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ED ने विकास दुबे की ₹10 करोड़ की संपत्ति जब्त की, यूपी पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारा गया था खूँखार अपराधी: मनी लॉन्ड्रिंग के तहत 28 संपत्तियाँ कुर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) के गैंग पर कड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने विकास दुबे और उसके साथियों की 10.12 करोड़ रुपए की 28 अचल संपत्तियाँ कुर्क की हैं। बताया जा रहा है कि यह संपत्ति विकास दुबे और उसके सहयोगियों द्वारा अपराधिक गतिविधियों के जरिए कमाई थी। इनकी संपत्ति धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कुर्क की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चौबेपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर दुबे के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार (2 नवंबर 2022) को बताया कि कानपुर और लखनऊ में स्थित कुल 28 अचल संपत्तियों को कुर्क करने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत एक अस्थायी आदेश जारी किया गया।

ईडी की जाँच में सामने आया है कि कुल 10.12 करोड़ रुपए की ये संपत्तियाँ विकास दुबे, उसके परिवार के सदस्यों और सहयोगी जयकांत बाजपेयी व उसके परिवार के सदस्यों के अलावा गैंगस्टर के अन्य सहयोगियों के नाम पर है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के कानपुर एनकाउंटर में 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाले विकास दुबे को जुलाई 2020 में उज्जैन से गिरफ्तार किया गया था। बाद में यूपी लाते समय कानपुर के नजदीक फरार होने की कोशिश में वह मारा गया था। विकास दुबे ने कई ऐसी खूँखार वारदातों को अंजाम दिया था, जिसको याद करके आज भी कानपुर के लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कानपुर के लोग विकास दुबे को गुनाह और दरिंदगी का दूसरा चेहरा मानते हैं।

विकास दुबे ने स्कूल में पढ़ते समय ही वहाँ के प्रिंसिपल की बर्बरतापूर्ण हत्या कर दी थी। एक बार उसने कानपुर थाने के अंदर 5 सब इंस्पेक्टर और 25 सिपाही के सामने एक दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री को गोलियों से भून दिया था।

11 साल की हिन्दू बच्ची का 6 महीने से रेप कर रहा था 3 बच्चों का अब्बा साजिद, मूल रूप से मेवात का है रहने वाला: बोले हिन्दू संगठन – फाँसी दो

हरियाणा के फरीदाबाद में एक नाबालिग लड़की से रेप का मामला सामने आया है। पीड़िता की उम्र 11 साल है जो क्लास 4 की छात्रा है। आरोपित का नाम साजिद है, जो मूल रूप से मेवात का रहने वाला बताया जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक लगभग 32 साल का साजिद शादीशुदा होने के साथ 3 बच्चों का पिता भी है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के साजिद को गिरफ्तार कर लिया है। घटना की FIR सोमवार (31 अक्टूबर 2022) को दर्ज हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला फरीदाबाद के सेक्टर 58 थाना क्षेत्र का है। यहाँ पर 11 वर्षीया पीड़िता अपने 5 भाई बहनों और पिता के साथ रहती है। बच्ची की माँ का पहले ही देहांत हो चुका है। आरोपित साजिद पीड़िता के पड़ोस में रहता है और वेल्डिंग का काम करता है। आरोप है कि वो लड़की से लगभग 6 माह से दुष्कर्म करता आ रहा था। शिकायत में साजिद पर आरोप है कि उसने पीड़िता को कुछ खाने का लालच दे कर अपने घर बुलाया था और रेप किया था। बाद में उसने लड़की को धमका कर लगातार 6 माह तक उसका यौन शोषण किया।

बताया जा रहा है कि साजिद के लगातार यौन शोषण से पीड़िता गर्भवती हो गई। लड़की की दादी को जब शरीर में हो रहे बदलाव से शक हुआ, तब उन्होंने पीड़िता से पूछताछ की। बाद में सारा राज खुल गया। पीड़िता के परिजनों ने इसके बारे में जब आरोपित साजिद से बात करनी चाही तब वो परिजनों को धक्का दे कर भाग निकला। बाद में इसकी शिकायत पुलिस में की गई। फरीदाबाद की सेक्टर 65 क्राइम ब्रान्च और महिला थाना पुलिस ने आरोपित साजिद को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक साजिद पर IPC की धारा 506 और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

पीड़िता के परिजनों और पड़ोसियों ने मीडिया से बात करते हुए साजिद की करतूतों के बारे में बताया। हिन्दू संगठनों और पीड़िता के परिजनों ने आरोपित को फाँसी की सजा देने की माँग की है।

इस घटना पर फरीदाबाद के हिन्दू संगठनों ने आक्रोश जताया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए फरीदाबाद निवासी ‘गौरक्षा बजरंग फ़ोर्स’ के बिट्टू बजरंगी ने बताया कि वो पीड़ित परिवार के साथ मिल कर आरोपित को गिरफ्तार करवाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे। बिट्टू बजरंगी ने ये भी कहा कि हालाँकि साजिद गिरफ्तार हो चुका है लेकिन उसको जल्द बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा, भले ही उसके खिलाफ हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़े।

‘मोरबी पुल का ढहना भगवान की इच्छा थी’ – ये कहने वाले ओरेवा मैनेजर समेत 9 कस्टडी में भेजे गए, वकीलों का फैसला – नहीं लड़ेंगे आरोपितों का केस

गुजरात के मोरबी पुल हादसे में गिरफ्तार किए गए 9 लोगों का कोई भी स्थानीय वकील केस नहीं लड़ेगा। ‘मोरबी बार एसोसिएशन’ और ‘राजकोट बार एसोसिएशन’ ने इन लोगों का मामला हाथ में नहीं लेने और अदालत में उनका प्रतिनिधित्व नहीं करने का फैसला लिया है। ‘मोरबी बार एसोसिएशन’ के सीनियर एडवोकेट एसी प्रजापति ने बताया कि ओरेवा कंपनी के 9 आरोपित मोरबी ब्रिज हादसे में गिरफ्तार किए गए हैं। दोनों बार एसोसिएशनों ने यह प्रस्ताव पारित किया है कि कोई भी वकील इनका मामला हाथ में नहीं लेगा।

गुजरात के मोरबी हादसे की जाँच कर रहे पुलिस उपाधीक्षक (DSP) पीए झाला ने पुल के ढहने का सबसे बड़ा कारण केबल में जंग का लगना बताया है। उन्होंने मंगलवार (1 नवंबर, 2022) को स्थानीय अदालत में आरोप लगाया कि खराब रखरखाव के कारण पुल टूट गया। पुल के केबलों में जंग लग गया था। उन्होंने कहा कि अगर केबलों की मरम्मत की जाती, तो यह घटना नहीं होती। वहीं, आईओ का कहना है कि केवल पुल का फर्श बदला गया था, केबल नहीं बदला गया।

मोरबी कोर्ट ने इस हादसे के जिम्मेदार 4 आरोपितों को 5 नवंबर 2022 तक पुलिस हिरासत में और अन्य 5 लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एडवोकेट एचएस पांचाल ने बताया कि जिन 4 लोगों को पुलिस हिरासत में भेजा गया था, उनमें से 2 ओरेवा कंपनी में मैनेजर हैं और 2 अन्य ने पुल के निर्माण का काम किया था। न्यायिक हिरासत में भेजे गए 5 अन्य सुरक्षाकर्मी और टिकट विक्रेता हैं।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, डीएसपी झाला ने नौ में से चार आरोपितों की 10 दिन की रिमांड की माँग करते हुए अदालत में कहा था कि सरकार की मंजूरी के बिना 26 अक्टूबर, 2022 को पुल खोला गया था, वह भी बिना किसी सुरक्षा और लाइफगार्ड को तैनात किए। वहीं पुल का रखरखाव करने वाली ओरेवा कंपनी के मैनेजर ने अपना पल्ला झाड़ते हुए अदालत में कहा था कि इस हादसे के लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।

उसका कहना है कि यह दुखद घटना भगवान की मर्जी से हुई थी। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और एडिशनल सीनियर सिविल जज एमजे खान की अदालत के समक्ष दीपक पारेख ने कहा कि भगवान की इच्छा से इतना दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ है। पारेख उन नौ लोगों में से एक हैं, जिसे इस हादसे के बाद गिरफ्तार किया गया है।

झाला ने आईई के हवाले से कहा, “रखरखाव और मरम्मत के हिस्से के रूप में केवल प्लेटफॉर्म (डेक) को बदला गया था। गाँधीनगर से आई एक टीम द्वारा एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की रिपोर्ट में बताया गया है कि पुल में मरम्मत का कोई अन्य काम नहीं किया गया था।”

झाला ने अपनी बात को समझाते हुए कहा, “पुल एक केबल पर था, जिस पर कोई तेल या ग्रीसिंग नहीं नहीं लगाई गई थी। जहाँ से केबल टूटी उस जगह पर जंग लगा हुआ था। यदि केबल पर ध्यान दिया गया होता तो यह घटना नहीं होती। क्या काम और कैसे किया गया, इसका कोई दस्तावेज भी नहीं रखा गया है।” डीएसपी ने आगे बताया कि पुल बनाने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता की जाँच की गई या नहीं, उसके बारे में पूछताछ की जानी बाकी है।

बता दें कि पुल के रखरखाव और मरम्मत का काम देखने वाली ओरेवा कंपनी का जनवरी, 2020 का एक पत्र सामने आया है। यह पत्र ओरेवा ग्रुप ने मोरबी के जिला कलेक्टर को जनवरी 2020 में लिखा था। पत्र में कहा गया है, “हम केवल अस्थायी मरम्मत करके पुल को फिर से खोल रहे हैं।” हालाँकि इस पत्र में ऐसी चीजें सामने आई हैं, जिनसे पता चलता है कि पुल के ठेके को लेकर कंपनी ने अपनी शर्तें रखी थीं। पत्र से पता चलता है कि ओरेवा ग्रुप पुल के रखरखाव के लिए एक स्थायी अनुबंध चाहता था।

भगवान विष्णु जा रहे थे ‘स्नान’ करने, 5 घंटे बंद रहा केरल का हवाई अड्डा: 5 घंटे तक रुकी रही फ्लाइट सेवाएँ, एयरपोर्ट बनने से पहले से चली आ रही है परंपरा

केरल को यूँ ही ‘गॉड्स ओन कंट्री’ नहीं कहा जाता है। यहाँ के प्राचीनतम मंदिर तो खैर इस बात की गवाही देते भी हैं, लेकिन राज्य के हिन्दू भी अपनी आस्था को लेकर काफी सजग हैं। सरकार किसी की भी हो, लेकिन परम्परा को हमेशा निभाया जाता है। इसी क्रम में तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ने ‘भगवान विष्णु को स्नान कराने’ के लिए रनवे से गुजरने वाले जुलूस के कारण मंगलवार (1 नवंबर, 2022) दोपहर को पाँच घंटे के लिए अपनी उड़ान सेवाओं को रोका।

हवाई अड्डा मशहूर पद्मनाभ स्वामी मंदिर की सदियों पुरानी इस परंपरा के लिए हर साल दो बार अपनी उड़ानों के कार्यक्रम में परिवर्तन करता है। मंदिर का यह जुलूस यहाँ रनवे के पास से गुजरता है। मंदिर के ‘अरट्टू’ जुलूस के साथ ही मंगलवार को अलपसी उत्सव संपन्न हो गया। हवाई अड्डा प्राधिकारियों ने बताया पहले बताया था कि उड़ान सेवाएँ शाम चार बजे से रात नौ बजे तक 5 घंटे के लिए निलंबित रहेंगी।

‘पंजाब केसरी’ की रिपोर्ट के अनुसार, हवाई अड्डे के सूत्रों ने बताया कि तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयर अरबिया सहित प्रमुख विमान वाहकों की कम से कम 10 उड़ानें रद्द कर दी गईं, क्योंकि सेवाएँ शाम चार बजे से रात नौ बजे तक ठप रहीं। इस परंपरा के लिए हवाई अड्डे को बंद करने की यह प्रथा दशकों से चली आ रही है और पिछले साल अडाणी समूह द्वारा इस हवाई अड्डे का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के बावजूद भी यह रुकी नहीं है।

हवाई अड्डा प्रबंधन ने यहां एक बयान में कहा था, “अलपसी अरट्टू जुलूस के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे से गुजरने के लिए श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के सुचारू संचालन के लिए उड़ान सेवाएं एक नवंबर 2022 को शाम चार बजे से रात नौ बजे तक स्थगित रहेंगी।”

रनवे के समीप अरट्टू मंडपम है, जहाँ मंदिर की प्रतिमाओं को जुलूस के दौरान एक रस्म के तौर पर कुछ देर के लिए रखा जाता है। मंदिर की परंपरा के अनुसार, मंदिर के देवताओं की प्रतिमाओं को साल में दो बार स्नान के लिए समुद्र में ले जाया जाता है जो हवाई अड्डे के पीछे है। 1992 में हवाईअड्डे के बनने से पहले से ही यह जुलूस इस मार्ग से गुजरता रहा है।

‘PM मोदी के आने से पहले मरीजों को चढ़ा दिया नया प्लास्टर’: मोरबी पुल हादसे के बाद लिबरल गिरोह का प्रोपेगंडा, पीड़ितों के घावों का उड़ा रहे मजाक

गुजरात के मोरबी (Morbi, Gujarat) में पुल हादसे के बाद मंगलवार (1 नवम्बर 2022) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अस्पताल में जाकर घायलों का हाल-चाल लिया। उनके दौरे के बाद सोशल मीडिया पर वामपंथी लॉबी द्वारा एक कुछ फोटो वायरल करके प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है। हालाँकि, ग्राउंड रिपोर्ट में यह झूठ बेनकाब हो गया है।

दरअसल, अभिजीत दीपके (@abhijeet_dipke) ने 1 नवम्बर को दोपहर 12:22 पर अपने ट्विटर हैंडल पर एक मरीज की तस्वीर शेयर की। उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी के आने से पहले मरीजों को नया प्लास्टर चढ़ाया जा रहा है।

इस पर राहुल पंडिता ने तंज कसते हुए लिखा कि उसी अस्पताल में वो बेड किसी असली जरूरतमंद को दिया जा सकता था। द क्विंट के पत्रकार आदित्य मेनन ने इस फोटो में लीपापोती एक्सपर्ट नाम से कैप्शन दिया। NDTV की स्तम्भकार स्वाति चतुर्वेदी ने पीड़ित को स्थाई मरीज कहा। स्वाति के ट्वीट को विनोद कापड़ी ने भी RT किया है।

सोर्स – संबंधित यूजर्स के स्क्रीनशॉट

जानिए क्या है असलियत

इस फोटो में एक मरीज को प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले नई पट्टी बँधवाए दिखाया गया है। यह आरोप लगाने वालों ने बाकायदा मरीज का बेड नंबर भी साझा किया है। आख़िरकार एक ग्राउण्ड रिपोर्ट में यह प्रोपोगेंडा पूरा तरह से आधारहीन साबित हुआ।

ट्विटर पर शेयर की जा रही इस तस्वीर की असलियत जानने के लिए द लल्लनटॉप के रिपोर्टर अभिनव पांडेय ने मोरबी के उसी अस्पताल का दौरा किया। वहाँ पर उन्होंने सीधे उसी मरीज से बात की, जिसके फोटो को शेयर किया जा रहा है। पीड़ित ने अपना नाम अश्विन बताया। अश्विन ने अपनी पट्टी को लेकर उठ रहे विवाद पर पूरी जानकारी दी।

अश्विन ने अनुभव से बताया कि जब उनके पैर पर छोटी पट्टी थी तब एक्स-रे आदि लिया गया था, लेकिन उससे उनके पैर में हो रहा दर्द दूर नहीं हुआ। मरीज ने आगे बताया कि जब इंजेक्शन का असर उतर गया, तब उनका दोबारा एक्स-रे करवाया गया और चोट पर प्लास्टर बाँधा गया। अश्विन के मुताबिक, जब पट्टी छोटी थी तब प्लास्टर कच्चा था और अब पैर में फैक्चर मिलने के बाद उसे पक्का कर दिया गया है।

अश्विन ने आगे बताया कि पहले वो 125 नंबर बेड पर भर्ती हुए थे और बाद में उन्हें 126 नंबर पर शिफ्ट कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि पहले कमरे में 4 बेड लगे थे, जिसे घटाकर 3 कर दिया गया है। इसलिए वहाँ जगह बन गई है। अश्विन के मुताबिक पहले 126 नंबर बेड पर एक महिला थी, जिसे दूसरे कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है और अब उन्हें उस महिला के बेड पर भर्ती कर दिया गया है। अश्विन ने यह भी बताया कि उनकी तबियत में अब सुधार है और PM मोदी ने उनका हाल-चाल लिया है।

झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को चमचमाते अत्याधुनिक फ्लैट्स, PM मोदी सौंपेंगे चाबी: पहले चरण में 3024 फ्लैट्स का हुआ निर्माण, हाईटेक सुविधाएँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं से देश को लगातार लाभ मिल रहा है। उनकी सोच के केंद्र में हमेशा से ही गरीबों का उत्थान रहा है। इसी क्रम में पीएम बुधवार (2 नवंबर, 2022) को दिल्ली में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को चमचमाते फ्लैट्स की चाबी सौंपने वाले हैं ।

इस योजना का पहला चरण पूरा हो चुका है, जिसके तहत 3024 फ्लैट बनाए गए हैं। इन्हें बनाने में 345 करोड़ रुपए की लागत आई। मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकारियों ने बताया कि ये फ्लैट्स ‘यथास्थान स्‍लम पुनर्वास योजना’ के तहत बनाए गए हैं। इनमें सभी हाईटेक नागरिक सुविधाएँ मौजूद हैं।

फ्लैट सभी नागरिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं, जिसमें विट्रिफाइड फर्श टाइल्स, सिरेमिक टाइल्स, किचन में उदयपुर ग्रीन मार्बल काउंटर आदि लगाया गया है। इसके साथ ही सामुदायिक पार्क, इलेक्ट्रिक सबस्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, ड्यूल वाटर पाइपलाइन, लिफ्ट, स्वच्छ जल आपूर्ति के लिए भूमिगत जलाशय जैसी सार्वजनिक सुविधाएँ भी प्रदान की गई हैं।

डीडीए के मुताबिक, उनकी ओर से कालकाजी एक्सटेंशन, जेलरवाला बाग और कठपुतली कॉलोनी में ऐसी तीन परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। इसका पहला चरण पूरा हो गया है। इसके तहत 3024 फ्लैट्स (EWS flats) का निर्माण हुआ है। अब इसे झुग्गी-झोपड़ी वालों को देकर उनकी जमीन को खाली करवाया जाएगा। फिर वहाँ पर दूसरे चरण का काम शुरू होगा।

इस योजना का लाभ पाने वाली एक महिला ने नए फ्लैट मिलने पर ख़ुशी जाहिर की। उसने कहा कि वह अब इस भीड़भाड़ से बाहर निकल सकेगी। महिला ने कहा की वह यहीं पैदा हुई थी और अब उनके बच्चे बड़े हो गए हैं, जो अब एक बड़े फ्लैट में रहेंगे।

पीएम मोदी विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में लाभार्थियों को इन फ्लैट्स की चाभी सौपेंगे। इसके बाद इन घरों का मालिकाना हक उनके पास हो जाएगा।

‘लाठीचार्ज कीजिए, मार डालिए, हम नहीं जाएँगे, आप गोली चलाइए’: जब मुलायम ने रामभक्तों पर चलवाई थी अंधाधुंध गोलियाँ, वीडियो में देखें मंजर

वो 2 नवंबर का ही दिन था, जब अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियाँ चली थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने रामभक्तों पर गोलियाँ चलाने का आदेश दिए थे। इस तरह अब इस क्रूर घटना को 32 साल पूरे हो गए हैं। अयोध्या में जुटे इन कारसेवकों के बलिदान का ही परिणाम है कि आज हम वहाँ बाबरी ढाँचे की जगह भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनते हुए देख रहे हैं। वो कार्तिक पूर्णिमा का दिन था, जब मुलायम सरकार ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे रामभक्तों को मरवाया।

तब मोबाइल फोन और इंटरनेट का जमाना नहीं थे, लेकिन कैमरों से रिकॉर्ड किए गए इस घटना के कुछ वीडियो यदा-कदा सोशल मीडिया पर सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक वीडियो फेसबुक पर मौजूद है, जिसमें पुलिस की क्रूरता और रामभक्तों की निष्ठा, दोनों एक साथ देखी जा सकती है। वीडियो की शुरुआत में देखा जा सकता है कि एक साधु पर पुलिस भिड़ी हुई है। एक रामभक्त को पुलिस ले जाती है, जिस पर एक व्यक्ति कहता है – ‘वो देखो, ले गए।’

इस वीडियो में पुलिस को साधु-संतों पर लाठियाँ चलाते हुए और बंदूक से गोलियाँ चलाते हुए भी देखा जा सकता है। एक रामभक्त को ये कहते हुए सुना जा सकता है, “आइए, लाठीचार्ज कीजिए, मार डालिए। हम नहीं जाएँगे, आप गोली चलाइए।” वीडियो में जगह-जगह आगजनी और लोगों को पत्थर इकट्ठा करते हुए भी देखा जा सकता है। लोग ‘जय श्री राम’ का नारा भी लगा रहे हैं। कई जगह बेसुध लोग जमीन पर पड़े हुए हैं।

कई जगह पुलिकर्मियों को रामभक्तों को सड़क पर घसीटते हुए भी इस वीडियो में देखा जा सकता है। लाठीचार्ज में बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया और उन्हें भी पीटा गया। अकेले इस दिन कारसेवकों पर हुई अंधाधुंध फायरिंग में 40 रामभक्त मारे गए थे। इन्हीं में नाम आता है कोठारी बंधुओं का, जिन्हें हनुमानगढ़ी में पुलिस ने मार डाला। पुलिसिया क्रूरता से सरयू पुल पर भगदड़ मचने से भी कई रामभक्तों की मौत हुई। वहाँ मौजूद एक पत्रकार ने मृतकों की संख्या 45 बताई थी।

इस घटना में 60 लोग बुरी तरह घायल भी हुए थे। असल में घायलों का कोई हिसाब ही नहीं था। श्रद्धालुओं को न सिर्फ मार डाला गया था बल्कि हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार तक नहीं होने दिया गया था। उन्हें दफना दिया गया था। एक अन्य दुर्लभ वीडियो में लोग कहते दिख रहे थे कि पुलिस ने कारसेवकों के घरों में घुस-घुस कर उन्हें पकड़ा और उनके साथ क्रूरता की। एक साधु इस वीडियो में ये कहता दिख रहा है कि यूपी पुलिस की फायरिंग में अब तक 100 से भी अधिक लोग मर चुके हैं।

हिंदू विरोधी लेस्टर हिंसा की ‘स्वतंत्र जाँच’ का जिम्मा इस्लामवादियों के दुलारे को, भारी विरोध के बाद हटे प्रोफेसर क्रिस एलन

हिंदू विरोधी और इस्लामवादियों से सहानुभूति रखने वाले लेस्टर विश्वविद्यालय में हेट क्राइम के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. क्रिस एलन (Professor Dr. Chris Allen) को हालिया हिंसा की ‘स्वतंत्र जाँच’ करने के लिए नियुक्त किया गया था। लेस्टर के मेयर पीटर सोलस्बी ने उन्हें इसके लिए चुना था, लेकिन स्थानीय हिंदुओं द्वारा आपत्ति जताने के बाद एलन ने अपना पद छोड़ दिया है।

दरअसल, पीटर सोलस्बी ने 26 अक्टूबर 2022 को लेस्टर हिंसा की स्वतंत्र जाँच के लिए एलन की नियुक्ति की घोषणा की थी, लेकिन इसके 24 घंटों के भीतर ही स्थानीय पार्षदों, स्थानीय हिंदू संगठनों और सोशल मीडिया पर इस निर्णय की काफी आलोचना की गई। इसके बाद क्रिस एलन ने अपने पद से हटने का फैसला किया। एलन ने कहा कि उन्हें अब विश्वास नहीं है कि वह वर्तमान माहौल में इस मामले की निष्पक्ष जाँच कर सकते हैं।

डॉ. एलन ने कहा, “मैंने इस पद से हटने का निर्णय लिया है, क्योंकि मुझे अब विश्वास नहीं है कि मैं और मेरी टीम इस मामले की जाँच करने में सक्षम हैं और अकेडमिक जाँच के आवश्यक मापदंडों को पूरा कर सकेंगे।” प्रोफेसर एलन ने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों या नफरत के जवाब में उन्होंने पद नहीं छोड़ा है।

वह कहते हैं, “ये बताना जरूरी है कि मेरा निर्णय पिछले हफ्ते मेरे खिलाफ फैलाई गई नफरत या सोशल मीडिया पर लगाए गए झूठे आरोपों के जवाब में नहीं है।” लेस्टर हिंसा को लेकर निष्पक्ष जाँच की शुरुआत करने वाले मेयर पीटर सोलस्बी का कहना है कि वह इस निर्णय को समझते हैं और इस जाँच को आगे बढ़ाने के लिए किसी अन्य व्यक्ति या संगठन को नियुक्त करने की कोशिश करेंगे, जिस पर सभी संबंधित पक्षों का विश्वास हो।

पीटर ने कहा, “मुझे लगता है कि जाँच के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है। स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर इस बात पर ध्यान देना होगा कि क्या कोई व्यक्ति या संगठन इसे इस तरह से आगे ले जा सकता है, जिसमें सभी संबंधित पक्षों का विश्वास हो।” दरअसल, इस विवादास्पद नियुक्ति के पीछे लेस्टर के मेयर पीटर सोलस्बी हैं, जो नियुक्ति से पहले इस्लामवादी माजिद फ्रीमैन से मिले थे, जिसने हिंदू समुदाय के खिलाफ दंगे भड़काए थे।

नियुक्ति के बाद एलन ने ट्वीट में लिखा था, “मुझे आज पूर्वी लेस्टर हिंसा की स्वतंत्र जाँच के लिए नियुक्त किया गया है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत और पेशेवर रूप से एक बड़ा सम्मान है।” क्रिस एलन की नियुक्ति की खबर के तुरंत बाद 15 हिंदू संगठनों ने इस जाँच का बहिष्कार किया। हिंदू संगठनों ने मेयर पीटर सोलस्बी के निर्णय को लेकर विश्वास नहीं जताया, क्योंकि उन्होंने इससे पहले हिंदुओं को लेस्टर हिंसा का दोषी ठहराया था।

हार्बरो के सांसद नील ओ ब्रायन ने मेयर पीटर सोल्सबी को लिखे पत्र के बारे में अपने ट्विटर हैंडल पर बताया है।

डॉ. क्रिस एलन हिंदू विरोधी

डॉ. क्रिस एलन का हिंदू विरोधी होना और कट्टरपंथी इस्लामवादियों से प्यार करना किसी से छिपा नहीं है। 52 वर्षीय क्रिस एलन लेस्टर विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वह अपने ट्विटर प्रोफाइल (जिसे अब हटा दिया गया है) के अनुसार, ‘इस्लामोफोबिया, नफरत और कट्टरपंथ’ के जानकार हैं।

क्रिस एलन के ट्विटर प्रोफाइल का स्क्रीनग्रैब, इसे अब डिलीट कर दिया है

इस साल सितंबर में उन्होंने द कन्वर्सेशन में एक प्रोपेगेंडा लेख लिखा था, “जिसमें उन्होंने इस्लामवादियों को बेकसूर बताते हुए हिंदुओं पर लेस्टर हिंसा का आरोप लगाया था। लेस्टर हिंसा के लिए हिंदुओं को दोषी ठहराने और मुस्लिमों को निर्दोष बताने पर हिंदू संगठनों के अलावा कई प्रतिष्ठित पत्रकारों ने भी क्रिस एलन की आलोचना की थी और उनके कथित निष्पक्षता के दावे पर चिंता व्यक्त की थी।

‘द डेली टेलीग्राफ’ के स्तंभकार निक टिमोथी ने लिखा था, “लेस्टर में सांप्रदायिक हिंसा की जाँच के लिए डॉ. क्रिस एलन को नियुक्त करना एक बहुत बड़ी गलती है।” उनके लेखन से पता चलता है कि उन्होंने इस मामले में पहले ही निष्कर्ष निकाल लिया है। वह स्थानीय हिंदुओं को दोषी ठहराते हैं और दावा करते हैं कि इसमें मुस्लिम के शामिल होने की रिपोर्ट ‘इस्लामोफोबिक’ है।”

डॉ. क्रिस एलन ने 9/11 हमले को लेकर भी ऐसे कुतर्क पेश किए हैं, जो कहीं से भी तर्कसंगत नहीं कहे जा सकते हैं।

इस वीडियो में डॉ. क्रिस एलन के साथ इस्लामवादियों के समर्थक रियाज खान भी थे, जिन्होंने 9/11 हमले को अंजाम देने वाले अपने मजहब के लोगों का बचाव किया था और हिंदू समुदाय को दोषी ठहराने का प्रयास किया था।

ऑपइंडिया ने हिंदू-विरोधी लेस्टर हिंसा पर काफी रिपोर्ट प्रकाशित की हैं, जिसने इस्लामवादियों से सहानुभूति रखने वाले मीडिया आउटलेट्स और कई इस्लामवादियों की रातों की नींद हराम कर दी थी।

ऑपइंडिया ने बताया था कि कैसे इस्लामवादियों ने लेस्टर में हिंदू समुदाय के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया, हिंसा के लिए एक ठोस आधार बनाया और सोची-समझी साजिश के तहत हमलों को अंजाम दिया। हमने यह भी सबके सामने लाया कि कैसे वामपंथी समाचार पोर्टलों ने इस्लामवादियों को बचाने की कोशिश की और भारतीय हिंदुओं पर लेस्टर हिंसा का आरोप लगाया।

PM मोदी की रैली में चुपके से पंडाल का नट-बोल्ट खोलता दिखा संदिग्ध, लोगों ने जताई बड़ी साजिश की आशंका: मोरबी पुल हादसे के बाद प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक

गुजरात के बनासकाँठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में बड़ी साजिश रची गई थी। एक वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति पीएम मोदी की रैली के पंडाल का स्क्रू खोल रहा है। वो इस तरीके से अपना काम करता नजर आ रहा है, जैसे कोई उसे देखे नहीं। हालाँकि, वहाँ मौजूद किसी व्यक्ति ने उसका वीडियो बना लिया। ये वीडियो तब सामने आया है, जब गुजरात के मोरबी में पुल टूटने के कारण 150 से भी अधिक लोगों को जान गँवानी पड़ी है।

गुजरात में विधानसभा चुनाव इसी साल होने हैं, लेकिन अब तक तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के साथ-साथ राज्य के कई हिस्सों में विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन भी कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने बनासकाँठा के थराड़ में भी 8000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन/शिलान्यास किया। इसी रैली में हादसा कराने की साजिश थी, जिसे वीडियो को देख कर समझा जा सकता है।

इससे पहले जुलाई 2018 में ऐसी घटना हो भी चुकी है, जब पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में प्रधानमंत्री की रैली में पंडाल गिरने के कारण 90 लोग घायल हुए थे। तब पीएम मोदी ने अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात भी की थी। टेंट के एक हिस्सा उस दौरान गिर गया था। पीएम मोदी ने लोगों से अपील भी की थी कि जो टेंट पर चढ़े हुए हैं, वो नीचे उतर जाएँ। तब पीएम मोदी के काफिले में शामिल एम्बुलेंस और बाइकों से घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया था।

अब नया वीडियो जो गुजरात के बनासकाँठा से सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे एक व्यक्ति पंडाल में लगी लोहे की बल्लियों का नट-बोल्ट खोल रहा है। इसमें वो बल्ली के पास खड़ा होकर चुपके से अपना काम करता दिख रहा है। फिर थोड़ी देर बाद वो नट-बोल्ट लेकर कुर्सी पर बैठ जाता है। नवंबर 2013 में पीएम मोदी की पटना रैली में सीरियल बम ब्लास्ट हो चुके हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक जाँच का विषय हो सकती है। सोशल मीडिया पर लोग इसे मोरबी पुल हादसे से जोड़ कर देखते हुए बड़ी साजिश की आशंका जता रहे हैं।

कन्हैया लाल का गला काटने के बाद जिन अधिकारियों को हटाया, उन्हें गहलोत सरकार ने फिर किया बहाल: गौस मुहम्मद और रियाज को पकड़वाने में बताई भूमिका

राजस्थान के उदयपुर (Udaipur, Rajasthan) में टेलर कन्हैया लाल (Kanhaiya Lal Murder) की सरेआम गला काटकर तालिबानी तरीके से की गई हत्या के मामले में निलंबित किए किए चार पुलिसकर्मियों को बहाल कर दिया गया है। विभाग जाँच में ये अधिकारी बेदाग पाए गए हैं। इस घटना के बाद राजस्थान सरकार ने लापरवाही बरतने के आरोप में राजस्थान पुलिस सेवा के चार अधिकारी सहित 12 से अधिक पुलिसकर्मियों को 1 जुलाई 2022 को सस्पेंड कर दिया था।

बता दें कि 28 जून 2022 को इस्लामी चरमपंथियों द्वारा कन्हैया लाल की दुकान में घुसकर गला काट दिया था। घटना के बाद चार महीने तक विभागीय जाँच की गई, जिसमें अब तक चार पुलिस अधिकारियों को फिर बहाल कर दिया है। कहा जा रहा है कि इन्हीं अधिकारियों के कारण आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था।

राजस्थान की अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार में संयुक्त सचिव (कार्मिक) राजेंद्र सिंह कविया ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। बहाल किए गए अधिकारियों में तत्कालीन सिटी एएसपी अशोक मीणा, डीएसपी (पश्चिम) जितेंद्र आंचलिया और डीएसपी (ईस्ट) जनरैल सिंह शामिल हैं। वहीं, उदयपुर की सीआईडी इंटेलिजेंस में एएसपी रहे राजेश भारद्वाज को लगभग एक महीना पहले ही क्लीनचिट देकर बहाल कर दिया गया था।

जाँच में पाया गया है कि डिप्टी जितेंद्र आंचलिया की सूचना पर आतंकी मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद को भीम-देवगढ़ मार्ग पर दबोचा गया था। उन्होंने ही हत्या के बाद मालदास स्ट्रीट में कन्हैया लाल के शव के पास हजारों की संख्या में जुटे लोगों को समझाया था और दंगा भड़कने से रोका था। हालाँकि, इस मामले में निलंबित किए गए अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ अभी जाँच जारी है।

बता दें कि कन्हैया लाल हत्याकांड की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कर रही है। इस मामले में 9 मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद सहित 9 आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है। सभी आरोपितों की शिनाख्त हो चुकी है और उनके बयान भी कोर्ट में दर्ज हो चुके हैं।