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जीत AAP की, धूम ‘रिंकिया के पापा’ की: MCD चुनाव नतीजों के बाद मनोज तिवारी के गाने पर कमरतोड़ डांस, Video वायरल

आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव में जीत हासिल करने के बाद अति उत्साह में उल-जलुल हरकत कर रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा जबर्दस्त टक्कर के बावजूद आप का जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दरअसल उत्तर प्रदेश AAP ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें उसके कार्यकर्ता भाजपा सांसद मनोज तिवारी के गाने ‘रिंकिया के पापा..’ पर मदहोश होकर डांस करते नजर आ रहे हैं।

AAP ने भाजपा को चिढ़ाते हुए लिखा, ”हम जीत गए।” साथ ही आप ने गाने के बोल ‘चट दिहली मार दिहली खींच के तमाचा.. हीही हीही हँस दिहली रिंकिया के पापा..’ भी साझा किया है। दूसरी ओर MCD के 250 वार्डों के लिए मतगणना पूरी हो गई है। आम आदमी पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है। AAP के 134 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। वहीं, 104 सीटों पर भाजपा जीती है। कॉन्‍ग्रेस ने भी 9 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि 3 सीट पर निर्दलीय जीते हैं।

मनोज तिवारी उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा के सांसद हैं। भाजपा सांसद एमसीडी के वार्ड नंबर 231 घोंडा में रहते हैं। भाजपा के कपिल मिश्रा भी इसी वार्ड के मतदाता हैं। घोंडा सीट पर भाजपा से प्रीति गुप्ता, आम आदमी पार्टी से विद्यावती और कॉन्ग्रेस की रीता मैदान में थीं। यहाँ भाजपा की प्रीति गुप्ता ने जीत दर्ज की है।

मनोज तिवारी के संसदीय क्षेत्र में एमसीडी के कुल 41 वार्ड हैं। इनमें से भाजपा के खाते में 17 और आम आदमी पार्टी की झोली में 18 सीटें आई हैं। यहाँ भाजपा ने AAP को कड़ी टक्कर दी है। कॉन्‍ग्रेस ने एमसीडी चुनाव में जिन 9 सीटों पर जीत हासिल की हैं, उनमें से 4 अकेले मनोज तिवारी के संसदीय क्षेत्र में हैं। 2 सीटों पर निर्दलीयों ने जीत हासिल की है।

AAP की जीत पर मनोज तिवारी ने प्रतिक्रिया दी है। उनसे पूछा गया कि बीजेपी तो निकाय चुनाव में 150 से अधिक सीटों पर दावा कर रही थी, लेकिन अब तो ग्राफ नीचे नजर आ रहा है। इस पर तिवारी ने AAP पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने 150 से अधिक सीटों पर जीत का दावा किया था, लेकिन AAP ने तो 200 से अधिक सीटें जीतने का दावा किया था। उनका वह दावा अब कहाँ है?

तबलीगी जमात के ‘इज्तेमा’ के लिए स्कूलों में 2 दिन की छुट्टियाँ,महाराष्ट्र के लातूर में शरद पवार की पार्टी के MLC के सामने झुका शिक्षा विभाग, प्राइवेट स्कूलों को भी मजबूर किया

महाराष्ट्र में लातूर प्रशासन द्वारा शहर के स्कूलों को एक इस्लामी कार्यक्रम के लिए दो दिन बंद करने का मामला सामने आया है। प्रशासन ने नोटिस जारी कर तबलीगी जमात द्वारा आयोजित इस्लामी कार्यक्रम ‘इज्तेमा’ का हवाला देते हुए दो दिन की छुट्टी घोषित करने का निर्देश दिया था। नोटिस में कहा गया था कि स्कूल सभी मुस्लिम शिक्षकों और छात्रों को को इस आयोजन में भाग लेने की अनुमति देते हुए दो दिन की छुट्टी की घोषणा करें।

ऑपइंडिया के पास उपलब्ध पत्र के अनुसार, ‘राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP)’ के नेता विक्रम वसंतराव काले द्वारा दिए गए ज्ञापन के आधार पर लातूर जिला प्रशासन के शिक्षा विभाग द्वारा निर्देश जारी किए गए थे। काले महाराष्ट्र विधान परिषद के वर्तमान सदस्य भी हैं। काले ने अपने ज्ञापन में कहा था कि लातूर जिले के औसा शहर में ‘इज्तेमा’ का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी मुस्लिम छात्रों और शिक्षकों के लिए उनके ‘बौद्धिक और सामाजिक विकास’ के लिए कार्यक्रम में भाग लेना महत्वपूर्ण है।

लातूर प्रशासन द्वारा जारी नोटिस

उन्होंने कहा कि 5 और 6 दिसंबर, 2022 को आयोजित कार्यक्रम में कई इस्लामी विद्वानों को शामिल होना है और यह बेहतर होगा कि प्रशासन जिले के सभी स्कूलों में दो दिन की छुट्टी घोषित करे। उन्होंने इस्लामी कार्यक्रम को ‘सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम’ भी करार दिया और कहा कि सभी मुस्लिम छात्रों और शिक्षकों को इस कार्यक्रम में उपस्थित होना चाहिए।

इसके बाद, लातूर के प्रशासनिक अधिकारियों ने शनिवार (3 दिसंबर, 2022) को जिले भर के स्कूलों के लिए दो दिन की छुट्टी की घोषणा करते हुए एक नोटिस जारी किया। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी वंदना फुताने व नागेश मपारी सहित पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि स्कूल एक महीने के लिए शनिवार (साप्ताहिक अवकाश) पर छात्रों को बुलाकर छुट्टियों की भरपाई करेंगे। इसके अलावा, अधिकारियों ने तबलीगी जमात द्वारा आयोजित ‘इज्तेमा’ के अवसर पर निजी स्कूल के प्रधानाचार्यों को दो दिन की छुट्टी घोषित करने के लिए भी मजबूर किया।

‘इज्तेमा’ मुसलमानों के लिए शक्ति प्रदर्शन करने का एक कार्यक्रम है जो लोगों के नैतिक सुधार के बारे में है और अक्सर इसे ‘मुसलमानों को सच्चा मुसलमान बनाने’ के रूप में वर्णित किया जाता है। यह एक धार्मिक कार्यक्रम भी है जिसमें कई इस्लामी विद्वानों को मार्गदर्शन देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इसे पूरी दुनिया में तब्लीगी जमात का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है क्योंकि यह मुसलमानों के जीवन पर बड़ा प्रभाव डालने का दावा करता है।

AAP को बहुमत, लेकिन भाजपा का ही होगा मेयर? LG नॉमिनेट करेंगे 12 पार्षद और बदल जाएगा खेल?- MCD पर इस दावे में कितना दम

दिल्ली के MCD चुनाव में अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की आम आदमी पार्टी (AAP) को भारी सफलता मिली है और वह बहुमत के आँकड़े को छूती नजर आ रही है। हालाँकि, मतगणना का अंतिम नतीजे शाम तक घोषित होंगे। इस बीच दावा किया जा रहा है कि MCD में भले ही AAP ने बहुमत हासिल किया हो, लेकिन मेयर (Mayor) भाजपा का ही बनेगा।

दरअसल, दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदरपाल सिंह बग्गा ने ट्वीट कर कहा, “दिल्ली में फिर एक बार भारतीय जनता पार्टी का मेयर बनेगा।” बग्गा ने यह ट्वीट 12:41 मिनट पर किया और उस समय तक शुरुआती रुझानों में AAP की बहुमत साफ हो गई थी।

उसके बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि AAP ने एमसीडी में भले ही बहुमत हासिल कर लिया हो, लेकिन दिल्ली का मेयर भाजपा का ही बनेगा। इसके पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं। इनमें से एक तर्क यह है कि दिल्ली के राज्यपाल 12 पार्षदों को मनोनीत करेंगे। इस तरह भाजपा के पार्षदों की संख्या बढ़कर 116 हो जाएंँगी।

इसके साथ ही लोगों का यह भी तर्क है कि AAP के पार्षद भले ही अधिक हों, लेकिन वे क्रॉस वोटिंग करेंगे और भाजपा के मेयर चुनने में मदद करेंगी। वहीं, कुछ लोग पार्षदों के भाजपा में शामिल होने की बात भी कर रहे हैं, क्योंकि पार्षदों पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता।

MCD चुनावों में दल-बदल कानून का लागू नहीं होना ही आम आदमी पार्टी के लिए असली खतरा है। सांसद और विधायक अपनी मर्जी से पार्टी नहीं बदल सकते हैं या सदन में पार्टी की मर्जी के बिना किसी मुद्दे पर वोट नहीं कर सकते हैं। हालाँकि, मेयर, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के प्रमुख और पार्षदों पर यह नियम लागू नहीं होता है।

अब अगर भाजपा दावा कर रही है कि मेयर भाजपा का ही होगा तो इसके पीछे वजह भी है। यह तो स्पष्ट हो गया है कि नगरपालिकाओं में दल-बदल कानून लागू नहीं होता, लेकिन जहाँ लागू होता है वहाँ भी भाजपा ने अल्पमत में रहते हुए अपनी सरकार बना ली है। इसके उदाहरण भी हैं।

भाजपा ने गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में दूसरी पार्टी के विधायकों का समर्थन आसानी हासिल कर सरकार बनाई है। गोवा और मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, इसके बाद भी कॉन्ग्रेस वहाँ सरकार नहीं बना सकी और भाजपा ने सत्ता पर कब्जा कर लिया।

बता दें कि MCD में जो भी पार्टी जीतकर आती है, उसका कार्यकाल 5 साल के लिए होता है, लेकिन उनके द्वारा चुने गए मेयर का कार्यकाल दिल्ली में सिर्फ एक साल का ही होता है। इस तरह दिल्ली में मेयर का चुनाव हर साल होता है। एक ही मेयर लगातार पाँच साल तक नहीं रह सकता है।

दिल्ली नगर निगम एक्ट के अनुसार, कोई भी पार्षद मेयर नहीं बन सकता है। रिजर्वेशन नियमों के तहत पहले साल महिला पार्षद ही मेयर बन सकती है, जबकि तीसरे साल अनुसूचित जाति या जनजाति का कोई पार्षद ही इस पद के लिए दावेदारी कर सकता है। इस तर दूसरे, चौथे और पाँचवेें साल में मेयर का पद अनारक्षित रहेगा और इसके लिए कोई भी पार्षद दावेदारी कर सकेगा।

बता दें कि MCD चुनाव में AAP को 134 सीटें मिली हैं, जबकि भाजपा को 104 सीटें। दिल्ली MCD के लिए 4 दिसंबर 2022 को हुए मतदान में कुल 1349 उम्मीदवार खड़े थे। MCD में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल के पास 126 या उससे अधिक का आँकड़ा होना चाहिए।

AAP को जीत, दिल्ली को दुविधा मुबारक

दिल्ली नगर निगम चुनावों के नतीजे (MCD Election Results) आ गए हैं। न तो आम आदमी पार्टी (AAP) को वह जीत मिली है, जिसके ख्वाब वह 4 दिसंबर 2022 की तारीख करीब आते-आते देखने लगी थी। न उसे वह हार मिली है जो निगम चुनावों के ऐलान के बाद उसे खुद के सर्वे में मिली थी। न नतीजे वैसे आए हैं, जैसे एग्जिट पोल वाले पंडितों ने अनुमान लगाया था। नतीजे निगम चुनावों की ऐलान के साथ बीजेपी के सोच जैसी भी नहीं है। वैसी भी नहीं है जिसके बारे में सोचकर बीजेपी वाले 4 दिसंबर को मतदान के बाद से खौफजदा थे। उस तरह के भी नहीं हैं जो सोच कॉन्ग्रेस ने चुनाव से पहले ही सरेंडर कर दिया था। यानी इन नतीजों में बीजेपी, आप, कॉन्ग्रेस सबके लिए थोड़ा-थोड़ा बढ़िया है। पूरा मजा किसी के लिए नहीं है। यह पूरा मजा न होना ही दिल्ली के लिए सबसे खतरनाक है।

MCD में किसकी कितनी सीटें, कितने वोट

दिल्ली नगर निगम की 250 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। आप को 134, बीजेपी को 104, कॉन्ग्रेस को 09 और अन्य को 03 सीटें मिली हैं। इसी तरह आप को 42.05% बीजेपी को 39.09% और कॉन्ग्रेस को 11.68% सीटें मिली हैं।

दिल्ली निगम चुनावों में विभिन्न दलों का वोट शेयर और सीटें (स्रोत: चुनाव आयोग)

जीत तो जीत होती है वाला जुमला

एक प्रसिद्ध जुमला होता है कि जीत तो जीत होती है, चाहे एक सीट से मिले या 100 सीट का अंतर हो। भले यह कानों को अच्छा लगता हो, लेकिन दिल्ली नगर निगम में फिट नहीं बैठता। यही कारण है कि दिल्ली नगर निगम चुनावों के रूझान आने के साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई थी कि आप से पिछड़ने के बाद भी बीजेपी अपना मेयर बनवाने में कामयाब हो सकती है। इसकी दो वजहें हैं। पहली, 12 लोगों को दिल्ली के उपराज्यपाल नगर निगम में मनोनीत करते हैं। माना जा रहा है कि ये बीजेपी के साथ जाएँगे।

दूसरी, एमसीडी चुनावों में दल-बदल कानून लागू नहीं होता। यानी, कोई पार्षद जब चाहे तब उस पार्टी को टाटा-टाटा बॉय-बॉय कर दे जिसके टिकट पर जीतकर आया है। वैसे भी राहुल गाँधी आए दिन रोते रहते हैं कि उनके जीते हुए लोगों को बीजेपी लेकर चली जाती है। निगम चुनावों में बेमन से लड़ी कॉन्ग्रेस के टिकट पर जीते पार्षद उसके प्रति कितने निष्ठावान होंगे आप समझ सकते हैं। इसी तरह केजरीवाल भी गाहे-बगाहे दिल्ली में ऑपरेशन लोटस का डर दिखाते रहते हैं, जबकि विधानसभा में नंबर एकतरफा आप के साथ है। दल-बदल का कानून भी विधानसभा के स्तर पर प्रभावी है। निगम में ऐसा कुछ भी आप के हक में नहीं है। यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि एक बार मेयर का चुनाव हो जाए तो अविश्वास प्रस्ताव भी नहीं लाया जा सकता है। ऐसे में आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए कि आप की बहुमत वाली दिल्ली नगर निगम में मेयर बीजेपी से हो।

हर नंबर नेता और पोल पंडित के हक में ही होता है

नेताओं और पोल पंडितों का सबसे बड़ा हुनर यह होता है कि वे किसी भी नंबर को अपने हक में बता देंगे। इसलिए दिल्ली नगर निगम चुनाव नतीजों के भी कई विश्लेषण आपके सामने आएँगे। मसलन दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता कहेंगे कि सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया के इलाके में आप साफ हो गई है। लेकिन यह भी सच है कि उनके इलाके में बीजेपी का खाता भी नहीं खुला है। इसके जवाब में वे कहेंगे कि प्रदेश अध्यक्ष का कोई इलाका नहीं होता। इलाका सांसद और विधायक का होता है। यानी चित भी मेरी, पट भी मेरी।

इसी तरह हारकर भी खुद को विजेता साबित करने के लिए नेता और खुद को जानकार साबित करने के लिए पोल पंडित अलग-अलग चुनावों के डाटा की तुलना करते हैं। बताते हैं कि फलाने का वोट इतना प्रतिशत बढ़ गया। फलाने की इतनी सीटें बढ़ गईं।

इस चुनाव के नतीजों का पिछले निगम चुनाव के नंबरों से तुलनात्मक अध्ययन नहीं होना चाहिए। क्योंकि एक बार फिर से दिल्ली में एक ही नगर निगम किया गया है। नए सिरे से परिसीमन हुआ है। आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। कुल मिलाकर एक नए पिच पर यह चुनाव हुआ है। इसी तरह नंबरों की तुलना विधानसभा चुनाव के डाटा से भी नहीं किया जाना चाहिए। फिर यह तुलना लोकसभा चुनाव तक जा सकती है।

इन नतीजों को कैसे समझे

  • लगातार दो विधानसभा चुनावों में दिल्ली में आप अपराजेय दिखी है। दिल्ली की जमीन पर भी उसका असर साफ दिखता है। लेकिन ये नतीजे दिखाते हैं कि आप अपराजेय नहीं रही है। उसके हर कहे पर जनता को यकीन नहीं है।
  • मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने जिस मंत्री सत्येंद्र जैन को ‘कट्टर ईमानदार’ बताते हैं उनके इलाके में आप साफ हो गई है। मतलब केजरीवाल के कहे की साख नहीं रही। जनता को दिख रहा है कि उसका नुमाइंदा जेल में बंद क्या कर रहा है।
  • आम आदमी पार्टी शिक्षा का जो मॉडल बेचती है उसे दिल्ली के मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ही देखते हैं। लेकिन उनके इलाके में भी पार्टी को पराजय मिली है। खुद उनके रिश्तेदार तक हार गए हैं। मतलब सिसोदिया की छवि शराब से दागदार हुई है। जनता भी मानती है कि जिसका मॉडल बेचा रहा है उसमें खोट है।
  • कॉन्ग्रेस को 9 सीट और वोट डबल डिजिट में मिले हैं। यानी कॉन्ग्रेस दिल्ली के संगठन में ताकत झोंके, नए चेहरे लाएँ तो वह उस वोट बैंक का एक हिस्सा फिर से वापस ला सकती है जो उससे पूरी तरह छिटक कर आप के पास जा चुकी है। खासकर, कुछेक मुस्लिम बहुल सीटों पर उसकी जीत के गहरे मायने हैं।
  • लगातार 15 साल से दिल्ली नगर निगम पर काबिज रही बीजेपी को यह नतीजे बताते हैं कि पब्लिक को अपने घर के बाहर जमा कूड़ा दिख रहा था। वो देख रही थी कि कूड़े का ढेर बढ़ रहा है। वो समझ रही थी कि प्रचंड बहुमत से विधानसभा में काबिज आप, बीजेपी शासित नगर निगमों को कूड़ा उठाने से नहीं रोक रही है। यह भी कि 2024 से पहले वह अपने सांसदों का नट-बोल्ट टाइट करे। दिल्ली में कोई ऐसा चेहरा तैयार करे जो अपने प्रभाव से करीबी मुकाबलों को उसके पक्ष में झुका दे।

आज का दिन दिल्ली की आप सरकार की नाकामियों को गिनाने का नहीं है। यह भी बताने का नहीं है कि उसकी कारगुजारियों से जनता कितनी परिचित है। विधानसभा में प्रचंड बहुमत के बावजूद वह अपनी नाकामियों का ठीकरा आए दिन भाजपा शासित एमसीडी और उपराज्यपाल पर फोड़ती रही है। अब निगम वाला बहाना उसके हाथ से निकल गया है। कूड़े की नाराजगी ने भले बीजेपी को दूसरे नंबर पर धकेल दिया है, लेकिन आप को भी ऐसे नंबर नहीं दिए हैं कि कूड़ा उठाना अकेले उसकी जिम्मेदारी ही रहे। उलटे इन नतीजों से आप को मौका दिया है कि वह उन ‘कूड़ों’ का भी निगम के अधीन आने वाले क्षेत्रों में प्रसार करे जो केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के अपने अधीन आने वाले क्षेत्रों में पिछले सात-आठ साल में किया है।

कुल मिलाकर इन नतीजों से दिल्ली ने कूड़े के ढेर, राजनीतिक गंदगी और यमुना में झाग का बढ़ना ही अपने लिए तय किया है। ऐसा उसने केजरीवाल से भंग होते मोह और घर के बाहर लगे कूड़े के ढेर की दुविधा में किया है। दुखद यह है कि ये तथ्य आँकड़ें नहीं बताते। जिस जमीन पर यह सब लिखा होता है, वहाँ चरण धरते ही हमारे पोल पंडितों और नेताओं को रतौंधी हो जाती है।

महिला के साथ आपत्तिजनक अवस्था में राजस्थान के मंत्री सालेह मोहम्मद? वीडियो वायरल होने के बाद BJP की माँग – पार्टी से बाहर करे कॉन्ग्रेस

सोशल मीडिया पर एक अश्लील वीडियो वायरल हो रहा है। भाजपा ने ट्वीट करते हुए वो वीडियो राजस्थान सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सालेह मोहम्मद का बताया है। इसी ट्वीट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सालेह मोहम्मद को बर्खास्त करने की भी माँग की गई है। पीड़िता मूल रूप से जोधपुर की रहने वाली बताई जा रही है। 2 दिन पहले लड़की ने पुलिस में अपना वीडियो लीक होने की शिकायत दर्ज करवाई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (5 दिसंबर, 2022) को एक महिला ने जोधपुर के थाना शेरगढ़ में अपना अश्लील वीडियो बन जाने की FIR दर्ज करवाई थी। पीड़िता ने दावा किया कि ये गलती से हो गया। शिकायत में यह भी बताया गया कि उसकी 7 वर्षीय बच्ची ने मोबाइल में गेम खेलते हुए गलती से इसे किसी और को फॉरवर्ड कर दिया था। बाद में वह वीडियो कई जगहों पर वायरल हो गया। महिला ने उस वीडियो को वायरल करने वालों के खिलाफ पुलिस से कार्रवाई की माँग की थी।

पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू की और वीडियो वायरल करने के आरोप में 5 लड़कों को हिरासत में ले लिया। महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि 2 माह पहले उन सभी 5 लड़कों ने उसकी रिश्तेदारी में उसका अश्लील वीडियो दिखा कर 25 लाख रुपए की रंगदारी माँगी थी। पीड़िता ने यह भी बताया कि पैसे के साथ आरोपितों ने शारीरिक संबंध बनाने का भी दबाव डाला था। खुद को आत्महत्या करने तक दबाव में होने की जानकारी देते हुए पीड़िता ने सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। उनका आरोप है कि आरोपितों की माँग न पूरी होने पर उन्होंने वीडियो को वायरल कर दिया है।

इस मामले में पोकरण से गिरफ्तार इन 5 आरोपितों के नाम पंकज विश्नोई, विकास, रामजस विश्नोई, सुमित विश्नोई और रविन्द्र विश्नोई हैं। दावा किया जा रहा है कि इस वीडियो में महिला के साथ मंत्री सालेह मोहम्मद ही दिख रहे हैं। भाजपा ने अशोक गहलोत से मंत्री के इस्तीफे की माँग करते हुए लिखा, “आप मंत्री सालेह मोहम्मद को बर्खास्त करेंगे या ‘वोट बैंक’ के लालच में छोड़ देंगे ?” भाजपा के इसी ट्वीट में वायरल हो रहे वीडियो का धुंधला चित्रण किया गया है।

केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी के क्षेत्र में BJP का बुरा हाल, इन 2 सांसदों के क्षेत्र में भी AAP आगे: इन 3 सांसदों के लिए चिंता का सबब बन सकते हैं MCD चुनाव के आँकड़े

दिल्ली नगर निगम चुनाव की मतगणना (Delhi MCD Election Result) के ताजा आँकड़ों में आम आदमी पार्टी ने बहुमत हासिल कर ली है। उसने अब तक 131 वार्डों में जीत दर्ज कर ली है। भारतीय जनता पार्टी ने 100 वार्ड जीते हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस सिर्फ 7 वार्ड में जीत सकी है, जबकि 3 वार्ड में निर्दलीय जीते हैं।

केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi) के संसदीय क्षेत्र नई दिल्ली में AAP भाजपा पर भारी पड़ रही है। नई दिल्ली लोकसभा सीट में कुल 25 वार्ड हैं। यहाँ ‘आप’ 17 सीटों पर आगे चल रही है और बीजेपी 7 सीटों पर आगे चल रही है। इस सीट से कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है। वहीं, एक सीट अन्य के पाले में है।

हंस राज हंस के संसदीय क्षेत्र का हाल

बीजेपी सांसद और गायक हंस राज हंस (Hans Raj Hans) का संसदीय क्षेत्र उत्तर पश्चिमी दिल्ली सबसे बड़ी सीट है। इस सीट में नगर निगम के 43 वार्ड आते हैं। रुझानों में 22 सीटों पर आम आदमी पार्टी आगे चल रही है, जबकि 17 सीटों पर बीजेपी की बढ़त है।

प्रवेश वर्मा के संसदीय क्षेत्र का हाल

पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा (Parvesh Verma) के इलाके में एमसीडी के कुल 19 वॉर्ड हैं। यहाँ बीजेपी और ‘आप’ में जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही है। रुझानों में बीजेपी को 18, AAP को 19 और कॉन्ग्रेस को 1 सीट मिली है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली MCD चुनावों में आम आदमी पार्टी को 42 प्रतिशत वोट मिले हैं। वह पहले स्थान पर है। वहीं, भाजपा दूसरे नंबर पर खिसक गई है और उसे 39 प्रतिशत वोट मिले हैं। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस को सिर्फ 11 प्रतिशत मिले हैं। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि कॉन्ग्रेस के वोटों में आई बड़ी कमी के कारण ही आम आदमी पार्टी (AAP) को दिल्ली नगर निगम चुनाव में बड़ी ताकत मिली है। बता दें कि दिल्ली एमसीडी (MCD) की 250 सीटों पर 4 दिसंबर 2022 को वोट डाले गए थे।

सीटें कम हुईं, लेकिन पिछले MCD चुनाव के मुकाबले 3% बढ़ गया BJP का वोट शेयर: देखें 2017, 2020 और 2022 चुनावों में कैसे बदले आँकड़े

साल 2022 के दिल्ली MCD चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने बहुमत के आँकड़े को पार कर भाजपा (BJP) को सत्ता से बेदखल कर दिया है। भाजपा की सीटें भी कम हुई हैं, लेकिन अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो इसमें बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है।

साल 2022 के MCD चुनावों में आम आदमी पार्टी को 42.10 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं भाजपा को 39.07 प्रतिशत और कॉन्ग्रेस को 11.65 प्रतिशत वोट मिले हैं। बहुजन समाज पार्टी से 2 प्रतिशत अधिक निर्दलीय उम्मीदवारों को वोट मिले हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों को 3.46 प्रतिशत वोट मिले हैं।

AAP ने 42.10 प्रतिशत वोटों के साथ MCD में 15 सालों से काबिज भाजपा को हटा दिया है। हालाँकि, उसे विधानसभा के मुकाबले वोटों के गिरे प्रतिशत उसे चिंतित कर रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों में AAP को 53.57 प्रतिशत वोट मिले थे। ऐसे में लगभग 11 प्रतिशत वोटों का उसे नुकसान हुआ है। यह AAP के लिए खुशी के साथ-साथ सतर्कता की घंटी भी है।

साल 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को 53.57 प्रतिशत वोट मिले थे। भाजपा को 38.51 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कॉन्ग्रेस को 4.26 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। इस तरह भाजपा को इस बार के MCD चुनाव में पिछले विधानसभा चुनावों के मुकाबले थोड़ा अधिक ही वोट मिला है।

हालाँकि, सबसे अधिक फायदा कॉन्ग्रेस को नजर आ रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को सिर्फ 4.26 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि इस बार के MCD चुनाव में उसे 11.65 प्रतिशत वोट मिले हैं। इसका मतलब यह हुआ कि AAP से जो 11 प्रतिशत वोट छिटका है, उसका बहुत बड़ा हिस्सा कॉन्ग्रेस में शिफ्ट हुआ है। यानी इस बार कॉन्ग्रेस को वोट में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

MCD चुनावों में AAP को कई ऐसे इलाकों में हार का मुँह देखना पड़ा है, जहाँ मुस्लिम वोट बड़ी संख्या निर्णायक स्थिति में हैं। इसका सीधा अर्थ यही लगाया जा रहा है कि पिछले विधानसभा चुनावों में AAP का वोटर रहा मुस्लिमों का एक बड़ा वर्ग MCD में कॉन्ग्रेस के पक्ष में मतदान किया है।

अगल पिछले MCD चुनाव की बात करें तो भी तस्वीर कुछ अलग है। साल 2017 में हुए MCD चुनाव की अपेक्षा इस बार के MCD चुनाव में AAP का वोट प्रतिशत लगभग 17 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एमसीडी चुनावों में आम आदमी पार्टी को लगभग 26 प्रतिशत वोट मिले थे।

इस बार के एमसीडी चुनावों में भाजपा का वोट शेयर लगभग 3 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले MCD चुनाव में भाजपा को लगभग 36 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं, कॉन्ग्रेस को पिछले MCD चुनाव की अपेक्षा 9 प्रतिशत वोट का नुकसान हुआ है। पिछले एमसीडी चुनाव में कॉन्ग्रेस को लगभग 21 प्रतिशत वोट मिले थे।

साल 2017 में MCD तीन हिस्सों में थी। इसमें कुल वार्ड की संख्या 272 थी। इनमें से बीजेपी ने 181, आम आदमी पार्टी ने 49 और कॉन्ग्रेस ने 31 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार भाजपा 104 सीटें मिली है, जबकि AAP को 134 सीटें मिली हैं। वहीं कॉन्ग्रेस को 9 और अन्य को 3 सीटें मिली हैं। हालाँकि, स्टोरी लिखे जाने तक मतगणना का अंतिम चरण पूरा नहीं हुआ है और इसमें कुछ बदलाव संभव हैं।

दिल्ली में अब गौतम गंभीर बनाम अरविंद केजरीवाल? पूर्व क्रिकेटर के क्षेत्र में 61% सीटों पर BJP का कब्ज़ा, लोग बोले – बड़ी जिम्मेदारी सौंपे पार्टी नेतृत्व

दिल्ली में एमसीडी चुनावों में आम आदमी पार्टी काफी आगे निकल चुकी है। रुझानों में वह दिल्ली नगर निगम में बहुमत के आँकड़े को भी पार कर चुकी है। भाजपा एमसीडी की सत्ता से लगभग बेदखल हो चुकी है। इन सब के बीच पूर्वी दिल्ली की 36 वार्डों में चुनाव परिणाम इसके उलट हैं। यह इलाका भाजपा सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर का संसदीय क्षेत्र है। नए परिसीमन के बाद पूर्वी दिल्ली में एमसीडी के कुल 36 वार्ड के लिए चुनाव कराए गए हैं। इसमें भाजपा 22 और आम आदमी पार्टी को 11 सीटें मिली हैं। 3 सीटों पर कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं।

पूर्वी दिल्ली में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा के सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ट्रेंड करने लगे। लोग उन्हें दिल्ली बीजेपी की कमान दिए जाने की माँग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को रोकने की ताकत सिर्फ गौतम गंभीर में है। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर लोग गौतम गंभीर के क्षेत्र में किए गए कामों को गिनवा रहे हैं।

ट्विटर पर पत्रकार आशीष कुमार सिंह लिखते हैं कि बीजेपी ने गौतम गंभीर के निर्वाचन क्षेत्र में उम्दा प्रदर्शन किया है, ऐसे में भाजपा नेतृत्व को गौतम गंभीर को बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने पर विचार करना चाहिए। अक्षित सिंह नाम के यूजर लिखते हैं कि दिल्ली में ‘आप’ को हराने में गौतम गंभीर ही भाजपा की मदद कर सकते हैं।

समीत ठक्कर नाम के यूजर ने लिखा है, “गौतम गंभीर दिल्ली में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले भाजपा सांसद हैं।”

कुल मिलाकर नतीजों को देखें तो भाजपा ने गौतम गंभीर के अलावा मनोज तिवारी और डॉ हर्षवर्धन के इलाके में अच्छा प्रदर्शन किया है। मनोज तिवारी के इलाके में बीजेपी ने 18, आम आदमी पार्टी ने 17 और कॉन्ग्रेस ने 04 सीटें हासिल कीं। डॉ. हर्षवर्धन के इलाके में भी भाजपा आगे रही । यहाँ से भाजपा को 16 सीटों पर और आम आदमी पार्टी को 14 सीटों पर जीत मिली। बीजेपी मीनाक्षी लेखी, परवेश वर्मा और रमेश बिधूड़ी के इलाकों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है।

मीनाक्षी लेखी के इलाके की 25 सीटों में बीजेपी सिर्फ 5 पर आगे है जबकि आम आदमी पार्टी 20 सीटों पर आगे है। परवेश वर्मा के इलाके की 38 में से 14 बीजेपी के खाते में गई जबकि आम आदमी पार्टी को यहाँ 24 सीटें प्राप्त हुईं। रमेश बिधूड़ी के इलाके में 13 पर भाजपा को जीत मिल रही है जबकि 23 पर आम आदमी पार्टी जीत रही है वहीं 1 सीट अन्य के खाते में जा रही है।

नीचे से चेक कर, नीचे से… MCD चुनावों में कॉन्ग्रेस को ‘मोरल विक्ट्री’, लोग बोले – न हार का गम-न जीत की चिंता, दार्शनिक हो गई है राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव की मतगणना जारी है। इस बार मुख्य मुकाबला भाजपा (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच माना जा रहा था। रुझानों में आम आदमी पार्टी बहुमत के आँकड़े को पार कर चुकी है। 15 सालों से दिल्ली नगर निगम पर राज करने वाली भाजपा दूसरे नंबर पर खिसक गई है। वहीं, कॉन्ग्रेस का बुरा हाल है। इसको लेकर बुधवार (7 दिसंबर 2022) को सोशल मीडिया पर नेटिजन्स ने कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का जमकर मजाक उड़ाया। लोगों का कहना है कि एमसीडी चुनाव में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का असर साफ देखा जा सकता है।

ललित भंडारी नाम के एक ट्विटर यूजर ने कॉन्ग्रेस का मीम शेयर किया है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव के परिणाम घोषित होने से पहले, रुझानों में अपनी पार्टी की हालत देखकर एक कॉन्ग्रेस उम्मीदवार हताश है। लोग कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी को इस चुनाव में ‘मोरल विक्ट्री’ मिली है।

माधव शर्मा लिखते हैं कि एमसीडी चुनाव में राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का असर साफ देखा जा सकता है। बहुत बढ़िया। पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने लिखा, “न जीत की चिंता, न हार का गम। राहुल गांधी की अगुवाई में दार्शनिक हो चुकी है कॉन्ग्रेस!”

माधव शर्मा के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए जितेंद्र वशानी नाम के यूजर ने लिखा, “उसकी वजह से कॉन्ग्रेस मुक्त भारत हो रहा है। इसी तरह से उन्होंने ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। कितना विजनरी है ये बंदा.. पप्पू पास हो गया।”

पीयूष मिश्रा नामक यूजर ने ‘3 इडियट्स’ फिल्म का एक सीन शेयर करते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस उम्मीदवार दिल्ली नगर निगम चुनाव के परिणाम देखता हुआ।” इस सीन में सबसे आगे अभिनेता शमरन जोशी हैं और पीछे आर माधवन। इस सीन के नीचे लिखा है, “नीचे से चेक कर.. नीचे से।”

वहीं इस दौरान एक यूजर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस दावे का भी मजाक उड़ाया, जिसमें उन्होंने लिखकर दिया था कि BJP को 20 से भी कम सीटें मिलेंगी।

दरअसल, ABP न्यूज चैनल के एक शो के दौरान सीएम केजरीवाल ने MCD में भाजपा को कितनी सीटें मिलेंगी इसको एक कागज पर लिखते हुए कहा था, “MCD के चुनाव में BJP की 250 में से 20 से भी कम सीट आएँगी। मैं कोई हवा में बात नहीं कर रहा हूँ।” लेकिन रुझान सामने आने के बाद उनके दावे की हवा निकल ​गई।

MCD चुनाव: केजरीवाल के लिए जो ‘कट्टर ईमानदार’ उस सत्येंद्र जैन के इलाके में AAP की दुर्दशा, मनीष सिसोदिया-गोपाल राय के इलाकों में भी झाडू साफ

दिल्ली MCD चुनाव के नतीजों (Delhi MCD Election Result) में कई उलट-फेर नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया था कि भाजपा को 250 में से 20 से भी कम सीटें मिलेंगी। वहीं, मतणना के रुझान बता रहे हैं कि आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गजों वाले क्षेत्र में भी भाजपा कमल खिलाने में सफल रही है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM arvind Kejriwal), उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (DCM Manish Sisodia) और मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) के विधानसभा क्षेत्रों में कहीं AAP का प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा तो कहीं गड़बड़ रहा।

अरविंद केजरीवाल ने वार्ड नंबर 74 चाँदनी चौक में वोट डाला था। यहाँ से आम आदमी पार्टी ने पुनरदीप सिंह साहनी को मैदान में उतारा था। वहीं, भाजपा ने रविंद्र सिंह और कॉन्ग्रेस ने राहुल शर्मा को प्रत्याशी बनाया था यहाँ अभी आप के उम्मीदवार पुनरदीप सिंह नेे जीत हासिल की है। इससे पहले यह सीट भाजपा के पास थी।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की विधानसभा पटपड़गंज में 4 वार्ड आते हैं। इनमें से सभी चार सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है। पटपड़गंज से बीजेपी की रेनू चौधरी, विनोद नगर से बीजेपी के रविंद्र सिंह नेगी जीते, पांडव नगर से बीजेपी के यशपाल सिंह और मंडावली से बीजेपी की शशि चाँदना जीते हैं।

मनीष सिसोदिया ने दिल्ली एमसीडी के वार्ड नंबर 203 लक्ष्मी नगर में वोट डाला था। यहां पर आप ने मीनाक्षी शर्मा, बीजेपी ने अलका राघव और कॉन्ग्रेस ने सुनीता धवन को चुनावी मैदान में उतारा था। यहाँ से भाजपा की अलका राघव ने जीत हासिल की है।

मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद AAP नेता और अरविंद केजरीवाल सरकार मंत्री सत्‍येंद्र जैन के विधानसभा क्षेत्र शकूर बस्ती में 3 वार्ड हैं। इन सभी तीनों वार्डों में बीजेपी ने जीत हासिल की है।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव में केजरीवाल सरकार के मंत्री गोपाल राय (Gopal Rai) के विधानसभा क्षेत्र के चार वार्डों में से दो पर भाजपा और एक पर कॉन्ग्रेस की जीती है। आम आदमी पार्टी को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा है।

हालाँकि, दिल्ली MCD चुनावों में आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की है। उसे 42 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं, भाजपा दूसरे नंबर पर खिसक गई है और उसे 39 प्रतिशत वोट मिले हैं। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस को सिर्फ 12 प्रतिशत मिले हैं।