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केरल: चर्च की भीड़ ने लाठी-पत्थरों से पुलिस थाने पर किया हमला, 36 पुलिसकर्मी घायल, 15 पादरियों पर केस दर्ज

केरल में लैटिन कैथोलिक चर्च के नेतृत्व में ईसाइयों की भीड़ ने रविवार देर रात को (27 अक्टूबर 2022) विझिंजम पुलिस थाने पर हमला किया। घटना में कम से कम 36 पुलिसकर्मी घायल हो गए।

बताया जा रहा है कि क्षेत्र में अडानी समूह द्वारा किए जा रहे बंदरगाह के विरोध में हिंसक प्रदर्शन चल रहा था, जिसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों (रिपोर्ट के अनुसार 5) को हिरासत में लिया था। पुलिस की इसी कार्रवाई के बाद स्टेशन पर पत्थर और लाठियों से हमला हुआ।

सामने आई वीडियोज में दिख रहा है कि किस तरह बेकाबू भीड़ स्टेशन के सामने हर जगह लाठियाँ मार रही है और पत्थर फेंक रही है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार इस भीड़ ने पुलिसकर्मियों को घायल किया। साथ में पुलिस की 4 जीप, 2 वैन और 20 मोटरसाइकिलों को भी क्षतिग्रस्त किया। कुछ फर्नीचर और दस्तावेजों को भी नष्ट किया गया।

हिंसक प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान पुलिस की जब जीप को तोड़ने का भी प्रयास किया, तब दो पुलिसवाले वहाँ भी घायल हुए। इनमें एक को तो विझिंजम के अस्पताल में भर्ती करवाया गया जबकि दूसरे को तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया। घटना के बाद आज तिरुवनंतपुरम में सर्वदलीय बैठक होनी है।

पादरियों के विरुद्ध शिकायत दर्ज

जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने केरल हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद विझिंजम में चल रही अडानी समूह की परियोजना को रोकने के लिए उन गाड़ियों का रास्ता बाधित किया जिनमें बंदरगाह निर्माण का सामान आ रहा था। इस संबंध में रविवार को कम से कम 15 पादरियों पर शिकायत हुई। इनमें आर्किबिशप थॉमस जे नेट्टो, फादर क्रिस्टूदास, फादर यूगिन पेरेरा समेत कई लोग थे। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए 200 से अतिरिक्ट पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।

अडानी समूह द्वारा बनाया जा रहा पोर्ट

उल्लेखनीय है कि अडानी समूह द्वारा कराया जा रहा बंदरगाह का निर्माण कोर्ट के फैसले के बाद हो रहा है। मगर फिर भी करीबन 120 दिन से प्रोटे्स के कारण यहाँ ढंग से काम नहीं हो पा रहा। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था जहाँ फैसला उनके पक्ष में आया है।

कोर्ट ने कंपनी को काम शुरू करने को कहा। मगर पादरियों के नेतृत्व में कई इसाई उनका रास्ता ब्लॉक करते रहे। स्थानीयों का कहना है कि इस बंदरगाह के बनने से उनके रोजगार पर असर पड़ेगा जबकि कोर्ट ने पूरा पक्ष सुनकर यह फैसला दिया है कि प्रोजेक्ट का कार्य किसी हाल में सस्पेंड नहीं हो सकता।

आमिर खान को बाइक के लिए चाहिए थे ₹70 हजार, हिना ने मायके से लाकर नहीं दिए तो डाला तेजाब: दो बच्चों का अब्बा बीवी पर एसिड अटैक कर फरार

आमिर खान को बाइक लेनी थी। बीवी हिना परवीन पर इसके लिए 70 हजार रुपए अपने मायके से लाने को कहा। हिना पैसे लेकर नहीं लौटी तो आमिर ने उस पर तेजाब उड़ेल दिया। मामला झारखंड के रांची का है। घटना रविवार (27 नवंबर 2022) की है। हिना की हालत गंभीर है। आमिर फरार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला नामकुम थाना क्षेत्र के काँटाटोली स्थित मौलाना आजाद कॉलोनी का है। पीड़िता के अब्बा ने दामाद आमिर अपनी बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया है कि आमिर पिछले कुछ समय से उनकी बेटी पर 70 हजार रुपए लाने का दबाव बना रहा था। प्रताड़ना से तंग आकर हिना शनिवार को मायके चली आई थी। पिता ने उसे जल्द पैसे का इंतजाम करने का भरोसा देकर वापस ससुराल भेजा दिया।

हिना के अब्बा के मुताबिक आमिर इन पैसों से बाइक खरीदना चाहता था। रविवार को हिना के वापस लौटते ही आमिर पैसे माँगने लगा। आरोप है कि उसने पहले से ही तेजाब खरीद कर घर में रख लिया था। जब हिना अपना मुँह धो रही थी तो उसने स्टील के बर्तन में रखे तेजाब को उस पर उड़ेल दिया। उसके चिल्लाने की आवाज सुन आसपास के लोग जमा हुए। एसिड अटैक से हिना का चेहरा, गर्दन और छाती बुरी तरह से जल गए।

बताया जा रहा है कि इस दौरान आमिर घटनास्थल से भाग निकला। हिना का रिम्स के बर्न वार्ड में इलाज चल रहा है। हालत गंभीर बताई जा रही है। फिलहाल वह कुछ बोल नहीं पा रही है। हिना के अब्बा के मुताबिक आमिर आए दिन नशे में उनकी बेटी की पिटाई करता था। उनका कहना है कि एक बार तो हालात तलाक तक पहुँच गए थे, लेकिन दोनों पक्षों के कुछ लोगों ने बातचीत कर मामला सुलझा दिया था।

पीड़िता के भाई के मुताबिक हिना और आमिर का निकाह लगभग 10 साल पहले हुआ था। दोनों के 2 बच्चे भी हैं। आरोप है कि हिना जब भी मायके आती थी, ससुराल के लिए 5-10 हजार ले जाती थी। आमिर की मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान है। पुलिस का कहना है कि आमिर के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।

मोहम्मद फैज ने नाबालिग हिंदू लड़की से कहा- निकाह कर, नहीं तो कर दूँगा टुकड़े-टुकड़े, पकड़ने आई पुलिस से भिड़ गए परिजन

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक नाबालिग हिंदू लड़की पर निकाह के लिए दबाव डालने और धमकी देने का मामला सामने आया है। आरोपित की पहचान मोहम्मद फैज के तौर पर हुई है। उस पर पहले से भी कई मामले दर्ज हैं। फैज को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन उससे पहले उसे पकड़ने आई पुलिस से उसके परिजन और पड़ोसी भिड़ गए। घटना शनिवार (26 नवम्बर 2022) की है।

घटना नौबस्ता थाना क्षेत्र की है। पीड़िता एक बिजनेसमैन की बेटी है। 12वीं में पढ़ती है। पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित परिवार ने फैज पर अपनी बेटी को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। चमनगंज के रहने वाले फैज पर नाबालिग छात्रा पर इस्लाम कबूलने और खुद से निकाह करने का दबाव डालने का आरोप है।

शिकायत के मुताबिक फैज ने निकाह नहीं करने पर पीड़िता के टुकड़े टुकड़े करने की धमकी दी। उसे घर से उठाने की बात कही। साथ ही उसके पूरे परिवार को गोली मारने की भी धमकी दी। ऑपइंडिया के पास मामले की शिकायत कॉपी मौजूद है। अक्टूबर में पीड़ित परिवार ने पहली बार फैज के खिलाफ शिकायत की तो वह फरार हो गया। लेकिन फरारी में भी वह 25 नवंबर को पीड़िता के घर पहुँच गया था। पुलिस के अनुसार फैज आपराधिक प्रवृत्ति का है। उस पर पहले से 3 केस दर्ज हैं। वह पहले भी जेल जा चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता के परिवार के लोग अक्सर बीमार रहते थे। इसी दौरान किसी ने उन्हें अजमेर दरगाह जाने की सलाह दी थी। पीड़िता के पिता के मुताबिक फैज उन्हें अजमेर के रास्ते में मिला था। बाद में उसने सोशल मीडिया के जरिए उनकी बेटी से दोस्ती कर ली। जब वह लड़की को प्रताड़ित करने लगा तो अक्टूबर 2022 में पीड़ित परिवार ने उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज करवा। इसके बाद वह फरार हो गया। इस दौरान पीड़ित पिता को लगातार धमकियाँ मिलने के चलते उन्होंने 27 नवंबर को फिर से उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाया।

फरारी में फैज लगातार लोकेशन बदल रहा था। शनिवार (26 नवंबर 2022) को पुलिस को उसकी लोकेशन चमनगंज में मिली। उसकी घेराबंदी की गई तो उसने महिलाओं को आगे कर दिया। बाद में महिलाओं ने आसपड़ोस के बाकी लोगों को भी जमा कर पुलिस से धक्कामुक्की की। बाद में अतिरिक्त फोर्स बुलाकर भीड़ को काबू किया गया और फैज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में फैज की अम्मी पुलिस वालों से उलझती दिखाई दे रही हैं। हालाँकि पुलिस ने महिलाओं को चेतावनी देकर छोड़ दिया है।

मदरसों में पढ़ रहे आठवीं तक के छात्रों को अब नहीं मिलेगी स्कॉलरशिप, पिछले साल 16558 मदरसों के 5 लाख बच्चों को मिला था

केंद्र की मोदी सरकार ने मदरसा छात्रों को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि अभी तक जो उनकी ओर से 1 से 8 वीं कक्षा के छात्रों को छात्रवृत्ति मिलती थी वो अब से नहीं मिलेगी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार मदरसा के कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को जो स्कॉलरशिप देती थी, उसमें उन्होंने अपने हिस्सा देने पर रोक लगा दी है। केंद्र सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि शिक्षा के अधिकार के तहत ‘पहली से लेकर आठवीं क्लास’ की शिक्षा मुफ्त है। ऐसे में 1 से 5 तक के छात्रों को 1000 रुपए और 6 से 8वीं तक के बच्चों को अलग-अलग कोर्स के हिसाब से छात्रवृत्ति देने पर रोक लगाई गई। अब केवल 9 वीं और 10वीं के छात्रों को पहले की तरह स्कॉलरशिप मिलेगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले वर्ष 16558 मदरसों के 4 से 5 लाख बच्चों को स्कॉलरशिप मिली थी। इस साल भी तमाम बच्चों ने इसके लिए आवेदन किया। हालाँकि केंद्र की ओर से फैसला आया कि अब से ये स्कॉलरशिप नहीं दी जाएगी।

इस संबंध में अल्पसंख्यक विभाग की ओर से आदेश जारी किया गया कि शिक्षा के अधिकार के तहत क्लास 1 से लेकर क्लास आठवीं तक पढ़ाई फ्री है। विद्यार्थियों को जरूरत की चीजें भी दी जाती हैं। इसलिए केवल 9वीं और 10वीं के बच्चों को ही छात्रवृत्ति मिलेगी। उन्हीं के आवेदन स्वीकारे जाएँगे।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट बताती है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के 269 मदरसों में भी 1 से 8वीं क्लास के लगभग 15 हजारों छात्रों की स्कॉलरशिप रोकी है। यह फैसला केंद्र सरकार के फैसले के बाद लिया गया है।

मदरसों को लेकर विवाद

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ समय में देश भर के मदरसे काफी कारणों से चर्चा में रहे है। उत्तर प्रदेश में तो सर्वे के बाद यह तक पता चला था कि राज्य में 7500 से अधिक मदरसे बिन मान्यता के चल रहे थे। सर्वेक्षण के दौरान कहा गया था कि ये मदरसे दान पर चल रहे हैं।

ऐसे में योगी सरकार ने फैसला किया था कि वो इन दान के स्रोत की जाँच करवाएगी। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, सऊदी और नेपाल से इन्हें मदरसा संचालित करने के लिए जकात दी गई थी।

‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें, डिंपल भाभी को जिताएँ’: इटावा रेलवे स्टेशन पर इन्क्वायरी रूम से अनाउसमेंट, जिंदाबाद के भी लगे नारे

उत्तर प्रदेश के इटावा रेलवे स्टेशन पर मैनपुरी से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी डिंपल यादव के समर्थन में अनाउसमेंट किए जाने का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार इन्क्वायरी रूम से शनिवार (26 नवम्बर 2022) की रात 11 बजे के करीब उनके समर्थक में अपील की गई। बीजेपी ने आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग से शिकायत का फैसला किया है। रेलवे मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार रात लगभग 11 बजे यात्रियों को ट्रेन की जानकारी देने वाले माइक से ‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें, डिंपल भाभी को जिताएँ’ का अनाउसमेंट किया गया। पहले तो यात्री कुछ समझ नहीं पाए। चश्मदीदों के मुताबिक यह अनाउसमेंट 15 से 20 बार किया गया।

इस दौरान ‘डिंपल यादव जिंदाबाद’ के नारे लगने की भी खबर है। चश्मदीदों के अनुसार रात के समय इन्क्वायरी रूम खाली था। कुछ लोग उसमें घुस गए और ये हरकत की। अनाउसमेंट सुनकर जब तक लोग इन्क्वायरी रूम पहुँचे वे लोग निकल चुके थे। चंद्रवीर नामक एक प्रत्यक्षदर्शी का दावा है कि यह हरकत रेलवे यूनियन से जुड़े कुछ लोगों ने की है जो प्रयागराज जा रहे थे। अनाउंसमेंट करने वालों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पूछताछ काउंटर पर तैनात कर्मचारी मंशा मुंडा ने इसे नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा जबरन की गई हरकत बताया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट सीनियर अधिकारियों को भेजी जा रही है। मैनपुरी से भाजपा प्रत्याशी रघुराज सिंह शाक्य ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए इसे समाजवादी पार्टी की बौखलाहट बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सपा ने अभी से हार मार ली है। शाक्य ने इस हरकत की शिकायत चुनाव आयोग से करने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि मुलायम सिंह के निधन से खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर आगामी 5 दिसम्बर 2022 को उपचुनाव होना है। समाजवादी पार्टी ने यहाँ से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है।

चीन के कई शहरों में फैला प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे छात्र: शी जिनपिंग के खिलाफ नारेबाजी, पत्रकार को पुलिस ने पीटा

चीन के अलग-अलग शहरों की सड़कों पर वामपंथी सरकार के खिलाफ उठा विरोध प्रदर्शन जोर पकड़ चुका है। खबर है कि वहाँ सैंकड़ों छात्र बीजिंग के चाओयांग जिले में एकत्रित हुए जहाँ हर एंबेसी स्थित है। यहाँ उन्होंने अपना प्रदर्शन किया जो धीरे-धीरे चीन के अन्य शहरों और यूनिवर्सिटीज में भी फैलता दिखाई दिया। हालात देखते हुए प्रशासन भारी तादाद में पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

बीबीसी के पत्रकार को पीटा

इस बीच बीबीसी ने भी जानकारी दी कि रविवार को उनका एक पत्रकार चीन में हो रहे प्रदर्शन की कवरेज करने मौके पर पहुँचा थे कि लेकिन पुलिस ने वहाँ उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पत्रकार का नाम एड लॉरेंस हैं जिन्हें शंघाई में चल रहे प्रदर्शन की कवरेज करने पर पकड़ा गया।

कथिततौर पर पुलिस ने लॉरेंस को घंटों हिरासत में रखा। इस दौरान उन्हें पीटा गया, पुलिस द्वारा मारा गया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। बीबीसी ने अपने बयान में कहा भी, “यह देखना बहुत चिंताजनक है कि हमारे पत्रकार पर उस समय हमला हुआ जब वो बस अपनी ड्यूटी कर रहा था।”

बीबीसी ने बताया कि उनके पास इस घटना के संबंध में कहीं से कोई सफाई नहीं आई है बल्कि प्रशासन तो कह रहा है कि उन्होंने पत्रकार को उसके भले के लिए पकड़ा था ताकि उसे भीड़ में कोरोना न हो जाए। बीबीसी ने घटना के संबंध में विस्तृत सफाई माँगी है।

चीन की सड़कों पर उतरे लोग, शी जिनपिंग के खिलाफ नारेबाजी

उल्लेखनीय है कि चीन में लगे लॉकडाउन के बीच गुरुवार (24 नवंबर को हुए बड़े हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद शनिवार को वहाँ विरोध प्रदर्शन भड़का। सैंकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने चीन की वामपंथी सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की और अपना गुस्सा जाहिर किया।  सामने आई वीडियोज को लेकर दावे किए गए कि लोगों ने वामपंथी सरकार को ललकारते हुए कुर्सी छोड़ने को कहा। लोग बोले- “कम्युनिस्ट पार्टी कुर्सी छोड़ो, शी जिनपिंग कुर्सी छोड़ों।”

जीरो कोविड पॉलिसी पर भड़के चीनी लोगों ने यह भी कहा, “हमें पीसीआर टेस्ट नहीं करवाना, हमें आजादी चाहिए, लॉकडाउन खत्म करो, लॉकडाउन खत्म करो।” कथिततौर पर इस प्रदर्शन के दौरान आम जनता पुलिस के सामने ही नारेबाजी करती रही, जिसे पुलिस ने चुपचाप देखा। सोशल मीडिया यह नजारा देख लोग बोले कि शायद ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पुलिस भी हैरान थी जो दशकों से नहीं हुआ वो अब हो रहा है।

‘बच्चों की हत्यारी सरकार’: हिजाब विरोधी प्रदर्शन के बीच ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता की भांजी को ही गिरफ्तार किया, UN को भी सुनाई थी खरी-खरी

ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन के बीच ईरान पुलिस ने वहाँ के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भांजी फरीद मोरादखानी को गिरफ्तार किया है। दरअसल, मोरादखानी ने यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया था। इस वीडियो में उन्होंने ईरानी सरकार की आलोचना करते हुए उसे ‘जानलेवा और बच्चों की हत्या करने वाली सरकार’ करार दिया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

फरीद मोरादखानी को जिस वीडियो के आधार पर गिरफ्तार किया गया है, उस वीडियो उन्होंने ईरान के लोगों से अपील करते हुए कहा था, “स्वतंत्र लोगों, हमारे साथ रहो। अपनी सरकारों से कहो कि वह इस जानलेवा और बच्चों की हत्या करने वाले शासन का समर्थन करना बंद करें। यह शासन अपने किसी भी धार्मिक सिद्धांत के प्रति वफादार नहीं है। ईरानी शासन अपनी शक्ति को बनाए रखने के अलावा किसी भी अन्य नियम या कानून को नहीं जानता है।”

इसके अलावा, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा था, “संयुक्त राष्ट्र ने यहाँ बहादुर ईरानियों पर हो रहे खुले उत्पीड़न के लिए खेद जताने और अप्रभावी बयानों के अलावा क्या किया है।” हालाँकि, अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि फरीद मोरादखानी का यह वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था।  कहा जा रहा है कि फरीद मोरादखानी की गिरफ्तारी बुधवार (23 नवंबर, 2022) को हुई है। इस गिरफ्तारी की जानकारी, उनके भाई महमूद मोरादखानी ने दी है।

गौरतलब है कि ईरान में मोरादखानी को मृत्युदंड विरोधी कार्यकर्ता के रूप में जाने जाता है, उन्होंने कई मोर्चों पर मृत्युदंड देना का खुला विरोध किया था। यह पहली बार नहीं है जब फरीद मोरादखानी को गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा हो, इससे पहले उन्हें इसी साल जनवरी में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी अक्टूबर 2021 के एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने शाह मोहम्मद रजा पहलवी की विधवा फराह दीबा की दिल खोलकर प्रशंसा की थी।

बता दें कि फरीद मोरादखानी ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनई की बहन बादरी की बेटी हैं। बादरी साल 1980 के दशक में अपने परिवार से अलग हो गईं थीं और इराक भाग गई थीं।

बिलाल ने दिन-दहाड़े दलित विशाल वाल्मीकि को मार डाला, CCTV में कैद हुई हत्या की वारदात: जाति का नाम लेकर दी गंदी-गंदी गालियाँ, 2 बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद (Moradabad) में दिन-दहाड़े बिलाल (Bilal) नाम के एक शख्स ने अनुसूचित जाति (SC) के एक युवक विशाल (Vishal) वाल्मीकि उर्फ अकोन (Akon) की गोली मार कर हत्या कर दी। हत्या (Murder) की वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।

घटना ठाकुरद्वारा की है। हत्या करने के इरादे से दो बदमाश बाइक से आए थे। वारदात के बाद दोनों भाग निकले। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने मुरादाबाद कांशीपुर रोड जाम कर दिया। मौके पर पहुँचे एसएसपी मुरादाबाद ने परिजनों को समझा कर जाम खुलवाया। एसएसपी ने बताया कि हत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। हालाँकि आरोपित की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ़्तारी के लिए पुलिस की पाँच टीमें लगाई गई हैं।

वहीं परिजनों ने घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज करा दी है, जिसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है। इसमें आरोप लगाया गया है की मृतक विशाल का बिलाल व अन्य के साथ पहले से ही रंजिश था। सभी आरोपित घर आए और विशाल को अपने साथ ले गए। बिलाल ने जातिसूचक शब्द कहना शुरू कर दिया और गंदी गाली देने लगा। करीब 11.30 बजे बिलाल ने विशाल को तमंचे से गोली मार दी और वह लड़खड़ा कर गिर पड़ा। सभी मौके से फरार हो गए। विशाल को केबीआर हॉस्पिटल कांशीपुर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मुरादाबाद जनपद के ठाकुरद्वारा के मुहल्ला शांति नगर निवासी विशाल वाल्मीकि उर्फ एकोन रायकोटी फाइनेंस का काम करता था। उसके पिता मुकेश वाल्मीकि भाजपा समर्थक नेता है। वहीं एक ट्विटर यूजर ने ‘सुदर्शन टीवी’ का एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि हत्यारे पीछे से आते हैं और विशाल को गोली मार देते हैं। वहीं वीडियो में विशाल को आरोपित बिलाल का नाम भी लेते देखा जा सकता है।

विशाल की उम्र लगभग 28 साल थी और वह शादीशुदा था। उसके दो बच्चे भी हैं। दिन-दहाड़े विशाल की हत्या से इलाके में दशहत का माहौल है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपित की गिरफ़्तारी के लिए उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है, लेकिन अभी तक आरोपी को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

‘येशु मसीह के शरीर में वजाइना, वो ट्रांसजेंडर थे’: ट्रिनटी कॉलेज के रिसर्चर का दावा, भड़के चर्च ने कहा – पुरुष के शरीर में छेद कर स्त्री मत बनाओ

ट्रिनिटी कॉलेज के डीन डॉ माइकल बैनर ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के छात्र जोशुआ हीथ के उस दावे का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईसा मसीह ट्रांसजेंडर थे। हालाँकि, उनके इस समर्थन के बाद चर्च से जुड़े लोग उनका विरोध कर रहे हैं और ‘ट्रांस मसीह’ की अवधारणा को नकार रहे हैं।

दरअसल, विगत रविवार (20 नवंबर, 2022) को ट्रिनिटी कॉलेज में आयोजित ईवनसॉन्ग में जूनियर रिसर्च फेलो जोशुआ हीथ ने ईसा मसीह के कुछ फोटो को प्रदर्शित किया था। इन फोटो में ईसा मसीह के शरीर में एक घाव दिखाया गया था। जोशुआ हीथ ने इस घाव की तुलना वजाइना से की थी। जोशुआ हीथ ने अपने संबोधन के दौरान तीन फोटोज दिखाए थे। इसमें, जीन मलौएल की पेंटिंग पिएटा और फ्रांसीसी पेंटर मैकरोनी की पेंटिंग क्राइस्ट्स भी शामिल है।

इस फोटो की ओर इशारा करते हुए हीथ ने जीसस के घाव और कमर तक बह रहे खून को लेकर ही टिप्पणी की थी। हीथ ने कहा था, “यदि मसीह के शरीर में मर्द और स्त्री दोनों के साथ हैं तो निश्चित तौर पर वह ट्रांसजेंडर थे।” हीथ के इस बयान के बाद ट्रिनिटी कॉलेज के डीन डॉ माइकल बैनर ने कहा, “मुमकिन है कि ईसा मसीह ट्रांसजेंडर रहे हों।” उन्होंने यह भी कहा, “हम मसीह के मेल/फीमेल शरीर वाली ऐसी तस्वीरों के बारे में सोच सकते हैं। मसीह आज हमें ट्रांसजेंडर्स के बारे में सोचने के तरीके बता रहे हैं।”

बैनर के इस बयान के बाद ईसा मसीह को मानने वालों ने उनका विरोध किया है। चर्च के एक सदस्य ने ट्रिनिटी कॉलेज के डीन को पत्र लिखते हुए कहा “मैं बेहद दुःखी हूँ। आपने मुझसे बात करने के लिए कहा था लेकिन मैं व्यथित था। मैं ऐसे किसी भी विचार को स्वीकार नहीं कर सकता जिसमें कहा गया हो कि पुरुष में छेद बनाकर उसे स्त्री बनाया जा सकता है।”

उन्होंने अपने शिकायती पत्र में यह भी कहा है कि ‘ईवनसॉन्ग’ के मंच से उनके ईश्वर के लिए जिस तरह की बातें की गईं हैं उन सभी बातों को वह अस्वीकार करते हैं। यही नहीं, ‘ट्रांस मसीह’ वाली धारणा को उन्होंने अधर्म करार दिया है।

गिनीज बुक में बजा ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ का डंका, दर्शकों की संख्या के मामले में बना दिया नया रिकॉर्ड: IPL फाइनल में हुआ था कारनामा

गुजरात स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम (Narendra Modi Stadium) के नाम एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI ) के सचिव जय शाह ने रविवार (27 नवंबर, 2022) को बताया कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम का नाम किसी भी T-20 मैच के दौरान सर्वाधिक दर्शकों की उपस्थिति के लिए ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स’ में शामिल हो गया है। आईपीएल 2022 (IPL 2022) के फाइनल मुकाबले को यहाँ कुल 101,566 दर्शकों ने देखा था।

इस स्टेडियम को पहले गुजरात क्रिकेट संघ (जीसीए) स्टेडियम मोटेरा के नाम से जाना जाता था। इसकी क्षमता 110,000 दर्शकों की है, जो कि मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) से लगभग 10,000 अधिक है। एमसीजी की क्षमता 100,024 दर्शकों की है।

शाह ने ट्वीट किया, “मुझे गर्व और खुशी है कि जीसीए मोटेरा के भव्य ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ को किसी एक टी20 मैच में सर्वाधिक दर्शकों की उपस्थिति के लिए ‘गिनीज बुक रिकॉर्ड’ में शामिल किया गया है। इस स्टेडियम में 29 मई 2022 को आईपीएल फाइनल के दौरान 101,566 दर्शक उपस्थित थे। इसे संभव बनाने के लिए हमारे प्रशंसकों का बहुत-बहुत आभार।”

इस मौके पर बीसीसीआई ने ट्वीट कर कहा, “हर भारतीय के लिए बहुत बड़ा लम्हा है क्योंकि भारत ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया है। हमारे सभी प्रशंसको और दर्शकों को उनके बेजोड़ जुनून और अटूट समर्थन की वजह से यह सफल हो पाया है। नरेंद्र मोदी स्टेडियम और आईपीएल को शुभकामनाएँ।”

वहीं आईपीएल 2022 के फाइनल मुकाबले से पहले ही बीसीसीआई ने एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया था। बीसीसीआई ने सबसे बड़ी क्रिकेट जर्सी बनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। इस जर्सी पर सभी 10 आईपीएल टीम के लोगो हैं। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली, सचिव जय शाह और आईपीएल बृजेश पटेल ने गिनीज रिकॉर्ड रिसीव किया था। इस विशालकाय जर्सी का साइज 66×42 मीटर है।