्होंने कवि गोविंद की कविताओं की एक पुस्तक का प्रकाशन करवाया था।

किसी न किसी के सीने में तो आग लगनी ही थी। चिंगारी तो कई सीनों में भड़क रही थी लेकिन इस बार शोले भड़के थे अनंत लक्ष्मण कन्हेरे के सीने के अंदर। कृष्णजी कर्वे के नेतृत्व में एक क्रांतिकारी गुट जैक्सन को सज़ा देने का मन बना लेता है। तभी जैक्सन को मुंबई के आयुक्त के पद पर पदोन्नत किए जाने की ख़बर आती है। कृष्णाजी कर्वे, विनायक देशपांडे और अनंत कन्हेरे जैक्सन के स्थानांतरण से पहले ही उसे उसे ख़त्म करने का फ़ैसला लेते हैं।

पता लगता है कि नासिक निवासीगण, विजयानंद थिएटर में जैक्सन के लिए विदाई समारोह का आयोजन करने वाले हैं। अनंत ख़ुद जैक्सन को मारने की ज़िम्मेदारी लेते हैं। अपने अन्य सहयोगियों को पकड़े जाने से बचाने के लिए आत्महत्या करने का फ़ैसला करते हुए अनंत ने अपने पास ज़हर भी रख लिया था। योजना यह थी कि अनंत का प्रयास विफल होने पर विनायक जैक्सन को गोली मारेगा। अगर ये दोनों विफल रहे तो कर्वे के पास हथियार भी था।

21 दिसंबर, 1909 को, जब जैक्सन नाटक देखने पहुँचा तो अनंत ने सामने से आकर पिस्तौल से उन पर चार गोलियाँ चला दीं। भारतीय अधिकारियों में से एक, पलशीकर और मारुतराव ने वहाँ मौजूद अन्य लोगों की सहायता से अनंत को पकड़ लिया। अनंत ना तो खुद को गोली मार पाए और ना ज़हर खा पाए। मात्र अठारह वर्ष के थे अनंत उस समय, मात्र अठारह वर्ष! केस चला तो अनंत ने हत्या में अपनी भूमिका ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार कर ली।

19 अप्रैल, 1910 को ठाणे जेल में अनंत के साथ कृष्णाजी कर्वे और विनायक देशपांडे को भी फाँसी पर चढ़ा दिया गया। मामले के अन्य आरोपियों शंकर रामचंद्र सोमन, नारायण जोशी और गणेश बालाजी वैद्य को आजीवन कारावास की सज़ा दी गई थी। दत्तात्रेय पांडुरंग जोशी को दो साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई गयी थी। हैवानियत की हद यह है अंग्रेज़ों की कि इन बलिदानियों की अस्थियों को भी उनके रिश्तेदारों को नहीं सौंपा गया था, बल्कि ठाणे के पास समुद्र में फेंक दिया गया था।

(भारत के स्वतंत्रता संग्राम एक ऐसे ही कुछ गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथाएँ आप ‘क्रांतिदूत’ श्रृंखला में पढ़ सकते हैं, जो डॉ. मनीष श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई हैं।)

कर्णप्रयाग के घरों में भी जोशीमठ की तरह दरारें, उत्तरकाशी के एक गाँव में खेत-खलिहान भी धँस रहे: मोदी सरकार ने अध्ययन के लिए भेजा दल

उत्तराखंड (Uttarakhand) प्राकृतिक आपदा के एक बड़े दौर से गुजर रहा है। जोशीमठ (Joshimath) के बाद अब कर्णप्रयाग (Karnaprayag) में भी लोगों के घरों में दरारें पड़ने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। भूमि धँसने और भूस्खलन के कारण इस पहाड़ी राज्य के कई क्षेत्रों में पड़ रही दरारों से लोग भय की स्थिति में जी रहे हैं। वे किसी प्राकृतिक आपदा को लेकर भयभीत हैं।

कर्णप्रयाग के बहुगुणानगर, सीएमपी बैंड और सब्जी मंडी के ऊपरी भाग में रहने वाले 50 से अधिक परिवारों के घरों में दरारें आ गई हैं। यहाँ बरसात के मौसम में भू-धंसाव देखने को मिला था। अब जोशीमठ की तरह यहाँ के घरों में भी दरारें पड़ने लगी हैं।

बदरीनाथ हाईवे के किनारे बसे इस क्षेत्र के लगभग 25 मकानों में 2 फीट तक दरारें पड़ी हैं। ऐसे घरों में रहने वाले कई परिवारों ने खतरे को देखते हुए इसे छोड़ दिया है। वहीं, अभी भी कुछ परिवार इन घरों में रहने को विवश हैं, लेकिन हर पल इन्हें डर का अहसास होते रहता है।

सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एमएस बुटोला के अनुसार, इस क्षेत्र का दो बार प्रशासन के अलावा रुड़की आईआईटी के वैज्ञानिक भी निरीक्षण कर चुके हैं। कर्णप्रयाग के प्रभावित इलाके के आसपास के लिए ट्रीटमेंट का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। भूगर्भीय सर्वे भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि पैसा स्वीकृत होते ही जल्दी काम शुरू करवाया जाएगा। 

इसी तरह उत्तरकाशी जिले के मस्ताड़ी गाँव भी 31 वर्षों से भू-धंसाव की मार झेल रहा है। यहाँ के घर ही नहीं, रास्ते और खेत-खलिहान भी धँस रहे हैं। साल 1991 में आए भूकंप के बाद से यह स्थिति शुरू हुई थी। भूकंप में गाँव के लगभग सभी मकान ध्वस्त हो गए थे। इसके बाद साल 1997 में प्रशासन ने यहाँ का भूगर्भीय सर्वेक्षण कराया था।

रिपोर्ट में कहा था कि भू-धंसाव वाले क्षेत्र में सर्वेक्षण कराकर चेकडैम, सुरक्षा दीवार का निर्माण और पौधा रोपण कराया जाए। मकानों के चारों ओर पक्की नालियों का निर्माण कर पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए। हालाँकि, इस तरह का कोई उपाय नहीं किए गए।

इसको देखते हुए वहाँ के ग्रामीण विस्थापन के लिए लंबे समय से माँग कर रहे हैं, जो अब तक लटका हुआ है। हालाँकि, जोशीमठ की घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने कहा है कि विस्थापन के लिए भूमि का चुनाव कर लिया गया है और भूगर्भीय सर्वे के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि जोशीमठ में भूमि धँसने की घटना के बाद प्रशासन एक-घर का सर्वे करा रहा है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को दूसरी जगह विस्थापित भी किया जा रहा है। इन लोगों को दूसरी जगह किराए पर मकान लेने के लिए राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने 4,000 रुपए महीने अगले 6 महीने तक देने का ऐलान भी किया है।

उधर, केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने शुक्रवार (6 जनवकी 2023) को जोशीमठ में भू-धंसाव का तेजी से अध्ययन करने के लिए एक पैनल का गठन किया। इस पैनल में पर्यावरण और वन मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन के प्रतिनिधि शामिल हैं।

एयर इंडिया की फ्लाइट में महिला यात्री पर पेशाब करने वाला शंकर मिश्रा गिरफ्तार, पिता ने किया बेटे को ब्लैकमेल किए जाने का दावा

शंकर मिश्रा गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर एयर इंडिया की फ्लाइट में महिला सहयात्री पर पेशाब करने का आरोप है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से उसे बंगलुरु से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। एयर इंडिया की अमेरिका से दिल्ली आ रही उड़ान में 26 नवंबर 2022 को यह घटना हुई थी।

दिल्ली पुलिस ने बताया है कि उसे शुक्रवार (6 जनवरी 2023) की रात गिरफ्तार किया गया। उसे आज कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। यह मामला सार्वजनिक होने के बाद से मिश्रा फरार था। अपने वकीलों के जरिए बयान जारी कर उसने मुआवजा देकर मामला सुलझाने का दावा किया था।

वहीं उसके पिता श्याम मिश्रा ने अपने बेटे को ब्लैकमेल किए जाने का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि पीड़ित महिला ने भुगतान की डिमांड की थी, जो पूरी कर दी गई थी। उसके बाद अचानक से उसने शिकायत की है। ऐसा लगता है कि कुछ और माँग भी रही होगी जो पूरी नहीं हुई और वह ब्लैकमेलिंग पर उतर गई होगी।

इस घटना की वजह से 34 वर्षीय मिश्रा को वेल्स फार्गो ने नौकरी से भी निकाल दिया है। अमेरिका की इस बहुराष्ट्रीय कंपनी में वह भारत का उपाध्यक्ष था। कंपनी ने कहा है, “वेल्स फार्गो कर्मचारियों को पेशेवर और व्यक्तिगत व्यवहार के उच्चतम मानकों के अनुरूप रखता है। ये आरोप बेहद परेशान करने वाला हैं। इस व्यक्ति को वेल्स फार्गो से निकाल दिया गया है। हम कानून प्रवर्तन के साथ सहयोग कर रहे हैं।”

दिल्ली पुलिस ने मिश्रा के खिलाफ IPC की धारा 294 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत), 354 (महिला का शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक इरादा), 509 (शब्द, हावभाव या कृत्य से महिला के अपमान का इरादा), 510 (शराबी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक तौर पर दुराचार) के साथ-साथ विमानन नियमों के तहत मुकदमा दर्ज कर रखा है।

शंकर मिश्रा पर न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में शराब के नशे में धुत होकर बुजुर्ग महिला सहयात्री के सामने जिप खोलने और उनके ऊपर पेशाब करने का आरोप है। महिला ने बताया था कि भोजन परोसे जाने और फ्लाइट के अंदर की रोशनी कम किए जाने के बाद यह घटना हुई। इस मामले में एयर इंडिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक क्रू मेंबर्स ने पीड़ित महिला की इच्छा के विरुद्ध उसे मिश्रा से बात कर मामले को सुलझाने को मजबूर किया था। इस दौरान महिला को देख मिश्रा रोने लगा और बाल बच्चों की दुहाई दे गिड़गिड़ाते हुए माफी माँगी।

‘नफरत की जमीन पर बन रहा राम मंदिर’: RJD के बिहार चीफ जगदानंद सिंह का विवादित बयान, कहा- अयोध्या में उन्मादियों के राम

बिहार की सत्ता में साझेदार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश अध्यक्ष और दिग्गज नेता जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) ने अयोध्या के राम मंदिर (Ram Mandir, Ayodhya) को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसको लेकर राजनीतिक घमासान मच गया है। उन्होंने कहा कि नफरत की जमीन पर राम मंदिर बन रहा है और राम को भव्य महल में कैद नहीं किया जा सकता।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के खिलाफ बगावत का झंडा उठाने वाले RJD विधायक सुधाकर सिंह (Sudhakar Singh) के पिता जगदानंद सिंह कहा, “हम ‘हे राम’ में विश्वास करने वाले लोग हैं, ‘जय श्री राम’ में नहीं।” इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

वीडियो में जगदानंद सिंह कह रहे हैं, “अब कण-कण से सिमट करके केवल पत्थरों की उस चहरदीवारी में राम चले गए। नफरत की जमीन पर राम के मंदिर का निर्माण हो रहा है। इंसानियत से बड़ा इस भारत में उन्मादियों के अब राम बचे हुए हैं। अब लोगों के, गरीबों के, झोपड़ी वालों के राम, तुलसी के, अयोध्या के राम, शबरी के जूठन खाने वाले राम अब भारत में नहीं हैं।”

भाजपा और RSS पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “अब केवल पत्थरों के बीच कैद राम रहेंगे, बाकी सब जगह के राम खत्म हो गए। मानी जाती थी कि भारत की भूमि राममय है, कृष्णमय है। अब ये सब खत्म हो गया। भारत का राम कण-कण में रहेंगे और RSS वालों के कारण वहाँ रहेंगे, जहाँ जा बैठे हैं।”

जगदानंद सिंह ने आगे कहा, “भारत राम का नहीं रहेगा और केवल एक मंदिर राम का रहेगा, पत्थरों के बीच में वे रहेंगे? अब वे लोगों के हृदय के बीच में नहीं रहेंगे? ना अयोध्या में राम कैद हुए और ना ना रावण को हराने के बाद लंका में रहे। राम का तो असली वास शबरी के झोपड़ी में हुआ और वे वहीं पर हैं। हम लोग ‘हे राम’ वाले हैं, ‘जय श्रीराम’ वाले नहीं।”

भाजपा ने इसे राजद की वोट बैंक की राजनीति बताया है। शहजाद पूनावाला ने कहा कि PFI बैन के दौरान भी राजद ने ऐसा ही बयान दिया था। इसके पहले SIMI को बैन करने के दौरान भी लालू यादव ने उसका बचाव किया था। हिंदू आस्था पर चोट वोट बैंक की पॉलिटिक्स के कारण की जा रही है। उन्होंने कहा कि ये कोई संयोग नहीं है, बल्कि वोट बैंक का प्रयोग है।

PFI बैन के समय जगदानंद सिंह ने कहा था, “RSS की तरह ही उनका भी संगठन (PFI) है। वे भी RSS की तरह अपने समुदाय की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन आप उन्हें देशद्रोही क्यों कहते हैं?… जब भी सुरक्षा बलों द्वारा पाकिस्तानी एजेंटों को गिरफ्तार किया जाता है तो वे सभी RSS से संबंधित पाए जाते हैं।”

राजद नेता का ये उस बयान उस वक्त आया है, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा में कहा था कि 1 जनवरी 2024 से भक्त अयोध्या के राममंदिर में भगवान राम का दर्शन कर सकेंगे। बता दें कि साल 2024 में ही लोकसभा का चुनाव होने वाला है। वहीं, इस साल (2023 में) 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

फ्लाइट में महिला पर पेशाब करने वाले शख्स को अमेरिकी कंपनी ने नौकरी से निकाला, घटना के बाद बीवी-बच्चों का वास्ता देकर रोते हुए माँगी थी माफी, फिलहाल फरार

एयर इंडिया की उड़ान में अपनी महिला सहयात्री पर पेशाब (Air India Flight Peeing Case) करने वाले आरोपित शंकर मिश्रा (Shankar Mishra) को उसकी कंपनी वेल्स फ़ार्गो ने नौकरी से निकाल दिया है। अमेरिका की इस बहुराष्ट्रीय कंपनी में 34 वर्षीय मिश्रा भारत का उपाध्यक्ष था। घटना में उसका नाम सामने आने के बाद कंपनी ने यह निर्णय लिया है।

बता दें कि 26 नवंबर 2022 को न्यूयॉर्क से नई दिल्ली जाने वाली एयर इंडिया की एक फ्लाइट के बिजनेस क्लास में मिश्रा ने 72 साल की महिला पर पेशाब कर दिया गया है। इसको लेकर बवाल मचा गया है। घटना को लेकर नागरिक उड्डयन निदेशालय (DGCA) ने एडवायजरी भी जारी की है।

अपने निर्णय से संबंधित बयान जारी करते हुए कंपनी ने कहा, “वेल्स फार्गो कर्मचारियों को पेशेवर और व्यक्तिगत व्यवहार के उच्चतम मानकों के अनुरूप रखता है। हम इन आरोपों को बेहद परेशान करने वाला पाए हैं। इस व्यक्ति को वेल्स फार्गो से निकाल दिया गया है। हम कानून प्रवर्तन के साथ सहयोग कर रहे हैं।”

उधर घटना के बाद से ही मिश्रा फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। मिश्रा मुंबई का रहने वाला है। दिल्ली पुलिस ने अधिकारियों को मिश्रा के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने के लिए लिखा है।

दिल्ली पुलिस ने मिश्रा के खिलाफ IPC की धारा 294 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत), 354 (महिला का शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक इरादा), 509 (शब्द, हावभाव या कृत्य से महिला के अपमान का इरादा), 510 (शराबी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक तौर पर दुराचार) के साथ-साथ विमानन नियमों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस घटना के DGCA ने टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही एयर इंडिया को ‘गैर-पेशेवर’ बताते हुए उसे लिखे पत्र में DGCA ने कहा, “प्रथम दृष्टया यह सामने आता है कि एक अनियंत्रित यात्री को ऑनबोर्ड सँभालने से संबंधित प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है।’

एयर इंडिया ने उस घटना की पुष्टि की है, जिसमें शंकर मिश्रा नशे की हालत में महिला यात्री पर पेशाब कर दिया। मिश्रा महिला की सीट के सामने खड़ा होकर अपनी पतलून की जिप खोली और अपने शिश्न को निकाल कर उस पर पेशाब करने लगा। इतना ही नहीं, पेशाब करने के बाद भी उसी अवस्था में महिला की सीट के पास खड़ा रहा। इसके बाद दूसरे यात्री ने उसे जाने के लिए कहा।

बुजुर्ग महिला ने इस घटना को लेकर टाटा समूह को पत्र भी लिखा है। उसने पत्र में कहा है कि पेशाब से भीगे उसके कपड़े को बदलने के लिए एयर इंडिया के चालक दल के सदस्यों ने उसे एक जोड़ी पजामा और चप्पल दी। इतना ही नहीं, चालक दल के सदस्यों ने मिश्रा को सामने लाकर उस महिला से बातचीत करने के लिए मजबूर भी किया। महिला का कहना है कि यह उसके लिए सदमे जैसी स्थिति थी।

पेशाब करने के बाद मिश्रा की जैसे ही कुछ होश आया, उसने अपने बगल में बैठे यात्री से कहा, ‘भाई लगता है कि में कुछ समस्या में फँस गया हूँ’। मिश्रा के सीट के बगल में बैठे अमेरिका में डॉक्टर सुगत भट्टाचार्य ने TOI को बताया कि खाना खाने के दौरान ही वह चार ग्लास सिंगल माल्ट ह्विस्की पी गया। भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि वह पियक्कड़ लग रहा था और वह इससे पहले भी उसने जरूर पी रखी होगी।

जिस महिला के ऊपर मिश्रा ने पेशाब किया था, वह उससे पीछे वाली सीट पर बैठी थी। होश में आने पर उसने चालक दल के सदस्यों से बात की और चालक दल के सदस्य उसे लेकर बुजुर्ग महिला के पास गए। मिश्रा महिला से माफी माँगने लगा। इस दौरान वह अपनी बीवी-बच्चों का वास्ता देकर रोने भी लगा। वो नहीं चाहता था कि उसकी हरकत के बारे में सबको पता चले।

उधर, शंकर मिश्रा के वकील ईशानी शर्मा और अक्षत बाजपेयी ने 6 जनवरी को एक बयान जारी कर कहा कि उनके मुवक्किल ने 28 नवंबर को महिला यात्री के कपड़े और बैग साफ करवाए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि महिला ने मिश्रा के इस हरकत की निंदा की थी, लेकिन उसने साफ तौर पर कहा था कि वह शिकायत नहीं करेगी।

वकीलों ने यह दावा किया कि महिला यात्री ने 20 दिसंबर 2022 को एयरलाइन से मुआवजा के लिए शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद शंकर मिश्रा ने महिला को 15,000 रुपए भेजे थे। वह आरोपी शंकर मिश्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती थीं। हालाँकि, महिला की बेटी ने अगले दिन उस पैसे को वापस कर दिया।

वहीं, शंकर मिश्रा के वकील पिता श्याम नवल मिश्रा उसके बचाव में उतर आए हैं। श्याम का कहना है कि उनके बेटे को नहीं पता कि फ्लाइट में क्या हुआ था। वह पिछले 72 घंटों से सोया नहीं था। इसलिए थोड़ी सी शराब पीकर सो गया था। इस घटना जानकारी चालक दल के सदस्यों ने उसे जगाकर दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनका बेटा कहाँ है।

2 अलग-अलग जगहों की वोटर लिस्ट में ओवैसी का नाम रजिस्टर: तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने EC से की शिकायत, कार्रवाई की माँग

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असद्दुदीन ओवैसी तेलंगाना की दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड हैं। इस बारे में, कॉन्ग्रेस नेता जी. निरंजन ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ओवैसी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, जी. निरंजन ने मुख्य चुनाव आयोग राजीव कुमार को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का नाम तेलंगाना के दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड है। आरोप में कहा गया है कि ओवैसी का नाम तेलंगाना के राजेंद्र नगर और खैराताबाद की मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में है।

इस मामले में, जी निरंजन ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि एक सांसद का मतदाता सूची स्थानों पर नाम होना और उसे खामोशी से देखते रहना ठीक नहीं है। इसलिए तेलंगाना कॉन्ग्रेस कमेटी के द्वारा चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा गया है।

हालाँकि, इस आरोप को लेकर अब तक न तो असदुद्दीन ओवैसी की ओर से कोई बयान आया है और न ही जी निरजंन के पत्र को लेकर चुनाव आयोग ने किसी प्रकार की टिप्पणी की है।

‘प्लेन से उतरते ही करवाएँ FIR, सारी सूचना हमको दें’: फ्लाइट में महिला सहयात्रियों पर पेशाब की घटनाओं पर DGCA सख्त, एडवाइजरी जारी की

हाल ही में एयर इंडिया की फ्लाइट में एक यात्री द्वारा अपनी महिला सहयात्री पर पेशाब करने के 2 मामले सामने आए। इसके बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने ऐसी हरकत करने वाले यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एयरलाइंस कंपनियों को एडवाइजरी जारी की है।

एयरलाइंस के हेड ऑफ ऑपरेशंस को भेजे गए दिशा-निर्देशों में डीजीसीए ने कहा, “हाल के दिनों में फ्लाइट के दौरान विमान में कुछ यात्रियों के बुरे-व्यवहार और अनुचित आचरण की घटनाओं पर DGCA ने ध्यान दिया है। इसमें यह देखा गया है कि पोस्ट होल्डर्स, पायलट और केबिन क्रू मेंबर ने उचित कार्रवाई नहीं की है।”

डीजीसीए (DGCA) ने यह भी कहा है कि किसी भी फ्लाइट का पायलट उड़ान के दौरान क्रू मेंबर, यात्रियों और कार्गो की सुरक्षा के साथ-साथ फ्लाइट में अनुशासन के लिए जिम्मेदार होता है। खासतौर से एक अनियंत्रित यात्री को सँभालने के लिए एक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जाती है। इसके लिए एयरक्राफ्ट रूल 1937, डीजीसीए के नियमों, एयरलाइन के सर्कुलर और मैनुअल में भी बताया गया है।

डीजीसीए ने आगे कहा है कि किसी भी स्थिति को शांत करने की जिम्मेदारी क्रू मेंबर की होती है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि निरोधक उपकरणों का उपयोग तभी किया जाना चाहिए, जब सुलह के सभी रास्ते बंद हो गए हों। फ्लाइट के कर्मचारियों को ऐसी सभी घटनाओं के बारे में डीजीसीए को सूचित करना चाहिए।

डीजीसीए ने यह भी कहा कि है विमान के उतरने पर एयरलाइन कर्मचारी हवाई अड्डे पर संबंधित सुरक्षा एजेंसी के पास FIR दर्ज कराएँगे। इसके बाद, अनियंत्रित यात्री को उन्हें सौंप दिया जाएगा।

इससे पहले, DGCA ने एयर इंडिया की फ्लाइट में हुई पेशाब वाली घटनाओं को लेकर एयर इंडिया के मैनेजमेंट और क्रू मेंबर को नोटिस जारी किया था। अपने नोटिस में DGCA ने पूछा था कि इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

दो घटनाओं के बाद DGCA को जारी करनी पड़ी एडवाइजरी

बीते दिनों एयर इंडिया की दो अलग-अलग फ्लाइट में यात्रियों द्वारा अन्य यात्री पर पेशाब करने का मामला सामने आया था। पहला मामला, 26 नवंबर 2022 का है। न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में एक शख्स ने शराब के नशे में धुत होकर 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर पेशाब कर दी थी। घटना की शिकायत के बाद क्रू मेंबर्स ने खानापूर्ति करते हुए मामले को रफा-दफा कर दिया था।

वहीं, दूसरी घटना 6 दिसंबर 2022 की है। पेरिस से दिल्ली आने वाली फ्लाइट संख्या 142 में नशे में धुत होकर एक व्यक्ति ने महिला के कंबल में पेशाब कर दिया था। इस मामले में भी उस व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। फिलहाल, इन दोनों मामलों को लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ( DGCA) काफी सख्त है।

जोशीमठ के प्रभावित परिवारों को किराए के लिए हर महीने ₹4000 देगी धामी सरकार, अस्थायी घर बनाने का आदेश: जमीन धँसने से मंदिर गिरा, सारे निर्माण कार्य बंद

‘हिमालय का द्वार’ (Gateway of Himalaya) कहलाने वाला उत्तराखंड का जोशीमठ दरक रहा है। हिंदुओं के प्रसिद्ध तीर्थ बद्रीनाथ धाम से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर स्थित इस शहर में जमीन फट रही है और पानी की धार निकल रही है। लोगों के दिवारों में दरार आ गए हैं। लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। हालाँकि, इनके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

इसको देखते हुए राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार (Pushkar Singh Dhami Government) ने कई फैसले लिए हैं। सरकार ने खतरा वाले क्षेत्र के लोगों के किराए के मकानों में शिफ्ट करने के लिए कहा। इसका किराया सरकार देगी। पुष्कर सरकार ने कहा कि ऐसे हर परिवार को अगले 6 महीने तक सरकार 4,000 रुपए महीना देगी। यह सहायता मुख्यमंत्री राहत कोष से दी जाएगी।

जोशीमठ में भू-धंसाव से प्रभावित भवन, होटल एवं अन्य संरचनाओं का मूल्यांकन एवं तकनीकी जाँच के लिए अधिकारियों और कार्मिकों की 9 टीमें गठित की है, जो प्रत्येक वार्ड में घर-घर जाकर सर्वे कर रही है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को सरकार राहत सामग्री भी पहुँचा रही है। अब तक लगभग 80 परिवारों को शिफ्ट किया जा चुका है। वहीं, वॉर्ड 16 का एक मंदिर ध्वस्त हो गया।

सीएम धामी ने कहा कि प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि जान-माल की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। विभिन्न संस्थानों की मदद ली जा रही है और अध्ययन किया जा रहा है कि पानी का रिसाव किन वजहों से और कहाँ से हो रहा है। उन्होंने प्रभावित लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में अस्थायी आवास स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।

धामी सरकार ने NTPC और HCC को अस्थायी भवन निर्माण के लिए कहा है। चमोली जिला के कलेक्टर ने ट्वीट कर कहा, “जोशीमठ में भू-धंसाव की समस्या के दृष्टिगत प्रभावित परिवारों को शिफ्ट करने हेतु जिला प्रशासन ने NTPC और HCC कंपनियों को अग्रिम रुप से 2-2 हजार प्री-फेब्रिकेटेड भवन तैयार कराने के आदेश भी जारी किए हैं।”

वहाँ के वर्तमान हालात को देखते हुए NTPC पावर प्रोजेक्ट के सुरंग का कार्य रोक दिया गया है। इसके अलावा, NTPC के तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना के सहित तमाम निर्माण कार्यों को रोक दिया गया है। BRO के अन्तर्गत निर्मित हेलंग बाईपास निर्माण कार्य को भी रोक दिया गया है। इसके साथ ही जोशीमठ-औली रोपवे का संचालन भी रोक दिया गया है।

बता दें कि जोशीमठ का इलाका बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है। यह सिस्मिक जोन 5 के अंतर्गत आता है। इतना ही नहीं, जोशीमठ मोरेन पर बसा है। मोरेन वह जगह होती है, जहाँ ग्लेशियर होता है और उसके ऊपर जमी मिट्टी आदि जमकर पत्थर बन जाता है। ग्लेशियर जब सरकता है तो भूमि धँसती है। यहाँ की वर्तमान स्थिति को लेकर बहुत पहले से आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों ने समय-समय पर इस क्षेत्र का अध्ययन किया और यहाँ की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार को आगाह भी किया।

जोशीमठ सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामरिक एवं रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहाँ से भारत-तिब्बत सीमा महज 100 किलोमीटर दूर है। इसके साथ ही बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली, फूलों की घाटी जैसे धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पर्यटन वाले स्थानों पर जाने के लिए लोगों को जोशीमठ से होकर गुजरना पड़ता है।

जोशीमठ को लेकर जाहिर की गई चिंता

जून 2022 में गढ़वाल विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने अध्ययन के बाद कहा था कि अगर शहरीकरण, चारधाम ऑल वेदर रोड और जल विद्युत परियोजना के निर्माण कार्यों को विशेषज्ञता के साथ न किया गया तो आने वाले समय में जोशीमठ धँस जाएगा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा था कि रैणी आपदा के बाद यहाँ पहले से काफी भूगर्भीय हलचल है। अगर चारधाम यात्रा मार्ग का निर्माण कार्य तेजी से चला तो यह खतरनाक होगा।

फरवरी 2021 में तपोवन जल विद्युत परियोजना में बाढ़ से काफी नुकसान हुआ था। सुरंग में मलबा घुस गया था। अब यह सुरंग बंद है। प्रोजेक्ट की 16 किलोमीटर लंबी सुरंग जोशीमठ के नीचे से गुजर रही है। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि संभवत: सुरंग में गैस बन रही है, जो ऊपर की तरफ दबाव बना रही है। इसी कारण जमीन धँस रही है। यह भी कहा जा रहा है कि सुरंग में संभवत: पानी भर गया है और रास्ता नहीं मिलने से ये ऊपर आ रहा है।

पहले से ही वैज्ञानिक देते रहे हैं चेतावनी

साल 2006 में वरिष्ठ भूस्खलन वैज्ञानिक डॉक्टर स्वप्नमिता चौधरी ने जोशीमठ का अध्ययन किया था। चौधरी का कहना है कि पिछले दो दशकों में जोशीमठ का अनियंत्रित विकास हुआ है। बारिश और घरों से निकलने वाला पानी नदियों तक नहीं पहुँच पाता है और जमीन के भीतर समा रहा है। इस कारण भू-धंसाव की घटनाएँ हो रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चौधरी बताते हैं कि साल 2013 में आई केदारनाथ आपदा, साल 2021 की रैणी आपदा, बदरीनाथ क्षेत्र के पांडुकेश्वर में बादल फटने की घटनाएँ भी भू-धंसाव के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। भू-धँसाव के लिए बेतरतीब निर्माण, पानी का रिसाव, मिट्टी का कटाव और मानव निर्मित जल धाराओं के प्रवाह में रुकावट को प्रमुख कारण बताया गया है। 

दरअसल, पहाड़ों के सदियों पुराने मलबे पर बसा होने के कारण जोशीमठ का क्षेत्र शुरू से ही दरक रहा है। साल 1976 में पहली बार गढ़वाल के आयुक्त रहे एससी मिश्रा की अध्यक्षता में एक 18 सदस्यीय समिति गठित की गई थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि जोशीमठ धीरे-धीरे धँस रहा है। 

भू-धँसाव को रोकने के लिए कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में निर्माण पर प्रतिबंध लगाने और भू-धंसाव वाले क्षेत्रों में पौधे लगाने की सलाह दी थी। इसके साथ ही ढलानों सहित के खनन पर रोक लगाने के लिए कहा गया है। यह कहा गया था कि खुदाई या विस्फोट करके किसी बोल्डर को ना हटाया जाए। नदियों के किनारे पड़े चट्टानों को सहारा दिया जाए, ताकि नदियों के धारा अवरुद्ध ना हो।

‘पूरे इलाके में इकट्ठा हो चुके हैं हथियार…’ : हल्द्वानी के हिंदू ने बताए मुस्लिम अतिक्रमणकारियों के इरादे, कहा- सब लाशों पर रोटी सेंकने वाले

उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर हजारों लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। इसमें से कई अवैध घुसपैठिए भी बताए जाते हैं। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बस्ती को सात दिन के अंदर हटाने के हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। हल्द्वानी में जो कुछ भी हो रहा है ऑपइंडिया वह सब आप तक ग्राउंड जीरो से पहुँचाने में जुटा हुआ है।

इसी कड़ी में, ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान, हमने स्थानीय लोगों से बातचीत की। इस बातचीत में कई ऐसे पहलू सामने आए हैं जो हैरान करने वाले हैं। हमने एक व्यक्ति से पूछा कि क्या आपको रेलवे लाइन वाली घटना का पता है, वहाँ से लोग हटाए जा रहे हैं? इस पर उस व्यक्ति ने कहा, “हाँ, मैं उधर ही रहता हूँ, रेलवे बाजार में।”

हमने उससे आगे पूछा, जो लोग वहाँ पर भीड़-भाड़ में दिखाई दे रहे थे और हंगामा कर रहे थे वे लोग लोकल थे या बाहरी? इस पर उसने कहा, “लोग यहाँ के भी हैं और बाहरी लोग भी आ जाते हैं। हालाँकि, मैं अपना अंदाजा बता रहा हूँ कि जब 10 तारीख से जब से ये काम शुरू होगा (अवैध बस्ती हटाने का काम) तो बिना कर्फ्यू के ये लोग काबू में नहीं आएँगे।”

हम जिस स्थानीय व्यक्ति से बात कर रहे थे वह बिना कुछ पूछे ही लगातार हल्द्वानी के हालात बताता जा रहा था, उसने आगे कहा, “कल मैं मुस्लिम भाई की एक दुकान पर बैठा था। दुकान में मैनें बच्चों से बात करते हुए कहा कि आपके बाप-दादाओं ने जमीन पर कब्जा किया और इतने सालों तक लगातार रहे। समझ लो किराए पर गुजारा कर लिया। लेकिन वहाँ बैठे लोगों ने कहा ऐसा है चाहे जान चली जाए लेकिन ऐसा नहीं होने देंगे।”

उसने कहा, “मैंने उन लोगों से पूछा कि ऐसा करने से आपको मिलेगा क्या? मान लिया कि आपका ये जा रहा है लेकिन रोजी-रोटी तो बची हुई है। उससे आप सब कुछ खरीद सकते हैं। हालाँकि, प्रशासन सतर्क है। लेकिन, राजनेता जो भी हैं, मतीन सिद्दकी हो या कोई भी नेता, कार्यकर्ता या मुस्लिम सब लाशों पर रोटी सेंकने वाले हैं।”

हमारे किसी भी सवाल का इंतजार किए बिना उसने कहा, “सब एक से बढ़कर एक दमदार हैं, समा वाले हों या ये लोग हों सबके पास हथियार हैं। हमारे हिंदू के पास एक चाकू नहीं होगा। इन सब के यहाँ इतना हथियार निकलेगा जिसकी हद नहीं। लाइन नंबर 17 से लेकर पूरे इलाके में इतना हथियार इकट्ठा हो चुका है, जिसकी कोई हद नहीं।”

हमसे बात करते हुए वह थोड़ा रुका। हम उससे कुछ पूछने वाले थे। लेकिन, तभी वह फिर बोल पड़ा। उसने कहा, एक छोटा बच्चा भी बड़ा हो चुका है। इसलिए, अगर प्रशासन इसमें लापरवाही कर गया तो खतरा भी हो सकता है।”

हमने उससे आगे पूछा, आप यहाँ कब से हैं? उसने कहा, मैं यहाँ 80 के दशक से रह रहा हूँ। हमारा अगला सवाल था कि क्या पहले यहाँ इतने ही मुस्लिम थे। उसने कहा, “नहीं-नहीं, भाईसाहब ये मुसलमान तो टोटल बाहर के हैं। ये लोग रामपुर, नजीमाबाद, बिजनौर के हैं। मेरे सामने ये लोग मजदूरी करते थे। अब इन्होंने उजाला नगर से लेकर न जाने कहाँ-कहाँ 3-3 मकान बना डाले। इनकी पूरी फैमिली, पूरे रिश्तेदार यहाँ शिफ्ट हो गए।”

हमारी बातचीत सुन रहे एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इतने मुसलमान यहाँ पहले थोड़ी थे। पहले हिंदू ही ज्यादा थे। मेरी पैदाइश इंदिरा नगर की ही है।” हमने आगे पूछा, “इंदिरा नगर अवैध कॉलोनी है या नहीं” तब, जवाब मिला, “नहीं, ये सब वही अवैध बस्ती है।” हमने पूछा कि क्या इंदिरा नगर, इंदिरा गाँधी के नाम पर बसाया गया, तो उसने जवाब दिया, हाँ, हो सकता है, उन्हीं के नाम पर हो।”