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पाकिस्तानी एयरफोर्स को आजादी के दिन ‘नए गाने’ पर मिल रही गाली… कंगाल पाकिस्तानियों ने अपनी ही सेना की बैंड बजा दी

पाकिस्तान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। इसी बीच पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF, पीएएफ) ने अपनी आजादी दिवस पर एक नया राष्ट्रगीत लॉन्च किया। इस गाने के लॉन्च होने के बाद पाकिस्तानियों ने पीएएफ की जमकर आलोचना की। कुछ गाली-गलौच पर भी उतर गए।

14 अगस्त पाकिस्तान का आजादी दिवस होता है। इसे भारत में हालाँकि ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ कहा जाता है। रविवार, 14 अगस्त 2022 को पाकिस्तान एयर फोर्स ने जब एक गाना लॉन्च किया तो ‘भूख से बिल-बिला रहे पाकिस्तानी’ भड़क गए।

बड़े उत्साह के साथ पाकिस्तानी वायु सेना ने अपनी आजादी की 75वीं वर्षगाँठ पर आधारित 4 मिनट लंबे गीत को लॉन्च किया। उन्हें लेकिन कहाँ पता था कि पैसों की तंगी से जूझ रहे देशवासियों का पेट गाने से नहीं बल्कि खाने से भरेगा।

पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF, पीएएफ) ने एक बयान में कहा, “ये गीत पाकिस्तानी वायु सेना के उन जवानों के साहस और बहादुरी को श्रद्धांजलि देता है, जिन्होंने दुश्मन के साथ हवाई लड़ाई में बहादुरी की कहानियाँ गढ़ीं और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाई।”

पाकिस्तानी नागरिक हालाँकि पीएएफ के देश प्रेम की इस नाटकीयता से प्रभावित नहीं दिखे। उन्होंने मुश्किल समय में गाने पर पैसे खर्च करने के लिए पाकिस्तानी वायुसेना को जमकर लताड़ा। तंगी के दिनों में इस गीत से गुस्साए नागरिकों की प्रतिक्रिया देखते हुए, पाकिस्तान वायु सेना के आधिकारिक यूट्यूब चैनल ने कॉमेंट सेक्शन ही बंद कर दिया। इसके बावजूद पीएएफ अपने देश के नागरिकों के गुस्से का सामना करने से नहीं बच सकी। सोशल मीडिया में गाने को लेकर पाकिस्तानियों ने अपने वायुसेना की जमकर आलोचना की।

एक फेसबुक पोस्ट में, ‘स्टार्टअप पाकिस्तान’ ने पोस्ट किया था, “पाकिस्तान वायु सेना ने स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष पर नया राष्ट्रीय गीत लॉन्च किया।”

पाकिस्तानी एयर फोर्स ने लॉन्च किया नया राष्ट्रगीत

इस मामले पर शाह हुसैन खान ने लिखा, “हमें गाना नहीं न्याय चाहिए।” एक अन्य फेसबुक यूजर ने चुटकी लेते हुए कहा, “गरीबी, महंगाई, भ्रष्टाचार, अस्थिर अर्थव्यवस्था और सत्तारूढ़ दलों की खराब मानसिकता को हराने के लिए हमें बस एक नए राष्ट्रीय गीत की जरूरत है। धन्यवाद पाक एयरफोर्स।”

वन आर फरियाह खान ने टिप्पणी की कि कैसे पाकिस्तान वायु सेना और उसके सशस्त्र बलों के अन्य विंग देश के खजाने को सुखा रहे हैं। एक अन्य यूजर ने पाकिस्तान वायु सेना पर कटाक्ष किया और व्यंग्यात्मक रूप से सुझाव दिया कि भारत नया गीत सुनने के बाद कश्मीर (जो भारत का अभिन्न अंग है) को पाकिस्तान को सौंप सकता है।

“महान उपलब्धि। आशा है कि हम इस म्यूजिक इंडस्ट्री से और अच्छी खबरें सुनेंगे” – यह टिप्पणी मलिक जान ने की।

एक यूजर अहमद जुबैर ने टिप्पणी की, “माशाअल्लाह। महंगाई को मात देने के लिए बहुत जरूरी है। आशा है कि यह हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। शानदार कदम पाक वायु सेना।”

अम्मार अहमद ने कहा, “मीडिया बिजनेस में शामिल होने के लिए पीएएफ को बधाई।”

फेसबुक यूजर अरसल अहमद ने पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “बाजवा प्रमुख गायक हैं।”

एक यूजर फैजान नूर ने कमेंट किया, “पाकिस्तान को एक राष्ट्रगान लॉन्च करने के लिए बधाई, यह दिखाने के लिए कि अब हम कितने मूल्यवान हैं, यह दिखाने के लिए कि मुद्रा कैसे गति में है, हम कैसे एएफजी में आतंकवादी गतिविधि करने के लिए जमीन देते हैं, यह दिखाने के लिए कि हमारे राजनेता हमारे उद्योगों के विकास के लिए कितने सक्षम हैं। भविष्य के विकास के लिए और गाने गाएँ। पाकिस्तान जिंदाबाद।”

पाकिस्तान आर्थिक संकट की स्थिति से गुजर रहा है। इस साल जुलाई में वहाँ की मुद्रास्फीति 21.3% तक पहुँच गई है। पाकिस्तान की सेना अति राष्ट्रवाद के जरिए जनता की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े सार्वजनिक मुद्दों को भटकाने में सक्षम थी, लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पैसों की तंगी से जूझ रहे पाकिस्तानी उनकी बातों में नहीं आ रहे।

₹180 करोड़ की फिल्म, 4 दिन में बस ₹38 करोड़: लाल सिंह चड्ढा के फ्लॉप होते ही सदमे में आमिर खान, डिस्ट्रीब्यूटर्स ने माँगा मुआवजा

लाल सिंह चड्ढा के बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पिटने के बाद आमिर खान सदमे में हैं। एक्टर और उनकी पूर्व बीवी के एक करीबी दोस्त ने बताया है कि आमिर खान ने फॉरेस्ट गंप की रीमेक बनाने के लिए बहुत कोशिशें की थीं, लेकिन दर्शकों द्वारा नकारे जाने के बाद उन्हें बहुत बुरा लगा और वह सदमे में चले गए।

लाल सिंह चड्ढा फिल्म से जहाँ आमिर की साख पर सवाल खड़े हुए। वहीं बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी इससे काफी नुकसान हुआ है जिसके कारण उन्होंने मेकर्स से मुआवजे की माँग की है।

आमिर के लिए परेशानी की बात ये है कि वो खुद इस फिल्म के को-प्रोड्यूसर हैं। ऐसे में शायद डिस्ट्रीब्यूटर्स का दबाव उनके ऊपर भी हो। कहा जा रहा है वो इस फिल्म के फ्लॉप होने के पीछे खुद को वजह बता चुके हैं, लेकिन इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया गया है।

लाल सिंह चड्ढा का बुरा हाल

बता दें कि 180 करोड़ रुपए के बजट में बनी लाल सिंह चड्ढा सोशल मीडिया पर चले बॉयकॉट अभियान के कारण बॉक्स ऑफिस पर कोई जादू नहीं दिखा पाई। अभी तक उन्होंने कुल 38.21 करोड़ रुपए कमाए हैं। रिलीज के चौथे दिन रविवार को इस फिल्म ने 10.5 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। इससे पहले ये फिल्म शनिवार को 8.75 करोड़ रुपए और शुक्रवार को 7.26 करोड़ रुपए का ही बिजनेस कर पाई थी। पहले दिन इसकी कमाई 11.7 करोड़ रुपए थी।

लाल सिंह चड्ढा को बचाने की कोशिशें

उल्लेखनीय है कि लाल सिंह चड्ढा का विरोध जहाँ सोशल मीडिया पर जोर-शोर से हो रहा है। वहीं बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रौशन से लेकर पंजाब सीएम भगवंत मान तक आमिर खान की साख बचाने को मैदान में उतर आए।

ऋतिक ने लिखा,  “मैंने हाल ही में लाल सिंह चड्ढा देखी। मैंने इस फिल्म के दिल को महसूस किया है। अच्छी और बुरी चीजें एक साइड में रखकर, यह फिल्म वाकई शानदार है। इतनी अच्छी फिल्म को मिस मत करिए। जाइए और इसे अभी देखिए। ये बेहद खूबसूरत और सुंदर है।”

वहीं भगवंत मान ने कहा, “मैंने लाल सिंह चड्ढा फिल्म देखी। ये फिल्म भाईचारे की मिसाल को कामय करती है। साथ ही ये लोगों के बीच आपस में नफरत न करने का संदेश भी देती है। आमिर खान और उनकी पूरी टीम को इस शानदार फिल्म के लिए ढे़र सारी बधाई।”

लाल सिंह चड्ढा में सेना के अपमान का आरोप

आमिर खान की इस फिल्म में कथिततौर पर सेना के अपमान का आरोप लगा है। दिल्ली के वकील विनीत जिंदल ने पुलिस कमिश्नर के समक्ष आमिर खान और पैरामाउंट पिक्सचर्स समेत अन्य पर केस दर्ज कराया है। उन्होंने माँग की है कि इनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 153, 153ए, 298 और 505 के तहत एफआईआर हो।

वो हिंदुस्तानी जो अभी भी नहीं हैं आजाद: PoJK के लोग देख रहे आशाभरी नजरों से भारत की ओर, हिंदू-सिखों का यहाँ हुआ था नरसंहार

जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है।
वह नर नहीं, नर-पशु निरा है और मृतक समान है।

कविवर माखनलाल चतुर्वेदी की ‘आत्माभिमान’ शीर्षक कविता की ये पंक्तियाँ स्वतंत्रता और राष्ट्रीयता की भावना की नींव हैं। ‘स्वतंत्रता’ एक शब्द नहीं तन-मन में बिजली की सी कौंध पैदा करने वाला भाव है। यह मनुष्य ही नहीं जीव मात्र की चाह होती है। इसी तरह किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी आकांक्षा, सबसे बड़ा सपना, सबसे बड़ी ताकत भी स्वतंत्रता ही होती है। पराधीनता मनुष्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की भी संभावनाओं को कुचल डालती है। देश और देशवासियों का स्वाभाविक और सहज विकास स्वतंत्र वातावरण में ही हो सकता है।

किसी भी राष्ट्र के लिए पराधीनता से बढ़कर कोई अभिशाप नहीं होता है। इसीलिए सचेत आत्मा वाले राष्ट्र पराधीनता को सरलता से नहीं स्वीकारते। भारत एक सजग आत्मा वाला राष्ट्र रहा है। भारत ने विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा उसे गुलाम बनाने की कोशिशों के खिलाफ सतत संघर्ष किया है। स्वतंत्र रहने की इसी भावना के कारण ही भारत के स्वतन्त्रता संघर्ष का इतना लंबा और गौरवशाली इतिहास है। बीच में अपनी कुछ भूलों-गलतियों और विदेशी आक्रान्ताओं की धूर्तता और कुटिल चालों के कारण सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृति वाले इस राष्ट्र के ऊपर पराधीनता के बादल छा गए थे। लेकिन इन बादलों को छाँट कर अपनी स्वतन्त्रता, अपनी अस्मिता, अपनी पहचान और अपनी सनातन संस्कृति को बचाने की लड़ाई भी भारतवासियों द्वारा बहुत मजबूती और अदम्य साहस के साथ लगातार लड़ी गई।

हजारों-लाखों वर्ष पुरानी सनातन संस्कृति वाले भारतवर्ष को लगभग एक हजार साल की पराधीनता के कालखंड में नष्ट-भ्रष्ट करने की असंख्य कोशिशें और साजिशें हुईं। अनेक बार आक्रमण करके विदेशी आक्रान्ताओं ने लूटपाट करके, डर और लालच से मतान्तरण कराके ‘सोने की चिड़िया’ और ‘विश्वगुरू’ के रूप में सम्मानित भारतवर्ष की गौरवशाली संस्कृति को मिटाने की अनवरत कोशिशें की। परन्तु उनकी वे साजिशें असफल ही साबित हुईं। भारत माँ के करोड़ों वीरों और वीरांगनाओं के बलिदानों के परिणामस्वरूप पराधीनता की लम्बी अँधेरी रात का अंत हुआ और 15 अगस्त, 1947 को भारत देश आज़ाद हुआ। इस दिन देश स्वाधीन तो हो गया, लेकिन उसे औपनिवेशिक (गुलाम) व्यवस्था और चेतना से स्वतंत्र करने का काम अधूरा ही रहा। वह काम अब जारी है।

आज़ादी के अमृत महोत्सव की शुभ बेला में इस दिन को संभव करने वाले वीरों और वीरांगनाओं को याद करना राष्ट्रीय कर्तव्य है। मंगल पांडे, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई, रानी गाइदिन्ल्यू, तात्या टोपे, अजीमुल्ला खान, बिरसा मुंडा, वीर कुंवर सिंह, तिरोत सिंह, टिकेन्द्रजीत सिंह, सरदार भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त, उधम सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, दुर्गा भाभी, कनकलता बरुआ, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह, नेताजी सुभासचन्द्र बोस, महात्मा गाँधी, लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, विपिन चन्द्र पाल, सरदार वल्लभभाई पटेल, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, वीर सावरकर, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी, जयप्रकाश नारायण, डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्रीमती एनी बेसेंट, सरोजिनी नायडू, कैप्टन लक्ष्मी सहगल, पंडित प्रेमनाथ डोगरा आदि असंख्य क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों की यह सूची है। करोड़ों अनाम बलिदानी भी हैं जिनका नाम जाने-अनजाने इतिहास में अंकित न हो सका, लेकिन उनका त्याग, समर्पण और देशप्रेम किसी से भी कमतर नहीं था।

भारत की स्वतंत्रता, एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए अपना बलिदान देने वाले देश के लाखों जांबाजों का स्मरण करना और उन्हें श्रद्धान्जलि देना समस्त देशवासियों का सामूहिक कर्तव्य है। उनके आश्रितों और परिवार के सदस्यों का मान-सम्मान करना और उन्हें हरसंभव सुविधा और सहूलियत देना भी समाज का कर्तव्य है। हमें सदैव याद रखना चाहिए कि जो समाज अपने वीरों और बलिदानियों को सम्मान देना भूल जाता है, वह विनाश की ओर बढ़ जाता है।

हमें स्वतंत्रता मिले 75 वर्ष हो गए हैं। स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने बहुत लम्बा संघर्ष किया था। इस संघर्ष में असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के तप, त्याग और बलिदान की गाथाएँ छुपी हैं। स्वतंत्रता के बाद जन्मी वर्तमान पीढ़ी को उनके निःस्वार्थ बलिदान, शौर्य और साहस का ज्ञान होना आवश्यक है। हमारे पूर्वजों ने स्वतंत्रता-प्राप्ति के लिए क्या किया है, इसे केवल जानना ही नहीं चाहिए बल्कि इससे प्रेरणा भी लेनी चाहिए, ताकि अपनी स्वतंत्रता की रक्षा की जा सके। अपने इन स्वतंत्रता सेनानियों के अलावा स्वतन्त्रता की रक्षा के लिए कुर्बानी देने वाले सेना और अन्य सुरक्षा बलों के जाँबाज सिपाहियों को भी निरंतर याद रखना चाहिए। आज भारतवर्ष को और आगे ले जाने की आवश्यकता है। उसके लिए वर्तमान पीढ़ी के आत्मविश्वास को बढ़ाना और उसे राष्ट्रभाव के लिए समर्पित और संगठित करना जरूरी है। ऐसा करके ही भारत को विश्व का सिरमौर बनाया जा सकता है। अपने पूर्वजों की वीरता और बलिदानों से प्रेरणा लेने वाला समाज ही सुरक्षित, संगठित, स्वतंत्र, संप्रभु और समृद्ध रह सकता है।

पीओजेके पर अक्टूबर 1947 में हुए पाकिस्तानी आक्रमण के समय मीरपुर, मुज़फ़्फ़राबाद, भिम्बर, कोटली आदि स्थानों पर हिन्दू और सिखों का क्रूरतम नरसंहार हुआ, माँ-बहनों पर अनेक अत्याचार हुए। उनमें से हजारों को अपना घर-द्वार, रोजी-रोटी, धन-संपत्ति; यहाँ तक कि प्राण भी गँवाने पड़े। लाखों निर्दोष लोग विस्थापित हुए। वे न्याय और अपने अधिकारों और घर वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसी प्रकार पीओजेके में रहने वाले भारतीय भी आज तक उपेक्षित और उत्पीड़ित हैं। वे अभी तक स्वतंत्र नहीं हैं, और भारत की ओर आशाभरी नज़र से देख रहे हैं। पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर और चीन अधिकृत जम्मू कश्मीर में रह रहे भारतीयों को न्याय, सम्मान, सुरक्षा, स्वतंत्रता और भारत की नागरिकता दिलाना प्रत्येक भारतीय का उत्तरदायित्व है।

इसके लिए संकल्पबद्ध और संगठित होकर काम करने की आवश्यकता है। देश और दुनिया में इस प्रताड़ित और अधिकार-वंचित समाज के दुःख-दर्द के प्रति जन-जागरण किया जाना चाहिए। उनकी परतन्त्रता और उनपर होने वाले अत्याचारों की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करना चाहिए ताकि उनको उनका हक़ मिल सके और उनसे जबर्दस्ती छीन ली गई भारत की नागरिकता उनको वापस मिल सके। कश्मीर घाटी में कश्मीरी हिन्दुओं के साथ जो अत्याचार किए गए हैं उनसे भी हम सब परिचित हैं। ‘कश्मीर फाइल्स’ नामक फिल्म में उसके झकझोरने वाले विवरण दिखाए गए हैं। अविश्वसनीय और असीम यातनाएँ सहने वाले कश्मीरी हिंदुओं को भी न्याय मिलना चाहिए और उनकी घर वापसी के लिए सम्पूर्ण भारतवर्ष को एकस्वर में हुँकार भरनी चाहिए।

आज देश में सकारात्मक परिवर्तन की लहर है। दुनिया के सामने भारत को फिर खड़ा करने का सुनहरा अवसर आ गया है। भारत को खड़ा करने के लिए भारतीय समाज को खड़ा होना होगा। कंधे-से-कन्धा और कदम-से-कदम मिलाकर चलना होगा। हम सब बढ़ेंगे, मिलकर आगे बढ़ेंगे तभी भारत आगे बढ़ेगा। अकेले-अकेले और आपस में बँटकर कुछ हासिल नहीं होगा। ईर्ष्या,द्वेष और कटुता की जगह समता,समरसता और बंधुता हमारा स्वभाव बनें। बाँटने वाली और विध्वंसकारी बातों की जगह हमारी ध्यान जोड़ने वाले और समन्वयकारी विषयों की ओर हो।

भारत बोध और भारत भाव का जागरण आवश्यक है। अपने देश की मिट्टी, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, नदियों-पहाड़ों, साधनों-संसाधनों, परम्पराओं-रीति-रिवाजों, भाषाओं-बोलियों, सभ्यता-संस्कृति के साथ-साथ अपने देशवासियों से प्रेम करना और उनके दुःख-सुख में साथ खड़ा होना ही सच्ची देशभक्ति है। सम्पूर्ण समाज पूरी प्रतिबद्धता और एकजुटता के साथ वीर सैनिकों और बलिदानियों के परिवारों के साथ खड़ा रहे। बलिदानियों के परिवारों की ज़िम्मेदारी सरकार के साथ-साथ समाज भी ले। इन परिवारों को कभी भी अकेला महसूस न होने दे। उनके बलिदान की सार्थकता सिद्ध करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। शहीदों के बलिदान को व्यर्थ न जाने देने की जिम्मेदारी सम्पूर्ण समाज की है। हमें एकजुट और एकस्वर होकर इस जिम्मेदारी को स्वीकार करना चाहिए।

अलग-अलग संस्थानों, मार्गों, भवनों विकास योजनाओं, पुरस्कारों और अपने बच्चों आदि का नामकरण देशभक्तों के नाम पर करें। अमर बलिदानियों के स्मारक बनाए जाएँ। जम्मू कश्मीर के स्वतन्त्रता संघर्ष के ऐतिहासिक स्थलों/केन्द्रों का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया जाए। इन बलिदानियों के जन्मतिथि तथा पुण्यतिथि सामूहिक उत्सव की तरह मनाई जाएँ। 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय उत्सवों में बलिदानियों को अवश्य याद करें। राष्ट्र गान, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रध्वज,राष्ट्रीय संविधान और अन्य राष्ट्रीय चिह्नों के प्रति ह्रदय में श्रध्दा और समर्पण का भाव रखें।

व्यक्ति मात्र के रूप में नहीं भारतीय के रूप में सोचने की आदत बनाएँ। अपने और अड़ोस-पड़ोस के गाँवों-मोहल्लों के शहीदों के बारे में पता करें और उनका नाम और उनकी वीरता की कहानी देश-समाज के सामने लाएँ। साहित्य, कहानी, लोकगीत, नाटक, फिल्मों, मीडिया और सोशल मीडिया आदि के माध्यम से इन अमर बलिदानियों की वीरगाथाओं को समाज के बीच लेकर जाएँ ताकि वे हमारे आदर्श और प्रेरणापुंज बन सकें। विदेशी आक्रान्ताओं की क्रूरता, मतान्धता और धन-लोलुपता के बारे में भी भावी पीढ़ियों को बताएँ। विभाजन की विभीषिका को भी भुलाया नहीं जा सकता। स्वतंत्रता-प्राप्ति का मूल्य समझकर और स्वतन्त्रता का मूल्य चुकाकर ही हम अपनी स्वतंत्रता को सुरक्षित और संरक्षित कर सकते हैं। ऐसा करके ही सशक्त भारत और अखंड भारत के स्वप्न को भी साकार किया जा सकता है।

वे नहीं रहे… क्योंकि वे हिन्दू थे: अपनी नवजात बेटी को भी नहीं देख पाए गौ प्रेमी किशन भरवाड

27 वर्षीय हिंदू युवक किशन भरवाड़ को कट्टरपंथी मुस्लिमों ने 25 जनवरी 2022 को केवल हिंदू होने के कारण मार डाला था। किशन भरवाड़ अहमदाबाद के धंधुका के रहने वाले थे। उनकी उस वक्त हत्या कर दी गई जब वह दोपहिया वाहन पर मोढवाड़ा मोहल्ले से गुजर रहे थे। कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा अन्य हत्याओं की तरह, किशन की हत्या भी “ईशनिंदा” के आरोपों में की गई।

किशन भरवाड़ और तथाकथित ईशनिंदा

युवा किशन भरवाड़ को गायों से प्यार था। फोटोकॉपी की दुकान और खेत में काम करते हुए वह अपने परिवार को आजीविका कमाने में मदद करता थे। लेकिन जनवरी 2022 में उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया। यह एक छोटी सी वीडियो थी एनीमेशन के जरिए जिसमें यीशु को ‘गॉड के पुत्र’ के रूप, पैगंबर मुहम्मद ‘गॉड के दूत’ के रूप में, जबकि भगवान श्रीकृष्ण को ‘ईश्वर’ अर्थात गॉड के रूप में दिखाया गया था। इस वीडियो को साझा करने के 30 मिनट के भीतर, किशन भारवाड़ को धमकी भरे फोन आने लगे क्योंकि उन्होंने अपने स्वयं के विश्वास को प्रदर्शित किया जो कट्टरपंथी मुस्लिमों को पसंद नहीं आया।

इस घटना के बाद ही किशन भरवाड़ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग को लेकर करीब 1000 मुस्लिमों की भीड़ स्थानीय थाने पहुँची। और शिकायत दर्ज कराने के बाद भी भीड़ ने किशन भारवाड़ की पिटाई कर दी। हालाँकि कट्टरपंथी भीड़ इससे भीड़ संतुष्ट नहीं हुई। तीन दिन बाद, उन्हें पुलिस स्टेशन से फोन आया क्योंकि उनके खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं उनके पिता ने अगले ही दिन उनका जमानत करा दिया और सुझाव दिया कि वह कुछ दिनों के लिए गाँव छोड़कर चले जाएँ।

किशन को जेल में डाले जाने के ठीक एक दिन बाद, उनकी पत्नी का सिजेरियन सेक्शन हुआ और उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। लेकिन किशन को अपनी बेटी का चेहरा कभी देखने को नहीं मिला, क्योंकि जिस दिन उनकी हत्या हुई उसी दिन वह अपनी बेटी को देखने के लिए अपने गाँव लौटे थे। एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, किशन पर गोली चलाने वाले दो लोग उसके पीछे थे और मोढवाड़ा में एक मोड़ पर उन्होंने पहली गोली चलाई। वे चूक गए और फिर उन्होंने फिर फायरिंग की। जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। परिवार ने किशन के पार्थिव शरीर को लेने से इनकार कर दिया। हालाँकि, भारी पुलिस सुरक्षा के बीच उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

किशन की हत्या के बाद भारी विरोध प्रदर्शन

जिहादी नारे ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही साजा, सर तन से जुदा’ का पालन करते हुए, किशन भरवाड़ की हत्या को अंजाम दिया गया क्योंकि उसने एक पोस्ट साझा किया था जिसे मुस्लिम “ईशनिंदा” मानते थे। गुजरात में हो रहे इस जिहादी एजेंडे का विरोध करने और मारे गए हिंदू युवक को न्याय दिलाने के लिए गुजरात के विभिन्न शहरों में बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए थे।

लोगों ने केंद्र सरकार से इस मामले की जाँच कराने की भी माँग की ताकि पाकिस्तान से की मदद से कथित तौर पर की जाने वाली ऐसी जिहादी गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जा सके।

हथियार सप्लाई करने वाले मौलवियों की शुरुआती गिरफ्तारी

वहीं इस मामले में 27 जनवरी 2022 को, अहमदाबाद पुलिस ने किशन की हत्या के मामले में दो मौलवियों के लिंक का पता लगाने के बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया। हत्या दो मौलवियों के निर्देश पर की गई थी, एक अहमदाबाद से और दूसरा मुंबई से था। अहमदाबाद के जमालपुर इलाके के एक मौलवी ने हत्यारों को हथियार मुहैया कराए थे और मुंबई के मौलाना ने निर्देश दिया था। वहीं 29 जनवरी 2022 को इसमें पाकिस्तानी कनेक्शन भी सामने आया।

इसके कुछ घंटों बाद ही पुलिस को कुल 6 मुस्लिम मौलवियों के शामिल होने का संदेह था। गिरफ्तार मौलवी अयूब से यह पता चला कि किशन की हत्या से पहले, जामनगर के एक अन्य युवक को इस्लाम के खिलाफ “ईशनिंदा” के लिए मारने की योजना थी। इसके लिए राजकोट निवासी अजीम बसीर समा ने हथियार दिए थे। हालाँकि, इस मामले में पुलिस ने उन शूटरों को भी गिरफ्तार कर लिया जिन्होंने इस हत्या को अंजाम दिया था।

वहीं किशन को मारने के लिए जिस पिस्तौल और बाइक का इस्तेमाल किया गया था, वह गुजरात पुलिस को धंधुका में सर मुबारक बुखारी दादा दरगाह के पास के इलाके से मिली थी। शूटर शब्बीर और इम्तियाज दोनों 25 जनवरी को किशन भरवाड़ की हत्या में शामिल थे। इम्तियाज बाइक चला रहा था और शब्बीर ने किशन पर गोलियाँ चलाईं।

शब्बीर और इम्तियाज ने अपनी खुलासा किया कि वे मौलाना कमर गनी के 2021 में सूरत में दिए गए भाषण से प्रेरित थे। जिसके बाद गुजरात एटीएस ने मौलाना कमर गनी उस्मानी को दिल्ली से गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि जाँच एजेंसियों को करीब 26 लोगों के प्रोफाइल मिले जो इस जिहादी नेटवर्क के निशाने पर थे। सूची में गाजियाबाद के डासना मंदिर के यति नरसिंहानंद और जितेंद्र नारायण त्यागी (वसीम रिज़वी), बीएस पटेल, पंकज आर्य, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, महेंद्रपाल आर्य, राहुल आर्य, राधेश्याम आचार्य, अपडेट राणा, उपासना आर्य, साजन ओदेदरा और आरएसएन के नाम शामिल थे।

नोट: मूल रूम से यह लेख अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी। जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

‘3 घंटे में ख़त्म कर देंगे’: मुकेश अंबानी के परिवार को हत्या की धमकी, ‘रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल’ को 8 फोन कॉल्स के बाद मुंबई पुलिस ने शुरू की जाँच

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमेन और देश के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी के परिवार को जान से मारने की धमकी मिली है। मुंबई पुलिस ने इस घटना की जानकारी दी है। मुंबई पुलिस के अनुसार, रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल (Reliance Foundation hospital) के डिस्प्ले नंबर पर सोमवार (15 अगस्त, 2022) को धमकी भरे फोन कॉल किए गए। कॉलर ने धमकी देते हुए कहा कि उनके पूरे परिवार को तीन घंटे के भीतर खत्म कर दिया जाएगा।

डीबी मार्ग पुलिस थाने में शिकायत दर्ज

‘रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल’ के अधिकारियों ने डीबी मार्ग पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि मुकेश अंबानी को धमकी देते हुए कुल आठ कॉल किए गए हैं। ‘रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल’ के CEO तरंग ज्ञानचंदानी ने मिड-डे से बात करते हुए कहा, “मुकेश अंबानी को अज्ञात व्यक्ति द्वारा जान से मारने की धमकी देते हुए कुल 8 कॉल किए गए हैं। हमने मामले की जाँच के लिए मुंबई पुलिस से शिकायत की है।”

मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मिड-डे को बताया, “हमें अस्पताल से शिकायत मिली है और हम इसकी पुष्टि कर रहे हैं। कॉल अस्पताल के डिस्प्ले नंबर पर की गई है।” इससे पहले समाचार एजेंसी ANI ने मुंबई पुलिस के हवाले से कहा था कि ‘रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल’ के फोन नंबर पर तीन से अधिक बार धमकी भरे कॉल आए थे।

गौरतलब है कि पिछले साल मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया से कुछ ही दूरी पर एक संदिग्ध कार मिली थी। जिसमें 20 जिलेटिन छड़ें बरामद हुई थीं। हालाँकि, इसे असेंबल नहीं किया गया था। एंटीलिया के बाहर खड़ी इस स्कॉर्पियों में एक चिठ्ठी भी मिली थी, जिसमें अंबानी परिवार को उड़ाने की धमकी दी गई थी। संदिग्ध कार मिलने के बाद हड़कंप मच गया था। इस मामले में महाराष्ट्र एटीएस के अलावा एनआईए ने भी इस मामले में जाँच कर रही है।

जिस कार में विस्फोटक मिला था, वह कार मनसुख हिरेन की थी। लेकिन कुछ दिन बाद ही मनसुख हिरेन का शव मिला था। मुंबई में मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक भरी गाड़ी के मामले में NIA ने मुंबई पुलिस अफसर सचिन वाजे को गिरफ्तार किया था। सचिन वाजे पर आरोप है कि उसने ही मनसुख हिरेन की हत्या की। मामले में जाँच जारी है। 

10 गोली खाकर भी जिस Axel ने आतंकी को दबोचा, उस आर्मी डॉग को ‘सर्वोच्च’ वीरता पुरस्कार: बचाई थी कई सैनिकों की जान

कुछ देश अपने मृत सैनिकों तक का सम्मान नहीं करते जबकि भारत ने अपने वीर पुरुषों को ही नहीं बल्कि जीवों तक का सम्मान किया है। आतंक-विरोधी अभियान में बलिदान हुए आर्मी डॉग एक्सल (Indian Army Dog Axel) को मरणोपरांत सम्मान देना उसी परंपरा की निशानी है।

इंडियन आर्मी डॉग एक्सल को मरणोपरांत आज 15 अगस्त 2022, स्वतंत्रता दिवस के दिन वीरता पुरस्कार ‘मेंशन-इन-डिस्पैच’ से सम्मानित किया गया। एक्सल भारतीय सेना का वो बहादुर डॉग था, जिसने गोली लगने के बाद भी आतंकी को दबोचा था।

30 जुलाई को कश्मीर के बारामूला जिले में सेना के एलीट असॉल्ट डॉग एक्सल की एक आतंकवादी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। एक्सल ने गोली लगने के बावजूद आतंकवादी को पकड़ लिया था। एक्सल सिर्फ 2 साल का था और वह बेल्जियन मैलिनोइस (Belgian Malinois) प्रजाति का कुत्ता था।

एक्सल (Axel) की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि 10 गोलियों के घाव के अलावा, उसकी फीमर पर फ्रैक्चर के साथ-साथ अन्य घाव भी थे। इससे स्पष्ट है कि लोगी लगने के बाद भी सेना के बहादुर डॉग ने आतंकी को नहीं छोड़ा था।

एक्सल की बहादुरी ने उन सैनिकों की जान बचाने में मदद की, जो ऑपरेशन का हिस्सा थे। सैनिकों के इमारत के अंदर जाने से पहले एक्सल ने एक कमरे में जाकर उसे ‘क्लीयर (मतलब कोई विस्फोटक नहीं, कोई खतरा नहीं की सूचना दी)’ किया। उसके बाद जैसे ही वो दूसरे कमरे में गया, वहाँ छिपे आतंकी ने उसे गोली मार दी। इसके बाद सैनिकों और आतंकियों के बीच फायरिंग शुरू हो गई। एक्सल के हैंडलर को भी इस अभियान के दौरान गंभीर चोंटे आईं।

एक्सल की बहादुरी के कारण हालाँकि कई सैनिकों की जान बच गई। क्योंकि जहाँ आतंकी छिपे हुए हों, ऐसे कमरे में हस्तक्षेप बहुत जोखिम भरा होता है। एक्सल ने पहले कमरे में जाकर आतंकी के होने का संकेत दिया, जिससे कई सैनिकों की जान बच सकी।

इंडियन आर्मी डॉग एक्सल (Indian Army Dog Axel) की इस बहादुरी को जानने के बाद उसकी वीरता को हर किसी ने सराहा। भारतीय सेना के उत्तरी कमान ने एक्सल को देश की सेवा करने वाला रियल हीरो कह करार दिया था। इंडियन आर्मी के ही चिनार कोर ने एक्सल की बहादुरी को सलाम किया था।

हाल के वर्षों में यह सर्वोच्च वीरता पुरस्कार (मेंशन-इन-डिस्पैच) होगा, जो एक आर्मी डॉग को ‘काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन’ में प्रदान की गई सेवाओं के लिए मिला है। आम तौर पर आर्मी डॉग्स को आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनकी उत्कृष्टता के लिए सेना प्रमुख प्रशस्ति पत्र और उप-सेना प्रमुख प्रशस्ति पत्र जैसे प्रशंसा पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है।

‘लाल सिंह चड्ढा’ का प्रमोशन कर फँसे ऋतिक रोशन, लोगों ने किया ‘विक्रम वेधा’ के बॉयकॉट का ऐलान: सैफ अली खान भी हैं फिल्म में

आमिर खान और करीना कपूर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुँह गिरी। फिल्म के रिलीज से पहले सोशल मीडिया पर ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बायकॉट की अपील की जा रही थी, जिसका असर फिल्म की कमाई पर साफ दिख रहा है। फिल्म के सोशल मीडिया पर हो रहे लगातार विरोध को देखते हुए कई बॉलीवुड कलाकार फिल्म का समर्थन कर रहे हैं और अपने फैंस से फिल्म को देखने की गुजारिश की है, जिसके बाद से वो सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर आ गए हैं।

ऋतिक रोशन ने शनिवार (13 अगस्त 2022) को आमिर खान की फिल्म का खुलकर समर्थन करते हुए एक ट्वीट किया और फैंस से फिल्म को दिखने की गुजारिश की। लेकिन उनके लिए लाल सिंह चड्ढा का सपोर्ट करना काफी नुकसानदायक साबित होता दिख रहा है। क्योंकि अब सोशल मीडिया #boycottVikramVedha ट्रेंड हो रहा है।

ऋतिक रोशन ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ की तारीफ करते हुए ट्विटर पर लिखा, “मैंने हाल ही में लाल सिंह चड्ढा देखी। मैंने इस फिल्म के दिल को महसूस किया है। अच्छी और बुरी चीजें एक साइड में रखकर, यह फिल्म वाकई शानदार है। इतनी अच्छी फिल्म को मिस मत करिए। जाइए और इसे अभी देखिए। ये बेहद खूबसूरत और सुंदर है।”

ऋतिक रोशन के ये ट्वीट अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और ट्रोल्स उन्हें जमकर खरी-खोटी सुना रहे हैं और भड़के यूजर्स अब ट्विटर पर ऋतिक रोशन की आगामी फिल्म विक्रम वेधा के बायकॉट की भी अपील कर रहे हैं। ऋतिक के ट्वीट पर एक यूजर ने भड़कते हुए लिखा, “बॉलीवुड से संन्यास लेने का इरादा कर लिया है क्या तुमने।”

जबकि दूसरे यूजर ने लिखा, “जिसकी पिक्चर है जनता उसकी नहीं सुन रही है तो तुम किस खेत की मूली हो। अपनी आने वाली पिक्चरों के बारे मे जरूर सोचना क्योंकि गेहूँ का साथ देने के चक्कर में घुन भी पिस जाता है।”

एक यूजर ने लिखा, “तुमने अब सोच ही रखा है तो अब धीरे धीरे पुरे बॉलीवुड का बहिष्कार होगा और हम सब करके रहेंगे। अभी लाल सिंह चड्ढा हुआ है… अगला पठान का होगा उसके बाद आपका भी अब नंबर आएगा…. जो आया है सब धोए जाएँगे।”

यूजर ने लिखा, “देखिए आपका सम्मान करते हैं, मगर आप ये मत भूलिए आप एक हिंदू भी है। हिंदू धर्म का अपमान अब नहीं सहेगा हिंदुस्थान।”

पंकज श्रीवास्तव नाम के यूजर ने लिखा, “ऋतिक इसलिए ऐसा लिखा है, क्योंकि कल को आमिर इसके लिए लिखे। ये परस्पर डैमेज कंट्रोल की नौटंकी है और कुछ नहीं।”

उज्जवल सिंह लिखते हैं, “ऋतिक जी अपना फिल्म का चिंता कीजिए। इनका फिल्म का झूठा प्रमोशन करने के चक्कर में आपका और आपके फिल्मों का भी बड़ा वाला L लग जाएगा। कोई नहीं है टक्कर में क्यों पड़े हो चक्कर में।”

सुभाषिनी शर्मा ने लिखा, “जो फिल्म हमे ये बताए की पूजा करने से दंगा फैलता है उसे कोई हिंदू कैसे देख सकता है। आप जैसे लोगों का बहिष्कार होना ही चाहिए। आमिर को ये नहीं पता की नमाज के बाद पथराव और दंगा होता है न की पूजा करने से।”

नेहा ने लिखा, “पेड ट्वीट, वो भी घटिया मूवी का।”

वहीं, बात अगर लाल सिंह चड्ढा के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की करें तो रक्षा बंधन के दिन रिलीज हुई इस फिल्म ने बेहद धीमी शुरुआत के साथ ओपनिंग डे पर 11.70 करोड़ रुपए की कमाई की थी, जोकि पिछले 10 सालों में आमिर खान की फिल्म की सबसे कम कमाई है। जानकारी के अनुसार इस फिल्म का बजटलगभग 180 करोड़ रुपए बताया जा रहा है।

‘रेप कर रहा था दानिश, भाभी-बहन दे रही थी पहरा’: अविनाश बनकर मिला था, पीड़िता की शिकायत के बाद 6 पर FIR

उत्तर प्रदेश के शाहजहॉंपुर में पहचान छिपाकर एक हिंदू युवती के साथ 9 साल तक रेप किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता के मुताबिक खुद को हिंदू बताकर दानिश उसके संपर्क में आया। बाद में उसने खुद भी उसके साथ रेप किया और अपने दोस्तों से भी करवाया। आरोप है कि अश्लील वीडियो बनाकर दानिश पीड़िता को ब्लैकमेल कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में शनिवार (13 अगस्त 2022) को 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें 4 नामजद हैं।

यह मामला कोतवाली नगर क्षेत्र का है। पीड़िता ने शिकायत में कहा है, “लगभग 9 साल पहले अविनाश नाम के एक युवक की कॉल मेरे पास आई और मेरी उससे दोस्ती हो गई। कुछ दिन बाद उसने मुझे अपने घर वालों से मिलने के लिए बुलाया। तब उसके रहन-सहन को देख कर मुझे उसके हिंदू होने पर शक हुआ। मैंने पता किया तो वह दानिश निकला, जिसके अब्बू का नाम रब्बू उस्ताद है। जब मैंने उसके झूठ की चर्चा की तब उसने अपनी भाभी की मदद से मुझे एक कमरे में बंद कर दिया। अपनी बहन व भाभी के आगे ही मुझसे रेप किया।”

पीड़िता ने शिकायत में कहा है, “रेप के दौरान में शोर मचा रही थी, तब दानिश की भाभी और बहन दरवाजे पर बैठ कर लोगों से मेरी तबियत खराब होने की बात कह रहे थे। दुष्कर्म के दौरान उसने मेरी कई अश्लील फोटो और वीडियो बना ली। इसी से डरा-धमकाकर उसने मेरा लगातार यौन शोषण किया। कुछ दिनों पहले उसने गुप्ता नाम के साथ 2 अन्य व्यक्तियों को बुलाकर मेरे साथ बलात्कार करवाया। ऐसा 9 साल तक चला। इस दौरान मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी जाती रही। पहले मैंने चुपचाप सब झेला पर अब मैंने ग्लानि महसूस करते हुए दानिश की शिकायत की है। उसने ऐसी हरकतें कई और हिन्दू लड़कियों के साथ भी की हैं।”

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने दानिश, उसकी भाभी और बहन, गुप्ता जी व 2 अन्य अज्ञात पर IPC की धारा 342, 376- D, 506 और IT एक्ट की धारा 67 के तहत FIR दर्ज कर ली है। शाहजहाँपुर के एडिशनल SP संजय कुमार ने बताया है, “मामले की गहराई से जाँच की जा रही है। जाँच में दोषी पाए गए आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता के परिजनों ने बताया कि हम लोग काफी मानसिक तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं। अभी तक आरोपित पकड़ा नहीं गया है और वो कई नम्बरों से हमारे परिवार को धमकियाँ दिला रहे हैं। पीड़िता के भाई ने बताया कि दानिश उसकी बहन पर इस्लाम कबूलने का दबाव डालता था। उसने व्हाट्सएप पर कई वीडियो भी भेज रखी हैं जिसमें इस्लाम कबूलने के फायदे बताए गए हैं।

शाहजहाँपुर के विश्व हिन्दू परिषद (VHP) नेता राजेश अवस्थी ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “पुलिस 2 दिनों से पीड़िता का केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। इसके विरोध में हम लोगों ने थाने पर प्रदर्शन किया। इसके बाद केस दर्ज किया गया।”

‘भारत के बाद US बना हिंदू आतंकवाद का हब’: स्वतंत्रता दिवस के मार्च में ‘बुलडोजर बाबा’ को देख मुस्लिम भड़के, बोले- ये आजादी नहीं, घृणा है

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज हर भारतीय आजादी का अमृत महोत्सव अपने-अपने ढंग से मना रहा है। केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी तिरंगे को फहराते हुए इस दिवस की शुभकामनाएँ दी जा रही हैं। ऐसे में अमेरिका के न्यू जर्सी के एडिसन में भी कुछ हिंदुओं ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए तिरंगा यात्रा निकाली। साथ ही बुलडोजर पर पीएम मोदी की और ‘बाबा बुलडोजर’ लिखते हुए योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लगाई।

इस तस्वीर को देखने के बाद इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल भड़क गया। अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल IAM काउंसिल से ट्वीट करके बताया कि उन्हें बुलडोजर देख कितनी परेशानी हुई है। आईएएम काउंसिल ने लिखा, “आज, न्यू जर्सी के ए़़डिसन में दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों ने उस बुलडोजर के साथ मार्च किया, जो भारत में मुस्लिमों के घरों और जीवन को तबाह करने के लिए भाजपा सरकार का हथियार बन चुका है।”

इस ट्वीट को देखने के बाद कई अन्य मुस्लिमों ने प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा, “भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी ये लोग मुस्लिमों के खिलाफ घृणा को नहीं छिपा पा रहे।”

फिफि हारून ने लिखा, “ये बहुत वाहियात है। अमेरिका में रहने वाले भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर बुलडोजर से आजादी कहते हुए मार्च कर रहे हैं। वहीं मोदी सरकार इसका इस्तेमाल मुस्लिमों को सजा देने के लिए कर रही है। अल्पसंख्यकों पर हमलों का महिमामंडन कोई स्वतंत्रता नहीं बल्कि घृणा है।”

एक यूजर ने पूछा, क्या भारत के बाद अब अमेरिका हिंदू आतंवाद का हब बन रहा है?

शफीक पूछता है कि मुस्लिमों के खिलाफ घृणा ही सबसे अच्छा ढंग है क्या स्वतंत्रता दिवस पर मनाने का?

अल्ताफ हुसैन लिखते हैं, “स्वतंत्रता दिवस की परेड में बुलडोजर लाने का क्या मकसद है? ऐसी मशीनरी का ही इस्तेमाल मुस्लिमों के घर ध्वस्त करने के लिए किया जाता है। नफरतें फैलानी बंद करो।”

‘घर-घर तिरंगा बाँट कर खुश है, तेरा सर तन से जुदा करना पड़ेगा’: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पति को ‘ISI के साथी’ की धमकी

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हर घर तिरंगा अभियान के तहत राष्ट्रध्वज बाँट रही आंगनबाड़ी की महिला कार्यकर्ता के पति को ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी मिली है। यह धमकी पीड़िता शशि कश्यप के घर और आस-पास पर्चे चिपका कर दी गई है। धमकी देने वाले ने तिरंगा बाँटने पर नाराजगी जताई है। पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस में की है। पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए पीड़ित को सुरक्षा उपलब्ध करवाई है। घटना रविवार (14 अगस्त, 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला किरतपुर थानाक्षेत्र के मोहल्ला बुध्दुपाड़ा का है। यहाँ रहने वाला अरुण कश्यप उर्फ़ अन्नू खाने का होटल चला कर गुजर-बसर करता है। अन्नू की पत्नी का नाम शशि है जो आंगनबाड़ी में सेविका के पद पर काम कर रही हैं। आज़ादी के अमृत महोत्सव में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत शशि बाल विकास परियोजना कार्यालय से मिले राष्ट्रध्वज को अपने क्षेत्र में आने वाले घरों में बाँट रही थीं। इस काम में उनके पति भी उनकी मदद कर रहे थे।

रविवार की सुबह जब शशि के बेटे को घर पर एक पर्चा चिपका दिखाई दिया। उस पर्चे पर लिखा था, “अन्नू, तुझे घर-घर में तिरंगा बाँट कर बहुत ख़ुशी है। तेरा भी सिर तन से अलग करना पड़ेगा।” ऐसे ही पर्चे शशि के घर के पास खड़ी रवि नाम के व्यक्ति की ठेली और रुपेश नाम के व्यक्ति की चाय की दुकान पर भी चिपके पाए गए। इन पर्चों के नीचे ‘ISI के साथी’ लिखा हुआ था। इन सभी पर्चों में अन्नू कश्यप को ही धमकाया गया था।

कुछ ही देर में पर्चे चिपकाने की खबर चारों तरफ फ़ैल गई, जिसके बाद आस-पास के लोग अन्नू के घर पर जमा होने लगे। मौके पर पहुँचे भाजपा और हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने अपनी जाँच शुरू करते हुए आस-पास जानकारी जुटाई तो मोहल्ले के कुछ लोगों ने बताया कि वो रात में 12 बजे तक जगे थे और तब तक पर्चे नहीं चिपकाए गए थे। आशंका जताई जा रही है कि रात 12 बजे के बाद किसी ने ये हरकत की।

पुलिस ने तीनों पर्चों को अपने कब्ज़े में ले लिया। पीड़ित परिवार से बात कर के अज्ञात आरोपितों के खिलाफ FIR भी दर्ज कर ली गई। आस-पास के CCTV फुटेज को भी खँगाला जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है और DSP नजीबाबाद को सावधानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।