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‘गुजरात विधानसभा चुनाव में शाम 5 बजे के बाद पड़े 16 लाख वोट’: कॉन्ग्रेसियों और वामपंथियों के दावे का ‘फैक्ट चेक’

पिछले कुछ समय से गुजरात विधानसभा चुनावों को लेकर सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हो रही है। इसमें कुछ हैंडलों द्वारा शाम 5 बजे के बाद 16 लाख से ज्यादा वोटरों के वोट डालने का दावा किया जा रहा है। कुछ मिला कर यह धारणा बनाने की कोशिश चल रही है कि मतदान के दिन अंतिम घंटे में कुछ गड़बड़ जरूर हुई थी।

ट्विटर पर एक कॉन्ग्रेस समर्थक हैंडल @achalshah06 ने यह दावा 7 दिसंबर को किया था। इस ट्वीट में लिखा था कि गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में शाम 5 बजे के बाद असमान्य रूप से 1600000+ वोटरों ने मतदान किया।

वामपंथी विचारधारा वाले @tnwatch1 ने भी कुछ इसी प्रकार का दावा किया है।

इन दावों की गहराई से जाँच करने पर कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी इसी प्रकार की जानकारियाँ प्रकाशित हुईं हैं। ‘द हिन्दू’ ने 10 दिसंबर 2022 को एक खबर प्रकाशित करते हुए बताया है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदाताओं की संख्या लगभग 6.5% बढ़ी थी। इस रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि इस चरण में शाम 5 बजे के बाद 16 लाख वोटरों ने मतदान किया।

दूसरे चरण में शुरुआती आँकड़ों ने संकेत दिया था कि 93 निर्वाचन क्षेत्रों में 58.8% मतदान हुआ था जिसे अंत में सुधार कर में 65.3% घोषित किया गया। वहीं पहले चरण के मतदान में प्रारम्भिक आँकड़े 60.11% थे जो अंत में सुधार कर 63.14% घोषित हुए थे। हालाँकि अपनी पूरी रिपोर्ट में ‘द हिन्दू’ ने ऐसा होने की वजह नहीं बताई है।

इस मुद्दे को कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा भी उठा चुके हैं। 12 दिसंबर, 2022 को उन्होंने अपने बयान में इसे ‘असामान्य रूप से ऊँची छलाँग ‘ कहा था। वहीं कॉन्ग्रेस ने इस मामले में कहा था कि एक वोट डालने में लगभग 1 मिनट का समय लगता है। ऐसे में इतने सारे वोट पड़ना मानवीय तौर पर मुमकिन ही नहीं है।

दावे में असमान्य कुछ भी नहीं

ये दावे पहली नजर में असमान्य लगते हैं लेकिन असल में इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है। वोटिंग बंद होने के बाद अंतिम घंटों का यह उछाल प्रत्येक पोलिंग स्टेशन पर हुए वोटिंग के नंबर को अपलोड करने में होने वाली देरी के चलते दिखाई देता है।

साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने ‘वोटर टर्न आउट’ नाम से एक एप लॉन्च किया था। ECI की वेबसाइट पर इस एप का विवरण दिया गया है। इस एप की लांचिंग से पहले जनता को मतदान खत्म होने के बाद ही वोटिंग आँकड़ों की जानकारी होती थी। अब इस एप से दिन में कई बार डाले गए वोटों का अपडेट जाना जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, इस एप में भी जानकारी अपलोड और अपडेट करने में लगभग 1 घंटे का समय लगता है। ये भी समझना जरूरी है कि सुरक्षा कारणों से वोटिंग में प्रयोग हो रहीं EVM मशीनें किसी भी नेटवर्क से जुड़ी नहीं होती हैं। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर साफ तौर से लिखा गया है कि वोटिंग के दौरान अनुमानित आँकड़े सावजनिक किए जाते हैं। ये आँकड़े मतदान केंद्रों पर मौजूद रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा समय-समय पर ऊपर भेजा जाता है। कुल मिला कर वोटिंग आंकड़ों क रियल टाइम प्रसारण सम्भव नहीं है।

नीचे से अलग-अलग मतदान केंद्रों से आने वाले इन तमाम आँकड़ों को जमा कर के उसे पब्लिक के लिए सार्वजानिक करने की प्रकिया में समय लगता है। सरल शब्दों में इसे यह माना जा सकता है कि डाला गया एक वोट लगभग 1 घंटे बाद ही लोगों की जानकारी में प्रतिशत के रूप में सामने आता है। वोटिंग का अंतिम संशोधित आँकड़ा लगभग 7 बजे सार्वजानिक किया जाता है। शाम 5 बजे डाला गया वोट निर्वाचन आयोग के एप में 1 घंटे बाद लगभग 6 बजे अपडेट होता है।

इन सभी के अलावा भले ही भी शाम 5 बजे वोटिंग खत्म हो जाती है पर मतदान केंद्रों में लाईन में लगे लोगों को वोट डालने की छूट दी जाती है। इसके चलते कई स्थानों पर समय शाम 5 बजे से अधिक हो जाता है। ऊपर के तमाम बिंदुओं को जोड़ कर कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग द्वारा शाम 7 बजे पब्लिश किया जाने वाला डाटा शाम 4 बजे से ले कर 5 बजे तक के बाद भी लाइन में खड़े लोगों का आँकड़ा होता है। कॉन्ग्रेस के वोट डालने में लगने वाले 60 से 65 सेकेण्ड वाले दावे पर दिव्य भास्कर नाम के पेपर ने स्पष्टीकरण दिया था। इसे खुद अचल ने शेयर किया था।

इसलिए, गुजरात विधानसभा चुनावों में शाम 5 बजे के बाद 16 लाख वोटरों के वोट डालने का दावा भ्रामक है।

‘PM मोदी के कारण तबाही से बच गई दुनिया’: अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी CIA के मुखिया का खुलासा-उनकी चिंताओं की वजह से टला परमाणु युद्ध

अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के प्रमुख विलियम बर्न्स ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है। सीआईए चीफ ने कहा है कि पीएम मोदी के रुख के कारण रूस पर असर हुआ है। यही कारण है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक परमाणु हथियारों का प्रयोग नहीं हुआ। साथ ही, इसके उपयोग होने के संकेत भी नहीं हैं।

विलियम बर्न्स ने पीबीएस के साथ एक इंटरव्यू में कहा है, “मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने परमाणु हथियारों के उपयोग के बारे में बार-बार अपनी चिंताएँ जाहिर की हैं। इसका रूस पर भी प्रभाव पड़ रहा है।” बर्न्स का यह बयान कई मायने में खास है। अव्वल तो यह कि विगत सप्ताह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि देश के रक्षा के लिए वह “सभी साधनों” का उपयोग करेंगे।

पुतिन ने यह भी कहा था, “अभी तक रूस ने पहले परमाणु हथियारों के प्रयोग के बारे में नहीं सोचा है। किसी भी स्थिति में रूस परमाणु हथियारों के प्रयोग से बचेगा, लेकिन इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि परमाणु हथियारों का प्रयोग बिल्‍कुल ही नहीं होगा।” पुतिन ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर रूस की सीमा पर कोई हमला हुआ तो फिर परमाणु युद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। उनके इस बयान को परमाणु हथियारों के उपयोग को लेकर स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा था।

बर्न्स ने यह भी कहा है, “मुझे लगता है कि चेतावनी सिर्फ डराने के लिए है। आज हमें सामरिक परमाणु हथियारों का उपयोग करने की योजना का कोई स्पष्ट सबूत नहीं दिख रहा है।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित दुनियाभर के कई नेताओं ने हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से टेलीफोन पर या व्यक्तिगत रूप से बातचीत की है। इस बातचीत का उद्देश्य यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध को ‘युद्ध विराम’ स्थिति में ले जाना था।

शुक्रवार (16 दिसंबर 2022) को प्रधानमंत्री मोदी ने व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की थी। इस बातचीत में उन्होंने कहा था कि बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। इससे पहले सितंबर 2022 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित हुई संघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक से अलग पीएम मोदी ने पुतिन से मुलाकात की थी।

समरकंद में मोदी ने पुतिन से कहा था, “इस मुद्दे पर मैंने आपसे बात की थी। आज हम इस पर बात करना चाहेंगे कि शांति के रास्ते पर आगे कैसे बढ़ा जा सके। भारत और रूस कई दशकों तक एक साथ रहे हैं। मैं यूक्रेन संघर्ष पर आपकी स्थिति जानता हूँ। मैं आपकी चिंता समझता हूँ। मैं जानता हूँ कि आप इन चिंताओं को समझते हैं। हम चाहते हैं कि ये संकट जितना जल्दी हो सके खत्म हो।

यही नहीं, इसी साल अक्टूबर में पीएम मोदी ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेन्स्की से भी बात की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि परमाणु हथियारों का उपयोग करने से सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं।

शिव मंदिर के गर्भगृह में अश्लील हरकतें कर रहा था पंचर लगाने वाला वसीम, हिन्दू महिलाओं से छेड़छाड़: कपड़े भी उतार देता था, अब पुलिस ने दबोचा

मध्य प्रदेश के इंदौर में शिव मंदिर के गर्भगृह में एक युवक के अश्लील हरकत करने का वीडियो सामने आया था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपित वसीम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत मामला दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंदौर के प्रकाश नगर स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में बैठकर अश्लील हरकत करता था। साथ ही, महिलाओं पर भद्दे कमेंट्स भी करता था। आरोपित वसीम की हरकत से परेशान होकर महिलाओं ने उसका वीडियो बना लिया था। वीडियो के साथ उन्होंने क्षेत्रीय पार्षद मनीष मामा से संपर्क किया था।

महिलाओं ने आरोप लगाया था कि आरोपित शिव मंदिर के गर्भगृह में बैठा रहता है, जहाँ कई बार वह अपने कपड़े तक उतार देता है। इसके बाद अश्लील हरकतें करने लगता है। इसके चलते कई महिलाओं ने मंदिर आना ही बंद कर दिया।

इस मामले में संयोगितागंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ टी काजी का कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी कि प्रकाश नगर के मंदिर में एक व्यक्ति ने अश्लील हरकत की है। मामले की जाँच की गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य तरीकों से जाँच कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने आरोपित वसीम के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), धार्मिक भावना आहत करने समेत अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज की है। वसीम ग्वाल टोली इलाके में साइकल का पंचर जोड़ता है और क्षेत्र में नशा कर घूमता रहता है।

बता दें कि शिव मंदिर के गर्भगृह में अश्लील हरकत करने का वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठन के कार्यकर्ता आग-बबूला हो गए थे। साथ ही, कुछ कार्यकर्ता आरोपित की गिरफ्तारी की माँग लेकर थाने के सामने धरने पर बैठ गए थे। यही नहीं, आरोपित की गिरफ्तारी जानकारी सामने आने के बाद भी हिंदू संगठन के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्रित होकर थाने पहुँच गए थे। आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

सरकारी सामुदायिक भवन को हरे रंग से पेंट कर घोषित कर दिया मदरसा अशराफिया, शिलापट्ट भी बदला: सोनभद्र में आरोप की जाँच शुरू

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में एक सामुदायिक भवन को मदरसे में तब्दील करने की साजिश का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक मस्जिद के पास बने इस सामुदायिक भवन पर हरे रंग का पेण्ट लगा दिया है। इसी के साथ भवन का प्लेट भी उखाड़ दिया गया है। बताया जा रहा है कि सामुदायिक भवन को मदरसा अशरफिया घोषित कर दिया गया है। एक पत्रकार की शिकायत पर सोनभद्र पुलिस ने मामले की जाँच करवा रही है। यह शिकायत रविवार (11 दिसंबर, 2022) को हुई थी।

मामला पिपरी थाना क्षेत्र का है। इस मामले में शिकायतकर्ता का नाम मनोज सिंह राणा है। राणा ‘जीवन एक्सप्रेस’ नाम के न्यूज़ संस्थान में सोनभद्र के संवाददाता हैं। अपनी शिकायत में उन्होंने लिखा कि तुर्रा मस्जिद के पास पूर्व चेयरमैन ने एक सामुदायिक भवन का निर्माण करवाया गया था। शिकायत के मुताबिक, पिपरी के वर्तमान चेयरमैन द्वारा उसी भवन को मदरसा बनाने की कोशिश की जा रही है। मनोज के मुताबिक, जब मामले की शिकायत की गई तब वर्तमान चेयरमैन ने सामुदायिक भवन पर ताला जड़ दिया था लेकिन, कुछ दिनों के बाद फिर से वहीं मदरसा बनाने की कोशिश की जाने लगी है।

पत्रकार मनोज ने अपनी शिकायत के साथ कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं। इस शिकायत पर सोनभद्र पुलिस ने बताया है कि मामले की जाँच थाना प्रभारी पिपरी को सौंपी गई है। एक अन्य ट्वीट में मनोज राणा ने सामुदायिक भवन को मदरसा अशरफिया बना देने का आरोप लगाया है। इसी ट्वीट में मनोज ने कहा है कि सामुदायिक भवन का शिलापट्ट भी बदल दिया गया है। अपने दावों के समर्थन में मनोज ने इस ट्वीट में भी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सामुदायिक भवन मुस्लिम बहुल इलाके में है। इस मामले में सार्वजनिक होते ही स्थानीय उप जिलाधिकारी (SDM) ने जाँच के आदेश दिए है। SDM शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि जिसने भी नियमों के खिलाफ काम किया होगा उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

‘डंके की चोट पर हो रहा सीमा पर निर्माण’ : PM मोदी ने नॉर्थ-ईस्ट को दी ₹4350 करोड़ की सौगात, कहा- ये देश का आखिरी छोर नहीं, व्यापार का गेटवे है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) रविवार (18 दिसंबर 2022) को नॉर्थ-ईस्ट के मेघालय (Meghalaya) और त्रिपुरा (Tripura) के दौरे पर हैं। उन्होंने मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) के गोल्डन जुबली कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में रोड शो किया। इस दौरान पीएम मे 4350 करोड़ रुपए से अधिक परियोजनाओं की सौगात दी।

शिलॉन्ग में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि स्पोर्ट्स को लेकर केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है। देश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी नॅार्थ ईस्ट में बनी है। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व में इस तरह के 19 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व में आधारभूत संरचना के विकास में 7 लाख करोड़ रुपए सरकार खर्च कर रही है।

AFSPA को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते 8 वर्षों में कई संगठनों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा। इसलिए AFSPA की जरूरत न पड़े, इसके लिए राज्य सरकार स्थितियों को सुधार रही है। उन्होंने बताया कि बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए 6,000 मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। इसके लिए 5,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारे लिए नॉर्थ ईस्ट बॉर्डर एरिया आखिर छोर नहीं है, बल्कि यह दूसरे देशों से व्यापार का गेटवे है। आज डंके की चोट पर बॉर्डर पर नई सड़कें, नई रेल लाइन जो भी आवश्यक है, उसके निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। जो सीमावर्ती गाँव पहले वीरान हुआ करते थे, उन्हें हम वाइब्रेंट विलेज बनाने में जुटे हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार आते ही नॉर्थ ईस्ट पर ध्यान दिया गया। पिछले 8 वर्ष में इस क्षेत्र में हवाईअड्डों की संख्या 9 से बढ़कर 16 हो गई। उड़ानों की संख्या 900 से बढ़कर लगभग 1,900 हो गई। क्षेत्र में 2014 के बाद से राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 50 फीसदी तक बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के कई राज्य रेलवे के मानचित्र पर आए हैं।

त्रिपुरा में पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी और प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभार्थियों के लिए ‘गृह प्रवेश’ कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत 3,400 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से घरों को बनाया गया है। इस कार्यक्रम से 2 लाख परिवारों को लाभ होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार से पहले त्रिपुरा या नॉर्थ ईस्ट की दो बार चर्चा होती है। एक बार चुनाव के दौरान और दूसरी बार जब कोई हिंसक घटना होती थी तब। कॉन्ग्रेस पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में डेवलपमेंट का डिवाइड की सोच थी।

‘भारत में होता तो कहते टेस्ट क्रिकेट को ख़त्म कर रहे’: दूसरे ही दिन ख़त्म हो गया ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका का मैच, गाबा के पिच को लेकर छिड़ी बहस

टेस्ट क्रिकेट की घटती लोकप्रियता को लेकर लंबे समय से बहस छिड़ी हुई है। इस बीच ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका (AUSvsSA) के बीच ब्रिस्बेन के गाबा (Gabba Test) में हुए टेस्ट मैच के दूसरे दिन खत्म होने के बाद दिग्गज क्रिकेटर से लेकर फैंस तक निराश नजर आ रहे हैं।

दरअसल, मेजबान ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच 3 टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच शनिवार (17 दिसंबर 2022) को शुरू हुआ था। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने अफ्रीका को 6 विकेट से हरा दिया है। कायदे से यह मैच बुधवार (21 दिसंबर 2022) तक चलना चाहिए था। हालाँकि, यदि गेंदबाज बेहतरीन प्रदर्शन करते तो मैच चौथे दिन भी खत्म हो सकता था। लेकिन, मैच में दूसरे दिन का खेल भी पूरी तरह से नहीं हुआ और परिणाम सामने आ गया।

मैच शुरू होने से पहले सामने आई पिच रिपोर्ट्स और फोटोज को देखने के बाद सोशल मीडिया में इस बात की चर्चा हो रही थी कि गाबा टेस्ट में गेंदबाजों का बोलबाला रहेगा और हुआ भी यही। मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए साउथ अफ्रीकी टीम महज 152 रनों पर ही सिमट गई थी। जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपनी पहली पारी में 218 रन बनाए थे। पहली पारी के आधार पर कंगारू टीम को 66 रनों की बढ़त हासिल हुई थी।

हालाँकि, इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरी अफ्रीका अपनी दूसरी पारी में महज 99 रनों पर ही ऑल आउट हो गई। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया को 34 रनों का लक्ष्य मिला था। ऑस्ट्रेलिया ने इस लक्ष्य को हासिल करने में अपने 4 विकेट गंवा दिए। इसमें भी दिलचस्प बात यह रही कि इन 34 रनों में 19 रन एक्सट्रा थे।

इस प्रकार 5 दिन चलने वाला टेस्ट मैच 2 दिन से पहले ही समाप्त हो गया। इस मैच में, 142 ओवरों का खेल हुआ और इसमें दोनों पारियों को मिलाकर कुल 34 विकेट गिरे। इसमें से, 30 विकेट तेज गेंदबाजों के खाते में गए। गाबा टेस्ट में खराब विकेट (पिच) के लिए पूर्व भारतीय ओपनर वीरेंद्र सहवाग समेत कई दिग्गज क्रिकेटरों और फैंस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

वीरेंद्र सहवाग ने ऑस्ट्रेलिया को लताड़ लगाते हुए कहा है कि यदि भारत में ऐसा हुआ होता तो कहा जाता टेस्ट क्रिकेट खत्म हो गया है। सहवाग ने ट्वीट किया, “142 ओवर और 2 दिन भी नहीं चला। ये लोग किस तरह की पिच होने चाहिए, इस पर ज्ञान देने में आगे रहते हैं। अगर यह भारत में हुआ होता, तो इसे टेस्ट क्रिकेट का अंत, टेस्ट क्रिकेट को बर्बाद हो गया और न जाने क्या-क्या कहा जाता। भयंकर हिपोक्रेसी है।”

यही नहीं, सहवाग ने इंस्टाग्राम में ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के बीच हुए इस मैच का स्कोरकार्ड पोस्ट करते हुए लिखा, “त्वाडा कुत्ता टॉमी, साडा कुत्ता कुत्ता। हिप्पोक्रेसी की भी सीमा होती है।”

पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर ने मीम शेयर करते हुए ट्वीट किया, “यदि उपमहाद्वीप में कोई टेस्ट 2 दिनों में समाप्त हो जाता, तो प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग होती।” दरअसल, हाल ही में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच खेले गए टेस्ट मैच के बाद रावलपिंडी की पिच को ICC ने डीमेरिट प्वाइंट दिया गया था।

दिनेश कार्तिक ने ट्वीट कर कहा, “दो दिनों से भी कम समय में 34 विकेट, ऐसा लगता है जैसे टेस्ट क्रिकेट स्टेरॉयड पर हो।”

पत्रकार तरुण सिंह वर्मा ने ट्वीट कर कहा, “गाबा में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट मैच दो दिन में 145 ओवर के अंदर ही खत्म हो गया। हरी पिच पर दोनों टीमों के तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन की हर कोई तारीफ करेगा। लेकिन, अगले साल जब ऑस्ट्रेलिया भारत आएगा, तो वे यहां के स्पिन ट्रैक को कोसना शुरू कर देंगे।”

पार्थ नारोदिया नामक ट्विटर यूजर ने कहा, “दो दिन में टेस्ट मैच खत्म हुआ। चूँकि ये ऑस्ट्रेलिया का ऐतिहासिक गाबा मैदान है इसलिए पिच खराब नहीं, बॉलर फ्रेंडली थी और ऐसी पिच बैट और बॉल के बीच संतुलन बनाए रखती है। गोरे लोगों का दोगलापन।”

सचिन देसाई नामके ट्विटर यूजर ने मीम शेयर करते हुए ट्वीट किया, “ये भेदभाव क्यों?”

एक अन्य यूजर स्वप्निल वर्मा ने गाबा में भारत द्वारा ऑस्ट्रेलिया को हराने की बात को याद करते हुए ट्वीट कर कहा, “गाबा में ऑस्ट्रेलिया को हराना हर किसी के बस की बात नहीं। दक्षिण अफ्रीका की हालत देख लीजिए।”

सलीम ने सोनू सिंह बनकर शादीशुदा हिन्दू महिला का किया रेप, कैद करके धर्मान्तरण और निकाह का दबाव बनाया: FIR के बाद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक शादीशुदा हिन्दू महिला ने मुस्लिम युवक पर नाम बदल कर अपहरण और रेप करने का आरोप लगाया है। आरोपित का नाम सलीम है जिस पर सोनू सिंह नाम से पीड़िता को अपने जाल में फँसाने के लिए FIR दर्ज हुई है। पुलिस ने सलीम को गिरफ्तार कर लिया है। घटना बुधवार (14 दिसंबर 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला ललौली थानाक्षेत्र का है। पीड़िता की शादी 3 साल पहले हुई थी। उसका 2 साल का एक बेटा भी है। ससुराल में कुछ विवाद होने के चलते वो अपने मायके में रहती है। लड़की और सलीम का परिचय फोन कॉल के जरिए हुआ था। 2 माह पहले पीड़िता के नंबर पर सलीम की कॉल आई थी। सलीम ने खुद को क्षत्रिय परिवार से बताते हुए सोनू नाम से परिचय दिया था। कुछ दिनों तक सोनू बने सलीम और महिला की बात होती रही।

पुलिस को दी गई शिकायत में आगे बताया गया है कि 14 दिसंबर को सोनू ने लड़की को मिलने के लिए एक जगह बुलाया। सोनू नाम से धोखे में आई लड़की सलीम से मिलने भी पहुँच गई। थोड़ी देर के बाद सलीम उन्हें अपने साथ एक घर में ले गया। यहाँ पीड़िता को सोनू के सलीम होने की जानकारी हुई। उसने घर से निकलना चाहा तो सलीम ने पीड़िता को बंधक बना लिया और जबरन रेप किया।

आरोप है कि सलीम ने उसी घर में महिला को 3 दिनों तक बंधक बनाए रखा और लगातार रेप किया। इस दौरान महिला पर जबरन निकाह और धर्मान्तरण का भी दबाव बनाया गया। महिला के घर वालों को चिंता हुई तो उन्होंने अपने स्तर से तलाश की। थक-हार पर लड़की के परिजनों ने गुमशुदगी की FIR दर्ज करवाई। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए महिला की तलाश शुरू कर दी। कई जगहों की छापेमारी के बाद आखिरकार पुलिस ने पीड़िता को खोज ही निकाला।

पुलिस ने जरूरी कार्रवाई करते हुए लड़की को उसके घर वालों को सौंप दिया। आरोपित सलीम को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक सलीम से पूछताछ की जा रही है। घटना की जानकारी होने के बाद हिन्दू संगठनों ने भी थाने पहुँच कर सलीम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

कोई तोड़फोड़ नहीं हुई, सिर्फ खंभे हटाए हैं: गुजरात के पालीताना में मंदिर विवाद को लेकर महंत ने दी सफाई, वायरल हुई थी ‘हमले’ की खबर

गुजरात के भावनगर जिले अंतर्गत पालीताना में शत्रुंजय पहाड़ी पर लगे बोर्ड और लोहे के खंभे को क्षतिग्रस्त किया गया था। पूरी घटना खंबे में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी। इसके बाद से दो समुदायों, सेठ आनंदजी कल्याणजी ट्रस्ट और नीलकंठ महादेव सेवा समिति के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

इस मामले में गृह विभाग की ओर से हाई लेवल मीटिंग की गई। वहीं, दूसरी ओर समस्त जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक तप गच्चा महासंघ ने पालीताना में रैली निकालकर डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा है।

क्या है पालीताना मंदिर विवाद?

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा विवाद मंदिर के पास लगे सीसीटीवी कैमरे के खंभे को हटाने के बाद शुरू हुआ था। लंबे समय से यहाँ पवित्र पहाड़ी पर शिव मंदिर के लिए आंदोलन हो रहा था। देश भर के महंतों ने इस आंदोलन में भाग लेकर सरकार से हस्तक्षेप की माँग की थी। हालाँकि, इस बीच दावा किया गया कि कुछ बदमाशों ने सूरजकुंड में लगे सीसीटीवी कैमरों के खंभे को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसके बाद जैन समुदाय के लोग रोष में आ गए। दूसरी ओर शिव मंदिर ट्रस्ट ने अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए कहा है कि सेठ आनंदजी कल्याणजी ट्रस्ट ने उनके परिसर में बिजली के पोल ​​लगवा दिए हैं।

अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो पर शिव मंदिर के महंत ने सफाई दी है कि कोई तोड़-फोड़ नहीं हुई, सिर्फ सीसीटीवी कैमरे लगे लोहे के खंभे हटाए गए।

गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने सख्त कार्रवाई का किया वादा

राज्य के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि सरकार ने घटना का संज्ञान लिया है और जाँच शुरू कर दी गई है। संघवी ने कहा है कि उन्होंने मामले को लेकर आला अधिकारियों के साथ बैठक की है। मामले की सख्ती से जाँच करने के आदेश दिए हैं।

इस मामले में श्रीमहासंघ अहमदाबाद के अध्यक्ष महेंद्र शाह का कहना है कि मंदिर के आसपास खनन बंद होना चाहिए। पहले भी इस तरह का कृत्य करके जैन और हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँचाई गई थी। सिर्फ 2-5 लोगों को गिरफ्तार करने से काम नहीं चलेगा, ये साजिश बंद होनी चाहिए। समाज के नेता 10 सूत्री माँगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे।

‘बम बनाते हुए कोई मरता है तो सरकार मुआवजा देती है क्या?’: ज़हरीली शराब से 70+ मौतों पर बोले जदयू नेता, मानवाधिकार आयोग बिहार भेजेगा टीम

बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब बनाने का काम जारी है और उसे पीकर मरने वालों का आँकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबके बीच जहरीली शराब पीकर मरे लोगों को मुआवजे की माँग पर राजनीति तेज हो गई है। जदयू के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने मृतकों की तुलना बम बनाने वालों से की है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार मौत के मामलों की जाँच करेगी।

बिहार में जहरीली शराब पीकर लगातार हो रही मौतों का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने जहरीली शराब से हुई मौतों की जाँच के लिए एक टीम बिहार भेजने का निर्णय लिया है। आयोग ने कहा कि इसके सदस्य की अध्यक्षता वाली एक जाँच टीम बनाई जाएगी।

उधर, JDU नेता उपेंद्र कुशवाहा ने जहरीली शराब पीकर मरने वाले लोगों की तुलना बम बनाने वालों से करते हुए कहा कि बम बनाते वक्त विस्फोट में किसी की मौत हो तो सरकार मुआवज़ा देती है? उन्होंने मृतकों को मुआवजे देने की विपक्ष की माँग को सिरे से खारिज कर दिया।

बता दें कि बिहार में जहरीली शराब पीने से मृतकों की संख्या बढ़ रही है। इसुआपुर से शुरू शुरू हुआ मौत का सिलसिला मशरख, मढ़ौरा, तरैया, अमनौर, बनियापुर तक जा पहुँचा। अब तक 72 लोगों की मौत की बात सामने आई है। वहीं, कई लोगों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि जहरीली शराब पीने के कारण मृतकों के शरीर में फॉलिक एसिड बढ़ गई है, जिसके कारण शरीर कम अंग काम करना बंद कर दे रहे हैं। मौत से पहले सभी मृतकों के ब्लड प्रेशर में लगातार बदलाव भी देखने को मिल रहा है। मरीजों में बेचैनी, उल्टी, पेट दर्द, साँस लेने में परेशानी, आँखों से धुँधला दिखाई देने जैसे कई तरह की समस्याएँ देखने को मिल रही हैं।

उधर लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने कहा कि जहरीली शराब पीने से लगभग 200 मौतें हुई हैं। सरकार बिना पोस्टमार्टम के मृतकों का अंतिम संस्कार करा रही है और मृतकों की संख्या छिपाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि वे राज्यपाल से मिलकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की माँग करेंगे।

मृतकों को लेकर राज्य की नीतीश सरकार की छिछालेदर होने के बाद सारण के SP ने इसुआपुर थाना के अध्यक्ष संजय कुमार राम, चौकीदार और दफदार को निलंबित कर अपने काम की इतिश्री कर ली है। पुलिस ऑपरेशन क्लीन के तहत छापेमारी कर शराब के कारोबार से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी कर रही है। हालाँकि, इसमें बड़ी मछलियाँ पहले भी बचती रही हैं और आशंका है कि इस बार भी बच जाएँगी।

जब विधानसभा में विपक्ष ने जहरीली शराब पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार को घेरना शुरू किया तो वे बिफर उठे थे। कुर्सी और सदन की मर्यादा को तार-तार करते हुए वे विपक्ष पर चिल्लाने लगे थे। उन्होंने कहा था कि जो नकली शराब पीएगा, वो मरेगा ही।

नीतीश कुमार ने राज्य में शराब की तस्करी और अवैध निर्माण को रोकने में लाचार रहने के बावजूद मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने से साफ इनकार कर दिया। दरअसल, मुआवजे की माँग को नकार कर नीतीश कुमार जहरीली शराब मामले में सरकार की लापरवाही को नजरअंदाज करना चाहते हैं।

स्कूल के नाम में ‘महेश’, बच्चों को घुमाया चर्च, करवाया प्रेयर: अभिभावकों के विरोध के बाद माँगी माफ़ी, VHP ने कहा – 700 छात्र-छात्राओं को ले गए थे

राजस्थान के जोधपुर में एक स्कूल के छात्रों को टूर के तौर पर चर्च ले जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस दौरान बच्चों से ईसाई प्रेयर भी करवाया गया। खबर फैलते ही बच्चों के माता-पिता और ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ ने घटना पर नाराजगी जताई है। हालात तनावपूर्ण होने की सूचना पर पुलिस भी पहुँच गई। लोगों के विरोध को देखते हुए शुक्रवार (16 दिसंबर, 2022) को स्कूल के मैनेजमेंट ने माफ़ी माँगी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवादों में घिरे शिक्षण संस्थान का नाम ‘महेश पब्लिक स्कूल’ है। यह जोधपुर के पहला पुलिया नाम की जगह पर स्थित है। इस स्कूल का प्रबंधन बच्चों को जोधपुर के ही सरदारपुरा इलाके में पड़ने वाले चर्च में ले गया था। आरोप है कि इस जगह पर बच्चों से चर्च में होने वाली प्रार्थना भी सामूहिक तौर पर करवाई गई थी। जब इसकी जानकारी कुछ बच्चों के माता-पिता को हुई तब वो स्कूल पहुँच कर विरोध दर्ज करवाने लगे।

बताया जा रहा है कि स्कूल मैनेजमेंट बच्चों के अभिभावकों को शांत करवा ही रहा था कि किसी ने पूरे मामले की सूचना ‘विश्व हिन्दू परिषद’ के कार्यकर्ताओं को दे दी। हिन्दू संगठन के लोग भी विरोध में शामिल हो गए। विरोध करने वालों का कहना था कि बच्चों के अभिभावकों को बिना बताए ऐसा करना उनकी धार्मिक भावनाओं का अपमान है। विरोध में शामिल सभी लोग स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे थे। घटना की सूचना पर पहुँची पुलिस भी नाराज लोगों को समझाने का प्रयास करने लगी।

जिन बच्चों को चर्च ले जाया गया वो क्लास 1 से क्लास 5 के बीच के छात्र हैं। वायरल वीडियो में बच्चों के अभिभावको को कहते सुना गया, “आज ही एक्जाम शुरू हुआ और आज ही चर्च घुमाया जा रहा है। क्या सिर्फ चर्च ही था ले जाने के लिए, मंदिर नहीं?”

VHP नेता महेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि जिन बच्चो को चर्च में घुमा फिर कर प्रार्थना करवाई गई थी, उनकी संख्या 600 से 700 के आस-पास थी। इस बीच हालात अपने खिलाफ देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने अपनी तरफ से बिना शर्त माफ़ी माँग ली। महेश पब्लिक स्कूल ने अपने प्रार्थना पत्र में भविष्य में बिना गार्जियन की अनुमति के बिना ऐसा कभी न करने का संकल्प लिया है। माफ़ी पात्र स्कूल के प्रिंसिपल की तरफ से लिखा गया है।