कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने ‘भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra)’ के दौरान महाराष्ट्र में विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) पर देश के साथ धोखा देने का आरोप लगाया था। अब सावरकर के पोते ने राहुल गाँधी के नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सावरकर के पोते रंजीत सावरकर (Ranjit Savarkar) ने राहुल गाँधी के आरोपों का खंढन करते हुए कहा कि पंडित नेहरू एक ‘महिला’ के कहने के कारण देश का विभाजन करने पर सहमत हुए थे। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 12 वर्षों तक पंडित नेहरू ने देश की गुप्त जानकारियाँ अंग्रेजों के साथ साझा की थी। रंजीत सावरकर ने इस पर राहुल गाँधी से जवाब माँगा है।
बता दें महाराष्ट्र के वाशिम में राहुल गाँधी ने सावरकर पर देश से गद्दारी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सावरकर अंग्रेजों को पत्र लिखकर उनका नौकर बने रहने के लिए कहा था और आजीवन पेंशन लेते रहे थे। इस दौरान उन्होंने सावरकर का एक पत्र भी मंच से लोगों को दिखाया था।
रंजीत सावरकर ने शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एंडविना और पंडित नेहरू के बीच हुए पत्रचारों को अंग्रेजों से वापस माँगा जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा, “इससे पता चलेगा कि जिसे देश चाचा नेहरू कहता है, उसने देश के साथ कैसे धोखा किया।”
स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए रंजीत सावरकर ने कहा कि पंडित नेहरू 9 मई से 12 मई 1947 के बीच अकेले हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला गए थे वे वहाँ चार दिनों तक रहे। रंजीत ने आगे कहा, “उस दौरान एडविना के ब्रिटिश सरकार को लिखे पत्रों में कहा गया था कि मैंने पंडित नेहरू को अपना अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।”
व्यक्तिगत संबंधों को लेकर एडविना के पत्र में उल्लेखित बातों का जिक्र करते हुए रंजीत सावरकर ने कहा, पंडित नेहरू बहुत व्यस्त हैं। इसलिए वे ‘नर्वस ब्रेकडाउन’ के करीब पहुँच रहे हैं। उन्होंने मेरे साथ चार दिन बिताए। हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए हैं और यह दोस्ती लंबे समय तक चलेगी।” रंजीत सावरकर ने यह कहा कि एडविना ने अपने पत्र में लिखा था कि ‘पंडित नेहरू मेरे काबू में आ गए हैं’।
रंजीत यहीं नहीं रूके। उन्होंने कि पंडित नेहरू ने देश की सुरक्षा को दरकिनार कर लॉर्ड माउंटबेटन को वायसराय नियुक्त किया था। उन्होंने कहा, “बलवंत सिंह ने कहा था कि माउंटबेटन वायसराय होने के कारण पाकिस्तान में सेना नहीं भेज सकते। 20,000 लड़कियों का अपहरण कर पाकिस्तान ले जाया गया। नरसंहार को देखकर भारतीय नेताओं को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें, इसलिए मैंने पूर्ण नियंत्रण ले लिया।”
माउंटबेटन का हवाला देते हुए रंजीत ने कहा, “वायसराय ने लिखा था कि उनके भारत छोड़ने के बाद पंडित नेहरू ने उन्हें 12 वर्षों तक हर दिन अपनी रिपोर्ट भेजी थी।” रंजीत सावरकर ने कहा कि यह खुफिया एजेंसियों की बड़ी नाकामी है। उन्होंने कहा कि नेहरू को हनीट्रैप में फँसाया गया था और वे फँस गए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसकी जाँच की माँग करते हुए रंजीत ने कहा कि पीएम को इस पूरे मामले की जाँच कराना चाहिए। इसके पहले भी कई लोग हनीट्रैप में पकड़े जा चुके हैं और उन्हें सजा भी दी जा चुकी है, लेकिन नेहरू की बता कौन करे। उन्होंने इस हनीट्रैप पर राहुल गाँधी से जवाब माँगा।
NDTV के न्यूज एंकर रवीश कुमार (Ravish Kumar) पर एक डॉक्यूमेंट्री बनी है। ‘व्हाइल वी वाच्ड (While We Watched)’ नाम की यह डॉक्यूमेंट्री बनते के साथ विवादों से घिर गई। विवादास्पद फोर्ड फाउंडेशन और जॉर्ज सोरोस ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के साथ संबंधों को लेकर। सबसे पहले इसका खुलासा डिजिटल मीडिया स्टार्टअप द पैम्फलेट ने किया है।
विनय शुक्ला के डायरेक्शन में बनी ‘व्हाइल वी वाच्ड (While We Watched)’ नाम की यह डॉक्यूमेंट्री NDTV के न्यूज एंकर रवीश कुमार (Ravish Kumar) पर बनी है। इससे पहले, विनय शुक्ला साल 2016 में आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक करियर पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘एन इंसिग्निफिकेंट मैन’ में को-डायरेक्टर की भूमिका में थे।
‘व्हाइल वी वाच्ड’ की वेबसाइट पर एक नजर देखें तो पता चलता है कि फिल्म को ‘ब्रिट डॉक फिल्म्स’ द्वारा फंडिंग की गई है, जिसका नाम बदलकर अब ‘डॉक सोसाइटी’ कर दिया गया है।
‘व्हाइल वी वाच्ड’ वेबसाइट का स्क्रीनशॉट
रवीश कुमार पर जो डॉक्यूमेंट्री बनी है, उसके स्क्रिप्ट का सार कुछ ऐसा कह कर बेचा जा रहा: “उथल-पुथल से भरा न्यूजरूम ड्रामा, जहाँ पत्रकार रवीश कुमार सच के लिए हर दिन फर्जी खबरों से लड़ते हैं। वो भी ऐसे समय में जहाँ तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पूरे विश्व से गायब हो रही। ‘While We Watched’ को देखिए और इस रसातल को समझिए।”
‘डॉक सोसाइटी’ की वेबसाइट की जाँच करने के दौरान ऑपइंडिया ने पाया कि विवादास्पद अमेरिकी फाउंडेशन, फोर्ड को गैर-लाभकारी संगठन के प्रमुख पार्टनर के रूप में दिखाया गया है। गौरतलब है कि ऑनलाइन पोर्टल द पैम्फलेट ने पहले भी इन लिंक्स का खुलासा किया था।
‘डॉक सोसाइटी’ वेबसाइट का स्क्रीनशॉट
इस साइट में फोर्ड फाउंडेशन की ‘जस्टफिल्म्स इनिसिएटिव’ के पूर्व डायरेक्टर कारा मर्ट्स का एक कोट भी शामिल है, जिसमें उन्होंने डॉक सोसाइटी की तारीफ की है। कारा मर्ट्स का वह कोट “सहयोग, नवाचार और तेजी से प्रोटोटाइप में विशेषज्ञ” है।
नीचे स्क्रॉल करने पर, ऑपइंडिया वेबसाइट के एक ऐसे हिस्से पर पहुँचा, जहाँ फोर्ड फाउंडेशन को फिर से प्रमुख पार्टनर के रूप में दिखाया गया है। ‘डॉक सोसाइटी’ के एक मैसेज में कहा गया है, “हम केवल वही कर सकते हैं जो हम उन संगठनों और व्यक्तियों की वजह से कर सकते हैं, जो हमारे काम को फंडिंग करते हैं।”
फोर्ड फाउंडेशन को डॉक सोसायटी के पार्टनर के रूप में दिखाया गया
भारत विरोधी गतिविधियाँ और फोर्ड फाउंडेशन
साल 2015 में, गुजरात सरकार ने तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा किए गए घोटाले की जाँच करते हुए पाया था कि फोर्ड फाउंडेशन द्वारा उसकी संस्थाओं को फंडिंग की गई थी। साथ ही यह भी सामने आया था कि तीस्ता की संस्था ने एफआरसीए के नियमों का उल्लंघन किया। दरअसल, तीस्ता सीतलवाड़ की संस्था ‘सबरंग कम्युनिकेशन एंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड’ को “मीडिया रणनीतियों सहित भारत में सांप्रदायिकता, जाति-आधारित भेदभाव को बढ़ावा देने के लिए” फोर्ड फाउंडेशन से 2.9 लाख डॉलर की बड़ी राशि मिली थी।
इस फंडिंग की जानकारी सामने आने के बाद गुजरात पुलिस द्वारा एक पत्र जारी किया गया था, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने भी फोर्ड फाउंडेशन की गतिविधियों की जाँच करने की बात कही थी। जिसके बाद, विकीलीक्स ने भी इस बारे में खुलासे किए थे।
फोर्ड फाउंडेशन ने दावा किया था कि वह तीस्ता सीतलवाड़ के सबरंग ट्रस्टों को फंड देने के विवाद में फँस गया था। 26 मई, 2015 को फोर्ड फाउंडेशन इन इंडिया: नोट्स टू जॉन पोडेस्टा नामक टाइटल वाले लेटर में सरकार की कार्रवाई के संभावित कारणों में अरविंद केजरीवाल (राजनीति में आने से पहले) के एनजीओ को की गई फंडिंग को भी बताया गया था।
इस बात की पुष्टि किसी और ने नहीं बल्कि भारतीय वामपंथियों की प्रमुख ‘सेलीब्रिटी’ अरुंधति रॉय ने की थी। सागरिका घोष के साथ एक इंटरव्यू में, अरुंधति रॉय ने उस लेख के बारे में बात की थी जो उन्होंने द हिंदू के लिए लिखा था। इस लेख में अरुंधति ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल और सिसोदिया के गैर सरकारी संगठनों ने तीन वर्षों में फोर्ड फाउंडेशन से $400,000 (अभी की कीमत 3 करोड़ 26 लाख रुपए लगभग) से अधिक प्राप्त किए थे।
अरुंधति रॉय ने यह भी दावा किया था कि आंदोलन के शीर्ष मैनेजमेंट वाले दस लोगों के समूह के पास अच्छी तरह से फंडिंग वाले एनजीओ थे। अरुंधति ने कहा था कि टीम के तीन मुख्य सदस्यों ने मैग्सेसे पुरस्कार जीता था, जिसे फोर्ड फाउंडेशन द्वारा फंडिंग की जाती है।
यह सुनने में दिलचस्प लग सकता है कि NDTV के एंकर रवीश कुमार को भी संयोग से साल 2019 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला। पिछले साल, क्रिस्टोफर ब्रुनेट द्वारा उनके सबस्टैक ‘कार्लस्टैक’ पर कोट किए गए व्हिसल-ब्लोअर ईमेल से पता चलता है कि फोर्ड फाउंडेशन असहिष्णु और कट्टर वामपंथी चरमपंथियों का गढ़ है।
डॉक सोसाइटी और जॉर्ज सोरोस का जुड़ाव
डॉक सोसाइटी के कई दर्जन ‘समर्थक’ हैं। लेकिन अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन इस कथित ‘गैर-लाभकारी कंपनी’ डॉक सोसाइटी को फंडिंग करने वाले प्रमुख संगठनों में से एक है। खासतौर से जॉर्ज सोरोस मीडिया और ‘सिविल सोसायटी’ का उपयोग करके एक खतरनाक भारत विरोधी नैरेटिव को हवा दे रहा है।
उल्लेखनीय है कि जॉर्ज सोरोस ‘राष्ट्रवादियों’ और रूढ़िवादी सरकारों से लड़ाई के बारे में कहता रहा है। जिसे वह अक्सर ‘सत्तावादी’ सरकारों के रूप में भी संबोधित करता है। बीते वर्षों में यह सामने आया है कि जॉर्ज सोरोस को अगर किसी चीज से सबसे अधिक नफरत रही है, तो वह है भारत और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी सरकार।
ओपन सोसायटी फाउंडेशन को ‘डॉक सोसायटी’ के समर्थक के रूप में दिखाया गया
साल 2008 में, सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड (SEDF) ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए अपने 17 मिलियन के फंड को लॉन्च करने के लिए ओमिडयार नेटवर्क, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) और Google.org के साथ हाथ मिलाया था। इसके बाद, सोरोस ने अन्य नेटवर्कों के साथ मिलकर, पॉलिटिकल नैरेटिव में हेरफेर करने के लिए मीडिया संस्थानों को बड़े पैमाने पर फंडिंग की। फिलहाल, MDIF साइट पर लिस्टेड वामपंथी वेबसाइट स्क्रॉल और ग्राम वाणी नामक एक अन्य वेबसाइट है।
मीडिया को फंडिंग के अलावा, ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन वामपंथी झुकाव वाले ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवियों का भी हितैषी रहा है, जिन्होंने मौजूदा सरकार के खिलाफ लगातार फर्जी बयानबाजी की है। जॉर्ज सोरोस के साथ जुड़ाव वाले कई बड़े नाम भी हैं, लेकिन इस बात की बहुत कम संभावना है कि ये कनेक्शन किसी को भी आश्चर्यचकित करेंगे। उनमें से कुछ सबसे प्रमुख हर्ष मंदर, प्रताप भानु मेहता, इंदिरा जयसिंह और अमर्त्य सेन हैं।
ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन ने ‘पत्रकार’ राणा अय्यूब जैसे लोगों के ट्वीट का भी समर्थन किया है। जॉर्ज सोरोस द्वारा फंड प्राप्त सोसाइटी ने अब एनडीटीवी न्यूज एंकर रवीश कुमार पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘व्हाइल वी वाच्ड (While We Watched)’ को भी फंडिंग की है।
भारतीय मीडिया के स्व-घोषित मसीहा रवीश कुमार फिलहाल अमेरिका में हैं, जहाँ वह निर्देशक विनय शुक्ला के साथ फिल्म ‘व्हाइल वी वाच्ड (While We Watched)’ का प्रचार कर रहे हैं। फिल्म ने अब तक 4 पुरस्कार जीते हैं, जिसमें टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘एम्पलीफाई वॉयस अवार्ड’ भी शामिल है।
कथित तौर पर, फिल्म को दर्शकों से स्टैंडिंग ओवेशन मिला है और डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के दौरान और बाद में रवीश कुमार को उनके प्रशंसकों द्वारा बधाई दी गई है। कुल मिलाकर, फोर्ड फाउंडेशन और जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन ने अपने धन का सदुपयोग (अपने एजेंडे के लिए) किया है।
आमिर खान की बेटी इरा खान (Ira khan) जल्द ही शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं। उन्होंने शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को मुंबई में अपने बॉयफ्रेंड नूपुर शिखरे (Nupur Shikhare) से सगाई की। इरा और नूपुर लंबे समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। इंगेजमेंट सेरेमनी (Ira Khan engaged to Nupur Shikhare) में आमिर खान के पारिवारिक सदस्यों के अलावा दोनों एक्स वाइफ भी मौजूद रहीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आमिर खान की बेटी इरा खान और नूपुर शिखरे की दोस्ती 2020 में हुई थी। नूपुर एक जिम ट्रेनर हैं। उन्होंने आमिर खान समेत कई बॉलीवुड स्टार्स को ट्रेन किया है। कोविड-19 के कारण देश भर में लगाए गए लॉक डाउन के दौरान नूपुर इरा को फिटनेस ट्रेनिंग दे रहे थे। इसी दौरान, दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए।
इसी साल सितंबर में एक कार्यक्रम के दौरान नूपुर ने इरा को शादी के लिए प्रपोज किया था, तब इरा ने भी हाँ कर दी थी। इरा खान ने इसका वीडियो भी इंस्टाग्राम पर शेयर किया था।
इरा खान और नूपुर शिखरे की सगाई के वीडियो और फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फोटोज में, इरा खान लाल गाउन में वहीं नूपुर ब्लैक टक्सीडो में नजर आए। आमिर खान सफेद कुर्ते में दिखाई दिए। इंगेजमेंट सेरेमनी में आमिर खान की दोनों एक्स वाइफ रीना दत्ता और किरण राव भी मौजूद रहीं। साथ ही, इरा का भाई जुनैद, किरण राव का बेटा आजाद राव खान, आमिर की बहन निखत और फरहत तथा भाँजे इमरान खान समेत कई स्टार्स मौजूद रहे।
इरा खान और नूपुर शिखरे की सगाई (Ira Khan engaged to Nupur Shikhare) में एक्ट्रेस फातिमा सना शेख भी नजर आईं, उन्होंने हर किसी का ध्यान आकर्षित किया। दरअसल, जब आमिर खान का अपनी दूसरी पत्नी किरण राव के साथ तलाक हुआ था, तब आमिर खान का नाम फातिमा सना शेख के साथ जोड़ा जा रहा था। सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा था कि फातिमा के साथ अफेयर के कारण आमिर और किरण राव का तलाक हुआ है।
इरा खान की सगाई जिस नूपुर शिखरे से हुई है, वह हिंदू हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी मुस्लिम लोग मजहब की दुहाई देने के साथ-साथ माँ-बहन वाली गंदी-गंदी गालियाँ भी देते दिखाई दे रहे हैं।
@AKofficialTeam मुबारक हों सुना था आज देख भी लिया की नाचने गाने वालो का कोई धर्म नही होता हज फर्ज़ हैं. इसका मतलब ये नही की आपसे हिसाब किताब नहीं होगा ? अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के घर मे इंडस्ट्रीज तो नहीं हैं लेकिन तुम्हारे कर्मो की सीसी टीवी जरूर होगी ?✖️❌
हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी के सांसद अरविंद धर्मपुरी के घर पर शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (TRS) जो अब भारत राष्ट्र समिति (BRS) बन चुकी है, के समर्थकों ने लाठी-डंडे से हमला कर दिया। आरोप है कि बीआरएस समर्थकों ने भाजपा सांसद के घर में घुस कर उत्पात मचाया। न्यूज एजेंसी एएनआई ने हमले का एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें बीआरएस का झंडा लेकर कुछ लोग अरविंद धर्मपुरी के घर पर हंगामा करते नजर आ रहे हैं।
#WATCH | Telangana: BJP MP Arvind Dharmapuri’s residence in Hyderabad attacked and vandalised allegedly by TRS supporters. Details awaited. pic.twitter.com/MYokgY6HGr
वीडियो में देखा जा सकता है कि एक पुलिसकर्मी हंगामा कर रहे लोगों को रोकने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बीआरएस समर्थक पुलिस की मौजूदगी में अपना उत्पात जारी रखते हैं। बीजेपी सांसद अरविंद ने दावा किया है कि घर की खिड़कियों, गाड़ियों और दूसरे सामान के साथ-साथ भगवान की मूर्तियों को भी निशाना बनाया गया है। वीडियो में नजर आ रहे लोग जय तेलंगाना के नारे लगाते सुने जा रहे हैं। भीड़ में शामिल कुछ लोग सांसद के घर पर पत्थर फेंकते हुए भी नजर आ रहे हैं।
केसीआर की बेटी ने करवाया हमला?
न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए अपने बयान में भाजपा सांसद अरविंद धर्मपुरी ने हमले का आरोप बीआरएस की एमएलसी और केसीआर की बेटी कल्वाकुंतला कविता पर लगाया है। उन्होंने कहा कि कल्वाकुंतला कविता के कहने पर ही टीआरएस (अब बीआरएस) के गुंडों ने उनके आवास पर हमला किया।
के. कविता ने घमंड में आकर TRS के गुंडों को मेरे आवास पर भेजा और हंगामा किया। उन्होंने मेरी 70 साल की मां के सामने फर्नीचर, भगवान की मूर्तियों और कारों को नुकसान पहुंचाया: हैदराबाद स्थित अपने आवास पर कथित तौर पर TRS समर्थकों द्वारा तोड़फोड़ करने पर भाजपा सांसद अरविंद धर्मपुरी pic.twitter.com/RTkSUSbDFU
मीडिया रिपोर्टस की मानें तो इस हमले के पीछे की वजह बीजेपी सांसद धर्मपुरी के कविता को लेकर किए गए एक दावे को माना जा रहा है। धर्मपुरी ने दावा किया था कि सीएम केसीआर की बेटी कविता ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से संपर्क किया था और पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई थी।
बीजेपी सांसद धर्मपुरी ने यह भी दावा कि था कि कविता अपने मुख्यमंत्री पिता केसीआर से नाराज चल रही हैं। इसलिए अब कविता ने टीआरएस छोड़ने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा सांसद धर्मपुरी के इस बयान के बाद कल्वाकुंतला कविता भड़क गई थीं। इतना ही नहीं एमएलसी कविता ने भाजपा सांसद अरविंद धर्मपुरी को निजामाबाद के चौराहे पर चप्पल से मारने की धमकी भी दी थी।
Strongly condemn attack by TRS goons on Nizamabad MP Shri @Arvindharmapuri garu’s residence. Spoke to him over phone, more power to BJP MP. TRS lacks guts to face us democratically & so is engaging in physical attacks and bullying. Don’t assume BJP’s patience as our incompetence. pic.twitter.com/VfO6IunXSb
हमले को लेकर भाजपा नेताओं ने रोष प्रकट किया है। तेलंगाना बीजेपी प्रमुख बंडी संजय कुमार ने हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि टीआरएस में लोकतांत्रिक रूप से बीजेपी का सामना करने की हिम्मत नहीं है, इसलिए इस तरह के हमलों का सहारा लिया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के एक ड्राइवर को नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू भवन से जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वह पैसों के बदले पाकिस्तान को गुप्त सूचनाएँ और दस्तावेज मुहैया कराता था। बताया गया है कि वह जिस व्यक्ति को जानकारी देता था, वह पूनम शर्मा या पूजा के रूप में उसे बेवकूफ बना रहा था। ANI के अनुसार, इसके पीछे पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई (ISI) का हाथ है।
Delhi Police with the help of security agencies arrested a driver working in Ministry of External Affairs (MEA) for passing confidential and sensitive information to Pakistan. The driver was honey-trapped by Pakistan ISI: Sources pic.twitter.com/VuVAwltppO
ड्राइवर को गिरफ्तार करने वाले दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने बताया कि ड्राइवर हनीट्रैप (Honeytrap) के मामले में फँसा हुआ था। ड्राइवर पैसे के एवज में पाकिस्तान के एक अधिकारी को सूचना या दस्तावेज भेज रहा था।
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय में तैनात आरोपित ड्राइवर का नाम श्रीकृष्ण बताया जा रहा है। उसके पास एक लड़की की तस्वीर और वीडियो बरामद हुई है। पाकिस्तानी जासूस ने विदेश मंत्रालय के ड्राइवर को फँसाने के लिए फर्जी आईडी दिखाई थी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक वह पूनम शर्मा नाम की जिस महिला के संपर्क में था, उसने ड्राइवर को बताया था कि वह कोलकाता में रहती है। अब पुलिस और ख़ुफ़िया अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विदेश मंत्रालय में काम करने वाले अन्य कर्मचारी कहीं इस मामले में शामिल तो नहीं हैं।
इससे पहले अगस्त 2022 में 46 वर्षीय एक व्यक्ति को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में राजस्थान पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उस शख्स को 2016 में भारतीय नागरिकता मिली थी। भागचंद नाम के जासूस का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वह 1998 में अपने परिवार के साथ दिल्ली आया था। जासूस ने 2016 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की और दिल्ली में एक टैक्सी चालक और मजदूर के रूप में काम करना शुरू किया। भागचंद पाकिस्तान में अपने रिश्तेदारों के जरिए अपने आकाओं के संपर्क में था।
श्रद्धा मर्डर केस (Shraddha Walker Murder) में एक और जानकारी सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) ने नवंबर 2020 में श्रद्धा वाकर को मौत के घाट उतारने की कोशिश की थी। उसे बहुत पीटा था। इस बात का खुलासा श्रद्धा के दोस्त गॉडविन ने किया है।
गॉडविन ने इंडिया टुडे को बताया कि आफताब उसकी दोस्त के साथ दरिंदों जैसा व्यवहार करता था। उन्होंने आफताब के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन वह उसे बार-बार फोन करता रहता, धमकी देता कि अगर वह उसके पास वापस नहीं आई, तो वह अपनी जान दे देगा। आफताब के आत्महत्या की धमकी देने के बाद श्रद्धा उसके पास वापस चली गई।
2020 में श्रद्धा वाकर का इलाज करने वाले एक डॉक्टर ने भी खुलासा किया है कि आफताब अमीन पूनावाला उस वक्त अस्पताल में मौजूद था, जब श्रद्धा को कंधे और पीठ में तेज दर्द के लिए भर्ती कराया गया था। नालासोपारा के ओजोन मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में दो साल पहले श्रद्धा का इलाज करने वाले डॉ एसपी शिंदे ने कहा कि श्रद्धा को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी, लेकिन उसने कंधे और पीठ में तेज दर्द की शिकायत की थी।
ओजोन मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में श्रद्धा वाकर ने हालाँकि इसका खुलासा नहीं किया था कि उसे ये दर्द किस वजह से हो रहा था। जब वह अस्पताल में भर्ती थी, उस वक्त श्रद्धा के परिवार का कोई भी सदस्य वहाँ मौजूद नहीं था। वहाँ केवल आफताब दिखाई दे रहा था।
‘मदद के लिए हमारे पास आई थी श्रद्धा’
श्रद्धा वाकर के दोस्तों द्वारा किए गए खुलासे के मुताबिक, श्रद्धा और आफताब 2018 से रिलेशनशिप में थे, लेकिन श्रद्धा ने आफताब के बारे में अपने दोस्तों को 2019 में बताया था। श्रद्धा के एक और दोस्त राहुल राय ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया:
“2020 में जब वह हेल्प के लिए हमारे पास पहुँची और कहा कि आफताब ने उसके साथ मारपीट की, तो हम सभी ने एफआईआर दर्ज कराने में उसकी (श्रद्धा) मदद की। पुलिस अधिकारी ने जब पूछताछ के लिए आफताब को हिरासत में लेने को कहा, तो उसने कहा कि रिलेशनशिप में ऐसी चीजें होती रहती हैं।”
In 2020 we all helped her in filing FIR after she reached out to us for help saying Aftab beats her…we took her home. The police officer suggested detaining Aftab for interrogation but she said such things happen in a relationship: Rahul Rai, Shraddha’s Friend pic.twitter.com/VVdfWUF0t2
राहुल राय के अनुसार, “अगले दिन पुलिस ने उसे (श्रद्धा) थाने बुलाया, जहाँ उसने कहा कि वह आफताब से बहुत डरती है। वह उसे मार डालेगा। क्योंकि वह इससे पहले भी उसे जान से मारने की कोशिश कर चुका है और उसे कई बार बुरी तरह पीटा है। आफताब ने उसे घर में बंद कर दिया था। उसका एक और अफेयर चल रहा था। वह दूसरी और लड़कियों से भी बात करता था। उसने कहा था कि आफताब ड्रग्स लेता है।”
When again we tried to reach out to her she said don’t worry, such things happen, later we never came in contact: Rahul Rai
राहुल ने आगे बताया कि जब उन्होंने फिर से श्रद्धा से संपर्क करने की कोशिश की तो उसने कहा कि चिंता मत करो। ऐसी चीजें होती रहती हैं। इसके बाद वे कभी संपर्क में नहीं आए।
‘सिगरेट से श्रद्धा को जला देता था’
बता दें कि 26 वर्षीय श्रद्धा की उसके लिव-इन पार्टनर आफताब ने 18 मई 2022 को दिल्ली के छतरपुर स्थित अपने फ्लैट में हत्या कर दी थी। श्रद्धा के पिता के गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के छह महीने बाद इस हत्याकांड का खुलासा हो पाया है। दिल्ली पुलिस इस मामले की जाँच जुटी हुई है। वहीं, हत्या आरोपित आफताब रोज एक नई कहानी सुनाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
श्रद्धा के दोस्त रजत शुक्ला ने दावा किया है कि जब वह मुंबई में थी, तब भी आफताब उससे मारपीट करता था। जलते हुए सिगरेट से श्रद्धा को जला देता था। जले हुए निशान को श्रद्धा ने अपने दोस्तों को भी दिखाया था। उस वक्त उसके सभी दोस्त पुलिस में जाना चाहते थे। लेकिन श्रद्धा आफताब को सुधरने का मौका देना चाहती थी।
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जहन्नुम के डर से इस्लाम कबूल करने वाले हिंदू युवक अक्षय गौर ने घर वापसी कर ली है। बताया जा रहा है कि दोस्तों, हिंदूवादी संगठन के आशोक पालीवाल और अन्य कार्यकर्ताओं ने उसे समझाया। उन्होंने मंदिर में पूजा-पाठ कर उसका शुद्धीकरण किया। इसके बाद गंगाजल पिलाकर उसकी घर वापसी करवाई।
गुरुवार (17 नवंबर 2022) को अक्षय के पिता गोविंद गौर ने नूरानी मस्जिद के आलिम अमीनुद्दीन कादरी के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया है कि आलिम ने उनके बेटे इंजीनियर अक्षय गौर को हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काया और उसका ब्रेनवॉश किया। उसे नौकरी दिलाने का लालच दिया, धमकाया। फिर मस्जिद में कलमा पढ़वाकर उसका धर्म परिवर्तन कर दिया। इसके बाद आलिम ने अक्षय का नाम मोहम्मद फहीम खान रख दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब चार महीने पूर्व अक्षय गौर ने फेसबुक पर अपने धर्मांतरण की सूचना दी थी। उसने फेसबुक पर कुर्ता पहने और टोपी लगाए हुए एक फोटो शेयर की थी। इसके साथ लिखा था, “मैंने अपना नया धर्म चुन लिया है। मेरा नया नाम मोहम्मद फहीम खान है।” जब हिंदू दोस्तों ने उसकी पोस्ट देखी तो वे हैरान रह गए। अब यह पोस्ट उसने डिलीट कर दी है।
फोटो साभार: दैनिक भास्कर
अक्षय गौर ने बताया, “सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद भी मैं बेरोजगार था। 5 महीने पहले मैं नागचून इलाके के पार्क में बैठा था। बहुत परेशान था। तभी वहाँ आलिम आया। उसने मुझसे कहा कि तुम परेशान लग रहे हो। तुम्हारा सब अच्छा होगा। अगर तुम हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लेते हो। अल्लाह का रास्ता अपनाओ। मस्जिद में आना। वहाँ नमाज पढ़कर देखो। तुम्हें अच्छा लगेगा। आलिम की बात सुनकर मैं दूसरे दिन मस्जिद में पहुँचा तो उसने हिंदू धर्म के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया। उसने यह भी कहा कि मैंने कई हिंदुओं को मुस्लिम बनाया है।”
अक्षय ने बताया, “मैं दो-तीन दिन लगातार मस्जिद में गया। आलिम ने मुझे डराया और कहा कि हिंदू हो या सिख या फिर क्रिश्चियन कितनी ही पूजा कर लो, जहन्नुम नसीब होता है। मुस्लिम ही ऐसा धर्म है कि अल्लाह की इबादत करने से जन्नत मिलेगी। आलिम की ये बातें मेरे दिमाग पर असर करने लगी। आलिम ने मुझे कलमा पढ़वाकर मेरा धर्म बदल दिया। उसने मुझे फहीम खान नाम दिया। जब मैंने अक्षय नाम बदलकर फेसबुक पर फहीम खान डाला तो मेरे दोस्त और परिजन हैरान हो गए।”
खंडवा के SP विवेक सिंह के मुताबिक, मोघट थाना पुलिस ने आलिम अमीनुद्दीन कादरी पर धार्मिक भावना आहत करने और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। वहीं, इस मामले में आलिम अमीनुद्दीन कादरी का कहना है कि उस पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। युवक खुद ही मस्जिद में मुस्लिम बनने आया था। हमने उसे सलाह दी थी कि कानून के अनुसार काम करें। हम इस तरह के काम नहीं करते हैं, लेकिन वह नहीं माना।
देश का पहला प्राइवेट रॉकेट ‘विक्रम-एस (Vikram-S)’ तीन सैटेलाइट्स के साथ सफलता पूर्वक प्रक्षेपित हुआ। इसी के साथ प्राइवेट स्पेस सेक्टर में भारत ने इतिहास रच दिया है। इसरो (ISRO) और हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के इस मिशन का नाम ‘प्रारंभ’ रखा गया है। इस मिशन के तीन पेलोड थे और यह एक उप कक्षीय मिशन था।
पृथ्वी की सतह से 101 किलोमीटर की दूरी पर पहुँच कर ‘विक्रम-एस (Vikram-S)’ समंदर (बंगाल की खाड़ी) में गिरा। 300 सेकेंड्स के ‘मिशन प्रारंभ’ से प्राइवेट स्पेस सेक्टर में भारत ने दमदार एंट्री की है। इसरो ने पहले इस मिशन के प्रक्षेपण के लिए स्काईरूट एयरोस्पेस को 12 नवंबर से 16 नवंबर का समय दिया था। लेकिन खराब मौसम के कारण 18 नवंबर को सुबह 11.30 बजे का समय तय हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया है।
A historic moment for India as the rocket Vikram-S, developed by Skyroot Aerospace, took off from Sriharikota today! It is an important milestone in the journey of India’s private space industry. Congrats to @isro & @INSPACeIND for enabling this feat. pic.twitter.com/IqQ8D5Ydh4
Vikram-S की उड़ान 2 भारतीय और 1 विदेशी पेलोड के साथ
विक्रम-एस को हैदराबाद की कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने विकसित किया है। इसका नाम स्पेस प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। देश के लिए नई शुरुआत के प्रतीक के तौर पर इस मिशन को ‘प्रारंभ’ नाम दिया गया है।
विक्रम-एस (Vikram-S) ने 2 भारतीय और 1 विदेशी पेलोड के साथ उड़ान भरी। इनमें चेन्नई के स्टार्टअप स्पेस किड्ज, आंध्र प्रदेश के स्टार्टअप एन-स्पेस टेक और आर्मेनियाई स्टार्टअप बाजूमक्यू स्पेस रिसर्च लैब के सैटेलाइट्स शामिल थे।
इस लॉन्च के बाद इसरो ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से मिशन ‘प्रारंभ’ के सफलता की जानकारी दी और स्काईरूट एयरोस्पेस व देश के लोगों को बधाई दी।
श्री हरिकोटा में विक्रम-एस के प्रक्षेपण के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। ट्विटर पर जितेंद्र सिंह ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम के सदस्यों के साथ एक तस्वीर शेयर की। आपको बता दें कि जितेंद्र सिंह को प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री के साथ-साथ पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रौद्योगिकी का प्रभार भी प्राप्त है।
With #StartUp Team “Skyroot Aerospace” at #Sriharikota, minutes before the launch of the first ever private Rocket, Vikram-S, named after Vikram Sarabhai, the founding father of India’s Space program. Countdown begins! pic.twitter.com/QUZpYSdsjS
स्काईरूट एयरोस्पेस के मुताबिक, इस मिशन पर काम साल 2020 में शुरू हुआ था। विक्रम-एस को बनाने में सिर्फ दो वर्षों का समय लगा है। विक्रम-एस सॉलिड फ्यूल्ड प्रोपल्शन, कटिंग एज एवियोनिक्स और कार्बन फाइबर कोर स्ट्रक्चर से लैस है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने जानकारी दी है कि इसका बॉडी मास 545 किलो, लेंथ 6 मीटर और डायमीटर 0.375 मीटर है।
अब तक इसरो अपने रॉकेट्स का प्रक्षेपण करता रहा है लेकिन यह पहली बार था जब इसरो ने किसी निजी कंपनी का मिशन अपने लॉन्चिंग पैड से प्रक्षेपित किया। जानकारों की मानें तो सरकार चाहती है कि छोटे मिशन का भार जो इसरो पर रहा है, वह अब प्राइवेट सेक्टर के भागीदारी को दिया जाए। ऐसा इसलिए ताकि इसरो से छोटे मिशन का लोड कम हो जाए और भारत की स्पेस एजेंसी इसरो बड़े-बड़े मिशन पर ध्यान केंद्रित कर सके।
पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में देसी बम विस्फोट में 9 साल की बच्ची की मौत हो गई। धमाका अब्दुल हुसैन के घर में हुआ। अब्दुल मृत बच्ची का मामा है। घटना बुधवार (16 नवंबर 2022) की है।
रिपोर्ट के अनुसार मृत लड़की बछोरा गाँव स्थित अपने ननिहाल गई थी। बुधवार की शाम खेल-खेल में उसने घर में रखे बम को उठा लिया। नीचे गिरते ही बम फट गया। धमाका होते ही अब्दुल अपने परिवार के साथ घर छोड़कर भाग गया। घायल बच्ची को ग्रामीण अस्पताल ले गए, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।
अब्दुल हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार अब्दुल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का कार्यकर्ता है। मीनाखान अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) अमीनुल इस्लाम ने बताया, “मृतक की पहचान तीसरी कक्षा की छात्रा सोहना खातून उर्फ झूमा के रूप में हुई है। वह दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती इलाके की रहने वाली थी। छात्रा घटना से दो दिन पहले अपने मामा के घर आई थी। विस्फोट में उसके साथ खेल रही सहेली रहीमा परवीन और अनीशा खातून घायल हो गईं।”
पुलिस के मुताबिक, “देसी बम झूमा के मामा अब्दुल हुसैन के घर में कैरम बोर्ड के बगल में रखा हुआ था। जब बच्ची ने मचान पर एक गेंद जैसी वस्तु देखी, तो जिज्ञासावश उसे पकड़ने का प्रयास किया। लेकिन देसी बम जमीन पर गिर गया और फट गया।” पुलिस के मुताबिक लड़की को लगा कि मचान पर नारियल रखा हुआ है। उसने उठाने का प्रयास किया तो वह नीचे गिर गया और धमाका हो गया।
अधिकारी के अनुसार बच्ची को ग्रामीण मिनाखान ग्रामीण अस्पताल लेकर आए थे। घटना के बाद अब्दुल अपने परिवार के साथ भाग गया था। लेकिन गुरुवार (17 नवंबर 2022) सुबह वह पकड़ा गया। पुलिस ने कहा कि अब्दुल के घर से 7 देसी बम भी बरामद किए हैं। उस पर आईपीसी की संबंधित धाराओं और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। उसके भाई अब्दुल सत्तार को भी गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के मुताबिक अब्दुल एक निर्माण श्रमिक है और किराने की दुकान भी चलाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह सत्तारूढ़ टीएमसी से भी जुड़ा हुआ है। उसका आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। हालाँकि पार्टी ने इस दावे का पार्टी ने खंडन किया है। तृणमूल नेता अजीजुल गाजी ने कहा है, “पार्टी का अब्दुल हुसैन के साथ कोई संबंध नहीं है।”
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक छात्रा से रेप का आरोपित रुहाब मेनन गिरफ्तार किया गया है। वह कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI का प्रदेश महासचिव रहा है। उसे भानु प्रतापपुर में हो रहे उप चुनाव में भी पार्टी ने जिम्मेदारी दे रखी थी। रिपोर्टों के अनुसार रुहाब ने मदद के बहाने छात्रा से दोस्ती की। फिर जंगल में ला जाकर उसके साथ जबर्दस्ती की।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीड़िता कांकेर के ही एक कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। आरोपित रुहाब ने कॉलेज में एडमिशन के दौरान उसकी मदद की थी। इसके बाद, वह लगातार पीड़िता के संपर्क में रहने की कोशिश करने लगा। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कुछ महीने पहले एडमिशन के दौरान रुहाब ने उसकी मदद की थी। एडमिशन के दौरान ही उसने पीड़िता का मोबाइल नंबर ले लिया था। इसके बाद अक्सर ही वह फोन पर बातें करता था।
बुधवार (16 नवंबर 2022) को रुहाब ने पीड़िता को फोन कर स्थानीय घड़ी चौक बुलाया था। जहाँ वह पढ़ाई की बातें करने के बाद घूमने के बहाने पीड़िता को कार में बैठा लिया। पीड़िता का कहना है कि कार में बैठाने के बाद रुहाब जबरन उसे सिंगारभाठ के जंगल में लेकर चला गया। जहाँ, उसने जंगल में ही कार रोककर उसके साथ दुष्कर्म किया।
कहा जा रहा है कि रुहाब की हरकतों को लेकर संगठन को पहले से ही जानकारी थी। इसलिए 15 नवंबर को उसे अनुशासनहीनता के आरोप में एनएसयूआई से निलंबित कर दिया गया था। करने का कारण बताते हुए निलंबित किया गया है। कांकेर एसपी शलभ सिन्हा का कहना है कि छात्रा की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। कहा जा रहा है कि रेप के बाद रुहाब ने इसकी शिकायत नहीं करने की धमकी भी छात्रा को दी थी। लेकिन उसके चंगुल से छूटते ही वह पुलिस के पास पहुँच गई।