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मोरबी नगरपालिका के चीफ ऑफिसर सस्पेंड, हादसे के बाद बताया था- बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के खोल दिया गया था पुल

गुजरात के मोरबी में हुए केबल पुल हादसे में 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी । हादसे के बाद नगरपालिका और पुल को मरम्मत करने वाले ओरेवा ग्रुप के बीच तालमेल की साफ़ कमी देखी गई थी।

कंपनी की लापरवाही तो शुरुआत में ही सामने आ गई थी, और इस सिलसिले में 9 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। हालाँकि अब मोरबी नगरपालिका के मुख्य अधिकारी संदीप सिंह झाला पर गाज गिरी है। उन्हें निलंबित कर दिया गया है ।

मोरबी के जिला अधिकारी जी. टी. पंड्या ने कहा, ”राज्य शहरी विकास विभाग ने मोरबी नगर पालिका के मुख्य अधिकारी संदीप सिंह झाला को निलंबित कर दिया है।” उन्होंने बताया कि मोरबी के रेजिडेंट अपर कलेक्टर को अगले आदेश तक मुख्य अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

इस हादसे के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के सीएम भूपेंद्र सिंह पटेल समेत मोरबी के आला अधिकारियों के साथ एक हाई लेवल मीटिंग की थी। पीएम ने इस मीटिंग में हादसे में मारे गए लोगों के प्रति दुख जताते हुए अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने को कहा था।

वहीं खबर यह भी आ रही है कि गुजरात के मोरबी पुल हादसे में गिरफ्तार किए गए 9 लोगों का कोई भी स्थानीय वकील केस नहीं लड़ेगा। ‘मोरबी बार एसोसिएशन’ और ‘राजकोट बार एसोसिएशन’ ने इन लोगों का मामला हाथ में नहीं लेने और अदालत में उनका प्रतिनिधित्व नहीं करने का फैसला लिया है।

‘मोरबी बार एसोसिएशन’ के सीनियर एडवोकेट एसी प्रजापति ने बताया कि ओरेवा कंपनी के 9 आरोपित मोरबी ब्रिज हादसे में गिरफ्तार किए गए हैं। दोनों बार एसोसिएशनों ने यह प्रस्ताव पारित किया है कि कोई भी वकील इनका मामला हाथ में नहीं लेगा।

उल्लेखनीय है कि ब्रिज पिछले कई महीनों से बंद चल रहा था, जिसे रेनोवेशन कर 26 अक्टूबर 2022 को खोला गया था। छह महीने तक चले रेनोवेशन कार्य पर करीब 2 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। बताया जा रहा है कि ब्रिज पर क्षमता से अधिक लोगों के जुटने के कारण यह हादसा हुआ। मोरबी नगरपालिका के मुख्य अधिकारी(अब निलंबित) संदीप सिंह झाला ने पुल के रखरखाव और संचालन के लिए जिम्मेदार ओरेवा कंपनी (अजंता मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड) पर बिना सूचित किए पुल को लोगों के लिए खोलने का आरोप लगाया था ।

यूपी के आजमगढ़ में BSP के जुलूस में लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी पप्पू खान सहित दो हिरासत में

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ (Azamgarh, UP) जिले में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के जुलूस में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने की घटना सामने आयी है। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पुलिस ने संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में पुलिस ने बसपा प्रत्याशी समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है। घटना गुरुवार (3 नवंबर 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आजमगढ़ जिले के जहानागंज थाना अंतर्गत एक कस्बे में आगामी निकाय चुनावों को लेकर बहुजन समाज पार्टी के नेताओं द्वारा बैठक आयोजित की गई थी। इसमें बीएसपी के कई नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए थे। इस बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी पप्पू खान भी पहुँचे थे। बैठक के बाद उन्होंने अपने समर्थकों सहित जुलूस निकाला था।

इस जुलूस से जुड़े वीडियो में बसपा प्रत्याशी पप्पू खान जुलूस की अगुवाई करते नजर आ रहे हैं, जबकि हाथों में बीएसपी का झंडा लेकर चल रहे उनके समर्थक ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, मुबारकपुर के बीएसपी के पूर्व विधायक गुड्डू जमाली भी इस जुलूस में शामिल थे।

इस मामले में आजमगढ़ के एसपी अनुराग आर्य ने कहा है कि सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो संज्ञान में आया है। इसमें आपत्तिजनक नारे लगाए जाने की शिकायत कुछ लोगों द्वारा की गई है।

उन्होंने कहा कि वीडियो की जाँच कर पप्पू खान और नारा लगाने वाले व्यक्ति खुर्शीद अहमद पुत्र शिब्ली पहलवान को हिरासत में लिया गया है। साथ इन दोनों के मोबाइल जब्त करते हुए मूल वीडियो रिकवर करने के बाद फॉरेंसिक जाँच कराई जाएगी।

एसपी ने यह भी कहा है कि इस मामले में जो भी आरोपित पाए जाएँगे उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस जुलूस की परमिशन थी या नहीं व इसमें शामिल हुए लोगों की जानकारी जुटाकर एफआईआर में धाराएँ बढ़ाई जाएँगी।

फ्री नील मुकुट हलाल, पैसा लगे तो कुफ्र… नीला (ब्लूटिक) मिला तो मिला, मगर मुफ्त न मिला तो क्या मिला

ट्विटर जगत में हाय तौबा मची हुई है। जो ट्विटर लिबरल-वामपंथियों की नई लंका लगभग बन ही चुका था, अचानक एक पूंजीपति ने खरीद लिया। अधिग्रहण की खबर आते ही दक्षिणपंथियों को लगने लगा था कि पवनसुत ही हैं जो मस्क का रूप धर कर वामपंथियों की लंका जलाने निकल पड़े हैं।

“मस्क” समान रूप कपि धरी।

लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी॥

पूंजीवादी के हाथ में आते ही उसने कमाई के साधन ढूँढने शुरू कर दिए। मुफ्त न रहने से दुखी तो सभी नील मुकुटधारी हुए, लेकिन चंदे की उगाही से धंधे की कमाई के बारे में सोचते ही ट्विटर के वामपंथी कर्मचारियों के हाथ पाँव फूल गए। रिसेशन में जाते अमेरिका में ट्विटर के वामपंथी और झुके कर्मचारी चाहकर भी नौकरी छोड़कर नहीं जा सकते। हाँ उन्हें निकाला जरूर जा सकता है। कुछ निकाले भी गए , कुछ पर नकेल भी कसी गई। कुल मिला कर पूंजीपति मस्क के हाथ में आते ही ट्विटर पर वामपंथियों की टाँय-टाँय ऐसे शुरू हो गई जैसे उनके टें बोलने के दिन आ गए हों। सबसे अधिक दुःख तो पत्रकारों को हुआ।

कल तक जो नील मुकुट “लिबरल प्रिवलेज” हुआ करता था, अचानक अब आठ डॉलर का हो गया। भारत ही नहीं दुनिया भर के नील मुकुटधारी जो इसको अपना विशेषाधिकार समझते हुए इतराते थे अचानक बिलबिला उठे। आठ डॉलर केवल नील मुकुट के?

‘केवल नील मुकुट’, अगर अर्थहीन है तो चाहिए ही क्यों? अगर चाहिए ही है तो मूल्य देकर क्यों नहीं ले सकते? लिबरल प्रिवलेज था भाई, चुन-चुन कर दिया जाता था, अब कोई भी ऐरा-गैरा आठ डॉलर में ले लेगा। फिर विशेष वाली बात रह कहाँ जाएगी? लेने को तो वामपंथी जहर का भी चंदा इकठ्ठा कर के ही लेते हैं, सो ये आठ डॉलर भी कहीं न कहीं से चंदा इकठ्ठा करके जुटा ही लेंगे। उनके लिए तो कल भी पैसे पप्पू देगा वाली बात थी, आगे भी रहेगी। कल तक पाँच रूपए माँगते थे, अब छह माँग लेंगे। क्राउड फंडिंग से लेकर लिंगपरिवर्तन से लेकर विदेश यात्राओं तक के लिए पैसा जमा करने वालों के लिए यह कौन सी नई बात होगी? उन्हें कौन सा अपनी जेब से देना है, लेकिन समस्या आठ डॉलर नहीं है, समस्या है जो इस नील मुकुट के साथ जुड़ी हुई प्रतिष्ठा थी अब उतनी नहीं रह जाएगी।

ऊपर से नील मुकुट देखकर यह तो पता चल ही जाएगा कि किसके पास पैसा है। फिर किस मुँह से वो गरीबी वाली कहानियाँ बनाएँगे? किस मुँह से टमाटर आलू के भाव पर रोना रोएँगे? उससे बड़ी बात तो ये कितने ऐसे महानुभाव होंगे जो मुफ्त न होने की वजह से अपना नील मुकुट त्याग पाएँगे? त्याग देंगे तो अपने उठने बैठने वालों को क्या मुँह दिखाएँगे? क्या कहेंगे अपने चेले चपाटों से जिन्हें अपना नील मुकुट दिखा कर रौब दिखाते थे?

जैसे मध्यम वर्ग में कोई वस्तु बजट से बाहर और आवश्यकता न होने पर भी लेना पड़ती है, क्योंकि पडोसी उसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना देते हैं, वैसे ही क्या अब नील मुकुट हो जाएगा? क्या इसी होड़ में ये आज के नील मुकुटधारी पैसे देकर भी अपना नील मुकुट बचाएँगे?

बचाएँ न बचाएँ, हज़ारों सरकारी और निजी संस्थाओं से तो ट्विटर की कमाई तो भरपूर हो ही जानी है।

एक भूतपूर्व पत्रकार टाइप आवेदक नील मुकुट न मिलने से परेशान थे, लेकिन अब अचानक पैसे की बात आने से सोच में डूब गए हैं – लें, कि न लें? कहते फिर रहे हैं षड्यंत्र के तहत हमारा अकाउंट वेरीफाई नहीं किया जा रहा।

उधर ट्विटर के आधुनिक मंडल जी बिफर पड़े हैं। कह रहे हैं इसमें EWS को कोई छूट तो देनी थी? वैसे मस्क किस्मतवाले हैं कि वो भारत में न हुए। हुए होते तो उन्हें न जाने कितनों को नील मुकुट बस इसलिए देना पड़ता कि उनकी कम्पनी चल पाए। नहीं तो लोग ‘छीन के लेंगे’ पर उतर आते। सरकार इसमें भी आरक्षण लागू कर देती। हो सकता है कोई नील मुकुट सेस लगाकर गरीबों, पिछड़ों, दलितों अल्पसंख्यकों के साथ मंत्रियों, संतरियों के नील मुकुट का खर्चा निकाल लेती।

केजरीवाल मुफ्त बिजली के साथ मुफ्त नील मुकुट का वादा चुनाव में कर देते। या हैंडसम सिसोदिया जी एक बोतल ब्लू लेबल के साथ ब्लू-टिक मुफ्त की योजना निकाल देते। बंगाल में नील मुकुट के नाम पर कोई चिटफंड शुरू हो जाता। तृणमूल सरकार बांग्लादेशियों को चुन चुन कर आधार कार्ड, राशन कार्ड के साथ नील मुकुट भी देने लगती। पंजाब वाले सरकार से नील मुकुट पर न्यू.स.मू माँगने धरने पर बैठ जाते। दक्षिण भारत में चुनाव में कोई द्रमुक पार्टी घर घर जाकर नील मुकुट घर घर लगा आती। पास्टर लोग प्रार्थना सभा में नील मुकुट ऐसे दिलवाते जैसे व्हीलचेयर से लंगड़ों को उठाकर चला देते हैं।

उत्तर प्रदेश वाले कहते सिर्फ अयोध्या, काशी मथुरा को नील मुकुट दे दो बाकि सब भाड़ में जाओ। बिहार में कोई नील मुकुट दिलवाने के लिए कोचिंग सेंटर शुरू हो जाता। मध्य प्रदेश में मामाजी नील मुकुट को समग्र कार्ड से जोड़ देते। पटवारी परीक्षा में नील मुकुट अनिवार्य कर दिया जाता।

कोई न कोई गुजराती मस्क से कोई डील कर के डीलरशिप ले लेता और नील मुकुट दिलवाने का बिजनेस डाल देता।

ब्लू-टिक न मिलने पर आत्मदाह की धमकी देने वालों की ख़बरें अखबारों में आतीं। ऐसी भी ख़बरें आती कि फलाँ मास्टर के लड़के ने पंचर की दूकान पर काम करके पैसे जोड़े और ब्लू-टिक लिया।

उधर पाकिस्तानी अपनी आदत के अनुसार ब्लू-टिक जिहाद शुरू कर देते। मौलवी बताने लगते कि जेहाद में मरने के बाद हूरों के साथ ब्लू-टिक भी मिलता है। नील मुकुट मुफ्त होने पर हलाल और पैसे लगने पर कुफ्र घोषित कर दिया जाता। JNU में एडमिशन के साथ नील मुकुट दिया जाने लगता। कोई दावा करता की ब्लू-टिक में जो ब्लू है वो बाबा साहब के कोट का ब्लू है, इसलिए ब्लू-टिक पर पहला अधिकार मूलनिवासियों का है।

हो सकता है कुछ नव बौद्ध यह दावा कर डालते कि नील मुकुट को बौद्ध धर्म से चुराया गया है। चालीस हज़ार साल पहले की किसी बौद्ध मूर्ति में पहले से लगा हुआ नील मुकुट वाली तस्वीरें वायरल हो रही होती। दो चार दन्त कथाएँ भी किसी ग्रन्थ में निकल आतीं। जैसे कहीं बुद्ध प्रवचन दे रहे थे तभी अचानक एक कुत्ता आ गया, कुत्ता प्रवचन सुनने लगा। प्रवचन सुनते सुनते ही उसे ब्लू-टिक प्राप्त हो गया और वह वेरिफाइड कुत्ता घोषित हो गया।

प्राचीन काल में अंगुलिमाल उन सबकी उँगलियाँ काट लेता था जिनके पास ब्लू-टिक होता था। क्योंकि वे उस समय भी फिल्दी-रिच लोग होते थे। बाद में वही अंगुलिमाल ने थ्रेड लिखना शुरू कर दिया और लेखक बन गया।

कोई यह दावा भी कर ही देता कि ब्लू-टिक दरअसल मुगलों की देन है। तैमूर भारत को लूटने नहीं ब्लू-टिक देने ही भारत आया था। ब्लू-टिक बाबर ऊँट पर लादकर अफगानिस्तान से लेकर आया था और अकबर दरबार लगाकर लोगों को ब्लू-टिक बाँटता था। औरंगजेब के पास खुद के ब्लू-टिक थे।

कुछ आधुनिक इतिहासकार इसका श्रेय नेहरू, गाँधी या राजीव जी को दे देते। राजीव जी कम्प्यूटर लाए थे इसलिए आज ब्लू-टिक मिल रहा है,लेकिन उनके योगदान को वर्तमान सरकार आदर नहीं देती। हालाँकि उनका लड़का खुद को कोड़े मारता घूम रहा है। जो सबसे ज्यादा कोड़े खाएगा राहुल जी अपने हाथ से उसे ब्लू-टिक देंगे। खुद को कोड़े मारने से तो ब्लू-टिक मिलता है ऐसा सुनते ही कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में खुद को कोड़े मारने की होड़ लग जाती।

ईद पर बचकर मुहर्रम पर नाचने की बात करने वाले ताज़ा-ताज़ा अध्यक्ष बने खड़गे जी यह सोचकर प्रसन्न होते कि मुहर्रम के जुलूस में ऐसे ही खुद हो कोड़े मारते हुए सभी कॉन्ग्रेसी निकलेंगे। ब्लू आइस वाले थरूर की बाँहें खिल जातीं। दिग्विजय सिंह सोचते कैसे जुलूस में दस्तखत करके हाजिरी लगाई जाए और बिना कोड़े खाए ब्लू-टिक लिया जाए।

वैसे तो पुलिस और प्रशासन के लोग ट्विटर के दफ्तर पर दबिश देकर हर महीने पूरे स्टाफ के लिए ब्लू-टिक ले ही आते। बाकी सरकारी संस्थाओं को डर के मारे खुद ही दे दिया जाता। न देने पर अगर सुप्रीम कोर्ट संज्ञान लेकर केस दर्ज न करता तो कोई न कोई वीर पीआईएल डाल ही देता कि जहाँ अस्सी करोड़ लोगों के पास खाने के पैसे नहीं हैं उनके पास ब्लू-टिक के लिए पैसे कहाँ से आएँगे? जिसपर कोर्ट आदेश देता कि जब तक मामला कोर्ट में है तब तक किसी से आठ डॉलर न वसूले जाएँ। मामला कोर्ट में एक बार जाता तो सालों तक न सुलझता और ब्लू-टिक से कमाई की योजना धरी रह जाती।

फिलहाल तो स्थिति यह है कि जहाँ दुनिया भर के लोग तरह तरह की बात कर रहे हैं, वहीं मस्क हर बात पर विनोदपूर्ण उत्तर देते हुए कुशल व्यापारी की तरह कह रहे हैं मुफ्त कुछ नहीं – लाओ मेरा आठ डॉलर।

‘मंदिर जैसे शरीर में जबरन प्रवेश कर…’: हलीम-रिजवान को ‘पिशाच’ बता कोर्ट ने दी फाँसी, रेप के बाद नाबालिग को कर दिया था अंधा

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की एक अदालत ने हलीम और रिजवान को मौत की सजा सुनाई है। दोनों नाबालिग लड़की को अगवा कर बलात्कार के दोषी ठहराए गए हैं। हलीम ऑटो मै​केनिक है, जबकि रिजवान दर्जी। इस मामले के एक अन्य आरोपित का मामला अदालत ने किशोर न्यायालय को ट्रांसफर कर दिया था।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने हलीम और रिजवान को ‘पिशाच’ करार देते हुए कहा कि उन्होंने नाबालिग के मंदिर जैसे शरीर में न केवल प्रवेश किया, बल्कि उसे तोड़ने की भी कोशिश की। उल्लेखनीय है कि गैंगरेप के बाद पीड़िता को गंभीर चोटें भी पहुँचाई गई थी। उसका चेहरा विकृत कर दिया गया था। बाईं आँख से वह स्थायी रूप से अंधी हो चुकी है।

कोर्ट ने गुरुवार (3 नवंबर 2022) को सजा सुनाते हुए इसे जघन्य अपराध बताया। पचास हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। इससे पहले 21 अक्टूबर 2022 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश/बलात्कार और पॉक्सो कोर्ट के जज पंकज कुमार श्रीवास्तव ने हलीम और रिजवान को दोषी करार दिया था।

कोर्ट ने कहा था, “अपनी हवस को पूरा करने के लिए न केवल पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया, बल्कि जानबूझकर उसे ऐसी चोटें भी पहुँचाई कि वह शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग हो गई। जब भी पीड़िता खुद को आईने में देखती होगी, उसे खुद पर अफसोस होता कि वह इस दुनिया में लड़की के रूप में क्यों पैदा हुई। लोग अपने जीवन में एक बार मरते हैं और यह पीड़िता हजारों, लाखों बार मरेगी।”

कोर्ट ने 10 पेज के आदेश में मौत की सजा को सही ठहराते हुए कहा है कि अगर कड़ी सजा नहीं दी गई तो लड़कियों के माता-पिता हर पल इस डर में जिएँगे कि कोई उनकी बेटी को हवस का शिकार न बना ले। गौरतलब है कि 30 दिसंबर 2021 को इस मामले में प्रतापगढ़ के नवाबगंज थाने में मामला दर्ज कराया गया था। 27 दिसंबर 2021 को बाजार जाते समय नाबालिग पीड़िता को अगवा किया गया था। रेलवे लाइन के पास गैंगरेप के बाद उसे छोड़ दिया गया था। उससे पहले क्रूरता से उसके सिर पर वार किए गए। आँखों पर चाकू से हमला किया गया। पैर तोड़ दिया गया था।

BJP के पूर्व नेता नवीन जिंदल को सुप्रीम कोर्ट से राहत: पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी को लेकर दर्ज सभी FIR दिल्ली पुलिस के हवाले, गिरफ्तारी नहीं

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार (4 नवंबर 2022) को इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) पर बयान से जुड़े दिल्ली प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रवक्ता नवीन जिंदल (Navin Jindal) केस को दिल्ली पुलिस को सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जाँच पूरी होने तक उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई है।

नवीव जिंदल की ओर से कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लुथरा ने जिरह की। उन्होंने कोर्ट के सामने नुपूर शर्मा और नविका कुमार के मामले का जिक्र किया और कहा कि इन दोनों भी पैगंबर मामले में नामित हैं। ऐसे मेें नवीन कुमार के सारे केसों को भी दिल्ली ट्रांसफर कर जाँच के लिए दिल्ली पुलिस को सौंपी जाए और इनकी गिरफ्तारी पर रोक लाई जाए।

उधर एजेेंसी की ओर से कोर्ट में पेश पेश हुए अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने इसके लिए अपनी सहमति दे दी। उन्होंने कहा, “वही ट्वीट, वही ट्विटर हैंडल की जाँच की जा रही है। जो दिल्ली में दिख रहा है, वही कोलकाता में दिख रहा है।”

इस पर जस्टिस एमआर शाह ने कहा, “हम यह आदेश पारित नहीं करेंगे कि इस मुद्दे के संबंध में भविष्य में दर्ज होने वाली सभी प्राथमिकी भी दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित की जाएगी। हम केवल उन मामलों को स्थानांतरित करने का आदेश देंगे, जो लंबित हैं और कोई अन्य मामला नहीं है।”

बता दें कि मई 2022 में टाइम्स नाऊ की एंकर नविका कुमार के मामले में एमआर शाह की खंडपीठ ने सभी प्राथमिकी और शिकायतों को दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। बता दें कि पैगंबर मुहम्मद पर जो बयानबाजी हुई थी वह नविका कुमार के शो में ही हुई थी। नवीन जिंदल ने बाद में ट्विटर पर इस संबंध में बयान दिया था।

पैगंबर पर बयानबाजी के बाद बीजेपी ने नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसको लेकर देश भर में बवाल किया गया था और नवीन जिंदल तथा नूपुर शर्मा के खिलाफ देश भर में कई जगहों पर शिकायत दर्ज कराई गई थी।

पंजाब में हिंदूवादी नेता की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या: कूड़े में मिली थी भगवान की मूर्ति, मंदिर के बाहर धरने पर बैठे थे

पंजाब के अमृतसर में मंदिर की मूर्तियों की बेअदबी मामले पर प्रदर्शन कर रहे शिवसेना हिंदुस्तान के नेता सुधीर सूरी को गोली मार दी गई। घटना गोपाल मंदिर के बाहर घटी। गोली की आवाज सुनते ही हड़कंप मच गया। कहा जा रहा है कि प्रदर्शनस्थल में जुटी भीड़ में से कोई हमलावर था जिसे पुलिस ने पकड़ लिया है।

गोली लगने के बाद सूरी की हालत नाजुक थी। उनको अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें संभव इलाज देने का प्रयास भी किया लेकिन इलाज के वक्त सूरी ने दम तोड़ दिया। गोली उनकी छाती में लगी थी।

पुलिस ने गोली मारने वाले संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है। उसकी पहचान संदीप के तौर पर हुई है। पुलिस को उसके पास से हथियार भी बरामद हुआ है। सूरी काफी समय से खालिस्तानियों के निशाने पर थे। कुछ समय पहले खुलासा भी हुआ था कि विदेश में बैठकर खालिस्तानी उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि सुधीर सूरी कुछ दिन से कूड़े में भगवान की मूर्तियाँ मिलने के बाद गोपाल मंदिर के बाहर धरना दे रहे थे। उनकी माँग थी कि मंदिर के बाहर रखा कूड़ा साफ हो और इस तरह देवी-देवताओं का अपमान न हो। इसी प्रदर्शन के वक्त उन पर गोली चली।

चश्मदीद डॉ अजय शर्मा ने बताया, “दो सरदार बाइक पर आए। उन्होंने गाड़ी खड़ी की। इसके बाद उन्होंने 5-6 गोली मारी। एक उनके माथे पर लगी। 2 छाती पर लगी। 1 कंधे पर लगी। उन लोगों ने सुधीर सूरी को पहले से निशाना बनाया हुआ था। एक को पुलिस ने पकड़ लिया है।”

इससे पहले गुरुवार को भी एक शिवसेना नेता के घर के पास फायरिंग की घटना घटी थी। गुरुवार (3 नवंबर 2022) को टिब्बा रोड स्थित ग्रेवाल कॉलोनी में पंजाब शिवसेना नेता अश्विनी चोपड़ा के घर के पास दो साइकिल सवार लोगों ने फायरिंग की थीं। हमलावर मौके से निकल गए थे। लेकिन उनकी फुटेज घर के बाहर लगे सीसीटीवी में कैद हो गई थी।

तुष्टिकरण की यात्रा पर राहुल गाँधी: पहले पादरी से पढ़ा ईसाइयत का पाठ, अब मुस्लिमों ने विक्टिम कार्ड से वक्फ बचाओ तक पर दी समझाइश

भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) पर निकले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) तुष्टिकरण की राजनीति को नया मुकाम दे रहे हैं। पहले उन्होंने भारत माता को लेकर घृणा दिखाने वाले पादरी से ईसाइयत का पाठ पढ़ा था। अब कथित मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की है।

7 सितंबर 2022 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से 3750 किमी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू हुई थी। अभी यह यात्रा तेलंगाना में है। तमिलनाडु, केरल, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक से गुजरते हुए राहुल गाँधी तेलंगाना पहुँचे हैं। इस दौरान उन्होंने एआईएमआईएम (AIMIM) के गढ़ हैदराबाद की चार मीनार मस्जिद के सामने भाषण भी दिया था।

इसके अलावा तेलंगाना के हनुमाननगर में राहुल गाँधी ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त नौकरशाहों, सामुदायिक संगठनों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों, कर्मचारी प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्र से जुड़े लोगों सहित मुस्लिम बुद्धिजीवियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की। इन मुस्लिम ‘बुद्धिजीवियों’ ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी पर अपना विश्वास जताया।

डेक्कन क्रॉनिकल की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम बुद्धिजीवियों और राहुल गाँधी के बीच मुस्लिम समुदाय के कथित उत्पीड़न से लेकर वक्फ संपत्तियों के संरक्षण सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। फरहाना खान नाम की एक शिक्षाविद ने मीडिया को बताया, “राहुल गाँधी ने हमें कई आश्वासन दिए हैं, जो हमें वास्तविक लगे। हमने वक्फ संपत्तियों के संरक्षण सहित कई मुद्दों पर उनसे चर्चा की है, जिन्हें नेताओं द्वारा लूटा जा रहा है।”

एक सामाजिक कार्यकर्ता सबा कादरी ने कहा, “मुस्लिमों पर हमेशा से हमले होते रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या कॉन्ग्रेस सत्ता में आने पर मुस्लिमों की रक्षा करेगी। इस पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस हमेशा से एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी रही है और मैं इस विचारधारा के साथ खड़ा रहूँगा।” राहुल से चर्चा करने वालों में पूर्व अधिकारी शफीकुज्जमां और तेलंगाना हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कुदसिया तबस्सुम भी शामिल थे।

तबस्सुम ने राहुल गाँधी से यूएपीए (UAPA) के दुरुपयोग के बारे में बात की, जिसके तहत कथित तौर पर मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूएपीए की धाराओं का इस्तेमाल मुस्लिमों को बुनियादी मौलिक अधिकारों से वंचित करने के लिए किया जा रहा है। वहीं शफीकुज्जमां ने पुलिस के हमले में मुस्लिमों को निशाने के बारे में चर्चा की। उन्होंने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस के पास बेहतर मुस्लिम प्रतिनिधित्व और स्थानीय नेतृत्व होना चाहिए।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गाँधी ने इन सभी बातों को धैर्यपूर्वक सुना। ऐसा प्रतीत होता है कि राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने मुस्लिम नेताओं की माँगों के अनुरूप यूएपीए कानून के विरोध में उनका समर्थन किया। कथित तौर पर, राहुल ने सहमति व्यक्त की कि समाज के कुछ वर्गों को निशाना बनाने के लिए यूएपीए और अन्य कानूनों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस मुस्लिम समुदाय के नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान करेगी।

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी लोकुर ने एक सिटिजन रिपार्ट जारी की थी, जिसमें यूएपीए कानून को कमजोर करने की माँग को लेकर दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों की जाँच को गलत तरीके से पेश किया गया था।

इससे पहले राहुल गाँधी ने 9 सितंबर 2022 को हिंदू विरोधी टिप्पणियों के लिए कुख्यात पादरी जॉर्ज पोन्नैया से मुलाकात की थी। इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें जीसस के बारे में चर्चा हो रही थी। पादरी राहुल गाँधी को समझा रहे थे कि यीशु ही असल में ईश्वर हैं।

अब दिल्ली में मजदूर घोटाला: श्रमिक कल्याण बोर्ड में 2 लाख फर्जी रजिस्ट्रेशन, BJP बोली- हेराफेरी से चल रही केजरीवाल सरकार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) के नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार (Delhi AAP Government) के एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं। अब यह बात सामने आई है कि दिल्ली बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड में 2 लाख फर्जी कामगार हैं। इसको लेकर भाजपा ने दिल्ली सरकार पर हमला बोला है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि बोर्ड में 2 से अधिक वर्कर फर्जी हैं और इनमें से 65,000 कामगारों के नाम पर एक ही मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड है। उन्होंने वर्करों के कल्याण वाले धन का हेराफेरी करने का आरोप लगाया।

संबित पात्रा ने कहा, “AAP द्वारा 2018-2021 के बीच लगभग 9 लाख लोगों को निर्माण श्रमिकों के रूप में पंजीकृत किया गया था, जिनमें से लगभग 2 लाख नकली हैं। इसके 65000 कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के के लिए सिर्फ एक मोबाइल नंबर डाला गया और ऐसे फ्रॉड किया गया।”

भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा, “इनमें से 4000 से अधिक श्रमिकों के स्थायी पते भी समान हैं। यह केवल प्रारंभिक जाँच है, जिसमें कहा गया है कि लगभग 2 लाख पंजीकरण फर्जी हैं और यह संख्या और भी अधिक हो सकती है।”

जाँच अधिकारियों का कहना है कि ये फर्जी आंकड़े और भी अधिक हो सकते हैं। प्रारंभिक जाँच में जिन श्रमिकों को शामिल किया गया है, वे साल 2018 से 2021 के बीच पंजीकृत हुए हैं। वहीं, सरकारी आंकड़े दर्शाते हैं कि भवन एवं अन्य निर्माण से जुड़े श्रमिकों की कुल संख्या 13 लाख 13 हजार 309 है। इनमें से 9,07,739 2018-22 के बीच जुड़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि फर्जी श्रमिकों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है।

अधिकारियों का कहना है कि जो 2 लाख फर्जी केस पाए गए हैं, उनमें 1 लाख 11 हजार 516 की दोबारा एंट्री की गई, 65 हजार लोगों के एक ही मोबाइल नंबर हैं। इनमें 15 हजार 747 ऐसे श्रमिक हैं जिनका पता एक ही है लेकिन वे आपस में किसी तरह संबंधित नहीं हैं। वहीं, 4370 श्रमिकों का स्थायी पता एक ही है।

दरअसल, श्रमिकों के कल्याण से जुड़ी संस्थानों ने उप-राज्यपाल से भ्रष्टाचार से शिकायत की थी। इसके बाद उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने 26 सितंबर 2022 को इस मामले की जाँच का आदेश दिया था। शिकायतकर्ताओं में बोर्ड के दो सदस्य भी शामिल हैं। इस मामले की पूरी रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में आ सकती है।

बता दें कि दिल्ली सरकार की विजिलेंस और एंटी करप्शन यूनिट गैर-निर्माण श्रमिकों के फर्जी पंजीकरण और उन्हें 900 करोड़ रुपए दिए जाने के मामले की जाँच साल 2018 से ही कर रही है। इस मामले में मई 2018 में FIR दर्ज की गई थी।

बता देें कि बोर्ड के पास 3,000 करोड़ रुपए का फंड है, जो 10 लाख रुपए से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट पर 1 प्रतिशत का श्रमिक कर लगा कर जनवरी 2006 से वसूला जा रहा है। इस फंड का उपयोग श्रमिकों के कल्याण पर खर्च किया जाता है, जिनमें उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देने सहित कई काम शामिल हैं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2 नवंबर 2022 को घोषणा की कि दिल्ली सरकार बोर्ड से पंजीकृत लगभग 10 लाख श्रमिकों को 5000 रुपए सहायता राशि देंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण को लेकर निर्माण कार्य पर रोक है, इसलिए ये सहायता राशि दी जा रही है। इस सहायता राशि पर 5000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पिछले साल कोविड के दौरान केजरीवाल सरकार ने इस मद से 350 करोड़ रुपए खर्च किए थे।

उधर, भाजपा प्रवक्ता पात्रा ने कहा कि फर्जी नामों के जरिए दिल्ली की केजरीवाल सरकार पैसों में हेराफेरी कर रही है और उसका इस्तेमाल अपनी पार्टी से संबंधित गतिविधियों को संचालित करने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस कल्याण फंड का निर्माण श्रमिकों के हितों के लिए किया गया, उसका उपयोग दिल्ली सरकार अपनी पार्टी के लिए कर रही है।

पराली जलाने के मामले 28% कम, ₹26 लाख जुर्माना: जानिए हरियाणा में खट्टर सरकार ने कैसे किसानों को फायदा पहुँचा बदले हालात

दिल्ली एक बार फिर गैस चैंबर बन गया है। हर साल की तरह ही इस साल भी इसका ठीकरा हरियाणा और पंजाब ​के किसानों पर फोड़ा जा रहा है। प्रदूषण की इस खतरनाक स्थिति के लिए पराली जलाने को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार आने के बाद भी पराली जलाने को लेकर स्थिति में सुधार नहीं आया है। उलटे इस साल मामले बढ़ गए हैं। यह दूसरी बात है कि जब तक पंजाब में आप की सरकार नहीं बनी थी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस समस्या के निदान का फॉर्मूला अपने पास होने का दावा किया करते थे। लेकिन, हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के प्रयासों की वजह से पराली जलाने के मामलों में काफी कम आई है।

रिपोर्टों के अनुसार पंजाब में इस साल पराली जलाने के 24146 मामले सामने आए हैं। जो पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी ज्यादा हैं। वहीं हरियाणा में 3 नवंबर 2022 तक ऐसे 2377 मामले सामने आए थे। यह पिछले साल के मुकाबले 28 प्रतिशत कम है। पिछले छह वर्षों में हरियाणा पराली जलाने की घटनाओं में 55 प्रतिशत से अधिक की कमी लाने में सफल रहा है। ऐसी घटनाओं की संख्या 2016 में 15,686 थी, जो 2021 में घटकर 6,987 हो गई थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार खट्टर सरकार ने पिछले छह साल में जो कदम उठाए हैं उसके कारण यह मुमकिन हो पाया है। हरियाणा कृषि और किसान कल्याण विभाग ने पराली नहीं जलाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के मकसद से नकद पुरस्कार शुरू किए। उन्हें सब्सिडी दी।

राज्य के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने बताया कि किसानों को सरकार इस संबंध में जागरुक करने के साथ साथ इंसेंटिव और मशीनरी मुहैया करा रही है। पराली पर एमएसपी देने को लेकर एक कमेटी का गठन किया गया है। किसानों को प्रति एकड़ सात हजार रुपए देकर धान की जगह अन्य फसलों की खेती को लेकर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

करनाल के किसानों का कहना है कि इस साल जिले में पराली जलाने की घटनाओं में कमी बेलर प्रदान करने के कारण हुई है । बेलर फसल अवशेषों को कॉम्पैक्ट गांठों में करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीन है। किसानों इन्हें कारखाने, बायोमास संयंत्र, बॉयलर और इथेनॉल संयंत्र में बेचकर कमाई करते हैं और पराली जलाने की आवश्यकता नहीं होती ।

राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक डॉ. हरदीप सिंह का कहना है कि पिछले साल तक 72770 से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें किसानों को दी गई थीं। इस वर्ष 7,146 मशीनें देने का लक्ष्य है। पराली को नष्ट करने के लिए छिड़काव करने के लिए 2.5 लाख एकड़ क्षेत्र के लिए पूसा डीकंपोजर कैप्सूल की 2.5 लाख से अधिक किट प्रदान की जा रही है।

हरियाणा के मुख्मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ने सोमवार (31 अक्टूबर 2022) को एक प्रेस मीट में कहा था कि पराली जलाने के मुद्दे पर स्थायी समाधान के प्रयास में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान के अवशेष खरीदने के मामले में विचार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई है।

इसके अलावा जो पराली जला रहे हैं उनसे भी राज्य सरकार सख्ती से निपट रही रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक पराली जलाने को लेकर 1041 चालान किए गए हैं। लगभग 26 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। अधिकारियों ने बताया कि कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और करनाल उन जिलों में शामिल हैं जहाँ पराली जलाने को लेकर सबसे ज्यादा किसानों का चालान किया गया है।

शराब पीकर प्रदर्शन, महिलाओं से छेड़खानी… गुजरात में AAP के CM कैंडिडेट इसुदान गढ़वी पत्रकार से बने हैं झाड़ू छाप नेता

गुजरात में आम आदमी पार्टी ने आज (4 नवंबर 2022) टीवी पत्रकार इशुदान गढ़वी को अपना मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया। आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने बताया कि 1648500 के करीब लोगों में से 73 फीसद लोगों के कहने पर उन्होंने इशुदान गढ़वी को अपना सीएम प्रत्याशी घोषित किया है। सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि इस घोषणा के बाद गढ़वी कितना भावुक दिखाई दिए।

मंच पर मौजूद गोपाल इटालिया ने भी उनको बधाई दी जबकि इटालिया खुद सीएम पद की रेस में कुछ समय पहले तक बड़ा नाम माने जा रहे थे। उनके अलावा बीच में मेधा पाटकर का नाम भी मीडिया में उछला था और अल्पेश कथेरिया, इंद्रनील राज्य गुरु, मनोज सुरथिया भी इस रेस में शामिल थे। हालाँकि आप ने इसुदान गढ़वी को चुना।

याद दिला दें कि इसुदान गढ़वी आम आदमी पार्टी से विवादित नाम हैं। उनके ऊपर गुजरात में (जहाँ शराब प्रतिबंध है वहाँ) शराब पीकर प्ररदर्शन करने बीजेपी की महिला कार्यकर्ता के साथ छेड़खानी करने के आरोप लग चुके हैं। इसकी वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। एफएसएल की रिपोर्ट में पुष्टि भी हुई थी कि उन्होंने घटना के समय शराब पी थी। लेकिन खुद को पाक साफ दिखाने के लिए उन्होंने सारा इल्जाम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर मढ़ दिया। उन्होंने कहा कि वो तो शराब पीते ही नहीं। वे देवी उपासक हैं।

आज जब गढ़वी के नाम की घोषणा हुई तो मंच पर गोपाल इटालिया के अलावा उनको मंच पर बैठे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गले लगाया। मान पर भी शराब से जुड़े आरोप लगते रहे हैं। इजुलाई 2016 में उन पर सांसद हरिंदर खालसा ने सदन में शराब पीकर आने का आरोप लगाया था। खालसा भी आप से ही चुने गए थे, लेकिन बाद में उन्हें पार्टी ने निलंबित कर दिया था। पिछले दिनों मान की जर्मनी यात्रा भी शराब से जुड़े आरोपों के कारण चर्चा में रही थी। हालाँकि उन्होंने आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया था