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ऑटो में बैठी 18 साल की टीचर के साथ झाड़ियों में गैंगरेप: UP पुलिस ने एनकाउंटर के बाद इमरान को पकड़ा; पिस्तौल-कारतूस बरामद

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow, Uttar Pradesh) में एक शिक्षिका का अपहरण कर गैंगरेप करने के मुख्य आरोपित इमरान उर्फ मुस्तफा को पुलिस ने एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित इमरान के पैर में गोली लगी है। वहीं, दूसरे आरोपित आकाश तिवारी को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है।

डीसीपी पूर्वी प्राची सिंह के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली कि टीचर के साथ गैंगरेप करने वाला फरार आरोपित इमरान विभूतिखंड इलाके के कठौता चौराहे के पास छिपा हुआ है। बुधवार (19 अक्टूबर 2022) की सुबह 3:30 बजे पुलिस जब उसे गिरफ्तार करने पहुँची।

पुलिस के अनुसार, कठौता झील के पास जब एक बाइक सवार युवक को पुलिस ने रोका तो वह भागने लगा। पीछा करने पर वह झील की दूसरी तरफ बाइक छोड़कर भागने लगा। इस दौरान उसने पुलिस पर फायरिंग भी की। जवाबी फायरिंग मे इमरान के पैर में गोली लगी। उसे लोहिया अस्पताल मे भर्ती कराया गया है।

पुलिस ने बताया कि इमरान उर्फ मुस्तफा के पास से .32 बोर की पिस्टल और कारतूस बरामद की गई है। वह मूल रूप से बहराइच के नानपारा का रहने वाला है और विभूतिखंड के विनम्रखंड मे रहकर आटो चलाता था। आकाश उसका दोस्त है।

शनिवार (15 अक्टूबर 2022) की रात को ट्यूशन पढ़ाकर घर लौट ही 18 साल की एक टीचर को इमरान और आकाश ने कठौता चौराहे से अगवा कर लिया था। इसके बाद आरोपित सुशांत गोल्फ सिटी के प्लासियो मॉल के पीछे झाड़ियों में ले गए और वहाँ उसके साथ गैंगरेप किया।

जब युवती शोर मचाने लगी तो आरोपितों ने उसके सिर पर वार कर दिया, जिसके कारण वह बेहोश हो गई। दोनों आरोपितों ने उसे ऑटो में डाला और हुसड़िया चौराहे पर फेंककर फरार हो गए। 

पीड़िता लखनऊ के हुसैनगंज में रहती है। रोज की तरह घर घटना वाले दिन भी वह चिनहट के फायर स्टेशन के पास पढ़ाने गई थी। शनिवार शाम को करीब 6:45 बजे वह ऑटो के इंतजार में खड़ी थी। उसी दौरान एक ऑटो चालक ने चारबाग जाने के लिए कहा तो वह बैठ गई।

पीड़िता ने बताया कि उस समय ऑटो में दो लोग थे। एक ऑटो चालक और एक अन्य लड़का था। कुछ दूर जाने के बाद वे ऑटो को गलत रास्ते पर ले जाने लगे। इस पर पीड़िता ने विरोध किया और शोर मचाया, लेकिन वो लोग उसे अंधेरे की तरफ ले गए और वहाँ उसके साथ बारी-बारी से बलात्कार किया।

दिवाली पर पटाखे फोड़े तो होगी 6 महीने जेल, बेचने पर 3 साल की सजा…: दिल्ली में केजरीवाल सरकार का ऐलान, कहा- बस दीप जलाओ

दिल्ली में दिवाली (Diwali) पर पटाखे फोड़ने वालों को 6 महीने तक की जेल और 200 रुपए जुर्माना हो सकता है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने इसकी जानकारी दी है। गोपाल राय (Gopal Rai) ने बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को मीडियाकर्मियों से कहा कि राजधानी में दिवाली पर पटाखे फोड़ने पर 6 महीने तक की जेल और 200 रुपए का जुर्माना हो सकता है। इसके साथ ही राय ने आगे कहा कि दिल्ली में पटाखों के प्रोडक्शन, स्टोरेज और बिक्री पर विस्फोटक अधिनियम की धारा 9बी के तहत 5000 रुपए तक का जुर्माना और 3 साल की जेल होगी।

उनके अनुसार, 21 अक्टूबर को एक जन-जागरूकता अभियान “दीए जलाओ पटाखे नहीं” शुरू किया जाएगा। केजरीवाल सरकार इस शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 51,000 दीए जलाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतिबंध लागू करने के लिए 408 टीमों का गठन किया गया है। दिल्ली पुलिस ने सहायक पुलिस आयुक्त के तहत 210 टीमों का गठन किया है, जबकि राजस्व विभाग ने 165 और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने 33 टीमें गठित की हैं। मंत्री ने कहा कि उल्लंघन के 188 मामलों का पता चला है और 16 अक्टूबर तक 2,917 किलोग्राम पटाखे जब्त किए गए हैं।

दिल्ली सरकार ने सितंबर में एक आदेश जारी करके अगले साल एक जनवरी तक सभी प्रकार के पटाखों के प्रोडक्शन, बिक्री और इस्तेमाल पर फिर से पूरा बैन लगा दिया था। 2020 से इस तरह का प्रतिबंध जारी है। राय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से पूरे एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया। क्योंकि यहाँ पटाखे जलाने से निकलने वाला धुआं दिल्ली में भी लोगों को प्रभावित करता है। दिल्ली के अलावा, हरियाणा ने पिछले साल अपने 14 जिलों में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और इसे उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालाँकि, पाबंदियों के बावजूद दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम में लोगों ने देर रात तक पटाखे फोड़े थे।

‘परवेज ने बंदूक की नोंक पर किया ब्राह्मण समाज की बेटी का अपहरण’: पीड़ित परिवार के साथ धरने पर BJP सांसद, कहा – गहलोत राज में बहन-बेटियाँ सुरक्षित नहीं

राजस्‍थान के सवाई माधोपुर में एक मुस्लिम युवक द्वारा हिंदू लड़की के अपहरण का मामला सामने आया है। घटना के विरोध में राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा पीड़िता के परिजनों के साथ थाने के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। मीणा समेत परिजनों की माँग है कि अपहृत लड़की को जल्द से जल्द मुस्लिम युवक के चंगुल से छुड़ाया जाए।

किरोड़ी लाल मीणा ने ट्विट कर कहा, “अशोक गहलोत सरकार में बहन-बेटियों की सुरक्षा पूरी तरह चौपट हो चुकी है। सवाई माधोपुर में मुस्लिम युवक द्वारा ब्राह्मण समाज की बेटी के अपहरण के विरोध में थाने के सामने युवती के परिजनों के साथ धरने पर बैठा हूँ। जब तक बच्ची ओर उनके परिजनों को न्याय नहीं मिलेगा, मेरी लड़ाई जारी रहेगी।” अपने ट्वीट में उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री आशोक गहलोत, पीएमओ इंडिया और भाजपा को भी टैग किया है।

एक स्‍थानीय न्‍यूज पोर्टल के अनुसार, मंगलवार (18 अक्टूबर, 2022) को मुस्लिम युवक परवेज ने बंदूक की नोक पर ब्राह्मण समाज की युवती का अपहरण कर लिया। परिजनों ने जब विरोध किया तो युवक ने लड़की की माँ को धक्का देकर गिरा दिया। साथ ही जान से मारने की धमकी देते हुए लड़की की कनपटी पर बंदूक लगा दी और उसे बाइक पर बिठाकर ले गया। इस पर परिजनों ने थाने में सूचना दी। पुलिस मामले की जाँच में जुटी हुई है।

वहीं, घटना को देखते हुए माना जा रहा है कि मामला कथित रूप से ‘लव जिहाद’ से जुड़ा हो सकता है। हालाँकि, पुलिस अभी तक आरोपी को नहीं पकड़ पाई है। इससे पहले मीणा ने पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की और समर्थकों के साथ पुलिस थाने पहुँचे, जहाँ वह अपहृत लड़की के परिजनों के साथ धरना दे रहे हैं। मीणा के द्वारा ट्वीट के विजुअल से पता चलता है की थाना के अधिकारी उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह नहीं मानते हैं। वहाँ मौजूद उनके समर्थक ‘जिला प्रशासन होश में आओ’ जैसे नारे लगाते हैं।

सहेली शशिकला की मर्जी से काम करते थे डॉक्टर, मौत की टाइमिंग पर भी सवाल: जयललिता की मौत पर 600 पन्नों की रिपोर्ट से तमिल राजनीति में हड़कंप

तमिलनाडु (Tamil Nadu) दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता (J Jayalalithaa) की मौत की परिस्थितियों की जाँच कर रही कमीशन ने उनकी सहेली शशिकला (Shashikala) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राज्य में जयललिता को अम्मा और उनकी सबसे खास सहेली शशिकला को चिन्नमा के नाम से जाना जाता है।

जाँच कमीशन ने 600 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में कई प्रमुख व्यक्तियों पर संदेह जताया है। इनमें शशिकला, डॉक्टर केएस शिवकुमार, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सी विजय भास्कर, तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णन और तत्कालीन मुख्य सचिव राममोहन राव शामिल हैं। कमीशन ने इन लोगों के खिलाफ जाँच की सिफारिश की है।

रिपोर्ट में कहा गया कि जयललिता को इलाज के लिए विदेश क्यों नहीं ले जाया गया और अमेरिका एवं इंग्लैंड के डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए एंजियोप्लास्टी क्यों नहीं की गई। इसके साथ ही अस्पताल ने किसी के दवाब में इसे टाल दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि अपोलो के डॉक्टर शशिकला के लगातार संपर्क में थे और उनकी सहमति के बाद ही वे आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ते थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जयललिता की मौत 4 दिसंबर 2016 को दोपहर 3:50 बजे ही हो गई थी, लेकिन उनकी मृत्यु की घोषणा करने में जानबूझकर देरी की गई। मेडिकल बुलेटिन में दिल के दौरे को मौत की वजह बताया गया था। जयललिता के बीमार पड़ने से लेकर उनकी मौत के समय तक शशिकला उनके साथ थीं। जब ये सब जयललिता के साथ हो रहा था, तब वो राज्य की मुख्यमंत्री थीं।

पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बेहद मजबूत सबूत के आधार पर ही जयललिता ने नवंबर 2011 से मार्च 2012 तक शशिकला को अपने आवास पोएस गार्डन से निकाल दिया था। हालाँकि, बाद में शशिकला ने माफी माँगी तो उन्हें वापस घर में घुसने दी, फिर भी एक निश्चित दूरी बनाकर रखी।

राज्य सरकार को सौंपे गए अपनी रिपोर्ट में जस्टिस अरुमुघस्वामी आयोग ने गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए पैनल ने कहा कि यह ‘अनुमान’ लगाया जा सकता है कि कुछ तनावपूर्ण संबंधों के कारण ही जयललिता ने शशिकला और उनके रिश्तेदारों को पोएस गार्डन छोड़ने के लिए कहा होगा।

आयोग ने 150 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें अन्नाद्रमुक (AIADMK) के शीर्ष नेता ओ पनीरसेल्वम, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केसी विजयभास्कर, एम थंबीदुरई, सी पोन्नियन, मनोज पांडियन, जयललिता की भतीजी दीपा और भतीजे दीपक, डॉक्टर और शीर्ष अधिकारी शामिल हैं।

बता दें कि जयललिता की तबीयत खराब होने के बाद साल 2016 में उन्हें चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह अस्पताल में लगभग 75 दिन तक भर्ती रही थीं। अंत में उनकी 5 दिसंबर 2016 को जयललिता की मौत हो गई थी। जयललिता की मौत के बाद कई तरह के सवाल उठाए गए थे।

लोगों में आक्रोश को देखते हुए तत्कालीन तमिलनाडु सरकार ने जस्टिस अरुमुगास्वामी की अध्यक्षता में एक जाँच कमीशन का गठन किया था। कमीशन की रिपोर्ट सौंपने के बाद राज्य सरकार ने इसे मंगलवार (18 अक्टूबर 2022) को सदन में रखा।

‘मैं हिन्दू हूँ और अपने धर्म में विश्वास रखता हूँ, वनवासियों के देवता भी हिन्दू संस्कृति का हिस्सा’: लिबरल गिरोह को चुभी ‘कांतारा’ के एक्टर-डायरेक्टर की बात

निर्देशक ऋषभ शेट्टी (Rishbh Shetty) की हाल ही में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ (Kantara) को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल का प्रदर्शन कर रही है। यह एक पीरियड एक्शन थ्रिलर है, जो कंबाला, भूत कोला, यक्षगान, दैवरधाने और जमींदार की पारंपरिक संस्कृति को जीवंत करती है। कन्नड़ अभिनेता से कार्यकर्ता बने चेतन कुमार ने दावा किया है कि ‘भूत कोला’ तटीय कर्नाटक के लोगों का प्रचलित आध्यात्मिक पूजा का एक अनुष्ठान है, जो हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है। उनके इस दावे से विवाद छिड़ गया है।

कुमार ने यह आपत्तिजनक टिप्पणी एक्टर और डायरेक्टर ऋषभ शेट्टी के उस बयान को लेकर की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘भूत कोला’ हिंदू संस्कृति का हिस्सा है। एक इंटरव्यू में शेट्टी से पूछा गया कि क्या फिल्म में पंजुर्ली को एक हिंदू देवता के रूप में दिखाया गया है?

शेट्टी ने कहा, “वे देवता, वे सभी हमारी परंपरा का हिस्सा हैं। निश्चित रूप से, यह हिंदू संस्कृति और हिंदू रीति-रिवाजों का हिस्सा है। क्योंकि मैं एक हिंदू हूँ और मेरी अपने धर्म में आस्था है और मैं इसका सम्मान करता हूँ। लेकिन मैं यह नहीं कहूँगा कि दूसरे गलत हैं। हमने जो कहा है वह हिंदू धर्म में मौजूद तथ्यों के आधार पर कहा है। ‘भूत कोला’ वराह रूपम अर्थात विष्णु भगवान हैं। ये लोग हिंदू धर्म को नीचा दिखाने की इतनी कोशिश क्यों करते हैं?”

तमिल चैनल सिनेमा विकटन को दिए गए इंटरव्यू का एक वीडियो क्लिप भी सामने आया है, जो कन्नड़ भाषा में है। चेतन अहिंसा के नाम से मशहूर चेतन कुमार ने शेट्टी के दावों को झूठा बताया है। चेतन कुमार ने ट्विटर पर लिखा, “मुझे खुशी है कि हमारी कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। निर्देशक ऋषभ शेट्टी का दावा है कि ‘भूत कोला’ ‘हिंदू संस्कृति’ का हिस्सा है। यह गलत है। हमारी पंबाड़ा/नालिक/परवा की बहुजन परंपराएँ वैदिक-ब्राह्मणवादी हिंदू धर्म से पहले की हैं।”

जहाँ कुछ लोगों ने कुमार का समर्थन किया है, वहीं अन्य लोगों ने उन्हें फटकार लगाई है। मिर्ची मोहन नाम के यूजर ने कुमार के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “यह ट्वीट ही अदालत की अवमानना है।” वहीं, एक अन्य नेटीजन ने दावा किया कि वह ‘भूत कोला’ देखकर बड़ा हुआ है और यह हिंदू संस्कृति का एक हिस्सा है।

कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा (Kantara)’ 30 सितंबर को रिलीज हुई है। ‘कांतारा‘ लोक-संस्कृति को दिखाती है। फिल्म में पंजुर्ली को हिंदू भगवान विष्णु के अवतार वराह रूपम के रूप में दर्शाया गया है। समीक्षकों ने फिल्म के अंत में बजने वाले गीत ‘वराह रूपम’ का उल्लेख किया है। बता दें कि इस साल फरवरी में कर्नाटक हिजाब मामले में कन्नड़ अभिनेता और कार्यकर्ता चेतन कुमार को बेंगलुरु सिटी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। चेतन पर आरोप था कि उन्होंने कर्नाटक में हिजाब मामले की सुनवाई कर रहे एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट किया था।

चीन के कारण UN में आतंकी घोषित नहीं हो सका लश्कर का शाहिद महमूद, इस साल चौथी बार की ऐसी हरकत: पाकिस्तान प्रेम में भारत विरोधी रवैया

भारत और अमेरिका लगातार पाकिस्तान के आतंकियों को वैश्विक आतंकी घोषित करने की कोशिशों में लगे हुए हैं। लेकिन चीन है जो पाकिस्तान प्रेम में आतंकियों के बचाव में आकर ऐसा नहीं होने देता। बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को भी यही देखने को मिला। भारत और अमेरिका चाहते थे किसी तरह लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शाहिद महमूद को वैश्विक आतंकी करार दिया जाए मगर चीन ने अपनी टांग अड़ा कर उसमें रोक लगा दी।

इस साल में ऐसा चौथी बार हुआ है। चीन जानता है कि महमूद को यूएस के ट्रेजरी विभाग ने साल 2016 में वैश्विक आतंकी करार दिया था। उसे लेकर जानकारी भी है कि वो गाजा से लेकर बांग्लादेश के रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप, म्यांमार, सऊदी अरब, तुर्की और सीरिया जैसी जगहों पर जा जाकर अपने संगठन में लड़कों को जोड़ता रहा है। इसके अलावा जून 2015 से जून 2016 तक शाहिद महमूद लश्कर-ए-तैयबा को फंड देने वाले संगठन फलाह-ए-इंसानियत (FIF) का उपाध्यक्ष भी था

Pak प्रेम में चीन ने कई बार किया आतंकियों का बचाव

बता दें कि शाहिद महमूद अकेला आतंकी नहीं है जिसे चीन का सहारा मिला हो। इससे पहले जून में अब्दुल रहमान मक्की को वैश्विक आतंकी बनाने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास गया था। वह खूँखार आतंकी हाफिज सईद का रिश्तेदार था। उस पर आरोप था कि वह जम्मू-कश्मीर के लड़कों को कट्टरपंथी बना रहा था और प्रदेश में हमले करवाने में भी उसका नाम था। हालाँकि चीन ने उसे भी वैश्विक आतंकियों की लिस्ट में शामिल करने पर टांग अड़ा दी।

इसके बाद अगस्त 2022 में चीन ने पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अब्दुल रउफ का भी बचाव किया था। भारत अमेरिका चाहते थे कि रउफ को बैन किया जाए। लेकिन चीन बीच में आया और अपनी शक्ति का प्रयोग करके ऐसा होने से रोक दिया।

सितंबर में यही हाल साजिद मीर को लेकर उठी माँग पर हुआ था। साजिद मीर भारत में मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक है। उसे 26-11 का मुख्य हैंडलर माना जाता है। भारत और अमेरिका दोनों चाहते थे कि UN सुरक्षा परिषद 1267 समिति (सैंक्शन रिजीम) के तहत उस पर प्रतिबंध लगे। लेकिन चीन आया और एक ऐसे आतंकी के वैश्विक आतंकी घोषित होने पर रोक लग गई जिसके ऊपर 5 मिलियन डॉलर इनाम है।

बता दें कि ये कुछ मामले हैं जो केवल साल 2022 में ही देखने को मिले। इस वर्ष से पहले ऐसे कई मौके आए हैं जब चीन ने आतंक को रोकने की जगह उन्हें बढ़ावा देने का काम किया।

43 साल पहले इंदिरा गाँधी से की थी बगावत, 2019 में ‘चेले’ ने ही बुरी तरह हराया: हिन्दू नहीं, इस धर्म को मानते हैं कॉन्ग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे

कॉन्ग्रेस पार्टी को 24 साल बाद गाँधी परिवार से अलग मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun kharge) के रूप में नया अध्यक्ष मिला है। अध्यक्ष पद के चुनाव में खड़गे को कुल 7897 वोट मिले। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी शशि थरूर (Shashi Tharoor) को सिर्फ 1072 वोट मिले। इस चुनाव में कुल 9385 नेताओं ने वोट डाले थे, जिनमें से 416 वोट रद्द हो गए।

नतीजे से पहले ही शशि थरूर ने कहा कि अध्यक्ष पद के चुनाव में अनियमितता हुई है और यह फ्री और फेयर नहीं था। मधुसूदन मिस्त्री को लिखे खत में थरूर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के संचालन में अत्यंत गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। थरूर ने खड़गे के समर्थकों पर यूपी में चुनाव के दौरान अनाचार में लिप्त रहने का आरोप लगाया। यह पत्र अब सामने आया है।

हालाँकि, चुनाव में हार के बाद शशि थरूर मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पहुँचे और उन्हें बधाई दी। इस दौरान थरूर ने खड़गे से कहा, “मैं उम्मीद करता हूँ कि खड़गे इस जिम्मेदारी को निभाने में सफल होंगे।” वहीं, सचिन पायलट और तारिक अनवर भी खड़गे के घर पहुँचकर उन्हें बधाई दी। इस चुनाव में खड़गे को 90 प्रतिशत वोट मिले हैं।

पार्टी अध्यक्ष पद का नतीजा सामने आने के बाद पार्टी नेता और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर निकले राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) का भी बयान आया है। राहुल गाँधी ने कहा, “मैं कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की भूमिका पर टिप्पणी नहीं कर सकता। यह मल्लिकार्जुन खड़गे तय करेंगे कि मेरी भूमिका क्या रहेगी।” राहुल गाँधी ने कहा कि वे अब नए अध्यक्ष खड़गे को रिपोर्ट करेंगे। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के पास सर्वोच्च अधिकार है।

थरूर द्वारा धाँधली के लगाए गए आरोपों पर राहुल गाँधी कहा, “कॉन्ग्रेस देश की अकेली पार्टी है, जिसने अध्यक्ष पद के चुनाव कराए। हम ही ऐसी पार्टी हैं, जिसमें चुनाव आयोग है और जिसके मुखिया टीएन शेषन जैसे व्यक्ति हैं। अगर चुनाव में धाँधली हुई है तो इस पर पार्टी का चुनाव आयोग निर्णय लेगा।”

कॉन्ग्रेस पार्टी के 137 साल के इतिहास में 6ठी बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ है। इससे पहले साल 1939, 1950, 1977, 1997 और 2000 में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए थे। पार्टी में 22 वर्षों के बाद अध्यक्ष पद का लिए चुनाव हुआ है। वहीं, 24 साल बाद कॉन्ग्रेस को फिर से गैर-गाँधी परिवार का अध्यक्ष मिला है। इससे पहले अध्यक्ष बनने वाले गैर-गाँधी परिवार के अंतिम व्यक्ति सीताराम केसरी (Sitaram Kesari) थे।

मल्लिकार्जुन खड़गे साल 1972 में कर्नाटक के गुरमितकल सीट से विधायक का चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने उसी सीट से लगातार 2008 तक चुनाव लड़े और जीते। खड़गे 32 साल तक एक ही सीट से चुनाव लड़कर लगातार 9 बार जीतने वाले संभवत: पहले नेता होंगे।

साल 1979 में खड़गे ने अपने राजनीतिक गुरु देवराज उर्स के साथ ही इंदिरा गाँधी से बगावत करके कॉन्ग्रेस से अलग हो गए थे। हालाँकि, 1980 के चुनाव में देवराज की पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली। इसके बाद देवराज के साथ नेता वापस कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। इनमें मल्लिकार्जुन खड़गे भी थे।

मल्लिकार्जुन खड़गे को गाँधी परिवार का करीबी माना जाता है। अध्यक्ष पद के नामांकन से सिर्फ एक दिन पहले खड़गे का नाम अध्यक्ष पद के लिए सामने आया था। इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नाम की चर्चा थी, लेकिन वहाँ विधायकों के बगावत के बाद मामला बदल गया। बता दें कि चुनावों के दौरान खड़गे ने कहा था कि यदि पार्टी चलाने के लिए गाँधी परिवार से राय-मशविरा करना पड़ा तो इसमें कोई बुराई नहीं है और वे ऐसा करेंगे।

मल्लिकार्जुन खड़गे के बारे में एक और रोचक तथ्य ये है कि 2019 के जिस लोकसभा चुनाव में गुलबर्गा से उन्हें अपने राजनीतिक करियर की एकमात्र हार मिली, उसका कारण उनके ही एक चुनावी एजेंट थे। उन्हें हराने वाले भाजपा नेता उमेश जाधव कभी उनके कभी उनके इलेक्शन एजेंट हुआ करते थे। इससे पहले खड़गे को ‘सलिलदा सरदार’ कहा जाता था, अर्थात जिसने हार का मुँह नहीं देखा हो। वो खुद को बौद्ध धर्म का अनुयायी मानते हैं।

पाँव में लगी गोली, 6 बार सर्जरी, 6 महीने रहीं बेड पर: 10 साल की उम्र में जिस लड़की ने कोर्ट में की थी कसाब की पहचान, उससे मिले UN महासचिव

मुंबई में हुए 26/11 आतंकवादी हमले (Mumbai Terror Attack) की सर्वाइवर और प्रत्यक्षदर्शी देविका रोतावन (Devika Rotawan) ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres) से मुलाकात की। गुटेरेस तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा (18-20 अक्टूबर) पर भारत पहुँचे हैं। उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई से की है। देविका ने हमले के दौरान जिंदा पकड़े गए आतंकी आमिर अजमल कसाब की पहचान की थी।

देविका ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “मैंने उनसे (गुटेरेस) से कहा कि मैं छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर घायल हो गई थी और अदालत में अजमल कसाब की पहचान की थी। मैंने उनसे यह भी कहा कि मैं पढ़ना चाहती हूँ और एक अधिकारी बनना चाहती हूँ। आतंकवाद को खत्म करना चाहती हूँ।”

रोतावन 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने वाली सबसे कम उम्र की गवाह थी। मुंबई हमलों के दौरान रोतावन महज दस साल थी और वे पुणे जाने के लिए अपने पिता और भाई के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पहुँची थीं।

26/11 की भयावह रात आतंकवादियों द्वारा चलाई गई गोली उसके पैर पर लगी थी। गोली लगने के बाद वह बेहोश हो गई और उसे सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया। हमले के बाद देविका के दो महीने के भीतर 6 सर्जिकल ऑपरेशन हुए और उसे 6 महीने बेड पर रहना पड़ा। जिसके बाद उसने आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही दी थी। वह मुंबई आतंकवादी हमले के मामले में सबसे कम उम्र की गवाह बनी थी।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस अपनी तीन दिवसीय यात्रा के पहले दिन मुंबई के होटल ताज पैलेस में 26/11 आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान गुटेरेस ने कहा कि आतंकवाद एक पूर्ण बुराई है। उन्होंने कहा कि कोई कारण, बहाना, शिकायतें आतंकवाद को सही नहीं ठहरा सकती। गुटेरेस बुधवार आधी रात (18 अक्टूबर, 2022) के बाद लंदन से एक व्यावसायिक उड़ान के जरिए मुंबई पहुँचे।

देविका रोतावन अगस्त 2020 में तब चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वजह ये थी कि ईडब्ल्यूएस स्कीम के तहत उन्हें मकान जिसे देने का वादा महाराष्ट्र सरकार ने किया था, जो उन्हें नहीं मिला। उन्होंने बताया था कि उनका पूरा परिवार भारी वित्तीय संकट से जूझ रहा है, लिहाजा उन्होंने घर के साथ-साथ कुछ ऐसा प्रबंध करने की गुहार लगाई थी, जिससे वह अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सके।

हाँलाकि, देविका ने यह भी बताया था कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से 10 लाख की सहायता राशि मिली थी, जो उनके टीबी के इलाज में खर्च हो गया।

2 दिन गैंगरेप के बाद महिला के हाथ-पाँव बाँध बोरी में भर कर फेंक दिया, प्राइवेट पार्ट में घुसा दिया रॉड: शाहरुख़, जावेद, औरंगजेब, जहीर और दीनू में से 4 गिरफ्तार

दिल्ली से सटे गाजियाबाद से महिला के साथ निर्भया जैसी ​दरिंदगी करने का मामला सामने आया है। यह घटना नंदग्राम थाना क्षेत्र के आश्रम रोड की है। पाँच लोगों ने न केवल 38 वर्षीय महिला के साथ दो दिन तक गैंगरेप, बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में रोड भी ​डाल दिया। महिला के भाई की शिकायत पर पुलिस ने शाहरुख, शाहरुख के भाई जावेद, औरंगजेब, जहीर उर्फ ढोला और दीनू के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने 4 आरोपितों को हिरासत में लिया है। वहीं एक अभी भी फरार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सभी आरोपित दिल्ली के दुर्गापुरी इलाके के रहने वाले हैं। महिला दिल्ली के नंदनगरी इलाके ​की रहने वाली है। वह गाजियाबाद में अपने भाई के घर जन्मदिन की पार्टी मनाने आई थी। दिल्ली वापस लौटने के दौरान पाँचों आरोपित महिला को अगवा कर जबरन गाड़ी में उठाकर ले गए। उन्होंने दो दिनों तक उसके साथ गैंगरेप किया और उसके प्राइवेट पार्ट में राड घुसा दी। पीड़िता से हैवानियत करने के बाद आरोपितों ने उसे बोरी में भरकर नंदग्राम इलाके के आश्रम रोड पर फेंक दिया। कुछ मीडिया रिपोर्ट में महिला की उम्र 40 साल बताई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि वे पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे है। इस मामले को लेकर एसपी सिटी ने कहा कि पुलिस को 18 अक्टूबर को सुबह लगभग 3.30 बजे नंदग्राम थाना को आश्रम रोड के पास एक महिला के रास्ते में पड़े होने की सूचना मिली थी। पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और उसे अस्पताल लेकर गए। पूछताछ में महिला ने बताया कि वह दिल्ली के नंदनगरी की रहने वाली है और 16 अक्टूबर को अपने भाई के घर जन्मदिन की पार्टी में आई थी।

गाजियाबाद एसपी सिटी ने बताया कि पीड़िता के भाई ने रात 9.30 बजे उसे आटो में बिठाया था। इसके बाद पीड़िता के जानने वाले 5 लोगों ने उसे स्कॉर्पियो कार में अगवा कर लिया था। महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद तत्काल केस दर्ज कर 4 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है। महिला का मकान के कब्जे को लेकर पहले से ही इन आरोपितों के साथ विवाद चल रहा है। वह उन्हें पहले से जानती है। कोर्ट में इसका केस भी चल रहा है।

बता दें कि दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने गाजियाबाद पुलिस को नोटिस जारी किया है। उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट शेयर किया है। साथ ही लिखा, “दिल्ली की महिला का गाजियाबाद में रेप। 5 लोगों ने 2 दिन तक अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म किया। सड़क पर हाथ-पैर बाँधे बोरे में पड़ी मिली पीड़िता अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही है।”

‘…और खींचेगा फोटो’: बिहार के अस्पतालों में ‘कुव्यवस्था’ दिखा रहे थे 2 युवक, नर्स ने कमरे में बंद करके डंडे से पीटा, Video वायरल

बिहार के अस्पतालों में कुव्यवस्था दिखाने की जुर्रत करने पर दो लड़कों को कमरे में बंद करके पीटे जाने का मामला प्रकाश में आया है। घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे नर्सों ने दो युवकों को कमरे में बिठाकर मोटे डंडे से पीटा और उनके रोने पर भी उन्हें नहीं छोड़ा।

कथिततौर पर यह लड़के डॉक्टर के साइन लेने अस्पताल में आए थे, लेकिन डॉक्टर ओपीडी में मौजूद नहीं थे। ऐसे में ये वीडियो बनाने लगे। तभी नर्सें आईं और इन्हें कमरे में ले जाकर डंडे से पीटा। घटना को वीडियो में रिकॉर्ड किया गया

वीडियो में दिख रहा है कि नर्सें मोटा डंडा लेकर पहले एक लड़के को मारती हैं और फिर दूसरे पर इधर-उधर देखे बिना जोर-जोर से डंडे मारती हैं। एक लड़का बिलखकर रो भी देता है। फिर भी नर्स को दया नहीं आती। वहीं दूसरा लड़का बस अपनी सफाई देता रहता है।

नर्सों को कहते सुना जा सकता है, “… और वीडियो बनाएगा और फोटो खींचेगा…जा अपनी बहन की वीडियो बना…अपनी माँ की वीडियो बना।” इस वीडियो में एक और व्यक्ति की आवाज आ रही है। वो लगातार लड़कों की पिटाई की वीडियो बनाते हुए नर्सों को रोकने की बजाय उन्हें उकसा रहा है। उसकी बातें सुनकर एक नर्स को लड़के को जोर-जोर से पीटते देखा जा सकता है।

वीडियो को शेयर करते हुए NCM ने लिखा, “बिहार के छपरा में सदर अस्पताल की दो नर्सों ने दो युवकों को 4 घंटे बंदी बनाकर उन्हें पीटा। उन्हें लाठी से मारा। सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने अस्पताल में पर्याप्त सुविधा न दिखने पर वीडियो बना ली। घटना के संबंध में कोई एफआईआर नहीं हुई है। अस्पताल के सर्जन ने मना किया है कि उनके अस्पताल में ऐसी कोई घटना घटित ही नहीं हुई।”

बता दें कि एक ओर जहाँ अस्पताल इस तरह युवकों की पिटाई पर कुछ स्पष्ट नहीं कह रहा। वहीं सोशल मीडिया पर दावा है कि युवकों को पीटने वाली इन 2 नर्सों के नाम साक्षी और पूजा हैं। इन दोनों ने अस्पताल में कुव्यवस्था को उजागर करने वाले लड़कों को मारा।

कुछ रिपोर्ट बता रही हैं कि इनमें से एक नर्स ने इन युवकों पर छेड़खानी का इल्जाम लगाकर इनके खिलाफ भगवान बाजार थाने में शिकायत दी है। घटना पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ सत्यदेव सिंह का बयान आया है। उन्होंने बताया कि मामला 14 अक्टूबर का है। इसे लेकर अस्पताल की नर्स ने थाने में FIR दर्ज करने के लिए एप्लीकेशन दी है। नर्सों से भी घटना के संबंध में स्पष्टीकरण माँगा गया है।