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‘IMDb पर 1 स्टार देकर ‘कार्तिकेय 2′ की रेटिंग गिरा रहे देशद्रोही तत्व, हमारी संस्कृति को दिखा रहे नीचा’: निर्माता ने कहा – श्रीकृष्ण ही सत्य

अभिषेक अग्रवाल द्वारा ‘ कार्तिकेय 2’ की IMDb रेटिंग को गिराने की साजिश चल रही है। समुद्र में डूबे द्वारका और श्रीकृष्ण के रहस्यों पर आधारित ये फिल्म शनिवार (13 अगस्त, 2022) को रिलीज की गई है। फिल्म में निखिल सिद्धार्थ मुख्य भूमिका में हैं, वहीं अनुपम खेर भी एक महत्वपूर्ण किरदार में मौजूद हैं। बता दें कि अभिषेक अग्रवाल ही ‘द कश्मीर फाइल्स’ के भी निर्माता हैं। विवेक अग्निहोत्री की अगली फिल्म ‘द दिल्ली फाइल्स’ में भी उन्होंने पैसा लगाया है।

उन्होंने ट्विटर पर फिल्म के IMDb पेज का लिंक शेयर करते हुए कहा, “हमारी फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ को इतना सारा प्यार देने के लिए आप सब का आभार। कुछ असामाजिक तत्व इस मूवी को 1 स्टार देकर इसकी IMDb रेटिंग को गिराने की साजिश में लगे हैं। भगवान श्रीकृष्ण ही सत्य हैं और सत्य की हमेशा विजय होनी चाहिए, सबसे पहले सत्य ही होना चाहिए। IMDb पर वोट कर के फिल्म का समर्थन करें। देशद्रोही तत्व इस फिल्म के बारे में नकारात्मक दुष्प्रचार कर रहे हैं।”

अभिषेक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि ये देशद्रोही तत्व फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ को IMDb पर 1 स्टार देकर हमारी संस्कृति को नीचा दिखाने के प्रयासों में लगे हैं। उन्होंने ऐसे तत्वों की काट के लिए जनता के सहयोग की अपील की। बॉक्स ऑफ्स कलेक्शंस की बात करें तो ‘कार्तिकेय 2’ ने पहले दिन दुनिया भर में लगभग 8.50 करोड़ रुपए की कमाई की है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ पर भारी पड़ी। इसे सकारात्मक समीक्षाएँ भी मिली हैं।

खबर लिखे जाने पर IMDb पर ‘कार्तिकेय 2’ को 6822 लोगों ने रेट किया था, जिनमें से 4972 लोगों ने इसे 10 रेटिंग दी है। वहीं 1480 लोग ऐसे हैं, जिन्होंने मात्र 1 स्टार देकर इसकी रेटिंग गिराने का प्रयास किया है। फिल्म की ओवरऑल रेटिंग फ़िलहाल 7.3 है। शुरुआत में इसकी रेटिंग 9 से ज्यादा थी, लेकिन अचानक कई लोगों द्वारा 1 स्टार रेट किए जाने के बाद ये घट गई। अब देखना ये है कि फिल्म रविवार और 15 अगस्त को कितनी कमाई करती है।

कोर्ट में ही पत्नी की गला रेत कर हत्या, बेटे को मारने का भी किया प्रयास: तलाक पर सुलह के लिए आए थे

कर्नाटक के हासन जिले की फैमिली कोर्ट में एक पति ने अपनी पत्नी का गला रेत कर हत्या कर दी। मृतका का नाम चित्रा है, जबकि आरोपित पता का नाम शिव कुमार है। हत्यारोपित पति को गिरफ्तार कर लिया गया है। हत्या से कुछ ही देर पहले पति-पत्नी 7 साल से हुए आपसी विवाद को सुलझा कर एक साथ रहने के लिए तैयार हुए थे। बताया जा रहा है कि आरोपित ने अपने बच्चे पर भी हमला करने की कोशिश की लेकिन वो बच गया। घटना शनिवार (13 अगस्त, 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 वर्षीया मृतका थट्टेकेरे गाँव की रहने वाली है जबकि 32 वर्षीय आरोपित शिवकुमार होलेनरसीपुरा तालुका का रहने वाला है। दोनों की शादी लगभग 7 साल पहले हुई थी। इस रिश्ते से उन्हें एक बच्चा भी था। कुछ दिनों बाद दोनों में झगड़े शुरू हो गए और उन्होंने तलाक लेने का फैसला किया। इसी अर्जी पर कोर्ट में सुनवाई थी। अदालत ने दोनों को आपसी सुलह की सलाह देने के बाद बुलाया था। दोनों ने कुछ देर बाद आपसी मतभेद भुलाने और एक साथ रहने की हामी भर दी।

बताया जा रहा है कि समझौते के बाद मृतका चित्रा कोर्ट परिसर में ही बने वॉशरूम गई। आरोपित पति शिवकुमार ने वहाँ उसका पीछा किया और मौका पा कर अकेले में चित्रा की गर्दन रेत दी। घटना के बाद शिवकुमार ने मौके से भागने की कोशिश की लेकिन आस-पास मौजूद लोगों ने उसे पकड़ लिया। बाद में शिवकुमार को पुलिस के हवाले कर दिया गया। अपनी पत्नी के साथ आरोपित ने अपने बच्चे को भी मारने की कोशिश की लेकिन तब तक चीख-पुकार सुन कर आस-पास के लोगों ने उसे बचा लिया।

हासन जिले के पुलिस अधीक्षक श्रीनिवास गौड़ा के मुताबिक, मृतका की गले की नसों को चाकू से काट दिया गया था। फ़ौरन ही एम्बुलेंस से चित्रा को अस्पताल पहुँचाया गया। इस दौरान उसे कृत्रिम साँसे दी जाती रहीं। लेकिन, अस्पताल में डॉक्टरों ने चित्रा को मृत घोषित कर दिया। आरोपित पर हत्या की धारा 302 के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस इस बात की भी जाँच करेगी कि कोर्ट परिसर में वो चाकू कैसे ला पाया और क्या उसने हत्या की पूरी तैयारी की थी।

केजरीवाल, AAP और वामपंथी पार्टियाँ तिरंगे से दूर… भाजपा का विरोध करते-करते राष्ट्र-ध्वज का विरोध क्यों?

अक्सर देखा गया है कि कुछ विपक्षी दल सत्ताधारी पार्टी की नीतियों का विरोध करते-करते देश/राष्ट्र के विरुद्ध खड़ी हो जाती है। इसका ताजा उदाहरण आम आदमी पार्टी और वामपंथी पार्टी ने पेश किया है। दरअसल इन दोनों के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर राष्ट्र-ध्वज तिरंगा कहीं नजर भी नहीं आ रहा है।

इन राजनीतिक दलों को तिरंगा बर्दास्त नहीं होता है, शायद यह कहना गलत नहीं होगा। पूरा देश इस समय आजादी की 75वीं वर्षगांठ का अमृत महोत्सव मना रहा। ऐसे समय में भी इनके जैसे कुछ राजनीति दल अपनी ओछी राजनीतिक सोच के कारण तिरंगे को लेकर सहज नहीं दिख रहे हैं।

सबसे पहले बात करते हैं खुद को प्रखर देशभक्त कहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Chief Minister Arvind Kejriwal) के राजनीतिक समूह आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के बारे में। बता दें पार्टी के ऑफिसियल ट्विटर अकाउंट के साथ-साथ दिल्ली, गोवा और गुजरात के ट्विटर हैंडल पर कहीं भी तिरंगे की झलक तक नजर नहीं आई है।

आप आदमी पार्टी का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट
AAP गुजरात का ट्विटर अकाउंट
AAP दिल्ली का ट्विटर अकाउंट
AAP गोवा का ट्विटर अकाउंट

वहीं इस पार्टी के कई बड़े कद्दावर नेताओं के ट्विटर अकाउंट पर भी तिरंगे का नामो-निशान तक नहीं देखने को मिला। इनमें संजय सिंह और नरेश बाल्यान का नाम भी शामिल है।

संजय सिंह का ट्विटर अकाउंट
नरेश बाल्यान का ट्विटर अकाउंट

आपको बताते चलें कि CPI यानी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के भी आधिकारिक ट्विटर हैंडल के साथ-साथ केरल और पुडुचेरी के ट्विटर अकाउंट पर भी तिरंगा नहीं दिखाई दे रहा है।

सीपीआई का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट
सीपीआई केरल का ट्विटर अकाउंट
सीपीआई पुडुचेरी का ट्विटर अकाउंट

यह आजादी झूठी है: CPI

गौरतलब है कि आजादी के 74 वर्ष बीत जाने तक यह CPI ही थी, जो आजादी को झूठा कहती रही। बीते वर्ष 2021 को 15 अगस्त के अवसर पर अपने दिल्ली और पश्चिम बंगाल में स्थित कार्यालयों व दफ्तरों में 74 साल बाद इस पार्टी ने तिरंगा फहराया था। बता दें कि इससे पहले तक कम्युनिस्ट पार्टी देश भर में ‘ये आजादी झूठी है’ का नारा देती रही थी। अब फिर से सोशल मीडिया पर DP के रूप में तिरंगे को न लगाकर इन्होंने अपनी सोच जाहिर कर दी है।

3 दिन रेकी, 1 फेक ID, 12 बार हमला: सलमान रुश्दी को अकेले मारने मंच पर चढ़ा था हादी मतार, फोन में मिली ईरानी कमांडर की फोटो

भारतीय मूल के लेखक सलमान रुश्दी के ऊपर न्यूयॉर्क में हुए जानलेवा हमले के बाद खबर है कि अस्पताल में धीरे-धीरे अब रुश्दी की तबीयत सुधर रही है। उनके एजेंट एंड्रयू विली के हवाले से बताया गया है कि रुश्दी को वेंटिलेटर से हटा दिया गया है और वह बातचीत कर पा रहे हैं।

रुश्दी की तबीयत में सुधार के अलावा मीडिया में इस हमले की अन्य डिटेल्स भी सामने आई हैं। मौके पर मौजूद चश्मदीद डॉ मार्टिन हैस्केल से पता चला है कि इवेंट में रुश्दी की सुरक्षा में दो सुरक्षाकर्मी तैनात थे। इसके बावजूद हमलावर रुश्दी को मंच पर चढ़कर 12-15 दफा चाकू घोंपने में सफल हो गया। 

फेक आईडी के साथ घुसा, 12-15 बार किया हमला

चश्मदीदों के मुताबकि, हादी मतार नाम का 24 वर्षीय हमलावर खुद अकेले रुश्दी की हत्या को अंजाम देने आया था। इसके लिए उसने 3 दिन पहले से इवेंट वाली जगह की छानबीन शुरू कर दी थी। इसके बाद ही वह इवेंट में फेक आईडी के साथ घुसा।

इवेंट में जैसे ही रुश्दी का इंट्रोडक्शन दिया गया और वह बोलने आगे बढ़े। हादी मतार सामने से स्टेज पर आया और रुश्दी के पेट व गले पर 12-15  बार हमला किया। इसके बाद रुश्दी वहीं स्टेज पर गिर गए जबकि हादी को गिरफ्तार कर लिया गया।

फोन से मिली ईरानी कमांडर की तस्वीर

पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि न्यू जर्सी निवासी हादी अपने सोशल मीडिया अकॉउंट पर ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड के प्रति सहानुभूति जताता था। इसके अलावा उसके फोन से उन्हें कमांडर कासिम सुलेमानी की तस्वीर मिली है। कासिम को 2020 में मारा गया था।

पुलिस का कहना है कि उन्हें हमले की ठीक वजह तो नहीं पता चल पाई है। लेकिन ये पता चला है कि मतार अकेल काम कर रहा था। उसने खुद ही इवेंट वाली जगह की छानबीन की थी और खुद हत्या के प्लॉन को बनाया था।

हमला पूर्व नियोजित था

बता दें कि हादी की गिरफ्तारी के बाद उसको कोर्ट में पेश किया गया था। वहाँ जिला अटॉर्नी जेशन स्मिथ ने पाया मतार ने जानूबूझकर रुश्दी को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की और फर्जी आईडी के साथ कार्यक्रम में घुसा। उन्होंने माना कि ये हमला पूर्वनियोजित थी और इसमें रुश्दी को निशाना बनाया गया था। कोर्ट की सुनवाई के बाद आरोपित को चौटौक्वा काउंटी जेल ले जाया गया।

सलमान रुश्दी को 33 साल से मिल रही थी धमकियाँ

उल्लेखनीय है कि द सैटेनिक वर्सेज नामक किताब लिखने के बाद सलमान खुर्शीद को इस्लामी कट्टरपंथियों से जान से मारने की धमकियाँ आती थीं। ये किताब भारत में भी बैन थी। इसके अलावा इरान में और पाकिस्तान जैसी जगहों पर उनके विरुद्ध फतवे निकाले गए थे। हालाँकि वेस्ट में शिफ्ट हो जाने के बाद वह इतने वर्ष सुरक्षित रहे। मगर शुक्रवार को ऐसा नहीं हो पाया

हिंदू-सिखों को मरते छोड़ भाग गए थे कॉन्ग्रेसी नेता, सैकड़ों RSS कार्यकर्ताओं के बलिदान से बची हजारों जिंदगी: इतिहास की इन किताबों से जानें विभाजन की विभीषिका

आज भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा नेताओं ने विभाजन के दौरान प्राण गँवाने वाले लोगों को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि 14 अगस्त 1947 के दिन को भुलाया नहीं जा सकता। इस त्रासदी में कई लोगों के घर छूटे, कई लोगों के कई लूटे, कई गुम हुए तो कई जिंदगी भर के लिए उसमें खो गए।

यह वह दिन था, जब एक तरफ भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो रहा था तो दूसरी तरफ उसके टुकड़े हो रहे थे। आज के दिन विश्व के पटल पर पाकिस्तान नाम के मुल्क का उदय हो रहा था, जो धर्म के आधार पर आधारित था।

भारत विभाजन विश्व के खूनी इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। वैसे तो मुस्लिम आक्रांताओं के हमलों के बाद से भारत की भूमि पीड़ा, वेदना और प्रताड़ना से रक्तरंजित होती रही है, लेकिन इस घटना में आजादी के नाम पर जिस तरह का विस्थापन और हिंसा देखने को मिली, वह विश्व में कहीं अन्य देखने को नहीं मिलता।

लोग अपनी पुरखों की जमीन और मेहनत की कमाई छोड़ रहे थे। बड़े, बुढ़े, महिलाएँ, युवा, बीमार, लाचार सब अपना घर-बाड़ छोड़कर अपनी जान बचाने की कोशिश में लगे थे। महिलाओं की इज्जत लूटी जा रही थी, हत्याएँ कर ट्रेनों में भेजे जा रहे थे। जो परिवार अपनी महिलाओं की इज्जत बचाने में जो खुद को असमर्थ पा रहे थे वो अपने ही हाथों से उनकी जान ले रहे थे। ये उस दौर के वो मंजर थे, जिसे सुनकर ही आत्मा काँप उठती है।

हर तरफ मजहबियों और उन्मादियों की भीड़ दिख रही थी, जो मुल्क मिलने के बाद भी ‘काफिरों’ के खून के प्यासे बने घूम रहे थे। हर तरफ लोगों को सिर्फ और सिर्फ अंधेरा नजर आ रहा था। ऐसा नहीं है कि ये तांडव आजादी के मिलने के दिन ही शुरू हुआ। यह 1947 में आजादी मिलने के वर्षों पहले शुरू हो चुका था, लेकिन इसका भयावह रूप 1947 के शुरुआती महीने में ज्यादा दिखने लगा और आजादी मिलने के बाद के कुछ महीनों तक दिखता रहा।

हिंदू-सिखों को बचाने के लिए संघ आया आगे

ऐसे असहाय लोगों की उम्मीद के रूप में एक प्रकाश पूँज नजर आ रहा था, वह था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)। वही आरएसएस जिस पर विपक्षी दल तमाम तरह के तोहमत लगाते रहते हैं। खासतौर पर कॉन्ग्रेस के नेता पूछते हैं कि संघ की भूमिका क्या रही है।

उस काली रात में लोगों की मदद के लिए कोई दिख रहा था तो संघ और उसके स्वयंसेवक। संघ के स्वयंसेवकों ने ना सिर्फ लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद की, बल्कि उनके रहने-खाने और दवा का भी इंतजाम किया। जिन लोगों को संघ ने बचाया उनमें कई कॉन्ग्रेसी नेताओं के परिजन भी थे। इस पुनीत कार्य में कई लोगों ने अपने प्राण भी गँवाए।

संघ के स्वयंसेवकों ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को बचाया

लेखक अरुण प्रकाश ने अपने लेख में बताया है कि अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर पर ‘मुस्लिम लीग’ और उसके सशस्त्र दस्ते ‘नेशनल गार्ड्स’ ने 6 मार्च 1947 की रात को और 9 मार्च 1947 में दिन के वक्त हमला किया था। इस दौरान स्वयंसेवकों ने मोर्चा सँभाला और सिखों के पवित्र स्थान स्वर्ण मंदिर को बचाया।

6 मार्च 1947 को नेशनल गार्ड्स के नेतृत्व में मुस्लिमों की भीड़ ने शेरावाला गेट से अमृतसर के चौक फवारा तक बढ़ी। उस दौरान संघ के नेतृत्व में हिंदू-सिखों ने उन पर लाठियों, तलवारों, भालों, चाकुओं और बमों से चौतरफा हमला कर दिया। इस अचानक हमले से उन्मादी इतने भयभीत हो हुए कि वे भाग गए।

हालाँकि, तीन दिन बाद 9 मार्च को दिन में मुस्लिमों की भीड़ ने दोबारा हमला कर दिया। भीड़ को गुरुद्वारा की बढ़ता देख जत्थेदार परेशान हो गए और संघ से मदद माँगी। इसके बाद स्वयंसेवकों के नेतृत्व में हिंदुओं और सिखों ने मोर्चा सँभाला। हर गली-मोहल्ला में जवाब देने की तैयारी की गई। चौक फवारा के पास जैसे ही हमलावर आए, हिंदुओं ने उन पर आक्रमण कर दिया। वे फिर भाग खड़े हुए। इस तरह स्वर्ण मंदिर को दो बार बचा गया।

हिंदुओं को भगवान भरोसे छोड़ निकल भागे कॉन्ग्रेसी नेता

माणिकचंद्र वाजपेयी और श्रीधर पराडकर ने अपने पुस्तक ‘पार्टिशन डे: द फियरी स्ट्रगल ऑफ आरएसएस’ ने लिखा है कि पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान से कॉन्ग्रेस के नेता खुद निकल गए, लेकिन हिंदुओं को ‘मुस्लिम लीग’ और उसके हथियारबंद दस्ते ‘नेशनल गार्ड’ के साथ-साथ पाकिस्तानी सेना और पुलिस के खूनी दरिंदों की दया पर छोड़ दिया था।

इस घड़ी में संघ और उसके स्वयंसेवक सामने आए और गली-गली से लोगों को निकालने का काम किया। कई जगहों पर राहत शिविर लगाए और असुरक्षित जगहों पर रहने वाले हिंदुओं को लाकर इन शिविरों में रखा। महीनों तक उनके लिए खाने-पीने का इंतजाम किया और उनकी देखभाल की।

पाकिस्तान के गली-मुहल्लों से हिंदू-सिखों को निकाला गया

लाहौर में अंग्रेजी के प्रोफेसर एएन बाली ने 1949 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘नाउ इट कैन बी टोल्ड’ में इस त्रासदी का विस्तार से जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि संघ के स्वयंसेवकों ने सूबे के हर मोहल्ले में हिंदू-सिख महिलाओं और बच्चों को खतरनाक इलाकों से निकालकर सुरक्षित केंद्रों तक पहुँचाने का काम किया।

हिंदुओं और सिखों को भारत ले जाने वाली ट्रेनों तक पहुँचाने के लिए लॉरी और बसों की व्यवस्था की गई और उसकी सुरक्षा के उपाय किए गए। हिंदू और सिख इलाकों में चौकसी रखी जाती थी और हमला होने पर बचाव के उपाय सिखाए जाते थे। यहाँ तक ​​कि पंजाब के कई जिलों में कॉन्ग्रेस के नेताओं ने भी अपने परिवारों और रिश्तेदारों को बचाने के लिए आरएसएस की मदद माँगी थी।

कश्मीर सीमा पर निगरानी और शरणार्थियों के लिए राहत शिविर

संघ के स्वयंसेवकों पाकिस्तान के नापाक इरादों से वाकिफ थे। कश्मीर सीमा पर वे पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। इसके लिए उन्हें कोई प्रशिक्षण नहीं मिला था। यह काम उन्होंने राष्ट्रभक्ति से प्रेरित किया था। जब पाकिस्तानी सेना की टुकड़ियों ने कश्मीर की सीमा लांघने की कोशिश की तो सैनिकों के साथ कई स्वयंसेवकों ने भी लड़ाई लड़ते हुए अपने प्राण दिए।

इसके अलावा, पाकिस्तान से हिंदुओं और सिखों का जत्था लगातार आ रहा था। उन लोगों को जम्मू में रहने की व्यवस्था का जिम्मा संघ के स्वयंसेवकों ने संभाला। उन्होंने सैकड़ों राहत शिविर स्थापित किए और पीड़ितों को हर तरह से मदद की।

सरदार पटेल ने केएम मुंशी के संघ के काम को सराहा

भले ही कॉन्ग्रेस आज संघ से उसके काम को पूछे, लेकिन उसके नेता स्वयंसेवकों की बहादुरी की सराहना कर चुके हैं। जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य केएम मुंशी ने आरएसएस के स्वयंसेवकों द्वारा पंजाब और सिंध में दिखाई गई बहादुरी की तारीफ की थी।

तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 11 अगस्त 1948 को संघ के दूसरे सरसंघचालक एमएस गोलवरकर ‘गुरुजी’ को लिखे पत्र में कहा था कि आरएसएस ने संकट के समय में हिंदू समाज की सेवा की है। संघ के युवाओं ने महिलाओं और बच्चों की रक्षा की और उनके लिए बहुत कुछ किया।

आज जब पूरा देश विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मना रहा है, ऐसे में संघ के इस निस्वार्थ सेवा को भी याद करने का दिन है। अगर संघ के स्वयंसेवकों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर हिंदू-सिखों की मदद नहीं की होती तो ना जाने और कितने लोगों को अपने प्राण गँवाने पड़ते या जलालत की जिंदगी जीनी पड़ती।

‘ISIS वालों की बेटी हूँ, सबको खत्म कर दूँगी’: उड़ते विमान में अंडरवियर उतार कर पायलट की तरफ दौड़ी महिला, लगाए ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे

साइप्रस से मैनचेस्टर जा रहे एक विमान में एक महिला ने अंडरवियर उतार कर दहशत फैला दी। महिला ने ‘अल्लाह हु अकबर’ का नारा लगाया और कॉकपिट में घुसने की कोशिश की। महिला ने अपने पास बारूद होने की बात कही थी और खुद को ISIS आतंकियों के परिवार से ताल्लुक रखने वाली बताया। फिलहाल महिला को फिलिप ओब्रायन नामक एक यात्री ने पकड़ लिया, जो 3 बच्चों के पिता हैं। घटना 9 अगस्त। 2022 की बताई जा रही है।

डेली मेल के मुताबिक, आरोपित महिला की उम्र लगभग 30 साल थी। उसे पकड़ने वाले व्यक्ति का नाम फिलिप ओब्रायन है, जो उसी विमान में अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ सवार थे। जहाज उड़ते ही महिला ने 2 बार ‘अल्लाह हु अकबर’ का नारा लगाया और कॉकपिट की तरह दौड़ी। उसने अपने अंडरवियर को उतार दिया। उसने कहा कि उसके पास विस्फोटक है और कुछ ही देर में विमान के सभी यात्री मरने वाले हैं। वो अपने माता-पिता को ISIS का आतंकी बता रही थी।

महिला की इस हरकत के बाद विमान में सवार 35 वर्षीय फिलिप ओब्रायन ने कॉकपिट के पास उसे रोकने का प्रयास किया। उन्होंने उस महिला को जहाज फर्श पर गिरा दिया और पायलटों से इमर्जेन्सी लैंडिग करने को कहा। हालात की गंभीरता को देखते हुए पायलटो ने भी मैनचेस्टर जा रहे विमान को फ्राँस की राजधानी पेरिस के एयरपोर्ट पर उतार लिया।

बाद में इस घटना की वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुई। उस फुटेज में फ़्रांस के 2 पुलिसकर्मी महिला को गिरफ्तार करने के लिए विमान में चढ़ते हुए दिख रहे हैं। गिरफ्तारी के दौरान महिला ने काले रंग की टोपी और लाल रंग का टॉप पहन रखी थी। आरोपित महिला की पहचान अभी उजागर नहीं हुई है। जहाज के कैप्टन ने उसकी हरकत को पागलपन बताया है।

आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ को तीसरे दिन भी नसीब नहीं हुए दर्शक, अब हृतिक रोशन से करवाया ट्वीट: 15 अगस्त से लगा कर बैठे हैं उम्मीदें

रिलीज के तीसरे दिन भी आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल रहा, जिससे बॉलीवुड में हैरानी की लहर है। फिल्म तीसरे दिन शनिवार (13 अगस्त, 2022) को मात्र 8.75 करोड़ रुपए ही कमा पाई, जिसके बाद भारत में इसकी 3 दिनों की कुल नेट कमाई 27.50 करोड़ रुपए हो गई है। लगभग 200 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने पहले दिन 11.50 करोड़ रुपए और दूसरे दिन 40% की गिरावट के साथ 7.25 करोड़ रुपए नेट कमाए थे।

‘लाल सिंह चड्ढा’ की कमाई में तीसरे दिन उछाल तो देखने को मिला, लेकिन 20% की मामूली उछाल से शायद ही बात बनें। चूँकि ये 5 दिनों का लंबा वीकेंड है और रक्षा बंधन के साथ-साथ स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की भी छुट्टियाँ इसमें शामिल हैं, वरना फिल्म का और बुरा हाल हो सकता है। अभी भी निर्माताओं को उम्मीद है कि 15 अगस्त के दिन लोग परिवार के साथ इस फिल्म को देखने निकलेंगे। लेकिन, अब इसकी टक्कर अक्षय कुमार की ‘रक्षा बंधन’ के अलावा तेलुगु फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ से भी है। फिल्म का समर्थन करने पर लोगों ने हृतिक रौशन को भी खरी-खोटी सुनाई।

अब बात कर लेते हैं ‘रक्षा बंधन’ की। अक्षय कुमार और भूमि पडनेकर इसमें मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म में अक्षय कुमार की बहन का किरदार निभाने वाली कनिका कपूर के देश विरोधी ट्वीट्स वायरल हुए थे, जिसके बाद इसके बॉयकॉट की भी अपील हुई थी। इस फिल्म की 3 दिनों में भारत में नेट कमाई 20.25 करोड़ रुपए है। इस फिल्म का बजट 70 करोड़ रुपए के लगभग है, ऐसे में ये अपनी लागत भी निकालती हुई नहीं दिख रही है।

‘लाल सिंह चड्ढा’ और ‘रक्षा बंधन’ के फ्लॉप होने पर वरिष्ठ फिल्म समीक्षक तरन आदर्श ने कहा है, “बॉयकॉट के आह्वान को नकारना बंद करें कि इससे फिल्मों पर कोई असर नहीं पड़ता। कबूल करो कि बहिष्कार के इन आह्वानों से बॉक्स ऑफिस पर फर्क़ पड़ता है। खासकर लाल सिंह चड्ढा के मामले में ये हुआ है। अब इसका सामना करें।” वहीं अभिनेत्री करीना कपूर के भी सुर बदल गए हैं और अब वो अकड़ दिखाने जगह लोगों से बॉयकॉट न करने की अपील कर रही हैं।

मदरसे में पढ़ाई, पाकिस्तान में रिश्तेदारी: नूपुर शर्मा के कत्ल की प्लानिंग वाला नदीम ऐसे धराया, हत्या की तैयारी के लिए लेता था ऑनलाइन क्लास

नूपुर शर्मा के कत्ल की प्लानिंग कर रहे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार जैश आतंकी नदीम की रिश्तेदारी पाकिस्तान में होने की खबर है। बताया ये भी जा रहा है कि आतंकी रात में जाग कर नूपुर शर्मा के हत्या की रूपरेखा बना रहा था। इसी के साथ आतंकी नदीम द्वारा बचपन में मदरसे में पढ़ाई करने की जानकारी सामने आ रही है। आतंकी के अम्मी-अब्बू ने खुद को बीमार बताते हुए किसी से बात करने से मना कर दिया है।

मुँह ढँक कर लेटे नदीम के अब्बू नफीस

सहरानपुर के जर्नलिस्ट पंकज चौधरी द्वारा ऑपइंडिया को भेजे गए वीडियो में आतंकी नदीम के पड़ोसी ने कहा, “नदीम की बुआ और दादी पहले से ही पाकिस्तान में रहती हैं। इसकी देहरादून में एक किराने की दुकान भी है। गाँव में किसी को पता भी नहीं था कि ये ऐसा निकलेगा। गाँव की बहुत बेइज्जती हो रही है।” वहीं एक अन्य पड़ोसी ने कहा, “नदीम के अम्मी और अब्बू दोनों की रिश्तेदारियाँ पहले से पाकिस्तान में हैं।”

जानकारी देता नदीम का पड़ोसी

ATS द्वारा पकड़े जाने के बाद नदीम के घर पर स्थानीय लोगों और मीडियाकर्मियों का जमावड़ा लगा हुआ है। मीडिया वालों को देख कर उनके अम्मी और अब्बू नफीस खुद को बेहद बीमार बताते हुए चारपाई पर लेट गए हैं। वो किसी से भी कोई बात नहीं कर रहे हैं।

नदीम का घर बिना प्लास्टर का है। हालाँकि नदीम के बिना प्लास्टर वाले घर में भी वॉशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान दिखाई दे रहे। नदीम के घर पर मौजूद गाँव के प्रधान ने कहा, “इससे पहले नदीम पर कहीं भी कोई मुकदमा नहीं था। हम लोगों को कुछ भी पता नहीं है। वो किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था।” नदीम के घर के ठीक पीछे एक मस्जिद भी है।

नदीम के घर पर जमा भीड़

वहीं नदीम द्वारा कुछ साल पहले एक मदरसे में पढ़ने की सूचना है। मदरसा नदीम के घर के आस-पास ही है, जिसका नाम ‘मोहम्मदिया अरबिया मदरसा’ है। मदरसे में नदीम को कुरान की और अन्य मज़हबी शिक्षाएँ देने वाले जमील ने बताया:

“नदीम लगभग 11 साल का होने के बाद यहाँ पढ़ाई पूरी कर के चला गया था। उसके बाद हमारी एकाध बार ही उस से मुलाकात हुई है। हमारे सामने उसकी कोई गलत शिकायत नहीं आई थी। उसके 2 और भाई भी यहाँ पढ़ते थे। नदीम पर लगे आरोपों की जानकारी मुझे नहीं है। मेरे मदरसे में उसने सिर्फ अरबी पढ़ी थी। बाद में उसने कहीं ट्यूशन आदि से हिंदी-इंग्लिश सीख ली तो मैं उस बारे में कुछ नहीं कह सकता।”

मदरसा मोहम्मदिया अरबिया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नदीम रात भर जाग कर नूपुर शर्मा की हत्या की तैयारी कर रहा था। इसके लिए वो ऑनलाइन क्लास भी लेता था। नदीम अपने रिश्तेदारों के बहाने पाकिस्तान जाना चाह रहा था लेकिन उससे पहले ही वो पकड़ा गया। उसने कई मौकों पर अपने भाई का भी फोन प्रयोग किया था, इसी के चलते ATS ने उसके बड़े भाई तैमूर को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। हालाँकि बाद में तैमूर को छोड़ दिया गया।

इंटरनेशनल क्रिकेटर को IPL के मालिक ने मारे कई थप्पड़… क्योंकि जीरो पर आउट हो गया था

न्यूजीलैंड (New Zealand) के पूर्व बल्लेबाज रॉस टेलर (Ross Taylor) ने आरोप लगाया है कि एक बार राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) टीम मालिक ने उन्हें थप्पड़ जड़ दिया था। टेलर का कहना है कि साल 2011 के सीजन में यह घटना उनके साथ घटी थी। टेलर इसके बाद इस फ्रेंचाइजी के लिए फिर कभी नहीं खेले।

टेलर ने यह आरोप एक किताब के जरिए लगाया है। उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘रॉस टेलर: ब्लैक एंड व्हाइट’ में टेलर ने लिखा है कि किंग्स इलेवन पंजाब (Kings XI Punjab) के खिलाफ मोहाली में हुए मैच में उनकी टीम हार गई थी। इसके बाद फ्रेंचाइजी का मालिक उन पर गुस्सा हो गया था।

टेलर ने अपनी किताब में लिखा है, “हमें 195 रन का लक्ष्य मिला था और मैं जीरो पर आउट हो गया। इस मैच में हमारी टीम को करारी हार मिली थी। हार के बाद टीम मालिक ने मुझसे कहा कि हम आपको जीरो पर आउट होने के लिए करोड़ों रुपए नहीं दे रहे हैं।”

न्यूजीलैंड के पूर्व बल्लेबाज ने आगे लिखा, “इसके बाद उन्होंने मुझे तीन-चार थप्पड़ मारा। हालाँकि, इस दौरान वह (फ्रेंचाइजी का मालिक) हँस रहे थे और थप्पड़ भी तेज नहीं थे। मैं इसको कोई मुद्दा नहीं बनाना था, लेकिन यह मेरे लिए बहुत अप्रत्याशित था।”

टेलर के आरोपों पर राजस्थान रॉयल्स ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बता दें कि रॉस टेलर ने राजस्थान रॉयल्स के लिए साल 2011 में मैच खेला था। इस सीजन में 12 मैच खेलते हुए उन्होंने 119 के स्ट्राइक रेट से 181 रन बनाए थे।

रॉस टेलर IPL में 55 मैच खेल चुके हैं। उन्होंने 1017 रन बनाए हैं। उनके नाम 3 अर्धशतक भी हैं। वे दिल्ली डेयरडेविल्स, पुणे वॉरियर्स, राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के लिए खेल चुके हैं।

न्यूजीलैंड पर नस्लावाद का आरोप

रॉस टेलर ने न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम और उसके खिलाड़ियों के नस्लवाद को भी अपनी किताब में उजागर किया है। टेलर ने लिखा, “वहाँ मुझे भारतीय समझते थे और साथी खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में मुझे बंदर कहते थे।”

उन्होंने आगे बताया, “कई बार जब मैं खराब शॉट खेलता था तो उस पर मेरे लिए बहुत ही गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। उसी तरह के शॉट पर टीम के बाकी बल्लेबाजों के लिए ऐसा कुछ नहीं कहा जाता था।”

‘अगला नंबर तुम्हारा’ – हैरी पॉटर की लेखिका जेके रॉलिंग को हत्या की धमकी: ट्विटर ने ‘इसमें कुछ भी गलत नहीं’ लिख झाड़ा पल्ला

‘हैरी पॉटर’ की लेखिका और स्कॉटलैंड निवासी जेके रॉलिंग को ट्विटर पर जान से मारने की धमकी मिली है। यह धमकी ईरान समर्थक एक कट्टरपंथी द्वारा दिए जाने का दावा किया जा रहा है। धमकी देने वाले का ट्विटर एकाउंट मीर आसिफ़ अज़ीज़ नाम से है। धमकी देने वाला आसिफ़ सलमान रुश्दी को चाकू मारने वाले आरोपित का समर्थन कर रहा था। रॉलिंग को यह धमकी 13 अगस्त 2022 (शनिवार) को दी गई है।

जेके रॉलिंग ने सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बाद शुक्रवार को अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “भयावह खबर, मैं बहुत कमजोर महसूस कर रही हूँ। वो जल्दी ही ठीक हो जाएँ।” इस ट्वीट पर खुद को कार्यकर्ता, छात्र और रिसर्चर लिखने वाले मीर आसिफ़ ने लिखा, “चिंता मत करो। अगला नंबर तुम्हारा है।” आसिफ ने इस से पहले रुश्दी पर हमला करने वाले हाडी मतार को एक ‘शिया क्रांतिकारी’ के तौर पर बताते हुए उसे मृत अयातुल्लाह खुमैनी के फतवा का पालन करने वाला बताया था।

इस धमकी के बाद जेके रॉलिंग ने आरोपित आसिफ के तमाम आपत्तिजनक स्क्रीनशॉट्स को लेकर ट्विटर सपोर्ट (@TwitterSupport) को ट्वीट किया। उन्होंने पूछा कि क्या उनकी तरफ से ऐसे ट्वीट पर कोई सपोर्ट मिल सकता है। उस पर ट्विटर का जवाब था, “हमने आपकी शिकायत की जाँच करके पाया कि उसमें (आसिफ के ट्वीट में) किसी भी प्रकार की कोई भी हिंसक बात नहीं कही गई है।”

ट्विटर के इस फैसले की जेके रॉलिंग के साथ कई अन्य लोगों द्वारा आलोचना की जा रही है। @WilliamGatesKF ने एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “ट्विटर ने जिस मीर आसिफ के एकाउंट को नहीं बंद किया, उस कायर ने अपना एकाउंट खुद ही डिलीट कर दिया।”

थोड़ी देर बाद जेके रॉलिंग ने एक और ट्वीट करके जानकारी दी कि मामला पुलिस के संज्ञान में आ गया है और वो दी गई धमकियों पर कार्रवाई कर रही है। रॉलिंग ने आरोपित आसिफ का फोटो भी शेयर किया है।

गौरतलब है कि शुक्रवार (12 अगस्त, 2022) को ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लेखक उपन्यासकार सलमान रुश्दी को न्यूयॉर्क में भाषण देने से पहले पर चाकू से हमला किया गया था। उन्हें 1980 के दशक में ही ईरान से जान से मारने की धमकी मिली थी। रुश्दी पर चाकू से गर्दन पर हमला किया गया था, जिसमें उनकी आँख और लीवर डैमेज हो गए हैं। उनका गंभीर अवस्था में इलाज करवाया जा रहा है। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है। रुश्दी पर हुए हमले का देश और दुनिया भर के कट्टरपंथी जश्न मना रहे हैं।