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1 जनवरी 2024 को होगा अयोध्या के भव्य राम मंदिर का उद्घाटन, श्रद्धालु भी कर सकेंगे दर्शन: त्रिपुरा में गृहमंत्री अमित शाह ने की घोषणा

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (MHA) ने गुरुवार (5 जनवरी 2023) को कहा कि अयोध्या में बन रहे भगवान राम के भव्य मंदिर का दर्शन श्रद्धालु 1 जनवरी 2024 से कर सकेंगे। अमित शाह त्रिपुरा में एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान यह बात कही।

उन्होंने श्रीराम निर्माण का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद से ही कॉन्ग्रेस अदालतों में राम मंदिर निर्माण के मामले में अड़ंगा लगाती आई है। राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद आया है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 5 अगस्त 2020 को श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में ‘भूमि पूजन’ किया था। श्रीराम मंदिर के आसपास के 70 एकड़ क्षेत्र में वाल्मीकि, केवट, शबरी, जटायु, सीता, विघ्नेश्वर (गणेश) और शेषावतार (लक्ष्मण) के मंदिरों का भी निर्माण किया जाएगा।

मंदिर के पहले पहले फेज का काम 30 दिसंबर 2023 को पूरा हो जाएगा। उसके बाद इसे श्रद्धालुओं के खोल दिया जाएगा। वहीं, दूसरे फेज का काम 30 दिसंबर 2024 और तीसरे एवं अंतिम फेज का काम 30 दिसंबर 2025 को पूरा होगा। मंदिर निर्माण में करीब 1800 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

मंदिर का पूरा परिसर 71 एकड़ का है। वहीं, रामलला का मंदिर 8 एकड़ में बन रहा है। मंदिर का शिखर 161 फीट का होगा। मंदिर के निर्माण में किसी प्रकार के लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया जा रहा। साथ ही, इसे ऐसा बनाया जा रहा है कि 1000 साल तक यह मंदिर पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। यहाँ तक कि 6.5 रिएक्टर के भूकंप से भी मंदिर को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुँचेगी।

मंदिर के गर्भ गृह में जहाँ राम लला विराजमान होंगे, वह आसन सोने का होगा। वहीं, मंदिर का शिखर भी सोने का हो सकता है। इसके लिए, महाराष्ट्र के एक व्यापारी ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से बात की है। हालाँकि, ट्रस्ट की ओर से अब तक इसको लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई।

भगवान राम के इस मंदिर को सरकार देश का सबसे बड़ा धार्मिक, आध्यात्मिक केंद्र बनाने के साथ ही सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने में जुटी है। चूँकि, रामलला की बालस्वरूप मूर्ति काफी छोटी है। इसलिए, श्रद्धालु सही तरीके से मूर्ति के दर्शन नहीं कर पाएँगे। ऐसे में, ट्रस्ट ने गर्भगृह में एक अन्य प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया है। 

बता दें कि इस साल मार्च में त्रिपुरा सहित देश के 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनमें उत्तर-पूर्व के त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के साथ-साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश शामिल है। उधर साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में श्रीराम मंदिर का सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है।

दरगाह-ए-हकीमी की खेत में गंदगी में पड़ी मिली हनुमान प्रतिमा: हिंदुओं ने ताला तोड़ की पूजा-अर्चना, कहा- 1912 के नक्शे में मंदिर का जिक्र

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में दरगाह-ए-हकीमी और इच्छेश्वर मंदिर ट्रस्ट के बीच अतिक्रमण को लेकर विवाद जारी है। इस बीच एक दूसरा विवाद भी सामने आ गया है जिसे लेकर हिंदू संगठन और दरगाह-ए-हकीमी आमने सामने आ गए हैं। मंगलवार (3 जनवरी, 2023) के दोपहर को तो दरगाह के पिछले हिस्से में जमकर हंगामा हुआ। हिंदुवादी संगठनों, इच्छेश्वर हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने दरगाह के पास प्रदर्शन किया।

मगंल को क्यों हुआ प्रदर्शन?

बुरहानपुर‎ के लोधीपुरा स्थित दरगाह-ए-हकीमी के स्वामित्व वाले खेत में हनुमान जी की प्रतिमा के पूजन को लेकर पूरा विवाद हुआ। हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों का दावा है कि इस स्थान पर पहले मंदिर हुआ करती थी जिसे सुरक्षित रखने के वादे के साथ जमीन का सौदा दरगाह के साथ किया गया था। लेकिन दरगाह की तरफ से न केवल मंदिर नष्ट किया गया बल्कि यहाँ तक पहुँचने वाले रास्ते पर ताला लगा दिया गया।

खेत में मंदिर होने का पता कैसे चला?

दरगाह-ए-हकीमी और इच्छेश्वर मंदिर ट्रस्ट के बीच चल रहे पूर्व विवाद को सुलझाने के लिए पिछले दिनों विधायक सुमित्रा कास्डेकर के साथ मंदिर ट्रस्ट के लोग खेत के पास चर्चा कर रहे थे। ट्रस्ट के लोगों का दावा था कि यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर हुआ करता था। घनी झाड़ियों के बीच उन्हें हनुमानजी की प्राचीन प्रतिमा नजर आई, जिससे मंदिर ट्रस्ट और हिंदुवादी संगठन के लोगों के दावों को बल मिला। हनुमान जी की प्रतिमा मिलने के बाद भक्त उनकी पूजा करना चाहते थे। परन्तु दरगाह की तरफ से खेत की तरफ जाने वाले रास्ते को बंद करवा दिया गया। जिससे ताज़ा विवाद उत्पन्न हुआ।

जब भगवान का पूजा किए बिना नहीं रह सके भक्त

आराध्य की पूजा से रोके जाने के बाद प्रदर्शन कर रहे भक्तों की संख्या बढ़ने लगी। भक्तों ने गेट के बाहर भजन और हनुमान चालीसा‎ का पाठ किया। इसके बाद गेट बंद होने पर विरोध‎ करते हुए ताला तोड़कर खेत के उस स्थान तक बढ़े जहाँ हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा प्राप्त हुई थी। वहाँ उन्होंने हनुमान जी का पूजन किया। हिंदू संगठन हनुमानजी की प्रतिमा के पूजन के पूरे‎ अधिकार की बात कह रहा है। वहीं, दरगाह प्रबंधन का‎ कहना है बिना अनुमति के निजी‎ संपत्ति में जबरन प्रवेश किया गया है।‎

दरगाह ने भक्तों को रोकने के लिए गेट पर जड़ा ताला (फोटो साभार नई दुनिया)

मामले पर दरगाह-ए-हकीमी का पक्ष

खेत के विवाद पर दरगाह का पक्ष है कि उन्होंने 1986 में यह खेत शंकर सिंह नाम के व्यक्ति से खरीदा था। वहाँ कई वर्षों से हनुमानजी की मूर्ति रखी हुई थी। दरगाह का कहना है कि जिस व्यक्ति का खेत था उसी ने प्रतिमा स्थापित की थी। यह कोई सार्वजनिक स्थान या मंदिर नहीं था। यहाँ निजी चबूतरा और मूर्ति थी। आज भी वह उसी स्थिति में है। ट्रस्ट ने उसे सुरक्षित रखा हुआ है। मंगलवार को‎ विवाद के समय हमने पूजा-पाठ के लिए दरगाह की अनुमति लेने की बात कही जिसे स्वीकार नहीं किया गया। दरगाह की तरफ से खेत को निजी संपत्ति बताया जा रहा है। दरगाह की तरफ से कहा गया कि इस तरह ताला तोड़कर किसी की निजी संपत्ति में प्रवेश करना पूरी तरह गलत है।‎ दरगाह की तरफ से इस मामले में 100 से ज्यादा लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।

मामले पर हिंदुवादियों और मंदिर ट्रस्ट का पक्ष

रिपोर्ट्स के मुताबिक इच्छेश्वर मंदिर समिति के सदस्य महेश सिंह चौहान का कहना है, “हमने 1912 का नक्शा देखा। वहाँ मंदिर होने का उल्लेख है। खेत में हनुमान जी की प्रतिमा भी मिली है। हमारी धार्मिक स्वतंत्रता के तहत वहाँ पूजन करने का हमें अधिकार है। इसको लेकर दरगाह प्रबंधन से समझौता भी हुआ था, लेकिन जब पूजन के लिए लोग पहुँचे तो बाहर गेट पर ताला लगा दिया गया। इससे नाराज भक्तों ने ताला तोड़ दिया।” महेश सिंह चौहान ने नक्शे के हवाले से कहा कि इलाके के लगभग 4 एकड़ भूमि पर हनुमान मंदिर और बड़े शिवलिंग का जिक्र है। स्थानीय लोगों ने भी दरगाह के पीछे खेतों में प्राचीन मंदिर होने की बात कही। जब हमलोग वहाँ पहुँचे तो हमें गंदगी में हनुमान जी की मूर्ति मिली। उसके बाद हमारा और भक्तों का विश्वास मजबूत हो गया।

खेत बेचने वाले शंकर सिंह चौहान के वंशज का पक्ष

दरगाह को जमीन बेचने वाले शंकर सिंह चौहान के वंशज जगदीश सिंह चौहान ने आरोप लगाया है कि दरगाह की तरफ से जमीन बेचने से पहले हुए समझौते का पालन नहीं किया जा रहा है। समझौते के तहत मंदिर और मंदिर का रास्ता छोड़कर खेत बेचा गया है। जगदीश सिंह ने मामले में पुलिस को शिकायत भी दी है। शिकायत में कहा गया है कि दरगाह के निसरीन अली ने जगदीश सिंह को झूठी गवाही देने के लिए प्रलोभन दिया। जगदीश सिंह से कहा गया कि आप खेत में बजरंग बली की मूर्ति होने की बात से इनकार कर दें। गवाही दें कि समिति वालों ने मूर्ति यहाँ लाकर रख दी है। जबकि सच्चाई यह है कि यह मंदिर कई पीढ़ियों से स्थापित है।

आपको बता दें कि दरगाह के तकरीबन 100 एकड़ जमीन में से 4 एकड़ पर मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा दरगाह और इच्छेश्वर हनुमान मंदिर के बीच अतिक्रमण को लेकर विवाद चल रहा है। इस विवाद के निपटारे के लिए पिछले दिनों सर्वे का काम भी किया गया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

सम्मेद शिखरजी रहेगा सिर्फ तीर्थ स्थान, पर्यटन स्थल नहीं बनेगा: मोदी सरकार ने मानी जैन समाज की माँग, झारखंड सरकार के फैसले पर रोक

झारखंड के गिरिडीह जिले में पार्श्वनाथ की पहाड़ियों पर स्थित जैन समाज के प्रसिद्ध तीर्थस्थल ‘सम्मेद शिखरजी’ को पर्यटन स्थल के रूप में नहीं विकसित किया जाएगा। जैन समाज के लोगों के विरोध प्रदर्शन और उनकी माँगों को ध्यान रखते हुए केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है।

इस मामले को लेकर केंद्र सरकार ने एक कमिटी बनाई है और झारखंड सरकार से कहा है कि इस समिति में वह 2 सदस्यों को शामिल करे। इस समिति में एक सदस्य स्थानीय जनजातीय समुदाय से शामिल किया जाए। यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैन समाज के लोगों से मुलाकात की।

केंद्रीय मंत्री यादव ने इस बारे में ट्वीट करते हुए कहा, “सम्मेद शिखर की पवित्रता बनाए रखने की माँग करने वाले जैन समुदाय के लोगों से मिला। उन्हें विश्वास दिलाया कि पीएम श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार सम्मेद शिखर सहित उनके सभी धार्मिक स्थलों पर जैन समुदाय के अधिकारों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने आगे कहा, “सम्मेद शिखर पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्य और तोपचांची वन्यजीव अभयारण्य के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में आता है। निषिद्ध गतिविधियों की एक सूची है, जो नामित पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में और उसके आसपास नहीं हो सकती है। प्रतिबंधों का अक्षरशः पालन किया जाएगा।”

भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी ज्ञापन में कहा गया है, गिरिडीह जिले में सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र और उसके आसपास वन्यजीव अभयारण्य और पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र है। इस संबंध में राज्य सरकार को निर्देशित किया जाता है कि वह पारसनाथ प्रबंधन योजना, जो पूरे पारसनाथ पर्वत क्षेत्र की रक्षा करता है, के खंड 7.6.1 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाए।”

मंत्रालय द्वारा जारी ज्ञापन में आगे कहा गया है, “इन प्रावधानों के तहत पारसनाथ पर्वत क्षेत्र पर शराब, ड्रग्स एवं अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री करना; तेज संगीत बजाना या लाउडस्पीकर का उपयोग करना; धार्मिक महत्व के पवित्र स्थल जैसे कि स्मारक, झीलें, चट्टानें, गुफाएँ, मंदिर आदि को छूना या प्रदूषित करने, ट्रैकिंग करना, पालतू जानवरों के साथ आने आदि की इजाजत नहीं है।”

पर्यावरण मंत्रालय ने झारखंड सरकार को यह भी कहा कि पारसनाथ पर्वत क्षेत्र के इलाके में शराब एवं मांसाहारी खाद्य पदार्थों के उपभोग एवं बिक्री पर प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करे। सम्मेद शिखरजी जैन धर्म का सबसे पवित्र और पूजनीय तीर्थस्थल है और मंत्रालय जैन समुदाय के साथ-साथ पूरे देश के लिए इसकी पवित्रता और महत्व को स्वीकार करता है।

बता दें कि झारखंड सरकार द्वारा पारसनाथ पर्वत क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा के बाद जैन समाज के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जैन समाज के लोग राजधानी दिल्ली से लेकर मुंबई, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान सहित पूरे देश में सरकार के इस फैसले को रद्द करने की माँग कर रहे थे।

हल्द्वानी के धरना-प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल: मदरसे के हाफिज से लेकर लोकल नेता तक, सबकी पोल बच्चों ने ही खोली

उत्तराखंड के हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों के इस्तेमाल पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आपत्ति जताई गई है

NCPCR ने जहाँ नैनीताल के जिलाधिकारी को पत्र लिख बताया है कि कैसे रेलवे के खिलाफ प्रदर्शन में बच्चों का प्रयोग हो रहा है, उनसे इमोशनल अपीलें करवाई जा रही हैं। वहीं, ग्राउंड जीरो पर मौजूद ऑपइंडिया की टीम ने भी देखा कि सरकार, न्यायालय और विदेशी संस्थाओं पर दबाव बनाने के लिए एक ऑर्गनाइज तरीके से काम किया जा रहा है। बच्चों को आगे कर के इमोशनल ब्लैकमेलिंग की जा रही है।

हल्द्वानी के वनभूलपुरा के अवैध कब्जे वाले स्थानों पर घूमते हुए हम रेल के पटरियों के पास खेलते बच्चों से मिले। खेल में मग्न बच्चों से हमने प्रदर्शन के बारे में सवाल किया। इस दौरान बच्चों ने कई चौंकाने वाली बातें बताई। मोहम्मद समीर नाम के बच्चे ने स्वीकार किया कि बच्चों को मदरसे का ड्रेस पहनाकर धरने में शामिल करवाया गया था।

मोहम्मद समीर ने बताया कि वह इस्लामिया स्कूल में भी पढ़ता है और मदरसे में भी तालीम हासिल करता है। प्रदर्शन के दौरान स्कूल और मदरसों के बच्चों को मदरसे वाले ड्रेस कोड में बुलाया गया था। इसका उद्देश्य भीड़ में ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम मासूमों को दिखाना हो सकता है। धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मदरसे से बच्चों की माँग मतीन सिद्दकी नाम के स्थानीय नेता ने की थी। मतीन सिद्दकी समाजवादी पार्टी से जुड़ा है। मतीन सिद्दकी प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में से एक है। बच्चों ने बतलाया कि मतीन ने ही इरफान हाफिज से बच्चों को तैयार कर प्रदर्शन में लाने की हिदायत दी थी।

वनभूलपुरा के इलाके में कई मदरसे हैं। सभी मदरसों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में बच्चों को इकट्ठा किया गया। बच्चे जिस तरह ऑन कैमरा बात कर रहे हैं, साफ समझा जा सकता है कि उन्हें इसके लिए अच्छे से तैयार किया गया है। बच्चों को ही नहीं बल्कि भीड़ में शामिल लोगों को कैमरे पर क्या बोलना है, कैसे बोलना है, किस भाषा में बोलना है – सब कुछ बतलाया जा रहा है। ऑपइंडिया के पिछले ग्राउंड रिपोर्ट में भी हम इन तथ्यों को सबूत के साथ आपके सामने पेश कर चुके हैं।

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हमने हल्द्वानी के वनभूलपुरा के गलियों में एजेंडाधारियों को देखा जो लोगों को बोलने की ट्रेनिंग दे रहे थे। हमने देखा कि किस तरह एक कथित पत्रकार, भीड़ को ज्यादा से ज्यादा हिंदी शब्दों का इस्तेमाल कर अपनी बात मासूमियत से रखना सिखा रहा था। वह शख्स लोगों से TheWire पर भी सिखाई गई बातें चलवाने का दावा कर रहा था।

महिला के हाथों में होगी नॉर्थ कोरिया की कमांड? 9 साल की बेटी और बहन को ट्रेनिंग दे रहे किम जोंग, कई बीमारियों ने तानाशाह को घेरा

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन (Kim Jong-un) के बीमार होने की अफवाहों के बीच अब यह दावा किया जा रहा है कि वह अपनी बहन और बेटी को भविष्य में देश की सत्ता संभालने के लिए तैयार कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया का तानाशाह किम आने वाली पीढ़ियों के लिए उत्तर कोरिया में अपने परिवार की शक्ति को मजबूत करना चाहता है इसलिए वह यह योजना बना रहा होगा।

द सन की खबर के अनुसार, एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि अगर 40 वर्षीय किम की मृत्यु जल्दी हो जाती है या उन्हें किसी वजह से अपनी कुर्सी से हटना पड़ता है तब भी उनका ही शासन जारी रहेगा। ऐसे में किम के बाद उनकी कुर्सी का मजबूत दावेदार उनकी छोटी बहन किम यो जोंग (Kim Yo-jong) को माना जा रहा है। इस बीच किम की नौ साल की बेटी किम ज्यू-एई (Kim Jue-ae) भी खासा चर्चा में हैं। हाल ही में किम ज्यू-एई को अपने पिता के साथ मिसाइल लॉन्च के मौके पर देखा गया था।

उत्तर कोरिया का मीडिया उसे किम की ‘प्यारी’ और ‘अनमोल’ बच्ची के रूप में दिखा रहा है। किम की 35 वर्षीय बहन उसकी खासदार यानी सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक रही है। ये दोनों भाई-बहन बहुत छोटी सी उम्र से एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। नॉर्थ कोरिया लीडरशिप वॉच के निदेशक और संस्थापक माइकल मैडेन के अनुसार, अगर किम जोंग-उन को किसी कारण सत्ता छोड़नी पड़ी या उनका निधन हो गया तो भी उत्तर कोरिया कमजोर पड़ने वाला नहीं है। यहाँ किम यो-जोंग के नेतृत्व में अभिजात वर्ग का सामूहिक नेतृत्व देखने को मिल सकता है। मैडेन ने यह भी कहा कि नेतृत्व टीम में किम के अन्य भरोसेमंद लोग अर्थात् उनके इनर सर्कल के सदस्य भी शामिल होंगे।

उन्होंने आगे कहा, “शीर्ष नेतृत्व के पदों पर डीपीआरके के अभिजात वर्ग में ऐसे व्यक्ति होते हैं, जिन्हें किम परिवार के नेतृत्व के प्रति उनकी वफादारी के लिए चुना गया था। इस वफादारी के हिस्से में समर्थन भी शामिल है, जो किम जोंग के बाद के सत्ता परिवर्तन के लिए जो भी योजनाएँ हैं, उसके लिए मिला है।” माना जाता है कि किम के करीबी और भरोसेमंद लोगों में उनकी बहन, बेटी के अलावा पत्नी री सोल जू, भाई किम जोंग-चुल और उनके शीर्ष जनरल-प्रीमियर किम टोक-हुन, जनरल चो रयोंग-हे और मार्शल पाक जोंग-चोन भी शामिल हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि किम की बेटी भी उनकी उत्तराधिकारी हो सकती है, जिसे वह (किम) दो मिसाइल लॉन्च के मौके पर लेकर गए थे।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के न्यू कॉलेज में राजनीति के लेक्चरर डॉ एडवर्ड हॉवेल का मानना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह (किम की बेटी) इस लाइन में हैं या नहीं। डॉ हॉवेल ने कहा कि यह सर्वविदित है कि किम का स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि किम को उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी कई बीमारियाँ हैं। साल 2020-2021 में किम जोंग का अचानक से वजन घटना उनके गिरते स्वास्थ्य को दर्शाता है। इसके अलावा वह चेन स्मोकिंग के दुष्प्रभावों से भी जूझ रहे हैं।

जोशीमठ में जमीन धँसने के कारण 500 से अधिक घर रहने लायक नहीं: अब तक 77 परिवार शिफ्ट, भाजपा ने बनाई 14 सदस्यीय समिति, PMO की भी नजर

उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धँसने की बढ़ती घटनाओं से वहाँ के लोग डरे हुए हैं। मकानों में दरारों के बढ़ने के साथ-साथ लोगों की चिंताएँ भी बढ़ रही हैं। लोग अपना गुस्सा सरकार पर निकाल रहे हैं। यहाँ के लोगों ने बद्रीनाथ हाईवे को जाम कर दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दूसरी और प्रदेश भाजपा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए 14 सदस्यीय समिति गठित की है।

सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए बुधवार (4 जनवरी 2023) की रात को लोगों ने मशाल जुलूस निकाला था। जमीन धँसने की वजह से लोगों ने गुरुवार (5 जनवरी 2023) दोपहर बद्रीनाथ हाईवे जाम कर दिया। इस वजह से हाईवे पर गाड़ियों की लंबी लाइन लग गईं। स्थानीय लोगों ने विरोध में अपनी दुकानें भी बंद रखी है।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड भाजपा ने स्थिति और इससे हुई क्षति का जायजा लेने के लिए 14 सदस्यीय समिति गठित की है। भाजपा ने इस समिति का गठन प्रदेश महासचिव आदित्य कोठारी के समन्वय से किया है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भी अब जमीन धँसने की घटनाओं की निगरानी कर रहा है। PMO की ओर से लगातार अपडेट लिया जा रहा है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कहा है कि वह भी जल्द जोशीमठ का दौरा करेंगे। स्थिति को सँभालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। अगर यहाँ के हालात की बात करें तो सभी 16 वार्डों में स्थिति खराब है। मारवाड़ी भूमि में पानी का बहाव भी नहीं रुक रहा है, जिससे निचले हिस्सों में स्थित घर तबाह हो रहे हैं।

सिंहधार में स्थित बीएसएनएल के कार्यालय और आवासीय भवनों में भी दरार आ गई है। जेपी कंपनी के परिसर में जमीन के साथ-साथ घरों की दीवारों से भी पानी का रिसाव हो रहा है। खेतों की दरार में ये पानी घुस रहा है। डाकघर को भी शिफ्ट करना पड़ा है।

‘माउंट व्यू’ नामक होटल तो ऐसा धँस गया कि इसकी पूरी संरचना ही तिरछी हो गई है। होटल को खाली करना पड़ा है। ज्योतिर्मठ परिसर, जो कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य का आवास है, वहाँ के मंदिरों के आसपास भी दरारें आ रही हैं। शंकराचार्य ने सरकार से इस पर ध्यान देने की अपील करते हुए आसपास चल रहे विद्युत्-जल परियोजनाओं को रोकने की माँग की है। 

बता दें कि जिन घरों में रहने लायक स्थिति नहीं, उस परिवार को राज्य सरकार ने दूसरी जगह शिफ्ट किया है। बुधवार को जोशीमठ से 66 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। अब तक 77 परिवारों को शिफ्ट किया जा चुका है। उत्तराखंड डिजास्टर एंड एक्सीडेंट सिनोप्सिस की रिपोर्ट के अनुसार, जोशीमठ में 500 घर रहने के लायक नहीं हैं।

नौकरी-रोजगार और पैसे का लालच: UP के हरदोई में 40 लोगों को ईसाई बनाने की कोशिश करने वाला गिरफ्तार, कहा- हिंदू धर्म अच्छा नहीं

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने और इसे अपनाने का दबाव देने वाले आरोपित कमलेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित 31 दिसंबर 2022 की शाम को चौपाल का आयोजन किया था और उसमें लोगों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव दे रहा था। वहाँ मौजूद एक शख्स ने पुलिस से इसकी शिकायत कर दी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोप है कि ग्रोसरी शॉप चलाने वाला 45 वर्षीय कमलेश कुमार हरदोई में टीकर मजरा मलेहरा स्थित अपने घर में चौपाल लगाया था। इसमें शामिल करीब 40 लोगों को वह ईसाई धर्म अपनाने के लिए विभिन्न तरह का प्रलोभन दे रहा था। इसके लिए वह हिंदू धर्म पर कई तरह के तोहमत लगा रहा था।

एक स्थानीय पत्रकार ने ट्वीट कर बताया, “हरदोई में घर के अंदर चौपाल लगाकर लोभ लालच देकर ईसाई धर्म को अपनाने के लिए किया जा रहा था प्रेरित। करीब आधा सैकड़ा महिला-पुरुष को घर के अंदर जमा किया गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके भेजा जेल दिया है। मामला संडीला कोतवाली क्षेत्र के टीकर मजरा मलेहरा का है।”

संडीला थाना के प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र गिरी ने बताया कि किराना दुकान चलाने वाले कमलेश ने टिकर माजरा स्थित अपने घर पर पार्टी का आयोजन किया था, जिसमें 40 से अधिक लोग शामिल हुए थे। कमलेश ने उन्हें नौकरी और रोजगार के अलावा नियमित आर्थिक मदद का लालच दिया था।

गिरि ने बताया, “वहाँ मौजूद लोगों में से एक बबलू दयाल ने पुलिस को बताया कि कमलेश ने पहले सभी को समझाने की कोशिश की कि हिंदू धर्म अच्छा नहीं है और बाद में भोले-भाले स्थानीय लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया।”

वहीं, हरदोई पुलिस ने भी ट्वीट कर घटना की जानकारी दी है। पुलिस ने बताया है कि आरोपित कमलेश को उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम- 2021 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

पता था कार में फँसी है लड़की, फिर भी 12 किमी तक भगाते रहे: कंझावला केस में सबूत मिटाने की भी हुई कोशिश, दिल्ली पुलिस ने बताया- 7 हैं आरोपित

दिल्ली के कंझावला मामले में पुलिस ने गुरुवार (5 जनवरी 2023) को बड़ा खुलासा किया। स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) सागर प्रीत हुडा (Sagar Preet Hooda) ने बताया, “वारदात को अंजाम देने वाले 5 नहीं कुल 7 आरोपित हैं। आशुतोष और अंकुश खन्ना की तलाश जारी है। पाँचों आरोपितों के बयान अलग-अलग हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “हम जल्द से जल्द मजबूत चार्जशीट दाखिल करने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की कुल 18 टीमें इस मामले की जाँच कर रही हैं। दो नए आरोपितों ने सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की है। हमें गलत सूचना दी और आरोपितों की मदद करने की कोशिश की।”

यह बात भी सामने आई कि आरोपितों को पता था कि गाड़ी के नीचे लड़की फँसी हुई है, इसके बावजूद वे गाड़ी को नहीं रोके। आरोपित कार को लगभग 12 किलोमीटर तक घूमाते रहे।

उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आना अभी बाकी है। कई सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है। अंजलि का आरोपितों से कोई संबंध नहीं था। गाड़ी अमित चला रहा था। अंजलि ने शराब पी या नहीं पी, इसका इस केस से कोई ताल्लुक नहीं है। निधि इस मामले की मुख्य गवाह है।

SCP हुड्डा ने कहा कि अभी कई रिपोर्ट आना बाकी है। सभी पहलुओं की जाँच करने के बाद ही पुलिस चार्जशीट दाखिल करेगी। पुलिस की 18 टीमें दिन-रात काम में जुटी हुई हैं। यह भयानक दुघर्टना 1 जनवरी 2023 को हुई और 5 जनवरी तक इससे जुड़ी कई जानकारी जुटा ली गई है।

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने आगे बताया, “5 के अलावा दो और आरोपितों में से एक अमित का भाई है। जब उसने यह देखा कि उसके भाई अमित के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है और ये एक एक्सिडेंट केस है, तब उसने दूसरे आदमी (दीपक) को सजेस्ट किया कि तुम कहो कि मैं गाड़ी ड्राइव कर रहा था। इस तरह उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की। क्रिमिनल को बचाने की कोशिश की है। वो भी इस मामले में हमारे लिए आरोपित है।”

इस मामले में आगे खुलासा करते हुए SCP हुड्डा ने कहा, “जिसकी गाड़ी थी, उसको भी मालूम था कि गाड़ी कौन लेकर गया है। गाड़ी दीपक लेकर नहीं गया था, बल्कि कोई दूसरा लेकर गया था। उसने भी एक तरह से गुमराह करने की कोशिश की है और आरोपित की मदद की। मुझे उम्मीद है कि हम जल्दी ही इस मामले में एक मजबूत चार्जशीट दाखिल करेंगे।” वहीं, दीपक ने पुलिस पूछताछ में बताया था कि वह गाड़ी चला रहा था, जबकि गाड़ी अमित चला रहा था।

बता दें कि 1 जनवरी 2023 को अंजलि की भयानक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसकी स्कूटी को टक्कर मारते हुए एक कार उसे कई किलोमीटर तक घसीटती रही। पुलिस ने कार सवार आरोपितों पर गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से मौत और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

वहीं, अंजलि की दोस्त निधि ने कहा था कि उस वक्त अंजलि ने शराब पी रखी थी, जबकि परिवारवालों ने निधि के दावों को खारिज कर दिया है। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंजलि के पेट में किसी तरह का अल्कोहल नहीं पाया गया है। यानी अंजलि ने शराब नहीं पी थी।

‘भगवा छोड़ मॉडर्न बनें CM योगी’: कॉन्ग्रेस नेता हुसैन दलवई का विवादित बयान, BJP ने बताया- संतों का अपमान

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में अगले महीने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट होने जा रहा है। इसके पहले योगी आदित्यनाथ मुंबई के दौरे पर हैं। योगी आदित्यनाथ समिट के लिए स्थानीय निवेशकों को आमंत्रित करने के साथ-साथ नोएडा में बनने वाले फिल्म सिटी को लेकर फिल्मी दुनिया के हस्तियों से मुलाकात कर रहे हैं। इस बीच महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता और पूर्व सांसद हुसैन दलवई ने यूपी के सीएम योगी पर विवादास्पद टिप्पणी की है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को भगवा कपड़ों का त्याग कर मॉडर्न बनने की सलाह दी है।

कॉन्ग्रेस नेता हुसैन दलवई ने पत्रकारों से मराठी में बातचीत करते हुए योगी आदित्यनाथ के भगवा वस्त्र पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री आधुनिकता का प्रतीक है इसलिए उन्हें (योगी आदित्यनाथ) को भगवा कपड़े छोड़कर आधुनिक कपड़े पहनने चाहिए। दलवई ने कहा कि उन्हें हर दिन धर्म की बात नहीं करनी चाहिए। भगवा कपड़े नहीं पहनने चाहिए और थोड़ा मॉडर्न हो जाना चाहिए।

भाजपा नेता राम कदम ने हुसैन दलवई के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दलवई के बयान को देश के साधु-संतो का अपमान करार दिया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि कॉन्ग्रेस का हिंदू विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है।

एक अन्य ट्वीट में राम कदम ने कॉन्ग्रेस नेता दलवई के वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस पार्टी और उनके नेताओं को हिंदू धर्म के सनातनी पवित्र भगवे रंग से इतनी नफरत क्यों ?” उन्होंने लिखा कि भगवा रंग साधु-संतो का पहनावा मात्र नहीं है बल्कि त्याग, बलिदान, सेवा, ज्ञान, शुद्धता एवं आध्यात्म का परिचायक भी है।

राम कदम ने लिखा कि कन्ग्रेस को सिर्फ चुनाव के समय हिंदू धर्म तथा हिंदू लोगों की याद आती है।

ताजा जानकारी मिलने तक योगी आदित्यनाथ की उद्योगपतियों के साथ बैठक चल रही है। मुंबई में उनका रोड शो होने वाला है। जानकारी के मुताबिक उनके कैबिनेट के दूसरे मंत्री भी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देश के बड़े-बड़े महानगरों में रोड शो निकालने वाले हैं।

मौलवी वसीम को पानीपत से कैराना ले गया उर्दू का उस्ताद दिलशाद, डंडे से पीट-पीटकर मार डाला; फिर निर्माणाधीन मकान में गाड़ा

हरियाणा के पानीपत जिले से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इस मामले ने बॉलीवुड फिल्म ‘दृश्यम’ की याद दिला दी है, जिस प्रकार फिल्म में एक युवक ही हत्या करने के बाद उसके शव को निर्माणाधीन पुलिस थाने में दफना दिया गया था, उसकी तरह फिल्मी स्टाइल में आरोपित पहले मौलवी को कैराना ले गया ​और फिर वहाँ उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसके शव को निर्माणाधीन म​कान में गाड़ दिया। पुलिस ने हत्यारोपित 65 वर्षीय मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की पहचान वसीम के रूप में हुई है। वह 31 दिसंबर 2022 से लापता था। बताया जा रहा है कि वसीम शादीशुदा था और उसके दो बच्चे हैं।

पानीपत पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार की मौजूदगी में मंगलवार (3 जनवरी 2023) को कैराना के रेता वाला मोहल्ला के निर्माणाधीन मकान से वसीम का शव बरामद किया। बुधवार (4 जनवरी 2023) को शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने बताया कि हत्या करने वाला उर्दू उस्ताद व उसका साथी मौलवी ही है। उसने करीब साढ़े 7 लाख रुपए के लालच में आकर वसीम पर जींद की एक महिला के साथ गलत काम करने का आरोप लगाकर उसकी हत्या कर दी।

भाई के व्हाट्सएप पर भेजा मैसेज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 वर्षीय वसीम पानीपत के इमाम साहब मोहल्ला जाटल रोड का निवासी था। वह 4 दिनों से लापता था। मृतक के बड़े भाई कल्लन के अनुसार, उसका छोटा भाई वसीम लकड़ी का काम करता था। वह 31 दिसंबर 2022 की सुबह करीब 8 बजे काम के लिए निकला था, जिसके बाद घर वापस नहीं लौटा। भाई ने बताया, “1 जनवरी 2023 की शाम 6 बजकर 12 बजे मिनट पर मेरे व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया, जिसमें वसीम के शव की फोटो थी। उस मैसेज में लिखा था कि हम जींद से बोल रहे हैं। तुम्हारे भाई ने हमारी लड़की के साथ गलत काम किया था। इसलिए हमने उसे मार दिया। वसीम ने लड़की से 7 लाख 35 हजार रुपए भी ले लिए थे। मरते हुए वसीम ने अपने भाई का नंबर दिया है। अब ये रुपए उसके भाई से वसूले जाएँगे।”

उस्ताद दिलशाद ने हत्या की बात कबूल की

कुछ मीडिया रिपोर्ट में वसीम को वसीन कहा जा रहा है। मामले की जाँच कर रहे जाँच अधिकारी महिपाल सिंह ने बताया, “पीड़ित परिवार ने शुरुआत में वसीम की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद वसीम की हत्या की बात सामने आई। जब उसके भाई को एक मैसेज मिला, जिसमें लड़की और पैसों के लेन-देने की बात कही गई थी।”

उनके मुताबिक, “मामले की जाँच के दौरान परिवार, दोस्त, पड़ोसी और अन्य लोगों से पूछताछ की गई। वसीम मौलवी भी था। उसने 65 साल के दिलशाद को अपना उस्ताद बनाया हुआ था, जो खुद भी मौलवी है। जब उसके इस मामले में सख्ती से पूछताछ की गई उसने अपने शागीर्द की हत्या की बात कबूल कर ली।”

साढ़े 7 लाख रुपए पर थी नजर

आरोपित ने पुलिस को बताया कि वह वसीम को काम दिलाने के बहाने कैराना लेकर गया था। उसने उसे एक निर्माणाधीन मकान में बैठने को कहा। तभी मौका पाकर दिलशाद ने वसीम के सिर पर डंडे से ताबड़तोड़ कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद वह गद्दों का चेन वाला कवर लेकर आया और उसमें वसीम के उसने शव को डालकर छाती तक चेन बंद कर दिया। फिर उसने निर्माणाधीन मकान में ही उसका शव दफना दिया।

आरोपित दिलशाद यूपी के कांधला का रहने वाला है। व​ह वसीम को करीब 7 साल से जानता था। दिलशाद अक्सर वसीम के घर भी आता था। इस दौरान उसे यह पता लगा कि वसीम की जींद निवासी एक महिला अध्यापिका के साथ दोस्ती है। अध्यापिका ने उसे हाल ही में करीब साढ़े 7 लाख रुपए दिए थे, जिन पर उसकी (दिलशाद) की नजर थी। इन पैसों के लिए ही उसने एक सोची समझी साजिश के तहत अपने चेले को मार डाला।