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अयोध्या और 9 नवंबर: जिस तारीख को चला महंत का फावड़ा-दलित ने रखी नींव की ईंट, उसी तारीख को सुप्रीम कोर्ट भी बोला- रामलला ही रहेंगे विराजमान

हिंदुओं का यह संघर्ष 1528 में ही शुरू हो गया था, जब मीर बाकी ने अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान पर ​बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया। इस लंबे संघर्ष में 9 नवंबर की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। इसके दो विशेष कारण हैं। पहली, 9 नवंबर 1989 को अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास हुआ। दूसरी, 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का वह निर्णय आया, जिसने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया और आज वहाँ निर्माण कार्य जोरों-शोरों से चल रहा है।

1528 से 2019 की इस यात्रा में कई मोड़ आए। लेकिन, 1989 के 9 नवंबर को ध्यान में रखकर हिंदू समाज ने जो तैयारी की उसने राम मंदिर को इस देश के गाँव-गाँव, जन-जन का मुद्दा बना दिया। इस तारीख ने तय किया कि अब भारत की राजनीति से मुस्लिम तुष्टिकरण के दिन लदने वाले हैं। इसी दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एक महंत ने पहला फावड़ा चलाया और एक दलित ने नींव की ईंट रखी। यह वह दिन था जब अयोध्या का आसमान ‘सौगंध राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएँगे’ से गूँजायमान था। उस समय की मीडिया रिपोर्ट बताते हैं कि 30 हजार की आबादी वाले अयोध्या में करीब 11 लाख लोग एकत्र हुए थे। जनसत्ता की 9 नवंबर 1989 की एक रिपोर्ट में फैजाबाद के तत्कालीन एसएसपी हरभजन सिंह के हवाले से बताया गया है कि 10 लाख लोग उस दिन पंचकोसी परिक्रमा के लिए अयोध्या पहुँचे थे।

9 नवंबर 1989 की पटकथा

ऐसा नहीं है 1989 नवंबर की 9 तारीख अचानक से ही आ गई थी। 1983 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने हिंदुओं को एकजुट करने के उद्देश्य से ‘एकात्म यात्रा’ निकाली। 1984 में धर्म संसद बैठी। लेकिन इंदिरा गाँधी की हत्या से उपजी सहानुभूति ने इस देश पर वंशवाद के एक चिराग को थोप दिया। ‘मिस्टर क्लीन’ की छवि लेकर आए राजीव गाँधी के इस दौर में देश ने मुस्लिम तुष्टिकरण का चरमोत्कर्ष शाहबानो प्रकरण में देखा। बोफोर्स के भ्रष्टाचार ने मिस्टर क्लीन के शासन का नकाब उतार दिया। फिर 1988 आया। जून 1988 में इलाहाबाद उपचुनाव में कॉन्ग्रेस को करारी शिकस्त मिली। फरवरी 1989 में इलाहाबाद में धर्म संसद हुई। उसी साल 9 नवंबर को अयोध्या में भूमि पूजन निश्चित किया गया। देश के हर गाँव से मंदिर के लिए एक शिला लाने की योजना बनाई गई। उस समय दो सांसदों वाली पार्टी रही बीजेपी ने भी उसी साल जून में हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की और राम मंदिर आंदोलन के समर्थन की घोषणा की।

रामजन्मभूमि आन्दोलन के कुछ रणनीतिकार पृष्ठभूमि में थे। इनमें से एक थे मोरोपंत त्र्यंबक पिंगले जिन्हें ‘मोरोपंत पेशवा’ भी कहते हैं। यह उनकी ही बनाई योजना थी कि शिलान्यास से पहले इसका अलख घर-घर तक पहुँचा। हेमंत शर्मा ने अपनी किताब ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखा है, “उनकी बनाई योजना के तहत देशभर में करीब तीन लाख रामशिलाएँ पूजी गई। गाँव से तहसील, तहसील से जिला और जिलों से राज्य मुख्यालय होते हुए लगभाग 25 हजार शिला यात्राएँ अयोध्या के लिए निकली थीं। 40 देशों से पूजित शिलाएँ अयोध्या आई थी। यानी, अयोध्या के शिलान्यास से छह करोड़ लोग सीधे जुड़े थे। इससे पहले देश में इतना सघन और घर-घर तक पहुँचने वाला कोई आंदोलन नहीं हुआ था।”

अयोध्या: 9 नवंबर 1989

‘अयोध्या का चश्मदीद’ में जनसत्ता में छपी रिपोर्टों के हवाले से बताया गया है कि 9 नवंबर 1989 को 9 बजकर 33 मिनट पर भूमि पूजन और नींव की खुदाई शुरू हुई। मंत्रोच्चार के बीच स्वामी वामदेव ने भूमि पूजन किया। पहला फावड़ा महंत अवैद्यनाथ ने चलाया। दोपहर के एक बजकर 34 मिनट पर शंखनाद और मुख्य ज्योति के बीच बिहार के दलित कामेश्वर चौपाल था के हाथों नींव की पहली शिला रखी गई। उस समय 35 वर्ष के रहे कामेश्वर चौपाल ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कहा था, “पहली ईंट रखने वाला वो समय मैं कभी भूल नहीं सकता। वह समय मुझे गर्व का एहसास कराता है।”

रामशिला
रामशिला ने घर-घर राम मंदिर की अलख जगाई थी

इधर मंदिर शिलान्यास, उधर खुदी ‘सेकुलर राजनीति’ की कब्र

इधर हिंदू समाज मंदिर शिलान्यास की तैयारियों में लगा था, उधर इसमें अड़ंगा डालने के भी तमाम प्रयास हो रहे थे। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कॉन्ग्रेस के बड़े नेता कमलापति त्रिपाठी ने ऐलान किया कि यदि मंदिर निर्माण के लिए फावड़ा चला तो पहला फावड़ा उनकी पीठ पर चलेगा। ‘युद्ध में अयोध्या’ में हेमंत शर्मा ने लिखा है कि कॉन्ग्रेस का एक वर्ग उनके इस बयान से काफी खुश था। चुनाव के वक्त कमलापति त्रिपाठी के बेटे लोक​पति ने उनको बताया था कि कॉन्ग्रेस को इस स्टैंड से फायदा हो रहा और मुस्लिम वीपी सिंह से छिटक कर पार्टी की तरफ आ रहे हैं। हालाँकि जब चुनाव हुआ तो कॉन्ग्रेस बुरी तरह हारी और उत्तर प्रदेश में उसे केवल 15 सीटें ही मिली। बकौल शर्मा नतीजों के कुछ समय बाद इन्हीं लोकपति ने इस संबंध में पूछ जाने पर उनसे कहा, “मेरे बाबू बाबर के नाती चले थे मस्जिद बनाने और पार्टी घुस गई…।”

इसके बाद अयोध्या में राम मंदिर का आंदोलन कैसे आगे बढ़ा, इसने कैसे हिंदुओं को एकजुट किया, कैसे भारतीय जनमानस पर प्रभाव डाला, बीजेपी के उदय और सेकुलर राजनीति के खात्मे का मार्ग प्रशस्त किया इससे हम भली-भाँति परिचित हैं। फिर आया 9 नवंबर 2019 का दिन जब देश की शीर्ष अदालत ने भी संविधान की रोशनी में माना कि अयोध्या की वह जगह हिंदुओं के अराध्य श्रीराम की ही है। 9 नवंबर 1989 को राम मंदिर का शिलान्यास भले उस जगह से कुछ मीटर दूर करना पड़ा था जहाँ रामलला विराजमान थे, लेकिन इसी तारीख ने यह तय कर दिया था कि भव्य राम मंदिर इस देश में बनकर जरूर खड़ा होगा।

‘अलग है हिन्दुओं का चिह्न और हिटलर का नाजी हुक्ड क्रॉस’: ट्विटर के नए नियम में स्वस्तिक को घृणा से जोड़ा, लोगों ने एलन मस्क से की बदलाव की माँग

पूरी दुनिया में हिंदूफोबिया बढ़ता जा रहा है। खासतौर से पश्चिमी देशों में हिंदुओं के खिलाफ नफरत और हिंसा एक अलग रूप में नजर आ रही है। इस नफरत में हिंदुओ के प्रतीक चिह्नों को देखकर टारगेट करना अब आम हो गया है। हाल ही में माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने अपने नियमों में बदलाव किया है। इसमें हिंदुओं के पवित्र चिह्न स्वस्तिक को ‘नाजी स्वस्तिक’ बताते हुए नफरती चिह्न कहा गया है। इस पर लोग ट्विटर को ईसाइयों के ‘हुक्ड क्रॉस’ से स्वास्तिक को अलग बताते हुए इसे हटाने की माँग कर रहे हैं।

दरअसल, एलन मस्क के ट्विटर खरीदने के बाद से इसमें कई बदलाव हुए हैं। इसमें सोमवार (7 नवंबर, 2022) को ट्विटर ने अपने नियमों में भी बदलाव किया है। इस बदलाव में ‘नफरती प्रतीकों’ के अंतर्गत ‘नाजी स्वास्तिक’ लिखा गया है।

ट्विटर के इस नए नियम पर अमेरिका में हिंदुओं के लिए आवाज उठाने वाली संस्था ‘हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन’ ने ट्वीट कर कहा, “ट्विटर को सुरक्षित बनाने के आपके प्रयासों के लिए धन्यवाद। जैसे-जैसे आपके नियम सामने आ रहे हैं, कृपया इसमें बदलाव करने का विचार करें और हिंदू धर्म की आस्था के प्रतीक “स्वस्तिक” को घृणित नाज़ी ‘हेकेनक्रेज’ या ‘हूक्ड क्रॉस’ से अलग करने का विचार करें।” इस ट्वीट के साथ ही उन्होंने एक यूआरएल भी दिया है। इसमें पवित्र स्वास्तिक के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया है।

वहीं, Yann Meridex नामक ट्विटर यूजर ने कहा है, “क्या आपकी टीम हिंदू हिंदू प्रतीक स्वास्तिक को हकेंक्रूस से बदल सकती है, जो हिंदूफोबिक परिभाषा के पहले हिटलर की पुस्तक ‘Mein Kampf’ में नाजियों का प्रतीक था? हिन्दू स्वस्तिक का नाज़ीवाद से कोई सम्बन्ध नहीं है।”

दरअसल, विदेशों में रहने वाले हिंदू और हिंदू संगठन लगातार वहाँ के अधिकारियों और सरकार को बताते रहे हैं कि नाजियों के हुक्ड क्रॉस और हिंदुओं के स्वस्तिक में भारी अंतर है। इस अंतर को समझते हुए हुक्ड क्रॉस को स्वस्तिक से ना जोड़ा जाए और ना ही उसे स्वस्तिक कहा जाए। इसके बावजूद हिंदू विरोधी लोग और संस्थान, हिंदुओं के इस प्रतीक का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ हिंसा के लिए स्थानीय लोगों को लगातार उकसा रहे हैं।

अमेरिका के राज्यों और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इस अंतर को समझते हुए इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी दिए हैं। पिछले महीने 23 अगस्त को अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया ने इसको लेकर एक कानून भी पारित किया है। कैलिफोर्निया राज्य की सीनेट ने सर्वसम्मति से एक विधेयक AB2282 पारित किया।

इस विधेयक में नाजी हेकेनक्रेज़ (जर्मन में हुक्ड क्रॉस) के प्रदर्शन को अपराध बनाया गया है। इसके साथ ही इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह स्वस्तिक जैसा दिखता है, लेकिन यह बिल हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म से जुड़े स्वस्तिक के प्रदर्शन को अपराधीकरण नहीं करता। इसका मतलब स्पष्ट है कि कैलिफोर्निया की सीनेट मानती है कि हिंसा को प्रतीक बना हुक्ड क्रॉस हिंदुओं के स्वस्तिक से अलग है।

वहीं, ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स संसद (NSW Parliament) ने हेक्रेनक्रेज के प्रदर्शन को अपराध घोषित किया, लेकिन स्वस्तिक को उससे अलग रखा। इसी तरह का बिल ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया और क्वींसलैंड में पास किया गया। यहाँ भी सरकारों ने हिंदुओं के माँग को ध्यान में रखते हुए नाजी हेकेनक्रेज और स्वस्तिक से अलग माना।

हिटलर ने अपनी आत्मकथा या अपने भाषणों में हेकेनक्रेज को स्वस्तिक कभी नहीं बताया है। इसके बावजूद भी इस हिंसक नाजी प्रतीक को हिंदुओं के पवित्र प्रतीक स्वस्तिक से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। जब नाजी सिंबल का कहीं पर प्रदर्शन होता है, उसे स्वस्तिक बता देते हैं।

ब्रिटिश स्कॉलर मैक्स मुलर ने भी ‘स्वस्तिक’ को भारतीय शब्द बताते हुए इसके प्रयोग पर आपत्ति जताई थी। वो ये नहीं चाहते था कि दुनिया ये मानें कि इस क्रॉस की उत्पत्ति भारत में हुई है। असल में हिटलर बचपन में अकेले में चर्च में गायिकी का आनंद लेता था और साथ ही पादरी भी बनना चाहता था। वो एक मोनेस्टरी है, जहाँ ऐसे ही चिह्न थे। यही चिह्न नाजी ‘Hakenkreuz’ की प्रेरणा बना। चैनल ने इसे 20वीं शादी का ऐसा विश्वासघात बताया है, जिसमें मोहरे सिर्फ एक ही तरफ से चले जा रहे थे।

बता दें, इसी साल फरवरी में कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने वहाँ के पार्लियामेंट में आवाज़ उठाते हुए अपील की थी कि नाजियों के निशान ‘हकेनक्रेज’ की तुलना हिन्दू ‘स्वस्तिक’ से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संसद में स्पीकर को सम्बोधित करते हुए कहा था कि कई धर्मों/मजहबों को मानने वाले 10 लाख कनाडा के नागरिकों, खासकर हिन्दू-कनाडियन समुदाय की तरफ से वो ये बात रख रहे हैं। उन्होंने खुद को भी एक हिन्दू-कनाडियन बताया। उन्होंने समझाया कि स्वस्तिक होता क्या है।

कनाडाई सांसद ने कहा, “मैं संसद के सभी सदस्यों से आग्रह करता हूँ कि वो हिन्दुओं के धार्मिक और पवित्र चिह्न स्वस्तिक और नाजियों के घृणा भरे निशान, जिसे जर्मनी में ‘Hakenkreuz (हकेनक्रेज)’ और अंग्रेजी में ‘Hooked Cross’ कहा जाता है – इन दोनों के बीच के अंतर को समझें। प्राचीन भारतीय भाषा संस्कृत में स्वस्तिक का अर्थ होता है – जो अच्छा सौभाग्य लेकर आए और कल्याण करे। ये एक प्राचीन और काफी पवित्र प्रतीक चिह्न है।”

उन्होंने संसद में कहा कि आज भी हिन्दू इसका प्रयोग करते हैं और हमारे हिन्दू मंदिरों, शुभ कार्यक्रमों (धार्मिक एवं सांस्कृतिक), घर में घुसने वाले दरवाजों एवं हमारे दैनिक जीवन में भी ‘स्वस्तिक’ चिह्न का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा, “कृपया नाजियों के निशान को ‘स्वस्तिक’ कहना बंद कीजिए।” चंद्र आर्य ने स्पष्ट किया कि हम नाजी प्रतीक ‘हकेनक्रेज’/हुक्ड क्रॉस पर प्रतिबंध का स्वागत करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे ‘स्वस्तिक’ बताने का अर्थ है हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों को छीनना।

टीवी शो के दौरान शोएब मलिक ने सानिया मिर्जा से की चीटिंग! पाकिस्तानी मीडिया ने बताया – दोनों अलग-अलग रह रहे, शौहर को बीवी के एकेडमी की जानकारी नहीं

सानिया मिर्जा और शोएब मलिक की तलाक की अटकलों के बीच खबर आ रही है कि दोनों पहले से ही अलग रह रहे हैं। दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। निकाह के 12 साल बाद अब दोनों के रास्ते जुदा होने वाले हैं। दोनों फ़िलहाल अपने बेटे इझान के पालन-पोषण के लिए किसी तरह मिलते रहते हैं। कहा जा रहा है कि एक टीवी शो का हिस्सा बनने के दौरान शोएब मलिक ने सानिया मिर्जा के साथ चीटिंग की है।

सानिया मिर्जा की इंस्टाग्राम स्टोरी से इन अटकलों को और बल मिला था, जिसमें उन्होंने पूछा था टूटे हुए दिल कहाँ जाते हैं? उन्होंने खुद ही जवाब देते हुए लिखा था कि क्या वो अल्लाह को ढूँढने जाते हैं? एक सप्ताह पहले सानिया मिर्जा और शोएब मलिक साथ में दिखे थे, जहाँ दोनों अपने बेटे का जन्मदिन मना रहे थे। पूर्व टेनिस खिलाड़ी ने कुछ दिन पहले भी अपने बेटे के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा था कि कुछ क्षण उन्हें कठिनतम दिनों से वापस नॉर्मल दिनों में ले आते हैं।

शोएब मलिक ने पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ अपडेट भी नहीं डाला है। पाकिस्तानी मीडिया कह रही है कि दोनों ऑलरेडी अलग-अलग रहे हैं। दोनों ने फ़िलहाल अपने रिश्तों पर चुप्पी बरकरार रखी है। अप्रैल 2010 में इन दोनों ने एक हाई प्रोफ़ाइल कार्यक्रम में शादी की थी। उनके बेटे की उम्र 4 साल है। जहाँ शोएब मलिक ने बेटे के कार्यक्रम की कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा की, सानिया मिर्जा ने एक भी अपलोड नहीं की।

निकाह के 8 वर्षों बाद 2018 में सानिया मिर्जा ने बच्चे को जन्म दिया था। दोनों ने अपने बेटे का हालिया जन्मदिन दुबई में मनाया था। हाल ही में पाकिस्तानी क्रिकेट के शो ‘Ask The Pavilion’ में शोएब मलिक से जब उनकी बीवी सानिया मिर्जा की टेनिस एकेडमियों और उनके लोकेशंस के बारे में पूछा गया था तो शोएब मलिक ने कहा था कि उन्हें इनकी जानकारी नहीं है और वो ऐसी एक भी एकेडमी में गए भी नहीं हैं।

राजस्थान में सरकारी हैंडपंप छूने पर जनजातीय समाज के व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या, हॉस्पिटल जाने से भी रोका: शकील, नासिर और बबलू गिरफ्तार

राजस्थान के जोधपुर में सरकारी हैंडपंप छूने पर जनजातीय व्यक्ति की हत्या करने का मामला सामने आया है। यहाँ, किशनलाल भील नामक व्यक्ति ने हैंडपंप से पानी लिया था, जिसके बाद मुस्लिम युवकों ने पीट-पीटकर उसे बुरी तरह से जख्मी कर दिया। इसके बाद उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं, अन्य आरोपित फरार हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जोधपुर के सूरसागर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक गाँव में जनजातीय युवक किशनलाल भील के सरकारी हैंडपंप छूने के बाद शकील, नासिर, बबलू समेत अन्य लोगों ने उसे गालियाँ देनी शुरू कर दीं। इसके बाद उस पर सरिया से हमला कर दिया। जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गया। इसके बाद, जब किशनलाल के परिजन उसे हॉस्पिटल ले जाने लगे तब मुस्लिम युवकों ने उन्हें हॉस्पिटल जाने से भी रोक दिया। तब, परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के आने पर किशनलाल को हॉस्पिटल ले जाया गया। जहाँ, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

जनजातीय युवक की हत्या को लेकर सूरसागर थानाधिकारी डॉ गौतम डोटासरा का कहना है कि परिजनों की शिकायत मिलने के बाद रात को ही पुलिस ने तीन नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया था। कुछ आरोपित फरार हैं उनकी तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान शकील, नासिर और बबलू के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपितों पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया है।

किशनलाल की मौत की जानकारी मिलने के बाद, उसके रिश्तेदार व जनजातीय संगठन के लोग भी हॉस्पिटल पहुँच गए। वहाँ इन लोगों ने मॉर्चरी के बाहर धरने पर बैठकर आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई व मृतक के परिवार को एक सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपए का मुआवजा देने की माँग की है। जनजातीय संगठन के लोगों का कहना है कि समुचित मुआवजा न मिलने पर आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और बढ़ेगा।

मुस्लिम युवकों की हिंसा का शिकार हुए मृतक किशनलाल के भाई अशोक भील ने कहा है कि सरकारी हैंडपंप में मोटर लगी हुई है। उस पर शकील, नासिर और बबलू का कब्जा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये लोग किसी अन्य समुदाय के व्यक्ति को पानी नहीं भरने देते हैं। अगर कोई पानी भरता है तो उसका पाइप काट देते हैं। आरोपितों ने किशनलाल और उसके बेटे के साथ भी मारपीट की है।

इस घटना पर दलित समाज के नेता अनिल तेजी ने कहा है कि पानी जैसी चीज के लिए एक युवक की निर्मम हत्या कर दी गई। वह अपने घर में इकलौता व्यक्ति था जो मजदूरी करके परिवार के सभी लोगों का पेट भरता था। उन्होंने कहा कि जाति विशेष के इन लोगों ने किशनलाल को पानी के लिए मार दिया। उन्होंने पूछा कि एक ओर समाज में यह नारा लगाते हैं मीम और भीम भाई-भाई, वहीं आज कहाँ गए वह जो भाई-भाई का नारा लगाते थे। उन्होंने कहा, “इस भीम को मार दिया है कोई भी मीम यहाँ पर धरने पर नहीं पहुँचा है।”

प्यार में महिला से मर्द बनी टीचर, छात्रा से की शादी: राजस्थान के स्कूल में परवान चढ़ी चाहत, लिंग बदलवाने को करवाई सर्जरी

राजस्थान के भरतपुर में 4 नवंबर 2022 को हुई एक शादी चर्चा का विषय बन गई है। यह शादी 30 साल के आरव और 21 साल की कल्पना की है। आप यह जानकर हैरत में रह जाएँगे कि कुछ समय पहले तक आरव का नाम मीरा होता था और वह भी महिला ही थी। जेंडर चेंज करवाकर वह आरव बनी और फिर कल्पना संग फेरे लिए। इस दौरान उसे तीन बार सर्जरी से गुजरना पड़ा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार इस कहानी की शुरुआत 2016 में हुई। कल्पना 10वीं में पढ़ने के लिए नगला के राजकीय माध्यमिक स्कूल आई। यहीं 2013 में मीरा की पीटी टीचर के तौर पर नौकरी लगी थी। कल्पना कबड्डी की खिलाड़ी थी तो दोनों के बीच संपर्क हुआ।

कबड्डी टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए कई बार मीरा के साथ ही कल्पना जाया करती थी। इसी दौरान दोनों की नजदीकियाँ बढ़ी। दो साल बाद दोस्ती प्यार में बदला। 2018 में मीरा ने कल्पना को प्रपोज किया। फिर शादी के लिए मीरा ने लिंग बदलवाने का फैसला किया।

सर्जरी के बाद 2020 में मीरा का रूप पूरी तरह बदल गया और वह आरव हो गई। दरअसल, मीरा पैदा तो लड़की के रूप में हुई थी, मगर उसके हाव भाव लड़कों जैसे थे। चिकित्सकों की राय में इसे डिस्फोरिया कहा जाता है।

चार नवंबर को कल्पना और आरव ने अपने-अपने परिवारों की सहमति से शादी कर ली। आरव ने बताया कि वह फीमेल कोटे से सरकारी स्कूल में शिक्षक बना था। स्कूल में पढ़ने वाली कल्पना अच्छी खिलाड़ी थी। उन्होंने बताया कि जेंडर चेंज करवाने की प्रक्रिया में कल्पना ने पूरा साथ दिया। आरव के अनुसार सर्जरी से पहले शादी को लेकर उन्होंने घरवालों से भी बात की थी। उन्होंने इसके लिए सहमति दी थी।

वहीं कल्पना का कहना है कि वह इस शादी से खुश है। यदि मीरा सर्जरी करवाकर आरव न बना होता तो भी वह उससे ही शादी करती। कल्पना के अनुसार शुरू में उसे लगता था कि लोग इस शादी को लेकर क्या कहेंगे। लेकिन आरव से हौसला मिलने के बाद उसने इसके बारे में सोचना छोड़ दिया।

भारत का राष्ट्रध्वज, उसको रौंदता मुल्ला… T20 विश्व कप के बहाने शोएब अख्तर ने वीडियो शेयर कर तिरंगे का किया अपमान, लोग बोले – औकात मत भूल

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम ने T20 विश्व कप के अपने अंतिम ग्रुप मैच में बांग्लादेश को हरा कर सेमीफाइनल में एंट्री कर ली। पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर ने इस पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसके माध्यम से उन्होंने भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान किया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि 4 लोग चटाई बिछा कर बैठे हुए हैं और उधर से एक गाड़ी चलती हुई आ रही है। गाड़ी के ऊपर पाकिस्तान का झंडा लगा है।

शोएब अख्तर द्वारा ट्वीट किए गए इस वीडियो में जमीन पर बैठे लोगों के शरीर पर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और भारत का झंडा दिखा कर उन्हें उन टीमों के रूप में दिखाया गया है। गाड़ी के आते ही ये लोग भागने लगते हैं। इसके बाद वो गाड़ी उस चटाई को रौंदते हुए आगे बढ़ जाती है। फिर उसका दरवाजा खुलता है और उसमें से एक बूढ़ा मुल्ला निकलता है। निकल कर वो कहता है, “सलाम मालिक।” साथ ही बैकग्राउंड में म्यूजिक भी बज रहा होता है।

शोएब अख्तर ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा, “ये होती है एंट्री।” हालाँकि, भारत के तिरंगे झंडे को पाकिस्तान द्वारा रौंदते हुए दिखाने के लिए लोगों ने उन्हें आड़े हाथों भी लिया। ‘जेम्स ऑफ बॉलीवुड’ ने लिखा, “भारत के झंडे को रौंदने का इनका स्वप्न पुराना है, बस अवसर चाहिए। यह शोएब अख्तर भारत से कमाई करता है और प्रकट रूप से इंटरव्यू में ‘गज़वा ए हिंद’ का समर्थन भी करता है। हिंदू मूर्ख है जो उसी को पालता है जो उसको डसता है।”

हार्दिक नामक ट्विटर यूजर ने ‘भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI)’ को टैग करते हुए इस वीडियो पर संज्ञान लेने की अपील की। हार्दिक ने लिखा कि शोएब अख्तर सरेआम भारत के झंडे को बेइज्जत कर रहा है, हमेशा ‘गज़वा-ए-हिन्द’ की बात करता हैं और आप लोग इसे भारत के करदाताओं के पैसों से पालते हो। यूजर ने BCCI को चेताया कि अगर ये सब बंद नहीं हुआ तो संस्था के खिलाफ भी जनता द्वारा आवाज़ उठाई जाएगी।

वहीं रामूर्ति होल्कर नामक यूजर ने शोएब अख्तर को लिखा, “कितने शर्म की बात है। तुम भी एक दिन क्रिकेटर थे, आज आतंकियों जैसी हरकत है। इसलिए, पाकिस्तानी सोच ही आतंकी है। संसार भूला नही है, श्रीलंका के खिलाड़ियों पर आतंकी हमले से क्रिकेट जगत आहत हुआ था, और आपके पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।” लोगों ने इस दौरान शोएब अख्तर पर मीम्स भी शेयर किए और चेताया कि वो अपनी औकात न भूलें।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान गिर पड़े कॉन्ग्रेस नेता, हार्ट अटैक से हो गई मौत: महाराष्ट्र की घटना, राहुल गाँधी ने जताया शोक

कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान पार्टी नेता और ‘सेवा दल’ के महासचिव कृष्णकांत पांडेय की मौत हो गई है। निधन से पहले वह तिरंगा लेकर यात्रा में चल रहे थे। इसके थोड़ी बाद हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई है। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और जयराम रमेश सहित कई अन्य नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जब यह हादसा हुआ तब कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में थी। इसी दौरान बिलोली के देगलूर और अटकली के बीच यात्रा के दौरान कृष्णकांत पांडेय जमीन में गिर गए। जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें एंबुलेंस से हॉस्पिटल ले जाया गया। वहाँ डॉक्टर्स ने हार्ट अटैक बताते हुए उन्हें मृत घोषित कर दिया।

कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कृष्णकांत पांडेय के निधन की पुष्टि की करते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है, “भारत जोड़ो यात्रा के 62वें दिन सेवा दल के महासचिव कृष्ण कुमार पांडे राष्ट्रीय ध्वज थामे हुए थे। वह दिग्विजय सिंह और मेरे साथ चल रहे थे। थोड़ा देर बाद उन्होंने एक सहयोगी को तिरंगा दे दिया और वापस चले गए। इसके बाद वे गिर गए तब उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।”

वहीं, राहुल गाँधी ने ट्वीट कर कहा, “कांग्रेस सेवा दल के महासचिव, कृष्णकांत पांडे जी का निधन पूरे कॉन्ग्रेस परिवार के लिए बहुत दुःखद है। उनके प्रियजनों को मैं अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। आज, यात्रा के दौरान अंतिम समय में उन्होंने हाथों में तिरंगा थामा था। देश के लिए उनका समर्पण हमें सदा प्रेरणा देता रहेगा।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ कन्याकुमारी से शुरू हुई थी। कुल 3500 किलोमीटर की दूरी तय करने के दौरान यह यात्रा 12 राज्यों से गुजरेगी और जम्मू-कश्मीर में समाप्त होगी। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरुआत से ही विवादों में घिरी रही है। मशहूर फिल्म KGF चैप्टर-2 के गानों के कॉपीराइट मामले में सोमवार (7 नवंबर 2022) को बेंगलुरु की एक कोर्ट ने कॉन्ग्रेस और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश दिया था।

‘मैं गणपति-गौरी इत्यादि देवी-देवताओं को नहीं मानूँगा’: छत्तीसगढ़ में दिलाई गई हिंदू विरोधी शपथ, कॉन्ग्रेसी महापौर भी थीं मौजूद

कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ से एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में हिंदू विरोधी शपथ दिलवाई जा रही है। वीडियो राजनांदगांव का है। इस दौरान कॉन्ग्रेस की महापौर हेमा सुदेश देशमुख भी मौजूद थीं।

वीडियो राजनांदगांव के वार्ड मोहरा में आयोजित राज्यस्तरीय बौद्ध सम्मेलन का है। यह वीडियो 7 नवंबर 2022 का है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि लोगों को हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानने की शपथ दिलाई जा रही है।

वीडियो में एक व्यक्ति वहाँ मौजूद लोगों को शपथ दिलाते हुए कह रहा है, “मैं गौरी,गणपति इत्यादि हिन्दू धर्म के किसी भी देवी-देवताओं को नहीं मानूँगा और ना ही कभी उनकी पूजा करूँगा। मैं इस बात पर कभी विश्वास नहीं करूँगा कि ईश्वर ने कभी अवतार लिया है।” इस दौरान शपथ दोहराने वाले लोगों में महापौर देशमुख भी दिख रहीं हैं।

जनजातीय मामलों की केन्द्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने यह वीडियो ट्वीट करते हुए कहा है, “कॉन्ग्रेस राज में हिंदू विरोध चरम पर है। यहाँ हिंदू आस्था पर खुलेआम प्रहार किया जा रहा है और कॉन्ग्रेस की राजनांदगांव महापौर हिंदू धर्म के विरूद्ध शपथ ले रही हैं। कोई सनातन विरोधी कार्यक्रम हो और कॉन्ग्रेस से उसके तार ना जुड़े ऐसा हो सकता है क्या?”

छत्तीसगढ़ भाजपा प्रवक्ता नीलू शर्मा ने भी इस आयोजन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “एक तरफ भूपेश बघेल की सरकार छतीसगढ़ में राम गमन पथ निर्माण की बात करती है। दूसरी और कॉन्ग्रेस नेता हिंदू विरोधी कार्यक्रमों में शिकरत करते हैं। कॉन्ग्रेस महापौर की ऐसे कार्यक्रम में मौजूदगी दुर्भाग्यजनक है।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले इसी तरह का कार्यक्रम दिल्ली में भी हुआ था। 5 अक्टूबर 2022 को आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 10 हजार लोगों को हिंदू विरोधी शपथ दिलाई गई थी। इसका आयोजन बौद्ध सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा नई दिल्ली के झंडेवालान स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर भवन में किया गया था।

इस कार्यक्रम में केजरीवाल सरकार के तत्कालीन मंत्री राजेंद्र पाल गौतम भी शामिल हुए थे। गौतम ने इसकी कुछ तस्वीरें ट्विटर पर साझा करते हुए कहा था, “आज मिशन जय भीम के तत्वाधान में अशोका विजयदशमी पर डॉ. अंबेडकर भवन रानी झाँसी रोड पर 10000 से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने तथागत गौतम बुद्ध के धाम में घर वापसी कर जाति विहीन और छुआछूत मुक्त भारत बनाने की शपथ ली। नमो बुद्धाय, जय भीम!”

इस कार्यक्रम में गौतम समेत कई लोग एक शपथ लेते भी दिखे थे। इसमें कहा गया था, “मैं हिंदू धर्म के देवी देवताओं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, श्रीराम और श्रीकृष्ण को भगवान नहीं मानूँगा, न ही उनकी पूजा करूँगा। मुझे राम और कृष्ण में कोई विश्वास नहीं होगा, जिन्हें भगवान का अवतार माना जाता है।” इस दौरान यह भी कहते हुए सुना गया, “मैं इस बात को नहीं मानता और न ही मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे केवल पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूँ। मैं श्राद्ध नहीं करूँगा और न ही पिंडदान करूँगा।” इसके बाद गौतम को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

‘जैसे जानवरों को बेचते हैं तुझे बेच दूँगा’: समीर अहमद ने पहचान छिपा फँसाया, फिर इतना प्रताड़ित किया कि कोमल शर्मा ने कर ली आत्महत्या

लव जिहाद ने एक और हिंदू युवती की जान ले ली है। इस युवती की पहचान हरियाणा के यमुनानगर की कोमल शर्मा के तौर पर सामने आई है। आरोपित समीर अहमद उत्तर प्रदेश के शामली जिले के झिंझाना कस्बे का रहने वाला है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार युवती ने करीब तीन महीने पहले आत्महत्या कर ली थी। प्रकरण तब सामने आया जब युवती की सुसाइड नोट लेकर उसकी भाभी 7 नवंबर 2022 को शामली जिला अधिकारी के पास पहुँची।

शिकायत में बताया गया है कि फेसबुक के जरिए समीर और कोमल का संपर्क हुआ था। समीर ने खुद को हिंदू बता 5 साल पहले कोमल से शादी की। इस दौरान कई बार उसका गर्भपात कराया गया। बाद में वह कोमल को ब्लैकमेल करने लगा और खुद आकर शामली में रहने लगा। इसी बीच कोमल को उसके मुस्लिम होने का पता चला और सदमे में आकर उसने आत्महत्या कर ली।

कोमल की भाभी ने बताया ​है कि अपने बच्चे की तबीयत खराब होने और पति की मौत की वजह से उन्हें शिकायत करने में देरी हुई है। यह भी कहा है कि कानूनी कार्रवाई रोकने के लिए समीर उन्हें भी धमकी दे रहा है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार शामली की डीएम जसजीत कौर ने पुलिस को जाँच के निर्देश दिए हैं। शामली पुलिस ने भी ट्ववीट कर इसकी पुष्टि की है।

कोमल ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा था। यह नोट भी उसकी भाभी ने अपनी शिकायत के साथ दी है। इसमें कोमल ने बताया है कि शादी के कुछ दिनों बाद ही समीर उसे टॉर्चर करने लगा। उससे पैसों की डिमांड करता था। निजी फोटो उसके परिजनों को भेजने और सोशल मीडिया पर डालने की धमकी देता था। जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि जैसे जानवर को बेचते हैं, वैसे तुझे बेच दूँगा। नोट में समीर की अम्मी और भाई पर भी धमकी देने का आरोप लगाया गया है।

(नोट: पुलिस जाँच में पता चला है कि कोमल शर्मा जीवित है। जो महिला लक्ष्मी बनकर शिकायत करने आई थी, असल में वही कोमल शर्मा है। केस में आए नए मोड़ के बारे में आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

पत्नी ने प्रेमी बबलू खान के साथ मिल कर रची साजिश, प्रॉपर्टी डीलर पति को मरवा डाला: सुपारी में दिया 65 तोला सोना, शूटर दोस्त मोहम्मद्दीन भी गिरफ्तार

दिल्ली से सटे गुरुग्राम में एक महिला द्वारा 65 तोला सोने की सुपारी देकर पति की हत्या करवाने का मामला सामने आया है। मृतक बड़ा प्रॉपर्टी डीलर था, जिसकी संपत्ति हड़पने के लिए उसकी पत्नी ने अपने प्रेमी बबलू खान के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची और फिर सुपारी देकर मरवा दिया। पुलिस ने आरोपित महिला और शूटर को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, महिला का प्रेमी बबलू खान अब भी फरार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 30 अक्टूबर 2022 की रात गुरुग्राम के सेक्टर-22 पालम विहार इलाके में बन रही एक इमारत में प्रॉपर्टी डीलर धर्मेश यादव सो रहे थे। इस दौरान दो शूटर्स ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। पुलिस को शुरुआती जाँच में पता चला था कि मृतक धर्मेश और उसकी पत्नी के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। साथ ही, नीतू उसके चरित्र पर भी शक करती थी।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि शुरुआती जाँच में सामने आई बातों को ध्यान में रखते हुए जब उन्होंने मृतक धर्मेश यादव के घर में काम करने वाली नौकरानी से पूछताछ की तो पता चला कि नौकरानी ने ही बबलू खान से नीतू को मिलवाया था। जिसके बाद, दोनों के बीच अफेयर शुरू हो गया था। बबलू खान यूपी के संभल जिले अंतर्गत बहजोई का रहने वाला है। यही नहीं, देहरादून के दून स्कूल में पढ़ने वाले अपने बच्चों से मिलने के लिए नीतू जब जाती थी तो बबलू भी उसके साथ पहुँच जाता था।

पुलिस ने यह भी कहा है कि प्रॉपर्टी डीलर धर्मेश की पत्नी की नजर उसकी प्रॉपर्टी पर थी। इसी वजह से उसने अपने प्रेमी बबलू खान और उसके दोस्त मोइनुद्दीन के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची और फिर सुपारी देकर मरवा दिया। नीतू ने पति की हत्या के लिए 650 ग्राम यानी 65 तोला सोना देकर अपने पति की हत्या की सुपारी दी थी, जिसकी कीमत करीब 34 लाख रुपए बताई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, नीतू ने कबूल किया है कि उसने अपने प्रेमी बबलू खान के साथ मिलकर धर्मेश की हत्या की शाजिश रची और बाद में अपने प्रेमी बबलू खान के साथ शादी करने का प्लान बनाया था। हत्या के इस मामले में पुलिस ने नीतू के अलावा बबलू खान के दोस्त मोहम्मद्दीन को गिरफ्तार किया है। उसे शूटर बताया जा रहा है।