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दवा-अनाज देकर लुभाना बेहद गंभीर, चैरिटी के नाम पर धर्म परिवर्तन नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट, केंद्र-राज्यों को एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने जबरन धर्मांतरण को ‘गंभीर मुद्दा’ बताया है। कहा है कि यह संविधान के विरुद्ध है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि चैरिटी के नाम पर किसी का धर्म परिवर्तन कराने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस संबंध में केंद्र और राज्यों को विस्तृत हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं।

चैरिटी की आड़ में धर्मांतरण करने वाले मिशनरीज और गैर सरकारी संस्थानों (NGO) की नीयत पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 दिसंबर 2022) को यह बात कही। अदालत ने कहा कि दवा और अनाज देकर लोगों को लुभाना और उनका धर्म परिवर्तन करना बेहद गंभीर मसला है। हर अच्छे काम का स्वागत है, लेकिन उसके पीछे की नीयत की जाँच जरूरी है। अदालत वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह केंद्र को इस बाबत कड़े कदम उठाने का निर्देश दे ताकि डरा-धमकाकर, उपहार या रुपए-पैसों का लालच देकर धर्मांतरण को रोका जा सके। जस्टिस शाह की अध्यक्षता वाली 2 जजों की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई (14 नवंबर 2022) में कोर्ट ने जबरन धर्म परिवर्तन को देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया था। केंद्र ने भी इससे सहमति जताते हुए कहा था कि 9 राज्यों ने इसके खिलाफ कानून बनाया है। केंद्र भी ज़रूरी कदम उठाएगा।

सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि वे सभी राज्यों से जबरन धर्मांतरण पर डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कोर्ट से एक हफ्ते का समय माँगा। मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर 2022 को होगी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “धर्म परिवर्तन के मामलों को देखने के लिए एक कमेटी होनी चाहिए, जो तय करे कि वाकई हृदय परिवर्तन हुआ है या लालच और दबाव में धर्म बदलने की कोशिश की जा रही है।”

पीठ ने कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है। दान और समाज सेवा अच्छी चीजें हैं, लेकिन धर्मांतरण के पीछे कोई गलत मकसद नहीं होना चाहिए।” एक वकील की तरफ से इस याचिका की मान्यता पर सवाल उठाए जाने पर पीठ ने कहा कि इतना टेक्निकल होने की जरूरत नहीं है। हम यहाँ पर उपाय खोजने के लिए बैठे हैं। हम यहाँ एक मकसद के लिए हैं। हम चीजों को ठीक करने आए हैं। अगर इस याचिका का मकसद चैरिटी है, तो हम इसका स्वागत करते हैं। लेकिन यहाँ नीयत पर ध्यान देना जरूरी है।

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने माँग की है कि धर्म परिवर्तनों के ऐसे मामलों को रोकने के लिए अलग से कानून बनाया जाए या फिर इस अपराध को भारतीय दंड संहिता (IPC) में शामिल किया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह मुद्दा किसी एक जगह से जुड़ा नहीं है, बल्कि पूरे देश की समस्या है जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

दोस्त बनाया, कर्जा लिया, फिर मारकर अनाज की टंकी में डाल दिया: नितिन भंडारी की हत्या में नौशाद ब्रदर्स एंड अम्मी गिरफ्तार

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में 27 नवंबर 2022 को हुई नितिन भंडारी की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। तीन सगे भाई गिरफ्तार किए गए हैं। इनकी पहचान आजाद और नौशाद के तौर पर हुई है। तीसरा नाबालिग है। अम्मी गुलशन सहित इनकी गिरफ्तारी 5 दिसंबर को हुई। पता चला है कि उधार का पैसा माँगने के चलते इन्होंने नितिन की हत्या की थी।

मिली जानकारी के मुताबिक 35 वर्षीय नितिन मूल रूप से पौड़ी जिले के पाबो ब्लॉक के गाँव चोड़िख का रहने वाला था। वह हरिद्वार में एक फैक्ट्री में काम करता था। नितिन के घर से कुछ ही दूरी पर भगवानपुर थाना क्षेत्र के ईदगाह कॉलोनी में गुलशन अपने तीन बेटों के साथ रहती है। नौशाद की नितिन से दोस्ती थी। एक दिन नौशाद ने प्लॉट खरीदने के नाम पर नितिन से ढाई लाख रुपए उधार ले लिए। बाद में पैसे लौटाने में आनाकानी करने लगा। इसके चलते नितिन और नौशाद के रिश्तों में तल्खी आ गई।

27 नवंबर को भी नितिन पैसे माँगने नौशाद के घर गया था। गर्मागर्म बहस के बाद मामला हाथापाई तक पहुँच गया। इसके बाद नौशाद ने नितिन को जमीन पर पटक उसका गला गमछे से घोंट दिया। नौशाद के परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उसका साथ दिया। नितिन की हत्या के बाद उसकी लाश के साथ नौशाद का पूरा परिवार रात भर सोया। अगले दिन आरोपितों ने बाजार से अनाज की टंकी खरीदी और उसमें नितिन की लाश को रख उसे ठिकाने लगाने के लिए सही समय का इंतजार कर रहे थे।

2 दिनों तक नौशाद का पूरा परिवार नितिन की लाश के साथ रहा। लेकिन जब अनाज की टंकी से खून निकलने लगा तो आरोपित शव को वहीं छोड़ और घर में ताला लगा भाग निकले। बाद में घर की तलाशी के दौरान पुलिस को नितिन की लाश बरामद मिली थी। लाश की जेब में मिली पर्ची से उसकी कम्पनी और कम्पनी से मिली जानकारी से नितिन के घर वालों को सम्पर्क किया गया। पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर जाँच शुरू कर की। इस दौरान पुलिस ने उस पिकअप चालक को खोज निकाला जो आरोपितों का सामान लेकर गया था। पिकअप चालक ने अपनी बुकिंग के लिए आए एक बुलेट का नंबर बताया जो आरोपितों की निकली। इसी नंबर से पुलिस आरोपितों तक पहुँची।

जाँच के दौरान पुलिस ने पाया कि गुलशन और उसके परिवार को किराए पर रखने वाले मकान मालिक ने सत्यापन नहीं करवाया था। इस बावत जल्द ही मकान मालिक पर कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने जाँच के दौरान कुछ मोबाइल नंबर जुटाए जिनकी लोकेशन नोएडा, बुलंदशहर और राजस्थान दिखा रही थी। पुलिस ने इन लोकेशनों पर छापेमारी करते हुए अलग-अलग दिनों में सभी 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक आरोपितों ने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है। उनके पास से गैस सिलेंडर, फ्रिज, बुलेट, मोबाइल फोन, मृतक नितिन का पैन कार्ड और ATM कार्ड के साथ 1 लाख 10 हजार रुपए कैश बरामद किए गए हैं। मामले में शामिल 3 आरोपितों को जेल और एक अन्य नाबालिग को बाल सुधर गृह भेजा गया है। नितिन की शादी साल 2018 में हुई थी। वह लगभग 6 साल से हरिद्वार की एक दवा कम्पनी में काम करता था। उसके पिता को 2019 में लकवा मार चुका है। घर में माँ के साथ 2 बहनें हैं।

गुजरात में भूपेंद्र तोड़ेंगे नरेंद्र का रिकॉर्ड तो हिमाचल में कड़ी टक्कर में BJP आगे: देखें किस चैनल का एग्जिट पोल क्या कहता है, MCD में चल सकती है झाड़ू

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा तथा दिल्ली में नगर निगम (MCD) चुनाव के लिए मतदान हो चुके हैं। गुजरात और हिमाचल प्रदेश का चुनाव परिणाम गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को सामने आएँगे। वहीं, दिल्ली नगर निगम चुनाव के परिणाम बुधवार (7 नवंबर 2022) को घोषित किए जाएँगे। इन तीनों ही चुनावों को लेकर एग्जिट पोल्स सामने आ चुके हैं। आइये देखें, एग्जिट पोल्स में किसकी सरकार बनते हुए दिख रही है।

गुजरात में फिर एक बार भाजपा सरकार

गुजरात विधानसभा चुनावों को लेकर सामने आए एग्जिट पोल्स (Gujarat EXIT Poll) में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के आसार नजर आ रहे हैं। आज तक के एग्जिट पोल के अनुसार, गुजरात की कुल 182 सीटों में भाजपा को 129-151 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस को 16-30 सीटें मिलने का अनुमान है।

TV9 के एग्जिट पोल के अनुसार, गुजरात में सत्ताधारी भाजपा को 125-130 सीटें तो वहीं कॉन्ग्रेस के खाते में 40-45 सीटें जाती दिख रहीं हैं। TV9 के एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी को पाँच सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।

इसके अलावा, गुजरात न्यूज एक्स-जन की बात के एग्जिट पोल में भी बीजेपी 117-140 सीटों के साथ वापसी करती हुई दिख रही है। जबकि, कॉन्ग्रेस 34-51 सीटें व आम आदमी पार्टी के खाते में, 6-13 सीटें जा सकतीं हैं।

एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल के अनुसार, गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को 140 सीटें कॉन्ग्रेस को 23 आप को 15 और अन्य को 4 सीटें मिलने का अनुमान है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के एग्जिट पोल के अनुसार, गुजरात में कॉन्ग्रेस का लगभग सूफड़ा साफ हो सकता है और बीजेपी को कुल 182 में से 167 सीटें मिल सकतीं हैं। जबकि कॉन्ग्रेस को महज 4 सीटें ही मिलने का अनुमान है। यदि वास्तव में होता है तो यह गुजरात के इतिहास में कॉन्ग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी हार होगी।

हिमाचल में भी बनती दिख रही है भाजपा की सरकार, कुछ सीटों के परिणाम बदल सकते हैं खेल

हिमाचल प्रदेश चुनाव की बात करें तो अब तक सामने आए एग्जिट पोल (Himachal EXIT Poll) में यहाँ भी बीजेपी बहुमत के साथ सरकार बनाती दिख रही है। हालाँकि, कुछ पोल्स में भाजपा और कॉन्ग्रेस में कड़ी टक्कर दिखाई गई है। यदि, दोनों ही राजनीतिक दलों को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तब अन्य दलों या निर्दलीय प्रत्याशी सरकार बनाने का फैसला कर सकते हैं।

ज़ी न्यूज़ और बार्क के एग्जिट पोल के अनुसार, हिमाचल प्रदेश की 68 सीटों में से बीजेपी कक 38 सीटें तो वहीं, कॉन्ग्रेस को 28 और आम आदमी पार्टी को 2 सीटें मिलने का अनुमान है। इंडिया टीवी के एग्जिट पोल में, भाजपा 35-40 सीटें प्राप्त कर सकती है। वहीं, कॉन्ग्रेस को 26-31 सीट मिलने का अनुमान है। जबकि, AAP का खाता खुलता नहीं दिख रहा है।

इसके अलावा, टाइम्स नाउ नवभारत के एग्जिट पोल में भी हिमाचल प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के आसार हैं। यहाँ भाजपा को 34-42 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। वहीं, कॉन्ग्रेस को 24-32 सीटें मिल सकती हैं। अन्य को 3 सीटें मिलने की बात कही गई है।

‘न्यूज 24’ और ‘चाणक्य टुडे’ के एग्जिट पोल में, भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच काँटे की टक्कर देखने को मिल रही है। इस एग्जिट पोल के अनुसार, भाजपा और कॉन्ग्रेस दोनों के बीच 42-42% वोट शेयर मिला है। इस प्रकार, दोनों ही पार्टियाँ 33-33 सीटें प्राप्त कर सकती हैं। हालाँकि, यह भी कहा गया है कि 7 सीटें कम या ज्यादा हो सकतीं हैं।

दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत

दिल्ली नगर निगम चुनाव में अब तक कब्जा करती आई भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ है। एग्जिट पोल्स (Delhi MCD EXIT Poll) के पोल यानी पोल ऑफ पोल के अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को कुल 250 में से 146-156 सीटें मिलती दिख रहीं हैं। वहीं, भाजपा को 89-94 और कॉन्ग्रेस को महज 6-10 सीटें मिलने का अनुमान है। यानी गुजरात, हिमाचल प्रदेश औए दिल्ली तीनों जगह कॉन्ग्रेस वोटों के लिए तरसती नजर आ रही है।

टाइम्स नाउ नवभारत ईटीजी के एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली MCD के चुनाव में, AAP को 146-156 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, बीजेपी को 89-94 सीटें मिलती दिख रहीं हैं व कॉन्ग्रेस के खाते में 6-10 सीटें जा सकतीं हैं। जी न्यून-बार्क के एग्जिट पोल में भी आप की सरकार बनती दिख रही है। इस पोल के अनुसार दिल्ली MCD में, AAP को 134-146 सीट, वहीं बीजेपी को 82-94 और कॉन्ग्रेस को 8-14 सीट मिलने की बात कही गई है।

इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल में दिल्ली MCD की कुल 250 सीटों में से आप को 149-171 सीट, बीजेपी को 69-91 तथा कॉन्ग्रेस को 3-7 सीटें मिलने के आसार जताए जा रहे हैं।

‘रूस से यूरोप खरीद रहा सबसे ज्यादा ईंधन’: S जयशंकर ने भारत को ज्ञान देने वाले पश्चिमी देशों को आँकड़ों के साथ लताड़ा, कहा – 10 देशों को मिला कर…

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही यूरोपीय यूनियन (EU) भारत पर रूस से ईंधन नहीं खरीदने को लेकर दबाव बनाता रहा है। हालाँकि सच्चाई कुछ और ही है। आँकड़ों के मुताबिक यूरोप भारत से कहीं ज्यादा ईंधन की खरीद कर रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ((Dr. S Jaishankar) ने इस मामले पर यूरोप को आईना दिखाया है। इसके साथ ही उन्‍होंने साफ कर दिया है कि भारत की ऊर्जा जरूरतें सिर्फ वही तय करेगा।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार (5 दिसंबर, 2022) को जर्मनी की विदेश मंत्री अन्नालेना बेयरबॉक (Annalena Baerbock) के साथ एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की तुलना यूरोपिय यूनियन से करते हुए आँकड़े पेश किए। रूस से ईंधन आयात पर जयशंकर ने कहा कि यूरोप ने उन 10 देशों को मिलाकर रूस से ज्‍यादा तेल, गैस और कोयले का आयात किया है जो इस मामले में उसके बाद आते हैं। यह आँकड़े 24 फरवरी और 17 नवंबर 2022 के बीच के हैं।

जयशंकर ने यह भी कहा कि यूरोप भारत की ऊर्जा जरूरतों को तय नहीं कर कर सकता है। वह यह भी नहीं बता सकता है कि भारत क्‍या कहाँ से खरीदेगा। उन्होंने यूरोपीय यूनियन को आईना दिखाते हुए कहा कि खुद वह कुछ करे और भारत से कुछ करने के लिए कहे। इस चीज को समझने की जरूरत है।

भारत से यूरोप के आयात की तुलना करते हुए जयशंकर ने कहा कि पश्चिमी देशों का ऑयल इम्‍पोर्ट भारत की तुलना में 5 से 6 गुना ज्‍यादा है। गैस तो अनगिनत गुना ज्‍यादा है क्‍योंकि भारत इसका आयात नहीं करता है। कोयला आयात भारत की तुलना में 50 फीसदी ज्‍यादा है। जयशंकर ने आगे कहा, ”मैं आपसे आँकड़े देखने का आग्रह करूँगा। ‘रूस फॉसिल फ्यूल ट्रैकर’ नाम की एक वेबसाइट है जो आपको सभी देशों के वास्तविक डाटा उपलब्ध कराएगी। किस देश ने कितना तेल आयात किया है आपको पता चल जाएगा। यह आपके लिए बहुत मददगार साबित होगी।”

आँकड़ों के अनुसार. 5 दिसंबर 2022 तक जर्मनी और नीदरलैंड रूसी ईंधन के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं। इसके बाद इटली, पोलैंड, फ्रांस, बुल्गारिया और ग्रीस जैसे देश हैं।

अब्बू, दादा और 3 चाचाओं ने मिल कर 9 साल की बच्ची को मार डाला, वो तड़पती रही-ये वीडियो बनाते रहे: पड़ोसियों को फँसाने के लिए रची थी साजिश

पीलीभीत (Pilibhit) में 9 साल की बच्ची की हत्या का दर्दनाक मामला सामने आया है। इस घटना को बच्ची के अब्बू अनीस, दादा व चाचाओं ने मिलकर अंजाम दिया। हैवानियत इतनी कि जब बच्ची तड़प रही थी तो इन्हीं लोगों ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। मामले में पुलिस ने बच्ची के दादा, अब्बू और तीन चाचा को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि अपने पड़ोसियों को फँसाने के लिए इन लोगों ने बच्ची की चाकू घोंपकर हत्या (Murder) कर दी। बच्ची का शव माधोपुर में मिला था।

पुलिस को जाँच के दौरान पता चला कि शादाब के परिवार और शकील में काफी समय से मुकदमेबाजी चल रही है। इसमें कोर्ट ने शादाब और उसके परिवार के खिलाफ वॉरंट जारी किया था। इसी बात से परेशान होकर उन्होंने शकील को फँसाने की योजना बनाई। शुक्रवार (2 दिसंबर, 2022) की शाम बच्ची का चाचा शादाब उसे मेला दिखाने के बहाने ग्राम सौदा पट्टी ले गया था।

पुलिस अधीक्षक दिनेश पी ने बताया, “वहाँ सभी आरोपित एकजुट हुए और बच्ची को एक बाग में ले जाकर नींद की गोली खिला दी। फिर उसे पराली में छुपा दिया। फिर शनिवार (3 दिसंबर, 2022) सुबह चार बजे चाकू घोंपकर हत्या कर दी। इसके बाद उसे मरा समझकर शकील को फँसाने के उद्देश्य से उसके खेत में फेंक दिया।”

उन्होंने बताया कि कुछ समय के बाद वे दोबारा खेत पर आए। हैरान करने वाली बात यह है कि उस वक्त बच्ची जिंदा थी। वे सभी बच्ची के मरने का इंतजार करने लगे। इस दौरान उसका वीडियो भी बनाया। मरने के बाद वीडियो बनाकर शकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस ने पिता अनीस, चाचा शादाब, नसीम, सलीम और दादा शहजादे को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से चाकू और खून से सने कपड़े बरामद कर लिए गए हैं।

बोस्टन की यूनिवर्सिटी में ‘The Wire’ की आरफा का ‘व्याख्यान’, भारत में लोकतंत्र पर प्रोपेगंडा: आयोजकों में आतंकवादियों के हमदर्द, छिपाया नाम

वामपंथियों के प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ की सीनियर संपादक आरफा खानम शेरवानी ने सोमवार (5 दिसंबर, 2022) को एक ट्वीट करते हुए कहा है कि उन्हें ‘मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय (UMass)’ बोस्टन द्वारा ‘इंडिया एट 75: द डाउनग्रेडिंग ऑफ इंडियाज डेमोक्रेसी एंड रोल ऑफ द प्रेस’ विषय पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया है।” आरफा ने अपने व्याख्यान का एक पोस्टर भी शेयर किया है। हालाँकि उन्होंने, अपने इस व्याख्यान और कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है।

आरफा ने ट्विटर पर जो पोस्टर शेयर किया था, उसे उन्होंने ऐसे क्रॉप किया था कि आयोजकों के नाम न दिखाई दें। हालाँकि, ऑपइंडिया ने पोस्टर ढूँढ़ निकाला, जिसमें पता चला कि UMass बोस्टन के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित किया गया यह कार्यक्रम चार संगठनों द्वारा प्रायोजित किया गया है। इसमें, एशियाई अध्ययन विभाग, राजनीति विज्ञान विभाग, बोस्टन दक्षिण एशिया गठबंधन और इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के नाम शामिल हैं।

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC)

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल एक कट्टरपंथी इस्लामवादी संगठन है। इस संगठन ने स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के साथ कथित संबंध रखे हैं। साथ ही, भारत के खिलाफ लॉबिंग का इसका एक लंबा इतिहास रहा है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) “अमेरिका में भारतीय मुस्लिमों का सबसे बड़ा वकालत करने वाला संगठन” होने का दावा करता है और अक्सर शरिया अदालतों की वकालत करता है। यही नहीं, यह भारत के खिलाफ अफवाह फैलाने के लिए भी जाना जाता है।

डिसइन्फो लैब (DisInfo Lab) की एक रिपोर्ट ने आतंकी संगठन जमात-ए-इस्लामी के साथ इसके संबंधों का भी खुलासा किया है। इं’डियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’, यानी IAMC के संस्थापक शैक उबैद व इसके सदस्य अब्दुल मलिक मुजाहिद ने जमात-ए-इस्लामी और पाकिस्तान के लिए अमेरिकी मोर्चे इस्लामिक सर्कल ऑफ नॉर्थ अमेरिका (ICNA) का नेतृत्व किया है।

DisInfo Lab के अनुसार, इस्लामिक सर्कल ऑफ नॉर्थ अमेरिका यानी ICNA के लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के साथ संबंध हैं। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (ICMA) का प्रमुख रशीद अहमद इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ़ नॉर्थ अमेरिका (IMANA) का कार्यकारी निदेशक रह चुका है। वहीं, IMANA का संचालक जाहिद महमूद पाकिस्तानी नौसेना में अधिकारी था। यही नहीं, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) को भारत में फर्जी खबरें फैलाते हुए भी पकड़ा गया था।

‘द वायर’ और फेक न्यूज

उल्लेखनीय है कि जिस वामपंथी पोर्टल ‘द वायर’ में आरफा खानम एक संपादक के रूप में काम करती हैं, उसी पोर्टल ने हाल ही में भाजपा के आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय को फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा से अधिक शक्तिशाली बताया था। यही नहीं, टेक फॉग नामक एक काल्पनिक एप को लेकर भी कई तरह के दावे किए थे। इन दावों के साथ कहा था कि यह सब भारतीय लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।

हालाँकि, ‘द वायर’ के ये दोनों ही दावे निराधार और झूठे साबित हुए थे। इसके बाद, पोर्टल को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था और फिर द वायर ने इन दावों से जुड़ी रिपोर्ट्स वापस ले ली थी।

विश्वविद्यालय की वेबसाइट में नहीं है कार्यक्रम की जानकारी

ऑपइंडिया ने Umass बोस्टन में एशियाई अध्ययन विभाग, राजनीति विज्ञान विभाग, बोस्टन दक्षिण एशिया गठबंधन और इतिहास विभाग के फेसबुक पेज और इवेंट सेक्शन की जाँच की, जहाँ हमने पाया केवल इतिहास विभाग ने अपने फेसबुक पेज पर इस कार्यक्रम की घोषणा की है लेकिन विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। आमतौर पर, यदि विश्वविद्यालय द्वारा उचित अनुमति के साथ कोई कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, तो वेबसाइट पर एक घोषणा की जाती है। लेकिन, यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं था।

ऑपइंडिया ने Umass के इतिहास विभाग और उस व्यक्ति से संपर्क किया है, जिसकी जानकारी पोस्टर के उस हिस्से में थी जिसे आरफा ने क्रॉप कर दिया था। इस बारे में, अधिक जानकारी हम बाद में अपडेट करेंगे।

‘भारत के लोकतंत्र का पतन’: विदेशी संगठनों का प्रोपेगंडा

बीते कुछ वर्षों में, कुछ विदेशी संगठनों ने दावा किया है कि भारत की केंद्र सरकार के कारण देश में लोकतंत्र खतरे में है। इसी साल मार्च में V-Dem नामक संस्थान ने भारत की डेमोक्रेसी रेटिंग घटा दी थी। इससे पहले, पिछले साल फ्रीडम हाउस ने भी ऐसा ही किया था।

गौरतलब है कि ऐसे कई विदेशी संगठन हैं जो अन्य देशों के लिए अपने-अपने हिसाब से ग्रेड और रैंक जारी करते रहते हैं। ऐसे संगठनों को वित्तीय सहायता कहाँ से प्राप्त होती है – यह हमेशा ही सवालों के घेरे में रहा है। यही नहीं, इन संगठनों के क्रियाकलापों पर भी सवाल उठते रहे हैं। उदाहरण के लिए, स्वीडन स्थित V-Dem संस्थान ने हाल ही में शैक्षणिक स्वतंत्रता सूचकांक में भारत को अफगानिस्तान और पाकिस्तान से नीचे स्थान दिया था। इसके बाद, V-Dem की इस रिपोर्ट का जमकर मजाक उड़ाया गय था। V-Dem ने ही भारत को दुनिया के शीर्ष दस निरंकुश देशों में भी स्थान दिया है।

स्वीडिश इंस्टीट्यूट के शोध के अनुसार, V-Dem के लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स (LDI) पर भारत 40% से 50% देशों में सबसे नीचे है। शोध के अनुसार, 15 देश लोकतंत्रीकरण की एक नई लहर देख रहे हैं। वहीं, 32 देश निरंकुशता का अनुभव कर रहे हैं। पिछले साल, संस्थान ने भारत को “चुनावी निरंकुशता” के रूप में दिखाया था।

V-Dem संस्थान और डेमोक्रेटिक रिपोर्ट

V-Dem संस्थान की स्थापना साल 2014 में एक स्वतंत्र शोध संगठन के रूप में प्रोफेसर स्टाफन आई. लिंडबर्ग द्वारा की गई थी। यह संस्थान दावा करता है कि उसके पास सोचने और लोकतंत्र का आकलन करने का एक नया तरीका है। यह संस्थान विभिन्न प्रकार के रीसर्च करता है और अलग-अलग विषयों को लेकर किए गए शोध पर रिपोर्ट प्रकाशित करता है।

डेमोक्रेटिक रिपोर्ट V-Dem द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों में से एक है। V-Dem लोकतंत्र के सैकड़ों अलग-अलग पहलुओं को जाँचने में सक्षम होने और इसके सभी पहलुओं को लेकर रिसर्च करने का दावा करता है।

कहाँ से मिलती है V-Dem को फंडिंग

वी-डेम संस्थान एक स्वतंत्र अनुसंधान संगठन होने का दावा करता है। इस संस्थान को कई अन्य संस्थानों और सरकारों द्वारा फंडिंग की जाती है। इसे फंड देने वालों में कनाडाई इंटरनेशनल डेवलपमेंट एजेंसी से लेकर विश्व बैंक ग्रुप तक का नाम शामिल है।

हैरानी की बात यह है कि जॉर्ज सोरोस के नेतृत्व वाली ओपन सोसाइटी फाउंडेशन भी V-Dem को फंड देती है। सोरोस एक स्व-घोषित परोपकारी और हंगेरियन-अमेरिकी निवेशक है, जो दुनिया भर में ‘राष्ट्रवादियों’ और रूढ़िवादी सरकारों से लड़ने की बात कह चुका है।

V-Dem संस्थान को जॉर्ज सोरोस द्वारा फंडिंग किए जाने से भारत के प्रति इसके इरादों के बारे में बहुत कुछ पता चलता है। सोरोस ने सार्वजनिक रूप से भारत के लिए अपनी नफरत व्यक्त की है और अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार की निंदा करता रहता है। भारत को मरते हुए लोकतंत्र के रूप में दिखाने वाले संगठन को सोरोस का समर्थन यह दिखाता है कि सब कुछ प्रोपेगैंडा के आधार पर चल रहा है।

ओपन सोसाइटी फाउंडेशन और जॉर्ज सोरोस

साल 1999 में, ओपन सोसाइटी फाउंडेशन ने भारतीय कॉलेजों में पढ़ाई और शोध करने के लिए छात्रवृत्ति और फेलोशिप प्रदान करके भारत में गतिविधियाँ शुरू की थीं। ओपन सोसायटी फाउंडेशन के माध्यम से, जॉर्ज सोरोस ने भारत विरोधी गतिविधियों के लिए हर संभव प्रयास किए हैं।

भारत में सक्रिय देश-विरोधी गुटों का खुले तौर पर समर्थन करके, वामपंथी अंतर्राष्ट्रीय संगठन ओपन सोसायटी फाउंडेशन ने सहायता के नाम देश में पाँव फैलाए। भारत में ओपन सोसायटी फाउंडेशन की स्थापना के बाद से जॉर्ज सोरोस ने विभिन्न प्रकार के एनजीओ और संगठनों को फंडिंग कर भारत की छवि धूमिल करने का प्रयास किया है। यही नहीं उसने, मीडिया से लेकर न्यायपालिका तक का उपयोग भी किया है।

फ्रीडम हाउस

अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन फ्रीडम हाउस ने आजादी के सूचकांक में भारत को ‘आजाद’ से गिरा कर ‘आंशिक रूप से आजाद’ स्तर पर ला दिया है। संस्था का कहना है कि भारत में आम आदमी के अधिकारों का हनन हो रहा है और मूलभूत स्वतंत्रताओं को छीना जा रहा है। फ्रीडम हाउस ने दावा किया था कि भारत की स्थिति एक बहुवर्षीय पैटर्न के कारण अब आंशिक रूप से आजाद स्थिति में आ गई है। इसका कारण, हिंदू राष्ट्रवादी सरकार और उसके सहयोगियों द्वारा मुस्लिम आबादी को प्रभावित करने वाली हिंसा को बढ़ावा देना और मीडिया, शिक्षाविदों और प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई है।

इसके अलावा, भारत की ‘डाउन ग्रेडिंग’ करने को लेकर जारी की गई रिपोर्ट में ‘आंशिक रूप से आजाद’ बताने का कारण नागरिक संशोधन कानून के बाद हुई हिंसा को बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2020 में हुई सांप्रदायिक हिंसा में 50 से अधिक लोग मारे गए थे। दिलचस्प बात यह है कि इस रिपोर्ट में नागरिकता कानून को लेकर किसी प्रकार की सच्चाई नहीं बताई गई है। यही नहीं, इस रिपोर्ट में इस बात को छिपाया गया है कि दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा सोची समझी साजिश का हिस्सा है।

फ्रीडम हाउस- अमेरिकी सरकार की फंडिंग पर आश्रित

फ्रीडम हाउस की वेबसाइट के अनुसार, “फ्रीडम हाउस के कार्यक्रम आजाद सरकार को बढ़ावा देने, मानवाधिकारों की रक्षा करने, नागरिक समाज को मजबूत करने तथा सूचना और विचारों को सुविधाजनक बनाने के प्रयासों में मानवाधिकारों और लोकतंत्र की वकालत करने वालों का समर्थन करते हैं।” इन शब्दों से फ्रीडम हाउस किसी भी उदारवादी वकालत ग्रुप की तरह लगता है जिसे अन्य देशों की घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप करने के लिए भारी मात्रा में फंडिंग मिल रही है।

साल 2016 की फंडिंग डिटेल के अनुसार, फ्रीडम हाउस को कुल राजस्व का 86% अमेरिकी सरकार से मिला था। फ्रीडम हाउस दावा करता है कि उसकी ‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड’ रिपोर्ट को कोई सरकारी फंडिंग नहीं मिलती है। वहीं, नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी पर एक नजर डालने से पता चलता है कि फ्रीडम हाउस का यह दावा पूरी तरह फर्जी है। उसकी वेबसाइट पर ही यह उल्लेख किया गया है कि नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी को अमेरिकी सरकार से बड़े पैमाने पर अनुदान मिलता होता है।

जॉर्ज सोरोस से संबंध

कुख्यात अरबपति जॉर्ज सोरोस द्वारा संचालित ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन’ भी ‘फ्रीडम हाउस’ को अपना सहयोगी बताता है। ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन की वेबसाइट पर लिखा है, “ओपन सोसाइटी इंस्टिट्यूट के कार्यों में ‘सोरोस फाउंडेशन नेटवर्क’ और अन्य दानदाताओं के साथ साझेदारी से महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। उदाहरण के तौर पर कभी-कभी साझेदारी के रूप में स्पष्ट करार भी किया जाता है, जिसमें अन्य दानदाता खर्च का वहन करते हैं। कभी-कभी ऐसे करार अनौपचारिक रूप से भी होते हैं। इसके तहत कोई दानदाता ओपन सोसाइटी इंस्टिट्यूट (OSI) द्वारा शुरू किए गए किसी प्रोजेक्ट का समर्थन करता है, या फिर हम किसी डोनर द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट में सम्मिलित होते हैं। कई मामलों में अन्य दानदाता किसी खास प्रोजेक्ट के समर्थन में ‘सोरोस फाउंडेशन’ को सीधे योगदान देता है।”

इसलिए, यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि ‘फ्रीडम हाउस’ अमेरिका की एक शाखा है और इसका अमेरिकी विदेश विभाग के साथ इतना अधिक संबंध है कि उस फंडिंग के बिना फ्रीडम हाउस का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इसके अलावा, फ्रीडम हाउस को अक्सर अमेरिकी विदेश नीति के एक अंग के रूप में देखा जाता। ‘फ्रीडम हाउस’ उन कामों को करता है जो अमेरिकी सरकार स्वयं स्पष्ट रूप से नहीं कर सकती।

इसके जॉर्ज सोरोस से भी संबंध हैं, जिसने खुले तौर पर राष्ट्रवादी सरकारों और नेताओं के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी। खासतौर से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को अपना टारगेट बताया था। इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि फ्रीडम हाउस दुनिया भर की सरकारों को अस्थिर करने के लिए प्रचार-प्रसार का काम करता है।

कहीं वरमाला डालने के बाद गिर कर मर गई दुल्हन तो कहीं छींकते ही चल बसा युवक, प्रार्थना के दौरान शिक्षक की मौत: हार्ट अटैक की घटनाएँ बन रहीं सुर्खियाँ

हाल ही में हार्ट अटैक की कई घटनाएँ सामने आई हैं, जिससे ये लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। नया मामला बरेली से सामने आया है, जहाँ एक 23 वर्षीय शिक्षक की हार्ट अटैक से मौत हो गई। घटना के समय शिक्षक गोविंद देवल अन्य शिक्षकों के साथ बच्चों को प्रार्थना करवा रहे थे।

दरअसल बरेली की नगर पंचायत शाही के एक स्कूल में प्रार्थना के दौरान एक शिक्षक की तबीयत अचानक से बिगड़ गई। उन्हें इलाज के लिए डॉक्टर के पास ले जाया गया। डॉक्टर ने हार्ट अटैक बताकर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में शिक्षक की मौत हो गई। प्रार्थना खत्म होने के बाद शिक्षक ने अपना सीना पकड़ लिया था। पास खड़े दूसरे टीचर ने जब उनसे पूछा, तो वह सिर्फ इतना बता पाए कि मैं खड़ा नहीं हो पाऊँगा, सीने में तेज दर्द है। उन्हें कुर्सी पर बैठाया गया। प्रारंभिक जाँच से पता चला है कि उन्हें हार्ट अटैक आया था।

गोविंद देवल की मौत के बाद उसके घर में कोहराम मच गया। गोविंद देवल दो बहनों और तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनकी शादी का रिश्ता तय हो गया था। स्कूल प्रबंधक, शिक्षक और छात्र उनके घर शोक संवेदना देने पहुँचे। इस तरह कम उम्र में होने वाली मौत को लोग कोविड संक्रमण के बाद आए बदलाव के रूप में देख रहे हैं। हालाँकि अभी इस संबंध कोई मेडिकल रिसर्च सामने नहीं आया है।

लखनऊ में हार्ट अटैक से स्टेज पर दुल्हन की मौत

यूपी के लखनऊ में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। शादी की पार्टी उस समय मातम में बदल गई, जब स्टेज पर आई दुल्हन की अचानक मौत हो गई। दुल्हन का नाम शिवांगी था और वह दूल्हे को वरमाला पहनाने स्टेज पर पहुँची थी। वरमाला डालने के बाद अचानक चक्कर खाकर गिर पड़ी। जिसके बाद उसे तुरंत पास के हेल्थ सेंटर में पहुँचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर के मुताबिक, दुल्हन की मौत हार्ट अटैक से हुई।

छींक के बाद युवक की मौत

हार्ट अटैक युवाओं की भी जान ले रहा है। मेरठ में चार दोस्त कहीं जा रहे थे। इसी दौरान अचानक एक युवक को छींक आ गई। वह लड़खड़ा कर गिर गया। उसकी हार्ड अटैक से मौत हो गई। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। वहीं बरेली में ही कुछ समय पहले डीजे पर डांस करने के दौरान 45 वर्षीय आईवीआरआई कर्मी की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।

‘महाराष्ट्र में मुस्लिम की लिंचिंग’: स्वीडन की यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले ट्रोल अशोक स्वैन ने भारत को बदनाम करने के लिए फैलाया झूठ, हिन्दुओं से करता है घृणा

हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने वाले, फेक न्यूज के लिए कुख्यात हिंदूफोबिक अशोक स्वैन (Ashok Swain) ने एक बार फिर भारत को बदनाम करने के लिए झूठ का सहारा लिया। हाल ही में अशोक ने भारत में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया।

अशोक स्वैन ने सोशल मीडिया से फैलाया झूठ

स्वीडन के उप्साला विश्वविद्यालय में प्रोफेसर स्वैन ने भीड़ द्वारा एक व्यक्ति को पीटने वाले इस वीडियो को साझा करते हुए इसे सांप्रदायिक रंग दिया। उन्होंने लिखा, “एक और दिन, एक और लिंचिंग। भारत के महाराष्ट्र में एक और मुस्लिम व्यक्ति की लिंचिंग की जा रही है।”

इसके बाद एक और ट्वीट में स्वैन ने कहा कि शुक्र है कि इस क्रूरतापूर्वक हमले में वह आदमी बच गया। अब वह अस्पताल में है।

वहीं, बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति पर मुस्लिम होने के कारण हमला नहीं किया गया था, बल्कि भीड़ ने चोर होने के शक में उसकी पिटाई की है। पिटाई का वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस ने इस घटना में शामिल 5 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, यह घटना 1 दिसंबर, 2022 को महाराष्ट्र के पेल्हार इलाके में हुई।

उधर, पुलिस ने उस व्यक्ति के खिलाफ भी चोरी के आरोप में केस दर्ज किया है। पुलिस ने बताया, “चार दिन पहले पालघर के नालासोपारा के पेल्हर इलाके में लोगों ने एक चोर को बुरी तरह से पीटा था। उसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिस शख्स को पीटा जा रहा था, उसके खिलाफ चोरी के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। वहीं पाँच अन्य लोगों को चोर की पिटाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।”

आपको बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं, जिसके बारे में झूठ फैलाया गया हो। इससे पहले भी कई ऐसे घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इस मामले में भीड़ ने चोरी के संदेह में उस व्यक्ति पर हमला किया, इसलिए नहीं कि वह एक मुस्लिम था, जैसा कि अशोक स्वैन ने आरोप लगाया है। स्वैन ने बिना सोचे समझे भारत में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए इस घटना के बारे में झूठा दावा करते हुए ट्वीट किया, जिसे ट्विटर पर हजारों लोगों ने देखा और रीट्वीट किया।

गाजियाबाद की फर्जी खबर

यह घटना गाजियाबाद की फर्जी घटना से काफी मिलती-जुलती है, जिसमें एक मुस्लिम के साथ मारपीट का म्यूट वीडियो इंटरनेट पर शेयर किया गया। मोहम्मद जुबैर, सबा नकवी और कई अन्य लोगों ने वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया कि ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने से इनकार करने पर बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति पर हमला किया गया। गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में सच्चाई बताई थी। पुलिस ने बताया था कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जब पुलिस ने जाँच की तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था।

वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए। वहाँ पर बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता था। आरोपितों ने बताया था कि उसके ताबीज से उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा। अब्दुल समद गाँव में कई लोगों को ताबीज दे चुका था। आरोपित उसे पहले से ही जानते थे।

जुनैद खान की हत्या को सांप्रदायिक रंग दिया

जुनैद खान की हत्या को भी वामपंथी लॉबी ने सांप्रदायिक रंग दिया। उदारवादियों ने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति को मुस्लिम होने के कारण पीट-पीटकर मार डाला गया था। हालाँकि, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि खान की हत्या ट्रेन की सीट को लेकर हुए झगड़े में की गई थी।

‘हिन्दुओं पर हमला था हिंसक भीड़ का मकसद, मीटिंग में चुन लिया था टारगेट’: दिल्ली दंगों में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन पर आरोप तय

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के हिन्दू विरोधी दंगों में आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन पर आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने यह माना है कि हिंसक भीड़ के पास हिन्दुओं पर हमले का मकसद था। पुलिस के जाँच अधिकारी द्वारा इस हिंसा के जमा वीडियो फुटेज भी इस कार्रवाई में अहम रोल अदा किए। इन फुटेज के आधार पर कोर्ट ने यह माना है कि दंगों में ताहिर हुसैन ने सक्रिय भागीदारी निभाई है।

बार एन्ड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले की सुनवाई कड़कड़डूमा कोर्ट के सत्र न्यायाधीश पुलत्स्य कर रहे हैं। ताहिर हुसैन के साथ रियासत अली, गुलफाम, शाह आलम, रशीद शैफी, अरशद कय्यूम, लियाकत अली, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद आबिद और इरशाद अहमद पर भी इसी केस में आरोप तय हुए। इन सभी पर दंगे भड़काने की धारा 147, हथियारों के साथ हिंसा की धारा 148, नफरत फैलाने की धारा 153- A, कानून व्यवश्ता बिगाड़ने की धारा 188, सामान्य चोट पहुँचाने की धारा 323, और डकैती की धारा 395 IPC के तहत आरोप तय हुए हैं।

सभी आरोपित पर आरोप तय करते हुए कोर्ट ने माना कि ताहिर हुसैन के घर पर जमा हिंसक भीड़ के हर सदस्य का मकसद हिन्दुओं को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुँचाना था। कोर्ट ने यह भी माना कि हिन्दुओ पर हमले के लिए ताहिर हुसैन के घर को एक बेस के तौर पर प्रयोग किया गया। आरोपितों पर चार्ज फ्रेम करते हुए कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपितों पहले से हुई मीटिंग में मिले टारगेट पर काम कर रहे थे।

न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में यह भी बताया कि सबूतों से पता चलता है कि भीड़ ने तोड़फोड़ और आगजनी की थी। कोर्ट के मुताबिक ताहिर हुसैन के घर पर सोची समझी साजिश के तहत जमा हिंसक भीड़ में कईयों के पास गोली चलाने वाले हथियार भी थे। आगे हुई टिप्पणी में हिंसा के दौरान ताहिर हुसैन को अपने छत पर सक्रिय बताया गया है। कोर्ट ने मौजूद सबूतों के आधार पर ताहिर हुसैन के वकील की दलील में दम नहीं पाया कि आरोपित खुद ही हिंसा काबू करने के लिए पुलिस को फोन कर रहा था। ताहिर हुसैन पर 17 दिसम्बर 2022 को UAPA के तहत दर्ज केस आरोप तय होंगे।

ताहिर हुसैन के वकील ने एक तर्क और भी दिया कि पुलिस ने FIR दर्ज करने में देरी की। बचाव पक्ष के इस तर्क पर कोर्ट का मनाना था कि पुलिस हिंसा को काबू करने पर ज्यादा केंद्रित थी और वो कोविड-19 के नियमावली का पालन भी कर रही थी। ऐसे में FIR दर्ज करने के लिए जरूरी गवाहों के बयान में देरी होना लाजमी है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ FIR में देरी के आधार पर ताहिर हुसैन के खिलाफ जमा तमाम सबूतों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। इस मामले में पुलिस का पक्ष सरकारी वकील मधुकर पांडेय ने रखा जबकि आरोपितों की तरफ से तारा नरूला, सलीम मालिक, दिनेश कुमार तिवारी, जेड बाबर चौहान और शवाना ने बहस की।

34000 FIR, मुकदमा किसी पर नहीं: SC ने पंजाब की AAP सरकार को फटकारा, BJP बोली- घरों में पानी नहीं, मोहल्लों में शराब पहुँच गई

सुप्रीम कोर्ट ने बड़े पैमाने पर अवैध शराब के निर्माण और बिक्री को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार (punjab Government) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य में ड्रग्स और शराब की समस्या एक गंभीर मुद्दा है। पंजाब सरकार ऐसे मामलों में केवल एफआईआर (FIR) दर्ज कर रही है और आगे की कार्रवाई नहीं कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से अवैध शराब बनाने के खतरे को रोकने के लिए उठाए गए विशिष्ट कदमों की सूची बनाने के लिए भी कहा। कोर्ट ने चिंता जताते हुए यह भी कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है और अगर कोई देश को खत्म करना चाहता है, तो वह सीमाओं से ही शुरुआत करेगा।

पंजाब सरकार से सवाल करते हुए कोर्ट ने जब्त किए गए पैसे के इस्तेमाल की जानकारी माँगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को इस पैसे का इस्तेमाल नशा विरोधी अभियानों के लिए करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अब तक 2 सालों में 34000 से ज्यादा एफआईआर हो चुकी है, लेकिन किसी पर मुकदमा नहीं हुआ है। पंजाब सरकार की ओर से जवाब देते हुए एएसजी ने कहा कि चीजें आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि धारा 302 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और आगे कार्रवाई भी होगी।

वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी भगवंत मान सरकार पर इस मुद्दे को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”नशीले पदार्थों और शराब की बढ़ती समस्या के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। आप ने पंजाब और दिल्ली को नशामुक्त के बजाय नशायुक्त बना दिया है। नशा माफिया को खुली छूट दी गई है। उनके साथ संभवतः दिल्ली की तरह ही सौदा किया गया है। आप पंजाब के युवाओं को बर्बाद कर रही है।”

इसके साथ ही ट्वीट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमे उन्होंने कहा, ”आज सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को नशा, अवैध ड्रग्स फटकार लगाई है। आम आदमी पार्टी की सरकार जब से पंजाब में आई है, ड्रग्स से संबंधित मामलों में 168 लोगों की मौत हुई है। कई तरह के युवाओं के वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसमें वह ड्रग्स की वजह से पैरों पर खड़े नहीं हो पाते। आम आदमी पार्टी ने कहा था कि एक महीने में शराब माफियाओं को समाप्त कर देंगे, लेकिन इन्होंने शराब माफियाओं को खुली छूट दी है, जिस वजह से घर-घर साफ़ पानी तो नहीं पहुँचा है बल्कि मोहल्ले-मोहल्ले नशा जरुर पहुँच चुका है।

उन्होंने आगे कहा, ”वहीं जब पुलिस इनसब पर कार्रवाई करती है तो आप के कार्यकर्ता पुलिस के सामने खड़े हो जाते हैं। आज आम आदमी पार्टी के तहत राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। आज आप को सुप्रीम कोर्ट से जो फटकार मिली है, वह दिखाता है कि पार्टी ने दिल्ली और पंजाब को नशा मुक्त बनाने के बदले नशा युक्त बना दिया है।”