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राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने केरल के 9 कुलपतियों की कर दी छुट्टी: भड़की वामपंथी सरकार ने बताया RSS की साजिश, कहा – हो रहा भगवाकरण

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राज्य की 9 यूनिवर्सिटी के कुलपतियों से उनका इस्तीफा आज सुबह 11:30 बजे तक देने को कहा था। गवर्नर खान ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया आदेश के बाद लिया था जिसमें यूजीसी के नियमों के विपरीत जाकर एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को रद्द करने का आदेश था।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि यूजीसी के मुताबिक, राज्य द्वारा गठित खोज समिति को कुलपति पद के लिए इंजीनियरिंग विज्ञान क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के बीच से कम से कम 3 उपयुक्त व्यक्तियों के एक पैनल की सिफारिश करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय उसने केवल एक ही नाम भेजा।

इसी आदेश पर केरल गवर्नर ने केरल यूनिवर्सिटी, महात्मा गाँधी यूनिवर्सिटी, कोच्चि यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेकनॉलजी, केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशियन स्टडीज, कन्नूर यूनिवर्सिटी, एपीजे अब्दुल कलाम टेकनॉलजी यूनिवर्सिटी, श्री शंकराचार्या यूनिवर्सिटी ऑफ संस्कृत, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिकट, मलयालम यूनिवर्सिटी के कुलपतियों से उनका इस्तीफा माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा जारी किए गए नोटिस को राज्य की सीपीएम सरकार ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की साजिश बताया। आरोप लगाए जाने लगे कि शिक्षा प्रणाली का भगवाकरण करने के एजेंडे के साथ ये सब हो रहा है। सीपीएम का कहना है कि यह फैसला लोकतंत्र की सभी सीमाओं का उल्लंघन है।

कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गोपीनाथ रविंद्रन ने राज्यपाल के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगे। देखते हैं कि मेरे इस्तीफा नहीं देने पर क्या कार्रवाई की जाएगी। वहीं सीपीएम ने राज्य सचिव एमवी गोविंदन और भाकपा केके राजेंद्रन ने कहा कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट नेताओं के यहाँ आयोजित एक बैठक में फैसला किया गया कि विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में गवर्नर ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया इसलिए वह इसके विरोध में राजव्यापी प्रदर्शन करेंगे।

‘यहीं पर आतंक के फन को कुचला गया था, Pak से हर युद्ध में यहाँ लहराया विजय ध्वज’: कारगिल में जवानों के बीच PM मोदी की दीवाली, कहा – आप सब ही मेरा परिवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा की तरह इस साल भी भारतीय सेना के जवानों के बीच दीवाली का त्योहार मनाया। इस बार वो कारगिल पहुँचे, जहाँ देश के बहादुर वीरों से उन्होंने कहा, “आप सब ही मेरा परिवार हैं।” पीएम मोदी ने कहा कि उनके लिए तो वर्षों-वर्ष से मेरा परिवार आप ही सब हैं। उन्होंने कहा, “मेरी दीपावली की मिठास आप के बीच बढ़ जाती है, मेरी दीपावली का प्रकाश आपके बीच है और अगली दीवाली तक मेरा पद प्रशस्त करता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरा सौभाग्य है मुझे वर्षों से दिवाली आपके बीच बॉर्डर पर आकर आपके साथ मनाने अवसर मिल रहा है। पाकिस्तान के साथ एक भी लड़ाई ऐसी नहीं हुई है, जहाँ कारगिल ने विजय ध्वज न फहराया हो। दीवाली का अर्थ है कि आतंक के अंत के साथ उत्सव। यही कारगिल ने भी किया था। कारगिल में हमारी सेना ने आतंक के फन को कुचला था और देश में जीत की ऐसी दीवाली मनी कि लोग आज भी उसे याद करते हैं।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी कहा कि एक राष्ट्र तब अमर होता है जब उसकी संतानों को, उसके वीर बेटों और बेटियों को अपने सामर्थ्य पर परम विश्वास होता है। उन्होंने जवानों से कहा कि आपकी वजह से देशवासी देश में चैन से रहते हैं, ये भारतवासियों के लिए खुशी की बात है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि यूक्रेन युद्ध के दौरान हमने देखा कि कैसे हमारा राष्ट्रीय ध्वज वहाँ फँसे हमारे नागरिकों के लिए एक ढाल बन गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल में सेना के जवानों के बीच कहा कि दुनिया भर में भारत का सम्मान बढ़ा है और ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि भारत अपने आंतरिक और बाहरी दुश्मनों के खिलाफ सफलता के साथ मोर्चा ले रहा है। उन्होंने जवानों से कहा कि आप सीमा पर कवच बनकर खड़े हुए हैं तो देश के भीतर देश के दुश्मनों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो रही है। उन्होंने बताया कि आतंकवाद, नक्सलवाद आदि जो जड़े बीते वर्षों में पनपी थी उसे उखाड़ने का सफल प्रयास देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, “कभी नक्सलवाद ने देश के एक बड़े हिस्से को अपनी गिरफ्त में ले लिया था, लेकिन आज वो दायरा सीमट रहा है। राष्ट्र हित में आज बड़े से बड़े निर्णय तेजी से लागू किए जाते हैं। सेना में बड़े सुधार की जो जरूरत दशकों से महसूस की जा रही है वो आज जमीन पर उतर रही है।” उन्होंने ये भी कहा कि शौर्य के अप्रतीम गाथाओं के साथ ही हमारी परंपरा, मधुरता और मिठास की भी है, इसलिए भारत अपने त्योहारों को प्रेम के साथ मनाता है – पूरी दुनिया को उसमें शामिल करके मनाता है।

कोयम्बटूर में मंदिर के सामने ब्लास्ट, कार के उड़ गए परखच्चे: मृतक मुबीन के घर से भारी मात्रा में मिला विस्फोटक, ISIS लिंक को लेकर 3 साल पहले हुई थी पूछताछ

तमिलनाडु के कोयम्बटूर स्थित कोट्टई ईश्वरम मंदिर के सामने एक कार में सिलिंडर ब्लास्ट हुआ। जिस जमिज़ा मुबीन इस ब्लास्ट में मारा गया, उसके घर से बड़ी मात्रा में विस्फोटक मिले हैं। अब पुलिस इस मामले की जाँच आतंकी हमले के एंगल से कर रही है। आशंका है कि दीवाली के दौरान मंदिर को निशाना बनाने की साजिश थी। जमिज़ा मुबीन से 2019 में पुलिस खूँखार आतंकी संगठन ISIS से लिंक्स को लेकर पूछताछ कर चुकी है।

उसकी उम्र 25 साल थी। वो इंजीनियरिंग ग्रेजुएट था। उसके करीबी लोगों से पूछताछ की जा रही है और जल्द ही पुलिस इस मामले में अन्य गिरफ्तारियाँ कर सकती है। जमिज़ा मुबीन अपनी गाड़ी में दो खुले सिलिंडर लेकर ड्राइव कर रहा था। उनमें से एक में विस्फोट हुआ। उसके घर से पोटासियम नाइट्रेट, एल्युमीनियम पाउडर और चारकोल के अलावा बड़ी मात्रा में सल्फर भी बरामद हुआ है। इन सबका इस्तेमाल देशी बम बनाने में किया जाता है।

उसकी गाड़ी में से लोहे की कई कील भी मिली है, जिनका इस्तेमाल सड़क पर गाड़ियों को पंक्चर करने में किया जाता है। साथ ही गाड़ी से कई मार्बल पत्थर भी मिले हैं। NIA ने उक्त आतंकी से पूछताछ तो की थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। तमिलनाडु में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और 6 पुलिस थाना इस केस की तहकीकात कर रहे हैं। मारुती 800 के परखच्चे उड़ गए हैं। तमिलनाडु भाजपा ने आरोप लगाया कि ये एक दुर्घटना नहीं, बल्कि साजिश के तहत ISIS से जुड़ा आतंकी हमला था।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने राज्य की डीएमके सरकार पर सूचनाओं को छिपाने और मामले में लीपापोती करने का आरोप लगाया। चेन्नई से कई बड़े अधिकारी इस घटनास्थल पहुँचे हैं। आरोपित का घर उक्कादम के बगल में स्थित कोट्टईमेडु में है। तमिलनाडु पुलिस का कहना है कि वो किसी संगठन से जुड़ा नहीं था, और न ही उसके खिलाफ कोई केस था। पुलिस का कहना है NIA की जद में शामिल कुछ लोगों से उसके लिंक ज़रूर सामने आए थे। हालाँकि, पुलिस इसे आत्मघाती हमला नहीं मान रही।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर से गैंगरेप मामले में झारखंड पुलिस ने 7 को किया गिरफ्तार, आरोपितों में 2 नाबालिग: 2 अब भी फरार, जनजातीय समाज की है पीड़िता

झारखंड के चाईबासा में जनजातीय युवती के साथ हुए गैंगरेप के मामले में पुलिस ने रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को दो नाबालिग आरोपितों सहित कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले के 2 आरोपित फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चाईबासा में 26 वर्षीय जनजातीय युवती के साथ हुए गैंगरेप के मामले की जाँच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने फोरेंसिक टीम की सहायता व स्थानीय लोगों से पूछताछ करते हुए इन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। कहा जा रहा है कि एसआईटी ने आसपास के गाँव के लोगों से पूछताछ कर घटना स्थल (हवाई पट्टी) में आने जाने वाले लोगों की लिस्ट बनाई थी। इसके बाद, संदिग्धों से पूछताछ करने के बाद गिरफ्तारी हुई है।

इस मामले में एसपी आशुतोष शेखर ने कहा है कि चाईबासा जिले में 26 साल की सॉफ्टवेयर इंजीनियर से गुरुवार (20 अक्टूबर, 2022) को हुए गैंगरेप के मामले में गठित विशेष जाँच दल (SIT) की टीम ने खुलासा करते हुए इस घटना में शामिल कुल 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इसमें दो नाबालिग भी शामिल हैं।

एसपी ने कहा है कि गैंगरेप के इस मामले में संलिप्त अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिये पुलिस छापेमारी कर रही है। मामले की जाँच के लिए गठित एसआईटी ने टेक्निकल और फॉरेंसिक टीम की मदद से घटना का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, सभी गिरफ्तार आरोपितों ने गैंगरेप में शामिल होने और अपने अपराध को स्वीकार किया है।

एसपी आशुतोष शेखर ने यह भी कहा है कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सुरेन देवगम, शिवशंकर करजी उर्फ बाज, पुरमी देवगम उर्फ सेटी, प्रकाश देवगम उर्फ डेंबो, और सोमा सिंकू उर्फ पेट्रा (19) के रूप में की गई है। ये सभी आरोपित चाईबासा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के शालीहातू गाँव के रहने वाले हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपित शिवशंकर करजी उर्फ बाज के घर से पीड़िता से लूटा गया सामान, पर्स एवं उसमें रखा पीड़िता का आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, ड्राइविंग लाईसेंस व 4500 रुपए एवं अन्य सामग्री बरामद की है।

घटना मुफस्सिल थानाक्षेत्र के टेकराहासू की है। पीड़िता अपने एक दोस्त के साथ इसी क्षेत्र में बनी एक हवाई पट्टी पर घूमने गई थी, जहाँ वो शाम तक रही। तभी वहाँ लगभग 10 अनजान लोग आ गए, जिन्होंने पहले पीड़िता के दोस्त को मारपीट कर भगा दिया। इस दौरान आरोपितों ने पीड़िता के दोस्त का मोबाइल फोन और जेब में रखे 5 हजार रुपए भी छीन लिए। बाद में सभी ने पीड़िता को कुछ दूर सुनसान में ले जा कर उसके साथ रेप किया।

हिंदुत्व को आतंकवाद से जोड़ता था जो पाकिस्तानी पत्रकार, वो केन्या में मारा गया: PM मोदी को बताता था हिटलर, बीवी ने कहा – मार दी गोली

पाकिस्तान के पत्रकार व टीवी एंकर अरशद शरीफ की केन्या की राजधानी में मौत हो गई। मीडिया में जहाँ पहले अरशद की मौत के पीछे दुर्घटना को कारण कहा गया। वहीं दूसरी ओर उनकी पत्नी जावेरिया सिद्दीकी का कहना है कि उन्हें गोली मारी गई है।

जावेरिया ने लिखा, “मैंने दोस्त खोया, पति खोया और अपना पसंदीदा पत्रकार खोया। पुलिस के अनुसार उन्हें गोली मारी गई। हमारी निजता की इज्जत करें और कृपा करके ब्रेकिंग के नाम पर हमारे परिजनों की या पर्सनल डिटेल या अरशद की आखिरी तस्वीरें न साझा करें।”

बता दें कि अरशद शरीफ पूर्व में एआरवाई न्यूज से जुड़े हुए थे और बाद में वह दुबई चले गए थे। वह पाकिस्तान के बेहद मशहूर पत्रकारों में से एक थे। उनके ऊपर देशद्रोह का मुकदमा भी था। इसके अलावा भारत में वह हिंदूविरोधी और मोदी विरोधी होने के लिए जाने जाते थे।

नीचे देख सकते हैं कि कैसे अरशद दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के समय हिंदूघृणा फैलाने में लगे हुए थे।

उन्होंने अपने ट्वीट में खासकर आरएसएस भाजपा और हिंदुत्व जैसे शब्दों का प्रयोग किया हुआ है। इसके अलावा ये भी कह रखा है कि दिल्ली के दंगों में मुस्लिमों के मस्जिद जलाए जा रहे हैं और साथ में मुस्लिम औरतों का रेप हो रहा है।

एक वीडियो जिसमें पीएम मोदी को गाली देने के साथ खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं, उस पर अरशद शरीफ ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने फासीवादी हिंदुत्व की कट्टर नीतियाँ लाकर और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करके पीएम मोदी ने भारतीय समाज को दो हिस्सों में बाँट दिया है। सिख भी अब आजादी चाहते हैं।

अगले ट्वीट में अरशद ने चेतावनी का साइन बनाते हुए कि मोदी अपनी हिंदुत्व की नीतियों के साथ दक्षिण एशिया के एक नए हिटलर के तौर पर उभर रहा है। ईसाइयों, पारसियों, यहूदियों, सिखों और मुस्लिमों के लिए भाजपा में कोई जगह नहीं है।

देख सकते हैं कि अरशद शरीफ ने भारत के खिलाफ समय-समय पर झूठ फैलाया। कभी कहा कि भारत में मुस्लिमों की नागरिकता खतरे में है। कभी कहा कि दक्षिणपंथी मोदी सरकार के वफादारा, कट्टरपंथी धार्मिक संगठन मुस्लिमों को धमका रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि शरीफ के ऊपर पाकिस्तान में एक विवादित इंटव्यू के बाद देशद्रोह का केस दर्ज हो रखे थे। इसके बाद शरीफ ने देश छोड़ दिया था। वहीं एआरआई न्यूज ने भी उनसे दूरी बना ली थीं। संस्थान ने कहा था कि वो अपने कर्मचारियों से सीमा में रहने की अपेक्षा करते हैं।

ब्रिटेन को पहला हिन्दू PM मिलना लगभग तय! रेस से हटे बोरिस जॉनसन, 16 साल में इस पद को संभालने वाले 7वें नेता होंगे ऋषि सुनक

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री का पद बीते कई महीनों से वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है। देश की सत्‍तारूढ पार्टी में ही इस पद के लिए घमासान मचा हुआ है। कुछ दिन पहले पार्टी के अंदर ही महीनों उठापटक के बाद पीएम बनीं ल‍िज ट्रस ने इस्‍तीफा दे दिया। लिज ट्रस ने भारतीय मूल के ऋषि सुनक को हराकर यह पद हासिल किया था। लेकिन, आज वही सुनक इस पद की रेस में सबसे आगे हैं। दरअसल ट्रस के इस्‍तीफे के बाद प्रधानमंत्री पद का दावा ठोंकने वाले जॉनसन ने रेस से पीछे हटने की घोषणा की है। इसके साथ ही सुनक अब प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हैं।

इंडीपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, बोरिस जॉनसन ने घोषणा की है कि वह टोरी नेतृत्व प्रतियोगिता के लिए खड़े नहीं होंगे। विवादास्पद पूर्व प्रधानमंत्री ने दावा करते हुए कहा क‍ि उन्होंने कंजरवेटिव सांसदों के मतपत्र पर उपस्थित होने के लिए आवश्यक 102 नामांकन की उच्च बाधा को पार कर लिया है। उन्होंने कहा, “मैं दुख के साथ इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि यह करना सही नहीं होगा। आप प्रभावी ढंग से शासन नहीं कर सकते जब तक कि आपके पास संसद में एक संयुक्त पार्टी न हो।”

जॉनसन के बयान से अब उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी, 42 वर्षीय पूर्व वित्त मंत्री सुनक के प्रधानमंत्री बनने का मार्ग लगभग साफ़ हो गया है। यदि उनके प्रधानमंत्री बनने पुष्टि हो जाति है तो है, तो ऋषि सुनक, लिज़ ट्रस की जगह लेंगे, जिन्हें वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल शुरू करने वाले आर्थिक कार्यक्रम शुरू करने के बाद इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था। 2007 में टोनी ब्लेयर की सरकार जाने के बाद से अब तक 5 प्रधानमंत्री ब्रिटेन देख चुका है। इस तरह 16 साल में ऋषि सुनक 7वें नेता होंगे, जिन्हें यूरोपीय देश इस पद पर देखेगा।

जॉनससन के प्रधानमंत्री पद की दौड़ से हटने के कुछ देर बाद ही सुनक ने ट्वीट कर कहा कि हम ब्रिटेन में ब्रेक्सिट और वैक्सीन रोलआउट देने के लिए और यूक्रेन पर व्लादिमीर पुतिन के ख‍िलाफ स्‍टैंड लेने के लिए जॉनसन के आभारी हैं।

एक अन्‍य ट्वीट में उन्‍होंने कहा, “हालाँकि उन्होंने फिर से पीएम के लिए चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि वह देश और विदेश में सार्वजनिक जीवन में योगदान देना जारी रखेंगे।”

‘द गार्जियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, जॉनसन के पीएम पद की रेस से हटने के बाद सुनक को अब 165 सांसदाें का समर्थन प्राप्‍त है। ऋषि सुनक ने रविवार को अपने आधिकारिक अभियान की शुरुआत इस घोषणा के साथ की कि वह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ-साथ देश को एकजुट करना चाहते हैं। दौड़ में तीसरी उम्मीदवार पेनी मोर्डौंट ने भी अपना अभियान शुरू किया है और उन्हें लगभग 27 सांसदों का समर्थन प्राप्त है।

उल्‍लेखनीय है कि 20 अक्टूबर को लिज ट्रस ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस केवल 45 दिनों के लिए प्रधानमंत्री पद पर रहीं। यह किसी भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री का अब तक का सबसे छोटा कार्यकाल रहा है। डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर उन्होंने कहा था, ”मैं वह काम नहीं कर सकी, जिसके लिए मैं चुनी गई थी।”

सोमालिया के होटल में इस्लामी आतंकी हमला, 9 की मौत और 47 घायल: पीड़ितों में कई स्कूली छात्र भी, 4 आतंकियों ने बरपाया कहर

पूर्वी अफ्रीकी देश सोमालिया के सबसे बड़े शहरों में से एक किसमायो के एक होटल पर हुए हमले में 47 लोग घायल हुए हैं जबकि 9 लोगों की मौत हो गई है। यह हमला रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को भारतीय समयानुसार देर रात 12:45 पर हुआ है। चूँकि, यह हमला स्कूल के पास हुआ है, इसलिए इसमें कई छात्रों के घायल होने की भी खबर है। इस्लामी चरमपंथी संगठन अल-शबाब ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, किसमायो के तवाकल होटल में हुआ यह हमला आत्मघाती हमला था। इसमें, कार सवार एक आतंकी ने कार को होटल के गेट से टकरा दिया जिससे उसमें विस्फोट हो गया। इस विस्फोट से आसपास की दुकानों और बिल्डिंग्स को काफी नुकसान हुआ है। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया है कि कार विस्फोटक से भरी हुई थी। इसके बाद, तीन बंदूकधारी आतंकी होटल में घुसे और अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरू कर दी। इसके बाद, सुरक्षा अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई में सभी आतंकियों को मार गिराया है।

किसमायु के सुरक्षा अधिकारी फराह मोहम्मद ने कहा है कि यह हमला तब हुआ जब होटल में आतंकी संगठन अल शबाब से लड़ने की प्लानिंग के लिए एक मीटिंग चल रही थी। इसलिए, ऐसा कहा जा रहा है कि हमलावरों ने यहाँ मीटिंग कर रहे सुरक्षा अधिकारियों को निशाना बनाते हुए ही विस्फोट किया है।

इस पहले को लेकर जुबालैंड के सुरक्षा मंत्री युसुफ हुसैन धूमल ने कहा है कि इस हमले में चार आतंकी शामिल थे। इनमें से तीन आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया, जबकि एक आतंकी की मौत बम विस्फोट से हो गई।

सुरक्षा मंत्री धूमल ने यह भी कहा है कि इस विस्फोट में छात्रों और नागरिकों सहित नौ लोग मारे गए हैं जबकि 47 अन्य घायल हुए हैं। घायलों में से कुछ लोगों की हालत गंभीर है ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। चूँकि, जिस होटल में हमला हुआ है वह स्कूल के पास था। इसलिए, कई छात्र भी घायल हुए हैं।

बता दें, सोमालिया में बीते एक दशक से अल शबाब ऐसे हमले करता आ रहा है। इस्लामिक आतंकी संगठन अल शबाब के हमले से बीते एक दशक में हजारों लोग मारे गए हैं। गौरतलब है कि इसी साल अगस्त में अगस्त में अल शबाब ने मोगादिशू के हयात होटल पर हमला किया था, जिसमें 21 लोग मारे गए थे जबकि 117 घायल हुए थे। साल 2019 में भी अल शबाब ने किसमायो के एक होटल पर इसी तरह से हमला किया था, जिसमें 26 लोग मारे गए और 56 घायल हुए थे।

धनतेरस के दिन हुई ₹45000 करोड़ की कमाई, केवल गहने ₹25000 करोड़ के बिके: भारतीय उत्पादों पर ग्राहकों ने प्यार दिखाया, चीन को ₹75000 करोड़ का नुकसान

हिंदू धर्म में धनतेरस के दिन बर्तन, गहने के रूप में कोई धातु खरीदना एक परंपरा की तरह रही है। इसी परंपरा के कारण बाजार में, व्यापार में जो उछाल आता है, उसका अंदाजा कोई नहीं लगा पाता। साल 2022 में ये त्योहार भारत में दो दिन मना- 22 अक्टूबर और 23 अक्टूबर। इन दो दिनों में 45 हजार करोड़ रुपए का व्यापार किया गया। केवल गहनों की बात करें तो 25 हजार करोड़ का व्यापारा भारत में हुआ है। बाकी के 20 हजार करोड़ रुपए का बिजनेस ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर, फर्नीचर, साज-सजावट, मिठाई, बर्तन, इलेक्ट्रिक सामान आदि के जरिए हुआ।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया के अनुसार, “दो दिन धनतेरस त्योहार होने के कारण देश में सोने और चांदी के सिक्कों, नोटों, मूर्तियों और बर्तनों के साथ-साथ सोने और चाँदी की भारी बिक्री हुई। लगभग 25 हजार करोड़ की।”

CAIT के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं, कल और आज दो दिन देश भर के बाजारों में ग्राहकों की उमड़ी भीड़ और सामान खरीदने की उत्सुकता इस बात का सबूत है कि लोगों में भारतीय सामान खरीदने की कितनी चाह है, खासकर ऑफलाइन मार्केटों से। दो साल के कोरोना के चलते बाजार से दूर रहने वाले ग्राहक अब फिर वापिस बाजार में पूरे जोर शोर से आ गए हैं।

CAIT का अनुमान है कि इस दिवाली व्यापार 1, 50,000 करोड़ से ज्यादा का होने वाला है और सबसे अच्छी बात ये है कि भारतीय बाजारों में सामान की खरीद के लिए लोग अब भारतीय उत्पादों को ही पसंद कर रहे हैं। इस वर्ष दिवाली से संबंधित सामान में चीन को 75 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान होगा।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बीसी भरतिया ने बताया कि गहनों के अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर में 6000 करोड़ का बिजनेस हुआ, फर्नीचर में 1500 करोड़ का, 2500 करोड़ कम्प्यूटर व उससे जुड़े सामानों की बिक्री से आए। इसी तरह फएमसीजी में लगभग 3 हजार करोड़, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान में लगभग 1 हजार करोड़, स्टेनलेस स्टील, एल्युमीनियम और पीतल के बर्तनों में लगभग 500 करोड़, किचन के उपकरण और किचन के अन्य सामन में लगभग 700 करोड़, टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट और फैशन के कपडे में लगभग 1500 करोड़ का व्यापार हुआ है।

त्योहार के मौके पर भारतीय बाजारों के हाल देखते हुए कैट के सहयोगी संगठन ऑन इंडिया ज्वेलर्स और गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि भारत में सोने की इंडस्ट्री पूरी तरह से कोविड काल से उबर चुकी है। अब भारत में सोना खरीदने की चाह अपने चरम पर है। आर्थिक गतिविधियों में आई उछाल और उपभोक्ता की माँग में हुई सुधार के बाद भारत में सोने की माँग जुलाई से सितंबर के बीच 80 फीसद बढ़ी है। पंकज अरोड़ा ने बताया कि धनतेरस के दिन देश भर में लगभग 25 हजार करोड़ रुपए के सोने चांदी के सिक्के, नोट, मूर्तियाँ और बर्तन मिले।

दिवाली को प्रदूषण से जोड़ते हुए लाइव वीडियो बना रही थी ‘भारत की ग्रेटा थनबर्ग’, मोबाइल फोन उड़ा ले गए उचक्के: कह रही थी – जानवर परेशान होते हैं

11 वर्षीय तथाकथित पर्यावरण एक्टिविस्ट लिसिप्रिया कंगुजम उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में में दिवाली को प्रदूषण से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर लाइव आ रही थीं, लेकिन इसी बीच लुटेरे उनका मोबाइल फोन ही छीन कर भाग निकले। उन्होंने ट्विटर पर नोएडा पुलिस को टैग करते हुए इसे अर्जेन्ट बताया है। उन्होंने बताया कि रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को रात 8:30 बजे बाइक सवार दो चोरों ने उनका मोबाइल फोन झपट लिया।

लिसिप्रिया कंगुजम ने अपने ट्विटर हैंडल ने जानकारी दी है कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 16B स्थित बेल्लाना स्ट्रीट मार्किट के सामने ‘निराला एस्पायर’ के पास से वो फेसबुक लाइव कर रही थीं, तभी ये घटना हुई। उन्होंने नोएडा पुलिस से मदद माँगी है। हालाँकि, रिप्लाई में लोगों ने चोरों को सही ठहराते हुए कहा है कि बच्चों को मोबाइल फोन नहीं रखना चाहिए। एक व्यक्ति ने लिखा कि फोन चोरी होने के बावजूद आप ट्वीट कर रही हैं, इसका अर्थ है कि आपका हैंडल कोई और चलाता है।

एक व्यक्ति ने तो दिवाली के प्रदूषण पर ज्ञान दे रही लिसिप्रिया कंगुजम को समझाया कि मोबाइल फोन बनाने में कैडमियम, लीड, लिथियम, मर्करी और ब्रोमिनैट जैसे हैवी मेटल्स का इस्तेमाल किया जाता है, ऐसे में पर्यावरण एक्टिविस्ट को इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हालाँकि, DCP सेन्ट्रल नोएडा ने बताया कि आवश्यक कार्यवाही के लिए बिसरख के थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया है। पुलिस ने बताया कि पीड़िता से बातचीत कर घटना की जानकारी ली है और जल्द मामले का पर्दाफाश होगा।

लाइव वीडियो के दौरान लिसिप्रिय कंगुजम को दिवाली पर लाइटिंग से सजाए गए घरों को दिखाते हुए ये कहते देखा जा सकता है कि ये सब अच्छी बात है, लेकिन पटाखे उड़ाना गंदी बात है और वो इसे लेकर उदास हैं। उन्होंने कहा कि ये हमारे पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि ये हवा को प्रदूषित करता है और नॉइज़ पॉल्यूशन से जानवर भी परेशान होते हैं। उन्होंने पूछा कि अगर हवा को प्रदूषित करोगे तो साँस कैसे लोगे?

सिखों के लिए दोगुनी ख़ुशी का त्योहार है दिवाली: भगवान श्रीराम की तरह लौटे थे छठे गुरु भी, 52 राजाओं को जहाँगीर की कैद से छुड़ाने के लिए अपनाई थी तरकीब

बच्चे-बच्चे को पता है कि हम दीपावली अथवा दिवाली का त्योहार इसीलिए मनाते हैं, क्योंकि त्रेता युग में इसी दिन भगवान श्रीराम लंका में रावण का वध कर के वापस अयोध्या लौटे थे। उन्हें 14 वर्ष का वनवास हुआ था, ये भी बताने की ज़रूरत नहीं है। अपने लोकप्रिय राजा का अयोध्या की जनता ने दीप जला कर और आतिशबाजी से स्वागत किया। लेकिन, क्या आपको पता है कि सिखों के लिए दिवाली दोगुने उत्साह का दिन है? ये दिन गुरु हरगोबिंद से जुड़ा हुआ है और ‘बन्दी छोड़ दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है?

आइए, आपको सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जी की कहानी सुनाते हैं। सिख समाज के पाँचवें गुरु अर्जन देव जी को जहाँगीर ने सिर्फ इसीलिए मरवा दिया था, क्योंकि उसे पवित्र गुरु ग्रन्थ साहिब के कुछ अंश मुस्लिम विरोध लगे थे और वो उसे हटाने के लिए तैयार यहीं हुए थे। इस तरह की क्रूर मुगलिया करतूतों के बाद सिख समाज को लगा कि हथियार उठाए बिना काम नहीं चलेगा। अतः, गुरु हरगोबिंद ने भक्ति के साथ-साथ शक्ति पर भी जोर देना शुरू कर दिया।

सन् 1606 में अपने पिता की हत्या के बाद हरगोबिंद जी को काफी कम उम्र में ही गुरु की पदवी स्वीकार करनी पड़ी थी। ये वो समय था, जब सिखों के उत्थान से मुग़ल साम्राज्य को अपनी नींव हिलती हुई महसूस हो रही थी। मात्र 11 वर्ष की उम्र में गुरु बने हरगोबिंद जी अपने साथ दो तलवार रखते थे, जिसे मीरी और पीरी के नाम से जाना गया। मीर से बना है मीरी, अर्थात नेता या शासक। पीर से बना है पीरी, अर्थात आध्यात्मिक गुरु।

गुरु हरगोबिंद ने अपने साथ-साथ 52 राजाओं/राजकुमारों को कैद से मुक्त कराया

अब आप समझ गए होंगे कि ये दोनों तलवार भौतिक विजय और आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का प्रतीक थे। सन् 1612 में जहाँगीर ने उन्हें भी गिरफ्तार करवा दिया था। उन्हें ग्वालियर स्थित एक जेल में रखा गया था। 1614-15 ईस्वी में जिस दिन उन्हें कैद से मुक्त किया गया था, उस दिन दिवाली ही थी। इस दिन को सिख समाज इसके बाद से ‘बन्दी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाने लगा, अर्थात जेल से छूटने के उत्सव के रूप में। जब वो अमृतसर पहुँचे, तो उनका दीप और पटाखों के साथ स्वागत किया गया था।

इसका अर्थ ये कतई नहीं लगाइएगा कि इससे पहले सिख समाज दिवाली नहीं मनाता था। असल में यही तो दिन होता था, जब गुरु की संगत में दूर-दूर के लोग जुटते थे और उनके प्रवचन का आध्यात्मिक लाभ लेते थे। इन पर्व-त्योहारों का सिख धर्म में भी महत्व है। असम में दिवाली के दिन पहुँचे गुरु नानक ने वहाँ के लोगों को उपदेश दिया था। गुरु गोविन्द सिंह ने रामायण की कथा को फिर से लिखा। गुरु हरगोबिंद का वापस आने दोहरी ख़ुशी का कारण बना।

हालाँकि, बाहर भी मुगलों के जासूस उनके पीछे पड़े रहते थे। उन्होंने जहाँगीर की कैद से मुक्त होकर सिख समाज का फिर से नेतृत्व करना शुरू किया। उस जेल में पहले से ही जहाँगीर ने 52 राजाओं और राजकुमारों को कैद कर के रखा था। उन सभी को कैद के दिनों में गुरु के आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ मिला और उन सबने हरगोबिंद साहिब को अपना गुरु माना। लेकिन, इस रिहाई के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है।

जब गुरु गरगोबिन्द ने जहाँगीर के सामने ये माँग रखी कि उनके साथ-साथ उन 52 राजाओं और राजकुमारों को भी छोड़ा जाए, तब बादशाह ने एक शर्त रखी। इस्लामी आक्रांता ने कहा कि गुरु के कपड़े को जितने राजा पकड़ सकेंगे, उतने ही रहा होंगे। गुरु ने भी ऐसा कुर्ता सिलवाया, जिसके 52 हिस्से थे और एक-एक कर सभी राजा बाहर आ गए। जहाँगीर अपनी बेइज्जती की वजह से कुछ नहीं कह सका। गुरु हरगोबिंद के बाद उनके पोते हर राय गुरु बने थे।

जानबूझ कर गुरु हरगोबिंद को पंजाब से दूर ग्वालियर में कैद कर के रखा गया था। वो गुरु हरगोबिंद ही थे, जिन्होंने युवाओं को घुड़सवारी और तलवारबाजी सीखने के लिए आह्वान किया। उन्होंने अपनी सेना बनाई, युवाओं को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने ही 1609 ईस्वी में हरमंदिर साहिब के मुख्य द्वार पर ‘अकाल तख़्त’ की स्थापना की। इसका अर्थ है – सत्य का सिंहासन। समाज की भाई के कार्यों के लिए ये पद सृजित किया गया था।

जहाँगीर ने कैसे करवाई थी गुरु अर्जन देव जी की हत्या

15 अप्रैल, 1563 को पंजाब के तंरतारन स्थित गोयंदवाल जन्मे गुरु अर्जुन देव जी को मुग़ल आक्रांता जहाँगीर के अत्याचारों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपना सिर नहीं झुकाया और न ही अधर्मियों की बात मानी। जहाँगीर हर हाल में सिख गुरु अर्जुन देव को मृत देखना चाहता था, जिसके काई कारण थे। मुगलों को लगता था कि गुरु ग्रन्थ साहिब में इस्लाम को लेकर कुछ गलत बातें लिखी गई हैं, जिन्हें हटाया जाना चाहिए।

जहाँगीर को ये भी लगता था कि गुरु अर्जुन देव जी बागी शहजादा खुसरो की सहायता कर रहे हैं। लेकिन, सबसे बड़ा कारण ये था कि सिख संप्रदाय जिस तरह से आगे बढ़ रहा था, उससे इस्लामी आक्रांता भयभीत हो उठे थे। गुरु अर्जुन देव जी को ‘शहीदों का सरताज’ कहा जाता है। गुरु रामदास की पत्नी बीबी भानी के तीन पुत्र थे – जिनमें सबसे बड़े का नाम पृथ्वी चंद्र था और सबसे छोटे तीसरे पुत्र अर्जुन देव थे। इन दोनों के बीच में जो थे, उनका नाम महादेव रखा गया था।

उन दिनों सिखों के तीसरे गुरु अमरदास गोयंदवाल में ही रहा करते थे। गुरु अर्जुन दास तीनों भाइयों में सबको सबसे ज्यादा योग्य लगते थे और साथ ही उनमें अपने पिता और नाना अमर दास के गुण भी भरे पड़े थे। इस कारण सभी उनसे प्रेम करते थे। उनका विवाह जालंधर जिले के मऊ गाँव के कृष्ण चंद्र की पुत्री गंगा देवी से हुआ था। गंगा देवी की कोख से ही सिखों के छठे गुरु हरगोविंद का जन्म हुआ था। असल में ये उनका दूसरा विवाह था, क्योंकि पहली पत्नी का देहांत हो चुका था और उनकी कोई संतान नहीं हुई थी।

गुरु अर्जन देव जी को पहले रावी नदी के किनारे ले जाया गया। वहाँ एक जलती हुई भट्ठी के ऊपर लोहे की चादर डाली गई, जो काफी गर्म हो उठी थी। उन्हें तपती हुई लोहे की चादर पर बिठा दिया गया और ऊपर से गर्म बालू डाला गया। इस तरह गुरु अर्जुन देव जी को सिख संप्रदाय में ‘प्रथम शहीद’ का दर्जा मिला। इस तरह उन्हें मृत्युदंड दिए जाने के पीछे जहाँगीर के मन में एक और कारण था, वही विचारधारा, जिस पर चल कर आज भी हिन्दू विरोधी हिंसा की जाती है।

गुरु अर्जुन देव जी पर जब शहजादा खुसरो की सहायता का आरोप लगाया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरु के दरबार में आने से किसी को रोका नहीं जा सकता और यहाँ जाति-पाति या धर्म-मजहब का भेदभाव भी नहीं चलता है, ऐसे में अन्य लोगों के समान खुसरो भी गुरु के दरबार में आया था और उसे रोकना गुरु परंपरा के विरुद्ध था। 30 मई, 1606 को उन्हें जहाँगीर के आदेश पर मार डाला गया। वो बलिदान हो गए।