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महरौली थाना, इस्लामी टोपी वाला और कॉन्ग्रेस का झंडा: पत्रकार ने पूछा आफताब का चेहरा क्यों ढक रहे थे, कहा- मैं नमाज को जा रहा था…

श्रद्धा वाकर (Shraddha walker) की हत्या से पूरा देश सन्न है। आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) ने हत्या के बाद उसके शव के 35 टुकड़े कर दिए थे। अब एक वीडियो सामने आया है जिसमें पत्रकार एक व्यक्ति से पूछ रहा है कि वह आफताब का चेहरा ढकने की कोशिश क्यों कर रहे थे। इस पर वह व्यक्ति भड़क गया और नमाज, मस्जिद और लोगों को परेशानी होने की बात करने लगा। इस वीडियो में एक व्यक्ति कॉन्ग्रेस का झंडा लिए हुए भी नजर आ रहा है।

यह वीडियो ABP न्यूज़ ने मंगलवार (15 नवम्बर 2022) को शेयर किया है। मंगलवार को दिल्ली पुलिस आफताब को लेकर महरौली के जंगल में गई थी, जहाँ उसने श्रद्धा की लाश के टुकड़े फेंके थे। वीडियो में एबीपी न्यूज के पत्रकार महरौली थाने के बाहर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। जंगल से आफताब को लेकर जब पुलिस की टीम थाने लौटती है तो वाहन के पास इस्लामी पहनावे में दिख रहा एक व्यक्ति गमछे से शीशे को ढकने की कोशिश करता है। वह पुलिस वाहन के साथ तब तक दौड़ता रहा, जब तक वह थाने के गेट के भीतर नहीं घुस जाती।

आप वीडियो की शुरुआत में इस्लामी पहनावे वाले इस व्यक्ति की हरकत देख सकते हैं। वीडियो के 1:50वें मिनट पर जब ABP न्यूज का रिपोर्टर उस व्यक्ति से उसका नाम पूछता है तो वह जवाब में कहता है, “बोलिए क्या करना है।” जब उससे आफताब के चेहरे को ढकने की कोशिश करने की वजह पूछी तो वह कहता है कि आप लोग महरौली की पब्लिक को परेशान कर रहे हैं। फिर वह व्यक्ति कहता है कि वह नमाज पढ़ने जा रहा है। यह रास्ता मस्जिद को जाता है। साथ ही पत्रकारों पर लोगों को परेशान करने का आरोप लगाने लगता है।

चेहरे ढकने के आरोपों को खारिज करते हुए वह व्यक्ति कहता है कि वह आरोपित को नहीं जानता। इसके बाद मस्जिद जाने की बात कह कर वह वहाँ से निकल जाता है। इस दौरान दाढ़ी वाला एक बुजुर्ग भी उसके पीछे खड़े दिख रहे हैं। बार बार पूछे जाने पर भी उसने अपनी पहचान नहीं बताई। वीडियो में पत्रकार के पीछे से एक व्यक्ति कॉन्ग्रेस का झंडा लेकर गुजरता हुआ भी दिख रहा है।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने श्रद्धा की हत्या और लाश के 35 टुकड़े काटने के आरोप में आफ़ताब को गिरफ्तार किया है। इस हत्या के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आफ़ताब के मुस्लिम के बजाए पारसी होने की भी अफवाह उड़ाई थी, जो बाद में आधारहीन साबित हुई थी।

श्रद्धा को काटते-काटते कटी थी आफताब की भी कलाई, दिल्ली के अस्पताल में जाकर लगवाए थे टाँके: डॉक्टर को बताया- फल काट रहा था

श्रद्धा वाकर (Shraddha walker) की लाश के टुकड़े करने के दौरान आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) भी जख्मी हुआ था। उसकी कलाई कट गई थी। इलाज के लिए वह दिल्ली के एक अस्पताल में गया था। डॉक्टर को बताया था कि फल काटने के दौरान हाथ पर कट लग गया। इस दौरान वह बेचैन भी लग रहा था। यह बात भी सामने आई है कि वह 18 मई से पहले ही श्रद्धा की हत्या करना चाहता था। लेकिन ऐन वक्त पर उसके इमोशनल होने के कारण उसने प्लान बदल दिया।

रिपोर्ट के अनुसार आफताब के फ्लैट की तलाशी के दौरान पुलिस को एक पर्ची मिली थी। इसके आधार पर वह छतरपुर के एपेक्स अस्पताल (Apex Hospital in Chhatarpur) के डॉ. अनिल सिंह तक पहुँची। उन्होंने बताया कि मई में आफताब इलाज कराने आया था। उसके हाथ पर चाकू के घाव थे।

डॉक्टर ने बताया, “मई में आफताब अस्पताल में आया था। उसके हाथ में कट लगा हुआ था। वह इंग्लिश में बात कर रहा था। इस दौरान वह काफी आक्रामक और बैचेन लग रहा था और गुस्से में लगातार जोर-जोर से बात कर रहा था।” उन्होंने कहा, “आम तौर पर, मरीज ऐसा नहीं करते हैं, लेकिन वह अन्य मरीजों से काफी अजीब और अलग लग रहा था।”

डॉक्टर ने आफताब के दाहिने हाथ पर 5-6 टाँके लगाए थे। जब डॉक्टर ने पूछा कि चोट कैसे लगी तो आफताब ने बताया कि जब वह फल काट रहा था, तभी चाकू फिसल गया और उसे चोट लग गई। डॉक्टर ने कहा, “मैंने उससे पूछा कि क्या यह चोट किसी लड़ाई के कारण तो नहीं लगी है, तो उसने फुल कॉन्फिडेंस के साथ इससे साफ इनकार कर दिया।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर ने बताया, “आफताब सुबह के वक्त आया था। मेरी असिस्टेंट ने मुझे बताया था कि इलाज के लिए कोई आया है। जब मैंने उसे देखा, तो उसका जख्म इतना गहरा नहीं था। मुझे भी कोई शक नहीं हुआ, क्योंकि वह साफ तौर पर चाकू का छोटा सा निशान लग रहा था। वह बिना घबराए सभी सवालों के जवाब दे रहा था। उसने कहा कि वह आईटी सेक्टर में बेहतर मौके की तलाश में मुंबई से दिल्ली आया है।”

आफताब ने 18 मई 2022 को श्रद्धा की गला दबाकर हत्या कर दी थी। उसके बाद उसके शव के 35 टुकड़े किए और इन्हें एक-एक कर 18 दिनों तक फेंकता रहा। एक रिपोर्ट के अनुसार उसने 18 मई से करीब एक सप्ताह पहले ही श्रद्धा की हत्या का फैसला कर लिया था। लेकिन उस दिन अचानक से श्रद्धा इमोशनल होकर रोने लगी। इसके बाद आफताब ने किसी और दिन उसे मारने का फैसला किया।

निधि मुस्लिम बनने को नहीं थी तैयार, सुफियान ने चौथी मंजिल से फेंका: अब लखनऊ में हिंदू लड़की हुई मजहबी सनक की शिकार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में निधि गुप्ता की हत्या कर दी गई है। धर्म परिवर्तन और निकाह से इनकार करने पर उसे जान से हाथ धोना पड़ा है। आरोप है कि सुफियान ने उसे चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया। घटना मंगलवार (15 नवम्बर 2022) की है। सुफियान फरार है।

यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है, जब पूरा देश आफताब द्वारा श्रद्धा वाकर के टुकड़े-टुकड़े कर देने की घटना से सन्न है। निधि की माँ का कहना है कि सुफियान उनकी बेटी का वीडियो बनाकर टॉर्चर कर रहा था। जब इसकी शिकायत उन्होंने सुफियान की अम्मी से की तो कथित तौर पर उसने दोनों का निकाह करा देने को कहा। रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित माँ की तहरीर पर सुफियान के खिलाफ हत्या और धर्म परिवर्तन की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है।

घटना दक्षिणी लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र की है। यहाँ डूडा कालोनी के ब्लॉक 41 में निधि का परिवार रहता है। हाईस्कूल तक पढ़ी निधि ब्यूटी पार्लर में काम सीख रही थी। सुफियान भी बगल के ब्लॉक 40 में अपने परिवार के साथ रहता है। वह काफी समय से निधि के पीछे पड़ा था। धर्म परिवर्तन और निकाह का दबाव डाल रहा था। उसकी सनक से तंग आकर निधि को उसके परिजनों ने कुछ समय के लिए ननिहाल भी भेज दिया था। उसके वापस लौटते ही सुफियान की हरकतें फिर शुरू हो गई।

सुफियान पर लड़की का वीडियो भी वायरल करने की धमकी देने का आरोप है। कहा जा रहा है कि सुफियान पिछले 15 दिनों से निधि को टॉर्चर कर रहा था। आरोप है कि वह धर्म परिवर्तन का दबाव डाल रहा था। इससे तंग आकर मंगलवार को निधि की माँ ने अपने भाई को बुलाया। वे सुफियान के घर जा रहे थे। इसी दौरान सुफियान ने पहले उन्हें धमकाया और फिर बाद में निधि को छत से धक्का दे दिया। उसे अस्पताल ले जाया गया। लेकिन उसकी जान नहीं बची।

चौथी मंजिल से गिरते ही निधि का सिर फट गया। आसपास के लोग उसकी मदद को दौड़े। इसी दौरान सुफियान मौके से भाग निकला। उसकी तलाश जारी है।

’40 हजार साल से हमारा DNA एक’: बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत – भारत को माता मानने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू, संकट के समय एक हो जाता है देश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक बार फिर कहा है कि भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है और सभी के पूर्व समान हैं। उन्होंने कहा है कि आज भले ही यह कहा जाए कि सब अलग-अलग हैं लेकिन विज्ञान कहता है कि 40 हजार साल से हमारा डीएनए (DNA) एक है।

दरअसल, संघ प्रमुख मोहन भागवत दो दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने सरगुजा जिले के अंबिकापुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “हम सबके पूर्वज समान हैं। आज का विज्ञान डीएनए मैपिंग की बात कहता है। आज हमें कुछ भी लगे हम यह कहें कि हम अलग-अलग हैं। हम ऐसे हैं या वैसे हैं। पर विज्ञान कहता है कि 40,000 साल पहले से जो अखंड भारत था, काबुल के पश्चिम से छिंदविन नदी की पूर्व तक और तिब्बत के उत्तर यानी चीन की तरफ की ढलान से श्रीलंका के दक्षिण तक जो मानव समूह आज है उनका डीएनए 40,000 वर्षों से समान है।”

उन्होंने यह भी कहा है कि आरएसएस की स्थापना से ही संघ यह कहता आ रहा है कि भारत मे रहना वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है। उन्होंने कहा, “हम 1925 से कह रहे हैं कि भारत में रहने वाला हर कोई हिंदू है। जो लोग भारत को अपनी माता मानते हैं और विविधता में एकता की संस्कृति के साथ रहना चाहते हैं और इस दिशा में प्रयास करते हैं, भले ही वे किसी भी धर्म, संस्कृति, भाषा और खान-पान की आदतों और विचारधारा का पालन करते हों, वे हिंदू हैं।”

मोहन भागवत ने यह भी कहा है कि हिंदुत्व पूरी दुनिया में एकमात्र विचार है जो विविधताओं को एकजुट करने में विश्वास करता है क्योंकि इसने हजारों वर्षों से इस देश में ऐसी विविधताओं को एक साथ रखा है। यह सच्चाई है और आपको इसे बोलना चाहिए। इसके आधार पर हम एक हो सकते हैं। हमारी संस्कृति हमें एक साथ बाँधती है। उन्होंने कहा कि हम संकट के समय एक हो जाते हैं, चाहे हम आपस में कितना ही झगड़ लें। जब देश संकट में होता है, तो हम एक साथ लड़ते हैं। कोरोना वायरस महामारी के दौरान, पूरा देश इससे निपटने के लिए एक साथ आया था।

उन्होंने यह भी कहा है कि जो जिस धर्म को मानता है उसे जबरन किसी दूसरे धर्म को मनवाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। धर्म, वेशभूषा, खान-पान कोई भी हो, लेकिन सभी एक हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है हिंदुत्व कोई सम्प्रदाय नहीं है, वह तो इस देश की चलती आई हुई परंपरागत जीवन पद्धति है।

पंजाब में बढ़ रही पगड़ी वाले ईसाइयों की संख्या, धर्मांतरण के लिए 65000 पादरियों की फ़ौज: 65 एकड़ में फैला है अकेले नरूला का साम्राज्य, मरे हुए को ज़िंदा करने तक के दावे

जिस धर्म की स्थापना ही धर्म की रक्षा के लिए की गई हो, जिस धर्म के गुरुओं और उनके बेटों ने धर्मांतरण की जगह मृत्यु को स्वीकार करते हुए बलिदान दिया हो – उस धर्म के लोगों को धर्मांतरण के जाल में उलझ कर किसी और धर्म का गुणगान करते देखना किसी के लिए भी दुःखद हो सकता है। हालाँकि, पंजाब में ईसाई मिशनरियों के इशारे पर नाचते पादरियों के ‘फरेब जाल’ में फँस कर लाखों सिख अब येशु-येशु करते दिख रहे हैं।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में पटियाला से लेकर पठानकोट तक और फाजिल्का से लेकर रूपनगर तक सभी 23 जिले ईसाई मिशनरियों द्वारा फैलाए गए धर्मांतरण जाल में उलझे हुए हैं। यदि यह कहा जाए कि पंजाब में धर्मांतरण का बाजार और इसमें संलिप्त पादरियों का साम्राज्य फल-फूल रहा है तो बिल्कुल गलत नहीं होगा। आज पंजाब में ऐसे हजारों पादरी हैं, जिनकी तथाकथित ‘धर्म सभाओं’ में पगड़ी वाले ईसाइयों की भीड़ दिखाई देती है। पगड़ी वाले ईसाई का मतलब उन लोगों से है जो सिख से ईसाई बन गए।

पंजाब में धर्मांतरण के आँकड़े चौंकाने वाले हैं। इन आँकड़ों को एक वाक्य में समझना हो तो ऐसे समझिए कि साल 2008 में शुरू हुई ‘अंकुर नरूला मिनिस्ट्री’ महज 3 अनुयायियों के साथ शुरू हुई थी। लेकिन महज 14 सालों में इस मिनिस्ट्री से जुड़े लोगों की संख्या 3 लाख से अधिक हो गई है। ये आँकड़े सिर्फ एक पादरी के हैं। अनुमान के मुताबिक, पूरे पंजाब में ईसाइयत का आडंबर रचने के लिए 65000 पादरियों की फौज काम कर रही है।

पंजाब में ऐसे कई पादरी हैं जिनकी प्रत्येक रविवार की प्रार्थना सभा में हजारों लोग पहुँचते हैं। पादरियों के कार्यक्रम को बाकायदा वीडियो बना कर प्रसारित किया जाता है। इनके सोशल मीडिया से लेकर यूट्यूब तक लाखों फॉलोवर्स हैं। यहाँ सबसे अधिक चर्चित पादरी बजिंदर सिंह प्रोफेट बजिंदर सिंह है, जो खुद को ईसा मसीह का पैगंबर बताता है। इसके यूट्यूब पर 18 लाख से अधिक फॉलोवर्स हैं और वीडियो पर लाखों में व्यूज भी आते हैं। वहीं, फेसबुक में 7 लाख से अधिक फ़ॉलोअर्स हैं।

बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार हो चुके ढोंगी पादरी बजिंदर सिंह ‘बिग हीलिंग क्रुसेड’ नामक कार्यक्रम आयोजित कराता है। इन कार्यक्रमों में वह भूत-प्रेत भगाने, बीमारी ठीक करने यहाँ तक कि मरे लोगों को जिंदा करने का दावा करता है। इसके जरिए वह लोगों को येशु के प्रति आस्थावान होने को कहता है और यहीं से शुरू हो जाता है धर्मांतरण का खेल।

दूसरे चर्चित पादरी का नाम अंकुर यूसुफ नरूला है, जिसे लोग अंकुर नरूला के नाम से जानते हैं। वहीं, धर्मांतरण का शिकार हुए लोग इसे ‘पापा’ कहते हैं। जालंधर के हिंदू खत्री परिवार में जन्मा नरूला कहता है कि वह अफ्रीका के ईसाई पादरियों का वीडियो देखता था, फिर उसने दावा किया कि सपने में येशु ने उसे पादरी बनने के लिए कहा है। उसने ‘अंकुर नरूला मिनिस्ट्री’ की स्थापना की है। नरूला ने जालंधर के खाँबड़ा गाँव 65 एकड़ से अधिक क्षेत्र में धर्मांतरण का साम्राज्य स्थापित किया हुआ है।

इसके अलावा पंजाब के 9 जिलों व बिहार और बंगाल के साथ ही अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और ग्रेटर लंदन के हैरो में भी उसके ठिकाने हैं।

सोशल मीडिया में अंकुर नरूला लंबे समय से एक्टिव है। अकेले फेसबुक में ही उसके 5.5 लाख फॉलोवर्स हैं। वहीं, यूट्यूब में 12.6 लाख सब्सक्राइबर हैं। इसके फ़ॉलोअर्स की फौज बड़ी है। रविवार को इसकी सभा में 10-15 हजार लोग इकट्ठे होते हैं। वहाँ, यह सुरक्षा कर्मियों के घेरे में खड़े होकर हालालुइया और येशु-येशु के नारे लगवाकर चमत्कार करने के दावे करता है।

नरूला की मिनिस्ट्री के चर्च में सभी प्रकार के लोग आते हैं। चर्च के लोग कहते हैं नरूला के चमत्कार से सब ठीक हो जाता है। इस चर्च में आए हुए लोग आँख बंदकर गुलाबी रंग के ‘पवित्र जल’ से भरी हुई प्लास्टिक की शीशियों को माथे पर लगाते हैं और फिर दूसरे हाथ को आगे बढ़ाते हैं जैसे कोई ‘कृपा’ मिलने वाली हो।

इस चर्च में धर्मांतरण के ‘व्यापार’ को आगे बढ़ाने के लिए रविवार शाम को ‘इंस्टैंट हीलिंग टेस्टिमनी संडे डिलिवरेंस’ शो आयोजित किया जाता है। इसके लिए, बड़े-बड़े कैमरे, स्क्रीन्स और मंच हुआ है। इस मंच पर लोग आकर बताते हैं कि नरूला के हाथों से वो ठीक हो गए हैं। फिर सभी जोर से चिल्लाते हैं ‘हालेलुया’… फिर अगला व्यक्ति आता है और वह भी ऐसे ही दावे करता है और यह क्रम चलता रहता है। इसी मंच पर महाराष्ट्र से आई हुई एक लड़की कहती है “अंधे देखते हैं, बहरे सुनते हैं, लंगड़े चलते हैं, मेरा भी लकवा ठीक हो जाएगा।”

धर्मांतरण की अगली कड़ी की हालत जानने के लिए जालंधर छोड़ अगर अमृतसर की ओर बढ़ें तो यहाँ भी ईसाई मिशनरियों ने सिखों को ‘पगड़ी वाला ईसाई’ बना दिया है। अमृतसर सिखों का पवित्र शहर है इसी शहर में सिखों का पवित्र स्वर्ण मंदिर भी है। लेकिन, यहाँ के सेहंसरा कलां गाँव की संकरी गलियों के बीच बना चर्च तथाकथित तौर पर धर्मांतरण का केंद्र है। इस चर्च का पादरी गुरुनाम सिंह है जो कि एक पुलिसकर्मी भी है। इस चर्च में रविवार को ‘प्रार्थना’ होती है।

इस ‘प्रार्थना सभा’ में महिलाएँ और पुरुष दोनों ही इकट्ठा होते हैं। पादरी और पुलिसकर्मी गुरुनाम सिंह का दावा है कि वह सिर्फ प्रार्थना कराता है। लेकिन, सवाल यह है कि यदि वह सिर्फ प्रार्थना कराता है तो लोग ईसाई कैसे बन रहे हैं?

गुरुदासपुर के पादरी और गुरनाम सिंह मिनिस्ट्री के संचालक गुरनाम सिंह खेड़ा को इलाके में मशहूर डॉक्टर और खालिस्तानी कमांडो फोर्स के सदस्य जसवंत सिंह खेड़ा के छोटे भाई रूप में जाना जाता था। हालाँकि, जब जसवंत धर्मांतरण कर ईसाई बन गया तो गुरनाम उसके ही रास्ते चलते हुए ईसाई मजहब अपना लिया। अब वह पादरी गुरनाम सिंह खेड़ा के नाम से जाता है। यूट्यूब से लेकर फेसबुक तक उसके हजारों फ़ॉलोअर्स हैं। इसकी सभा में आने वाले लोगों में भी पगड़ी वाले ईसाइयों की संख्या सबसे अधिक होती है।

वास्तव में किसी के भी चमत्कारिक दावे और उसके फ़ॉलोअर्स की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितना नाटकीय है। यानी, वह किस हद ढोंग कर सकता है। पादरी हरप्रीत देओल भी इनमें से एक है। सोशल मीडिया में बड़ी फैन फॉलोइंग तो इसकी पहचान है ही, लेकिन लग्जरी कारों से लेकर ऑफिस में बाउंसर्स और हाई क्लास सिक्योरिटी सिस्टम यह दिखाता है कि धर्मांतरण के व्यापार ने इसे बड़ा बना दिया है।

महिला पादरी कंचन मित्तल और उसकी कंचन मित्तल मिनिस्ट्री भी किसी मामले में पीछे नहीं है। फेसबुक, यूट्यूब से लेकर प्लेस्टोर में एप तक हर माध्यम से यह ईसाइयत को बढ़ाने की कोशिश में जुटी है। इसके अलावा भी ऐसे हजारों पादरी हैं जो इसी तरह के काम में जुटे हुए हैं। इन पादरियों के पास आलीशान बंगले, महंगी गाड़ियाँ, पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड से लेकर हट्टे-कट्टे बाउंसर्स तक होते हैं।

ये सभी ईसाई पादरी धर्मांतरण के जाल में फसाने के लिए बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इन कार्यक्रमों में बैनर, पम्पलेट, सोशल मीडिया कैंपेन समेत अनेक तरीकों से हजारों की भीड़ जुटाई जाती है, बैंड और गायक बुलाए जाते हैं। गानों की लय में नाचते-थिरकते लोग होते हैं और फिर शुरू होता है ‘चमत्कारिक इलाज’ का दावा। पादरी दावा करता है कि वह हर बीमारी को ठीक कर सकता है, भूतों को भगा सकता है और मरे हुए को भी जीवित कर सकता है।

पादरी के दावे और लुभावने वादों की फेहरिस्त से प्रभावित लोग कुछ कार्यक्रमों में जाने के बाद या तो धर्मांतरित हो जाते हैं या दबाव डालकर धर्मांतरित कर दिए जाते हैं।

पंजाब में धर्मांतरण के व्यापार में शामिल ईसाई पादरियों में अधिकांश धर्मांतरण के बाद ईसाई बने पादरी हैं। हालाँकि, न तो इन लोगों ने नाम बदला है और न पहचान। सिख पादरी आज भी पगड़ी लगाते हैं और हाथ में बाइबिल लेकर ईसाइयत का ढिंढोरा पीटते फिरते हैं। हालाँकि, इन लोगों ने अपने नाम के साथ ईसाइयत की पहचान जोड़ रखी है। इसमें, नामक के आगे पास्टर और बाद में मिनिस्ट्री जोड़ना शामिल है। जैसे पास्टर कंचन मित्तल मिनिस्ट्री, पास्टर रमन हंस मिनिस्ट्री पास्टर अंकुर यूसुफ नरूला मिनिस्ट्री।

आज पंजाब के गरीब तबके से लेकर समृद्ध वर्ग को भी ईसाइयत के ढोंग ने ‘पागल’ कर दिया है। जहाँ, कभी वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह के मूल मंत्र का जाप होता था और ‘जो बोले से निहाल सत श्री अकाल’ के नारों की गूँज होती थी। वहाँ, अब छोटे-छोटे कस्बों में रहने वाले लोगों को ईसाई बना दिया है और उनके घर ‘चर्च’ में तब्दील हो गए हैं। अब तो यही कहना होगा कि पंजाब गुरु नानक देव से लेकर गुरु गोविंद सिंह तक की विरासत और गुरु तेग बहादुर जैसे शूरवीर गुरुओं के बलिदान को संभाल नहीं पाया।

धर्मांतरण के विरुद्ध युद्ध लड़ने वालों की संतानें आज धर्म से पलायन कर विधर्म की ओर भाग रहीं हैं।

‘ये भूमि महर्षि मार्कण्डेय-अगस्त्य के तप से पवित्र, यहाँ घर-घर में गणेश विराजमान’: G-20 के लिए इंडोनेशिया पहुँचे PM मोदी ने राम मंदिर का भी किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इंडोनेशिया के बाली में हैं। उन्होंने यहाँ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने बाली में प्रवासी भारतीयों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में रामायण और राम से लेकर महर्षि मार्कण्डेय और महर्षि अगस्त्य का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत नमस्‍ते से की। उन्होंने कहा, “इंडोने‍श‍िया के बाली आने के बाद हर हिंदुस्तानी को एक अलग ही अनुभूति होती है। एक अलग ही एहसास होता है। मैं भी वही वाइब्रेशन फील कर रहा हूँ। इस जगह के साथ भारत का हजारों वर्षों का र‍िश्‍ता रहा है। यहाँ हजारों पीढ़ियाँ आईं और चली गईं, लेकिन उस परंपरा को कभी ओझल नहीं होने दिया। पीढ़ी दर पीढ़ी उस परंपरा को जानना और हर पल उस परंपरा से जुड़े रहना, यहाँ की खासियत है। यहाँ की धरती एक अलग ही आनंद देती है।”

उन्होंने कहा, “जब हम बाली की परंपराओं के गीत गा रहे हैं, इसी पल बाली से कई हजार क‍िलोमीटर दूर ओडिशा के कटक में महानदी के क‍िनारे बाली यात्रा का महोत्सव चल रहा है, जिसे ‘बाली जात्रा’ कहते हैं। यह महोत्सव भारत और इंडोनेशिया के बीच ट्रेड रिलेशन को सेलिब्रेट करता है। जब यहाँ के लोग ‘बाली जात्रा’ की फोटो देखेंगे तो उन्हें अच्छा लगेगा। ओडिशा में जो लोग इकट्ठा हुए हैं, उनके शरीर भले ही वहाँ हैं, लेकिन मन यहाँ है।”

प्रधानमंत्री ने साथ ही यहाँ आकर बसे भारतीयों की उपलब्धियों की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि अपनत्व के विषय में भारत की तारीफ होती है, लेकिन इंडोनेशिया के लोगों में भी अपनत्व कम नहीं है। उन्होंने याद किया कि पिछली बार जब वो जकार्ता आए थे तब इंडोनेशिया के लोगों ने जो स्नेह और प्यार दिया, वह उन्होंने महसूस किया था। बकौल पीएम मोदी, बहुत सी चीजे हैं जिसे भारत और इंडोनेशिया ने अब तक सँजो कर रखा है। बाली की ये भूमि महर्षि मार्कण्डेय और महर्षि अगस्त्य के तप से पवित्र है।”

उन्होंने कहा, “भारत में अगर हिमालय है, तो बाली में अगुंग पर्वत है। भारत में अगर गंगा हैं, तो बाली में तीर्थ गंगा है। हम भी भारत में हर शुभ कार्य का श्रीगणेश करते हैं। यहाँ भी श्री गणेश घर-घर विराजमान हैं और सार्वजनिक स्थानों पर शुभता फैला रहे हैं।” उन्होंने कहा कि बाली के लोगों की जैसी आस्था महाभारत के लिए है, भारत में लोगों की आत्मीयता बाली के लोगों के लिए भी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम राम मंदिर की नींव रखते हैं तो इंडोनेशिया की रामायण परंपरा को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले जब रामायण फेस्टिवल का आयोजन हुआ था, यहाँ से कई कलाकार भारत आए थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिभा, भारत की टेक्नोलॉजी, भारत का इनोवेशन, भारत का उद्योग इन सब ने दुनिया में अपनी एक पहचान बनाई है। आज दुनिया की बहुत सी बड़ी कंपनियाँ ऐसी हैं जिनके CEO भारत के हैं। आज दुनिया के 10 यूनिकॉर्न बनते हैं तो उनमें से एक भारत का होता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब भारत कुछ छोटा सोचता ही नहीं है और 2014 के बाद से भारत ने अमेरिका की कुल जनसंख्या जितनी है, उतने बैंक खाते खोले हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 2014 के बाद से हमने 3 करोड़ घर बनाए हैं, इसका मतलब है कि हमने इतने घर बनाए हैं कि ऑस्ट्रेलिया के हर नागरिक को उसका घर मिल जाए।

वहीं उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से मुलाकात की। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने के बाद ऋषि सुनक से प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली मुलाकात है। भारतीय मूल के ऋषि सुनक ब्रिटेन में हुई राजनीतिक अस्थिरता और लिज ट्रस के इस्तीफे के बाद अक्टूबर में कंजरवेटिव पार्टी के प्रमुख और यूके के प्रधानमंत्री बने।

लड़कियाँ नहीं पहन सकेंगी शॉर्ट्स-स्लीवलेस, सार्वजानिक स्थानों पर ‘प्रेम दिखाने’ की मनाही: क़तर में FIFA वर्ल्ड कप दर्शकों के लिए कड़े नियम, सेक्स पर भी पहरा

20 नवंबर से फीफा वर्ल्ड कप 2022 (FIFA World Cup 2022) की शुरुआत हो रही है। इस साल कतर में फुटबॉल वर्ल्ड कप का आयोजन हो रहा है। यह पहला मौका है, जब किसी एशियाई देश को फुटबॉल वर्ल्ड कप के मेजबानी का मौका मिल रहा है। अनुमान है कि फीफा वर्ल्ड कप के लिए 10 लाख से ज्यादा खेल प्रेमी कतर पहुँचेंगे। फुटबॉल विश्व कप के दौरान जहाँ एक तरफ टीमें मैच खेल रही होती हैं, वहीं दूसरी तरफ तो प्रशंसक मैदान के दर्शक दीर्घा से लेकर बाहर तक जमकर पार्टी और हुड़दंग करते हैं।

इसलिए, मेजबान देश फुटबॉल टीमों के साथ-साथ प्रशंसकों के लिए भी व्यापक इंतजाम करते हैं। इस बार फुटबॉल फैंस को दूसरे फीफा वर्ल्ड कप की तरह एन्जॉय करने का मौका नहीं मिलने वाला। इसकी वजह है मेजबान देश कतर, जो एक इस्लामी मुल्क है। कतर एक छोटा, कट्टर और रूढ़िवादी मुस्लिम देश है, इसलिए वहाँ प्रशंसकों को दूसरे देशों की तरह छूट नहीं मिलेगी।

फीफा 2022 की क़तर की आधिकारिक वेबसाइट के ‘कल्चरल अवेयरनेस सेक्शन’ में विजिटर्स के लिए कपड़े, शराब और फोटोग्राफी के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

कंधों और घुटनों को ढँकना जरूरी

कपड़ों से जुड़े दिशानिर्देशों के अनुसार, कतर आने वाले मेहमान आमतौर पर अपनी पसंद के कपड़े पहन सकते हैं, परंतु म्यूजियम, अन्य सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थानों पर अपने कंधों और घुटनों को ढँकने की सलाह दी गई है। कतर की सरकारी पर्यटन वेबसाइट ने पुरुषों और महिलाओं को वहाँ की संस्कृति का सम्मान करने के लिए कहा है। कतर में सार्वजनिक स्थानों पर पारदर्शी कपड़े, शॉट्स और स्लीवलेस पहन कर घूमने की मनाही है।

दावा किया गया है कि शराब स्थानीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, इसलिए कतर में हर जगह शराब नहीं मिलता। शराब केवल ऐसे होटल, रेस्ट्रॉं और बार में परोसी जाएगी, जिनके पास लाइसेंस है। अन्य स्थानों पर शराब पीना गैर-कानूनी है। गैर-मुस्लिम घर पर शराब पी सकते हैं, लेकिन उनके पास लाइसेंस होना आवश्यक है। वर्ल्ड कप में फैंस स्टेडियम के भीतर ‘बडवाइजर’ बियर खरीद सकेंगे। फुटबॉल प्रशंसक शाम के समय ‘फैन जोन’ में शराब पी सकते हैं।

आम तौर पर, कतर में सार्वजनिक जगह पर शराब पीने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा दी जाती है।

फोटोग्राफी से जुड़े निर्देश

तस्वीर लेते समय भी शिष्टाचार पालन करने की बात कही गई है। निर्देश के अनुसार, फुटबॉल विश्व कप के दौरान कतर आने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे किसी की भी तस्वीरें लेने/वीडियो शूट करने से पहले उनसे अनुमति माँगें। इसके अलावा सरकारी भवनों की तस्वीरें लेने की अनुमति नहीं है।

कतर में अविवाहित महिलाओं और पुरुषों के बीच सेक्सुअल रिलेशनशिप अपराध की श्रेणी में आती है। हालाँकि, सरकारी पर्यटन वेबसाइट पर कहा गया है कि वर्ल्ड कप के दौरान अविवाहित कपल होटल रूम शेयर कर सकते हैं। वेबसाइट के मुताबिक, सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर प्रेम प्रदर्शित करने की मनाही है। हाथ पकड़ना इसमें शामिल नहीं है। निर्देश के मुताबिक, मेहमानों को सार्वजनिक रुप से अंतरंगता दिखाने से बचना चाहिए।

कतर के कानून के अनुसार, ‘क्रॉस ड्रेसिंग’ (किसी पुरुष द्वारा महिला या महिला द्वारा पुरुष के कपड़े पहनना) और लेस्बियन सेक्स अपराध है।

18 दिसंबर को होगा फाइनल मुकाबला

बता दें कि कतर में 20 नवंबर से शुरू होने जा रहे फुटबॉल विश्व कप टूर्नामेंट में 32 टीमें भाग ले रही हैं। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में कुल 64 मैच खेले जाएँगे। 20 नवंबर को मेजबान कतर और इक्वाडोर के बीच मैच से फीफा वर्ल्ड कप 2022 की शुरुआत होगी। फाइनल मुकाबले की बात करें तो यह यह 18 दिसंबर को खेला जाएगा।

₹200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैकलीन फर्नांडिस को कोर्ट से मिली जमानत: विदेश जाने की भी मिली छूट, ED ने कहा था – सबूतों से कर सकती हैं छेड़छाड़

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) को महाठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले में जमानत मिल गई है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार (15 नवंबर, 2022) को अपना फैसला सुनाते हुए एक्ट्रेस को दो लाख के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। इससे पहले वह अंतरिम जमानत पर थीं। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने फैसले में जैकलीन को विदेश जाने की छूट भी दी है। जैकलीन कुछ दिनों के लिए देश से बाहर जा सकती हैं, लेकिन उसके लिए उन्हें कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें जैकलीन फर्नांडिस को पटियाला हाउस कोर्ट से बाहर निकलते हुए देखा जा सकता है। एक्ट्रेस की जमानत पर 11 नवंबर, 2022 को फैसला होना था। लेकिन, कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। ‘राम सेतु’ फिल्म की एक्ट्रेस की अंतरिम जमानत 10 नवंबर को ही खत्म हो गई थी।

मालूम ​हो कि जैकलीन ने जमानत के लिए अर्जी लगाई थी। वहीं, 11 नवंबर को हुई सुनवाई में ईडी ने जैकलीन की जमानत का विरोध किया था। ईडी का कहना था जैकलीन सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं। वह हमेशा के लिए देश छोड़कर विदेश भाग सकती हैं। इस पर जैकलीन फर्नांडिस के वकील ने जाँच में पूरा सहयोग करने का भरोसा दिया था।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने 200 करोड़ रुपए के वसूली के मामले में जैकलीन फर्नांडिस को आरोपित बनाते हुए 17 अगस्त 2022 में पूरक चार्टशीट दाखिल की थी। इस चार्टशीट का दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट (Delhi Patiala House Court) ने संज्ञान लिया, जिसके बाद दिल्ली की अदालत ने अभिनेत्री को 26 सितंबर 2022 को हाजिर होने को समन भेजा था। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, अभिनेत्री जैकलीन जानती थीं कि ठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) जबरन वसूली करता था और वह वीडियो कॉल पर सुकेश से लगातार संपर्क में थी।

ईडी ने अपनी चार्टशीट में इस बात का भी जिक्र किया था कि सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री को महँगे तोहफे देना कबूल किया है। जैकलीन पर यह भी आरोप था कि उन्होंने चंद्रशेखर से 10 करोड़ रुपए के महँगे गिफ्ट भी लिए हैं।

‘मेरे शरीर में मोहब्बत का दर्द, अल्लाह के करम से तंदुरुस्त और रोमांटिक हूँ’: 70 साल के लियाकत और 19 वर्षीय शुमाइला का निकाह, कहा – जैसे बड़ी मछली छोटी को…

पाकिस्तान के लाहौर में एक बेमेल निकाह फिलहाल मीडिया और सोशल मीडिया की सर्खियाँ बना हुआ है। यहाँ पर लियाकत नाम के शौहर की उम्र 70 साल और उनकी बीबी शुमाइला की उम्र महज 19 साल है। दोनों का दावा है कि उनकी मुलाकात मार्निंग वॉक के दौरान हुई थी जहाँ, उन्होंने एक दूसरे को दिल दे दिया था। लियाकत का दावा है कि शमाइला उनके गाने पर फ़िदा हो गईं थी। सैयद बासित अली नाम के चैनल पर मियाँ-बीवी का इंटरव्यू भी 14 जून 2022 को प्रकाशित हुआ है।

लगभग 6 माह पूर्व हुए इस इंटरव्यू में लियाकत और शुमाइला ने बेहद रोमांटिक अंदाज़ में पोज भी दिए हैं और बेबाकी से सवालों के जवाब भी। शुमाइला ने खुद को रिश्ते से बेहद खुश बताया। लियाकत ने बताया कि मार्किंग वॉक में वो शुमाइला को देख कर गाना गाने लगे थे जिसे शुमाइला ने मुड़ कर देखा और उसी दौरान आँखें 4 हो कर दोनों में प्यार हो गया। शुमाइला ने भी लियाकत के इस दावे में हामी भरी।

दोनों ने बताया कि पहले वो अलग-अलग ट्रैक पर वॉक करते थे जो बाद में नजदीक आते-आते एक हो गए थे। वहीँ लियाकत की उम्र के सवाल पर शुमाइला ने कहा कि इश्क में उम्र नहीं देखी जाती और मोहब्बत बस हो ही जाती है। उनका कहना था कि इसमें न उम्र देखी जाती है और न ही जाती। शुमाइला के मुताबिक, लियाकत ने आँख-मटक्का शुरू किया था जिसमें उन्होंने सहयोग किया। घर वालों की नाराजगी पर शुमाइला ने ‘मियाँ-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी’ जैसा जवाब दिया।

जिस समय सैयद बासित अली यह इंटरवियु ले रहे थे तब तक लियाकत और शुमाइला के निकाह को 4 माह पूरे हो चुके थे। लियाकत का मानना है कि फर्क शरीर नहीं बल्कि दिल की जवानी से पड़ता है। दोनों के मुताबिक अब उनके परिवार वालों ने भी उन्हें कबूल कर लिया है और घर भी आना जाना शुरू कर दिया है। उम्र के बेमेल निकाह की पैरवी करते हुए लियाकत ने मिसाल दी कि बड़ी मछली छोटी मछली को खाती है। दोनों ने अपने निकाह को पूरी तरह जायज बताते हुए बाकी लोगों से अपनी जिंदगी पर बातें न करने की नसीहत दी।

70 साल के लियाकत ने बाकी लोगों से भी मॉर्निंग वॉक पर जाने की अपील की। खुद को पूरी तरह से फिट बताते हुए लियाकत ने कहा कि उनके शरीर में मोहब्बत के दर्द को छोड़ कर बाकी कोई दर्द नहीं है। इस तंदुरुस्ती को उन्होंने अल्लाह का करम बताते हुए खुद को बेहद रोमांटिक बताया। दोनों ने बताया कि वो खाना और चाय नाश्ता मिल कर बनाते हैं। इसी इंटरवियु में लियाकत ने अपनी बीवी को पाकिस्तानी गाना ‘जानू सुन जरा’ गा कर भी सुनाया।

अपने शौहर के गाने के जवाब में शुमाइला ने उन्हें भारतीय गाना ‘मोहब्बत बरसा देना तुम सावन आया है’ गा कर सुनाया। गाने से पहले शुमाइला ने बाकायदा नजाकत के साथ ओढ़नी ओढ़ ली थी।

जानिए कौन हैं शाक्य, जिन्हें डिंपल यादव के खिलाफ भाजपा ने मैदान में उतारा: रामपुर में आज़म के खिलाफ लंबा संघर्ष करने वाले को मौका

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार (15 नवंबर, 2022) को मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव के लिए अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी। पार्टी ने इस सीट से समाजवादी पार्टी (SP) की प्रत्याशी डिंपल यादव के खिलाफ शिवपाल यादव के करीबी रघुराज सिंह शाक्य (Raghuraj Singh Shakya) को मैदान में उतारा है। सपा के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के निधन के बाद मैनपुरी सीट खाली हुई थी।

शाक्य भले हीं इटावा से हैं, लेकिन भाजपा ने रणनीति के तहत उन्हें डिंपल यादव के खिलाफ खड़ा किया है। दरअसल, अगर जातिगत समीकरण देखें तो मैनपुरी में यादव समाज के बाद शाक्य समाज की आबादी सबसे ज्यादा है। वहीं, पार्टी ने यूपी की रामपुर (Rampur) और खतौली सीट (Khatauli) विधानसभा सीट के लिए भी अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। इसके अलावा भाजपा ने राजस्थान के सरदारशहर, बिहार के कुरहानी और छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर विधानसभा सीट के लिए भी अपने प्रत्याशी की घोषणा की है।

शाक्य दो बार सांसद, एक बार विधायक रह चुके हैं

दो बार सांसद और एक बार विधायक रहे रघुराज सिंह शाक्य पिछड़ा वर्ग में अच्छी पैठ रखते हैं। इटावा निवासी रघुराज सिंह शाक्य सपा में रहते हुए 1999 और वर्ष 2004 में इटावा से सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भी सपा की टिकट पर इटावा सदर सीट से उन्होंने जीत हासिल की थी। 27 जनवरी, 2017 को रघुराज शाक्य ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वे शिवपाल सिंह यादव से जुड़ गए।

शिवपाल यादव ने उन्हें अपनी पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में रघुराज शाक्य ने इटावा सदर सीट से दावेदारी की थी। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने का मौका मिलने पर भाजपा प्रत्याशी ने सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।

उन्होंने कहा, “पार्टी ने मुझे बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी है। पीएम मोदी, सीएम योगी और पार्टी को धन्यवाद करता हूँ। देश की जनता परिवर्तन करने का काम करेगी। मैनपुरी की जनता बदलाव के लिए तैयार है। यहाँ भी जनता राम राज्य की स्थापना करने का काम करेगी। राज्य में सुशासन की सरकार है। आजमगढ़, रामपुर और गोला उपचुनाव में ये साबित हो गया है। बीजेपी यहाँ चुनाव जीतने का काम करेगी। राजा और महाराजाओं का राज अब खत्म होगा। हम राज्य में वर्षों तक रहे गुंडा राज्य के मुद्दे को उठाएँगे।”

रामपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा ने आकाश सक्सेना को अपना प्रत्याशी बनाया है। ये वही आकाश सक्सेना हैं, जिन्होंने पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आजम खान के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी थी। आकाश की मेहनत और संघर्ष का पार्टी ने इनाम दिया है। आजम खान को तीन साल की सजा मिलने के बाद रामपुर की सीट खाली हुई है।

इसके आलावा मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने राजकुमारी सैनी को उम्मीदवार बनाया है। राजकुमारी सैनी खतौली के पूर्व विधायक विक्रम सिंह सैनी की पत्नी हैं। इस सीट पर सपा गठबंधन से आरएलडी ने मदन भैया को उम्मीदवार बनाया है।