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1 सेकंड के भीतर 83% पासवर्ड क्रैक कर लेते हैं ऑनलाइन चोर: Big Basket ने भी की गड़बड़ी, करना पड़ा ट्वीट डिलीट

क्या आपको पता है लोग कैसे-कैसे पासवर्ड रखते हैं? स्ट्रॉन्ग पासवर्ड कैसे बनाना चाहिए? खराब पासवर्ड बनाने के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं? दुनिया भर के इंटरनेट यूजर्स द्वारा उपयोग किए जाने वाले पासवर्ड पर नॉर्डपास की एक रिपोर्ट है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मिंट ने 15 नवंबर 2022 को एक स्टोरी प्रकाशित की।

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में 3.4 मिलियन (34 लाख) से अधिक लोगों ने अपना पासवर्ड रखा है – ‘पासवर्ड (password)’। मतलब भारत के तमाम इंटरनेट यूजर्स के बीच सबसे आम या यूँ कहें कि सबसे कॉमन पासवर्ड है – ‘पासवर्ड (password)’।

भारत के लोगों के द्वारा password के बाद ‘123456’ दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला पासवर्ड है। आश्चर्यजनक रूप से, इस सूची में ‘BigBasket’ चौथे स्थान पर रहा। ऑनलाइन ग्रोसरी शॉप की लोकप्रियता को दर्शाते हुए रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह भारत में चौथा सबसे आम पासवर्ड है।

मोस्ट कॉमन पासवर्ड पर नॉर्डपास की रिपोर्ट, स्रोत: नॉर्डपास

बिगबास्केट ने खुशी में कर दिया प्रचार

बिगबास्केट ने यह जाने बिना कि नॉर्डपास ने यह सूची कैसे तैयार की, अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर मिंट की रिपोर्ट को दर्शा दिया। कंपनी को लगा कि यह गर्व करने वाली बात है। हालाँकि, चीजें उनके अनुकूल नहीं थीं क्योंकि रिपोर्ट में इस्तेमाल की गई जानकारी डेटा लीक की घटनाओं पर आधारित थी।

अब डिलीट कर दिए गए ट्वीट में बिगबास्केट ने लिखा, ”अपने पार्टनर का नाम ‘पासवर्ड’ के तौर पर रखना गलत। हमारे नाम को ‘पासवर्ड’ के रूप में रखना सही।” हालाँकि, जैसे ही उन्हें अहसास हुआ कि इसमें गर्व करने की कोई बात नहीं है और सूची का मतलब है कि उनके सर्वर मजबूत और सुरक्षित नहीं थे, कंपनी ने ट्वीट को हटा दिया।

पासवर्ड पर नॉर्डपास की रिपोर्ट के मायने

एक ट्विटर यूजर रवि हांडा ने इस मुद्दे पर एक विस्तृत थ्रेड लिखा है। इस थ्रेड से इसके बारे में समझा जा सकता है। हांडा ने यह समझने के लिए नॉर्डपास से संपर्क किया कि वे सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले पासवर्ड पर रिपोर्ट कैसे लेकर आए। ईमेल करके हांडा ने नॉर्डपास से डेटा के स्रोत के बारे में पूछा।

जवाब में नॉर्डपास ने पुष्टि की कि उन्होंने स्वतंत्र शोधकर्ताओं के साथ मिलकर सूची तैयार की है, जिन्होंने 3 टेरा बाइट डेटा का अध्ययन किया।

दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि जिन स्वतंत्र शोधकर्ताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ थे। इसके अलावा, यह पूछे जाने पर कि 3-टीबी डेटा कहाँ से आया, नॉर्डपास ने कहा कि वे स्रोत का खुलासा नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने स्रोत के साथ एक ‘नन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (एनडीए)’ पर हस्ताक्षर किए थे। नॉर्डपास ने यह भी उल्लेख किया कि उक्त जानकारी एकत्र करने के लिए उनके पास किसी कंपनी या सर्वर के डेटाबेस तक पहुँच नहीं थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पासवर्ड सूची लीक हुए डेटा से मिली है।

इसके अलावा, मिंट की रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से बताया गया कि ‘पासवर्ड डेटा’ सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा विश्लेषण किए गए डेटा के आधार पर संकलित किए गए थे। नॉर्डपास के अनुसार, इस वर्ष 200 सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले पासवर्डों में से 73% पिछले वर्ष के समान थे।

नॉर्डपास की बनाई सूची में लगभग 83% पासवर्ड को एक सेकंड के भीतर क्रैक करना आसान था, जिसमें ‘पासवर्ड’ और ‘123456’ शामिल हैं। रिपोर्ट में बता दिया गया है कि हैकर्स को पासवर्ड के रूप में ‘बिगबास्केट’ का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं के पासवर्ड को क्रैक करने में लगभग पाँच मिनट का समय लगेगा।

बिगबास्केट और 2020 का डेटा सुरक्षा मामला

बिगबास्केट अक्टूबर 2020 में डेटा उल्लंघन के लिए जाँच के दायरे में रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 20 मिलियन उपयोगकर्ताओं का डेटा कथित रूप से लीक हो गया था। अप्रैल 2021 में, शाइनीहंटर्स के रूप में पहचाने जाने वाले एक हैकर समूह ने कथित तौर पर एक हैकर फोरम पर मुफ्त में डेटा जारी किया था। हैकर ने लिखा था कि डेटा फाइल में यूजर्स के ईमेल, पासवर्ड, नाम, फोन नंबर, पता, ऑर्डर डिटेल्स और अन्य जानकारियाँ हैं।

सूचना सुरक्षा फर्म Cyble Inc. ने इस उल्लंघन की पहचान की थी और 7 नवंबर 2020 को अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट प्रकाशित की थी। 1 नवंबर 2020 को उन्होंने ‘बिगबास्केट’ को उल्लंघन के बारे में सूचित किया था। कंपनी ने उनसे उल्लंघन का खुलासा नहीं करने का आग्रह किया। Cyble ने उन्हें सलाह दी कि वे ग्राहकों को बताएँ क्योंकि उन्हें उल्लंघन के बारे में जानने का अधिकार है।

7 नवंबर 2020 को Cyble ने उल्लंघन के बारे में सार्वजनिक खुलासा किया। 9 नवंबर 2020 को बिगबास्केट ने स्वीकार किया कि डेटा लीक हो गया था। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि न केवल बिगबास्केट के डेटा बल्कि अन्य कंपनियों के डेटा भी लीक (मतलब चोरी) हो गए था। Cyble को बाद में पता चला कि कुख्यात हैकर समूह शाइनीहंटर्स इस उल्लंघन के पीछे था।

यह संभव है कि सामान्य (कॉमन) पासवर्ड सूची को संकलित करने के लिए उपयोग किए गए लीक डेटा में बिगबास्केट से लीक हुआ डेटा भी शामिल है। इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि बिगबास्केट को पासवर्ड के रूप में उपयोग करने वाले अधिकांश लोग ऑनलाइन स्टोर के ग्राहक हैं। संभवत: उन्होंने इसे अपने बिगबास्केट अकाउंट के लिए उपयोग किया हो।

ऑपइंडिया ने इस लिस्ट के बारे में नॉर्डपास से संपर्क किया है। जैसे ही उनका मेल आएगा, हम इस खबर को अपडेट करेंगे।

भाग र​हा था सूफियान, UP पुलिस ने मारी गोली: निधि गुप्ता की हत्या के बाद से था फरार, मुस्लिम बनने का डाल रहा था दबाव

उत्तर प्रदेश के निधि गुप्ता हत्‍याकांड (Nidhi Gupta Murder) में फरार चल रहे आरोपित सूफियान को शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को लखनऊ पुलिस ने एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी लखनऊ के ठाकुरगंज से हुई है। सूफियान पुलिस से भागने की कोशिश कर रहा था। एनकाउंटर में आरोपित के पैर में गोली लगी, जिससे वह घायल हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने एनकाउंटर के तुरंत बाद घायल आरोपित को गिरफ्तार किया और उसे ट्रॉमा सेंटर लेकर गई। यहाँ उसका इलाज चल रहा है। अभी सूफियान खतरे से बाहर है। सोशल मीडिया पर आरोपित की तस्वीर भी सामने आई है। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि वह एक जंगली इलाके में घायल अवस्था में जमीन पर पड़ा हुआ है।

बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद से सूफियान के घरवाले उसे बचाने का प्रयास कर रहे ​थे। वहीं, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने निधि के हत्यारे सूफियान पर 25 हजार का इनाम घोषित किया था। लखनऊ पुलिस निधि गुप्ता की मौत के बाद से लगातार सूफियान की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। उसके पीछे लखनऊ पुलिस की 6 से ज्यादा टीमें लगी हुई थीं। पुलिस को सूफियान के फोन की आखिरी लोकेशन चौक में मिली थी। वहीं एक टीम दिल्ली के लिए रवाना की गई थी। इस बीच उसकी लोकेशन दुबग्गा इलाके में पता चली और टीम वहाँ पहुँच गई। यहीं पर पुलिस टीम की सूफियान के साथ मुठभेड़ हो गई। खबर है कि वह ठाकुरगंज से बालागंज की ओर भाग रहा था।

निधि गुप्ता हत्‍याकांड

लखनऊ के दुबग्गा इलाके के डूडा कॉलोनी में 15 नवंबर 2022 को निधि गुप्ता नाम की लड़की हत्या कर दी गई थी। लड़की के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि सूफियान ने उसे चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया। इलाज के दौरान निधि की मौत हो गई थी। घटना के बाद से सूफियान फरार था। हत्या के पीछे का कारण निधि का धर्म परिवर्तन और निकाह से इनकार करना बताया गया है।

सूफियान पर आरोप है कि वह काफी समय से निधि के पीछे पड़ा था। वह उस पर धर्म परिवर्तन और निकाह का दबाव डाल रहा था। उसकी सनक से तंग आकर निधि को उसके परिजनों ने कुछ समय के लिए ननिहाल भी भेज दिया था। उसके वापस लौटते ही सूफियान की हरकतें फिर शुरू हो गई। इससे तंग आकर 14 नवंबर 2022 को निधि की माँ ने अपने भाई को बुलाया। वे सूफियान के घर जा रहे थे। इसी दौरान सूफियान ने पहले उन्हें धमकाया और फिर बाद में निधि को छत से धक्का दे दिया।

₹1.20 लाख देकर बनाया ईसाई, चर्च जाना बंद किया तो देने लगे धमकी: दलित महिला बोली- ₹90 हजार लौटाया फिर भी माँग रहे चार गुना पैसा

मध्य प्रदेश के दमोह से दलित को लालच देकर ईसाई बनाने और फिर उसे धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला का कहना है कि उसे और उसके पति को पैसे देकर ईसाई बनाया गया था। लेकिन, जब उन लोगों ने चर्च जाना बंद कर दिया तो उन्हें धमकी दी जाने लगी। धर्मांतरण के लिए दी गई रकम से चार गुना अधिक पैसे की माँग की जा रही है।

स्वराज्य की पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने इस महिला का वीडियो शेयर करते किया है। इसमें पीड़ित दलित महिला पादरी अजय लाल और उसके सहयोगियों पर 1 लाख 20 हजार रुपए देकर धर्मांतरण कराने और अब चर्च न जाने पर धमकी देने का आरोप लगा रही है।

मीडिया को पीड़िता ने बताया कि थॉमस, साजन व अन्य लोगों ने चर्च न आने और मूर्ति पूजा करने पर उन्हें कई बार धमकी है। पीड़िता का कहना है कि ईसाई धर्म अपनाने के लिए उसे जो पैसे दिए गए थे उससे अब चार गुना अधिक पैसे की माँग हो रही है।

पीडिता का कहना है कि जब ईसाई मिशनरी के लोगों ने धर्मांतरण के लिए उसे पैसे दिए थे, तब यह नहीं कहा था कि उन्हें पैसे लौटाने होंगे। पीड़िता का दावा है कि दिए गए पैसे में से उसने 90 हजार रुपए लौटा दिए हैं। बाकी पैसे भी वह वापस देने के लिए तैयार है। सबूत के तौर पर उसके पास डायरी में आरोपित के हस्ताक्षर भी हैं।

धर्मांतरण का शिकार हुई दलित महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि ईसाई पादरी और उसके लोगों का कहना है कि यदि वो और उसका पति चर्च नहीं जाएँगे तो उन्हें ब्याज के तौर पर चार गुना अधिक पैसे देने पड़ेंगे। पीड़ित दलित महिला का कहना है कि उसे और उसके पति को पानी की टंकी में डुबोकर धर्मांतरण कराया गया था। यही नहीं, उससे कहा गया था कि वह अपने भाइयों को भी चर्च लाए जिसके बाद उन्हें भी धर्मांतरित कर दिया गया।

बीते दिनों दमोह के ईसाई मिशनरी के हॉस्टल में धर्मांतरण का मामला सामने आया था। इसके बाद 13 नवंबर 2022 को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने दमोह देहात थाना में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इस एफआईआर में उस ईसाई पादरी अजय लाल का भी नाम शामिल है, जिस पर धर्मांतरण का शिकार हुई दलित महिला ने पैसे देकर धर्मांतरण कराने और अब चार गुना अधिक वसूली का आरोप लगाया है।

बिना नाम लिए PM मोदी ने पाकिस्तान को चेताया: आतंकवाद को खत्म करने जुटे दुनिया भर के देश, पड़ोसी इस्लामी मुल्क को नहीं भेजा न्योता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काउंटर-टेररिज्म फाइनेंसिंग पर ‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन की शुरुआत की। ‘नो मनी फॉर टेरर’ का यह तीसरा सम्मेलन है। इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को इस कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग देशों के 450 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पाकिस्तान को कॉन्फ्रेंस के लिए न्योता नहीं भेजा गया था।

‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन का आयोजन भारत में होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमारा देश उस समय से आतंकवाद का दंश झेल रहा है, जब दुनिया इसे गंभीरता से नहीं लेती थी। पीएम मोदी ने आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प लेते हुए कहा:

“दशकों से, अलग-अलग रूपों में आतंकवाद ने भारत को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की है। आतंकवाद के कारण हजारों जानें गईं लेकिन हमने हर तरह के आतंकवाद और उग्रवाद का बहादुरी से सामना किया है। हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक आतंकवाद का अंत नहीं हो जाता।”

बिना नाम लिए पाकिस्तान पर निशाना

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आतंकवाद मानवता, स्वतंत्रता और सभ्यता पर हमला है। उन्होंने इसके समाधान पर कहा कि केवल एक साथ मिलकर जीरो टॉलरेंस के साथ किया गया प्रयास ही आतंकवाद को हरा सकता है। पाकिस्तान का नाम लिए बगैर ही उन्होंने पड़ोसी देश पर निशाना साधते हुए कहा कि आतंकवादी संगठनों का वित्त पोषण कई स्रोतों से होता है। कुछ देशों के विदेश नीति में आतंकवाद का समर्थन निहित है। ऐसे देश आतंकवादी संगठनों को राजनीतिक, वैचारिक और वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेरर फंडिंग को संगठित अपराध करार दिया। उन्होंने कहा कि टेरर फंडिग को आतंकवाद से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने तर्क रखा कि इन गिरोहों के आतंकी संगठनों से गहरे संबंध होते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद अब तकनीक की मदद ले रहा है, ऐसे में तकनीक की मदद से ही इसे खत्म किया जा सकता है।

आतंकवाद और अर्थव्यवस्था

‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन को संबोधित करते हुए में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आतंकवाद का दीर्घकालिक प्रभाव गरीबों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे पर्यटन और व्यापार भी प्रभावित होते हैं। इसकी वजह से आतंकवाद ग्रसित इलाके के लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ता है।

देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ गरीबों की जीविका, उनके व्यवसाय आदि का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने आतंकवाद के खात्मे पर बल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आवश्यक है कि आतंवाद की जड़ों पर हमला किया जाए। आतंकवाद को खत्म करने के लिए बड़े, सक्रिय और व्यवस्थित प्रतिक्रिया की जरूरत है।

‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन का उद्देश्य

दिल्ली में 18-19 नवंबर 2022 को आयोजित इस सम्मेलन में मुख्य रूप से टेरर फंडिंग, आतंकवाद के लिए धन के औपचारिक व अनौपचारिक स्रोतों, जैसे हवाला नेटवर्क के उपयोग के विषयों पर चर्चा होनी है। इसके अलावा, नई तकनीक की मदद से किस तरह से आतंकवाद को फंड किया जा रहा है और उसे रोकने में जो परेशानियाँ आ रही हैं, उस पर भी चर्चा होनी है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन का उद्देश्य साल 2018 में पेरिस और साल 2019 में मेलबर्न में हुए पिछले दो सम्मेलनों में टेरर फंडिंग (आतंकवाद के वित्तपोषण) का मुकाबला करने के विषय पर अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के बीच हुई चर्चा को आगे ले जाना है।

नाजनीन बानो को TikTok पर दीपक से हुआ प्यार, घर वाले कर रहे थे विरोध: हिंदू बन मंदिर में लिए फेरे, नाम हुआ- नैंसी गोस्वामी

मध्य प्रदेश के मंदसौर (Mandsaur) में नाजनीन बानो सनातन धर्म स्वीकार कर नैंसी गोस्वामी बन गई हैं। नाजनीन बानो ने गुरुवार (17 नवंबर 2022) को गायत्री मंदिर में हिंदू रीति रिवाज से दीपक गोस्वामी के साथ सात फेरे लिए। नाजनीन गुना जिले की रहने वाली हैं। दोनों 2019 में टिक टॉक के जरिए मिले थे। नैंसी की उम्र 19 साल है और दीपक 22 वर्ष के हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुना जिले के कुंभराज में रहने वाली नाजनीन बानो (अब्बा का नाम मोहम्मद जफर) को 2019 में टिक टॉक पर दीपक (पिता का नाम विट्ठल गोस्वामी) पसंद आ गए। इसके बाद वह उन्हें वहाँ फॉलो करने लगी। नैंसी 9वीं तक पढ़ी है। वहीं, दीपक कॉमर्स में फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है। इसी एप के जरिए दोनों की दोस्ती हुई। कुछ समय बाद यह दोस्ती प्यार में बदल गई। युवती के घर वालों को जब इस बारे में पता चला तो इसका विरोध करने लगे। पर दोनों शादी कर एक-दूसरे के साथ जिंदगी बिताना चाहते थे, इसलिए वे 6 महीने पहले 13 मई 2022 बिना बताए घर से भाग गए। लेकिन अलग-अलग धर्म होने से वजह से दोनों शादी नहीं कर पा रहे थे।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले लड़के ने अपने परिवार से संपर्क किया और उन्हें बताया कि नाजनीन सनातन धर्म अपनाना चाहती है। इसके बाद युवक के पिता ने मंदसौर के चेतन्य सिंह राजपूत (जफर शेख) से संपर्क किया। फिर गुरुवार रात विधि-विधान से गायत्री मंदिर में सनातन धर्म अपनाकर नाजनीन, नैंसी गोस्वामी बन गई। फिर दोनों ने 7 फेरे लिए और ​विवाह के बंधन में बंध गए।

बता दें, मंदसौर में हाल में कई मुस्लिम हिंदू बने हैं। इस साल 27 मई को शेख जफर कुरैशी ने विधि-विधान से हिन्दू धर्म अपनाते हुए घर वापसी की थी। अब वो चैतन्य सिंह राजपूत बन गए हैं। यह जानकारी उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर की थी।

इसके बाद मंदसौर में ही एक मुस्लिम लड़की ने हिन्दू युवक से शादी करके सनातन धर्म अपनाया था। जोधपुर की इकरा ने  इशिका बनकर 9 सितम्बर 2022 को गायत्री मंदिर में विधि-विधान से घर वापसी की थी। इस शादी को चैतन्य सिंह राजपूत ने ही सम्पन्न करवाया था। 30 सितंबर को मध्य प्रदेश के मंदसौर के रहने वाले मोहम्मद निसार ने इस्लाम त्यागकर हिन्दू धर्म अपना लिया था। मोहम्मद निसार हिंदू धर्म अपनाकर अब सोनू सिंह बन गए हैं। उन्होंने 8 साल पहले हिन्दू युवती से शादी की थी।

श्रद्धा को बुरी तरह पीटता था आफताब, सिगरेट से जला देता था: दोस्त ने कैमरे के सामने किया खुलासा, कहा – ‘उसके अम्मी-अब्बू को सब पता’

श्रद्धा मर्डर केस (Shraddha Walker Murder) में आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) को लेकर कई और नए खुलासे हुए हैं। 2020 की मेडिकल रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि आफताब अक्सर श्रद्धा को बुरी तरह पीटा करता था। इसके अलावा ये दावा भी किया जा रहा है कि श्रद्धा की हत्या के बाद उसके शव के 35 टुकड़े करने वाले आफताब के अम्मी-अब्बू इस केस के बारे में सब कुछ जानते हैं।

यह दावा श्रद्धा के दोस्त रजत शुक्ला ने किया है। रजत ने मीडिया को बताया कि जब वह मुंबई में थी, तब भी आफताब उससे मारपीट करता था। जलते हुए सिगरेट से श्रद्धा को जला देता था। जले हुए निशान को श्रद्धा ने अपने दोस्तों को भी दिखाया था। उस वक्त उसके सभी दोस्त पुलिस में जाना चाहते थे। लेकिन श्रद्धा आफताब को सुधरने का मौका देना चाहती थी।

श्रद्धा के दोस्त रजत ने आजतक को बताया, “आफताब हैवान था। ये लोग महाराष्ट्र वसई के रहने वाले थे। वसई के ही पास नायगाँव पड़ता है। यहाँ ये दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहते थे। इनका जो एग्रीमेंट सामने आया है, उसके मुताबिक, इसमें इन दोनों ने खुद को पति-पत्नी दिखाया था। इसी एग्रीमेंट में आफताब के अम्मी-अब्बू के फोटो, उनके हस्ताक्षर और रजामंदी भी दिखी है।”

रजत ने दावा किया कि आफताब के अम्मी-अब्बू वसई के घर में रहते थे। वह केस की पूछताछ शुरू होने से 15 दिन पहले ही अपना घर छोड़कर कहीं जा चुके हैं। वे 23 साल से यहाँ रह रहे थे। इसका मतलब साफ है कि आफताब के घरवालों को इस बात की जानकारी थी कि उसने श्रद्धा का मर्डर कर दिया है।

श्रद्धा के दोस्त ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए आगे कहा कि क्या इतना मुश्किल है आफताब के जिंदा अम्मी-अब्बू को ढूँढना? पुलिस क्या कर रही है अभी तक? अगर आफताब के अभिभावक को जीवित पकड़ लिया जाता है, तो ये जो नार्को टेस्ट की बात हो रही है या वह जो कहानियाँ रच रहा है, उससे यह केस बहुत आसान हो जाएगा।

श्रद्धा ये सब कुछ क्यों सह रही थी? उसके दिमाग में आफताब को लेकर क्या चल रहा था? इसके जवाब में रजत ने कहा, “वह बहुत ही बोल्ड, स्ट्रॉन्ग और आउटस्पोकन लड़की थी। उसको किसी बात का डर नहीं था। वो ब्लंट थी, उसको जो पसंद आ रहा और जो नहीं पसंद आ रहा है, उसको बोलने की क्षमता रखती थी। जिस तरीके से पूरे देश में यह माहौल बनाया जा रहा है कि वो एक बेचारी थी, प्यार में पागल हो गई थी। ये सब चीजें बिल्कुल भी सही नहीं हैं। श्रद्धा उस किस्म की इंसान नहीं थी।”

रजत शुक्ला ने इसके बाद यह भी बताया कि वह इस रिलेशनशिप में किस तरह का बर्ताव कर रही थी। उन्होंने कहा:

“श्रद्धा इस मामले में कुछ ना कुछ छिपा रही थी। वो क्या बात थी, जिसकी वजह से वह कंट्रोल दिख रही थी। वो आफताब से डरी हुई दिख रही थी। मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा ब्लैकमेलिंग हो सकता है। एक मेल पाटर्नर, एक फीमेल पाटर्नर को कई लेवल पर ब्लैकमेल कर सकता है। हो सकता है कि कुछ प्राइवेट मूमेंट्स के बारे में।”

श्रद्धा के दोस्त रजत शुक्ला ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे यह भी शक जताया कि शायद उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई हो। उनके अनुसार श्रद्धा शायद मजबूरी में आफताब के साथ रह रही थी। इसके पीछे रजत ने तर्क दिया कि वो इस रिलेशनशिप से बाहर निकलना चाहती थी, कई बार दोस्तों से उसने इस बारे में कहा भी था। फिर भी वह आफताब के साथ रहने को मजबूर थी।

रजत के मुताबिक, वह 2015 से 2019 तक श्रद्धा के साथ लगातार संपर्क में था। 2018 तक वह उससे ठीक से बात कर रही थी, उसके बाद वह थोड़ा डल हो गई थी। 2019 तक वह रूड हो चुकी थी। इसके बाद वह फ्रेंड सर्कल में कुछ ही लोगों तक सीमित रह गई थी। इसमें एक उसकी बेस्ट फ्रेंड थी और एक बचपन का दोस्त था।

दोस्तों के अलावा फैमिली में वो सिर्फ अपनी मम्मी और भाई के साथ टच में थी। रजत का कहना है, “हम एक दूसरे के बारे में जान जरूर रहे थे, लेकिन आफताब ने उसकी लाइफ को बहुत लिमिटेड कर दिया था। इससे श्रद्धा का किसी से सही से कॉमनिकेशन नहीं हो पा रहा था।”

पुण्यकोटि दत्तू योजना: गाय संरक्षण के लिए 1 दिन का वेतन देंगे कर्नाटक के सरकारी कर्मचारी, आम लोग भी ले सकेंगे गौवंश को गोद

कर्नाटक की भाजपा सरकार ने गौ वंश संरक्षण के लिए ‘पुण्यकोटि दत्तू योजना’ शुरू की है। योजना के तहत बेसहारा गायों को संरक्षण प्रदान किया जाएगा। योजना के सफल संचालन और वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए राज्य के सरकारी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटा जाएगा।

राज्य के वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य कर्मचारियों के नवंबर महीने की सैलरी में से एक दिन का वेतन इस योजना के लिए काटा जाएगा। हालाँकि यह स्वैच्छिक है। जो कर्मचारी योगदान नहीं देना चाहते, उन्हें अपने विभाग प्रमुख को 25 नवंबर से पहले लिखित में बताना होगा। इसके जरिए 80 से 100 करोड़ रुपए योजना के लिए जमा होने का अनुमान है।

रैंक के अनुसार कटेगा वेतन

वित्त विभाग के आदेश के अनुसार ग्रुप ए के कर्मचारियों के वेतन से लगभग 11,000 रुपए, ग्रुप बी के कर्मचारियों से 4,000 रुपए और ग्रुप सी के कर्मचारियों से लगभग 400 रुपए कटेंगे। वहीं ग्रुप डी के कर्मचारियों को इस कटौती से छूट दी गई है।

स्वैच्छिक है योगदान

राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योगदान स्वैच्छिक रखा गया है। वेतन से काटी जाने वाली एक दिन की राशि सीधे कर्नाटक पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के खाते में जमा होंगे। जो कर्मचारी यह योगदान नहीं देना चाहते हैं, उन्हें अपने विभाग प्रमुख को 25 नवंबर से पहले लिखित में जानकारी देनी होगी। पिछले महीने कर्नाटक के सरकारी कमचारी संघ के अध्यक्ष सीएस सदाक्षरी ने सीएम बोम्मई से मुलाकात कर संघ की ओर से कर्मचारियों के वेतन कटौती का सहमति पत्र सौंपा था। उन्होंने कहा था कि इस नेक काम में योगदान देने से हमें खुशी होगी।

मवेशियों के कल्याण और रखरखाव का होगा प्रबंध

जमा किए गए इस राशि से राज्य की सरकारी गौशालाओं में मवेशियों के कल्याण और रखरखाव के लिए प्रबंध किए जाएँगे। ‘पुण्यकोटि दत्तू योजना’ को बसवराज बोम्मई सरकार ने पिछले बजट पेश किया था। इसमें गायों को गोद लेने और उनके पालन-पोषण के लिए प्रोत्साहित करने के उपाय शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं अब तक 100 गायों को गोद लेने का दावा किया है। राज्य सरकार की मानें तो कर्नाटक सरकार की पुण्यकोटि दत्तू योजना के तहत गोद लेने के लिए विभिन्न गोशालाओं में एक लाख से अधिक गायें हैं। वहीं प्रत्येक जिले में नई गोशाला स्थापित की जा रही हैं, जिसके लिए 50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। बड़े पैमाने पर गौवंश संरक्षण के लिए लोगों की भागीदारी की आवश्यकता है और इसके लिए एक वेबसाइट भी बनाई गई है। इस योजना के तहत एक वर्ष के लिए गाय को गोद लेने के लिए ₹11,000 निर्धारित किया गया है।

एलन मस्क ने शेयर की ‘ट्विटर की कब्र’, ट्रेंड हुआ RIP Twitter: अल्टीमेटम के बाद सैकड़ों का इस्तीफा, 3700 को खुद निकाल चुके हैं

जब से ट्विटर की कमान एलन मस्क (Elon Musk) के हाथों में आई है, यह किसी न किसी वजह से रोज चर्चा में बना रहता है। सैकड़ों कर्मचारियों के इस्तीफे के बीच ट्विटर पर #RIPTwitter ट्रेंड हो रहा है। इसके साथ खूब मीम शेयर हो रहे हैं। खुद मस्क ने एक मीम शेयर किया है, जिसमें आप ट्विटर की कब्र देख सकते हैं।

RIPTwitter ट्रेंड के बीच मस्क का पोस्ट

यह सब तब हो रहा है जब ट्विटर के सैंकड़ों कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की खबरें सामने आई है। बताया जा रहा है कंपनी में बड़े स्तर पर किए जा रहे बदलाव और ‘हार्डकोर वर्क’ को लेकर कर्मचारी बेहद नाराज हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मस्क के काम के घंटे बढ़ाने और ‘हार्डकोर वर्क’ का अल्टीमेटम देने के बाद सैकड़ों कर्मचारियों ने खुद ही कंपनी से इस्तीफा दे दिया है। इन कर्मचारियों ने ऐसे समय में सामूहिक इस्तीफा दिया है, जब मस्क पहले से ही कंपनी में बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी और अन्य बदलावों को लेकर आलोचना का सामना कर रहे हैं।

27 अक्टूबर 2022 को 44 बिलियन डॉलर (362461220000 रुपए) में ट्विटर को खरीदने के बाद मस्क सीनियर मैनेजमेंट समेत 3700 पूर्व कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुके हैं। मस्क ने सबसे पहले भारतीय मूल के सीईओ पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) सहित CFO नेड सेगल और लीगल अफेयर-पॉलिसी हेड विजया गाड्डे की छुट्टी की थी और इन्हें कंपनी हेडक्वार्टर से भी बाहर निकलवा दिया था। इसके बाद उन्होंने ट्वीट किया था- द बर्ड इज फ्रीड (the bird is freed) यानी आजाद हुई चिड़िया।

बताया जा रहा है कि बुधवार (16 नवंबर 2022) को एलन मस्क ने कर्मचारियों को ईमेल के जरिए एक अल्टीमेटम दिया था। इसमें कंपनी के नए मालिक ने ट्विटर 2.0 के निर्माण को लेकर कर्मचारियों को कहा था, “ट्विटर को सफल बनाने के लिए हमें बेहद कट्टर होने की आवश्यकता है।” इसके साथ ही लंबे समय तक काम करने का भी जिक्र किया गया था। इस ईमेल से कर्मचारी खासा नाराज दिखे।

एलन मस्क ने कर्मचारियों को गुरुवार (17 नवंबर 2022) तक कंपनी को छोड़ने का विकल्प दिया था। उन्होंने कहा था कि यह आपको तय करना होगा कि क्या आप लंबे समय तक काम करना चाहते हैं या नहीं। अगर आप यहाँ काम नहीं करना चाहते हैं, तो आपको अगले तीन महीने की सैलरी दे जाएगी।

बता दें कि इससे पहले भी कई कर्मचारियों ने खुद से इस्तीफा दे दिया था। बीते हफ्ते ब्लूमबर्ग न्यूज ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके मुताबिक, ट्विटर के प्रति लोगों का विश्वास कम हुआ है। मस्क ने कंपनी के कर्मचारियों को बताया था कि वह ट्विटर के दिवालियापन से इनकार नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कर्मचा​रियों से यह भी कहा था कि उन्हें हफ्ते में 80 घंटे कार्य करने के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा उन्होंने कोरोना काल में काम करने के उस लचीलेपन को भी समाप्त कर दिया है, जिसमें कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी गई थी। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार एलन मस्क ने कहा था, “यदि आप नहीं आना चाहते हैं, तो आपका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा। हम सभी को और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है।”

राहुल गाँधी के साथ अंग्रेजों के ‘वफादार नौकर’ के प्रपौत्र, पुलिस के पास पहुँचे सावरकर के पोते और बाला साहब की शिवसेना

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) इन दिनों भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) पर हैं। अभी यात्रा महाराष्ट्र में है। शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को महात्मा गाँधी के प्रपौत्र तुषार गाँधी भी इस यात्रा में शामिल हुए। इधर वीर सावरकर पर की गई टिप्पणियों को लेकर रंजीत सावरकर और बालासाहेबांची शिवसेना ने राहुल गाँधी के खिलाफ पुलिस से शिकायत की है।

राहुल की यात्रा महाराष्ट्र में अपने अंतिम चरण में है। शुक्रवार सुबह अकोला जिले के बालापुर से यात्रा शुरू हुई। बुलढाणा के शेगांव में कॉन्ग्रेस नेता एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। यात्रा से तुषार गाँधी के जुड़ने को लेकर कॉन्ग्रेस ने ट्वीट कर कहा है, “आज भारत जोड़ो यात्रा में महात्मा गाँधी के प्रपौत्र श्री तुषार गाँधी शामिल हुए। वैसे भी इतिहास गवाह है- संकट में घिरे देश को बचाने गाँधी-नेहरू हमेशा साथ आए हैं।”

सावरकर पर टिप्पणी राहुल गाँधी ने महाराष्ट्र के वाशिम में गुरुवार को की थी। उन्होंने कहा था कि सावरकर ने अंग्रेजों की मदद की। जेल में रहने के दौरान माफीनामा लिखकर महात्मा गाँधी और भारतीय नेताओं को धोखा दिया। राहुल गाँधी ने कहा, “सावरकर ने अंग्रेजों को खत लिखकर कहा था कि सर, मैं आपका नौकर रहना चाहता हूँ। जब सावरकर जी ने माफीनामे पर हस्ताक्षर किए तो उसका कारण डर था। अगर वह डरते नहीं तो वह कभी हस्ताक्षर नहीं करते। इससे उन्होंने महात्मा गाँधी और उस वक्त के नेताओं के साथ धोखा किया था।”

इसके खिलाफ वीर सावरकर के पोते रंजीत ने मुंबई के शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने कहा है, “राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस ने सावरकर का पहली बार अपमान नहीं किया है। ये पहले भी सावरकर का अपमान कर चुके हैं। उनका बार-बार अपमान किया जा रहा है। अब हम इसे और नहीं सह सकते।”

इसी तरह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली बालासाहेबांची शिवसेना ने भी शिकायत दर्ज करवाई है। वंदना सुहास डोंगरे की शिकायत पर पुलिस आईपीसी की धारा 500 और 501 के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायत में स्वतंत्रता सेनानी को बदनाम करने और स्थानीय लोगों की भावनाओं को आहत करने का आरोप कॉन्ग्रेस नेता पर लगाया गया है।

वीर सावरकर पर टिप्पणी करते हुए राहुल गाँधी ने एक पत्र भी दिखाया था। इसकी भाषा के आधार पर सावरकर को अंग्रेजों का वफादार बताया था। वैसे इस तरह की भाषा में पत्र लिखने का उस जमाने में चलन था। सावरकर ही नहीं, उस समय महात्मा गाँधी ने भी अंग्रेजों को लिखे अपने पत्रों के अंत में इसी वाक्य का प्रयोग किया था। इससे पता चलता है कि जिस तरह आज ‘भवदीय’ आदि लिखकर पत्र के अंत में अपना नाम लिखने का चलन है, उसी तरह यह उन दिनों पत्रों को समाप्त करने का मानक और सामान्य तरीका था।

ड्यूक ऑफ कनॉट को लिखे पत्र के अंत में महात्मा गाँधी ने लिखा था, ‘I beg to remain, your royal Highness faithful servant, M.K Gandhi’ यानी ‘आपका सदैव नौकर बने का प्रार्थी….’। राहुल गाँधी पत्र लिखने के इसी तरीके पर सवाल उठा रहे हैं और इसे अंग्रेजों के मददगार के रूप में मान रहे हैं। पत्र के अंत में महात्मा गाँधी जो लिखते थे, वही सावरकर ने भी लिखा था।

टीवी पर कट्टरपंथी पाठ, नाबालिगों से रेप: जिस ‘इस्लामिक उपदेशक’ की 1000 गर्लफ्रेंड उसे 8658 साल की सजा, मिली थी 69000 गर्भनिरोधक गोलियाँ

तुर्की की अदालत ने इस्लामिक उपदेशक अदनान ओकतार (Adnan Oktar) को 8658 साल की सजा सुनाई है। टीवी पर कट्टरपंथी पाठ पढ़ाने वाला ओकतार अपने मॉर्डन कपड़ों और महिलाओं से घिरे रहने को लेकर चर्चा में रहा है। वह लड़कियों को किटेन्स बोलता था। अदालत में बताया था कि उसकी करीब 1000 गर्लफ्रेंड है।

इस्तांबुल की हाई क्रिमिनल कोर्ट ने उसे बुधवार (16 नवंबर 2022) को सजा सुनाई। उसे आतंकवादी संगठन चलाने, यौन शोषण, नाबालिगों से रेप, ब्लैकमेल करने, मनी लॉन्ड्रिंग और जासूसी के मामले में सजा सुनाई गई है। वह ऑनलाइन ए9 टीवी चैनल पर इस्लामिक उपदेश देता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओकतार जब टीवी पर कट्टरपंथी पाठ पढ़ाता था तब उसके चारों तरफ छोटे कपड़ों में महिलाएँ मौजूद रहती थीं। वह इन महिलाओं को ‘किटेन्स (kittens)’ यानी बिल्ली कहता था। उसके इस शो की खूब आलोचना भी होती रही है। सोशल मीडिया पर भी उसके कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिसमें वह महिलाओं के साथ डांस करता हुआ नजर आ रहा है।

फोटो साभार: breezyscroll

अदालत के फैसले के बाद आरोपित अदनान ने कहा, “हमें आपसे बहुत प्यार है। हमें अपनी सरकार पर पूरा भरोसा है। हम इस फैसले से खुश हैं। ये अल्लाह का फैसला है। हमारे जीवन में अच्छे दिन हैं। इस्लाम पूरी दुनिया पर राज करेगा। तुर्की एक सुंदर देश होगा। यह फैसला फायदेमंद हो सकता है।“

मालूम हो कि पिछले साल 66 वर्षीय अदनान ओकतार को यौन उत्पीड़न, नाबालिगों के यौन शोषण, धोखाधड़ी और राजनीतिक और सैन्य जासूसी के प्रयास सहित अन्य अपराधों के लिए 1,075 साल की सजा सुनाई गई थी। 236 अन्य लोगों पर उसके संगठन से जुड़े होने और उसका सदस्य होने का आरोप लगाया गया था, लेकिन इस फैसले को ऊपरी अदालत ने पलट दिया था।

इसी तरह इससे पहले दूसरे मामलों में ओकतार को 891 साल की सजा सुनाई गई थी। उसके खिलाफ एक आपराधिक संगठन चलाने, यौन शोषण, शिक्षा के अधिकारों से वंचित करने, यातना, अपहरण और गैरकानूनी तरीके से व्यक्तिगत डेटा इकट्ठा करने के आरोप थे। उसके द्वारा किए गए अपराधों की लिस्ट इतनी लंबी है कि उसकी सजा बढ़ाकर 8658 साल कर दी गई।

बता दें कि इस्तांबुल की पुलिस अपराध इकाई ने 2018 में अदनान ओकतार के विला पर छापा मार कर सैकड़ों समर्थकों के साथ उसे गिरफ्तार किया था। छापेमारी के दौरान पुलिस को पता चला कि वह इस्लामिक उपदेशक बनकर आपराधिक गिरोह चलाता है। इसके अलावा उसके घर में पुलिस को लगभग 69000 गर्भ निरोधक गोलियाँ मिली थीं। इसको लेकर उपदेशक ने अदालत में दावा किया था कि इसका इस्तेमाल वह स्किन से संबन्धित और मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने के लिए करता था।