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‘मेरे मामा मेरी मातृभूमि से बढ़कर नहीं हो सकते’: जिसने उत्तर-पूर्व की रक्षा के लिए मामा का भी किया वध, जिसके ‘त्रिभुज’ में औरंगजेब की फौज डूबी

भारतवर्ष का इतिहास लाचित बरपुखान/लाचित बोड़फुकन (Lachit Borphukan) जैसे वीर सपूतों के शौर्य और वीरता का महाख्यान है। इसके कोने-कोने से आने वाले इसके वीर सपूतों की अनेक गाथाएँ, अपनी मातृभूमि के प्रति इन वीरों की निष्ठा, त्याग और समर्पण की अनेक अकल्पनीय कहानी प्रस्तुत करती हैं। ऐसी ही एक अद्भूत और अकल्पनीय कहानी है लाचित बरपुखान की।

मुगल आक्रांताओं से उत्तर-पूर्व भारत की पवित्र भूमि की रक्षा करने वाले वीरयोद्धा लाचित बरपुखान का जीवन और व्यक्तित्व शौर्य, साहस, स्वाभिमान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का पर्याय है। प्रसिद्ध इतिहासकार सूर्यकुमार भूयान ने उनकी मौलिक रणनीति और वीरता के कारण उन्हें उत्तर-पूर्व भारत का ‘शिवाजी’ माना है। वास्तव में, लाचित बरपुखान ने उत्तर-पूर्व भारत में वही स्वातंत्र्य-ज्वाला जलाई जो मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध पश्चिम भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज ने, पंजाब में गुरू गोविंद सिंह ने और राजपूताना में महाराणा प्रताप ने जलाई थी। इसी तथ्य को रेखांकित करते हुए पूर्व राज्यपाल श्री श्रीनिवास कुमार सिन्हा ने अपनी पुस्तक ‘मिशन असम’ में लिखा है, “महाराष्ट्र और असम हमारे विशाल और महान देश के दो विपरीत छोर पर हो सकते हैं। लेकिन वे एक सामान्य इतिहास, एक साझी विरासत और एक सामान्य भावना से एकजुट होते हैं। मध्ययुगीन काल में उन्होंने दो महान सैन्य नेताओं, महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी और असम में लाचित बरपुखान को जन्म दिया है।”

भारत में इस वीर योद्धा की स्मृति को नमन करते हुए प्रतिवर्ष 24 नवम्बर को ‘लाचित दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। लाचित बरपुखान का जन्म 24 नवंबर 1622 ई को अहोम साम्राज्य के एक अधिकारी सेंग कालुक-मो-साई के घर में चराइदेऊ नामक स्थान पर हुआ था। उनकी माता कुंदी मराम थीं और उनका पूरा नाम ‘चाउ लाचित फुकनलुंग’ था। उन्होंने सैन्य कौशल के साथ-साथ मानविकी तथा शास्त्र का भी अध्ययन किया था। बचपन से ही अत्यंत बहादुर और समझदार लाचित जल्द ही अहोम साम्राज्य के सेनापति बन गए। ‘बरपुखान’ लाचित का नाम नहीं, बल्कि उनकी पदवी थी। उत्तर-पूर्व भारत के राजनीतिक इतिहास का अनुशीलन करने पर यह ज्ञात होता है कि अहोम सेना की संरचना बहुत ही व्यवस्थित थी। एक देका दस सैनिकों का, बोरा बीस सैनिकों का, सेंकिया सौ सैनिकों का, हजारिका एक हजार सैनिकों का और राजखोवा तीन हजार सैनिकों का जत्था होता था। इस प्रकार बरपुखान छः हजार सैनिकों का संचालन करता था। लाचित बरपुखान इन सभी के प्रमुख थे।

‘बरपुखान’ के रूप में अपनी नियुक्ति से पूर्व वे अहोम साम्राज्य के राजा चक्रध्वज सिंह की शाही घुड़साल के अधीक्षक थे। वे परमवीर और राजा के अत्यंत विश्वासपात्र थे। प्रारम्भ में उन्हें रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण सिमलूगढ़ किले के प्रमुख और शाही घुड़सवार रक्षक दल के अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। लाचित बरपुखान जैसे योद्धा के रहते मुगल आक्रांता भारत के उत्तर-पूर्व क्षेत्र को अपने अधीन नहीं कर सके। लाचित ने शक्तिशाली मुगलों से न सिर्फ टक्कर ली, बल्कि उन्हें परास्त करके उनके अभिमान और अभियान को तहस-नहस करते हुए उत्तर-पूर्व विजय के उनके अरमान को सदा के लिए चकनाचूर कर दिया।

लाचित ने बीमार होते हुए भी भीषण युद्ध किया और अपनी असाधारण नेतृत्व क्षमता और अदम्य साहस से सराईघाट की प्रसिद्ध लड़ाई में लगभग 4000 मुगल सैनिकों को मार गिराया। 1671 ई में सराईघाट, ब्रह्मपुत्र नदी में अहोम सेना और मुगलों के बीच ऐतिहासिक लड़ाई हुई, जिसमें लाचित ने पानी में लड़ाई (नौसैनिक युद्ध) की सर्वथा नई तकनीक आजमाते हुए मुगलों को पराजित किया। उन्होंने अपने भौगोलिक-मानविकी ज्ञान और गुरिल्ला युद्ध की बारीक रणनीतियों का प्रयोग करते हुए सर्वप्रथम मुगल फौज की ताकत का सटीक आकलन किया और फिर ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर भीषण नौसैनिक युद्ध में उन्हें हरा दिया। लाचित ने अपनी मौलिक युद्धनीति के तहत रातोंरात अपनी सेना की सुरक्षा हेतु मिट्टी से दृढ़ तटबंधों का निर्माण कराया। उन्होंने मातृभूमि और देशवासियों के स्वाभिमान और हित को अपने सगे-संबंधियों से सदैव ऊपर रखा। अत: युद्धभूमि में अपने मामा की लापरवाही को अक्षम्य मानकर उनका वध कर दिया और कहा कि ‘मेरे मामा मेरी मातृभूमि से बढ़कर नहीं हो सकते’।

युद्ध के समय अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए कहा गया उनका यह बोधवाक्य–लाचित जियाइ थका माने गुवाहाटी एरा नाही (अर्थात् जब तक लाचित जीवित है, उससे गुवाहटी कोई नहीं छीन सकता), उनकी निर्भीकता, वीरता और कुशल नेतृत्व क्षमता का परिचय देता है। घायल और अत्यंत अस्वस्थ लाचित ने अपने सैनिकों में जोश भरने के लिए कहा था, “जब मेरे देश पर आक्रमणकारियों का खतरा बना हुआ है, जब मेरे सैनिक उनसे लड़ते हुए अपनी ज़िंदगी दांव पर लगा रहे हैं, तब मैं महज बीमार होने के कारण कैसे अपने शरीर को आराम देने की सोच सकता हूँ।” ऐसे आदर्श और प्रेरक सेनानायक की स्मृति को सम्मान देने के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के सर्वश्रेष्ठ कैडेट को ‘लाचित बरपुखान स्वर्ण पदक’ से सम्मानित किया जाता है। लाचित बरपुखान की स्मृति को चिरस्थायित्व प्रदान करने के लिए उनके समाधि स्थल जोरहाट से 16 किमी दूर हुलुन्गपारा में ‘स्वर्गदेव उदयादित्य सिंह द्वार’ का भी निर्माण किया गया है।

दरअसल, लाचित बरपुखान का महत्व समझने के लिए अहोम साम्राज्य का सारांश व इतिहास जानना-समझना आवश्यक है। बारह सौ अठाईस में असम में ताई अहोम वंश का शासन स्थापित हुआ जो मयंमार से आए थे। इस राजवंश ने सदियों तक खिलजी, तुगलक, इलियास शाही, लोदी और बंगाल सुल्तानों के आक्रमण से सफलतापूर्वक अपनी रक्षा की। लेकिन 1648 में मुगलों के एक बड़े आक्रमण में हारकर उन्हें बड़ी आर्थिक हानि झेलनी पड़ी। फिर 1658 में औरंगजेब मुगल बादशाह बना और 1661 में उसने अपने दो प्रमुख सेनापतियों मीर जुमला और दिलेर खान को पहले बंगाल और फिर असम पर आक्रमण करने के लिए भेजा। अहोम साम्राज्य की शक्ति और शौर्य, जिसके बल पर इस साम्राज्य ने इतने लंबे समय तक सारे आक्रमणकारियों का सफलतापूर्वक सामना किया था, वह क्षीण होने लगा था। मुगल सेनापतियों मीर जुमला और दिलेर खान द्वारा किए गए इस हमले में अहोम साम्राज्य पराजित हो गया। इस साम्राज्य के कई किले तो बिना कोई लड़ाई लड़े हाथ से निकल गए। अहोम के राजा जयध्वज सिंघा को इस युद्ध में पीछे हटना पड़ा और उन्होंने पूर्वोत्तर का बड़ा हिस्सा इस युद्ध में खो दिया। इतना ही नहीं, उनको मुगल साम्राज्य के साथ एक अपमानजनक संधि के लिए राजी होना पड़ा, जिसके तहत उन्हें न सिर्फ धन, भूमि, हाथी; बल्कि अपनी छः साल की बेटी को भी मुगल हरम में देना पड़ा।

अहोम साम्राज्य की पराजय और अपमान के कारण राजा जयध्वज सिंघा को बहुत बड़ा सदमा पहुँचा, जिसके कारण जल्दी ही उनकी मृत्यु हो गई। उनके बाद चक्रध्वज सिंघा को राजा बनाया गया। उनका बरपुखान बनने के बाद लाचित के सामने बहुत-सी चुनौतियाँ थीं। उनके सामने एक तरफ मुगलों की विशाल और संगठित फ़ौज थी, जिसका संचालन करने वाले साइस्ता खान और दिलेर खान जैसे अनुभवी सेनापति थे। दूसरी तरफ अहोम साम्राज्य की निराश और विभाजित सेना थी। अगले चार वर्षों तक लाचित बरपुखान ने अपना पूरा ध्यान अहोम सेना के नव-संगठन और अस्त्र-शास्त्रों को इकट्ठा करने में लगाया। इसके लिए उन्होंने नए सैनिकों की भर्ती की, जल सेना के लिए नौकाओं का निर्माण कराया, हथियारों की आपूर्ति, तोपों का निर्माण और किलों के लिए मजबूत रक्षा प्रबंधन इत्यादि का दायित्व अपने ऊपर लिया। उन्होंने यह सब इतनी चतुराई और समझदारी से किया कि इन सब तैयारियों की मुगलों को भनक तक नहीं लगने दी। लाचित बरपुखान की चतुराई के कारण कूटनीतिक तरीके से मुगलों के साथ में दोस्ती का दिखावा भी चलता रहा। ये लाचित की राजनीतिक सूझबूझ एवं दूरदर्शिता का उत्तम उदहारण था।

मुगल शासन द्वारा 1668 में गुवाहाटी के फौजदार रशीद खान को बदल कर फिरोज खान को नियुक्त किया गया। वह बेहद ऐय्याश किस्म का व्यक्ति था। उसने चक्रध्वज सिंघा को सीधे-सीधे असमिया लड़कियों को ऐय्याशी के लिए अपने पास भेजने का आदेश दिया। इससे लोगों में मुगलों के खिलाफ लड़ने के लिए जोश और आक्रोश भरने लगा। लाचित ने लोगों के इस जोश और आक्रोश का सही प्रयोग करते हुए उसी समय गुवाहाटी के किले को मुगलों से छीनने का निर्णय लिया। लाचित बरपुखान के पास एक शक्तिशाली और निपुण जल सेना के साथ समर्पित जासूसों का संजाल तो था, परन्तु घुड़सेना की भारी कमी थी। यही कारण है कि अहोम सेना द्वारा घेराबंदी करने के बाद भी महीनों तक गुवाहाटी के किले को स्वतंत्र नहीं कराया जा सका, जिसकी रक्षा इटाकुली का किला कर रहा था। अंत में लाचित बरपुखान ने दूसरी योजना बनाई, जिसके अनुसार दस-बारह सिपाहियों ने रात के अँधेरे का फायदा उठाते हुए चुपके से किले में प्रवेश कर लिया और मुगल सेना की तोपों में पानी डाल दिया। अगली सुबह ही लाचित ने इटाकुली किले पर आक्रमण कर उसे जीत लिया।

इस विजय के साथ ही एक बार फिर गुवाहाटी ने आजादी की साँस ली। लेकिन यह आजादी ज्यादा दिन तक कायम नहीं रह पाई। जब औरंगजेब को इसके बारे में पता चला तब वह गुस्से से तिलमिला उठा। उसने मिर्जा राजा जयसिंह के बेटे रामसिंह को सत्तर हजार सैनिकों की बड़ी सेना के साथ अहोम से लड़ने के लिए असम भेजा। रोचक बात यह है कि राम सिंह के साथ सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर भी असम आए थे, किंतु उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए लाचित के विरुद्ध होने वाले इस युद्ध में भाग नहीं लिया। उधर लाचित ने बिना एक पल व्यर्थ किए किलों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ प्रारंभ कर दीं।

अपनी भूल से अहोम सेना के प्राण संकट में डालने वाले अपने मामा को प्राणदंड देने की घटना ने लाचित बरपुखान को अपने ही सैनिकों की दृष्टि में बहुत ऊँचा उठा दिया। अब सबको यह विश्वास होने लगा कि मुगलों का सामना करना और उनका मुकाबला करना असंभव नहीं है। इस युद्ध में अहोम सेना जब तक छापामार या गुरिल्ला युद्ध कर रही थी, तब तक राम सिंह पर भारी पड़ रही थी। लेकिन फिर कुछ ही समय बाद रामसिंह ने युद्ध-नैतिकता का उल्लंघन करते हुए छल-कपट शुरू कर दिया। लाचित से रुष्ट कुछ टुकड़ी प्रमुखों को लालच देकर राम सिंह अपनी ओर करने में भी सफल हो गया। फिर उसने अहोम सेना को मैदानी युद्ध के लिए उकसाया। लाचित को पता था कि खुले युद्ध में मुगलों से जीत पाना असंभव है, क्योंकि उनके पास बेहतरीन घुड़सेना थी। लेकिन राजा चक्रध्वज सिंघा ने आवेश में आकर मैदानी युद्ध का आदेश दे दिया। इस प्रकार 1669 के अलाबोई के इस मैदानी युद्ध में अहोम सेना की भयानक हार हुई और लाचित के दस हजार से ज्यादा सैनिकों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी।

दुर्भाग्य से 1670 में राजा चक्रध्वज सिंघा का देहांत हो गया और उदयादित्य सिंघा नए राजा बने। 1671 के आरंभ में राम सिंह को अपने गुप्तचरों से पता चला कि अन्दुराबली के किनारे पर रक्षा इंतजामों को भेदा जा सकता है और गुवाहाटी को फिर से हथियाया जा सकता है। उसने इस अवसर का फायदा उठाने के उद्देश्य से मुगल नौसेना खड़ी कर दी। उसके पास चालीस जहाज थे जो सोलह तोपों और छोटी नौकाओं को ले जाने में समर्थ थे। दुर्भाग्यवश लाचित इस समय इतने अस्वस्थ हो गए कि उनका चलना-फिरना भी अत्यंत कठिन हो गया। 1671 के मार्च महीने में सराईघाट का युद्ध आरंभ हुआ। यह युद्ध उस यात्रा का चरमोत्कर्ष था जो यात्रा आठ वर्ष पहले मीर जुमला के आक्रमण से आरंभ हुई थी। भारतवर्ष के इतिहास में कदाचित् यह पहला महत्वपूर्ण युद्ध था जो पूर्णतया नदी में लड़ा गया। ब्रह्मपुत्र नदी का सराईघाट इस ऐतिहासिक युद्ध का साक्षी बना। इस युद्ध में ब्रह्मपुत्र नदी में एक प्रकार का त्रिभुज बन गया था, जिसमें एक ओर कामख्या मंदिर, दूसरी ओर अश्वक्लान्ता का विष्णु मंदिर और तीसरी ओर इटाकुली किले की दीवारें थीं। यह भीषण युद्ध जलस्थिति इसी त्रिभुजाकार सेना-संरचना में लड़ा गया।

इस निर्णायक युद्ध में अहोम सेना ने महान योद्धा लाचित बरपुखान के नेतृत्व में अपने वर्षों के युद्धाभ्यास से अर्जित रणकौशल का अद्भुत प्रदर्शन किया। इस युद्ध में अहोम सेना ने अनेक आधुनिक युक्तियों का उपयोग किया। यथा- पनगढ़ बनाने की युक्ति। युद्ध के दौरान ही बनाया गया नौका -पुल छोटे किले की तरह काम आया। अहोम की बच्छारिना (जो अपने आकार में मुगलों की नाव से छोटी थी) अत्यंत तीव्र और घातक सिद्ध हुई। इन सभी आधुनिक युक्तियों ने लाचित बरपुखान की अहोम सेना को मुगल सेना से अधिक सबल और प्रभावी बना दिया। दो दिशाओं से हुए प्रहार से मुगल सेना में हडकंप मच गया और सांयकाल तक उसके तीन अमीर और चार हजार सैनिक मारे गए। इसके बाद मुगल सेना पूरी तरह तबाह होकर मानस नदी के पार भाग खड़ी हुयी। दुर्भाग्यवश इस युद्ध में घायल लाचित बरपुखान ने कुछ दिन बाद ही प्राण त्याग दिए। वीर सपूत लाचित बरपुखान के नेतृत्व में अहोम सेना द्वारा अर्जित की गई सराईघाट की इस अभूतपूर्व विजय ने असम के आर्थिक विकास और सांस्कृतिक समृद्धि की आधारशिला रखी। आगे चलकर असम में अनेक भव्य मंदिरों आदि का निर्माण हुआ। यदि सरायघाट के युद्ध में मुगलों की विजय होती, तो वह असम के लिए सांस्कृतिक विनाश और पराधीनता लेकर आती। लेकिन लाचित बरपुखान जैसे भारत माँ के वीर सपूत के अदम्य साहस और असाधारण नेतृत्व क्षमता के कारण ही मुगल साम्राज्य के दुष्प्रभाव से अहोम साम्राज्य बच सका। मरणोपरांत भी लाचित असम के लोगों और अहोम सेना के ह्रदय में अग्नि की ज्वाला बनकर धधकते रहे और उनके प्राणों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया। लाचित बरपुखान द्वारा संगठित सेना ने 1682 में मुगलों से एक और निर्णायक युद्ध लड़ा, जिसमें उसने अपने सेनापति लाचित को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इटाकुली किले से मुगलों को खदेड़ दिया। परिणामस्वरूप, मुग़ल फिर कभी असम की ओर नहीं आए।

मुगल आक्रांताओं को पराजित करके स्वराष्ट्र के स्वाभिमान और गौरव की रक्षा करने वाले लाचित बरपुखान जैसे प्रेरणास्पद पूर्वजों से प्रभावित होकर ही तिरोत सिंह, नंगबाह, पा तागम संगमा, वीरांगना रानी रुपलियानी, रानी गाइदिन्ल्यू, मनीराम दीवान, गोपीनाथ बारदोलोई, कुशल कुँवर, कनकलता बरुआ आदि स्वाधीनता सेनानियों ने आगे चलकर अंग्रेजी साम्राज्यवाद के विरुद्ध भी आजीवन संघर्ष किया। उत्तर-पूर्व भूमि की पवित्रता और स्वाधीनता की रक्षा में लाचित बरफूकन के शौर्य और बलिदान का अप्रतिम और आदि महत्व है। उनका जीवन-आदर्श और जीवन-मूल्य ही परवर्ती स्वाधीनता सेनानियों का पाथेय और प्रेरणा बने। यही कारण है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 24 नवम्बर 2015 को “लाचित दिवस” के अवसर पर उनकी वीरता को रेखांकित करते हुए कहा था, “लाचित भारत के गौरव हैं। सराईघाट के युद्ध में उनके द्वारा प्रदर्शित अभूतपूर्व साहस को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है।” इस वर्ष असम सरकार द्वारा दिल्ली के विज्ञान भवन में उनकी जन्मजयंती को बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। आजादी की अमृत महोत्सव बेला में इतिहास के उपेक्षित नायकों की पुनर्प्रतिष्ठा सराहनीय पहल है।

(लेखक जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता, छात्र कल्याण हैं)

3 हिंदू लड़की, OYO रूम, नंगी फोटो: महावीर कॉलेज के लव जिहादी जीतू शेख का VHP ने पहले किया स्टिंग, फिर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

गुजरात के सूरत से लव जिहादी की पिटाई का मामला सामने आया है। घटना महावीर कॉलेज की है। बताया जा रहा है कि विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं ने हिंदू लड़कियों को फँसाने वाले जीतू शेख का पहले स्टिंग किया। उसके बाद कैंपस में ही उसकी पिटाई की गई। घटना बुधवार (23 नवम्बर 2022) की है। हालाँकि इस मामले में पुलिस से शिकायत नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना महावीर कॉलेज की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विहिप कार्यकर्ताओं को कॉलेज से लव जिहाद की शिकायत मिली थी। पता चला था कि मुस्लिम छात्र कुछ हिंदू लड़कियों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। इसकी पुष्टि के लिए विहिप ने एक स्टिंग किया। इसमें मामला सही पाया गया।

VHP के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश नावड़िया के मुताबिक उन्हें जानकारी मिली थी कि कई मुस्लिम लड़के सोशल मीडिया पर फर्जी ID बनाकर हिंदू लड़कियों से चैटिंग करते हैं। साथ ही कुछ मुस्लिम लड़कों के हिंदू लड़कियों से अफेयर की भी जानकारी मिली थी।

स्टिंग में जीतू शेख लड़कियों के OYO होटल की तस्वीरों के बारे में कैमरे पर बता रहा है। वह 3 हिंदू गर्लफ्रेंड होने का दावा करता है। उन लड़कियों के नाम भी बताता है। वह कहता है कि पहले उसकी हिंदू लड़कियों के साथ नॉर्मल दोस्ती थी। लेकिन अभी कुछ हुआ है। एक लड़की की 2 नंगी फोटो अपने पास होने का दावा करते हुए जीतू शेख ने लड़की को अपने साथ अक्सर OYO ले जाने की बात करता है।

बताया जा रहा है कि स्टिंग वीडियो को देखने के बाद VHP कार्यकर्ता कॉलेज में घुसे और उन्होंने 3 मुस्लिम छात्रों की पिटाई की। मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालाँकि विहिप नेता दिनेश नावड़िया के अनुसार अभी उन्हें समझाकर छोड़ा गया गया। बाद में और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कहा जा रहा है कि विवाद के दौरान कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को बाहर जाकर झगड़ा करने के लिए कहा था। यह भी जा रहा है कि कॉलेज प्रशासन ने परिसर के अंदर लव जिहाद के आरोपों से इनकार किया है।

भारतीय सेना ने PoK वापस लेने की बात की तो ‘आहत’ हो गई ऋचा चड्ढा, ‘गलवान’ का जिक्र कर बलिदानी सैनिकों का उड़ाया मजाक

बॉलीवुड अपने स्तरहीन कंटेंट की वजह से लगातार गर्त में जा रहा है। दर्शक इनकी बेसिर पैर की फिल्मों को ख़ारिज कर रहे हैं। दूसरी ओर बॉलीवुड हस्तियाँ अपने खराब कॉमन सेंस और भारत विरोधी रुख की वजह से भी चर्चा में रहते हैं। इसका ताजा उदाहरण ऋचा चड्ढा (Richa Chadha) हैं। ऋचा चड्ढा ने बुधवार (23 नवंबर 2022) को ट्विटर पर भारतीय सेना का मजाक उड़ाया।

दरअसल भारतीय सेना के उत्तरी कमान के कमांडिंग-इन-चीफ उपेन्द्र द्विवेदी ने एक बयान में कहा था अगर सरकार आदेश जारी करती है तो वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को वापस लेने के लिए तैयार हैं। इस बयान को ‘बाबा बनारस’ नाम के ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया था। इसी ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए ऋचा ने भारतीय सेना का मजाक उड़ाया और ताना मारते हुए कहा कि गलवान हाय (Galwan says hi) बोल रहा है।

उल्लेखनीय है कि जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की चीनी फौजियों के साथ झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय सैनिक ने अपना बलिदान दिया था। घंटों चली झड़प में कई चीनी भी मारे गए थे। लेकिन चीन ने आधिकारिक तौर पर पर अपने मृत सैनिकों की सही संख्या का खुलासा कभी नहीं किया। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच लद्दाख में एक तनावपूर्ण युद्धविराम हुआ था। हालाँकि दोनों देशों ने क्षेत्र में करीब 60,000 सैनिक और उन्नत हथियार तैनात कर दिए थे।

ऋचा चड्ढा को उस घटना का मजाक उड़ाते देखना बेहद हास्यास्पद है। उन्हें संभवतः यह भी मालूम नहीं होगा कि भारतीय सैनिकों ने बिना किसी हथियार के चीनी सेना से बहादुरी से लड़ाई लड़ी और उन्हें पीछे धकेलने में कामयाब हासिल की।

देखा जाए तो बॉलीवुड स्टार्स को कभी भी उनके सामान्य ज्ञान के लिए नहीं जाना जाता है, लेकिन ऋचा चड्ढा ने इस मामले में खुद को मूर्ख की तरह प्रस्तुत किया। इतना ही नहीं यह गलवान में बलिदान देने वाले 20 सैनिकों के परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता भी है।

जहाँ तक ​​पीओके पर भारतीय सेना की प्रतिक्रिया की बात है, तो यह भारतीय पत्रकारों के मूर्खतापूर्ण सवालों का एक मानक जवाब है। यह पूछे जाने पर कि क्या वे पीओके वापस ले सकते हैं, यह एकमात्र प्रतिक्रिया है जो सेना दे सकती है, इसका मतलब यह नहीं है कि वे कल पाकिस्तान पर आक्रमण कर रहे हैं। हम निश्चित रूप से नहीं चाहते कि सेना यह कहे कि वे पीओके वापस नहीं ले सकते।

50000 की मुगलिया फौज, पूर्वोत्तर के पानी से गई हार: यूँ ही नहीं NDA का सर्वश्रेष्ठ कैडेट पाता है ‘लाचित बरपुखान’ सम्मान

अहोम साम्राज्य (Ahom Dynasty)। लाचित बरपुखान/लाचित बोड़फुकन (Lachit Borphukan)। ये वे नाम हैं जिन्हें दफन कर इतिहास को मुगलिया पन्नों से रंग दिया गया। जबकि लाचित बरपुखान ने पूर्वोत्तर की जमीन पर मुगलों की बर्बर विस्तारवादी मंसूबों को ही दफन कर दिया। उनके पराक्रम में इतना बल था कि उससे टकराने के बाद मुगलों ने कभी पूर्वोत्तर पर काबिज होने का स्वप्न भी न देखा।

24 नवंबर 1622 को पैदा हुए लाचित बरपुखान को उनके युद्ध लड़ने की अद्भुत क्षमता के लिए ‘पूर्वोत्तर का शिवाजी’ भी कहा जाता है। उन्होंने 1671 में हुए सराईघाट के युद्ध (Battle of Saraighat) में मुगलों की विशाल सेना को अपनी रणनीति और जलीय युद्ध लड़ने की क्षमता की वजह से घुटनों पर ला दिया। मुगल जब पराजित हुए थे, तब लाचित पूरी तरह से स्वस्थ भी नहीं थे। पर राष्ट्रभक्ति का जज्बा ऐसा था कि बीमार होते हुए भी मातृभूमि की रक्षा के प्रण से नहीं डिगे। मुस्लिम आक्रांताओं से लड़े। अपनी सेना को विजय दिलाई।

1228 से 1826 के बीच लगभग 600 वर्षों तक अहोम ने असम के प्रमुख हिस्सों पर शासन किया था। इस साम्राज्य पर तुर्क, अफगान और मुगलों ने कई बार हमला किया। मुगलों का पहला हमला लाचित के जन्म से सात साल पहले 1615 में हुआ था।

1663 में मुगलों से अहोम पराजित हो गए। इसके बाद घिलाजरीघाट की संधि हुई। संधि के अनुसार अहोम राजा जयध्वज सिंह को अपनी बेटी और भतीजी को मुगल हरम में भेजना पड़ा। मुगलों को 82 हाथी, 3 लाख सोने-चाँदी के सिक्के, 675 बड़ी बंदूकें 1000 जहाज मिले। राज्य का एक बड़ा हिस्सा भी चला गया।

जयध्वज सिंह इसे सह नहीं सके और जल्द ही चल बसे। उनके उत्तराधिकारी चक्रध्वज सिंह ने इस अपमान का बदला लेने की कसम खाई। अहोम सम्मान को वापस पाने के लिए उन्होंने अगस्त 1667 में लाचित बरपुखान को सेनापति नियुक्त किया। बरपुखान को मानविकी और शास्त्रों के बारे में अच्छी जानकारी थी। वे सैन्य कौशल में पारंगत थे। सेनापति बनने से पहले अहोम साम्राज्य में कई अन्य अहम जिम्मेदारी भी निभा चुके थे।

4 नवंबर 1667 को बरपुखान के सैनिकों ने गुवाहाटी पर कब्जा कर लिया। मुगलों से युद्ध होने पर गुवाहाटी रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण जगह थी। इस हार के बाद मुगल शासक औरंगजेब ने गुवाहाटी को फिर से हासिल करने के लिए अंबर के राजा मिर्जा राजा जय सिंह के पुत्र राजा राम सिंह की कमान में एक बड़ी सेना भेजी। हालाँकि इस दौरान अहोमों औए मुगलों के बीच कई बार संघर्ष हुए और एक रणनीति के तहत लाचित ने मुगलों को पानी की तरफ धकेलने का प्रयास किया और अंततः 1671 में सराईघाट का युद्ध लड़ा गया।

50,000 से भी अधिक संख्या में आई मुगल फौज को घेरने के लिए बरपुखान ने जलयुद्ध की रणनीति अपनाई। ब्रह्मपुत्र नदी और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र को अपनी मजबूती बना कर मुगलों को नाकों चने चबवा दिए। उन्हें पता था कि जमीन पर मुगलिया फौज चाहे कितनी भी मजबूत हो, लेकिन पानी में वे घुटने टेकने को मजबूर होंगे। इस युद्ध में जीत के एक साल बाद वीर योद्धा बरपुखान का निधन हो गया।

लाचित बरपुखान का पराक्रम ऐसा था कि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence Academy) के सर्वश्रेष्ठ कैडेट को उन्हीं के नाम पर स्वर्ण पदक (The Lachit Borphukan Gold Medal) प्रदान किया जाता है। असम सरकार ने भी 2000 में लाचित बरपुखान अवॉर्ड की शुरुआत की थी।

यह अच्छी बात है कि इतिहास ने जिन योद्धाओं के साथ अन्याय किया, केंद्र की मोदी सरकार उनको उनका गौरव लौटाने के प्रयास में लगी है। इसी कड़ी में बरपुखान की 400वीं जयंती पर दिल्ली के विज्ञान भवन में 23 नवंबर 2022 से एक तीन दिवसीय आयोजन की शुरुआत की गई है।

’72 दिन में मिटा दिया सबूत’: सुशांत की मैनेजर की 14वें तले से गिर कर हुई थी मौत, CBI ने जाँच के बाद कहा – ये रेप-हत्या नहीं

संदेहास्पद स्थिति में मृत मिले बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत (Disha Saliyan Death) को लेकर केंद्रीय एजेंसी CBI ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। सारी आशंकाओं को दूर करते हुए CBI दिशा की मौत को एक दुर्घटना बताया है। इसके साथ ही एजेंसी ने यह भी कहा कि सुशांत सिंह की मौत और दिशा की मौत में कोई कनेक्शन नहीं है।

CBI ने दावा किया है कि दिशा की हत्या नहीं हुई थी। वह नशे की हालत में थी और संतुलन बिगड़ने के कारण 14वीं मंजिल से गिर गई थीं, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उनकी हत्या के कोई सबूत नहीं मिले हैं। यह सिर्फ एक दुर्घटना था।

बता दें कि 8 जून 2020 की रात को एक बिल्डिंग की 14वीं मंजिल से गिरने के कारण दिशा की मौत हो गई थी। दिशा की मौत के ठीक छह दिन बाद यानी 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत ने भी आत्महत्या कर ली थी। दिशा सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रह चुकी थीं। इसके बाद लोगों ने इन दोनों की मौत को एक साजिश बताते हुए CBI जाँच की माँग की थी।

यहाँ तक महाराष्ट्र से भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे और उनके बेटे नीतेश राणे ने भी दावा किया था कि दिशा सालियान और सुशांत सिंह की मौत में कनेक्शन है। दोनों ने दावा किया था कि दिशा की हत्या से पहले उनका रेप किया गया था। जब सुशांत सिंह राजपूत को इसकी जानकारी मिली और वे इसका खुलासा करने वाले थे, उससे पहले ही उनकी भी हत्या कर दी गई।

हालाँकि, CBI के हालिया खुलासे के बाद भी नारायण राणे ने अपनी बात पर टिके हुए हैं। उन्होंने बुधवार (23 नवंबर 2022) को ट्वीट कर कहा, “मैं दिशा मामले में CBI जाँच को दोष नहीं दे रहा। 72 दिन बाद इस मामला में CBI आई। 8 जून से MVA सरकार (उद्धव ठाकरे वाली सरकार) की मदद से ‘सफाई’ इतनी अच्छी तरह से की गई थी कि जब तक सीबीआई आई, तब तक कुछ भी बरामद नहीं किया जा सका। सब कवरअप के मास्टर!”

हालाँकि, CBI इस मामले में अपनी क्लोजर रिपोर्ट कब देगी, इसको लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं है। बता दें कि दिशा की मौत की जाँच के लिए CBI ने अलग से कोई केस दर्ज नहीं किया था। इसकी जाँच सुशांत सिंह की मौत की जाँच के साथ ही की जा रही थी। शुरुआत में इस मामले की जाँच मुंबई पुलिस कर रही थी।

नाम नहीं छापने की शर्त पर सीबीआई के एक अधिकारी ने ईटी को बताया, “जाँच में हमें पता चला कि दिशा ने 8 जून की रात अपने जन्मदिन के अवसर पर घर में पार्टी रखी थी। शायद अल्कोहल ज्यादा पी लेने की वजह से दिशा ने अपना बैलेंस खो दिया। इस कारण वो फ्लैट से नीचे गिर पड़ीं।”

एक अन्य अधिकारी ने बताया, “नारायण राणे इस आरोप के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि दिशा के साथ रेप किया गया था और मदद के लिए उसने सुशांत सिंह राजपूत को फोन किया था, और इसमें किसी तरह की राजनीतिक साजिश थी। मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की प्रकृति के कारण परिस्थितियों की जाँच करना आवश्यक था।”

बता दें कि 28 साल की दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं। उन्होंने कुछ समय के लिए सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी काम किया था। कहा जाता है कि 8 जून 2020 की आधी रात को वह मुंबई के मलाड स्थित गैलेक्सी रीजेंट बिल्डिंग की 14वीं मंजिल से गिर गई थीं। इसमें उनकी मौत हो गई थी। जिस समय यह हादसा हुआ था, उस समय वह बंटी सजदेह की मैनेजमेंट कंपनी ‘कॉर्नर स्टोन’ के लिए काम कर रही थीं।

‘रमेश कुमार बेकार भाषण देता रहता है, #@& की औलाद है @%&’: कॉन्ग्रेस विधायक को गरियाते पकड़े गए पूर्व CM कुमारस्वामी, वीडियो सामने आने पर माँगी माफी

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल सेक्युलर (JDS) के नेता एचडी कुमारस्वामी (Karnataka Ex-CM HD Kumaraswami) द्वारा कॉन्ग्रेस नेता केआर रमेश कुमार (KR Ramesh Kumar) को गाली देने का वीडियो वायरल हो गया है। हालाँकि, उन्होंने माफी माँग ली है।

दरअसल, कुमारस्वामी कोलार के श्रीनिवासपुरा विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। इस दौरान वो अपनी जबान पर लगाम नहीं रख पाए और गुस्से में श्रीनिवासपूरा से कॉन्ग्रेस विधायक और कर्नाटक विधानसभा के पूर्व स्पीकर केआर रमेश को गाली दे बैठे। उन्हें जैसे ही आभास हुआ कि पीछे माइक और सामने कैमरा लगा है तो वे एकदम से चुप हो गए। हालाँकि, उनका यह बयान कैमरे में कैद हो गया।

कुमारस्वामी के वीडियो को ट्विट करते हुए कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने लिखा, “नफरत के आधार पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, हम जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं, व्यवहार हमारे व्यक्तित्व का दर्पण हैं। कुमारस्वामी जी, आपके इस तरह के शब्दों के प्रयोग से न तो आपका गौरव बढ़ेगा और न ही यह राजनीति की गरिमा को बचाएगा। बड़ों ने दिखाया है कि राजनीति आपसी सम्मान से की जा सकती है।”

कुमारस्वामी श्रीनिवासपुरा के एक स्कूल का दौरा कर लौट रहे थे। कार में बैठते वक्त उन्होंने रमेश कुमार को गाली दी और कहा, “ये रमेश कुमार बेकार भाषण देता रहता है, …की औलाद है… इसके स्कूल की हालत कैसी है? यहाँ पर भी बच्चे पढ़ रहे हैं।”

बाद में कुमारस्वामी को अहसास हुआ कि उनका बयान गलत था। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया ट्विटर पर खेद जताया। उन्होंने लिखा, “मैंने पूर्व स्पीकर श्री रमेश कुमार के बारे में जो शब्द इस्तेमाल किया, उससे मुझे भी दुख हुआ। उस शब्द का प्रयोग मेरा व्यक्तित्व नहीं है। मुझे इसका खेद है। अगर इस शब्द से रमेश कुमार या अन्य लोगों को ठेस पहुँची है तो मैं उसे वापस लेता हूँ।”

उन्होंने ट्वीट में आगे कहा, “कल श्रीनिवासपुरा विधानसभा क्षेत्र के बंगवाड़ी गाँव में एक जीर्ण-शीर्ण स्कूल को देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। पिछले 2-3 साल से पीपल के पेड़ के नीचे बच्चों की कक्षाएँ आयोजित हो रही हैं। यह सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आ गया।”

उन्होंने कहा कि किसी का अपमान करने के लिए उन्होंने ऐसा नहीं किया। बच्चों के आँसू देखकर वे गुस्सा हो गए और भावनाओं में आकर उनके मुँह से ये शब्द निकल गए।

‘ज़िंदा है सद्दाम हुसैन, अमेरिका ने पूरी दुनिया को धोखा दिया’: राहुल गाँधी को देख लोगों को ‘शक’, आरोप – पैसे देकर लाए जा रहे बॉलीवुड सितारे

भाजपा के नेता और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) के कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) पर दिए गए बयान से बवाल हो गया है। सीएम सरमा ने चुनाव के दौर से गुजर रहे गुजरात के अहमदाबाद में कहा कि राहुल गाँधी आजकल इराक के मारे गए तानाशाह सद्दाम हुसैन (Saddam Hussain) की तरह दिख रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “अगर वे अपना लुक बदलना ही चाहते हैं तो वे सरदार वल्लभभाई पटेल या पंडित जवाहरलाल नेहरू को क्यों नहीं चुना? यहाँ तक कि गाँधी जी का लुक भी बेहतर रहता, लेकिन वे सद्दाम हुसैन की तरह क्यों दिखना चाहते हैं?ठ

राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर भी हिमंत बिस्वा सरमा ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के लिए बॉलीवुड स्टार को भुगतान किया होगा। बता दें कि अभिनेत्री पूजा भट्ट, रिया सेन, अभिनेता अमोल पालेकर सहित बॉलीवुड के कई सितारे राहुल गाँधी के साथ शामिल हो चुके हैं।

सीएम सरमा ने कहा, “वह गुजरात में लापता हैं। वह एक गेस्ट फैकल्टी की तरह राज्य में आते हैं। हिमाचल प्रदेश में भी उन्होंने चुनाव प्रचार नहीं किया। वे केवल उन्हीं जगहों का दौरा कर रहे हैं, जहाँ चुनाव नहीं हैं। शायद उन्हें हार का डर सता रहा है।”

सीएम सरमा के बयान के बाद कॉन्ग्रेस उन पर हमलावर हो गई है। राजस्थान कॉन्ग्रेस के नेता प्रताप सिंह खचरियावास (Pratap Singh Khachariyawas) ने कहा, “ये वही व्यक्ति हैं, जो कभी राहुल गाँधी का गुणगान करते थे। आज ये राहुल गाँधी को सद्दाम हुसैन से तुलना वाला शर्मनाक बयान दे रहे हैं। सरमा जैसे लोग अपराधी हैं और वे दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए। भाजपा को राहुल गाँधी से सीखना चाहिए। भारत उनके DNA में है और वे राष्ट्रीय झंडा को अपना धर्म मानते हैं।”

असम कॉन्ग्रेस के प्रमुख भूपेन कुमार बोरा ने कहा, “सरमा सिर्फ हेडलाइन में आना चाहते हैं और इसके लिए वे राहुल गाँधी का नाम ले रहे हैं। सरमा कुछ भी कह सकते हैं। उनके ऐसे बयान पर हम ध्यान नहीं देते।”

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेश पटेल (Bhupesh Patel) ने कहा, “ED और आयकर की जाँच के माध्यम से असम के मुख्यमंत्री को लगातार धमकाया जा रहा है और फिर जब भी उन्हें निर्देश दिया जाता है तो वे बोलना शुरू कर देते हैं। इसका कोई मतलब नहीं है।”

सीएम सरमा के इस बयान को लेकर कॉन्ग्रेस के राजनीतिक गलियारों में ही नहीं, सोशल मीडिया में भी बहस छिड़ गई है। वही, कुछ यूजर ने भी राहुल गाँधी की लुक को लेकर टिप्पणी की है। राकेश कदम नाम के यूजर ने लिखा, “सद्दाम हुसैन की तरह नहीं, लेकिन राहुल गाँधी एक बेघर व्यक्ति की तरह दिखते हैं।”

बाबामुरुगन नाम के एक यूजर ने लिखा, “पप्पू के रूप में जिंदा सद्दाम हुसैन हैं। अमेरिका ने पूरी दुनिया को धोखा दिया है।”

हालाँकि, सीएम सरमा के बयान की आलोचना करने वाले लोगों की भी एक लंबी फेहरिस्त है। उनका कहना है कि सद्दाम हुसैन एक निर्भीक आदमी थे, जो अपने देश और अपने लोगों के लिए लड़ते रहे और अमेरिका की साजिश के शिकार हो गए। उनका तर्क है कि इराक का भारत के साथ अच्छे संबंध थे।

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने वाला PFI नेता गिरफ्तार, वीडियो की फॉरेंसिक जाँच के बाद कार्रवाई: AltNews और मोहम्मद जुबैर ने दी थी क्लीन चिट

प्रतिबंधित इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूर्व जिलाध्यक्ष अब्दुल सलाम नाम के व्यक्ति को राजस्थान की भीलवाड़ा पुलिस ने एक रैली में पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस साल 15 मई को एक वीडियो वायरल होने के बाद मामला दर्ज किया गया था। वीडियो में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे सुने जा सकते हैं। प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने भी कथित तथ्यों की जाँच की बात कही थी और PFI नेता को क्लीन चिट दे दी थी।

सुभाष नगर थाना प्रभारी नंदलाल रिणवा ने बताया कि शिकायत के बाद वायरल वीडियो को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया था। जाँच में पाया गया कि पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए थे। इसके अलावा, यह पता चला कि रैली 7 फरवरी, 2021 को नाथूलाल राव के लिए आयोजित की गई थी, जिन्होंने PFI की राजनीतिक शाखा एसडीपीआई के टिकट पर वार्ड 57 से चुनाव जीता था।

रैली का नेतृत्व पीएफआई के पूर्व जिलाध्यक्ष अब्दुल सलाम अंसारी ने किया। रैली में शामिल लोग पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते साफ दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर पीएफआई नेता अब्दुल सलाम अंसारी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

थाना प्रभारी ने बताया कि 15 मई, 2022 को सांगानेर निवासी नेमीचंद पुत्र बाबूलाल खटीक ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद वीडियो को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा था। सोमवार ( 21 नवंबर, 2022) को आई फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक, रैली के दौरान पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए थे। रिणवा ने बताया कि अब्दुल सलाम को गिरफ्तार कर लिया गया है और रैली में मौजूद अन्य व्यक्तियों के विवरण की जाँच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

ऑल्ट न्यूज़’ और मोहम्मद ज़ुबैर ने PFI की उस रैली को क्लीन चिट दी थी

‘ऑल्ट न्यूज़’ और मोहम्मद ज़ुबैर ने PFI की उस रैली को क्लीन चिट दी थी जिसमें ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगे थे। शिकायत दर्ज होने और मामले के तूल पकड़ने के कुछ दिनों बाद, अति-वामपंथी प्रचार वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने PFI का बचाव करते हुए दावा किया कि रैली में कोई पाक-समर्थक नारे नहीं लगाए गए थे। उल्लेखनीय है कि ‘ऑल्ट न्यूज़’ इस्लामवादियों को बचाने के लिए प्रसिद्ध है।

इसने पीएफआई नेता अब्दुल सलाम को क्लीन चिट दे दी और दावा किया कि पाकिस्तान जिंदाबाद के नहीं ‘एसडीपीआई जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए थे। रिपोर्ट को यहाँ देखा जा सकता है।

ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट
ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट

‘ऑल्ट न्यूज़’ ने PFI नेता अब्दुल सलाम के बयान का भी उल्लेख किया था, जिसे अब रैली आयोजित करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने अब्दुल सलाम अंसारी के हवाले से बताया था, “वायरल वीडियो स्थानीय चुनाव के बाद 7 फरवरी, 2021 का है। एसडीपीआई के नाथूलाल राव के वार्ड 57 में जीतने के बाद वीडियो में रैली का एक हिस्सा दिखाया गया है। यह दावा कि पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए गए थे, झूठा है।”

ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट

रिपोर्ट के अंत में, ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने कहा, “वीडियो में पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने का दावा झूठा है।” उन्होंने दावा करते हुए कहा था कि नारा ‘एसडीपीआई जिंदाबाद’ का लगाया गया है न कि ‘पाकिस्तान जिंदाबाद का। प्रचार पोर्टल के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगे भड़काने के लिए कई मामलों में FIR दर्ज किया गया है। जुबैर भी मई 2022 में अंसारी के समर्थन में उतर आए और ट्वीट कर रैली का बचाव किया।

मोहम्मद जुबैर का ट्वीट

‘ऑल्ट न्यूज़’ ने न केवल अपने पाठकों को यह विश्वास करने के लिए गुमराह किया कि पीएफआई की रैली में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों ने ‘एसडीपीआई जिंदाबाद’ के नारे लगाए, बल्कि इस बात पर जोर दिया कि यह वीडियो फरवरी 2021 का है न कि मई 2022 का। ऑल्ट न्यूज मानो यह कहना चाह रहा था कि फरवरी 2021 में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाना स्वीकार्य था और दंडनीय नहीं था।

ऐसा लगता है कि ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने वायरल वीडियो के साथ किए गए दावों को झूठा साबित करने के लिए कुटिल अभ्यास में महारत हासिल कर ली है। प्रदर्शनकारियों ने रैली में ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाए, लेकिन ज़ुबैर और ऑल्ट न्यूज़ ने इस बात पर जोर दिया कि वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और प्रदर्शनकारी पीएफआई के समर्थन में नारे लगा रहे थे।

बच्ची से बलात्कार आरोपित से मसाज, जेल में बाहर का शानदार भोजन भी… मीडिया को वीडियो चलाने से रोकने के लिए कोर्ट पहुँचे AAP के मंत्री सत्येंद्र जैन

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) के तिहाड़ जेल में मसाज करवाते और कई तरह का भोजन करते हुए दो वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो को लेकर सत्येंद्र जैन ने दिल्ली की अदालत में एक याचिका दायर की है। इस संबंध में अदालत ने तिहाड़ जेल प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है। जैन ने अपनी याचिका में मीडिया घरानों को तिहाड़ जेल के सीसीटीवी फुटेज को चलाने से रोकने की माँग की है। कोर्ट इस मामले की सुनवाई गुरुवार (24 नवंबर, 2022) को करेगा।

दरअसल, पिछले दिनों तिहाड़ जेल में बंद AAP नेता सत्येंद्र जैन का मालिश कराते हुए ए​क वीडियो सामने आया था। AAP ने इस मामले पर अपनी सफाई दी थी। उन्होंने इसे सत्येंद्र जैन की बीमारी बताते हुए फिजियोथेरेपी बताया था। AAP के इस फिजियोथेरेपी वाले दावे को तिहाड़ जेल प्रशासन और भारतीय फिजियोथेरेपी एसोशिएशन ने सामूहिक रूप से नकार दिया था।

इसके बाद मसाज वीडियो मामले में बड़ा खुलासा हुआ था। वायरल वीडियो में सत्येंद्र जैन को जिस शख्स से जेल में मसाज कराते हुए देखा गया था, वह नाबालिग से रेप का आरोपित बताया गया था। तिहाड़ जेल के अधिकारिक सूत्रों का हवाला देते हुए समाचार एजेंसी ने बताया था कि सत्येंद्र जैन की मालिश करने वाले कैदी का नाम रिंकू है। वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं है। रिंकू एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में जेल में बंद है। उस पर पॉक्सो (POCSO) की धारा 6 और IPC की धारा 376, 506 और 509 के तहत केस दर्ज है।

इसके बाद बुधवार (23 नवंबर, 2022) को मनी लॉन्ड्रिंग (Money laundering) मामले में जेल में बंद जैन का एक और वीडियो सामने आया। इसमें जैन को अपने बैरक में कई प्रकार का भोजन और फल खाते हुए देखा गया। कहा जा रहा है कि जेल में उनका वजन 8 किलो बढ़ गया है। हालाँकि उनके वकीलों ने वजन 28 किलो कम होने का दावा किया है। इससे पहले AAP नेता ने ‘धार्मिक आहार’ के लिए सीबीआई कोर्ट में अर्जी लगाई थी। इसमें उन्होंने ड्राई फ्रूट्स और सलाद मुहैया कराने की माँग की थी।

अंजलि ने शादीशुदा अब्दुल से निकाह किया, शौहर के परिवार वालों ने ही पीठ में मार दी गोली

राजस्थान के जयपुर में अंजलि नाम की एक महिला को दिन-दहाड़े गोली मार दी गई है। मामला मुरलीपुरा इलाके का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाइक सवार दो लोगों ने अंजलि नाम की महिला को गोली मार दी। गोली अंजलि के पीठ में लगी, जिसके बाद वह सड़क पर गिर गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुँची। घायल अवस्था में अंजलि को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

अंजलि से खुश नहीं थे लतीफ के परिवार वाले, अब्दुल ने की थी दूसरी शादी

महिला के पति अब्दुल लतीफ ने पुलिस को बताया कि पिछले साल उसने अंजलि से प्रेम विवाह किया था। उसके परिवार के सदस्य इस विवाह से खुश नहीं थे। परिवार के लोग अब्दुल पर अंजलि को छोड़ने का दबाव बना रहे थे। अब्दुल के परिवार के लोग दोनों को परेशान कर रहे थे। इसे लेकर सदर थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब्दुल ने अंजलि पर गोली चलाने के पीछे उसके बड़े भाई अजीज और उसके दोस्तों का हाथ बताया है।

दरअसल, अब्दुल लतीफ ने इससे पहले एक मुस्लिम महिला से शादी की थी। विवाद के बाद उसकी पहली शादी टूट गई थी। इसके बाद लतीफ ने अंजलि से शादी की, जिससे उसके परिवार के लोग नाराज़ थे। इसलिए वे मुरलीपुरा इलाके में किराए का मकान लेकर अलग रहने लगे। अब्दुल ने बताया कि शादी के बाद से ही अंजलि को अपनी हत्या का डर था।

जानकारी मिली है कि अंजलि पास के ही एक आर्युवेदिक दुकान पर काम करती है। बुधवार (23 नवंबर, 2022) की सुबह लगभग 10 बजे वह काम पर जाने के लिए घर से निकली थी। घर से डेढ़ किलोमीटर दूर सुबह करीब 10.29 बजे उस पर हमला किया गया।

पुलिस ने 2 संदिग्धों को पकड़ा

पुलिस को शक है कि अंजलि पर देसी कट्टे से हमला किया गया है। मौके से पुलिस को देसी कट्टे का एक खोल मिला है। पुलिस ने आसपास लगे हुए सीसीटीवी कैमरे खंगालने शुरू कर दिए हैं। पीड़ित और उसके पति के बयानों के आधार पर पुलिस ने कुछ संदिग्धों को पकड़ा है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।