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डील से अनजान होने के NDTV के दावों की अडानी ने खोली पोल, बताया- प्रणय और राधिका रॉय पर SEBI की रोक नहीं आता सौदे के आड़े

NDTV ने बीते दिनों अडानी समूह के ऊपर आरोप लगाया था कि उसने RRPR के मालिक प्रणय रॉय और राधिका रॉय से पूछे बिना एनडीटीवी के शेयर्स को खरीदा है। अब इस मामले पर अडानी समूह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और NDTV के आरोपों को आधारहीन बताया है।

अडानी समूह ने 26 अगस्त को अपने बयान में कहा, “वीसीपीएल को दिनांक 23 अगस्त 2022 को RRPR की तरफ से वारंट एक्सरसाज नोटिस का जबाव मिला था, जिसमें 19,90,000 वारंट को 19,90,000 एक्विटी शेयर में बदलने की बात थी। NDTV द्वारा 24 अगस्त 2022 के अपने डिस्क्लोजर में भी इसका जिक्र किया गया था।”

बता दें कि VCPL (विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड) अडानी ग्रुप की अप्रत्यक्ष सहायक कंपनी है। वहीं, NDTV की प्रमोटर कंपनी RRPR होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी है, जिसके मालिक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय हैं। NDTV में RRPR की 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसको खरीदने को लेकर यह पूरा मामला उठा है।

RRPR ने दावा किया था कि वारंट को इक्विटी शेयर में बदलने के लिए SEBI से लिखित मंजूरी की आवश्यकता थी। हालाँकि, अडानी की सहायक कंपनी विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) ने ने RRPR के इस दावे को खारिज कर दिया।

वीसीपीएल का कहना है कि RRPR बाजार नियामक संस्था SEBI के आदेश का पक्षकार नहीं है। इसलिए SEBI के प्रतिबंध उस पर लागू नहीं होते। बता दें कि SEBI ने प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर प्रतिभूतियों (Securities) में किसी भी तरह के लेन-देन के लिए प्रतिबंध लगा रखा है।

कंपनी ने कहा, “VCPL ने वारंट एक्सरसाइज नोटिस एक अनुबंध (Contract) के तहत जारी किया है, जो RRPR के लिए बाध्यकारी है। इसलिए RRPR अपने अनुबंध में लिखी गई बातों का पालन करने के लिए बाध्य है।”

VCPL का यहाँ स्पष्ट कहना है कि वारंट एक्सरसाइज से प्रतिभूतियों में लेनदेन के लिए प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर लगाए SEBI के प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं हुआ। इसलिए नियामक निकाय (SEBI) से किसी पूर्व लिखित अनुमोदन की आवश्यकता भी नहीं थी।

कंपनी ने आगे कहा, “23 अगस्त 2022 को वारंट एक्सरसाइज पर RRPR के 19,90,000 इक्विटी शेयर के लिए 1.99 करोड़ रुपए देय था, जो VCPL द्वारा भुगतान किया गया और RRPR को मिला। RRPR द्वारा ली गई राशि या ऑरिजिनल वारंट सर्टिफिकेट को वापस करने का कोई भी प्रयास VCPL के वारंट एक्सरसाइज, जो कि पूरा हो चुका है, पर कोई भी कानूनी प्रभाव नहीं डाल सकता।”

अडानी समूह ने RRPR द्वारा दिए गए तर्कों को आधारहीन, कानूनी रूप से महत्वहीन और सच्चाई से दूर बताया। कंपनी ने कहा कि RRPR अपने दायित्वों को पूरा करने और वारंट एक्टरसाइज नोटिस में बताए गए इक्विटी शेयरों को उसे आवंटित करने के लिए बाध्य है।

अडानी समूह ने खरीदा NDTV

बता दें कि हाल में खबर आई थी एएमजी मीडिया नेटवर्क लिमिटेड (AMNL) ने NDTV में अप्रत्यक्ष रूप से 29.18% शेयर्स खरीदे हैं। ये सौदा ‘विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL)’ और ‘RRPR होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए हुआ। जहाँ VCPL पूरी तरह से AMNL की 100% सब्सिडियरी कंपनी है, वहीं RRPR एनडीटीवी की प्रमोटर कंपनी है।

अडानी समूह पर NDTV ने लगाया इल्जाम

अडानी समूह द्वारा हिस्सेदारी खरीदने की खबर आने के बाद सोशल मीडिया पर हल्ला मच गया कि अब तक अडानी ग्रुप की आलोचना करने वाला एनडटीवी उसके अधीन काम करेगा। इन सभी पोस्ट के बीच एनडीटीवी न्यूज चैनल ने दावा किया प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर सिक्‍योरिटीज की प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष खरीद-फरोख्‍त पर SEBI ने 26 नवंबर 2022 तक के लिए प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसलिए, कंपनी के अधिग्रहण के लिए SEBI की मंजूरी की जरूरत होगी।

इसके अलावा एनडीटीवी की सीईओ सुपर्णा सिंह का भी इस संबंध में बयान आया था। उन्होंने अपने दर्शकों का भरोसा एनडीटीवी की पत्रकारिता पर बनाए रखने के लिए कहा था। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि ये पूरी डील प्रणय रॉय और राधिका रॉय की सहमति के बिना हुई है।

उन्होंने दावा किया था कि 32% हिस्सेदारी के साथ पति-पत्नी NDTV में सबसे बड़े शेयरधारक बने रहेंगे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि प्रणय रॉय और राधिका रॉय को इस डील की जानकारी ही नहीं थी। कर्मचारियों को भेजे गए इंटरनल सन्देश में CEO ने आगे रेगुलेटरी और कानूनी कदम उठाने की बात भी कही थी।

एनडीवी को पता था पैसे कहाँ से आ रहे हैं

उल्लेखनीय है कि विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी 2008 में अस्तित्व में आई थी। 2009 में इसने NDTV की होल्डिंग कंपनी RRPRH को 403.85 करोड़ रुपए का लोन दिया। इसके बदले RRPR ने VCPL को वारंट जारी किए थे, जो VCPL को RRPR में 99.9 फीसदी इक्विटी शेयर में वारंट को तब्‍दील करने का अधिकार देते थे।

उसी साल VCPL को शिनानो रिटेल प्राइवेट लिमिटेड से असुरक्षित लोन मिला था। शिनानो रिटेल पूरी तरह रिलायंस ग्रुप की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी थी। अब चूँकि इन सब डील्स के दस्तावेज सार्वजनिक हैं, इसलिए एनडीटीवी जानता था कि उसे एक ऐसे समूह से पैसे आ रहा है, जिसका संबंध रिलायंस समूह से है।

‘जम्मू-कश्मीर में बनाऊँगा अपनी नई पार्टी’ : कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद बोले गुलाम नबी आजाद, 5 और नेताओं ने दिया इस्तीफा

कॉन्ग्रेस पार्टी से शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को इस्तीफा देने के बाद गुलाम नबी आजाद ने ऐलान किया है कि वो जम्मू-कश्मीर में नई पार्टी का गठन करेंगे। उन्होंने अपना यह बयान भाजपा से जुड़ने के कयासों पर दिया। इस बीच जम्मू-कश्मीर में 5 अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी गुलाम नबी आजाद के समर्थन में पार्टी से इस्तीफा दिया।

गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को कॉन्ग्रेस के हर पद से इस्तीफा देने के बाद भाजपा से जुड़ने के कयासों का खंडन करते हुए इंडिया टुडे से बात की। उन्होंने कहा, “मैं जम्मू-कश्मीर जाऊँगा और राज्य में अपनी खुद की पार्टी बनाऊँगा। उसकी राष्ट्रीय संभावनाओं पर बाद में विचार करेंगे।” मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर में नई पार्टी बनाने की बात आजाद ने ऐसे समय में कही है जब प्रदेश में कुछ ही महीनों में चुनाव होने वाले हैं।

5 अन्य नेताओं ने छोड़ी कॉन्ग्रेस

बता दें कि गुलाम नबी आजाद के पार्टी से हटने के बाद जिन पाँच नेताओं व पूर्व विधायकों ने उनके समर्थन में अपना इस्तीफा दिया है। उनके नाम जीएम सरूरी, हाजी अब्दुल राशिद, मोहम्मद अमीन भट्ट, गुलजार अहमद वानी और चौधरी मोहम्मद अकरम हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री आर एस चिब, पूर्व मंत्री जुगल किशोर शर्मा और महासचिव अशवनी हांडा ने भी त्याग पत्र दे दिया है।

गुलाम नबी आजाद के पत्र में राहुल गाँधी को बनाया गया निशाना

गौरतलब है कि गुलाम नबी आजाद ने कॉन्ग्रेस को छोड़ने के साथ ही सोनिया गाँधी को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने राहुल गाँधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि कैसे राहुल गाँधी के राजनीति में प्रवेश के बाद हालात बदले। अनुभवी नेताओं को किनारे कर दिया गया और चाटुकारों की अनुभवहीनों मंडली पार्टी को चलाने लगी।

पूर्व कॉन्ग्रेस नेता ने राहुल गाँधी द्वारा सरकारी अध्यादेश को फाड़ने की घटना को बेहद बचकाना कहा। उन्होंने कहा कि ये अध्यादेश प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने पारित किया था। इस तरह उसे फाड़ देने से भारत सरकार की गरिमा विकृत हुई और 2014 के चुनावों में इस घटना ने यूपीए की हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नदीमर्ग में हिंदुओं के नरंसहार की फाइल फिर खुलेगी, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का आदेशः 24 कश्मीरी पंडित (11 पुरुष+11 महिला+2 बच्चे) 2003 में भून दिए गए थे

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने एक दशक पहले बंद हो चुके नदीमर्ग नरसंहार केस (Nadimarg Massacre Case) को फिर से खोलने का आदेश दिया है। यह नरसंहार मार्च 2003 में पुलवामा जिले के नदीमर्ग गाँव मे हुआ था। लश्कर आतंकियों ने 24 कश्मीरी हिन्दुओं की निर्मम हत्या कर दी थी।

न्यायमूर्ति संजय धर ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे फिर से खोलने का आदेश शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को दिया। इस याचिका में दिसंबर 2011 के आदेश को वापस लेने की माँग की गई थी। उस समय आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी।

नदीमर्ग नरसंहार मामले में स्थानीय जैनपोरा थाने में धारा 302, 450, 395, 307, 120-बी, 326, 427 आरपीसी, 7/27 आर्म्स एक्ट और धारा 30 के तहत दर्ज किया गया था। शुरुआती जाँच के बाद 7 आरोपितों के खिलाफ प्रधान सत्र न्यायालय पुलवामा में चालान पेश किया गया। बाद में केस शोपियाँ के प्रधान सत्र न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया गया।

शोपियाँ की अदालत को अभियोजन पक्ष ने बताया था कि गवाह डर के कारण घाटी छोड़कर जा चुके हैं। वे सुनवाई के दौरान हाजिर नहीं हो सकते। इसके बाद केस बंद कर दिया गया। लेकिन, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के ताजा आदेश से इस मामले में एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2022 को होगी।

क्या है नदीमर्ग नरसंहार

शोपियाँ जिले में नदीमर्ग (अब पुलवामा में) एक हिन्दू बहुल गाँव था, जिसकी कुल आबादी मात्र 54 थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद के पैतृक गाँव से 7 किलोमीटर दूर स्थित इस गाँव में 23 मार्च, 2003 की रात सब तबाह हो गया। जब पूरा देश भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में शहीद दिवस मना रहा था, तब नदीमर्ग में हिन्दुओं का नरसंहार हो रहा था। उस दिन 7 आतंकवादी गाँव में घुसे और सभी हिन्दुओं को चिनार के पेड़ के नीचे इकठ्ठा करने लगे। रात के 10 बजकर 30 मिनट पर इन आतंकियों ने 24 हिन्दुओं की गोली मार कर हत्या कर दी। गौर करने वाली बात थी कि 23 मार्च को पाकिस्तान का राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है।

मरने वालों में 70 साल की बुजुर्ग महिला से लेकर 2 साल का मासूम बच्चा तक शामिल था। क्रूरता की हद पार करते हुए एक दिव्यांग सहित 11 महिलाओं, 11 पुरुषों और 2 बच्चों पर बेहद नजदीक से गोलियाँ चलाई गई थी। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि पॉइंट ब्लेंक रेंज से हिन्दुओं के सिर में गोलियाँ मारी गई थी। आतंकी यही नहीं रुके उन्होंने घरों को लूटा और महिलाओं के गहने उतरवा लिए। न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार ने इस घटना का जिम्मेदार ‘मुस्लिम आतंकवादियों’ बताया। अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट ने भी इसे धर्म आधारित नरसंहार माना था।

आतंकियों को मदद पड़ोस के मुस्लिम बहुलता वाले गाँवों से मिली थी। उस दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस के इंटेलिजेंस विंग को संभाल रहे कुलदीप खोड़ा भी मानते हैं कि बिना स्थानीय सहायता के नदीमर्ग नरसंहार को अंजाम ही नहीं दिया जा सकता था। नरसंहार के चश्मदीद बताते है कि आतंकियों ने हिन्दूओं को उनके नाम से पुकारकर घरों से बाहर निकाला था। यानी वे पहले से ही इस योजना पर काम कर रहे थे। आतंकियों ने गाँव का दौरा किया हो, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण में राज्य सरकार की भूमिका भी संदेह वाली बनी रही। उस इलाके की सुरक्षा में लगी पुलिस को हटा लिया गया था। घटना से पहले वहाँ 30 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, जिनकी संख्या उस रात घटाकर 5 कर दी गई।

नदीमर्ग नरसंहार के बाद जम्मू-कश्मीर के हिन्दुओं के मन में बैठ गया कि वे राज्य में सुरक्षित नहीं हैं। इस नरसंहार के करीब एक महीने बाद आतंकी जिया मुस्तफा गिरफ्तार किया गया था। वह पाकिस्तान के रावलकोट का रहने वाला था और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तय्यबा का एरिया कमांडर था। उसने बताया था कि लश्कर के अबू उमैर ने उसे ऐसा करने के लिए कहा था। मुस्तफा के मुताबिक वह उन बैठकों का हिस्सा रहा था, जहाँ भारत के हिन्दू मंदिरों पर आतंकी हमले की योजना बनाई गई थी। 

जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में 24 अक्टूबर 2021 को सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच एक मुठभेड़ में जिया मुस्तफा मारा गया था। कश्मीर की कोट बलवाल जेल में बंद मुस्तफा को 10 दिनों की रिमांड पर लिया गया था। भाटा दूरियान नाम की जगह पर पहचान के लिए उसे ले जाते वक़्त आतंकियों ने जवानों पर फायरिंग कर दी थी। आग से घिर जाने के चलते आतंकी मुस्तफा को निकाला नहीं सके। बाद में उसकी लाश बरामद की गई।

अमेरिका में ‘बाबा का बुलडोजर’ वाली परेड पर IBA का माफी माँगने से इनकार, कहा- भारत में यह अवैध निर्माणों को गिराता है

भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर परेड के दौरान अमेरिका के न्यू जर्सी में बुलडोजर शामिल करने वाले इंडियन बिजनेस एसोसिएशन (IBA) ने माफी माँगने से इनकार कर दिया है। एसोसिएशन का कहा कि परेड में बुलडोजर को शामिल करके उसने कुछ भी गलत नहीं किया है।

टाउनशिप काउंसिल की बैठक में 24 अगस्त 2022 को आईबीए के अध्यक्ष चंद्रकांत पटेल ने कहा कि संगठन ने कुछ भी गलत नहीं किया है। इसलिए माफी नहीं माँगेगा। पटेल ने कहा, “बुलडोजर केवल सरकारी भूमि (भारत में) पर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का काम करता है।” चार घंटे तक चली बैठक में कई स्थानीय लोगों ने इस पर अपनी राय रखी।

टाउनशिप काउंसिल की बैठक में स्थानीय लोगों के साथ भारतीय मुसलमानों और हिंदुओं ने भी भाग लिया (फोटो साभार- MEE)

दरअसल, भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अमेरिका के न्यू जर्सी के एडिसन में इंडियन बिजनेस एसोसिएशन ने परेड निकाली थी। इस परेड में संगठन ने बुलडोजर को भी शामिल किया था, जिसका नाम नाम ‘बाबा का बुलडोजर’ (Baba ka Bulldozer) रखा था।

आयोजकों ने बुलडोजर के ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) का पोस्टर भी लगाया था। साथ ही उन्होंने सड़कों पर बुलडोजर भी घुमाया।

इस तस्वीर को देखने के बाद इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल भड़क गया। उसने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल IAM काउंसिल से ट्वीट करके बताया कि उसे बुलडोजर देख कितनी परेशानी हुई है।

आईएएम काउंसिल ने लिखा, “आज, न्यू जर्सी के ए़़डिसन में दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों ने उस बुलडोजर के साथ मार्च किया, जो भारत में मुस्लिमों के घरों और जीवन को तबाह करने के लिए भाजपा सरकार का हथियार बन चुका है।”

इस ट्वीट को देखने के बाद कई अन्य मुस्लिमों ने भी प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा था, “भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी ये लोग मुस्लिमों के खिलाफ अपनी घृणा को नहीं छिपा पा रहे।”

वहीं, अमेरिका में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन से जुड़े समाजसेवी जेली थॉमस ने कहा, “जैसे कभी अमेरिका में अश्वेतों को पेड़ों से बाँधकर मार दिया जाता था और रस्सी अश्वेतों को डराने की प्रतीक बन गई थी, उसी तरह बुलडोजर अल्पसंख्यकों को डराने का प्रतीक है।”

अपडेट : इंडियन बिजनेस एसोसिएशन (IBA) ने मुस्लिमों की आहत भावनाओं को देख न्यू जर्सी परेड में बुलडोजर शामिल किए जाने पर खेद जताया है। यह परेड भारत की स्वतंत्रता दिवस के मौके पर निकाला गया था। शुरुआत में आईबीए ने इसके लिए माफी माँगने से इनकार किया था। लेकिन दबाव बढ़ने पर उसने 30 अगस्त 2022 को खेद जताते हुए विवाद का निपटारा करने की कोशिश की है।

हिमंता सरकार का आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज: असम पुलिस ने बोंगाईगाँव से अल-कायदा के एक और आतंकी को किया गिरफ्तार, मदरसे में था मौलवी

पुलिस ने शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को असम ने बोंगाईगाँव जिले से एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जाँच में इस आतंकी का संबंध अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से जुड़ा पाया गया है। फिलहाल यह आतंकी पुलिस हिरासत में है, जहाँ इससे कड़ी पूछताछ की जा रही है।

पुलिस ने यह गिरफ्तारी गोलपारा जिला पुलिस द्वारा बोंगाईगाँव जिले के जोगीघोपा इलाके से की है। गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी की पहचान हाफिजुर रहमान मुफ्ती के रूप में हुई है। हाफिजुर इलाके के एक मदरसे में पढ़ाता है।

गोलपारा के SP वीवी राकेश रेड्डी ने बताया, “गोलपारा जिला पुलिस ने बोंगाईगाँव जिले के जोगीघोपा इलाके से एक्यूआईएस/एबीटी से जुड़े हाफिजुर रहमान मुफ्ती को गिरफ्तार किया है। वह एक मदरसे में शिक्षक है। एक सप्ताह के भीतर AQIS/ABT से संबंध के मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है।”

गौरतलब है कि असम पुलिस अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से जुड़े आतंकियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। इस अभियान में एक के बाद आतंकी पुलिस के हत्थे चढ़ रहे हैं।

बता दें AQIS और ABT से जुड़े आतंकियों की यह पहली गिरफ्तारी नहीं है। गत शनिवार (20 अगस्त 2022) को पुलिस ने गोलपारा जिले से अब्दुस सुभान और जलालुद्दीन शेख नामक दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ये दोनों ही अलग-अलग मस्जिदों में इमाम थे।

इन संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी पर पुलिस ने बताया था कि ये दोनों बांग्लादेश से आए जिहादी आतंकियों को रहने और खाने-पीने का इंतजाम करते थे। इसके साथ ही ये AQIS की ओर से गोलपारा जिले में स्लीपर सेल की भर्ती कर रहे थे।

इसी प्रकार, 28 जुलाई 2022 को भी असम पुलिस ने 11 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद हुई पूछताछ में इनके संबंध AQIS और ABT से जुड़े पाए गए थे।

बचकाना हरकत, रिमोट कंट्रोल मॉडल, चापलूसों की मंडली… राहुल गॉंधी के 2013-2022 तक की ‘राजनीति’ का गुलाम नबी आजाद ने 5 पन्नों में किया पोस्टमार्टम

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को पार्टी छोड़ दिया। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वे काफी समय से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे थे।

पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लिखे अपने त्याग-पत्र में गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उन्होंने इंदिरा गाँधी से लेकर सोनिया गाँधी तक के नेतृत्व में काम किया और पार्टी की मजबूती में हर तरह का योगदान दिया। हालाँकि, आजाद ने त्याग-पत्र में राहुल गाँधी को अपने निशाने पर रखा।

राहुल गाँधी को लेकर गुलाम नबी ने लिखा, “दुर्भाग्य से राहुल गाँधी की राजनीति में प्रवेश के बाद, खासकर जनवरी 2013 में आपके (सोनिया गाँधी) द्वारा उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाने के बाद उन्होंने पार्टी में पहले से मौजूद परामर्श लेने के मैकेनिज्म को ध्वस्त कर दिया। सभी वरिष्ठ एवं अनुभवी नेताओं को किनारे कर दिया गया और चाटुकारों की अनुभवहीन नई मंडली पार्टी को चलाने लगी।”

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इस अपरिपक्वता का सबसे बड़ा उदाहरण राहुल गाँधी द्वारा सार्वजनिक रूप से सरकारी अध्यादेश को फाड़ना था। उन्होंने कहा, “यह अध्यादेश कॉन्ग्रेस कोर ग्रुप से बनाया गया था, जिसे प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने पारित किया था और बाद में राष्ट्रपति ने इसे अनुमोदित किया था।”

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि राहुल गाँधी की इस ‘बचकाना’ हरकत ने प्रधानमंत्री और भारत सरकार की गरिमा को विकृत कर दिया। उन्होंने कहा कि इस एक गलती ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में यूपीए की हार में महत्वपूर्ण निभाई। दक्षिणपंथी दलों और कुछ कॉरपोरेट ने इसे मुद्दा बनाया।

गुलाम नबी यहीं नहीं रूके। उन्होंने सोनिया गाँधी को याद दिलाया कि सीताराम केसरी को कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाने के बाद पार्टी के दो-दो चिंतन शिविरों में कुछ सिफारिशें की गई थीं। इसके अलावा, साल 2013 के जयपुर शिविर में भी उन्होंने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ मिलकर कुछ सिफारिशें पेश की थीं, जिसे कॉन्ग्रेस वर्किंग ग्रुप ने भी पारित किया था। इन सभी सिफारिशों को कभी लागू नहीं किया गया। यहाँ तक 2013 के जयपुर शिविर में की सिफारिशों को साल 2014 से पहले लागू किया जाना था, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया।

गुलाम नबी ने अपने त्याग-पत्र में कहा कि इन सिफारिशों को लागू करने के लिए वह सोनिया गाँधी और पार्टी के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गाँधी से कई बार मिले, लेकिन उनकी बातों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।

उन्होंने कहा, साल 2014 के बाद से आपके (सोनिया गाँधी) और राहुल गाँधी के नेतृत्व में पार्टी दो लोकसभा चुनावों में अपमानजनक तरीके हारी। 2017-2022 के बीच 49 विधानसभा चुनावों में से 39 में पार्टी की हार हुई। पार्टी केवल चार विधानसभा चुनाव जीत पाई।”

उन्होंने कहा, “साल 2019 के चुनावों के बाद पार्टी की स्थिति और बदतर हुई। उसके बाद आवेश में आकर राहुल गाँधी ने पद छोड़ दिया और आपने (सोनिया गाँधी) अंतरिम अध्यक्ष का पदभार सँभाला। तीन साल बाद भी आप इस पद पर बनी हुई हैं। यूपीए सरकार की सबसे बुरी दुर्गति ‘रिमोट कंट्रोल मॉडल’ के कारण हुई, जो पार्टी में भी लागू कर दिया गया।”

राहुल गाँधी को निशाने पर लेते हुए उन्होंने पत्र में सोनिया गाँधी को कहा, “आप तो नाममात्र की प्रमुख हैं, जबकि पार्टी से संबंधित सारे महत्वपूर्ण निर्णय राहुल गाँधी और यहाँ तक कि उनके सिक्योरिटी गार्ड और निजी सहायक (PA) द्वारा लिए जाते हैं।”

गुलाम नबी आजाद ने आरोप लगाया कि जब अगस्त 2020 में पार्टी के अंदर जारी घमासान को लेकर उन्होंने और उनके साथ 22 अन्य वरिष्ठ नेताओं ने हाईकमान को लिखा तो ‘चापलूसों की मंडली’ ने उन पर हमले शुरू कर दिए। उन्होंने कहा कि चापलूसों की इस मंडली का उत्साहवर्धन राहुल गाँधी और पार्टी के कुछ महासचिव करते रहे।

उन्होंने कहा कि देश भर पार्टी के किसी भी स्तर पर कोई चुनाव नहीं होता और चापलूसों को पद पर बैठा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा और राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों के लिए राजनीतिक जगह बची रह गई है।

बता दें कि गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को 5 पन्नों का इस्तीफा भेजा है। इसमें पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर संजय गॉंधी तक का जिक्र है। गुलाम नबी ने पत्र में सोनिया गाँधी को ‘रबर स्टांप’ की तरह बताया है।

सेवा की मूर्ति बता राइस बैग छिपाए, मदर का तमगा दे मिशनरी में बच्चों को बाँधकर रखना छिपायाः जिस टेरेसा को इंदिरा की इमरजेंसी में भी दिखी थी ‘खुशी’, वह ‘संत’ कैसे

1910 में 26 अगस्त को अल्बेनिया के स्काप्जे में एक लड़की पैदा हुई। नाम रखा गया- गोंझा बोयाजिजू। दुनिया ने जाना ‘मदर टेरेसा’ के नाम से। उसे करुणा और सेवाभाव की मूर्ति के तौर पर वैसे ही प्रचारित किया गया, जैसे संत वेलेंटाइन को प्रेम का मसीहा बताया जाता है।

इसकी आड़ में मदर टेरेसा का ‘चावल के बोरों’ वाला परिचय छिपा लिया गया। यह नहीं बताया गया कि टेरेसा ‘मदर’ नहीं, कलकत्ता की ‘पिशाच’ थी। भोपाल गैस त्रासदी का समर्थन किया था। करोड़ों रुपयों की हेराफेरी की थी। उसकी मिशनरी में बच्चे बाँध कर रखे जाते थे। नन खुद को कोड़े मारती थीं। वह एक ऐसे पादरी की ‘रक्षक’ थी, जिस पर बच्चे के यौन शोषण का आरोप था।

मदर टेरेसा की दिल का दौरा पड़ने के कारण 5 सितंबर 1997 को मौत हो गई थी। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि उसकी मौत के बाद यह सिलसिला बंद हो गया। उसकी ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ पर बच्चों के खरीद-फरोख्त का आरोप है। ‘मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट’ के शेल्टर होम में बच्चियों के यौन शोषण की खबर तो पिछले साल ही सामने आई थी। दिसंबर 2021 में गुजरात में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के बाल गृह पर धर्म परिवर्तन का आरोप लगा था। आरोप था कि यहाँ पर लड़कियों को गले में क्रॉस बाँध जबरन बाइबल पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्हें ईसाई धर्म अपनाने का लालच दिया जाता है। हिंदू लड़कियों को मांसाहारी भोजन दिया जाता है। 

‘The Turning: The Sisters Who Left’ नामक पॉडकास्ट में मदर टेरेसा के ऐसे ही डार्क साइड को दिखाया गया है। इसमें एक महिला की कहानी है, जो अपने समाज की मजहबी व्यवस्था से बाहर निकलना चाहती है और मदर टेरेसा की मिशनरी में फँस जाती है।

सबसे ज्यादा अत्याचार तो मिशनरी में ननों के साथ होता था। इस पॉडकास्ट में दिखाया गया है कि ननों को मरीजों और बच्चों को छूने तक की मनाही थी और न ही वो किसी से दोस्ती कर सकती थीं। जिन बच्चों की वो देखभाल करती थीं, उन्हें ही छूने की इजाजत नहीं थी। इन ननों को खुद पर ही कोड़े बरसाने का निर्देश दिया जाता था और एक दशक में 1 बार ही वो अपने परिवार से मिलने घर जा सकती थीं।  ननों को काँटों वाली चेन से खुद लो बाँध कर मात्र एक मग पानी से स्नान करना होता था। ननों की भर्ती के बाद उनके बाल शेव कर के जला डाला जाता था।

टेरेसा पर आम जनता का ध्यान शायद 1969 में आई बीबीसी की एक डाक्यूमेंट्री फिल्म (समथिंग वंडरफुल फॉर गॉड) से शुरू हुआ था। उनका कोलकाता स्थित संस्थान पीड़ितों का इलाज नहीं करता था बल्कि उन्हें बताता था कि उन्हें पापों के लिए ईश्वरीय दंड मिला है, जिसे उन्हें बिना शिकायत झेलना चाहिए। नॉबेल पुरस्कार लेते वक्त टेरेसा ने 1979 में कहा था कि आज के दौर में शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा गर्भपात है।

‘टेरेसा शोषित और वंचित वर्ग की हितैषी थीं’ – ऐसी तमाम कहानियों के विपरीत तानाशाहों के साथ भी उसके बहुत अच्छे संबंध थे। अपने जीवन के दौरान, उसने अक्सर क्रूर तानाशाहों का समर्थन किया और इस तरह अपने अत्याचार को वैधता का लिबास देने का प्रयास किया। 1971-86 के बीच पुलिस राज्य के रूप में हैती पर शासन करने वाले दुवैलियर के साथ टेरेसा के अच्छे संबंध थे। 1981 में अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने शासन को ‘गरीबों का दोस्त’ बताया, वही शासन जिसके शासकों ने 1986 के विद्रोह के बाद लाखों डॉलर के लिए हैतियों को लूट लिया था।

जेसुइट पादरी डोनल्ड जे मग्वायर मदर टेरेसा का आध्यात्मिक सलाहकार था। उसने 11 साल के एक लड़के का यौन शोषण किया – एक बार नहीं, हजारों बार। उसके खिलाफ यौन संबंधों के बारे में जब रिपोर्ट आई थी, तब मदर टेरेसा ने सभी आरोपों को असत्य बताया था। इसलिए आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि जब इंदिरा गाँधी सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी तब मदर टेरेसा ने कहा था, “लोग इससे खुश हैं। उनके पास ज्यादा रोजगार है और हड़तालें भी कम हो रही हैं।”

UP में गायों को लाने, ले जाने के लिए परमिट आवश्यक नहीं: इलाहाबाद HC के जस्टिस असलम ने रद्द किया वाराणसी DM का ऑर्डर

उत्तर प्रदेश में गाय या गौवंश का परिवहन यूपी गौहत्या अधिनियम (UP Cow Slaughter Act) के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) के जस्टिस मोहम्मद असलम ने यह बात कही है। जस्टिस असलम ने गुरुवार (25 अगस्त 2022) को वाराणसी के जिलाधिकारी द्वारा पारित एक आदेश को रद्द करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर गाय और उसके वंश को ले जाने के लिए किसी परमिट की आवश्यकता नहीं है।

जिलाधिकारी ने बिना वैध अनुमति के कथित गौहत्या के उद्देश्य से जानवरों को ले जा रहे वाहन को जब्त करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा कि वाराणसी के डीएम ने 18 अगस्त 2021 को जब्ती का गलत आदेश पारित किया, जबकि उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर गाय और उसके वंश को ले जाने के लिए किसी परमिट की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि वाराणसी के डीएम का आदेश उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर का था।

जस्टिस असलम ने एक पुराने निर्णय का भी हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि यदि यह मान भी लिया जाए कि आरोपित हत्या के लिए गाय और बैल ले जा रहे हैं तो भी वह गौहत्या अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध नहीं है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार इस फैसले में कहा गया था, “यदि परिवहन के दौरान गाय और बैल की मौत सामान्य कारणों से हो जाती है तो यह गौहत्या अधिनियम के तहत अपराध नहीं है। भले ही इन मवेशियों को हत्या करने के इरादे से ले जाया गया हो, क्योंकि हत्या के अपराध का इरादा दंडनीय नहीं है।”

मोहम्मद शाकिब ने दायर की थी याचिका

रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहम्मद शाकिब ने वाराणसी जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने ट्रक को छोड़ने के लिए एक आवेदन दिया था, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसने पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, उसे भी खारिज कर दिया गया। फिर शाकिब ने डीएम के आदेश के साथ-साथ पुनरीक्षण न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की

इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मोहम्मद असलम ने कहा कि गाय और उसके वंश को उत्तर प्रदेश के भीतर ले जाने के लिए किसी परमिट की आवश्यकता नहीं है। बिना किसी कानूनी अधिकार के गाय के परिवहन व्यवसाय में लगे ट्रक को पुलिस ने पकड़ लिया और जब्त कर लिया। इस मामले में गौहत्या अधिनियम की धारा 3/5ए/8, 5बी और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

16 साल की हिंदू लड़की को अली ने मारी गोली, क्योंकि नहीं कर रही थी दोस्ती: दिल्ली की घटना, गली से लेकर सोशल मीडिया तक पीछे पड़ा था

दिल्ली के संगम विहार में एक 16 साल की लड़की को गोली मारने का मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि दूसरे समुदाय का एक लड़का काफी समय से उसका पीछा करता था। जब लड़की को पता चला कि लड़के का मजहब अलग है, तो उसने लड़के से बात करनी एकदम बंद कर दी। इसके बावजूद वह नाबालिग का पीछा करता रहा। अब उसी लड़के पर आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ आकर लड़की को गोली मारी।

घटना गुरुवार (24 अगस्त 2022) दोपहर की है। 2:15 के आसपास लड़की अपनी माँ और बहन के साथ स्कूल से घर आ रही थी। इसी दौरान उसका पीछा बाइकसवार लोगों ने किया और घर से थोड़ी दूर पहले उस पर गोली चली। घटना के बाद उसको एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लड़की का इलाज चल रहा है। उसने पुलिस को दिए बयान में बताया कि जब वो स्कूल से आ रही थी तो उसे तीन लोग बाइक पर आते दिखे। वह लोग उसका पीछा कर रहे थे। 

लड़की के अनुसार, उसने अपनी माँ-बहन के साथ जैसे ही संगम विहार के बी ब्लॉक में एंटर किया, तभी फायरिंग की गई। फिर लड़के बाइक तेज लेकर भाग गए। पड़ताल में पता चला है कि हमलावरों में से एक लड़का सोशल मीडिया के जरिए लड़की से संपर्क में था। पुलिस ने अब इस केस को हत्या की कोशिश मामले में दर्ज किया है। आरोपितों को पकड़ने का प्रयास भी चल रहा है।

जून में बीट कांस्टेबल ने लगाई थी फटकार

लड़की के पिता ने बताया है कि उन्हें बेटी पर हुए हमले के बारे में गुरुवार दोपहर 2:17 पर पता चला था। उन्हें इस घटना के पीछे उसी लड़के का हाथ लग रहा है जो उनकी बेटी का पीछा करता था। पिता के मुताबिक लड़का पड़ोस का था, इसलिए शुरू में इन बातों पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन बाद में वह सोशल मीडिया के जरिए बेटी को तंग करने लगा। बेटी ने कोई रिस्पांस नहीं दिया तो लड़के ने उसका पीछा किया। 

इसके बाद उन लोगों ने इस बारे में बीट कांस्टेबल को बताया। बीट कांस्टेबल ने लड़के को फटकारा भी था। पिता के अनुसार, उन्हें ये पक्का नहीं पता कि गोली चलाने वाले कौन थे, क्योंकि हमलावरों ने हेलमेट लगाया हुआ था। फिलहाल पुलिस ने स्कूल सीसीटीवी फुटेज प्राप्त कर ली है। लड़की को तंग करने वाले लड़के का नाम अली पता चला है। पुलिस परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। हमलावरों को पकड़ने की कोशिश जारी है।

मुस्लिमों ने दलित का हाथ-पैर बाँध रात भर पीटा, पेशाब पिलाई: शरीर की कई हड्डियाँ टूटीं, बजरंग दल बोला- मधुबनी के इस गाँव में रहते हैं PFI सदस्य

देश में ‘जय भीम जय मीम’ के नारे लगाकर जिन कहानियों पर पर्दा डालने की कोशिश की जाती है, वो समय-समय पर सामने आ ही जाती है। बिहार के दरभंगा में मुस्लिमों ने एक हिंदू दलित पर चोरी का आरोप लगाकर इतनी पिटाई की कि उसके शरीर की कई हड्डियाँ टूट गईं। इतना ही नहीं, मरणासन्न हालत में जब युवक ने पानी माँगा तो उसे मुस्लिमों ने पेशाब पिला दिया। इसका वीडियो सामने आया है।

मामला मधुबनी का बताया जा रहा है। दरअसल, दरभंगा के केवटी थाना अंतर्गत रजोरा गाँव के रहने वाले राम प्रकाश पासवान 16 अगस्त को अपनी बुआ के यहाँ मधुबनी गए हुए थे। जब वे वापस लौट रहे थे तो मधुबनी के इजरा गाँव के कुछ मुस्लिमों ने उन पर चोरी का आरोप लगाते हुए पकड़ लिया।

इसके बाद पासवान के हाथ-पैर बाँध दिए गए और उन्हें लाठी-डंडे तथा लात-घूँसों से बुरी तरह पीटा गया। इस दलित व्यक्ति को इतना पीटा गया था कि उनकी पसली, रीढ़, कमर और कंधे की हड्डी टूट गई। यहाँ तक कि पिटाई से उसकी किडनी पर भी बुरा असर पड़ा है। राम प्रकाश को दरभंगा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

राम प्रकाश पासवान के बेटे का अभिषेक पासवान का आरोप है कि उनके पिता राम प्रकाश पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें पीटा गया और जब वे पीने के लिए पानी माँगे तो मुस्लिमों ने उन्हें पेशाब पिला दिया। अभिषेक का कहना है कि उनके पिता वेंटिलेटर पर हैं।

ऑपइंडिया को मिली FIR की कॉपी में कहा गया है कि राम प्रकाश की रात भर पिटाई की जाती रही। सुबह जब परिवार को पता चला तो वे लोग उन्हें लाने पहुँचे। उस दौरान पीड़ित की पत्नी पर हमला कर सिर को फोड़ दिया।

परिजनों का कहना है कि परिजनों पर रॉड और पिस्टल से हमला किया गया और जाति-सूचक गालियाँ दी गई। उनसे कहा गया कि 20 लाख रुपए दो नहीं तो पीड़ित का हाथ-पैर काटकर जंगल में फेंक दिया जाएगा। इसके बाद परिजनों ने तत्काल 50 हजार रुपए इकट्ठा कर आरोपितों को दिए। इसके बाद उन लोगों ने पुलिस थाने में जाने पर जान से मारने की धमकी दी।

राम प्रकाश की बेटी पूजा कुमारी का कहना है कि उनके पापा धर्म के काम में जुटे हुए थे, इसलिए वे कई लोगों के निशाने पर थे। पूजा ने कहा कि मुहर्रम के दिन ही उसके पिता को पीटने की योजना बनाई गई थी, लेकिन वे लोग इसमें सफल नहीं हो पाए। इसके बाद घटना वाले दिन आरोपितों ने दरभंगा लौट रहे उसके पिता जी को नाम लेकर रोका और कमरे में बंद करके पूरी रात पिटते रहे।

यह बात भी सामने आई कि पीड़ित परिवार ने थाने में शिकायत की, लेकिन SHO इंस्पेक्टर सरवर आलम ने मामले को दबाने की कोशिश की। जब घटना का वीडियो वायरल हुआ, उसके बाद पुलिस अपनी किरकिरी होती देख, कार्रवाई की बात कही। बेंता थाने की पुलिस अस्पताल पहुँचकर पीड़ित का बयान लिया।

दरभंगा के SDPO कृष्णनंदन कुमार ने घटना की पुष्टि की है। उनका कहना है कि घटनास्थल मधुबनी जिला है। इसलिए इस मामले में दरभंगा पुलिस मधुबनी पुलिस की जाँच में हर तरह का सहयोग देगी। पीड़ित पक्ष ने कुछ आरोपितों की पहचान की है। इनमें अकरम, मोहम्मद राजा, मोहम्मद अखरोट सहित सात लोगों के नाम पुलिस को बताया है।

बजरंग दल के नेता राजीव प्रकाश का कहना है कि जिस गाँव में यह घटना हुई वहाँ कुख्यात PFI के सदस्य रहते हैं। उन लोगों ने मॉब लिंचिंग की है। बजरंग दल ने चेतावनी देेते हुए कहा कि अगर पीड़ित व्यक्ति को इंसाफ नहीं मिला तो देश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।