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गुजरात में अब तक के सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करने की ओर BJP, रुझानों में टूट रहा कॉन्ग्रेस का ‘KHAM’ वाला 149 का आँकड़ा

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है। गुजरात में भाजपा प्रचंड जीत की ओर बढ़ रही है। यहाँ भाजपा ने 150 के आँकड़े को पार कर लिया है और 158 सीटों पर आगे चल रही है, वहीं कॉन्ग्रेस मात्र 15 सीटों पर ही जीतती हुई दिख रही है। अरविंद केजरीवाल की AAP ने हाइप तो खूब बनाया था, लेकिन पार्टी पार्टी मात्र 5 सीटों पर ही आगे है। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को भी 1 सीट मिलती हुई दिख रही है। भाजपा गुजरात में सारे रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर सकती है।

जहाँ तक बात हिमाचल प्रदेश की है, वहाँ एग्जिट पोल्स सटीक साबित हो रहे हैं और काँटे की टक्कर चल रही है। सत्ताधारी भाजपा जहाँ 34 सीटों के साथ बहुमत के आँकड़े से मात्र 1 सीट पीछे है, वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी 30 सीटों के साथ उसे कड़ी टक्कर दे रही है। हालाँकि, अन्य के होते में 3 सीटें गई हैं और उनमें अधिकतर भाजपा के बागी ह बताए जा रहे हैं। ऐसे में अंतिम परिणामों में भाजपा एक-दो सीट पीछे भी रही तो उसे सरकार बनाने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

गुजरात के जामनगर विधानसभा क्षेत्र में क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रीवाबा आगे चल रही हैं। मुख्यमत्री भूपेंद्र पटेल घाटलोडिया से लड़ रहे हैं, जहाँ से वो आसान जीत हासिल करने वाले हैं। अगर भाजपा 150 सीटों से आगे का आँकड़ा पार कर लेती है तो ये राज्य में अब तक किसी भी पार्टी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा। कॉन्ग्रेस के ‘KHAM’ मॉडल का रिकॉर्ड भी टूट जाएगा। वहीं हिमाचल प्रदेश में खंडित जनादेश की आशंका भी जताई जा रही है। माधव सिंह सोलंकी ने ‘क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम’ का गठबंधन बना कर 80 के दशक में 149 का आँकड़ा छुआ था।

जहाँ तक उत्तर प्रदेश की बात है, यहाँ मुलायम सिंह यादव परिवार का गढ़ रहे मैनपुरी को सपा ने फिर से बचा लिया है। डिम्पल यादव यहाँ से सहज रूप से जीत दर्ज करती हुई दिख रही हैं। आज़म खान के रामपुर और बिहार के कुढ़नी में काँटे की टक्कर है और पाला किसी भी तरफ जा सकता है। मनीष सिसोदिया ने दावा किया है कि गुजरात में इस प्रदर्शन के साथ अब AAP राष्ट्रीय पार्टी भी बनने जा रही है, क्योंकि दिल्ली और पंजाब में पहले से ही उसकी सरकार है।

हिरोइन के पैर चाट राम गोपाल वर्मा ने कहा – शादी मत करना, पति को तुम्हारा पूरा शरीर मिल जाएगा

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक फिल्म देने वाले वाले राम गोपाल वर्मा इन दिनों अपने अजीबोगरीब हरकत की वजह से चर्चा में हैं। हाल ही में उनका एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और साउथ की एक्ट्रेस आशु रेड्डी के कदमों में बैठे हैं और उनकी उँगलियाँ चाटते नजर आते हैं। सोशल मीडिया यूजर्स को उनकी यह हरकत बिल्कुल भी पसंद नहीं आई और उनकी जमकर क्लास लगा दी।

समलैंगिक संबंधों पर आधारित राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘डेंजरस (Dangerous)’ जल्द ही सिनेमा घरों में दस्तक देने वाली है। बताया जा रहा है कि इस फिल्म में भी काफी बोल्ड सीन हैं। ऐसे में वह अपनी फिल्म के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में वह एक्ट्रेस आशु रेड्डी (Ashu Reddy) के साथ अपना एक वीडियो शेयर करते हैं।

वीडियो (Ram Gopal Varma interview Ashu Reddy) में दिख रहा है कि एक्ट्रेस जहाँ काउच पर बैठी है, राम गोपाल वर्मा उनके क़दमों के पास नीचे जमीन पर बैठे हैं। वीडियो में दोनों काफी लंबी बातचीत करते हैं। वीडियो के अंत में राम गोपाल वर्मा एक्ट्रेस के पैरों में मसाज करते हैं और कुछ देर बाद किसी पोर्न स्टार की तरह उनके पैरों की उँगलियाँ चाटने लगते हैं।

राम गोपाल वर्मा के इस व्यवहार से आशु भी भौचक्की नजर आती हैं। हालाँकि थोड़ी ही देर बाद आशु रेड्डी ने राम गोपाल वर्मा को उनके गाल पर किस किया। वीडियो में 1:21:00 के बाद राम गोपाल वर्मा को सामने बैठी हिरोइन को यह सलाह देते सुन सकते हैं कि कभी शादी मत करना क्योंकि इससे उसके पति को पूरे शरीर पर अधिकार मिल जाएगा। एक्ट्रेस आशु रेड्डी ने भी राम गोपाल वर्मा के साथ अपनी फोटो इन्स्टाग्राम पर शेयर की है।

सोशल मीडिया यूजर्स को रामू-आशू का यह अंदाज पसंद नहीं आया। ट्विटर पर भी रामू ने एक्ट्रेस के साथ अपना वीडियो शेयर किया था, जहाँ कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, ”आपको हो क्या गया है सर? बहुत ही अजीब है यह।”

वहीं एक यूजर ने इमोजी शेयर किया, जिसमें लिखा हुआ है, ”ठरकी है ठरकी”

वहीं एक यूजर ने लिखा, ”इसमें डेंजर क्या है, आप तो सिर्फ पब्लिसिटी पाने की कोशिश कर रहे हैं… आप अपने आप को एक बड़ी फिल्मी हस्ती कहते हैं, जिस तरह से आपने खुद को पेश किया है, शर्म करो !! और यह देश आपको पद्मश्री भी देगा।”

AAP नहीं, AAAP कहिए जनाब: गुजरात और हिमाचल प्रदेश में गायब नहीं हुए हैं आम आदमी पार्टी के नंबर, जानिए क्या है A का लोचा

गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए वोटों की गिनती चल रही है। रूझान आने शुरू हो गए हैं। टीवी चैनल के पल पल बदलते नंबर के बीच लोग आधिकारिक नंबर जानने के लिए बीच बीच में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी हो आते हैं। आपने पाया होगा कि वहॉं बीजेपी, कॉन्ग्रेस सब है। लेकिन AAP नहीं दिखती, जबकि AAAP मौजूद है।

आप सोच रहे होंगे कि चुनाव के दौरान दिखी आम आदमी पार्टी यानी AAP के नंबर्स कहां गायब हो गए। तो इसका जवाब है कि AAP के नंबर कहीं गायब नहीं हुए हैं। दरअसल AAAP का नंबर ही आम आदमी पार्टी का नंबर है। वही पार्टी जिसका निशान झाड़ू है। जिसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल हैं। जिसकी दिल्ली और पंजाब में सरकार है। जिसने 7 दिसंबर 2022 को दिल्ली नगर निगम के चुनावों में भी जीत हासिल की है।

AAP नहीं, AAAP कहिए जनाब

दरअसल नाम में अतिरिक्त A को लेकर कंफ्यूजन उस समय भी हुआ था, जब पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। यही 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान भी देखने को मिला था। चुनाव आयोग ने उस समय इस कंफ्यूजन को दूर करने का काम किया था, क्योंकि निर्वाचन आयोग की साइट पर हमेशा से आम आदमी पार्टी के लिए AAP नहीं, AAAP प्रयोग होता आया है।

भारतीय निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता ने बताया था, “शॉर्ट फॉर्म में ट्रिपल A कोई चूक नहीं है। इसी शब्द का प्रयोग साल 2015 के चुनावों के वक्त किया गया था।” उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि आम आदमी पार्टी से पहले ही एक पार्टी ने इस नाम को अपने लिए पंजीकृत करवाया था, जबकि आम आदमी पार्टी का पंजीकरण 2013 में हुआ था। उस पार्टी का नाम बता दें आवामी आमजन पार्टी थी जो भारतीय निर्वाचन आयोग में 3 जनवरी 2011 को पंजीकृत हुई थी।

गौरतलब है कि सिर्फ मीडिया, सोशल मीडिया ही नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी खुद भी दल की शॉर्ट फॉर्म aap ही लिखता आया है। चाहे उनके कार्यालय हों, प्रेस कॉन्फ्रेंस हो, मेनिफेस्टो हो। हर जगह आपको उनके चुनाव चिह्न झाड़ू के साथ aap लिखा दिखाई देगा। ये पार्टी साल 2012 में गठित हुई थी और 2013 में इसे निर्वाचन आयोग ने पंजीकृत किया था। पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल हैं जो दिल्ली में सरकार बनाने के बाद अपनी पार्टी को पंजाब तक पहुँचा चुके हैं।

गुजरात का गठन, BJP का अजेय रथ और ब्रांड मोदी… राज्य में 27 वर्षों से भाजपा की सरकार, 5 और सालों के लिए उत्साहित पार्टी

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे (Gujarat Assembly Election Results) आने में अब कुछ ही घंटों का इंतजार है। विभिन्न दलों के प्रत्याशियों की साँसें अभी से थमने लगी हैं। हालाँकि, गुजरात की जमीनी हकीकत को जानने वाले राजनीतिक एवं चुनावी विश्लेषक और एक्जिट पोल साफ कर चुके हैं कि एक बार फिर राज्य में भाजपा की सरकार बनने जा रही है।

गुजरात में पिछले 27 सालों से भाजपा की सरकार है और हिंदुत्व के इस प्रयोगशाला और विकास के गुजरात मॉडल के गढ़ से भाजपा को बाहर करना इतना आसान नहीं है। उधर आम आदमी पार्टी (AAP) चाहे कितने भी दावे करे कि वह गुजरात चुनाव जीतने जा रही है, लेकिन यह सीएम अरविंद केजरीवाल के लिखित दावे जैसा ही फुस्स हो जाएगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने एक शो के दौरान कागज पर लिखकर दिया था कि दिल्ली के MCD चुनाव में भाजपा 250 में से 20 से भी कम सीटें जीतने जा रही है। MCD में AAP की जीत जरूर हुई है, लेकिन उनके झूठे दावों की कलई भी खुली है।

हालाँकि, गुजरात की कहानी दिल्ली जैसी नहीं है। यह भाजपा का गढ़ है। कुछ हिस्सों को छोड़कर जब पूरे देश में कॉन्ग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियों का बोलबाला था, जब भाजपा ने कॉन्ग्रेस को हटाकर गुजरात में सत्ता स्थापित की थी और शासन का ऐसा मॉडल विकसित किया कि गुजरातियों का भाजपा पर पिछले 27 सालों से विश्वास जमा बैठा है। अगर गुजरात में इस बार भाजपा जीतती है तो यह उसकी लगातार 7वीं बार सरकार बनेगी।

राज्य के रूप में गुजरात का गठन

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1953 में पहला राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया, जिसके तहत 14 राज्य तथा 9 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए। हालाँकि, तब गुजरात नहीं बना था और वह मुंबई का ही हिस्सा था। इसके बाद गुजरातियों का आंदोलन तेज हुआ और 1960 में बंबई राज्य को दो भागों में बाँट दिया गया। एक महाराष्ट्र बना और दूसरा गुजरात।

साल 1960 में विधानसभा चुनाव हुए और इसमें 132 सीटों में से 112 सीटों पर कॉन्ग्रेस जीती। सन 1960 से लेकर सन 1975 तक राज्य की सत्ता पर कॉन्ग्रेस का शासन रहा। इसके बाद कुछ समय के जन मोर्चा की संयुक्त सरकार बनी लेकिन वह ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई।

सन 1977 में पहली बार जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी, जिसमें जनसंघ, भारतीय लोकदल, समता पार्टी और कॉन्ग्रेस से अलग हुई कॉन्ग्रेस (ओ) की सरकार बनी और बाबू पटेल मुख्यमंत्री बने। यह सरकार सिर्फ 211 दिनों की चली। इसके बाद 1990 तक फिर से कॉन्ग्रेस से बनी। इस दौरान माधव सिंह सोलंकी राज्य के ताकतवर नेता के रूप में उभरे थे।

गुजरात में भाजपा का सत्ता में प्रदार्पण

इसके बाद 1990 के चुनाव में जनता दल और भाजपा एक साथ आकर चुनाव लड़े। जनता दल के नेता चिमनभाई पटेल थे और भाजपा ने केशुभाई पटेल। उस दौरान दलित-मुस्लिम और क्षत्रिय (राजपूत) मतदाताओं के बल पर सत्ता में दबदबा बरकरार रखने वाली कॉन्ग्रेस को मात देने के लिए भाजपा ने पटेल कार्ड खेला और यह सफल भी रहा।

साल 1990 के चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार हुई जनता दल और भाजपा की मिली-जुली सरकार बनी। इस सरकार का नेतृत्व जनता दल के चिमनभाई पटेल को मिला। हालाँकि, राममंदिर आंदोलन को लेकर जनता दल भाजपा से अलग हो गई और इस बीच एक साल के लिए कॉन्ग्रेस की फिर सरकार बनी।

साल 1995 में हुए चुनावों में भाजपा को जबरदस्त फायदा मिला और राज्य की कुल 182 सीटों में से 121 सीटें भाजपा ने जीती। इस तरह भाजपा की जीत के बाद केशुभाई पटेल मुख्यमंत्री बने, लेकिन एक साल बाद ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा और उनकी जगह सुरेश मेहता मुख्यमंत्री बने। उनकी जगह फिर शंकर सिंह वाघेला आए।

सन 1998 के चुनावों में भाजपा फिर केशुभाई सीएम बने। 1998 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 44.81 फीसदी था, जबकि कॉन्ग्रेस का वोट शेयर 35.88 फीसदी था। इस चुनाव में बीजेपी ने 182 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 117 उम्मीदवार जीते थे।

राज्य में मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी

इसी बीच साल 2001 में विनाशकारी भूकंप आया। केशुभाई पटेल की उदासीनता और राज्य में राजनीतिक उठा-पटक को लेकर नरेंद्र मोदी को राज्य की कमान सौंपी गई। नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही महीनों बाद राज्य में विधानसभा चुनाव हुए और भाजपा ने बहुमत हासिल किया।

इसके बाद से नरेंद्र मोदी की अगुवाई में गुजरात में भाजपा की सरकार रही है। साल 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनकर दिल्ली आ गए। इस तरह 1995 से लेकर 2022 तक राज्य में भाजपा की सरकार बरकरार है और इसमें फिलहाल बदलाव की गुंजाइश नहीं दिख रही है।

‘घायल शेर की साँसें, दहाड़ से ज्यादा खतरनाक होती हैं’: खून टपक रहा था, लेकिन 9 नंबर पर उतर कर रोहित शर्मा ने अटका दी बांग्लादेश की साँसें

भारत और बांग्लादेश (India vs Bangladesh) के बीच दूसरे वनडे मैच में भारत की हार हो गई है। हालाँकि, कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) रहा है। इस मैच के दौरान टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा चोटिल हो गए, लेकिन हार माने बिना वे दोबारा फील्ड में उतरे। उनके इस जुझारूपन को देखकर लोग शर्मा की खूब तारीफ कर रहे हैं।

दरअसल, मैच की पहली पारी में बांग्लादेश बैटिंग कर रही थी, एक बॉल से रोहित शर्मा चोटिल हो गए हैं। स्लिप एरिया में फील्डिंग के दौरान उनके बाएँ अंगूठे में चोट लगी। इसके बाद उन्हें एक्स-रे के लिए ढाका के एक अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल से लौटकर शर्मा स्टेडियम लौटे और क्रीज पर बल्लेबाजी करते नजर आए। इस दौरान उनकी अँगुली में पट्टी बँधी हुई भी नजर आई। घायल होने के बावजूद उन्होंने तूफानी पारी खेली। शर्मा ने 28 गेंदों में 51 रनों की बौछार कर दी। इस दौरान रोहित शर्मा ने ने 5 खतरनाक छक्के और 2 चौके जड़े।

हालाँकि, इस मैच में वे भारत को जीत नहीं दिला पाए और भारत 5 रनों से हार गया। अंतिम गेंद पर भारत को जीत के लिए 6 रनों की जरूरत थी, लेकिन बांग्लादेश के मुश्ताफिजुर रहमान ने अंतिम गेंद डॉट निकाल दी। इस तरह भारत को सिर्फ एक रन पर संतोष करना पड़ा।

इस दौरान रोहित शर्मा ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। रोहित शर्मा पहले ऐसे भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच में 500 छक्के लगाया है। शर्मा की इस पारी का सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है।

रोहित शर्मा की तारीफ करते हुए अविनाश आर्यन नाम के एक यूजर ने लिखा, “घायल शेर की साँसें, उसकी दहाड़ से भी ज्यादा खतरनाक होती है।”

आनंद सिंह नाम के यूजर ने लिखा, “भारत भले ही मैच हार गया है, लेकिन रोहित शर्मा ने भारतीयों और क्रिकेट की दुनिया का दिल जीत लिया है।”

रतनीश नाम के यूजर ने लिखा, “परिणाम चाहे जो भी हो, रोहित शर्मा की यह पारी लंबे समय तक याद रखी जाएगी। सचमुच चैंपियन।”

कैश फॉर टिकट: MLA त्रिपाठी के सीट पर AAP साफ, आदेश गुप्ता वाले ऑडियो को एजेंसी ने पाया था फेक

दिल्ली में MCD चुनाव के नतीजे आ गए हैं और ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ 134 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। वहीं 15 वर्षों से महानगरपालिका की सत्ता पर काबिज भाजपा एंटी-इंकम्बेंसी के बावजूद 104 सीटें लाने में कामयाब रही है और 2017 के MCD चुनाव के मुकाबले उसका वोट प्रतिशत भी सुधरा है। खास बात ये है कि AAP के दागी मंत्री सत्येंद्र जैन और घोटाले के आरोपों में गिरे उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के वार्डों में भाजपा की जीत हुई है।

इस दौरान सभी की नज़रें मॉडल टाउन विधानसभा क्षेत्र पर भी थी, जहाँ से अखिलेश पति त्रिपाठी AAP के विधायक हैं। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। उनके विधानसभा क्षेत्र की तीनों की वार्डों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। दिल्ली भाजपा के नेता कपिल मिश्रा ने भी इस जीत पर ख़ुशी जताई है, जिन्होंने अंतिम दिनों में यहाँ धुआँधार चुनाव प्रचार किया था। ज्ञात हो कि ‘पेड़ों के बदले टिकट’ मामले में अखिलेश पति त्रिपाठी आरोपित हैं।

अखिलेश पति त्रिपाठी के साले को ‘एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB)’ ने गिरफ्तार भी किया था। आरोप है कि वार्ड संख्या 69 से AAP का पार्षद टिकट दिलाने के लिए उसने 90 लाख रुपए की माँग की थी। आरोप है कि शोभा ने अखिलेश पति त्रिपाठी को 35 लाख रुपए दे भी दिए थे। हालाँकि, मनीष सिसोदिया ने दावा किया था कि AAP में टिकट बेचा नहीं जाता। अखिलेश पति त्रिपाठी को ACB ने समन भी भेजा था। अब उनके विधानसभा क्षेत्र में पार्षद के चुनाव में भाजपा ने AAP का सूपड़ा साफ़ कर दिया है।

दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता का नाम भी इस तरह के स्कैंडल में घिसटने का प्रयास हुआ था। उनका ऑडियो वायरल कर के ये दावा किया गया था कि वो टिकट की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं। हालाँकि, मीडिया ने जानकारी दी थी कि ‘डिजिटल मॉर्फ चेकिंग एजेंसी’ ने जाँच के बाद उनका ऑडियो फेक पाया है। एजेंसी ने दावा किया था कि अलग-अलग ऑडियो को मिला कर इसे तैयार किया गया था। आदेश गुप्ता ने भी इसे विपक्ष की ‘गंदी राजनीति’ करार दिया था।

आदेश गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कन्नौज में स्थित गुरसहायगंज से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कानपुर स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक किया है। 1994 में जब वो दिल्ली आए थे, तब उन्होंने ट्यूशन पढ़ा कर अपना गुजरा चलाया था। PWD में कॉन्ट्रैक्टर के रूप में कार्य करने के बाद उन्होंने कारोबार और राजनीति में सफलता प्राप्त की। वो अप्रैल 2018 में NDMC के मेयर बने और जून 2020 में उन्हें दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

‘राहुल गाँधी FIFA मैच देख रहे हैं और चुनावों में पार्टी फुटबॉल बन गई’: MCD चुनावों में कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ़, अपने नेता भी सुना रहे खरी-खोटी

दिल्ली के MCD चुनावों में कॉन्ग्रेस की दुर्गति हो गई है। उसे सिर्फ 09 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। उधर पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के तहत देश भर में घूम रहे हैं। वे ना तो गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान दिखे और ना ही दिल्ली के MCD चुनावों को उन्होंने महत्व दिया।

भारत जोड़ो यात्रा पर निकले राहुल गाँधी का मंगलवार (6 दिसंबर 2022) को एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे कॉन्ग्रेस के अन्य नेताओं के साथ एक ग्राउंड में फुटबॉल मैच का आनंद लेते नजर आए। इसको लेकर कॉन्ग्रेस नेता आचार्य प्रमोद ने राहुल गाँधी पर तंज कसा।

आचार्य प्रमोद ने लिखा, “MCD का ‘रिजल्ट’ भी देखना चाहिए।” दरअसल, बुधवार (7 दिसंबर 2022) को दिल्ली MCD चुनावों की मतगणना थी। इसमें कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन को लेकर प्रमोद ने यह कटाक्ष किया।

टीवी9 के एक शो के दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं एंकर अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा, “राहुल जी आराम के क्षणों में FIFA का मैच देख रहे थे। हमने कहा MCD का भी चुनाव देख लेते। यहाँ पूरी पार्टी फुटबॉल हो गई और वे FIFA देख रहे हैं।”

राहुल गाँधी के नेतृत्व में जिस तरह से कॉन्ग्रेस की दुर्गति हुई, उसके बाद उन्होंने लगता है कि चुनावों को महत्व देना ही छोड़ दिया है। उनके लिए चुनाव सिर्फ मोह-माया जैसा अब रह गया है। वे निर्विकार एवं साक्षी भाव से सिर्फ कर्म किए जा रहे हैं और राजनीति एवं चुनाव के आडंबर में फँसना ही नहीं चाहते। इसलिए चुनावों के मौसम में भी राजनीति से विमुख होकर सिर्फ आनंद में लिप्त हैं।

वे गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दौरान भी ना नजर आए और ना ही एक शब्द बोले। इसलिए MCD जैसे सबसे सबसे निचले निकाय पर उनसे बयान या प्रचार का उम्मीद करना बेमानी-सा है। यह उनके समभाव के परालौकिक ज्ञान पर सवाल उठाने जैसा है। वे सिर्फ साक्षी भाव से इस परिवर्तनशील संसार को सिर्फ देख रहे हैं।

हालाँकि, आचार्य प्रमोद जैसे धर्मगुरु भी उनके इस नए अवतार को शायद समझ नहीं पा रहे हैं। इसके लिए उन पर कटाक्ष कर रहे हैं। यही नहीं, मीडिया और राजनीति में भी चुनाव नतीजों के दिन फुटबॉल मैच देखने को लेकर लोग उनकी राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं। बता दें कि आचार्य प्रमोद साल 2019 में लखनऊ सीट से कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। अब वे कॉन्ग्रेस से भी कड़वे सवाल करते हैं।

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी राजस्थान में हैं। वे कोटा में मोरक्को बनाम स्पेन के बीच खेले जा रहे फुटबॉल मैच का एक बड़े स्क्रीन पर आनंद लेते नजर आए। इस दौरान उनके साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित अन्य नेता भी मौजूद रहे।

दिल्ली के सीलमपुर में बुर्का वाली पार्षद, जीत के बाद भी कोई नहीं देख सका चेहरा: लोगों ने कसा तंज – महिला सशक्तिकरण की बड़ी जीत

दिल्ली एमसीडी चुनाव में जीत हासिल करने वाली एक बुर्के वाली पार्षद का वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल, दिल्ली एमसीडी चुनाव में तीन वार्डों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इन्हीं में से एक सीलमपुर वार्ड नंबर 225 सीट से शकीला बेगम नाम की उम्मीदवार को कामयाबी मिली। जीत मिलने के बाद वह पत्रकारों के सामने आईं तो सिर से पाँव तक बुर्के में ढँकी हुई थी। यहाँ तक कि उनका चेहरा भी नहीं दिख है था। उन्होंने रिपोर्टरों को बाइट भी बुर्के में ही दी।

शकीला बेगम के बगल में बैठे शख्स उनकी मदद कर रहे थे। वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि जीत के बाद जब ‘नवभारत टाइम्स’ के पत्रकार ने शकीला बेगम से प्रतिक्रिया माँगी तो पहले वह कुछ समझ नहीं सकीं, फिर उन्होंने कहा, “सीलमपुर की जनता को मैं बहुत मुबारकबाद देती हूँ और दुआ करती हूँ कि हमारा ऐसा ही साथ हमेशा बना रहे। ऐसे ही हमें उनका प्यार मिलता रहे। लोगों के कर्ज तो उतर जाते हैं लेकिन हमारे इलाके की जनता ने जो अहसान किया है, वह कभी नहीं उतरेगा।”

शकीला ने लोगों के लिए काम करने का भरोसा दिलाया। शकीला बेगम जिस सीट से जीत कर आई हैं वह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए आरक्षित की गई थी। जीत हासिल करने के बाद जिस तरह शकीला बेगम मीडिया के सामने पेश हुईं वह ट्विटर पर कौतूहल का विषय बन गया। पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “महिलाओं के लिए आरक्षित सीट सीलमपुर से विजयी उम्मीदवार शकीला बेगम, महिला सशक्तिकरण और हिजाब की बड़ी जीत”

महेश विक्रम हेगड़े नाम के यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “शकीला बेगम से मिलें जो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दिल्ली के सीलमपुर वार्ड से जीती हैं। कोई टिप्पणी नहीं।”

वीडियो पर संजय नाम के एक यूजर ने कमेंट किया कि क्या आपको यकीन है कि वह शकीला बेगम हैं या उनकी जगह कोई और? उन्होंने लिखा कि लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाला राजनीतिक व्यक्ति जिसे लोगों ने चुना है वह लोगों को अपना चेहरा भी नहीं दिखा सकती। यूजर ने पूछा कि जब जनता के सामने अपना चेहरा दिखाने से भी डरते हैं तो सार्वजनिक जीवन में क्यों आते हैं?

वहीं कुछ यूजर्स तो मजाक उड़ाते भी नजर आए।

आपको बता दें कि शकीला बेगम तीसरी बार एमसीडी में पार्षद बनी हैं। 2017 के चुनाव में भी शकीला बेगम ने सीलमपुर से जीत हासिल की थी। इस साल उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा की सीमा शर्मा को 4262 वोटों के अंतर से हराया।

गॉड ने 6 दिन दुनिया बनाई, 7वें दिन आराम किया… केरल में ईसाइयों के हिंसक प्रदर्शन के बाद 35 चर्च बंद: ‘Holy Mass’ में पादरी का चेहरा किधर होगा, इसी पर बवाल

केरल के कोच्चि में सेंट मैरी कैथेड्रल बेसिलिका में रविवार (27 नवंबर, 2022) को ‘होली मास’ की प्रक्रिया को लेकर दो समूहों के बीच हिंसक टकराव देखा गया था। बाद में टकराव इतना बढ़ गया कि 35 चर्चों को बंद करना पड़ा।

आर्कबिशप एंड्रयूज ताज़थ को ‘होली मास’ प्रक्रिया का विरोध कर रहे ईसाइयों ने बेसिलिका में प्रवेश करने से रोक दिया था। वहीं अनुयायियों के एक अन्य समूह ने चर्च का ताला तोड़ने का प्रयास किया, जिससे तनाव और बढ़ गया। कथित तौर पर, हिंसक प्रदर्शनकारियों ने चर्च की संपत्ति को भी नुकसान पहुँचाया। बढ़ते तनाव के मद्देनजर, पुलिस ने हस्तक्षेप किया और विरोध करने वाले समूहों को चर्च खाली करने के लिए कहा। इसके बाद स्थिति सामान्य होने तक चर्च पर ताला लगा दिया गया।

हालाँकि, हिंसक विरोध खत्म नहीं हुआ। ‘दैनिक भास्कर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न ईसाई संगठनों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद 35 चर्चों को बंद कर दिया गया है। दरअसल, ईसाई समुदाय की मान्यता है कि गॉड ने 6 दिन में दुनिया को बनाया था और 7वें दिन आराम किया था। इसी वजह से ईसाई भी रविवार को ईसा मसीह की पूजा करते हैं। इसी पूजा को ‘होली मास’ कहा जाता है।

रोमन कैथोलिक चर्च की स्थानीय विंग सिरो मालाबार ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि इसकी प्रैक्टिस के दौरान पादरी और भक्तों का मुँह पूर्व दिशा की ओर होगा, लेकिन केरल के मॉडर्न कैथोलिक ईसाइयों का दावा है कि ये बात कहीं नहीं लिखी है। इससे अनुयायी पादरी को न तो देख पाते हैं और न ही उससे संवाद कर पाते हैं। इनका दावा है कि हम पादरी को भगवान के रूप में देखते हैं। भगवान हमारी तरफ नहीं देखे, ये बात ठीक नहीं है।

अल्माया मुन्नेट्टम संगठन का कहना है कि हमने पोप फ्रांसिस से अनुमति ली थी कि हमारे चर्च में लोगों की ओर देखकर ही प्रार्थना होगी, लेकिन अब हम पर नया आदेश मानने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ये आदेश वापस नहीं लिया गया तो रोमन कैथोलिक चर्च को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अगस्त 2021 में, सिरो मालाबार कैथोलिक चर्च के धर्मसभा ने अपने चर्चों में ‘होली मास’ आयोजित करने की एक समान विधि लागू करने का निर्णय लिया था। यहां यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि ईसाइयों के बीच ‘होली मास’ पूजा की सबसे अच्छी प्रक्रिया मानी जाती है।

ईसाई समुदाय के विशेषज्ञों के मुताबिक, नियम ये कहता है कि प्रार्थना के दौरान पादरी को आधे समय अनुयायियों की ओर देखना चाहिए। बाकी समय पूर्व दिशा की ओर देखना चाहिए। हालांकि, मॉडर्न ईसाइयों ने इसे मानने से भी इनकार कर दिया। उनका कहना है कि 50 साल से जो प्रथा चली आ रही है, वही चलेगी।

आ रहे हैं भगवाधारी… जिस सीट पर था दंगाई ताहिर हुसैन का कब्ज़ा, उसे BJP ने किया अपने नाम: दंगा प्रभावित इलाकों की जनता ने भाजपा पर जताया भरोसा

दिल्ली MCD चुनावों में अधिकतर लोगों की नजर साल 2020 में हिन्दू विरोधी दंगों से प्रभावित रहे उत्तर पूर्वी क्षेत्र पर थी। इस बार यहाँ की सीटें सभी पार्टियों के लिए अहम थीं। घोंडा विधानसभा सीट में 4 वार्ड आते थे। इनके नाम भजनपुरा, यमुना विहार, ब्रह्मपुरी और घोंडा वार्ड हैं। इन 4 में से 2 वार्डों में भाजपा और 2 वार्डों में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की है।

जानकारी के मुताबिक, भजनपुरा वार्ड में आप पार्टी की प्रत्याशी रेखा रानी ने नजदीकी भाजपा उम्मीदावर से 3100 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। वहीं यमुना विहार वार्ड में भाजपा के प्रमोद गुप्ता ने 9000 से ज्यादा वोटों से नजदीकी आप पार्टी के कैंडिडेट को हराया है। तीसरे वार्ड घोंडा से भाजपा की प्रीति गुप्ता ने आप पार्टी प्रत्याशी को 3000 से अधिक वोटों से हराया है। ब्रह्मपुरी वार्ड में आम आदमी पार्टी की छाया शर्मा ने भाजपा प्रत्याशी को 2900 से ज्यादा वोटों से हराया है।

दिल्ली का सभापुर वार्ड भाजपा के बृजेश सिंह की झोली में गया। सोनिया विहार वार्ड से वार्ड से भाजपा की सोनी पांडेय ने जीत दर्ज की है। इन दोनों प्रत्याशियों की जीत पर ‘जय श्री राम’ और ‘आ रहे हैं भगवाधारी’ जैसे नारे लगे हैं।

हिंसा प्रभावित रहे जफाराबद के चौहान बांगर से कॉन्ग्रेस के चौधरी जुबेर अहमद की बेगम शगुफ्ता ने जीत हासिल की है। मौजपुर के वार्ड संख्या 228 से भी भाजपा के अनिल कुमार शर्मा ने जीत हासिल की। करावल नगर के दयालपुर वार्ड से भी भाजपा के पुनीत शर्मा ने जीत दर्ज की।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों के मास्टरमाइंड के तौर पर आरोपित किए गए आप पार्षद ताहिर हुसैन की विधानसभा नेहरू विहार में भाजपा ने जीत दर्ज कर ली है। यहाँ भाजपा के अरुण भाटी ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी अलीम अंसारी को एक बेहद नजदीकी मुकाबले में 309 वोटों से हरा दिया है। 2020 में हिंसा प्रभावित करवाल नगर पश्चिम में भी भाजपा ने जीत दर्ज की। यहाँ बीजेपी के सत्यपाल सिंह बैंसला ने बाजी मारी। पिछले कुछ समय पहले सुंदर नगरी हिन्दू युवक की हत्या के लिए काफी चर्चा में रहा।

यहाँ पर आम आदमी पार्टी की महिला प्रत्याशी मोहिनी ने लगभग 10 हजार वोटों से भाजपा प्रत्याशी रेनू को हराया है। मुस्तफाबाद और बृजपुरी वार्डों में कॉन्ग्रेस कैंडिडेट जीते।