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‘अंपायर ने धोखा दिया, BCCI वाले चला रहे हैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट’: हार से तिलमिलाए Pak फैंस ने भारत पर लगाया ‘रनों की डकैती’ का आरोप, कहा – हमें लूट लिया

रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को टी20 विश्वकप में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैच भारत ने पाकिस्तान को 4 विकेट से करारी शिकस्त दी है। एक समय टीम इंडिया मुश्किल में फँस चुकी थी और मैच बेहद रोमांचक हो गया था। हालाँकि, आखिरी ओवर में पाकिस्तानी गेंदबाज मोहम्मद नवाज ने नो बॉल फेंक दी, जो मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा। मोहम्मद नवाज की गेंद को अंपायर द्वारा नो बॉल करार देने पर पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमी सोशल मीडिया पर आँसू बहा रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में हुए इस मैच में टीम इंडिया के जीत के हीरो रहे विराट कोहली और हार्दिक पांड्या 20वें ओवर में बल्लेबाजी कर रहे थे। इस ओवर में टीम इंडिया को जीत के लिए 16 रनों की जरूरत थी। गेंद पाकिस्तान के मोहम्मद नवाज के हाथों में थी। उन्होंने पहली ही गेंद पर हार्दिक पांड्या को बाबर आजम के हाथों कैच कराकर मैच में पाकिस्तान की पकड़ मजबूत कर दी थी।

इसके बाद, बल्लेबाजी करने आए दिनेश कार्तिक ने एक रन लेकर विराट कोहली को स्ट्राइक दे दी। इसके बाद कोहली ने तीसरी गेंद पर 2 रन लिए और फिर मोहम्मद नवाज ने अगली गेंद विराट कोहली की कमर से काफी ऊपर फेंक दी जिस पर कोहली ने छक्का जड़ते हुए टीम इंडिया की वापसी करा दी। यह गेंद कमर से काफी ऊपर थी, जिसका मतलब साफ था कि यह नो बॉल है।

चूँकि, ऐसी स्थिति में गेंद को नो बॉल करार देने की जवाबदेही लेग अंपायर की होती है। लेकिन, उन्होंने इसे नो बॉल नहीं दिया। ऐसे में, मेन अंपायर ने गेंद नो बॉल करार दी। इसके बाद पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम समेत कई प्लेयर अंपायर से आकर बहस करने लगे। हालाँकि, इसके बाद भी अंपायर ने अपना फैसला नहीं बदला और गेंद नो बॉल ही रही। यह नो बॉल ही मैच का बड़ा टर्निंग प्वाइंट रही।

टीम इंडिया के हाथों पाकिस्तान को मिली करारी शिकस्त के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट फैंस सोशल मीडिया पर नो बॉल को चीटिंग बताते हुए आँसू बहाते दिख रहे हैं। इसके कारण ट्विटर पर ‘नो बॉल’ और ‘चीटिंग’ ट्रेंड कर रहा है। इसको लेकर ट्विटर यूजर @teepusahab ने ट्वीट कर कहा “वह नो बॉल नहीं थी। कोहली के बोल्ड होने के बाद के उन 3 रन की गिनती नहीं की जानी चाहिए। हमें लूटा गया है।”

@ikarachiwala नामक ट्विटर यूजर ने लिखा “विराट कोहली क्रीज से बाहर थे और गेंद उनकी कमर की ऊँचाई पर थी, गेंदबाज भी स्पिनर था, इसलिए गेंद को कमर की ऊँचाई के नीचे होना था। यह एक गलत नो बॉल थी और अगली ही गेंद पर विराट क्लीन बोल्ड हो गए। अगर फ्री हिट के कारण वह नॉट आउट हो जाते हैं, तो एक डॉट बॉल होनी चाहिए।”

@Gotoxytop1 नामक यूजर ने टीम इंडिया की जीत के बाद विराट कोहली के बयान “मेरे पास कोई शब्द नहीं है” को कोट करते हुए लिखा “एक फ्री नो बॉल और एक बॉल के 3 अतिरिक्त रन मिलने के बाद वास्तव में आपके पास शब्द नहीं होंगे। क्योंकि आपके पिता बीसीसीआई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट चलाते हैं और जब चाहें डकैती कर सकते हैं।”

एक ने ट्विटर यूजर ने लिखा “नवाज और पक्षपाती ‘अंपायर’, पाकिस्तान के लिए कभी अच्छे साबित नहीं हुए। वह नो बॉल नहीं थी।”

@Naya_Pakistan नामक ट्विटर यूजर ने अंपायर्स को दोषी ठहराते हुए लिखा, “अंपायर के धोखे से पाकिस्तान यह मैच हार गया। नो बॉल नहीं थी।”

वहीं, इस पर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने नो बॉल पर रोने वालों पर व्यंग्य करते हुए ट्वीट किया, “भारत-पाकिस्तान मैच में “नो बॉल” के फैसले के बारे में रोने वाले कुछ लोग बिल्कुल चुनाव हारने के बाद ईवीएम के बारे में रोने वालों की तरह लगते हैं।”

‘राम के अस्तित्व पर लगाए जाते थे प्रश्नचिह्न, 8 साल में देश ने हीनभावना की बेड़ियों को तोड़ा’: सरयू तट पर बोले PM मोदी – अयोध्या हमारी महान संस्कृति का प्रतिबिंब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवाली की पूर्व संध्या पर रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को अयोध्या में रामलला विराजमान के दर्शन किए, राम मंदिर के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक करने के साथ-साथ सरयू तट पर दीपोत्सव के भी साक्षी बने। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज अयोध्या जी, दीपों से दिव्य हैं, भावनाओं से भव्य हैं, आज अयोध्या नगरी, भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के स्वर्णिम अध्याय का प्रतिबिंब है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमने त्रेता की उस अयोध्या के दर्शन नहीं किए, लेकिन प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से आज हम अमृतकाल में अमर अयोध्या की अलौकिकता के साक्षी बन रहे हैं। हम उस सभ्यता और संस्कृति के वाहक हैं, पर्व और उत्सव जिनके जीवन का सहज-स्वाभाविक हिस्सा रहे हैं। दीपावली के दीपक हमारे लिए केवल एक वस्तु नहीं है। ये भारत के आदर्शों, मूल्यों और दर्शन के जीवंत ऊर्जापुंच हैं। ‘जगत प्रकास्य प्रकासक रामू।’ – अर्थात, भगवान राम पूरे विश्व को प्रकाश देने वाले हैं। वो पूरे विश्व के लिए एक ज्योतिपुंज की तरह हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि मध्यकाल और आधुनिक काल तक भारत ने कितने अंधकार भरे युगों का सामना किया है, जिन झंझावातों में बड़ी-बड़ी सभ्यताओं के सूर्य अस्त हो गए, उनमें हमारे दीपक जलते रहे, प्रकाश देते रहे और फिर उन तूफानों को शांत कर उद्दीप्त हो उठे। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय था, जब राम के बारे में, हमारी संस्कृति और सभ्यता के बारे में बात करने तक से बचा जाता था। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाए जाते थे। साथ ही कहा कि बीते 8 वर्षों में देश ने हीनभावना की इन बेड़ियों को तोड़ा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान राम ने अपने वचन में, अपने विचारों में, अपने शासन में, अपने प्रशासन में, जिन मूल्यों को गढ़ा, वो सबका साथ-सबका विकास की प्रेरणा हैं और सबका विश्वास-सबका प्रयास का आधार हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या भारत की महान सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब है। बकौल पीएम मोदी, राम अयोध्या के राजकुमार थे, लेकिन आराध्य वो पूरे देश के हैं। प्रधानमंत्री ने समझाया कि उनकी प्रेरणा, उनकी तप-तपस्या, उनका दिखाया मार्ग, हर देशवासी के लिए है और भगवान राम के आदर्शों पर चलना हम सभी भारतीयों का कर्तव्य है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भगवान राम, मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं। उन्होंने समझाते हुए कहा कि मर्यादा, मान रखना भी सिखाती है और मान देना भी, और मर्यादा, जिस बोध की आग्रही होती है, वो बोध कर्तव्य ही है। पीएम ने कहा कि हमारे यहाँ जब भी समाज ने कुछ नया किया, हमने एक नया उत्सव रच दिया। उन्होंने कहा कि सत्य की हर विजय के, असत्य के हर अंत के, मानवीय संदेश को हमने जितनी मजबूती से जीवंत रखा, इसमें भारत का कोई सानी नहीं है। उन्होंने कहा कि दीप से दीपावली तक, यही भारत का दर्शन है, यही भारत का चिंतन है, यही भारत की चिरंतर संस्कृति है।

चली गई सलमान रुश्दी की एक आँख, एक हाथ भी हो गया अपाहिज: लेखक के गर्दन-छाती और शरीर पर 18 गंभीर जख्म, इस्लामी कट्टरवादी ने किया था हमला

2 महीने पहले न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में भाषण देने से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय लेखक सलमान रुश्दी पर एक इस्लामी कट्टरपंथी ने हमला किया था। अब उनके एजेंट ने जानकारी दी है कि सलमान रुश्दी की एक आँख चली गई है। इतना ही नहीं, वो अब सिर्फ अपने एक ही हाथ का इस्तेमाल कर पाएँगे। 75 वर्षीय लेखक को 80 के दशक से ही उनकी पुस्तक ‘The Satanic Verses’को लेकर ईरान से धमकियाँ मिलती रही हैं।

उन्हें उनके गले और कमर में चाकू घोंपा गया था। उन पर 12 अगस्त, 2022 को ‘Chautauqua Institution’ में हमला हुआ था, जहाँ वो ‘कला में आज़ादी’ विषय पर आख्यान देने गए थे। अब तक ये अस्पष्ट था कि उन पर जख्मों का क्या असर हुआ है और इलाज में क्या चल रहा है। उनके घाव काफी गंभीर हैं। उनके गर्दन में तीन जगह गंभीर जख्म हैं। उनका एक हाथ हमेशा के लिए अपाहिज हो गया है, क्योंकि उस हाथ में Nerves को काटने पड़े।

उनकी छाती और शरीर में इसके अलावा भी 15 अन्य जख्म हैं। उनके एजेंट ने बताया कि ये एक जानलेवा हमला था। फ़िलहाल वो अस्पताल में ही हैं, लेकिन उनके एजेंट ने इसकी पुष्टि नहीं की है। लेकिन उसका ये कहना है कि सबसे राहत वाली बात ये है कि वो ज़िंदा रहेंगे। सलमान रुश्दी ने पूर्व में अपने ऊपर इस तरह के हमले की आशंका जताई थी। कई फतवे जारी होने के बाद उन्हें डर था कि कहीं से कोई एक व्यक्ति आकर अचानक से उन पर हमला कर सकता है।

उनके एजेंट ने कहा कि ऐसी घटनाओं को आप टाल नहीं सकते, क्योंकि ये एकदम अचानक से होता है और बेतुका होता है। उसने अंग्रेजी गायब जॉन लेनन की हत्या से इसकी तुलना की, जिन्हें 1980 में 40 की उम्र में गोली मार दी गई थी। सलमान रुश्दी के एजेंट एंड्रू वैली ने कहा कि दुनिया उथल-पुथल से गुजर रही है और अमेरिकी में भी यही हाल है। हालाँकि, उन्होंने जिस जिस इस्लामी कट्टरवाद ने रुश्दी का ये हाल किया, उसकी आलोचना की बजाए राष्ट्रवाद और दक्षिणपंथ के बढ़ने पर चिंता जताई।

‘अब्बू ने अम्मी को कुछ पिलाया, इसके बाद वो उठी ही नहीं’: बच्ची के बयान के बाद पुलिस ने कब्र से निकाला शव, दहेज़ के लिए प्रताड़ित करता था फसीज कुरैशी

झारखंड के वासेपुर में एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी की शातिराना ढंग से हत्या करने का आरोप लगा है। यहाँ, जैनब खातून नामक की महिला के घर वालों ने उसके शौहर फसीज कुरैशी पर दहेज की लालच में हत्या करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। वहीं, मृतक की बेटी का कहना है कि उसके अब्बू ने अम्मी को कुछ पिलाया था जिसके बाद उसकी मौत हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार के भोजपुर में रहने वाली जैनब खातून के मायके वालों को उसके ससुराल वालों ने फोन कर बताया था कि जैनब की मौत रोड एक्सीडेंट में हो गई है। इसके बाद, मृतक जैनब खातून के मायके वाले झारखंड के वासेपुर से आकर अपनी बेटी का शव धनबाद ले आए और यहाँ लाकर उन्होंने उसकी लाश को कब्रिस्तान में दफना दिया।

इसके बाद, जैनब खातून की 10 साल की बेटी समैया के एक बयान ने पूरी कहानी को पलट कर दिया। समैया ने जैनब खातून के मायके वालों को बताया है कि एक दिन उसके अब्बू यानी फसीज कुरैशी ने उसकी अम्मी (जैनब) को कुछ पिलाया जिसके बाद वह नहीं उठी। समैया ने कहा, “मौत के एक दिन पहले अब्बू ने बोतल में कुछ मिलाकर अम्मी को पिलाया था। इसके बाद वो सो गईं और उठी ही नहीं।”

समैया के यह बताने के बाद जैनब के मायके वालों ने इस मामले में जैनब के शौहर फसीज कुरैसी समेत 15 लोगों पर दहेज प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। जिसके बाद, कोर्ट और एसपी के आदेश पर मामले की जाँच के लिए पाँच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है जो इस मामले की जाँच कर रही है। फिलहाल, मृतक जैनब खातून का शव कब्रिस्तान से निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। फिलहाल, पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है। यह रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बताया जा रहा है कि धनबाद जिले के वासेपुर में रहने वाले कलीमुल्लाह ने साल 2010 में अपनी बेटी जैनब खातून की शादी बिहार के भोजपुर में रहने वाले फसीज कुरैशी से की थी। मृतक जैनब खातून के घरवालों का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही फसीज कुरैशी उसके घर वाले दहेज के लिए जैनब को परेशान करने लगे। इस बात की जानकारी जब जैनब के भाई को मिली तो उसने अपनी बहन को सुखी देखने के लिए पटना स्थित एक जमीन उसके ससुराल वालों के नाम कर दी।

जैनब के घरवालों ने आरोप लगाया है कि जमीन देने के बाद भी फसीज कुरैशी के घर वालों का लालच खत्म नहीं हुआ था। कुछ दिन बाद ही उन लोगों ने चार लाख रुपए और एक कार की माँग जैनब खातून के घरवालों के सामने रख दी थी। लेकिन, अब तक की गई माँगे पूरी करने वाले जैनब के परिवार वाले यह पूरी नहीं कर सकते थे।

इस दौरान, जैनब को उसके ससुराल वाले लगातार परेशान कर रहे थे। लेकिन, उसके मायके पक्ष वाले बने हुए रिश्ते को तोड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए, उन लोगों ने कई बार पंचायत कर जैनब का घर बसाने की कोशिश की। लेकिन, फसीज कुरैशी और उसके घरवाले दहेज की लालच के आगे अंधे हो चुके थे।

अभिषेक बच्चन को ट्विटर यूजर ने कहा बेरोजगार, अभिनेता ने दिया जवाब – बुद्धि और रोजगार का कोई संबंध नहीं

बॉलीवुड एक्टर अभिषेक बच्चन ने उन्हें ट्रोल करने की कोशिश करने वाले एक सोशल मीडिया यूजर को जवाब दिया है। ट्विटर पर एक यूजर ने अभिषेक बच्चन के एक ट्वीट पर कमेंट करते हुए कहा था कि वह बुद्धिमान नहीं हैं और बेरोजगार हैं। इस ट्वीट का जवाब देते हुए अभिषेक ने कहा बुद्धि और रोजगार का कोई संबंध नहीं है।

दरअसल, इस पूरी बातचीत की शुरुआत ट्विटर पर WION की पूर्व पत्रकार पालकी शर्मा के एक ट्वीट से हुई। पालकी ने धनतेरस की शुभकामनाएँ देते हुए अखबारों में बड़ी संख्या में छपे विज्ञापनों का मुद्दा उठाया था। पालकी ने लिखा, “धनतेरस की शुभकामनाएँ। आज की खबरों तक पहुँचने के लिए आपको कितने पन्ने पलटने पड़े? क्या आप सप्लीमेंट से मेन पेज बता सकते हैं? आपके अखबार के कितने फ्रंट पेज हैं? क्या दीवाली के विज्ञापन आपके खरीदारी निर्णयों को प्रभावित करते हैं? (एक दोस्त के लिए पूछ रही हूँ।)।”

अभिषेक बच्चन ने इस ट्वीट का जवाब देते हुए पूछा, “क्या लोग अब भी अखबार पढ़ते हैं?” इसके बाद, ‘CJain (@CJain3018)’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने अभिषेक बच्चन के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “बुद्धिमान लोग पढ़ते हैं। आप जैसे बेरोजगार लोग नहीं।”

Cjain नामक ट्विटर यूजर के इस कमेंट के बाद अभिषेक बच्चन ने लिखा, “ओह, देखता हूँ। इस जानकारी के लिए धन्यवाद। वैसे, बुद्धि और रोजगार का कोई संबंध नहीं हैं। उदाहरण के लिए आप को ही देखें। मुझे यकीन है कि आप के पास नौकरी है और मुझे यह भी यकीन है (आपके ट्वीट को देखते हुए) कि आप बुद्धिमान नहीं हैं।”

अभिषेक बच्चन के जवाब के बाद, कई अन्य ट्विटर यूजर्स ने उनकी तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, “अच्छा कहा जूनियर बच्चन। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी को नीचा दिखाने की कोशिश करने वाले कुछ लोगों के दुस्साहस से मैं हैरान नहीं हूँ। दु:खद हकीकत।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “अभिषेक बच्चन, आप इतना लोड क्यों लेते हैं? बोलने दीजिए जिसको जो बोलना है। किसी के कुछ बोलने से आपका कुछ नही बिगड़ेगा क्योंकि आप एक बहुत ही बेहतरीन इंसान हैं। हमेशा पैसा, पॉवर, सक्सेस होना बड़ी बात नहीं है, अगर लक साथ दे तो वो कोई भी पा सकता है। मगर, अच्छा इंसान होना बड़ी बात है जो आप हैं।”

बता दें, अभिषेक बच्चन आखिरी बार फिल्म ‘दसवीं’ में यामी गौतम और निम्रत कौर के साथ नजर आए थे। फिल्म की स्ट्रीमिंग 7 अप्रैल, 2022 को नेटफ्लिक्स और जियो सिनेमा पर शुरू हुई थी। इस फिल्म की कहानी शुरू होती है गंगा राम चौधरी (अभिषेक बच्चन) से जो ‘हरित प्रदेश’ के आठवीं पास मुख्यमंत्री है। लेकिन, टीचर भर्ती घोटाले में उनको जेल हो जाती है, इस जेल में इस मंत्री को मिलती है आईपीएस अफसर ज्योति देसवाल (यामी गौतम) जो बेहद कठिन स्वभाव की होती हैं।

फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है और अब इस अनपढ़ मंत्री को अपना पुराना सपना दसवीं पास करने का मन करता है। और जेल से अपने शिक्षा का अधिकार लेते हुए वह दसवीं की तैयारी करता है और सफल होता है। यही इस फिल्म की पूरी कहानी है। 

‘भगवान राम की कृपा से ही मिलता है उनके दर्शन का सौभाग्य’: अयोध्या में PM मोदी ने लिया मंदिर निर्माण का जायजा, किया श्रीराम का राज्याभिषेक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को दीपावली की पूर्व संध्या पर अयोध्या पहुँचे, जहाँ उन्होंने रामलला की पूजा-अर्चना की और राम मंदिर के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने साधु-संतों की मौजूदगी में रामलला की आरती उतारी। फिर उन्होंने गर्भगृह की परिक्रमा भी की। पीएम मोदी ने इसके बाद सरयू नदी के किनारे दीपोत्सव में शिरकत की। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनके साथ मौजूद रहे।

पूरी अयोध्या में इस अवसर पर 50 लाख दीये जगमगा रहे हैं। हजारों की संख्या में लोग इन कार्यक्रमों का साक्षी बन रहे हैं। भगवान राम के राज्याभिषेक का भी कार्यक्रम हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। ‘पुष्पक विमान’ (हेलीकॉप्टर) से भगवान राम, माँ सीता और लक्षमण की वेशभूषा में कलाकार आए। सीएम योगी ने उनकी अगवानी की और तिलक लगा कर आरती उतारी। ‘धर्मध्वज’ के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले दीया जलाया।

रामकथा पार्क और सरयू तट पर PM का स्वागत किया गया। शैलेंद्र शास्त्री की अगुवाई में 51 वैदिकों की टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार किया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक नजर आया। रामलला के दर्शन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेब से निकाल कर रुपए भी दानपत्र में डाले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोगों ने अयोध्या को वीरान बना दिया था, लेकिन पीएम मोदी ने राम मंदिर का भूमिपूजन कर एक नया अध्याय शुरू किया।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि भगवान राम की कृपा से ही उनके दर्शन और अभिषेक का सौभाग्य मिलता है। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम का अभिषेक होता है तो हमारे भीतर भगवान राम के आदर्श, मूल्य और दृढ़ हो जाते हैं। बकौल पीएम मोदी, आजादी के अमृतकाल में भगवान राम जैसी संकल्प शक्ति, देश को नई ऊँचाई पर ले जाएगी। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने वचन में, अपने विचारों में, अपने शासन में, अपने प्रशासन में जिन मूल्यों को गढ़ा – वो सबका साथ-सबका विकास की प्रेरणा हैं और सबका विश्वास-सबका प्रयास का आधार हैं।

विराट का तूफ़ान, T20 विश्व कप के मैच में भारत से हारा पाकिस्तान: मेलबर्न में भारत का शानदार आगाज़, दिवाली से पहले कोहली की आतिशी पारी

मेलबर्न में T20 विश्व कप के पहले मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 4 विकेट से मात दे दी। विराट कोहली ने 53 गेंदों में 4 छक्कों और 6 चौकों की मदद से 82 रन बनाए, जबकि हार्दिक पंड्या ने 37 गेंदों पर 2 छक्कों और 1 चौके की मदद से 40 रनों की पारी खेली। भारत को जीत के लिए अंतिम ओवर में 16 रन चाहिए थे। अंतिम ओवर की पहली ही गेंद पर हार्दिक पंड्या आउट हो गए, जिसके बाद विकेटकीपर दिनेश कार्तिक को उतरना पड़ा। हालाँकि, जब 2 गेंदों पर 2 रन चाहिए थे तब वो स्टंप आउट हो गए। फिर रविचंद्रन आश्विन स्ट्राइक पर आए।

पाकिस्तानी टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और दूसरे ही ओवर में अर्शदीप सिंह ने कप्तान बाबर आजम को चलता किया। मध्य प्रदेश के गुना में जन्मे अर्शदीप सिंह घरेलू क्रिकेट में पंजाब की तरफ से खेलते रहे हैं। चौथे ओवर में उन्होंने सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान को भी चलता किया। हालाँकि, इफ्तिखार अहमद ने इसके बाद पारी को संभाल लिया और 34 गेंदों में 4 छक्कों और 2 चौकों की मदद से 51 रनों की अर्धशतकीय पारी खेल डाली।

गुजरात के लेफ्ट एआरएम ऑर्थोडॉक्स स्पिनर अक्षर पटेल मैच में जब अपना एकमात्र ओवर लेकर आए तो 12वें ओवर में उन्हें 21 रन लगे। ये सभी रन इफ्तिखार ने ही मारे। लेकिन, 13वें ओवर में मोहम्मद शमी ने उन्हें चलता किया। 14वें ओवर में हार्दिक पंड्या का कमाल चला। उन्होंने शादाब खान और हैदर अली के रूप में 2 बल्लेबाजों को पवेलियन वापस भेजा। 16वें ओवर में उन्होंने मोहम्मद नवाज को आउट किया। इसके बाद अर्शदीप सिंह ने आसिफ अली को वापस भेजा।

हालाँकि, तीसरे नंबर पर उतरे शान मसूद ने एक तरफ से मोर्चा संभाले रखा और पाकिस्तान को 159 के स्कोर तक पहुँचाया। अंत में शाहीन अफरीदी ने 8 गेंदों पर 16 रनों की पारी खेल कर उनका साथ दिया। जवाब में इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज केएल राहुल मात्र 4 रन बना कर नसीम शाह की गेंद पर चलते बने। रोहित शर्मा ने भी इतने ही रन बनाए और चौथे ओवर में हैरिस रउफ का शिकार बने।

भारतीय टीम की पारी शुरू से ही लड़खड़ाती हुई नजर आई और सूर्यकुमार यादव भी कोई कमाल नहीं दिखा सके। 10 गेंदों पर 15 रन बना कर वो राउफ का ही शिकार बने। अक्षय पटेल को चौथे नंबर पर उतारने का एक्सपेरिमेंट काम नहीं आया और वो 2 रन पर ही रन आउट हो गए। इसके बाद हार्दिक पंड्या ने विराट कोहली के साथ मिल कर पारी को संभाला।

‘संकल्प है मेरा… कभी कोई परेशानी नहीं आने दूँगा’ : कोरोना काल में जो बच्चे हुए अनाथ, उनके ‘मामा’ बन झूमे CM चौहान, डांस देख लोगों ने कहा- आपके होते कौन अकेला

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार (23 अक्टूबर 2022) को कोरोना महामारी के दौरान अनाथ बच्चों के साथ दीवाली मनाई है। सीएम चौहान के साथ उनकी पत्नी साधना चौहान भी थीं। इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी ने बच्चों के साथ जमकर डांस किया। साथ ही, बच्चों को सीएम बाल आशीर्वाद योजना के तहत 5-5 हजार रुपए के चेक भी सौंपे हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित मुख्यमंत्री आवास में आयोजित दीवाली के इस रंगारंग कार्यक्रम में सीएम शिवराज ने बच्चों के साथ दीवाली मनाकर उनका हौसला बढ़ाया है। इस मौके पर, सीएम शिवराज ने बच्चों से कहा है कि मामा का घर मस्ती करने के लिए होता है। इसलिए, खूब मस्ती करो और दीवाली मनाओ। किसी भी बच्चे को निराश होने और चिंता करने की जरूरत नहीं हैं।

कोविड-19 के कारण अनाथ हो चुके बच्चों के साथ दीवाली मनाते हुए मुख्यमंत्री ने ‘नदिया चले-चले रे धारा, तुझको चलना होगा…’ गाना भी गाया। उनके गाने पर बच्चे झूम रहे थे। बच्चों को नाचता देख वह खुद भी मंच से उतरकर नीचे आ गए और उनके साथ डांस करने लगे। इसके बाद, उन्होंने अपनी पत्नी साधना सिंह चौहान को भी बुला लिया और वह भी नाचती हुई दिखाई दीं।

खुद को मध्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे का मामा बताने वाले सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्यक्रम का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार जीना इसी का नाम है। मैंने संकल्प लिया है कि इन बच्चों के जीवन में कभी भी कोई परेशानी नहीं आने दूँगा। यह मामा व पूरे मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी है। मेरे बच्चों, तुम्हारी हर जरूरत तुम्हारा मामा पूरी करेगा।”

यही नहीं, इस कार्यक्रम के दौरान, सीएम शिवराज ने अधिकारियों को कोविड में अनाथ बच्चों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इन व्हाट्सएप ग्रुप में ही ये बच्चे अपनी समस्या बताएँगे। साथ ही, सीएम ने अनाथ बच्चों के लिए साल में एक बार खेल ओर सांस्कृति कार्यक्रम की प्रतियोगिता आयोजन करने का भी ऐलान किया है।

अनाथ बच्चों के साथ दीवाली मनाने को लेकर ट्विटर यूजर्स ने सीएम शिवराज सिंह चौहान की तारीफ की है। मोनू सिंह राठौर नामक यूजर ने लिखा “अनाथ बच्चों के साथ खुशियाँ इस प्रकार बाँटी जाती हैं। यह मामा जी का राज है। तुम सुखपूर्वक, आनंद के साथ अपना जीवन सुगमता से व्यतीत करो, यही तुम्हारे मामा शिवराज का संकल्प है।”

बृजेश जैन नामक यूजर ने लिखा “सीएम शिवराज सिंह चौहान का डांस देखिए। बच्चों के साथ मस्ती भरा डांस करते हुए मामा सीएम।”

वहीं, आकाश चंद साहू नामक यूजर ने ट्वीट कर कहा “मुझे लगता है आज मामा श्री दिल से हँसे हैं। बहुत बहुत धन्यवाद मामा श्री शिवराज सिंह चौहान जी।”

विकास सिंह राजपूत नामक यूजर ने ट्विटर पर लिखा “मामा के होते भला कौन अकेला है। बहुत सराहनीय, शिवराज सिंह चौहान जी।”

पहले Meta.. फिर Tek Fog: भारी फजीहत के बाद द वायर ने पोर्टल से हटाईं झूठी और मनगढ़ंत रिपोर्ट, सफाई में कहा- जाँच अब भी जारी है

वामपंथी मीडिया पोर्टल द वायर ने अपनी साइट से मेटा और टेक फॉग पर फैलाई झूठी रिपोर्टों को वापस ले लिया है। मेटा को लेकर फर्जी दावे करने पर पिछले दिनों द वायर की खूब फजीहत हुई थी। इसके बाद उन्होंने आंतरिक समीक्षा करने का निर्णय लिया और अंत में रिपोर्ट्स की सीरीज को रोकते हुए इन्हें वापस ले लिया।

द वायर द्वारा इन रिपोर्ट्स को वापस लेने का मतलब यह है कि उसने स्वीकार कर लिया है कि जो दावे किए गए थे उसको साबित करने के लिए उसके पास कोई सबूत नहीं है। साथ ही, यह भी कि ‘मेटा वर्सेज द वायर’ मामला पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत था।

द वायर का कहना है कि इस मामले की ‘जाँच’ अभी भी जारी है। इस जाँच में उन्होंने पाया कि वे अपनी ‘रिपोर्टिंग टीम’ द्वारा उपयोग किए गए सोर्स का वेरिफिकेशन करने में असमर्थ हैं। द वायर ने कहा कि उपयोग किए गए कंटेंट में सब कुछ सामान्य नहीं था। इसमें, उसके रिसचर्स द्वारा मेटा के एंडी स्टोन और माइक्रोसॉफ्ट के उज्ज्वल कुमार द्वारा कथित रूप से भेजे गए ईमेल का वेरिफिकेशन न कर पाना भी शामिल है।

द वायर ने इन ‘ईमेल्स’ के आधार पर कई रिपोर्ट्स की थीं। द वायर ने मेटा अधिकारी के कथित ईमेल से यह साबित करने की कोशिश की थी कि अमित मालवीय इंस्टाग्राम को लेकर मेटा से कहीं अधिक पॉवरफुल हैं और द वायर की ‘स्टोरी’ 100 फीसदी सच है। यही नहीं, माइक्रोसॉफ्ट के अधिकारी के कथित ईमेल ने से यह वेरिफिकेशन किया गया था कि पहला ईमेल वेरिफाई है। हालाँकि, मेटा के एंडी स्टोन और माइक्रोसॉफ्ट के उज्जवल कुमार दोनों ने ही ईमेल लिखने की बात से इनकार कर दिया और कहा कि द वायर की पूरी कहानी मनगढ़ंत है।

तमाम फर्जी दावे करने के बाद अब द वायर ने कहा है कि चूँकि, इन दोनों व्यक्तियों ने इस तरह के ईमेल का स्पष्ट रूप से खंडन किया है, इसलिए अब इससे जुड़ी रिपोर्ट्स को वापस लेना उचित है। वामपंथी पोर्टल द वायर ने यह भी कहा है “अभी भी पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं। जिसमें यह संभावना भी शामिल है कि जानबूझकर द वायर को गलत सूचना देने या धोखा देने की कोशिश की गई थी।”

द वायर ने एक अन्य सिक्योरिटी एक्सपर्ट के एक ईमेल का उपयोग करते हए दावा किया था कि उन्होंने मेटा के ईमेल को वेरिफाई किया था। हालाँकि, बाद में कनिष्क करण नामक सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने कहा था कि उन्होंने ऐसे ईमेल नहीं भेजे थे और यह सब मनगढ़ंत है। द वायर की स्टोरी में भी कनिष्क करण का नाम नहीं है।

द वायर ने कहा, “संपादकीय पर्यवेक्षण में चूक के साथ-साथ संपादकों की जिम्मेदारियों की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि सोर्स के आधार पर होने वाली सभी प्रकार की रिपोर्टिंग की पुष्टता प्रमाणित करने के लिए ज़रूरी प्रक्रियाओं को लागू किया जा सके।”

दिलचस्प बात यह है कि द वायर अब अपनी ‘रिपोर्टिंग टीम’ को फर्जी रिपोर्ट्स के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि इसके संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन को कुछ स्टोरीज में सह-लेखक के रूप में दिखाया गया था। यानी कि संपादक भी ‘रिपोर्टिंग टीम’ का हिस्सा थे।

द वायर ने यह भी कहा “यह हमारे मेटा कवरेज में शामिल तकनीकी टीम द्वारा की गई पिछली रिपोर्टिंग की गहन समीक्षा भी करेगा। साथ ही उस प्रक्रिया के पूरा होने तक रिपोर्ट्स को पब्लिक डोमेन से हटा दिया जाएगा।” 

याद दिला दें कि सोशल मीडिया में हेरफेर करने को लेकर भाजपा की क्षमता के बारे में इसी तरह के अजीबोगरीब दावों वाली एक और स्टोरी ‘टेक फॉग’ इस साल की शुरुआत में पब्लिश की गई थी जिनके ऊपर भी द वायर ने एक्शन लिया है।

टेक फॉग एप के नाम पर झूठ

दिलचस्प बात ये है कि मेटा और टेकफॉग- दोनों ही स्टोरीज पर देवेश कुमार ‘प्राइमरी टेक्निकल एक्सपर्ट’ थे। इन दोनों स्टोरीज पर एक जैसे दावे और एक जैसी ही खामियां सामने आई। द वायर ने दावा किया था कि ‘टेक फॉग’ नाम का रहस्यमयी ऐप बीजेपी को ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सएप आदि जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सभी सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने की अनुमति देता है। साथ ही यह ऐप एक क्लिक से दर्जनों अकाउंट्स बना और हटा सकता है। द वायर ने दावा किया कि बीजेपी सोशल मीडिया ट्रेंड को हाईजैक कर सकती है और ऐप का इस्तेमाल करने वाले पत्रकारों को भी टारगेट किया जा सकता है।

नेटिज़न्स ने मेटा स्टोरी की तरह ‘टेक फॉग’ स्टोरी में भी बड़े पैमाने पर खामियों को उजागर किया था। वह स्टोरी भी पूरी तरह से तथाकथित ऐप के ‘स्क्रीनशॉट’ पर निर्भर थी। ‘टेक फॉग’ स्टोरी में भी द वायर के पास कोई भी पुख्ता सबूत नहीं थे। मेटा स्टोरी की ही तरह, टेक फॉग स्टोरी पर भी कई टेक्निकल एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाए थे।

द वायर ने मेटा पर स्टोरीज को हटाने के बाद अपनी टेक फॉग से जुड़ी तीन स्टोरीज को भी साइट से हटा लिया है। हालाँकि ऐप को लेकर बनाई वीडियो अब भी द वायर पर है। इस वीडियो में सोफी झांग, बिली पेरिगो, रॉबर्ट बैप्टिस्ट, तरुणिमा, प्रभाकर वी आनंद और सागरिका घोष शामिल थे।

टेक फॉग और मेटा दोनों झूठ पर आधारित रिपोर्ट

उल्लेखनीय है कि द वायर ने ‘मेटा’ और ‘टेक फॉग’ दोनों स्टोरीज में समान झूठ फैलाते हुए बीजेपी को बदनाम करने की कोशिश की। वहीं, मेटा जैसी दिग्गज कंपनी की भी निंदा करते हुए माइक्रोसॉफ्ट तक को इस मामले में घसीट लाए थे। जिसके बाद, द वायर के फर्जी ‘सबूतों’ की गहनता से जाँच हुई।  वहीं टेक फॉग में उन्होंने बीजेपी के साथ ही भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयरचैट बदनाम किया था। मेटा स्टोरी के सामने आने के बाद शेयरचैट ने पहले ही द वायर से टेक फॉग स्टोरी को हटाने का आग्रह किया था।

दिवाली पर देश में खतरा बन छाया ‘सितरंग’, बंगाल और ओडिशा में अलर्ट जारी: बिहार-झारखंड में भी होगा असर, बंगाल की खाड़ी से बढ़ रहा चक्रवात

मौसम विभाग ने चक्रवात सितरंग के कारण अगले 12 घंटों में बंगाल, ओडिशा सहित कई राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही तेज आँधी और तूफान आ सकता है। चक्रवाती तूफान के कारण धन-जन की होने वाली हानि को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है।

इस दौरान 60-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएँ चल सकती हैं। साल 2018 में बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवाती तूफान ‘तितली’ के बाद यह पहला तूफान है। इसलिए ओडिशा, बंगाल और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों को विशेष रूप से सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

पूर्वी मध्य बंगाल की खाड़ी में बना दबाव उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया है। दबाव का केंद्र पोर्ट ब्लेयर से लगभग 580 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम, सागर द्वीप से 700 किलोमीटर दक्षिण में और बारिसल (बांग्लादेश) से 830 किलोमीटर दक्षिण में था।

इसके कारण बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और त्रिपुरा में भारी बारिश के साथ तेज हवाएँ चलने की आशंका जाहिर की गई है। IMD ने मछुआरों को सलाह दी है कि वे मध्य बंगाल की खाड़ी के गहरे समुद्र क्षेत्र में न जाएँ।

IMD ने कहा है, “साइक्लोन सितरंग का केंद्र निम्न दबाव वाले क्षेत्र बंगाल की पूर्व-मध्य खाड़ी से सटे दक्षिण-पूर्व में है। यह 23 अक्टूबर की सुबह तक पूर्व-मध्य और इससे सटे बंगाल की दक्षिण-पूर्वी खाड़ी पर बड़ा असर डाल सकता है। 24 अक्टूबर की सुबह तक सितरंग के धीरे-धीरे उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने और बंगाल की मध्य खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान में तेज होने की संभावना है।”

क्या होता है चक्रवात

साइक्लोन शब्द ग्रीक भाषा के साइक्लोस (Cyclos) से बना है। इसका अर्थ होता है साँप की कुंडली। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में ट्रॉपिकल साइक्लोन (उष्णकटिबंधीय आँधी) समुद्र में कुंडली मारे साँप की तरह दिखाई देते हैं। 62 किमी/घंटे तक वाले ट्रॉपिकल स्टॉर्म कहलाते हैं। यदि हवा की रफ्तार 120 किमी/घंटे पहुँच जाती है तो ये चक्रवात बन जाते हैं।

चक्रवात समुद्र में कम दबाव के बाद बनते हैं और गर्म होकर ऊपर उठते हुए गोलाकार घुमते हुए एक घेरा बनाते हुए आगे बढ़ते हैं। जब ये चक्रवात जमीन पर पहुँचते हैं तो अपने तेज हवाओं के साथ भारी बारिश लेकर आते हैं। चक्रवात के रास्ते में आने वाले पेड़-पौधे, जीव-जंतु और घरों तक को तबाही का सामना करना पड़ता है।

स्टॉर्म को साइक्लोन, हरिकेन और टाइफून एक ही होते हैं और इन्हें ट्रॉपिकल साइक्लोन भी कहा जाता है। अटलांटिक और उत्तर-पश्चिम महासागरों में बनने वाले साइक्लोन हरिकेन कहलाते हैं। उत्तर-पश्चिम प्रशांत महासागर के साइक्लोन को टाइफून कहा जाता है।

दक्षिण प्रशांत महासागर और हिंद महासागर में उठने वाले तूफान साइक्लोन कहलाते हैं। इसी वजह से भारत के आसपास के इलाकों में आने वाले समुद्री तूफान साइक्लोन कहलाते हैं। वहीं, समुद्र के बजाय धरती पर बनने वाले चक्रवात को टॉरनेडो कहा जाता है और यह सबसे ज्यादा अमेरिका में आते हैं।

कैसे रखे जाते हैं नाम

दुनिया भर में साइक्लोन के नाम 18वीं सदी तक कैथोलिक संतों के नाम पर रखने का रिवाज। था। उसके बाद 19वीं सदी में महिलाओं के नाम पर भी इसके नाम रखे जाने लगे। इसके बाद 1979 से साइक्लोन के नाम में पुरुषों के नाम को भी जोड़ा गया।

साल 2000 से विश्व मौसम संगठन (WMO) और यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर द एशिया पैसिफिक (ESCAP) ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के तूफानों के नामकरण का एक तरीका निकाला। साइक्लोन के नाम रखने का काम दुनिया भर में मौजूद 6 रीजनल स्पेशलाइज्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर्स (RSMCS) और 5 ट्रॉपिकल साइक्लोन वॉर्निंग सेंटर्स (TCWCS) करते हैं।

6 रीजनल स्पेशलाइज्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर्स (RSMCS) में भारतीय मौसम विभाग (IMD) भी शामिल है। IMD इस रीजन के बंगाली की खाड़ी और हिंद महासागर में आने वाले चक्रवात से संबंधित एडवायजरी 13 देशों को जारी करता है।

हिंद महासागर के इलाके में आने वाले चक्रवात के नामकरण को लेकर साल 2004 में बने फॉर्मूले के तहत इलाकों में आने वाले साइक्लोन के नाम रखने के फॉर्मूले पर 2004 में सहमति बनी थी। इसके तहत हर साल साइक्लोन के नाम वर्णानुक्रम के तहत आने वाले देश तय करेंगे। एक नाम का दोबारा इस्तेमाल कम से कम 6 साल बाद ही हो सकता है।

आने वाले साइक्लोन का नाम सितरंग थाईलैंड ने तय किया है। इसके बाद UAE और उसके बाद यमन करेगा। इस रीजनल में जो 13 देश शामिल हैं, उनके नाम हैं- भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और यमन।

साल 1970 में आए साइक्लोन का नाम भारत ने भोला रखा था। यह अब तक के सबसे खतरनाक चक्रवातों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि इस दौरान 3 लाख से 5 लाख लोगों की मौत हुई थी। बता दें कि जिन चक्रवातों की गति 65 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक होती है, सिर्फ उन्हीं का नामकरण किया जाता है।