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लव जिहाद का मास्टर निकला सीवान वाला कलीमुल्लाह: शादी कर रत्ना को बनाया आयशा खातून, अब दूसरी हिंदू लड़की के लिए छोड़कर भागा

बिहार के सीवान से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। 28 वर्षीय कलीमुल्लाह शेख नाम के एक शिक्षक पर उसकी ही पत्नी ने हिंदू लड़कियों को फँसाने का आरोप लगाया है। 27 वर्षीय इस महिला का कहना है कि कलीमुल्लाह ने समीर खन्ना बनकर उसे फँसाया था। शादी के बाद उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया। अब अर्चना नाम की एक अन्य हिंदू लड़की के लिए उसको छोड़कर भाग गया है।

रिपोर्ट के अनुसार कलीमुल्लाह उत्तर प्रदेश के देवरिया का रहने वाला है। वह सीवान में करीब 6 साल से कोचिंग इंस्टीट्यूट चला रहा है। पीड़ित महिला बुधवार 15 दिसंबर 2022 को एसपी कार्यालय में आवेदन देने पहुँची थी। उसका कहना है कि कलीमुल्लाह अब दूसरी लड़की से शादी करने वाला है, इसलिए वह सामने आई है।

पीड़ित महिला के अनुसार 2016 में वह कलीमुल्लाह के संपर्क में आई थी। तब उसने अपना नाम समीर खन्ना बताया था। वह कलावा बाँधता था। माथे पर तिलक लगाता था। पूजा-पाठ में शामिल होता था। 17 मार्च 2017 को दोनों ने कोर्ट में शादी की। इसके बाद समीर बने कलीमुल्लाह ने उसे अपनी असली पहचान बताई। उसका धर्म परिवर्तन करवाया। सीवान जिले के हुसैनगंज थाना क्षेत्र स्थित मदरसे से जाकर उससे निकाह क‍िया। उसका नाम आयशा खातून रख दिया। जो बेटी हुई उसका नाम सुहाना खातून रख दिया।

पीड़ित महिला के अनुसार कलीमुल्लाह उससे मारपीट भी करता था। करीब चार महीने पहले वह उसे छोड़कर भाग गया और अब एक अन्य हिंदू लड़की से शादी करने जा रहा है। उसने कोचिंग भी बंद कर रखा है। पीड़िता के अनुसार कई हिंदू लड़कियाँ उसके जाल में फँसी हुई हैं। कुछ डॉक्यूमेंट उसने समीर तो कुछ कलीमुल्लाह शेख के नाम से बनवा रखे हैं।

सीवान के एसपी शैलेश कुमार ने बताया है कि मह‍िला की श‍िकायत पर संबंध में संबंध‍ित थाने को कार्रवाई के निर्देश द‍िए गए हैं। दोषी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

‘जिस थिएटर में पठान लगे, उसे फूँको’: शाहरुख-दीपिका की फिल्म पर अयोध्या के महंत भड़के, भगवा को कहा ‘संतों’ का रंग

अयोध्या के महंत राजू दास ने दर्शकों से बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (Shahrukh Khan) की फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) के बहिष्कार की अपील की है। महंत राजू दास ने कहा, “शाहरुख की फिल्म पठान का बहिष्कार करो, जिस भी थिएटर में यह फिल्म रिलीज हो उसे फूँक दो।”

सोशल मीडिया पर महंत राजू दास का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इसमें महंत ने आरोप लगाया है कि ‘पठान’ फिल्म में सनातन धर्म का मजाक उड़ाया गया है। हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के नए-नए तरीके खोजे जा रहे हैं। यह वीडियो गुरुवार (15 दिसंबर 2022) का है।

अयोध्या के महंत राजू दास कहते हैं, “बॉलीवुड और हॉलीवुड लगातार इस प्रयास में रहते हैं कि किस तरह से सनातन धर्म का मजाक उड़ाया जाए। हिंदू देवी-देवताओं का किस तरह से अपमान किया जाए। साधु संतों का रंग, राष्ट्र का रंग, देश का रंग या फिर सनातन संस्कृति का रंग भगवे का जिस तरह से ‘पठान’ फिल्म में दीपिका पादुकोण के द्वारा एक बिकिनी के रूप में इस्तेमाल किया गया, उससे हमारी आस्था को ठेस पहुँचाई जा रही है।”

वह कहते हैं, “यह बहुत ही दुखद है। मुझको लगता है कि देश के शत प्रतिशत लोगों के मन में यह भाव है कि शाहरुख खान की लगातार, एक नहीं अनेक बार सनातन धर्म संस्कृति का मजाक उड़ाने में सहभागिता रही है। अभी भी देख लीजिए। क्या जरूरत थी दीपिका पादुकोण को भगवा रंग की बिकिनी पहनकर नंगा प्रदर्शन करने की। ऐसा करके हमारी आस्था को ठेस पहुँचाई गई है। हमें और कुछ नहीं चाहिए, बस ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चा​हिए।”

महंत ने दर्शकों से अपील करते हुए आगे कहा, “मैं चाहता हूँ कि आप लोग ऐसी फिल्मों का बहिष्कार करो और जहाँ भी, जिस भी थिएटर में ये लगे उसको फूँक दो। नहीं फूँकोगे, तो ये मानने वाले नहीं हैं। जैसे को तैसा करना पड़ता है। दुष्टों के साथ जब तक दुष्टतापूर्वक व्यवहार नहीं करोगे, तो इसके ऊपर आप कंट्रोल नहीं लगा सकते।”

मध्यप्रदेश के गृहमंत्री ने उठाया सवाल

गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार (14 दिसंबर 2022) को मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने शाहरुख खान (Shahrukh Khan) की फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) के ‘बेशरम रंग’ (Besharam Rang) गाने में दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की वेशभूषा और इसे फिल्माने के तरीके पर आपत्ति जताई थी।

उन्होंने कहा था, “फिल्म पठान (Pathan) के गाने में टुकड़े-टुकड़े गैंग की समर्थक अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की वेशभूषा बेहद आपत्तिजनक है। साफ दिख रहा है कि यह गाना दूषित मानसिकता के साथ फिल्माया गया है। ‘बेशरम रंग’ गाने के बोल, दृश्यों और भगवा व हरे रंग की वेशभूषा को ठीक किया जाए। वरना हम तय करेंगे कि मध्य प्रदेश में फिल्म की स्क्रीनिंग होनी चाहिए या नहीं।”

बता दें कि शाहरुख की फिल्म ‘पठान’ 25 जनवरी 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। लेकिन यह फिल्म रिलीज से पहले ही विवादों में है। इस पर जानबूझकर अश्लीलता फैलाने के आरोप लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर फिल्म का बॉयकाट (Boycott Pathan) करने की बात हो रही है।

59 रामभक्त जलाकर मार डाले गए, साबरमती की बोगियों पर पत्थर फेंक रहा था गोधरा का फारूक: आजीवन कारावास की सजा, सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत

साल 2002 में हुए गुजरात के गोधरा के सारबमती एक्सप्रेस कांड (Sabarmati Express, Godhra Case) में उम्रकैद की सजा पाए फारूक नाम के एक दोषी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान गुजरात सराकर ने फारूक की जमानत का विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की खंडपीठ ने कहा कि दंगों का दोषी फारूक 2004 से जेल में है। वह 17 साल जेल में रह चुका है। इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए। गुजरात सरकार की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ दोषी पत्थरबाज जेल में लंबा समय काट चुके हैं। ऐसे में उन्हें जमानत पर दिया जा सकता है।

दोषी फारूक की तरह ही 17 अन्य दोषियों ने भी कोर्ट में जमानत के लिए अपील की है। सुप्रीम कोर्ट छुट्टियों के बाद उनकी अपील पर सुनवाई करेगा। फारूक पर जलती साबरमती एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी करने का मामला दर्ज था और इस मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

जमानत का विरोध करते हुए गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह सिर्फ पत्थरबाजी का मामला नहीं था। ये जघन्य अपराध था, क्योंकि जलती ट्रेन से लोगों को निकलने दिया गया। गुजरात सरकार ने पत्थरबाजों की भूमिका को गंभीर बताया था।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पत्थरबाजों की मंशा यह थी कि साबरमती एक्सप्रेस की जलती बोगी से कोई भी यात्री बाहर ना निकल सके और ना ही बाहर से कोई व्यक्ति उन्हें बचाने के लिए आ सके। इतना ही नहीं, उसने अन्य लोगों को भी पत्थरबाजी के लिए उकसाया था। इस हमले में कई यात्री घायल भी हुए थे। उन्होंने कहा कि सामान्य हालत में पत्थरबाजी एक अलग घटना है, लेकिन इस मामले में बिल्कुल अलग है।

साबरमती एक्स्प्रेस पर पत्थरबाजी करने का मामले में 31 लोगों को सजा सुनाई गई थी, जिनमें से एक फारूक भी शामिल है। बता दें कि 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से तीर्थयात्रियों को लेकर आ रही साबरमती एक्सप्रेस के चार डिब्बों में मुस्लिम भीड़ ने आग लगा दी थी, जिसमें 59 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई। मरने वालों में बच्चे और महिलाएँ भी थीं। इस घटना के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर दंगे फैल गए थे।

साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन को जलाने की घटना में 100 से अधिक लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर मुकदमा भी चलाया गया। हालाँकि, ट्रायल कोर्ट ने फरवरी 2011 में 63 आरोपितों को बरी कर दिया और 31 को दोषी ठहराया। इन 31 दोषियों में 11 को मौत की सजा और 20 को आजीवन कारावास की सजा दी गई।

दोषियों ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील की और हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2017 में मौत की सजा पाए 11 दोषियों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इसके साथ ही आजीवन कारावास की सजा पाए 20 दोषियों की सजा को बरकरार रखा था। इस तरह सभी 31 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वहीं, सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका अभी भी लंबित है।

फारूक ने सु्प्रीम कोर्ट में जमानत की याचिका दी थी और साथ में दलील थी कि उसने जेल में 17 साल काट चुका है। ऐसे में उसे उसे जमानत दी जाए। फारूक की इस दलील को स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने उसे जमानत दे दी।

इससे पहले 13 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों में से एक अब्दुल रहमान धंतिया उर्फ कानकट्टो उर्फ जम्बुरो को छह महीने की अंतरिम जमानत दी गई थी। 11 नवंबर 2022 को कोर्ट ने उसकी बेल को 31 मार्च 2023 तक बढ़ा दिया।

कनकट्टो ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दिया था कि उसकी पत्नी टर्मिनल कैंसर से जुझ रही है और उसकी बेटियाँ मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं। इसलिए पत्नी की देखभाल के लिए उसे जमानत दी जाए। कोर्ट ने रहमान की याचिका को स्वीकार कर लिया था।

‘मुझे डर था… कोई मुझ पर तेजाब फेंक देगा’: दिल्ली में नाबालिग पर एसिड अटैक के बाद छलका कंगना का दर्द, बोलीं- बहन की हुई थी 52 सर्जरी

दिल्ली के द्वारका में एक नाबालिग लड़की पर हुए एसिड अटैक के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इंस्टा पर स्टोरी शेयर करते हुए याद किया कि कैसे ये एसिड अटैक का ट्रॉमा उनकी बहन रंगोली चंदेल ने भी झेला हुआ है और किस तरह वो एक समय में इसी एसिड अटैक के डर से अपना चेहरा छिपाकर चलती थीं।

“जब मैं टीनेजर थी तब मेरी बहन रंगोली चंदेल पर रोड साइड रोमियो ने तेजाब फेंक दिया था। उसे 52 सर्जरी और मानसिक-शारीरिक आघात से गुजरना पड़ा। हम एक परिवार के रूप में टूट गए थे। मुझे भी थेरेपी लेनी पड़ी क्योंकि मुझे डर था कि जो भी मेरे पास से गुजरेगा, वह मुझ पर तेजाब फेंक सकता है। इसकी वजह से मैं घर से बाहर निकलते वक्त अच्छे से अपना चेहरा ढक लेती थी ताकि कोई मुझ पर तेजाब न फेंक दे। ये अत्याचार आज तक बंद नहीं हुए हैं।”

उन्होंने दिल्ली में एसिड अटैक और अपनी बहन के साथ हुई घटना को याद करते हुए कहा, “इन अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मैं गौतम गंभीर से सहमत हूँ। हमें एसिड हमलावरों के खिलाफ बहुत सख्त कदम उठाने की जरूरत है।”

कंगना रनौत की इंस्टा स्टोरी का स्क्रीनशॉट (तस्वीर साभार: कंगना का इंस्टा अकॉउंट)

गौरतलब है कि दिल्ली के द्वारका में 12वीं क्लास की स्कूली छात्रा पर तेजाब फेंकने की घटना हुई। लड़की स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी मगर दो लड़कों ने बाइक पर आकर उस पर तेजाब फेंक दिया। घटना में बच्ची 8 फीसद जल गई। उसका सफदरजंग के आईसीयू में अस्पताल चल रहा है। इस बीच गौतम गंभीर ने पोस्ट किया था। अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा था, “जिन लड़कों ने लड़की पर एसिड फेंका है, उन्हें सरेआम फाँसी दी जानी चाहिए।” इसी ट्वीट के बाद कंगना ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

पिछले वर्ष भी उन्होंने इस संबंध में पोस्ट किए थे। उन्होंने रंगोली की योग स्टोरी शेयर करते हुए कहा था,“रंगोली की योग स्टोरी सबसे ज्यादा प्रेरणा देने वाली है, एक सड़क छाप आशिक ने रंगोली पर एसिड फेंका था, जब वो मुश्किल से 21 साल की थीं। उसे थर्ड डिग्री बर्न हुआ, उसका करीब आधा चेहरा झुलस गया था, एक आँख की रोशनी चली गई थी, एक कान पिघल गया था और ब्रेस्ट भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे। रंगोली की 2-3 साल में करीब 53 सर्जरी हुईं, लेकिन वो भी काफी नहीं थीं।”

उन्होंने कहा था कि उन्हें रंगोली की मानसिक स्थिति की हमेशा चिंता रहती थी। रंगोली ने बोला छोड़ दिया था। वह एक शब्द नहीं कहती थीं, बस चीजों को एक टक देखती रहती थीं। जिस एयरफोर्स ऑफिसर से उनकी सगाई हुई थी उसने भी उन्हें छोड़ दिया था। डॉक्टर कहते थे कि रंगोली शॉ़क में हैं। बाद में उन्हें सही करने के लिए कई थेरेपी दी घईं। उन्हें मनोवैज्ञानिक से मिलवाया गया। योग के जरिए उन्हें सही करने की कोशिश हुई।

कॉन्ग्रेस MLA ने बीवी के बेडरूम में लगाए CCTV, प्रेमिका से करवाते थे टॉर्चर: पत्नी ने बताया- मृत्यु के डर से मुझसे ब्याह, अफेयर किसी और से

हिमाचल प्रदेश के कॉन्ग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह पर उनकी पत्नी सुदर्शना ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। सुदर्शना का कहना है कि उनके बेडरूम में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए थे। विक्रमादित्य का शादी से पहले से अमरीक नाम की किसी महिला से अफेयर चल रहा था। यह शादी के बाद भी जारी रहा। सुदर्शना का कहना है कि विक्रमादित्य इस महिला से भी उन्हें टॉर्चर करवाते थे।

सुदर्शना ने घरेलू हिंसा को लेकर उदयपुर की कोर्ट में मामला दर्ज करवा रखा है। इसमें विक्रमादित्य सिंह के अलावा अपनी सास प्रतिभा सिंह, ननद अपराजिता, ननदोई अंगद सिंह और चंडीगढ़ की एक युवती को आरोपित किया है। पहले इन सबके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की बात सामने आई थी। अब अमर उजाला ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कोर्ट की वेबसाइट पर गलत सूचना अपलोड हो गई थी। अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी नहीं किया है। आरोपितों के आवेदन पर सूचना दुरुस्त कर दी गई है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार सुदर्शना सिंह का कहना है कि उनके पति व‍िक्रमाद‍ित्‍य स‍िंंह का शादी से पहले से ही अमरीक नाम की लड़की से अफेयर था। वे उसी से शादी करना चाहते थे। लेकिन एक पंड‍ित के कहने पर यह शादी नहीं हुई। पंड‍ित का कहना था कि यदि वे अमरीक से पहली शादी करेंगे तो उनकी मौत हो जाएगी। सुदर्शना के अनुसार इसके बाद साज‍िश के तहत व‍िक्रमाद‍ित्‍य ने उनसे शादी की।

सुदर्शना के अनुसार जब तक व‍िक्रमाद‍ित्‍य के पिता वीरभद्र स‍िंंह जीव‍ित रहे, उन्‍हें अच्‍छे से रखा गया। लेक‍िन बाद में उन्‍हें परेशान क‍िया जाने लगा। सुदर्शना का आरोप है क‍ि व‍िक्रमाद‍ित्‍य व उनकी माँ प्रतिभा स‍िंंह उनके घराने को छोटा बताकर ताना मारते थे। दहेज को लेकर भी प्रताड़ित करते थे। कहा करते थे क‍ि उन्‍हें उनकी हैस‍ियत के ह‍िसाब से दहेज नहीं द‍िया गया।

सुदर्शना के वकील भंवरसिंह देवड़ा का कहना है क‍ि जुलाई में वीरभद्र स‍िंंह की मौत के बाद सुदर्शना को उदयपुर भेज द‍िया गया था। बकौल वकील सुदर्शना का कहना है क‍ि व‍िक्रमाद‍ित्‍य का दूसरी मह‍िला के साथ अफेयर है और वह उसके साथ नहीं रहना चाहती है। सुदर्शना ने रहने के ल‍िए मकान और भरण-पोषण के ल‍िए हर माह पैसे की माँग की है। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2023 को न‍िर्धार‍ित की गई है।

गौरतलब है कि वीरभद्र सिंह 6 बार हिमचाल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। अभी उनके बेटे विक्रमादित्य विधायक तो उनकी पत्ली प्रतिभा सिंह सांसद हैं। हिमचाल विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद वीरभद्र सिंह की विरासत का हवाला देकर ये मुख्यमंत्री के पद पर दावेदारी भी जता रहे थे।

चीनी सेना हुड़दंगी, तवांग की तरह होती रहती है पिटाई: पूर्व सेना प्रमुख ने बताया- साल में 2-3 बार होती है घुसैपठ की कोशिश, सलामी स्लाइसिंग पर करता है अमल

भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोद मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Narvane) ने कहा कि चीन देश के प्रमुख खतरा है। उन्होंने कहा कि गलवान में हुए संघर्ष ने चीन को पहला झटका दिया था। नरवणे ने यह भी कहा कि बालाकोट हवाई हमले ने पाकिस्तान को पैगाम दे दिया है कि यदि उसने भारत को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की तो उसे नुकसान उठाना पड़ेगा।

पूर्व सेना प्रमुख के बयान ऐसे समय में आए हैं, जब 9 दिसंबर 2022 को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर के यांग्त्से में भारतीय सेना के गश्ती दल को रोका था। इस दौरान एक झड़प भी हुई और भारतीय जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया।

इस झड़प को लेकर जनरल नरवणे ने कहा कि चीन की सेना भारत को यथास्थिति बनाए रखने से रोकना चाहती थी, लेकिन उसे करारा जवाब दिया गया। जनरल नरवणे ने कहा कि PLA अपने आप को 21वीं सदी की सबसे स्मार्ट और प्रोफेशनल मिलिट्री समझती है, लेकिन उनकी हरकतें हुड़दंगी और स्ट्रीट फाइटिंग जैसी लगती हैं।

पूर्व सेना प्रमुख ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए साक्षात्कार में कहा कि चीनी सैनिकों के लिए ऐसी हरकतें नई बात नहीं रह गई हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ 2020 के गलवान झड़प की बात नहीं है। चीन कई सालों से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर यथास्थिति बदलने की कोशिश कर रहा है।

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि चीन इसे बहुत छोटे-छोटे चरणों में कर रहा है। पूर्व सेना प्रमुख ने इसे ‘सलामी स्लाइसिंग’ कहा। उन्होंने आगे कहा कि हर साल ये चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में घुसने की इस तरह की 2-3 कोशिशें करते हैं और हर बार उन्हें शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है।

बता दें कि सलामी स्लाइसिंग छोटे-छोटे उन सैन्य ऑपरेशनों को कहा जाता है, जिसमें पड़ोसी देशों की जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा कर लिया जाता है। ऐसे ऑपरेशन इतने छोटे स्तर पर होते हैं कि इनमें पूर्ण युद्ध की आशंका बेहद कम होती है। हालाँकि, पड़ोसी देश को यह समझना मुश्किल होता है कि इसका जवाब कैसे दिया जाए।

उन्होंने कहा कि गलवान संघर्ष के दौरान चीनी सेना को पहली बार बड़ा झटका लगा। विस्तारवादी चीन को अतिक्रमण करते हुए 2 दशकों में पहली बार इतने सैनिक खोने पड़े। इस दौरान पूर्व सेना प्रमुख ने पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीस के चीन पर दिए बयान को याद करते हुए कहा कि चीन भारत के लिए आज भी खतरा नंबर एक बना हुआ है।

पाकिस्तान और बालाकोट पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए नरवणे ने कहा कि बालाकोट में किया गया एयर स्ट्राइक यह पैगाम था कि ‘आप हमारा नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेंगे तो हम आपका ज्यादा नुकसान पहुँचा सकते हैं’। उन्होंने कहा कि बालाकोट में कितने आतंकियों को मारा यह मायने नहीं रखता है। मायने यह रखता है कि यदि नुकसान होने पर भारत घर में घुसकर मारने के लिए तैयार है।

‘शायद सरकार एक दिन हमें नागरिकता भी दे दे…’: पाकिस्तानी हिंदुओं को 1 दशक बाद दिल्ली में मिली बिजली, घरों में उजाला देख जगी और उम्मीदें

पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के अत्याचार से तंग आकर भारत का रुख करने वाले तमाम हिंदू दिल्ली में करीबन 10 सालों के बिन बिजली के गुजारा कर रहे थे। लेकिन, पिछले महीने कोर्ट के एक आदेश के बाद उनका जीवन बदल गया। लोगों के घरों में बल्ब आ गए, ट्यूबलाइट लग गई और स्विच बॉक्स काम करने लगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक से लगभग 900 लोग मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन के पीछे एक खुले बड़े मैदान में नारकीय जीवन जी रहे हैं, जहाँ कोई बुनियादी सुविधाएँ नहीं थीं। दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 नवंबर, 2022 को शहर में बिजली वितरण करने वाली टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) को एक महीने के भीतर शरणार्थियों के सभी घरों में बिजली की आपूर्ति करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा था, “बिजली की आपूर्ति न करवाना, बुनियादी जरूरतों से इनकार करने जैसा है।”

टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) ने 13 दिसंबर 2022 को इस इलाके का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि यहाँ के लोगों ने बिजली की आपूर्ति होने के बाद राहत की साँस ली। टीओआई से बात करते हुए पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मूल निवासी 47 वर्षीय गुलाब दास ने कहा, “हम वैध तरीके से बुनियादी सुविधाओं की माँग कर रहे हैं, इसलिए यह संघर्ष लंबा चलेगा। कुछ साल पहले सौर पैनल लगाए गए थे, लेकिन वे एक कमरे को भी रोशन करने के लिए भी पर्याप्त नहीं थे।” शिविर के घरों में अब बल्ब, ट्यूबलाइट और स्विच बॉक्स देखे जा सकते हैं।

30 वर्षीय सुनहरी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “हमारा बड़ा परिवार है। हमारे लिए इतने लंबे समय तक अँधेरे में रहना बेहद दर्दनाक था। खासकर हमारे बच्चों के लिए। अब जाकर हमारा दर्द कुछ कम हुआ है। हम भी अपने घरों में बिजली आने का इंतजार कर रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में बड़ी संख्या में पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू भारत चले आए थे। दिलचस्प बात यह है कि इन शरणार्थियों के कई घरों में भारतीय तिरंगा, भगवा झंडे के साथ-साथ बीजेपी का झंडा देखा जा सकता है। इन शरणार्थियों के लिए भारतीय नागरिकता और मतदान का अधिकार अभी भी एक सपना है। हालाँकि, शरणार्थियों के घरों के रोशन होने के बाद उम्मीद की एक किरण दिखाई देती है कि और चीजों का समाधान भी जल्द ही होगा।

शरणार्थियों के कई घरों में तिरंगा, भगवा झंडे के साथ-साथ बीजेपी का झंडा दिखाई दिया। (फोटो साभार: द प्रिंट)

एक अन्य पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी प्रधान नेहरू लाल का कहना है, “हम चार सौ लोग 2013 में यहाँ आए थे और तब से मैं इस झुग्गी में रह रहा हूँ। यहाँ लगभग 900 लोग रहते हैं और हमारे कई रिश्तेदार जो अभी भी पाकिस्तान में हैं, वे भारत आना चाहते हैं। हमें बिजली की आपूर्ति के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा और इसी तरह अन्य मुद्दे भी हैं। चीजें धीरे-धीरे बदलेंगी और शायद एक दिन हमें सरकार के समर्थन से भारतीय नागरिकता भी मिल जाएगी।”

पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी खुश

पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी शिविरों में धीरे-धीरे हो रहे बदलावों से काफी खुश नजर आ रहे हैं। हालाँकि, पानी की आपूर्ति, जल निकासी और सड़कों की स्थिति अभी तक यहाँ बेहद खराब है। क्लस्टर के अंदर एक छोटी सी दुकान चलाने वाले 70 वर्षीय राम चंदर कहते हैं, “10 साल से हमारी हालत ऐसी ही है और हमें अँधेरे में रहने की आदत हो गई थी। सौर पैनल कुछ राहत लेकर आए, लेकिन उतनी नहीं जितनी की हमें आवश्यकता थी। पानी की आपूर्ति, खुली नालियों और उचित सड़कों की कमी जैसे अन्य मुद्दे हमें आज भी परेशान करते हैं।”

इतनी कठिनाइयों के बावजूद, पाकिस्तानी हिंदू भारत को अपना घर कहने में बहुत गर्व महसूस करते हैं। वे पाकिस्तान में अपना सब कुछ छोड़कर भारत आए हैं, एक बेहतर जीवन की तलाश में। उन्हें उम्मीद है कि वे यहाँ बिजली की तरह अपने अन्य अधिकार भी हासिल करेंगे।

‘लादेन की मेजबानी और भारतीय संसद पर हमला कराने वाला देश UN में उपदेशक बन रहा है’: पाकिस्तान को जयशंकर ने दिया करारा जवाब, चीन को भी खरी-खरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए भारत (India) ने पाकिस्तान (Pakistan) को एक बार लताड़ा है। दरअसल, पाकिस्तान ने यूएन में फिर से कश्मीर का राग अलापा था। इस पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जारदारी को करारा जवाब दिया।

बिलावल ने बैठक में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। इसलिए विश्व व्यवस्था, शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षा परिषद कश्मीर मुद्दे पर अपने प्रस्तावों को लागू करे।

पाकिस्तान के इस कश्मीर राग से भारत भड़क गया। भारत की ओर से विदेश मंत्री जयशंकर ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकी संगठन अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन की मेजबानी करता है और अपने पड़ोसी देश की संसद पर हमला करवा सकता है, उसे यूएन में ‘उपदेशक’ बनने की कोई जरूरत नहीं है। 

विदेश मंत्री जयशंकर ने 2001 में हुए संसद हमले को याद करते हुए, “18 साल पहले 13 दिसंबर को पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने दिल्ली में संसद पर हमला किया था। आतंकियों की इस फायरिंग में नौ लोगों की मौत हुई थी।”

इस दौरान विदेश मंत्री ने चीन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तरफ दुनिया मिलकर आतंकवाद का मुकाबला कर रही है, वहीं इन गतिविधियों की साजिश रचने और उसे अंजाम देने वालों बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग किया जा रहा है और उसे उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने ऐसा कहकर चीन की तरफ इशारा किया था। बता दें कि पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए भारत और अमेरिका कई बार यूनएन में प्रस्ताव ला चुके हैं। वहीँ, चीन इन प्रस्तावों पर अड़ंगा डालकर पाकिस्तान का पक्ष लेता रहा रहा है।

जयशंकर ने बुधवार (14 दिसंबर 2022) को यूएन में बोलते हुए कहा, “संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता इस समय की प्रमुख चुनौतियों पर हमारी प्रभावी प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है, फिर चाहे वह महामारी हो, जलवायु परिवर्तन हो या आतंकवाद की।” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में संशोधन का भी मुद्दा उठाया।

बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान की विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खार ने भारत पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया था। हिना ने कहा था कि पाकिस्तान में जारी आतंकी गतिविधियों में भारत शामिल है।

क्या आप उस मेजर को जानते हैं जिन्होंने बिना खून-खराबे तवांग को भारत में मिलाया: नेहरू थे गुस्सा, 70 साल बाद मोदी राज में मिला सम्मान

चीन अपनी आदतों के कारण पूरे विश्व में फजीहत झेल रहा है। 9 दिसंबर को उसने अपने 600 फौजियों को भेजकर भारत के इलाके में घुसाने का प्रयास किया था, लेकिन भारतीय सैनिकों की मुस्तैदी के कारण उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा और वह सब सीमा से वापस लौट गए। घटना की वीडिया आने के बाद जहाँ चीनी फौजियों की दुनिया भर में फजीहत हुई, वहीं भारतीय सैनिकों की बहादुरी की तारीफें चारों ओर होने लगीं। इस बीच जो एक और चीज चर्चा में आई वो है- अरुणाचल प्रदेश का तवांग इलाका। 

तवांग में चीनी फौजी, भारतीय सैनिकों से झड़प करके इसलिए घुसना चाहते थे ताकि यहाँ से वो एलएसी के साथ तिब्बत पर निगरानी रख सकें और बाद में अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोंके। जबकि भारतीय सेना का एक सीधा मकसद चीनियों से उस इलाके की रक्षा करना था जिसका विलय 71 साल पहले बिन खून खराबे के शांतिपूर्ण ढंग से भारत में हुआ था।

मौजूदा जानकारियों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश का तवांग पहले तिब्बत प्रशासन का हिस्सा हुआ करता था। 1951 में ये भारत का हिस्सा बना और इसका पूरा श्रेय भारत के एक महान सैन्य अधिकारी को गया जिनका नाम- मेजर रालेंगनाओ बॉब खातिंग था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू को नाराज करके और सरदार पटेल के रास्ते पर चलते हुए तवांग को भारत से मिलाया था। आइए आज उन मेजर बॉब की कहानी जानते हैं…

मेजर बॉब काथिंग और तवांग का भारत में विलय

तत्कालीन नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा) के सहायक राजनीतिक अधिकारी रहे खातिंग का जन्म मणिपुर के तंगखुल नगा समुदाय में हुआ था। उन्होंने बिना किसी खून-खराबे के जनवरी 17, 1951 को तवांग को भारत में मिलाने का कार्य किया था। इस काम में असम राइफल्स के 200 जवानों ने उनका साथ दिया था। तब असम के राज्यपाल रहे जयरामदास दौलतराम के आदेश पर ये हुआ था। उससे पहले तवांग स्वतंत्र तिब्बत प्रशासन का हिस्सा हुआ करता था।

तवांग का भारत में विलय कराने वाले मेजर रालेंगनाओ बॉब खातिंग ने इंडियन फ्रंटियर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAFS) के पहले अधिकारी, नगालैंड के मुख्य सचिव और विदेश में आदिवासी समुदाय के पहले भारतीय राजदूत के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। लेकिन उन्हें तवांग उपलब्धि के लिए कभी सम्मानित नहीं किया गया। उन्हें पद्मश्री और ब्रिटिश सरकार की तरफ से मेंबर ऑफ ब्रिटिश एंपायर सम्मान मिला था। उनके बेटे जॉन भी IRS की सेवा से रिटायर हो चुके हैं।

मेजर रालेंगनाओ बॉब खातिंग के जीवन की बात करें तो उनकी 5वीं तक की शिक्षा-दीक्षा एक स्थानीय मिशनरी स्कूल में हुई थी। उनकी बौद्धिक क्षमता के कारण असम की तत्कालीन राजधानी शिलॉन्ग के सरकारी हाई स्कूल में पढ़ने के लिए उन्हें स्कॉलरशिप मिला। गुवाहाटी के बिशप कॉटन कॉलेज से स्नातक की डिग्री पाने वाले वो मणिपुर के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जो जनजातीय समुदाय से आते थे। इसके बाद वो असम के दर्राम स्थित बारासिंघा में एक स्कूल खोल कर पढ़ाने लगे। तब एक ब्रिटिश अधिकारी ने उन्हें उखरुल हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक बना दिया। 1939 में दूसरे विश्व युद्ध के समय उन्होंने सेना में शामिल होने का फैसला लिया। 5 फ़ीट 3 इंच के बॉब ‘किंग्स कमीशन’ पाने वाले पहले मणिपुरी थे।

सेना में भर्ती के दौरान उनकी क्षमताओं के कारण उनकी हाइट आड़े नहीं आई, लेकिन उन्हें इसके लिए दिक्कतों का सामना ज़रूर करना पड़ा। उन्होंने मेजर केएस थिमैय्या (आज़ादी के बाद भारतीय सेना के प्रमुख) के नेतृत्व में प्रशिक्षण लिया और फिर 19वीं हैदराबाद रेजिमेंट (बाद में 7वाँ कुमाऊँ रेजिमेंट) में शामिल हुए। जोरहाट में लॉजिस्टिक्स अधिकारी के रूप में काम करते हुए उन्होंने यूएस आर्मी एयर फोर्सेज (USAAF) की जापान की सेना के खिलाफ सहायता की।

बर्मा रोड में मणिपुरी जनजातीय समूहों के लोगों ने इस युद्ध में ब्रिटिश सेना के लिए गाइड का काम किया था। मणिपुर के महाराजा ने बर्मा के आक्रमण को ध्यान में रखते हुए भारत के साथ विलय का फैसला लिया और 1949 में ये एक भारतीय राज्य बना। 1950 में उन्होंने असम के तत्कालीन राज्यपाल अकबर हैदरी के निवेदन पर असम राइफल्स में सेवाएँ दी। तब असम-तिब्बत भूकंप के कारण इलाके में काफी बुरी स्थिति थी।

उन्होंने राहत कार्यों में बड़ी भूमिका निभाई। इसके बाद वो अरुणाचल प्रदेश में असिस्टेंट पॉलिटिकल अधिकारी बने और उनकी कूटनीति के सब कायल हो गए। जनवरी 17, 1951 को उन्होंने तवांग की तरफ मार्च किया। उन्होंने वहाँ के गाँवों के बुजुर्गों से बात की, तिब्बत के अधिकारियों से मिले और तिब्बती प्रशासन द्वारा मोनपा जनजातीय समुदाय पर लगाए कड़े टैक्सों की समीक्षा की। उनके तवांग दौरे के दौरान ही पीएम नेहरू ने अपने विदेश सचिव को एक पत्र लिखा। उन्होंने इस पत्र में लिखा था,

“मैं लगातार रक्षा समिति द्वारा उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर हो रही गतिविधियों के बारे में सुन रहा हूँ। इससे तिब्बत और नेपाल की सीमा पर हलचल है। इन मामलों को कभी मेरी राय के लिए मेरे सामने नहीं लाया गया। असम के राज्यपाल और अन्य लोग निर्णय ले रहे हैं। हमारे तवांग में जाकर वहाँ का नियंत्रण लेने से अंतरराष्ट्रीय समस्याएँ आ सकती हैं, मैं पहले भी कह चुका हूँ। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि बिना मेरी जानकारी के ये सब कैसे हो रहा है।”

लेकिन ये सब उस दूरदर्शी नेता कहने पर हो रहा था, जिनका असामयिक निधन हो गया लेकिन उनकी नीतियाँ अब भी देश का भला कर रही थीं। सरदार पटेल ने अपने जीवनकाल में ही जयरामदास दौलतराम और मेजर बॉब को कह दिया था कि नेहरू से राय-मशविरा किए बिना ही ये ऑपरेशन चलाया जाए, क्योंकि वो दूसरी कश्मीर समस्या नहीं चाहते थे। उन्होंने 800 किलोमीटर की म्यांमार सीमा की समस्याएँ भी सुलझाई।

पीएम मोदी के राज में मिला मेजर बॉब को सम्मान

भारत को मजबूत बनाने में मेजर बॉब खातिंग ने अपना इतना महत्वपूर्ण योगदान दिया। लेकिन उसके बावजूद 70 साल तक वो किसी भी सम्मान से अछूते रहे। पिछले वर्ष 14 फरवरी 2021 उनके सम्मान में इम्फाल में एक स्मारक का अनावरण हुआ था। उस कार्यक्रम में पूर्व सीडीएस जनरल विपिन रावल, अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, मेघालय के मुख्यममंत्री कोनराड संगमा, केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) बीडी मिश्रा भी मौजूद थे।

सुशासन बाबू! हम बिहारियों को मार डालिए, अपने बड़े भाई की तरह रौंद डालिए; पर हमारे बिहार को माफ कर दीजिए

​प्रिय सुशासन बाबू,

सिद्धांत। शुचिता। मर्यादा। आत्म नियंत्रण… ये कुछेक शब्द याद आ रहे हैं जो कभी नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के पर्यायवाची थे। हमें याद है कि कभी राबड़ी देवी ने सार्वजनिक तौर पर ललन सिंह से आपका ‘रिश्ता’ बता दिया था, फिर भी ये शब्द आपके भूषण बने रहे। आपके बड़े भाई कहते रहे कि आपके ‘पेट में दाँत है’ पर राजनीतिक फायदे के लिए आपने शब्दों की मर्यादा कम नहीं होने दी।

इसी भरोसे में हम बिहारियों ने आपको सुशासन बाबू बनाया। मोदी लहर पर सवार बिहार ने उसके खिलाफ खड़े होने पर भी आपको नजरों से नहीं उतारा। तब भी आपके लिए खड़ा हो गया, जब आप उसी भाई की गोद में जाकर बैठ गए, जिसके जंगलराज से त्रस्त बिहार ने आपको गोद में बिठाया था। स्नेह की वर्षा की थी।

हमने यह सब कुछ आपको यह जानते हुए भी दिया कि आपने विकास की कोई गंगा नहीं बहाई है। शिक्षा और स्वास्थ्य को तंदुरुस्त नहीं किया है। उद्योग और रोजी-रोजगार के अवसर पैदा नहीं किए हैं। पलायन को थामा नहीं है।

हम बिहारियों ने फिर भी आपको सुशासन बाबू कहा। जानते हैं क्यों? क्योंकि हम जैसे बड़े होते बच्चों ने सड़कें नहीं देखी थी। आपने सड़कें बनवा दी। हम ढिबरी युग में कैद थे, आपने बिजली दे दी। हमें घर से निकलते डर लगता था, आपने कुकुरमुत्ते की तरह उगे गुंडों को जेल में बंद कर दिया। हम घर से बोरा लेकर पढ़ने जाते थे, पेड़ के नीचे हमारी कक्षा लगती थी, आपने बेंच-डेस्क और पक्की कक्षा दे दी।

यह आपका सौभाग्य था कि आपको बिहार उस वक्त और इतना बेहाल मिला कि यह सब करके भी आप सुशासन बाबू हो गए। आईटी क्रांति के दौर में इन कार्यों के दम पर तो दोबारा सत्ता नहीं मिलती, आपको बिहार डेढ़ दशक से भी अधिक समय से मिला हुआ है। यह आपकी राजनीतिक सूझबूझ या पलटी मारने की कला की सफलता कम, हम बिहारियों के उदार चरित्र की कहानी ज्यादा है। पर आप तो गजब आत्ममुग्ध हुए पड़े हैं।

इस आत्ममुग्धता में आपको उनकी चीत्कार तक नहीं सुनाई पड़ रही जो चंदा करके अपने परिजनों का दाह संस्कार कर रहे हैं। आपने सही कहा जो पिएगा वो मरेगा। पर यह भी सच है कि जो नहीं पिएगा वो भी मरेगा। आप भी कोई अश्वत्थामा तो हैं नहीं।

वैसे भी बिहार शराबबंदी का विरोधी नहीं है। बिहार उस व्यवस्था का विरोधी है, जिसमें थाने के पास जहरीली शराब बिकती है और उसे पीकर लोग मर जाते हैं। बिहार उस व्यवस्था का विरोधी है, जिसमें गली-गली शराब मिलती है। ये सच सदन में किसी मुख्यमंत्री के तू तड़ाक पर उतर जाने से नहीं खत्म हो जाते।

बिहार में शराब कहाँ से आती है? कौन बेचते हैं? किन्हें कमीशन मिलता है? कमीशन के रेट कैसे बढ़ाए जाते हैं? शराब के नाम पर कैसे लोगों को पुलिस फँसाती है? इनके जवाब आपको बिहार की किसी भी गली में मिल जाएँगे। इसलिए यह तो नहीं माना जा सकता कि आपको इसकी खबर न होगी। तो क्या वह दावा सही है जो बिहार के हर चौक-चौराहे पर होते हैं। यह दावा है कि आपकी पार्टी दारू और बालू की कमाई से चल रही है। आपने खास पुलिस अधिकारी को इससे उगाही का काम दे रखा है। वैसे भी आप दारू के इतने ही विरोधी होते तो अपने पहले कार्यकाल में हर चौक-चौराहे पर ठेके खोलकर बिहार के गाँव-गाँव में शराबी पैदा न किए होते। ये आपका ही कार्यकाल है जिसने बिहार की पूरी एक पीढ़ी को नशेड़ी बनाया है।

हम जानते हैं कि अंतरात्मा, लोकलाज, आदर्श इन सबकी आपने समय के साथ तिलांजलि दे दी है। इसलिए आप चाहें तो हम बिहारियों को किश्तों में मारने की कृपा करने की जगह एक ही बार में रेत दीजिए। सीधे कह दीजिए कि जो बिहार में रहेगा वो मरेगा। बिहार के बेटों को जंगलराज की तर्ज पर तेजाब से नहला दीजिए। लेकिन प्लीज हमारे बिहार को बख्श दीजिए।

भले आपके बड़े भाई की वजह से हम जड़ों से कटकर जिंदा रहने को मजबूर हैं। लेकिन बिहार हम सबके भीतर आज भी जिंदा है। ब्रह्म बाबा की कसम आप जब-जब इस बिहार को आरी से काटते हैं, हम दूर होकर भी दर्द से तड़पते हैं।

आपका
वो बिहारी जो कभी सुशासन पर निहाल था