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कभी पिता के लिए बेचा पान, अब CWG में भारत को दिलाया पहला मेडल: संकेत महादेव ने वेटलिफ्टिंग में जीती ‘चाँदी’, चोटिल होने के कारण ‘गोल्ड’ से चूके

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत के हिस्से पहला पदक आ गया है। भारत के संकेत महादेव सरगर ने 55kg की वेथ लिफ्टिंग में देश को रजत पदक दिलाया। बर्मिंघम में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टर संकेत ने पहले प्रयास में 113 किग्रा भार उठाया और दूसरे राउंड में 135 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया।

संकेत ने दूसरे राउंड में चोटिल होने के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की। इस राउंड में उन्होंने दो बार 139 किग्रा उठाने का प्रयास किया जिसकी वजह से उन्हें चोट लग गई।

उन्होंने दो राउंड के 6 प्रयासों में अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए कुल 248 किलोग्राम का वजन उठाया और सिल्वर पदक को अपने नाम किया। वहीं मलेशिया के अनीक कासदान ने 249 किलोग्राम का भार उठाकर स्वर्ण पदक को अपने नाम किया जबकि श्रीलंका के दिलांका कुमारा ने 225 किलोग्राम उठाकर कास्य पदक जीता। 

बता दें कि भारत के संकेत महादेव ने इससे पहले पिछले साल दिसंबर में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में नेशनल रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल को जीता था। इसके अलावा फरवरी में सिंगापुर वेटलिफ्टिंग इंटरनेशनल में 256 किलोग्राम उठाकर कॉमनवेल्थ और राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर जीता है। उनकी इस कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुभकामनाएँ दी हैं।

उल्लेखनीय है कि संकेत महादेव सरगर महाराष्ट्र के सांगली के रहने वाले हैं। उनके पिता पान की दुकान चलाते हैं और खुद संकेत भी इसमें उनकी मदद करते हैं। संकेत ने हाल ही में कहा था कि अगर वह स्वर्ण जीतते हैं तो अपने पिता की मदद करेंगे। उन्होंने काफी दुख उठाए हैं। इसलिए संकेत उन्हें खुशियाँ देना चाहते हैं।

जिसके घरों से अब तक मिल चुका है ₹50 करोड़ कैश और 5 किलो सोना, जर्जर घर उसकी माँ का ठिकाना: अकेली रहती हैं अर्पिता मुखर्जी की जन्मदाता

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इन खुलासों के केंद्र में अर्पिता मुखर्जी भी हैं। वे ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री रहे पार्थ चटर्जी की करीबी हैं। अर्पिता के घरों पर छापेमारी में अब तक 50 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश और 5 किलो सोना मिलने की बात सामने आ चुकी है। लेकिन अर्पिता मुखर्जी का पुश्तैनी घर जर्जर हाल में है। इस घर में उनकी माँ मिनाती मुखर्जी अकेली रहती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अर्पिता का पुश्तैनी घर उत्तर 24 परगना जिले के बलघेरिया के देवनपाड़ा इलाके में स्थित है। ये घर कई जगह से टूट रहा है। मकान करीब 50 साल पुराना है। अर्पिता की माँ की तबीयत खराब रहती है। उनकी छोटी बहन की शादी हो चुकी है। माँ की देखभाल के लिए अर्पिता ने दो लोगों को वहाँ पर रखा हुआ है। खुद भी कभी-कभार माँ से मिलने के लिए आया करती रही हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अर्पिता की माँ ने बताया कि वो आती है और दवाइयाँ दे देती है। लेकिन कभी भी पैसे नहीं देती थी। उन्होंने बताया कि कई साल पहले ही अर्पिता ने घर छोड़ दिया था। उसने पहले सीरियल और फिर फिल्मों में काम किया। लेकिन, अपने पास इतने पैसे होने का जिक्र उसने कभी भी माँ से नहीं किया।

अर्पिता की माँ कहती हैं, “अगर उसने मेरी बात मानी होती तो उसकी शादी करा देती। उसके पिता सरकारी नौकरी में थे। उनकी जगह उसे ये सर्विस भी मिल सकती थी। लेकिन उसकी इन सब में कोई दिलचस्पी नहीं थी।” अर्पिता के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा की जा रही कार्रवाइयों को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें इसके बारे में अखबारों के जरिए पता चला। मिनाती मुखर्जी ने इसे कानूनी मुद्दा बताते हुए पैसे की जानकारी होने से इनकार किया।

अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से अब तक मिले 50 करोड़ रुपए

अर्पिता मुखर्जी के घरों पर छापे से अब तक तकरीबन 50 करोड़ नकदी और 5 किलो सोना बरामद होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही अर्पिता के बेलघरिया फ्लैट की तलाशी के दौरान अधिकारियों को दो सेक्स टॉय भी मिले थे। अर्पिता मुखर्जी का दावा है कि उनके फ्लैट से प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जो पैसा मिला है, वह पार्थ चटर्जी का ही है। ईडी से पूछताछ में एक्ट्रेस ने कहा कि चटर्जी के आदमी उनके यहाँ पैसे लाकर रखते थे। कभी-कभी चटर्जी खुद भी आते थे और कमरों में रखे पैसों की जाँच करते थे। अर्पिता का दावा है कि उन्हें उस कमरे में जाने की अनुमति नहीं थी, जहाँ पैसे रखे जाते थे।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार का खुमार उतरा, अब पुराने स्टाइल में ही बिकेगी शराबः नई एक्साइज पॉलिसी की CBI जाँच का LG ने दिया था आदेश

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार की नई आबकारी नीति 2021-22 की जगह अब पुरानी शराब नीति लागू होती है। दिल्ली सरकार ने यह फैसला लिया है। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार (30 जुलाई 2022) को कहा कि नई आबकारी नीति आने तक 1 अगस्त से केवल सरकार द्वारा संचालित शराब की दुकानों से ही शराब की बिक्री होगी।

पुरानी आबकारी व्यवस्था को लागू करने की घोषणा करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा, “हम भ्रष्टाचार को रोकने के लिए नई शराब नीति लाए। इससे पहले सरकार को 850 शराब की दुकानों से करीब 6,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता था। नई नीति के बाद हमारी सरकार को उन्हीं दुकानों से 9,000 करोड़ रुपए से अधिक मिले।”

मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “वे (भाजपा) दुकानदारों और अधिकारियों को ED और CBI की धमका रहे हैं। वे चाहते हैं कि दिल्ली में कानूनी शराब की दुकानें बंद हों और अवैध दुकानों से पैसा कमाया जाए। हमने नई शराब नीति को रोकने का फैसला किया है और सरकारी शराब की दुकानें खोलने का आदेश दिया है।”

उन्होंने कहा कि इस ट्रांजिशन के दौरान किसी तरह की अराजकता ना हो, इसके लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिया गा है। बता दें कि राजधानी में इस समय 468 निजी शराब की दुकानें हैं और इनके बंद होने के बाद राजधानी में शराब की उपलब्धता पर बड़ा संकट पैदा हो गया है।

उप-मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा गुजरात की तरह दिल्ली में भी दुकानदारों और अधिकारियों को धमकाकर नकली और ऑफ-ड्यूटी शराब की बिक्री को बढ़ावा देना चाहती है और उससे पैसे कमाना चाहती है, लेकिन वे ऐसा नहीं होने देंगे।

उन्होंने कहा कि नई नीति से पहले सरकारी दुकानों में शराब बेची जाती थीं, लेकिन निजी दुकानें भी थीं। इन निजी दुकानों के लाइसेंस अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को दे दिए जाते थे। इसमें खूब भ्रष्टाचार होता था। इस भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ही नई आबकारी नीति लागू की गई थी।

बता दें कि कुछ दिन पहले दिल्ली एलजी वीके सक्सेना ने नई शराब नीति में अनियमितताओं को लेकर सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे। दिल्ली सरकार ने इसके खिलाफ खूब हल्ला बोल किया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने अंतत: इसे वापस लेने का फैसला लिया है।

‘मुँह खोला तो तेरा रेप होगा’: संजय राउत का ऑडियो वायरल; महिला मराठी प्रोड्यूसर से गाली-गलौच का इल्जाम, हत्या की धमकी

शिवसेना नेता संजय राउत एक बार फिर से अपनी ‘अभद्र भाषा’ के चलते खबरों में आ गए हैं। कथिततौर पर मराठी फिल्मों की प्रोड्यूसर डॉ स्वप्ना पाटकर के साथ बातचीत की उनकी एक ऑडियो वायरल हुई है। इस ऑडियो में जो पुरुष है, उसकी ओर से महिला को गंदी-गंदी गाली दी जा रही है। ऑडियो में औरत से बात करते हुए “स%$ली, मादरच&^द और बहन&^%” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। 

इसके अलावा ऑडियो में आदमी कहता है, “इस कॉल को रिकॉर्ड कर, पुलिस को भेज या जो मन हो वो कर। बस तू देखती जा। प्रॉपर्टी या तो मेरे नाम कर या फिर सुजीत के नाम।”

मालूम हो कि डॉ स्वप्ना पाटकर वही महिला हैं जिन्होंने साल 2021 में संजय राउत के ऊपर गाली-गलौच करने का और उन्हें पिछले 8 साल से तंग करने का आरोप लगाया था। अब ऑपइंडिया इस ऑडियो को लेकर ये पुष्टि नहीं करता है कि जो आवाज इसमें है वो स्वप्ना पाटकर और संजय राउत की है या नहीं। लेकिन इस ऑडियो को टाइम्स नाऊ नवभारत ने भी शेयर किया है और बताया है कि 70 सेकेंड की इस ऑडियो में 27 बार गाली दी गई हैं।

ये लीक ऑडियो संजय राउत से बातचीत की है: डॉ स्वप्ना पाटकर

इसके अलावा इस ऑडियो को लेकर स्वप्ना पाटकर ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि ये उनके और संजय राउत के बीच हुई बातचीत की ऑडियो है। उन्होंने SSR वॉरियर नाम के चैनल पर अपलोड किए गए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें पिछले 18 महीनों में कई बार धमकियाँ मिली हैं और इन्हीं धमकियों के मद्देनजर उन्होंने अपनी शिकायत दी है। उन्होंने संजय राउत से जुड़े ‘पात्रा चॉल जमीन घोटाले’ मामले की जाँच में जुटे संबंधित अधिकारियों को इन धमकियों और ऑडियो क्लिप के बारे में बताया है। उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर को भी पत्र लिखा है और ईडी को भी धमकियों के बारे में बताया है।

स्वप्ना कहती हैं कि संजय की पत्नी वर्षा और उनके नाम अलीबाग में जमीन थी जिसे ईडी ने अपनी जाँच में अटैच किया। संपत्ति के दस्तावेज भी संजय राउत के करीबी सुजीत पाटकर के घर छापेमारी में मिले। लेकिन ईडी ने जब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ शुरू की तो उनको रेप और हत्या की धमकियाँ आने लगीं और उन पर दबाव बनने लगा कि वह संजय राउत का नाम वापस लें।

स्वप्ना को मिली धमकियों में भाजपा पर इल्जाम मढ़ने का बनाया जा रहा दबाव

मालूम हो कि स्वप्ना पाटकर को पिछले हफ्ते भी धमकी वाला एक पत्र मिला था जिसमें कहा गया था कि अगर उन्होंने ईडी के सामने कुछ भी कहा तो उनका रेप किया जाएगा। इस धमकी के बाद उन्होंने वकोला पुलिस में अपनी शिकायत दी थी। पत्र में स्वप्ना को कहा गया था कि वह मीडिया में बोलें कि ये सब उन्होंने भाजपा नेता किरीट सोमैय्या के कहने पर किया है।

स्वप्ना की इस शिकायत के बाद प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता किरीट सोमैय्या ने भी 30 जुलाई को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने बताया कि आज शाम 4 बजे धमकी, गाली-गलौच, ऑडियो क्लिप से जुड़ी शिकायतों के संबंध में वकोला थाने जाएँगे। उन्होंने अपने ट्वीट में पत्र शेयर किया है। इसमें लिखा है, “अगर मुँह खोला तो तेरा रेप करके थाना में खड़ी मिलेगी तू। ईडी के सामने बकबक करेगी तो मरेगी। मीडिया को बता कि सोमैय्या ने जबरदस्ती किया और आगे चुप बैठ वरना कोई नहीं बचा पाएगा।” 

स्वप्ना पाटकर और संजय राउत का विवाद

बता दें कि डॉ स्वप्ना पाटकर इससे पहले पिछले साल संजय राउत पर इल्जाम लगाने के बाद चर्चा में आई थीं। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर बताया था कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के सह-संपादक संजय राउत पिछले 8 वर्षों से अपनी पार्टी के रुतबे और सिस्टम पर पकड़ का इस्तेमाल कर न सिर्फ उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, बल्कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित कर रहे हैं। पाटकर ने बताया था कि राउत के इशारे पर पुलिस ने उन पर ‘धंधा करने’ का आरोप भी लगाया था। उन्होंने कहा था कि 2017 में खुद संजय राउत ने फोन पर धमकी दी और 2018 में कॉन्ट्रैक्ट पर आदमी रख कर उनका पीछा कराया गया। बकौल स्वप्ना, उनके सोशल मीडिया हैंडल्स को हैक कर कभी सुसाइड नोट तो कभी अश्लील सामग्रियाँ डाली गईं, लेकिन पुलिस ने साफ़ कह दिया कि संजय राउत के खिलाफ वो FIR दर्ज नहीं कर सकते।

दिल्ली में ‘लोकतंत्र बचाओ’ के नाम पर जमावड़े की फिराक में था PFI, पुलिस ने नहीं दी अनुमतिः VHP ने भी जताई थी आपत्ति

दिल्ली पुलिस ने PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) की प्रस्तावित रैली को इजाजत देने से मना कर दिया है। इस रैली को लेकर विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने आपत्ति दर्ज करवाई थी। ‘लोकतंत्र बचाओ’ (Save the Republic) नाम की यह रैली शनिवार (30 जुलाई 2022) को झंडेवालान क्षेत्र के अम्बेडकर भवन में होने वाली थी।

दिल्ली पुलिस ने इस रैली की अनुमति 27 जुलाई को ही रद्द कर दी थी। सेंट्रल दिल्ली की DCP ने PFI के महासचिव मोहम्मद इलियास को पत्र भेज कर कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक अव्यवस्थित होने की आशंका जताते हुए इस सम्मेलन की अनुमति रद्द की थी। दिल्ली पुलिस के इस आदेश को PFI की दिल्ली शाखा ने ट्वीट किया है।

29 जुलाई 2022 को विश्व हिन्दू परिषद दिल्ली प्रदेश ने भी इस कार्यक्रम के विरोध में दिल्ली पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी भेजी थी। चिट्ठी में कहा था, “30 जुलाई 2022 को दोपहर 2.30 बजे अम्बेडकर भवन रानी झाँसी रोड, करोलबाग में पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह संगठन पूरे देश में संदिग्ध गतिविधियाँ चला रहा है। देश में हुई अनेक हिंसक घटनाओं के पीछे इसका हाथ होने की जाँच अनेक राज्यों में चल रही है। स्वतंत्रता दिवस से पहले राजधानी में इस प्रकार के कार्यक्रमों से वातावरण खराब हो सकता है। आपसे निवेदन है कि इसे तुरन्त रोकना चाहिए।”

VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए इस पत्र को शेयर किया था। उन्होंने इसे देश विरोधी हरकत बताया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 7 जुलाई को तेलंगाना भाजपा ने PFI को ‘चरमपंथी समूह’ बताते हुए इस पर बैन लगाने की माँग की थी। निज़ामाबाद क्षेत्र में PFI के 4 एजेंटों की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय गृहमंत्री को भेजे गए पत्र में तेलंगाना भाजपा ने PFI पर वर्षों से मुस्लिम युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया था। कर्नाटक के मंगलुरु में हुई भाजपा युवा मोर्चा नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या में भी PFI से जुड़े चरमपंथियों का हाथ होने की संभावना जताई जा रही है।

झारखंड में मंत्री के आदेश का भी नहीं मोल, शुक्रवार को खुले सरकारी स्कूल मुस्लिमों ने बंद करवाए: रिपोर्ट में दावा- गेट पर जड़ दिया ताला

झारखंड की स्थिति का अंदाजा वहाँ के सरकारी स्कूलों की हालत से लगाया जा सकता है। मुस्लिम बहुल इलाके में रविवार की जगह स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी होने लगी और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। कई सरकारी स्कूलों के नाम में उर्दू तक जोड़ दिए गए। जब चीजें मीडिया में सामने आई तो प्रशासन हरकत में आया। बावजूद कई जगहों पर प्रशासन के आदेश को स्थानीय मुस्लिम मानने को तैयार नहीं दिख रहे।

शिक्षा मंत्री के आदेश के बावजूद पलामू जिले में शुक्रवार को मुस्लिमों ने जबरदस्ती 5 सरकारी स्कूलों को बंद करवा दिया। समझाने के बाद भी वे नहीं माने और स्कूल में ताला जड़ दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ये स्कूल पलामू के नवाबाजार और विश्रामपुर में हैं। शुक्रवार (29 जुलाई 2022) को जब स्कूल खुले तो मुस्लिम समुदाय के लोग विश्रामपुर के चार स्कूलों में पहुँच गए और जबरन बंद करवा दिया। स्कूल के शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के आदेश का हवाला दिया। उच्चाधिकारियों से बात करवाई। फिर भी स्थानीय मुस्लिम समुदाय नहीं माने।

इसी तरह से नावाबाजार में भी एक स्कूल को बंद करवा दिया गया। डिहरिया में तो मुस्लिमों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ही ताला जड़ दिया और शिक्षकों को स्कूल के बाहर ही रोक दिया। बताया जाता है कि ये इलाके मुस्लिम बहुल हैं। यहाँ के मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि वे शुक्रवार को स्कूल को नहीं खोलने दिया जाएगा। प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मणि कुमार पांडेय ने कुछ स्कूलों को जबरन बंद करवाने की बात स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि स्कूलों में रविवार को ही छुट्टी रहेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक पलामू जिले में 20 उर्दू विद्यालय हैं। लेकिन इनके अलावा गुपचुप तरीके से 49 अन्य स्कूलों में भी उर्दू जोड़कर शुक्रवार को छुट्टी शुरू कर दी गई थी। मीडिया में यह खबर सामने आने के बाद पलामू के जिला शिक्षा पदाधिकारी उपेंद्र नारायण इन स्कूलों के नाम से उर्दू हटाने और इन्हें शुक्रवार को खोलने का आदेश जारी किया था।

हिंदुओं के लिए ‘चिकन की दुकान’ खोलने के कारण प्रवीण नेट्टारू को कुल्हाड़ी से काटा? दावा- खुन्नस में थे कट्टरपंथी, हत्या से पहले कई बार धमकी

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या के पीछे एक नया एंगल सामने आया है। अनुमान लग रहे हैं कि शायद कट्टरपंथियों ने प्रवीण को मौत के घाट इसीलिए उतारा क्योंकि उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वह लोग हिंदुओं की दुकान से मीट खरीदें।

प्रवीण की ‘अक्षय फार्म फ्रेश चिकन’ नाम से यह दुकान बेल्लारे में थी। उन्होंने 9 महीने पहले ही इसे शुरू किया था। लेकिन इतने कम समय में उन्होंने अपना काम ऐसा चलाया कि आसपास के मुस्लिम दुकानदारों की नजर में वह खटकने लगे।

उनके साले ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि प्रवीण चूँकि राष्ट्रवादी थे और धर्म से जुड़े तमाम पोस्ट भी शेयर करते थे तो उनको धमकियाँ आए दिन मिलती रहती थीं। उन्होंने इस बाबत पुलिस को सूचना भी दी थी लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। हत्या से पहले भी प्रवीण को धमकियाँ मिली थीं।

बता दें कि दक्षिण कर्नाटक में एक अभियान चला हुआ था कि मुस्लिम मीट विक्रेताओं का बहिष्कार किया जाए। कथिततौर पर इस अभियान का नेतृत्व प्रवीण ही कर रहे थे। उन्होंने हिंदुओं को जागरूक करना शुरू किया था कि चिकन अगर खरीदना है तो हिंदुओं से खरीदें। वह हिंदुओं को अपनी खुद की पोल्ट्री शॉप खोलने को भी प्रेरित करते थे।

प्रवीण के साले ने बताया, “बेल्लारे में चिकन मीट का बिजनेस अधर्मियों के पास था। प्रवीण ने चिकन मीट शॉप को शुरू किया और धमकियाँ आने लगीं। उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन फिर भी वो सफल हुए। उनके प्रेरणा लेकर कई अन्य हिंदुओं ने भी जिले के अन्य जगहों पर दुकानें खोलीं।”

अब इन्हीं सब बातों के मद्देनजर लोग अनुमान लगा रहे हैं कि हो सकता है प्रवीण को इसलिए मौत के घाट उतारा गया क्योंकि एक तो प्रवीण 9 माह के कम समय में पोल्ट्री शॉप को चलाने में कामयाब हो गए थे और दूसरा उन्होंने हिंदुओं को जागरूक कर दिया था कि वो हिंदू दुकानदार से ही सामान खरीदें। 

मालूम हो कि इससे पहले प्रवीण की हत्या के पीछे उनके सोशल मीडिया पोस्ट और एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या के बदले को कारण बताया जा रहा था। हालाँकि अब ये दुकान और बिजनेस से जुड़ा एंगल सामने आया है। सोशल मीडिया यूजर्स भी प्रवीण की दुकान के पोस्ट और हत्या की खबर शेयर करके यही कयास लगा रहे हैं कि हिंदुओं के लिए खोली गई मीट शॉप की वजह से ही प्रवीण को मौत के घाट उतारा गया।

प्रवीण की हत्या में 2 गिरफ्तारियाँ

उल्लेखनीय है प्रवीण नेट्टारू को 26 जुलाई को बेल्लारे में उनकी दुकान के पास बाइकसवारों ने तलवार-कुल्हाड़ी जैसे धार-धार हथियारों से मौत के घाट उतारा था। इस हत्या के आरोप में पुलिस जाकिर और शफीक नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। जाँच अभी चल रही है। इनके लिंक पीएफआई और एसडीपीआई से भी मिले हैं।  इसके अलावा ये भी पता चला है कि शफीक के अब्बा इब्राहिम तो प्रवीण की दुकान में काम भी करते थे। उन्होंने खुद बताया कि उनका बेटा और प्रवीण अच्छे दोस्त थे और दुकान पर बात भी करते थे।

जहाँ शकीना ग्राम प्रधान, वहाँ काँवड़ यात्रा नहीं आसान: मर्दों ने रोका रास्ता, औरतों ने छतों से फेंके पत्थर-गंदा पानी, बंद करवाया DJ

उत्तर प्रदेश के बरेली में कॉंवड़ियों का रास्ता रोके जाने, उन पर गंदा पानी फेंकने और पथराव की घटना सामने आई है। आरोप महिला ग्राम प्रधान शकीना के ससुर इश्तियाक और उसके सहयोगियों पर है। बताया जा रहा है कि काँवड़ियों पर DJ बंद करने का दबाव भी बनाया गया। पुलिस ने 6 लोगों को हिरासत में लिया है। घटना शुक्रवार (29 जुलाई 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कैंट थानाक्षेत्र के गाँव परगंवा का है। बगल के लखौरा गाँव के प्रधान राजेंद्र कुछ अन्य काँवड़ियों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली से गंगा नदी में जल लेने कछला नाम की जगह जा रहे थे। शाम को लगभग 5 बजे जब ये जत्था परगवां गाँव से गुजरा तो वहाँ की ग्राम प्रधान शकीना के ससुर इश्तियाक ने काँवड़ियों का रास्ता रोक दिया। उसने इसे गैर परम्परागत मार्ग बताते हुए काँवड़ियों से आगे नहीं जाने को कहा।

इश्तियाक ने काँवड़ियों पर DJ बंद करने का दबाव बनाया। जत्थे में चल रहे जेनरेटर को बंद कर दिया। फिर भी जब काँवड़िए आगे बढ़े तो कुछ लोगों ने उनकी पिटाई कर दी। इस दौरान छतों से महिलाओं द्वारा गंदे पानी और पत्थर फेंकने का भी आरोप है। इससे नाराज काँवड़ यात्रियों ने हंगामा कर दिया।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भारी दल बल के साथ मौके पर पहुँची। 6 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक विवाद का समाधान कर दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बरेली के ADM वी के सिंह के मुताबिक गाँव में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और काँवड़ियों की सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं।

बिहार के स्कूलों में शुक्रवार की छुट्टी पर नीतीश सरकार ने माँगी रिपोर्ट, मुस्लिम बहुल इलाकों में ‘परंपरा’ की दुहाई दे रही थी JDU और HAM

मुस्लिम बहुल इलाकों के स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी दिए जाने की बात सामने आने के बाद बिहार सरकार ने रिपोर्ट तलब की है। सरकार में साझीदार भाजपा की माँग है कि पूरे बिहार में एक समान छुट्टी होनी चाहिए। इस माँग से NDA में शामिल JDU और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) सहमत नहीं हैं और वो ‘परम्परा और मिसाल’ नाम पर वर्तमान हालात बनाए रखने के पक्षधर हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बिहार के शिक्षा मंत्री और JDU नेता विजय कुमार चौधरी ने ऐसे स्कूलों की लिस्ट मँगाई है। मंत्री ने कहा कि हमें जानकारी मिलते ही हमने रिपोर्ट तलब की और अधिकारियों से जवाब माँगा है। विभाग के अधिकारियों ने भी इस बावत मौखिक आदेश मिलने की पुष्टि की है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बिहार के पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार और अररिया के लगभग 500 सरकारी स्कूलों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश होता है। ये जिले बिहार के मुस्लिम बहुल जिले माने जाते हैं।

खबरों के वायरल होने के बाद इसे बदलने की माँग उठ रही है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने भी कानून का शासन कायम रहने और संवैधानिक ढाँचे को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने की आशा जताई है। वहीं JDU नेता उपेंद्र कुशवाहा के मुताबिक यह एक ‘गैर जरूरी मुद्दा’ है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “ये एक बेवजह का विवाद खड़ा करने का प्रयास है। विरोध करने वाले जान लें कि संस्कृत विश्वविद्यालयों में हर महीने की प्रतिपदा और अष्टमी की छुट्टी होती है।”

अपने ट्वीट के साथ उपेंद्र कुशवाहा ने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय की छुट्टियों का एक कैलेंडर भी शेयर किया है। JDU के प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी शुक्रवार की छुट्टी वाली परम्परा को न छेड़ने की बात कही है। सरकार में शामिल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा, “नीतीश सरकार न्याय और विकास में यकीन करती है। स्कूलों को विवाद में घसीटना गलत है। किसी छात्र या उसके अभिभावक को जब इससे दिक्कत नहीं है तो इस पर कुछ लोगों द्वारा न जाने क्यों हंगामा खड़ा किया जा रहा है।”

गौरतलब है कि बिहार की कुल आबादी में मुस्लिम लगभग 17 % हैं। सबसे अधिक मुस्लिम आबादी किशनगंज जिले में है, जहाँ लगभग 67% मुस्लिम बताए जाते हैं। इसके बाद कटिहार, अररिया और पूर्णिया का नंबर आता है, जहाँ मुस्लिम आबादी 40 से 50% के बीच बताई जाती है। बिहार में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या लगभग 75,000 है। इसमें पूर्णिया में लगभग 200, अररिया में 229, कटिहार में 100 और किशनगंज के लगभग 37 स्कूलों में रविवार के बजाय शुक्रवार की छुट्टी होने की बात सामने आई है।

₹700 करोड़ से बने अस्पताल में 5000 चूहों का आतंकः मरीजों का ग्लूकोज तक पी जाते हैं, मारने के लिए ₹12 लाख होंगे खर्च

छत्तीसगढ़ के एक अस्पताल में चूहों का आतंक इस कदर है कि वे मरीजों का ग्लूकोज तक पी जा रहे हैं। इतना नहीं, वे आए दिन अस्पताल के मशीनों के तार काटते रहते हैं और मरीजों को भी परेशान करते रहते हैं। इन चूहों को मारने के लिए अस्पताल प्रशासन ने टेंडर जारी किया है।

ये हाल है बस्तर में 700 करोड़ रुपए की लागत से बने जगदलपुर मेडिकल कॉलेज का। इस अस्पताल में लगभग 5,000 चूहों ने आतंक मचा रखा है। बीते दिनों उन्होंने सीटी स्कैन मशीन का तार काट दिया, जिससे दो दिनों तक जाँ प्रभावित रहा।

अस्पताल प्रशासन ने इन चूहों को मारने के लिए 10 से 12 लाख रुपए का बजट रखा है। इसका टेंडर एक निजी कंपनी को दी गई है। इस कंपनी ने 6 लोगों की एक टीम को चूहों को मारने के लिए लगाया है। यहाँ प्रतिदिन लगभग 50 चूहों को मारकर दफनाया जा रहा है।

पिछले एक महीने में लगभग 1500 चूहों को मारकर दफनाया जा चुका है। हालाँकि, इसके बावजूद भी चूहों का आतंक कम नहीं हुआ है। कुछ दिन पहले एक चूहे द्वारा एक मरीज को चढ़ाया जा रहा ग्लूकोज पीने का वीडियो सामने आया था। इसे एक मरीज ने बनाया था।

वीडियो में एक बिस्तर पर लेटे एक मरीज को ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है, तभी ग्लूकोज बोतल के स्टैंड से एक चूहा नीचे उतरता है और मरीज के नस में लगी पाइप को दाँतों से कुतर देता है। इसके बाद एक और चूहा नीचे उतरकर उस पाइप से बहने वाले ग्लूकोज को पीने लगता है।

मरीजों का कहना है कि दिन हो या रात, वार्डों में चूहे सोने नहीं देते। कई मरीजों को तो इन चूहों ने काट भी लिया है। बस्तर के कलेक्टर चंदन कुमार का कहना है कि अस्पताल में चूहों की समस्या बढ़ी है और उसके समाधान पर काम किया जा रहा है।