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मुरब्बा-पटाखा के बाद ‘चिकनकारी’ भी हुआ मुगलों का, 2500 साल पुराने अजंता-चन्द्रकेतुगढ़ को भूले: राजा हर्ष भी कढ़ाई की इस कला के थे शौकीन

भारत हमेशा से फैशन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है, वो अलग बात है कि कुर्ता-धोती को ‘गँवार’ और कोट-पैंट को आधुनिक मान लिया गया। वाराणसी से लेकर नाथद्वारा तक, देश के कोने-कोने में कई ऐसे इलाके हैं जहाँ की चित्रकला, कपड़ों पर काम और कढ़ाई की तकनीक खासी लोकप्रिय है। चिकनकारी का काम इन्हीं में से एक है। ‘चिकनकारी’ का मूल उद्भव उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को माना जाता है। अब इस कला को भी मुगलों का देन बताया जा रहा है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में एक ट्वीट किया, जिसमें उसने चिकनकारी कला का श्रेय इस्लामी आक्रांताओं को दे दिया, मुगलों को। इससे लोग भी खफा नज़र आए, क्योंकि भारत के लिबरल और सेक्युलर गिरोह के बीच ये चलन रहा है कि मुरब्बे से लेकर बिरयानी तक का श्रेय मुगलों को दे दिया जाए। वैसे भी इनका मानना है कि भारत के लोग असभ्य थे और इस्लामी आक्रांताओं ने ही उन्हें ठीक से रहना सिखाया। अपने उन्नत सभ्यता, भव्य इतिहास और समृद्ध संस्कृति के अलावा पूर्वजों की ज्ञान-संपदा पर भी उन्हें विश्वास नहीं।

तो, यहाँ बात हो रही है कढ़ाई की चिकनकारी कला की। ‘चिकनकारी’ कला का श्रेय नवाबों को दिया जाता है, जबकि ऐसा है नहीं। भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण के नाम पर स्थापित लखनऊ को भी ऐसे ही उसकी सांस्कृतिक पहचान से दूर कर के ‘नवाबों का शहर’ बता दिया जाता है। कई अन्य कढ़ाई की कलाओं की तरह ‘चिकनकारी’ भी उद्भव, विकास, बदलाव और गिरावट के कई स्तरों से गुजरी है। जिस तरह की सत्ता और सभ्यता रही, ‘चिकनकारी’ कला को उसी के अनुरूप ढाला गया।

किसी खास समय में सत्ता में कौन लोग काबिज थे, इसे बनाने वाले कलाकार कहाँ के थे, उस समय की सभ्यता में किन चीजों का प्रचलन था और लोगों का रहन-सहन कैसा था – किसी भी कला या कढ़ाई की तकनीक पर इसका असर पड़ता है। ‘चिकनकारी’ हमेशा से बाजार पर आधारित कला रही है। जो इन उत्पादों को बनाते रहे हैं, वो अलग-अलग समुदाय में इसे बचते रहे हैं। ‘चिकनकारी’ का उद्भव कहाँ से हुआ, इसे सटीक तरीके से बताना संभव नहीं है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने ‘चिकनकारी’ कढ़ाई कला के उद्भव का श्रेय मुग़ल शासनकाल को दे दिया

खासकर उस देश में, जो कला के मामले में इतना समृद्ध रहा है कि दक्षिण में तंजावुर के मंदिर और उत्तर में मार्तण्ड सूर्य मंदिर (अब ध्वस्त) के वैभव से इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है। जसलीन धमीजा अपनी पुस्तक ‘Asian Embroidery‘ में बताती हैं कि प्राचीन साहित्यों के अध्ययन और उनके अर्थ निकालने से पता चलता है कि ईसा से 300 वर्ष पूर्व भी ‘चिकनकारी’ कढ़ाई कला का अस्तित्व था। इस कला का नमूना अजंता की पेंटिंग्स में भी मिलता है।

सोचिए, महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित अजंता की गुफाओं के निर्माण का इतिहास 480 ईसापूर्व तक जाता है। राजा हर्षवर्धन भी ऐसे कपड़ों के शौकीन थे, जिन पर पैटर्न बनाया होता था और कलाकृतियाँ की होती थीं। उन्हें मलमल (Muslin/हलके वजन वाला कॉटन) के कपड़े पसंद थे। दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने भी माना है कि ऐसे कढ़ाई वाले सफ़ेद कपड़े हर्षवर्धन को पसंद थे, लेकिन वो सफ़ेद रंग के होते थे और उनमें बहुत खास कलाकारी नहीं की जाती थीं।

राजा हर्षवर्धन का शासनकाल सातवीं शताब्दी के पहले 50 वर्षों का रहा है। उस समय इस्लाम की स्थापना ही हुई थी और तलवार के बल पर वो फैलने की कोशिश में था। लेकिन, इतना साफ़ है कि एक अच्छी चिकन कलाकारी भारत में सातवीं शताब्दी में अस्तित्व में थी। सफ़ेद फूलों वाले मलमल के कपड़ों पर चिकनकारी के कई प्राचीन सबूत आज भी मौजूद है। हालाँकि, चिकनकारी कला के अधिकतर सबूत 19वीं शताब्दी के हैं।

हो सकता है कि नवाबों के समय में ये ज़्यादा फ्ला-फूला हो, लेकिन इससे ये नहीं मान लिया जा सकता कि उनके समय में ही इसका उद्भव हुआ और इस्लामी आक्रांताओं ने इसका अविष्कार किया। मुगलों के दरबारियों की तस्वीरों में वो चिकनकारी कला वाले कपड़े पहने हुए ज़रूर दिखते हैं। ‘चिकन’ शब्द कहाँ से आया, इस संबंध में भी कुछ खास आकलन नहीं हो सका है। बस अंदाज़ा लगाया जा सका है कि ये बंगाली भी हो सकता है, जहाँ ‘चिकन’ का मतलब ‘बहुत उत्कृष्ट चीज’ होता है।

वैमपैंठी इतिहाकारों ने मुगलों और खासकर जहाँगीर की बीवी नूरजहाँ को ‘चिकनकारी’ कढ़ाई कला का श्रेय दे डाला। पर्सिया में ‘चिकनकारी’ का मूल खोजने वालों को पता होना चाहिए कि सिलाई की वहाँ की तकनीक और भारत की तकनीक में खासा अंतर रहा है। डोरे से सीने की तकनीक में भी अंतर रहता है। नूरजहाँ ने जहाँगीर के लिए टोपी सिली – इस कहानी का एक वर्जन लखनऊ में भी मौजूद है, बस किरदार अलग हैं।

कई विशेषज्ञ जमदानी तकनीक को ‘चिकनकारी’ से जोड़ कर देखते हुए ये अंदाज़ा भी लगाते हैं कि बंगाल में ही इसका जन्म हुआ होगा। मुस्लिमों द्वारा कहा जाता है कि लखनऊ में नवाब नजीरुद्दीन हैदर के काल में 19वीं सदी में ‘चिकनकारी’ का काम ज्यादा लोकप्रिय हुआ। इसमें सच्चाई हो सकती है, लेकिन ये भी सच ये कि ये कला पहले से भारत में मौजूद थी। ‘Indian Art At Delhi, 1903’ में जॉर्ज वाट ने स्पष्ट लिखा है कि ‘चिकनकारी’ पूरी तरह भारत में जन्मी सिलाई की तकनीक पर आधारित है।

पश्चिम बंगाल में एक 2500 वर्ष पुराना ऐतिहासिक स्थल है चन्द्रकेतुगढ़, जो कोलकाता से 35 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बिद्याधरी नदी के किनारे स्थित है। नॉर्थ 24 परगनास जिले में स्थित इस स्थल पर एक महिला की टेराकोटा की प्राचीन मूर्ति भी है, जिसके वस्त्रों पर ‘चिकनकारी’ की तरह कढ़ाई की गई है। विशेषज्ञों का ऐसा ही कहना है। 300 ईसापूर्व में भारत में आए मेगस्थनीज ने भी ‘चिकनकारी’ जैसी कढ़ाई कला के उस समय भारत में मौजूद होने की बात कही है।

रियाज के साथ लिव इन में थी उरवी वैष्णव, नवी मुंबई में नहर के पास मिली लाश: परिजन बोले- हत्या कर फेंक दिया

महाराष्ट्र के नवी मुंबई में एक लड़की की लाश नहर के पास से मिली है। मृतका की पहचान उरवी वैष्णव के तौर पर हुई है। वह मूल रूप से राजस्थान के बूंदी जिले की रहने वाली थी। यहाँ एक होटल में वेटर थी। उसकी हत्या का आरोप रियाज खान पर लगा है। बताया जा रहा है कि उरवी उसके साथ लिव इन में थी। शव शनिवार (17 दिसम्बर 2022) को बरामद हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 27 वर्षीया उरवी करीब 7 साल पहले राजस्थान से मुंबई आई थी। यहाँ उसने कोपरखेरण इलाके के एक होटल में वेटर की नौकरी कर ली। उसके साथ उसके 2 भाई पारस और आरुष भी रहते थे। इसी दौरान उसका रियाज खान से संपर्क हुआ। दोस्ती बाद में प्यार में बदल गई। कुछ समय बाद वह रियाज के साथ लिव इन में रहने लगी।

पारस के मुताबिक उरवी के पास कार थी। इसी कार में रियाज खान भी घूमता था। हर दिन की तरह 13 दिसंबर 2022 को उरवी घर से होटल के लिए निकली। वह हर दिन शाम 5 बजे वो अपने भाई पारस को कॉल किया करती थी, लेकिन उस दिन कॉल नहीं आई। अपनी बहन का कॉल नहीं आने से परेशान पारस और आरुष ने रियाज खान को कॉल किया। रियाज ने कोई जवाब नहीं दिया और फोन काट दिया।

उरवी के भाई आरुष का कहना है कि 13 दिसंबर को रियाज ही उसकी बहन को कार से होटल छोड़ने गया था। आरोप है कि दोपहर लगभग डेढ़ बजे रियाज उरवी की कार से अकेले वापस आया। उसने सिर में दर्द बताकर कॉफी माँगी और फिर उरवी को वापस लाने की बात कह घर से निकल गया। देर रात तक उरवी घर नहीं लौटी। उसका फोन भी स्विच ऑफ बता रहा था। अगले दिन 14 दिसम्बर को भाइयों ने नेरुल थाने में उसको गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। इस दौरान रियाज का कुछ भी अता-पता नहीं चला। 3 दिनों तक दोनों भाइयों ने उरवी को अपने स्तर से बहुत खोजा पर कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

17 दिसम्बर को पनवेल थाने से दोनों भाइयों को कॉल आई। कॉल पर उन्हें एक लड़की के नहर किनारे मिले शव की पहचान के लिए बुलाया गया था। दोनों भाई थाने गए तो उन्होंने उरवी के शव को पहचान लिया। बाद में इसकी सूचना उरवी के राजस्थान स्थित परिजनों को दे दी गई। उन सभी ने उरवी का शव लिया और 19 दिसम्बर 2022 को राजस्थान के बूँदी में उरवी का अंतिम संस्कार किया। उरवी के घर वाले रियाज खान पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। नवी मुंबई पुलिस मामले की जाँच कर रही है। अभी तक रियाज की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

यूट्यूब पर ‘डिस्को वाली रात’, इंस्टाग्राम पर अकाउंट बंद: रीवा अरोड़ा की माँ ने NCPCR से माँगी माफी, बार वाले रील पर हुआ था विवाद

चाइल्ड एक्ट्रेस रीवा अरोड़ा (Riva Arora) का इंस्टाग्राम अकाउंट प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये अकाउंट इंस्टाग्राम (Instagram) से कब हटाया गया। हालाँकि, फेसबुक और यूट्यूब जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उनके अकाउंट एक्टिव हैं।

रीवा अरोड़ा का इंस्टाग्राम अकाउंट हटाया गया। (फोटो साभार: इंस्टाग्राम)

दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने अभिनेता करण कुंद्रा के साथ रीवा के विवादास्पद इंस्टाग्राम रील का संज्ञान लिया था, जिसमें एक शॉट बार में लिया गया था। हंगामे के बाद इस रील को हटा दिया गया है। वहीं, रीवा अरोड़ा की माँ निशा अरोड़ा ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखकर आयोग से माफी माँगी है।

निशा अरोड़ा ने एनसीपीसीआर से माँगी माफी (फोटो साभार: इंस्टाग्राम)

18 नवंबर 2022 को एक इंस्टाग्राम पोस्ट में रीवा अरोड़ा की माँ ने लिखा, “मैं, निशा अरोड़ा, अपनी बेटी रीवा अरोड़ा के अकाउंट के लिए बनाए गए वीडियो के लिए माफी माँगती हूँ, जहाँ मैंने अल्कोहल सेटअप का इस्तेमाल किया। इससे समाज में गलत मैसेज गया। मैं दिल से मानती हूँ कि एक कलाकार और एक रोल मॉडल होने के नाते, हमें समाज में एक अच्छी इमेज पेश करनी चाहिए। मैं सभी बाल कलाकारों और उनके माता-पिता से अनुरोध करना चाहती हूँ कि वे इस तरह के वीडियो बनाने से बचें। मैं भविष्य में इस बात का ध्यान रखूँगी। मैंने इसके लिए एनसीपीसीआर (NCPCR) से लिखित में माफी भी माँगी है और उन्हें इस मामले से संबंधित सभी स्पष्टीकरण भी दिए हैं।”

इंस्टाग्राम रील विवाद

19 अक्टूबर 2022 को चाइल्ड एक्ट्रेस रीवा अरोड़ा और 38 वर्षीय अभिनेता करण कुंद्रा की इंस्टाग्राम रील सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। रील में कुंद्रा ने रीवा के ब्वॉयफ्रेंड का रोल प्ले किया था, जो पहले से ही किसी और के साथ रिलेशनशिप में थी। रील में यह दिखाया गया था कि अभिनेत्री का दो पुरुषों के साथ अफेयर है। अभिनेता उम्र में रीवा से बहुत बड़े थे। रील के एक दृश्य में दिखाया गया था कि 12 साल की लड़की बोल्ड ड्रेस में क्रॉस-लेग करके बैठी हुई है। वह रील में एक व्यस्क महिला की तरह व्यवहार करती हुई दिखाई देती है। इसको लेकर रीवा को उसके इंस्टाग्राम पोस्ट पर लगातार भद्दे कमेंट्स किए जा रहे थे। वहीं कुछ पुरुषों ने उन्हें कमेंट में कहा कि वे कैसे उनकी तस्वीरों और वीडियो को देखकर मास्टरबेशन कर रहे हैं।

रीवा अरोड़ा का इंस्टाग्राम हटाने से पहले ली गई तस्वीर। (फोटो साभार: रीवा अरोड़ा का इंस्टाग्राम)

रीवा की माँ बचाव में उतरीं

बाद में 23 अक्टूबर 2022 को रीवा की माँ ने अपनी बेटी का बचाव करने के लिए इंस्टाग्राम का सहारा लिया। उन्होंने अपनी बेटी की सुरक्षा पर बोलने की बजाए इंस्टाग्राम स्टोरी में रीवा की उम्र का खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि वह 12 साल की नहीं है। उनकी बेटी अभी 10वीं क्लास में है। उन्होंने इंडस्ट्री में 13 से अधिक वर्षों तक काम किया है और अपनी मेहनत के दम पर सब कुछ हासिल किया है। ध्यान दें कि अगर रीवा अरोड़ा 10वीं कक्षा में हैं, तो भी उनकी उम्र 14-15 साल होगी और वह अभी भी नाबालिग हैं। ऐसे में वह Hyper Sexualisation को समझने के लिए अभी भी बहुत छोटी हैं।

रीवा की माँ की इंस्टाग्राम स्टोरी

रीवा अरोड़ा का नया गाना ‘डिस्को वाली रात’

यह विवाद अभी थमा भी नहीं था कि 15 दिसंबर को यूट्यूब पर रीवा अरोड़ा का नया गाना ‘डिस्को वाली रात’ रिलीज किया गया। इसमें रीवा डिस्को-बार सेटअप में ‘डिस्को वाली रात’ गाने पर डांस कर रही हैं।

साक्षी होल्कर द्वारा गाए गए इस गाने में 22 वर्षीय अभिनेता अभिषेक कुमार भी हैं। इसे अपलोड करने वाले चैनल ने गाने पर कमेंट सेक्शन को बंद कर दिया है। इस गाने को अभी तक 10 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं।

तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा पर लगाया रोक, लेकिन लिबरल कहते हैं – उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया: UN ने कहा – मुल्क पर पड़ेगा विनाशकारी प्रभाव

तालिबान (Taliban) ने अफगानिस्तान (Afghanistan) की सत्ता पर काबिज होने के बाद से महिलाओं की आजादी पर रोक लगाने वाले फैसले लिए हैं। महिलाओं के आने-जाने, सार्वजनिक रूप से चेहरा दिखाने तक पर पाबंदी लगाने वाले तालिबानी शासकों ने अब अपने ताजा फैसले में महिलाओं की शिक्षा पर रोक लगा दी है। इसको लेकर उच्च शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को फरमान जारी किया है।

उच्च शिक्षा मंत्री नेदा मोहम्मद नदीम (Neda Mohammad Nadeem) ने कहा, “आप सभी को सूचित किया जाता ​है कि अगली सूचना तक महिलाओं को देश के किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसे तुरंत लागू करें।” याद कीजिए, भारत के लिबरल गिरोह ने तालिबान की प्रशंसा करने की कोई कसर नहीं छोड़ी थी और उसने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिया था तो ये लोग उस पर लट्टू हो चले थे।

दूसरी बार अफगानिस्तान की सत्ता में वाले तालिबान ने खुद को बदलने को वादा किया था, लेकिन उसने अपने तालिबानी फैसलों से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बदलने वाला नहीं है। उसके आदेश को संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने भी परेशान करने वाला इस कदम बताया। उन्होंने कहा, “यह कल्पना करना मुश्किल है कि महिलाओं की शिक्षा और उनकी भागीदारी के बिना कोई देश कैसे विकास कर सकता है। उन सभी चुनौतियों से कैसे निपट सकता है, जो उसके सामने हैं।”

वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी तालिबान के महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कहना है, “शिक्षा पर बैन लगाना न केवल महिलाओं और लड़कियों के समान अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि इससे देश के भविष्य पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।”

अफगानिस्तान में एक 52 वर्षीय लेक्चरर ने कहा, “मेरी एक छात्रा तालिबान के इस फैसले से बेहद परेशान है। मुझे नहीं पता कि मैं उसे कैसे दिलासा दूँ। उनमें से एक छात्रा काबुल चली गई है। उसने कई कठिनाइयों को पार करते हुए यहाँ के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था। लेकिन आज उसकी सारी उम्मीदें और सपने चकनाचूर हो गए हैं।”

इससे पहले जब 1990 के दशक के अंत में तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था, उस वक्त ‘मीना विश्वविद्यालय’ में पढ़ाई करती थीं। उन्होंने बताया, “मैं अपनी छात्रा के डर को अच्छी तरह से समझ सकती हूँ, क्योंकि पिछली बार जब वे सत्ता में आए थे, तब मुझे भी कई सालों तक अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। जिस दिन तालिबान ने राजधानी काबुल पर कब्जा किया था, मुझे उसी दिन पता चल गया था कि अब वे विश्वविद्यालयों में लड़कियों के प्रवेश कर प्रतिबंध लगाएँगे।”

उन्होंने आगे कहा, “भले ही अब वे स्मार्टफोन रखते हों, सोशल मीडिया पर उनका अकाउंट हो और बड़ी कारों में चलते हो, लेकिन ये अभी भी वही तालिबान है, जिसने मुझे शिक्षा से वंचित रखा और अब ये मेरे छात्रों का भी भविष्य खराब कर रहे हैं।”

दरअसल, अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से ही महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे। ऐसे में तालिबान का महिलाओं की शिक्षा को लेकर लिया गया यह फैसला चौंकाने वाला नहीं है, क्योंकि अफगानिस्तान में अपने शुरुआती शासन में भी उसने छठी कक्षा के बाद से लड़कियों की स्कूली शिक्षा पर ही रोक लगा दी थी।

गौरतलब है कि नवंबर 2022 में तालिबान की बर्बरता का एक वीडियो भी सामने आया था। यह पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में बदख्शाँ विश्वविद्यालय के परिसर का था। इसमें तालिबानी शासकों ने छात्राओं को कॉलेज परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया था। ‘द इंडिपेंडेंट’ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस अधिकारी को छात्रों पर डंडों का इस्तेमाल करते हुए देखा गया था, वह तालिबान सरकार के ‘मोरल मंत्रालय’ से संबंधित है। वायरल वीडियो में तालिबान का एक अधिकारी छात्राओं को डंडों से दौड़ा-दौड़ा कर पीटते हुए दिख रहा था, क्योंकि वे अपने शिक्षा के अधिकार को लेकर विरोध कर रही थीं।

जहाँ जहरीली शराब से मरे 70+, वहीं JDU नेता के घर में मिला दारू का भंडार: राजद MLC ने बताया- तेजस्वी यादव भी पीते हैं, नीतीश ने कहा था- जो पिएगा वो मरेगा

बिहार के छपरा में जहरीली शराब से 70 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। अब जिले में जदयू नेता के घर से भारी मात्रा में शराब बरामद की गई है। जदयू नेता कामेश्वर सिंह के मकान से अंग्रेजी और देसी शराब जब्त की गई। इसके साथ ही पुलिस ने एक महिला को हिरासत में भी लिया है।

छपरा में ज़हरीली शराब से हुई मौत के बाद से लगातार छापेमारी की जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक गुप्त सूचना के आधार पर छपरा के मढ़ौरा नगर इलाके में स्थित जदयू नेता के मकान पर छापा मारा गया। यह मकान जदयू नेता कामेश्वर सिंह का है। कामेश्वर सिंह जेडीयू राज्य परिषद के सदस्य हैं। इस मकान में किराएदार के रूप में सरोज महतो और उसकी पत्नी रहती हैं। छापेमारी के बाद पुलिस ने घर की एक महिला को हिरासत में ले लिया है।

बता दें कि कामेश्वर सिंह मशरक के रहने वाले हैं। वही मशरक, जहाँ ज़हरीली शराब से सबसे ज्यादा मौत हुई है। हालाँकि शराब मिलने के बाद जदयू नेता कामेश्वर सिंह ने कहा है कि उन्हें और पार्टी को बदनाम करने की साज़िश हो रही है।

जदयू नेता के घर से बरामद शराब (फोटो साभार: एबीपी न्यूज़)

दूसरी तरफ राजद के विधान पार्षद रामबली सिंह पर हुए एक स्टिंग ऑपरेशन ने बिहार की राजनीति को झकजोर कर रख दिया है। इस स्टिंग में राजद नेता रामबली सिंह ने कहा है कि बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव खुद शराब पीते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के आधे से ज्यादा मंत्री- विधायक शराब पीते हैं और तेजस्वी भी उनमें शामिल हैं। बिहार भाजपा के ट्विटर हैंडल से भी वीडियो शेयर कर महागठबंधन सरकार पर हमला किया गया है।

एबीपी न्यूज़ की तरफ से किए गए स्टिंग ऑपरेशन में राजद एमएलसी रामबली सिंह कह रहे हैं कि शराबबंदी पर मुख्यमंत्री किसी की सुनना नहीं चाहते हैं और उनकी अपनी जिद है। इसमें वो कहते दिख रहे हैं कि सभी लोग महसूस करते हैं कि शराब नीति की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि शराब नीति कामयाब नहीं है इससे गरीबों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, “शराबबंदी के बावजूद शराब मिल रहा है। तेजस्वी भी नहीं बोल पाते हैं नीतीश जी के सामने। तेजस्वी खुद दारू पीते हैं तो वो क्यों नहीं चाहेंगे कि दारू मिलनी शुरू हो।”

स्टिंग कर रहे रिपोर्टर ने तेजस्वी का नाम सुनने के बाद दोबारा पूछा, “पीते हैं तेजस्वी जी?” इस पर रामबली सिंह ने जवाब दिया – “आधे से ज्यादा मंत्री और विधायक माननीय पीते हैं, आधे से ज्यादा ऑफिसर शराब पीते हैं। बंदी तो यहाँ दिखाने के लिए है। रात में जाकर पता कीजिए कितने ऑफिसरों के यहाँ दारू चल रहा है।”

उधर ‘राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC)’ की टीम छपरा में ज़हरीली शराब से मारे गए लोगों की जाँच के लिए बिहार पहुँच गई है। टीम में 10 लोग शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छपरा सदर अस्पताल पहुँच कर जाँच टीम ने मरीजों और मृतकों की संख्या और पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी हासिल की। NHRC टीम का बिहार आना सत्ता पक्ष के लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। लोकसभा में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने NHRC की टीम को बिहार भेजने पर विरोध किया था।

जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भी पूछा था कि भाजपा शासित राज्यों में घटी घटनाओं की जाँच के लिए कोई टीम क्यों नहीं जाती? इस पर भाजपा ने भी सवाल पूछा है कि बिहार सरकार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जाँच से डर क्यों रही है?

‘भारत जोड़ो यात्रा’ से कोरोना फैलने का ख़तरा! केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का राहुल गाँधी-अशोक गहलोत को पत्र – कोविड दिशानिर्देशों का पालन हो, या रद्द करें यात्रा

ठंड बढ़ते हीं दुनिया भर में कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं। चीन में तो कोरोना की वजह से स्थिति भयावह हो गई है। ऐसे में भारत सरकार ने भी अब एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को पत्र लिखा है और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करवाने के लिए कहा है।

दरअसल, कोरोना मामलों में तेजी की आशंका को देखते हुए राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर सवाल उठाए जा रहे थे। राहुल गाँधी की यात्रा फ़िलहाल राजस्थान में है और वहाँ के कुछ सांसदों ने स्वास्थ्य मंत्री को यात्रा में कोरोना फैलने की आशंका को लेकर पत्र लिखा था। इन्हीं सांसदों को संदर्भित करते हुए मनसुख मांडविया ने राहुल गाँधी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा है।

पत्र में मनसुख मांडविया ने कहा है की राजस्थान में चल रही ‘भारत जोड़ो यात्रा में कोरोना सम्बन्धी सतर्कता दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करवाया जाना चाहिए। रैली में मास्क और सेनीटाइजर का इस्तेमाल सुनिश्चित कराया जाए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने साथ ही यह भी आग्रह किया है कि जिन लोगों ने कोरोना वैक्सीन की खुराक ली है, उन्हें ही रैली में शामिल होने की अनुमति दी जाए। ये भी सलाह दी गई है कि रैली के बाद लोगों को आइसोलेट किया जाए।

उन्होंने पत्र में आगे कहा कि अगर इन कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन करवाना संभव नहीं है तो सार्वजनिक आपात स्थिति को ध्यान में रखते देश को कोरोना महामारी से बचाने के लिए देशहित में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को स्थगित कर देना चाहिए। दरअसल, राजस्थान के भाजपा सांसदों पीपी चौधरी, निहाल चंद और देवजी पटेल ने राहुल गाँधी की यात्रा को लेकर आपत्ति जताई थी। उन्होंने यात्रा को लेकर 20 दिसंबर, 2022 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का पत्र लिखा था। सांसदों ने राजस्थान में चल रही ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से कोरोना फैलने का आरोप लगाया था।

वहीं कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने स्वास्थ्य मंत्री के पत्र को पूरी तरह से राजनीतिक बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा से मोदी सरकार बौखलाई हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ध्यान भटकाने के लिए भाजपा इस तरह के सवाल उठा रही है। उन्होंने पूछा, “क्या गुजरात चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मास्क लगा कर और सारे प्रोटोकॉल्स का पालन करते हुए घर-घर गए थे?”

‘शादी में खाने की प्लेट छूने पर दलित को ब्राह्मणों ने पीटा’: जिसे ‘छूआछूत’ बता मीडिया ने परोसा, उस झगड़े की जड़ में कोटेदारी

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज थाना क्षेत्र के नौबस्ता गाँव में हुए विवाद को मुख्यधारा की मीडिया ने ‘छूआछूत’ का मामला बताकर पेश किया। गाँव में 9 दिसंबर 2022 को एक शादी हुई थी। रेनू कुमारी ने गाँव के ही 7 लोगों पर अपने 19 वर्षीय भाई लल्ला के साथ मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाया था। रेनू दलित है, जबकि आरोपितों में शामिल संदीप, अमरेश, श्रवण, सौरभ, अजीत, विमल और अशोक ब्राह्मण। लेकिन जब ऑपइंडिया ने इस घटना को लेकर ग्रामीणों से बातचीत की तो पता चला कि इसके पीछे कोटेदारी का पुराना विवाद है। पुलिसिया जाँच में भी अब तक इस घटना में जातीय एंगल की पुष्टि नहीं हुई है।

दलित रेनू की शिकायत

पुलिस को 10 दिसंबर को दी गई तहरीर में रेनू ने आरोप लगया है कि गाँव में हुई एक शादी के दौरान खाना छूने पर सवर्ण समुदाय के 7 लोगों ने उसके भाई की पिटाई की। पिटाई के बाद आरोपित उसके घर आए और जातिसूचक शब्द बोलते हुए तोड़फोड़ की। परिवार और रिश्तेदारों को भी पीटा। पुलिस ने इस शिकायत पर IPC की धारा 147, 323, 427, 504, 506, 336 और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। जाँच चल रही है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

मीडिया ने क्या बताया

12 दिसंबर 2022 को इंडियन एक्सप्रेस और लल्लनटॉप ने इस मामले लगभग एक जैसी खबर प्रकाशित की। घटना में किसी की गिरफ्तारी नहीं होने का प्रमुखता से जिक्र किया। जबकि इस केस में नामजद 6 आरोपितों ने शांति भंग की धारा IPC 151 में अपनी जमानत मजिस्ट्रेट से करवाई थी। इसी मामले में हिंदुस्तान ने 4 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। सभी खबरों में रेनू के हवाले से FIR में दर्ज बातें दोहराई गई हैं। रिपोर्ट में वजीरगंज थाने के SHO का वर्जन भी छापा गया, जिसमें जाँच जारी होने की बात कही गई थी। जबकि उत्तर प्रदेश पुलिस की नियमावली के मुताबिक SC/ST एक्ट से जुड़े मामलों की जाँच का अधिकार SHO को नहीं है। इन केसों की जाँच DSP रैंक के अधिकारी करते हैं।

मीडिया में मामले की रिपोर्टिंग

इंडियन एक्सप्रेस और लल्लनटॉप की ही लीक पर दैनिक भास्कर, अमर उजाला, TV9 हिंदी, आज तक और ETV भी चले। उन्होंने भी इस पूरे मामले को छूआछूत और जातीय एंगल से ही परोसा।

खाने को लेकर विवाद

ऑपइंडिया ने इस घटना पर गोंडा जिले के डिप्टी SP तरबगंज संसार सिंह राठी से बात की। DSP राठी ही इस केस के विवेचक हैं। उन्होंने बताया कि इस मालमे में छुआछूत जैसा कोई भी एंगल नहीं है। विवाद खाने को लेकर हुआ था। राठी ने बताया कि उनके सर्किल क्षेत्र में अक्सर SC/ST के मामले दर्ज होते हैं, जिस पर गहनता से जाँच की जाती है।इस मामले में अभी भी जाँच जारी है और अंतिम निष्कर्ष के तौर पर चार्जशीट नहीं लगाई गई है। उन्होंने इस घटना के पीछे गाँव में कोटेदारी का पुराना विवाद होने का भी जिक्र किया।

कोटेदार था रेनू का भाई

9 दिसंबर 2022 को हुई घटना के आरोपितों में से एक संदीप पांडेय हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि जिस रेनू ने शिकायत की है, उसका भाई देवीशरण गाँव का कोटेदार था। सरकारी अधिकारियों ने जाँच में उसका घोटाला पकड़ा था जिसके बाद उसे जेल भी जाना पड़ा। वह हाल में ही जमानत पर छूटा है। बकौल संदीप उन पर आरोप लगाने वाली लड़की को लगता है कि उसके भाई के घोटाले की सूचना प्रशासन तक उन लोगों ने पहुँचाई थी। इसका बदला लेने की नीयत से उसने मेरे सहित 7 लोगों पर केस दर्ज करवाया है।

कोटेदारी का विवाद

बताते चलें कि गाँव में सरकारी योजनाओं के तहत खाद्य सामग्रियों की बिक्री और बँटवारा करने वाले को कोटेदार कहते हैं। कोटेदार देवीशरण के खिलाफ 25 अगस्त 2021 को गोंडा के जिला पूर्ति अधिकारी अतुल श्रीवास्तव ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत FIR दर्ज करवाई थी। यह FIR थाना वजीरगंज में दर्ज हुई थी। ऑपइंडिया के पास इस FIR की कॉपी भी मौजूद है।

FIR के बाद SDM तरबगंज ने देवीशरण का कोटा 13 अक्टूबर 2021 को निरस्त कर दिया था। देवीशरण ने इस आदेश को देवीपाटन मंडल के कमिश्नर के यहाँ चुनौती दी थी। एक लम्बी सुनवाई के बाद कमिश्नर IAS राकेश चंद्र शर्मा ने 21 सितम्बर 2022 को SDM के आदेश को सही बताते हुए देवीशरण के कोटेदारी को निरस्त करने के निर्णय पर अपनी भी मुहर लगा दी थी। ऑपइंडिया के पास कमिश्नर के आदेश की कॉपी मौजूद है। इस आदेश में कार्रवाई के गवाह के तौर पर दिवाकर पांडेय का नाम दर्ज है। संदीप पांडेय की माने तो दिवाकर उनके ही परिवार से हैं।

संदीप ने बताया कि देवीशरण से कोटेदारी लेकर गाँव की ही आरती पांडेय को मिला है। आरती पांडेय भी उनके परिवार से ही हैं। बताया जा रहा है कि कोटेदारी चलाने में आरती की मदद अमरेश पांडेय करते हैं। 9 दिसंबर की घटना में जो आरोपित हैं उनमें से एक अमरेश भी हैं।

खाने पर हुई थी बहस

संदीप पांडेय ने बताया कि रेनू के जिस भाई के साथ मारपीट की बात कही जा रही है, वह सबके खाने में चम्मच के बजाए सीधे हाथ डाल कर खाना निकाल रहा था। इससे रोके जाने पर उनलोगों पर झूठा केस दर्ज करवा दिया। मारपीट और घर पर हमले के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने दावा किया कि पुराने विवाद के कारण केस किया गया है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट में इस मामले को लेकर ग्राम प्रधान के यहाँ पंचायत होने और कथित पीड़ित दलित परिवार पर आरोपितों द्वारा हमले का जिक्र है। संदीप का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ था। FIR में जिनके नाम हैं उन्होंने चुनाव में वर्तमान प्रधान का सहयोग नहीं किया था। इसके कारण प्रधान उनका विरोध कर रहा।

आरोपितों की गिरफ्तारी न होने के मीडिया रिपोर्ट्स को संदीप पांडेय ने भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि अब तक 6 लोग IPC 151 (शांतिभंग) के मामले में जमानत करवा चुके हैं और SC/ST केस में जाँच की जा रही है। मामले के अन्य आरोपित अजीत मिश्रा ने ऑपइंडिया को बताया कि वे गाँव की राजनैतिक रंजिश के शिकार हैं।

नौबस्ता से सटे रामपुर टेंगराहा के बजरंगी दलित ही है। वे 9 दिसंबर की घटना का चश्मदीद होने का दावा करते हैं। उन्होंने ऑपइंडिया से बातचीत में दावा किया कि खाना हाथ से नहीं छूने की गुजारिश संदीप पांडेय ने की थी। इसके बाद शिकायतकर्ता का परिवार लड़ने के लिए वहाँ जमा हो गया था।

जिस हिन्दू महिला के साथ लिव-इन में रहता था शाहरुख़, भाई साहिल संग मिल कर उसकी ही नाबालिग बेटी का किया यौन शोषण: कपड़े उतार कर खड़ा कर देता था

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक नाबालिग हिन्दू लड़की ने अपनी माँ के लिव इन पार्टनर और उसके भाई पर अपने साथ छेड़खानी का आरोप लगाया है। इन हरकतों से तंग हो कर बच्ची 8 दिसंबर, 2022 अपनी दादी के घर आ गई है। आरोपितों के नाम शाहरुख़ और साहिल हैं। पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। आरोपितों की हरकतों को नजरअंदाज करने के आरोप में लड़की की माँ को भी नोटिस जारी हो सकती है।

‘दैनिक भास्कर’ के मुताबिक, जिस लड़की ने शाहरुख़ और साहिल पर आरोप लगाया है उसकी माँ 2008 से अपने पति से अलग रह रही थी। उसकी 2 बेटियाँ हैं। महिला का आरोप है कि उसके पति ने दूसरी औरत से शादी कर ली है। लगभग 2 साल पहले शाहरुख़ नाम का व्यक्ति महिला के घर में रंगाई-पुताई का काम करने आया था। इन दौरान उसने महिला का मोबाइल नंबर लिया। दोनों में काफी समय तक बातें हुईं। बाद में महिला अपनी दोनों बेटियों के साथ शाहरुख़ के साथ अलग कमरा ले कर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी।

शाहरुख़ के साथ रहने के दौरान दोनों बेटियाँ अपनी नानी के घर आती-जाती थीं। बड़ी बेटी की उम्र 14 साल है। आरोप है कि एक दिन जब उसकी छोटी बहन नानी के घर गई थी, तब शाहरुख़ ने अकेला पा कर पीड़िता के साथ अश्लील हरकतें की। इसके बाद शाहरुख़ का मन बढ़ गया और उसने अपनी हरकतों में इजाफा कर दिया। हालात यहाँ तक बिगड़ गए कि वो पीड़िता को बिना कपड़ों के खड़े रहने पर मजबूर करने लगा। इस दौरान वो लड़की को घूरता रहता था।

कुछ दिनों के बाद शाहरुख़ के भाई साहिल को इस पूरे मामले की जानकारी हुई। साहिल अपने भाई शाहरुख़ को समझाने के बजाए उसकी हरकतों में शामिल हो गया। वो आए दिन लड़की के घर आने लगा। इस दौरान वो भी पीड़िता से अश्लील हरकतें करता रहा। जब लड़की उनकी हरकतों का विरोध करती तब उसको जान से मार डालने की धमकी दी जाती थी। साथ ही दोनों आरोपितों द्वारा किसी को न बताने का भी दबाव बनाया जाता था। पीड़िता के मुताबिक जब शाहरुख़ और साहिल की हरकतों ने हद पार कर दी, तब वह अपनी दादी के घर चली आई।

लड़की ने दादी से कहा कि वो दुबारा अपनी माँ के पास नहीं जाना चाहती। दादी को शक हुआ तो उन्होंने वजह पूछी। 17 दिसंबर, 2022 को पीड़िता ने शाहरुख और साहिल की हरकतों और आए दिन गलत टच किए जाने आदि के बारे में खुल कर अपनी दादी को बता दिया। लड़की ने बताया कि शाहरुख़ के साथ रहते हुए उसकी माँ इस्लाम कबूल कर चुकी हैं। आरोप है कि लड़की की माँ और शाहरुख़ मिल कर पीड़िता को भी मुस्लिम बनाना चाह रहे थे जिस से मना करने पर उसे और ज्यादा प्रताड़ित किया जाने लगा।

नाबालिग बच्ची की पीड़ा सुन कर उसकी दादी ने पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने शनिवार (17 दिसंबर, 2022) को शाहरुख़ और साहिल पर छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। आरोप है कि थाने में प्रियंका नाम की एक महिला पुलिसकर्मी ने मंगलवार (20 दिसंबर, 2022) को लड़की को अपनी इज्जत का हवाला दे कर चुप रहने की नसीहत दी। बाद में पीड़िता एक महिला वकील के साथ कोर्ट में बयान के लिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुई। बयान के बाद कोर्ट ने बच्ची की माँ द्वारा आरोपितों को न रोकने को भी संज्ञान में लिया। कहा जा रहा है कि जल्द ही लड़की की माँ को भी आरोपित बनाया जा सकता है। वहीं शाहरुख़ और साहिल पर भी धाराएँ बढ़ाई जा सकती हैं।

‘अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने लिया ₹100 करोड़ का घूस’: कोर्ट में ED का खुलासा – दारू घोटाले से दिल्ली को ₹2873 करोड़ का नुकसान

दिल्ली में शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने अदालत के समक्ष पेश आरोप-पत्र में कहा है कि दक्षिण भारत के कुछ लोगों ने दिल्ली की सत्ताधारी ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ सरकार को शराब कारोबार में अनुचित लाभ लेने के उद्देश्य से 100 करोड़ रुपए की रिश्वत दी। साथ ही जाँच एजेंसी ने कहा कि दिल्ली सरकार की आबकारी नीति की वजह से सरकारी खजाने को कुल 2873 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

ईडी ने आरोप-पत्र में कहा है की कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी और विधान परिषद की सदस्य (MLC) के कविता ने कुछ लोगों के साथ मिलकर AAP के संचार प्रभारी विजय नायर को 100 करोड़ रुपए की रिश्वत दी। रिश्वत देने का उद्देश्य शराब कारोबार में अनुचित लाभ हासिल करना था। उल्लेखनीय है कि इस साजिश में व्यवसायी समीर महेंद्रू, ओंगोल (आंध्र प्रदेश) से सांसद मगुनता श्रीनिवासुलु रेड्डी (एमएसआर), उनके बेटे राघव मगुनता और सरथ रेड्डी शामली थे।

आरोप-पत्र (Chargesheet) में कहा गया है कि दक्षिण भारत के इस समूह के साथ मिलकर महेंद्रू और नायर ने रिश्वत वसूलने के लिए बहुत चालाकी से एक ‘उत्पादक संघ’ बनाया। इस संघ में शराब बनाने वाली कंपनी पेरनोड रिकार्ड, बिनॉय बाबू, विजय नायर, अरुण पिल्लई, के कविता, मगुनता श्रीनिवासुलु रेड्डी और उनके बेटे राघव, सरथ रेड्डी, अभिषेक बोइनपल्ली और बुच्ची बाबू शामिल थे।

आरोप-पत्र के अनुसार, रिश्वत की राशि AAP को सीधे नहीं दी गई थी। इसे व्यवसायी महेंद्रू के स्वामित्व वाली इंडो स्पिरिट्स (Indo Spirits) के थोक संचालन और खुदरा संचालन से होने वाले मुनाफे के माध्यम से दिया गया था। रिश्वत के एवज में इस समूह के साझेदारों को महेंद्रू की इंडो स्पिरिट्स में 65 फीसदी हिस्सेदारी दे दी गई।

आरोप-पत्र में खुलासा किया गया कि दिल्ली आबकारी नीति के चलते सरकारी खज़ाने को कुल 2873 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बकौल ईडी, इस नीति को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने तैयार किया था और इनमें से कुछ सरकार में भी शामिल हैं। इनका मकसद अवैध रूप से धन हासिल करना था। विशेषज्ञ समिति का गठन और जनता से राय माँगना महज दिखावा भर था। उनकी रिपोर्ट को कभी लागू ही नहीं किया जाना था।

ईडी ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया कि इस नीति को जानबूझकर ऐसे तैयार किया गया कि बाद में इसका फायदा उठाया जा सके और इससे अनुचित लाभ हासिल किया जा सके। इसमें जानबूझकर कमियाँ छोड़ दी गई। नीति को ध्यान से देखने से इसे बनाने वालों के दुर्भावनापूर्ण इरादों का पता चलता है।

जिस युसूफ को ‘दोस्त’ समझते थे उमेश कोल्हे उसने ही निकाला था मौत का फरमान, गला काटने से पहले की गई थी प्रैक्टिस: NIA ने सब कुछ बताया

महाराष्ट्र के अमरवती में उमेश कोल्हे हत्याकांड में तबलीगी जमात का कनेक्शन सामने आने के बाद एक नया खुलासा हुआ है। NIA की चार्जशीट के मुताबिक उमेश के 16 साल पुराने साथी युसूफ ने ही सबसे पहले उमेश का नूपुर शर्मा के समर्थन वाला स्क्रीनशॉट अन्य ग्रुपों में शेयर किया था। हत्या से पहले गला काटने की प्रैक्टिस भी की गई थी। लोगों की मदद के नाम पर चलाई जा रही एम्बुलेंस को सबूतों को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उमेश की हत्या के ‘गुस्ताख़ नबी की एक सजा, सिर तन से जुदा, सिर तन से जुदा’ वाले नारे से प्रभावित थे। जिस व्हाट्सएप ग्रुप में उमेश कोल्हे ने नूपुर शर्मा के समर्थन वाला मैसेज शेयर किया था, उसका नाम ‘ब्लैक फ्रीडम’ था। इसी ग्रुप में उमेश का 16 साल पुराना साथी युसूफ भी था। उमेश कई बार युसूफ की आर्थिक मदद कर चुके थे। युसूफ ने उमेश का वही मैसेज ‘कलीम इब्राहिम’ व्हाट्सएप ग्रुप में भेज कर अंजाम दिखाने की बात कही। इसी ग्रुप में हत्या का एक अन्य आरोपित इरफ़ान खान भी जुड़ा था।

चार्जशीट में बताया गया है कि उमेश को किसी भी हाल में अंजाम तक पहुँचने के लिए युसूफ ने अपने एक अन्य क्लाइंट आतिब रशीद से भी बात की। आतिब ने युसूफ की बातों से सहमति जताते हुए अपने एक और साथी मोहम्मद शोएब को साथ जोड़ा। बाद में ये सभी युसूफ के व्हाट्सएप ग्रुप के साथी इरफ़ान से मिले। उमेश द्वारा नूपुर शर्मा के समर्थन वाला मैसेज एक और व्हाट्सएप ग्रुप ‘हँसी मज़ाक’ में अब्दुल तौफीक शेख ने फॉरवर्ड किया था। इसके चलते ग्रुप मेंबर अब्दुल मुशिफिक अहमद, शेख शकील और मुदस्सिर अहमद भी उमेश से भड़के हुए थे।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि उमेश को अंजाम तक पहुँचाने के लिए 4 आरोपितों ने 19 जून 2022 को गौसिया हाल में मीटिंग की थी। इसमें मोहम्मद शोएब ने अपने साथी शमीम अहमद को भी बुलाया था। मीटिंग में उमेश की हत्या का एलान हुआ। कत्ल करने की जिम्मेदारी मोहम्मद शोएब, अतिब रशीद और शमीम अहमद ने ली। इरफ़ान ने इस हत्या में हर तरह की मदद का भरोसा दिया। इरफ़ान ने हमले के वक्त मोबाइल न ले जाने और काले रंग के लिबास में चेहरा ढक कर जाने की सलाह दी।

मीटिंग के बाद आतिब और शोएब उमेश की दुकान भी उसे पहचानने गए थे। पहचान के बाद आरोपितों ने हत्या के लिए जगह का चुनाव किया। तब तक इस गैंग में मुशीफिक अहमद नाम का मौलवी भी जुड़ चुका था। मौलवी भी नूपुर को जेल न भेजे जाने से नाराज था। उमेश की हत्या 20 जून को ही होनी थी। लेकिन मोहम्मद शोएब और शहीम अहमद द्वारा रात में लम्बे इंतज़ार के बाद भी उमेश नहीं आए। इसी के चलते उस दिन उमेश बच गए।

उमेश की हत्या में नाकाम रहने के बाद आरोपितों ने आपस में बात की। इस चर्चा में रेकी करने वाले शाहरुख़, अब्दुल तौफीक भी शामिल थे। तय प्लान के तहत उमेश की हत्या अगले दिन करने की तैयारी की गई। 21 जून को उमेश की रेकी मुदस्सिर अहमद, शाहरुख़ और अब्दुल तौफीक कर रहे थे। शाहरुख़ ने गमछे से चेहरा ढंका था। इस दौरान तीनों मोबाइल से कनेक्टेड थे।

आरोपित शाहरुख़ रहबर NGO में एम्बुलेंस चलाता था। इसी NGO से अब्दुल तौफीक भी जुड़ा है। हत्या के दिन प्लान के तहत कातिल मोहम्मद शोएब, अतिब रशीद और शहीम अहमद ने अपने मोबाइल एम्बुलेंस में रख दिए थे। ऐसा पुलिस को लोकेशन के आधार पर चकमा देने के लिए किया गया था। तीनों रास्ते में उमेश का इंतज़ार कर रहे थे। रात 10:20 पर उमेश जैसे ही दुकान बंद कर घंटाघर पहुँचे वैसे ही कातिलों ने उन्हें रोक लिया और घुटने पर बिठा कर उनका गला काट दिया गया। चार्जशीट में NIA का दावा है कि कत्ल से पहले मोहम्मद शोएब ने गला काटने की प्रैक्टिस भी भी थी। गले पर वार मोहम्मद शोएब ने किया था। फ़िलहाल सभी आरोपित मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं।