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ट्विटर ने ‘$8 वाली ब्लू टिक स्कीम’ पर लगाई रोक, अलग-अलग रंग से होगा वेरिफिकेशन: एलन मस्क का ऐलान, बोले- फर्जीवाड़ा रुकने तक नहीं करेंगे स्कीम लॉन्च

सोशल मीडिया साइट ट्विटर इन दिनों लगातार चर्चा में है। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क (Elon Musk) ने जब से इसे टेकओवर किया है, वह इसकी नीतियों में बदलाव कर रहे हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले 8 डॉलर के बदले ब्लू टिक देने की स्कीम लॉन्च की थी। फिर फर्जी अकाउंट की समस्या के बाद इसे बंद कर दिया और बाद में सूचित किया कि वह इस सर्विस को नई तैयारी के साथ 29 नवंबर 2022 को रिलॉन्च करेंगे। हालाँकि अब खबर है कि मस्क ने ब्लू टिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया के रिलॉन्च को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

एलन मस्क ने मंगलवार (22 नवंबर 2022) को ट्वीट कर बताया कि फर्जी खातों की जाँच पड़ताल होने तक ब्लू टिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि संभवतः व्यक्ति और संस्था को अलग-अलग कलर का वेरिफिकेशन टिक दिया जाएगा।

दरअसल ब्लू टिक खातों के वेरिफिकेशन के लिए शुल्क चुकाने के मस्क के फैसले को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी। कई लोगों ने इसे समानता की दिशा में उठाया गया कदम बताया था। वहीं इस नियम के तहत कई फर्जी अकाउंट भी वेरिफाइड हो गए थे। इसका सोशल मीडिया यूजर्स ने मजाक भी उड़ाया था।

मस्क के इस फैसले के बाद दुनिया की दिग्गज फार्मेसी कंपनी Eli Lilly (LLY) को 1.20 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया था। दरअसल कंपनी के नाम से एक फर्जी अकाउंट बना लिया गया था और केवल 8 डॉलर देकर उसे वेरिफाई करवा लिया गया था।

इसके बाद इस फेक अकाउंट से यह ट्वीट किया गया था कि ‘Insulin is Free Now’। कुछ निवेशकों ने इसे सच मानकर पैसे निकालने शुरू कर दिए थे। इस कारण कंपनी के शेयर्स एक दिन में 4.37 फीसदी तक गिर गए थे और कंपनी को लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया था।

इन्हीं सब वजहों से मस्क ने ब्लू टिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया को रोक दिया था और इसे 29 नवंबर 2022 को रिलॉन्च करने की बात कही थी।

उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “ब्लू वेरिफाइड को 29 नवंबर 2022 से फिर से लॉन्च किया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह एकदम रॉक सॉलिड है।”

मस्क ने इसके साथ ही कहा था कि कोई शख्स सेलेब्रिटी है या नहीं, इसका फैसला यूजर्स पर छोड़ देना चाहिए। वहीं मस्क ने नए तरीके से ब्लू टिक दिए जाने के बारे में कहा कि नए नियमों के हिसाब से अगर आप अपने सत्यापित नाम को बदलते हैं तो आपको चेकमार्क का नुकसान हो सकता है। इसे तभी बहाल किया जाएगा जब यह ट्विटर के सेवा की शर्तों को पूरा कर लेगा।

डिप्रेशन में थी लड़की, मौलवी ने ‘जिन्न सवार है’ कह कर बना दिया निकाहनामा: फिरोज ने किया रेप, अश्लील वीडियो बना कर ऐंठे लाखों रुपए

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ फ़िरोज़ नाम एक एक व्यक्ति पर अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की का निकाहनामा बनवाने के साथ रेप और ब्लैकमेल कर के पैसे ऐंठने का आरोप लगा है। इसी मामले में एक मौलवी द्वारा दिखाए गए जिन्न के डर की भी चर्चा हो रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला थाना बसंत विहार क्षेत्र का है। यहाँ पर काँवली इलाके में रहने वाली एक युवती ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया कि वो कोरोना काल में पढ़ाई और कैरियर को ले कर डिप्रेशन में थी। उसके पड़ोस में फ़िरोज़ नाम का एक व्यक्ति रहता था, जो मूल रूप से सहारनपुर का निवासी है। फ़िरोज़ ने पीड़िता को बातचीत के दौरान विश्वास में ले लिया। पीड़िता ने फ़िरोज़ को अपनी समस्या बताई तो उसने एक मौलवी का परिचय दिया और अपने साथ पीड़िता को ले कर गया।

आरोप है कि मौलवी ने पीड़िता पर जिन्न की सवारी होने का डर दिखाया। मौलवी ने पीड़िता को बताया कि अगर उसका निकाह जल्द नहीं हुआ तो जिन्न उसे मार डालेगा। इसी दौरान उसने लड़की को फ़िरोज़ से निकाह करने की सलाह भी दे डाली। पीड़िता को बताया गया कि केवल फर्जी निकाहनामा बनवाना है। जिन्न से डरी पीड़िता इस निकाहनामें के लिए तैयार हो गई। निकाहनामा तैयार करते समय कागजातों में 2 गवाह भी डाले गए। इसमें एक गवाह का नाम विकास और दूसरे का जुल्फिकार है। बताया जा रहा है कि यह निकाहनामा 27 अक्टूबर, 2020 को बनाया गया।

अपनी शिकायत में पीड़िता ने आगे बताया है कि 26 जनवरी, 2021 को फिरोज ने उसे अपने कमरे पर बुलाया। इस दौरान फ़िरोज़ ने युवती के साथ रेप किया और उसका अश्लील वीडियो भी बना डाला। बाद में इसी वीडियो का डर दिखा कर आरोपित ने पीड़िता से 2 लाख 70 हजार रुपए ऐंठ लिए। फ़िरोज़ पर आरोप है कि उसने पैसे लेने के बाद भी निकाहनामे की कॉपी लड़की के पड़ोसियों को भेज दिया। इस से लड़की के परिवार की मोहल्ले में काफी बदनामी हुई। बाद में फ़िरोज़ निकाहनामा और अश्लील वीडियो छिपाने के नाम पर पीड़ित परिवार से 5 लाख रुपए की और माँग करने लगा।

पुलिस के मुताबिक तहरीर के आधार पर फ़िरोज़ व उसके 2 साथी विकास और जुल्फिकार पर FIR दर्ज कर ली गई है। मामले की जाँच की जा रही है।

राम नाम की गूँज, मंत्रोच्चार और विशाल मूर्ति: दर्शकों को टीजर में भाए ‘हनुमान’ , बोले- आदिपुरुष के मेकर्स को सीखना चाहिए

तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर निर्देशक प्रशांत वर्मा की फिल्म ‘हनुमान’ का टीजर रिलीज होने के बाद से सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा है। दर्शकों को फिल्म के वीएफएक्स इतने कमाल के लग रहे है कि वो उसकी तारीफ करते नहीं थक रहे। 

खास बात बात यह है कि ‘हनुमान’ का टीजर आते ही एक बार फिर सोशल मीडिया पर ‘आदिपुरुष’ की चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि टीजर बनाना अगर सीखना है तो हनुमान के मेकर्स से सीखना चाहिए।

बता दें कि हनुमान का टीजर ‘राम’ नाम की गूंज से शुरू होता है और फिर बैकग्राउंड में मंत्रोच्चारण सुनाई देता रहता है। पहले ही दृश्य में भगवान हनुमान की इतनी विशाल मूर्ति है कि किसी की भी नजर उसे एक बार देखने के बाद हट नहीं सकती। टीजर में आगे जब हीरो की एंट्री होती है तब भी उसके हाथ में गदा होता है और जब टीजर खत्म होने लगता है तब बर्फ के शिवलिंग में हनुमान जी की झलक देखने को मिलती है।

एक ही दिन में हनुमान फिल्म के टीजर को 5.5 मिलियन लोगों द्वारा देखा जा चुका है। दर्शकों को इस टीजर में जो बात पसंद आ रही है वो यह कि अगर फिल्म का नाम हनुमान है तो उस नाम का कहीं मखौल नहीं उड़ाया गया। जबकि आदिपुरुष फिल्म में राम-सीता-हनुमान-रावण-लक्ष्मण का अभिनय करने वाले एक्टर की वेशभूषा पर सवाल खड़े हुए थे। यही वजह है कि दोनों फिल्मों की तुलना हो रही है।

कहा जा रहा है कि एक फिल्म 12 करोड़ रुपए लगाकर बनी और उसका टीजर इतना प्रभावशाली है। वहीं आदिपुरुष 600 करोड़ रुपए लगाकर बनी और इस तरह फिल्म में भावनाओं का मजाक उड़ा दिया गया। सोशल मीडिया रिएक्शन देख पता चल रहा है कि लोगों को आदिपुरुष से ज्यादा हनुमान फिल्म का इंतजार है। लोग इसे भारतीय सिनेमा की अगली बड़ी फिल्म के तौर पर देख रहे हैं।

एक यूजर लिखते हैं, “हनुमान का क्या सुंदर टीजर है। छोटे बजट में और सीमित संसाधनों में प्रशांत वर्मा ने क्या गजब काम किया है। वीएफएक्स और सीजेआई जब आदिपुरुष फिल्म से बेहतर है।”

उल्लेखनीय है कि प्रशांत वर्मा की फिल्म में तेजा सज्जा, अमृता अय्यर, वरलक्ष्मी सरथकुमार मुख्य किरदारों में हैं। इनके अलावा दीपल शेट्टी, विनय राय, सत्या भी होंगे। फिल्म का निर्देशन जहाँ प्रशांत वर्मा ने किया है। वहीं इसे प्रोड्यूस निरंजन रेड्डी ने किया है।

अब उमर खालिद ने ‘बहन की निकाह’ के लिए माँगी बेल: प्रेग्नेंसी पर सफूरा जरगर तो भतीजी की निकाह पर रिफाकत अली को मिल चुकी है जमानत

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों (Delhi Anti Hindu Riots) के आरोपित उमर खालिद (Umar Khalid) को दिल्ली हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2022 में नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया था। अब उसने अपनी ‘बहन की निकाह’ का हवाला देकर दो सप्ताह की अंतरिम जमानत माँगी है। इस संबंध में कड़कड़डूमा कोर्ट में 25 नवंबर को सुनवाई होनी है। वैसे इस तरह के आधार पर जमानत की गुहार लगाने वाला खालिद दिल्ली दंगों (Northeast Delhi Riots) का पहला आरोपित नहीं है। रिफाकत अली और सफूरा जरगर भी इस आधार पर राहत पा चुके हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक उमर खालिद ने यह याचिका 18 नवम्बर 2022 को कड़कड़डूमा कोर्ट में दाखिल की। मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत कर रहे हैं। याचिका पर न्यायालय ने अभियोजन पक्ष से जवाब माँगा है। खालिद ने कहा है कि उसकी छोटी बहन की निकाह 28 दिसंबर को है। 26 और 27 दिसंबर को निकाह से जुड़े अन्य रस्म हैं। लिहाजा उसे 20 दिसंबर 2022 से तीन जनवरी 2023 तक के लिए अंतरिम जमानत दी जाए।

18 अक्टूबर को भी उमर खालिद ने जमानत अर्जी दी थी जो अभियोजन पक्ष के विरोध के बाद ख़ारिज कर दी गई थी। दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे के मामले में पुलिस ने खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया था। दंगों में सक्रिय भूमिका के आरोप में उस पर UAPA के तहत केस दर्ज है। अप्रैल 2022 में भी दिल्ली हाई कोर्ट ने दंगों के मुख्य साजिशकर्ता उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने इस दौरान उसके बयान को भड़काऊ और आपत्तिजनक माना था।

गौरतलब है कि 23 जून 2020 को दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेग्नेंट सफूरा जरगर को ‘मानवता के आधार’ पर जमानत दी थी। उससे पहले तीन बार उसकी जमानत याचिका खारिज की गई थी। इसी तरह सितम्बर 2021 में दिल्ली दंगों के एक अन्य आरोपित रिफाकत अली को भतीजी की निकाह के लिए दो सप्ताह की बेल दी गई थी। उसे जमानत कड़कड़डूमा कोर्ट के सेशन जज अमिताभ रावत ने दी थी जो खालिद की याचिका पर भी सुनवाई कर रहे हैं। उससे पहले अली को भी जमानत देने से अदालत ने इनकार किया था।

AAP विधायक गुलाब सिंह को भीड़ ने दौड़ा-दौड़ाकर थप्पड़ मारे, बैठक छोड़ भागे: Video वायरल, दावा- MCD टिकट बेचने पर हुई धुनाई

दिल्ली नगर निगम चुनावों (Delhi MCD Election 2022) में पैसे लेकर टिकट बेचने के आरोपों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) विवादों में है। इसी आरोप में सोमवार (21 नवंबर 2022) को ‘आप’ विधायक गुलाब सिंह यादव (Gulab Singh yadav) की पिटाई कर दी गई। इसका वीडियो वायरल है। वीडियो में विधायक को बैठकर छोड़कर भागते देखा जा सकता है।

बीजेपी दिल्ली ने यह वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, “पिट गए AAP के विधायक जी। आम आदमी पार्टी विधायक गुलाब सिंह यादव को टिकट बेचने के आरोप में आप कार्यकर्ताओं ने दौड़ा-दौड़ा करके पीटा। केजरीवाल जी, ऐसे ही AAP के सभी भ्रष्टाचारी विधायकों का नंबर आएगा।”

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि विधायक खुद को बचाने के भाग रहे हैं, जबकि कुछ लोग उनका पीछा कर रहे हैं। इस दौरान कुछ लोगों ने धक्का-मुक्की की और आप विधायक के कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधायक गुलाब सिंह यादव सोमवार को श्याम विहार में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक के दौरान अचानक से विधायक के साथ कार्यकर्ताओं की बहस शुरू हो गई। इसके बाद गुस्से में आकर कार्यकर्ता ‘आप’ विधायक गुलाब सिंह के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। गुलाब सिंह ने भागने की कोशिश की तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया।

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने भी इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “मटियाला विधानसभा से AAP के विधायक गुलाब सिंह यादव द्वारा टिकट बेचने पर नाराज AAP के ही कार्यकर्ताओं के द्वारा उनकी पिटाई की यह वीडियो देख, कहीं अरविंद केजरीवाल जी की भी यादाश्त ना चली जाए, क्योंकि इन सभी भ्रष्टाचारियों के KINGPIN तो अरविंद केजरीवाल ही हैं।”

दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “जिस सुमित शौकीन ने कल का कार्यक्रम किया, वह खुद कह रहा है कि उसने टिकट के लिए केजरीवाल और गुलाब को 1 करोड़ रुपए दिए थे। लेकिन केजरीवाल को शायद कोई बड़ा ग्राहक मिल गया और उसने इसकी टिकट काट दी।”

सोमवार रात आप विधायक ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, “भाजपा बौखला गई है। भाजपा टिकट बेचने के बेबुनियादी आरोप लगवा रही है। अभी में छावला थाने में हूँ। मैंने देखा भाजपा का निगम पार्षद और इस वार्ड से भाजपा का उम्मीदवार उन लोगों को बचाने थाने में मौजूद हैं। इससे बड़ा सबूत और क्या होगा। मीडिया यहाँ मौजूद है भाजपाई से जरूर पूछे।”

बता दें कि दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए 4 दिसंबर को वोट डाले जाएँगे। 7 दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएँगे। बीजेपी ने 21 नवंबर 2022 को एक स्टिंग के जरिए खुलासा किया था कि आप नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ता बिंदू श्रीराम से एमसीडी चुनावों में टिकट देने के बदले 80 लाख रुपए की माँग की थी। आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी पर भी कमलानगर वार्ड नंबर 69 सीट से टिकट के बदले गोपाल खारी नाम के शख्स से 90 लाख रुपए लेने का आरोप है। इस मामले में ACB तीन लोगों को गिरफ्तार भी कर चुकी है।

तिहाड़ में सत्येंद्र जैन को मसाज देने वाला निकला ‘बलात्कारी’, Video लीक होने पर AAP ने बताया था- फिजियोथेरेपिस्ट: IAP चीफ ने भी लताड़ा

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अरविंद केजरीवाल सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) के मसाज मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। एक वायरल वीडियो में सत्येंद्र जैन को जिस शख्स से जेल में मसाज कराते हुए देखा गया था, वह नाबालिग से रेप का आरोपित है।

समाचार एजेंसी के मुताबिक, तिहाड़ जेल के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सत्येंद्र जैन की मालिश करने वाले कैदी का नाम रिंकू है। वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं है। रिंकू एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में जेल में बंद है। उस पर पॉक्सो POCSO की धारा 6 और IPC की धारा 376, 506 और 509 के तहत केस दर्ज किया गया है।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी इस मामले में ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “सत्येंद्र जैन को मालिश और चंपी देने वाला शख्स असल में रेपिस्ट था। वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं बल्कि रेपिस्ट था। ‘आप’ ने किया इसका बचाव। उन्होंने सही मायने में तिहाड़ को थाईलैंड में बदल दिया।”

पिछले दिनों जेल में बंद सत्येंद्र जैन की मसाज का वीडियो सामने आया था। इसमें एक व्यक्ति उनकी मालिश करता हुआ दिख रहा था। आम आदमी पार्टी ने इस मामले पर अपनी सफाई दी थी। उन्होंने इसे सत्येंद्र जैन की बीमारी बताते हुए फिजियोथेरेपी बताया था। AAP के इस फिजियोथेरेपी वाले दावे को तिहाड़ जेल प्रशासन और भारतीय फिजियोथेरेपी एसोशिएशन ने सामूहिक रूप से नकार दिया था।

‘इंडियन एसोशिएशन ऑफ़ फिजियोथेरेपी’ के चीफ डॉक्टर संजीव झा ने उन दावों का खंडन किया था, जिसमें तिहाड़ के वायरल वीडियो में सत्येंद्र जैन की मालिश को उपचार बताया गया था। IAP इंडिया ऑफिसियल हैंडल से वीडियो जारी करते हुए संजीव झा ने बताया कि फुटेज में जो कुछ भी दिख रहा है उसे फिजियोथेरेपी नहीं कहा जा सकता। संजीव झा ने इस हरकत की निंदा करते हुए इसे फिजियोथेरेपी का अपमान बताया था। वीडियो में हो रही गतिविधि को फिजियोथेरेपी बताने वालों से डॉक्टर संजीव झा ने माफी माँगने के लिए कहा था।

गौरतलब है कि 19 नवंबर 2022 को शराब घोटाले के ​आरोपित और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सत्येंद्र जैन को लेकर ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था,”सत्येंद्र जैन के स्पाइन-इंजरी के दो ऑपरेशन हुए हैं। उनको डॉक्टर ने रेगुलर फिजियोथेरेपी बताई है। कोविड के बाद से उनके lungs में patch है, जो अभी ठीक नहीं हुआ है। किसी आदमी की बीमारी और उसको दिए जा रहे इलाज का मजाक बनाने की सोच ही बहुत घटिया है।”

‘जब नमाज पढ़ी जा सकती है तो मंत्र क्यों नहीं’: जिस ट्रेन में तीन बार पढ़ी गई नमाज, उसमें मंत्रोच्चार करने पर पूर्व सैनिक की पिटाई

दिल्ली से विशाखापट्ट्नम जा रही स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस में एक रिटायर्ड सैनिक की पिटाई का मामला सामने आया है। घायल पूर्व सैनिक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ट्रेन के पैंट्री कार मैनेजर और उसके साथियों पर मारपीट का आरोप है। इस संबंध में मध्य प्रदेश के GRP थाना में मामला दर्ज किया गया है। घटना रविवार (20 नवम्बर 2022) की है।

रिपोर्टों के अनुसार ट्रेन में मंत्रोच्चार करने पर पूर्व सैनिक विलास नाईक की पिटाई की गई। वे ट्रेन में रास्ता घेरकर नमाज पढ़ने के विरोध में मंत्रोच्चार कर रहे थे। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया, “रविवार को कुछ लोग सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने के लिए ट्रेन के गलियारे में बैठ गए। तीन बार ऐसा किया गया। मैंने बाथरूम जाने के लिए रास्ता माँगा तो मुझे लौटा दिया।”

पूर्व सैनिक के अनुसार जब वे मंत्रोच्चार करने लगे तो नमाजियों ने उन्हें हटने को कहा। इसी दौरान पैंट्री कार वाले आए और उनके साथ विवाद करने लगे। जब उन्होंने पूछा कि जब नमाज पढ़ी जा सकती है तो मंत्रोच्चार क्यों नहीं हो सकता तो उनके साथ मारपीट करने लगे।

रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दिन नाईक दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से विशाखापट्ट्नम की यात्रा पर थे। ट्रेन नंबर 12804 के स्लीपर क्लास S- 4 के जिस डिब्बे में वे सवार थे, उसमें कुछ मुस्लिम भी यात्रा कर रहे थे। नाईक का आरोप है कि इसी दौरान ट्रेन के डिब्बे में नमाज़ पढ़ी गई। उनके विरोध का नमाज़ियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। विरोध में उन्होंने मंत्रोच्चार शुरू किया तो पैंट्री कार के स्टाफ आ गए। आधे घंटे तक विवाद के बाद मामला हाथापाई तक पहुँच गया। पैंट्री मैनेजर हरवेश श्रीवास्तव ने अपने साथियों को बुला कर नाईक की पिटाई कर दी।

घटना पर सफाई देते हुए पैंट्री मैनेजर ने बताया है कि नाईक ने खुद ही खुद को चोट पहुँचाई। वहीं ट्रेन में यात्रा कर रहे मुजाकिर अहमद ने नमाज़ पढ़ने की बात कबूली है। उसने बताया कि जब नमाज़ पढ़ी जा रही थी तो नाईक टॉयलेट जाने की जिद कर रहे थे। इन सभी को बैतूल स्टेशन की चौकी जीआरपी पर उतार लिया गया। चौकी इंचार्ज एन एस ठाकुर के मुताबिक पैंट्री कार के मैनेजर व उनके साथियों के खिलाफ IPC  की धारा 294, 322, 34 के तहत FIR दर्ज कर जाँच की जा रही है।

रेलवे द्वारा घटना को लेकर दी गई जानकारी

रेल सुरक्षा बल नागपुर डिवीजन के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त ने एक प्रेस रिलीज जारी कर घटना की पुष्टि की है। बताया है कि इसके कारण बैतूल रेलवे स्टेशन पर ट्रेन करीब 18 मिनट तक रुकी रही। नाइक की शिकायत पर पैंट्री कार मैनेजर और उसके दो वेंडर पर मामला दर्ज किया गया है। मामले की जाँच की जा रही है।

रवीन्द्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास में TMC ने बना लिया था दफ्तर, हाईकोर्ट ने दिया ध्वस्त करने का आदेश: कहा – कोई पार्टी कहीं जाकर बना लेगी ऑफिस?

कलकत्ता हाईकोर्ट ने जोरासांको ठाकुरबारी (Jorasanko Thakurbari) में अवैध रूप से बनाए गए तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कार्यालय को लेकर नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट ने विवादास्पद कार्यालय को गिराने का आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति आर भारद्वाज की खंडपीठ ने सोमवार (21 नवंबर, 2022) को हेरिटेज बिल्डिंग के हिस्सों से पार्टी कार्यालय को हटाने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने कोलकाता नगर पालिका को निर्देश लागू करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 दिसंबर को है।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक यूनिवर्सिटी की हेरिटेज कमेटी महर्षि भवन के पुराने स्वरूप को वापस लाएगी। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि हेरिटेज विभाग की जिम्मेदारी है कि वह उस हिस्से के निर्माण को उसकी पूर्व स्थिति में लौटाए। जीर्णोद्धार के बाद कार्यालय की पहचान हेरिटेज बिल्डिंग के रूप में की जाए।

हाई कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि हेरिटेज बिल्डिंग न भी हो तो क्या कोई कहीं जाकर पार्टी आफिस बना सकता है? यदि आपके पास कोई पजेशन पेपर नहीं है, तो इसे गैर-मौजूद निर्माण माना जाएगा। क्या आप में से किसी ने उस कमरे का इस्तेमाल किया है? याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पार्टी कार्यालय अभी भी है। पुलिस वहां जाकर कार्यालय बंद करे और वह कमरा रवींद्र भारती को लौटा दे।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर के पैतृक घर ‘जोरासांको ठाकुरबारी’ के एक हिस्से को तृणमूल शिक्षाबंधु समिति के कार्यालय के रूप में अवैध रूप से तैयार करने का मामला सामने आया था। जानकारी के मुताबिक, जिस कमरे में रवीन्द्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने पहली बार बातचीत की थी, उसे पूरी तरह से नया रूप दिया गया है।

बंगाली पुनर्जागरण के साक्षी रहे महर्षि भवन की दीवारों को हरे रंग से रंगा गया था। दरवाजे और खिड़की, फर्श से भी सत्ताधारी दल से जुड़े समिति द्वारा छेड़छाड़ की गई है।

ऐसा माना जाता है कि भारतीय राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गीतकार बंकिम चंद्र चटर्जी और टैगोर पहली बार उसी कमरे में मिले थे। दीवारों पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की दो विशाल आकार की तस्वीरों को लगाया गया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी के जोरासांको परिसर में विरासत संरचनाओं के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि ठाकुरबारी के महर्षि भवन के कुछ कमरों को पार्टी भवन के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

पॉलीग्राफ से लेकर नार्को टेस्ट तक, आफताब अमीन पूनावाला ऐसे उगलेगा सच: जानिए कैसे काम करती है झूठ पकड़ने वाली मशीन, कोर्ट में कितनी कारगर

श्रद्धा वालकर हत्याकांड में हर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हालाँकि, अब भी मामले की पूरी सच्चाई सामने आना बाकी है। पुलिस आफताब के खिलाफ अधिक से अधिक सबूत जुटाते हुए कोर्ट में पेश करना चाहती है। ऐसे में, पुलिस आफताब का नार्को टेस्ट करना चाहती थी। हालाँकि, अब उसके नार्को टेस्ट से पहले पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट किया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है लाई डिटेक्टर और नार्को टेस्ट…

दरअसल, लाई डिटेक्टर मशीन झूठ पकड़ने वाली मशीन के नाम से भी जाना जाता है। इस मशीन को साल 1921 में कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी के छात्र जॉन अगस्तस लार्सन ने बनाया था। इस मशीन का मकसद अपराधियों के झूठ का पर्दाफाश करना था। भारत में किसी भी व्यक्ति का पॉलीग्राफ टेस्ट या नार्को टेस्ट कराने से पहले अदालत की अनुमति जरूरत होती है। फिलहाल, आफताब के केस में पुलिस को पॉलीग्राफ टेस्ट करने की अनुमति मिल गई है।

कैसे होता है पॉलीग्राफ टेस्ट

पॉलीग्राफ टेस्ट करने से पहले जिस व्यक्ति की जाँच करनी होती है उसके शरीर के 4-6 पॉइंट्स को मशीन के तारों के माध्यम से जोड़ा जाता है। इसके बाद, उससे कुछ ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जिनका केस से कोई संबंध नहीं होता। फिर, शुरू होता है असली टेस्ट और आरोपित से केस से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।

सवालों के दौरान जब आरोपित जवाब देता है तो यदि वह झूठ बोलता है तो उस समय उसकी प्लस रेट, ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट बढ़ने या घटने लगता है। साथ उसके हाथ या माथे पर पसीने आने लगता है। यह पूरा टेस्ट विशेषज्ञों की निगरानी में किया जाता है। विशेषज्ञ मशीन के डिस्प्ले व आरोपित के हाथों और अन्य जगहों पर आ रहे मशीन को देखकर बताते हैं कि वह झूठ बोल रहा है या सच।

पॉलीग्राफ टेस्ट की विश्वनीयता

कई रिसर्च में यह सामने आया है कि पॉलीग्राफ टेस्ट को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। दरअसल, पेशेवर अपराधी खुद को इस टेस्ट के लिए ऐसे तैयार कर लेते हैं कि टेस्ट के दौरान मशीन में किसी भी प्रकार का संकेत नहीं दिखता है और यह जो बोल रहे होते हैं उसे ही सच मानना पड़ता है। हालाँकि, अब तक की जाँच में यह सामने नहीं आया है कि आफताब आदतन अपराधी नहीं है। इसलिए, इस टेस्ट में बहुत सारे सच सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

पॉलीग्राफ टेस्ट से कितना अलग है नार्को टेस्ट

पॉलीग्राफ टेस्ट की ही तरह नार्को टेस्ट भी किसी आरोपित की सच्चाई सामने लाने के लिए किया जाता है। हालाँकि, इस टेस्ट में किसी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि ‘ट्रुथ सीरम’ नामक दवा का इंजेक्शन दिया जाता है। ‘ट्रुथ सीरम’ वास्तव में साइकोएक्टिव दवा होती है, जिसमें सोडियम पेंटोथोल, स्कोपोलामाइन और सोडियम अमाइटल जैसी दवाओं का उपयोग किया जाता है।

ये दवाएँ जैसे ही व्यक्ति के खून में मिलती है वैसे ही वह अर्धचेतन अवस्थ में पहुँच जाता है। साथ ही, यह उसके नर्वस सिस्टम को भी शिथिल कर देता है, जिससे आरोपित सभी सवालों के सही जवाब देना शुरू करता है।

अदालत की अनुमति मिलने के बाद, यह टेस्ट फॉरेंसिक एक्सपर्ट, जाँच एजेंसियों के अधिकारी, मनोवैज्ञानिक और डॉक्टरों की उपस्थिति में होता है। जिस व्यक्ति को ‘ट्रुथ सीरम’ का इंजेक्शन दिया जाता है वह व्यक्ति जब अर्धचेतन अवस्था में होता है तब उससे सवालों का सिलसिला शुरू होता है। चूँकि, व्यक्ति पूरी तरह होश में नहीं होता ऐसे में वह सब कुछ सच-सच बताने लगाता है।

चूँकि, नार्को टेस्ट के दौरान आरोपित अर्धचेतन अवस्था में होता है इसलिए वह बड़े सवालों को भूल सकता है। यही कारण है कि उससे छोटे-छोटे सवाल पूछे जाते हैं साथ ही सवालों को बार-बार दोहराया जाता है। इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है, जिसका उपयोग सबूत के तौर पर कोर्ट में किया जाता है।

नार्को टेस्ट प्रमाणिक नहीं

सुप्रीम कोर्ट के वकील अजय गौतम ने ऑपइंडिया को बताया कि नार्को टेस्ट कोर्ट में बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता। उनके मुताबिक, कई बार अपराधी अपनी शारीरिक क्षमता से नार्को और लाई डिक्टेटर जैसे टेस्ट में बच निकलते हैं। लेकिन वे सजा से नहीं बच पाते। जैसे निठारी केस। उनके अनुसार, इसी तरह यदि आफताब नार्को टेस्ट में बच निकलता है तो भी इसकी गारंटी नहीं है कि कोर्ट भी उसे निर्दोष मान लेगा।

ईरान की फुटबॉल टीम भी हिजाब के विरोध में, FIFA वर्ल्ड कप में राष्ट्रगान गाने से किया इनकार: महिला प्रदर्शनकारियों का किया समर्थन

हिजाब के विरोध में ईरान में कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहा है। अब इस विरोध प्रदर्शन की आग कतर में चल रहे फीफा विश्व कप (FIFA World Cup Qatar 2022) तक जा पहुँची है। ईरान की फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सोमवार (21 नवंबर, 2022) को इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप के अपने पहले मैच में देश का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खलीफा इंटरनेशनल स्टेडियम में (Khalifa International Stadium) जब राष्ट्रगान बजाया गया तो सभी 11 खिलाड़ी खामोश खड़े रहे। इस दौरान वे काफी भावुक दिखाई दिए। वहीं, स्टैंड में जमा हुए ईरानी फैंस ने राष्ट्रगान बजते ही चिल्लाना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ थम डाउन करने का इशारे करते हुए नजर आए।

दरअसल, ईरान में इस साल सितंबर में 22 साल की लड़की महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से यहाँ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। महिलाएँ सड़कों पर उतरकर हिजाब उड़ा रही हैं। अपने बाल काट रही हैं। वहीं ईरान में प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए लाठीचार्ज किया जा रहा है। ईरान में 2 महीने से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने 43 साल पहले 1979 में हुई उस क्रांति की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने देश को पूरा बदलकर रख दिया था।

वहीं, ईरान ने लाइव टेलिकास्ट के दौरान मैच से पहले लाइन में लगे खिलाड़ियों के फुटेज को सेंसर कर दिया है, क्योंकि जिस वक्त राष्ट्रगान बजाया गया था, सभी खिलाड़ी खामोश थे।

मैच की पूर्व संध्या पर कप्तान एहसान हजसाफी (Ehsan Hajsafi) ईरान की टीम के पहले सदस्य थे, जिन्होंने विश्व कप के दौरान अपने देश में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर बात की। उन्होंने कहा, “हम उनके साथ हैं। उनका समर्थन करते हैं। हमें उनसे सहानुभूति है।” उधर खिलाड़ी करीम अंसारीफर्ड और मुर्तजा पोरालीगंजी ने शुक्रवार (18 नवंबर, 2022) को ईरान में चल रहे महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के बारे में किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया, जबकि डच क्लब फेयेनोर्ड (Dutch club Feyenoord) के मिडफील्डर अलीरेजा जहानबख्श ने कहा कि इस तरह के सवाल टीम को भ्रमित करने के लिए एक चाल है।

महसा अमिनी की हत्या

उल्लेखनीय है कि ईरान में सितंबर 2022 को पहले 22 साल की महसा को निर्ममता से पीट-पीट कर कोमा में पहुँचाया। कथिततौर पर महसा ने ईरान में रहकर सही से हिजाब नहीं पहना था इसलिए पुलिस ने उस पर हमला किया और उन्हें इतना मारा कि उनका पहले ब्रेन डेड हुआ, वो कोमा में गईं और उसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा, मंदाना करीमी और नेटफ्लिक्स की हिट सीरीज सेक्रेड गेम्स में काम कर चुकी एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए 11 अक्टूबर 2022 को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया था।

इस वीडियो को उन्होंने ‘मॉय बॉडी-मॉय चॉइस’ का नाम दिया था। इसमें वह कैमरे के सामने एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतारती हुई नजर आ रही थीं।