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किशनगंज में 7वीं के प्रश्न-पत्र में कश्मीर को फिर बताया अलग देश, जिले के 37 स्कूलों में रविवार की बजाए जुमे को मिलती है छुट्टी

बिहार (Bihar) के शिक्षा विभाग की एक करतूत सामने आई है, जिसमें उसने कश्मीर (Kashmir) को भारत से अलग एक स्वतंत्र देश बताया है। मुस्लिम बहुल बिहार के सीमावर्ती जिले किशनगंज में सातवीं कक्षा के लिए आयोजित अर्धवार्षिक परीक्षा में अंग्रेजी के प्रश्नपत्र में कश्मीर को स्वतंत्र देश बताया गया है।

बिहार शिक्षा बोर्ड द्वारा सरकारी स्कूलों के कक्षा 7 के प्रश्नपत्र के अनुसार, कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक अलग देश है। छात्रों से परीक्षा में पूछा गया कि पाँच देशों- चीन, नेपाल, इंग्लैंड, कश्मीर और भारत के लोगों को क्या कहा जाता है।

गौरतलब है कि किशनगंज जिले के माध्यमिक विद्यालयों में सर्व शिक्षा अभियान (Sarv Shiksha Abhiyan) के तहत परीक्षा आयोजित की जा रही है। यह परीक्षा बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (BEPC) द्वारा आयोजित की जाती है। स्कूल के हेड टीचर एसके दास ने कहा कि ‘क्वेश्चन पेपर’ बिहार एजुकेशन बोर्ड से आया है।

बिहार में इस कश्मीर को भारत को अलग देश दिखाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले साल 2017 में भी इस तरह का मामला प्रकाश में आया था। इसी सवाल को उस समय भी पूछा गया था। इसके बाद काफी बवाल मचा था। इसके बाद बोर्ड ने इसे मानवीय भूल बताकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की थी।

इस मामले में जिलाधिकारी ने DDC की अध्यक्षता में जाँच शुरू की है। जाँच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर यह गलती किस स्तर पर हुआ है। स्थानीय स्तर पर प्रश्न पत्र तैयार करने में ऐसे सवाल कैसे पूछा गया। कहीं पुराने सवाल को उठाकर फिर से नए सत्र में पूछे जाने के कारण यह चूक तो नहीं हुई।

पाँच साल बाद फिर वही गलती होने पर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली JDU-RJD गठबंधन सरकार पर हमला बोला है। घटना सामने के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि प्रश्न ही बताता है कि बिहार सरकार और उसके पदाधिकारी कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानते हैं।

संजय जायसवाल ने कहा कि इसका सबूत सातवीं कक्षा का बिहार शिक्षा परियोजना परिषद का प्रश्न पत्र है। बच्चों के दिमाग में यह बात डालने की कोशिश की जा रही है कि जिस प्रकार चीन, इंग्लैंड, भारत, नेपाल एक देश हैं, वैसे ही कश्मीर भी एक अलग देश है।

किशनगंज जिला के भाजपा अध्यक्ष सुशांत गोप ने इसे घोर निंदनीय बताते हुए कहा कि गठबंधन सरकार तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मन में भारत और कश्मीर को अलग दिखाने का प्रयास किया गया है और भूल वश नहीं हुआ, बल्कि नीतीश कुमार की सरकार ने साजिश के तहत किया है। गोप ने कहा कि कश्मीर के लिए कितनी माँओं की गोदी सूनी हो चुकी हैं, फिर भी नीतीश कुमार सरकार द्वारा इस तरह का कृत्य किया जा रहा है।

बीजेपी युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष अंकित सिंह ने कहा कि इस मामले से केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिसने भी इस तरह का प्रश्न पत्र तैयार किया है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है।

भाजपा नेताओं ने कहा कि मामले से पार्टी को अवगत कराया जाएगा कि किशनगंज में ही ऐसा क्यों हो रहा है? बता दें कि हाल ही में जिला के कई सरकारी स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को अवकाश घोषित कर दिया गया था। मुस्लिम बहुल इस जिले के 37 स्कूलों में अभी भी रविवार की जगह शुक्रवार को अवकाश हो रहा है।

वहीं, AIMIM के नेता शाहिद रब्बानी ने कहा कि यह प्रिंटिंग मिस्टेक हो सकता है। इसमें सरकार को दोष देना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि यह गलती भूल वश हुई या जानबूझकर की गई है। यह जानबूझकर की गई है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

देश में ‘सनातन धर्म की हुकूमत’ का डर दिखाने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे बने कॉन्ग्रेस के नए अध्यक्ष: लगातार 9 बार रहे हैं विधायक, 3 बार बने सांसद

गाँधी परिवार के वफादार मल्लिकार्जुन खड़गे कॉन्ग्रेस पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। उन्होंने केरल के नेता शशि थरूर को हराया। अब उन्होंने सोनिया गाँधी की जगह ली है। केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ने कहा है कि अब पार्टी में उनके किरदार और जिम्मेदारी पर नए अध्यक्ष निर्णय लेंगे। चुनाव में अनियमितता के आरोप भी लगे हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक से आते हैं। वो लोकसभा और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं।

बुधवार (19 अक्टूबर, 2022) को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के लिए हुए चुनाव की मतगणना हुई। इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत हुई। पछले दो दशक में इस पद को सँभालने वाली गाँधी परिवार से बाहर के वो पहले व्यक्ति होंगे। जहाँ मल्लिकार्जुन खड़गे को 7897 वोट मिले, वहीं शशि थरूर मात्र 1072 वोट ही प्राप्त कर सके। चुनाव में कुल 9385 वोट पड़े थे। 2019 लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था।

हाल ही में मल्लिकार्जुन खड़गे का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वो कहते दिखे थे, “साढ़े चार कदम भी नहीं चले और हमसे पूछ रहे हैं कि क्या किया। अगर मोदी जी को देश में ऐसे ही शक्ति मिलेगी तो समझो फिर इस देश में सनातन धर्म और आरएसएस की हुकूमत आएगी।” ये वीडियो 2019 लोकसभा चुनाव के समय का था। 16 फरवरी, 2021 से खड़गे राज्यसभा सांसद हैं। वो कर्नाटक विधानसभा में भी नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं।

उन्होंने पहली बार 1972 में गुलबर्ग में स्थित गुरमिटकल विधानसभा क्षेत्र से पहली बार जीत दर्ज की थी और विधायक बने थे। 1976 में वो मंत्री बने। 1978 में फिर से जीत करने के बाद उन्हें दोबारा राज्य में मंत्री पद मिला। वो 1980 में फिर मंत्री बने। 1983 में बतौर विधायक हैट्रिक लगाई। इस तरह 1989, 1994, 1999, 2004 और 2008 में भी वो विधायक बने। 2009 और 2014 में वो सांसद बने, लेकिन 2019 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

‘बेटी का ख्याल रखना’: केदारनाथ हेलीकॉप्टर क्रैश से पहले पायलट ने कहा था, एक बर्थडे गर्ल के थे अंतिम शब्द – पापा, आपसे कभी बात नहीं करूँगी…

उत्तराखंड के केदारनाथ में मंगलवार (18 अक्टूबर, 2022) को एक हेलीकॉप्टर क्रैश (Kedarnath Helicopter Crash) होने से पायलट समेत 7 लोगों की मौत हो गई। खराब मौसम के कारण हुए इस हादसे में हेलीकॉप्टर के पायलट अनिल कुमार (57), उर्वी बराड़ (25), कृति बराड़ (30), पूर्वा रामानुज (26), प्रेम कुमार वी (63), सुजाता (56) और कला (60) ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पायलट अनिल कुमार मुंबई के अंधेरी इलाके में रहते थे। उनकी एक बेटी है, जिससे वह बहुत प्यार करते थे।

उन्होंने इस हादसे से एक दिन पहले ही अपनी पत्नी शिरीन आनंदिता को फोन करके कहा था, “मेरी बेटी का ख्याल रखना। उसकी तबीयत ठीक नहीं है।” वहीं, इस हादसे में जान गँवाने वाली गुजरात की कृति बराड़ का मंगलवार को 30वाँ जन्मदिन था। वह नहीं जानती थीं कि उनके जन्मदिन पर ही उनकी मौत हो जाएगी। उन्होंने केदारनाथ से अपने पिता कमलेश को भावनगर में फोन किया था और लंबी बातचीत की थी।

कृति ने अपने पिता से मजाक करते हुए कहा था कि उन्होंने सबसे उसे विश क्यों नहीं किया? वह उनसे नाराज है और अब कभी भी बात नहीं करेगी। लेकिन, उन्हें क्या पता था कि वह सच में अपने पिता से दोबारा कभी भी बात नहीं कर पाएँगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पायलट की पत्नी आनंदिता पेशे से लेखिका हैं। उन्होंने बताया, “आखिरी बार उनके पति ने सोमवार (17 अक्टूबर 2022) को बेटी का हालचाल जानने के लिए फोन किया था। उनकी बेटी फिरोजा की तबियत ठीक नहीं थी, इसलिए उन्होंने मुझे उसकी देखभाल करने के लिए कहा था।” आनंदिता को किसी से कोई शिकायत नहीं है। उनके मुताबिक, यह एक दुर्घटना है और पर्वतीय राज्यों में अक्सर खराब मौसम का सामना करना पड़ता है।

पायलट मूल रूप से पूर्वी दिल्ली के शाहदरा इलाके के रहने वाले हैं। वह पिछले 15 सालों से मुंबई में रह रहे थे। बताया जा रहा है कि कृति एक स्कूल टीचर थीं। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। हेलिकॉप्टर दुर्घटना में तमिलनाडु के तीन अन्य तीर्थयात्रियों और पायलट के साथ जान गँवाने वाली 25 वर्षीय उर्वी बराड़ कृति की चचेरी बहन और 26 वर्षीय पूर्वा रामानुज उनकी दोस्त थी।

बंगाल में हिन्दुओं के घरों में फेंके गए थे पेट्रोल बम, अब गृह मंत्रालय ने NIA को सौंपी जाँच: पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन पर लगे थे इस्लामी नारे

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मोमिनपुर (Mominpura, West Bengal) में हुई हिंसा की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। राज्य की मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस हिंसा की जाँच केंद्रीय एजेंसी से कराने की लगातार माँग कर रही थी।

बंगाल भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया था कि दंगाईयों का मजहब देख उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने ने राज्यपाल ला गणेशन (Governor La Ganeshan) और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) से मोमिनपुर में सेंट्रल फोर्स की तत्काल तैनाती करने और NIA जाँच की माँग की थी।

दरअसल, पश्चिम बंगाल के खिर्दीपुर मोमिनपुर इलाके में में नवरात्र के दौरान लक्ष्मी पूजा की शाम हिंदुओं की दुकानों और घरों पर दंगाइयों ने हमला कर दिया था। इस दौरान हिंदुओं के घरों पर पेट्रोल बम फेंके गए, उनकी झोपड़ियों में आग लगा दी गई और उनके सामान तोड़ दिए गए। इसके बाद कट्टरपंथी भीड़ ने घरों और दुकानों में इस्लामी झंडे लगा दिए।

दरअसल, इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन के मौके पर अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिमों) ने हिंदुओं के घर और दुकानों पर इस्लामी झंडे लगा दिए थे, जिन्हें हिंदुओं ने खोल दिया। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में कट्टरपंथी भीड़ इकट्ठा हो गई और हिंदुओं के घर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। बार-बार पुलिस को बुलाए जाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।

ऑपइंडिया ने घटना के बाद वहाँ जाकर ग्राउंड रिपोर्टिंग की थी और आप वीडियो देखकर खुद समझ जाएँगे कि घटना के समय कट्टरपंथियों ने कैसा उत्पात मचाया था।

मोमिनपुर हिंसा की जाँच के लिए NIA की टीम जल्द ही मौके पर पहुँचकर वहाँ का जायजा लेगी। NIA ने इस हिंसा को लेकर केस दायर कर लिया है। बता दें कि पहले इस हिंसा की जाँच पश्चिम बंगाल पुलिस कर रही थी।

इस मामले में से कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) ने 12 अक्टूबर 2022 को बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता के पुलिस आयुक्त (CP) को मोमिनपुर इलाके में हुई हिंसा की जाँच के लिये एक विशेष जाँच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया था।

हिंसा को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने DGP और पुलिस आयुक्त को सबूतों और वीडियो फुटेज के संरक्षण करने और घटना में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि घटना की जाँच NIA से करानी है या नहीं, इसका फैसला केंद्र सरकार करेगी।

₹33 करोड़ के 307 पुरावशेष अमेरिका ने भारत को लौटाए: एक ही चोर ने चुराई थी 235 मूर्तियाँ, मंदिरों से गायब देवी-देवताओं की 10 प्रतिमाएँ भी मिलीं

अमेरिका ने भारत को 307 पुरावशेष वापस लौटा दिए हैं। इसकी कीमत 4 मिलियन डॉलर यानी 33 करोड़ रुपए के करीब बताई जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा सोमवार (17 अक्टूबर 2022) को लौटाए गए पुरावशेष में से अधिकांश मूर्ति तस्कर सुभाष कपूर द्वारा चोरी की गई मूर्तियाँ हैं और बाकी निजी संग्राहकों की हैं। जया मेनन की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कम से कम 10 भगवान की मूर्तियों को तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मंदिरों से चुराया गया था।

कपूर को इंटरपोल ने 2011 में जर्मनी में गिरफ्तार किया था। वह 2012 से तमिलनाडु के त्रिची की एक जेल में बंद है। मैनहट्टन के अभियोजकों ने उस पर करोड़ों रुपए की मूतियाँ चुराने और उसकी तस्करी करने का आरोप लगाया था। बताया जाता है कि मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी साइरस वांसे के कार्यालय ने कपूर और कई अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कपूर पर चोरी की मूर्तियों को रखने, इनकी चोरी करने से लेकर धोखाधड़ी आदि का आरोप लगाया था। जाँच में 307 पुरावशेषों में से 235 सुभाष कपूर द्वारा चोरी की गई मूर्तियाँ पाई गई, जिसे जब्त कर लिया गया।

इस संबंध में मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी साइरस वांसे के कार्यालय ने एक विज्ञप्ति जारी की। इसमें उन्होंने कहा, “एक शातिर लुटेरा, जिसने अफगानिस्तान, कंबोडिया, भारत, इंडोनेशिया, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड और अन्य देशों से मूर्तियों की तस्करी के लिए मदद ली।”

उन्होंने आगे कहा, “पाँच पुरावशेषों को नैन्सी वीनर (Nancy Wiener) और एक को नायेफ होम्सी (Nayef Homsi) की जाँच के बाद जब्त कर लिया गया। शेष 66 पुरावशेष कई छोटे तस्करी नेटवर्कों द्वारा भारत से चुराए गए थे।”

विज्ञप्ति में कहा गया है कि सभी 307 पुरावशेष न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास में एक प्रत्यावर्तन समारोह के दौरान लौटा दिए गए हैं, जिसमें भारत के महावाणिज्य दूत रणधीर जायसवाल और यूएस होमलैंड सिक्योरिटी इंवेस्टिगेशन (एचएसआई) के कार्यवाहक डिप्टी स्पेशल एजेंट-इन-चार्ज टॉम लाउ शामिल थे। डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी एल्विन एल ब्रैग जूनियर ने कहा, “हमें सैकड़ों कलाकृतियाँ भारत को वापस लौटाने पर गर्व है।”

‘हाथों में लोहे की रॉड और हथौड़े, सिर पर किए गए ताबड़तोड़ वार’: नितेश की हत्या के वक्त मौजूद दोस्त ने बताया – झूठे मुकदमे में फँसाने की मिल रही धमकी

देश की राजधानी दिल्ली के शादीपुर में बुधवार (12 अक्टूबर, 2022) को अदनान, अबदास और उफीजा ने नितेश चौधरी नाम के युवक को बेरहमी से पीट दिया था। बाद में इलाज के दौरान नितेश की मौत हो गई। इस हत्या से नाराज हिन्दू संगठनों ने 16 अक्टूबर को पटेल नगर में सड़क को जाम कर के फाँसी की माँग की थी। अब तक मीडिया रिपोर्ट्स में आरोपितों के तौर पर महज 3 नाम लिए जा रहे हैं, जबकि पुलिस को दी गई शिकायत में ये संख्या 5 है। घटना में नामज़द हुए 2 अन्य आरोपित हमजा और अफ़ज़ल हैं।

बाईक सवारों ने दी गालियाँ तो शुरू हुआ झगड़ा

इस घटना की पुलिस में शिकायत आलोक कुमार दुबे ने दर्ज करवाई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। रंजीत नगर थाने में दी गई शिकायत के मुताबिक, 12-13 अक्टूबर की रात लगभग 12:15 बजे अलोक अपने 2 दोस्तों के साथ मंदिर वाली गली में टहल रहे थे। बताया गया कि इस दौरान कुछ लड़के बहुत खराब ढंग से बाइक चलाते आए और तीनों दोस्तों को गंदी-गंदी गालियाँ देनी शुरू कर दी। शिकायत में झगड़े की शुरुआत की वजह यही बताई गई है।

अपनी शिकायत में अलोक ने मस्जिद का जिक्र करते हुए लिखा कि झगड़े के दौरान दूसरे पक्ष का एक लड़का मस्जिद की तरफ भाग कर भीड़ बुलाने गया। शिकायत में बताया गया है कि तुरंत ही दूसरे पक्ष से 20-25 हमलावर आ गए, जो किसी पहले से रची गई हमले की साजिश जैसा प्रतीत होता है। आरोप लगाया गया है कि हमलावरों के हाथों में हॉकी, लोहे की रॉड, बेस बॉल के डंडे और हथौड़े थे। अलोक के मुताबिक, हमलावरों ने अलोक और उसके दोनों साथियों को बुरी तरह से मारा जिसमें नितेश की मौत हो गई।

नितेश के सिर पर किए गए वार

शिकायत में कहा गया कि हमलावरों ने निशाने पर खास तौर पर नितेश थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, नितेश को अलग खींच कर ले जाया गया और उसके सिर पर ताबड़तोड़ वार किए गए। अलोक ने बताया है कि हमलावरों ने नितेश को मरा जान कर छोड़ दिया। पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में लिखा गया है कि नितेश के साथियों को धमकी दी गई कि अगर वो बच गया वो सुबह सबको देखा जाएगा। अलोक ने दावा किया है कि नामजदों के अलावा लगभग आधे दर्जन हमलावरों को वो देख कर पहचान लेगा।

शिकायत में अलोक ने बताया है कि हमले में सबसे ज्यादा चोटें नितेश को आई थीं। साथ ही आलोक भी इस हमले में घायल हो गए थे। पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि बाद में पुलिस की PCR आई और उन्होंने अलोक व नितेश को अस्पताल में भर्ती करवाया।

किसी अस्पताल ने माँगे ढेर सारे पैसे तो किसी ने बताया फुल

अपनी शिकायत में अलोक दुबे ने खास तौर पर राम मनोहर लोहिया (RML) और गंगाराम अस्पताल का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि नितेश का परिवार उन्हें पहले राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गया जहाँ पर बेड ही मौजूद नहीं था। बताया गया है कि बाद में नितेश के घर वालों ने उसे दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती करवाने का प्रयास किया, जहाँ इतने पैसे माँग लिए गए कि वो नितेश के परिजनों की पहुँच से बाहर थे।

अलोक ने कहा कि बाद में हालात को देखते हुए नितेश को एम्स में भर्ती करवाने की कोशिश भी हुई, पर वहाँ भी बेड न होने की जानकारी दी गई।

शिकायतकर्ता को ही झूठे मुकदमे में फँसाने की धमकी

शिकायतकर्ता अलोक ने अपनी शिकायत में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अलोक के अनुसार, उनके और नितेश के पूरे इलाज और इस दौरान हुई मौत के बीच किसी पुलिस वाले की मौजूदगी अस्पताल में नहीं थी। शिकायतकर्ता की मानें तो अगर इलाज के दौरान पुलिस मौजूद होती तो शायद नितेश की जान बच जाती। शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि पुलिस पीड़ित का बयान ही लेनेको लेकर गंभीर नहीं थी। अलोक ने आरोप लगाया है कि शिकायतकर्ता होने के बाद भी उनको ही फर्जी मुकदमे में फँसाने की धमकी दी जा रही है।

ऑपइंडिया के पास इस घटना की FIR कॉपी मौजूद है। FIR कॉपी में पुलिस ने बताया है कि किसी दीपक जैन नाम के व्यक्ति ने पुलिस को झगड़े की सूचना फोन पर दी थी। पुलिस मौके पर पहुँची तो उन्हें जो जानकारी मिली थी कि लड़कों के 2 गुटों के बीच झगड़ा हुआ है। पुलिस को घटनास्थल पर ईंटें और खून के छींटे बिखरे हुए मिले। शुरुआत में पुलिस ने यह केस IPC की धारा 308 के तहत दर्ज किया था। तब शिकायतकर्ता रंजीत नगर थाने के ही असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) सुखबीर सिंह थे।

FIR कॉपी में राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर के हवाले से पुलिस ने शिकायतकर्ता अलोक को अस्पताल में आने के दौरान नशे में होना बताया है। पुलिस ने अलोक द्वारा मेडिकल न करवाने की ये वजह बताई है। पुलिस का कहना है कि अलोक खुद ही दूसरे अस्पताल में चला गया था, जिस से उसके बयान नहीं नोट हो पाए।

ISIS के आतंकी स्ट्रक्चर को ‘लाफार्ज सीमेंट’ ने दी थी डॉलर की मजबूती: कोर्ट को बताया- प्लांट बंद न हो इसलिए दिए पैसे

फ्रांसीसी सीमेंट कंपनी लाफार्ज ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) को पैसा देने की बात कबूल ली है। सीरिया में कंपनी का प्लांट चालू रखने के लिए 777.8 मिलियन डॉलर (64057663500 रुपए) आतंकी संगठन को देने की बात उसने अमेरिकी अदालत में मानी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रुकलिन फेडरल कोर्ट ने मंगलवार (18 अक्टूबर 2022) को पहली बार किसी कंपनी को आतंकवादियों की सहायता करने के लिए दोषी ठहराया। लाफार्ज, जिसे 2015 में स्विस लिस्टेट होल्सिम (HOLN.S) ने खरीद लिया था, अपना जुर्म कबूलते हुए जुर्माने के रूप में 778 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है।

अमेरिकी प्रोसेक्यूटर के अनुसार, लाफार्ज ने इस्लामिक स्टेट और अल-नुसरा फ्रंट को बिचौलियों के जरिए 2013 और 2014 के बीच लगभग 5.92 मिलियन डॉलर (485928130 रुपए) के बराबर भुगतान किया। अभियोजकों ने बताया कि लाफार्ज ने इस्लामिक स्टेट के हमले बढ़ने पर सितंबर 2014 में सीरिया में अपने सीमेंट प्लांट को खाली कर दिया था। उस समय, इस्लामिक स्टेट ने शेष सीमेंट प्लांट पर कब्जा कर लिया था और इसे 3.21 मिलियन डॉलर (263508480 रुपए) में बेच दिया था।

लाफार्ज के अध्यक्ष मगाली एंडरसन ने मंगलवार को अमेरिकी अदालत में कहा कि अगस्त 2013 से नवंबर 2014 तक कंपनी के पूर्व अधिकारियों ने जानबूझकर सीरिया में विभिन्न आतंकी संगठनों को पैसे दिए। उन्होंने बताया कि इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को 2017 में ही कंपनी से अलग कर दिया गया था।

अमेरिका की डिप्टी अटॉर्नी जनरल लिसा ओ मोनाको ने कहा आतंकवादियों का साथ देने के लिए लाफार्ज और उसकी सहायक कंपनी को दोषी ठहराया गया है। उन्होंने इस्लामिक स्टेट के साथ बिजनेस को बढ़ाने और बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए दोस्ती की, जो दुनिया के अब तक के सबसे क्रूर आतंकवादी संगठनों में से एक है। मोनाको ने कहा कि फ्रांसीसी अधिकारियों ने इसमें शामिल कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन नाम नहीं बताया है। अमेरिकी अदालत के रिकॉर्ड में छह अज्ञात लाफार्ज अधिकारियों का भी उल्लेख किया गया है।

एक बयान में लाफार्ज कंपनी के नए मालिक ने कहा है कि किसी भी तरह से होल्सिम इस अपराध में शामिल नहीं है। लाफार्ज के पूर्व अधिकारियों ने होल्सिम से इस अपराध में शामिल होने की बात छिपाई। होल्सिम का नाम लिए बिना, अमेरिकी डिप्टी अटॉर्नी जनरल लिसा मोनाको ने संवाददाताओं से कहा कि जिस कंपनी ने लाफार्ज को खरीदा है, उसने इसके बारे में पता लगाने में बिल्कुल भी मेहनत नहीं की है। 2015 और 2017 के बीच सीईओ रहे एरिक ऑलसेन (Eric Olsen) ने सीरिया में आतंकियों की मदद करने के लिए लाफार्ज के जाँच के दायरे में आने के बाद अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि वह किसी भी गलत काम में शामिल नहीं हैं।

META पर ‘द वायर’ ने थूक कर चाटा: पहले लिखा- अमित मालवीय के पास स्पेशल पावर, अब कहा- हटा रहे स्टोरी, जाँच करेंगे

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को मेटा से ताकतवर बताने वाली रिपोर्ट्स को द वायर ने अपनी साइट से हटाने का निर्णय लिया है। भारी फजीहत करवाने के बाद द वायर ने कहा कि वो अब मेटा के खिलाफ रिपोर्ट बनाने के लिए इस्तेमाल हुए हर दस्तावेज और हर सूत्र पर आंतरिक समीक्षा करने वाले हैं।

द वायर ने बयान जारी कर बताया कि उनकी मेटा कवरेज को लेकर जो सवाल उठे, उसके लिए वह एक आंतरिक समीक्षा करेंगे। इसमें दस्तावेजों, सूचनाओं, स्रोत सामग्री और स्रोतों की जाँच की जाएगी।

बता दें कि वामपंथी वेबसाइट ने अपनी ही स्टोरीज पर ऐसा एक्शन तब लिया जब डोमेन एक्सपर्ट्स और इंडिपेंडेंट रिसर्चर्स ने उनकी स्टोरी खारिज की। साथ ही बताया कि शायद इस स्टोरी को गढ़ने के लिए फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग हुआ।

एक्सपर्ट्स के ऐसे दावे के बाद ही मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म से स्टोरी हटाई और आंतरिक समीक्षा की बात कहकर अप्रत्यक्ष रूप से मान लिया कि मेटा पर की गई उनकी स्टोरी कितनी गलत थी।

साइट से आर्टिकल सस्पेंड (साभार: द वायर)

उल्लेखनीय है कि द वायर की स्टोरीज जिन शोधकर्ताओं द्वारा खारिज की गई उन्हें वायर ने एक्सपर्ट्स की लिस्ट में शामिल किया था। इन्हीं विशेषज्ञों ने बताया कि उन्होंने द वायर के लिए DMIK वेरिफिकेशन नहीं किया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पब्लिक सेफ्टी देखने वाले पॉलिसी मैनेजर कनिष्क करण ने तो ट्विटर पर ही द वायर के दावों को झूठा कह दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने द वायर की स्टोरी FB ‘XCheck’ पर नहीं वेरीफाई की थी।

इसी तरह एक अन्य विशेषज्ञ जिनका नाम उज्जवल कुमार है और जो माइक्रोसॉफ्ट एशिया में काम करते हैं, उन्होंने भी द वायर के दावे को झुठलाया। उज्जवल को लेकर द वायर ने कहा था कि उन्होंने ही उन मेल्स की पुष्टि की है जिसके आधार पर उनकी रिपोर्ट थी। हालाँकि उज्जवल ने ऐसा कोई वेरिफिकेशन करने से मना कर दिया।

टेक एक्सपर्ट प्रणेश प्रकाश ने बताया कि उन्होंने दोनों एक्सपर्ट्स से बात की थी। दोनों ने ही ऐसे किसी भी सत्यापन को करने से मना किया है। ऑपइंडिया ने भी इस संबंध में माइक्रोसॉफ्ट एशिया से संपर्क का प्रयास किया था लेकिन उनका अभी कोई जवाब नहीं आया है। इस बीच खबर है कि द वायर पर मेटा की स्टोरी करने वाले पत्रकार ने अपने अकॉउंट को डिएक्टिवेट कर दिया था। हालाँकि कुछ देर बाद वह लौट आया।

OpIndia ने कन्हैया लाल का कटा सिर याद दिलाया तो Youtube ने डिलीट किया वीडियो: वे मजहबी आतंक पर पर्दा भी डालेंगे, आपकी आवाज भी कुचलेंगे

भारत की मीडिया को हमेशा से इकोसिस्टम हाँकती रही है। ऑपइंडिया ने उसे चुनौती दी। उसकी चमड़ी छीलनी शुरू की। उसके रोम-रोम में भरा हिंदूफोबिया रिस-रिस कर पाठकों के सामने आने लगा। बौखलाए इकोसिस्टम ने ऑपइंडिया की छवि मलिन करने का प्रोपेगेंडा शुरू किया। इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से लेकर वैश्विक संस्थाओं और चेहरों तक को हथियार बनाया गया। संस्थान के लिए काम करने वाले लोगों के निजी जीवन में ताँक-झाँक की गई। हमारे आर्थिक तंत्र पर हमला किया गया। अब उसी इकोसिस्टम के दबाव में यूट्यूब ने हमारा एक वीडियो डिलीट कर दिया है।

यह वीडियो भारत की मेनस्ट्रीम मीडिया के उस चरित्र को बेपर्दा कर रही थी, जिसके तहत वह इस्लामी बर्बरता पर पर्दे डालती है। मजहबी आतंकियों के लिए पाठकों/दर्शकों के मन में सहानुभूति पैदा करने की कोशिश करती है।

दरअसल दैनिक भास्कर ने एक लंबी-चौड़ी रिपोर्ट प्रकाशित कर पाठकों को यह बताने की कोशिश की थी कि उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल का गला रेतने वाले मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद अब बदल गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया था कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपित अजमेर की जेल में बंद हैं। अपने किए पर पछता रहे हैं। रिहाई की दुआ माँग रहे हैं। उनसे मिलने उनके परिवार वाले भी नहीं आते हैं। वे जेल में महापुरुषों की जीवनी पढ़ रहे हैं। इनके अध्ययन से उनका जीवन बदल गया है। यह भी बताया गया था कि अजमेर दरगाह का खादिम गौहर चिश्ती जिसने नुपूर शर्मा का सिर कलम करने की धमकी दी थी, वह भी इसी जेल में बंद है और अब वह भी बदल गया है।

अपने वीडियो में हमने इस रिपोर्ट की मंशा को लेकर सवाल उठाए थे। पूछा था कि जो लोग हिंदुओं को काफिर मानते हैं, वे कैसे काफिरों की जीवनी पढ़कर बदल जाते होंगे? पूछा था कि ​जो कौम सर तन से जुदा के नारों, मजहब के नाम पर हिंसा का विरोध तक नहीं करती, जो किसी का गला काटने के बाद वीडियो बनाकर हिंदुओं को यह संदेश देते हैं कि तुम काफिर हो, कहीं भी रहो सुरक्षित नहीं हो, हम जब चाहें तुम्हारा गला काट जाएँगे, उन्हें अपने किए पर क्यों और कैसे पाश्चाताप होता होगा?

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट

अपने वीडियो में हमने बताया था कि भारत की मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए यह नया भी नहीं है। कभी मजहब के नाम पर हिंदू देवी देवताओं को खंडित करने वालों को ‘मानसिक रोगी‘ बताकर बचाव किया जाता है तो कभी आतंकी को ‘हेडमास्टर का बेटा’ बताकर उसकी हिंदू घृणा पर पर्दा डाला जाता है। बताया था कि कैसे फिर इन्हीं रिपोर्टों का इस्तेमाल इन मजहबी आतंकियों के महिमामंडन, न्यायिक व्यवस्था से उनके लिए राहत पाने के लिए किया जाता है। हमने मजहबी आतंक पर मीडिया की इस लीपापोती को लेकर दर्शकों को सचेत करते हुए उनसे इसका विरोध करने का आह्वान किया था।

हमने यूट्यूब की आपत्तियों पर जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया है

यूट्यूब का कहना है कि हमने उसके गाइडलाइन का उल्लंघन किया है। यह गाइडलाइन बताती है कि आप ऐसे फुटेज का इस्तेमाल नहीं कर सकते जो हिंसा के वक्त फिल्माया गया हो। हमने अपने वीडियो में कन्हैया लाल का गला काटने वाले मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद की कुछ सेकेंड के लिए जो तस्वीर लगाई है, वह घटना के समय का नहीं है। उस वीडियो का हिस्सा है जिसे मजहबी आतंकियों ने हिंसा के बाद शूट किया था। यह तस्वीर मीडिया में धड़ल्ले से इस्तेमाल भी होती रही है।

आप ही बताइए ​क्या ऐसा करके हमने पत्रकारिता के किसी नैतिक मूल्यों का उल्लंघन किया है? क्या मीडिया की नंगई को उजागर करना अपराध है? फिर भी यूट्यूब ने हमारे वीडियो को हटा दिया।

हम जानते हैं कि ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि हम इकोसिस्टम को सरेआम नंगा कर देते हैं। क्योंकि हम हिंदुओं की आवाज बनते हैं। हम मजहबी आतंक के खिलाफ बोलते हैं। भले यूट्यूब ने हमारा वीडियो हटा दिया हो, भले इससे हमारे आर्थिक हितों को चोट पहुँचता हो, बावजूद इसके हम न तो इकोसिस्टम को चुनौती देना बंद करेंगे, न ही मजहबी आतंकी के खिलाफ बोलना। क्योंकि हम यहाँ आपके लिए और यह जानते हैं कि आप भी हमारे लिए ही यहाँ हैं। हम जानते हैं कि हर मुश्किल समय की तरह इस बार भी आप हमारा संबल बनेंगे। हमारे लिए खड़े होंगे।

PFI का टारगेट था अयोध्या का राम मंदिर, गिराकर बाबरी मस्जिद बनाने की थी प्लानिंग: महाराष्ट्र ATS की कार्रवाई के बाद खुलासा

हाल ही में देश में प्रतिबंधित हुए आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI/ पीएफआई) को लेकर नया खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र सरकार ने नासिक कोर्ट में बताया कि पीएफआई वाले अयोध्या के राम मंदिर को तोड़कर वहाँ बाबरी मस्जिद बनाने की प्लानिंग कर रहे थे

महाराष्ट्र एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के 5 संदिग्धों से पूछताछ और उनकी पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। साथ ही यह भी पता चला कि कैसे इनका मकसद देश को 2047 तक किसी भी हाल में इस्लामी राष्ट्र में तब्दील करना था। इसके अलावा देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ये विदेशों से ट्रेनिंग पा रहे थे। संदिग्धों के अकॉउंट की जाँच में विदेशी पैसा भी मिला है।

गौर देने वाली बात है कि पीएफआई कार्यकर्ताओं का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी सामने आया है। जानकारी मिली है कि भारत में चल रहे संगठन के इस ग्रुप का एडमिन कोई भारतीय नहीं बल्कि पाकिस्तान से है।

बता दें कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के ये 5 संदिग्ध आतंकी गतिविधियों के इल्जाम में सितंबर माह में पकड़े गए थे। पड़ताल के दौरान जाँच टीम को विदेश से संचालित होते व्हॉट्सएप ग्रुप के बारे में पता चला। छानबीन हुई तो ये सामने आया कि ग्रुप में न केवल पाकिस्तान बल्कि अफगानिस्तान और अमीरात के लोग भी थे।

पीएफआई के संदिग्ध सामाजिक कार्यों के नाम पर देश-विदेश से पैसा इकट्ठा कर रहे थे। इनका मकसद इन पैसों के जरिए, (खासकर खाड़ी देशों से आए पैसों का प्रयोग करके) देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना था। इस बात की जानकारी होने के बाद अब एनआईए के साथ ईडी भी इस मामले में अपनी जाँच कर रही है। छानबीन में संदिग्धों के पास से मोबाइल और हार्ड डिस्क समेत अन्य सामग्रियाँ बरामद की गईं।

महाराष्ट्र ATS की PFI पर कार्रवाई

गौरतलब है कि पीएफआई के कट्टरपंथी लगातार देश के माहौल को बिगाड़ने के लिए साजिशें रच रहे थे। ऐसे में कुछ वक्त पहले भारत सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगाया। वहीं एनआईए ने देश भर में ताबड़तोड़ रेड मारते हुए सैंकड़ों पीएफआई से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया। इसी क्रम में महाराष्ट्र एटीएस ने भी एक्शन लिया।

एटीएस ने हाल में मालेगाँव में पीएफआई के अध्यक्ष मौलाना सईद अहमद अंसारी, पुणे में संगठन के उपाध्यक्ष अब्दुल कय्यूम शेखांद और 3 अन्य को गिरफ्तार किया था। इनके ऊपर इल्जाम था कि ये विदेशों से मिले पैसों के जरिए देश में अशांति फैलाने का काम कर रहे थे। हालाँकि महाराष्ट्र एटीएस ने इन्हें गिरफ्तार करके इनके मनसूबों पर पानी फेर दिया।