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जिस 40 साल के इमरान को ईसाई परिवार ने दिया सहारा, उसी ने घर से 12 साल की बेटी का किया अपहरण: धर्मांतरण के बाद निकाह, भाइयों को हत्या की धमकी दी

पाकिस्तान में एक नाबालिग ईसाई लड़की के अपहरण और धर्मांतरण का मामला सामने आया है। परिवार का कहना है कि उनकी 12-13 साल की लड़की को उनके ही घर में रहने वाले इमरान ने किडनैप किया और बाद में उसका धर्म परिवर्तित करवा कर उससे निकाह कर लिया। अब लड़की परिजनों के पास किसी भी हाल में लौटना चाहती है लेकिन कोर्ट के आदेश हैं कि वो इमरान के साथ ही रहे।

डीएनडी पर प्रकाशित एक रिपोर्ट बताती है कि 40 साल का इमरान शहजाद और अदीबा अपने तीन बच्चों के साथ ईसाई दंपत्ति के घर में रहते थे। ईसाई परिवार ने उनकी मदद उस समय में की थी जब इमरान की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। लेकिन इमरान और अदीबा, ईसाई परिवार के एहसान को भुलाकर उनके घर में झगड़ा करते थे। आए दिन इमरान अपनी बीवी अदीबा पर हाथ उठाता था, उसको मारता था।

ऐसे में ईसाई परिवार ने उन लोगों को घर छोड़ने को कहा। परिवार ने उन्हें समझाया कि उनके घर में लड़ाई झगड़े का माहौल नहीं है और वो नहीं चाहते हैं कि ये लड़ाइयाँ हों, जो उनके बच्चों पर असर डालें।

इमरान और अदीबा ने इसी चेतावनी के एक हफ्ते बाद ईसाई दंपत्ति की बेटी जारा (बदला नाम) को उठाने की साजिश रची। 30 अप्रैल 2022 को इमरान की बीवी अदीबा उनके घर आई और कहा कि वो जारा को बाजार ले जाना चाहती है। घरवाले अदीबा को जानते थे तो उन्होंने अपनी बच्ची को उसके साथ भेज दिया। लेकिन देर रात होने पर भी जब बच्ची नहीं लौटी तो वह परेशान हो गए। बाजार में खूब ढूँढने के बाद वह लोग थाने रिपोर्ट लिखवाने गए।

बच्ची के पिता बताते हैं कि जिस समय वह वहाँ पर रिपोर्ट लिखवा रहे थे, तभी इमरान ने उन्हें मैसेज भेजा कि उनकी बेटी उसके पास है और अब वह उसको नहीं छोड़ेगा। 1 मई को पीपीसी की धारा 364 बी के तहत केस रावलपिंडी थाने में दर्ज हुआ। पुलिस ने इमरान, अदीबा और अपहरण करने वाले लियाकत को गिरफ्तार किया। बच्ची भी रातभर थाने में अदीबा के साथ रखी गई।

14 मई को जब बच्ची की गवाही कोर्ट में दिलवाने का समय आया तो उसने कहा कि उसकी उम्र 14 साल है और वो मेडिकल नहीं करवाना चाहती। उसने इस्लाम कबूल करके इमरान से निकाह किया है और उसके साथ अपनी मर्जी से रहना चाहती है।

बच्ची के इस बयान को सुनने के बाद रावलपिंडी के जज ने उन तीनों आरोपितों को रिहा कर दिया। लेकिन, इस फैसले के कुछ दिन बाद बच्ची का परिजनों पर फोन आया। उसने बताया कि आरोपितों ने उसे धमकी दी थी कि वो उनके पक्ष में बोलें वरना दोनों भाइयों को मार दिया जाएगा। बेटी की बात सुन माँ ने दोबारा याचिका दाखिल की। लेकिन 13 जुलाई को उनकी याचिका खारिज कर दी गई। अब पीड़िता की माँ का कहना है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ न्याय नहीं होता।

पुलिस कानून को ताक पर मुस्लिमों का साथ देती है। उनके अनुसार, जाँच में किए गए भेदभाव के कारण एक छोटी बच्ची अपने माँ-बाप से अलग उस व्यक्ति के पास है जिसने उसको सताया। अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ताओं के कारण ये मामला प्रकाश में आया है, लोग जारा की रिहाई और इमरान को सजा दिलाने की माँग कर रहे हैं।

लखीमपुर खीरी के गाँव में इलाज के बहाने ईसाई धर्मांतरण का लालच, 7 महीने से चल रहा था दुष्प्रचार: यूपी पुलिस ने 2 को दबोचा

देश में धर्मांतरण का जाल लगातार फैलाया जा रहा है। इसके लिए विदेशी फंडिंग से लेकर तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। धर्मांतरण का नया मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सामने आया है। लखीमपुर खीरी के निघासन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दौलतापुर गांव में ईसाई मिशनरी के लोगों पर लालच देकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने का आरोप लगा है। धर्मांतरण का यह आरोप स्थानीय ग्रामीणों ने ही लगाया है।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार (19 अगस्त) को दौलतापुर में धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम गाँव के ही दयाराम नामक व्यक्ति के घर के सामने आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम को लेकर ग्राम प्रधान दीपक जायसवाल व अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि इसमें में पंजाब के ईसाई मिशनरी से जुड़े लोग आए थे।

इस कार्यक्रम में पहले ईसाई मजहब से जुड़े भजन और प्रवचन चलाए गए थे। इसके बाद ईसाई मजहब से जुड़ी हुई बातें करते हुए ईसाइयत की तारीफ की गई और इसे ही स्वीकार करने के लिए कहा गया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों को इकट्ठा कर बीमारी दूर करने से लेकर अन्य प्रकार के लालच दिए जा रहे थे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि बीते सात महीनों से यहाँ ऐसा ही चला आ रहा है। इस तरह के कार्यक्रमों के चलते ही गाँव के तीन-चार लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है।

पुलिस को देख भाग खड़े हुए लोग

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दौलतापुर में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी थी। इस सूचना के बाद, सीओ सुबोध जायसवाल और तहसीलदार भीमचंद पुलिस फोर्स के साथ कार्यक्रम स्थल पहुँच गए थे। पुलिस बल को देखते ही वहाँ मौजूद लोग कार्यक्रम स्थल को छोड़कर भाग खड़े हुए।

इस पूरे मसले पर तहसीलदार भीमचंद ने कहा है हम लोग पुलिस टीम के साथ दौलतापुर गाँव गए थे। गाँव के ही दयाराम नामक व्यक्ति के घर सामने बिना किसी अनुमति के भीड़ इकट्ठा कर धर्म का प्रचार किया जा रहा था। इसके बाद, कार्यक्रम को तुरंत बंद करवाते हुए दोनों आयोजकों निक्का और दयाराम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

इस मामले पर कोतवाल चंद्रभान यादव ने कहा है कि इस कार्यक्रम को लेकर लिखित शिकायत नहीं मिली थी। इसलिए, आयोजकों पर शांति भंग करने को लेकर चालान किया गया है।

नीतीश कुमार के RJD वाले मंत्री ने प्रेस कॉफ्रेंस में ही बकी गाली, ‘बोंकाचो@’ शब्द का किया इस्तेमाल: वायरल हुआ वीडियो

बिहार में नीतीश-तेजस्वी की गठबंधन वाली सरकार के मंत्री सुरेंद्र कुमार यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस में गाली देते सुनाई पड़े। उनका ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। इससे पहले भी नई सरकार के कई मंत्री विवादों में घिरे हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की गठबंधन वाली सरकार के मंत्री का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उनको मीडिया के सामने ऑन कैमरा गाली देते हुए सुना जा सकता है। वहीं सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना भी हो रही है और विपक्षी दलों के नेता भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

भाजपा नेता निखिल आनंद ने मंत्री सुरेंद्र कुमार का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया और लिखा, “सुरेंद्र भाई मंत्री हैं और उनकी मंशा ठीक है, इंटरेस्ट भी लेते हैं। लेकिन ई जो बुड़बकवा आपको सीखा रहा था लाइव पीसी में! बताइए इसको समझ में नहीं आता है कि मंत्री को पब्लिकली ज्ञान नहीं देना चाहिए। मंत्री जी ठीक बोले- फोटो खिंचवाओ लेकिन ऐसे ज्ञान मत दो कि मंत्री को सब “बो@चो@” समझे।”

आपको बताते चलें कि सुरेंद्र कुमार यादव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) कोटे से नीतीश-तेजस्वी सरकार की कैबिनेट में मंत्री हैं। भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा, “मंत्री सुरेंद्र यादव का दबंग इतिहास रहा है। वे ज्ञान से भी भरे हुए हैं, कभी विधायक रहते हुए बीपीएससी की परीक्षा क्वालिफाई कर गए थे। अब मंत्री बने हैं तो अपनी जुबान पर काबू रखना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी ने पब्लिकली सलाह दे दी तो वे भड़क गए। लगता है बिहार सरकार के मंत्रियों को सार्वजनिक मंच पर कैसे बयान देने हैं, इसकी ट्रेनिंग देनी चाहिए।”

पहले से नई सरकार के मंत्री विवादों में

गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं की बिहार की नई सरकार के मंत्री किसी विवाद में ना फँसे हो। बताया जा रहा है कि कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह के खिलाफ तो एक केस में गिरफ़्तारी का वॉरंट भी जारी हो गया था। लेकिन, इसके बावजूद भी उन्होंने मंत्री पद की शपत ली। बिहार सरकार की इस कैबिनेट में दागदार मंत्रियों की संख्या करीब 72 फीसदी बताई जा रही हैं।

‘मोदी सरकार ने किया बेरोजगारी भत्ते का ऐलान, हर माह मिलेंगे ₹6000’ : जानें ‘वायरल योजना’ का सच

केंद्र सरकार देश के गरीब तबके को उभारने के लिए आए दिन कोई न कोई योजना लेकर आती रहती है। इसी बात का फायदा ऑनलाइन स्कैम करने वाले खूब उठाते हैं।

ये धोखेबाज कभी महिलाओं के, कभी बुजुर्गों के, कभी बच्चों के नाम पर मैसेज वायरल करते हैं, जिनमें कई तरह की सुविधाओं का लालच देकर पर्सनल जानकारी माँगी जाती है।

हाल में ऐसा ही एक मैसेज बेरोजगारों के नाम पर वायरल होना शुरू हुआ। इस संदेश में लिखा गया,

“मोदी सरकार का नया फैसला। अब बेरोजगार युवाओं को 6 हजार रुपए हर महीने जीवन यापन के लिए दिए जाएँगे। प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। इस योजना के अंतर्गत बेरोजगार युवाओं को 6000 रुपए हर महीने दिए जाएँगे।”

इस संदेश के साथ एक लिंक दिया गया है जिसमें रजिस्ट्रेशन करने को कहा गया है।

अब ये वायरल संदेश की हकीकत क्या है इसका खुलास पीआईबी की फैक्ट चेकिंग साइट ने किया है। पीआईबी ने इस संदेश के खिलाफ अलर्ट करते हुए कहा,

“एक वायरल Whatsapp मैसेज में दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री बेरोजगारी भत्ता योजना के तहत सरकार बेरोजगार युवाओं को हर महीने ₹6,000 का भत्ता दे रही है। ये मैसेज फर्जी है। भारत सरकार ऐसी कोई योजना को नहीं चला रही। कृपया ऐसे संदेशों को फॉरवर्ड न करें।”

श्मशान सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू का दावा

गौरतलब है कि मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर आए दिन फेक न्यूज फैलाने का काम कोई नया नहीं है। पिछले ही महीने एक संदेश वायरल किया गया था जिसमें श्मशान सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी की घोषणा की बात थी। हालाँकि प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेकिंग साइट ने बताया कि श्मशान सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी लगाने का दावा भ्रामक था।

पीआईबी ने कहा था कि अंतिम संस्कार, दफनाने, श्मशान या मुर्दाघर सेवाओं पर जीएसटी लागू नहीं किया गया। यह केवल श्मशान से संबंधित होने वाले कामों के कॉन्ट्रैक्ट पर लागू होता है। इसका मतलब है कि श्मशान के निर्माण और रखरखाव से संबंधित सेवाओं पर जीएसटी लागू होगा।

‘निर्माता तय करेंगे, तुम्हें क्या मतलब?’: ‘दोबारा’ के फ्लॉप होने के बाद बिलबिला रहा बॉलीवुड, ऑनलाइन भी लीक हो गई तापसी की मूवी

तापसी पन्नू की फिल्म ‘दोबारा’ के फ्लॉप होने के बाद बॉलीवुड बिलबिला गया है। हंसल मेहता लोगों से सोशल मीडिया पर लड़ाई करते फिर रहे हैं और फिल्म को फ्लॉप बताने वालों पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर फिल्म ने कमाई नहीं की है तो ये निर्माता तय करेंगे, दूसरे को इससे क्या मतलब? उन्होंने दावा किया कि फिल्म का कलेक्शन इसे मिले स्क्रीन्स के हिसाब से शानदार है।

साल 2018 में आई स्पेनिश फिल्म ‘मिराज’ की रीमेक ‘दोबारा’ (Dobaaraa) शुक्रवार (19 अगस्त, 2022) को रिलीज हो गई है। तापसी पन्नू व पावेल गुलाटी स्टारर ‘दोबारा’ को लेकर समीक्षकों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। हालाँकि, ऐसा लगता है कि बॉलीवुड फिल्मों के बॉयकॉट के बीच एक और फिल्म बॉयकॉट की बलि चढ़ गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी बातें सामने आ रहीं हैं कि ‘दोबारा’ तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) के करियर की सबसे खराब फिल्मों में से एक हो सकती है। साथ ही, ऐसा भी कहा जा रहा है कि थिएटरों में दर्शकों की 2-3% उपस्थिति के कारण इस फिल्म के कई शो रद्द करने पड़े हैं।

फिल्म ट्रेड एनालिस्ट सुमित कदेल ने ट्वीट कर बताया, “बॉक्स ऑफिस पर ‘दोबारा’ की शुरुआत बेहद खराब रही है। फिल्म केवल 2-3% ऑक्यूपेंसी हासिल कर पाईं है। जबकि, दर्शकों के न होने के कारण कई शो रद्द कर दिए गए हैं।”

तापसी पन्नू और अनुराग कश्यप ने कहा था ‘प्लीज बॉयकॉट करो’

गौरतलब है कि, ‘दोबारा’ के प्रमोशन के दौरान जब फ़िल्म के डायरेक्टर अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू से आमिर खान की फ़िल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ और अक्षय कुमार की फिल्म ‘रक्षा बंधन’ के खिलाफ चलाए गए बॉयकॉट कैंपेन को लेकर सवाल किया गया था। तब, अनुराग कश्यप ने कहा था, “मैं चाहता हूँ कि ट्विटर पर ‘हैशटैग बायकॉट कश्यप’ ट्रेंड करें।”

वहीं तापसी पन्नू ने भी अनुराग कश्यप की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा था, “कृपया सभी लोग हमारी फिल्म दोबारा का बहिष्कार करें। अगर आमिर खान और अक्षय कुमार जैसे अभिनेताओं का बहिष्कार किया जा रहा है, तो मैं भी इस लीग में शामिल होने चाहती हूँ।” इसके अलावा इन लोगों की तरफ से यह भी कहा गया था कि “पिक्चर देखो या ना देखो, मगर बायकॉट कर दो।”

मेकर्स को लग सकता है बड़ा झटका

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ‘दोबारा’ बुरी तरह फ्लॉफ होने की स्थिति में जा रही है। 30 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने पहले दिन 72 लाख रुपए के आसपास की की कमाई की थी वहीं दूसरे दिन भी लगभग इतनी ही कमाई का अनुमान लगाया गया है।

‘घूरता था, पीछा करता था, गंदे मैसेज भेजता था’: हमीरपुर में वकील मोहम्मद हारून के खिलाफ महिला जज ने की शिकायत, छेड़छाड़ का भी आरोप

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक महिला सिविल जज से बदसलूकी का मामला सामने आया है। आरोपित की पहचान अधिवक्ता मोहम्मद हारून के तौर पर हुई है। हारून पर आरोप है कि उसने महिला जज हर्षिता सचान के ऊपर भद्दे-भद्दे कमेंट किए और उनसे बदसलूकी भी की।

महिला जज ने इस संबंध में हमीरपुर कोतवाली में आईपीसी की धारा 354 (क) और 354 (ख) के तहत केस दर्ज करवाया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद हारून हमीरपुर की जिला अदालत में नियुक्त महिला जज को गंदे मैसेज भेजता था। काम के दौरान उनको घूरता था और शाम में उनका पीछा करता था।

महिला जज ने इस तरह मैसेज भेजे जाने पर कई बार आपत्ति भी जताई थी और हारून को चेतावनी भी दी थी। लेकिन, अधिवक्ता ने कोई बात नहीं सुनी और महिला जज को परेशान करना जारी रखा। जब चीजें बर्दाश्त से पार हो गईं तब महिला जज ने हमीरपुर थाने में एफआईआर दी।

एफआईआर में बताया गया कि हारून उनको आपत्तिजनक संदेश तो भेजता ही था। साथ में उन्हें घूरता भी था और ईवनिंग वॉक के दौरान उनका पीछा भी करता था। उन्होंने अपनी शिकायत के साथ पुलिस को हारून के मैसेजों के स्क्रीनशॉट भी दिए हैं।

बता दें कि पुलिस में ये केस दर्ज होने के बाद इस केस में जाँच शुरू हो गई है। शिकायत के आधार पर पूरी पड़ताल आगे बढ़ाई जा रही है। जाँच पूरी होने पर अधिवक्ता के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच हमीरपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा, “हर्षिता मैडम ने छेड़खानी की रिपोर्ट दर्ज करवाई है। हारून ने जो किया हम उसका विरोध करते हैं, उसकी निंदा करते हैं। हम ऐसे अधिवक्ता के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई की माँग करते हैं। अगर एफआईआर सच्ची घटना पर है तो हम बार काउंसिल को लिखकर हारून का लाइसेंस को कैंसिल करवाने की माँग करेंगे। ऐसे व्यक्ति और अधिवक्ता समाज में कलंक हैं।”

अमित शाह के मंत्रालय ने जाँच एजेंसियों को दिया खालिस्तानी नेटवर्क के सफाए का आदेश, 5 राज्यों की पुलिस के साथ बैठक: विदेशी फंडिंग पर भी कसेगी नकेल

भारत के कई राज्यों में अपने कदम फैला रहे खालिस्तान के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) और सख्त हो गया है। MHA की ओर से NIA, ED, IB और RAW सहित कई राज्यों की पुलिस को भी भारत में पनप रहे खालिस्तानी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के निर्देश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार (Central Government) अब खालिस्तानी नेटवर्क और ड्रग ट्रैफिकिंग मॉड्यूल के विरुद्ध एक्शन मोड में आ गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार 19 अगस्त को NIA, ED, IB और ROW के साथ हुई अहम बैठक में एक बड़ा फैसला लिया। MHA ने ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)’ और अन्य जाँच एजेंसियों को दिल्ली से सटे 5 राज्यों में खालिस्तानी नेटवर्क को खत्म करने के निर्देश दिए हैं।

आपको बताते चलें कि शुक्रवार को आयोजित इस बैठक में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ 5 अन्य राज्यों की पुलिस भी शामिल रहीं। तमाम जाँच एजेंसियों का खालिस्तानी एक्टिविटी पर नजर रखने और केस दर्ज करने को कहा गया है। बता दें कि कुछ महीने पहले दिल्ली और आसपास के राज्यों में IED और विस्फोटक बरामद हुए थे।

वहीं जाँच एजेंसियों का यह मानना है कि इन सब में ISI और पाकिस्तान में मौजूद खालिस्तानी संगठनों का हाथ हो सकता है। जाँच एजेंसियों की माने तो ये संगठन देश में बड़े हमले को अंजाम देना चाहते हैं। उसके लिए इन संगठनों को विदेशों से फंडिंग हो रही। NIA इसकी भी जाँच करेगी कि इन संगठनों को विदेशी फंडिंग कहां से आ रही है।

भारत सरकार के टारगेट पर हैं 5 खालिस्तानी संगठन

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के टारगेट पर मुख्यत: 5 खालिस्तानी संगठन हैं। इस सूची में सिख यूथ फेडरेशन (SYF), सिख फॉर जस्टिस (SFJ), खालिस्तानी लिबरेशन फ्रंट (KLF), खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) और बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) जैसे बड़े खालिस्तानी संगठनों के नाम भी शामिल किए गए हैं।

बता दें कि बीते कुछ समय से खालिस्तानी नेटवर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। इस काम में सबसे ज्यादा अपनी सक्रियता सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) दिखा रहा है। लेकिन, इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उसके ही गाँव के लोगों ने पन्नू की खूब आलोचना की और युवाओं ने अपने स्तर पर तिरंगा रैली भी निकाली। इससे पहले कुछ युवाओं ने तो पन्नू के घर पर ही तिरंगा फहराया दिया था, जबकि पन्नू ने सबसे तिरंगा ना फहराने की अपील की थी।

पाकिस्तान से आए हिंदू-सिखों को 75 साल बाद मिलेगा इंसाफ: जम्मू-कश्मीर के वोटर लिस्ट में 1.5 लाख से अधिक विस्थापित होंगे शामिल, फारूक-महबूबा बेचैन

धारा-370 हटने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। यह चुनाव इस साल के अंत तक होने की संभावना है और इसको लेकर चुनाव आयोग ने तैयारियाँ भी शुरू कर दी हैं। राज्य में मतदाता सूची को अपडेट करने का काम जारी है।

जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के बाद सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने की कोशिश की जा रही है। इसमें ऐसे लोगों के मतदान का अधिकार देना भी शामिल है, जो 1947 में भारत बँटवारे के बाद पाकिस्तान से आकर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बसे थे। इसके अलावा वहाँ रहने वाले देश के दूसरे हिस्से के लोगों को भी मतदान का अधिकार देने की बात कही गई है।

राज्य चुनाव आयोग की इस घोषणा के बाद इस्लामी आतंकी संगठनों से लेकर विशेषाधिकार के तहत सत्ता सुख भोग रहे लोग तिलमिला उठे हैं। इसको लेकर तमाम तरह की भ्रामक खबरें भी चल रही हैं, जिनका आयोग ने खंडन किया है। बता दें कि हर काम कोई नियम या प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं। मतदाता सूची में नामों को भी प्रक्रिया के तहत शामिल किया जा रहा है।

आयोग के निर्णय के बाद एक तरफ आतंकी नागरिकों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है तो दूसरी तरफ पीढ़ियों से सत्ता का सुख भोगते आ रहे लोग ‘मतदाताओं का आयात’ बताकर मनमाफिक बदलाव करने की बात कह रहे हैं। ऐसे बयान देने वालों में फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती शामिल हैं।

क्या कहा था मुख्य चुनाव अधिकारी ने

जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) हृदेश कुमार सिंह ने 17 अगस्त 2022 को कहा था कि इस बार जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव में राज्य के बाहर के लोग भी वोट डाल सकेंगे। इनमें वैसे लोग शामिल हैं, जो राज्य में कर्मचारी, छात्र, मजदूर या कारोबारी हैं और जम्मू-कश्मीर में सामान्य रूप से रह रहे हैं।

मुख्य चुनाव अधिकारी हृदेश कुमार सिंह ने कहा था, “अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से पहले कई लोग जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकते थे, लेकिन अब वे भी मतदाता बन सकते हैं।” प्रदेश में ऐसा पहली बार होगा, जब गैर-कश्मीरी भी वोट डाल सकेंगे।

हृदेश कुमार सिंह ने था कि जम्मू-कश्मीर में इस बार करीब 25 लाख नए वोटरों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल होने के उम्मीद है। 15 सितंबर से वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो 25 अक्टूबर तक चलेगी।

हालाँकि, कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर बताया कि जम्मू-कश्मीर की मतदाता सूची में 25 लाख अतिरिक्त मतदाता जोड़े जाएँगे। इसका राज्य की प्रशासन की ओर से खंडन किया है। इसके साथ प्रवासियों कश्मीरियों के नाम को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया में किसी तरह के बदलाव को भी खारिज किया है।

राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) ने बताया कि ये 25 लाख जिन मतदाताओं की बात हो रही है वे राज्य के वर्तमान निवासी हैं। ये ऐसे मतदाता हैं, जिन्होंने 1 अक्टूबर 2022 या इससे पहले 18 साल की उम्र पूरी कर ली है। जम्मू-कश्मीर में आखिरी मतदाता सूची में संशोधन तीन साल पहले 1 जनवरी 2019 को किया गया था। इन तीन सालों में राज्य में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। विभाग का कहना है कि भ्रामक खबरें कुछ निहित स्वार्थ के लिए फैलाए जा रहे हैं।

DIPR ने आगे कहा, “कश्मीरी प्रवासियों के लिए उनके मूल मूल निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में नामांकन के लिए विशेष प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जम्मू-कश्मीर सरकार में संपत्ति और नौकरियों की खरीद के संबंध में नियमों में भी कोई बदलाव नहीं है और मतदाताओं के प्रतिनिधित्व से इसका कोई लेना-देना नहीं है।”

कश्मीर में क्यों कर सकेेंगे बाहरी लोग भी मतदान

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद के जम्मू-कश्मीर की विशेष दर्जा खत्म हो गई। इस तरह भारत के जो कानून पहले जम्मू-कश्मीर छोड़कर अन्य राज्यों में लागू होते थे, वे भी अब जम्मू-कश्मीर में लागू होते हैं।

इस तरह जम्मू-कश्मीर में भी पीपल एक्ट 1950 और 1951 लागू हो गया है। यह ऐक्ट जम्मू-कश्मीर में रहने वाले देश के अन्य के अन्य हिस्सों के लोगों को केंद्र शासित प्रदेश की मतदाता सूची में शामिल होने की अनुमति देता है। अगर कोई व्यक्ति जम्मू-कश्मीर की मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराना चाहता है और पहले से किसी दूसरे राज्य के निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत है तो उसे वहाँ से अपना नाम हटाना होगा।

मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया

जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूची को लेकर जिस तरह भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं, उससे लगता है कि भारत के किसी हिस्से का कोई भी व्यक्ति वहाँ जाएगा और वोट देकर चला आएगा, जबकि ऐसा नहीं है। किसी राज्य में कोई भी व्यक्ति तभी मतदान कर सकता है, जब वहाँ के मतदाता सूची में नाम हो। ये नाम भी एक प्रक्रिया के तहत शामिल किए जाते हैं।

भारत का कोई भी व्यक्ति सिर्फ एक ही राज्य में मतदान कर सकता है। अगर दिल्ली का कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश में रहता है और उसका नाम उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में है तो वह दिल्ली में मतदान नहीं कर सकता। यदि वह अपने गृह राज्य दिल्ली में मतदान करना चाहता है तो उसे अपना नाम उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से हटना होगा।

यहाँ बताना आवश्यक है कि किसी भी व्यक्ति के नाम को मतदाता सूची में शामिल करने से पहले चुनाव आयोग के अधिकारी आवेदक के सभी दस्तावेजों की जाँच करते हैं। अब नए नियम में आधार नंबर से यह पहचान हो जाएगी कि कहीं वह अन्य राज्य का मतदाता तो नहीं है।

चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, एक ही व्यक्ति के दो अग-अलग राज्यों की मतदाता सूची में भी नाम नहीं हो सकता। हालाँकि, देश में ऐसे हजारों-लाखों लोग हैं, जिनके पास दो राज्यों के वोटर आईडी हैं, लेकिन वे अवैध हैं। इसी खामी को दूर करने के लिए चुनाव आयोग ने वोटर आईडी को आधार से जोड़ने का काम शुरू किया है, ताकि जिनके पास दोहरे वोटर कार्ड हैं उनकी पहचान की जा सके।

सूची में नाम शामिल कराने के लिए क्या करना होगा

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में मतदान करने के लिए वहाँ की मतदाता सूची में नाम होना आवश्यक है। मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए कुछ प्रक्रिया हैं, जिनका पालन करना आवश्यक होता है। अगर कोई व्यक्ति वहाँ या किसी राज्य की मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराना चाहता है तो उसे फॉर्म 6 (Form 6) भरना होगा।

इसके अलावा, अगर कोई मतदाता सूची से अपना नाम हटाना चाहता है तो उसे फॉर्म 7 (Form 7) भरना होगा। अगर किसी व्यक्ति के विवरण (नाम या पता में सुधार) में किसी तरह का सुधार कराना है तो उसे फॉर्म 8 (Form 8) भरना होगा। इसके साथ ही फॉर्म 6B भरना अनिवार्य है। इस फॉर्म के जरिए आधार को वोटर आईडी से लिंक किया जाएगा।

पाकिस्तान से आए विस्थापितों का नाम होगा शामिल

इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें उन लोगों को भी मतदान का मौका मिल सकता है, जो 1947 में देश का बँटवारा होने के बाद पाकिस्तान के सियालकोट से विस्थापित होकर आए थे। पिछले 75 सालों में उन्हें स्थानीय चुनावों से दूर रखा गया। वे लोकसभा चुनावों में मतदान तो कर सकते हैं, लेकिन विधानसभा और पंचायत चुनावों में नहीं।

उम्मीद है कि इस बार हो रही मतदाता सूची संशोधन में उनके नाम को शामिल किया जाएगा। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, लगभग 5,400 परिवार पाकिस्तान से जम्मू के सीमावर्ती इलाकों में आकर बसे थे। इनमें अधिकांश हिंदू और सिख हैं।

ये सभी लोग जम्मू संभाग के कठुआ, सांबा और जम्मू जिलों में रहते हैं। समुदाय के नेताओं का कहना है कि ये परिवार बढ़़कर अब 22,000 से अधिक हो गए हैं। इनमें कुल 4 लाख लोग शामिल हैं। वहीं, माना जा रहा है कि इन परिवारों के 1.5 लाख से अधिक वयस्कों को मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।

पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी एक्शन समिति के अध्यक्ष लाभा राम गाँधी का कहना है कि मतदाता सूची में विस्थापितों के नामों को शामिल करने से कश्मीर की पार्टियों को दिक्कत है। यह प्रदेश के चुनावी परिदृश्य को बदल देगा, इसलिए वे ऐसा नहीं चाहते।

उन्होंने कहा, सरकार को यह स्वीकार करने में लगभग 75 साल लग गए कि विस्थापितों भी जम्मू-कश्मीर का हिस्सा हैं। हमें कभी भी जम्मू-कश्मीर का हिस्सा नहीं माना गया। अब जब हमें जम्मू-कश्मीर में वोटिंग का अधिकार मिलने जा रहा है तो कश्मीरी नेता इसे मुद्दा बना रहे हैं। फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या हम ‘बाहरी’ हैं।”

गैर-स्थानीय को मतदाता बनाने पर फारूक-महबूबा बेचैन

गैर-स्थानीय लोगों को मतदान का अधिकार देने पर जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय दलों ने आपत्ति जताई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने इस पर चर्चा के लिए 22 अगस्त को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है।

वहीं, पीडीपी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भाजपा के लिए राजनीतिक लेबोरेटरी बन गया है। उन्होंने कहा कि गैर-स्थानीय लोगों का नाम मतदाता सूची में जोड़ना जम्मू-कश्मीर में चुनावी लोकतंत्र के ताबूत में आखिरी कील होगा।

महबूबा ने कहा कि भ्रामकों खबरें फैलाते हुए कहा कि भाजपा राज्य में बाहर से 25 लाख अपने मतदाता ला रही है। उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों को मतदान का अधिकार देकर जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोगों को शक्तिहीन बनाने की साजिश रची जा रही है।

आतंकियों ने भी नागरिकों को निशाना बनाने की दी चेतावनी

शरणार्थियों को विधानसभा चुनाव में भी हिस्सा लेने देने और राज्य में रहने वाले देश के अन्य क्षेत्रों के लोगों को भी मतदाता सूची में शामिल करने के फैसले से सिर्फ फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे राजनीतिक लोग ही नहीं व्याकुल हैं। राज्य में शरण पा रहे और अपनी गतिविधयाँ चला रहे इस्लामी आतंकी भी बेचैन हैं।

पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) समर्थित आतंकी ग्रुप कश्मीर फाइटर ने गैर-कश्मीरियों पर हमले करने की धमकी दी है। आतंकी वेबसाइट दी गई धमकी में उसने कहा, “सभी गैर-कश्मीरियों को वोट देने के अधिकार के बाद यह सामने आ गया है कि दिल्ली में गंदा खेल खेला जा रहा है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि हम अपने हमलों को तेज करें और अपने लक्ष्यों को प्राथमिकता दें।”

‘कार्तिकेय 2’ ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ को पीछे छोड़ा, पहले दिन ₹1 करोड़ के लिए भी तरस गई तापसी पन्नू की फिल्म: खुद कहा था – बॉयकॉट करो

निखिल सिद्धार्थ की फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ ने दुनिया भर में 60 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार कर लिया है, वहीं तापसी पन्नू की ‘दोबारा’ दर्शकों के लिए तरस गई। 8 दिनों में ‘कार्तिकेय 2’ ने 60.12 करोड़ रुपए की कमाई वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर कर ली है, जबकि अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित तापसी पन्नू की फिल्म ‘दोबारा’ ने पहले दिन भारत में मात्र 72 लाख रुपए का नेट कारोबार किया। इसका बजट 30 करोड़ रुपए से भी अधिक है।

भगवान श्रीकृष्ण और द्वारका पर जुड़ी फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ की बात करें तो हिंदी बेल्ट में भी इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और शोज की संख्या 3000 के पार पहुँच चुकी है। शुक्रवार (19 अगस्त, 2022) को तो इसके हिंदी वर्जन ने दो बड़े बजट वाली फिल्मों आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ और अक्षय कुमार की ‘रक्षा बंधन’ से भी ज्यादा कमाई की। हिंदी में इसकी घरेलू नेट कमाई अब तक सवा 8 करोड़ रुपए है, जो आगे और बढ़ेगी।

वहीं ‘दोबारा’ की बात करें तो अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू ने हिन्दुओं पर तंज कसते हुए खुद कहा था कि वो चाहते हैं कि इस फिल्म का बॉयकॉट हो। हालाँकि, दर्शकों ने उन्हें इस लायक भी नहीं समझा। बॉयकॉट के बिना ही फिल्म धड़ाम हो गई। 9वें दिन ‘लाल सिंह चड्ढा’ ने मात्र 1.25 करोड़ रुपए कमाए, जबकि ‘कार्तिकेय 2’ हिंदी का कलेक्शन 2.46 करोड़ रुपए रहा। 200 करोड़ रुपए बजट वाली आमिर खान और करीना कपूर की इस मूवी का कलेक्शन 51 करोड़ के आसपास झूल रहा है।

हिंदी फिल्मों से अच्छी कमाई तो धनुष और नित्य मेनन की तमिल फिल्म ‘Thiruchitrambalam’ ने कर ली है, जिसने 2 दिनों में 17.25 करोड़ रुपए कमा डाले। दक्षिण भारतीय फिल्मों को लेकर उत्तर भारत में भी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। बॉलीवुड फिल्मों में लगातार हिन्दुओं की भावनाएँ आहत किए जाने के कारण लोग उनका बॉयकॉट कर रहे हैं और दक्षिण भारत की फिल्मों में संस्कृति और इतिहास से जुड़ी चीजें दिखाए जाने के कारण लोग उन्हें पसंद कर रहे हैं।

तुम्हारी मर्जी चाहे जैसे करो/जिसके साथ करो, पर अपनी सोलोगामी के लिए सेक्स में ही मत समेटो स्त्री-पुरुष का संबंध: केवल रस्म नहीं है विवाह, सुहाग, सिंदूर…

मॉर्डन होने के नाम पर आज सबसे पहले हिंदू मान्यताओं को तार-तार करने का काम तेजी से हो रहा है। इसी क्रम में विवाह की अवधारणा को भी तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। ये बात सामान्य बनाई जा रही है कि विवाह खुद से भी हो सकता है। जरूरी नहीं कि मंगलसूत्र और सिंदूर लगाने के लिए किसी आदमी के साथ ही रहना पड़े।

आपने कुछ दिन पहले क्षमा बिंदु के बारे में सुना होगा। खुद से विवाह रचाने वाली पहली महिला। इसके बाद आप कनिष्का सोनी के बारे में भी सुन रहे होंगे जिन्हें आदमियों पर यकीन नहीं है इसलिए उन्होंने खुद से शादी कर ली है।

उनका कहना है कि सेक्स के लिए आदमी की जरूरत नहीं होती है। तकनीक इतनी बढ़ गई है कि लड़कियाँ खुद खुश रह सकती हैं। इसके अलावा अगर सिंदूर-मंगलसूत्र पहनना है तो खुद से शादी करके भी पहना जा सकता है, ये भी इन लोगों का तर्क है।

अब जाहिर सी बात है कि खुद को भारतीय संस्कृति से जुड़ा दिखाकर जो खुद से सिंदूर-मंगलसूत्र लगाने की बातें की जा रही है, इन लोगों को इनका अर्थ और मायने तक नहीं मालूम होंगे। इन्हें केवल एक शो-पीस की तरह इन आभूषणों का इस्तेमाल करना है और दुनिया को ये बताना है कि अब तक जो शादी विवाह हुए वो केवल सेक्स के लिए हुए। बच्चे पैदा करने के लिए हुए। इसके अलावा और किसी काम के लिए नहीं।

केवल सेक्स के लिए नहीं होती शादियाँ

इनके तर्कों पर यदि भारतीय संस्कृति को देखेंगें तो शायद हर परिवार, हर दंपत्ति से घृणा करने लगें और हर औरत के माथे में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र एक बंदिश या कोई आभूषण मात्र लगे। लेकिन इनके तर्कों से ऊपर भी लोग हैं जिनके लिए शादी-विवाह मजाक नहीं है। कोई ऐसी रस्म भर नहीं है जिसे अकेले में निभा लिया जाए और फोटो अपलोड कर दी जाए। इनके मायने हैं। इनके अर्थ हैं। शादी के वक्त लिए जाने वाले सात फेरों से लेकर माँग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र का अर्थ है।

आधुनिक समाज में कोई किसी को रोकने नहीं जाता कि उन्हें खुद से शादी करनी है तो वो ऐसा न करें। क्षमा ने भी ऐसा किया था और कनिष्का ने भी यही किया है। हो सकता है आने वाले समय में और ऐसे उदाहरण देखने को मिलें। लेकिन इस नए किस्म के आधुनिकीकरण में पौराणिक मान्यताओं का मखौल नहीं उड़ना चाहिए। ऐसे अनगिनत लोग हैं जो शादी को जीवन भर का साथ मानते हैं और बुढापे के अंतिम क्षण तक एक दूसरे का हर घड़ी साथ देते हैं। पवित्र रिश्ते को सेक्स में सीमित कर देना केवल तुच्छ और कुंद मानसिकता का उदाहरण है।

कोर्ट ने बताई सिंदूर-मंगलसूत्र की महत्ता

हाल में सुप्रीम कोर्ट ने भी एक तलाक को खारिज करते हुए भारतीय महिलाओं के लिए सिंदूर और मंगलसूत्र की महत्ता को बताया था। कोर्ट ने कहा था, “हिंदू धर्म में शादीशुदा औरत के सुहाग और सिंदूर की अहमियत होती है। समाज उनको उसी नजरिए से देखता है। पत्नियाँ अपने पति से अलग भी रहें तो वो सिंदूर के सहारे अपना जीवन काट लेती हैं।”

कोर्ट ने यह टिप्पणी,उस महिला की अर्जी पर की थी जो अपनी शादी को बहाल करवाने की माँग लेकर आई थी। 18 साल से पति से अलग रहने के बावजूद महिला चाहती थी कि उससे उसके विवाहिता होने का दर्जा न छीना जाए।

उसने कोर्ट को बताया कि वह अपने पति के घर पर किसी क्रूरता का शिकार नहीं हुई और न ही अपनी मर्जी से घर छोड़कर आई है। वह नहीं चाहती कि उसके वैवाहिक होने का दर्जा बदला जाए। वहीं मध्य प्रदेश का भिंड निवासी पति ने कहा कि वो अब ‘साधु’ हो चुका है। वो वैवाहिक जीवन में प्रवेश नहीं कर सकता इसलिए उसने तलाक लिया है।

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस यू यू ललित की अगुआई वाली बेंच ने अपनी टिप्पणी दी। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से समाज अकेली महिलाओं के साथ व्यवहार करता है, उसे देखते हुए विवाह और विवाह की स्थिति की अवधारणा काफी महत्वपूर्ण है। महिलाओं के लिए शादी का बहुत महत्व है। इसलिए कोर्ट तलाक को रद्द करेगी और इससे पति की स्थिति पर भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।