Home Blog Page 2241

इंडोनेशिया में भूकंप ने मचाई तबाही, अब तक 268 की मौत: मदरसों-मस्जिदों को भारी नुकसान, अस्पतालों में कम पड़ गई है जगह

सोमवार (21 नवंबर, 2022) को इंडोनेशिया (Indonesia) में आए भूकंप ने भयानक तबाही मचाई है। भूकंप के बाद मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इडोनेशियाई सरकार ने अब तक 268 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। वहीं सैकड़ों की संख्या में लोग घायल बताए जा रहे हैं। यूएसजीएस के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.6 आँकी गई है।

भूकंप और उसके बाद आए झटकों की वजह से दर्जनों मकान गिर गए। अपनी जान बचाने के लिए सड़कों और गलियों में भाग रहे लोगों में से कई घायल और खून से लथपथ नजर आए। भूकंप का केंद्र राजधानी जकार्ता से 100 किलोमीटर दूर पश्चिम जावा प्रांत के सियांजुर क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई में था। बता दें कि हाल ही में इंडोनेशिया में जी-20 देशों का सम्मेलन आयोजित हुआ था।

मरने वालों में ज्यादातर बच्चे शामिल

जावा के गवर्नर रिदवान कामिल ने जानकारी दी है कि मरने वालों में ज्यादातर बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि भूकंप के वक्त पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे अपनी पढ़ाई खत्म होने के बाद इस्लामी स्कूल में तालीम लेने पहुँचे थे। भूकंप के केंद्र सियांजुर में सबसे बड़ी संख्या में इस्लामी आवासीय स्कूल और मस्जिद हैं। कामिल ने कहा, “भूकंप की वजह से कई इस्लामी स्कूलों में हादसे हुए हैं। इन हादसों में बच्चों की दर्दनाक मौतें हुई हैं।” बताया यह भी जा रहा है कि अब भी बड़ी संख्या में लोग मलबों में दबे हुए हैं। लोग घायल अवस्था में अपनों की तलाश कर रहे हैं।

घायलों को अस्पताल में नहीं मिल रही जगह

भूकंप के बाद बड़ी संख्या में घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों की संख्या अधिक होने के कारण बहुत सारे लोगों का इलाज बाहर किया जा रहा है। सियांजुर में अस्पताल की पार्किंग में घायलों को रखा गया है। कुछ को अस्थायी टेंट में जगह मिली तो कुछ फुटपाथ पर ही लेटे नज़र आए। इतना ही नहीं स्वास्थ्य कर्मियों ने टॉर्च के प्रकाश में मरीजों को टाँके लगाए।

फुटपाथ पर इलाज कराने को मजबूर भूकंप प्रभावित (फोटो साभार KhaledBeydoun ट्विटर हैंडल)

बताया जा रहा है कि इस आपदा के बाद लगभग 13 हजार लोग बेघर हो चुके हैं। हालाँकि, अभी भूकंप से होने वाली तबाही के ऑफिशियल आँकड़े आने बाकी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर आए भूकंप से जान-माल के नुकसान पर दुख जताया। पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर के इस हादसे पर दुःख जताया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, “इंडोनेशिया में भूकंप से जान-माल के नुकसान से दुखी हूँ। पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। दुख की इस घड़ी में भारत इंडोनेशिया के साथ खड़ा है।”

इंडोनेशिया में आती रहती हैं प्राकृतिक आपदाएँ

इंडोनेशिया की आबादी 27 करोड़ से अधिक है और ये मुल्क भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और सुनामी से अक्सर प्रभावित होता रहता है। इस साल फरवरी में पश्चिम सुमात्रा में 6.2 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई थी और 460 से ज्यादा लोग घायल हो हुए थे। जनवरी 2021 में पश्चिम सुलावेसी प्रांत में 6.2 तीव्रता के भूकंप से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 6,500 लोग घायल हो गए थे।

2004 में हिंद महासागर में आए एक शक्तिशाली भूकंप और सुनामी ने एक दर्जन देशों में लगभग 2 लाख 30 हजार लोगों की जान ली थी, जिनमें से अधिकतर इंडोनेशिया में थे।

‘अल्लाहु अकबर, कतर में 500 ने कबूला इस्लाम’: FIFA वर्ल्ड कप के बीच ISIS समर्थक माजिद फ्रीमैन का दावा, मीडिया में खबर नहीं

लेस्टर में हुई हिंदू विरोधी हिंसा के दौरान फेक न्यूज फैलाने वाले ‘द गार्जियन के सहयोगी’ माजिद फ्रीमैन ने फीफा वर्ल्ड कप को लेकर एक नई बात फैलाई है। माजिद ने 22 नवंबर को दावा किया है कि कतर में वर्ल्ड कप देखने आए लोगों में से 500 लोगों ने इस्लाम में धर्म परिवर्तन किया। अपने ट्वीट में उसने कहा, “अल्लाहु अकबर! हमने सुना है कि कतर में हाल में 500 लोगों ने इस्लाम स्वीकारा।”

अपने ट्वीट में फ्रीमैन ने मेक्सिकन व्यक्ति की वीडियो भी शेयर की और दावा किया कि वो इस्लाम कबूल रहा है। उसने लिखा, “दुनिया भर के हजारों फैन यहाँ हैं। उन्हें भी इस्लाम की खूबसूरती देखने का मौका मिले और अल्लाह उन्हें दिशा दिखाए।”

बता दें कि एक ओर जहाँ द गार्जियन के माजिद फ्रीमैन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ऐसा दावा करके सबको चौंका दिया है। वहीं मीडिया में कहीं भी इस्लामी धर्मांतरण से जुड़ी खबर नहीं है। द गार्जियन तक में इसका कोई जिक्र नहीं है जिसे कुछ दिन पहले नाइजीरिया की साइट ‘मुस्लिम वेबसाइट’ ने सबसे हिजाब फ्रेंडली मीडिया हाउस कहा था। इसी मीडिया हाउस ने राणा अयूब को ग्लोबल मुस्लिम मीडिया पर्सन 2021 का अवार्ड दिया था।

मालूम हो कि फ्रीमैन अकेला शख्स नहीं है जो इस तरह फीफा वर्ल्ड कप की आड़ में हुए धर्मांतरण की बातें कर रहा हो। एक ट्विटर यूजर अबू सिद्दीक ने भी ट्वीट करके दावा किया है कि कतर में फीफा वर्ल्ड कप देखने आए 558 लोगों का धर्मांतरण हुआ।

अबू सिद्दीक ने लिखा, “कतर में डॉ जाकिर नाइक शेख और उनकी टीम के आने से जिस तरह की चीजें हो रही हैं, यूरोपीय लोग एक नई रौशनी देखेंगे और इस्लाम स्वीकारेंगे।”

इसी तरह एक 5pillarsUK के डिप्टी एडिटर दिली हुसैन ने कहा भी अपने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि कम से कम 558 लोगों ने कतर में इस्लाम स्वीकारा है।

बता दें कि माजिद फ्रीमैन के ऊपर आईएसआईएस समर्थक होने के आरोप लगते रहे हैं। वह ब्रिटिश आईएसआईएस आतंकी इफ्तेखर जमान के लिए दुआ पढ़ने की अपील करता भी देखा जा चुका है। इसके अलावा उसने अलकायदा आतंकियों को भी शहीद कहकर अपना प्रेम उनके प्रति दिखाया था। उससे पुलिस ने पूछताछ भी की थी लेकिन दिलचस्प बात ये है कि उसपर कोई मामला नहीं चला। माजिद को लेकर यह भी जानकारी है कि उसने यूरोपीय मुस्लिमों को सीरिया में जिहाद करने को कहा और अपने फेसबुक-ट्विटर के जरिए अलकायदा आतंकी को श्रद्धांजलि भी दी थी। इतना ही नहीं अभी बीते दिनों लेस्टर में जो हिंसा हुई उस समय भी माजिद ने झूठ फैलाकर हिंदुओं के खिलाफ कट्टरपंथियों को भड़काया था।

नोट: ये लेख मूलत: अंग्रेजी में है। इसे विस्तार से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

‘जेल में मसाज’ के बाद सत्येंद्र जैन ने कोर्ट में ड्राई फ्रूट्स-सलाद के लिए लगाई अर्जी, कहा- इनके बिना प्रोटीन और आयरन की हो जाएगी कमी

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। जेल में ‘मसाज सुविधा’ लेने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के इस नेता ने अब ‘धार्मिक आहार’ के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई है। ड्राई फ्रूट्स और सलाद मुहैया कराने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जैन ने सीबीआई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि जेल प्रशासन उन्हें मिश्रित बीज, फल, खजूर, सूखे मेवे, सलाद सहित उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुनियादी चीजें नहीं उपलब्ध करवा रही है। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि वह पिछले छह महीने से धार्मिक उपवास पर हैं। इसलिए उन्हें ड्राई फ्रूट्स और अन्य फल खाने की आवश्यकता है। यदि उपवास के दौरान ये चीजें नहीं दी जाएँगी तो उनके शरीर में प्रोटीन और आयरन की कमी हो जाएगी।

जैन ने याचिका में यह भी कहा है कि वह बिना मंदिर गए भोजन नहीं करते। हर दिन पहले मंदिर जाते हैं, उसके बाद ही खाना खाते हैं। लेकिन, उनके मंदिर जाने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा है कि बिना मंदिर गए वह भोजन, अनाज और दुग्ध उत्पादों का सेवन नहीं करते। पिछले 2 दिन से उन्हें फल और सलाद नहीं दिया जा रहा, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इससे पहले, जैन के जेल में ‘मसाज सुविधा’ लेने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। वायरल वीडियो में सत्येंद्र जैन को जिस शख्स से जेल में मसाज कराते हुए देखा गया था, वह नाबालिग से रेप का आरोपित बताया जा रहा है।

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, तिहाड़ जेल के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सत्येंद्र जैन की मालिश करने वाले कैदी का नाम रिंकू है। वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं है। रिंकू एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में जेल में बंद है। उस पर पॉक्सो (POCSO) की धारा 6 और IPC की धारा 376, 506 और 509 के तहत केस दर्ज है।

भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी इस मामले में ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “सत्येंद्र जैन को मालिश और चंपी देने वाला शख्स असल में रेपिस्ट था। वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं बल्कि रेपिस्ट था। उन्होंने सही मायने में तिहाड़ को थाईलैंड में बदल दिया है।”

पिछले दिनों जेल में बंद सत्येंद्र जैन की मसाज का वीडियो सामने आया था। इसमें एक व्यक्ति उनकी मालिश करता हुआ दिख रहा था। आम आदमी पार्टी ने इस मामले पर अपनी सफाई दी थी। उन्होंने इसे सत्येंद्र जैन की बीमारी बताते हुए फिजियोथेरेपी बताया था। AAP के इस फिजियोथेरेपी वाले दावे को तिहाड़ जेल प्रशासन और भारतीय फिजियोथेरेपी एसोशिएशन ने सामूहिक रूप से नकार दिया था।

टुकड़े कर खेत में गाड़ दिया, सभी 9 आरोपित बेल पर बाहर: जैसे आफताब के ‘प्रेम’ में मारी गई श्रद्धा, वैसे ही शाकिब के ‘लव जिहाद’ की भेंट चढ़ी थी एकता

जैसे आज पूरा देश श्रद्धा वालकर (Shraddha Walker Murder Case) की निर्मम हत्या से सन्न है, ऐसे ही करीब दो साल पहले एकता देशवाल (Ekta Deshwal Murder Case) की हत्या ने झकझोर दिया था। जैसे आफताब पूनावाला ने श्रद्धा के 35 टुकड़े कर जंगल में फेंक दिए, वैसे ही शाकिब ने अपने परिजनों संग एकता के टुकड़े कर खेत में गाड़ दिया था। जैसे करीब आठ महीने बाद श्रद्धा की हत्या किए जाने का खुलासा हुआ है, वैसे ही कई दिनों तक एकता की हत्या किए जाने की बात आरोपितों के अलावा किसी को मालूम नहीं थी। ताजा खबर यह है कि एकता देशवाल मर्डर केस के सभी 9 आरोपित जमानत पर जेल से बाहर आ चुके हैं।

पंजाब के लुधियाना की रहने वाली एकता देशवाल की हत्या मेरठ में 5 जून 2019 को हुआ थी। लेकिन खुलासा 13 जून 2019 को तब हुआ, जब गन्ने के एक खेत से कुत्ते को इंसान का हाथ मुँह में लेकर भागते हुए ईश्वर पंडित ने देखा। खेत की खुदाई हुई तो एकता की लाश मिली। लाश को कई टुकड़ों में काट कर खेत में दफना दिया गया था। लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इस केस में ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है। एकता के परिजनों ने ऑपइंडिया से बातचीत में अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देकर खुद को इस केस में हुई प्रगति से अनभिज्ञ बताया।

घर वालों को नहीं है केस की जानकारी

ऑपइंडिया से बात करते हुए एकता की माँ से सीमा देशवाल ने खुद को केस की स्थिति से अनजान बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक हालात खराब होने और मेरठ काफी दूर होने की वजह से वो केस की पैरवी नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि DNA सैम्पल देने के बाद से उन्हें कभी कोई भी कागज कोर्ट या पुलिस की तरफ से आज तक प्राप्त नहीं हुआ है। एकता की माँ के मुताबिक उनके घर का सारा सोना बेटी के माध्यम से शाकिब ने हड़प लिया जो अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि एकता की हत्या के बाद से उन्हें मुस्लिमों से डर लगने लगा है।

CJM की कोर्ट में केस

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO दौराला आर के पचौरी ने बताया कि एकता का केस चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में है। 2 दिसंबर 2022 को इस केस में अगली सुनवाई की डेट लगी है। यहाँ से केस जिला जज की अदलात में जाएगा जिसके बाद इसे सुनने वाले सेशन जज का निर्धारण होगा। उन्होंने बताया कि वादी यानि एकता की माँ आदि को गवाही के समय पर उन्हें बुलाया जाएगा। सरकारी वकील इस केस में एकता की तरफ से लगातार पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि मामले में आरोपित सभी 9 लोग जमानत पा चुके हैं।

सबसे पहले इशमत को मिली जमानत

ऑपइंडिया से जुटाई गई जानकारी के मुताबिक इस मामले में सबसे पहले महिला आरोपित इशमत को जमानत मिली। इशमत की जमानत सेशन कोर्ट से ख़ारिज हो गई थी, जिसे इलाहांबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। यहाँ पर 10 जुलाई 2020 को सुनवाई हुई जिसमें उच्च न्यायालय में जस्टिस सिद्धार्थ की बेंच ने जमानत का आधार अरोपिता का आपराधिक इतिहास न होने के साथ उनके पास से कोई मजबूत बरामदगी न होना बताया गया है। इसी आधार पर बाद में मुशर्रत को भी जमानत मिली थी। इन दोनों की जमानत के बाद मुस्तकीम ने भी इलाहबाद हाई कोर्ट का रुख किया था और उसे भी 3 सितम्बर 2020 को जमानत मिल गई थी।

केस के मुख्य आरोपित शाकिब की जमानत याचिका पर इलाहबाद हाई कोर्ट में सुनवाई 13 जनवरी 2021 को हुई थी। यह सुनवाई जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की बेच में हुई थी। अपने बचाव में शकिब ने मृतका के अपनी मर्जी से अपने साथ भागने और ख़ुशी से रहने की दलील दी थी। इसी के साथ शाकिब ने कोर्ट को बताया था कि उसको जेल केवल पुलिस कस्टडी में उसके इकबालिया बयान के आधार पर भेजा गया है जो उससे दबाव में लिया गया था। शकिब ने भी अपना कोई आपराधिक इतिहास न होने की जानकारी कोर्ट में दाखिल की थी।

कोर्ट ने शाकिब की दलीलों से सहमति जताते हुए पुलिस के पास शाकिब को जेल में रखने लायक कोई ठोस सबूत न होने के तर्क को आधार बना कर उसे जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे। शाकिब की जमानत में उस से पहले रिहा हुई इशमत के साथ मुस्तकीम और मुशर्रत की जमानत ने भी आधार का काम किया था। मुख्य आरोपित शकिब के रिहा होने के बाद बाकी 5 आरोपित भी अलग-अलग तारीखों पर जमानत पर बाहर आ गए।

क्या है मामला

गौरतलब है कि इस हत्या का खुलासा हुआ था तो यह जानकारी सामने आई थी कि 5 जून 2019 को ईद का दिन था। शाकिब एकता को घुमाने के बहाने बाहर ले गया। रात करीब 9 बजे उसने अपने परिवार की मदद से कोल्डड्रिंक में नशीली दवा मिलाकर एकता को पिला दी थी। उसके भाई मुसर्रत, पिता मुस्तकीम, भाभी रेशमा पत्नी नवेद, इस्मत पत्नी मुसर्रत एवं गाँव के साथी अयान के साथ सुनसान इलाके में बेहोश एकता को ले गए।

मेरठ पुलिस के सामने दिए बयान के अनुसार रेशमा ने एकता के सभी कपड़े उतार दिए। इसके बाद सभी ने मिलकर उसके हाथ, पैर और सिर अलग-अलग कर दिए। पुलिस ने बताया कि शाकिब ने पीड़िता का हाथ इसलिए काट दिया था, क्योंकि उस पर उसके नाम का टैटू था। धड़ को सबी अहमद के गन्ने के खेत में गड्ढा खोदकर दबा दिया। इतना ही नहीं, आरोपितों ने लाश के ऊपर नमक छिड़क दिया था, ताकि वो जल्द से जल्द गल जाए। हाथ, पैर और सिर को गाँव के तालाब में फेंक दिया था। यह बात भी सामने आई थी कि हत्या के बाद भी एकता का सोशल मीडिया अकाउंट शाकिब चला रहा था।

दिसंबर के बाद नहीं बचेगी ममता बनर्जी की सरकार, BJP के संपर्क में TMC के 30+ MLA: अग्निमित्रा पॉल का दावा, मिथुन चकवर्ती ने 38 से बताए थे ‘अच्छे संबंध’

पश्चिम बंगाल में दिसंबर में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा- यह दावा राज्य की भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल (Agnimitra Paul) ने किया है। उन्होंने कहा है कि इस दिसंबर पश्चिम बंगाल में एक ‘खेला’ होगा। पॉल ने यह भी कहा है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के 30 से अधिक विधायक उनकी पार्टी के संपर्क में हैं।

उन्होंने कहा कि वे (30 विधायक) जानते हैं कि दिसंबर के बाद उनकी पार्टी का पत्ता साफ़ हो जाएगा। उनका अस्तित्व दाँव पर है।

पॉल ने फर्स्टपोस्ट से कहा, ”लगभग 30 टीएमसी विधायक हमारी पार्टी के सदस्य मिथुन चक्रवर्ती के संपर्क में हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता, विशेष रूप से विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी इस पर विचार करेंगे।”

बता दें कि इस साल जुलाई में भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया था कि टीएमसी के 38 विधायक पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी के संपर्क में हैं। चक्रवर्ती ने कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था, “क्या आप ब्रेकिंग न्यूज सुनना चाहते हैं? इस समय, 38 टीएमसी विधायकों के हमारे साथ बहुत अच्छे संबंध हैं, जिनमें से 21 प्रत्यक्ष रूप से हमारे संपर्क में हैं।”

अग्निमित्रा पॉल के अनुसार, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार में वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं। उन्होंने आगे कहा कि ममता बनर्जी के आधे नेता घोटाले के आरोपित हैं और अन्य आधे कथित भ्रष्टाचार के लिए जेल में हैं। पश्चिम बंगाल की भाजपा विधायक ने आगे आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पश्चिम बंगाल सरकार के पास अपने कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं।

अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “मैं एक साधारण नेता हूँ। हमारे शीर्ष नेतृत्व और विपक्ष के नेता का कहना है कि सरकार डीए नहीं दे पा रही है, लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है। इस बारे में हमारे शीर्ष नेतृत्व और विपक्ष के नेता अपने राजनीतिक अनुभव से कह रहे हैं। हम जो सुन रहे हैं, उससे दिसंबर में कुछ हो सकता है।”

पॉल ने आगे आरोप लगाया कि टीएमसी केंद्र सरकार की परियोजना से पैसा चुरा रही है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की माँग है कि सीबीआई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ उनके मंत्रियों से भी पूछताछ करे क्योंकि वह राज्य की प्रमुख हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि दिसंबर के बाद राज्य में तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार का अस्तित्व नहीं रहेगा और प्रदेश में विधानसभा के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ 2024 में होंगे। उन्होंने कहा था, ”कुछ महीने रुकिए, यह सरकार पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं रहेगी। मेरी बातों का गाँठ बाँध लीजिए, इस साल दिसंबर तक पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार सत्ता में नहीं होगी।”

सऊदी अरब में 3 पाकिस्तानी सहित 12 को सजा-ए-मौत, तलवार से काटा: रिपोर्ट, प्रिंस सलमान ने किया था रोक का वादा

इस्लामिक देश सऊदी अरब में 12 लोगों को मौत की सजा दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार 10 दिन के भीतर इनलोगों को सजा मिली है। तलवार से इनका गला काटा गया है। इसने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से किए गए वादे की भी पोल खोल दी है।

सलमान ने अहिसंक अपराधों पर मौत की सजा पर रोक लगाने की बात कही थी। लेकिन जिन लोगों को मृत्युदंड दिया गया है उन पर नशीली दवाओं से जुड़े अपराध में शामिल होने के आरोप थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीते जिन 12 लोगों को मौत की सजा दी गई है उन्हें नशीली दवा रखने/ तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों के पास जो दवाएँ प्राप्त हुईं थीं वे हाई-लेवल ड्रग्स की श्रेणी में शामिल नहीं हैं। इसके बाद भी इन लोगों का गला काट दिया गया है। सऊदी अरब सरकार ने शरिया कानून के तहत तलवार से जिन लोगों का गला काटा है उनमें 3 पाकिस्तानी, 4 सीरियाई, सऊदी अरब के 3 और जॉर्डन के 2 नागरिक शामिल हैं।

बता दें कि सऊदी सरकार ने इसी साल मार्च में 81 लोगों को मौत की सजा दी थी। उस समय जिन 81 लोगों को सजा दी गई थी, उनमें 73 सऊदी, 7 यमन और 1 सीरियाई व्यक्ति था। इन लोगों पर बलात्कार, बच्चों के अपहरण, हत्या, हथियारों की तस्करी और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। साथ ही कुछ लोग अलकायदा और ISIS जैसे इस्लामिक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए थे।

सऊदी अरब में इस साल अब तक कुल मिलाकर 132 लोगों को मौत की सजा दी गई है, जो कि पिछले साल के मुकाबले कहीं ज्यादा है। साल 2021 में सऊदी सरकार ने 69 लोगों को मौत की सजा दी थी। वहीं, 2019 में 187 लोगों को यह सजा सुनाई गई थी।

गौरतलब है कि साल 2018 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने कहा था कि प्रशासन ने मौत की सजा को कम करने की कोशिश की है। सिर्फ हत्या या हत्या के दोषी पाए गए लोगों को ही मृत्युदंड दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि सऊदी अरब में कानून के हिसाब से ही फैसले होते हैं।

औरंगजेब मर गया पर उस राठौड़ से जीत न पाया, इस्लामी सरदार देते थे टैक्स: मारवाड़ की वह अभेद्य दीवार जिससे टकरा मुगल हुए पस्त

भारत भूमि में हमेशा से वीरों की कमी नहीं रही है। बात मेवाड़-मारवाड़ की करें तो राजपूतों की बहादुरी के किस्से पूरे राजस्थान की आन-बान-शान हैं। इन्हीं वीरों में से दुर्गादास राठौड़ भी थे, जिन्होंने औरंगजेब की नाक में दम दिया। उन्होंने न सिर्फ मुगलों को कई बार धूल चटाई, बल्कि मेवाड़ और मारवाड़ में संधि करवा कर हिंदू एकता पर भी बल दिया। वो मारवाड़ के सेनापति थे। वहाँ के राजा अजीत सिंह के संरक्षण का जिम्मा भी उन्होंने ही उठाया था।

दुर्गादास राठौड़ का जन्म 16 अगस्त, 1638 को हुआ था। जबकि, सन् 1718 में 22 नवंबर को उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे उन्होंने अपने त्यागे। अपने अंतिम समय में वो मध्य प्रदेश में भगवान महाकाल की धरती पर निकल गए थे। उन्होंने अपने राजा जसवंत सिंह से एक वादा किया था, जिसे निभाने के बाद उन्होंने अंत समय में निश्चिंत होकर ईश्वर की शरण ली। 1988 में उनके सम्मान में भारत सरकार ने स्टांप जारी किए।

वहीं अगस्त 2003 में उनके सम्मान में सिक्के भी जारी किए गए थे। जब दुर्गादास राठौड़ का जन्म हुआ, उस समय दिल्ली की मुग़ल सल्तनत का बादशाह शाहजहाँ था। राठौड़ वंश के करणौत कुल में जन्मे दुर्गादास राठौड़ के पिता का नाम आसकरण थम जो जोधपुर के तत्कालीन महाराज जसवंत सिंह के करीबी थे। जब महाराज की मृत्यु हुई, उस समय उनकी गर्भवती पत्नी पेशावर में थीं। वहाँ से वो दिल्ली के लिए निकलीं, लेकिन रास्ते में ही उन्हें प्रसव पीड़ा होने लगी।

फिर उनके एक पुत्र का जन्म हुआ, जो जोधपुर के साम्राज्य का उत्तराधिकारी भी बना। महाराज की मृत्यु के बाद उस शिशु की रक्षा की जिम्मेदारी दुर्गादास राठौड़ ने उठाई। उस बालक का नाम अजीत सिंह था। उस समय औरंगजेब उक्त शिशु को अपने संरक्षण में रखना चाहता था, जबकि मारवाड़ पर उसका संपूर्ण कब्ज़ा हो जाए। हालाँकि, राजपूत सरदारों को ये कतई गँवारा न था। औरंगजेब के एक बेटे का नाम मुहम्मद अकबर था, जिसे दुर्गादास राठौड़ ने अपना करीबी बनाया।

ये दुर्गादास राठौड़ की कुशल कूटनीति ही थी कि अकबर ने अपने अब्बा के खिलाफ बगावत कर दिया। हालाँकि, बल और बुद्धि में कुशल न होने के कारण उसकी ये बगावत सफल न हो पाई। इसके बाद दुर्गादास राठौड़ ने उसे मराठा साम्राज्य के तत्कालीन अधिपति छत्रपति संभाजी महाराज के संरक्षण में पहुँचाया। शहजादा अकबर के पुत्र और पुत्री को उसके पीछे पालन-पोषण कर के दुर्गादास राठौड़ ने मित्र-धर्म भी निभाया।

जब वो बच्चे बड़े हो गए तो उन्हें औरंगजेब को सौंप दिया गया। औरंगजेब के विरुद्ध इस तरह का साहस उस समय बड़ी बात थी। शुरू में तो जसवंत सिंह और औरंगजेब के संबंध भी अच्छे थे। लेकिन, औरंगजेब के भाई दारा शिकोह और शुजा को जसवंत सिंह ने बगावत के वक्त समर्थन दिया था। शाहजहाँ भी दारा शिकोह को ही अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहता था। औरंगजेब ने जब सत्ता संभाली, तब मारवाड़ राज्य उसके प्रभाव में थे।

उसने जसवंत सिंह को कभी काबुल, कभी कंधार तो कभी दक्षिण में मोर्चों पर भेज कर दिल्ली से दूर रखने का भरसक प्रयास किया। तब भी महाराज जसवंत सिंह को दुर्गादास राठौड़ पर पूरा भरोसा था और उन्हें लगता था कि वो आगे जाकर कुछ अच्छा करेंगे। एक वाकया जमरूद का है, जहाँ शिकार के दौरान दुर्गादास राठौड़ बिछड़ गए तो एक पेड़ के नीचे थक कर सो गए थे। वहाँ पहुँचे महाराज ने अपने रूमाल से छाया कर के धूप को रोका।

उसी समय महाराज ने वहाँ मौजूद लोगों को कह दिया था कि इसी रूमाल की छाया की तरह कभी दुर्गादास राठौड़ संपूर्ण मारवाड़ की रक्षा करेंगे। जसवंत सिंह के पुत्र पृथ्वी सिंह भी अत्यंत शूरवीर थे, जिन्होंने औरंगजेब के सामने ही एक प्रतियोगिता में निहत्थे शेर को हरा दिया था। एक साजिश के तहत ज़हर देकर पृथ्वी सिंह की हत्या करा दी गई। कहा जाता है कि बेटे के मौत के गम में ही जसवंत भी चल बसे। ऐसे समय में न सिर्फ पूरे मेवाड़, बल्कि राजपूताना की नजर दुर्गादास राठौड़ पर थी।

दुर्गादास राठौड़ ने महारानी को सती होने से भी रोका। संग्राम सिंह आरूवा नामक सरदार ने इसके लिए रानी को मनाया। राठौड़ ने इसके बाद चालाकी से महाराज का शव स्वदेश ले जाने के लिए मुगलों को तैयार कराया। जनता को भी समझा दिया गया कि ऐसा कुछ भी न करे जिससे औरंगजेब को जरा भी शंका हो। उधर मुग़ल बादशाह मारवाड़ को हड़प लेने के फेर में था। इधर सरदारों ने एक शासन समिति बना कर सरकार चलाने की जिम्मेदारी सौंप दी।

औरंगजेब का एक सरदार सैयद अब्दुल्ला इसी बीच मारवाड़ पहुँचा, जिसने वापस जाकर बादशाह को बताया कि हिन्दू युद्ध की तैयारी में लगे हुए हैं। चूँकि औरंगजेब ने अजीत सिंह को शासक के रूप में मान्यता नहीं दी, इसीलिए इन वीरों ने युद्ध का निर्णय लिया। मुग़ल बादशाह ने खुद अजमेर में बैठ कर वहाँ की राजनीतिक परिस्थिति को समझा और फिर दिल्ली लौट आया। औरंगजेब की फ़ौज ने राजस्थान में तबाही मचानी शुरू कर दी।

सन् 1681 से लेकर 1687 तक दुर्गादास राठौड़ ने दक्षिण भारत में छिप कर अजीत सिंह की रक्षा की और उनके युवा होने पर उन्हें वापस लेकर लौटे। हालाँकि, औरंगजेब इससे खुश भी था कि दुर्गादास राठौड़ ने उसके पोते-पोती की शिक्षा-दीक्षा इस्लामी तौर-तरीकों से करवाई थी। सन् 1702 में औरंगजेब ने गुजरात के शासक को दुर्गादास राठौड़ की हत्या कराने का आदेश जारी कर दिया। दुर्गादास राठौड़ मारवाड़ लौट कर लगातार औरंगजेब के खिलाफ युद्ध का नेतृत्व करते रहे।

1707 में औरंगजेब की मौत होते ही दुर्गादास राठौड़ ने धावा बोल कर जोधपुर को मुगलों के प्रभाव से मुक्त कराया और वहाँ से इस्लामी शासकों की फ़ौज को खदेड़ा। जो वहाँ रह गए, उन्हें दुर्गादास राठौड़ को ‘चौथ’ देने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस्लामी शासकों ने जिन मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था, दुर्गादास राठौड़ ने उनका पुनर्निर्माण करवाया। उज्जैन का चक्रतीर्थ, कहाँ दुर्गादास राठौड़ का निधन हुआ था, वो आज भी हिन्दुओं, खासकर राजपूतों के लिए एक पवित्र स्थल है। 1690 में उन्होंने अजमेर के युद्ध में मुगल सरदार शफी खान को हराया था।

दुर्गादास राठौड़ ऐसे थे कि उनकी देशभक्ति को खरीदने की कई कोशिश नाकाम रहीं। मुगलों ने उन्हें सोने-चाँदी से लेकर पद तक का लालच दिया, लेकिन वो मातृभूमि के साथ रहे। जब दुर्गादास राठौड़ मुगलों से लड़ रहे थे, उसी समय मेवाड़ के राणा राज सिंह की सेना ने गुजरात और मालवा में 32 मस्जिदों को धूल में मिला दिया था। राठौड़ को खासकर लोग इसीलिए करते हैं कि उन्होंने जसवंत सिंह की गर्भवती रानियों (जिनमें से एक के पुत्र की मौत हो गई) के साथ दिल्ली छोड़ते हुए औरंगजेब द्वारा बंदी बनाए जाने की साजिश को नाकाम किया और पीछा कर रही इस्लामी फ़ौज को हराया।

जिस जाकिर नाइक के लिए फुटबॉल हराम वह FIFA World Cup में कबूल, रेनबो टीशर्ट पहने पत्रकार को स्टेडियम में प्रवेश करने से रोका

कतर में फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) चल रहा है। इस्लाम का हवाला देकर जिस तरह की पाबंदियाँ खिलाड़ियों और दर्शकों पर थोपी गई है, उससे फुटबॉल विश्व कप का रंग फीका है। इस बीच एक खेल पत्रकार को स्टेडियम में प्रवेश करने से केवल इसलिए रोक दिया गया, क्योंकि उन्होंने रेनबो कलर की टीशर्ट पहन रखी थी। वहीं भगोड़ा जाकिर नाइक (Zakir Naik) जो कभी फुटबॉल के खेल को हराम बता चुका है, वह इस आयोजन में दीनी तकरीर के लिए कतर बुलाया गया है।

फीफा विश्व कप के खास मेहमान नाइक का सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उसने फुटबॉल खेलने को गैर इस्लामिक करार दिया है। यह वीडियो 1:25 मिनट का है। इसमें जाकिर नाइक कह रहा है, “फुटबॉल एक पेशे के रूप में हराम है।” वह इसमें कई बार इस बात को दोहराता नजर आ रहा है। इसके अलावा वह कहता है, “मैं लोगों को इस पेशे में जाने के लिए नहीं कह सकता। मैं ये भी नहीं चाहता कि मेरा बेटा भी कभी एक प्रोफेशनल फुटबॉल प्लेयर बने।”

मालूम हो कि ब्रिटेन ने भी साल 2010 में जाकिर नाइक को नफरत फैलाने के आरोपों के चलते बैन कर दिया था। भारत में उस पर मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद को बढ़ावा देने, अवैध धर्मांतरण, नफरत फैलाने सहित कई मामलों चल रहे हैं।

वहीं, कतर में सोमवार (21 नवंबर 2022) को एक पत्रकार को अमेरिका और वेल्स के बीच मैच के दौरान अहमद बिन अली स्टेडियम में रेनबो कलर की टी-शर्ट पहनने के कारण सुरक्षाकर्मियों ने हिरासत में ले लिया। यूएस बेस्ड ग्रांट वाहल के रूप में पहचाने जाने वाले पत्रकार ने जो टी-शर्ट पहनी थी, उसमें कुछ-कुछ रंग LGBTQ समुदाय के फ्लैग जैसा लग रहा था। इसके लिए उन्हें पहले एक सुरक्षा गार्ड ने रोका और फिर शर्ट उतारने को कहा, क्योंकि कतर में समलैंगिकता गैरकानूनी है।

हिरासत के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकार से पूछताछ की कि क्या वह यूनाइटेड किंगडम से है। कथित तौर पर, न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पत्रकार को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। वाहल ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “सुरक्षा गार्डों में से एक ने मुझे बताया कि वे मुझे अंदर बैठे फुटबॉल प्रेमियों से बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जो इस टी-शर्ट को पहनने के लिए मुझे नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसके बाद फीफा के एक प्रतिनिधि ने बाद में मुझसे भी माफी माँगी।” पत्रकार ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा कि फीफा और यूएस सॉकर दोनों के प्रतिनिधियों ने मुझे बताया था कि सार्वजनिक रूप से टी-शर्ट और रेनबो कलर के झंडों से कतर विश्व कप में कोई समस्या नहीं होगी।

आखिरकार, लंबी पूछताछ के बाद अमेरिकी पत्रकार को रेनबो टी-शर्ट के साथ अहमद बिन अली स्टेडियम में प्रवेश की अनुमति दी गई। कहा जा रहा है कि एलजीबीटीक्यू अधिकारों, बोलने की स्वतंत्रता और अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी के बारे में बातें करने वाले वाहल ट्विटर पर इस घटना के बारे में बताकर गायब हो गए।

‘भौंकती थी, इसलिए मार दिया’: दिल्ली में गर्भवती कुतिया की हत्या में 4 गिरफ्तार, दावा- फादर के कहने पर 20 छात्रों ने किया हमला

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (22 नवंबर 2022) को ओखला के जाकिर नगर स्थित डॉन बॉस्को टेक्निकल इंस्टीट्यूट के 4 छात्रों को गिरफ्तार किया। इन चारों पर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में एक गर्भवती कुतिया को पीट-पीट कर मार डालने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, ये चारों आरोपित कुतिया के भौंकने से परेशान थे।

छात्रों की इस दरिंदगी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एक शिकायत के आधार पर दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस स्टेशन में इनके खिलाफ IPC की धारा 429, 34 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 (1) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने 19 नवंबर 2022 को इस घटना से संबंधित वीडियो और तस्वीरें शेयर की थीं। इसमें ये दरिंदे कुतिया को बेरहमी से घसीटते हुए ले जा रहे हैं।

फोटो साभार: तजिंदर बग्गा का ट्विटर अकाउंट

उन्होंने लिखा, “डॉन बॉस्को टेक्निकल इंस्टीट्यूट जाकिर नगर के 20 छात्रों के समूह ने एक गर्भवती कुतिया को मार डाला, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

इस घटना के सामने आए वीडियो में गर्भवती कुतिया टिन शेड के अंदर बैठी हुई है। इस कुतिया पर वहाँ मौजूद लड़के लगातार वार करते दिख रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है की एक हाथ में रॉड लिए हुए एक लड़का टिन शेड के अंदर जाता है। इसके बाद, वहाँ मौजूद अन्य लोग कुतिया को मारने के लिए कहते हैं। इसके बाद लड़के कुतिया को घसीट कर मैदान के बाहर फेंकते हुए दिख रहे हैं।

पत्रकार श्रेया अग्रवाल ने सोमवार (21 नवंबर 2022) को इस घटना को लेकर सिलसिलेवार कई ट्वीट किए। उन्होंने बताया कि यह घटना 30 अक्टूबर 2022 की है। दिल्ली के जाकिर नगर इलाके में डॉन बॉस्को टेक्निकल इंस्टीट्यूट के 20 युवकों के एक समूह ने एक गर्भवती कुतिया को पीट-पीट कर मार डाला।

पत्रकार ने अपने ट्वीट में दावा किया है कि संस्थान के फादर अभय के निर्देश पर ऐसा किया गया था। जब मामले की गहराई से पड़ताल की तो ये चौंकाने वाले विवरण सामने आए। जबकि मुख्यधारा का मीडिया लिखता रहा है कि यह अपराध छात्रों के एक समूह द्वारा किया गया था।

प्राथमिकी में कहा गया है कि अंकित और उसके भाई जैरोम की उपस्थिति में यह अपराध किया गया था। इसमें आगे यह भी कहा गया है कि यह संस्थान के प्रमुख फादर अभय के निर्देश पर किया गया था। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भाई अंकित और जैरोम स्टाफ सदस्य हैं न कि छात्र।

हालाँकि, किसी भी मीडिया रिपोर्ट में इसका जिक्र नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 15-20 पुरुषों ने इस हत्या को अंजाम दिया है, लेकिन फादर ने केवल दो नामों का उल्लेख किया। इस मामले में संस्थान के प्रमुख और कर्मचारियों के सदस्यों की संलिप्तता के महत्वपूर्ण विवरण को छिपाकर जानबूझकर जाँच को गुमराह करने की कोशिश की।

बता दें कि हैदराबाद में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहाँ आरोपित ने पहले तो कुत्ते के पिल्ले को रस्सी से बाँध कर पेड़ से लटका दिया। इसके बाद चौथी मंजिल से उसे नीचे फेंक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में आरोपित की मानसिक हालत कमजोर बताई जा रही है। साथ ही कहा जा रहा है कि घटना के समय वह नशे में था। हालाँकि, पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

जो हुआ गुस्से में हुआ, अब याद नहीं… श्रद्धा वालकर मर्डर पर कोर्ट में पलट गया आफताब, परिवार से मिलने की इजाजत भी मिली

श्रद्धा वालकर हत्याकांड के आरोपित आफताब को दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (22 नवंबर, 2022) को अदालत में पेश किया। ऐसा लग रहा है जैसे वो एक पेशेवर अपराधी की तरह जाँचकर्ताओं को गुमराह कर रहा हो। अदालत में आफ़ताब ने कहा कि ये घटना आवेश में आकर हो गई और उसे याद भी नहीं आ रहा है कि क्या-क्या हुआ था। जबकि पुलिस के सामने उसने कबूला था कि वो एक सप्ताह पहले से ही श्रद्धा की हत्या की साजिश रच रहा था।

आफताब को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंगलवार (22 नवंबर, 2022) को साकेत कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान आफताब ने कोर्ट के सामने कहा कि उसने जो भी किया, वह आवेश में आकर किया। यह भी दावा किया कि वह जाँच में पुलिस की पूरी मदद कर रहा है। हालाँकि, उसने इस घटना के संबंध में कहा कि वो सब कुछ भूल गया है और याद करने की कोशिश कर रहा है।

अपनी प्रेमिका श्रद्धा की हत्या कर उसके शव के 35 टुकड़े करने वाले आफ़ताब की पुलिस रिमांड भी 4 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। आफताब के वकील के मुताबिक, अदालत ने इस बयान को अपने रिकॉर्ड पर नहीं लिया है, जिसमें उसने गुस्से में ‘घटना हो जाने’ की बात कही है। अदालत ने आफ़ताब को उसके परिवार से मिलने की इजाजत भी दे दी है। इसके लिए उसने कोर्ट से निवेदन किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, पालीग्राफी टेस्ट के लिए आफताब ने सहमति भी दे दी है। दिल्ली पुलिस ने आफताब का पॉलीग्राफिक टेस्ट कराने के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) से संपर्क किया है। इसकी तैयारी चल रही है। एएनआई के ट्वीट के मुताबिक, आफ़ताब का मंगलवार (22 नवंबर, 2022) को पॉलीग्राफिक टेस्ट हो सकता है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस अब एक बार फिर इस मामले में उन जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाएगी, जहाँ आफताब ने शव के टुकड़ों को फेंका था। पुलिस सूत्रों की माने तो आफताब लगातार जाँच को भटकाने की कोशिश कर रहा है। वह लगातार अपने बयानों को बदल रहा है। वह कई बार श्रद्धा के शव के टुकड़ों, हथियार और श्रद्धा के मोबाइल को लेकर अपने बयान बदल चुका है।

वहीं मंगलवार (22 नवंबर, 2022) को ही दिल्ली हाई कोर्ट में उस याचिका पर सुनवाई होनी है जिसमें इस वीभत्स हत्याकांड की जाँच सीबीआई (CBI) से कराने की माँग की गई थी। सीबीआई जाँच की माँग से संबंधित याचिका सोमवार (21 नवंबर 2022) को दायर की गई थी।