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असम में मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ्तार: 8 मौलवी हिरासत में, पुलिस ने बताया – ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे

असम पुलिस ने आतंक के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राज्य की पुलिस ने मोरीगाँव में सक्रिय एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। ताजा जानकारी के मुताबिक यहाँ के एक मदरसे में जिहादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था।

यह आतंकी मॉड्यूल एक मदरसे से संचालित हो रहा था और कथित तौर पर राज्य में बड़े हमले की योजना बना रहा था। असम पुलिस को इसके बारे में खुफिया एजेंसी से जानकारी मिली। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संदिग्ध जिहादी को गिरफ्तार किया। इसकी पहचान मुफ्ती मुस्तफा के रूप में हुई है। 

मोरीगाँव पुलिस ने बुधवार (27 जुलाई 2022) रात मोइराबारी में मदरसा और अन्य आवासों पर तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गिरफ्तार किया। मदरसे को भी पुलिस ने सील कर दिया है।

मुफ्ती मुस्तफा को ही आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह मोइराबारी में 2018 से जामी-उल-हुदा मदरसा चलाता है। पुलिस ने मुफ्ती मुस्तफा के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और अन्य सामग्री के साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए। इसके साथ ही पुलिस ने पूछताछ के मदरसे के 8 मौलवियों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि उसे बांग्लादेश से अंसरुल्ला फंडिंग कर रहा था। इसके अलावा भी मदरसे को कई अन्य देशों से फंडिंग हो रही थी।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मुस्तफा को किस वजह से गिरफ्तार किया गया है, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। स्थानीय लोगों में से एक ने कहा, “मोरीगाँव पुलिस, सेना और अन्य अधिकारियों ने कल रात मुस्तफा के आवास और मदरसा में कम से कम दो घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। मुस्तफा को पुलिस ने पकड़ लिया। हमें नहीं पता कि उसे क्यों गिरफ्तार किया गया।”

फिलहाल पुलिस घटना के संबंध में आगे की जाँच कर रही है। इस बीच, इस मामले पर बोलते हुए, असम के डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने कहा, “आतंकवादी संगठन धीरे-धीरे असम को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे बांग्लादेश के रास्ते राज्य में प्रवेश कर रहे हैं। वे राज्य के मुस्लिम युवाओं को ‘हदीस’ की शिक्षा देकर भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री हिमंता विस्व सरमा ने मदरसा शब्द ही खत्म करने की वकालत करते हुए कहा कि मदरसे में बच्चों को दाखिला दिलवाना ही मानवाधिकार का उल्लंघन है। सीएम सरमा ने मदरसों को मानवता का दुश्मन बताते हुए कहा था कि ये मदरसा शब्द ही विलुप्त हो जाना चाहिए। जब तक मदरसा दिमाग में घूमेगा तब तक बच्चा कभी डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाएगा। यदि ये बातें बच्चों को सिखाई जाएँ तो बच्चे खुद ही मदरसे में न जाएँ। मदरसे में बच्चों का दाखिला ही मानवाधिकार के उललंघन के लिए करवाया जाता है। 

इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि लगभग सात सौ मदरसे बंद हो चुके हैं, बाकी मदरसों को नर्सिंग स्कूल और मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों में बदलने का इरादा है। वो चाहते हैं कि मेरे मुसलमान भाई मदरसों में ना जाए और उसकी जगह लोग डॉक्टर-इंजीनियर बनें, समाज को रोशन करें।

आधी रात में निकलती है किन्नरों की शवयात्रा? लाश को जूते से पीटा जाता है? किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर से जानिए सच, किन्नरों को इसीलिए कहते हैं ‘मंगलामुखी’

किन्नरों की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार कैसे होता है, इस बारे में आम लोगों के बीच कई प्रकार की शंकाएँ हैं। कुछ लोगों का कहना है कि किन्नरों की अर्थी या जनाज़ा आधी रात में निकलता है जिस से कोई देख न पाए। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि किन्नरों की मौत के बाद उनको शव को जूतों से पीटा जाता है, जिस से वो दुबारा उस रूप में जन्म न लें। इसी के साथ किन्नर बनने की प्रक्रिया पर भी तमाम संशय बना रहता है जिसमें उनके गुप्तांग को बिना सुन्न किए काटने जैसी चर्चाएँ अक्सर सुनाई देती हैं।

इस बारे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी शव को जूतों से पीटने जैसी बातें प्रकाशित की जा चुकी हैं। ऑपइंडिया ने तह तक जा कर पड़ताल करने और असल सच निकालने का निर्णय लिया। 24 जुलाई, 2022 (रविवार) को हमने हरिद्वार में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी माँ से इस बाबत जानकारी जुटाई। भवानी माँ ने किन्नरों की शव यात्रा आधी रात में निकलने व उनके शव को जूते से पीटने जैसी चर्चाओं को निराधार और अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि किन्नरों का अंतिम संस्कार भी सामान्य लोगों की तरह ही होता है।

अलग-अलग धर्म को मानने वालों की अलग-अलग विधान

भवानी माँ ने हमें बताया, “जैसे स्त्री व पुरुष अलग-अलग धर्म को मानते हैं वैसे ही किन्नर में भी हिन्दू और मुस्लिम होते हैं। वो जीवित रहते हुए अपने-अपने पारमपरिक विधि विधान पूजा-पाठ करते हैं और मौत के बाद भी उन्हें उनका उनके धर्म के मुताबिक अंतिम संस्कार होता है। यदि किन्नर हिन्दू है तो उसको जलाया जाता है और यदि मुस्लिम है तो बाकायदा नमाज़ आदि पढ़ कर उसको दफनाया जाता है।”

झूठी है जूते से पीटने वाली बात

भवानी माँ ने आगे बताया, “मेरी उम्र लगभग 50 साल है। 13 साल की उम्र से मैं किन्नरों के बीच में रहती हूँ। अनगिनत किन्नर मेरे आगे सामान्य रूप से जलाए या दफनाए गए। मैंने अब तक एक भी मामला ऐसा नहीं देखा। हम अपने गुरु या सीनियरों का हद से ज्यादा सम्मान करते हैं। वही बुजुर्ग हो कर जब मरेंगे तो क्या हम उनको जूते मारेंगे? ऐसी बातें न जाने किसने फैलाई है। ये सच है कि जीते जी हमारी दुनिया स्त्री और पुरुष के जीवन से अलग होती है पर मौत के बाद सभी का अंतिम संस्कार एक जैसे ही होता है। इसमें शव को धोना और बाद में कुछ लोगों को खाना खिलाना भी शामिल है।”

महामंडलेश्वर भवानी माँ

आधी रात में शव यात्रा वाली बात भी कोरी अफवाह

महामंडलेश्वर भवानी माँ आगे कहा, “पिछले कुछ समय में दिल्ली और NCR क्षेत्र में कई किन्नरों की या स्वाभाविक मौत हुई या कुछ की हत्या हुई जो बेहद चर्चित भी रहीं। उनके शव यात्राएँ दिन में बाकायदा आम लोगों की तरह ही निकाली गईं। मुझे समझ में नहीं आता कि कोई अफवाह उड़ाने वाला अर्थी पर ले जाए जा रहे शव के अंदर कैसे झाँक कर देख लेता है कि वो किन्नर का है या नहीं। यदि आप दिन में सड़क से गुजर रहे हों और कोई शव यात्रा या जनाज़ा सामान्य रूप से जा रहा हो तो वो किसी किन्नर का भी हो सकता है।”

बिना सुन्न किए प्राइवेट पार्ट काटने की भी बातें अफवाह

कुछ चर्चाओं किन्नर का बिना सुन्न किए प्राइवेट पार्ट काटने की बातों को भी भवानी माँ ने झूठ बताया। उन्होंने कहा, “जिसे भी ये करवाना होता है वो बाकायदा ऑपरेशन करवा लेता है। लोग ऐसे कही सुनी बातों पर विश्वास न करें।”

हमेशा मंगल (भलाई) की कामना इसलिए मंगलामुखी की उपाधि

भवानी माँ ने आगे बताया, “किन्नरों को मंगलामुखी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो हमेशा लोगों के मंगल (भलाई) की कामना करते हैं। हमारा आशीर्वाद भी लोगों पर सार्थक असर करता है। किन्नर कभी भी किसी की भी दुःख की घड़ी में पैसे माँगने नहीं जाते।” भवानी माँ के साथ उस समय उनके लगभग दर्जन किन्नर शिष्य मौजूद थे। उन सभी ने भवानी माँ द्वारा कही गई हर बात से सहमति जताई।

‘पार्था चटर्जी को सारे पदों से हटाओ, पार्टी से निकालो’: TMC में पड़ी फूट, अर्पिता मुखर्जी ने कहा – मेरे घर से मिला सारा पैसा मंत्री का

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के गिरफ्तार मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी ने गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बताया कि उनके दूसरे फ्लैट से बरामद करोड़ों रुपए चटर्जी के हैं। जाँच एजेंसी ने अर्पिता मुखर्जी के पहले फ्लैट से 21 करोड़ रुपए बरामद करने के कुछ दिनों बाद उसके दूसरे अपार्टमेंट से 28.90 करोड़ रुपए कैश और 5 किलो से अधिक सोना बरामद किया है। यह छापेमारी गुरुवार (28 जुलाई, 2022) सुबह 4 बजे तक चली, जिसमें अधिकारियों को पैसे गिनने में 10 घंटे का समय लगा।

वहीं, पार्टी की किरकिरी होने के बाद टीएमसी महासचिव और प्रवक्ता कुणाल घोष ने पार्थ चटर्जी को मंत्रालय और पार्टी के सभी पदों से हटाने की माँग की।

टीएमसी के प्रवक्ता घोष ने ट्विटर पर कहा कि अगर उनकी माँग गलत है, तो पार्टी उन्हें सभी पदों से बर्खास्त कर सकती है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “पार्थ चटर्जी को तुरंत मंत्रालय और पार्टी के सभी पदों से हटाया जाना चाहिए। उन्हें निष्कासित किया जाना चाहिए। अगर मेरे इस बयान को गलत माना जाता है, तो पार्टी को मुझे सभी पदों से हटाने का पूरा अधिकार है।” इससे पहले घोष ने बुधवार (27 जुलाई, 2022) को कहा था कि चटर्जी की करीबी के घर से कैश मिलना पार्टी के लिए अपमान और हम सभी के लिए शर्म की बात है।

मालूम हो कि अर्पिता मुखर्जी के दूसरे फ्लैट के टॉयलेट में यह रकम छुपाकर रखी गई थी। इस रकम को गिनने के लिए ईडी के अधिकारियों को नोट गिनने की 4 मशीनें मँगवानी पड़ी। समाचार एजेंसी ANI ने बताया है कि अर्पिता मुखर्जी के बेलघरिया स्थित आवास से लगभग 29 करोड़ रुपए की नकदी मिली। इसे 10 ट्रंक में भरकर एजेंसी साथ ले गई। अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट्स से अब तक करीब 50 करोड़ रुपए नकद बरामद हो चुके हैं। इससे पहले 23 जुलाई को अर्पिता के एक अन्य घर से ED ने 21 करोड़ रुपए कैश बरामद किए गए थे।

बता दें कि पश्चिम बंगाल शिक्षा घोटाले की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। केंद्रीय एजेंसी ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की सिफारिशों पर सरकार द्वारा प्रायोजित व सहायता प्राप्त स्कूलों में समूह ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों व शिक्षकों की भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं की जाँच शुरू की है। ममता बनर्जी सरकार में मौजूदा उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी उस समय शिक्षा मंत्री थे, जब घोटाला हुआ था।

केरल सरकार की लॉटरी, विजेता बन गया गया मोहम्मद बावा: अब मिलेंगे ₹1 करोड़ रुपए

केरल (Kerala) में कर्ज में डूबकर अपना घर बेचने के लिए मजबूर एक व्यक्ति की किस्मत उस वक्त चमक उठी जब उसे एक करोड़ रुपए की लॉटरी लग गई। अपने घर को औने-पौने दामों में बेचने जा रहे 50 वर्षीय मोहम्मद बावा की मन माँगी मुराद पूरी हो गई। टैक्स कटौती के बाद उन्हें 63 लाख रुपए मिलेंगे।

केरल के उत्तरी जिले के मंजेश्वर के रहने वाले बावा पर लगभग 50 लाख रुपए का खर्च था। मोहम्मद बावा ने यह कर्ज अपनी दो बेटियों की शादी करने और व्यापार में हुए घाटे से उबरने के लिए रिश्तेदारों और बैंकों से ले रखा था।

रिश्तेदारों और बैंकों के बढ़ते दबाव को देखते हुए मोहम्मद बावा ने अपना घर बेचकर कर्ज चुकाने की सोची। इसके लिए उन्होंने ग्राहक से बात भी कर ली, लेकिन घर बेचने के दो घंटे पहले ही उन्हें एक करोड़ रुपए की लॉटरी लगने की सूचना मिली। इसके बाद उन्होंने अपना घर बेचने का फैसला टाल दिया।  

मोहम्मद बावा ने इस उम्मीद में लॉटरी का एक टिकट खरीदा था, एक दिन उनकी किस्मत बदल जाएगी और हुआ भी ऐसा ही। बावा ने रविवार (24 जुलाई 2022) को केरल की पी. विजयन सरकार की लॉटरी के टिकट लिए थे। लॉटरी का परिणाम रविवार दोपहर 3:30 बजे घोषित हुआ और इसमें वह विजेता साबित निकले।

लॉटरी जितने वाले 5 बच्चों के पिता बावा के अनुसार, उन्होंने रविवार की शाम 5 बजे ही उनके घर के खरीददार एडवांस रुपए देने आने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही उनकी किस्मत खुल गई। उन्होंने कहा कि वह लॉटरी टिकट के नियमित खरीददार नहीं थे, लेकिन कर्ज की वजह से उन्होंने इसे लिया था।

आगे उन्होंने कहा, “मैं उस लॉटरी एजेंट को व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ, इसलिए जब वह मेरे घर से गुजरता था, तो वह मुझे कुछ टिकट देता था। यह विशेष टिकट मैंने बेहद तनाव में खरीदा था क्योंकि मुझे नहीं पता था कि मुझे क्या करना है।”

जिसे लोग समझ रहे थे ED की छापेमारी, वो निकली चोरी: पार्था चटर्जी के घर से बड़े-बड़े बैग भर कर फरार हुए चोर, बंगाल का ‘स्पेशल 26’

पश्चिम बंगाल के मंत्री और शिक्षक भर्ती घोटाले में मुख्य आरोपित पार्थ चटर्जी के घर प्रवर्तन निदेशालय की लगातार चल रही छापेमारी के बीच एक अनोखी घटना सामने आई है। बता दें कि पार्थ चटर्जी के दक्षिण 24 परगना स्थित आवास पर चोरी का मामला सामने आया है। घटना बुधवार रात (27 जुलाई) की है।

बताया जा रहा है कि पार्थ चटर्जी के 24 परगना वाले घर में चोरी की नियत से कुछ चोर घुस गए और बड़े बड़े बैग्स में चोरी किया हुआ सामान ले कर निकल गए। हालाँकि पड़ोस के लोगो ने इसे ईडी की छापेमारी समझ नजरअंदाज कर दिया।

आस पास के लोगो के मुताबित बुधवार देर रात कुछ लोग पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री पार्थ चटर्जी के घर ताला तोड़ कर घुस गए। ये लोग करीब 1 घंटे तक चोरी की वारदात को अंजाम देते रहे। लोग इसे ईडी का छापा मान रहे थे। जबकि चोर बड़े आराम से बड़े बड़े बैग्स में चोरी किया हुआ सामान लेकर वहाँ से आराम से निकल गए।

गौरतलब है कि पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के ठिकाने से ईडी अब तक करीब 50 करोड़ रुपए बरामद कर चुकी है। इतना ही नहीं बुधवार को हुई छापेमारी में ईडी ने 5 किलो सोना भी बरामद किया है। बुधवार (27 जुलाई 2022) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अर्पिता मुखर्जी के दूसरे फ्लैट पर छापा मारा था। यहाँ से ईडी को करीब 28.90 करोड़ रुपए कैश और 5 किलो सोना मिला।

इससे पहले 23 जुलाई को अर्पिता के एक अन्य घर से ED ने 21 करोड़ रुपए कैश बरामद किए थे। अर्पिता मुखर्जी का कहना है कि पार्थ चटर्जी उनके घर को ‘मिनी बैंक’ की तरह इस्तेमाल करते थे। अर्पिता ने बताया कि पार्थ चटर्जी उनके घर में ही पैसा रखा करते थे। 

बता दें कि पश्चिम बंगाल शिक्षा घोटाले की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। केंद्रीय एजेंसी ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की सिफारिशों पर सरकार द्वारा प्रायोजित व सहायता प्राप्त स्कूलों में समूह ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों व शिक्षकों की भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं की जाँच शुरू की है। ममता बनर्जी सरकार में मौजूदा उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी उस समय शिक्षा मंत्री थे, जब घोटाला हुआ था। सीबीआई दो बार उनसे पूछताछ कर चुकी है। पहली बार पूछताछ 25 अप्रैल, जबकि दूसरी बार 18 मई को की गई थी।

रामायण को सेक्युलर बनाना चाहते थे राजदीप के ससुर, उस समय थे दूरदर्शन के हेड: रामानंद सागर ने लिखा था – कॉन्ग्रेस राज में हिन्दू भयभीत

दूरदर्शन का लोकप्रिय सीरियल रामायण (Ramayana) एक बार फिर चर्चा में है। 1987 में आए रामायण सीरियल के निर्माता रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर द्वारा लिखी गई उनकी बायोग्राफी का हवाला देते हुए कॉलमनिस्‍ट शेफाली वैद्य ने कहा, “जिस वक्त रामायण का प्रसारण शुरू हुआ पत्रकार सागरिका घोष के पिता और राजदीप सरदेसाई के ससुर भास्कर घोष, जो उस वक्त दूरदर्शन के हेड थे वह इसे दिखाए जाने के पक्ष में नहीं थे। घोष को ये लगता था कि रामायण का प्रसारण इस देश के सेक्युलर चरित्र को बदल देगा और हिंदुत्व की अवधारणा को बढ़ाएगा।” लेखिका ने ट्वीट के साथ तीन स्क्रीनशॉट साझा किए हैं।

दरअसल, पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी रहे घोष रामायण को उस रंग-रूप में बिल्कुल नहीं दिखाना चाहते थे, जैसा रामानंद सागर कर रहे थे। भास्कर घोष को उस वक्त दर्शकों पर किए गए शोध से ये पता चला था कि रामायण को देखने वाला अकेला हिंदू समाज ही नहीं था, बल्कि मुस्लिम भी बड़ी तादाद में उसे देखते थे, क्योंकि सीरियल का निर्माण उस समय के स्डैंडर्ड के हिसाब से किया गया था। रामायण सिर्फ मनोरंजन ही नहीं था, बल्कि इसमें आदर्शों और मूल्यों की बात भी की गई थी। ऐसे में वह अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए रामायण को धर्मनिरपेक्ष बनाना चाहते थे। हालाँकि राजीव गाँधी सरकार में ऐसे कई मामले देखने को मिले जब हिंदू और मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए राजनीति की गई।

रामानंद सागर की बायोग्राफी के पेज नंबर 273 में लिखा गया है, “भारत के इतिहास में पहली बार कॉन्ग्रेस के राज में हिंदू भयभीत महसूस कर रहे थे। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कॉन्ग्रेस ने अल्पसंख्यकों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। वह भावनाओं में बहकर हर कार्य कर रहे थे। उस दौरान एक कट्टर हिंदू नेता की आवश्यकता थी, जो हिन्दुओं की रक्षा के लिए आगे आ सके और जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी का विरोध करने की क्षमता हो।”

प्रेम सागर के मुताबिक, “एन वक्त पर भाजपा ने मोर्चा संभाला और एलके आडवाणी ने इसके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने पार्टी के संसाधनों और जनशक्ति का इस्तेमाल जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यकर्ताओं के माध्यम से देश के कोने-कोने में इस बारे में जागरूकता फैलाने और अपने पक्ष में समर्थन हासिल करने के लिए किया। यह भाजपा के उदय और हिंदुत्व आंदोलन की पुरजोर शुरुआत थी।”

बताया गया है कि उस वक्त जब हिंदू कॉन्ग्रेस से आक्रोशित थे, भाजपा अपनी जमीनी स्थिति मजबूत करने में जी जान से जुटी हुई थी। इसको लेकर राजीव गाँधी काफी डर गए थे, उन्होंने भांप लिया था कि इस बार हिंदू उन्हें चुनाव में वोट नहीं करेंगे। इस स्थिति में उन्होंने संभावित विकल्पों को तलाशना शुरू कर दिया था। अयोध्या विवाद, जो तीस साल से अधिक समय से चला आ रहा था, हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा लेने लगा था। हिंदू विवादित ढाँचे बाबरी मस्जिद के द्वार खोलने और यहाँ पूजा करने की माँग कर रहे थे। यह मामला न्यायपालिका के दायरे में था, लेकिन राजीव गाँधी ने हिंदुओं को खुश करने के लिए इसमें हस्तक्षेप किया और दरवाजे खोलने के लिए अपील दायर की गई।

इस मामले में सरकार और न्यायपालिका ने जिस तेजी से काम किया उसने सभी को हैरान कर दिया था। बिना समय बर्बाद किए, राजीव गाँधी सरकार ने गवाही दी कि पूजा के लिए द्वार खोलना सुरक्षित होगा (अर्थात, कानून व्यवस्था को प्रभावित नहीं करेगा) और फैसले के कुछ घंटों के भीतर ही द्वार खोल दिए गए।

यह विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसने दशकों के विरोध और धैर्य के बाद अपनी लड़ाई जीती थी। साथ ही, इसने भाजपा को अपना अगला जनसमूह शुरू करने के लिए एक मंच प्रदान किया। इस तरह, राजीव गाँधी की हिंदू तुष्टिकरण की रणनीति ने भाजपा के विकास के लिए एक मंच तैयार किया था।

‘मैं पागल हूँ क्या जो ये व्रत करूँगी?’: नसीरुद्दीन शाह की बीवी ने ‘करवा चौथ’ पर उगला जहर, ज्योतिष-वास्तु का भी बनाया मजाक

बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की बीवी और एक्ट्रेस रत्ना पाठक शाह (Ratna Pathak Shah) ने हिंदू त्योहार पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने करवा चौथ को महिलाओं की गुलामी और अंधविश्वास का प्रतीक बताते हुए इसे मनाने वाली महिलाओं का मजाक उड़ाया है। रत्ना पाठक शाह ने कहा कि देश में औरतों के लिए अभी भी कुछ नहीं बदला है। देश रूढ़िवादी होता जा रहा है। क्या हम सऊदी अरब जैसा देश बनना चाहते हैं?

हाल ही एंटरटेनमेंट वेबसाइट ‘पिंकविला‘ को एक दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 40 वर्षों में पहली बार उनसे पिछले साल पूछा गया था कि क्या वह अपने शौहर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की सलामती के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं? इस पर उन्होंने कहा, “क्या मैं पागल हूँ, जो ऐसा करूँगी?” उन्होंने आगे कहा, “हमारे देश में औरतें अभी भी सदियों पुरानी प्रथाओं और रीति-रिवाजों को फॉलो करती आ रही हैं। पूरा समाज रूढ़िवादी होता जा रहा है। क्या यह भयावह नहीं है कि पढ़ी-लिखी आधुनिक महिलाएँ भी करवा चौथ का व्रत करती हैं। अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं, जिससे उन्हें विधवा होने का कोप न झेलना पड़े।”

‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ की अभिनेत्री ने कहा, “हम रूढ़िवादी हो रहे हैं। कुंडली दिखो, वास्तु कराओ, अपने ज्योतिषी को दिखाओ के विज्ञापनों की संख्या देखें। नित्यानंद की तरह फनी लोगों को देखिए, जिन्हें कहीं एक जगह मिल गई है। हर जगह एक मूर्ख, बूढ़ा गुरु बनकर बैठा हुआ है और हर कोई उनके पास जाता है। क्या यह आधुनिक समाज की निशानी है। यहाँ दाभोलकर जैसे तर्कवादी दिनदहाड़े मार दिए जाते हैं। उसका मुकदमा अभी चल रहा है और इसके बारे में कुछ नहीं किया जाएगा।”

रत्ना पाठक शाह ने बातचीत में यह भी कहा, “समाज रूढ़िवादी होने पर सबसे पहले औरतों पर शिकंजा कसता है। दुनिया की जितने भी रूढ़िवादी समाज हैं, सब पर नजर डाल लीजिए। आप देखेंगे कि औरतें ही हैं जो सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आज भी औरतों के लिए कुछ भी नहीं बदला है और अगर बदलाव हुआ भी है तो वह बेहद मामूली है। लोग अब अंधविश्वासी होते जा रहे हैं। उन्हें धर्म को स्वीकार कर उसे अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

बता दें कि रत्ना शाह पाठक अक्सर अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रही हैं। उन्होंने करीब 40 साल पहले नसीरुद्दीन शाह से निकाह किया था। उनके दो बेटे हैं, जिनके नाम इमाद और विवान शाह हैं। उन्हें आखिरी बार यशराज फिल्म की ‘जयेशभाई जोरदार’ में देखा गया था। उन्होंने ‘लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का’ ‘खूबसूरत’, ‘कपूर एंड संस’ के अलावा हिट टीवी शो ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ जैसे कई प्रोजेक्ट में काम किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने किया अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल, कहा – माफ़ी नहीं माँगूँगा

कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति पर दिए बयान को लेकर बीजेपी ने लोकसभा में जोरदार तरीके से विरोध किया। बीजेपी ने कहा कि कॉन्ग्रेस आदिवासी और गरीब, महिला विरोधी है। हंगामे के चलते लोकसभा को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे देश का अपमान बताया है। स्मृति ईरानी ने कहा कि जब से द्रौपदी मुर्मू का नाम राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप में घोषित हुआ तब से ही द्रौपदी मुर्मू कॉन्ग्रेस पार्टी की घृणा और उपहास का शिकार बनीं। राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने के बाद भी उनके खिलाफ हमले रुकते नहीं दिख रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता जानते थे कि भारत के राष्ट्रपति को संबोधित करने का यह तरीका न केवल उनके संवैधानिक पद बल्कि समृद्ध आदिवासी विरासत का भी प्रतिनिधित्व करता है। वह जानते थे कि राष्ट्रपति को इस तरह से नीचा दिखाना हमारे देश में महिलाओं की क्षमता को कम करना है।

स्मृति ईरानी ने कहा कि सोनिया गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेसी संवैधानिक पदों पर महिलाओं को नीचा दिखाते रहे हैं। देश के पहले आदिवासी राष्ट्रपति को नीचा दिखाने वाली कॉन्ग्रेस को संसद में और भारत की सड़कों पर माफी माँगनी चाहिए। अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ‘राष्ट्रपत्नी’ के रूप में संबोधित किया, यह जानते हुए भी कि यह उस सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को अपमानित करता है। देश जानता है कि कॉन्ग्रेस आदिवासी विरोधी, दलित विरोधी और महिला विरोधी है।

इधर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ ‘राष्ट्रपत्नी’ वाली टिप्पणी पर अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत भारतीय जनता पार्टी की कई महिला सांसदों ने संसद भवन में विरोध-प्रदर्शन किया। बैनर के साथ महिला सांसदों ने कॉन्ग्रेस पार्टी से माफी की माँग की है। अधीर रंजन के इस बयान के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन भी किया। 

दूसरी ओर, बीजेपी की ओर से विवादित टिप्पणी को लेकर माफी माँगने के बीच कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “माफी माँगने का सवाल ही नहीं है। मैंने गलती से ‘राष्ट्रपत्नी’ कह दिया था। अब अगर आप मुझे इसके लिए फाँसी देना चाहते हैं, तो आप ऐसा कर सकते हैं। सत्ताधारी दल जानबूझकर राई का पहाड़ बनाने की कोशिश कर रहा है।”

वहीं कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी का कहना है कि अधीर रंजन चौधरी ने अपने इस बयान के लिए माफी माँग ली है।

ये थे अधीर रंजन चौधरी के बेतुके बोल

संसद भवन परिसर में कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन चल रहा था, तभी पत्रकारों के सवाल पर जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति के लिए ‘राष्ट्रपत्नी’ शब्द का इस्तेमाल किया। एक पत्रकार ने पूछा था कि कल आप राष्ट्रपति भवन जा रहे थे, जाने नहीं दिया गया। इसके जवाब में कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि आज भी जाने की कोशिश करेंगे। इसके बाद चौधरी ने कहा कि हिंदुस्तान की राष्ट्रपति सबके लिए है। हिंदुस्तान की ‘राष्ट्रपत्नी’ सबके लिए है। हमारे लिए क्यों नहीं। अब इसी को लेकर भाजपा अब हमलावर है।

बकरीद पर गोहत्या के बाद धरना दे रहे थे हिन्दू, राजस्थान पुलिस ने 35 को हिरासत में लिया: महिलाओं को पीटने के भी आरोप

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में गौ हत्या की घटना से तनाव की खबर है। यहाँ 4 दिनों से धरना दे रहे लोगों को पुलिस ने जबरन उठाने का प्रयास किया तो पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने इस घटना में अब तक 35 लोगों को हिरासत में लिया है। मामला बुधवार (27 जुलाई, 2022) का बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय लोग चिड़ियागाँधी इलाके में गोकशी के विरोध में धरने पर बैठे थे। उनका आरोप था कि बकरीद पर गौ हत्या हुई है जिसे जिला प्रशासन नहीं मान रहा था। बाद में मिले मांस को प्रयोगशाला में भेजा गया तो उसके गौमांस होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने इस केस में फारुख, अनवर, अमीन खान और सिकंदर खान पर गौ हत्या व अन्य धाराएँ लगा कर जेल भेज दिया। तब से क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण थे।

बताया जा रहा है कि इस गौ हत्या के विरोध में स्थानीय लोग व कुछ हिन्दू संगठन पिछले 4 दिनों से धरना दे रहे थे। मंगलवार (26 जुलाई) को पुलिस ने उन्हें हटा दिया और कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन इसके विरोध में भारी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए और प्रदर्शन करने लगे। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएँ भी शामिल थीं।

पुलिस ने इन्हे भी बलपूर्वक हटाने की कोशिश की तो घटनास्थल पर ही झड़प हो गई। आरोप है कि पुलिस पर पत्थर भी फेंके गए जिस से कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालत तनावपूर्ण देखते हुए गाँधीबड़ी और चिड़यागाँधी क्षेत्र में कर्फ्यू भी लगा दिया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया आँसू गैस के गोले भी छोड़े। एहतियात के तौर पर क्षेत्र में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है। क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

इस घटना का दावा कर के वायरल हो रहे वीडियो में कुछ पुरुष पुलिसकर्मी एक महिला को पकड़ने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। ऊपर छत से कुछ महिलाएँ शोर मचा रही हैं। बीच में एक पुलिसकर्मी हाथ में पत्थर ले कर वीडियो बना रही महिलाओं को मारने की धमकी भी दे रहा है। आख़िरकार पुलिसकर्मी उस महिला को अपने साथ ले जाते हैं। वहीं दूसरे वीडियो में कई पुलिसकर्मियों ने एक व्यक्ति का कॉलर पकड़ रखा है। हालाँकि ऑपइंडिया इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता।

‘हमें किसी और जेल में ले चलो’: कैदियों द्वारा पिटाई के बाद उमेश कोल्हे के हत्यारों ने अपनी जान को बताया खतरा, NIA कोर्ट से लगाई गुहार

महाराष्ट्र के अमरावती में दवा व्यापारी उमेश कोल्हे की हत्या के आरोपितों ने खुद को मुंबई की आर्थर रोड जेल से कहीं और शिफ्ट करने की माँग की है। इस बाबत उन्होंने NIA कोर्ट में एप्लिकेशन भी दिया है। प्रार्थना पत्र में आरोपितों ने आर्थर रोड जेल में अपनी जान का खतरा बताया है। दावा है कि इस माँग पर NIA व जेल प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उमेश कोल्हे की हत्या करने के आरोप में इस समय आर्थर रोड जेल में 7 आरोपित बंद हैं। इनके नाम 22 वर्षीय मुदस्सिर अहमद उर्फ़ सोनू रज़ा, 25 वर्षीय शाहरुख़ पठान उर्फ़ बादशाह खान, 24 वर्षीय अब्दुल तौफीक उर्फ़ नानू शेख, 22 वर्षीय शोएब खान उर्फ़ भुंया खान, 22 वर्षीय आतिब रशीद, 44 वर्षीय युसूफ खान, 35 वर्षीय इरफ़ान शेख हैं। इरफ़ान शेख को ही इस हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार माना जाता है, जो उमेश कोल्हे का पुराना दोस्त बताया जा रहा है। इसकी उमेश ने कई मौकों पर मदद भी की थी।

गौरतलब है कि एक दिन पहले 27 जुलाई को शाहरुख़ पठान नाम के आरोपित पर जेल में हमला हुआ था। बताया जा रहा है कि वो जेल के अंदर उमेश कोल्हे की हत्या पर अन्य कैदियों के आगे शेखी बघार रहा था। इस बात से नाराज हो कर कल्पेश पटेल, हेमंत मनेरिया, अरविंद यादव, श्रवण अवान और संदीप जाधव नाम के 5 कैदियों ने शाहरुख़ की पिटाई कर दी। पिटाई करने वाले उन सभी पर IPC की धारा 143, 147, 149, 323 के तहत जोशीमार्ग पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर ली गई है।

अमरावती के दवा व्यापारी उमेश कोल्हे की 22 जून, 2022 को हत्या कर दी गई थी। सभी आरोपित उमेश कोल्हे द्वारा नूपुर शर्मा की एक पोस्ट व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किए जाने से नाराज बताए गए थे। उमेश की गर्दन पर चाकू से वार किए गए थे। उनके परिवार के अन्य सदस्य उन्हें बचाने दौड़े तब तक हमलावर भाग चुके थे। मुंबई पुलिस पर शुरुआत में इस केस को गंभीरता से न लेने के भी आरोप लगे थे।