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गाँधी, गोडसे और संविधान… कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी एक ही बार में बोल गए सब पर झूठ: जानिए वायरल हो रहे बयान का क्या है पूरा सच

बिहार के कटिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने महात्मा गाँधी, नाथूराम गोडसे और भारतीय संविधान को लेकर एक के बाद एक कई झूठ बोले, जिसने उन्हें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना दिया है। हाथ में संविधान की लाल किताब लेकर, राहुल गाँधी ने दावा किया कि नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी की हत्या इसलिए की क्योंकि वह संविधान से नफरत करता था और महात्मा गाँधी ने इसी संविधान के लिए अपना जीवन दिया।

हालाँकि, उनके ये दावे ऐतिहासिक तथ्यों के आगे टिक नहीं पाते। हकीकत यह है कि जब महात्मा गाँधी की हत्या हुई थी, तब भारतीय संविधान का मसौदा (ड्राफ्ट) भी सामने नहीं आया था। नाथूराम गोडसे को भी संविधान लागू होने से पहले ही फाँसी दी जा चुकी थी। राहुल गाँधी का यह बयान सच्चाई से कोसों दूर है।

महात्मा गाँधी की हत्या और संविधान का अस्तित्व

राहुल गाँधी ने दावा किया कि गोडसे ने महात्मा गाँधी की हत्या इसलिए की, क्योंकि गोडसे संविधान से नफरत करता था और गाँधी जी ने संविधान के लिए अपना पूरा जीवन दिया। यह दावा पूरी तरह से निराधार है।

बता दें कि 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी की हत्या की थी। भारतीय संविधान को भारतीय संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को अपनाया था और यह 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।

इन तारीखों से यह स्पष्ट है कि जब महात्मा गाँधी की हत्या हुई, तब भारत का संविधान अस्तित्व में नहीं था। संविधान का पहला मसौदा (ड्राफ्ट) भी गाँधी जी की हत्या के एक महीने बाद, यानी 21 फरवरी 1948 को प्रस्तुत किया गया था। इस प्रकार, यह कहना पूरी तरह से बेतुका है कि गोडसे ने उस चीज से नफरत की, जो उस समय मौजूद ही नहीं थी और गाँधी ने ऐसी चीज का बचाव किया, जिसका अस्तित्व उनके जीवनकाल में नहीं था।

गोडसे की फाँसी और संविधान का लागू होना

राहुल गाँधी का दूसरा बड़ा झूठ यह था कि गोडसे की नफरत संविधान से थी, जिसके कारण उसने गाँधी जी को गोली मारी। सच्चाई तो यह है कि गोडसे को संविधान लागू होने से पहले ही फाँसी दे दी गई थी।

दरअसल, 15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे को महात्मा गाँधी की हत्या के लिए फाँसी दी गई थी। भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था, यानि गोडसे को फाँसी दिए जाने के दो महीने बाद।

यह तथ्य ही राहुल गाँधी के पूरे कथन को खोखला साबित कर देता है। गोडसे को भारतीय गणराज्य द्वारा संविधान अपनाए जाने से पहले ही सजा मिल चुकी थी। ऐसे में, यह दावा कि उसकी नफरत संविधान से थी, हास्यास्पद है।

महात्मा गाँधी जी और संविधान सभा में उनकी भूमिका

राहुल गाँधी ने यह भी कहा कि महात्मा गाँधी ने संविधान के लिए अपना जीवन दिया। यह बात भी ऐतिहासिक रूप से सही नहीं है। जब 1947 में भारत को आजादी मिली तो महात्मा गाँधी ने खुद को संक्रमण प्रक्रिया से अलग कर लिया था। वह न तो अंतरिम सरकार का हिस्सा थे और न ही संविधान सभा के सदस्य थे। महात्मा गाँधी संविधान सभा का हिस्सा इसलिए नहीं बनना चाहते थे क्योंकि उनका मानना था कि इसका गठन वायसराय ने किया है और यह ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाई गई है।

महात्मा गाँधी इसे एक सार्वभौम (Sovereign) सभा नहीं मानते थे। इसलिए उन्होंने खुद को इस प्रक्रिया से दूर रखा और इसमें शामिल नहीं हुए। महात्मा गाँधी ने कुछ विशिष्ट प्रस्ताव जरूर दिए थे, जैसे कि ग्राम-आधारित शासन मॉडल, जिसे ग्राम स्वराज के नाम से जाना जाता है। महात्मा गाँधी के अनुसार, सच्चा लोकतंत्र गाँव की संस्थाओं में निहित होता है, जो आत्मनिर्भर और स्वशासित हों।

संविधान निर्माण का काम मुख्य रूप से डॉ बीआर अंबेडकर की अध्यक्षता में गठित प्रारूप समिति ने किया था। ऐसे में, यह दावा कि महात्मा गाँधी ने संविधान के लिए अपना जीवन दिया, सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी है जिसका कोई ऐतिहासिक आधार नहीं है।

RSS और बीजेपी पर राहुल गाँधी का आरोप

राहुल गाँधी ने यह भी दावा किया कि RSS और बीजेपी ने संविधान को नहीं बनाया। दरअसल, बीजेपी का गठन 1980 में हुआ था, जबकि संविधान 1950 में लागू हो गया था। इसलिए, बीजेपी की संविधान बनाने में कोई भूमिका नहीं हो सकती। यह एक बेतुका दावा है। RSS एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है और उसकी संविधान निर्माण में कोई भूमिका नहीं थी।

राहुल गाँधी के ये दावे न केवल ऐतिहासिक तथ्यों से परे हैं, बल्कि वे एक बड़ी झूठ की बुनियाद पर टिके हैं। राहुल गाँधी की ये टिप्पणियाँ, जिसमें वह संविधान की प्रति हाथ में लेकर झूठे दावे कर रहे थे, न केवल देश के इतिहास को गलत तरीके से पेश करती हैं, बल्कि महात्मा गाँधी और संविधान के महत्व को भी कम करती हैं। राहुल गाँधी हमेशा से अपने राजनीतिक फायदे के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़ के पेश करते हैं, जिसका मजाक वो खुद ही बनकर रह जाते हैं।

फर्जी गैंगरेप केस में BJP नेता को फँसाने का हो रहा था प्रयास, अश्लील वीडियो दिखा दी जा रही थी धमकी: UP पुलिस ने किया पर्दाफाश, 1 महिला समेत 3 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में भारतीय जनता पार्टी के नेता वीरेंद्र शुक्ला और सरकारी अधिवक्ता प्रवेश त्रिपाठी को फर्जी गैंगरेप मामले में फँसाने की साजिश का खुलासा हो गया है। पुलिस ने साजिश रचने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें एक महिला भी है, जिसने बीजेपी नेता के खिलाफ फर्जी रेप केस दर्ज करवाया था।

भदोही पुलिस अधीक्षक (SP) अभिमन्यु मांगलिक ने रविवार (24 अगस्त 2025) को प्रेस वार्ता कर मामले को सुनियोजित साजिश बताया। पुलिस के अनुसार, यह साजिश बीजेपी नेता वीरेंद्र शुक्ला के भाई अशोक शुक्ला और भतीजे कैलाशपति शुक्ला को फँसाने के लिए रची गई थी। साजिश में सुशील दुबे भी शामिल था।

इन लोगों ने अयोध्या की रहने वाली सुमन पांडेय नाम की महिला से झूठे दुष्कर्म मामले की तहरीर दिलवाई थी। लेकिन पुलिस की जाँच में बीजेपी नेता पर दुष्कर्म के आरोप झूठे साबित हुए। साथ ही पुलिस पूछताछ में बीजेपी नेता को फँसाने के पीछे दो मकसद भी सामने आए।

पुलिस ने बताया कि आरोपितों का मकसद बीजेपी नेता पर झूठा मुकदमा दर्ज कर पैसे ऐंठना था, जिसे हनीट्रैप से भी जोड़ा गया है। इसके अलावा बीजेपी नेता के भाई अशोक शुक्ला पर दर्ज प्रॉपर्टी से संबंधित मुकदमों को निपटाने का भी दबाव बनाने के चलते भी साजिश रची गई थी।

बीजेपी नेता को फोन पर दी धमकी

बीजेपी नेता को झूठे गैंगरेप केस में फँसाने वाले आरोपितों का एक गैंग है। पुलिस ने बताया कि ये लोग पेशेवर तरीके से लोगों को झूठे मुकदमों में फँसाकर उनसे वसूली करता था। बीजेपी नेता के मामले भी पूरी प्लानिंग की गई थी।

महिला सुमन पांडेय बीजेपी नेता को फोन पर धमकी दे रही थी। वहीं बाकी साजिशकर्ता एक पुराना अश्लील वीडियो वायरल कर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने जब गहराई से जाँच की तो साफ हुआ कि पूरा मामला बीजेपी नेता और सरकारी अधिवक्ता को झूठे केस में फँसाने की सोची-समझी साजिश थी।

पुलिस ने साजिशकर्ता अशोक शुक्ला, उसके सहयोगी सुशील दुबे और महिला सुमन पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं अशोक शुक्ला का बेटा कैलाशपति शुक्ला फिलहाल फरार है। चारों आरोपितों के खिलाफ धारा 217, 351(3), 308 (7) और 61 (2)a के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

औलाद पाने की चाह में मुस्लिम महिला पहुँची मुश्ताक के पास, झाड़-फूँक के नाम पर हुआ रेप: मीडिया ‘तांत्रिक’ लिखकर कर रहा हिंदुओं को बदनाम, तलाश में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश के मथुरा में झाड़फूंक करने वाले मुस्लिम ‘आलिम’ मुश्ताक अली ने एक महिला से रेप कर उसे जान से मारने की धमकी दी है। इस महिला की कोई औलाद नहीं है और इसी के लिए वह मुश्ताक से उपाय पूछने गई थी।

इसके बाद मुश्ताक ने कमरे में अगरबत्ती जलाकर धुआँ कर दिया और एक घंटे तक उसका रेप किया। उसने महिला को धमकी भी दी कि अगर उसने किसी को बताया वह उसकी हत्या करवा देगा। वहीं, इस खबर के सामने आने के बाद मीडिया ने वही पुराना राग अलापते हुए मुश्ताक को तांत्रिक बताना शुरू कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आगरा की रहने वाली और वह नौहझील में मुश्ताक से उपाय पूछने गई थी। पीड़िता का कहना है, “निकाह के 8 साल बाद भी मेरी कोई औलाद नहीं हुई। मुझे बताया गया कि नौहझील, मथुरा में बटन वाली गली, मस्जिद के पास रहने वाला मुश्ताक अली इसका इलाज कर सकता है। इससे मेरा बच्चा हो सकता है। इस पर विश्वास कर करीब 1 महीने पहले मैं अपनी ननद के साथ तांत्रिक के पास गई। उसने कहा कि हर जुमेरात (गुरुवार) मुझे वहाँ आना होगा।”

महिला का कहना है कि दूसरी बार जब वह अपने शौहर के साथ वहाँ गई। वहाँ पहुँचने के बाद मुश्ताक उसे एक कमरे में ले गया और कहा, “मैंने तुम्हें मना किया था कि ननद के अलावा किसी और को साथ मत लाना।”

गुरुवार (21 अगस्त 2025) को वह अपनी ननद के साथ फिर से उसके घर गई। वहाँ वह उसे एक कमरे में ले गया और दरवाजा बंद कर दिया, उसने कमरे में अगरबत्ती जला कर धुआँ फैला दिया।

इसका फायदा उठाकर मुश्ताक उसने उसके साथ रेप किया। महिला ने कहा, “मैंने शोर मचाने की कोशिश की लेकिन आवाज नहीं निकल पा रही थी। उसने मुझे करीब 1 घंटे कमरे में बंद रखा। साथ ही धमकी दी कि अगर मैंने किसी को बताया तो मेरी ननद और शौहर की हत्या करवा देगा।”

महिला ने बताया कि वह किसी तरह अपनी जान बचाकर ननद के साथ अपने घर आगरा वापस आई और शौहर को घटना की जानकारी दी। पीड़ित महिला ने शनिवार (24 अगस्त 2025) को एसएसपी ऑफिस में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत के अनुसार, “महिला ने शिकायत दी है। इसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस की टीम दबिश दे रही है। आरोपित को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।”

मीडिया ने मुश्ताक को बताया ‘तांत्रिक’

इस खबर के सामने आने के बाद मीडिया ने आरोपित मुश्ताक को तांत्रिक बताना शुरू कर दिया। ऐसा मामला जहाँ पीड़िता मुस्लिम हो, उसके साथ रेप करने वाला आलिम मुश्ताक मुस्लिम को, उसे तांत्रिक बताना मीडिया की हिंदू विरोधी सोच पर सवाल खड़े करता है।

ऐसा कोई पहली बार भी नहीं हुआ है, वर्षों से ऐसे मामलों में मुस्लिम आरोपित को तांत्रिक लिखना, हवन-पूजन जैसे चित्रों का इस्तेमाल करना, जैसी चालें हिंदू विरोधी मीडिया चलता रहा है। ऐसे मामलों में जहाँ ना कोई तंत्र है, ना कोई मंत्र हैं, वहाँ तांत्रिक कहकर सिर्फ एक धर्म को बदनाम करने की साजिश ही है। पूरे धर्म को बदनाम करने के लिए हिंदुओं के खिलाफ चल रही इस साजिश को रोके जाने की जरूरत है।

जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर अमित शाह ने पहली बार किया सब साफ, ‘हाउस अरेस्ट’ की बातों को नकारा: सुदर्शन रेड्डी को VP उम्मीदवार बनाने को बताया- वामपंथी सोच

गृह मंत्री अमित शाह ने एएनआई को दिए खास इंटरव्यू में 130वें संविधान संशोधन विधेयक, एसआईआर और चुनाव आयोग और जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे, एसआईआर विवाद और चुनाव आयोग से जुड़े तमाम मसलों पर बात रखी है।

130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर अमित शाह ने कहा कि एनडीए के चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार विधेयक से सहमत हैं। संसद में हंगामे के कारण कई लोगों को समर्थन करने का मौका नहीं मिल पा रहा है। जेपीसी बनेगी और संसद में चर्चा होगी तो सबको अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।

जेल में रहकर सरकार चलाना चाहते हैं नेता

विपक्ष के लगाए जा रहे लगातार आरोपों पर अमित शाह ने कहा, “आज भी वे कोशिश कर रहे हैं कि अगर उन्हें कभी जेल जाना पड़ा, तो वे जेल से आसानी से सरकार बना लेंगे। जेल को ही सीएम हाउस, पीएम हाउस बना देंगे और डीजीपी, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव या गृह सचिव जेल से आदेश देंगे। मेरी पार्टी और मैं इस विचार को पूरी तरह से खारिज करते हैं…इससे संसद या विधानसभा में किसी के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एक सदस्य जाएगा, पार्टी के अन्य सदस्य सरकार चलाएंगे, और जब आपको जमानत मिल जाएगी, तो वे आकर फिर से शपथ ले सकते हैं। इसमें क्या आपत्ति है?…”

बीजेपी के वरिष्ठ नेता आडवाणी जी, मदनलाल खुराना और कई अन्य लोगों को याद करते हुए अमित शाह ने कहा, ” इनलोगों ने पहले इस्तीफा दिया था। अभी हेमंत सोरेन ने झारखंड सीएम पद से इस्तीफा दिया। पहले जो भी किसी मामले में आरोपी होता था, वह इस्तीफा दे देता था। बरी होने के बाद, वे फिर से राजनीति में आ जाते थे। लेकिन अभी तमिलनाडु के कुछ मंत्रियों ने इस्तीफा नहीं दिया। दिल्ली के मंत्री और मुख्यमंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया। अगर राजनीति और सामाजिक जीवन की नैतिकता का स्तर इस तरह से गिराया जा रहा है, तो हम इससे सहमत नहीं हैं।”

AAP संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा नहीं देने पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अगर यह कानून लागू होता, तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ता। जेल से केजरीवाल के बाहर निकलने के बाद जनता जब सवाल पूछने लगी तब उन्होंने इस्तीफा दिया और आतिशी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया।

राहुल गाँधी के अध्यादेश फाड़ने को किया याद

2013 में जब यूपीए की सरकार थी, उस वक्त राहुल गाँधी ने मनमोहन सरकार के लाए गए अध्यादेश को फाड़ दिया था। इसको याद करते हुए शाह ने कहा कि तब लालू यादव को राहत दी जा रही थी। अगर उस दिन नैतिकता थी तो अब क्या हो गया है? अब पीएम, सीएम समेत सभी मंत्रियों को 30 दिनों से ज्यादा जेल में रहने पर पद से हटाने की व्यवस्था की जा रही है तो राहुल गाँधी क्यों विरोध कर रहे हैं?

आरएसएस से उपराष्ट्रपति के संबंधों पर बोले शाह

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार राधाकृष्णन को लेकर उन्होंने कहा कि आरएसएस से हम सब जुड़े रहे हैं। प्रधानमंत्री का RSS से संबंध है। उनका भी RSS से संबंध है। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या RSS से संबंध होना कोई माइनस पॉइंट है? अटल बिहारी वाजपेयी, आडवाणी जी RSS से जुड़े हैं। सी.पी. सुदर्शन की उम्मीदवारी का समर्थन करते हुए, अमित शाह ने कहा कि ये स्वाभाविक चयन था। राष्ट्रपति पूर्व से हैं, पीएम उत्तर-पश्चिम से, उपराष्ट्रपति दक्षिण से हों, तो बहुत अच्छा है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु चुनाव 2026 को लेकर राधाकृष्णन की उम्मीदवारी को जोड़ना गलत है।

धनखड़ के इस्तीफे की बताई वजह

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर अमित शाह ने साफ किया है कि पूर्व उपराष्ट्रपति की सेहत ठीक नहीं थी, इसलिए स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने इस्तीफा दिया है। उनकी तारीफ करते हुए शाह ने कहा कि विपक्ष के ‘हाउस अरेस्ट’ वाले आरोप पूरी तरह गलत और निराधार है। एएनआई से गृहमंत्री ने कहा, “धनखड़ साहब का इस्तीफा पत्र खुद स्पष्ट है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है और प्रधानमंत्री समेत सभी के प्रति आभार जताया है। बात का बतंगड नहीं बनाना चाहिए और बेवजह हंगामा नहीं किया जाना चाहिए। विपक्ष के बयान सच से परे हैं।”

इंडी गठबंधन के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर साधा निशाना

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए इंडी गठबंधन ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार घोषित किया है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जज बी. सुदर्शन रेड्डी की 2011 के छत्तीसगढ़ के सलवा जुडूम को लेकर की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि इसकी वजह से नक्सलवाद दो दशक और जिंदा रहा। ऐसी टिप्पणियों ने नक्सलियों को बचाया। ऐसे में विपक्ष ने आखिर ऐसा उम्मीदवार क्यों चुना? उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में है कि सलवा जुडूम खत्म कर आदिवासियों का आत्मरक्षा का अधिकार छीना गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना वामपंथी सोच का नतीजा है।

काउंसलिंग के दौरान जज ने महिला पर कीं अश्लील टिप्पणियाँ, यौन दुर्व्यवहार का भी लगा आरोप: मामला तूल पकड़ने के बाद हाईकोर्ट ने किया ट्रांसफर, जाँच का आदेश जारी

जिस न्यायालय को लोकतंत्र में न्याय की आखिरी उम्मीद माना जाता है, वहीं अगर जजों पर अश्लीलता के आरोप लगने लगें तो जनता का विश्वास हिलना स्वाभाविक है। केरल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न्यायपालिका की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

केरल हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के जज उदयकुमार वी. का तबादला कर दिया है। उदयकुमार वी. पर महिलाओं के साथ काउंसलिंग के दौरान यौन दुर्व्यवहार और अश्लील टिप्पणियाँ करने का आरोप है।

क्या है पूरा मामला?

‘बार ऐंड बेंच’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला ने कोल्लम के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को पत्र लिखकर जज उदयकुमार वी. के खिलाफ शिकायत दी थी। महिला ने अपने पत्र में दावा किया कि उदयकुमार ने काउंसलिंग के दौरान यौन दुर्व्यवहार किया और उनको लेकर अश्लील टिप्पणियाँ कीं।

यह मामला सामने आने के बाद न्यायपालिका में हड़कंप मच गया। इसके बाद केरल हाईकोर्ट ने चवरा फैमिली कोर्ट के जज उदयकुमार वी को कोल्लम मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके अलावा हाईकोर्ट ने कोल्लम में मोटर ऐक्सिडेंट क्लेम्स ट्राइब्यूनल के जज प्रसन्ना गोपालन का ट्रांसफर फैमिली कोर्ट में कर दिया है। जिला न्यायालय के रजिस्ट्रार ने दोनों जजों के म्यूचुअल ट्रांसफर का आदेश जारी कर दिया है।

जज उदयकुमार के खिलाफ जाँच का आदेश जारी

इस मामले की गंभीरता को देखता हुए हाईकोर्ट ने जज के खिलाफ उदयकुमार वी. के खिलाफ जाँच के आदेश जारी किए हैं। केरल हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने रजिस्ट्रार (जिला न्यायपालिका) को मामले की जाँच का आदेश दिया है। रजिस्ट्रार द्वारा की गई इस जाँच की रिपोर्ट समिति को सौंपी जाएगी और समिति आने वाले सप्ताह में इस रिपोर्ट पर विचार करेगी।

फैमिली कोर्ट्स में परिवारिक समस्याओं को निपटारा किया जाता है। न्यायालयों पर बोझ और सुनवाई में देरी को देखते हुए ये कोर्ट बनाए गए थे लेकिन परिवार से जुड़े कोर्ट में ही महिलाओं के साथ इस तरह दुर्व्यवहार किया जाए तो इससे न्यायापालिका की साख पर बट्टा लगता है।

भीख माँगने को मजबूर… फिर भी आवाम को पिला रहा मजहब की घुट्टी, पाकिस्तान में कारखानों से 26 गुना अधिक है मस्जिदों की संख्या: आर्थिक जनगणना में सामने आए हैरान करने वाले आँकड़े

पाकिस्तान में 6,00,000 से ज्यादा मस्जिदें और 36,000 मदरसे हैं, जबकि मात्र 23,000 कारखाने हैं। पाकिस्तान की पहली आर्थिक जनगणना में ये बात सामने आई है। इसे पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने जारी किया है।

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब नकदी संकट से जूझ रहा पाकिस्तान करीब 61 हजार करोड़ रुपए के बेलआउट पैकेज की दूसरी समीक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ बातचीत कर रहा है।

मात्र 2.42 लाख स्कूल और 214 यूनिवर्सिटी

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 2,42000 स्कूल, 11568 कॉलेज और मात्र 214 यूनिवर्सिटी हैं। कॉलेजों में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत ज्यादा है। इससे पता चलता है कि शिक्षा और कल-कारखानों की जगह देश ने मस्जिदों और मदरसों पर निवेश किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 27 लाख रिटेल शॉप्स, 1.88 लाख होलसेल की दुकानें, 2.56 लाख होटल और 1.19 लाख अस्पताल हैं।

250 से ज्यादा रोजगार वाले मात्र 7086 प्रतिष्ठान

पाकिस्तान के अंदर सबसे ज्यादा विकसित राज्य पंजाब है, जहाँ देश की 58 फीसदी प्रतिष्ठान हैं। इसके बाद सिंध में 20 फीसदी, खैबर पख्तूनख्वा में 15 फीसदी और बलूचिस्तान में 6 फीसदी हैं। राजधानी इस्लामाबाद में 1 फीसदी से कम प्रतिष्ठान हैं। पंजाब में मदरसे और मस्जिदें भी सबसे ज्यादा हैं। देश में छोटे कारोबार का बोलबाला हैं। यहाँ 71 लाख ऐसे बिजनेस हैं जहाँ 1 से 50 लोग काम करते हैं। जबकि 35351 ऐसे प्रतिष्ठान हैं जहाँ 50 से 250 लोग काम करते हैं। सिर्फ 7086 ऐसे बिजनेस यूनिट्स हैं जहां 250 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।

मस्जिदों- मदरसों की तुलना में फैक्ट्री काफी कम

देश में कुल 400 लाख स्थाई यूनिट्स हैं जिनमें से 72 लाख रोजगार देती हैं। देश में 2023 तक 254 लाख लोग काम कर रहे थे। इनमें सबसे ज्यादा सर्विस सेक्टर में 113 लाख लोग हैं यानी करीब 45 फीसदी। 76 लाख लोग सोशल सेक्टर में हैं जो करीब 30 फीसदी हैं। जबकि 22 फीसदी लोग प्रोडक्शन सेक्टर में काम करते हैं। देश में करीब 6.04 लाख मस्जिदें हैं जबकि 36331 मदरसे हैं।

पाकिस्तान के हालात को ये रिपोर्ट बयाँ कर रहा है। गंभीर आर्थिक संकट की एक अहम वजह पिछले कुछ दशकों में देश में इस्लामिक कट्टरता को माना जा रहा है। यही वजह है कि देश में मस्जिदों, मदरसों की संख्या, कारखानों से कहीं अधिक है। शिक्षण संस्थान कम हैं और जो हैं वहाँ की शिक्षा का स्तर भी विश्वस्तरीय नहीं है।

‘यहाँ रह सकते हैं बांग्लादेशी’: कॉन्ग्रेस सरकार में योजना आयोग की सदस्य रहीं सैयदा हमीद घुसपैठियों के समर्थन में उतरीं, कहा- अल्लाह ने इंसानों के लिए बनाई है धरती; वामपंथी गिरोह के साथ पहुँची हैं असम

भारत में घुसपैठियों के नए-नए पैरोकार सामने आ रहे हैं। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाली सैयदा हमीद का कहना है कि बांग्लादेशियों को भारत में रहने का पूरा हक है। सैयदा इससे पहले मनमोहन सिंह सरकार के समय योजना आयोग की सदस्य रही थीं। सैयदा का यह बयान उनके असम दौरे के समय आया है। असम सरकार इन दिनों सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने और बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को वापस भेजने की कोशिशों में जुटी हुई है।

सैयदा हमीद पूरे वामपंथी गिरोह के साथ असम दौरे पर पहुँची हैं। इस दौरे पर उनके साथ जाने-माने वामपंथी प्रशांत भूषण, हर्ष मंदर, जवाहर सरकार और अन्य लोग शामिल हैं। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि असम सरकार ने वहाँ के मुसलमानों पर आफत ला दी है और उन्हें बांग्लादेशी कहकर निशाना बनाया जा रहा है।

सैयदा ने कहा, “अगर वे (घुसपैठिए) बांग्लादेशी भी हैं तो इसमें गलत क्या है? बांग्लादेशी भी इंसान हैं। धरती इतनी बड़ी है, बांग्लादेशी यहाँ भी रह सकते हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कहना कि अवैध घुसपैठिए असली नागरिकों का हक छीन रहे हैं, बहुत ही परेशान करने वाली बात है। सैयदा ने इसे भ्रामक है और इंसानियत के लिए पूरी तरह नुकसानदायक बताया है।

सैयदा हमीद ने आगे कहा, “अल्लाह ने यह धरती इंसानों के लिए बनाई है, हैवानों के लिए नहीं। अगर कोई इंसान जमीन पर खड़ा है और उसे वहाँ से खदेड़ा जाता है, तो यह मुसलमानों के लिए कयामत जैसा है।” उन्होंने यह भी कहा कि सबको मिलकर गंगा-जमुनी तहजीब और भारत की मिली-जुली संस्कृति के लिए खड़ा होना होगा।

सैयदा हमीद ने एक और जहाँ यह माना कि असम सरकार बांग्लादेश से आए अवैध लोगों को वापस भेज रही है। वहीं, प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि भारत के मुसलमानों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह साफ है कि हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली असम सरकार हर तरह की गैरकानूनी हरकत कर रही है। खासकर नागरिकों को जबरन बांग्लादेश और देश से बाहर धकेल रही है, उनको जमीन से बेदखल कर रही है और उनके घर गिरा रही है।”

यह टीम असम नागरिक सम्मेलन नामक एक मंच के निमंत्रण पर असम आई थी। इस मंच के सदस्य और राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां का कहना है कि वे बाहर से जानी-मानी हस्तियों को बुलाते हैं ताकि वे ताजा हालात पर अपनी राय दे सकें।

इस टीम के दौरे को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि जमतीय द्वारा उनका इस्तीफा माँगे जाने के बाद दिल्ली से आई एक टीम असम में डेरा डाले हुए है। उन्होंने कहा, “इस टीम में हर्ष मंदर, वजाहत हबीबुल्लाह, फैयाज शाहीन, प्रशांत भूषण और जवाहर सरकार शामिल हैं।”

सरमा ने आगे कहा कि इस टीम एक ही मकसद है कि किसी तरह कानूनी तौर पर की जा रही बेदखली को तथाकथित ‘मानवीय संकट’ बताकर बदनाम किया जाए। उन्होंने कहा, “यह अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश है। हम सतर्क हैं और मजबूती से खड़े हैं, कोई भी प्रोपेगेंडा या दबाव हमें अपनी जमीन और संस्कृति की रक्षा करने से रोक नहीं पाएगा।”

अहमदाबाद में छात्र की हत्या के बाद साबरकांठा के स्कूल में 4 मुस्लिम नाबालिगों ने हिंदू छात्र पर किया हमला, जान से मारने की दी धमकी: जानें पीड़ित के पिता और स्कूल के प्रिंसिपल ने ऑपइंडिया को क्या बताया

गुजरात के अहमदाबाद में एक हिंदू छात्र की हत्या की घटना के बाद अब साबरकांठा जिले से भी ऐसा ही मामला सामने आया है। वडाली के शेठ सीजे हाई स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक हिंदू छात्र पर चार मुस्लिम नाबालिगों ने हमला किया और उसे जान से मारने की धमकी दी।

पीड़ित छात्र के पिता ने बताया कि यह घटना 21 अगस्त की शाम करीब साढ़े चार बजे स्कूल की छुट्टी के बाद हुई। चार मुस्लिम नाबालिगों ने स्कूल परिसर में उनके बेटे पर हमला किया और मारने की धमकी दी।

वडाली बजरंग दल के संयोजक रमेशभाई सागर ने बताया कि घटना के तुरंत बाद स्थानीय हिंदू और हिंदू संगठनों ने इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया है। 23 अगस्त को फिर से स्थानीय लोग और हिंदू संगठन के कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के साथ स्कूल पहुँचे और आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की। उस समय स्कूल प्रशासन ने आश्वासन दिया कि आरोपितों को एलसी (लीविंग सर्टिफिकेट) दिया जाएगा, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन रोक दिया गया।

‘मुस्लिम नाबालिग पहले भी स्कूल में चाकू लेकर आए थे’: पीड़ित परिवार का दावा

पीड़ित छात्र के पिता मणिभाई ने ऑपइंडिया को बताया कि मुस्लिम नाबालिग उनके बेटे को बार-बार छेड़ते थे। जब बच्चे ने इसका विरोध किया तो 21 अगस्त की शाम स्कूल छुट्टी के बाद उस पर हमला कर दिया गया।

मणिभाई के अनुसार, घटना के बाद वे आरोपियों के परिवार से मिलने गए थे लेकिन मुख्य आरोपी के पिता ने कहा कि उसका बेटा उनके पास नहीं है। इसके बाद उन्होंने हिंदू संगठनों को जानकारी दी, जिसके चलते स्कूल में विरोध प्रदर्शन हुआ।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि ये चारों नाबालिग पहले भी स्कूल में चाकू जैसे धारदार हथियार लेकर आते थे। छह महीने पहले भी उन्होंने उनके बच्चे पर हमला किया था, लेकिन उस समय स्कूल प्रशासन ने केवल मौखिक आश्वासन दिया था कि आगे ऐसा नहीं होगा।

मणिभाई ने बताया कि इस बार भी स्कूल प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। परिवार की माँग है कि आरोपी नाबालिगों को तुरंत एल.सी. (लीविंग सर्टिफिकेट) दिया जाए और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएँ।

उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित बच्चे की पीठ पर गंभीर चोटें हैं, क्योंकि उसे मवेशियों से पीटा गया। फिलहाल वह चलने में सक्षम नहीं है और उसका इलाज जारी है।

स्कूल ने घटना को बच्चों के बीच झगड़ा बताया, कहा- हम LC नहीं दे सकते

स्कूल के प्राथमिक विभाग के प्रधानाचार्य अमितभाई ने ऑपइंडिया को बताया कि चार मुस्लिम नाबालिगों ने एक हिंदू छात्र पर हमला किया था। लेकिन उन्होंने इस घटना को केवल ‘बच्चों के बीच मामूली झगड़ा’ बताया।

प्रधानाचार्य ने पीड़ित परिवार के उन आरोपों को नकार दिया जिनमें कहा गया था कि आरोपित नाबालिग पहले स्कूल में हथियार लेकर आए थे या पहले भी झगड़ा हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को लीविंग सर्टिफिकेट)देने की कोई बात नहीं हुई थी।

एल सी को लेकर प्रधानाचार्य ने स्पष्ट किया कि चूँकि आरोपित नाबालिग प्राथमिक कक्षा के छात्र हैं, इसलिए शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत उन्हें स्कूल से निकाला नहीं जा सकता।

जब तक उनके माता-पिता अपील न करें या किसी वरिष्ठ अधिकारी का आदेश न हो, तब तक एल सी जारी नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार इस घटना को गंभीर मान रहा है।

उनका कहना है कि आरोपित मुस्लिम नाबालिगों को तुरंत स्कूल से निकाला जाए और कार्रवाई की जाए। परिवार ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर स्कूल प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तो वे पुलिस में शिकायत दर्ज कराएँगे।

(मूल रूप से ये खबर गुजराती में भार्गव राजगुरु ने लिखी है, इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे।)

1956 में पाकिस्तान से आईं बिहार, बनवा लिए आधार-वोटर ID कार्ड: SIR में हुआ इमराना और फिरदौसिया खानम का भंडाफोड़, बिना वीजा दशकों से छिपी रहीं भागलपुर में

जिस वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) पर विपक्ष हंगामा खड़ा कर रहा है। उसी प्रक्रिया के दौरान बिहार के भागलपुर में अवैध रूप से रह रही दो औरतों को पकड़ा गया है। पाकिस्तान की इमराना खानम और फिरदौसिया खानम 1956 से भारत में छिपकर बैठी थीं। उनके पास आधार कार्ड भी मिले हैं।

अधिकारियों के अनुसार, दोनों औरतें पाकिस्तान के पासपोर्ट पर साल 1956 में भारत आई थीं। इमराना खानम तीन साल के वीजा और फिरदौसिया तीन महीने के वीजा पर भारत में घुसीं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक दोनों ही औरतों ने वीजा को नवीनीकरण कराए बिना भारत में अवैध ढंग से रहना जारी रखा।

यह मामला बिहार में SIR के तहत मतदाता सूची की जाँच में सामने आया। चूँकि प्रक्रिया में नागरिकता की भी जाँच की जा रही है। हालाँकि, दोनों पाकिस्तानी औरतों का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल है, जिसे गृह मंत्रालय ने हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

गृह मंत्रालय ने शुरू की वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया

गृह मंत्रालय ने 11 अगस्त 2025 को दोनों पाकिस्तानी औरतों के नाम मतदाता सूची से हटाने को लेकर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। इसकी जानकारी देते हुए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) फरजाना खानम ने कहा, “मुझे लेटर मिला है, जिसमें इमराना खानम का पाकिस्तानी पासपोर्ट नंबर हैं। वे काफी उम्रदराज हैं और बीमार रहती हैं।”

BLO ने आगे कहा, “मंत्रालय के निर्देशों मतदाता सूची से औरतों के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इमराना खानम का पासपोर्ट 1956 का है। अब इस मामले में विभाग आगे की जाँच करेगा।”

वहीं, भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने भी वोटर लिस्ट में दो पाकिस्तानी औरतों के नाम शामिल होने की पुष्टि की। जिलाधिकारी ने कहा, “जिले में 24 लाख मतदाता हैं। BLO ने हर बूथ पर विरेफिकेशन किया है। ऐसा मामला पहली बार आया है। इस मामले में कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।”

विपक्ष का प्रोपेगेंडा फिर हुआ फेल

बिहार में SIR प्रक्रिया में भारत में अवैध रूप से रह रही दो पाकिस्तानी औरतों को पकड़ा गया है। इससे साबित होता है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) कितनी जरूरी प्रक्रिया है। वहीं कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। इस मामले से विपक्ष के SIR के खिलाफ फैलाए गए सभी प्रोपेगेंडा धाराशाही हो गए हैं।

DRDO ने ओडिशा में स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम IADWS का किया सफल परीक्षण: आसमान में नष्ट करेगा दुश्मनों के हवाई हमले, एक साथ तीन टारगेट्स को बनाएगा निशाना

भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा को और मज़बूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। शनिवार, 23 अगस्त 2025 को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के समुद्र तट पर ‘इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम‘ (IADWS) का पहला सफल परीक्षण किया। यह सिस्टम कई तरह के हथियारों को मिलाकर बनाया गया है, जो एक साथ मिलकर दुश्मन के किसी भी हवाई हमले से देश की रक्षा कर सकता है।

इस एयर डिफेंस सिस्टम में तीन मुख्य हथियार शामिल है। पहला, क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM), जो जमीन से हवा में मार करती है। दूसरा, एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) जो बहुत करीब से आने वाले टारगेट को गिरा सकती है और तीसरा, डायरेक्ट एनर्जी वेपन (DEW)– यह एक लेजर आधारित हथियार है, जो बिना मिसाइल छोड़े सीधे लेज़र किरण से दुश्मन को खत्म करता है।

इन सभी हथियारों को एक ही कमांड सेंटर से कंट्रोल किया जाता है। यह कमांड सेंटर DRDO की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने बनाया है। वहीं, VSHORADS मिसाइल को विकास रिसर्च सेंटर (RCI) ने और लेजर हथियार DEW को विकास सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (CHESS) नाम की संस्था ने तैयार किया है।

परीक्षण के दौरान DRDO ने एक साथ तीन अलग-अलग हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाया। इनमें दो तेज रफ्तार ड्रोन और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन शामिल थे। ये सभी अलग-अलग ऊँचाई और दूरी पर उड़ रहे थे। DRDO की तीनों प्रणालियों ने अलग-अलग टारगेट को एकदम सटीकता से मार गिराया।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस टेस्ट के दौरान सभी सिस्टम ने मिलकर शानदार काम किया, चाहे वो मिसाइलें हों, राडार सिस्टम, कम्युनिकेशन या टारगेट ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी। पूरे परीक्षण को ओडिशा के चांदीपुर में मौजूद इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में रिकॉर्ड किया गया और DRDO के वैज्ञानिकों के साथ-साथ सेना के वरिष्ठ अफसरों ने खुद मौके पर जाकर इसे देखा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बड़ी कामयाबी पर DRDO, सेना और भारतीय उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह टेस्ट दिखाता है कि अब भारत के पास एक ऐसा मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम है, जो दुश्मन के किसी भी हवाई हमले से देश की रक्षा कर सकता है।

यह सिस्टम भारत की रक्षा को और मज़बूत करेगा, खासकर एयरपोर्ट, मिलिट्री बेस, और बड़ी सरकारी इमारतों जैसे अहम ठिकानों की सुरक्षा में।