सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें अरशद खान काफिरों (हिंदुओं) को गाड़ देने की धमकी दे रहा है। इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें एक युवक मंदिर में घुसकर शिवलिंग पर पेशाब करते दिख रहा है। उसकी पहचान शोएब के तौर पर हुई है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
शिवलिंग पर पेशाब करने वाला वीडियो उत्तर प्रदेश के मेरठ का है। वायरल वीडियो में एक युवक मंदिर में घुसते और शिवलिंग पर पेशाब करते नजर आता है। मामला मेरठ के थाना सरूरपुर क्षेत्र के गाँव रासना का है। मंगलवार (18 अक्टूबर 2022) की सुबह जब मंदिर में पुजारी पूजा-पाठ के लिए पहुँचे, तो गेट खुला हुआ था। मंदिर के अंदर से बदबू आ रही थी। इसके बाद गाँव के युवक मोहित को बुलाकर सीसीटीवी फुटेज चेक करवाया गया, जिसमें शोएब शिवलिंग पर पेशाब करते हुए देखा गया।
मेरठ पुलिस ने बताया है कि CCTV फुटेज के आधार पर अभियुक्त की पहचान की गई। उसे गिरफ्तार कर जेल में भेज दिया गया है। इस संबंध में थाना सरूरपुर में आरोपित के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जाँच में पाया गया कि घटना में शामिल अभियुक्त नशे का आदी है। नशे में धुत होने के कारण उसने यह कृत्य किया।
प्रकरण के सम्बन्ध में थाना सरूरपुर पर अभियोग पंजीकृत किया गया है,जॉच उपरान्त पाया गया कि घटना में शामिल अभियुक्त नशे का आदी है,जिसके द्वारा नशे की हालत में इस प्रकार का कृत्य किया है, अभियुक्त की पहचान CCTV फुटेज के आधार पर की गयी है। अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
कोलकाता स्थित इस्कॉन ISKCON के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने शिवलिंग पर पेशाब करने का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया है। उन्होंने लिखा, “शोएब ने शिवलिंग पर पेशाब किया। आज हिन्दुओं की स्थिति ऐसी है कि हम सब कुछ नहीं करेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें मुस्तफा अरशद खान नाम का शख्स हिंदुओं को धमकाते हुए दिखाई दे रहा है। इस वीडियो के साथ राधारमण दास ने लिखा, “जब समय आएगा तो वे सभी हिंदुओं का नामो-निशान मिटा देंगे। यह एक इस्लामिक इन्फ्लुएंसर है। इंस्टाग्राम पर इसके 14,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं। मुस्लिम इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि जब उनका समय आएगा तो वे हिंदुओं के साथ क्या करेंगे। हिंदुओं, आप क्या करेंगे?”
Sohaib urinated on a Shivling. The condition of Hindus today is such that we all will do nothing. pic.twitter.com/BVVHQDrmhU
बता दें की हिंदुओं की भावनाओं का आहत करने के लिए शिवलिंग पर पेशाब किए जाने की कई घटनाएँ पूर्व में भी सामने आ चुकी है। मार्च 2021 में आसिफ को शिवलिंग पर पेशाब करते पकड़ा गया था। जुलाई 2019 में इरशाद उर्फ ईरानी ने जहाँगीरबाद में महादेव के मंदिर में शिवलिंग पर पेशाब किया था। प्राचीन शिव मंदिर की पवित्रता को तार-तार करने वाले इरशाद के खिलाफ बजरंग दल के सदस्यों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी, जिसके बाद बुलंदशहर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, वे अपनी जड़ों को तलाश कर उससे जुड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक बार फिर मुस्लिम परिवार के पाँच सदस्यों ने घर वापसी करते हुए हिंदू धर्म अपना लिया है। इस परिवार के लोगों को अब नया हिंदू नाम दिया गया है।
बिजनौर का रहने वाला यह परिवार आठ साल पहले हिंदू धर्म छोड़ इस्लाम अपना लिया था। हालाँकि, समय बीतने के साथ ही इन्हें अपने धर्म, रीत-रिवाज और संस्कारों की याद आई तो वे दोबारा हिंदू धर्म में वापस आ गए। हिंदू धर्म में घर वापसी करने वाले परिवार के मुखिया संदीप सैनी का कहना है कि पहले भी उनका परिवार हिंदू था, अब फिर वापसी की है।
बिजनौर के मुस्लिम परिवार का मुजफ्फरनगर के “योग साधना यशवीर आश्रम” में धर्मांतरण।
मुजफ्फरनगर जिले के बघरा स्थित योग साधना यशवीर आश्रम में एक ही परिवार के पाँच सदस्यों को पूरे विधि-विधान के साथ घर वापसी कराई गई। इस दौरान मोहम्मद अहमद को संदीप सैनी, सानिया को दोबारा सीमा सैनी नाम दिया गया। परिवार के अन्य लोगों के भी उनके पुराने नाम दिए गए।
यशवीर आश्रम के संन्यासी यशवीर ने बताया कि मुस्लिम बना बिजनौर का सैनी परिवार बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को स्वेच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की। वेद मंत्रों के साथ विधि-विधान से उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने आश्रम की परिक्रमा की।
आज बिजनौर के सैनी जाति के 5 मुसलमानो को योग साधना यशवीर आश्रम बघरा मुजफ्फरनगर में यशवीर महाराज के सानिध्य में आचार्य मृगेन्द्र ने शुद्धि यज्ञ कराके हिन्दू धर्म में दीक्षित करके घर वापसी कराई यशवीर आश्रम में अब तक सैकडों मुस्लिमों को हिन्दू बनाया जा चुका है pic.twitter.com/C5fwQHsEYA
घर वापसी के दौरान परिवार के सदस्यों पर गंगाजल का छिड़काव कर उनका शुद्धिकरण किया गया। इस दौरान आश्रम में मौजूद लोगों ने परिवार पर पुष्पवर्षा भी की। इस दौरान स्वामी यशवीर ने कहा कि इलाके के मदरसों में लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जाता है। पुलिस-प्रशासन को इसकी जाँच करनी चाहिए।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने राजस्व पुलिस की व्यवस्था ख़त्म कर के उनकी जगह नियमित पुलिस की व्यवस्था करने का फैसला लिया है। राजस्व पुलिस के संरक्षण में जो इलाके आते थे, अब वो अधिकार नियमित पुलिस को चला जाएगा। ऋषिकेश के एक फार्महाउस में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या के बाद राज्य की भाजपा सरकार ने ये फैसला लिया है।राज्य कैबिनेट के इस निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने भी शीघ्रता से कार्यवाही पूरी करने के लिए कहा है।
अपर मुख्य सचिव गृह राधा रतूड़ी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि राजस्व क्षेत्र में 6 थानों के अलावा 20 चौकियों की स्थापना और पुलिस क्षेत्र के विस्तार का कार्य 6 महीने के अंदर पूरी करने के लिए कहा है। कैबिनेट ने भी यही निर्णय लिया था। पुलिस ने इस सम्बन्ध में प्रस्ताव तैयार कर सरकार को सौंपा शुरू कर दिया है, जिसके तहत चौकियों की स्थापना होगी। 2018 में नैनीताल हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को इसकी सलाह दी थी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, जहाँ धामी सरकार ने बताया कि सभी डीएम-एसपी को इस बाबत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं। इसे राज्य में ‘पटवारी सिस्टम’ के नाम से भी जाना जाता है। हत्या और बलात्कार जैसे मामलों की जाँच और इस सम्बन्ध में कार्रवाई अब नागरिक पुलिस ही करेगी। चरणबद्ध तरीके से पटवारी सिस्टम को ख़त्म किया जाएगा। 12 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया था, जिसका ब्यौरा सुप्रीम कोर्ट में भी पेश किया गया।
अंकिता भंडारी की हत्या के बाद लगातार आरोप लग रहे थे कि राजस्व पुलिस के समक्ष ऐसे मामलों की शिकायतें दर्ज कराने और फिर कार्रवाई में लंबा समय लग जाता है। 161 साल पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत कानूनगो, लेखपाल और पटवारी जैसे राजस्व अधिकारियों को अपराध दर्ज करने और जाँच करने के अलावा पुलिस अधिकारियों की शक्ति और कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं। खास बात ये है कि राजस्व पुलिस को हथियार रखने की अनुमति नहीं है, जिस कारण उन्हें ‘गाँधी पुलिस’ भी कहा जाने लगा था।
उत्तराखंड के लगभग 60% इलाकों में राजस्व पुलिस की ही व्यवस्था लागू थी। 7500 गाँव उनके अधिकार क्षेत्र में आते थे। पहले चरण में इनमें से 1500 गाँव सिविल पुलिस के पास आ जाएँगे। पटवारी व्यवस्था पहाड़ी समाज के लिए काफी पहले से लागू थी। सन् 1861 में अंग्रेजों का पुलिस एक्ट भी यहाँ नहीं लागू हुआ था। अंग्रेजों के कमिश्नर रहे जी.डब्ल्यू. ट्रेल ने पटवारी पुलिस को राजस्व से लेकर अपराध रोकने और टैक्स कलेक्शन तक के अधिकार दे रखे थे और इसके लिए 16 पद सृजित किए थे।
अल्मोड़ा में 1837 और रानीखेत में 1843 में थानों की स्थापना की गई थी। इसके तहत पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार, तहसीलदार, परगनाधिकारी, जिलाधिकारी और कमिश्नर अन्य कार्यों के अलावा पुलिस वाले काम ही करने लगे। तकनीक और हथियारों के अभाव में अब वो ये काम ठीक से नहीं कर पा रहे थे। अंग्रेजों के जमाने में कुमाऊं में 19 परगना और 125 पटवारी क्षेत्र थे, जबकि गढ़वाल में 11 परगना और 86 पटवारी क्षेत्र हुआ करते थे।
हत्या और बलात्कार जैसे गंभीर अपराध इस कारण फाइलों में ही दबे रह जाते थे, ऐसे में उम्मीद है कि संसाधनों से संपन्न नागरिक पुलिस की तैनाती से ये क्रम टूटेगा। काफी पहले के समय में यहाँ ज्यादा अपराध नहीं थे, शायद इसीलिए ये व्यवस्था रही होगी। अब जमाना बदल गया है। जब अंकिता भंडारी के गायब होने की शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई थी, तब तब पटवारी वैभव प्रताप ने कोई कार्रवाई नहीं की। वो चुप रहा और छुट्टी पर चला गया।
उसने मुख्य आरोपित पुलकित आर्य की मदद की थी, जो रिसॉर्ट चलाता था। वो राज्य के पूर्व मंत्री का बेटा है। अंकिता भंडारी के गायब होने की शिकायत पटवारी ने नहीं दर्ज की। कुछ दिनों बाद ये केस रेगुलर पुलिस के पास पहुँचा और कार्रवाई शुरू हुई। पहले पटवारी से रेगुलर पुलिस तक केस आने और कार्रवाई में कई दिन लग जाते थे। पहाड़ों में कम अपराध होने के कारण आई व्यवस्था अब नासूर बन गई थी, इसीलिए धामी सरकार ने इसे हटा दिया।
फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों से संबंधित एक मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) को दिल्ली की एक कोर्ट (Delhi Court) ने राहत दे दी है। ताहिर हुसैन एवं अन्य 9 आरोपितों को न्यायालय ने बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को इमारत में आगजनी करने के आरोप से मुक्त कर दिया है।
हालाँकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने IPC की धारा 147, 148, 149, 427, 120B और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत अन्य अपराधों के मुकदमे पर सुनवाई के लिए इस केस को वापस मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (CMM) के पास भेज दिया।
Breaking: A Delhi Court Discharges former Aam Aadmi Party Councillor #TahirHussain and nine others from the charge of ‘causing mischief by fire or explosive substance with intent to destroy a building’, in a case of 2020 North-East #Delhiriotshttps://t.co/vQjwXhoNEK
दिल्ली पुलिस ने एक FIR कर आरोप लगाया था कि ताहिर हुसैन की घर की छत पर कई दिनों से ईंट और पत्थर जमा किए जा रहे थे। दंगों के दौरान इसी घर की छत से दंगाइयों ने पथराव किया था और पेट्रोल बम फेंके थे। इसके सबूत भी सामने आए थे। इसमें दर्जनों दुकानों और मकानों को आग के हवाले कर दिया गया था।
प्राथमिकी में दिल्ली पुलिस ने जय भगवान नाम के एक व्यक्ति की शिकायत भी जोड़ दी थी। जय भगवान ने कहा था कि दंगों के दौरान उन्मादियों की भीड़ ने उनकी बेटी की शादी के सामान से भरे रिक्शे को भी जला दिया था। इसके कारण उन्हें भारी हानि हुई थी।
सुनवाई के दौरान दिल्ली स्थित कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचल ने पाया कि अचल संपत्ति में आग नहीं लगी थी। ऐसे में भारतीय दंड संहिता की धारा 436 के तहत लगाया गया आगजनी का आरोप नहीं बनता है। इसके साथ ही कोर्ट ने ताहिर हुसैन को अचल संपत्ति में आगजनी के आरोप से मुक्त कर दिया।
बता दें कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी भीषण दंगों वक्त लगातार तीन दिन तक दंगाइयों द्वारा हिंसा की जाती रही। इसमें दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल रतन लाल सहित 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, इस दंगे में सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इसके अलावा, करोड़ों रुपए की संपत्ति का भी नुकसान हुआ था।
अपने बेतुके बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले शायर मुनव्वर राना ने एक बार फिर अजीबोगरीब बयान दिया है। इस बार उन्होंने अपने बयान में अपने माँ-बाप का जिक्र किया है। दरअसल, एबीपी न्यूज के एक रिपोर्टर ने मुनव्वर राना से भाजपा द्वारा पसमांदा सम्मेलन के बारे में सवाल पूछा, जिसके बाद राना ने जवाब देते हुए कहा, “मेरा बाप मुसलमान था, इसकी मैं गारंटी लेता हूँ। लेकिन मेरी माँ भी मुसलमान थी, इसकी गारंटी मैं नहीं लेता।”
उन्होंने कहा कि पसमांदा का मतलब समाज में पिछड़े हुए लोग होते हैं। साथ ही दावा किया कि इस्लाम में पसमांदा का कोई अर्थ नहीं था। मुनव्वर राना का मानना है कि अरब में भी कोई जाति के बारे में नहीं जानता था, लेकिन जब हिंदुस्तान आए तो इस रंग में रंग गए।
इसी दौरान उन्होंने कहा, ”मैं बहुत ईमानदारी से कहता हूँ कि मेरा बाप मुसलमान था, इसकी मैं गारंटी लेता हूँ। लेकिन मेरी माँ भी मुसलमान थीं, इसकी गारंटी नहीं ले सकता। क्योंकि, मेरा फर्स्ट फादर जो इंडिया में आया, चाहे समरकंद, अफ्रीका, अरब या कहीं से भी आया हो, वह फौज के साथ आया था और फौजें बगल में बीवियाँ लेकर नहीं चलतीं। ऐसे में माँ भी मुसलमान थीं, इसकी गारंटी नहीं ले सकता।”
मुनव्वर राना इससे पहले भी अपने बयानोंं के लिए विवादों में रहे हैं। भाजपा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उनकी नापसंदगी जगजाहिर है। उत्तर प्रदेश विधानसभा (Uttar Pradesh Assembly Election) के लिए होने वाली वोटिंग से पहले उन्होंने पलायन का राग अलापा था। उन्होंने कहा था कि अगर प्रदेश में फिर से योगी आदित्यनाथ की सरकार बन जाती है तो वे पलायन कर जाएँगे।
मुनव्वर ने कहा था, “मैं पहले ही कह चुका हूँ कि अगर योगी आएगा तो मैं पलायन कर दूँगा। इस बात को स्पष्ट तौर पर नोट कर लिया जाए।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कारण मुस्लिमों में इतना खौफ है कि कोई बोल नहीं रहा है। उन्होंने कहा, “मुस्लिमों ने अपने घरों में छुरी रखना तक बंद कर दिया कि पता नहीं योगी उनको बंद करवा दे।”
बिहार के पूर्णिया (Purnia, Bihar) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो लव जिहाद (Love Jehad) को लेकर आँखें खोलने वाली है। यहाँ के रहने वाले सोनू आलम के झाँसे में फँसकर धर्मांतरण (Religious Conversion) के बाद निकाह करने वाली की एक लड़की ने आत्महत्या (Suicide) कर ली।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की रहने वाली आरती नाग शौहर आलम की मारपीट और उसके परिजनों की प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इसके पहले उसने पंचायत में भी प्रताड़ना की शिकायत की और इसको लेकर पंचायत भी हुई, लेकिन उसके ससुराल वालों पर इसका असर नहीं हुआ।
पूर्णिया के मोहम्मदपुर गाँव का रहने वाला सोनू आलम बेंगलुरु में मजदूरी करता है। उसने सोशल मीडिया साइट फेसबुक (Facebook) पर छत्तीसगढ़ की रहने वाले जुगनू राम की बेटी आरती नाग को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। धीरे-धीरे दोनों में बातचीत होने लगी।
आरती सोनू आलम के झाँसे में इस तरह फँसी की उसने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लिया और सोनू के साथ भागकर निकाह कर लिया। निकाह के बाद सोनू आरती को लेकर अपने गाँव चम्पानगर ओपी थाना क्षेत्र के गोकुलपुर पंचायत के मोहम्मदपुर आ गया।
मोहम्मदपुर आने के बाद आरती के साथ जुल्म-ओ-सितम का सिलसिला शुरू हुआ। सोनू आलम उसके साथ अक्सर मारपीट करने लगा। इतना ही नहीं, उसके घर वाले भी बात-बात पर आरती के साथ मारपीट करने लगे। उसे इतना जलील और प्रताड़ित किया जाने लगा कि उसका जीना दूभर हो गया।
शौहर और ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर दो महीना पहले आरती ने भागकर गोकुलपुर पंचायत के मुखिया से अपनी आपबीती बताई। पंचायत प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद भी आरती को न्याय नहीं मिला। उसका उत्पीड़न जारी रहा। इसके बाद मंगलवार (18 अक्टूबर 2022) को आरती ने गले में फंदा डालकर आत्महत्या कर ली।
उधर सोनू आलम की अम्मी शाहजहाँ बेगम का कहना है कि आरती एक सप्ताह से तनाव में थी। शाहजहाँ ने पुलिस को बताया, “मैं आरती को अपने मायके जाने के लिए भी कही थी। मंगलवार की सुबह करीब 5 बजे घास लाने अपने खेत चली गई और करीब 7 बजे घास लेकर आई तो घर में आरती गले में फंदा लगा लटकी हुई थी।”
ओपी थाना अध्यक्ष ओम प्रकाश ने बताया घटना की जाँच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का खुलासा हो पाएगा। पुलिस इस एंगल से भी मामले की जाँच कर रही है कि आरती ने खुदकुशी की है या उसकी हत्या करके आत्महत्या का रंग देने की कोशिश की गई है।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुँचकर मृतका के शव को कब्जे में ले लिया और पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। इस घटना के संबंध में आरती की सास शाहजहाँ बेगम ने चम्पानगर ओपी थाने में लिखित सूचना दी है।
अमेरिका के न्यूयार्क से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। यहाँ एक शख्स ने बांग्लादेशी रेस्टॉरेंट में महज इसलिए आग लगा दी, क्योंकि उसे उसका ऑर्डर यानी चिकन बिरयानी नहीं मिला। घटना (1 अक्क्टूबर, 2022) क्वींस इलाके की है और इस संबंध में पुलिस ने एक फुटेज जारी किया है। घटना के कुछ दिनों बाद पुलिस ने आरोपी चोफेल नोरबु को गिरफ्तार किया था, लेकिन उसे अब रिहा कर दिया गया है।
फोक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा कैमरे के फ़ुटेज में एक व्यक्ति को रेस्टॉरेंट के स्टोर के सामने एक ज्वलनशील तरल डालते देखा जा सकता है। कुछ सेकंड बाद, आरोपित व्यक्ति झुककर आग जलाता है, जिससे विस्फोट हो जाता है। वीडियो में दिख रहा है कि संदिग्ध के जूते आग की चपेट में आ जाते हैं और वह वहाँ से भाग जाता है। आग की लपटों से रेस्टॉरेंट की खिड़कियों और एयर-कंडीशनिंग यूनिट को नुकसान पहुँचा, जिसकी कीमत करीब 1500 डॉलर (1.24 लाख रुपए) है। अच्छी बात यह रही है घटना के वक्त कोई व्यक्ति वहाँ मौजूद नहीं था।
आग लगने की घटना के बाद पुलिस ने आरोपित नोरबु को हिरासत में ले लिया। ‘न्यूयार्क पोस्ट’ के मुताबिक, आरोपित नोरबु ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा, “मैंने शराब पी हुई थी। मैं बांग्लादेशी रेस्टॉरेंट में खाना खाने गया था। वहां मैंने चिकन बिरयानी का ऑर्डर दिया। लेकिन स्टाफ मेरा ऑर्डर लेकर नहीं आया।। इसके बाद मुझे गुस्सा आया और मैं आपे से बाहर हो गया। मैं वहाँ काले कपड़े पहनकर फिर से वापस आया और गैसोलीन से आग लगा दी।”
नोरबु का इससे पहले कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। इसीलिए गिरफ्तारी (14 अक्टूबर, 2022) के अगले दिन ही एक समझौते के बाद उसे बिना जमानत के बिना ही रिहा कर दिया गया। क्वींस काउंटी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में कोई बड़ी सज़ा का प्रावधान नहीं है। हालाँकि, नोरबु को दिसम्बर में न्यायालय के समक्ष फिर से पेश होना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने देश की स्थानीय भाषाओं के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि अंग्रेजी सिर्फ संचार का माध्यम है, बौद्धिक होने का पैमाना नहीं। प्रधानमंत्री ने बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को गाँधीनगर जिले के अडलाज शहर में गुजरात सरकार के ‘मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ पहल का शुभारंभ करने के बाद यह बात कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले अंग्रेजी भाषा के ज्ञान को बौद्धिक होने की निशानी माना जाता था, जबकि अंग्रेजी भाषा केवल संवाद का माध्यम है। उन्होंने कहा, “5जी सेवा स्मार्ट सुविधाओं, स्मार्ट क्लासरूम और स्मार्ट शिक्षण से आगे जाएगी। यह हमारी शिक्षा प्रणाली को अगले स्तर पर ले जाएगी।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में देश ने 5G युग में प्रवेश किया है, हमने इंटरनेट की पहली जनरेशन से लेकर 4G तक की सेवाओं का उपयोग किया। अब देश में 5G बड़ा बदलाव लाने वाला है। आज 5G, स्मार्ट सुविधाएँ, स्मार्ट क्लासरूम, स्मार्ट टीचिंग से आगे बढ़कर हमारी शिक्षा व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाएगा। अब वर्चुअल रियलिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स की ताकत को भी स्कूलों में अनुभव किया जा सकेगा।”
पीएम मोदी ने कहा, “गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए मैंने गाँव-गाँव जाकर, सभी लोगों से अपनी बेटियों को स्कूल भेजने का आग्रह किया था। परिणाम ये हुआ है कि आज गुजरात में करीब-करीब हर बेटा-बेटी स्कूल पहुँचने लगा है, स्कूल के बाद कॉलेज जाने लगा है।”
गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए मैंने गांव-गांव जाकर, सभी लोगों से अपनी बेटियों को स्कूल भेजने का आग्रह किया था।
परिणाम ये हुआ है कि आज गुजरात में करीब-करीब हर बेटा-बेटी स्कूल पहुंचने लगा है, स्कूल के बाद कॉलेज जाने लगा है।
उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए आगे कहा कि शिक्षा, पुरातन काल से ही भारत के विकास की धुरी रही है। उन्होंने कहा कि हम स्वभाव से ही ज्ञान के समर्थक रहे हैं और हमारे पूर्वजों ने ज्ञान एवं विज्ञान में पहचान बनाई है।
पीएम मोदी ने यह भी कहा, “बीते दो दशकों में गुजरात में शिक्षा के क्षेत्र में जो परिवर्तन आया है, वो अभूतपूर्व है। 20 साल पहले गुजरात में 100 में से 20 बच्चे स्कूल ही नहीं जाते थे और जो बच्चे जाते थे। उनमें से कई बच्चे आठवीं तक पहुँचते-पहुँचते स्कूल ही छोड़ देते थे। बेटियों की स्थिति तो और खराब थी। केंद्र सरकार ने पूरे देश में साढ़े 14 हजार से अधिक पीएम स्कूल बनाने का फैसला किया है। ये स्कूल पूरे देश में नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के लिए मॉडल स्कूल होंगे।”
दिल्ली के शादीपुर में नितेश चौधरी नाम के युवक की हत्या के बाद जिस स्थान का सबसे ज्यादा जिक्र आ रहा वो है मस्जिद वाला मोहल्ला। न सिर्फ हमले में घायल अलोक दुबे की शिकायत में मस्जिद लिखी हुई है बल्कि मृतक के घर वालों के बयानों में भी मस्जिद का जिक्र आया। नितेश चौधरी के परिवार ने मस्जिद वाले मोहल्ले में तमाम तरह के अपराध होने और खुद पुलिस के वहाँ जाने में डरने का आरोप लगाया था। ऑपइंडिया की टीम ने सोमवार (17 अक्टूबर 2022) को उस मोहल्ले का दौरा किया, जहाँ पर वो मस्जिद भी मौजूद है।
सैयद कासिफ की सूर्या इलेक्ट्रिकल्स नाम से दुकान
मुख्य सड़क से पटेल नगर और शादीपुर मेट्रो स्टेशन के लगभग बीच में पिलर संख्या 215 के सामने मंदिर वाली गली से हम उस मोहल्ले की तरफ बढ़े, जिसे इलाके के लोग मुस्लिम बहुल कहते हैं। अभी हम सड़क से लगभग 70 मीटर ही आगे बढ़े होंगे कि बेसमेंट में बनी ‘सूर्या इलेक्ट्रिकल्स’ नाम की दुकान पर हमारी नजर गई। यहाँ जब हमने इस दुकान के बोर्ड पर देखा तो उस पर सैयद कासिफ का नाम लिखा हुआ था। हमने कुछ देर वहाँ कासिफ से मिलने का इंतज़ार किया लेकिन जब वो नहीं दिखे तो हम आगे बढ़ गए।
सैयद कासिफ की ‘सूर्या इलेक्ट्रिकल’
जहाँ नितेश का कत्ल हुआ, वहाँ पैरामिलिट्री तैनात
सैयद कासिफ की दुकान से होते हुए हम उसी गली से होते हुए आगे बढ़े तो बस्ती और वहाँ लोगों की आबादी और सघन होती चली गई। कुछ ही देर बाद सीरत टेलर्स की दुकान के आगे आते ही हमने वो गली दिखाई दी जहाँ नितेश की हत्या अदनान, हमज़ा और तमाम अन्य हमलावरों की भीड़ ने की थी। गली के ठीक मुहाने पर पैरामिलिट्री ITBP के लगभग 4 जवान और दिल्ली पुलिस की 2 महिला कॉन्स्टेबल तैनात दिखीं।
जिस गली में हत्या हुई, वहाँ आम आदमी पार्टी के पोस्टर भी काफी संख्या में लगे दिखे। घटनास्थल के आस-पास दुकानदार और खरीददार पूरी तरह से सामान्य हालात में दिखे और बाजार में चहल-पहल थी।
घटनास्थल
रास्ते में नॉनवेज की कई दुकानें
जिस जगह पर नितेश चौधरी और उसके साथियों पर प्राणघातक हमला हुआ था, वहाँ से हम आगे उस मस्जिद की तरफ बढ़े जिसका जिक्र पूरी घटना में कई बार आया। रास्ते में हमें नॉनवेज की कई दुकानें दिखीं, जिस पर काफी भीड़ लगी हुई थी। मस्जिद के आसपास का क्षेत्र मुस्लिम बहुल कहा जाता है। इस मुस्लिम बहुल क्षेत्र के मुहाने पर पैरामिलिट्री के जवान खड़े दिखे, लेकिन जब हम इस मोहल्ले के अंदर गए तब हमने पुलिस की तैनाती नहीं दिखी।
यहाँ बकरे काट कर टाँगे गए थे। अधिकतर लोग इस्लामी वेशभूषा में दिखाई दिए। इस स्थान पर भी हालात पूरी तरह से सामान्य थे और लोग रोजमर्रा के कामों में लगे थे। हालाँकि इस क्षेत्र में गंदगी बाकी रंजीत नगर से अधिक दिखी।
घटनास्थल और आस-पास तैनात सुरक्षा बल
T- पॉइंट पर है हरे रंग की बड़ी मस्जिद
लगभग 5 मिनट पैदल चल कर आखिरकार हम उस मस्जिद के सामने पहुँच ही गए, जिसका जिक्र कई बार घटना में आया है। यह हरे रंग की है और एक तिराहे नुमा जगह के टी-पॉइंट पर बनी हुई है। मस्जिद के सामने वाली सड़क के किनारे पर कुछ निर्माण कार्य जैसा चलता दिखा। दुकानदारों में एक वर्ग विशेष ही अधिकतर दिखाई दिए। सड़क की हालात देख कर ऐसा लगा कि कहीं न कहीं उस पर अस्थाई अतिक्रमण हुआ है।
मस्जिद और आस-पास बनी दुकानें
घटनास्थल से पैदल सामान्य चाल से चलते हुए हमें मस्जिद तक पहुँचने में लगभग 5 मिनट लगे थे। एक अनुमान के मुताबिक, अगर वहाँ से कोई दौड़ता हुआ आएगा तो उसको अधिकतम 3 मिनट का समय लगेगा। घायल अलोक दुबे द्वारा लगाए गए आरोप में भी यह कहा गया है कि हमलावर कुछ ही समय में मस्जिद वाले मोहल्ले से उन्हें और नितेश को मारने पहुँच गए थे।
X, Y और Z ब्लॉक हैं मुस्लिम बहुल
रंजीत नगर के जिस स्थान को मुस्लिम बहुल कहा जाता है उसमें X, Y और Z ब्लॉक प्रमुख हैं। मृतक नितेश के परिवार और पड़ोसियों ने इस पूरे क्षेत्र में अपराध का बोलबाला होने का आरोप लगाया था। नितेश के परिजनों के मुताबिक, यहाँ रात भर दुकाने खुली रहती हैं और कोरोना के समय लगे लॉकडाउन का भी यहाँ महामारी के नियमों का पालन नहीं किया गया था।
XYZ मोहल्ले के आसपास का दृश्य
अस्थाई टिन शेड में शुरू हुई थी पहली बार नमाज़
कैमरे पर न आने और अपने नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक स्थानीय निवासी ने हमें X, Y और Z ब्लॉक का इतिहास बताया। उसने कहा कि जब तुर्कमान गेट से विस्थापित मुस्लिमों को यहाँ फ़्लैट दे कर बसाया गया था, तब उनकी इबादत के लिए कोई मस्जिद नहीं थी। हमें बताया गया कि तब स्थानीय मुस्लिमों ने एक अस्थाई टिन शेड रख कर नमाज़ पढ़नी शुरू कर दी थी जो आज भी लगभग उसी हालत में मौजूद है।
हमने बात कर रहे स्थानीय निवासी ने कहा कि मस्जिद 80 दशक के आस-पास के बनी थी। हमें बताया गया कि मस्जिद जिस जगह बनी है, उसके आस-पास कभी पार्क हुआ करता था। स्थानीय निवासी ने हमें बताया कि इस मस्जिद के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने पार्क के अन्य हिस्से में मरीजों के इलाज के लिए सरकारी डिस्पेंसरी बनवा दी। उन्होंने हमें बताया कि डिस्पेंसरी और मस्जिद सटी हुई है। हालाँकि, ऑपइंडिया इन दावों की पुष्टि नहीं करता।
खाने की चीजों पर दुकानदार की अजीब हरकत
जब ऑपइंडिया की टीम मस्जिद के आस-पास मौजूद थी, तब उसी के सामने वाली सड़क पर एक दुकान के अंदर दुकानदार ने अजीब हरकत की। मस्जिद के सामने एक दुकान बेकरी और खाने-पीने के सामान की थी। हमारे कैमरे में रिकार्ड वीडियो में दुकानदार पहले तो अपना मुँह बिकने के लिए काउंटर पर रखे गए सामान के एकदम पास ले गया और बाद में अचानक ही ऊपर उठा लिया।
दिल्ली के नीतेश चौधरी हत्याकांड में ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान हम उस मोहल्ले में गए जहां से हमलावरों के आने का आरोप लगा है. यहीं की एक मस्जिद का भी जिक्र शिकायत कॉपी में है.
दुकानदर की इस हरकत को वहाँ मौजूद एक अन्य व्यक्ति देख रहा था, जिसने उस पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी।
नाले और पार्कों की जमीन पर अवैध कब्ज़े
रंजीत नगर के वार्ड पार्षद तेजराम के मुताबिक, कुल 8 पार्क उनकी जानकारी में उस क्षेत्र के अंदर हैं। पार्कों पर अतिक्रमण करते हुए छतों से छज्जे निकाल दिए गए हैं। इसी के साथ उन्होंने कहा कि उन्होंने नाले का पक्का निर्माण करवाया था जिसको कब झुग्गियों में रहने वालों ने कब्ज़ा कर रहा है। अवैध कब्ज़े की स्थिति को तेजराम ने काफी चिंताजनक बताया है और कहा है कि XYZ ब्लॉक की तरफ सरकार की कई जमीनें अवैध कब्ज़े में हैं।
घटना में जिक्र हुई मस्जिद के बारे में उन्होंने बताया कि उसके आसपास गलियों में भी अवैध कब्ज़े हुए हैं। तेजराम के मुताबिक, X Y Z ब्लॉक के पास मदरसा भी चल रहा है।
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या में आरोपित दीपक टीनू दोबारा से गिरफ्तार कर लिया गया है। टीनू को दिल्ली पुलिस ने राजस्थान में जाकर पकड़ा। टीनू कुछ दिन पहले मानसा पुलिस की हिरासत से फरार हुआ था। पहले माना जा रहा था कि टीनू विदेश चला गया है। लेकिन बाद में खबर आई कि वह राजस्थान के गाँव में छिपा बैठा है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने वहाँ जाकर उसे पकड़ लिया।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के स्पेशल सीपी ने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई-गोल्डी बराड़ गैंग का दीपक टीनू मानसा पुलिस की कस्टडी से भागा था। उसका मूसेवाला हत्याकांड में हाथ था। पुलिस ने उसकी कई राज्यों में तलाशी की। अब उसे राजस्थान के अजमेर के केकड़ी से पकड़ा गया है। उसके पास से 5 ग्रेनेड, 2 पिस्तौल बरामद हुई हैं।
Deepak Tinu, member of Lawrence Bishnoi-Goldy Brar gang, escaped from Mansa police custody. He had a role in Moose Wala's murder. Our teams took action in various states. He was arrested from Kekri, Ajmer, we recovered 5 grenades & 2 pistols from him:Spl CP, Delhi Police Spl Cell pic.twitter.com/gJRTtajflE
रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 अक्टूबर को सीआईए इंचार्ज टीनू को उसकी गर्लफ्रेंड से मिलाने के लिए सरकारी आवास पर लेकर गए थे। यहीं वह मौका देख फरार हो गया। पुलिस ने उसकी बहुत तलाश की। एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले यात्रियों का पता लगवाया। लेकिन कुछ पता नहीं चला। पंजाब पुलिस ने टीनू को पकड़ने के लिए अलर्ट जारी किया हुआ था। इस बीच दिल्ली पुलिस को उसके राजस्थान में छिपे होने की खबर आई। उन्होंने फौरन टीम बनाकर उसे राजस्थान में जाकर पकड़ लिया।
उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका नहीं था जब दीपक टीनू पुलिस की गिरफ्त से फरार हुआ था। जानकारी के मुताबिक पहले भी वह कुल 4 बार पुलिस के हाथ लगने के बाद फरार हो चुका था। दीपक साल 2017 में अंबाला सेंट्रल जेल में सलाखों के पीछे था। तब, वह एक पुलिस अधिकारी की आँखों में काली मिर्च का स्प्रे कर फरार हो गया था।
मालूम हो कि टीनू उन 24 आरोपितों में से एक है जिनके नाम सिद्धू मूसेवाला की हत्या में सामने आए हैं। उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल है। चार्जशीट में बताया गया है कि वह मूसेवाला के हत्यारों को लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करने में शामिल था।