Home Blog Page 2515

PFI ने ईशनिंदा में काटा हाथ, पत्नी ने की आत्महत्या: बाएँ हाथ से लिख डाली आत्मकथा, प्रोफेसर को मिला केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार

केरल (Kerala) में जिस प्रोफेसर का दायाँ हाथ कट्टरपंथियों ने काट दिया था, उन्होंने बाएँ हाथ से अपनी आत्मकथा लिख कर इनाम जीता है। प्रोफेसर का नाम टी जे जोसेफ है। उनकी आत्मकथा को केरल साहित्य अकादमी द्वारा 2020 की बेस्ट बायोग्राफ़ी घोषित किया गया है। मलयालम में ‘अट्टूपोकथा ओरमाकल’ नाम से लिख गई अपनी आत्मकथा में प्रोफेसर ने हाथ काटे जाने के पहले के अपने जीवन की चर्चा की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के कट्टरपंथियों ने ईशनिंदा के कथित आरोप में प्रोफेसर का दायाँ हाथ 4 जुलाई 2010 को काट दिया था। तब प्रोफेसर जोसेफ लडुक्की जिले के थोडूपुझा क्षेत्र में आने वाले न्यूमैन कॉलेज में पढ़ाते थे। उन पर परीक्षा के लिए एक प्रश्न पत्र में इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के नाम का प्रयोग करने पर कट्टरपंथी नाराज हो गए थे।

वह प्रश्न पत्र एक पागल और भगवान के बीच हुई बातचीत को लेकर था। प्रश्न प्रसिद्ध लेखक पीटी कुंजू मोहम्मद की किताब से लिया गया था। विवाद बढ़ने पर प्रोफेसर जोसेफ ने सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि पेपर में पागल आदमी का कोई नाम नहीं था और मोहम्मद नाम किताब के लेखक पीटी कुंजू मोहम्मद के चलते आया था।

हालाँकि, उनकी सफाई का चरमपंथियों पर कोई असर नहीं पड़ा था। मुख्य हमलावर का नाम नजीब था। साल 2015 में इस केस में PFI के 13 सदस्यों को NIA कोर्ट ने सजा सुनाई थी।

जब प्रोफेसर जोसेफ पर हमला हुआ तब उनकी उम्र 52 साल की थी। हमले से हुए घाव से उन्हें उबरने में काफी समय लगा, लेकिन उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा और लम्बे समय तक बाएँ हाथ से लिखने की प्रैक्टिस करते रहे। आखिरकार लगभग 10 साल की मेहनत के बाद उन्होंने बाएँ हाथ से लिखकर अपनी बायोग्राफी प्रकाशित की।

अपनी इस बायोग्राफी में प्रोफेसर टी जे जोसेफ ने बताया है कि कैसे उस समय कॉलेज प्रशासन से लेकर उनके तमाम सहयोगियों और यहाँ तक कि चर्च ने भी उनका साथ छोड़ दिया था और उसी डिप्रेशन में उनकी पत्नी ने भी आत्महत्या कर ली थी। उ

उन्होंने बताया था, “कॉलेज के प्रिंसिपल और मैनेजमेंट ने शुरुआती समय में मेरा साथ दिया, लेकिन समय के साथ उनके मत बदल गए। ये जानने के बावजूद कि मैं निर्दोष हूँ, कॉलेज ने मुझ पर ईशनिंद का आरोप मढ़ा, मुझे सस्पेंड किया गया और बाद में नौकरी से निकाल दिया गया। चर्च ने मेरे परिवार को बहिष्कृत किया।”

जोसेफ़ की आत्मकथा को इंग्लिश में भी ‘ए थाउजेंड कट्स’ नाम से प्रकाशित किया गया है। प्रोफेसर जोसेफ ने ‘भ्रान्तनु स्तुति’ नाम से दूसरी किताब भी प्रकाशित की है। यह किताब उनके द्वारा तैयार किए गए प्रश्न पत्र में उसी पागल आदमी पर आधारित है। फिलहाल प्रोफसर विदेश दौरे पर बताए जा रहे हैं।

गाने पर नेहा कक्कड़ से तारीफ, शिव-भजन के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों से गाली-धमकी: मिलिए फ़रमानी नाज़ से, जिन्हें है जान का खतरा

सोशल मीडिया पर काफी चर्चित गायिका फ़रमानी नाज़ (Farmani Naaz) ने सावन के महीने में भगवान शिव पर एक भजन लॉन्च किया। यह भजन अब वायरल हो गया। इस गाने के बाद उनके सोशल मीडिया हैंडल पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा लगातार उल्टे-सीधे कमेंट किए जा रहे हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों की इन हरकतों के चलते फ़रमानी नाज़ ने अपने यूट्यूब का कॉमेंट सेक्शन भी बंद कर दिया है। यह गाना 16 जुलाई 2022 को रिलीज हुआ था, जिसका टाइटल है ‘घूमूंगी हरिद्वार (Gummu Gi Haridwar)’।

इस गाने के थंबनेल में महादेव शिव की फोटो लगी हुई है, जिसके बगल में फ़रमानी नाज़ खड़ी दिखाई दे रही हैं। गाने में फ़रमानी नाज़ ने अपने सहयोगी से खुद हरिद्वार जाने की जिद करते हुए शिव और काँवड़ यात्रा की काफी तारीफ की है।

फ़रमानी नाज़ ने 22 जुलाई 2022 को एक और गाना ‘हर हर शम्भू (Farmani Naaz Har Har Shambhu)’ रिलीज किया। इस गाने में वो शिव की स्तुति ‘कर्पूर गौरं करुणावतारम’ गाते हुए सुनाई दे रही हैं। उनके सहयोगी का नाम भूरा ढोलक है, जो गाने में उनका साथ दे रहा।

इस गाने पर मोहम्मद अमजद ने लिखा, “अरे शर्म करो फ़रमानी नाज़, अखिरियत का थोड़ा सा तो खौफ करो।”

मोहम्मद अमजद

निशा खान ने लिखा, “ये भी पगला गई।”

निशा

मोहम्मद निज़ाम ने लिखा, “ईमान खराब कर लिया।” मोहम्मद गुफरान ने कहा, “फ़रमानी नाज़ तू भी घंटा हिलाएगी।”

गुफरान

मोहम्मद जावेद खान ने लिखा, “पैसे के चक्कर में दीन को मत भूल जा।”

जावेद

सलाउद्दीन खान ने लिखा, “क्या बकवास है, आज से तेरे वीडियो देखना बंद।”

सलाउद्दीन

ज़मीर खान ने फ़रमानी नाज़ को लानत भेजी तो अयान पटेल ने लिखा, “अल्लाह तुमको कामयाब नहीं करेगा इंशाअल्लाह, आमीन।”

अयान पटेल

मोहम्मद शमी पठान ने बेहद गंदी गाली देते हुए लिखा, “अगर तुझे पैसे से इतना ही प्यार है तो फ़रमानी $%*& और देने लग।”

शमी पठान

वारिश आलम ने भी गंदी गाली देते हुए लिखा, “कितना आदमी से #**ती हो फ़रमानी नाज़, एक बार हमसे भी #*वा लो।”

वारिश आलम

राव नदीम ने लिखा, “&%* में हाथ दे कर बाहर निकाल लूँ।”

राव नदीम

इन धमकियों और गालियों पर फिलहाल फ़रमानी नाज़ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। बता दें कि फ़रमानी नाज़ साल 2020 में इंडियन आइडल (Farmani Naz in Indian Idol 2020) में भी भाग ले चुकी हैं। नेहा कक्कड़ ने इनके गानों की तारीफ भी की थी लेकिन अपने 2 साल के बेटे के ऑपरेशन के कारण फ़रमानी नाज़ को इंडियन आइडल बीच में ही छोड़ना पड़ा था।

फ़रमानी नाज़ (Farmani Naz) ने दिसंबर 2021 में अपने पति पर खुद को तीन तलाक देने और दूसरी शादी करने का आरोप लगाते हुए खुद को जान का खतरा बताया था। फ़रमानी नाज़ का भाई फरमान नाज़ भी गाने गाता है।

अपनी ही पार्टी की हार पर नाचने लगे कॉन्ग्रेसी… ‘दरी बिछाने और कुर्सी पकड़ने’ पर भिड़े कॉन्ग्रेस के टॉप लीडर

एक तरफ अपनी पार्टी की हार पर कॉन्ग्रेसी नाच रहे हैं तो दूसरी तरफ दरी बिछाने और कुर्सी देने के नाम पर शीर्ष नेताओं में तकरार चल रही है। राजस्थान कॉन्ग्रेस (Congress) के नेता और प्रदेश के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने एक बार फिर पार्टी में नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि युवा सिर्फ दरी बिछाने के लिए नहीं है। उधर, मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव हारने के बाद कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया।

लगभग ढाई महीने पहले जयपुर में हुए कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर में जीत के लिए युवाओं को आगे लाने की बात कही गई थी। इसी बीच सचिन पायलट ने कहा कि युवा सिर्फ दरी बिछाने के लिए नहीं है, उन्हें लीडरशिप भी चाहिए। युवा नेता पायलट का यह बयान उनके पुराने दर्द को दिखाता है।

पायलट ने कहा, “जब तक हम ऊर्जावान और संघर्षशील युवाओं को लीडरशिप का मौका नहीं देंगे, तब तक हम उनके साथ न्याय नहीं कर रहे होते हैं।” उन्होंने कहा कि आज के युवाओं में लीडरशिप की क्षमता और गुण हैं। उनकी इस क्षमता का उपयोग करना चाहिए।

सचिन पायलट युवाओं को आगे करने के पक्षधर रहे हैं। जनवरी 2014 में जब उन्हें राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली थी, तब उन्होंने राजनीति में ऊर्जावान युवाओं की टीम तैयार की। उनकी वजह से कई युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिला।

प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट की बीच सीएम पद को लेकर प्रतिस्पर्धा रही है। इस कारण दोनों के बीच अक्सर जुबानी जंग देखने को भी मिलते हैं। पहले उन्हें राज्य में सत्ता से बाहर रखा गया, लेकिन पायलट समर्थकों को दबाव में उन्हें उप-मुख्यमंत्री का पद दिया गया था।

सचिन पायलट का लक्ष्य राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार को फिर से सत्ता में लाना है और इसके लिए उन्होंने कॉन्ग्रेस हाईकमान को अपने सुझाव भी भेजे हैं। दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश के पंचायत चुनाव में हार के बाद वहाँ के कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं।

मध्य प्रदेश में धार जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव हुए थे, जिसमें दोनों पदों पर कॉन्ग्रेस की हार हुई। इसके बाद पूर्व वन मंत्री उमंग सिंघार और जिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बालमुकुंद सिंह गौतम ने कार्यकर्ताओं के साथ जमकर डांस किया और अपनी हार को प्रेरणा कहा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने इस दौरान ‘हार के बाद ही जीत है’ गाने पर जमकर डांस किया।

बच्ची से रेप की सुनवाई 1 दिन में; मौत की सजा 6 दिन में… हाईकोर्ट ने जज को किया सस्पेंड: मामला अब सुप्रीम कोर्ट में

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (29 जुलाई 2022) को अररिया जिले के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश शशिकांत राय की निलंबन वाली याचिका पर बिहार सरकार को नोटिस भेजा है। जज राय ने पॉक्सो एक्ट में चार दिन में ही सुनवाई पूरी कर आरोपित को मौत की सजा सुनाई थी।

इसके अलावा, ADJ शशिकांत राय ने जिला न्यायालयों में प्रोमोशन की नई प्रणाली पर सवाल उठाया था। इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इस निलंबन को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

जस्टिस यूयू ललित (Justice UU Lalit) और जस्टिस एस रवीन्द्र भट (Justice S Ravindra Bhat) की सुप्रीम कोर्ट वाली खंडपीठ ने अपने निर्देश में बिहार की नीतीश कुमार सरकार को अपना जवाब दो सप्ताह में दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इस मामले को सुनवाई के लिए उन्होंने सूचीबद्ध कर लिया है।

न्यायाधीश शशिकांत राय की याचिका में कहा गया है कि उन्हें पदोन्नति से वंचित कर दिया। इसको लेकर उन्होंने जिला न्यायपालिका में पदोन्नति के लिए नई मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाया था।

राय की तरफ से शीर्ष अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता विकास ने कहा, माननीय उच्च न्यायालय केवल निर्णयों के मूल्यांकन की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए याचिकाकर्ता को सीधे कारण बताओ नोटिस जारी किया और बाद में बिना कोई कारण बताए उन्हें निलंबित कर दिया, जिससे न्यायिक अधिकारियों का मार्गदर्शन और सुरक्षा करने के अपने संवैधानिक दायित्व में विफल रहे।

राय ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि उनके खिलाफ एक ‘संस्थागत पूर्वाग्रह’ है, क्योंकि उन्होंने छह साल की एक बच्ची से बलात्कार से जुड़े POCSO (बच्चों को यौन अपराध से संरक्षण कानून) के एक मामले में सुनवाई एक ही दिन में ही पूरी कर ली थी।

राय ने कहा कि उन्होंने एक अन्य मामले में एक आरोपित को चार दिन की सुनवाई में के बाद दोषी ठहराते हुए उसे मौत की सजा सुनाई थी। उन्होंने कहा किया कि उनके ये फैसले व्यापक रूप से सुर्खियों में छाए रहे। इसके लिए उन्हें सरकार तथा जनता से सराहना भी मिली।

अररिया के सत्र न्यायाधीश शशिकांत राय ने 6 साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार के मामले की सुनवाई एक दिन में पूरी कर ली थी। वहीं, एक अन्य मामले में उन्होंने छह दिन की सुनवाई में आरोपित को मौत की सजा सुनाई थी। जज राय के इस त्वरित निर्णय पर पटना हाईकोर्ट ने निलंबन का यह निर्णय लिया था।

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, आपने सुनवाई की और आरोपित को एक दिन में ही उम्रकैद की सजा सुना दी। इस तरह नहीं होना चाहिए। मामलों को लंबित होना एक मुद्दा है और मुद्दों के प्रति दृष्टिकोण एक अलग मुद्दा है।”

पीठ ने कहा, “शीर्ष अदालत के अनेक फैसले हैं जिनमें उसने कहा है कि सजा उसी दिन (सुनवाई पूरी करके) नहीं सुनाई जानी चाहिए। हमारे हिसाब से यह न्याय का उपहास होगा कि आप उस व्यक्ति को पर्याप्त नोटिस, पर्याप्त अवसर तक नहीं दे रहे जिसे अंतत: मौत की सजा मिलने वाली है।”

प्रवीण नेट्टारू की हत्या से लेकर प्रोफेसर का हाथ काटने तक: PFI और शरिया कोर्ट, इस्लामीकरण के विरोधी हिंदुओं के कत्लेआम का फरमान

अफगानिस्तान (Afghanistan) में सजा के तौर पर हाथ काटने, आँख निकालने, गला काटने, पत्थर मारकर मौत के घाट उतारने, सरेआम फाँसी देने और मृतक के शवों को सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम लटकाने जैसी घटनाओं के बारे में अक्सर हम पढ़ते और सुनते हैं। ये सजाएँ इस्लामी नियमों और कानूनों के तहत दी जाती हैं। इसका निर्धारण इस्लामी कोर्ट यानी शरिया अदालतें करती हैं, जिन्हें दारुल कजा (Darul Khada) कहा जाता है।

दारुल कजा का अर्थ होता है, न्याय का घर या अल्लाह का घर। यह वही दारुल कजा उर्फ शरिया कोर्ट है, जिसने साल 2010 में केरल के थोडुपुझा में स्थित न्यूमैन कॉलेज के ईसाई प्रोफेसर टीडी जोसेफ का हाथ काटने का आदेश दिया था। प्रोफेसर जोसेफ पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने इस्लाम के पैगंबर का अपमान किया है। दारुल कजा की भूमिका का खुलासा PFI के गिरफ्तार सदस्य अशरफ ने किया था।

कुछ दिन पहले कर्नाटक में भाजयुमो (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की जिस तरह से हत्या की गई है, उसमें ऐसे में PFI और दारुल कजा संदेह के घेरे में है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसावाराज बोम्मई ने कहा था कि हत्यारे केरल से आकर घटना को अंजाम दिए और वापस भाग गए, ऐसा संदेह है।

NIA ने कुछ साल पहले केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में PFI की आतंकी गतिविधियों और उसके मजबूत आधार पर एक रिपोर्ट दी थी। हाल के दिनों में कथित ईशनिंदा के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों में दंगा करने और हत्या करने की घटनाओं के लिंक PFI से जुड़े हुए पाए गए हैं। इसमें में इसके कंगारू कोर्ट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

देश भर में दारुल कजा, AIMPLB ने हर जिले के लिए की थी वकालत

देश के न्यायिक व्यवस्था के समानांतर ये दारुल कजा आज देश के तमाम राज्यों में अवैध रूप से चल रही हैं। साल 2018 में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इन शरिया अदालतों को बढ़ाकर देश के हर जिले में खोलने की वकालत की थी। हालाँकि, उस वक्त इसका काफी विरोध हुआ था, लेकिन यह काम रूका नहीं।

छह महीना पहले एदार-ए-शरिया झारखंड के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने कहा था कि राज्य के सभी जिलों में दारुल कजा या शरिया कोर्ट स्थापित किया जाएगा। मार्च 2022 तक राज्य के डाल्टनगंज, गोड्डा, मधुपुर और जामताड़ा में इसकी शाखाएँ खोलने का लक्ष्य रखा था।

उस दौरान रिजवी ने बताया था कि जमशेदपुर, राँची, धनबाद, दुमका, हजारीबाग, कोडरमा, लोहरदग्गा, राजमहल (साहिबगंज) और बोकारो में पहले से ही शरिया कोर्ट संचालित हैं। उन्होंने तर्क दिया था कि मुस्लिमों की माँग पर इसे खोला जा रहा है।

मुस्लिम स्कॉलर द्वारा आमतौर पर तर्क दिया जाता है कि दारुल कजा में मुस्लिमों के छोटे-मोटे और घरेलू मुकदमों को देखा जाता है और उनमें सुलह कराकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से बचाया जाता है। इससे देश की न्यायिक व्यवस्था पर से भार कम होता है।

हालाँकि, देश में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ और इन शरिया अदालतों के संबंध स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। कट्टरपंथी संगठनों ने भी शरिया कोर्ट स्थापित की है और मुस्लिमों को कोर्ट के बदले इन दारुल कजा में जाने के लिए प्रेरित किया है।

PFI ने साल 2009 में बनाई अपनी दारुल कजा

पिछले कुछ वर्षों से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) और तालिबान की स्टाइल में लोगों को मारने के कारण चर्चा में आए चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने भी शरिया कोर्ट स्थापित की है।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को पता चला है कि ये अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में समानांतर न्याय-व्यवस्था चलाते हैं और मुस्लिमों से जुड़े मुद्दों को सुलझाती है। रिपोर्टों के अनुसार, PFI की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया (SDPI) के राष्ट्रीय प्रमुख और संस्थापक ई अबूबकर ने साल 2009 में अपनी शरिया कोर्ट यानी दारुल कजा की स्थापना केरल में की थी।

इसमें उसने मुस्लिम विद्वानों के साथ-साथ अधिवक्ताओं को शामिल किया था। हालाँकि, बाद के वर्षों में धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिंदुओं और कई नेताओं की हत्याओं में इस शरिया कोर्ट की भूमिका पाई गई।

धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिंदू नेताओं की ‘दावा’ टीम द्वारा हत्या

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह भी पता चला है कि PFI का दारुल कजा केरल में ना सिर्फ मुस्लिमों को न्यायालयों में जाने रोकता है, बल्कि ये उन हिंदू नेताओं की हत्या करने का भी निर्देश भी देता है, जो इन शरिया कोर्ट का विरोध करते हैं। इसके साथ ही यह मुस्लिमों से जुड़े मामलों में यह हिंदुओं की टारगेट किलिंग करने का निर्देश देता है।

कई हिंदू नेताओं की हत्या से जुड़े मामलों की जाँच के दौरान NIA को यह भी पता चला कि PFI ने हत्याओं के जरिए हिंदुओं में डर पैदा करने के लिए ‘दावा’ टीम का गठन किया है। इस टीम का मुख्य काम सामाजिक कार्य के नाम पर हिंदुओं का इस्लाम में धर्मांतरण है और जो इस धर्मांतरण का विरोध करे उसकी हत्या करना है।

PFI का सत्यसारणी केंद्र इसका प्रमुख उदाहरण है, जहाँ हिंदुओं लड़कियों को लव जिहाद में फँसाकर लाया जाता है और उनका ब्रेनवॉश कर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित किया जाता है। लव जिहाद के अलावा कई तरह के प्रलोभन और डर पैदा करके भी ये धर्मांतरण का काम करते हैं।

NIA ने साल 2017 में गृह मंत्रालय को सौंपे अपने डोजियर में कहा था कि केरल के मंजेरी स्थित सत्यसारणी इस्लामिक दावा इंस्टीट्यूट उर्फ मरकज-उल-हिदया धर्मांतरण केंद्र के रूप में काम करता है। इतना ही नहीं, यहाँ आने वाले लोगों को धर्मांतरण के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण दिया जाता है और उनका ब्रेनवॉश किया जाता है।

ईसाई प्रोफेसर का हाथ काटकर ‘ईशनिंदा’ की सजा

साल 2010 में केरल के थोडुपुझा स्थित न्यूमैन कॉलेज के ईसाई प्रोफेसर टीडी जोसेफ ने B.Com कक्षा के लिए एक प्रश्न-पत्र तैयार किया था। क्लास के मुस्लिम छात्रों ने हंगामा कर दिया कि इसमें इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया गया है।

इसके बाद PFI से जुड़े 8 मुस्लिमों के एक समूह ने प्रोफेसर जोसेफ का दाहिना हाथ काटकर उस समय अलग कर दिया, जब वे मुवत्तुपुझा के निर्मला चर्च में रविवार की प्रार्थना सभा से भाग लेकर अपनी माँ और बहन के साथ वापस घर लौट रहे थे।

इस मामले में गिरफ्तार अशरफ नाम के एक आरोपित ने बताया था कि शरिया कोर्ट उर्फ दारुल कजा ने ईशनिंदा के आरोप में प्रोफेसर जोसेफ का हाथ काटने की सजा सुनाई थी और ऐसा करने के लिए उसे निर्देश दिया गया था। उस दौरान केरल के शरिया कोर्ट का समन्वयक मौलवी ईसा था और उसी के अंतर्गत आने वाले कोर्ट ने यह सजा सुनाई थी।

धर्मांतरण का विरोध करने पर हुई थी रामालिंगम की हत्या

फरवरी 2019 में तमिलनाडु के तंजावूर में रामलिंगम की PFI के ‘दावा’ दल ने धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी थी। रामलिंगम ने PFI द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण का विरोध किया था। इसके बाद चरमपंथी संगठन ने उनकी हत्या कर दी थी।

NIA को पता चला कि PFI की विचारधारा से मेल खाने के कारण कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने भी उसकी मदद की। इसके बाद PFI ने केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में अपने आधार को खूब मजबूत किया। उसने बड़े पैमाने पर हथियार खरीदे और लोगों को प्रशिक्षित किया।

देश में हत्याओं का एक ही पैटर्न और PFI का जनाधार

आज प्रवीण नट्टारे ही नहीं, राजस्थान में कन्हैया लाल की हत्या, अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या, कानपुर में सांप्रदायिक दंगों का मुख्य आरोपित जफर हयात हाशमी और अजमेर के चिश्ती दरगाह के खादिम द्वारा PFI का सदस्य होने की स्वीकृति इसके फैलाव की ओर इशारा करती हैं।

हाल ही में बिहार के फुलवारी शरीफ में छापेमारी के बाद PFI की ‘विजन 2047’ दस्तावेज का खुलासा हुआ और उसके प्रशिक्षण स्थलों के बारे में जानकारी मिली। जाँच के दौरान यह बात भी खुल कर सामने आ रहा है कि बिहार में PFI के कैडर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। बिहार में इस संगठन ने 25 हजार से अधिक लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी है।

NIA ने अपनी रिपोर्ट में बताया था PFI को कट्टरपंथी संगठन

आतंकी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर NIA ने PFI की जाँच की थी। साल 2017 में अपने डोजियर (रिपोर्ट) में NIA ने कहा था कि पीएफआई के आतंकी संपर्कों को लेकर उसके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं।

गृह मंत्रालय को सौंपे गए इस डोजियर में NIA ने PFI द्वारा प्रोफेसर जोसेफ का हाथ काटने से लेकर हथियार चलाने एवं देशी बम बनाने के लिए चलाए जा रहे शिविर तक का जिक्र किया था। इसके अलावा बंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता रुद्रेश की हत्या का भी जिक्र किया गया था।

NIA ने यह भी कहा था कि PFI अपने कैडरों को इस्लामी मूल्यों के रखवाले के रूप में संदर्भित करता है। इसलिए वह लोगों को कोर्ट में जाने के बजाए शरिया कोर्ट में जाने के लिए कहता है। उसने दारुल कजा की भी स्थापना की थी, जो मुस्लिमों के मामलों की सुनवाई करता था।

शरिया कोर्ट और सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट

देश में संवैधानिक न्यायिक व्यवस्था के समानांतर न्यायिक व्यवस्था चलाई जा रही है। यह खुलेआम हो रहा है। स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई करने वाले संविधान के रखवाले सुप्रीम कोर्ट ने शरिया कोर्ट और इसके फैसले अथवा फतवे को लेकर एक मामले की सुनवाई की थी।

विश्वलोचन मदन बनाम भारत संघ एवं अन्य (2014) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि शरिया अदालतों द्वारा दिए गए फतवे या इस्लामी आदेशों का ‘स्वतंत्र भारत में कोई स्थान नहीं है’ और इन्हें मासूमों को दंडित करने के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे यह भी कहा था कि इन अदालतों का सलाह मानना बाध्यकारी नहीं है और कोई भी पक्ष इसे स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है। हालाँकि, दारुल कजा को अवैध घोषित करने से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट मना कर दिया था।

साल 2010 में जब केरल में प्रोफेस जोसेफ का हाथ काट दिया गया था, तब केरल के तत्कालीन गृहमंत्री कोडियेरी बालकृष्णन ने विधानसभा को बताया था कि सरकार शरिया अदालतों के कामकाज की जाँच करेगी। हालाँकि, वह जाँच हुई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। हाँ, केरल सरकार की तुष्टिकरण की खबरें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।

परशुराम तीर्थ सर्किट को योगी सरकार की हरी झंडी: नैमिषारण्य से बाबा नीम करौली धाम तक जुड़ेंगे 5 तीर्थस्थल, 500+ किमी की परियोजना

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार परशुराम जन्मस्थली का निर्माण करने जा रही है। जिससे 6 जिलों के पाँच तीर्थस्थल आपस में जुड़ जाएँगे। परशुराम तीर्थ सर्किट के निर्माण की जिम्मेदारी राज्य के पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंपा गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुओं की आस्था से जुड़े पाँच धामों जिनमें नैमिष धाम, महर्षि दधीचि स्थल मिश्रिख, गोला गोकर्णनाथ, गोमती उद्गम और पूर्णागिरी माँ के मंदिर को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा पूर्णागिरी माता के मंदिर से बाबा नीम करौरी धाम और जलालाबाद स्थित परशुराम की जन्मस्थली को जोड़ दिया जाएगा।

योगी सरकार की योजना के अनुसार, परशुराम तीर्थ सर्किट यूपी के छह जिलों सीतापुर, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली, शाहजहाँपुर, फरुखाबाद से होकर गुजरेगा। वहीं इस सर्किट की लंबाई 500 किमी से ज्यादा बताई जा रही है।

इस परियोजना के बारे में कहा जा रहा है पिछ्ले दिनों में पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद ने परशुराम जन्मस्थली के कई दौरे किए। उन्होंने परशुराम जन्मस्थली के महंत और पुजारियों से भी वार्ता की, इसके बाद नैमिषधाम के पुजारी, गोला गोकर्णनाथ के पुजारी समेत कई साधु-संतों से राय लेकर इस कॉरिडोर की रूपरेखा तैयार कर और प्रस्ताव बना कर एनएच के सहयोग से कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है।

वहीं इस परियोजना के प्रोग्रेस को लेकर बताया गया है कि इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी चर्चा की गई है। इसमें नैमिष तक के कुछ हिस्से की टेंडर प्रक्रिया संपन्न हो गई है और जल्द केन्द्र से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि योगी सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद ने शाहजहाँपुर के जलालाबाद स्थित परशुराम जन्मस्थली को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने की माँग की थी जिसे इसी साल अप्रैल महीने में योगी सरकार ने पूरा करते हुए परशुराम की जन्मस्थली को पर्यटन स्थल के रूप में घोषित कर दिया था। साथ ही परशुराम सर्किट के रास्ते पर जगह-जगह इन सभी तीर्थस्थलों के बारे में वर्णन और चित्रण से इस रूट को काफी खूबसूरत बनाने का भी प्रस्ताव है।

हिन्दू नाबालिग लड़की का अपहरण कर हत्या, फेसबुक पर उसकी तस्वीर पोस्ट कर लिखा- ‘खोजने की जरुरत नहीं, मर चुकी है’, बांग्लादेश की घटना

बांग्लादेश से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जहाँ एक हिंदू लड़की का एक व्यक्ति ने अपहरण किया और फिर उसकी हत्या कर दी। जिसके बाद उसकी तस्वीर को फेसबुक पर पोस्ट करते हुए घोषित कर दिया कि वह मर चुकी है। मृतक लड़की की पहचान अनुराधा सेन के रूप में हुई है जो बांग्लादेश के शेरपुर के नलिताबाड़ी उपजिला में हिन्दू अल्पसंख्यक समुदाय की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, जिस हिन्दू लड़की को पहले अगवा किया गया, फिर उसकी हत्या के बाद आरोपित ने अपने फेसबुक अकाउंट पर उसकी तस्वीर पोस्ट कर दी थी। पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा है, “उसे खोजने की कोई जरूरत नहीं है। वह मर चुकी है।” इस मामले में बारी मेहदी नाम के व्यक्ति पर संदेह जताया जा रहा है क्योंकि उसने पहले भी अनुराधा के भाई को धमकी भरे फोन किए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ने इसी साल बांकुरा हाई स्कूल से 10वीं की बोर्ड परीक्षा दी थी। मामले में कहा जा रहा है कि पीड़िता का अपहरण जिसने किया उसने पहले उसकी आगे की पढ़ाई के लिए सरकारी धन मुहैया कराने के लिए उसके स्कूल से फोन करने का नाटक किया था।

घटना रविवार 25 जुलाई की बताई जा रही है, जब आरोपित ने अनुराधा की माँ को फोन किया और उसे पैसे लेने के लिए स्कूल भेजने को कहा। फोन करने वाले व्यक्ति ने कहा कि सरकार द्वारा कुछ विशेष छात्रों के लिए धन उपलब्ध कराया जा रहा था और अनुराधा उनमें से एक थी।

हालाँकि, लड़की के परिवार को बाद में पता चला कि उस व्यक्ति ने लड़की को झूठ बोलकर फँसाया था और स्कूल बुलाकर उसका अपहरण कर लिया था। पीड़ित लड़की के पिता ने जब स्कूल जाकर उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। तब उन्होंने नलिताबाड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई।

इस बीच, लड़की के भाई ने खुलासा किया कि उसे कुछ दिन पहले बारी मेहदी नाम के एक व्यक्ति का फोन आया था। दूसरी तरफ के व्यक्ति ने अनुराधा के बारे में बात की थी। उसने कहा था कि वह फेसबुक के जरिए लड़की से मिला था और दावा किया था कि उसके उसके साथ प्रेम संबंध थे।

तब बारी मेहदी ने अनुराधा के भाई से फोन पर कहा, “मैं आपकी बहन से फेसबुक पर मिला था। फिर हम करीब हो गए। तुम्हारी बहन ने मेरी माँ से बहुत बातें कीं। अब मैंने सुना है कि तुम्हारी बहन का रिश्ता किसी और से है। यह ठीक नहीं चल रहा है। यह अच्छा नहीं है।”

भाई ने पुलिस को इस बात की भी पुष्टि की कि उस दिन उसके पास जो कॉल आया था और उसकी माँ को कॉल करके जिसने अनुराधा को स्कूल भेजने के लिए कहा था, दोनों एक ही नंबर से किया गया था। रिपोर्ट्स से आशंका जताई जा रही है कि आरोपित ने किसी और के साथ संबंध होने के शक में लड़की की हत्या कर दी। फ़िलहाल मामले में बांग्लादेश पुलिस जाँच कर रही है।

मौसेरे भाई के साथ मिल शौहर अदनान ने किया बीबी का गैंगरेप, विरोध करने पर बुरी तरह पीटा, फिर दे दिया तीन तलाक: गोंडा की घटना

उत्तर प्रदेश के गोंडा से गैंगरेप के बाद तीन तलाक का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ आरोपित शौहर ने अपने मौसेरे भाई के साथ मिलकर न केवल अपनी ही बीबी का गैंगरेप किया, बल्कि उसे तीन तलाक भी दे दिया। मामला गोंडा जिले के कोतवाली नगर क्षेत्र का है।

रिपोर्ट के अनुसार, घटना के खुलासे के बाद पुलिस को जैसे ही तीन तलाक और गैंगरेप के इस मामले की जानकारी मिली, पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए गैंगरेप और तीन तलाक के आरोपित शौहर मोहम्मद अदनान और उसके मौसेरे भाई के खिलाफ संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपित शौहर को गिरफ्तार कर लिया है वहीं उसका मौसेरा भाई फरार बताया जा रहा है। इस मामले में फ़िलहाल आगे की जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि वारदात के बाद पीड़िता ने एसपी से न्याय की गुहार लगाई थी। एसपी के निर्देश पर प्रभारी निरीक्षक ने थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गुरुवार की देर शाम कार्रवाई शुरू कर दी।

वहीं एसपी आकाश तोमर ने इस मामले में खुलासा करते हुए बताया, “गोंडा की रहने वाली एक युवती का निकाह लखनऊ के रहने वाले मोहम्मद अदनान के साथ हुआ था। मोहम्मद अदनान दहेज का लालची था और दहेज देने की माँग करता था। इसको लेकर वो आए दिन अपनी बीबी से मारपीट भी करता था। इससे परेशान होकर पत्नी ससुराल से चली आई थी और काफी दिनों से अपने मायके में ही रह रही थी।”

रिपोर्ट के अनुसार, बीते दिन मौका पाकर शौहर मोहम्मद अदनान अपने मौसेरे भाई के साथ पत्नी के मायके आया और उसे अकेली पाकर दोनों ने उससे सामूहिक रेप किया। महिला के विरोध करने पर शौहर ने उसे मारा-पीटा और तीन बार तलाक बोलकर लखनऊ चला गया।

मोहम्मद फाजिल की हत्या के मामले में NDTV ने शिया-सुन्नी प्रेम प्रसंग को छिपाया, वीडियो रिपोर्ट में भगवा कपड़े पहने लोगों को दिखाया: कर्नाटक की घटना

कर्नाटक (Karnataka) के मंगलुरु में कृष्णापुरा-एमआरपीएल रोड पर हमलावरों द्वारा मोहम्मद फाजिल नाम के युवक की हत्या की खबर सामने आने के बाद एनडीटीवी दुष्प्रचार में जुट गया है। वामपंथी चैनल ने घटना के कुछ घंटों बाद ही यह बताने की कोशिश की कि भाजपा ने युवा मोर्चा (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या का बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया है।

पुलिस के मुताबिक, फाजिल पर 4-5 अज्ञात बदमाशों ने घातक हथियार से हमला किया था। पुलिस ने अपनी प्रारंभिक जाँच में कथित तौर पर पाया कि मृतक की हत्या इसलिए की गई, क्योंकि वह सुन्नी था और एक शिया महिला से प्यार करता था। हमलावरों ने चेहरे पर नकाब पहन रखा था। वे सभी हुंडई कार से आए थे और फाजिल की हत्या कर कार में बैठकर फरार हो गए।

हालाँकि, पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है कि हमलावरों ने किस कारण से फाजिल की हत्या की है। वहीं, एनडीटीवी ने इस घटना की वीडियो रिपोर्ट में दावा किया है कि ये संदिग्ध हिंदू हो सकते हैं। चैनल ने 26 जुलाई को इस्लामवादियों द्वारा की गई प्रवीण नेट्टारू की हत्या का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिशोध लेने के लिए मोहम्मद फाजिल की हत्या की गई। दूरदर्शन से चुराए गए टेपों, उपकरणों को बेचकर खुद को स्थापित करने वाले एनडीटीवी ने इस मामले में शिया-सुन्नी प्रेम प्रसंग को नजरअंदाज करते हुए हिंदू संगठनों पर निशाना साधा।

वीडियो में NDTV ने फाजिल की हत्या के संबंध में कर्नाटक पुलिस द्वारा एक्सेस किए गए सीसीटीवी फुटेज को दिखाया। इसके बाद प्रवीण नेट्टारू की हत्या के विरोध में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं को दिखाया। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से अप्रत्यक्ष रूप से यह बताने का प्रयास किया गयाहै कि 28 जुलाई को प्रवीण की हत्या के प्रतिशोध में हिंदुओं द्वारा फाजिल की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। एनडीटीवी द्वारा किए गए इस तरह के कथित दावों को अन्य मीडिया रिपोर्टों ने खारिज कर दिया है। वहीं, दूसरे मीडिया रिपोर्ट्स में फाजिल की हत्या को शिया-सुन्नी प्रेम संबंध से जोड़ कर दिखाया गया है।

मेंगलुरु के पुलिस आयुक्त एन शशि कुमार ने 28 जुलाई को फाजिल की मौत की पुष्टि करते हुए कहा था कि यह घटना मंगलुरु सिटी के सूरतकल की है। जहाँ कृष्णापुरा कटिपल्ला रोड पर रात करीब 8 बजे 23 वर्षीय लड़के पर 4-5 लोगों ने बेरहमी से हमला किया था। हमलावरों से बचने के लिए फाजिल ने दौड़ भी लगाई, लेकिन वह बच नहीं पाया। गंभीर हालत में फाजिल को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

घटना के बाद मंगलुरु के पुलिस कमिश्नर एनएस कुमार ने मुस्लिम उलेमाओं और मौलानाओं से घर के अंदर ही नमाज़ पढ़ने की अपील की थी। मंगलुरु पुलिस ने शिक्षण संस्थानों, क्षेत्र की शराब की दुकानों को भी 29 जुलाई तक बंद रखने का आदेश दिया था।

गौरतलब है कि इससे पहले कर्नाटक के बेल्लारे इलाके में मंगलवार (26 जुलाई 2022) की रात करीब 9 बजे कुछ हमलावरों ने कुल्हाड़ी से हमला कर भाजपा युवा मोर्चा के जिला सचिव प्रवीण नेट्टारू की हत्या कर दी थी। यह हमला तब हुआ जब वे बाइक से घर जा रहे थे। प्रवीण की हत्या के मामले में PFI और SDPI पर संदेह जताया गया है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि पुलिस को संदेह है कि हत्या बेल्लारे के मुस्लिम युवक मसूद की हत्या के बदले में की गई होगी। क्योंकि कुछ दिनों पहले एक युवक की हत्या हुई थी।

वहीं इस मामले में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी ने कहा था, “प्रारंभिक रिपोर्ट और कुछ मीडिया रिपोर्ट एसडीपीआई और पीएफआई लिंक की तरफ इशारा करती हैं। उन्हें केरल में बढ़ावा दिया जा रहा है। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस उन्हें प्रोत्साहित कर रही है। कर्नाटक में हमारी सरकार कार्रवाई करेगी और दोषियों को सजा देगी।”

तेलंगाना के मंत्री के जन्मदिन में गैर हाजिर होने पर अस्पताल के 4 स्टाफ को नोटिस, 24 घंटे में माँगा जवाब, नहीं तो होगी कार्रवाई

तेलंगाना के मानचेरियल जिले में एक सरकारी अस्पताल के 4 कर्मचारियों को नगर विकास मंत्री के टी रामाराव के 24 जुलाई 2022 को मनाए गए जन्मदिन में शामिल न होने पर नोटिस दिया गया है। चारों से उनकी गैर हाजिरी की वजह पूछी गई है। जवाब देने के लिए कर्मचारियों को 24 घंटे का समय दिया गया है। यह नोटिस बेलमपल्ली नगर परिषद के कमिश्नर ने 25 जुलाई 2022 को जारी किया है।

सिटी कमिश्नर गोपू गंगाधर द्वारा जारी इस पत्र में लिखा गया है, “माननीय नगर विकास मंत्री के टी रामाराव का जन्मदिन 24 जुलाई को सुबह 10 बजे बेलमपल्ली के सरकारी अस्पताल में आयोजित हुआ था। सभी स्टाफ को व्हाट्सएप पर सूचना दे कर इसमें शामिल होने का आदेश दिया गया था। लेकिन कुछ लोगों द्वारा इस आदेश की अनदेखी की गई। यह नोटिस इसी वजह से जारी की जा रही है। नोटिस रिसीव होने के 24 घंटे में जवाब दें कि जन्मदिन के कार्यक्रम में शामिल न होने पर आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?”

जिन 4 कर्मचारियों को यह नोटिस दी गई है उसमें एक महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। ये स्टाफ वरिष्ठ सहायिका टी राजेश्वरी, जूनियर सहायक एस. पुन्नमचंदर, सिस्टम मैनेजर ए मोहन और बिल कलेक्टर श्रवण हैं। नोटिस में तीन नाम प्रिंट हैं जबकि चौथे को कलम से लिखा गया है। 24 घंटे में इन चारों से जवाब न मिलने की दशा में आगे की कार्रवाई के लिए सीनियर अधिकारियों को सूचित करने की चेतावनी दी गई है।

के टी रामाराव के पास तेलंगाना सरकार के उद्योग, शहरी विकास और आईटी मंत्रालय हैं। उन्होंने खुद राज्य में बाढ़ और बारिश के चलते किसी से भी अपना जन्मदिन कार्यक्रम न आयोजित करने की अपील की थी। हालाँकि, उनकी अपील का कोई खास फर्क नहीं पड़ा और उनके कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर जन्मदिन मनाया जबकि खुद मंत्री ने अपना जन्मदिन नहीं मनाया।