असम की एक कोर्ट ने पुलिस को एआईयूडीएफ चीफ बदरुद्दीन अजमल के खिलाफ विवादित बयान के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट का यह आदेश असम जातीय परिषद (एजेपी) के उपाध्यक्ष दुलु अहमद की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया।
दरअसल, 03 दिसंबर, 2022 को दुलु अहमद, बदरुद्दीन अजमल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने हतीगाँव पुलिस स्टेशन पहुँचे थे। जहाँ उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। इसके बाद अहमद ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिका के अनुसार दुलु अहमद ने 6 दिसंबर, 2022 को गुवाहाटी पुलिस आयुक्त से भी संपर्क किया था लेकिन इसके बाद भी उन्हें मदद नहीं मिली।
याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मामले में जाँच आवश्यक है। असम की कामरूप कोर्ट ने 13 दिसंबर 2022 को अपने आदेश में पुलिस को एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन के विवादास्पद टिप्पणी की जाँच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए भी कहा था।
ऑल यूनियन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने 02 दिसंबर, 2022 को विवादित बयान देते हुए हिंदुओं को बच्चों के मामले में मुसलमानों का फॉर्मूला अपनाने की सलाह दी थी। करीमगंज में एक कार्यक्रम के दौरान सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा था कि मुस्लिम लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में हो जाती है, लेकिन हिंदू लड़कियों की शादी 40 साल की उम्र में भी नहीं होती। हिन्दू 40 साल की उम्र तक अवैध पार्टनर रखते हैं। बच्चे नहीं पैदा करते और पैसे बचाते हैं।
इतना ही नहीं अजमल ने लव जिहाद को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भी टिप्पणी की थी। अजमल ने कहा था, “मुख्यमंत्री देश के बड़े नेताओं में से एक हैं। आप भी चार-पाँच मुस्लिम लड़कियों से लव-जिहाद कीजिए। हम आपका स्वागत करेंगे और लड़ाई भी नहीं करेंगे।” बयान के बाद विवाद बढ़ता देख अजमल ने माफी भी माँग ली थी। उन्होंने मीडिया के सामने कहा था कि मैं अपने बयान पर शर्मिंदा हूँ।
अरुणाचल प्रदेश के तवांग (Twang, Arunachal Pradesh) में चीनी सेना के साथ झड़प के अगले ही दिन भारत ने शक्तिशाली अग्नि-5 अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (Agni-V ICBM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस मिसाइल की जद में पूरा चीन आ जाएगा। 5,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली इस मिसाइल का पूरी रेंज के साथ पहली बार परीक्षण किया गया है।
ओडिशा के अब्दुल कलाम आजाद द्वीप से लॉन्च अग्नि-5 मिसाइल परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है। 17.5 मीटर लंबी इस मिसाइल का वजन 50,000 किलोमीटर है और इस पर 1,500 किलोग्राम का न्यूक्लियर वारहेड लगाया जा सकता है। यह ध्वनि की 24 गुना तेज गति, यानी एक सेकेंड में 8.16 किलोमीटर की गति से अपने लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने संयुक्त रूप से तैयार किया है। इस मिसाइल में तीन चरण वाले रॉकेट बूस्टर का इस्तेमाल किया गया है, सॉलिड फ्यूल से संचालित होते हैं। अग्नि-5 मिसाइल 29,401 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है।
इस मिसाइल की सबसे खास बात इसकी MIRV (Multiple Independently-targetable Reentry Vehicles) तकनीक है, जो इसे एक साथ कई निशाने को भेदने में सक्षम बनाती है। इसका अर्थ है कि इस मिसाइल के ऊपर 10 वारहेड तक लगाए जा सकते हैं और उनका उपयोग अलग-अलग रेंज के ठिकानों को तबाह करने के लिए किया जा सकता है।
इसमें अपने लक्ष्य को सटीकता के साथ भेदने के लिए रिंग लेजर गाइरोस्कोप इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, जीपीएस, NavIC सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम जैसे अत्याधुनिक तकनीक लगे हुए हैं। इसे मोबाइल लॉन्च पैड से भी छोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही इसे ट्रक पर लाद कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी ले जाया जा सकता है।
इस मिसाइल की रेंज में चीन की राजधानी बीजिंग और प्रमुख व्यापारिक शहर शंघाई सहित पूरा चीन है। इतना ही नहीं, इस मिसाइल की जद में पूरा एशिया और यूरोप का कुछ भाग आ जाएगा। इससे यूक्रेन, रूस, जापान, इंडोनेशिया तक हमला किया जा सकता है।
अग्नि-5 मिसाइल की परिकल्पना 2007 में वैज्ञानिक एम. नटराजन ने की थी। इसके बाद इसे मूर्त रूप देने की कोशिश शुरू हुई। अग्नि-5 का अब तक 8 बार सफल परीक्षण हो चुका है। सबसे पहला परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को किया गया था। इसका अंतिम परीक्षण 10 दिसंबर 2018 को किया गया था। रक्षा मंत्रालय ने इसे रूटीन टेस्ट बताया है।
अग्नि-5 मिसाइल को स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड (Strategic Forces Command) में की गई है। इस कमांड के जरिए प्रमुख मिसाइलों का संचालन किया जाता है, जिनमें पृथ्वी, अग्नि और समुद्र में तैनात धनुष, सागरिका आदि जैसी मिसाइलें शामिल हैं।
अग्नि-5 के बाद भारत के वैज्ञानिक अग्नि-6 को विकसित करेंगे। इसकी मारक क्षमता 8,000 किलोमीटर से 12,000 किलोमीटर तक होगी। इसके बाद भारत ‘सूर्य’ नामक अंतर-महाद्वीपीय मिसाइल को विकसित करेगा, जिसकी मारक क्षमता 12,000 किलोमीटर से 16,000 किलोमीटर तक होगी।
बॉलीवुड की आने वाली फिल्म पठान के गाने बेशरम रंग को लेकर लोगों की नाराजगी के बीच शहरुख खान का बड़ा बयान सामने आया है। कोलकाता फिल्म फेस्टिवल में शिरकत करने पहुँचे शाहरुख खान ने फिल्म के बायकॉट के कॉल के बीच अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर बायकॉट की कॉल को नकारात्मकता करार दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सिनेमा की भूमिका काफी अहम है और सोशल मीडिया की जो नकारात्मकता है उसे सिनेमा ही दूर कर सकती है।
आपको बता दें कि कोलकाता में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत हुई है। इसमें बॉलीवुड के कई सितारों के साथ शाहरुख खान भी पहुँचे हैं। फिल्म फेस्टिवल में अपने संबोधन के दौरान शाहरुख खान ने सोशल मीडिया के बारे में अपनी राय रखी। आज के जमाने और सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए शाहरुख खान ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया का इस्तेमाल कलेक्टिव नैरेटिव देने के लिए किया जाता है।
उन्होंने कहा, “मैंने कहीं पढ़ा था, नकारात्मकता सोशल मीडिया के यूज को बढ़ाती है। इसके अलावा नकारात्मकता से सोशल मीडिया के व्यावसायिक मूल्य (commercial value) में भी वृद्धि होती है।” उन्होंने कहा कि इस तरह की कोशिशें सामूहिक आख्यान (collective narrative) को विभाजित और भटकाने का काम करती हैं। शाहरुख खान ने कहा,”दुनिया चाहे कुछ भी करे, हम जैसे लोग सकारात्मक रहेंगे।”
No matter what the world does, people like us will stay positive: Shah Rukh Khan at Kolkata International Film Festival pic.twitter.com/RA9BUAiKtN
शाहरुख ने कहा कि फिल्मों की भूमिका आज के दौर में और भी अहम हो गई है और सोशल मीडिया की नकारात्मकता को सिनेमा ही दूर करेगा।
पठान का गाना रिलीज होने के बाद विवाद
आपको बता दें कि हाल ही में पठान फिल्म का गाना बेशरम रंग रिलीज हुआ था। गाना रिलीज होने के बाद से फिल्म के बायकॉट की माँग और तेज हो गई है। गाने पर अश्लीलता फैलाने के साथ-साथ भगवा रंग को अपमानित करने का इल्ज़ाम लगा है। गाने के कई दृश्यों में दीपिका को भगवा रंग की बिकनी पहने दिखाया गया है। जिसे लेकर लोग सोशल मीडिया पर आपत्ति जता रहे हैं। लोग गाने के बोल ‘बेशरम रंग’ को दीपिका के बिकनी के रंग से जोड़ कर शाहरुख व फिल्म निर्माताओं पर जानबूझकर भगवा रंग को बदनाम करने का आरोप लगा रहे हैं। देश भर में बड़े पैमाने पर फिल्म के बायकॉट की माँग के बीच पहली बार शाहरुख खान ने कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रतिक्रिया दी।
#WATCH | Social media often driven by a certain narrowness of view that limits human nature to its baser self…I read somewhere-negativity increases social media consumption…Such pursuits enclose collective narrative making it divisive & destructive: Shah Rukh Khan at Kolkata pic.twitter.com/LO1X5YUXh4
फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन पहले से उपस्थित थे। उनके अलावा बॉलीवुड के कई और कलाकार समारोह का हिस्सा बने। बता दें कि 22 दिसंबर 2022 तक चलने वाले इस फिल्म फेस्टिवल में दस स्थानों पर 42 देशों की 52 शॉर्ट फिल्में और डाक्यूमेंट्री सहित करीब 183 फिल्में दिखाई जाएँगी।
उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) को गाजीपुर की अदालत ने 10 साल कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कुल मामलों की सुनवाई में कॉन्स्टेबल रघुवंश सिंह और गाजीपुर के ASP सहित कई लोगों की हत्या शामिल है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनात (Yogi Adityanath) ने अपने पहले कार्यकाल में माफियाराज को खत्म करने का संकल्प लेते हुए उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की बात कही थी। इसके बाद से प्रदेश में पुलिस-प्रशासन ने गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी थी। इनमें से एक मुख्तार अंसारी भी है।
माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी की पिछले तीन महीने में यह तीसरी सजा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 21 सितंबर 2022 को जेलर एसके अवस्थी पर पिस्टल तानने और उन्हें धमकाने के मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। साल 2003 के इस मामले में कोर्ट ने अंसारी को 7 साल कैद की सजा सुनाई है।
इसी तरह 23 सितंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने साल 1999 के एक मामले में मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। अंसारी को 5 साल की सजा सुनाने के साथ-साथ कोर्ट ने 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था। जेल अधीक्षक रमाकांत तिवारी की 4 फरवरी 1999 को हत्या कर दी गई थी।
मुख्तार अंसारी पिछले कुछ समय से यूपी के बांदा जेल में बंद है। उस पर हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, धमकी देने सहित गैंगस्टर ऐक्ट एवं अन्य ऐक्ट में 59 मामले दर्ज हैं। इनमें से 20 मामले अदालतों में अभी लंबित हैं।
मुख्तार अंसारी के अलावा, उसके गिरोह के 282 लोगों पर पुलिस कार्रवाई चल रही है। इनमें से 126 पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है, जबकि 66 पर गुंडा एक्ट में कार्रवाई हुई है। मुख्तार अंसारी के 5 साथियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है।
विभिन्न मामलों में कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्तार अंसारी की लगभग 290 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। वहीं, प्रशासन ने लगभग 283 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति को नष्ट किया है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में मोहम्मद राशिद ने साधु का चोला धारण कर महिला के साथ अश्लील हरकत की। महिला ने आरोप लगाया कि ज्योतिषी के भेष में राशिद ने उसे बुरी नीयत से छुआ। महिला के शोर मचाने के बाद जब लोगों ने उसे पकड़ा तो उसकी सच्चाई सामने आई। वह कोई ज्योतिषी नहीं बल्कि मोहम्मद राशिद नाम का मनचला निकला।
मामला इंदौर के बाणगंगा इलाके का है। जहाँ एक ज्योतिषी के भेष में राशिद हाथ देखकर भविष्य बताने का दावा करने लगा। इसपर महिला ने भी उसे हाथ दिखाया। राशिद ने महिला का हाथ देखने के बहाने उसे गलत तरीके से छूने लगा। उसने महिला के शरीर पर तिल देखने की बात कहते हुए अश्लील हरकत शुरू कर दी। जिसके बाद महिला ने उसे डाँटा और आस पास के लोगों को बुला लिया। लोगों ने ज्योतिषी को पकड़ कर उसका नाम पूछा, ज्योतिषी ने मौजूद लोगों को अपना नाम मोहम्मद राशिद बताया और मौके से फरार हो गया।
घटना के बाद पीड़िता ने थाने में जाकर मामला दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। जाँच में पता चला है कि साधु के भेष में छेड़-छाड़ करने वाला आरोपित राशिद उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। जिसके खिलाफ छेड़-छाड़ का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
चूड़ी बेचने आए तस्लीम ने बच्ची से की थी बदसलूकी
आपको बता दें कि इंदौर में नाम बदलकर और हिंदू वेश भूषा धारण कर छेड़खानी का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी एक चूड़ीवाला अपना नाम बदलकर नाबालिग लड़की को गलत तरीके से छू कर परेशान कर चुका है। जिसके बाद लोगों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी थी। चूड़ीवाले की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल किया गया था। बाद में वीडियो को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ और सच्चाई बाहर आई।
मामला अगस्त 2021 का है। जब इंदौर में चूड़ीवाले की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जब मामले की जाँच हुई तो पता चला कि 25 वर्षीय चूड़ी विक्रेता तस्लीम अली के ने चूड़ी बेचने के बहाने 13 साल की बच्ची को गलत तरीके से छूआ और परेशान करने लगा। अली के खिलाफ दर्ज शिकायत में बताया गया कि वह रविवार दोपहर करीब दो बजे लड़की के घर आया था और उस दौरान बच्ची के पिता घर से बाहर थे। पीड़िता के अनुसार अली ने उसे चूड़ियाँ बेचने के लिए अपनी पहचान छुपाई और ‘आधा जला’ आधार कार्ड दिखाते हुए खुद को गोलू बताया। जैसे ही बच्ची की माँ पैसे लेने गई, चूड़ी-विक्रेता ने चूड़ी पहनाने के बहाने बच्ची का हाथ पकड़ लिया। इतना ही नहीं उसने बच्ची के गालों को भी गलत तरीके से छुआ।
मध्य प्रदेश के सीहोर में ध्वस्त मंदिरों के अवशेष को जोड़कर उन्हें दोबारा स्थापित किया जा रहा है। ये मंदिर 11वीं शताब्दी के परमार क्षत्रियों के शासनकाल के हैं और पिछले 300 सालों से जमीन के नीचे दबे पड़े थे। इनमें से एक लगभग 51 फीट ऊँचे भगवान शिव की मंदिर को स्थापित कर दिया गया है। इसमें 41 लाख रुपए खर्च हुए हैं।
सीहोर के जिले बीलपान गाँव के नजदीक देवबड़ला इलाके में इस मंदिर को स्थापित किया गया है। यह इलाका जिला मुख्यालय से 75 किलोमीटर दूर है और वहाँ पहाड़ी इलाका होने के कारण यहाँ तक पहुँचना बेहद दुर्गम है।
पुरातत्व विभाग (ASI) को जानकारी मिली की देवबड़ला इलाके में प्राचीन मंदिर के अवशेष मिल रहे हैं। इसके बाद विभाग सक्रिय हो गया और इसके बिखरे एवं दबे टुकड़ों को जोड़कर फिर से मंदिर को खड़ा करने का बीड़ा उठाया।
साल 2016 में पुरातत्व विभाग ने यहाँ खुदाई शुरू की थी। खुदाई के दौरान चार मंदिरों की नींव का पता चला था। पुरातत्व विभाग के अधिकारी जीपी चौहान के अनुसार, खुदाई के दौरान पहले चार मंदिरों का बेस मिला। 5वें मंदिर की नींव तलाश की जा रही थी, उसी दौरान चार और मंदिरों का पता चला। इस तरह यहाँ कुल 9 मंदिरों का पता चला है।
खुदाई के दौरान यहाँ भगवान की विभिन्न प्रतिमाएँ प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें नटराज, उमाशंकर, जलधारी, नंदी, विष्णु, लक्ष्मी की प्रतिमाएँ शामिल हैं। इस तरह कुल 30 प्रतिमाएँ मिल चुकी हैं। इन प्रतिमाओं में कुछ खंडित हैं, जबकि अन्य अच्छी हालत में हैं।
हालाँकि, देवबड़ला के पहाड़ी इलाके में 200 फीट से अधिक क्षेत्र में खुदाई का काम अभी भी जारी है। खुदाई प्रतिमाओं के साथ-साथ अन्य तरह की कलाकृतियाँ के भी मिलने की उम्मीद है। देवबड़ला का अर्थ है देवताओं की पहाड़ी। इसका मतलब है कि यहाँ धार्मिक गतिविधियाँ लंबे समय से संपन्न होती रही हैं।
पुरातत्व विभाग ने अनुमान है कि 18वीं सदी में ये मंदिर ध्वंस हुए थे। इन्हें किसी आक्रमणकारी ने हमले करके गिराए होंगे या फिर भी भूकंप में गिरे होंगे। हालाँकि, भूकंप में गिरने की गुंजाइश कम है। इसके बाद विध्वंस के 300 साल से मंदिरों के ये अवशेष भूमि में दबते चले गए।
देवबड़ला मंदिर समिति के अध्यक्ष ओंकार सिंह और कुँवर विजेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि भगवान शंकर का 51 फीट ऊँचा मंदिर बनकर तैयार हो गया है। इसे बनाने में अभी तक 41 लाख रुपए की लागत आई है। अब भगवान विष्णु के मंदिर पर काम हो रहा है।
ओंकार सिंह के अनुसार, भगवान विष्णु का यह मंदिर 35 फीट ऊँचा है और इसे बनाने में लगभग 16 लाख रुपए की लागत आएगी। यह मंदिर अगले साल तक बनकर पूरा हो जाएगा। इसके बाद अन्य मंदिरों को बनाने का काम होगा।
पुरातत्व विभाग के अधिकारी जीपी चौहान ने बताया कि इन भवनों को दोबारा स्थापित करने के लिए उसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसे उस काल में अपनाया जाता था। जीपी चौहान के मुताबिक, मंदिर के अवशेषों को उड़द की दाल, चूना, गुड़ जैसे लेपों से जोड़ा जा रहा है। इनमें मसाले की बेहद पतली लेयर भी लगाई जा रही है।
राहुल गाँधी चले जा रहे हैं। लोगों ने यह बात भारतीय मीडिया में राजनीतिक खबर के नाम पर दिखाई जा रही नौटंकी से जान ली है। उन्हें अखबार पढ़ते हुए, मोबाइल में न्यूज को स्क्रॉल करते हुए पता चल गया है कि राहुल गाँधी चल रहे हैं। मुख्यधारा मीडिया में और सोशल मीडिया पर एक वर्ग राहुल के इस चलने को लेकर इतना उत्साहित है कि उन्होंने बिन वजह इसे चर्चा का कारण बना रखा है। ऐसे लोगों से इस यात्रा का कारण पूछा जाए तो कोई जवाब नहीं मिलेगा क्योंकि कोई नहीं जानता कि राहुल चल क्यों रहे हैं, उनकी पदयात्रा का उद्देश्य क्या है?
हो सकता है कि राहुल गाँधी को लेकर भी लोगों में ऐसी ही दुविधा है। कोई नहीं जानता कि वह जो कर रहे हैं क्यों कर रहे हैं। कोई नहीं जानता कि बार-बार हारने के बावजूद वह चुनाव क्यों लड़ते हैं। देश की जनता ने साफ कर दिया है कि वे राहुल गाँधी को वोट नहीं देने वाली हैं। कॉन्ग्रेस कहीं चुनाव में विजयी होती भी है तो यह क्षेत्रीय नेताओं और कुछ समर्पित विधायकों के व्यक्तिगत प्रयासों के कारण, जो अपने शीर्ष नेतृत्व की तरह देश के लोगों को नाराज नहीं करते। इस तरह विजयी क्षेत्रीय नेता अपने शीर्ष नेतृत्व पर उपकार कर रहे हैं।
कोई नहीं जानता कि कॉन्ग्रेस के तथाकथित युवराज, पार्टी के लिए बड़े अभियानों की घोषणा करने के बाद छुट्टियों पर विदेश क्यों चले जाते हैं। राहुल कहाँ जाते हैं कोई नहीं जानता। कोई नहीं जानता कि राहुल ऐसे घोटालों को मुद्दा क्यों बनाते रहे जो हुए ही नहीं। कोई नहीं जानता राहुल ऐसे मुद्दों पर क्यों चीखते चिल्लाते रहे जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। राहुल “मेड इन जौनपुर, पटियाला और मेड इन छत्तीसगढ़ मोबाइल फोन” जैसे बेवकूफी से भरे भाषण दोहराते रहे, जबकि सभी यहाँ तक कि उनकी दादी भी जानती थीं कि उनका कोई मतलब नहीं है और इससे पार्टी को कभी भी वोट नहीं मिल सकता। राहुल गाँधी जो कुछ भी करते हैं, उसका कारण और उद्देश्य कोई नहीं जानता।
राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा भी इसी कड़ी की एक गतिविधि है जिसका असल में कोई मकसद और औचित्य नहीं है। विधानसभा चुनावों के समय जब कॉन्ग्रेस के कमजोर नेता और कार्यकर्ता गुजरात में एक मजबूत पार्टी से मुकाबला करने की कोशिश कर रहे थे, जब कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता हिमाचल में एक जोशिला चुनाव अभियान चला रहे थे उस वक्त युवराज राहुल राजनीतिक मोह माया से दूर दक्षिण में कहीं चल रहे थे।
भारत जोड़ो यात्रा में ऐसा नहीं है कि राहुल गाँधी बड़ी मुश्किलों से गुजर रहे हैं। यात्रा के लिए हर तरह की सुविधा से लैश शानदार कंटेनर तैयार किए गए हैं। यात्रा में शामिल हुए लोग अच्छे से भोजन पाते हैं। अच्छी नींद ले रहे हैं। राहुल गाँधी और यात्रा में शामिल लोगों के आराम, कपड़े, सुरक्षा और स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। उन्हें सारी सुविधाएँ प्राप्त हैं फिर भी यदि उनकी दाढ़ी लाल सिंह चड्ढा के आमिर खान की तरह बढ़ती जा रही है तो इसका कारण यह है कि वो अपनी दाढ़ी शौख से बढ़ा रहे हैं। सभी जानते हैं कि कंटेनर में शौचालय भी होते हैं।
राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे लक्ज़री कंटेनरों के अंदर अटैच्ड वॉशरूम और टॉयलेट (फोटो साभार इंडियन एक्सप्रेस)
जैसा कि हम सभी जानते हैं आमिर खान की फिल्म लाल सिंह चड्ढा का खूब प्रचार प्रसार किया गया। धूम-धाम से इसे रिलीज़ किया गया। परिणाम हम सभी जानते हैं। हम यह भी जानते हैं कि आमिर खान फिल्मों में अपने उपदेशों के लिए विख्यात हैं। उन्होंने शायद यही सोचा था कि जैसे उनके उपदेशों की वजह से पूर्व में उनकी फिल्में कामयाब होती रही हैं उसी तरह इस बार भी फिल्म सफल होगी और कोई ‘फ़ॉरेस्ट गंप’ को याद नहीं रखेगा, खास तौर से भारतीय दर्शक। उन्होंने सोचा कि फिल्म के हर दृश्य को कॉपी करके कुछ भारत-पाकिस्तान का मसाला लगाकर और हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई एकता की बातें कर के फिल्म को सफल बना लेंगे।
अफसोस कि अब भारतीय दर्शक उनके उपदेशों के झाँसे में नहीं आए। यह रीमेक एक शानदार फ्लॉप साबित हुई। जो गलती से फिल्म देखने पहुँच गए वो यही सोचते रहे कि आखिर इस लंबी फिल्म का क्या मतलब है। आमिर खान अपने बेतुके एक्सप्रेशन्स और असहनीय उपदेशों के साथ एक हॉलीवुड क्लासिक फिल्म को बर्बाद करके वास्तव में क्या करने की कोशिश कर रहे थे? हालाँकि, एक व्यक्ति ने शायद इस फिल्म को बहुत गंभीरता से देखा। राहुल गाँधी को भारतीय राजनीति में “लॉन्च” करने के लगभग सभी तरीके आजमाए जा चुके हैं, इसलिए उनके सलाहकारों ने शायद सोचा होगा कि एक बार और कोशिश करने में हर्ज क्या है? भारतीयों में वैसे भी तीर्थ यात्रा और पद यात्रा को लेकर सॉफ्ट कॉर्नर रहा है।
इसलिए राहुल ने चलना शुरू किया और 7 सितंबर से ही खबरों में बने हुए हैं। हर दिन कोई न कोई अनजान अभिनेत्री यात्रा में शामिल होती है उनके साथ कुछ कदम चलती है। अच्छी तस्वीरें लेने के लिए उनके आसपास फोटोग्राफर्स होते हैं। देश का हर नागरिक और उनकी दादी भी जानती हैं कि एक सांसद और एक पूर्व पीएम के बेटे के रूप में उन्हें टैक्स पेयर्स के पैसों से दी जाने वाली Z+ स्तर की सुरक्षा मिलती है। हीरो या हीरोइन बनने की चाह रखने वाले युवा खुद को धन्य मानते हैं यदि राहुल ने किसी अज्ञात कारण से उनका हाथ पकड़ लिया। तस्वीरें लिए जाने के बाद वे अपने रास्ते और राहुल अपने रास्ते चल देते हैं। अगली फोटो में राहुल फिर किसी दूसरे चेहरे के साथ हाथ थामे चलते नजर आते हैं। तस्वीरों में कभी राहुल किसी को गले लगाते भी नज़र आते हैं तो किसी को चूमते हुए भी देखे जाते हैं।
Some common & frequent activities & poses during #BharatJodaYatra are rahul Gandhi k!sssing,hugging, holding hands,crying etc. It seems this yatra is more of pics clicking with diff emotions. Why females cry when they see Raga.Acting has diff level all together pic.twitter.com/Z2rvemgh6C
इन नजारों की तुलना शादी के फोटोग्राफ्स से कर सकते हैं। शादी के रिसेप्शन में भी दूल्हा और दुल्हन के साथ फोटो खिंचवाने के लिए रिश्तेदार और दोस्त स्टेज पर आते हैं, मुस्कुराते हैं, क्लिक करवाते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। इस यात्रा में भी यही हो रहा है “काम की चाह में पब्लिसिटी तलाश रहे छोटे-मोटे एक्टर्स, आउट-ऑफ-जॉब एक्टर्स, खारिज किए जा चुके पेशेवर प्रदर्शनकारी, मौसमी राजनेता, शिकागो से छुट्टी पर पहुँचे इकोनॉमिक एक्सपर्ट, गाली-गलौज करने वाले स्टैंड-अप कॉमेडियन” हर कोई आता है, मुस्कुराता है और राहुल गाँधी के साथ तस्वीर खिंचवाकर चल देता है।
Joined @bharatjodo yatra today & walked with @RahulGandhi. The energy, commitment & love is inspiring! The participation & warmth of common people, enthusiasm of Congress workers & RG’s attention & care toward everyone & everything around him is astounding! ✊????✨ @INCIndiapic.twitter.com/k3RqKxT1gh
राहुल गाँधी चले जा रहे हैं, और गुजरात में कॉन्ग्रेस का सफाया हो गया। राहुल गाँधी चल रहे हैं और हिमाचल में जीत के बावजूद पार्टी आपसी कलह में फँसी हुई है। पंजाब में कॉन्ग्रेस की कलह और चुनावों में उसका हश्र हम सभी देख चुके हैं। हम देख रहे हैं कि कैसे राजस्थान में गहलोत और पायलट बारी-बारी से नाराज होने वाले फूफा की भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन पार्टी के युवराज को इसकी कोई परवाह नहीं है। इसके बावजूद उन्हें चलते हुए दिखाया जा रहा है। साफ-साफ कहें तो भारतीय अब उस सच को स्वीकार कर चुके हैं कि राहुल गाँधी दिखाए चलते रहेंगे। सरकारें आएँगी और जाएँगी, कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष आएँगे और जाएँगे, चुनाव भी आएँगे और जाएँगे लेकिन राहुल गाँधी खबरों में हमेशा बने रहेंगे। उन्हें युथ आइकन करार दिया जाता रहेगा। यह कहा जाता रहेगा कि वे अभी सीख रहे हैं। राहुल के साथ फोटो खिंचवाने वाले उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री बताते रहेंगे और गाँधी परिवार के साथ अपनी निकटता साबित करते रहेंगे।
पश्चिम बंगाल की पुलिस ने जब ‘बांग्लादेशी घुसपैठिया’ बताकर उसे पकड़ा था, तब उसकी उम्र 20 साल थी। उसकी शादी होनी थी। अब हाई कोर्ट ने जब उसे ‘भारतीय’ माना है, तब वह 27 साल की हो चुकी है। इस बीच उसके कई महीने जेल में कटे। ट्रायल कोर्ट ने तो 4 साल की सजा भी सुना दी थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जाँच में लापरवाही की वजह से इस महिला को यह साबित करने में सात साल लगे कि वह बांग्लादेशी नहीं, बल्कि भारतीय है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा है कि ‘जीने के अधिकार में निष्पक्ष जाँच और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार’ भी शामिल है।
इस महिला को 2015 में महिला पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय चेकपोस्ट के पास से गिरफ्तार किया गया था। उसने खुद को भारतीय बताया। लेकिन उसकी नहीं सुनी गई। बाद में ट्रायल कोर्ट ने उसे घुसपैठ के आरोप में चार साल की सजा सुनी दी।
9 पन्नों के आदेश में जस्टिस सिद्धार्थ रॉय चौधरी ने कहा है, ”जीने के अधिकार में निष्पक्ष जाँच और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार भी शामिल है। इस मामले में दोनों का पालन नहीं हुआ। युवा लड़की को प्रताड़ित होना पड़ा।” साथ ही यह भी कहा कि जाँच अधिकारी को यह पता था कि लड़की भारतीय है। फिर भी उसका केस ट्रायल के लिए भेजा गया। जाँच में घाेर लापरवाही की गई।
महिला का केस लड़ने वाले वकील आशीष चक्रवर्ती ने बताया कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उसकी एक भी दलील नहीं मानी। पुलिस ने उस पर विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत आरोप लगाया। महिला के पिता ने अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई थी। बाद में उन्होंने ट्रायल कोर्ट को बताया था कि उसने मैट्रिक की परीक्षा पास की है और उसके पास राशन कार्ड भी है। महिला के पिता के दावाें का तीन सरकारी अधिकारी ने समर्थन भी किया था।
गिरफ्तारी के बाद महिला को डेढ़ महीना जेल में रहना पड़ा। सजा सुनाए जाने के बाद भी 11 महीने से ज्यादा समय तक वह जेल में रही। बाद में कोविड के कारण उसे जमानत मिल गई। महिला के अनुसार उसके मंगेतर ने भी सात साल तक उसका इंतजार किया।
बॉलीवुड को ‘कंपनी’ और ‘साथिया’ जैसी फिल्में देने वाले अभिनेता विवेक ओबेरॉय (Vivek Oberoi) का हाल ही में बॉलीवुड बबल (Bollywood Bubble) को दिया गया एक्सक्लूसिव इंटरव्यू खासा चर्चा में है। इस इंटरव्यू में उन्होंने ऐश्वर्या राय संग अपने रिश्ते पर जहाँ चुप्पी साध ली। वहीं बॉलीवुड पर कुछ लोगों के कंट्रोल समेत कई चौंकाने वाले खुलासे किए।
विवेक ओबेरॉय ने बताया कि बॉलीवुड के पावरफुल लोगों की वजह से उनका करियर तबाह हो गया। हिट फिल्में देने के बाद बावजूद उनके पास कोई काम नहीं था। उन्होंने कहा, “मैं सुशांत सिंह राजपूत और उनके जैसे अन्य लोगों का दर्द समझ सकता हूँ, क्योंकि मैं भी उस बुरे दौर से गुजर चुका हूँ, जब मेरे मन में सब कुछ खत्म करने का विचार आया था।”
बॉलीवुड से ओटीटी का रुख करने वाले अभिनेता ने खुलासा किया कि डेढ़ साल तक उनके पास कोई काम नहीं था। वह ऑडिशन देने के लिए प्रोडक्शन ऑफिस के बाहर कई देर तक खड़े रहते थे, लेकिन उन्होंने कभी भी किसी को ये नहीं बताया वह बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय के बेटे हैं। कई विवादों और परेशानियों के चलते वह अपने रास्ते से भटक गए थे। लेकिन इस दौरान अभिनेता की पत्नी प्रियंका ओबेरॉय ने उनकी काफी मदद की।
विवेक ने कहा, “एक समय मेरे मन में बहुत नेगटिव विचार आए, लेकिन इससे बाहर निकलने में मेरे परिवार ने मेरी मदद की।” उन्होंने कहा, “मैं अपने आसपास की नकारात्मकता से काफी परेशान रहता था। शायद यही एजेंडा था। एजेंडा कभी-कभी आपको मानसिक रूप से तोड़ने काम करता है। लेकिन इस दौरान मेरी पत्नी प्रियंका ने मुझे साहस दिया और इस बुरे दौर से निकलने में अहम भूमिका निभाई। उसकी वजह से ही मैं यह जान पाया कि मैं कौन हूँ।”
ओबेरॉय ने आगे कहा कि ‘सब कुछ खत्म करने’ का मतलब काफी गहरा है, इसलिए वह सुशांत सिंह राजपूत और अन्य लोगों के साथ जो हुआ उस डार्क साइड और दर्द को महसूस कर सकते हैं। इंडस्ट्री के पावरफुल लोग टैलेंटड लोगों से खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। बॉलीवुड कुछ लोगों के कंट्रोल में है।
हालाँकि, ऐश्वर्या राय संग रिश्ते पर सवाल सुनकर विवेक ओबेरॉय ने चुप्पी साध ली। एक समय ऐसा भी था, जब विवेक ओबेरॉय और ऐश्वर्या राय के रिलेशनशिप की खबरें हर टीवी चैनल और अखबार का हिस्सा बनती थीं। इसके साथ ही सलमान खान के विवेक ओबरॉय से भिड़ने की खबर भी किसी से छिपी नहीं है। इसी बीच जब इंटरव्यू में विवेक से पूछा गया, “अगर करियर की शुरुआत में एक्स गर्लफेंड ऐश्वर्या राय संग रिलेशनशिप को पब्लिक नहीं किया होता तो?” इस सवाल पर एक्टर ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अब सब खत्म हो चुका है।
वह कहते हैं कि ये जगह काफी भयावह हो सकती है। यहाँ आपको कुचलने की कोशिश में लोग क्रूर हो सकते हैं। एक झूठ बार-बार बोला जाए, तो वह भी सच लगने लगता है। आपको यह बात मानने पर मजबूर किया जाता है कि यही आपकी सच्चाई है। लेकिन सच को आप ज्यादा दिनों तक नहीं छिपा सकते हैं। जब आप शांति से, खुशी मन से अपनी ताकत को पहचानेगे तो खुद ही महसूस करेंगे कि आपकी सच्चाई क्या है। कोई भी झूठ इसका स्थान नहीं ले सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि आपको इस दर्द से लड़ने और आगे बढ़ने की ताकत कैसे मिली, तो उन्होंने कहा, “मेरी माँ।” विवेक कहते हैं, “मेरी माँ ने मुझे इस दर्द से बाहर निकालने के लिए उन बच्चों से मिलवाया, जो टाटा मेमोरियल अस्पताल में कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। जब मैं वहाँ गया, तो वे बच्चे मुझे मुस्कराते हुए दिखाई दिए। उस दिन मुझे दो बातें समझ में आईं, एक तो मेरी परेशानी उन बच्चों और माता-पिता के आगे कुछ भी नहीं है। इसलिए, मैं इससे निपट सकता हूँ। दूसरा यह है कि सेलिब्रिटी, लोकप्रियता, सफलता केवल ईश्वर का उपहार है। वास्तव में वही आँसू पोंछ सकता है और लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है। यही वह शक्ति है जिससे मेरा हौसला बढ़ा। अब मैं खुद को एक व्यक्ति के रूप में अधिक संपूर्ण और बहुत खुश महसूस करता हूँ।
बता दें कि हाल ही में विवेक ओबेरॉय को मैक्स प्लेयर पर सुनील शेट्टी के साथ ‘धारावी बैंक‘ वेब सीरीज में देखा गया। इसमें उनके किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया। ‘धारावी बैंक’ की कहानी मुंबई के स्लम धारावी पर आधारित है।
दिल्ली के महरौली में श्रद्धा वालकर (Shraddha Walkar) की हत्या के मामले में बरामद की गई हड्डियों का मिलान हो गया है। ये हड्डियाँ श्रद्धा की ही हैं। DNA जाँच में इसकी पुष्टि हुई है। बरामद हड्डियों में एक मानव जबड़ा भी शामिल है।
दिल्ली पुलिस स्पेशल कमिश्नर सागर प्रीत हुड्डा ने कहा कि जिन हड्डियों का मिलान श्रद्धा के पिता के DNA से हुआ है उसे पुलिस टीम पोस्टमार्टम के लिए भेजेगी। इन हड्डियों का पोस्टमार्टम दिल्ली के AIIMS में किया जाएगा।
इतना ही नहीं, आफताब के महरौली स्थित फ्लैट में पुलिस ने खून के निशान भी पाए थे। फ्लैट के बाथरूम और किचन से मिले खून श्रद्धा के ही हैं। श्रद्धा के पिता के DNA सैंपल से इनका भी मिलान हो गया है। अब जाँच टीम को नार्को रिपोर्ट का इंतजार है। दिल्ली पुलिस को DNA और पॉलीग्राफ जाँच की रिपोर्ट मिल गई है।
बता दें कि श्रद्धा की हत्या के आरोपित और उसके लिव-इन पार्टनर रहे आफताब ने पुलिस पूछताछ में बताया कि श्रद्धा की हत्या करने के बाद उसने शव को 35 टुकड़ों में काट दिया था। इसके बाद उन टुकड़ों को उसने महरौली के जंगलों में फेंक दिया था।
आरोपित आफताब के बताए गए स्थान पर दिल्ली पुलिस की कई टीम ने लगातार खोजबीन की थी। कई दिनों की थकाऊ खोजबीन में कुछ मानव हड्डियों के टुकड़े मिले थे। इनमें जबड़ा और जाँघ की हड्डी शामिल थी। बाद में इसे जाँच के लिए भेज दिया गया था।
पुलिस का कहना है कि CFSL की दो रिपोर्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट जाँच में बेहद मददगार साबित होगी। वहीं, महरौली के जंगलों में कुछ कपड़े भी मिले थे, जिनकी जाँच के लिए फोरेंसिक विभाग को भेजा गया गया है।
हालाँकि, श्रद्धा का सिर, मोबाइल और उसके कपड़ों की तलाश अभी भी पुलिस को है। इस मामले में आरोपित आफताब पुलिस को कोई भी पुख्ता जानकारी नहीं दे रहा है। इस वजह से पुलिस इन्हें बरामद करने में नाकाम रही है।