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करनी प्रफुल्ल पटेल की, भोग रहा फुटबॉलः अब भारत में नहीं होगा अंडर-17 महिला विश्व कप, FIFA ने AIFF को किया सस्पेंड

विश्‍व फुटबॉल की सर्वोच्‍च संस्‍था फीफा (FIFA) ने सोमवार (15 अगस्त 2022) को अखिल भारतीय फुटबॉल संघ (AIFF) को निलंबित कर दिया। फीफा के मुताबिक एआईएफएफ ने फीफा के नियमों का गंभीर उल्‍लंघन किया है। यह फैसला फीफा के नियमों के उल्लंघन और तीसरी पार्टियों के अनुचित प्रभाव के कारण लिया गया। इसके अलावा भारत से अक्टूबर में होने वाले फीफा अंडर-17 महिला वर्ल्ड कप 2022 की मेजबानी भी छीन ली गई है। फीफा के नियमों के मुताबिक, सदस्य संघों को अपने-अपने देशों में कानूनी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए।

कब हटेगा निलंबन?

फीफा ने कहा है कि AIFF कार्यकारी समिति की शक्तियों को ग्रहण करने के लिए प्रशासकों की एक समिति गठित करने के आदेश के निरस्त होने और AIFF प्रशासन द्वारा दैनिक मामलों पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के बाद निलंबन हटा लिया जाएगा

बैन के पीछे NCP नेता प्रफुल्ल पटेल!

भारतीय फुटबॉल संघ का निलंबन पूर्व केंद्रीय मंत्री और शरद पवार की पार्टी एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल के कारण हुआ है। दरअसल, यूपीए सरकार में मंत्री रहे प्रफुल्ल पटेल 13 साल तक भारतीय फुटबॉल संघ के अध्यक्ष थे। देश का स्पोर्ट्स कोड कहता है कि कोई भी व्यक्ति 3 बार से ज्यादा अध्यक्ष नहीं रह सकता। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा।

पटेल 2009 से भारतीय फुटबॉल संघ के अध्यक्ष रहे। 2020 में पटेल का तीसरा कार्यकाल भी खत्म हो गया था। 2020 में चुनाव होना था लेकिन पटेल ने अध्यक्ष पद छोड़ा ही नही। 2022 की मई में शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पटेल को अध्यक्ष पद से हटने का आदेश दिया। पटेल ने एक याचिका दायर करके माँग की थी कि जब तक नए अध्यक्ष को नहीं चुना जाता, तब तक उनकी एग्जिक्यूटिव काउंसिल का समय बढ़ा दिया जाए, लेकिन कोर्ट ने उनकी माँग को ठुकराते हुए, प्रशासनिक काम काज देखने के लिए एक कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (COA) का गठन कर दिया

हालाँकि, पद से हटते ही प्रफुल्ल पटेल ने गंदी राजनीति शुरू कर दी। राज्य संघों के साथ मिलकर चुनाव नहीं होने दिया। इधर पटेल चुनाव में अड़ंगा लगाते रहे। दूसरी ओर FIFA में अपनी जुगाड़ से AIFF को बैन करने की कोशिशों में भी लगे रहे। फीफा से लगातार धमकी दिलवाते थे। प्रफुल्ल पटेल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए एआईएफएफ और राज्य संघों के 35 सदस्यों की 6 अगस्त को एक बैठक आयोजित किया था। आखिरकार सोमवार देर रात रात फीफा ने इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन को बैन कर दिया।

दरअसल, चुनाव न होने के चलते भारतीय फुटबॉल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (COA) चला रही है। मगर नियम कहता है कि किसी भी देश में अगर फुटबॉल को चलाने वाली प्रॉपर संस्था या ऑर्गनाइजिंग बॉडी नहीं हो तो उसकी मान्यता खतरे में पड़ सकती है। इसका मतलब ये है कि अब अक्टूबर में होने वाले महिला अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी भारत से छीन गई। 

बैन करने की वजह

पहली वजह AIFF की स्वायत्ता पर सवाल है। फीफा के अनुसार किसी भी देश में फुटबॉल को देखने वाली बॉडी पूरी तरह से स्वतंत्र होनी चाहिए। उसमें सरकार या किसी अन्य एजेंसी का दबान नहीं होना चाहिए। दूसरी वजह यह है कि फीफा के अनुसार समय पर चुनाव होने चाहिए, लेकिन AIFF में 2020 के बाद से चुनाव नहीं हुए हैं। इसके अलावा फीफा सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स को बाहरी दखलअंदाजी यानी तीसरा पक्ष मानती है। इन्हीं सब वजहों से फीफा ने AIFF को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

छेत्री ने कहा था- फीफा की चेतावनी पर ध्यान न दें

गौरतलब है कि हाल ही भारतीय कप्तान सुनील छेत्री ने सस्पेंशन को लेकर बयान दिया था। उन्होंने अपने साथी खिलाड़ियों से फीफा की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लेने की बात कही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छेत्री ने खिलाड़ियों से सिर्फ अपने खेल पर ध्यान देने की बात कही थी।

‘मैंने कुछ गलत नहीं किया’ : लाल किला हिंसा के वक्त मौजूदगी को पंजाब के मंत्री ने बताया जायज, कहा- किसान का बेटा बनकर गया था

साल 2021 में गणतंत्र दिवस के मौके पर लाल किले पर जब हिंसा हुई थी, उस समय प्रदर्शनकारियों के साथ वहाँ आम आदमी पार्टी नेता व वर्तमान में पंजाब के ट्रांस्पोर्ट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लड़ भी मौजूद थे

ये खुलासा पिछले दिनों एक वीडियो से हुआ था। इस वीडियो को देखने के बाद कॉन्ग्रेस ने माँग की थी कि भुल्लड़ को पद से हटाया जाए। वहीं AAP नेता भुल्लड़ ने अब इस संबंध में सफाई देकर कहा है कि वह किसान आंदोलन के वक्त वहाँ एक किसान के बेटे की हैसियत से गए थे।

उन्होंने कहा, “देखों मैं किसान का बेटा हूँ। किसान आंदोलन के समय हर किसान और उसका बेटा दिल्ली गया था। मैंने कुछ गलत नहीं किया है।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस के नेता सुखपाल खैहरा द्वारा भुल्लड़ की वीडियो साझा किए जाने पर भुल्लड़ ने सुखपाल पर भी निशाना साधा और कहा कि अब वो सफाई दें कि क्या वो अपने पिता की तरह खालिस्तानी समर्थक हैं क्या?

उन्होंने कहा, “सुखपाल खैहरा के पिता खालिस्तान माँग चुके हैं। उन्हें अपने पिता के बारे में लोगों को बताना चाहिए। पहले आप सफाई दो।”

बता दें कि कुछ दिन पहले ही सुखपाल खैहरा ने लाल किले पर बनाई गई दीप सिद्धू की वीडियो को शेयर किया था। इस वीडियो में लालजीत सिंह साफ दिख रहे थे। ऐसे में खैहरा ने पूछा था,

“अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान कृपया बताएँ कि क्या आपने परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लड़ लाल किले पर केसरी निशान साहिब को फैलाने के दौरान दीप सिद्धू के साथ ही थे? अगर हाँ, तो मुख्यमंत्री उन्हें कैसे देश विरोधी कहेंगे और अपने मंत्रिमंडल में रखेंगे?”

याद दिला दें कि साल 2021 में दीप सिद्धू जैसे कई खालिस्तानी समर्थक, अपने झंडे के साथ लाल किले पहुँचे थे और वहाँ उन्होंने जमकर उत्पात मचाया था। वहीं 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। घटना के बाद कॉन्ग्रेस और भाजपा दोनों ही ने भुल्लड़ की मौजूदगी पर सवाल उठाए थे। भाजपा की माँग यह भी थी कि जो हिंसा केस में एफआईआर हुई है उनमें लालजीत सिंह भुल्लड़ का नाम भी शामिल किया जाए।

कर्नाटक के शिवमोगा में लगे वीर सावरकर के पोस्टर तो काटा बवाल, प्रेम सिंह को चाकू घोंपा: धारा 144 लागू, अब्दुल, नदीम और जबीउल्लाह गिरफ्तार

कर्नाटक के शिवमोगा में वीर सावरकर के पोस्टर लगाए जाने के कारण हुए बवाल के बाद वहाँ के गाँधी बाजार में एक हिंदू व्यक्ति को चाकू घोंपे जाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित की पहचान प्रेम सिंह के तौर पर हुई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

तीन गिरफ्तार

डोडापेटे पुलिस ने इस संबंध में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। एक की पहचान 25 साल के नदीम के तौर पर हुई है और दूसरे की पहचान अब्दुल रहमान के तौर पर हुई हैं।

वहीं तीसरा आरोपित, सोमवार की देर शाम थिरतथल्ली रोड पर गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपित को पकड़ने के दौरान पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जो कि उसके पैर में लगी। उसका नाम जबीउल्लाह बताया गया है। उसने पकड़े जाने के बाद पुलिस पर हमला किया था, इसी वजह से पुलिस को जवाबी कार्रवाई में बंदूक चलानी पड़ी।

15 अगस्त को हुआ हमला

कथिततौर पर प्रेम सिंह एक कपड़े के स्टोर में काम करते थे। घर आते समय 15 अगस्त को उनके ऊपर हमला हुआ। स्थानीय अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। पुलिस कह रही है कि अभी हमले का कारण साफ नहीं है।

हालाँकि कर्नाटक के गृहमंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने चाकू घोंपने की घटना को वीर सावरकर के पोस्टर से जोड़कर बताया है। उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा,

“जैसा कि मुझे बताया गया है कि शिवमोगा में एक चाकू घोंपने का मामला प्रकाश में आया है। ऐसा लग रहा है कि ये वीर सावरकर की फोटो से जुड़ा है। अभी पूरी डिटेल्स आना बाकी हैं।”

इस बीच शिवमोगा जिला कलेक्टर आर सेल्वमणि ने मंगलवार को शहर और भद्रावती नगर सीमा में स्कूल और कॉलेज बंद रखने का आदेश दिया है। उनके आदेशानुसार 18 अगस्त तक ये रोक इलाके में रहेगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

शिवमोगा में झड़प, धारा 144 लागू

बता दें कि कर्नाटक के शिवमोगा में सोमवार (15 अगस्त, 2022) को अमीर अहमद सर्कल पर हिंदूवादी संगठनों ने वीर सावरकर की तस्वीर लगाई थी। जिसके कुछ देर बाद वहाँ टीपू सुलतान सेना का झंडा लेकर दूसरे समुदाय के युवक पहुँच गए और तस्वीर हटाने की कोशिश करने लगे।

देखते ही देखते दोनों समुदाय में बहस शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। अमीर अहमद सर्कल में दोनों गुटों के बीच हुई झड़प को देखते हुए शिवमोगा पुलिस ने धारा 144 लागू कर दी है।

सावरकर के बैनर हटाए गए

एक अन्य घटना में, मेंगलुरु के सुरतकल (Surathkal) चौराहे का नाम सावरकर के नाम पर रखने वाले एक बैनर को हटा दिया गया है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने इस बैनर पर आपत्ति जताई थी। SDPI की सुरतकल इकाई ने बैनर पर आपत्ति जताई और इसे पुलिस के संज्ञान में लेकर आई। निगम आयुक्त अक्षय श्रीधर ने बैनर को हटाने के आदेश दिए थे, जिसके बाद इसे हटा दिया गया।

सपा नेता इसरार अहमद पर योगी सरकार का शिकंजा, 35 लाख की संपत्ति कुर्क: TET परीक्षा के फरार नकल माफियाओं पर हुआ एक्शन

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में नकल कराने वाले गैंग के फरार मेंबरों पर योगी सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस मामले में खुलासे के बाद पहले तो यूपी पुलिस ने सपा नेता इसरार अहमद सहित चारो फरार आरोपितों पर 10-10 हजार का इनाम घोेषित किया था। वहीं इसके बाद भी जब आरोपितों ने सरेंडर नहीं किया तो अब पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी ,

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आजमगढ़ जनपद के रानी की सराय थाने की पुलिस ने शनिवार को सपा नेता व पूर्व ब्लाक प्रमुख इसरार अहमद के घर पहुंचकर 35 लाख रुपए की चल संपत्ति कुर्क की। वहीं अब इस मामले में बाकि फरार आरोपितों पर भी कुर्की की तलवार लटक रही है।

बता दें कि इस मामले की विवेचना सीओ लालगंज मनोज रघुवंशी कर रहे थे। जाँच के दौरान इस मामले में सपा के पूर्व ब्लाक प्रमुख इसरार अहमद सहित आठ लोगों का नाम सामने आया था। जिसमें से पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन इसरार सहित चार आरोपित फरार बताए जा रहे थे। पुलिस ने पिछले दिनों चारो फरार आरोपितों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। लेकिन इसके बाद भी आरोपित कोर्ट में सरेंडर नहीं किए तो पुलिस ने धारा 82 के तहत इनके घर नोटिस चस्पा किया। जिस पर अब एक्शन शुरू हो गया है।

गौरतलब है कि जनवरी, 2022 में माह में हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा में नक़ल कराने का खुलासा पुलिस ने किया था। इस मामले में पुलिस ने लगभग 51 लाख रुपए के चेक व कैश की बरामदगी दिखाने के साथ ही 22 लोगों को गिरफ्तार किया था। रिपोर्ट के अनुसार, नकल माफियाओं के गैंग में डीआईओएस कार्यालय के एक लिपिक की भी संलिप्तता सामने आई थी। इस मामले में डीआईओएस के खिलाफ भी शासन स्तर पर कार्रवाई की गई थी।

वकील मोहम्मद आलम ने अनुज बन कर छात्रा को फाँसा, भाइयों संग मिल कर किया गैंगरेप: दर्शन के लिए काशी भी ले गया था

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से लव जिहाद (Love Jihad) का मामला सामने आया है। यहाँ मोहम्मद आलम ने अनुज बनकर सोशल मीडिया पर पहले नर्सिंग छात्रा से दोस्ती की फिर अपने भाइयों के साथ मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया। छात्रा की शिकायत के आधार पर कर्नलगंज पुलिस ने मोहम्मद आलम और उसके भाइयों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लव जिहाद का यह मामला कर्नलगंज थाना क्षेत्र के मम्फोर्डगंज इलाके का है। नर्सिंग छात्रा बलिया की रहने वाली है। प्रयागराज के सोनू उर्फ अनुज प्रताप सिंह से उसकी दोस्ती सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। वह युवती के करीब आने के लिए हर जतन कर रहा था। बताया जा रहा है कि युवती जब बीमार हुई, तब अनुज ने उसकी मदद की। वह लड़की को काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए भी अपने साथ लेकर गया था। लड़की को अनुज पर पूरा विश्वास हो गया था। वह दोनों एक-दूसरे के काफी करीब आ गए। इसके बाद अनुज लड़की को शादी का झाँसा देकर उसे रामबाग स्थित एक होटल में ले गया और उसके साथ संबंध बनाए। यही नहीं उसने लड़की के गर्भवती होने के बाद उसका गर्भपात भी कराया।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि सोनू ने उससे शादी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए कहा था। फिर वह उसे अपने साथ रजिस्ट्रार दफ्तर ले गया, जहाँ दोनों ने कोर्ट मैरिज की। पुलिस की जाँच में सामने आया है कि युवक ने रजिस्टर में भी अपना नाम सोनू उर्फ अनुज प्रताप सिंह ही लिखा है। इसी बीच छात्रा को अनुज के बारे पता चला कि वह हिंदू नहीं मुस्लिम है, जिसने उससे झूठ बोलकर कोर्ट मैरिज की। लड़की ने जब इसका विरोध किया तो वह उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा।

इसके बाद उसे कमरे में बंंद करके आलम, उसके भाई मो. असलम और नूर आलम ने उसके साथ दुष्कर्म किया। किसी तरह वह इनके चंगुल से भागकर थाने पहुँची और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। इसकी सूचना मिलते ही राष्ट्रीय हिंदू संगठन के जितेंद्र मिश्रा भी कार्यकर्ताओं के साथ थाने पहुँच गए और अधिकारियों से बातचीत कर कार्रवाई की माँग की।

इंस्पेक्टर कर्नलगंज राममोहन राय के मुताबिक, आरोपित पेशे से वकील है। पीड़ित छात्रा ने दो वर्ष पूर्व सिविल लाइंस थाने में दीपक पाल के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। दीपक पाल अभी जेल में बंद है। उसी दौरान उसकी अधिवक्ता से दोस्ती हुई थी। शिकायत के आधार सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच की जा रही है।

‘जिनसे जान-पहचान, उन्हें ही जज नियुक्त करता है कॉलेजियम, अच्छे रह जाते हैं पीछे’: CJI के सामने सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष ने उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष विकास सिंह ने सोमवार को कहा कि 43% लॉ मेकर सांसदों का आपराधिक इतिहास रहा है और देश को ऐसे लोगों को निर्वाचित होने से रोकने के लिए कानून बनाकर सुधार की जरूरत है। वहीं उन्होंने कॉलेजीएम द्वारा जजों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सिंह ने भारत की आजादी की 75वीं वर्षगाँठ पर सुप्रीम कोर्ट में एक समारोह को संबोधित करते हुए कॉलेजियम से निचली न्यायपालिका से लोगों को सर्वोच्च न्यायालय में ‘केवल वरिष्ठता के बजाय उनके द्वारा किए गए केसों के जजमेंट के आधार पर’ उठाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि न्याय प्रदान करने के संबंध में ये दो क्षेत्र थे – कानून निर्माता और न्यायाधीशों की नियुक्ति – जहाँ गंभीर सुधार और गंभीर आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता थी।

उन्होंने कहा, “आज 75 साल बाद अगर हम देखते हैं कि हमारे 43 फीसदी विधायकों का आपराधिक इतिहास है, तो मुझे लगता है कि हमें सुधार की जरूरत है। मुझे लगता है कि हमें (कानून) में संशोधन करने की आवश्यकता है क्योंकि कोई भी व्यक्तिगत राजनीतिक दल यह सुनिश्चित करने की पहल नहीं कर सकता है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों का चुनाव न हो। क्योंकि अगर कोई पार्टी जीतने वाले को टिकट नहीं देती है, तो दूसरी पार्टी देगी।

बता दें कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एन वी रमना इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसी समारोह में एससीबीए अध्यक्ष विकास सिंह ने वहाँ मौजूद कानून मंत्री किरेन रिजिजू से भी आग्रह किया कि वे इस पर गंभीरता से विचार करें।

उन्होंने कहा, “यदि कोई कानून है, यदि समान अवसर है, तो निश्चित रूप से हम एक बेहतर संसद, बेहतर कानून बनाने और कानून बनाने पर अधिक स्पष्ट चर्चा करने में सक्षम होंगे। अगर कानून बनाने में सुधार होता है तो न्याय प्रदान करने से अंततः लाभ होगा।”

न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में, उन्होंने दावा किया, “कॉलेजियम के सदस्य, विशेष रूप से उच्च न्यायालयों में, उन न्यायाधीशों को ऊपर उठाने में अधिक रुचि रखते हैं जिन्हें वे जानते हैं, बजाय इसके कि वे सर्वश्रेष्ठ नाम खोजने की कोशिश करें।”

विकास सिंह ने कहा कि एससीबीए अध्यक्ष के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को बेंच में पदोन्नत करने के उनके प्रयासों को ठुकरा दिया गया। क्योंकि अच्छे नामों में किसी की दिलचस्पी नहीं है।

“यही वह जगह है जहाँ भ्रम की स्थिति है। कभी-कभी हमारे पास एससी (बार) का एक व्यक्ति ऊँचा हो जाता है, लेकिन यह तभी होता है जब यहाँ कॉलेजियम के सदस्यों में से एक अपनी उम्मीदवारी को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है, और यह बिल्कुल भी स्वस्थ बात नहीं है।”

उन्होंने कहा, “यहाँ तक ​​​​कि जब आप निचली न्यायपालिका से लोगों को ऊपर उठाते हैं, तो यह केवल वरिष्ठता के बजाय उनके द्वारा किए गए मामलों के जजमेंट के आधार पर होना चाहिए।”

‘पता नहीं 9 सितंबर को क्या होगा’: ‘लाल सिंह चड्ढा’ का हाल देख कर सहमे करण जौहर, ‘ब्रह्मास्त्र’ के डायरेक्टर को अभी से दे रहे दिलासा

क्या करण जौहर को रिलीज से पहले ही ‘ब्रह्मास्त्र’ के फ्लॉप होने का डर सता रहा है? निर्देशक अयान मुखर्जी के नाम उनके सन्देश से तो यही झलकता है। बता दें कि करण जौहर ही ‘ब्रह्मास्त्र’ के निर्माता हैं, जबकि अयान मुखर्जी इसके निर्देशक हैं। फिल्म में रणबीर कपूर और उनकी पत्नी आलिया भट्ट के अलावा वरिष्ठ अभिनेता अमिताभ बच्चन और दक्षिण के अभिनेता नागार्जुन भी शामिल हैं। अयान मुखर्जी के जन्मदिन पर इंस्टाग्राम पर करण जौहर ने ये पोस्ट लिखा।

इस पोस्ट में उन्होंने प्यार को एक मजबूत एहसास और भावना बताते हुए लिखा कि ये एक ऐसी चीज है तो बँट भी सकती है, लेकिन ये फिर भी ये प्रचुरता में रहता है। उन्होंने अयान मुखर्जी के लिए ‘मैं तुमसे प्यार करता हूँ’ लिखते हुए कहा कि वो उनके लिए उतना ही ‘प्रोटेक्टिव’ महसूस करते हैं, जितना वो अपने जुड़वाँ बच्चों के लिए। उन्होंने दावा किया कि अयान मुखर्जी ने अपने करियर का पूरा का पूरा एक दशक ही ‘ब्रह्मास्त्र’ में लगा दिया।

करण जौहर ने इस पोस्ट में लिखा, “मैंने आज तक किसी को एक प्रोजेक्ट में इस तरह से अपनी सारी मेहनत लगाते हुए नहीं देखा, जिस तरह से तुमने किया है। हम इस क्षण इसकी कल्पना नहीं कर सकते कि कल क्या होगा या 9 सितंबर (फिल्म की रिलीज की तारीख़) को हमारे लिए क्या लिखा है। लेकिन तुम्हारी प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत पहले से ही एक विजय है। तुम उड़ते रहो। बस अपना लक्ष्य ऊँचा तय करते रहो। अगर आप अपने सपने में विश्वास रखते हैं तो वास्तविकता बन जाता है, और मुझे पता है कि तुम्हें ये विश्वास है।”

करण जौहर के इस बयान से ये साफ़ है कि ‘लाल सिंह चड्ढा’ के सुपर फ्लॉप होने के बाद उन्हें भी इसका डर बैठ गया है कि 9 सितंबर को क्या होगा। पहले जो फ़िल्मी हस्तियाँ अपनी फिल्मों को लेकर अकड़ में रहती थी, आज वो ही भविष्य की अनिश्चितताओं की बातें कर रहे हैं। करीना कपूर भी पहले कहती थीं कि हमारी फिल्म मत देखो, जबरदस्ती थोड़े है। वहीं अब वो लोगों से अपील कर रही हैं कि फिल्म का बॉयकॉट न किया जाए।

‘टीपू सुल्तान पार्टी’ ने वीर सावरकर के पोस्टर फाड़े, धरम सिंह को चाकू से गोदा: SDPI ने वीर सावरकर चौराहे का बैनर फाड़ा

कर्नाटक के शिवमोग्गा में सोमवार (15 अगस्त, 2022) को अमीर अहमद सर्कल में वीर सावरकर का पोस्टर (Savarkar Poster Row) लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मामले को तूल पकड़ता देख पुलिस ने इलाके में धारा 144 लगा दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज अमीर अहमद सर्कल पर हिंदूवादी संगठनों ने वीर सावरकर की तस्वीर लगा दी। इसको लेकर कुछ देर बाद वहाँ टीपू सुलतान सेना का झंडा लेकर दूसरे समुदाय के युवक पहुँच गए और तस्वीर हटाने की कोशिश करने लगे, जिसको लेकर दोनों समुदाय में बहस शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। अमीर अहमद सर्कल में दोनों गुटों के बीच हुई झड़प को देखते हुए शिवमोग्गा पुलिस ने धारा 144 लागू कर दी है। बताया जा रहा है कि शिवमोग्गा में जारी तनाव के बीच मुस्लिम युवकों ने धरम सिंह नाम के शख्स को चाकू मार दिया।

इसी तरह की एक अन्य घटना में, मेंगलुरु के सुरतकल (Surathkal) चौराहे का नाम सावरकार के नाम पर रखने वाले एक बैनर को हटा दिया गया है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने इस बैनर पर आपत्ति जताई थी। SDPI की सुरतकल इकाई ने बैनर पर आपत्ति जताई और इसे पुलिस के संज्ञान में लेकर आई। निगम आयुक्त अक्षय श्रीधर ने बैनर को हटाने के आदेश दिए थे, जिसके बाद इसे हटा दिया गया।

मेंगलुरु नगर-निगम ने इससे पहले मेंगलुरु उत्तर से भाजपा के विधायक वाई भारत शेट्टी के अनुरोध पर इस चौराहे का नाम सावरकर के नाम पर रखने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया था। नगर-निगम सावरकर के नाम पर इसका आधिकारिक नामकरण किए जाने के लिए सरकार की अनुमति का इंतजार कर रहा है। श्रीधर ने कहा कि नगर परिषद ने इस चौराहे का नाम सावरकर के नाम पर रखने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया था। लेकिन, सरकार ने आधिकारिक रूप से मंजूरी नहीं दी है, तो शिकायतों को देखते हुए बैनर को हटा दिया गया है।

वहीं, एसडीपीआई के एक स्थानीय नेता ने कहा कि इस मुद्दे को पुलिस के संज्ञान में लाया गया, क्योंकि सुरतकल सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि एसडीपीआई सावरकर के नाम पर सर्कल के नामकरण के खिलाफ है।

जिन्हें लालू यादव ने बताया था ‘भकचोन्हर’, उन्हें अपनी ही पार्टी के नेताओं ने दी गाली: मंत्री बनने के लिए कॉन्ग्रेस में बवाल, बिहार में होना है मंत्रिमंडल विस्तार

बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बवाल हो गया है। सोमवार (15 अगस्त 2022) को सदाकत आश्रम में कॉन्ग्रेस कोटे से पाँच मंत्री बनाने की माँग को लेकर खूब हंगामा किया गया। इस दौरान जमकर गाली-गलौज भी हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने माँग की है कि विधायकों की संख्या के आधार पर कैबिनेट में हमारे पाँच मंत्री होने चाहिए। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बिहार प्रभारी भक्त चरण दास के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।

कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव गयासुद्दीन खान ने कहा कि विधायकों की संख्या के आधार पर कॉन्ग्रेस को मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी की पार्टी के एक विधायक हैं, उनकी पार्टी से एक मंत्री बनाया जा रहा है। उसी तरह कॉन्ग्रेस के विधायकों की संख्या को देखते हुए पाँच मंत्रीपद मिलना चाहिए। मंत्रिमंडल में सबकी भागदारी होनी चाहिए।

हालाँकि, बाद में वहाँ मौजूद पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने बिहार कॉन्ग्रेस प्रभारी को किसी तरह बाहर निकाला और मामला शांत कराया। लेकिन गयासुद्दीन खान और आपात खान जैसे नेताओं ने जिस तरीके से विरोध जताया उससे सदाकत आश्रम में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इन दोनों नेताओं ने मीडिया में खुलकर अपनी आपत्ति जताई। यही नहीं इस दौरान उन्होंने अपमानजनक टिप्पणी करने से भी गुरेज नहीं किया।

बता दें कि मंगलवार (16 अगस्त 2022) को नीतीश कैबिनेट का विस्तार होने जा रहा है। कहा जा रहा है कि महागठबंधन ने संभावित मंत्रियों के नाम लगभग तय कर लिए हैं। कैबिनेट में राजद की हिस्सेदारी अधिक होगी। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उनसे संभावित नाम पर चर्चा की। नीतीश कैबिनेट के सारे मंत्रियों की शपथ एक साथ नहीं होगी। कुछ ही मंत्रियों की शपथ मंगलवार को होगी। तय फार्मूले के तहत राजद को 17, जदयू को 13, कॉन्ग्रेस को 3, हम को 1, निर्दलीय को 1 मंत्री पद मिलना लगभग तय है। शिक्षा, ग्रामीण कार्य समेत कुछ विभाग राजद के खाते में, जबकि वित्त जदयू के पास जा सकता है।

‘उत्तराखंड में एक भी भ्रष्टाचारी नहीं बचेगा, 1064 नंबर पर करें शिकायत’: CM धामी ने पर्चा लीक का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को किया सम्मानित

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार (15 अगस्त, 2022) को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्पष्ट कर दिया कि राज्य में एक भी भ्रष्टाचारी नहीं बचेगा। सीएम धामी ने हाल ही में यूकेएसएसएससी (UKSSSC) पेपर लीक मामले का खुलासा करने वाली उत्तराखंड एसटीएफ टीम को मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया। इसके साथ ही अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अपने क्षेत्र में अच्छे कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

एसटीएफ की कमान संभाल रहे अजय सिंह और उनके टीम के साथी उपनिरीक्षक दिलवर सिंह, नरोत्तम बिष्ट, उमेश कुमार, विपिन बहुगुणा को सीएम ने मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया गया। UKSSSC पेपर लीक मामले में अब तक एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सीएम धामी ने जनहित में किए जा रहे सरकार के कार्यों के बारे में भी जनता को बताया। सीएम धामी ने कहा कि हमने अपने वादे के अनुसार ‘समान नागरिक संहिता’ के लिए समिति का गठन कर दिया है। उन्होंने जानकारी दी कि भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए आम व्यक्ति कदम उठा सकता है और 1064 में फोन कर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत की जा सकती है।

सीएम धामी ने कहा कि सरकार गरीब परिवारों को तीन सिलेंडर मुफ्त उपलब्ध करवाने जा रही है। इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने ये जानकारी भी दी कि सरकार पर्यटन को बढ़ाना देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने पर्वतीय इलाकों में रोपवे नेटवर्क का निर्माण, सर्फेस पार्किंग के साथ मल्टीस्टोरी पार्किंग, केविटी पार्किंग, टनल पार्किंग विकिसित किए जाने की जानकारी भी जनता को दी।

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड देव भूमि ही नहीं, वीर भूमि भी है। उन्होंने जानकारी दी कि उत्तराखंड में भव्य सैन्य धाम की स्थापना की जा रही है और हमारी सरकार बलिदानी सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे रही है।

UKSSSC पेपर लीक मामला

बता दें कि उत्तरखंड सेवा चयन आयोग की परीक्षा में नकल माफिया ने पेपर लीक करवाया था। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के बाद सामने आया है कि इस केस के तार यूपी नकल माफिया से जुड़े हैं। इस मामले में पेपर लीक कराने वाले कर्मचारियों के साथ अब तक 17 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

इस मामले में शनिवार (13 अगस्त, 2022) को एक पीटी टीचर को गिरफ्तार किया गया है। शिक्षक ने पूछताछ में कई अहम राज खोले हैं। ये शिक्षक उत्तरकाशी इलाके में सरकारी नौकरियों का सौदागर कहे जाने वाले मास्टरमाइंड का खास बताया जा रहा है।

एसएसपी अजय सिंह ने बताया है कि गिरफ्तार शिक्षक ने पेपर लीक मामले में उत्तर प्रदेश के कई नकल माफिया के नाम बताए हैं। कई सालों से ये मिलकर नकल का खेल, खेल रहे हैं। इस मामले में यूपी और उत्तराखंड के नकल माफिया के गठजोड़ का खुलासा हुआ है। एसएसपी का कहना है कि इस केस के मास्टरमाइंड को भी जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।