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‘मेरी गिरफ्तारी क्रांति लाएगी’ : दिल्ली में फिर जुट रहे किसान, राकेश टिकैत को पुलिस ने हिरासत में लिया

वर्ष 2020-21 में लगभग एक साल तक चले किसान आंदोलन को फिर से हवा देने की तैयारी की जा रही है। इसके चलते किसानों का दिल्ली आगमन भी शुरू हो गया है। इसी दौरान प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे राकेश टिकैत को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी सहित अपनी कई और माँगों को लेकर किसान नेताओं ने सोमवार को दिल्ली के जंतर-मंतर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।

इसी के चलते भारी संख्या में किसान पंजाब और हरियाणा से दिल्ली पहुँच रहे हैं। लेकिन इस बार दिल्ली पुलिस ने आंदोलन की शुरुआत से पहले ही दिल्ली-हरियाणा को जोड़ने वाले टीकरी बॉर्डर पर सीमेंटेड बैरिकेड्स लगाने शुरू कर दिए हैं। वहीं सुरक्षा से जुड़े मजबूत इंतजाम भी किए जा रहे हैं।

राकेश टिकैत को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

पिछले साल लंबे समय तक चले किसान आंदोलन के चेहरे बने किसान नेता राकेश टिकैत को दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर से हिरासत में लिया है। रविवार को टिकैत अपने समर्थकों के साथ दिल्ली आना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। वहीं टिकैत के समर्थकों ने पुलिस की इस कार्रवाई का भी विरोध किया और सड़कों पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे।

इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, “सरकार के इशारे पर काम कर रही दिल्ली पुलिस किसानों की आवाज को नहीं दबा सकती। यह गिरफ्तारी एक नई क्रांति लेकर आएगी। यह संघर्ष अंतिम साँस तक जारी रहेगा। ना रुकेंगे ना थकेंगे, ना झुकेंगे।”

बता दें कि टिकैत ने शनिवार को भी अपने एक सम्बोधन में कहा था, “केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ को हटाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने संबंधी एक कानून बनाए जाने समेत अन्य माँगों को लेकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में चल रहा किसानों का धरना शीर्ष जिला अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद आज समाप्त हो गया। छह सितंबर को दिल्ली में एक बैठक के दौरान एसकेएम की भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी।”

‘CM योगी का सिर काटने वाले को ₹2 करोड़ का इनाम’ : मुरादाबाद पुलिस के ‘फेक अकॉउंट’ से मैसेज वायरल, प्रोफाइल में पाकिस्तानी झंडा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हत्या के लिए एक फेसबुक पोस्ट में इनाम का ऐलान करने का मामला प्रकाश में आया है। पोस्ट में लिखा गया कि जो कोई भी सीएम योगी आदित्यनाथ का सिर काटकर लाएगा उसे 2 करोड़ रुपए का इनाम मिलेगा।

इस मैसेज के वायरल होने के बाद आरएसएस की महिला कार्यकर्ता आयुषी माहेश्वरी ने मुरादाबाद पुलिस में शिकायत दी। मैसेज देखते ही पुलिस सकते में आ गई। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अब पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है। दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिस फेसबुक अकॉउंट से धमकी देने का काम हुआ वो आत्म प्रकाश पंडित के नाम पर है। जब पुलिस ने आत्म प्रकाश को बुलाकर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस मैसेज के बारे में कुछ नहीं पता। उन्होंने अपनी ओर से ऐसा कुछ अपलोड नहीं किया।

पूछताछ के बाद एसएसपी के निर्देश पर सिविल लाइन्स पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धारा 153, 505 (2) एवं 67 एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। वहीं पूरी जाँच साइबर सेल को सौंप दी गई है।

अभी तक की पड़ताल में सामने आया है कि आत्म प्रकाश नाम के शख्स के फेसबुक अकॉउंट को हैक कर लिया गया था। इसके बाद मुरादाबाद पुलिस के नाम से एक फर्जी फेसबुक पेज बनाया गया और योगी आदित्यनाथ का सिर काटने की धमकी दी गई। साथ ही 2 करोड़ रुपए इनाम का ऐलान किया गया।

पुलिस ने बताया कि जिस पेज से धमकी दी गई उसकी प्रोफाइल में पाकिस्तान का झंडा लगा था। अब पुलिस ने अकॉउंट संबंधी जानकारी लेने के लिए फेसबुक को ईमेल किया है। ईमेल में फेसबुक से संबंधित अकॉउंट को चलाने वाले की जानकारी माँगी गई है और इसे बंद करने को कहा गया है।

विरोध के आगे झुका Zomato, महाकाल का नाम इस्तेमाल करने पर माँगी माफ़ी: MP के गृह मंत्री ने उज्जैन एसपी से तलब की रिपोर्ट, कहा – होगी कार्रवाई

हिन्दू विरोध के कारण फिल्मों के बॉयकॉट के बाद भी बॉलीवुड एक्टर सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस लिस्ट में नया नाम ऋतिक रोशन (Hritik Roshan) का है। दरअसल, ऋतिक रोशन ने फूड डिलेवरी कम्पनी जोमैटो (Zomato) के एक ऐड में उज्जैन के प्रसिद्ध शिव मंदिर महाकाल का नाम ले लिया, जिसके बाद से विवाद शुरू हो गया है। यही नहीं, इस पूरे मसले पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कार्यवाही की बात कही है।

जोमैटो के विवादित विज्ञापन में ऋतिक रोशन कहते हुए दिखाई दे रहे हैं, “थाली का मन किया। उज्जैन में हैं तो महाकाल से मँगा लिया।” इस विज्ञापन को लेकर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने कहा,”मैंने उज्जैन के पुलिस अधीक्षक से कहा है कि वो वीडियो की वास्तविकता की जाँच करें और देखकर मुझे रिपोर्ट करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सके।”

हालाँकि, इस विज्ञापन को लेकर शुरू हुए विरोध के आगे Zomato को झुकना पड़ा है और कंपनी की तरफ से माफी माँगते हुए सफाई जारी की है। जोमैटो ने अपने बयान में कहा है कि हमने इस विज्ञापन में ‘महाकाल रेस्टोरेंट’ का जिक्र किया था न कि महाकालेश्वर मंदिर का।

बता दें कि इस विज्ञापन में ऋतिक द्वारा महाकाल का नाम लिए जाने पर महाकाल मंदिर के पुजारियों ने भी आपत्ति जताते हुए कहा था कि यदि ऋतिक रोशन माफी नहीं माँगते हैं तो हम कोर्ट जाएँगे। महाकाल मंदिर के एक पुजारी ने कहा था कि ऐसे विज्ञापन बनाने से पहले कंपनी को सोच-विचार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि हिन्दू सहिष्णु है इसलिए कोई कुछ भी कह रहा है और यदि यही बात किसी और के लिए कही गई होती तो कंपनी में आग लगा दी जाती।

इस विज्ञापन को लेकर जोमैटो ने भले ही माफी माँग ली हो, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग ऋतिक रोशन के माफी माँगने पर अड़े हुए हैं। इसको लेकर ट्विटर पर लगातार ट्वीट किए जा रहे हैं और कह रहे हैं कि महाकाल हमारी आस्था और शक्ति का केंद्र है, आपकी माँ की रसोई नहीं, जहाँ आप थाली मँगवाएँगे। ‘ऋतिक रोशन माफ़ी माँग’ ट्विटर पर भी ट्रेंड कर रहा है।

देश के No.1 अभियंता ‘सड़जी’ हुए क्रोधित, हर सवाल का एक जवाब – चलो प्रिये, दुनिया को No.1 बनाने की बात करें

देश के नंबर वन अभियंता क्रोधित हैं, कहते हैं कि जी लगाकर उन्हें सम्बोधित नहीं किया गया, यह धृष्टता है। अब कोई अभियंता जी को नाम लेकर ऐसे सम्बोधित करेगा कि जैसे उसके घर में बाप-भाई या कंपनी में मैनेजर-मालिक न हो तो बुरा लगेगा ही। फिर ऐसी बातचीत में से जी उचट जाए और कोई जी भर के मन की भड़ास निकालने लग जाए तो दोष क्यों देना? वैसे भी जो जी लगाकर बात न करे उससे क्या ही मुँह लगाना?

बात तो उन से ही की जानी चाहिए जिनका जी आपमें लगा हो और आपका जी जिनमें लगा हो। जब दोनों के जी मिल जाएँ तो तो जी भर के बातें की जा सकती हैं। नहीं तो जी उमछाने लगता है। वो लोग कितने प्रिय लगते हैं जो जी-जी कर के बात करते हैं और जो जी के अलावा कुछ नहीं बोलते वो तो लाड़ले हो जाते हैं। फिर बात वही होनी चाहिए जो जी को भाए। जैसे अभी पार्टी का जी जिस विषय पर बात करने का हो तो उस विषय की ही बात की जाए। इधर-उधर की बात की भी जाए तो लौटकर उस विषय पर आ जानी चाहिए। बात वैसे ही हो जैसे दो प्रियजन बात कर रहे हों।

“हमारे मोहल्ले की समस्याओं पर ध्यान दीजिए।”
“चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“देखिए, लोगों को ऑक्सीजन की कमी हो रही है।”
“चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“आप इतना पलटते क्यों हैं?”
“वो देखो अमरीका वाले मोहल्ला क्लिनिक देखने आ रहे हैं। चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“अच्छा! ये आपके स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप क्यों लग रहे हैं?”
“चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“देखो वो जेल जा रहे हैं।”
“लेकिन हमारा हेल्थ मॉडल वर्ल्ड में नंबर वन है, चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“आपके राज में कोई नया अस्पताल नहीं बना, आपका वादा और दावा झूठ लग रहा है।”
“चलो प्रिये! हैप्पीनेस क्लास की बात करें।”

“देखो वो आपके स्वास्थ्य मंत्री जेल चले गए हैं।”
“चलो प्रिये! शिक्षा मॉडल की बात करें।”

“लेकिन स्वास्थ्य मंत्री?”
“हमारा शिक्षा मंत्री दुनिया का बेस्ट शिक्षा मंत्री है।”

“आपके राज में नलों में पानी नहीं आ रहा।”
“चलो प्रिये! क्लासरूम की बात करें।”

“आपके राज में नाले उफान पर हैं, बसें डूब जाती हैं।”
“चलो प्रिये! स्कूल की बात करें।”

“वो स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की बात की थी वो भी नहीं बनी, आप तो कहते थे कि बनवा दी।”
“चलो प्रिये! स्कूल को नंबर वन बनाने की बात करें।”

“आपके स्कूलों का रिजल्ट बिगड़ रहा है।”
“हमारे पास दुनिया का बेस्ट शिक्षा मंत्री है। चलो प्रिये! स्कूल में लगे टाइल्स की बात करें।”

“स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, जो हैं उनको वेतन नहीं मिल रहा।”
“लेकिन बिजली तो मुफ्त मिल रही है न? मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? चलो प्रिये!, हम तुमको स्कूल दिखा कर लाते हैं।”

“अच्छा ये बताओ आपके शिक्षा मंत्री के बच्चे खुद आपके स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ते।”
“सबको मुफ्त शिक्षा मिलनी चाहिए। चलो प्रिये! फ्री शिक्षा की बात करें।”

“आप तो अटक गए हैं। अच्छा, आपके यहाँ शराब एक पर एक फ्री क्यों मिल रही है?”
“हम कट्टर ईमानदार हैं। हम शिक्षा की बात कर रहे हैं आप शराब की।”

“हाँ वो ठीक है, लेकिन आपके यहाँ शराब मामले में कुछ घोटाला हुआ है।”
“हमारे शिक्षा मंत्री दुंनिया में बेस्ट हैं, दुनिया भर से लोग स्कूल देखने आते हैं।”

“आते तो हैं लेकिन अभी बात तो शराब की हो रही है। शिक्षा मंत्री ही आबकारी मंत्री हैं। उनको जवाब देना चाहिए न।”
“हाँ तो शिक्षा के बारे में पूछिए।”

“लेकिन आबकारी मंत्री होने के नाते वो जवाब नहीं देंगे क्या?”
“नहीं, शिक्षा मंत्री होने के नाते देंगे।”

“हम आपसे शराब की बात कर रहे हैं, आप शिक्षा की बात क्यों बीच में ला रहे हैं।”
“शराब की बात भी कोई करता है क्या? शिक्षा सबका अधिकार है।”

“लेकिन जहाँ घोटाला हुआ प्रश्न तो वहाँ का पूछा जाएगा न?”
“हमने दिल्ली को शिक्षा में नंबर वन बनाया है। दिल्ली को हर क्षेत्र में पच्चीस साल में नंबर वन बना देंगे।”

“पच्चीस साल तो न हम रहेंगे न आप, आप अभी का जवाब क्यों नहीं देते। वो देखिए, आपके शिक्षा मंत्री पर छापा पड़ गया।”
“लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स में खबर छपी है वो देखिए। कितना मुश्किल होता है उधर खबर छपवाना। यह सब इसलिए हुआ कि हमारे पास दुनिया का नंबर वन शिक्षा मंत्री है।”

“मतलब वो खबर आपने छपवाई?”
“छपी तो है! न्यूयॉर्क टाइम्स, कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। देखना हमारे स्कूल अब न्यूयॉर्क में भी खुलेंगे।”

“वो खबर तो लगता है आपके ही आदमी ने छापी है, तस्वीरें भी गलत है। उधर देखिए आपके शिक्षा मंत्री के घर सीबीआई बैठी है।”
“नहीं, आबकारी मंत्री के घर बैठी है। शिक्षा मंत्री के बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स में खबर छपी है वो देखिए। “

“पर वो तो एक ही आदमी हैं!”
“नहीं, सीबीआई हमारे शिक्षा मंत्री को उठा कर नहीं ले जा सकती, चाहे तो आबकारी मंत्री को उठा ले जाए। शिक्षा मंत्री के बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स में छपा है।”

“लेकिन आदमी तो एक ही है।”
“हाँ तो! उसमे से आबकारी वाला जो है, सो सीबीआई ले जाए।”

“कैसी बातें कर रहे हैं?”
“हम अपने देश को नंबर वन बनाएंगे।”

“कैसे नंबर वन बनाएँगे? वो शराब वाले मामले में जवाब तो दीजिए?”
“हम दुनिया को नंबर वन बनाएंगे।”

“हैं? दुनिया को?”
“हम रुकने वाले नहीं हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स देख लीजिए देखिए क्या खबर छपी है।”

“खबर तो छपी है, लेकिन क्या अब शिक्षा मंत्री भी जेल जाएँगे? “
“ये सब हमारे खिलाफ साजिश है, क्योंकि हम दुनिया को नंबर वन बनाना चाहते हैं, इसलिए पहले हमारे नंबर वन स्वास्थ्य मंत्री को जेल में ड़ाल दिया, फिर शिक्षा मंत्री के घर छापा मारा है और अब देखिए, परिवहन मंत्री पर भी छापा मारने की तैयारी कर रहे हैं।”

“लेकिन परिवहन मंत्री की तो बात ही नहीं की?”
“देखो बदतमीजी से बात कर रहे हो, जी लगाकर बात करो। न्यूयॉर्क टाइम्स क्यों नहीं देखते। “

“ऐसा लगता है आपके ही किसी कार्यकर्ता ने खबर छापी है। वो देखिये शिक्षा मंत्री बौखलाए घूम रहे हैं।”
“तमीज से बात करो। बड़ों से ऐसे बात की जाती है?”

“लेकिन जो पूछ रहे हैं, वह तो बता दीजिए कि आप इन मंत्रियों पर कोई एक्शन कब लेंगे?”
“जी लगाकर बात करो।”

“अरे?”
“जी लगाकर बात करो।”

“लेकिन… “
“जी लगाकर बात करो।”

“जी! अब तो कह दीजिए यह सब क्या हो रहा है जी?”
“चलो प्रिये! दुनिया को नंबर वन बनाने की बात करें। प्रिये! मिसकॉल करें।“

‘सत्येंद्र जैन को मंत्री पद के लिए अयोग्य नहीं ठहरा सकते’: दिल्ली HC ने खारिज की याचिका, मनी लॉन्ड्रिंग में कार्रवाई का सामना कर रहे हैं AAP नेता

दिल्ली हाई कोर्ट ने AAP नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन को मंत्री पद के लिए अयोग्य ठहराने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा की एक रिट याचिका में कही बातों के आधार पर जैन को ‘मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति’ घोषित नहीं किया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली सरकार की कैबिनेट में मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन के खिलाफ दायर एक याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिककर्ता की अपील थी कि जैन ने अपनी याददाश्त खो दी है, इसी के आधार पर उन्हें ‘मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति’ घोषित कर दिया जाना चाहिए।

आपको बताते चलें कि दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “एक रिट याचिका में कही बातों के आधार पर जैन को ‘मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति’ घोषित नहीं किया जा सकता है और न ही उन्हें मंत्रिमंडल तथा विधानसभा से अयोग्य ठहराया जा सकता है।”

कोर्ट ने कहा, “AAP विधायक विभिन्न अपराधों के लिए मुकदमे का सामना कर रहे हैं और कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की जिम्मेदारी अदालत की है।” वहीं कोर्ट ने यह भी माना कि यह सच है कि प्रतिवादी नंबर 5 (सत्येंद्र जैन) भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के साथ ही धन शोधन रोकथाम कानून के तहत विभिन्न अपराधों के लिए मुकदमों का सामना कर रहा है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा, “तथ्य यही है कि दंड प्रक्रिया संहिता-1973 अपने आप में एक पूर्ण संहिता है, जो पूछताछ, जाँच और मुकदमे के संबंध में एक व्यवस्था उपलब्ध कराती है।” कोर्ट ने यह भी कहा, “दंड प्रक्रिया संहिता में कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की जिम्मेदारी अभियोजन/अदालत की है।”

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वो सत्येंद्र जैन को को मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति घोषित नहीं कर सकती और न ही उन्हें विधानसभा या दिल्ली सरकार में मंत्री पद से अयोग्य ठहरा सकती है। इसके परिणामस्वरूप रिट याचिका खारिज की जाती है।

आप सरकार के नेता मनीष सिसोदिया को CBI ने दिया लुक आउट नोटिस

गौरतलब है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार में केवल सत्येंद्र कुमार जैन ही नहीं, बल्कि डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी शराब घोटाले के मामले में फँसते जा रहे हैं। इस केस में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 14 लोगों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है और इस लिस्ट में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Delhi Deputy CM Manish Sisodia) का नाम भी शामिल किया गया है।

‘इन लोगों को भाव मत दो, जिसे देखना है देखेगा’: लोगों को पसंद नहीं आया Liger के हीरो का घमंड, कहा – बॉलीवुड के साथ आकर बदले तेवर, होगा बॉयकॉट

बॉलीवुड के रंग में रंग रहे साउथ के मशहूर हीरो विजय देवरकोंडा की आने वाली फिल्म ‘लाइगर’ पर बॉयकॉट की तलवार लटकने जा रही है। देवरकोंडा ने हाल में एक इंटरव्यू के दौरान इस बॉयकॉट ट्रेंड पर बयान दिया था जिसके बाद लोग उनसे नाराज हैं और उनकी फिल्म के बहिष्कार के लिए सोशल मीडिया पर #BoycottLiger ट्रेंड करवा रहे हैं।

इससे पहले लाइगर के विरोध का कारण केवल ये था कि इसके साथ करण जौहर के प्रोडक्शन का नाम जुड़ा है। लेकिन देवरकोंडा के लगातार आते बयानों ने ऑडियंस को उनके विरोध में खड़ा कर दिया है। लोग अब उन्हें घमंडी कहते हुए सबक सिखाने की बात कर रहे हैं।

हमें इन्हें भाव नहीं देना चाहिए: विजय देवरकोंडा

दरअसल, लाइगर की रिलीज से पहले विजय की एक छोटी क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें वह अनन्या पांडे के साथ दिखाई दे रहे हैं। इसमें वह खुद को कूल दिखाते हुए कह रहे हैं,  “मुझको लगता है हम इन लोगों को कुछ ज्यादा ही भाव दे रहे हैं। हमको क्या है। हम तो पिक्चर बनाएँगे। जो देखना चाहते हैं देखेंगे। जो नहीं देखना चाहते हैं वो टीवी में या फोन में देखेंगे। हम क्या कर सकते हैं।”

लोगों ने ट्रेंड कराया #BoycottLiger

इस बयान को सुनने के बाद लोग कह रहे हैं- अब तुम बॉयकॉट की ताकत देखना। यूजर्स का उनसे कहना है, “भाई तुम अच्छे एक्टर हो लेकिन तुम इस तरह बॉलीवुड से नजदीकियाँ बढ़ाकर अपने को मुश्किल में डाल रहे हो। अल्लू अर्जुन और महेश बाबू को फॉलो करो।”

मल्लिकार्जुन पत्तार ने कहा, “तुम इस सवाल के जवाब को देने से बच सकते थे। लेकिन अब तुम संकट में हो”

सैम कुमार ने कहा, “बॉलीवुड बॉयकॉट है भाई, वो जो भी हो, तुम्हें हिट होना है तो कहीं और जाना पड़ेगा। कहीं भी जाओ चाहे बिहार चले जाओ लेकिन बॉलीवुड में नहीं।”

बॉयकॉट ट्रेंड के बाद बोले विजय देवरकोंडा- डरो मत

बता दें कि सोशल मीडिया पर जो बॉयकॉट लाइगर का ट्रेंड शुरू हुआ है, उसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजय ने अपना बयान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने करण जौहर से अनुरोध करके अपनी फिल्म को नॉर्थ तक की ऑडियंस के लिए तैयार किया है।

वह बॉयकॉट ट्रेंड पर वह बोले,

“मुझे नहीं पता कि उन लोगों (बॉयकॉट करने वालों) का मसला क्या है और वे क्या चाहते हैं। हम अपनी तरफ से सही हैं। मेरा जन्म हैदराबाद में हुआ था। चार्मे का जन्म पंजाब में हुआ था। पुरी सर का जन्म नरसीपट्टनम में हुआ था। क्या हमें काम नहीं करना चाहिए? हमने इस सिनेमा को बनाने के लिए तीन साल तक कड़ी मेहनत की है। क्या हमें अपनी फिल्में रिलीज नहीं करनी चाहिए? क्या हम घर में बैठ जाएँ? दर्शकों का हम पर जो प्यार बरस रहा है, वह आप सब देख रहे हैं। मैं उन दर्शकों के लिए फिल्में कर रहा हूँ। मुझे उन्हीं की जरूरत है। जब तक हमारे पास ये लोग नहीं हैं, तब तक किसी भी डरने की जरूरत नहीं है।”

उन्होंने कहा, “जब हम सही हों और अपना धर्म निभाएँ तो किसी और की सुनने की जरूरत नहीं, जो आ रहा है आने दो, हमें लड़ना होगा। मुझे डर नहीं है। मैं दिल से कहता हूँ कि हमने ये अपने दिन से किया है। हम सब इस देश के हैं और जानते हैं कि हमने अपने लोगों के लिए कितना किया है। हम वो लोग नहीं है जो कम्प्यूटर के आगे बैठ बस ट्वीट करें। हम वो हैं जो, जब कुछ होता है तो सबसे पहले आगे आते हैं।”

उल्लेखनीय है कि विजय अपनी आने वाली फिल्म के सुपरहिट होने की गारंटी ले चुके हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश में फिल्म प्रमोशन के दौरान कहा, “मैं आपको गारंटी देता हूँ, फिल्म धमाल मचा देगी। आपको मेरे लिए एक काम करना चाहिए, आपको 25 अगस्त को गुंटूर में धमाका मचा देना चाहिए। 25 अगस्त को वाट लगा देंगे।”

PM मोदी के पंजाब दौरे पर आतंकियों की नजर, रच रहे बड़े हमले की साजिश: खुफिया एजेंसियाँ अलर्ट, पुलिस ने बढ़ाई चौकसी

मुंबई में 26/11 जैसे आतंकी हमले की धमकी के बाद अब पंजाब में भी आतंकी हमले का खतरा मँडरा रहा है। खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार, आतंकियों ने चंडीगढ़ और मोहाली में आतंकी हमले की साजिश रची है। सबसे बड़ी बात यह है कि खुफिया एजेंसियों ने इस यह अलर्ट तब जारी किया है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार (24 अगस्त, 2022) को पंजाब दौरे पर जाने वाले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर चंडीगढ़ और मोहाली के बस स्टैंड पर आतंकी हमले की साजिश रची गई है। इस अलर्ट के बाद पंजाब पुलिस से लेकर तमाम जाँच एजेंसियाँ सक्रिय हो गई हैं।

इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि पंजाब के 10 राजनेता भी आतंकियों के निशाने पर हैं। खुफिया एजेंसी द्वारा दी गई लिस्ट में पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा, पूर्व मंत्री गुरकीरत कोटली, परमिंदर पिंकी और विजयइंदर सिंगला का नाम शामिल है। इस लिस्ट के सामने आने के बाद इन नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पंजाब पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। पुलिस को इन लोगों के पास से कुछ अहम जानकारियाँ मिली हैं। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आयी है कि टारगेट किलिंग के लिए दिल्ली, मोहाली और मोगा इन लोगों के निशाने पर थे।

इस आतंकी हमले को लेकर जाँच एजेंसियाँ और पुलिस इसलिए भी खासा सक्रिय है, क्योंकि 24 अगस्त को पीएम नरेंद्र मोदी पंजाब दौरे पर जाएँगे। इस दौरे पर पीएम मोदी को मोहाली के टाटा कैंसर हॉस्पिटल का उद्घाटन करना है।

सब इंस्पेक्टर की गाड़ी में बॉम्ब लगाने का बनाया था प्लान

गौरतलब है कि पंजाब पुलिस और महाराष्ट्र एटीएस (आतंकवाद निरोधी टीम) के जॉइंट ऑपरेशन में एक संदिग्ध की भी गिरफ्तारी हुई है। इस गिरफ्तारी को लेकर बताया गया है कि संदिग्ध का नाम राजिंदर सिंह है जो कि पंजाब पुलिस के सब इंस्पेक्टर दिलबाग सिंह की कार में बम लगाने की प्लानिंग कर रहा था।

इतना ही नहीं, इससे पहले भी दो अन्य संदिग्ध लोगों को भी दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किया गया था। इन पर भी दिलबाग सिंह की कार पर बॉम्ब लगाने का आरोप लगाया गया है। ये दोनों ही संदिग्ध देश छोड़ने की फिराक में थे। बता दें कि दिलबाग सिंह पंजाब पुलिस के ऐसे सब इंस्पेक्टर हैं जो आतंकियों के विरुद्ध जारी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

SC-ST एक्ट से परेशान CA ने चौथी मंजिल से कूदकर की आत्महत्या, केस में माँ का नाम डालने से था आहत: राजस्थान पुलिस पर भी प्रताड़ना का आरोप

दलितों के सशक्तिकरण के नाम बना भेदभावपूर्ण SC-ST ACT आज समाज के लिए कितना भयानक साबित हो रहा है, इसका ताजा गवाह राजस्थान के जयपुर का रक्षित आत्महत्या मामला है। इस ऐक्ट ने एक हँसते-खेलते परिवार को पूरी तरह बर्बाद करके रख दिया। आर्थिक नुकसान को शायद वे सँभाल भी लेते, लेकिन संकट के दौर से गुजर रहे परिवार को अब पालनहार बेटे का नुकसान बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

अपनी माँ के खिलाफ दायर झूठे एससी-एसटी केस के कारण जयपुर के मुहाना थाना क्षेत्र में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट रक्षित खंडेलवाल ने गुरुवार (18 अगस्त 2022) को आत्महत्या कर ली है। अपने परिवार की बेइज्जती से परेशान होकर रक्षित चौथे माले पर स्थित अपने फ्लैट से कूद गए और अपनी जान दे दी।

रक्षित का एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने आपबीती लिखी है। उन्होंने लिखा है कि भीम सिंह नाम के एक व्यक्ति ने उनके परिवार, यहाँ तक कि उनकी माँ के खिलाफ SC-ST में झूठा मुकदमा लिखाया है। इसके कारण उनको परिवार को Dy SP सतीश वर्मा लगातार परेशान कर रहे थे।

रक्षित ने अपनी सुसाइड नोट में लिखा कि वे लोग बुरे लोग नहीं हैं। समय ने उन्हें बर्बाद कर दिया है और उनके परिवार के पास पैसा नहीं है। भीम सिंह लगातार उन्हें परेशान कर रहा है। उन्होंने डीएसपी से आग्रह कि उनके परिवार को परेशान ना करे। उन्होंने लिखा कि मरना बहुत जरूरी था।

अपनी चार पेज की सुसाइड नोट में रक्षित ने लिखा है कि भीम ने उनके परिवार के खिलाफ जयपुर और भरतपुर में 420 और एससी-एसटी ऐक्ट में झूठा केस दर्ज किया है। उन्होंने लिखा, “इसके कारण हमारा पूरा परिवार परेशान है। यहाँ तक उसने मेरी माँ खिलाफ तक केस कर दिया। इसमें उसका साथ डीएसपी सतीश वर्मा दे रहे हैं। आए दिन ये लोग हमें परेशान करते हैं और घर पर पुलिस टीम भेजते हैं। हम को क्रिमिनल नहीं हैं।”

सुसाइड नोट में रक्षित ने परिवार की आर्थिक तंगी का भी जिक्र किया है। उसने लिखा है, “बहुत लोगों को मैं सॉरी बोलना चाहता हूँ, लेकिन मेरी बात कोई क्यों नहीं मानता। मेरे पास पैसा नहीं है। वो बहुत पहले चले गए। कोई ये बात समझता ही नहीं कि नुकसान हो गया। प्लीज मेरे जाने के बाद मेरे परिवार को परेशान मत करना।”

उन्होंने उसमें आगे लिखा, “मैं एक सीधा-साधा लड़का था, जिसकी एक नॉर्मल लाइफ थी। बेहतर बनने के चक्कर में मेरी पूरी लाइफ खराब हो गई। हमारे परिवार की इज्जत, पैसा सब खत्म हो गया। आज मेरे लिए सभी बुरा-भला बोलते हैं। भीम सिंह जैसे लोग पैसे के लिए मुझे बुरा-भला बोलते हैं। हम इंसान खराब नहीं, वक्त खराब था, जो सब खत्म कर गया।”

रक्षित पर थी परिवार की जिम्मेदारी

25 साल के रक्षित के पिता रमाकांत खंडेलवाल का जयपुर में कपड़ों का शोरूम था। कोरोना महामारी के दौरान उनके व्यापार पर जबरदस्त चोट पहुँची और व्यापार पूरी तरह बर्बाद हो गया। रक्षित पर माँ मंजू खंडेलवाल एवं छोटे भाई आर्यन सहित परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी।

वे अपनी जिम्मेदारी को निभा भी रहे थे और मेहनत कर परिवार को एक बार फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच उन्होंने आत्महत्या कर ली। सुसाइड के अगले दिन उनके कमरे से सुसाइड नोट मिला तो पता चला कि वे इस झूठे केस के कारण परिवार की हो रही बेइज्जती से विचलित हो गए थे।

उन्होंने सुसाइड नोट में अपने परिवार और लोगों से बहुत भावनात्मक अपील की। उन्होंने लिखा कि वे अपने माता-पिता और परिवार से बेहद प्यार करते हैं, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बन गई है कि वे आगे की जीवन-यात्रा को नहीं जारी रख सकते हैं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे उनके परिवार को परेशान ना करें, बल्कि सपोर्ट करें।

राजस्थान के जालौर में हेडमास्टर पर SC-ST एक्ट में कार्रवाई

बता दें कि राजस्थान के जालौर के सुराणा गाँव के एक विद्यालय के हेडमास्टर छैल सिंह पर मटका में पानी पीने को लेकर SC-ST एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसको लेकर देश भर में बवाल मचा हुआ है। वहीं, राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी कह रहे हैं कि स्कूल में मटका था ही नहीं।

स्कूल के दलित शिक्षकों एवं छात्रों का भी कहना है कि स्कूल में मटका है ही नहीं पानी पीने के लिए और सभी लोग एक ही टंकी से पानी पीते हैं। वहीं, बच्चे के पिता ने इसे जातीय रंग देते हुए अपनी प्राथमिकी में पिटाई का कारण मटका से पानी बताया है।

अधिकारियों के अनुसार, स्कूल के दो आपस में किसी बता पर झगड़ा कर रहे थे, इसी दौरान वहाँ से गुजर रहे हेडमास्टर छैल सिंह ने दोनों को एक-दो थप्पड़ लगा दिए थे। बाद में उस दलित छात्र की अस्पताल में मौत हो गई थी। इसके बाद इसे राजनीतिक रंग दे दिया गया है।

वामपंथियों ने तिरंगे से बना ली दूरी, नेहरू तक सीमित रहे कॉन्ग्रेसी: जिस सरकार ने लोगों को दिए 1.26 करोड़ मकान, उस पर ‘घर वाला तंज’ क्यों?

एक तरफ पूरा राष्ट्र राष्ट्रीय गौरव व पूर्ण उत्साह से स्वाधीनता का अमृत महोत्सव मना रहा है, वहीं कुछ राष्ट्र विरोधी व तथाकथित बुद्धिजीवी इसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तरीकों से विरोध कर रहे हैं। उन्हें तिरंगा फहराने में भी तकलीफ होती है। स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान हुए कई गुमनाम राष्ट्र नायकों के जीवन चरित्र को राष्ट्र के नागरिकों के सामने लाने पर भी उन्हें दिक्कतें हो रही है। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को राष्ट्र की जनता ने बड़े ही उत्साह व गौरवमयी भाव से मनाया।

लेकिन, वहीं राष्ट्रीय पर्व के समय में भी कुछ लोग व तथाकथित बुद्धिजीवियों ने इसमें भी बेवजह विरोध किया व उनके द्वारा अभिव्यक्ति स्वतंत्रता के नाम पर मीनमेख निकाला गया। एक राष्ट्रीय अखबार में लंबे समय से कार्टून बना रहे एक कार्टूनिस्ट ने तो अपने एक कार्टून के माध्यम से ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का ही विरोध करने का प्रयास किया। उस कार्टून में लिखा था, “सर, इसे घर पर तिरंगा लगाना है और तिरंगा इसके पास है। घर माँग रहा है!”

वे अपने इस कार्टून में मकान की जगह घर लिख गए। उन्हें पता होना चाहिए था कि घर व मकान में बड़ा अंतर होता है। लेकिन, लगता है कि उन्होंने यह जानबूझकर लिखा। मकान को परिवार के सदस्य घर बनाते है, सरकारें व उनकी योजनाएँ नहीं। अब जब पश्चिमी संस्कृति का अनुसरण करके सोचोगे तो आपकी कला का यही पक्ष उभरकर सामने आएगा। तिरंगा अभियान पर इतना हल्का कार्टून बनाकर ये कार्टूनिस्ट क्या संदेश देना चाह रहे थे?

वैसे भी तिरंगा फहराने के लिए राष्ट्र प्रेम चाहिए, ना कि कोई स्थान विशेष। जो जहाँ है व जिस स्थान पर अपने जीवन का कर्तव्य निभा रहा है, वहीं पर सम्मान पूर्वक तिरंगा फहराया जा सकता है। उसके लिए ऐसे बचकाने बहाने बनाने की जरूरत नहीं है। वहीं उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के आँकड़ों के बारे में व इस योजना के द्वारा कितने ही गरीब व बगैर आवास के रह रहे लोगों को मिले आवास (मकान) के विषय में भी पहले तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त करना चाहिए था।

लेकिन, लगता है अपनी कला के माध्यम से विरोध के लिए सिर्फ विरोध करना उनका उद्देश्य बन गया है। यदि देश के नागरिक के आवास (मकान) पर बात करना भी है तो पहले यह तथ्य देख लेना चाहिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पिछले आठ वर्षों में लाखों भारतीयों को आवास दिया गया है। एक रिपोर्ट व खबर के अनुसार, “केंद्र सरकार द्वारा सबको आवास देने का लक्ष्य है, जिसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत हुई। आँकड़ों के मुताबिक, अभी तक 1.26 करोड़ घर बनाए जा चुके हैं, जिसमें करीब सवा लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जा रही है।”

शहरी क्षेत्र में इस योजना के अंतर्गत इससे भी ज्यादा मदद दी जाती है। यह सब धरातल पर जाकर आसानी से देखा जा सकता है व इसकी खबरें राष्ट्रीय मीडिया में आसानी से उपलब्ध है। राष्ट्रीय गौरव के इस पर्व पर इस तरह से विरोध करना किस तरह से सही व तर्कसम्मत है? राष्ट्रीय पर्व पर यही एक घटना नहीं हुई। कॉन्ग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल ने भी तिरंगा अभियान को सिर्फ नेहरू तक ही सीमित करने का प्रयास किया। उसने अपने सोशल मीडिया मंचों (हैंडलो) पर नेहरू के हाथ में तिरंगा वाला फोटो लगाकर ही इस गौरवमयी राष्ट्रीय अभियान को हल्का व सीमित करने का संदेश दिया।

वहीं इसी पार्टी ने अमृत महोत्सव के समय में काले वस्त्र पहनकर विरोध करने का नया तरीका अपनाया। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव को विपक्ष के कुछ नेताओं ने भाजपा की नाटक-नौटंकी तक बता दिया। भारत में वामपंथियों की कम्युनिस्ट पार्टी ने तो तिरंगा अभियान से पूर्ण रूप से दूरी बनाकर रखी। राष्ट्रीयता व राष्ट्रीय पर्व के मामलों में वामपंथियों का यह स्थायी चरित्र शुरू से देखने में आया है। वहीं इस अभियान के तहत देखा गया है कि भारत के कोने-कोने से तिरंगा फहराने की स्वीकार्यता उत्साह से आ रही थी व भारत के नागरिकों ने इसमें बढ़ चढ़कर भाग लिया।

इससे यही समझ आ रहा है कि विपक्ष भी टुकड़े टुकड़े गैंग का साथ देकर स्वयं टुकड़े टुकड़े हो गया है। राष्ट्र का नागरिक राष्ट्रीय एकता का महत्व समझ रहा है। इसलिए जनता अब टुकड़े-टुकड़े गैंग के बहकावे में नहीं आने वाली हैं। खैर, राष्ट्र के लिए प्रेम व समर्पण हृदय से होता है। सरकार व राजनीतिक दलों की किसी नीति या योजना के कारण नहीं। यह बात हमारे देश के वामपंथी जाने कब समझेंगे। इधर लंबे समय से देखने में आया है कि राष्ट्रीय पर्व व स्वाभिमान में भी देश के कलाकारों व लेखकों (खासकर वामपंथीयों) का एक धड़ा बेवजह विरोध का कोई न कोई मनगढ़ंत तरीका निकालता रहा है। यह उनकी 75 वर्ष से ना जाने वाली बीमारी हो गई है।

(लेखक भूपेंद्र भारतीय मध्य प्रदेश में अधिवक्ता हैं)

ज्ञानवापी केस में हिंदू पक्ष की वादी रेखा पाठक की हो रही रेकी, ‘दाढ़ी वाले’ पड़ोसियों से करते हैं पूछताछ: रिपोर्ट

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे और श्रृंगार गौरी केस में हिंदू पक्ष की एक महिला याचिकाकर्ता ने शिकायत की है कि कुछ लोग उनके घर की रेकी कर रहे हैं। रेखा पाठक नाम की याचिकाकर्ता ने बताया कि आस-पड़ोस वाले उन्हें बताते हैं कि कुछ नकाबपोश लोग आ आकर उनके घर के बारे में पूछते हैं।

आजतक से बातचीत में रेखा ने बताया कि वह वाराणसी के भदऊ इलाके की गंगानगर कॉलोनी में रहती हैं। कई दिनों से कुछ लोग उस इलाके की रेकी कर रहे हैं। ये लोग नकाबपोश होते हैं और मोहल्ले वालों से रेखा के घर के बारे में पूछताछ करते हैं। हालाँकि पड़ोसी सर्तक हैं। वह रेखा के बारे में कुछ भी उनको नहीं बताते और रेखा को आगाह कर देते हैं कि वो थोड़ा संभलकर रहें।

महिला याचिकाकर्ता बताती हैं कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस को सूचना दे दी है। पड़ोसियों के बताए अनुसार संदिग्धों का हूलिया बताया गया है। रेखा कहती हैं कि पड़ोसियों ने उनको बताया था कि वो लोग जो पूछताछ कर रहे थे वह दाढ़ी वाले लोग थे और मुँह ढके हुए थे।

रेखा पाठक की तरह एक अन्य महिला याचिकाकर्ता सीता साहू ने भी जानकारी दी है कि कि उनके रिश्तेदार भी उन्हें आगाह करते रहते हैं। लेकिन वह डरेंगी नहीं और माँ श्रृंगार गौरी के लिए आगे बढ़ती रहेंगी।

वकील सोहन लाल आर्य को मिली धमकी

बता दें कि इससे पहले माँ श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी विवादित ढाँचे मामले के पैरोकार डॉक्टर सोहन लाल आर्य को जान से मारने की धमकी मिली थी। सोहनलाल को पाकिस्तान के नंबर से फोन करके धमकाया गया था। सोहनलाल आर्य ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया था कि धमकी देने वाले ने कहा, “राजस्थान के कन्हैया की तरह तुम्हारा भी सिर तन से जुदा कर दिया जाएगा।”

उन्होंने धमकी मिलने के बाद 16 अगस्त, 2022 को इसकी जानकारी वाराणसी के पुलिस और प्रशासन के अफसरों को दी। साथ ही डॉ. आर्य ने सर तन से जुदा करने की धमकी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि धमकी के बारे में इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारियों से भी बात हुई है। उनको ऐसा अंदेशा था कि भारत से ही कोई व्यक्ति पाकिस्तान के नंबर का इस्तेमाल करके कॉल कर रहा है। इन नंबरों को उन्होंने इंटेलिजेंस के अधिकारियों को सौंपा है।