Monday, July 15, 2024
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NBT की प्रेम वाली पत्रकारिता: बेटी प्रतिभा को बचाने वाली माँ हुई ‘नफरती’, भगोड़े शादीशुदा नदीम सैफी पर पूरा प्यार लुटाया

एनबीटी के विद्वान संपादकों को बताना चाहिए कि उन्होंने प्यार की वह कौन सी परिभाषा गढ़ी है, जिसमें अपनी बेटी की जिंदगी बचाने वाली माँ नफरती हो जाती है। खासकर तब जब परिवार को ठुकरा करने आफताब को चुनने वाली श्रद्धा के हश्र से पूरा देश सन्न है।

श्रद्धा वाकर की निर्मम हत्या ने लव जिहाद के खतरों को चर्चा में ला दिया है। इससे भन्नाई भारत की मेन स्ट्रीम मीडिया भारतीय समाज को प्रेम विरोधी साबित करने पर तुली है। इसके लिए उसने उस माँ को भी ‘नफरती’ करार दिया है, जिसने अपनी बेटी को एक ऐसे व्यक्ति से बचाया जो पहले से शादीशुदा था, जो बाद में देश छोड़कर भाग गया।

यह माँ है- माला सिन्हा। जिस बेटी का प्यार कथित तौर पर उनकी नफरत की आग में जला, उसका नाम है- प्रतिभा सिन्हा। उन्होंने कथित तौर पर जिससे अपनी बेटी को प्यार करने से रोका उसका नाम है- नदीम सैफी। सारे बॉलीवुड से जुड़े हुए नाम हैं। माला सिन्हा गुजरे जमाने की नामचीन अभिनेत्री हैं। प्रतिभा भी फिल्म इंडस्ट्री में हाथ आजमा चुकी हैं। वहीं नदीम कभी श्रवण के साथ जोड़ी बनाकर संगीत दिया करते थे।

प्रतिभा और नदीम की कथित लव स्टोरी टाइम्स ग्रुप की वेबसाइट ‘नवभारत टाइम्स ऑनलाइन’ पर ट्यूजडे तड़का नामक सीरीज में प्रकाशित हुई है। 22 नवंबर 2022 को यह स्टोरी पब्लिश की गई है। इसे जैसमीन नाम के किसी पत्रकार ने संपादित किया है। एनबीटी का एजेंडा इस आर्टिकल की हेडलाइन से ही शुरू हो जाता है। हेडलाइन है- माला सिन्हा की नफरत की ‘आग’ में झुलस गया बेटी प्रतिभा और नदीम का प्यार, खूब हुई थी छीछालेदर

एनबीटी में प्रकाशित रिपोर्ट

इस आर्टिकल में म्यूजिक डायरेक्टर नदीम सैफी को नायक की तरह दिखाने की कोशिश हुई, जबकि माला सिन्हा को प्यार का दुश्मन बताने की कोशिश की गई है। रिपोर्ट में लिखा गया है, “म्यूजिक डायरेक्टर नदीम सैफी के साथ बेटी प्रतिभा सिन्हा का रिश्ता माला सिन्हा को पसंद नहीं था। उन्होंने दोनों को अलग करने के लिए हर संभव तरीका अपनाया।” इस आर्टिकल में कहा गया है कि शादीशुदा होने के बाद भी नदीम, प्रतिभा के चार्म से बच नहीं सके। वे अपनी बीबी को तलाक तक देने को तैयार थे। आर्टिकल में नदीम को सपनों का राजकुमार भी बना दिया गया है, जबकि इसी आर्टिकल के आखिर में नदीम के साथ किसी रिश्ते से प्रतिभा इनकार कर रही हैं।

इस आर्टिकल को पढ़ने से प्रतीत होता है कि यह नदीम के दृष्टिकोण से लिखा गया है। एक विशेष एजेंडे के साथ परोसा गया है। यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मजहब विशेष के लोग प्रेम के मसीहा हैं, पर ये हिंदू हैं कि वे प्यार के दुश्मन बने बैठे हैं।

प्रतिभा के इनकार के बावजूद यदि मान लिया जाए कि नदीम से उनकी करीबी थी तो क्या एक माँ को अपनी बेटी को इस मामले में सलाह देने का हक नहीं है? कोई माँ क्यों चाहेगी कि उसकी बेटी किसी शादीशुदा मर्द के साथ इश्क लड़ाए? वह क्यों चाहेगी कि उसकी बेटी के कारण किसी का बसा-बसाया घर उजड़ जाए? रिपोर्ट में इस बात का जिक्र तक नहीं है कि नदीम भारत छोड़कर भाग चुका है। गुलशन कुमार की हत्या में उसका नाम आया था। उस पर अंडरवर्ल्ड से साँठगाँठ के आरोप रहे हैं।

एनबीटी के विद्वान संपादकों को बताना चाहिए कि उन्होंने प्यार की वह कौन सी परिभाषा गढ़ी है, जिसमें अपनी बेटी की जिंदगी बचाने वाली माँ नफरती हो जाती है। खासकर तब जब परिवार को ठुकरा करने आफताब को चुनने वाली श्रद्धा के हश्र से पूरा देश सन्न है।

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राजन कुमार झा
राजन कुमार झाhttps://hindi.opindia.com/
Journalist, Writer, Poet, Proud Indian and Rustic

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