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‘लाठीचार्ज कीजिए, मार डालिए, हम नहीं जाएँगे, आप गोली चलाइए’: जब मुलायम ने रामभक्तों पर चलवाई थी अंधाधुंध गोलियाँ, वीडियो में देखें मंजर

लोग 'जय श्री राम' का नारा भी लगा रहे हैं। कई जगह बेसुध लोग जमीन पर पड़े हुए हैं। कई जगह पुलिकर्मियों को रामभक्तों को सड़क पर घसीटते हुए भी इस वीडियो में देखा जा सकता है।

वो 2 नवंबर का ही दिन था, जब अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियाँ चली थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने रामभक्तों पर गोलियाँ चलाने का आदेश दिए थे। इस तरह अब इस क्रूर घटना को 32 साल पूरे हो गए हैं। अयोध्या में जुटे इन कारसेवकों के बलिदान का ही परिणाम है कि आज हम वहाँ बाबरी ढाँचे की जगह भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनते हुए देख रहे हैं। वो कार्तिक पूर्णिमा का दिन था, जब मुलायम सरकार ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे रामभक्तों को मरवाया।

तब मोबाइल फोन और इंटरनेट का जमाना नहीं थे, लेकिन कैमरों से रिकॉर्ड किए गए इस घटना के कुछ वीडियो यदा-कदा सोशल मीडिया पर सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक वीडियो फेसबुक पर मौजूद है, जिसमें पुलिस की क्रूरता और रामभक्तों की निष्ठा, दोनों एक साथ देखी जा सकती है। वीडियो की शुरुआत में देखा जा सकता है कि एक साधु पर पुलिस भिड़ी हुई है। एक रामभक्त को पुलिस ले जाती है, जिस पर एक व्यक्ति कहता है – ‘वो देखो, ले गए।’

इस वीडियो में पुलिस को साधु-संतों पर लाठियाँ चलाते हुए और बंदूक से गोलियाँ चलाते हुए भी देखा जा सकता है। एक रामभक्त को ये कहते हुए सुना जा सकता है, “आइए, लाठीचार्ज कीजिए, मार डालिए। हम नहीं जाएँगे, आप गोली चलाइए।” वीडियो में जगह-जगह आगजनी और लोगों को पत्थर इकट्ठा करते हुए भी देखा जा सकता है। लोग ‘जय श्री राम’ का नारा भी लगा रहे हैं। कई जगह बेसुध लोग जमीन पर पड़े हुए हैं।

कई जगह पुलिकर्मियों को रामभक्तों को सड़क पर घसीटते हुए भी इस वीडियो में देखा जा सकता है। लाठीचार्ज में बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया और उन्हें भी पीटा गया। अकेले इस दिन कारसेवकों पर हुई अंधाधुंध फायरिंग में 40 रामभक्त मारे गए थे। इन्हीं में नाम आता है कोठारी बंधुओं का, जिन्हें हनुमानगढ़ी में पुलिस ने मार डाला। पुलिसिया क्रूरता से सरयू पुल पर भगदड़ मचने से भी कई रामभक्तों की मौत हुई। वहाँ मौजूद एक पत्रकार ने मृतकों की संख्या 45 बताई थी।

इस घटना में 60 लोग बुरी तरह घायल भी हुए थे। असल में घायलों का कोई हिसाब ही नहीं था। श्रद्धालुओं को न सिर्फ मार डाला गया था बल्कि हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार तक नहीं होने दिया गया था। उन्हें दफना दिया गया था। एक अन्य दुर्लभ वीडियो में लोग कहते दिख रहे थे कि पुलिस ने कारसेवकों के घरों में घुस-घुस कर उन्हें पकड़ा और उनके साथ क्रूरता की। एक साधु इस वीडियो में ये कहता दिख रहा है कि यूपी पुलिस की फायरिंग में अब तक 100 से भी अधिक लोग मर चुके हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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