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डंडे से डराया, पीटा, नाबालिग लड़की को KISS करवाया, हँसते रहे सब… वीडियो वायरल होने के बाद कॉलेज ने 12 को किया निलंबित: BJD का छात्र नेता है आरोपित

ओडिशा के गंजाम जिले के एक जूनियर कॉलेज में रैगिंग के नाम पर नाबालिग लड़की और लड़के को जबरन किस कराने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद 5 छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें दो नाबालिग हैं। वहीं, कॉलेज ने घटना में शामिल छात्रों को कॉलेज से निष्काषित किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रैगिंग और यौन उत्पीड़न का यह मामला गंजाम जिले के बेरहामपुर स्थित बिनायक आचार्य गवर्नमेंट कॉलेज बेरहामपुर का है। इस घटना के वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि आरोपित छात्र कॉलेज के जूनियर लड़के को एक नाबालिग लड़की को किस करने के लिए मजबूर कर रहा है। इसके बाद, जूनियर लड़का लड़की को किस करता दिखाई देता है।

हालाँकि, बात यहीं पर खत्म नहीं होती। जब लड़का, वहाँ से जाने लगता है आरोपित छात्र डंडा दिखाकर उसे रोकता है। साथ ही, जब लड़की उठकर जाने लगती है तो आरोपित उसे भी डंडा दिखाता है और उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए उसे वापस बैठा देता है। यही नहीं, वह जूनियर लड़के को जमीन पर बैठाकर पीटता हुआ भी दिखाई दे रहा है। इस वीडियो में, कुछ लड़के और लड़कियाँ भी दिखाई दे रहीं हैं, लेकिन घटना का विरोध करने की बजाय सभी हँसते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इस मामले पर, कॉलेज की प्रधानाचार्य प्रमिला खडंगा ने कहा है कि रैगिंग में शामिल हुए छात्रों की पहचान हो गई है। एंटी-रैगिंग टीम की सिफारिश के बाद इसमें संलिप्त 12 छात्रों को कॉलेज से निष्कासित किया गया है। 12वीं के छात्रों को बोर्ड परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन, ओडिशा बोर्ड को एक पत्र भी लिखेगा।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद, स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पाँच आरोपित छात्रों को हिरासत में लिया है। इसमें, दो नाबालिग और तीन बालिग छात्र हैं। इस घटना का मुख्य आरोपित अभिषेक नाहक है, जो यौन उत्पीड़न के एक अन्य मामले में जमानत पर है। आरोपित अभिषेक ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी ‘बीजू जनता दल’ के छात्र संगठन और कैंपस समिति का सदस्य है।

इस पूरी घटना पर बेरहामपुर एसपी सरबन विवेक एम का कहना है कि आरोपित छात्रों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो एक्ट) अधिनियम और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सिर्फ रैगिंग का मामला नहीं है, बल्कि पीड़ित छात्रा के यौन उत्पीड़न का भी मामला है।

‘आफ़ताब का मतलब सूर्य होता है’: श्रद्धा के हत्यारे का बचाव कर रहे कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद? उधर लापता परिवार की तलाश में जुटी पुलिस

ये खबर आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है कि कैसे आफताब अमीन पूनावाला ने श्रद्धा नाम की हिन्दू लड़की की हत्या कर के शव के 35 टुकड़े किए और उन्हें अपने फ्रिज में डाल रखा था। अब इस घटना को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी व भाजपा में वाक् युद्ध छिड़ गया है। दरअसल, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आगाह किया था कि अगर देश में एक मजबूत नेता नहीं होगा तो हर शहर में आफताब जैसे हत्यारे पैदा होंगे और हम अपने समाज की रक्षा करने में समर्थ नहीं हो पाएँगे।

उन्होंने गुजरात के कच्छ में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि आफ़ताब जैसे हत्यारे हर शहर में पैदा न हों, इसके लिए देश में एक मजबूत नेता का होना आवश्यक हैं। उन्होंने आगे कहा था कि इन्हीं कारणों से 2024 में नरेंद्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना अति आवश्यक है। अब इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी एक तरह से आफताब के बचाव में उतर आई है। पार्टी नेता सलमान ख़ुर्शीद के बयान से विवाद पैदा हो गया है।

‘रिपब्लिक’ की खबर के अनुसार, पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने पूछा है कि क्या सीएम सरमा ‘आफ़ताब’ शब्द का अर्थ जानते हैं? फिर उन्होंने समझाया कि ‘आफताब’ का मतलब सूर्य होता है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए ये कहा। बता दें कि श्रद्धा वॉकर हत्याकांड में पुलिस को अब आफताब के परिवार की तलाश है, जो लापता है। मुंबई के मीरा रोड स्थित उसका फ़्लैट खाली है। दीवाली के आसपास परिवार यहाँ रहने आया था।

श्रद्धा जिस कंपनी में काम करती थी, उसके मैनेजर करण बारी का बयान भी पुलिस दर्ज करेगी। उन्होंने जानकारी दी है कि नवंबर 2020 में श्रद्धा ने उन्हें आफताब द्वारा पीटे जाने की बात बताई थी। करण ने अपने एक परिचित को श्रद्धा की मदद के लिए भी भेजा था। आफताब का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ चुका है, जिसमें वो अपने घर से कुछ लेकर जाता दिख रहा है। हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद होने की बात कही जा रही है।

शादी का प्रस्ताव लेकर आफताब के घर गए थे श्रद्धा के माँ-बाप, बेइज्जत कर भगा दिया था: हत्या से पहले ‘छुट्टी पर’ चले गए थे अब्बू-अम्मी, बाद में लौटे

श्रद्धा मर्डर केस में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। मृतक श्रद्धा के पिता ने खुलासा किया है कि वह श्रद्धा की शादी का रिश्ता लेकर आफताब के घर गए थे, लेकिन आफताब ने शादी करने से इनकार कर दिया था। वहीं, आफताब के पड़ोसियों का कहना है कि उसके परिवार वाले छुट्टी मनाने गए थे और हत्या की खबर सामने आने के बाद वापस आए। यही नहीं, हत्या के आरोपित आफताब से जुड़ा एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है जिसमें वह बैग लिए दिखाई दे रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धा के पिता विकास वालकर ने खुलासा किया है कि वह और उनकी पत्नी हर्षिला अगस्त 2019 में शादी का प्रस्ताव लेकर आफताब के घर गए थे। लेकिन, आफताब के चचेरे भाई ने उन्हें बेइज्जत करते हुए भगा दिया था और कहा था कि कभी दरवाजे पर मत आना। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि, पहले उन्हें लगता था कि आफताब को उसके घरवालों का सपोर्ट नहीं है। लेकिन, अब आशंका जताई जा रही है कि उसके परिवार वाले भी इसमें शामिल थे।

गौरतलब है कि श्रद्धा की हत्या की जानकारी सामने आने के बाद से आफताब का परिवार गायब है। पुलिस को संदेह है कि श्रद्धा के मर्डर के बारे में आफताब के परिवार को पहले से जानकारी थी। इसलिए, पुलिस उसके परिवार वालों की तलाश में जुटी हुई है और उनके खिलाफ सबूत इकट्ठा करने की कोशिश कर रही है।

वहीं, इस मामले में आफताब के पड़ोसियों का कहना है कि दिवाली के आसपास आफताब का परिवार वसई से मीरा रोड स्थित बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ था। लेकिन, अब पिछले सप्ताह से फ्लैट पर ताला लगा हुआ है। पड़ोसियों का कहना है कि बिल्डिंग में रहने के लिए आने के बाद आफताब के माता-पिता और भाई सहित परिवार के सदस्य छुट्टी पर चले गए थे। इसके बाद, जब हत्या की खबर सामने आई तब वे लोग वापस आए थे। हत्या की घटना सामने आने के बाद, उन्होंने आफताब के पिता अमीन और माँ मुनीरा को दो बार देखा है।

यही नहीं, श्रद्धा की जघन्य हत्या करने के आरोपित आफताब का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इस फुटेज में वह कंधे पर दो बैग टाँगे दिखाई दे रहा है। यह फुटेज 18 अक्टूबर की सुबह 4 बजे का बताया जा रहा है। इस फुटेज को लेकर पुलिस ने आफताब से पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस को संदेह है कि उस बैग में आफताब श्रद्धा के शरीर के टुकड़े लेकर गया होगा।

नबाब खाँ की बकरी ने जन्मा इंसान जैसा दिखने वाला मेमना, चेहरा किसी चश्मा लगाए बुजुर्ग जैसा: सिरिंज से पिलाया जा रहा दूध, माँ नहीं आने दे रही पास

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक बकरी ने इंसान की तरह दिखने वाले बच्चे को जन्म दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पालतू बकरी सिरोंज तहसील के सेमल खेड़ी गाँव के नबाब खाँ की है। नबाब खाँ की बकरी के बच्चे का चेहरा चश्मा लगाए बुजुर्ग जैसा लग रहा है। मेमना अब भी जीवित है। जिसे देखने के लिए आस पास के लोग पहुँच रहे हैं। अलग तरह का चेहरा होने के कारण बकरी बच्चे को दूध नहीं पिला पा रही है।

ऐसे में मेमने को सिरिंज की मदद से दूध पिलाया जा रहा है। सेमलखेड़ी के नबाब खाँ किसान हैं। उसके पास एक भैंस और 7 बकरियाँ हैं। इस बकरी ने पहली बार मेमने को जन्म दिया है। नबाब ने बताया कि बकरी इस अजीब बच्चे को अपने पास नहीं आने दे रही। मेमना कमजोर हो रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही मेमने की तस्वीरें

सोशल मीडिया पर इस बकरी की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि उसकी आँखें, इंसानों की तरह बिल्कुल एक दूसरे के अगल-बगल हैं और उनके आसपास काला घेरा है जो किसी चश्मे जैसा दिख रहा है। इसके अलावा बकरी का मुँह भी इंसानों की ही तरह है और उसके सिर पर ढेरों सफेद बाल हैं। मेमने को देखने के लिए इलाके के लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस तरह की घटना पहले नहीं देखी है।

बकरियों में न के बराबर सामने आते हैं ऐसे मामले

पशु चिकित्सक मानव सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया कि आम बोलचाल की भाषा मे ऐसे विकृत बच्चे को मोनिस्टर किड कहते हैं। चिकित्सीय भाषा में इस बीमारी को हेड डिस्पेसिया कहा जाता है। 50 हजार में से 1 बार इस तरह के मामले सामने आते हैं। ऐसे केस ज्यादातर गाय-भैंस में देखे जाते हैं। बकरियों में यह न के बराबर होता है। ऐसे बच्चे 1 हफ्ते से 15 दिन ही जिंदा रह पाते हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के 2 कारण माने जाते हैं, एक गर्भावस्था में विटामिन ए की कमी, दूसरा गर्भावस्था में गलत या प्रतिबंधित दवाई का सेवन।

‘काशी और तमिलनाडु की संस्कृति-सभ्यता कालातीत’: वाराणसी में ‘काशी-तमिल संगमम्’ के उद्घाटन में मोदी-योगी, बोले PM- एक स्वयं में काशी तो तमिलनाडु में दक्षिण काशी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने उत्तर भारत और दक्षिण भारत की संस्कृति को एकाकार करने के लिए बनाए गए काशी-तमिल संगमम् (Kashi-Tamil Sangamam) का वाराणसी में शुभारंभ किया। एक माह तक चलने वाले इस समारोह को BHU के एंफीथिएटर मैदान में आयोजित किया गया है। इस दौरान पीएम ने तमिल समेत 13 भाषा में लिखी गई धार्मिक पुस्तक तिरुक्कुरल और काशी-तमिल संस्कृति पर लिखी गईं पुस्तकों का विमोचन किया।

प्रधानमंत्री का संबोधन शुरू होने से पहले तमिल के प्रसिद्ध संगीतकार व राज्यसभा सांसद इळैयराजा और उनके शिष्यों ने साज-सज्जा के साथ ऊँ, गणेश, शिव, शक्ति, समेत अन्य देवगणों का मंत्र स्तुति के साथ आह्वान किया। इसके अलावा, मंच पर विशेष राग में शहनाई वादन भी हुआ। इस दौरान शहनाई वादक कासिम और बाबू संग तमिल के कलाकारों ने संगत की।

लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “एक ओर पूरे भारत को अपने आप में समेटे हमारी सांस्कृतिक राजधानी काशी है तो दूसरी ओर भारत की प्राचीनता और गौरव का केंद्र हमारा तमिलनाडु और तमिल संस्कृति है। ये संगम भी गंगा-यमुना के संगम जितना ही पवित्र है।” पीएम ने कहा कि काशी और तमिलनाडु दोनों शिवमय हैं, दोनों शक्तिमय हैं। एक स्वयं में काशी है तो तमिलनाडु में दक्षिण काशी है। काशी-काँची के रूप में दोनों की सप्तपुरियों में अपनी महत्ता है।

उन्होंने कहा, “हमें आजादी के बाद हजारों वर्षों की परंपरा और इस विरासत को मजबूत करना था, इस देश का एकता सूत्र बनाना था, लेकिन दुर्भाग्य से इसके लिए बहुत प्रयास नहीं किए गए। ‘काशी-तमिल संगमम्’ इस संकल्प के लिए एक प्लेटफॉर्म बनेगा और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए ऊर्जा देगा।”

पीएम ने कहा, “हमारे पास दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा तमिल है। आज तक ये भाषा उतनी ही लोकप्रिय है। ये हम 130 करोड़ देशवासियों की ज़िम्मेदारी है कि हमें तमिल की इस विरासत को बचाना भी है, उसे समृद्ध भी करना है। हमें अपनी संस्कृति, अध्यात्म का भी विकास करना है।”

उन्होंने कहा कि कि काशी और तमिलनाडु का प्राचीन काल से संबंध हैं। इसका प्रमाण काशी की गलियों में मिलेगा। यहां आपको तमिल संस्कृति के मंदिर मिलेंगे। हरिश्चंद्र घाट और केदार घाट पर 200 से ज्यादा वर्ष पुराना मंदिर है। काशी और तमिलनाडु दोनों ही संस्कृति और सभ्यता के कालातीत केंद्र हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा, “काशी और तमिलनाडु दोनों संगीत, साहित्य और कला के स्त्रोत हैं। काशी में बनारसी साड़ी मिलेगी तो कांचीपुरम का सिल्क पूरे विश्व में मशहूर है। तमिलनाडु संत तिरुवल्लुवर की पुण्य धरती है। दोनों ही जगह ऊर्जा और ज्ञान के केंद्र हैं। आज भी तमिल विवाह परंपरा में काशी यात्रा का जिक्र होता है। यह तमिलनाडु के दिलों में अविनाशी काशी के प्रति प्रेम है। यही एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना है जो प्राचीन काल से अब तक अनवरत बरकरार है।”

इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कहा कि तमिल भाषा का साहित्य अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। मान्यता है कि भगवान शंकर के मुँह से दो भाषाएँ निकली थीं, वे संस्कृत और तमिल थीं। उन्होंने कहा कि काशी और तमिलनाडु में भारतीय संस्कृति के सभी तत्व समान रूप से संरक्षित हैं।

काशी-तमिल संगमम्

काशी-तमिल संगमम् सनातन संस्कृति के दो केंद्रों का मिलन है। काशी और तमिलनाडु के वर्षों पुराने संबंधों को मजबूती देने के लिए शिक्षा मंत्रालय की ओर से इसे आयोजित किया गया है।इस समारोह में दोनों क्षेत्रों के धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक रिश्तों, परंपरा, खानपान, जीवनशैली पर आयोजित प्रदर्शनी व मेले का किया गया है।

इस मेले में हथकरघा व हस्तशिल्प के 10-10 स्टॉल लगाए गए हैं। तमिलनाडु से आए शिल्पियों ने थीम पवेलियन में अपने उत्पाद सजाए हैं। इसमें हथकरघा की 17 समितियों के स्टॉल लगे हैं। इसके अलावा अन्य उत्पादों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है।

एक महीने के दौरान करीब 3 हजार तमिलभाषी लोग काशी आएँगे और अपनी तमिल संस्कृति को काशी के लोगों के साथ साझा करेंगे। हर 2 दिन पर 200 से 250 के लोगों का एक समूह वाराणसी आएगा। इसमें छात्र-छात्राएँ, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएँ आदि शामिल हैं। इस दौरान यहाँ पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। काशी तमिल संगमम् का नोडल अधिकारी स्टेट आर्कियोलॉजी विभाग के एक अधिकारी को बनाया गया है।

काशी का कन्‍याकुमारी से 2,000 साल से भी अधिक पुराना संबंध है। काशी में करीब 200 तमिल परिवार रहते हैं, जिनके दादा-परदादा आकर यहीं बस गए। इनमें तमिल के राष्‍ट्रकवि सुब्रह्मण्‍यम भारती के नाती 97 वर्षीय प्रोफेसर केवी कृष्‍णन भी हैं। राष्‍ट्रकवि ने 1898 में वाराणसी आकर चार साल पढ़ाई की थी।

तमिलनाडु के नाट्कोट्टई क्षेत्रम की ओर से काशी विश्‍वनाथ मंदिर में 210 वर्षों से निर्बाध 3 आरती की जाती है। आरती के लिए भस्‍मी और चंदन तमिलनाडु से ही मँगवाया जाता है। देश की आजादी से पहले 1926 में बनारस में दक्षिण भारतीय व्‍यंजन परोसने की शुरुआत अय्यर परिवार ने की थी।

के. वेंकटरमन्ना घनपति काशी विश्वनाथ मंदिर के पहले तमिल ट्रस्टी नियुक्त किए गए हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर प्रशासन में नियुक्त किया है। इस आयोजनको गंगा-कावेरी का समागम कहा जा रहा है।

अब्बू के साथ दंगा करने वाले नाबालिग को ‘सो रहा बच्चा’ साबित करने में जुटा मीडिया गिरोह, भेजी गई है ₹2.9 लाख की देनदारी की नोटिस: बोले हिन्दू – हमारी संपत्ति अब भी भगवान भरोसे

मध्य प्रदेश का खरगोन 10 अप्रैल, 2022 को दंगों की आग तब झुलस गया था, जब रामनवमी के दिन श्रद्धालुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। बड़ी चालाकी से इन दंगों का ठीकरा नूपुर शर्मा के बयान पर फोड़ दिया गया था। हिंसा में न सिर्फ हिन्दुओं के घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया था, बल्कि पुलिस पर भी हमला हुआ था। दंगाइयों ने जिले के एसपी को गोली मार दी थी। हिंसा के बाद हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सरकार ने रिटयर्ड जज की अध्यक्षता में एक ट्रिब्यूनल का गठन किया था।

इस ट्रिब्यूनल का गठन शासन द्वारा बनाए गए ‘प्रिवेंशन एन्ड रिकवरी ऑफ़ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट’ के तहत हुआ था। ट्रिब्यूनल में रिटायर्ड IAS सहित कई अन्य पूर्व सीनियर अधिकारी शामिल हैं।

इस ट्रिब्यूनल ने जाँच रिपोर्ट के आधार पर कई आरोपितों को हर्जाने और जुर्माने की नोटिसें भेजी हैं। उन्हीं नोटिसों में एक नोटिस को मीडिया के एक खास वर्ग द्वारा विवाद का मुद्दा बनाने की कोशिश की गई है। यह नोटिस एक 12 साल के नाबालिग को भेजी गई है। नाबालिग किशोर मुस्लिम समुदाय का है, जिसके अब्बा का नाम कालू खान है। ट्रिब्यूनल ने उस पर 2.9 लाख रुपए की देनदारी तय की है। ट्रिब्यूनल का मानना है कि आरोपित 12 वर्षीय किशोर हिंसा में सक्रिय रूप से शामिल था और उसने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।

कालू खान को भी 4.8 लाख रुपए देने के लिए कहा गया है, क्योंकि ट्रिब्यूनल का मानना है कि हिंसा में अब्बा और बेटे दोनों शामिल थे।

12 साल की उम्र बनी सुर्खियाँ

नोटिस जारी होने के थोड़े ही समय बाद 12 साल की उम्र कई मीडिया समूहों की सुर्खियाँ बन गईं। कई खबरों में हिंसा के आरोपित को ‘बच्चा’ शब्द से सम्बोधित किया गया।

खरगोन की घटना के बाद नोटिस पर मीडिया कवरेज

‘द वायर’ जैसे समूहों दंगाइयों को बचाने के लिए ने फैलाया प्रोपेगंडा

ट्रिब्यूनल के साथ खरगोन प्रशासन भी अपनी तमाम स्तरीय जाँचों के बाद हिंसा की भरपाई की नोटिसें भेज रहा था। इसके बाद भी ‘द वायर’ जैसे कुछ संस्थान हेडलाइनों में बच्चे के सोने जैसे हेडलाइन के साथ मैदान में उतर गए।

मीडिया ने कुछ यूँ दंगाइयों को बचाने की कोशिश की

हाईकोर्ट ठुकरा चुका है नोटिस रद्द करने की माँग

मीडिया रिपोर्ट्स में न्यायाधिकरण के सदस्य प्रभात परिसर का जिक्र है। उन्होंने बताया है कि आपराधिक मामलों में किशोर अथवा नाबालिगों को छूट मिलती है, लेकिन भरपाई का मामला दीवानी प्रवृत्ति का है न कि आपराधिक। पराशर का कहना है कि आरोपित के वकील बशर अली अभी तक उसे निर्दोष साबित करने योग्य तर्क या प्रमाण नहीं दे पाए हैं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बशर अली नोटिस को रद्द करवाने के लिए इंदौर हाईकोर्ट गए थे लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें ट्रिब्यूनल के आगे अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था।

ऑपइंडिया से बात करते हुए खरगोन के ADM ने बताया कि नुकसान काआकलन व वसूली गठित किए गए एक ट्रिब्यूनल द्वारा की जा रही है। उन्होंने बताया कि गठित ट्रिब्यूनल के मुखिया कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि रिटायर्ड जज हैं। बकौल ADM, यह न्यायाधिकरण ठोस सबूतों के आधार पर कार्रवाई कर रहा।

प्रशासन नहीं, बल्कि पीड़ित की शिकायत पर हो रही कार्रवाई

खरगोन दंगों की जाँच व कार्रवाई के लिए गठित ट्रिब्यूनल के एक सदस्य ने ऑपइंडिया से बात की। सदस्य पूर्व सीनियर ब्यूरोक्रेट रह चुके हैं। उन्होंने हमें बताया कि मीडिया में जिस नोटिस की चर्चा हो रही, वो पहली नोटिस है, न कि इसे अंतिम फैसले के तौर पर सुना दिया गया है। इसी के साथ सदस्य ने बताया कि भरपाई की जो नोटिस जारी भी हुई है, वो ट्रिब्यूनल के या किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा नहीं बल्कि हिंसा के एक पीड़ित की शिकायत पर जारी हुई है।

ट्रिब्यूनल मेंबर ने हमें आगे बताया कि नोटिस भेज कर आरोपितों को उनका पक्ष रखने का मौक़ा और समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि इसे तुरंत पैसा जमा करने का आदेश समझा जा रहा तो वो गलत है। बकौल ट्रिब्यूनल सदस्य, 12 साल के आरोपित के परिजनों ने अपना पक्ष न्यायाधिकरण के पास जमा करा दिया है, जिस पर एक साथ अन्य सदस्यों के साथ अंतिम फैसला जल्द लिया जाएगा।

आपराधिक मामलों में छूट पर नुकसान की भरपाई में परिजनों की जिम्मेदारी

अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर ट्रिब्यूनल मेंबर ने हमें आगे बताया कि कानून आपराधिक मामलों में नाबालिग को छूट देता है, लेकिन हुए नुकसान की भरपाई भी जरूरी है। उन्होंने हमें बताया कि नाबालिग के परिजनों को भी इसकी सूचना से एक साथ अवगत करवाया गया है। बकौल मेंबर, इस हिंसा में कुछ नाबालिगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई थी। अंत में हमें बताया गया कि किसी के भी साथ अन्याय नहीं हो रहा और ट्रिब्यूनल की कार्रवाई न्यायसंगत चल रही है।

खरगोन के VHP (विश्व हिन्दू परिषद) नेता विवेक ने ऑपइंडिया से बात की। विवेक ने हमें बताया कि ट्रिब्यूनल और प्रशासन की दंगाइयों पर हो रही कार्रवाई से न सिर्फ दंगा पीड़ित बल्कि खरगोन का बहुसंख्यक समाज संतुष्ट है। नाबालिग के मुद्दे पर विवेक ने हमें बताया कि हिंसा में हिन्दुओं के घरों और दुकानों को निशाना बनाने वालों में कई नाबालिग शामिल थे। VHP नेता ने प्रशासन से भी निष्पक्ष और बिना किसी दबाव में कार्रवाई जारी रखने की अपेक्षा जताई।

दुकान लूटने वालों में कई नाबालिग

खरगोन हिंसा में अपने लगभग 25 लाख रुपए लुट जाने का आरोप लगाते हुए राजू उर्फ़ राजेश टेलर ने हमें बताया कि उनकी दुकान को लूट कर बचे माल को जला दिया गया था। राजेश ने आगे बताया कि इस लूटपाट को करने वालों में कई नाबालिग थे जिनके चेहरे CCTV फुटेज में कैद भी हुए थे। आरोपितों से वसूली की कार्रवाई का पूरा समर्थन करते हुए राजेश ने बताया कि ट्रिब्यूनल और प्रशासन की सक्रियता से अब तक उनके कुल नुकसान में से लगभग ढाई लाख (2.5 लाख) रुपए उन्हें मिले हैं।

अपने दावों की प्रमाणिकता के तौर पर राजेश ने हमें हिंसा की कुछ वीडियो फुटेज और तस्वीरें भेजीं हैं। फुटेज में भीषण पथराव के बीच कुछ नाबालिगों को हिंसा में सक्रिय देखा जा सकता है, जिनके हाथों में पत्थर दिखाई दे रहे हैं।

हाथों में पत्थर ले कर खड़ा एक कथित नाबालिग

हालाँकि, प्रशासन द्वारा मिले सहयोग को नाकाफी बताते हुए राजेश ने हमें बताया कि वो फिर से अपने बिखरे हुए व्यापार को खड़ा करने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। जब हमने राजेश से सवाल किया कि क्या इस बार उन्होंने अपनी दुकान की सुरक्षा के कोई अतिरिक्त इंतजाम किए हैं तो उन्होंने कहा कि उनकी ही नहीं बल्कि दंगाइयों से पूरे हिन्दू समाज की सुरक्षा ही भगवान के भरोसे है।

तौकीर ने खुद को राजपूत बता कर गरीब हिन्दू युवती को फाँसा, शादी के बाद राज़ खुलने पर कहा – अब मुस्लिम बनो: पूजा की जगह नमाज का दबाव, घर से भागी पीड़िता

देश में ‘लव जिहाद’ के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बिहार के कटिहार में हिन्दू नाम बताकर एक मुस्लिम लड़के ने हिन्दू लड़की से शादी कर ली और अब धर्म-परिवर्तन के लिए उस पर दबाव बना रहा है। शुक्रवार (18 नवंबर, 2022) को पीड़ित महिला न्याय माँगने के लिए जब कटिहार न्यायालय पहुँची, तब जाकर ये घटना सामने आई। ‘लव जिहाद’ की यह घटना कटिहार के मनिहारी की है।

पीड़िता की मानें तो तौकीर आलम नाम के शख्स ने ‘राज राजपूत’ बन कर फेसबुक पर हिन्दू लड़की से दोस्ती की। इसके बाद मोबाइल नंबर एक्सचेंज हुए और दोनों में बातचीत होने लगी। फिर तौकीर जूली से मिलने भी आया। तौकीर ने अपने पिता का नाम ‘अमित सिंह’ बताया था और कहा था कि उसका परिवार दिल्ली में रहता है। लड़की के पिता नहीं हैं, जबकि माँ सब्जी बेचती है। गरीबी के कारण जूली ने तौकी से कोर्ट में शादी की।

शादी के बाद युवती ने ससुराल जाने और परिवार के बाकी सदस्यों से मिलने की जिद की। इस पर पहले तो तौकीर टालमटोल करता रहा, फिर वह उसे अपनी बहन के घर सुपौल ले गया। जूली के मुताबिक, उसकी बहन और आसपास के लोगों का रहन-सहन व खानपान अजीब लगा। फिर जूली को सच्चाई का एहसास हो गया। पुष्टि के लिए जूली ने आसपास पूछताछ की तो पता चला उसका असली नाम तौकीर आलम है और उसके पिता का नाम मोहम्मद नासिर है।

सच्चाई जानने के बाद पीड़िता जूली के पैरों तले जमीन खिसक गई। फिर उसे यह भी पता चला कि तौकीर पहले से शादीशुदा भी है और उसकी 11 साल की एक बेटी भी है।

नमाज पढ़ने के लिए कहा जाने लगा

युवती का आरोप है कि सच्चाई पता चलने के बाद जब उसने तौकीर को छोड़ने की बात की, तब आरोपित ने जान से मारने की धमकी दी। तौकीर और उसके परिवार के लोग धर्म-परिवर्तन का दबाव बनाने लगे। जूली ने बताया कि तौफीक उस पर अक्सर धर्म बदलने का दबाव डालता और मारपीट करता। वह उसे पूजा-पाठ करने से मना करने लगा और नमाज पढ़ने के लिए कहने लगा। पीड़िता को मुस्लिम महिलाओं की तरह ही कपड़े पहनने के लिए कहा जाने लगा।

हिम्मत दिखाकर जूली घर से फरार हो गई और पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। जूली अपने परिजनों के पास कटिहार स्थित अपने घर वापस आ गई है। जूली ने तलाक के लिए गुहार लगाने के साथ ही आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिए जाने की माँग की है। आपको बता दें तौकीर सुपौल का रहने वाला है और दुबई में नौकरी करता है। पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज किया जा चुका है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

‘आपके पास आधार कार्ड है तो आपको भी मोदी सरकार से मिलेगा ₹4.78 लाख का लोन’: सोशल मीडिया पर दावा, PIB ने बताया क्या है सच

सोशल मीडिया पर आए दिन अलग-अलग तरह के दावे देखने को मिलते रहते हैं। ऐसा ही एक दावा सरकार द्वारा दिए जा रहे लोन के लिए किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार आधार कार्ड होल्डर्स को 4.78 लाख रुपए का लोन दे रही है। वायरल पोस्ट की जाँच करते हुए भारत सरकार की नोडल एजेंसी PIB ने इसे फर्जी करार दिया है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो और आधार कार्ड के लोगो के साथ बनी एक तस्वीर वायरल की जा रही है। इस फोटो में लिखा हुआ है, “सरकार दे रही है सभी आधार वालों को 4,78,000 रुपए का लोन।”

इस वायरल मैसेज की सच्चाई पता करने के लिए केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी ‘प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB)’ ने इसका फैक्ट चेक किया है। इस फैक्ट चेक में पीआईबी (PIB Fact Check) ने पाया कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा पूरी तरह से भ्रामक है और इसमें किसी तरह की सच्चाई नहीं हैं।

इस बारे में पीआईबी फैक्ट चेक ने ट्वीट कर कहा है, “दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार सभी आधार कार्ड होल्डर्स को 4,78,000 रुपए का लोन उपलब्ध करा रही है। यह दावा फर्जी है। ऐसे मैसेज को फॉरवर्ड ना करें। कभी भी अपना निजी या बैंकिंग डिटेल किसी के साथ शेयर न करें।” बता दें कि ऐसा ही एक मैसेज इसी साल जुलाई-अगस्त के मध्य में भी वायरल हो रहा था, तब भी PIB फैक्ट चेक ने ऐसा ही ट्वीट कर लोन वाले दावे को फर्जी करार दिया था।

गौरतलब है, साइबर अपराध (फ्रॉड) करने वाले लोग सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों, खासतौर से व्हाट्सएप्प के जरिए इस तरह के ऑफर्स देते हैं। ऐसा इसीलिए किया जाता है, ताकि लोग लोन के झाँसे में आकर अपनी बैंक डिटेल, ओटीपी इत्यादि उनके साथ शेयर कर दें। ऐसा देखा गया है कि लोग ऐसे मैसेज देखने के बाद जानकारी शेयर कर देते हैं और फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं।

यही नहीं, कई बार लोग लोन के ऐसे दावों के साथ भेजे गए लिंक्स पर क्लिक करके आपनी निजी और बैंकिंग डिटेल्स शेयर कर देते हैं। इसके बाद, फ्रॉड उनके बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं। यही कारण है कि PIB फैक्ट चेक ने ऐसे फर्जी दावों की जाँच करते हुए कहा है कि इस तरह के ऑफर्स के झाँसे में आकर बैंकिंग डिटेल्स किसी के साथ शेयर न करें।

कभी भी मेरी हत्या… शराबी बॉयफ्रेंड से मार खाने वाली अभिनेत्री का छलका दर्द, कहा – मेरा हाल भी श्रद्धा जैसा, एक्टर के साथ लिव-इन में थी

आफताब के साथ लिव-इन में रहने वाली श्रद्धा वॉकर (Shraddha Walker) की निर्मम हत्या ने देश को झकझोर दिया है। इस बीच टीवी ऐक्ट्रेस कनिष्का सोनी (Kanishka Soni) ने अपने रिलेशनशिप के बारे में बात कही। उन्होंने नाम लिए बिना एक ऐक्टर पर गंभीर आरोप लगाया और कहा कि वह श्रद्धा वाली घटना से खुद को रिलेट कर रही हैं।

हाल ही में खुद से शादी करके चर्चा में आईं टीवी सीरियल ‘दीया और बाती हम’ अभिनेत्री कनिष्का ने रोते हुए एक वीडियो शेयर किया है और श्रद्धा की मौत पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि इस घटना वे खुद को रिलेट कर पा रही हैं, क्योंकि उन्हें भी एक ऐक्टर ने प्रपोज किया था।

कनिष्का ने बताया कि वह ऐक्टर उनसे शादी करना चाहता था, लेकिन उसकी आदतें बहुत खराब थीं। वह हिंसक प्रवृत्ति का व्यक्ति था। वह शराब पीता था और उसे एंगर इश्यूज था। इसके बावजूद उन्होंने उसके साथ रहने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें लगा कि एक्टर में समय के साथ बदलाव आ जाएगा।

अभिनेत्री ने कहा, “वो मुझसे लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए कहा करता था। हालाँकि, मैं जिस जगह से आती हूँ, वहाँ इसकी इजाजत नहीं है और मैं खुद कभी लिव-इन रिलेशनशिप के फेवर में नहीं रही हूँ।” कनिष्का ने कहा कि शादी को लेकर ऐक्टर के साथ ज्यादा समय बीताने लगी। 

कनिष्का ने आगे कहा, “मुझे लगता था हम शादी करेंगे, जिसके चलते मैं ज्यादातर वक्त उसके घर पर रहती थी। एक दिन जब मैंने उससे पूछा कि हम शादी कब कर रहे हैं। मैं उसके साथ इसलिए ही रह रही थी, क्योंकि उसने कहा था कि जल्द ही शादी करेंगे।”

कनिष्का ने बताया, “मेरे शादी के सवाल पर ही उसे गुस्सा आ गया और उस रात उसने मुझे बहुत मारा था। उस वक्त मेरे अंदर यह डर बैठ गया था कि वो मुझे कभी भी मार सकता है। मैं उसी रात उसके घर से अपना कुछ सामान लेकर भाग निकली थी। प्यार में मैंने लड़कों का केवल यही हिंसक रूप देखा है।”

एक्ट्रेस का कहना है कि ऐसी भयावह मानसिकता वाले इंसान से शादी कर रहने से तो बेहतर है कि लड़कियाँ अकेले रहकर अपनी जिंदगी संवारें। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कहा कि आज भले ही माहौल बदल गया हो, किसी भी लड़की को लड़के के बारे में पूरी जानकारी लिए बिना इसके बारे में निर्णय नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमारे देश में लड़कियाँ लिव-इन रिलेशनशिप में इसलिए जाती हैं, क्योंकि उन्हें उस इंसान के साथ जिंदगी बितानी होती है। वो सिर्फ टाइम पास करने के लिए लिव-इन में रहने जैसा बड़ा डिसीजन नहीं लेंगी।” उन्होंने इस मामले में फिल्म इंडस्ट्री पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर फिल्म स्टार अपना मुँह नहीं खोल रहे हैं, यह बहुत शॉकिंग है।

इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान कनिष्का ने कहा था कि रिलेशनशिप को लेकर उनके अनुभव ज्‍यादातर बुरे ही रहे हैं। उन्‍होंने कहा था, “जब मैं मुंबई आई तो कई लड़कों ने मुझे प्रपोज किया। मैंने 1200-1300 प्रपोजल रिजेक्‍ट किया है। एक बहुत ही पॉपुलर एक्‍टर ने भी शादी के लिए प्रपोज किया था, मगर सिर्फ दो महीने में ही उसका असली चेहरा सामने आ गया। वह बहुत ही हिंसक था। मैं नाम नहीं लूँगी, क्‍योंकि इससे विवाद खड़ा हो जाएगा।”

कनिष्का ने MeToo में फँसे साजिद खान पर भी आरोप लगाया था। कनिष्का सोनी ने साल 2008 में साजिद खान ने उन्हें अपने घर बुलाया था। उन्होंने कहा था कि वो अपनी माँ के साथ रहते हैं, इसलिए डरने की जरूरत नहीं है। इसके बाद वह साजिद खान के घर गईं।

कनिष्का ने आगे बताया कि जब वह साजिद खान (Sajid Khan) के घर पहुँची तो साजिद ने उनकी फिगर देखी और कहा कि ये अच्छा है। वो उस समय अपने बिस्तर पर आराम से बैठे हुए थे। उन्होंने इसके बाद उनका पेट देखने की डिमांड कर डाली। बकौल कनिष्का, उन्हें इन चीजों की आदत नहीं थी और साड़ी के अंदर से भी उनका पेट दिख जाता था तो वो असहज हो जाती थीं। उन्होंने साजिद खान से मना कर दिया। फिर साजिद खान ने उनकी पोर्टफोलियो बंद कर के कहा कि वो उन्हें फिल्म में नहीं ले सकते।

बता दें कि कनिष्का सोनी ने हाल ही में खुद से शादी की थी। इस दौरान उन्होंने खुद अपनी माँग भरी और सिंदूर लगाया है। यानी कि उन्होंने सोलोगामी मैरिज की है। इस पर कनिष्का ने 16 अगस्त को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कहा था, “मैंने खुद से शादी की है क्योंकि मैंने अपने सभी सपनों को पूरा किया है और मैं एकमात्र व्यक्ति हूँ जिसे मैं प्यार करती हूँ। मुझे कभी कोई आदमी नहीं चाहिए- ये जवाब उन सारे सवालों के लिए है जो मुझसे पूछे जा रहे हैं। मैं अकेले और अपने गिटार के साथ खुश हूँ। मैं देवी हूँ, मजबूत हूँ और शक्तिशाली हूँ, शिव और शक्ति मेरे अंदर सब कुछ है। धन्यवाद।”

सामूहिक ईसाई धर्मांतरण के मामले में टेरर फंडिंग की आशंका: ATS की रडार पर एक स्कूल भी, खँगाले जा रहे 36 आरोपितों के बैंक खाते

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में हुए सामूहिक धर्मांतरण के एक मामले में विगत सप्ताह 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में पहले भी गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। हालाँकि, अब उत्तर प्रदेश की आतंकवाद निरोधी शाखा (ATS) की भी इस मामले में इंट्री हो चुकी है। एटीएस को शक है कि धर्मांतरण के लिए आरोपितों को फंडिंग प्राप्त हो रही थी।

उत्तर प्रदेश एटीएस ने 7 महीने पुराने धर्मांतरण के इस मामले की जाँच को आगे बढ़ाते हुए इसमें हुई फंडिंग से जुड़े नेटवर्क को खँगालना शुरू किया है। इसके लिए, एटीएस ने धर्मांतरण के आरोपितों के बैंक खातों की डिटेल्स जुटाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, एटीएस को इस मामले के 36 आरोपितों में से 31 आरोपितों के बैंक खातों की डिटेल्स मिल चुकी है।

उल्लेखनीय है कि सामूहिक धर्मांतरण के इस मामले में यूपी पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में 4 नवंबर को एक पादरी समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें स्थानीय सीपीएस स्कूल की एक महिला टीचर का नाम भी शामिल था। वहीं एक अन्य आरोपित शिक्षक फिलहाल फरार है। इसलिए, यूपी एटीएस (UP ATS) के निशाने पर सीपीएस स्कूल भी है। इस स्कूल के संचालक व अन्य स्टाफ से भी एटीएस पूछताछ कर सकती है।

‘न्यूज 18’ ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इस मामले में उत्तर प्रदेश की आतंकवाद निरोधी शाखा (ATS) यूपी पुलिस के एक अधिकारी की संदिग्ध भूमिका की भी जाँच कर रही है। एटीएस की पूछताछ के बाद कहा जा रहा है कि ईसाई मिशनरी के एक रसूखदार व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई में शिथिलता बरती गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, सामूहिक धर्मांतरण और उसके लिए की गई फंडिंग से जुड़े मामले में ATS कई अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ कर रही है। वहीं, सदर कोतवाल और हरीगंज चौकी इंचार्ज से भी पूछताछ कर धर्मांतरण के केंद्र रहे ‘चर्च ऑफ इंडिया’ के पादरी विजय मसीह के बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है।

बता दें कि इसी साल 15 अप्रैल 2022 को फतेहपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिहरगंज मोहल्ले के चूना वाली गली स्थित ‘इवेजलिकल चर्च ऑफ इंडिया’ में देर शाम प्रार्थना सभा चल रही थी। उसी दौरान मोहल्ले के लोगों की सूचना पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुँच गए थे। इन कार्यकर्ताओं का कहना था कि गरीब हिंदू परिवारों को रुपयों का लालच देकर उनका मतांतरण करने की साजिश रची जा रही है।

इस बारे में जब चर्च के पादरी से पूछा गया तो उसने कबूल किया था कि चर्च के भीतर 70 से ज्यादा लोग मौजूद थे, जिनमें 50 से ज्यादा हिंदू थे। इसकी सूचना पुलिस-प्रशासन को दी गई और उनसे आग्रह किया गया कि चर्च के भीतर जितने लोग प्रार्थना सभा कर रहे थे, उनकी आईडी चेक की जाए और उन्हें बाहर निकाला जाए। माँग की गई थी कि यदि मतांतरण का आरोप सही हो तो मुकदमा दर्ज किया जाए।

इसके बाद पुलिस ने चर्च के भीतर मौजूद 55 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। बाद में, पुलिस ने 35 लोगों के खिलाफ नामजद व 20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धर्मांतरण की धाराओं पर एफआईआर दर्ज की थी। साथ ही 26 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि, बाद में ये लोग छूट गए थे। लेकिन, फिर लगातार चली जाँच के बाद पादरी विजय मसीह, विनय कुमार, अजय सैमुअल, विजय सिंह, आशीष कुमार, प्रिंस, पूजा, रेनुका, नासिर मंसूर और विक्रम सिंह समेत कुल 14 आरोपित जेल में हैं।