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बीवी बुर्के वाली, दूसरी औरतों से बातें सेक्सी: इमरान खान के लीक ऑडियो में ऊँट से लेकर प्राइवेट पार्ट्स में दर्द तक, बोला पाकिस्तानी- अब मत बनना उम्माह का मॉडल

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) की तीसरी बीवी बुशरा बीवी का आपने शायद ही चेहरा देखा हो। वह सार्वजनिक तौर पर बुर्के में ही नजर आती हैं। उनका जीवन भी बेहद रहस्यमय बताया जाता है। अब कुछ ऑडियो सामने आए हैं जो इमरान खान के बताए जा रहे हैं। इसमें वे गैर औरतों से सेक्सी बातें करते सुनाई पड़ रहे हैं। ऊँट से लेकर प्राइवेट पार्ट्स में दर्द तक की चर्चा होती है।

पाकिस्तानी पत्रकार सैयद अली हैदर ने अपने यूट्यूब चैनल पर ये ऑडियो दो हिस्सों को जारी किया है। इस ऑडियो के वायरल होते ही इमरान खान विवादों में आ गए हैं। हालाँकि उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का कहना है कि यह ऑडियो उनके नेता का नहीं है।

पहली ऑडियो में इमरान और एक महिला को बातें करते सुना जा सकता है। इमरान खान महिला को मिलने के लिए बुलाते हैं, लेकिन महिला कहती हैं, “मैं दर्द में हूँ। मिलने के लिए नहीं आ सकतीं। तुमने (इमरान खान) मेरा क्या हाल किया है, मैं डॉक्टर को भी नहीं बता सकती।” इसके बाद इमरान खान कहते हैं, “क्या हम कल मिल सकते हैं? बच्चों समेत मेरा परिवार परसों आ रहा है। इसको आगे बढ़ाने का प्रयास करता हूँ।”

वहीं दूसरे ऑडियो क्लिप में इमरान खान महिला के साथ बातचीत के दौरान बेहद कामुक बातें करते सुनाई पड़ते हैं। खुद को ऊँट बताते हुए महिला से सेक्शुअल प्लेजर के बारे बात करते हैं। ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने उनकी तुलना अभिनेता इमरान हाशमी से की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “इमरान खान, इमरान हाशमी बन गए हैं।”

वहीं एक अन्य पकिस्तानी पत्रकार हमजा अजहर सलाम ने कहा है, “खान साहब अपने निजी जीवन में जो चाहें कर सकते हैं, लेकिन अब मुझे उम्मीद है कि वह पूरी उम्माह के लिए खुद को किसी तरह के रोल मॉडल के रूप में पेश करना बंद कर देंगे।”

एक अन्य पाकिस्तानी पत्रकार सैयद समीर अब्बास ने दावा किया है कि वायरल ऑडियो क्लिप फर्जी हैं। उसने कहा है, “डब ऑडियो। मैंने बीट रिपोर्टर के तौर पर 2010 से 2016 तक इमरान खान को कवर किया। उनके हर भाषण और प्रेस कॉन्फ्रेंस को सुना है। यह इमरान खान नहीं, बल्कि एक नकली और डब किया हुआ ऑडियो है। बहुत ही शर्मनाक हरकत।”

वहीं भारतीय रक्षा विशेषज्ञ गौरव आर्य ने ट्वीट कर कहा है, “पाकिस्तान के किसी व्यक्ति ने मुझे सैयद अली हैदर ऑफिशियल नामक YouTube चैनल का एक वीडियो भेजा है। वीडियो में इमरान खान कथित तौर पर एक महिला के साथ बातचीत कर रहे हैं। इमरान खान निश्चित रूप से जन्नत में जाने और 72 हूर पाने का इंतजार नहीं कर रहे हैं।”

ऐसा नहीं है कि इमरान खान का कोई ऑडियो पहली बार वायरल हुआ है। इससे पहले भी इमरान खान की कथित कॉल रिकॉर्डिंग वायरल हो चुकी है। अक्टूबर में इमरान खान का एक कथित ऑडियो सामने आया था, जिसमें वह संसद में अविश्वास मत से पहले सांसदों को खरीदने की कोशिश कर रहे थे।

माथे पर तिलक देख सुशील को काटा, कर्फ्यू लगा तो पुलिस पर हमला: 40 पत्थरबाजों को एक साथ सजा, MP के बांग्लादेश में हुई थी हिंसा  

मध्य प्रदेश के खंडवा में एक साथ 40 पत्थरबाजों को सजा सुनाई गई है। खंडवा कोर्ट ने मंगलवार (20 दिसंबर 2022) को 7-7 साल की कैद के अलावा इन पर 6500-6500 रुपए का जुर्माना भी लगाया। यह घटना खंडवा के घासपुरा स्थित बांग्लादेश में 2018 में हुई थी। पुलिस पर पत्थर, कुल्हाड़ी और अन्य धारदार हथियारों से हमला किया गया था। एक हिंदू की हत्या के बाद शहर में लगे कर्फ्यू के दौरान पुलिस पर यह हमला हुआ था।

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना की शुरुआत 30 जुलाई 2014 को हुई थी। एक सोशल मीडिया पोस्ट से शहर का माहौल तनावपूर्ण था। इसी दिन बीमा कम्पनी के एजेंट सुशील पुंडगे बाइक से मुस्लिम बहुल हातमपुरा इलाके से गुजर रहे थे। सुशील ने माथे पर तिलक लगा रखा था, जिसे देखकर मुस्लिमों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। हमले में धारदार हथियारों से सुशील को तब तक मारा गया जब तक उनकी जान नहीं चली गई।

सुशील पुंडगे की हत्या में 4 लोगों को सितम्बर 2018 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इनके नाम मोहम्मद आजम, जियाउल हक, मोहम्मद जाकिर और जुबेर हैं।

सुशील की हत्या के बाद शहर में साम्प्रदायिक तनाव फ़ैल गया था। जगह-जगह पत्थरबाजी हो रही थी। हालात काबू करने के लिए प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों पर 1 अगस्त 2014 को घासपुरा के बांग्लादेश में हमला हुआ। कुछ हमलावरों ने तो पुलिस की ही वर्दी पहन रखी थी। पत्थरों, लाठियों, डंडों और कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया गया था।

पत्थरबाजी में 47 आरोपित

इस हमले में 12 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इनमें महिला स्टाफ भी शामिल थीं। इसी दौरान पुलिस ने मोहल्ले की घेराबंदी करते हुए 40 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें मुख्य आरोपित फारुख था। जाँच के दौरान कुल 47 आरोपित प्रकाश में आए थे। इनमें से 4 नाबालिग थे। सभी पर IPC की धारा 307, 147, 148, 149, 352, 153, 188, 34 में FIR दर्ज हुई थी।

ताबड़तोड़ दबिश डालकर पुलिस ने अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया था। समय बीतने के साथ कई आरोपितों की जमानत भी हो गई। मंगलवार को करीब 8 साल बाद न्यायाधीश प्राची पटेल ने 2 आरोपितों को सबूतों के आभाव में बरी करते हुए 40 आरोपियों को सजा सुनाई। ट्रायल के दौरान 1 आरोपित की मौत हो गई थी। 4 नाबालिगों का मामला किशोर अदालत में भेज दिया गया था।

इन पत्थरबाजों को सजा

एक रिपोर्ट के मुताबिक जिनको सजा सुनाई गई है, उनके नाम- कलीम, जुनेद, हाफीज, मोहम्मद उमर, मोहम्मद रज्जाक, इरफान, जावेद, शब्बीर, जहूर, शब्बीर, सलाउद्दीन, मो. अली, मजीद खान, सलामउद्दीन, शाहरूख, फिरोज, शेख सलीम, आरिफ, शेख युसूफ, ईसाक, सरवर, शेख जाकीर, शाकीर, अब्दुल रहीम, मोहम्मद एजाज, मोहम्मद इरसाद, वसीम, कलीम, शेख जाकीर, इस्माईल, शाबीर, शाकीर, अजीज, मोहम्मद ईशाक, मुबारिक, इस्ताक, रहीश, अशरफ, मोनू उर्फ सलमान और मोहम्मद अजहर हैं।

‘केले की दुकान लगाओ, जाकर अंडे बेचो’: कपिल देव ने की ‘प्रेशर’ की धुलाई, कहा- मत खेलो, किसी ने क्रिकेट के लिए मजबूर नहीं किया

1983 की विश्व विजेता टीम के कप्तान रहे कपिल देव (Kapil Dev) ने प्रेशर का रोना रोने वाले खिलाड़ियों को फटकार लगाई है। उन्होंने कहा है कि जो खिलाड़ी दबाव नहीं झेल सकते उन्हें केले और अंडे की दुकान लगानी चाहिए। उन्हें किसी ने क्रिकेट खेलने के लिए मजबूर नहीं किया है।

कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान कपिल देव ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को खेल का आनंद लेना चाहिए। एक खिलाड़ी को देश का प्रतिनिधित्व करते हुए गर्व होना चाहिए, न कि दबाव महसूस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने सुना है कि खिलाड़ी आजकल आईपीएल खेलने की वजह से प्रेशर में हैं। दबाव एक बहुत ही सामान्य शब्द है। ऐसे में मैं दबाव महसूस करने वाले खिलाड़ी से कहूँगा कि वे क्रिकेट ना खेले। उनको किसी ने क्रिकेट खेलने के लिए मजबूर नहीं किया है। जब आप इतने बड़े स्तर (विश्व स्तर) पर खेलेंगे तो दबाव और प्रतिस्पर्धा होगी। आपकी प्रशंसा और आलोचना होगी। यदि आप आलोचना नहीं सह सकते तो मत खेलिए।

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान ने कहा कि प्रेशर एक अमेरिकी शब्द है। अगर आप काम नहीं करना चाहते तो न करें। क्या कोई आपको मजबूर कर रहा है? जाकर केले की दुकान लगाओ। अंडे बेचो। आपको मौका मिला है तो आप इसे दबाव के रूप में क्यों ले रहे हैं? कपिल ने कहा कि 100 करोड़ से भी अधिक आबादी वाले देश में आपको देश के प्रतिनिधित्व का मौका मिला है और आप दबाव में हैं। यह कैसे हो सकता है? जिन खिलाड़ियों को टीम इंडिया में खेलने का मौका मिला, उन्हें खुद को भाग्यशाली समझना चाहिए क्योंकि आपको लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। हर किसी को यह खुशी नहीं मिलती।

आपको बता दें कि विराट कोहली समेत कई खिलाड़ियों ने हाल के दिनों में अपने मेंटल हेल्थ को लेकर अनुभव साझा किया था। कोहली ने एक इंटरव्यू में कहा था कि एक समय में वे मानसिक रूप से कमजोर महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि लोगों से भरे कमरे में भी उन्हें अकेलापन सा लगता था। कोहली ने एशिया कप मुकाबले से पहले क्रिकेट से कुछ दिनों का ब्रेक भी लिया था। हालाँकि ब्रेक से वापसी के बाद कोहली का प्रदर्शन तो ठीक-ठाक रहा, लेकिन हाल के दिनों में टीम इंडिया बड़े मुकाबलों और प्रेशर मैचों में आसानी से हार गई। एशिया कप के बाद हाल ही में संपन्न टी 20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का प्रदर्शन औसत रहा। फेवरेट मानी जा रही टीम फाइनल तक नहीं पहुँच सकी। जिसके बाद से भारतीय क्रिकेटरों को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

‘तू बहुत हिंदुत्व की बात करता है… तेरा सर कलम करना होगा’: गाजियाबाद के महंत को पश्चिम बंगाल से भेजा ‘मौत का फरमान’, कहा- मोदी-योगी भी न बचा पाएँगे

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में महंत मार्तण्ड पशुपति को ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी दी गई है। यह धमकी एक पत्र के माध्यम से दी गई है, जो पश्चिम बंगाल से भेजा गया है। पत्र में इस्लाम को सबसे ऊँचा बताते हुए कत्ल की वजह हिंदुत्व की बात करने को लिखा गया है। महंत ने मामले की सूचना पुलिस को दे दी है। बताया जा रहा है कि महंत को 2 माह में मिली यह पाँचवी धमकी है। धमकी भरा खत मंगलवार (20 दिसंबर 2022) को मिला।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्तण्ड पशुपति, पशुपति अखाड़ा नेपाल के महंत हैं। फिलहाल वो साहिबाबाद थानाक्षेत्र के श्याम पार्क इलाके में रह रहे हैं। मंगलवार को सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल से उन्हें एक धमकी भरी चिट्ठी मिली। यह चिट्ठी स्पीड पोस्ट से भेजी गई थी जिस पर भेजने वाले के तौर पर किसी मंज़ूर अहमद का नाम लिखा था। इस चिट्ठी में टाइटल के तौर पर ‘मौत का फरमान’ लिखा हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार चिट्ठी में कहा गया है, “तू बहुत हिंदुत्व की बात करता है। इस्लाम सबसे ऊँचा है और सबसे ऊँचा रहेगा इंशाल्लाह। तुझे मिटाना होगा, तेरा सर कलम करना होगा।”

जब महंत ने इस चिट्ठी को खोला तब उसमें उनको जान से मार डालने की धमकी दी गई थी। पत्र में इस्लाम को सबसे ऊँचा बताते हुए हिंदुत्व की बात करने की वजह से महंत के सिर को कलम करने की बात कही गई है। चिट्ठी में कहा गया है कि महंत को अल्लाह का बंदा जमींदोज करेगा, क्योंकि उनका घर खोज निकाला गया है। साथ ही इसमें मोदी और योगी का भी जिक्र करते हुए लिखा गया, “अल्लाह के फ़रिश्ते तुझ पर नजर रखे हुए हैं। तू जल्द मिटने वाला है। कोई सरकार तुझे बचा नहीं सकेगी। मोदी-योगी कोई नहीं।”

महंत मार्तण्ड ने इस धमकी की सूचना साहिबाबाद पुलिस को दी है। उन्होंने धमकी देने वाले की गिरफ्तारी की माँग की। इस से पहले भी महंत मार्तण्ड को 17 अगस्त 2022 को चिट्ठी से ही धमकी दे कर सिर कलम का एलान किया गया था। इस धमकी पर 20 अगस्त को FIR भी दर्ज हुई थी। खुद पर खतरा बताते हुए महंत ने पुलिस पर न तो धमकी देने वालों को पकड़ने और न ही खुद को सुरक्षा देने का आरोप लगाया है। ACP पूनम मिश्रा के मुताबिक धमकी देने वाले के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस की एक टीम पश्चिम बंगाल भेजी जा रही है।

फिर से ईसाई हुक्ड क्रॉस को हिन्दू स्वस्तिक बताने में लगे विदेशी, ‘डेली मेल’ की पत्रकार प्रोपेगंडा में आगे: नाजियों के चिह्न से एकदम अलग है सनातन प्रतीक

‘स्वस्तिक’ और ‘हुक्ड क्रॉस’ के बीच अंतर को लेकर दुनिया भर में कन्फ्यूजन है। खासकर पश्चिमी मीडिया ने इस कन्फ्यूजन को बढ़ाने का काम किया है। इसका ताजा उदाहरण ‘डेली मेल’ की एक कॉलमनिस्ट ने अपने ट्वीट से पेश किया है। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने ‘हनुक्का’ की पहली रात को इजरायल विरोधी एक क्रॉसवर्ड पहेली जारी किया है, जिसके बारे में सोशल मीडिया में लोगों का कहना है कि ये स्वस्तिक की तरह दिख रहा है। वह आगे कहती हैं – “हम तुम्हें देख लेंगे न्यूयॉर्क टाइम्स।” ‘हनुक्का’ यहूदियों का पवित्र पर्व है। यहूदी इस पर्व को प्रकाश उत्सव की तरह मनाते हैं।

कॉलमनिस्ट मेघान मैक्केन द्वारा शेयर की गई तस्वीर किसी भी एंगल से स्वस्तिक नहीं दिख रही है। एक ट्विटर यूजर ने उनके ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “यह हुक्ड क्रॉस है न कि स्वस्तिक। आपको हनुक्का मुबारक। भगवान आपको सद्बुद्धि दे। कृपया हमारे खिलाफ नरसंहार को भड़काए नहीं।”

बता दें कि पश्चिमी मीडिया नाजियों के हुक्ड क्रॉस या हेकेनक्रेज को हिंदू धर्म के शुभ प्रतीक स्वस्तिक बताकर प्रोपेगेंडा फैलाती रही है। इससे विश्व भर में हिंदुओं के खिलाफ और उनके धर्मस्थलों पर हमले बढ़ रहे हैं। कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन में हिंदुओं पर इसे लेकर कई बार हमले हुए हैं। इन हमलों को लेकर भारत सरकार को विदेशों में रहने वाले हिंदुओं को लेकर चेतावनी जारी करनी पड़ी।

दरअसल, इन देशों में रहने वाले हिंदू और हिंदू संगठन लगातार वहाँ के अधिकारियों और सरकार को बताते रहे हैं कि नाजियों के हुक्ड क्रॉस और हिंदुओं के स्वस्तिक में भारी अंतर है। इस अंतर को समझते हुए हुक्ड क्रॉस को स्वस्तिक से ना जोड़ा जाए और ना ही उसे स्वस्तिक कहा जाए। इसके बावजूद हिंदू विरोधी मीडिया संस्थान हिंदुओं के इस प्रतीक का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ हिंसा के लिए स्थानीय लोगों को लगातार उकसा रहे हैं।

अमेरिका के राज्यों और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इस अंतर को समझते हुए इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी दिए हैं। 23 अगस्त 2022 को अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया ने इसको लेकर एक कानून भी पारित किया था। कैलिफोर्निया राज्य की सीनेट ने सर्वसम्मति से एक विधेयक AB2282 पारित किया।

इस विधेयक में नाजी हेकेनक्रेज़ (जर्मन में हुक्ड क्रॉस) के प्रदर्शन को अपराध बनाया गया है। इसके साथ ही इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह स्वस्तिक जैसा दिखता है, लेकिन यह बिल हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म से जुड़े स्वस्तिक के प्रदर्शन को अपराधीकरण नहीं करता। इसका मतलब स्पष्ट है कि कैलिफोर्निया की सीनेट मानती है कि हिंसा को प्रतीक बना हुक्ड क्रॉस हिंदुओं के स्वस्तिक से अलग है।

वहीं, ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स संसद (NSW Parliament) ने हेक्रेनक्रेज के प्रदर्शन को अपराध घोषित किया, लेकिन स्वस्तिक को उससे अलग रखा। इसी तरह का बिल ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया और क्वींसलैंड में पास किया गया। यहाँ भी सरकारों ने हिंदुओं के माँग को ध्यान में रखते हुए नाजी हेकेनक्रेज और स्वस्तिक से अलग माना।

मोईन खान ने ‘मोनू वर्मा’ बन हिन्दू लड़की को फाँसा, कर रहा था अश्लील हरकत: ‘बजरंग दल’ ने धुनाई के बाद पुलिस को सौंपा, 5 साल से बना रहा था संबंध

मध्य प्रदेश में कड़ा कानून बनने के बाद भी धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ के मामले सामने आ रहे हैं। दरअसल, इंदौर में मोइन खान नामक व्यक्ति खुद को मोनू वर्मा बताते हुए हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फँसा कर अश्लील हरकत कर रहा था। इसकी सूचना ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं को मिली। बजरंगियों ने मौके पर पहुँचकर उसकी पिटाई कर पुलिस को सौंपा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंदौर के ट्रेजर आइलैंड मॉल में मोइन नामक युवक हिंदू लड़की के साथ घूम रहा था। इस बारे में, बजरंग दल के जिला संयोजक मनोज यादव को जानकारी मिली थी कि एक मुस्लिम युवक हिंदू लड़की को लेकर घूम रहा है और उसके साथ अश्लील हरकत कर रहा है। इस पर, मनोज यादव कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुँचकर मोइन को अश्लील हरकत करते रंगे हाथों पकड़ लिया।

इसके बाद, बजरंगियों ने उससे पूछताछ करनी शुरू की। इस पर वह खुद को मोनू वर्मा निवासी माणिक बाग बताने लगा। साथ ही, उसने लड़की को अपना फ्रेंड बताया। पूछताछ के दौरान, उसके हावभाव देखकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को शक हुआ। इसके बाद, उन्होंने उससे ओरिजिनल आईडी माँगी तो वह घबड़ा गया। कड़ी पूछताछ के बाद उसने अपना नाम मोइन खान बताया।

मोइन खान की सच्चाई सामने आने के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उससे पूछा कि तुमने पहले अपना नाम गलत क्यों बताया। इस पर उसने कहा कि बजरंग दल वाले मुस्लिम लव जिहादियों को पकड़कर जेल में डाल देते हैं, इसलिए वह डर गया था। उसने लड़की के साथ बीते 5 सालों से संबंध बनाने की बात भी स्वीकारी। इसके बाद, बजरंगियों ने उसकी पिटाई कर दी। फिर, स्थानीय तुकोगंज थाने की पुलिस को बुलाकर उसे सौंप दिया। साथ ही, लड़की के परिजनों को भी थाने बुलाया।

‘लव जिहाद’ के इस मामले में पुलिस का कहना है कि मोईन खान अपना नाम बदलकर मोनू रख लिया था। कई वर्षों से नाम बदलकर युवती से संबंध बना रहा था। पीड़िता की शिकायत के आधार पर आरोपित मोइन खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जाँच की जा रही है। दोषी पर सख्त कार्रवाई होगी।

हत्या से पहले दिलदार अंसारी के मामा और दोस्त ने गर्भवती जनजातीय महिला से किया था रेप, पहचान छिपाने के लिए उतार दी खाल: प्लास्टिक बिछा कर टुकड़े-टुकड़े किया

झारखंड के साहिबगंज के रिबिका मर्डर मामले में रूह कँपा देने वाली बातें सामने आई हैं। जाँच के दौरान यह बात सामने आई है कि आरोपितों ने शव की पहचान छिपाने के लिए उसका खाल तक उतार दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हत्या से पहले दिलदार के मामा और उसके सहयोगी ने रिबिका के साथ बलात्कार भी किया था। इतना ही नहीं जाँच में यह बात भी सामने आई है कि हत्या के वक्त रिबिका गर्भवती थी।

दिलदार की दरिंदगी का शिकार रिबिका का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर डिप्टी कमिश्नर रामनिवास यादव और एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा भी मौजूद रहे। पुलिस के मुताबिक मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है मामले में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हत्या के समय रिबिका गर्भवती थी। दिलदार के मामा और उसके दोस्त ने रिबिका के क़त्ल से पहले उसके साथ जबरदस्ती भी की थी। इतने से भी उनका मन नहीं भरा तो हैवानों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। लाश की पहचान न हो सके इसके लिए उन्होंने खाल तक उतार दिया था।

पुलिस ने मामले पर रिपोर्ट्स आने के बाद ही अपना बयान देने की बात कही है। सूत्रों का दावा है कि आरोपितों ने गुनाह कबूल लिया है। बताया जा रहा है कि रिबिका के शौहर दिलदार अंसारी के मामा मोइनुद्दीन अंसारी और उसके दोस्त मैनुल अंसारी ने बलात्कार के बाद रिबिका की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को मामा के दोस्‍त मैनुल अंसारी के घर ले जाया गया क्‍योंकि मोइनुद्दीन के घर पर लाश को बोटियों में काटने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी।

मैनुल के घर पर प्‍लास्टिक बिछाकर शव के टुकड़े किए गए। शव के टुकड़े करने के लिए जिन धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ उनमें से कुछ बरामद हो चुकी हैं और कुछ की तलाश की जा रही है। रुबिका की बेदर्दी से हुई हत्‍या से उसके गाँव के लोगों में आक्रोश है। सभी आरोपितों की फाँसी की माँग कर रहे हैं।

आपको बता दें कि जनजातीय समाज की 22 वर्षीय रिबिका पहाड़िन नाम की एक महिला को मार कर उसके शव के टुकड़े अलग-अलग जगह फेंक दिए गए थे। माँस के लोथड़ों को कुत्ते निवाला बना रहे थे। रिबिका को उसके शौहर और रिश्तेदारों ने मौत के घाट उतार दिया। रिबिका और दिलदार दोनों की यह दूसरी शादी थी। कई वर्षों तक मिलने-मिलाने के बाद दोनों ने 10 दिनों पहले ही निकाह किया था।

हरियाणा से शुरू हुआ संगठन जिसके शागिर्द ISI के मुखिया भी, गोधरा-कंधार से भी कनेक्शन: जानें क्या है ‘तबलीगी जमात’, उमेश कोल्हे की हत्या में आया नाम

देश में कोरोना वायरस की पहली लहर के समय ‘तबलीगी जमात’ का नाम चर्चा में आया था। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित इसके मुख्यालय मरकज में इसके कई लोग एक मस्जिद में छिपे हुए पकड़े गए थे। इन पर देश भर में कोरोना फैलाने का आरोप लगा था। इस्लामी तकरीर करने के नाम पर इनका आतंकी कनेक्शन अब कई घटनाओं में जगजाहिर है। हाल ही में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने उमेश कोल्हे हत्याकांड में चार्जशीट दाखिल की है।

NIA ने बताया है कि इससे जुड़े लोग इस्लामी कट्टरपंथी हैं। उनका ‘तबलीगी जमात’ से कनेक्शन है। इसमें 11 नाम हैं। मुख्य आरोपितों में से एक इरफान खान जमात का कट्टर समर्थक बताया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NIA की चार्जशीट में बताया गया है कि कट्टरपंथियों का मकसद हत्या कर आतंक पैदा करना था। नूपुर शर्मा के समर्थन में व्हाट्सएप मैसेज फॉरवर्ड करने की वजह से कोल्हे उनके टारगेट पर थे। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के अमरावती में 22 जून 2022 को उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी।

तबलीगी जमात की शुरुआत 1927 में एक आंदोलन के रूप में हुई थी। मुहम्मद इलियास अल-कांधलवी ने भारत में हरियाणा के नूँह जिले के एक गाँव से इसे शुरू किया था। ‘तबलीगी जमात’ की पहली मरकज वर्ष 1941 में 25 हजार लोगों के साथ हुई थी। विश्व के अलग-अलग देशों में हर साल इसका वार्षिक कार्यक्रम आयोजित होता है, जिसे ‘इज्तेमा’ कहा जाता है।

आइए पहले ‘मरकज, तबलीगी, जमात’ के शाब्दिक अर्थ जान लेते हैं। तबलीगी का शाब्दिक अर्थ होता है, अल्लाह के संदेशों का प्रचार करने वाला। जमात मतलब, समूह और मरकज का अर्थ होता है बैठक के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जगह। यानी, अल्लाह की कही बातों का प्रचार करने वाला समूह।

तबलीगी जमात ख़ुद के ग़ैर-राजनीतिक होने के दावे भी करता रहा है, भले ही इसका इतिहास कई आतंकी घटनाओं से जुड़ा हुआ है। पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी से लेकर आईएसआई के प्रमुख रहे जावेद नसीर तक इसके अनुयायी रहे हैं। कई अन्य पाकिस्तानी सेलेब्रिटी भी तबलीगी जमात में शामिल हैं। हालाँकि, समुदाय विशेष में इस जमात को लेकर आपस में ही सिर-फुटव्वल चलती रहती है। सऊदी अरब में सुन्नी वहाबी उलेमाओं ने तो मुल्क में तबलीगी जमात द्वारा मजहबी उपदेश की गतिविधियाँ करने पर रोक तक लगा दी है। इसके लिए फतवा भी जारी किया गया था।

तबलीगी जमात की कई आतंकी घटनाओं में संलिप्तता

कोरोना आने से पहले भारत में बहुत कम लोग इस बारे में जानते थे। लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स, विकीलीक्स से लेकर भारत के ही कुछ पूर्व अनुसंधान और विश्लेषण विंग (RAW), आईबी अधिकारियों ने तबलीगी जमात की आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की बात से पर्दा उठाया था। तबलीगी जमात का पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैसे हरकत-उल-मुजाहिदीन (HuM) के साथ एक लंबे समय तक संबंध रहा है। भारतीय ख़ुफ़िया विभाग (IB) के एक पूर्व अधिकारी और कुछ पाकिस्तानी विश्लेषकों के मुताबिक, हरकत-उल-मुजाहिदीन के मूल संस्थापक तबलीगी जमात के ही सदस्य थे। इसी हरकत-उल-मुजाहिदीन (HuM) के आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर में कई लोगों की हत्याएँ की है।

न्यूयॉर्क टाइम्स में 14 जुलाई, 2003 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एफबीआई के तत्कालीन वाशिंगटन फील्ड कार्यालय के आतंकवाद निरोधी प्रभाग के विशेष एजेंट माइकल जे हेइम्बच (Michael J. Heimbach) ने कहा था, ”हमने अमेरिका में तबलीगी जमात की बड़े स्तर पर मौजूदगी पाई है और हमने यह भी पाया है कि आतंकी संगठन अलकायदा भर्ती के लिए इनका इस्तेमाल करता है।”

तबलीगी जमात पर 2002 में गोधरा में 59 हिंदू कार सेवकों को ट्रेन में जिंदा जलाने के मामले में भी शामिल होने के आरोप हैं। उल्लेखनीय है कि हिंदुओं को साबरमती एक्सप्रेस में जिंदा जलाने की इस घटना के कारण गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़के थे, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। इसी तरह से कांधार कांड में भी जमात की भूमिका सामने आई थी। नेपाल के काठमांडू से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइंस के विमान को 24 दिसंबर, 1999 को हाईजैक कर अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था। बाद में तीन आतंकवादियों की रिहाई के बदले विमान में सवार 170 लोगों को छोड़ा गया था। ये आतंकवादी मसूद अजहर अल्वी, सैयद उमर शेख और मुश्ताक अहमद जरगर थे।

‘विदेशी माता से पैदा हुआ पुत्र कभी राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता, प्रॉब्लम DNA का है’: मनोज मुंतशिर ने राहुल गाँधी को लताड़ा, भारतीय सेना का किया था अपमान

मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रसिद्ध गीतकार मनोज मुंतशिर ने ब‍िना नाम ल‍िए ही राहुल गाँधी पर निशाना साधा है। मनोज मुन्तशिर ने कहा, “चाणक्य ने कहा था कि विदेशी माता से उत्पन्न पुत्र कभी राष्ट्र भक्त नहीं हो सकता। समस्या डीएनए की है।”

भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित ‘मैं भारत हूँ’ विषय पर मनोज मुंतशिर अपनी बात रख रहे थे। इस दौरान उन्होंने राहुल गाँधी के सेना पर दिए बयान का जिक्र किया। मनोज ने कहा, “एक गैर-ज‍िम्‍मेदार राजनेता ने कहा कि हमारे देश के सैन‍िक चीन के सैन‍िकों से प‍िट गए। कोई इतनी शर्मनाक भाषा का इस्‍तेमाल कैसे कर सकता है, पर मैं उसे क्या दोष दूँ? मैंने चाणक्य को पढ़ा है, उनका बयान है, मैं आचार्य व‍िष्‍णुगुप्‍त चाणक्‍य के बयान को कोट कर रहा हूँ – व‍िदेशी माता से पैदा हुआ पुत्र कभी राष्‍ट्रभक्‍त नहीं हो सकता।”

उन्होंने आगे कहा, “साथियों, प्रॉबलम डीएनए का है – कोई कुछ नहीं कर सकता है इसमें.. हम तो भारत माता कहते हैं ना, हम जब भारत माता कहते हैं तो फिर माँ से प्यार करना थोड़ी ना सीखना है।” मनोज मुंतशिर ने कहा कि भारत माता कह दिया तो हम सदा के लिए ऋणी हो गए उस माँ के।

मनोज मुंतशिर के इस बयान के बाद जहाँ कई भाजपा नेता उनका समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्हें कॉन्ग्रेसियों की आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है।

बता दें कि 9 द‍िसंबर, 2022 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारतीय सैनि‍कों और चीनी सैनि‍कों के बीच ह‍िंसक झड़प हुई थी। झड़प के दौरान भारतीय सैन‍िकों ने घुसपैठ कर रहे लगभग 300 चीनी सैन‍िकों को खदेड़ द‍िया था। इसी घटना का ज‍िक्र करते हुए शुक्रवार (16 दिसंबर, 2022) को राजस्‍थान में राहुल गाँधी ने केंद्र सरकार पर न‍िशाना साधते हुए कहा था कि चीनी सैन‍िक हमारे जवानों को अरुणाचल प्रदेश में पीट रहे हैं।

राहुल गाँधी के इस बयान के बाद देश भर में उनकी आलोचना हुई थी। 19 दिसंबर 2022 को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी राहुल को लोकसभा में करारा जवाब दिया। जयशंकर ने कहा कि राजनीतिक आलोचनाओं का हमेशा स्वागत है, लेकिन अपने जवानों का अपमान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेना के लिए ‘पिटाई’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपने जवानों की आलोचना नहीं करनी चाहिए। हमारे जवान यांग्त्से में 13 हजार फीट की ऊँचाई पर खड़े होकर हमारी सीमा की रखवाली कर रहे हैं। उनका सम्मान और उनकी सराहना की जानी चाहिए।”

‘खराब प्रबंधन का विरोध किया तो कॉलेज ने लगवा दिया SC/ST एक्ट’: पुलिस से क्लीन चिट के बाद भी मेडिकल छात्रा को नहीं दे रहे हॉस्टल, कह रहे – माँ-बाप माँगें माफ़ी

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के एक मेडिकल कॉलेज की छात्रा ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाने पर खुद को प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है। पीड़िता के मुताबिक, उस पर पैसे दे कर SC/ST का झूठा केस भी दर्ज करवाया गया, जिसमें जाँच के बाद उसे क्लीन चिट मिली। छात्रा ने अपने भविष्य और करियर का वास्ता देते हुए कॉलेज प्रशासन से खुद पर रहम करने की माँग की है।

डॉ सोनाली द्वारा जारी किए गए एक बयान के मुताबिक, वो बाराबंकी स्थित ‘मेयो इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज’ में साल 2017-18 बैच की इंटर्न हैं। सोनाली के अनुसार, उनके बैच ने कॉलेज के ख़राब प्रबंधन के खिलाफ 18 जून, 2022 को एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। आरोप है कि इस विरोध प्रदर्शन में सोनाली का दिया बयान मीडिया और सोशल मीडिया में वायरल होने की वजह से कॉलेज प्रशासन ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बकौल सोनाली, इस प्रताड़ना के पहले चरण में उन्हें 4 सितम्बर, 2022 को 60 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया।

सस्पेंशन का आदेश

सोनाली के अनुसार, ऐसा बाकी छात्रों पर दबाव बनाने के लिए किया गया था। हालाँकि, कॉलेज प्रबंधन ने सोनाली सिंह को सस्पेंड करने की वजह गेट पर तैनात गार्डों से बदतमीजी को बताया है। प्रोफेसर एन के मोहिंद्रू द्वारा जारी आदेश की मानें तो सोनाली का व्यवहार कॉलेज के नियमों के हिसाब से अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इस आदेश में सोनाली पर पूर्व में भी गलतियाँ करने का आरोप लगाया गया है। 27 सितम्बर को DGME (डॉयरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन एन्ड ट्रेनिंग) ने उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया गया।

DGME आदेश

बताया गया है कि इसके बाद सोनाली लगातार अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए ‘मेयो मेडिकल कॉलेज’ के चक्कर लगा रही है, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। सोनाली का कहना है कि उनका निलंबन भी 5 नवम्बर, 2022 को खत्म हो चुका है, लेकिन उन्हें फिर से पढ़ने की अनुमति अभी तक नहीं दी गई है।

सोनाली द्वारा भेजा गया ईमेल

बकौल सोनाली, कॉलेज प्रशासन ने उनसे कहा है कि वो पहले 8,62,500 रुपए दें, उसके बाद उनकी माँग पर विचार किया जाएगा। आरोप यह भी है कि कॉलेज प्रबंधन ने न सिर्फ सोनाली, बल्कि उनके माता-पिता से भी लिखित माफ़ी माँगने को कहा है। हालाँकि, कॉलेज प्रशासन द्वारा दिए गए फीस स्ट्रक्चर में कुल देय राशि 2 लाख 50 हजार रुपए है। इस राशि को पेनाल्टी में छूट और एक अन्य राशि को एडजस्ट कर के अंतिम रूप दिया गया है।

फीस लिस्ट

सोनाली ने कॉलेज प्रशासन द्वारा पैसे माँगे जाने को लालच करार देते हुए खुद पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उन्होंने अपने माता-पिता से माफ़ी माँगने के लिए कहे जाने को भी गलत व्यवहार करार दिया। सोनाली ने कहा कि उनके ऊपर कॉलेज प्रबंधन ने ही दबाव बनाने के लिए SC/ST का फर्जी केस दर्ज करवाया था, जिसमें पुलिस जाँच के बाद वो बेदाग़ बरी हुई हैं। इस FIR की साजिश में सोनाली ने मधुलिका मैडम (मेडिकल कॉलेज की चेयरपर्सन) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के OSD के पी सिंह को भी शामिल बताया है।

क्या था SC/ST की FIR में और क्या निकला निष्कर्ष

सोनाली के खिलाफ यह FIR कॉलेज में ही सुरक्षाकर्मी के तौर पर तैनात मोनिका नाम की एक दलित महिला ने दर्ज करवाया था। मोनिका ने सोनाली पर आरोप लगाया था कि 24 जुलाई, 2022 को सोनाली अपने कमरे में एक जूनियर छात्रा के साथ नशा कर रही थी, जिसे रोकने पर उसने जातिसूचक शब्द बोले और मारपीट की। हालाँकि, 24 जुलाई को कथित तौर पर घटी इस घटना की शिकायत 30 सितम्बर, 2022 को पुलिस में दर्ज करवाई गई थी। FIR कोतवाली नगर बाराबंकी में दर्ज हुई थी।

एफआईआर की कॉपी

इस FIR की जाँच बाराबंकी पुलिस के डिप्टी SP सिटी ने की थी। उन्होंने 17 नवम्बर, 2022 को इस केस में आरोपों के ठोस सबूत न होने की रिपोर्ट लगाते हुए केस को बंद कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, घटना के दिन की CCTV माँगे जाने पर कैमरे खराब बताए गए।इसी के साथ जिस चोट का आरोप सोनाली पर लगाया गया था, उसका कोई मेडिकल परीक्षण भी नहीं करवाया गया था।

क्लोजर रिपोर्ट

अब सोनाली को नहीं मिलेगा हॉस्टल

कॉलेज प्रशासन ने लिखित तौर पर सोनाली को फिर से इंटर्नशिप शुरू करवाने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। सोनाली को सस्पेंड करने वाले प्रोफेसर एन के मोहिंद्रू ने 21 नवम्बर, 2022 को एक सोनाली को सम्बोधित करते हुए एक पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने सोनाली को फिर से इंटर्नशिप करने के लिए आमंत्रित किया है। हालाँकि सोनाली को अब हॉस्टल न मिलने और ड्यूटी के दौरान मोबाइल प्रयोग न करने की हिदायत दी गई है।

आधिकारिक पत्र में यह भी कहा गया है कि सोनाली को इंटर्नशिप फिर से शुरू करने के लिए पहले अपने बकाया फीस आदि का भुगतान करने के साथ लिखित तौर पर अंडरटेकिंग जमा करना होगा।

नोटिस