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जालौर में इंद्र मेघवाल की मौत: मृतक की जाति वाले टीचर ने नकारा भेदभाव, स्कूल में 8 में से 5 स्टाफ SC/ST

राजस्थान के जालौर में इन दिनों 9 साल के दलित इंद्र मेघवाल की मौत के बाद माहौल गरमा रखा है। मीडिया में इसे सवर्ण-दलित मामला कहकर तूल दिया जा रहा है। राजस्थान की पुलिस भी इस मामले में एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है।

मृतक के पिता देवाराम मेघवाल का दावा है कि 20 जुलाई को इंद्र ने अपने हेडमास्टर छैल सिंह की मटकी से पानी पी लिया था। इसी के बाद उसे भद्दी-भद्दी गाली देते हुए पीटा गया, जिससे उसका ब्रेन हैमरेज हो गया और 24 दिन बाद इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

अब इस मामले में आरोपित हेडमास्टर छैल सिंह की गिरफ्तारी हो गई है। उनके ऊपर एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई हो रही है। लेकिन इसी सब के बीच विरोधाभासी बातें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों के द्वारा इनमें एक बात यह सामने आई है कि मटकी से पानी पीने पर बच्चे को मारने वाला दावा गलत है। इन लोगों के अनुसार स्कूल में एक ही टंकी है और बच्चों से लेकर टीचर उसी टंकी से पानी पीते थे।

शिक्षकों ने नकारा भेदभाव वाला एंगल

सरस्वती स्कूल के टीचर गटाराम मेघवाल (मृतक बच्चे की जाति वाले टीचर) ने बताया है कि वो 7-8 साल से स्कूल में पढ़ा रहे हैं, पर उन्होंने भेदभाव कभी महसूस नहीं किया। छोटे बच्चों का भी कहना है कि स्कूल में कोई मटकी नहीं है, सारे लोग टंकी का पानी पीते हैं।

टीचर ने बताया कि अभी तक खबरों में ये बातें सामने आई हैं कि बच्चे को मटकी से पानी पीने के कारण मारा गया, लेकिन हकीकत तो ये है कि स्कूल में भेदभाव जैसा कुछ नहीं है। वो खुद स्कूल में 8 सालों से पढ़ा रहे हैं। पूरे स्कूल में एक टंकी है और सब उससे पानी पीते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल में कुल 8 स्टाफ हैं, जिनमें एससी-एसटी के 5 स्टाफ हैं। ऐसे में भेदभाव का तो सवाल ही नहीं है।

ऑडियो में हेडमास्टर और पिता की बात

अब हकीकत क्या है, ये प्रशासन की जाँच बताएगी। लेकिन इस बीच आरोपित हेडमास्टर की और इंद्र के पिता की एक ऑडियो सामने आई है। इसमें भी टंकी से पानी पीने की बात कहीं नहीं है, लेकिन हेडमास्टर ये कह रहे हैं कि शायद लड़के ने गलती ज्यादा कर दी होगी, इसलिए उन्हें थप्पड़ मारना पड़ा। वो कहते हैं:

“मैं मेरी गलती मान रहा हूँ। मैंने जानबूझकर इतनी तेज नहीं मारा। ज्यादा लगी है तो मैं इलाज का खर्चा देने को तैयार हूँ। मैं माफी माँगता हूँ, खर्चा दे रहा हूँ और क्या करूँ।”

वहीं लड़के के पिता को ऑडियो में कहते सुना जा सकता है कि लड़के के सिर की नस ब्लॉक हो गई है। हाथ-पाँव काम नहीं कर रहे। ये सारी बातें डॉक्टर ने कही हैं।

इस ऑडियो में पिता ने कहीं भी बेटे के मटकी से पानी पीने वाली बात का जिक्र नहीं किया है। वहीं एक अन्य वीडियो में उन्हें मटकी वाली बात पर कहते सुना गया:

“सुराणा गाँव में सरस्वती स्कूल में छैल सिंह के पास मेरा लड़का इंद्र कुमार पढ़ने जाता था। उसके मटकी में से पानी पीने पर जातिवाद कर शिक्षक ने कान पर थप्पड़ मारा, जिससे उसके सिर में हैमरेज होकर नाड़ी ब्लॉक हो गई। मैं बच्चे को लेकर डीसा, पालनपुर, उदयपुर सब जगह घूमा। बाद में मैंने उसको अहमदाबाद में भर्ती कराया, जहाँ उसकी मौत हो गई। मैं रविवार सुबह जालोर के सायला आऊँगा। सब भीम आर्मी, भीम सेना सब पधारना और मुझे न्याय दिलाना, जय भीम।”

सड़कों पर भीम आर्मी, पुलिस पर पथराव

दलित छात्र की मौत के बाद और उनके पिता द्वारा वीडियो में किए गए आह्वान के बाद भीम आर्मी सड़कों पर आ गई। इन लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस ने इन लोगों पर लाठी चलाई। प्रशासन ने बिगड़े हालात देखते हुए जिले में इंटरनेट सेवा बंद कर दी। परिवार के लोगों को सरकार ने 5 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है। परिजनों की माँग है कि स्कूल की मान्यता रद्द की जाए, उन्हें 50 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए और परिवार के 1 सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।

1.5 लाख रुपए लेकर नाम लेने की बात

इसके अलावा मीडिया में एक बुजुर्ग को इस मामले पर बात करते सुना जा सकता है। वह बच्चों की लड़ाई जैसे एंगल पर बात करते हैं और कहते हैं कि लड़के के हालत बिगड़ने के बाद उन्होंने छैल सिंह से पाँच लाख रुपए माँगे थे, लेकिन वह डेढ़ लाख रुपए दे पाए।

इसके बाद समझौता हो गया। हेडमास्टर से कहा गया कि अब उनका (हेडमास्टर) कहीं नाम नहीं लिया जाएगा, लेकिन अचानक ये मामला बढ़ गया और ये मटकी वाला एंगल भी सामने आया।

यूपी के कारीगरों को मिला 40 करोड़ ग्राहकों वाला बाजार, योगी सरकार का Flipkart के साथ करार: हस्तशिल्प उत्पादों के लिए देश भर में 75 मार्ट

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की हस्तशिल्प को ग्राहकों के बड़े बाजार तक पहुँचाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश की पारंपरिक संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए इस स्वतंत्रता दिवस पर एक MSME मार्ट का उद्घाटन किया जाएगा। इससे राज्य के बुनकरों को एक बड़ा बाजार मिलेगा। इसके लिए यूपी सरकार ने Flipkart के साथ करार किया है। लखनऊ के समिट बिल्डिंग में इसका उद्घाटन होगा।

उत्तर प्रदेश के ‘इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स (UPICON)’ के प्रबंध निदेशक प्रवीण सिंह ने बताया कि समिट बिल्डिंग के 7वें तले पर स्थित मध्यम एवं लघु उद्योग (MSME) मार्ट का संचालन शुरू हो गया है। उन्होंने जानकारी दी कि यहाँ राज्य के शिल्पकारों द्वारा बनाए गए उत्पाद के लिए इसे एक प्रमोशनल हब के रूप में स्थापित किया गया है। ODOP सहित अन्य सरकारी योजनाओं के तहत बने प्रोडक्ट्स की प्रदर्शनी भी यहाँ लगाई गई है।

पूरे देश में इस तरह के 75 मार्ट्स खोलने की योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के शिल्पकारों और बुनकरों को एक बड़ा बाजार मुहैया कराया जाए। ऐसे शिल्पकारों को पहचान एवं सम्मान के साथ अर्थोपार्जन दिलाना भी इसका उद्देश्य है। मोरादाबाद के पीतल के उत्पाद से लेकर चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने तक, इन सबको बड़ा बाजार मिलेगा। प्रोडक्ट्स के वीडियोज दिखाते समय उन्हें बनाने वालों के बारे में भी बताया जाएगा, ताकि ग्राहक उन्हें जानें।

त्योहारों के मौसम भी आ रहे हैं, ऐसे में लोग इन उत्पादों को एक-दूसरे को गिफ्ट देने के लिए भी प्रयोग में ला सकते हैं। ग्राहकों को खरीददारी में छूट देने की भी योजना है। नोएडा, प्रयागराज, वाराणसी और आगरा में अगले चरण में जल्द ही ऐसे मार्ट खुलेंगे। उसके बाद बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और कोलकाता तक ऐसे मार्ट्स खोलने की योजना है। फ्लिपकार्ट के माध्यम से हस्त शिल्पकारों को ट्रेनिंग भी मिलेगी। MoU के तहत, 6 महीने तक उनसे कोई कमीशन भी नहीं लिया जाएगा। फ्लिपकार्ट के पास 40 करोड़ ग्राहक हैं।

सीएम योगी ने सभी 75 जिलों के डीएम को निर्देश दिया है कि वो अपने-अपने जिले के सभी तहसीलों में एक खास स्थानीय प्रोडक्ट के बारे में बताएँ, ताकि उन्हें और उन्हें बनाने वालों को बढ़ावा दिया जा सके। इसका नाम ‘वन तहसील, वन प्रोडक्ट (OTOP)’ दिया गया है। इसी क्रम में 7 अगस्त को फ्लिपकार्ट के साथ भी MoU पर हस्ताक्षर हुए। 20% तक और ब्याज पर कर्ज और 7% तक की सब्सिडी भी दी जाती है। अब शिल्पकारों और कारीगरों को नई पहचान मिलेगी।

‘कुत्ता सलमान रुश्दी’ को ‘उड़ती कुरान’ ने जला डाला: पाकिस्तानी फिल्म International Gorillay की कहानी, इस्लाम के दुश्मन का अंजाम

इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के विरुद्ध कुछ बोलने-लिखने वालों के खिलाफ फतवे और ‘सर तन से जुदा’ के नारों का सिलसिला अभी का नहीं बल्कि वर्षों पुराना है। सलमान रुश्दी को चाकू से मारने की घटना नई है। वो सोच-विचार जिसके तहत चाकू मारी गई है, वो नई नहीं है। इसी सोच के साथ पाकिस्तान में फिल्म भी बन चुकी है। नाम है इंटरनेशनल गोरिल्ले (International Gorillay).

पाकिस्तानी फिल्म इंटरनेशनल गोरिल्ले में कुरान और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ किताब लिखने वाले सलमान रुश्दी को उनके किए की सजा देने का काल्पनिक चित्रण दिखाया गया है। उस समय का तो पता नहीं लेकिन काल्पनिक चित्रण भी इस फिल्म में ऐसा कि आपको देख कर हँसी छूट जाएगी।

आपको बताते चलें कि तब के समय फिल्म इंटरनेशनल गोरिल्ले (International Gorillay) पाकिस्तान की सबसे सफल फिल्मों में से एक साबित हुई थी। फिल्म में बाबरा शरीफ, नीली और जावेद शेखी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। पाकिस्तान और इस्लाम के खिलाफ साजिश रचने वालों को ये सब पात्र ही मिल कर उनके अंजाम तक पहुँचाते हैं। फिल्म की कहानी में जबरदस्त इस्लाम प्रेम ठूँसा हुआ है। तब ब्रिटेन में इस फिल्म को बैन भी किया गया था।

इस फिल्म के माध्यम से पूरी दुनिया को ‘इस्लाम की ताकत’ दिखाने कोशिश की गई है। फिल्म के मुख्य किरदारों को भी देशभक्त और महानायक की तरह पेश किया गया है। फिल्म में विलेन के रूप में सलमान रुश्दी को ही काल्पनिक ढंग से दिखाया गया है।

फिल्म की कहानी कुछ ऐसी है जिसमें सलमान रुश्दी का मकसद होता है कि वह पूरी दुनिया से इस्लाम का सम्पूर्ण विनाश कर दे। इसके लिए वह अपनी एक फौज भी तैयार करता है और पाकिस्तान में बैठे अपने एक एजेंट को खूब सारा पैसा भी भेजता है।

इंटरनेशनल गोरिल्ले (International Gorillay) की कहानी

इंटरनेशनल गोरिल्ले फिल्म के शुरुआती कुछ मिनटों में ही सलमान रुश्दी की लिखी किताब के विरुद्ध एक जुलूस निकलता है। लेकिन उस जुलूस पर पुलिस द्वारा फायरिंग करवा दी जाती है और कई लोगों की मौत हो जाती है। इसके साथ ही फिल्म की कहानी आगे बढ़ने लगती है। पूरी फिल्म में सलमान रुश्दी को कुत्ता बोला जाता है।

यह फिल्म हीरो और उसके दो भाइयों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। दोनों भाई शुरू में अलग-अलग विचारों में रहते हैं। मगर अंत में सब एक हो जाते हैं और ‘इस्लाम के दुश्मन’ को मारने के मिशन पर निकल पड़ते हैं।

फिल्म का क्लाइमेक्स इतना विचित्र है कि उसे समझना कुछ लोगों के बस का नहीं। दरअसल अंत में फिल्म के सभी नायकों की हत्या के लिए उन्हें रस्सियों से बाँध दिया जाता है। तभी वे लोग अल्लाह को समर्पित एक गाना गाते हैं। फिर क्या था… अचानक आसमान से बिजलियाँ गिरने लगती हैं… सब की रस्सियाँ खोल देती हैं।

क्लाइमेक्स अभी बाकी है… मजे से पढ़ते जाइए। इसके बाद आसमान से किताब उतरती है और फिल्म के खलनायक को ये उड़ती हुई किताब (कुरान) जलाकर भस्म कर देती है। वहाँ खड़े कलाकार तब उसे याद दिलाते हैं कि उसे इस्लाम के खिलाफ बोलने की सजा मिल रही है।

द सेटेनिक वर्सेज़ किताब के कारण बनी फिल्म

गौरतलब है कि यह फिल्म वास्तव में सलमान रुश्दी की एक किताब के कारण बनाई गई थी। उस किताब का नाम ‘द सेटेनिक वर्सेज़’ है। सलमान ने इस किताब का प्रकाशन सितंबर 1988 में किया। ‘द सैटेनिक वर्सेज़’ के प्रकाशन ने इस्लामी दुनिया में तत्काल विवाद को जन्म दिया और इसका कारण बना पैगंबर मोहम्मद का अपमानजनक समझा जाने वाला चित्रण। क़िताब की कौन सी बात इस्लाम को मानने वालों को बुरी लगी, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है क्योंकि यह किताब भारत में कॉन्ग्रेसी सरकार ने प्रतिबंधित कर दी थी।

द सेटेनिक वर्सेज़ किताब के प्रकशन के बाद 14 फ़रवरी 1989 को सलमान रुश्दी को मारने के फतवे जारी किए गए। इसके बाद ईरान और ब्रिटेन के बीच राजनीतिक स्तर पर भी विवाद हुआ। वहीं किताब पर मचा बवाल अभी तक खत्म नहीं हुआ है। हाल ही में सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में हुए जानलेवा हमले पर भी कुछ कट्टरपंथियों ने जश्न मनाया और उनके मरने की दुआएँ भी माँगी।

‘पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं जनजातीय नायक’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र को सम्बोधन, कहा – देश में दिख रहा बदलाव

महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने पहली बार बतौर राष्ट्रपति स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को सम्बोधित किया। 76वें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा याद किया कि कैसे 15 अगस्त 1947 के दिन हमने औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों को काट दिया था। उन्होंने कहा कि उस शुभ-दिवस की वर्षगाँठ मनाते हुए हम लोग सभी स्वाधीनता सेनानियों को सादर नमन करते हैं।

द्रौपदी मुर्मू ने याद किया कि स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, ताकि हम सब एक स्वाधीन भारत में सांस ले सकें। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में वोट देने का अधिकार प्राप्त करने के लिए महिलाओं को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था, लेकिन हमारे गणतंत्र की शुरुआत से ही भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया। राष्ट्रपति ने कहा कि ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मार्च 2021 में दांडी यात्रा की स्मृति को फिर से जीवंत रूप देकर शुरू किया गया।

इस यात्रा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस युगांतरकारी आंदोलन ने हमारे संघर्ष को विश्व-पटल पर स्थापित किया और उसे सम्मान देकर हमारे इस महोत्सव की शुरुआत की गई। उन्होंने बताया कि यह महोत्सव भारत की जनता को समर्पित है। उन्होंने पिछले वर्ष से हर 15 नवंबर को ‘जन-जातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि हमारे जन-जातीय महानायक केवल स्थानीय या क्षेत्रीय प्रतीक नहीं हैं बल्कि वे पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या के सम्बोधन में कहा, “हमारा संकल्प है कि वर्ष 2047 तक हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को पूरी तरह साकार कर लेंगे। हमने देश में ही निर्मित वैक्सीन के साथ मानव इतिहास का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किया। पिछले महीने हमने दो सौ करोड़ वैक्सीन कवरेज का आँकड़ा पार कर लिया है। इस महामारी का सामना करने में हमारी उपलब्धियाँ विश्व के अनेक विकसित देशों से अधिक रही हैं।”

उन्होंने कहा कि जब दुनिया कोरोना महामारी के गंभीर संकट के आर्थिक परिणामों से जूझ रही थी तब भारत ने स्वयं को संभाला और अब पुनः तीव्र गति से आगे बढ़ने लगा है। बकौल द्रौपदी मुर्मू, इस समय भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में आज संवेदनशीलता व करुणा के जीवन-मूल्यों को प्रमुखता दी जा रही है और इन जीवन-मूल्यों का मुख्य उद्देश्य हमारे वंचित, जरूरतमंद तथा समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों के कल्याण हेतु कार्य करना है।

राष्ट्रपति ने कहा, “आज देश में स्वास्थ्य, शिक्षा और अर्थ-व्यवस्था तथा इनके साथ जुड़े अन्य क्षेत्रों में जो अच्छे बदलाव दिखाई दे रहे हैं उनके मूल में सुशासन पर विशेष बल दिए जाने की प्रमुख भूमिका है। भारत के नए आत्म-विश्वास का स्रोत देश के युवा, किसान और सबसे बढ़कर देश की महिलाएँ हैं। आज जब हमारे पर्यावरण के सम्मुख नई-नई चुनौतियाँ आ रही हैं तब हमें भारत की सुंदरता से जुड़ी हर चीज का दृढ़तापूर्वक संरक्षण करना चाहिए। जल, मिट्टी और जैविक विविधता का संरक्षण हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सलाह दी कि हमारे पास जो कुछ भी है वह हमारी मातृभूमि का दिया हुआ है। इसलिए हमें अपने देश की सुरक्षा, प्रगति और समृद्धि के लिए अपना सब कुछ अर्पण कर देने का संकल्प लेना चाहिए।

पाकिस्तान के इस शक्तिपीठ को मुस्लिम कहते हैं ‘नानी मंदिर’, पूजा को मानते हैं ‘हज’: तीर्थयात्रा करने वाली महिलाएँ कहलाती हैं ‘हाजियानी’

पाकिस्तान के कब्जे वाला बलूचिस्तान (Baluchistan, Pakistan) प्रांत बेहद खूबसूरत स्थान है। हालाँकि, बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की माँग करने वालों पर पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के कारण यह स्थान अक्सर चर्चा में रहता है। लेकिन, हिंदुओं के बीच यह एक और वजह से जाना जाता है। यहाँ हिंदुओं की देवी हिंगलाज माता (Hinglaj Mata Mandir in Pakistan) का विश्वविख्यात मंदिर है।

हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक हिंगलाज माता का दर्शन करने के लिए दुनिया भर के लोग बलूचिस्तान पहुँचते हैं और दुर्गम रास्तों को पार कर माता का दर्शन करते हैं। कहा जाता है कि हिंगलाज माता की यात्रा कश्मीर की अमरनाथ यात्रा से भी कठिन है। इस मंदिर की देखरेख मुस्लिम करते हैं।

मंदिर तक के रास्ते में 1,000 फुट ऊँचे पहाड़, दूर तक फैला सुनसान रेगिस्तान, जंगली जानवर से भरे घने जंगल और 300 फीट ऊँचा मड ज्वालामुखी पड़ता है। इन सबको पार करने के बाद भी डाकुओं और आतंकियों का खतरा बना रहता है। इसी कारण वहाँ जाने वाले लोग 40-50 का समूह बनाकर जाते हैं। अकेले इस मंदिर की यात्रा करना मना है।

बलूचिस्तान के लसबेला (Lasbela) कस्बे में किर्थार पहाड़ों की तलहटी में हिंगोल नदी (Hingol River) के किनारे स्थित इस मंदिर को लेकर ना सिर्फ हिंदुओं में बल्कि पाकिस्तान के मुस्लिमों में भी असीम श्रद्धा है। यहाँ के हिंदू के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी माता हिंगलाज के दर्शन के लिए जाते हैं और उनकी पूजा करते हैं।

कौन हैं हिंगलाज माता?

हिंगलाज माता को माँ भगवती का रूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा के पुत्र दक्ष प्रजापति अपनी बेटी सती (माँ पार्वती का पूर्व रूप) के भगवान शंकर से विवाह करने पर खुश नहीं थे। इसलिए, एक बार जब उन्होंने यज्ञ किया तो सबको बुलाया, लेकिन भगवान शंकर को नहीं बुलाए।

भगवान शंकर के मना करने पर भी माता सती नहीं मानीं और वहाँ चली गईं। वहाँ सती ने अपने पिता के मुख से अपने पति के लिए तिरस्कार सुनकर वहाँ लज्जित और क्रोधित होकर यज्ञ के हवनकुंड में कूद कर प्राण त्याग दिए।

जब भगवान शिव को इसका पता चला तो वे क्रोधित हो उठे। उन्होंने अपनी जटा का बाल उठाकर भूमि पर फेंका, जिससे वीरभद्र पैदा हुए। वीरभद्र ने दक्ष प्रजापति के यहाँ जाकर उनका सिर काट दिया। इसके पहले भगवान शिव एक बार ब्रह्मा पर भी क्रोधित हो चुके थे। उनके क्रोध से उत्पन्न कालभैरव ने ब्रह्मा का पाँचवा सिर काटकर काशी में विसर्जित कर दिया था।

क्रोधित भगवान शिव भी वहाँ पहुँचे और माता सती के अर्धजले शव को कंधे पर लादकर तांडव करने लगे। भगवान शिव के इस रूप के देखकर सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि शिवजी को शांत करने का प्रयत्न करने लगे, लेकिन वे शांत नहीं हुए। अंत में देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की और भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए।

माता सती का शरीर 51 टुकड़ों में कटकर अलग-जगहों पर गिरा। जिन-जिन जगहों पर माता सती के शरीर के अंग गिरे वे शक्तिपीठ कहलाएँ। कहा जाता है कि हिंगलाज में माता सती का सिर गिरा था। इसलिए इस शक्तिपीठ को सबसे चमत्कारिक माना जाता है।

कैसे नाम पड़ा हिंगलाज?

हिंगलाज माता का नाम हिंगलाज कैसे पड़ा, इसको लेकर एक कहानी है। किवदंतियों के अनुसार, यहाँ पर कभी हिंगोल नाम का एक राज हुआ करता था। इसका राजा हंगोल था। हंगोल बहुत ही बहादुर और न्यायप्रिय राजा था, लेकिन उसके दरबारी उसे पसंद नहीं करते थे।

राज्य पर कब्जा करने के लिए मंत्री ने राजा को कई तरह के व्यसन के लत लगा दिए। राजा की हालत को देखकर राज के लोग परेशान हो गए। उन्होंने देवी से राजा को सुधारने की प्रार्थना की। माता ने उनकी प्रार्थना सुन ली। तभी से वह हिंगलाज माता कहलाने लगीं।

हिंगलाज माता आज भी आती हैं सरोवर में स्नान के लिए

हिंगोल नदी के किनारे चंद्रकूप पहाड़ के ऊपर एक गुफा में हिंगलाज का मंदिर स्थित है। इस मंदिर में का स्वरूप पिंडी रूप में है। वहीं, बगल में भगवान शिव यहाँ भीमलोचन भैरव रूप में प्रतिष्ठित हैं। मंदिर के परिसर में भगवान गणेश और कालिका माता की प्रतिमा लगी हुई हैं। इसमें किसी तरह का दरवाजा भी नहीं लगा रहता है।

कहा जाता है माता का स्वरूप स्वयंभू है। यह खुद ही गुफा में प्रकट हुआ है। इस शक्ति पीठ का वर्णन शिव पुराण, देवी भगवती पुराण और कलिका पुराण आदि में ग्रंथों में मिलता है। इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर 2000 वर्ष से भी पुराना है।

कहा जाता है कि जहाँ माता का पिंड स्थित है, वहाँ देखकर ऐसा लगता है, जैसे जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी का दरबार हो। इस मंदिर को अत्यंत चमत्कारिक माना जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि जो इस मंदिर का एक बार दर्शन कर लेता है उसे पूर्वजन्म के क ष्टों से मुक्ति मिल जाती है।

इस मंदिर के साथ ही एक सरोवर है। इसे गुरु गोरखनाथ के सरोवर के नाम से जाना जाता है। लोगों के बीच मान्यता है कि इस सरोवर में माता हिंगलाज आज भी सुबह-सुबह स्नान के लिए आती हैं। इसके अलावा, यहाँ ब्रह्मकुंड और तीर्थकुंड भी हैं।

भगवान राम से लेकर गोरखनाथ तक कर चुके हैं पूजा

कहा जाता है कि भगवान श्रीराम भी यहाँ आकर माता हिंगलाज की पूजा-अर्चना कर चुके हैं। इसके अलावा महर्षि परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि भी यहाँ कठोर तपस्या कर चुके हैं। इसके अलावा नाथ पंथ के संस्थापक और भगवान शंकर के रूप कहने जाने वाले गुरु गोरखनाथ ही यहाँ तपस्या कर चुके हैं।

इसके अलावा, सिखों के प्रथम गुुरु नानकदेव, दादा मखान जैसे संतों ने आध्यात्मिक शक्ति के लिए यहाँ पूजा-अर्चना की है। इसके अलावा भारत के प्रधानमंत्री रह चुके राजीव गाँधी और उप-प्रधानमंत्री रह चुके लालकृष्ण आडवाणी भी इस मंदिर में आ चुके हैं।

हिंगलाज मंदिर जाने से पहले लेनी पड़ती है दो शपथ

2007 में चीन द्वारा रोड बनवाने से पहले तक हिंगलाज मंदिर पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को कम-से-कम 200 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। इसमें 2 से 3 महीने तक लग जाते थे। अब दर्शनार्थियों को त्री 4 पड़ाव में 55 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर हिंगलाज मंदिर पहुँचते हैं। 

कहा जाता है कि हिंगलाज माता के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा शुरू करने से पहले 2 शपथ लेनी पड़ती है। पहली शपथ यह कि माता के दर्शन करके वापस लौटने तक संन्यास ग्रहण करना होगा। वहीं, दूसरा शपथ ये होता है कि पूरी यात्रा में कोई भी यात्री अपने साथी यात्रियों को अपनी सुराही का पानी नहीं देगा। भले ही वह रास्ते में प्यास से तड़प कर मर जाए।

कहा जाता है कि ये दोनों शपथ हिंगलाज माता तक पहुँचने के लिए भक्तों की परीक्षा लेने की प्राचीन परंपरा है और यह अभी भी चली आ रही है। इन दोनों शपथों को पूरा नहीं करने वाले श्रद्धालु की यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती है।

इसके साथ ही इस मंदिर पर पहुँचने वाले ऐसे श्रद्धालु, जो विशेष मनोरथ की पूर्ति के लिए मंदिर आते हैं, उन्हें 10 फीट लंबे अग्नि से धधकते ‘माता की चूल’ से होकर गुजरते हैं। कहा जाता है कि इस चूल से गुजरने के बाद हर हाल में उनकी मनोकामना पूरी होती है।

मान्यता है कि एक हिंदू भले ही चारों धाम की यात्रा कर ले, काशी-अयोध्या में स्नान और पूजा-पाठ कर ले, लेकिन जब तक माता हिंगलाज का दर्शन नहीं करता, तब तक सब व्यर्थ है।

मुस्लिमों का ‘नानी मंदिर’

हिंगलाज मंदिर हिंदू के साथ-साथ मुस्लिम के लोगों के लिए भी पूजनीय है। आज भी इस मंदिर में मुस्लिमों की गहरी श्रद्धा है। मंदिर में जाकर पता नहीं चलता कि कौन हिंदू है और कौन मुस्लिम। कई बार पुजारी और सेवक नमाजी टोपी पहने दिखते हैं तो मुस्लिम पूजा करते दिख जाते हैं।

बलूचिस्तान और सिंध के मुस्लिम सहित पाकिस्तान के मुस्लिम हिंगलाज मंदिर को ‘नानी मंदिर’, ‘नानी पीर’ या नानी का ‘हज’ के तौर पर मानते हैं। पाकिस्तान के अलावा अफगानिस्तान, मिस्र और ईरान के मुस्लिम भी यहाँ पूजा करने के लिए आते हैं। वे माता हिंगलाज को नानी के तौर पर लाल फूल, इस्त्र और अगरबत्ती चढ़ाते हैं और मनोकामना पूरी करने के लिए प्रार्थना करते हैं।

यही नहीं, इस मंदिर की देखरेख और यहाँ की व्यवस्था भी स्थानीय मुस्लिम देखते और करते हैं। पाकिस्तान में जो स्त्रियाँ यहाँ दर्शन के आती हैं, उन्हें ‘हाजियानी’ कहा जाता है और समाज में बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

कई बार मंदिर पर हमला

मुस्लिम आक्रमणकारियों ने भारत (अब पाकिस्तान सहित) के मंदिरों को नष्ट करने की तरह ही इस मंदिर को भी नष्ट करने की कोशिश की थी। हालाँकि, हर बार स्थानीय हिंदू और मुस्लिम इसे बचाने के लिए मिलकर साथ-साथ खड़े हुए और लड़े।

कहा जाता है कि भारत के विभाजन के बाद धार्मिक उन्माद से पीड़ित कुछ धर्मांधों ने इसे तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वे हवा में लटक गए और मंदिर का नुकसान नहीं पहुँचा पाए। इसके बाद से इसे आतंकी भी इस मंदिर की ओर नहीं देखते।

भारत में तनोट माता के रूप में हिंगलाज भवानी

हिंगलाज माता का दूसरा स्वरूप भारत में तनोट माता के रूप में स्थित है। तनोट माता का मंदिर राजस्थान के जैसलमेर जिला से करीब 130 किलोमीटर दूर पाकिस्तान सीमा पर स्थित है।1965 के भारत-पाकिस्तान की लड़ाई के दौरान यह मंदिर चर्चा में आया।

कहा जाता है कि पाकिस्तान ने इस इलाके में भारत पर 3,000 बम फेंके, लेकिन इस मंदिर को खरोंच तक नहीं आई। कहा जाता है कि इस मंदिर के आसपास 500 बम गिरे, जो कभी फटे ही नहीं। आज भी ये बम मंदिर के संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए हैं।

भारत के अलावा विदेशों में हैं शक्तिपीठ

हिंदुओं के 51 शक्तिपीठों में 10 शक्तिपीठ विदेशों में हैं। इनमें दो शक्तिपीठ पाकिस्तान में, 4 बांग्लादेश में, 2 नेपाल में, एक श्रीलंका में और एक शक्तिपीठ तिब्बत में (चीन) हैं। वहीं, 42 शक्तिपीठ भारत में हैं।

पाकिस्तान में हिंगलाज शक्तिपीठ एवं शिवहरकराय शक्तिपीठ (कराची), तिब्‍बत में मानस शक्तिपीठ, श्रीलंका में लंका शक्तिपीठ स्थित हैं। वहीं, नेपाल में गण्डकी शक्तिपीठ और गुह्येश्वरी शक्तिपीठ हैं। बांग्लादेश में सुगंध शक्तिपीठ, करतोयाघाट शक्तिपीठ, चट्टल शक्तिपीठ और यशोर शक्तिपीठ स्थित हैं। इन शक्तिपीठों पर हर साल हजारों श्रद्धालु माता का दर्शन करने के लिए जाते हैं।

CM योगी को बम से उड़ाने की धमकी, यूपी पुलिस ने राजस्थान से सरफराज को दबोचा: चिट्ठी में लिखा था – ‘औकात याद दिला देंगे’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले सरफराज को राजस्थान के भरतपुर से गिरफ्तार किया गया है। यूपी पुलिस ने जुरहरा थाना क्षेत्र के सतपुरा गाँव से उसे दबोचने में कामयाबी पाई। उसका अब्बा रत्ती खान इसी इलाके में एक झोलाछाप डॉक्टर है। सरफराज शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। उसने शाहिद खान के नाम से धमकी दी थी। यूपी पुलिस के व्हाट्सएप्प नंबर पर उसने मैसेज कर के ये धमकी दी थी।

उसने दावा किया था कि वो सीएम योगी को 3 दिनों में बम से उड़ा देगा। लखनऊ की साइबर सेल की पुलिस ने ये गिरफ़्तारी की। नंबर के आधार पर उसे ट्रेस किया गया। वो यूपी से हरियाणा होता हुआ जुरहरा बॉर्डर पर पहुँचा और फिर अपने गाँव सतपुरा आ गया। भरतपुर पुलिस का कहना है कि उन्हें इस गिरफ़्तारी को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली है। लखनऊ के आलमबाग में रहने वाले देवेंद्र तिवारी के घर उन्हें और सीएम योगी की हत्या की धमकी भरा पत्र भी मिला था।

देवेंद्र ने अवैध बूचड़खानों के विरुद्ध अदालत में जनहित याचिका दायर कर रखी है। देवेंद्र तिवारी के घर एक लावारिश बैग मिला था, जिसमें ये चिट्ठी थी। हिंदूवादी नेता के घर मिले इस पत्र में उन्हें और सीएम योगी को बम से उड़ाने के साथ-साथ ‘औकात याद दिलाने’ की धमकी देते हुए लिखा गया था कि अवैध बूचड़खाने बंद होने से मुस्लिमों के पेट पर लात पड़ी है। इसके बाद सलमान सिद्दीकी नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था।

सुशांत गोल्फ सिटी थाने में सीएम योगी को धमकी दिए जाने के मामले में FIR दर्ज की गई थी। उत्तर प्रदेश में ATS फ़िलहाल सतर्क है और स्वतंत्रता दिवस के आलोक में कट्टरपंथियों पर नजर रखी जा रही है। इसी क्रम में सहारनपुर से नदीम और फतेहपुर से हबीबुल इस्लाम उर्फ़ सैफुल्ला नामक आतंकियों को भी गिरफ्तार किया गया है। 15 अगस्त को सीएम योगी झंडोत्तोलन भी करेंगे। यूपी में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान भी खासा सफल हुआ है।

कॉन्ग्रेस ने ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बता कर लगाए थे टीपू सुल्तान के पोस्टर्स, लोगों ने फाड़ डाला: तोड़ा था कालीकट मंदिर, लड़कियों को फ़ौज में बाँटता था

कर्नाटक के हडसन सर्किल में शनिवार (13 अगस्त 2022) को कॉन्ग्रेस ने अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ इस्लामी आक्रांता टीपू सुल्तान के पोस्टर सड़क पर लगाए थे। वे यहाँ स्वतंत्रता दिवस के मौके पर फ्रीडम मार्च करने वाले थे। हालाँकि, कुछ लोगों ने इस मार्च से पहले टीपू सुल्तान के पोस्टरों को फाड़ दिया। जब कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता सुबह हडसन सर्किल पहुँचे, तो उन्हें पोस्टर फटे मिले, जिसे देख वह काफी नाराज हो गए।

इस घटना के बाद कॉन्ग्रेस के राज्य प्रमुख डीके शिवकुमार ने घटनास्थल का दौरा किया और टीपू सुल्तान के फटे पोस्टर देख अपना दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा, “राज्य में कोई अशांति फैलाने की कोशिशें कर रहा है। वह लोग कॉन्ग्रेस के फ्रीडम मार्च को नहीं पचा पा रहे। इस तरह पोस्टर को फाड़ना महान स्वतंत्रता सेनानी का अपमान है।”

बता दें कि जिस टीपू सुल्तान को कॉन्ग्रेस स्वतंत्रता सेनानी बताने में जुटी है उसकी क्रूरता इतिहास के पन्नों में साफ दर्ज हैं। कॉन्ग्रेस हमेशा टीपू का नाम ले लेकर चुनावी राजनीति करने की कोशिश करती है लेकिन क्या आप जानते हैं दूसरा पक्ष उसका विरोध क्यों करता है?

हिंदुओं पर अत्याचार के लिए कुख्यात टीपू सुल्तान

दरअसल टीपू सुल्तान को लेकर किताबों में ये बात कही जाती रही हैं कि उसने ब्राह्मणों और राजाओं की बेटियों को अपहरण करके उन्हें इस्लाम सिखवाने के लिए कैद करवा दिया था। उन महिलाओं को ये तक नहीं पता होता कि बाहर के जीवन में क्या चल रहा है और जीवन को कैसे जीते हैं। उसके हरम में 601 औरतें थी। इनमें 333 उसकी और 268 उसके अब्बा की थीं।

ईसाइयों पर भी टीपू सुल्तान आए दिन अत्याचार करता था। उसने हजारों ईसाईयों को कई वर्षों तक बंधक बना कर प्रताड़ित किया था। ‘Moon-o-theism, Volume II‘ में योएल नटन लिखते हैं कि एक बार तो उसने हजारों ईसाईयों को 338 किलोमीटर तक चलवाया, जिसमें 6 सप्ताह लगे। कई बीच में ही मर गए। अंत में उनमें से कई महिलाओं और लड़कियों को उसकी फौज में बाँटा गया।

19वीं सदी में ब्रिटिश सरकार के अधिकारी और लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब मालाबार मैनुएल में भी बताया है कि कैसे टीपू सुल्तान ने 30 हजार सैनिकों के साथ कालीकट में मंदिर और चर्चों को तुड़वा दिया था। हिंदुओं और ईसाइयों की मुस्लिमों से शादी करवाई थी।

इतना ही नहीं, ये भी कहा जाता है कि टीपू सुल्तान के राज्य में तीन हजार ब्राह्मणों ने इसलिए आत्महत्या कर ली थी क्योंकि वो उन्हें जबरन मुस्लिम बनाना चाहता था। टीपू पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने भारत में तबाही मचाने के लिए अफगानिस्तान के सुल्तान जमान शाह को बुलाया था। वह हिंदुओं के गाँव, महिलाओं और बच्चों सबको मारता था। लाखों हिंदू उसके अत्याचार का शिकार हो चुके हैं।

नदीम के बाद अब जैश आतंकी हबीबुल इस्लाम को यूपी ATS ने दबोचा: वर्चुअल ID बनाने में एक्सपर्ट, Pak में होने वाली थी ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नदीम की गिरफ़्तारी के बाद अब ATS ने कानपुर से हबीबुल इस्लाम उर्फ़ सैफुल्ला नाम के एक आतंकी को दबोचने में कामयाबी पाई है। नदीम से पूछताछ के आधार पर ही उसे गिरफ्तार किया गया। वो पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद से संपर्क में था। वो फर्जी वर्चुअल आईडी बनाने में एक्सपर्ट है। नदीम के साथ मिल कर वो अब तक 50 से अधिक ऐसी फर्जी आईडी बना चुका है। पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी आतंकियों की इस मामले में वो मदद करता था।

उत्तर प्रदेश ATS ने बताया कि मौजूदा संवेदनशील स्थिति को देखते हुए वो लगातार कट्टरपंथी तत्वों की निगरानी कर रहा है। इसी क्रम में शनिवार (13 अगस्त, 2022) को नदीम की गिरफ़्तारी हुई थी। उससे पूछताछ के बाद ही हबीबुल इस्लाम उर्फ़ सैफुल्ला को फतेहपुर से कानपुर जाँच के लिए लाया गया था। उसने कबूल किया है कि वो नदीम को जानता था और दोनों जैश से जुड़े हुए हैं। टेलीग्राम, व्हाट्सएप्प और फेसबुक के जरिए ये पाकिस्तानी और अन्य विदेशी आतंकियों से संपर्क में रहते थे।

हबीबुल इस्लाम उर्फ़ सैफुल्ला विभिन्न ग्रुप्स में वर्चुअल आईडी के माध्यम से ही जुड़ा हुआ है। इन ग्रुप्स में जिहादी सन्देश भेजे जाते हैं। वो अन्य लोगों को भी ये जिहादी सामग्रियाँ भेज कर उन्हें आतंकी बनने के लिए उकसाता था। पाकिस्तानी हैंडलर्स से उसे आदेश मिला था कि वो जिहादी ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान आए और फिर वहाँ से भारत में लौट कर आतंक फैलाए। उसके पास से एक मोबाईल फोन और एक सिम कार्ड बरामद हुआ है।

साथ ही उसके पास से एक चाकू भी मिला है, जो बटन द्वारा झटके में खुलता है। उससे पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 19 वर्षीय हबीबुल इस्लाम उर्फ़ सैफुल्ला फतेहपुर के सैय्यदबाड़ा का रहने वाला है। मूल रूप से वो बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित रामगढ़वा के अधकपरिया गाँव का रहने वाला है। उसका दोस्त आतंकी नदीम दसवीं पास है, लेकिन ये दोनों तकनीकी रूप से एक्सपर्ट हैं। नदीम को देख कर कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कि वो फोन में क्या कर रहा है।

नूपुर शर्मा के कत्ल की प्लानिंग कर रहे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार जैश आतंकी नदीम की रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। आतंकी रात में जाग कर नूपुर शर्मा के हत्या की रूपरेखा बना रहा था। इसी के साथ आतंकी नदीम द्वारा बचपन में मदरसे में पढ़ाई करने की जानकारी सामने आ रही है। मदरसा नदीम के घर के आस-पास ही है, जिसका नाम ‘मोहम्मदिया अरबिया मदरसा’ है। आतंकी के अम्मी-अब्बू ने खुद को बीमार बताते हुए किसी से बात करने से मना कर दिया है।

‘हम Pak में रह लेंगे, हमारे भगवान को भारत पहुँचा दो’: जब पेड़ से लटक रही थीं हिंदुओं की लाश, तब प्लेन से लाई गई श्रीजी की मूर्ति

भारत की आजादी को 75 साल होने के बाद ऐसी तमाम कहानियाँ एक बार फिर सामने आनी लगी हैं जिन्हें 1947 के दौर में लोगों ने जिया। ऐसे तमाम लोग अब भी जीवित हैं जो उस समय पाकिस्तान को छोड़-छोड़ भारत दौड़े आए थे। उन्हें न तो अपने मकान की चिंता थी और न ही जमीन, जायदाद की। उनके मन में बस एक भाव था कि वो यदि रहना चाहते हैं तो सिर्फ उस भारत में, जहाँ उनके धर्म की, उनके देवी-देवताओं की इज्जत हो।

यकीन करना शायद मुश्किल होगा लेकिन उस समय जब पाकिस्तान में हिंदुओं को नाम पूछ-पूछकर उन्हें काटा जा रहा था, उस दौरान लोग अपनी पेटियों में छिपाकर अपने भगवान की मूर्ति भारत ला रहे थे और कुछ लोग तो अखंड लौ ही ट्रेन में लेकर घुस गए थे। उनकी श्रद्धा और हिम्मत ही कहिए कि आज श्रीजी भगवान का मंदिर भारत में है और दुर्गापुरा के श्री झूलेलाल महाराज मंदिर में आज भी पाकिस्तान के गिदुबंदर से लाई गई अखंड लौ जलती है।

पेटियों में सुरक्षित भारत लाए गए श्रीजी

दैनिक भास्कर में प्रकाशित समीर शर्मा के लेख में हाल में ऐसे ही लोगों के बारे में बताया गया है। इनमें एक मनोहर लाल सिंघवी भी हैं। उन्होंने बताया कि जब पाकिस्तान में हालात बिगड़े उस समय वो 11 साल के थे और दंगे-फसाद देख पाकिस्तान छोड़ने की तैयारी बना रहे थे। उन्हें और उनके समाज के लोगों को पता चल चुका था कि वहाँ श्रीजी भगवान का मान बरकरार नहीं रह पाएग, इसलिए उन लोगों ने श्रीजी भगवान को अपने साथ लिया। इसके अलावा संगमरमर से बनी अन्य प्रतिमाओं को भी लकड़ी की पेटियों में भरा और मुंबई के लिए प्लेन बुक किया।

आज 86 साल के हो चुके मनोहरलाल सिंघवी बताते हैं कि 1947 में भारत लौटते समय वह छिपते-छिपाते मुल्तान के एरोड्रम तक आए थे। वहाँ पेड़ों पर लोगों को मारकर लटकाया गया था। उनमें कुछ दम तोड़ चुके थे और कुछ तड़प रहे थे। ये सारे भयावह दृश्य देखते-देखते सब लोग एरोड्रम पहुँचे थे। वहाँ प्लेन पहले से बुक था। लेकिन वो छोटा था।

यात्रियों की संख्या और सामान देख पायलट ने कहा कि इतने सामान के साथ प्लेन नहीं उड़ पाएगा। पहले लोगों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन जब पायलट ने नहीं सुनी तो कई हिंदू प्लेन से उतर गए और बोले- “हमारी चिंता मत करो, पेटियों को भारत पहुँचा दो, हम यही रह जाएँगे।” यात्रियों की बात सुन पायलट भी हैरान था। उसे हालात मालूम थे। उसने लोगों की बात सुन कहा कि सब लोग बैठ जाएँ, वो प्लेन उड़ाने की कोशिश करेगा। 

सब लोग जहाज में चढ़े और एक सफल उड़ान भरी गई। अंत में प्लेन जोधपुर उतरा। पायलट ने तब जाकर सवाल किया कि आखिर इन पेटियों में ऐसा भी क्या था। उसने इतना हल्का जहाज कभी नहीं उड़ाया। हिंदुओं ने जवाब दिया- “इसमें तो बस हमारे भगवान हैं।” पायलट हक्का-बक्का रह गया। उसने पेटियों के हाथ जोड़े और वहाँ से चला गया।

आज श्रीजी की पूजा अर्चना करने वाले लोग उन हिंदुओं का धन्यवाद करते नहीं थकते जिनकी वजह से भारत में श्रीजी आ पाए। श्रीजी के मंदिर के लिए समाज के लोगों ने घर-घर गुल्लक रखवाए और जैसे ही पैसा इकट्ठा हुआ, वैसे ही उनका मंदिर बनवाया गया। श्रीजी के मंदिर के लिए अन्य कोई सहायता बाहर से नहीं ली गई।

जब ‘अखंड लौ’ पाकिस्तान से भारत ट्रेन में आई

इसी तरह दुर्गापुरा के मंदिर में जलने वाली अखंड लौ की भी कहानी है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के हैदराबाद में रहने वाले बाबा जेठगिल और उनकी पत्नी पपूर बाई को जब भारत आना हुआ तो उनको डर था कि उनके भारत जाते ही झूलेलाल मंदिर की अखंड लौ बुझ जाएगी।

उनकी इसी चिंता ने उन्हें हिम्मत दी और वह जलती लौ को रेलवे स्टेशन लेकर पहुँच गए। पूरी गाड़ी पर दंगाइयों का खतरा था। चलती ट्रेन से हिंदू फेंके जा रहे थे। फिर भी उस लौ को बचाने हिंदू एकजुट हुए दंगाइयों को ढकेल ट्रेन का दरवाजा बंद कर लिया गया। 

इसके बाद लाहौर से ट्रेन निकली और भारत तक आई। यहाँ लंबे समय बाबा जेठगिल और उनकी पत्नी दिल्ली-जयपुर कैंपों में रहे। वहाँ भी उन्होंने सुनिश्चित किया कि वो खुद सही रहें या न रहें लेकिन लौ जलती रहे। जब हालात सुधरे तो उन्होंने दुर्गापुर मंदिर बनवाया और वो लौ वहाँ प्रतिष्ठित हुई। आज भी यहाँ रोज धूप आरती होती है। मंदिर में आने वाले लोग बाबा जेठगिल के साहस को सुन उन्हें प्रणाम करना नहीं भूलता।

जम्मू में तिरंगे से गाड़ियाँ साफ कर रहा था मैकेनिक उमैर अहमद, यूपी में असलम-शाहवान ने राष्ट्रध्वज को नोच कर लगाया हरा झंडा: गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर के डोडा में पुलिस ने तिरंगे का अपमान करते हुए उससे गाड़ियों को पोंछने के आरोप में एक मैकेनिक को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम उमैर अहमद है, जिसकी हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उमैर एक वर्कशॉप में काम करता है। वहीं उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में तिरंगे को नोच कर हरे रंग का झंडा लगाने के आरोप में पुलिस ने 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिरंगे से गाड़ियों को पोंछने वाले आरोपित उमैर की उम्र 25 साल है। वह डोडा के तोंडवाह इलाके में एक वर्कशॉप में काम करता है। डोडा जिले के SSP अब्दुल कयूम के मुताबिक, आरोपित पर राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत FIR दर्ज हुई है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

तिरंगा नोच कर हरा झंडा लगाया

दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में पुलिस ने असलम और शाहवान नाम के 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर राष्ट्रध्वज को नोच कर उसकी जगह पर हरे रंग का झंडा लगाने का आरोप है। बहराइच के एडिशनल SP अशोक कुमार ने बताया, “खैरी घाट थाना क्षेत्र में एक सरकारी पानी की टंकी से राष्ट्रीय ध्‍वज को उतार कर हरा झंडा लगाने की घटना सामने आई है। तिरंगा उतार कर हरा झंडा लगाने के आरोप में पुलिस ने शनिवार को दो युवकों को गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले 12 अगस्त, 2022 को उत्तर प्रदेश की कुशीनगर पुलिस ने अपने घर पर पाकिस्तान का झंडा फहराने वाले सलमान को गिरफ्तार किया था। सलमान की छत पर लगे पाकिस्तानी झंडे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जबकि 9-10 अगस्त की रात को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की औराई पंचायत के पूर्व मुखिया पर तिरंगे में अशोक चक्र के बजाए चाँद-तारे की फोटो लगाने का आरोप भाजपा विधायक ने लगाया था, जिसके बाद 4 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। हालाँकि, पुलिस ने आरोपितों का नाम बताने से इनकार कर दिया था।