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ED ने एमनेस्टी इंडिया और उसके पूर्व CEO आकार पटेल पर लगाया ₹62 करोड़ का जुर्माना, FEMA प्रावधानों का उल्लंघन कर विदेश से लिया फंड

खुद को मानवाधिकारों का पहरुआ बताने वाले एमनेस्टी इंडिया (Amnesty India) पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरी है। ED ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (AIIPL) पर 51.72 रुपए और उसके पूर्व CEO आकार पटेल पर 10 करोड़ का जुर्माना लगाया है।

ईडी को जानकारी मिली थी कि एमनेस्टी इंटरनेशनल, यूके विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRN) से बचने के लिए FDI के रास्ते अपनी भारतीय संस्थाओं (गैर-एफसीआरए कंपनियों) को बड़ी मात्रा में विदेशी फंड भेज रहा था। इस बात की जैसे ही जाँच एजेंसी को पता चली, उसने एमनेस्टी पर निगाह रखनी शुरू कर दी।

ईडी का कहना है कि इसके पहले भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एफसीआरए के तहत एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट (एआईआईएफटी) और अन्य ट्रस्टों के पंजीकरण या अनुमति से इनकार से इनकार कर दिया था। इसके बाद बावजूद एमनेस्टी इंडिया FCRN का उल्लंघन करते हुए भारत में एनजीओ गतिविधियों का विस्तार करने के लिए विदेशों से भारत मात्रा में धन ले रहा था।

ईडी ने अपने कारण बताओ नोटिस में कहा था कि नवंबर 2013 और जून 2018 के बीच की अवधि में एमनेस्टी इंडिया द्वारा भारी धन लिया गया। उसने इसे विदेश में व्यापार/प्रबंधन परामर्श और जनसंपर्क सेवाओं के तौर पर दिखाया। ईडी का कहना है कि एमनेस्टी इंडिया और कुछ नहीं, बल्कि इसके जरिए विदेशियों से राशि ले रहा था, जो कि FEMA के प्रावधानों का उल्लंघन है।

एमनेस्टी इंडिया से जवाब मिलने के बाद ईडी के निर्णायक प्राधिकरण ने माना है कि एमनेस्टी इंडिया और कुछ नहीं, बल्कि भारत में अपनी गतिविधियाँ चलाने वाला एमनेस्टी इंटरनेशनल लिमिटेड, यूके की एक इकाई है। एमनेस्टी इंडिया ऐसी कई सारी गतिविधियों में शामिल है, जो उसके द्वारा घोषित वाणिज्यिक व्यापार के तहत नहीं आता है।

ईडी का कहना है कि यह सब एफसीआरए जाँच से बचने के लिए व्यावसायिक गतिविधियों की आड़ में विदेशी धन को रूट करने के लिए यह मॉडल लागू किया गया है। माना जाता है कि 51,72,78,111.87 रुपये का जो फंड एमनेस्टी इंडिया को भेजा गया वह भारत में उसकी गतिविधियों को चलाने के लिए एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा भेजा गया था।

शिंजो आबे की मृत्यु पर भारत में राष्ट्रीय शोक: गोली मारने का जश्न मना रहे हैं चीनी, कॉन्ग्रेसी ने भी दिखाई मोदी घृणा

जापान के नारा शहर में शुक्रवार (8 जुलाई, 2022) को जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे (Shinzo Abe) को पीछे से गोली मार दी गई थी। आबे पर उस समय हमला किया गया जब वह पश्चिमी जापान में एक चुनाव प्रचार के दौरान भाषण दे रहे थे। हालाँकि, उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें कुछ देर बाद मृत घोषित कर दिया गया। हालाँकि, हमलावर पकड़ा गया है।

इस खबर से जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया सदमे में है, वहीं चीनी लोगों के साथ ही हमारे देश के वामपंथी और कॉन्ग्रेसी भी जश्न मना रहे हैं। कई चीनी सोशल मीडिया यूजर्स शिंजो पर हुए हमले को लेकर शर्मनाक कमेंट कर रहे हैं। हमले के बाद से ही चीनी वीबो, वीचैट और यूकू सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिंजो आबे की मौत की कामना करने लगे थे। यहाँ तक कि यूजर्स शिंजो की गोली लगाने से गिरने और उसके बाद के हालात का भी मजाक उड़ाते दिखे

साभार-आजतक

शिंजो अबे को गोली लगाने और बाद में मौत के बाद केवल चीनी ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कम्युनिस्टों की ओर से कई ट्वीट किए गए, जिसमें आबे की निंदा की गई और उनकी मौत की कामना करते हुए खुशियाँ मनाई जाने लगीं।

वहीं भारतीय वामपंथी गिरोह और कॉन्ग्रेसी उनके दक्षिण पंथी होने और प्रधानमंत्री मोदी से गहरी दोस्ती की वजह से नफ़रत में कुढ़ते हुए जश्न मना रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि अपने 8 साल के कार्यकाल में शिंजो आबे 4 बार भारत की यात्रा पर आए थे। वहीं उनकी मौत के बाद भारत में एक दिन के राष्ट्रीय शोक की भी घोषणा की गई है। यहाँ तक कि कुछ लोग मजाक बनाते हुए PM मोदी की मौत की कामना से भी नहीं चुके।

चीनी क्यों करते हैं शिंजो आबे से नफरत

चीनियों के शिंजो आबे से नफरत करने का कारण लगभग 90 साल पुराना है। हालाँकि, हाल के कारण भी हैं, लेकिन चीनी प्रतिक्रिया को समझने के लिए, हमें जापान के पूर्व प्रधान मंत्री नोबुसुके किशी (Nobusuke Kishi) के बारे में संक्षेप में जानना होगा।

यह सब 1931 में चीन में मंचूरिया पर जापानी आक्रमण के साथ शुरू हुआ, और बाद में, नोबुसुके किशी नाम का एक व्यक्ति नवगठित जापानी कठपुतली राज्य मांचुकुओ में औद्योगिक विकास का उप मंत्री बन गया।

अपनी नई भूमिका में मांचुकुओ की अर्थव्यवस्था पर किशी का पूरा नियंत्रण था, और उन्हें राष्ट्रीय रक्षा राज्य का समर्थन करने के लिए इस क्षेत्र के औद्योगीकरण का काम सौंपा गया था। किशी ने इस लक्ष्य को हासिल किया और इस क्षेत्र में स्थापित किए गए विशाल औद्योगिक संयंत्रों में कथित तौर पर चीनियों को गुलाम मजदूरों के रूप में काम पर लगाकर भारी मुनाफा कमाया। चीनियों के खिलाफ नस्लवाद और दुर्व्यवहार के व्यापक आरोप थे, जबकि किशी मांचुकुओ में थे। बाद में वह जापान लौट आए और द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी के शामिल होने के शुरूआती वर्षों के दौरान युद्ध को जारी रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किशी ने 1941 में संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध के लिए भी मतदान किया था।

हालाँकि, अगस्त 1945 में जापानी आत्मसमर्पण के बाद, किशी को क्लास ए युद्ध अपराधी घोषित करते हुए सुगामो जेल में रखा गया। लेकिन, युद्ध के बाद जापान का नेतृत्व करने के लिए अमेरिकियों द्वारा उन्हें आदर्श व्यक्ति के रूप में पहचाना गया और 1948 में रिहा कर दिया गया था।

रिहा होने के बाद किशी जल्द ही जापान में सक्रिय राजनीति में लौट आए और 1955 में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (अब तक की सबसे प्रभावशाली जापानी पार्टी) की स्थापना में मदद की, और 1957 में जापान के प्रधान मंत्री बने।

अपने निजी जीवन में, नोबुसुके किशी का एक बेटा नोबुकाज़ु किशी और एक बेटी का नाम योको किशी था। योको किशी ने शिंटारो आबे नाम के एक राजनेता से शादी की। योको किशी और शिंटारो आबे के दूसरे बेटे शिंजो आबे हैं, जिन्हें आज गोली मार दी गई थी, और चीनी इस तरह से अपने दुश्मन की मौत की कामना के साथ उन्हें गोली लगने का जश्न मना रहे हैं।

बता दें कि अपने वंश के अलावा, शिंजो आबे को चीन में उनके मजबूत राष्ट्रवादी रुख और आत्मरक्षा के लिए जापानी सेना को पुनर्जीवित करने के उनके प्रयास के लिए भी नापसंद किया जाता है। आबे पर उनके आलोचकों द्वारा अपनी दक्षिणपंथी और संशोधनवादी नीतियों के माध्यम से देश को इंपीरियल जापान के दिनों में वापस ले जाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया है।

पाकिस्तान के विकेटकीपर का बकरा चोरी, बकरीद पर देनी थी कुर्बानी: बोले कामरान अकमल के अब्बू- घर के बाहर बँधे थे 6 बकरे, सबसे अच्छा वाला चुरा लिया

पाकिस्तान के विकेटकीपर-बल्लेबाज कामरान अकमल (Kamran Akmal) के साथ अजीब घटना हुई है। उनका बकरा चोरी हो गया है। इसे बकरीद पर कुर्बानी देने के लिए 90,000 पाकिस्तानी रुपए में खरीदा गया था। बकरा उनके लाहौर स्थित घर के बाहर बँधा हुआ था।

रिपोर्ट के मुताबिक, अकमल का परिवार कुर्बानी के लिए छह बकरे लाया था। इन्हें लाहौर में अपने घर के बाहर उन्होंने बाँध रखा था। माना जा रहा है कि चोरी तड़के हुई होगी। तब बकरों की देखभाल करने वाला नौकर सो रहा था। इसी का फायदा उठाते हुए चोरों ने बकरे पर हाथ साफ कर दिया होगा।

कामरान अकमल के अब्बू ने बताया, “कुर्बानी के लिए 6 बकरे खरीदे थे। उन्हें अपने घर के बाहर बाँध दिया था। चोरों ने उनमें से सबसे अच्छा बकरा चुरा लिया। उसकी कीमत 90 हजार रुपए थी।” अकमल की हाउसिंग सोसायटी के सिक्योरिटी ने उन्हें भरोसा दिया है कि वे चोरों को पकड़कर बकरा बरामद करने की पूरी कोशिश करेंगे। पाकिस्तान में 9-10 जून को बकरीद मनाई जाएगी।

गौरतलब है कि 2017 के बाद से कामरान अकमल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हैं। फिलहाल वो फ्रेंचाइजी क्रिकेट खेल रहे हैं और पेशावर जाल्मी टीम का हिस्सा है। अकमल ने पाकिस्तान के लिए 157 वनडे, 53 टेस्ट मैच और 58 टी20 मैच खेले हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अकमल ने 11 शतक भी बनाए हैं। अकमल ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत 2002 में की थी।

अकमल ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत 2002 में की थी। लेकिन उनका करियर विवादों में भी घिरा रहा है। शुरुआती दिनों में अपने दस्ताने से छेड़छाड़ के मामले को लेकर वे विवादों से घिरे रहे। इसी तरह से 2009 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी टेस्ट में उन्होंने चार कैच छोड़ और एक रन आउट के मौके को गँवा दिया था। इसकी सजा के तौर पर टीम में उनका डिमोशन किया गया, जिसे उन्होंने मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनके खिलाफ पीसीबी ने डिसीप्लिनरी एक्शन लिया था।

‘हिंदुओं को नौकरी नहीं देता है हमदर्द’: हरियाणा में महापंचायत, कहा- भर्तियों में 50% हिस्सा दो, वरना लगाएँगे ताला

हरियाणा में हुई महापंचायत के बाद दवा कम्पनी हमदर्द (Hamdard) में हिन्दुओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की माँग की गई है। माँग पूरी न होने पर मानेसर स्थित कम्पनी को बंद करवाने का एलान किया गया है। गुरुवार (7 जुलाई 2022) को हुई पंचायत में हमदर्द पर नौकरियाँ में हिन्दुओं के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंचायत में स्थानीय ग्रामीण और हिन्दू संगठन के मौजूद लोगों ने अपनी माँगों को लेकर स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। मानेसर के पूर्व सरपंच राम अवतार के मुताबिक, हमदर्द की फैक्ट्री स्थानीय हिन्दू किसानों की जमीनों पर बनी है। उसे ट्रस्ट के नाम पर भी काफी छूट मिल रही है।

राम अवतार ने बताया कि इतना सब कुछ होने के बाद भी इस दवा कंपनी में किसी भी स्थानीय हिन्दू को आज तक नौकरी नौकरी नहीं दी गई। इसमें प्रशासन से यह भी माँग की गई कि वो फैक्ट्री में जाकर चेक करे कि वहाँ कितने हिन्दू कर्मचारी काम करते हैं।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में शिकायत की गई है कि किसी योग्य व्यक्ति को भी मात्र स्थानीय हिन्दू होने के नाते मौक़ा नहीं दिया जाता। पंचायत में हमदर्द कम्पनी में होने वाली भर्ती प्रक्रिया की जाँच की माँग भी की गई है।

पंचायत में फैसला किया गया है कि अगर हिन्दुओं को 50 प्रतिशत नौकरी की माँग पर जल्द अमल नहीं किया गया तो फैक्ट्री में ताला लगा दिया जाएगा। इस पंचायत को लेकर पुलिस प्रशासन काफी सजग रहा।

मानेसर के DCP महावीर सिंह के मुताबिक, “पंचायत के दौरान और बाद में लॉ एन्ड आर्डर की स्थिति पूरी तरह से सामान्य रही और हालात पर हमारी पूरी नजर है।” द ट्रिब्यून का दावा है कि हमदर्द के चीफ ऑपरेशन्स यूनिट मैनजर शैलेश तिवारी ने कम्पनी पर लगे तमाम आरोपों को निराधार बताए हुए इसे महज पब्लिसिटी स्टंट बताया है।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने हरियाणा में चल रही निजी कंपनियों में हरियाणा के लोगों को 75 प्रतिशत आरक्षण दिलाने का एलान किया था। इसके बाद निजी कंपनियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

‘नूपुर शर्मा गलत नहीं थीं’: इस्लामिक स्कॉलर अतीकुर रहमान की दो टूक, कहा- कोई मौलवी बताए वह कहाँ गलत थीं

इस्लामिक स्कॉलर अतीकुर रहमान का कहना है कि नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद पर जो टिप्पणी की थी, वह गलत नहीं थी। उन्होंने यह बात ‘इंडिया न्यूज’ पर प्रदीप भंडारी के डिबेट शो के दौरान कही। साथ ही इसको लेकर सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई नफरत और धमकियों पर भी अफसोस जताया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को लगता है कि नूपुर शर्मा ने गलत कहा तो किसी वरिष्ठ मौलवी को बताना चाहिए कि वह कहाँ गलत थीं।

दरअसल, डिबेट के दौरान विश्व हिन्दू परिषद के नेता विनोद बंसल ने इस्लामवादियों द्वारा हत्या की धमकियों का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में शो के होस्ट प्रदीप भंडारी ने कहा कि भारत एक लिबरल डेमोक्रेसी वाला देश है। कोई कट्टर धार्मिक देश नहीं है, जहाँ धर्म की आलोचना का मतलब सख्त सजा है।

इसके बाद विनोद बंसल ने कहा, “मैं अतीकुर रहमान के उस बयान का समर्थन करता हूँ कि पैगंबर मुहम्मद के जीवन पर चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि उनके जीवन से बहुत सी चीजें सीखनी हैं। भारत ऐसा देश है, जहाँ हम भगवान राम और कृष्ण के जीवन के बारे में चर्चा करते हैं, ताकि चीजों को सीखें और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित हों। ऐसे में हमें पैगंबर मुहम्मद से क्यों नहीं सीखना चाहिए?”

इसके बाद बंसल ने अतीकुर रहमान से पूछा, “जहाँ तक ​​नुपुर शर्मा का सवाल है, उन्होंने जो भी कहा है वो इस्लामिक किताबों के हवाले से कहा है और यही बात कई इस्लामिक विद्वानों ने भी कही है। इसलिए मैं पूछना चाहता हूँ कि उनके बयान में क्या गलत था? क्या वो गलत बोलीं थीं? या फिर उनकी शैली और व्यवहार गलत था? इस्लामिक ग्रंथों में जो भी लिखा है, वो गलत है? आखिर इस्लामवादी उनका सर तन से जुदा करने की माँग क्यों कर रहे हैं?”

इसके जबाव में रहमान ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि नूपुर शर्मा गलत नहीं थीं। वो गलत नहीं थी। अगर कोई इस्लामी विद्वान या मुस्लिम सोचता है कि वह गलत थीं, तो इस्लाम का दायरा इतना व्यापक है कि उन्हें माफ किया जा सकता है। कोई वरिष्ठ मौलवी बताए कि वो कहाँ गलत थीं।”

अतीकुर रहमान के इस बयान का समर्थन करते हुए प्रदीप भंडारी ने कहा कि धर्म के बारे में इस तरह से बहस होनी चाहिए। जहाँ किसी भी गलतफहमी को बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान से दूर किया जाता है न कि धमकियों से।

इसी डिबेट के दौरान इस्लामिक विद्वान ने ये भी कहा कि इस्लाम के फॉलोवर के तौर पर उन्हें टीवी डिबेट में आने का कोई हक नहीं बनता, अगर वो इतने सक्षम नहीं हैं कि नूपुर शर्मा को आमंत्रित कर उनकी गलत जानकारियों को सही कर सकें। उन्होंने कहा, “मैं इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ आलोचना को आमंत्रित करता हूँ। इससे मुझे दुनिया को यह समझाने का मौका मिल सकता है कि उनका संदेश क्या था। दुनिया में अपना संदेश फैलाने के लिए उन्हें (पैगंबर मुहम्मद) अल्लाह ने कैसे चुना।”

बिहार के जिस प्रोफेसर के ‘वेतन लौटाने’ पर लिबरल लहालोट, उनके खाते में केवल ₹968.95-फिर भी काट दिया ₹23.82 लाख का चेक: अब माँग रहे माफी

कॉलेज में विद्यार्थी नहीं होने के कारण लगभग 3 साल की 24 लाख रुपए का वेतन लौटाने की घोषणा करने वाले डॉ. ललन कुमार ने सोशल मीडिया और मीडिया में छिछालेदर होने के बाद लिखित माफी माँग ली है। ललन कुमार बिहार के मुजफ्फरपुर के नीतीश्वर सिंह कॉलेज में प्रोफेसर हैं। इसके बाद वामपंथियों की प्रोपेगेंडा पर विराम लग गया।

ललन कुमार ने अपने माफीनामे में कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ मनोज कुमार को भेजा है। इसके बाद प्रिंसिपल ने इस माफीनामे को यूनिवर्सिटी के कुलसचिव (VC) डॉ. आरके ठाकुर को भेज दिया। अपने माफीनामे में ललन कुमार ने कहा कि स्थानांतरण कराने के लिए उन्होंने 6 बार प्रयास किए, लेकिन उनका स्थानांतरण नहीं हुआ। इसके बाद वह भावावेश में आकर उन्होंने यह फैसला लिया था।

बता दें कि प्रोफेसर ललन ने कहा था कि पिछले लगभग तीन सालों में उन्होंने एक भी विद्यार्थी को नहीं पढ़ाया है, इसलिए इतने दिनों का वेतन वे लौटा रहे हैं। उनके इस घोषणा के बाद हर चर्चा उनकी ईमानदारी की चर्चा हो रही थी। हालाँकि, सोशल मीडिया पर उनके इस घोषणा को लेकर स्थानांतरण संबंधी समस्या की अटकलें पहले दिन से ही लगाई जाने लगी थी, जो अंतत: सही साबित हुईं।

सुर्खियों में रहने के दौरान यह बात भी सामने आई कि प्रोफेसर ललन कुमार ने विश्वविद्यालय को वेतन वापसी का जो चेक दिया था, उस पर अंकित खाता नंबर में सिर्फ 970.95 रुपए ही थे। जैसे ही यह बात सामने आई प्रोफेसर ललन कुमार की ईमानदारी का आभामंडल बिखरने लगा।

प्रभात खबर के अनुसार, प्रोफेसर ललन कुमार ने विश्वविद्यालय को SBI की मिठनपुरा ब्रांच का चेक दिया था, जिसका नंबर 959622 है। इस चेक पर उनके बैंक का खाता नंबर अंकित था, उसमें हजार रुपए भी नहीं थे।

उन्होंने अपनी नियुक्ति 25 सितंबर 2019 से लेकर मई 2022 तक का वेतन 23.82 लाख रुपए वापस करने का ऐलान किया था। जिस दिन उन्होंने चेक भरकर विश्वविद्यालय को भेजा था, उस दिन उनके खाते में सिर्फ 968.95 रुपए थे।

प्रोफेसर ललन कुमार के मीडिया में लेकर बयान पर कॉलेज के शिक्षक संघ ने एक बैठक भी की। कॉलेज की बैठक में प्रोफेसर ललन कुमार ने कहा कि उन्होंने मीडिया में कहा था कॉलेज में विद्यार्थियों की उपस्थिति कम है, लेकिन मीडिया ने इस उपस्थिति को शून्य घोषित कर दिया।

कॉलेज के शिक्षक संघ (BUTA) के सचिव डॉ. रवि रंजन ने गुरुवार (7 जुलाई 2022) को डॉ. ललन की बातों के आधार पर कहा कि उनका मुद्दा कक्षा में बच्चों का आना ही नहीं है, बल्कि उनका मुद्दा स्नातकोत्तर कॉलेज में स्थानांतरण से हैं। ऐसा बयान उन्होंने पूर्व में भी सोशल मीडिया क की चैनलों को दिया है।

बकरीद पर हरिद्वार में भी कटेंगे जानवर: उत्तराखंड हाई कोर्ट का हुक्म, BJP सरकार ने घोषित किया था बूचड़खाना मुक्त क्षेत्र

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार (7 जुलाई, 2022) को पूरे हरिद्वार जिले को “स्लॉटर-मुक्त क्षेत्र” घोषित करते हुए पुष्कर सिंह धामी सरकार की तरफ से जारी रखे गए बूचड़खानों पर लगाई गई पाबंदी को हटा दिया है। हरिद्वार में बूचड़खानों को पूर्ण रूप से बंद करने के खिलाफ उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हरिद्वार जिले के मैंगलोर इलाके में मुस्लिम समुदाय को बकरीद पर जानवरों कुर्बानी देने की इजाजत दे दी है। हालाँकि, सुनवाई के चलते अदालत ने मैंगलोर नगर पालिका एवं याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि बकरीद पर कुर्बानी केवल बूचड़खाने में ही की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की सुनावाई करते हुए चीफ जस्टिस विपिन सांघी एवं जस्टिस आरसी खुल्बे की बेंच ने निर्देश दिया कि 10 जुलाई को ईद-उल-अजहा अर्थात बकरीद केवल मंगलौर में ही मुस्लिम समुदाय के लोग जानवरों की कुर्बानी दे सकेंगे। ये भी स्पष्ट किया कि पशुओं की बलि मान्यता प्राप्त बूचड़खाने में ही की जाएगी, न कि गलियों और मोहल्लों में।

बता दें कि बीजेपी की उत्तराखंड सरकार ने पिछले साल 3 मार्च 2021 को हरिद्वार के सभी क्षेत्रों को बूचड़खाना मुक्त घोषित कर दिया गया था। सरकार की तरफ से ये आदेश कुंभ को लेकर दिया गया था। उस समय हरिद्वार जिले के बीजेपी विधायकों ने तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर यह माँग की थी कि हरिद्वार जैसे धार्मिक शहर में बूचड़खानों की अनुमति नहीं दी जाए। तत्पश्चात, राज्य सरकार ने जिले के दो नगर निगमों, दो नगर पालिकाओं एवं पाँच नगर पंचायतों में चल रहे बूचड़खानों को जारी एनओसी को कैंसिल कर दिया था।

हरिद्वार के फैसल हुसैन ने दी थी चुनौती

गौरतलब है कि इस मामले में हरिद्वार निवासी फैसल हुसैन ने उत्तराखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि जानवरों का कुर्बानी इस्लाम में एक आवश्यक मजहबी प्रथा है और ईद अल-अजहा (बकरीद) त्योहार के लिए, मंगलौर के बूचड़खाने में जानवरों की कुर्बानी की अनुमति दी जानी चाहिए, जिसका निर्माण पिछले दिनों किया गया था। लेकिन पिछले वर्ष जिले में जानवरों की कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध होने के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ा।

वहीं याचिकाकर्ताओं की तरफ से बकरीद को देखते हुए प्रदेश सरकार के आदेश पर प्रतिबंध लगाने की माँग की गई थी। याचिका में ये कहा गया था कि मंगलौर में लगभग 90 फीसदी मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं, इसलिए बकरीद पर मंगलौर में मुस्लिम समुदाय को कुर्बानी की अनुमति प्राप्त हो।

इस्लामी कट्टरपंथी दे रहे हैं धमकी तो VHP और बजरंग दल से करें संपर्क, कई राज्यों में शुरू किए हेल्पलाइन नंबर

महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे और राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल की नृशंस हत्या के बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) एवं बजरंग दल (BD) ने हिंदुओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और कई अन्य राज्यों में इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ हिंदू समुदाय की मदद करने के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू किए हैं।

इन नंबरों को जारी करने के साथ ही VHP और बजरंग दल ने कहा है कि जिहादी ताकतों से खतरा होने पर पीड़ित हिंदू इन हेल्पलाइन नंबर या संबंधित क्षेत्रों के स्थानीय कार्यकर्ता से संपर्क कर सकते हैं। गुजरात विहिप के महासचिव अशोक रावल ने कहा, “असामाजिक तत्व और देशद्रोही आजकल हिंदुओं को धमका रहे हैं। हाल ही में हमने देखा है कि कैसे मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। हिंदुओं को सिर काटने की धमकी दी जा रही है। ऐसी घटनाएँ हुई भी हैं। हिंदुओं में डर है।”

रावल ने आगे कहा, “मैं सभी हिंदुओं को बताना चाहता हूँ कि हम उनके साथ हैं। हम 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर शुरू कर रहे हैं। कोई भी हिंदू समस्या में है तो हमें कॉल करें। सबसे पहले, उन्हें स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए और आगे की मदद के लिए उन्हें हमसे संपर्क करना चाहिए। पहले हम समस्या को वेरिफाई करेंगे और फिर उनकी मदद करेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने कानूनी और आर्थिक मदद करने की भी बात कही।

इसके अलावा विहिप और बजरंग दल ने कर्नाटक, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, बिहार, ओडिशा और अन्य राज्यों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने काशी प्रांत के 18 जिलों के लिए भी हेल्पलाइन शुरू की है। विहिप के प्रवक्ता ने कहा, “हम हिंदू समुदाय के साथ हैं और इसके लिए हमने काशी प्रांत के 18 जिलों में एक हेल्पलाइन नंबर (9198942004) जारी किया है, ताकि अगर वे पुलिस और जिला अधिकारियों के पास खतरे की आशंका के संबंध में शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं तो उनकी मदद की जा सके।”

प्रांत प्रचार प्रमुख (काशी प्रांत- विहिप) अश्वनी कुमार ने कहा कि विहिप और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने काशी प्रांत जिलों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट पर इस्लामी कट्टरपंथियों से धमकी मिलने पर जल्द से जल्द स्थानीय पुलिस स्टेशन या जिला प्रशासन में अपनी शिकायतों को दर्ज करवाएँ।

विहिप नेताओं ने यह भी दावा किया कि उदयपुर और अमरावती की घटनाओं के अलावा, हिंदू जुलूस (शोभा यात्रा) पर हमले और हिंदू देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी भी आतंक का माहौल बनाने के लिए किए जा रहे हैं। लेकिन हम इसके खिलाफ लड़ेंगे। विहिप नेता ने कहा कि इस्लामिक कट्टरपंथी हिंदुओं को धमकाने और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी देने के लिए वीडियो जारी कर रहे हैं। इस तरह से ये भारत की एकता और संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के अमरावती में 22 जून को केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने नुपुर शर्मा के समर्थन में फेसबुक पोस्ट किया था। इसके अलावा उदयपुर से भी ऐसा ही मामला सामने आया था। यहाँ फेसबुक पोस्ट को लेकर 28 जून को कन्हैया लाल की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। 

जिंदगी की जंग हार गए जापान के पूर्व PM शिंजो आबे, चुनावी कैंपेन के दौरान पीछे से मार दी थी गोली

हमले के शिकार जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की ईलाज के दौरान शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को मौत हो गई है। जापान की स्थानीय मीडिया ने इसकी खबर दी है। आबे को एक हमलावर ने गोली मार दी थी, इसके बाद उनकी हालत गंभीर थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हमलावर ने पीछे से उन पर दो गोलियाँ मारी थीं, इसके बाद वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े थे।

शिंजो आबे शुक्रवार को पश्चिमी जापान के नारा शहर में भाषण दे रहे थे, इसी दौरान उन पर हमला हुआ। उनके सीने में गोली लगी है। जापान के NHK वर्ल्ड न्यूज के मुताबिक, आबे गंभीर रूप से घायल थे। वहीं, संदिग्ध हमलावर को मौके से पकड़ लिया गया है।

आबे पर हमला शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को स्थानीय समयानुसार दिन में 11:30 बजे हुआ। NHK वर्ल्ड न्यूज ने बताया कि गोली चलने जैसी आवाज सुनी गई और एक संदिग्ध को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया।

मौके पर मौजूद NHK वर्ल्ड न्यूज के एक रिपोर्टर ने कहा कि आबे के भाषण के दौरान उन्हें लगातार दो धमाके की आवाज सुनाई दी। जापान टाइम्स के अनुसार, शिंजो आबे पर शुक्रवार को नारा की एक सड़क पर भाषण देने के दौरान पीछे से एक व्यक्ति ने हमला किया।

बता दें कि जापान में उच्च सदन के चुनाव होने हैं। इसके लिए शिंजो आबे वहाँ कैंपेनिंग कर रहे थे। शिंजो आबे सबसे लंबे समय तक जापान के प्रधानमंत्री रहे हैं और वे अपने देश में बेहद लोकप्रिय थे। आबे ने अगस्त 2020 में खराब स्वास्थ्य के कारण पद छोड़ दिया था।

शिंजो आबे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खास दोस्त थे। कई मौकों पर पीएम मोदी और शिंजो एक-दूसरे को याद कर चुके हैं। पिछले साल ही भारत ने शिंजो आबे को पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

Zee न्यूज के पत्रकार को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी ‘राहुल गाँधी की पुलिस’, रोहित रंजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत: सादे कपड़ों में घर पहुँच गई थी छत्तीसगढ़ पुलिस

जी न्यूज के एंकर रोहित रंजन (ZEE News Anchor Rohit Ranjan) को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोहित रंजन के खिलाफ जहाँ-जहाँ भी एफआईआर दर्ज की गई है, वहाँ उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।

रोहित रंजन पर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के वीडियो को कथित तौर पर भ्रामक बनाकर पेश करने के आरोप हैं। इस मामले में उनके खिलाफ कई FIR दर्ज किए गए हैं। इसी तरह के एक मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस ने 5 जुलाई ने गाजियाबाद रहने वाले रोहित रंजन के घर पर धावा बोलकर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की थी।

छत्तीसगढ़ पुलिस 5 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे रोहित के घर पहुँची थी। रोहित जिस सोसाइटी में रहते हैं, वहाँ का सिक्योरिटी गार्ड पुलिस को रोकने की कोशिश की, लेकिन सादी कपड़े में आई छत्तीसगढ़ पुलिस ने उसकी एक बात नहीं सुनी। यह भी कहा जाता है कि पुलिस ने गार्ड का फोन छीन लिया और उसके साथ गाली-गलौज भी की।

छत्तीसगढ़ पुलिस के 10-15 जवानों को बिना वर्दी के रोहित रंजन को गिरफ्तार करने पहुँचने की जानकारी मिलते ही यूपी पुलिस वहाँ पहुँच गई। हालाँकि, एक मामले में यूपी को रोहित ने गिरफ्तार कर लिया और बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

क्या हुई थी गलती?

बता दें कि कुछ दिन पहले राहुल गाँधी का वायनाड में कार्यालय उपद्रवियों द्वारा तोड़ा गया था जिसके बाद उन्होंने एक बयान जारी करते हुए कहा था कि उपद्रवियों को बच्चा मानकर माफ कर रहे हैं क्योंकि उनकी हरकत बचकाना है और वह इस पर नाराज नहीं हैं।

अब चूँकि उस दौरान उदयपुर घटना पर लगातार अपडेट और प्रतिक्रियाएँ आ रही थी, तो डीएनए शो में गलती से इस बयान को उदयपुर घटना पर दिया गया बयान बताकर पेश कर दिया गया। जाहिर है ये गलती छोटी नहीं थी। लेकिन जैसे ही जी न्यूज को अपनी इस गलती का एहसास तो चैनल द्वारा माफी भी जारी की गई और ये भी बताया गया कि उनसे गलती हुई है।

रोहित की माफी

रोहित रंजन ने 2 जुलाई को ट्वीट करते हुए कहा, “कल हमारे शो DNA में राहुल गाँधी का बयान उदयपुर की घटना से जोड़ कर ग़लत संदर्भ में चल गया था, ये एक मानवीय भूल थी जिसके लिए हमारी टीम क्षमाप्रार्थी हैं, हम इसके लिए खेद जताते हैं।”

बता दें कि चैनल द्वारा इस मुद्दे पर माफी माँग लिए जाने के बाद ये मामला शांत नहीं हुआ। जब छत्तीसगढ़ पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुँची, तब रोहित रंजन ने अपने ट्वीट में यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, एसएसपी गाजियाबाद और एडीजी लखनऊ को टैग करते हुए लिखा, “बिन लोकल पुलिस को जानकारी दिए छत्तीसगढ़ पुलिस मेरे घर के बार मुझे अरेस्ट करने के लिए खड़ी है। क्या ये कानून सही है।”