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जमात-ए-इस्लामी की ₹100 करोड़ की संपत्ति जब्त, जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग की कमर तोड़ने के लिए बड़ी कार्रवाई: कुल 188 संपत्तियाँ जद में

जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जाँच एजेंसी (SIA) की सिफारिश पर सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JEI) की लगभग 100 करोड़ रुपए की अनेक संपत्तियों को सील किया है।

SIA ने शनिवार (17 दिसंबर, 2022) को जारी एक बयान में कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश के बारामूला, बांदीपोरा, गांदरबल और कुपवाड़ा में एसआईए की सिफारिश पर बारामूला, बांदीपोरा, गांदरबल और कुपवाड़ा के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद लगभग 100 करोड़ रुपए की संपत्तियों के उपयोग और प्रवेश पर रोक लगाई गई है। ये संपत्तियाँ अलग-अलग जगहों (एक दर्जन से अधिक स्थानों) पर थीं।

एक अधिकारी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन की उपलब्धता को रोकने व देश विरोधी तत्वों और आतंकी नेटवर्क के पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई।

इस कार्रवाई को लेकर अधिकारियों का कहना है कि जमात-ए-इस्लामी से जुड़ी हुई संपत्तियों को सील करने के साथ ही संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में इन्हें ‘रेड एंट्री’ दी गई है। इसके अलावा, अधिकारी ने यह भी कहा है कि जब्ती की कार्यवाही के दौरान, यह पाया गया है कि कुपवाड़ा और कंगन (गांदरबल में) कस्बों में करीब दो दर्जन व्यावसायिक प्रतिष्ठान जमात-ए-इस्लामी की संपत्ति पर किराए से चल रहे थे।

इसलिए, जाँच पूरी होने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि जिन लोगों को जमात-ए-इस्लामी से कोई संबंध न हो, उन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। क्योंकि, ऐसे लोग सामान्य किराएदार थे। SIA ने अपने बयान में कहा है, “जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ हुई यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में बढ़ रही टेरर फंडिंग के खतरे को काफी हद तक खत्म कर देगी। साथ ही यह कानून व्यवस्था और समाज में फैले डर को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम है।”

बयान में यह भी कहा गया है कि जम्मू कश्मीर पुलिस की राज्य जाँच एजेंसी (SIA) ने जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी की 188 संपत्तियों की पहचान की थी। इन सभी संपत्तियों को या तो नोटिफाई किया जा चुका है या फिर ऐसी संपत्तियों पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

दिलदार अंसारी ने इलेक्ट्रिक कटर से किए अपनी बीवी के 18 टुकड़े, जनजातीय समाज की महिला से 10 दिन पहले किया था निकाह: झारखंड की घटना

झारखंड के साहेबगंज में दिल्ली की श्रद्धा हत्याकांड जैसा ही मामला सामने आया है। यहाँ आदिम जनजाति की 22 वर्षीय रिबिका पहाड़िन नाम की एक महिला को मार कर उसके शव के टुकड़े अलग-अलग जगह फेंक दिए गए। माँस के लोथड़ों को कुत्ते निवाला बना रहे थे। इस निर्मम क़त्ल का आरोप दिलदार अंसारी पर लगा है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। घटना शनिवार (17 दिसंबर 2022) की है।

उल्लेखनीय है कि रिपोर्ट में जहाँ कहा जा रहा है कि दिलदार ने रिबिका के 50 टुकड़े किए। वहीं संथल के डीआईजी सुदर्शन प्रसाद मंडल ने इस मुद्दे पर बताया कि आरोपित ने मृतिका के शव को 18 टुकड़ों में काटा था। जहाँ तक सवाल है कि घटना में कौन शामिल था, तो इसकी जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना लोगों की जानकारी में तब आई जब बोरियो थानाक्षेत्र के संताली पंचायत के मोमिन टोला में कुछ ग्रामीणों ने इंसानी शव के टुकड़े बिखरे देखे। इन टुकड़ों को कुत्ते नोच कर खा रहे थे। आँगनबाड़ी केंद्र के पास पड़े इन टुकड़ों में पैर और सीने के हिस्से थे। आखिरकार लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लाश के बिखरे हिस्सों को कब्ज़े में लिया और जाँच शुरू कर दी।

जाँच के दौरान पुलिस ने शव की शिनाख्त करवाई। लाश जनजातीय समुदाय की महिला रिबिका पहाड़िन की निकली। इस बीच पुलिस को महिला के प्रेमी दिलदार अंसारी पर शक हुआ। पुलिस ने दिलदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो कुछ ही देर में उसने सच उगल दिया। ये भी पता चला कि मृतिका रिबिका 25 साल के दिलदार अंसारी की दूसरी पत्नी थी। कई वर्षों तक मिलने-मिलाने के बाद दोनों ने 10 दिनों पहले ही निकाह किया था। दिलदार और रिबिका में आए दिन झगड़े होते थे जिसके बाद उसने ये कदम उठाया।

लाश को टुकड़ों में काटने के लिए दिलदार ने लोहा काटने वाली मशीन (इलेक्ट्रिक कटर) का प्रयोग किया था। पुलिस को कत्ल में प्रयोग हुआ हथियार दिलदार के मामा मो. मोईनुल के घर से मिला। घटना के बाद मोईनुल अंसारी फरार है। इसी मामले में दिलदार के परिजन मोहम्मद मुस्तकीम, उनकी बीवी मरियम खातून, दिलदार की पहली पत्नी गुलेरा, दिलदार के भाई अमीर अंसारी, महताब अंसारी और दिलदार की बहन शारेजा खातून को भी हिरासत में लिया गया है। इन सभी से पूछताछ चल रही है।

पुलिस दिलदार अंसारी की निशानदेही पर लाश के अन्य टुकड़े बरामद करने में जुट गई। पुलिस ने रिबिका के शरीर के कुछ अन्य हिस्से आँगनबाड़ी केंद्र से लगभग 300 मीटर दूर एक बंद पड़े घर से बरामद किए। यह घर मांझटोला इलाके में पड़ता है। ये हेमंती मुर्मू का है जिसे दिलदार ने 2 हजार रुपए प्रतिमाह के भाड़े पर लिया था। यहीं पर वो लगभग 1 हफ्ते मृतका को अपने साथ रखा था और बाद में उसकी लाश को बोरे में भर कर फेंका गया था। मृतिका के शरीर के 12 हिस्से बरामद हुए हैं जबकि कटा हुआ सिर और शरीर के कुछ अन्य हिस्से अभी तक पुलिस को नहीं मिल पाए हैं। पुलिस दिलदार को गिरफ्तार कर के पूछताछ कर रही है। गाँव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

UP इन्वेस्टर समिट 2023 से पहले निवेश की बारिश: सिंगापुर नोएडा में करेगा 10000 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट, डाटा सेंटर से लेकर स्कूल बनाने तक हुए समझौते

अगले साल फरवरी में होने वाले ‘उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन’ (UPGIS) से पहले यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार (Yogi Adityanath Government) ने सिंगापुर (Singapore) में निवेशकों के साथ कई समझौते हैं। इन समझौते के तहत सिंगापुर यूपी में अरबों रुपए निवेश करेगा।

उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) ने कहा कि ऐसे ही एक महत्वपूर्ण सौदे में न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (Noida) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक डाटा सेंटर स्थापित करने के लिए सिंगापुर की SLG कैपिटल के साथ एक बिलियन अमरीकी डॉलर (8,273 करोड़ रुपए) के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

Noida की CEO रितु माहेश्वरी ने ट्विटर पर कहा, “मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की उपस्थिति में यूपी में नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में निवेश और डेटा सेंटर स्थापना के लिए एसएलजी कैपिटल सिंगापुर के साथ $1 बिलियन यूएस डॉलर के लिए एक और प्रमुख समझौता किया गया है। यह क्षेत्र के विकास को एक बड़ा बढ़ावा देगा।”

इसके अलावा, नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में स्कूल स्थापित करने के लिए सिंगापुर स्थित ग्लोबल स्कूल फाउंडेशन के साथ 100 करोड़ रुपए के निवेश का समझौता किया गया है। इसके अलावा, रितु माहेश्वरी ने शनिवार (17 दिसंबर 2022) को ट्वीट किया, “नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में आईटी/आईटीईएस केंद्रों की स्थापना सहित यूपी में लॉजिस्टिक्स/डेटा सेंटर/आईटी/स्किलिंग पर ध्यान केंद्रित करते हुए आज सिंगापुर में लगभग 4100 करोड़ रुपए के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।”

एक अन्य सौदे में यूपीएसआईडीए ने कहा कि उसने उत्तर प्रदेश में डाटासेंटर/लॉजिस्टिक सेवाओं की स्थापना के लिए सिंगापुर में स्टार कंसोर्टियम प्राइवेट लिमिटेड के साथ 2000 करोड़ रुपए के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। प्राधिकरण ने कहा, “2000 करोड़ रुपए के निवेश से राज्य में कई लोगों के लिए रोजगार पैदा होगा।”

Noida की सीईओ रितु माहेश्वरी यूपी कैडर की 2003 बैच की आईएएस अधिकारी है। वह उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नेतृत्व में सिंगापुर गए प्रतिनिधिमंडल की हिस्सा हैं। यह प्रतिनिधिमंडल निवेशक शिखर सम्मेलन से पहले सिंगापुर का दौरा कर रहे हैं।

स्वतंत्र देव सिंह ने शुक्रवार (16 दिसंबर 2022) को कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 अरब डॉलर के निवेश प्रतिबद्धता का लक्ष्य हासिल करने के लिए सिंगापुर से समर्थन की माँग की है। उन्होंने कहा था कि सिंगापुर में उन्हें उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है।

उधर, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Deputy CM Keshav Prasad Maurya) ने नीदरलैंड सरकार (Netherlands government) के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान यूपी में मल्टी स्पोर्ट्स सेंटर्स स्थापित करने के लिए स्पोर्ट्स नेटवर्किंग के साथ 600 करोड़ रुपए का एमओयू भी साइन किया गया।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का दौरा किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और पूर्व मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सैन फ्रांसिस्को में बेरिया काउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की। इस दौरान कई समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

यूपी इन्वेस्टर समिट से पहले निवेशकों से मिलने के लिए यूपी की सरकार ने 8 प्रतिनिधिमंडल बनाया है। यह प्रतिनिधिमंडल निवेशक शिखर सम्मेलन के बारे में प्रचार करने के लिए 16 से अधिक देशों की यात्रा पर है।

मोहम्मद अमन ने दलित लड़की का किया 5 साल रेप, शादी का दबाव बनाने पर घरवालों को पीटा: शिकायत के बाद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र में एक 18 साल की दलित लड़की ने मुस्लिम लड़के पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि मोहम्मद अमन नाम के लड़के ने पीड़िता को यह कहकर फँसाया था कि वह उससे शादी करेगा। हालाँकि बाद में वह मुकर गया और लड़की के घरवालों से मारपीट भी की।

लड़की के मुताबिक, अमन पहले उसे तंग किया करता था और। फिर बाद में उसने उसको शादी का झांसा देकर प्रेम जाल में फँसाया और उसके साथ 5 साल तक रेप किया। जब लड़की के परिजनों को अमन के बारे में पता चला तो वह शादी के लिए तैयार हो गए। वह अमन से बात करने भी गए लेकिन वहाँ अमन ने लड़की के घरवालों से मारपीट की और शादी से भी साफ मना कर दिया।

अब नवाबगंज थाना में पीड़िता ने अपनी शिकायत दी है। पुलिस का कहना है कि मोहम्मद अमन और शिकायतकर्ता के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग था। मगर शादी से अमन मुकर गया। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधीक्षक शिवराज प्रजापति ने बताया कि आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। तरबगंज क्षेत्राधिकारी द्वारा इस मामले में जाँच की जा रही है।

वहीं सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि दलित लड़की को मोहम्मद अमन से प्यार हो गया था, दोनों में शारीरिक संबंध बने और दोनों ने शादी करने का मना बनाया। इसके बाद लड़की घर से कुछ पैसे लेकर आई और अमन को दिए। मगर पैसे पाते ही अमन बदल गया। अब पुलिस ने लड़की की शिकायत के बाद उसे पकड़ा है।

‘ब्रेस्ट टैक्स का विरोध करते हुए महिला ने काट डाले थे अपने दोनों स्तन’: CJI ने कहा: जानें केरल की इस कहानी का सच, हिन्दू घृणा फैलाने वालों ने ऐसे रचा प्रोपेगंडा

देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई की 90वीं जयंती पर मुंबई में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने नंगेली की उस कहानी का जिक्र किया है, जिसके अनुसार एक दलित की महिला ने ‘स्तन कर’ (Breast Tax) का विरोध करने के लिए अपने स्तनों को काट दिया था।

जस्टिस चंद्रचूड़ की ही तरह बहुत सारे लोगों ने भी यह कहानी सुनी और फिर सुनाई होगी। हालाँकि, क्या आप जानते हैं इसका सच क्या है? सच जानने से पहले आइए जानते हैं पूरी कहानी क्या है।

दरअसल, इस कहानी में दावा किया जाता है कि केरल में उच्च जाति के नायर और नंबुथिरी ब्राह्मणों ने निचली जातियों की महिलाओं को अपने स्तन ढँकने की अनुमति नहीं दी और फिर उन पर ‘स्तन कर’ लगाया। कहानी में बताया जाता है कि ऐसे शोषक समाज में, गुलाब नंगेली नामक महिला ने अपने स्तन काटकर इसका विरोध किया था। साथ ही, उसने अपने स्तनों को टैक्स कलेक्टर के सामने बतौर कर यानी टैक्स पेश किया था। स्तन काटने के कारण उसका खून बहुत अधिक बह गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद, उसका पति भी दुःखी होकर उसकी चिता में ही कूदकर जान दे देता है।

इस कहानी सच्चाई जानने के लिए हमने केरल के 19वीं सदी के इतिहास को खंगाला। हमें पता चला कि उमस भरे मौसम के कारण वहाँ के लोग सिर्फ कमर के नीचे ही कपड़े पहनते थे। यह सब, बिना किसी जाति, लिंग, धर्म के भेद के चलता आ रहा था।

17वीं, शताब्दी में भारत आए एक डच यात्री विलियम वैन निउहोफ ने त्रावणकोर की तत्कालीन रानी अश्वती थिरुनल उमयम्मा की पोशाक के बारे में बात करते हुए लिखा है, “मुझे महारानी के सामने पेश किया गया था। उनके पास 700 से अधिक नायर सैनिकों का पहरा था, जो मालाबार शैली के कपड़े पहने हुए थे। रानी की पोशाक उसके बीच में लिपटे कॉलिको के एक टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं है। उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा नग्न दिखाई देता है।”

त्रावणकोर की महारानी से मिलते हुए जोहान नीहॉफ। (स्रोत: Here)

त्रावणकोर की रानी से हुई मुलाकात को लेकर विलियम वैन ने एक चित्र भी बनाया था। इस चित्र में यह स्पष्ट देखा जा सकता है कि रानी और उनके साथ मौजूद लोगों ने अपने सीने को या तो कपड़े से नहीं ढँका है या फिर काफी छोटा कपड़ा डाला हुआ है।

इसके अलावा, 17वीं और 18वीं शताब्दी के यात्री पिएत्रो डेला वैले और जॉन हैरी ग्रोस के अनुसार, केरल में पुरुष और महिला दोनों ही ऊपरी कपड़े नहीं पहनते थे। एक अन्य यात्री अब्बे डुबोइस ने 1815 में लिखे अपने मैनुअल “हिंदू शिष्टाचार, सीमा शुल्क और समारोह” (Hindu Manners, Customs and Ceremonies) में लिखा है कि सभी महिलाओं में से, वेश्याएँ ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपनी छाती को ढँकती हैं। वहाँ, स्तन ढँकना एक मोहक कार्य माना जाता था।

इसके अलावा, मानवविज्ञानी फ्रेड फावसेट ने उल्लेख किया है कि मालाबार में रहने वाला कोई भी स्थानीय निवासी ब्लाउज पहनने या अपने स्तनों को ढँकने का शौक नहीं रखता। शुरुआत में जब अंग्रेज नर्सों ने स्थानीय तिय्या महिलाओं को अपने स्तन ढकने के लिए कहा तब उन महिलाओं द्वारा उन्हें जमकर फटकार लगाई गई थी। इसका कारण यह था कि वह वेश्याएँ नहीं थीं। इससे भी पुष्टि होती है कि मालाबार में सिर्फ वेश्याएँ ही स्तन ढकती थीं।

यदि आपको लगता है कि वामपंथियों द्वारा रची गई इस कहानी को काल्पनिक कहने के लिए 17वीं और 18 वीं शताब्दी का समय कुछ ज्यादा ही पुराना समय हो गया है तो 19वीं और 20वीं शताब्दी के उदाहरणों को भी बतौर सबूत देख सकते हैं।

कनिपय्युर शंकरन नंबूदरीपाद की 20वीं शताब्दी की मलयालम पुस्तक से एक नम्बूदरी ब्राह्मण महिला
एल. के. अनंत कृष्ण अय्यर द्वारा लिखित ‘द कोचीन ट्राइब्स एंड कास्ट्स’ से नम्बुथिरी ब्राह्मण महिलाएँ
मंदिर के जुलूस में नायर लड़कियाँ और पुरुष, एल. के. अनंत कृष्ण अय्यर की किताब से
एल. के. अनंत कृष्ण अय्यर की पुस्तक से नायर लड़कियाँ

ऐसे कई फोटोज और सबूत उपलब्ध हैं जिनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह सब सिर्फ एक कहानी है। नीचे फोटोज में दिखाया गया है कि नंबूथिरी परिवारों और समृद्ध नायर परिवारों की महिलाओं ने खुद स्तन नहीं ढका हुआ है। वास्तव में, इन महिलाओं को स्तन ढकने की आवश्यकता ही नहीं थी। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं तब स्तन ढकने की ‘परंपरा’ ही नहीं थी।

ऊपर की तस्वीरें उस समय की उच्च जाति की महिलाओं की तस्वीरें हैं। वहीं, नीचे की तस्वीरें मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा ने प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा की पेंटिंग हैं। इन पेंटिंग्स में भी इस झूठी कहानी की पोल खुलती नजर आएगी।

राजा रवि वर्मा द्वारा त्रावणकोर की जूनियर रानी, ​​भरणी तिरुनाल रानी पार्वती बाई की 19वीं सदी की पेंटिंग (स्रोत: Here)
19वीं सदी की पेंटिंग, राजा रवि वर्मा द्वारा ‘मालाबार ब्यूटी’ (स्रोत: Here)

इन पेंटिंग्स को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि महिलाओं में अपने सीने पर एक बिना सिला हुआ कपड़ा डाल रखा है। यह तब है जबकि महिलाओं ने तमाम तरह के गहने पहने हुए हैं। हालाँकि, बाद में 20वीं सदी में अंग्रेजों के हस्तक्षेप और प्रभाव के बाद लोगों ने एक सिला हुआ ऊपरी वस्त्र पहनना शुरू कर दिया। यह पहनावा सीने के चारों ओर सिला हुआ रहता था।

एझावा गर्ल्स, एल. के. अनंत कृष्ण अय्यर की पुस्तक से
एन. के. वेंकटेश्वरन की 20वीं सदी की शुरुआत की किताब ‘ग्लिम्पसेस ऑफ त्रावणकोर’ से एझावा परिवार

फोटोज को देखने से समझ आता है कि इसका उद्देश्य सिर्फ स्तन को ढँकना नहीं था। बल्कि, अंग्रेजी सभ्यता और फैशन के प्रभाव के चलते सामने के पूरे हिस्से को ढँका जाने लगा था।

नंगेली कौन थी

नंगेली की कहानी की पुष्टि करने के कोई भी ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। विकिपीडिया में लिखे गए लेखों के स्त्रोत और संदर्भों को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि ये सभी बीते दशक के हैं। साथ ही, इसमें अधिकांश बीते कुछ वर्ष पुराने हैं। यानी कि नंगेली की ‘झूठी कहानी’ को सही साबित करने के लिए कोई भी पुख्ता सबूत नहीं है।

कहानी का जन्म

इस कहानी की शुरुआत पत्रकार सी. राधाकृष्णन ने की। इस कहानी में उन्होंने नंगेली और कडप्पन नामक किरदारों को गढ़ते हुए बेहतरीन कहानी लिखी। इसमें मसाला डालने के लिए उन्होंने नंगेली के पति की आत्महत्या की कहानी को भी जोड़ दिया। यह कहानी पहली बार 8 मार्च, 2007 को ‘पायनियर’ में प्रकाशित हुई थी। इसका मलयालम अनुवाद उसी दिन ‘मातृभूमि’ और ‘मनोरमा’ में भी प्रकाशित हुआ था। 

हालाँकि, बाद में साल 2012 में, इसे एसबीडी कवियूर बुलेटिन और फिर मुरली टी के कैनवास में भी जगह मिल गई थी। इसके बाद, इसे वागाबॉन्ड, बीबीसी और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ समेत कई अन्य मीडिया संस्थानों ने इस कहानी को सच मानते हुए ‘फैलाने’ की कोशिश की।

शब्दों का फेर, अर्थ का अनर्थ और प्रोपेगैंडा…

दरअसल, मलयालम में कर या टैक्स को थल्लाकरम कहा जाता है। थल्लाकरम शब्द का उपयोग वोटिंग टैक्स जैसे टैक्सों के लिए उपयोग किया जाता था। त्रावणकोर में भी मतदान के लिए टैक्स लगाया जाता था। हालाँकि, इसमें महिलाओं से अपेक्षाकृत कम टैक्स वसूला जाता था। चूँकि, मलयालम में मूला को स्तन कहा जाता है। इसलिए, प्रोपेगैंडा फैलाने से रची गई कहानी में, थल्लाकरम को मुल्लाकरम (महिला कर) और फिर स्तन कर के रूप में चित्रित किया गया है।

इतिहास से लेकर आज तक यह कहा जाता रहा है कि यदि किसी भी कहानी को बार-बार और जोर देकर कहा जाए तो उसमें सच्चाई झलकने लगती है। दुर्भाग्य से इस कहानी के साथ भी यही हुआ। कहानी समाज में फैलाई गई और फिर इसे जातिगत भेदभाव के भीषणतम रूप में प्रदर्शित करने की कोशिश की गई।

नंगेली की कहानी को हाल ही में टी मुरली नामक एक मलयाली चित्रकार ने अपने कैनवास पर उकेरा था। इसके बाद से यह काल्पनिक कहानी एक बार फिर लोगों की जुबान में चढ़ गई थी। दिलचस्प बात यह है कि टी मुरली का ब्लॉग हिंदू देवी-देवताओं और संस्कृति के प्रति उनकी अत्यंत कटु और घृणित मानसिकता से भरा पड़ा है। उदाहरण के लिए,  इस ब्लॉगपोस्ट में वह देवी सरस्वती के बारे में उसने बेहद भद्दी बात कही है। उसका यह ब्लॉग किसी बौद्धिक प्रामाणिकता के बजाय हिंदुओं के प्रति उसकी अंधी नफरत की बानगी प्रदर्शित करती है।

वह कहता है:

“, സമൂഹത്തിലെഭക്തിഭ്രാന്ത്കൂടിവരുന്നസാഹചര്യത്തില്സരസ്വതിയുടെമുലകളുടെമുഴുപ്പ്, സരസ്വതിഉപയോഗിക്കുന്നസാരി, ബ്രായുടെബ്രാന്ഡ്തനെയിം, തുടങ്ങിയവസ്തുതകളെക്കുറിച്ച്ചിന്തിക്കുന്നത്പ്രസക്തമാണെന്ന്ബോധോദയമുണ്ടായിരിക്കുന്നു, തുടങ്ങിയവസ്തുതകളെക്കുറിച്ച്ചിന്തിക്കുന്നത്പ്രസക്തമാണെന്ന്ബോധോദയമുണ്ടായിരിക്കുന്നു।”

अनुवाद: “चूँकि समाज में देवताओं के प्रति भक्ति (वह इसे ‘पागलपन’ कहता है) लोकप्रिय हो रही है। इसलिए, मुझे लगता है कि सरस्वती के स्तन के आकार के बारे में साथ ही वह किस ब्रांड के ब्रा और पैंटी का उपयोग करती है, यह सोचना प्रासंगिक है।”

ब्लॉग से एक और बयान:

“ബ്രാഹ്മണന്റെമഹാവിഷ്ണുഎന്നകുണ്ടന്ദൈവത്തിന് (മോഹിനിയാട്ടക്കാരി/രന്) എത്രയോനിയുണ്ടെന്നുംചിത്രകാരന്സന്ദേഹിച്ചുകൊണ്ടിരിക്കുന്നസത്യംകൂടിവെളിപ്പെടുത്തട്ടെ, എത്രയോനിയുണ്ടെന്നുംചിത്രകാരന്സന്ദേഹിച്ചുകൊണ്ടിരിക്കുന്നസത്യംകൂടിവെളിപ്പെടുത്തട്ടെ,”

अनुवाद: “मैं यह भी बता दूँ कि मैं ब्राह्मणों के समलैंगिक भगवान विष्णु के कितने लिंग और योनि के बारे में सोच रहा हूँ।”

अपने ब्लॉग में उसने खुद इस बात को स्वीकारा है कि भक्ति लोकप्रिय हो रही है, इसलिए इसे बदनाम करने के लिए उसने ये सब बातें सोचीं और लिखीं हैं। वास्तव में, सनातन संस्कृति से घृणा ही स्तन कर जैसी कोरी कल्पनाओं को जन्म देती है। फिर, इस कहानी को आगे बढ़ाते हुए जातिवादी चश्मे से देखते है प्रोपेगैंडा तैयार किया जाता है।

प्रोपेगैंडाजीवियों ने इस कहानी को आगे बढ़ाते हुए इस्लामिक आक्रांता टीपू सुल्तान को महान बताते हुए यह हिस्सा भी जोड़ा था कि टीपू ने निचली जातियों के साथ हो रहे अत्याचार को देखते हुए त्रावणकोर के उस राजा पर हमला किया था जो ‘स्तन कर’ वसूला करता था। वास्तव में, यह भी एक झूठी कहानी में गढ़ा गया एक झूठा किस्सा है।

सच्चाई यह है कि टीपू सुल्तान का उद्देश्य त्रावणकोर के हिंदू साम्राज्य पर हमला कर उस पर कब्जा करना था। इसके अलावा, पद्मनाभ मंदिर की विशाल संपत्ति अन्य राज्यों की आँखों में ईर्ष्या का विषय तो थी ही। इसके अलावा, हिंदुओं में जातिगत भेदभाव की स्थिति को दिखाने से धर्मांतरण को भी बल मिलता। इसलिए ही टीपू की निगाह त्रावणकोर पर टिकी हुई थी।

‘हमारा परमाणु बम रखने के लिए नहीं है’: भारत में बिलावल भुट्टो के पुतले जलते देख फुँकीं PAK मंत्री, बोलीं- हम थप्पड़ खाकर गाल आगे नहीं करेंगे

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आतंकवाद पर लताड़ के बाद पाकिस्तान (Pakistan) बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जारदारी (Bilawal Bhutto Zardari) और विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खार (Hina Rabbani Khar) के बाद अब वहाँ की सामाजिक सुरक्षा मंत्री शाजिया मर्री (Shazia Marri) ने भारत के भारत को गीदड़ भभकी दी है।

शहबाज शरीफ सरकार की महिला मंत्री शाजिया मर्री ने शनिवार (17 दिसंबर 2022) को भारत को परमाणु हमले की धमकी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने एटम बम खामोश बैठने के लिए नहीं बनाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मुँहतोड़ जवाब देना जानता है।

शाजिया ने कहा, “यदि भारत की ओर से कोई कार्रवाई की गई तो उसका जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान वह मुल्क नहीं है, जो एक थप्पड़ के बाद अपना दूसरा गाल आगे करेगा। पाकिस्तान जवाब देना जनता है। हमने एटम बम खामोश बैठने के लिए नहीं बनाया है।”

शाजिया ने आगे कहा, “हमारी शिकायत भारत के खिलाफ नहीं है। हमारी शिकायत हिंदुस्तान के मौजूदा नरेंद्र मोदी से सरकार से है। आप बार-बार पाकिस्तान के खिलाफ इल्जाम लगाते रहेंगे और पाकिस्तान चुपचाप सुनता रहेगा तो ऐसा नहीं होगा।”

50 वर्षीय शाजिया मर्री पाकिस्तान के सिंध प्रांत के राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखती हैं। उनके दादा, पिता और उनकी माँ भी सियासत में रहे और सरकारी ओहदों पर रहते हुए भारत विरोधी की राजनीति को चुना। शाजिया भी अपने खानदानी रास्ते पर ही चल रही हैं।

शाज़िया 30 साल की उम्र में राजनीति में उतरीं और साल 2002 में पहली बार चुनाव लड़कर सिंध प्रांत की विधानसभा की सदस्य चुनी गईं। उस समय परवेज़ मुशर्रफ की तानाशाही थी।साल 2008 में उनको सिंध सरकार में सूचना मंत्री बनाया गया। अब वो राष्ट्रीय राजनीति में अपने आपको स्थापित करने के लिए भारत विरोध की राजनीति कर रही हैं।

बता दें शाजिया मर्री ने बिलावल भुट्टो के खिलाफ भारत में उपजे गुस्सा और जगह-जगह उनके जलाए गए पुतले के बाद यह धमकी दी। शाजिया ने कहा, “सुधर जाओ। बिलावल भुट्टो के पुतले जलाने की धमकी दे रहे हो, जबकि तुम्हारे तो खुद के पुतले हिंदुस्तान में जल रहे हैं।

बिलावल भुट्टो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात का कसाई कहा था। इसके बाद देश में आक्रोश फैल गया था। इससे पहले UN में भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान की पोल खोलते हुए कहा था कि जो देश पड़ोसी के संसद पर हमला करता है, ओसामा बिन लादेन की मेजबानी करता है, आतंकियों को प्रश्रय देता है वह संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पर उपदेश दे रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बिलावल भुट्टो के बयान का दुनिया भर में विरोध हो रहा है। इसके साथ ही पाकिस्तान का भी एक बडा तबका इसका विरोध कर रहा है। इस वर्ग का कहना है कि बिलावल ने जो कहा वह कूटनीति दृष्टि से सही नहीं था। पद की गरिमा होती है। वही बात वो अलग तरीके से कह सकते थे। पाकिस्तान यह बुद्धिजीवी वर्ग इसके लिए उनकी अनुभवहीनता को जिम्मेदार ठहरा रहा है।

बात दें कि इमरान खान ने प्रधानमंत्री रहते हुए बिलावल भुट्टो पर तीखा हमला किया था। उन्होंने कहा था, “आसिफ़ अली ज़रदारी, ख़ुदा के वास्ते अपने बेटे को उर्दू तो सीखा दो। 15 साल हो गए। उसके लिए अब भी बारिश आता है। चीनी उगता है। अब भी उसे पता नहीं है कि लड़की आती है कि आता है। मैंने अंग्रेज़ों को दो साल में उर्दू सीखते देखा है।”

बस से ले गए भारत जोड़ो यात्रा में, राहुल की रैली खत्म हुई तो सुनसान जगह पर छोड़ा: राजस्थान से ‘दलित महिलाओं’ का Video आया सामने, कॉन्ग्रेस पर आरोप

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) भारत जोड़ो यात्रा के तहत राजस्थान में हैं। यहाँ पर राहुल गाँधी के स्वागत में बड़ी संख्या में महिलाएँ दिखी थीं, लेकिन इन्हीं महिलाओं को लेकर कॉन्ग्रेस पर आरोप लगने लगे हैं। आरोप है कि कॉन्ग्रेस ने भीड़ जुटाने के लिए दलित महिलाओं को रैली में लेकर आई और उसके बाद रात में सड़क पर छोड़कर चली गई।

दलित टाइम्स ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें कुछ महिलाएँ रात में अंधेरे में सड़कों पर दिख रही हैं। वीडियो में महिलाएँ में कह रही हैं कि उन्हें राहुल गाँधी की रैली के लिए ले जाया गया था और रैली खत्म होने के बाद उन्हें घर पहुँचाने की जगह आधी रात में सुनसान जगह पर छोड़ दिया गया।

वीडियो में एक महिला कह रही है कि इंदरगढ़ में राहुल गाँधी की रैली खत्म होने के बाद 20 बसों में महिलाओं को लाया गया और उन्हें सुनसान जगह पर छोड़ दिया गया। आधी रात में उन्हें अपने घर तक पहुँचना मुश्किल हो रहा है। एक महिला ने कहा कि रैली में जाते समय उन्हें सरकारी बसों में बैठाकर ले जाया गया था और काम होने के बाद उन्हें इस हालत में छोड़ दिया गया।

‘जो ये खूनी खेल देख रहा है, वो इंसानियत के नाम पर धब्बा’ : ईरान में गिरफ्तार हुईं ऑस्कर विजेता एक्ट्रेस, प्रशासन ने मढ़ा झूठी खबर फैलाने का आरोप

ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन के बीच वहाँ देश की सबसे प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में से एक एक्ट्रेस व ऑस्कर विजेता तारानेह अलीदूस्ती को झूठ फैलाने का आरोप मढ़कर गिरफ्तार किया गया है। स्थानीय मीडिया बताती है कि तारानेह ने देश में चल रहे प्रदर्शन में भाग लिया था और नारों के संग अपनी फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की थी।

IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, तारानेह को अपने इंस्टा पोस्ट के लिए एक हफ्ते बाद गिरफ्तार किया गया। अपने पोस्ट में उन्होंने उस शख्स का समर्थन किया हुआ था जिसे ईरानी प्रशासन ने फाँसी की सजा दी थी। 

उनकी तरह कुछ अन्य ईरानी सेलीब्रिटियों को भी कथिततौर पर भड़काऊ कंटेंट पोस्ट करने के आरोप में समन भेजा गया है। रही बात तारानेह के पोस्ट की, तो उसमें लिखा था, “उसका नाम मोहसेन शेखरी है। हर अंतरराष्ट्रीय संगठन जो यह खूनी खेल देख रहा है और कोई कार्रवाई नहीं कर रहा वो इंसानियत के नाम पर धब्बा है।”

बता दें कि शेखरी को तेहरान की सड़कें ब्लॉक करने और सुरक्षाबलों पर हमला करने के आरोप में पकड़ा गया था। बाद में ईरानी कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए 9 दिसंबर को फाँसी की सजा हुई थी।

मोहसिन शेखरी अकेले नहीं हैं जिन्हें ईरानी प्रशासन ने मौत की सजा दी। पिछले हफ्ते ऐसे ही माजीदरेजा रेहनवर्द को भी फाँसी पर सरेआम लटकाया गया था। रेहनवर्द ने अपने मरने से पहले वीडियो में कहा था, “मैं नहीं चाहता है कि कोई मेरी मौत पर मातम मनाए। किसी भी तरह की दुआ न करे। मेरी कब्र पर मातम न मनाया जाए। मैं नहीं चाहता कि कोई कुरान या नमाज पढ़े। सभी लोग मेरी मौत का जश्न मनाएँ, संगीत बजाएँ, खुश रहें।”

दरअसल, रेहनवर्द पर प्रदर्शन के दौरान 2 पुलिस अफसरों को जान से मारने के इल्ज़ाम थे। इसलिए तेहरान की अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई थी। उस पर 4 अन्य अफसरों पर हमला करने का भी इल्ज़ाम था। 12 दिसंबर, 2022 को रेहनवर्द को फाँसी दी गई। 

अलीदूस्ती ने इसी बाबत अपने इंस्टा पर तीन पोस्ट शेयर किए थे और देश में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन के लिए एकजुटता दिखाई थी। उनके अकॉउंट पर 8 मिलियन फॉलोवर थे लेकिन उनके अकॉउंट को भी सस्पेंड कर दिया गया।

गैर-मुस्लिमों का कत्ल, औरतों को सजा, फिदायीन हमले…: तालिबान अब स्कूली लड़कों को देगा कट्टरपंथ की तालीम, सिलेबस में 62 नए बिंदु जोड़े

अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जे के पास तालिबान (Taliban) ने वहाँ इस्लामी कट्टरता लागू करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले उसने लड़कियों को स्कूल-कॉलेज जाने पर रोक लगाई और अब पूरे पाठ्यक्रम को बदलकर उसमें चरमपंथ को शामिल करने जा रहा है।

तालिबान के कब्जे के बाद खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्लाह सालेह (Amrullah Saleh) ने तालिबान की इस योजना के बारे में ट्विटर पर जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि तालिबान नए पाठ्यक्रम में 62 नए बिंदुओं को जोड़ रहा है।

इनमें संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) को शैतान बताने वाला, गैर-मुस्लिमों को कत्ल, कट्टरपंथ को संस्थागत रूप से स्थापित करने की कोशिश, महिलाओं को सजा और इस्लामी प्रतिरोध के रूप में फिदायीन हमले को सही ठहराने की कोशिश की गई है।

सालेह ने कहा, “नया पाठ्यक्रम इतना बुरा है कि लोग अब लड़कों के स्कूलों को भी तब तक बंद देखना चाहते हैं, जब तक कि पाकिस्तान द्वारा बनाए और पोषित इस लिपिकीय फासीवाद खत्म नहीं किया जाता। अफगानिस्तान के स्कूल मार्च में खुलेंगे। ज्वलंत प्रश्न ये है कि ऐसी शिक्षाओं और नई पुस्तकों के लिए अमेरिका हर सप्ताह $40M (4 करोड़ डॉलर) देगा।”

अमरुल्लाह सालेह ने कहा कि शर्मनाक दोहा सौदे पर हस्ताक्षर करने से पहले और उसके बाद लंबे समय तक पूरे प्रायोजित मीडिया ने तालिबान को सुधारवादी और बदला हुआ दिखाने का प्रयास किया। इतना ही नहीं, देश में भ्रष्टाचार को इस आतंकवादी समूह के सत्ता में आने का कारण बताया।

सालेह ने आगे कहा कि तालिबान को पाकिस्तान से अफगानिस्तान में लाए गए घातक मुल्लावाद को भू-राजनीतिक योजना तक छुपाना था। उन्होंने पूछा कि तालिबानों का यह रूमानी नज़ारा कब तक चलेगा? अफगानिस्तान आश्चर्य का देश है और परिवर्तन इसका मूल है।

भारतीय टीम ने तीसरी बार अपने नाम किया नेत्रहीन T-20 वर्ल्ड कप, फाइनल में बांग्लादेश को दी मात: गदगद PM मोदी बोले – देश को आप पर गर्व है

भारत की पुरुष नेत्रहीन टीम ने बांग्लादेश को हराकर एक बार फिर नेत्रहीन टी20 विश्व कप पर कब्जा कर लिया है। तीसरे नेत्रहीन टी20 विश्व कप में फाइनल में भारत ने बांग्लादेश की टीम को 120 रनों से शिकस्त दी।

बेंगलुरू के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए मैच में टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए दो विकेट खोकर 277 रन बनाए। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने पारी की शुरुआत में ही 2 विकेट खो दिए। इसके बाद कप्तान अजय रेड्डी और सुनील रमेश ने पारी को संभाला। दोनों ने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए टीम को 277 के स्कोर तक पहुँचाया और अंत तक आउट भी नहीं हुए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में तीन विकेट पर 157 रन ही बना सकी। सुनील रमेश को उनके शानदार बल्लेबाजी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। सुनिल ने 136 रनों की नाबाद पारी खेली।

टीम इंडिया की शानदार जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ दीं। पीएम ने लिखा, “भारत को अपने एथलीट्स पर गर्व है। हमने नेत्रहीन टी-20 वर्ल्ड कप जीत लिया है, इस बात की प्रसन्नता है। हमारी टीम को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।”

आपको बता दें कि नेत्रहीन टी 20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में 6 देशों ने हिस्सा लिया था। 5 दिसंबर, 2022 से शुरू हुए टूर्नामेंट में टीम इंडिया शुरू से ही विजेताओं की तरह खेल रही थी। लीग मुकाबलों में भारतीय टीम पहला स्थान हासिल कर सेमीफाइनल में पहुँची। सेमीफाइनल में भारत ने साउथ अफ्रीका को 207 रनों के बड़े अंतर से हराकर फाइनल में पहुँची। वहीं बांग्लादेश की टीम ने श्रीलंका को हरा कर फाइनल में जगह बनाई थी। जहाँ भारत के हाथों उसे हार का सामना करना पड़ा।

इस तरह भारत ने तीसरी बार टूर्नामेंट अपने नाम कर लिया। अब तक 3 बार नेत्रहीन टी20 क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन हुआ है और भारत ने ही विश्व कप के तीनों खिताब जीते हैं।