Home Blog Page 2575

भारत के खिलाफ जंग की तैयारी कर रहा PFI: कैडर से हथियार जमा करने को कहा, इस्लामी मुल्कों से मदद में भी जुटा

इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने भारत को 2047 तक इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हर मुस्लिम को PFI से जोड़ना, विरोध करने वालों की हत्या और हिंदू नेताओं की सूची तैयार करना शामिल है। इसके बाद जरूरी हुआ तो सरकार के सशस्त्र विद्रोह करने का रोडमैप तैयार किया गया है। पटना में छापेमारी के बाद PFI के ‘इंडिया विजन 2047’ में इस बात का स्पष्ट खुलासा किया गया है।

PFI ने डॉक्यूमेंट में इसे ‘पूर्ण एवं अंतिम शक्ति प्रदर्शन’ कहा है। उसने कहा कि जब अंतिम शक्ति प्रदर्शन की बारी आएगी, उस समय कई इस्लामी मुल्क उसे सहयोग देंगे और अंत में भारत इस्लाम के ध्वज के नीचे आ जाएगा।

पीएफआई अपने डॉक्यूमेंट में कहता है कि उसे ‘अंतिम शक्ति प्रदर्शन’ से पहले हिंदुओं और हिंदू नेताओं के बारे में विवरण रखना चाहिए। इसका मतलब है कि वह इन हिंदुओं और हिंदू नेताओं की हत्या के लिए जानकारी अपने साथ तैयार रखना चाहता है।

पुलिस द्वारा बरामद PFI के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “अंतिम प्रदर्शन के चरण से पहले हिंदू/आरएसएस नेताओं और उनके कार्यालयों के स्थानों के व्यक्तिगत विवरण के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करना और तैयार रखना अनिवार्य है। विभिन्न स्तरों पर सूचना विंगों को अपने डेटा-बेस का फॉलोअप और अपडेट करते रहना चाहिए। उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने से हमें उनके खिलाफ कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी। हमारे अंतिम लक्ष्य के रोडमैप में सूचना विंग के महत्व को ध्यान में रखते हुए सभी स्तरों पर विंग के कामकाज को मजबूत और तेज करने की जरूरत है।”

पीएफआई अपने ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ को यह कहकर समाप्त करता है कि भारत सरकार के साथ पूर्ण रूप से टकराव की स्थिति में उसे तुर्की जैसे ‘दोस्ताना इस्लामी राष्ट्रों’ से मदद की आवश्यकता होगी। PFI कहता है कि उसने तुर्की के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए हैं, जबकि अन्य इस्लामी राष्ट्रों तक भी पहुँचने की आवश्यकता है।

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “सरकार के साथ पूर्ण शक्ति प्रदर्शन की स्थित में अपने प्रशिक्षित PE कैडरों पर भरोसा करने के अलावा हमें मित्र इस्लामिक देशों से मदद की आवश्यकता होगी। पिछले कुछ वर्षों में PFI ने इस्लाम के ध्वजवाहक तुर्की के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित किए हैं। कुछ अन्य इस्लामी मुल्कों के साथ विश्वसनीय दोस्ती बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।”

दस्तावेज में कहा गया है, “हमारे अच्छी तरह से प्रशिक्षित PE प्रशिक्षकों को कैडरों को हथियारों और विस्फोटकों का प्रशिक्षण देने के लिए राज्य-दर-राज्य भेजा जा रहा है। हमारे पास प्रशिक्षकों की कमी है और संभावित प्रशिक्षुओं की संख्या बहुत बड़ी है। इसके लिए साधन संपन्न उम्मीदवारों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें बेसिक PE कोर्स इंस्ट्रक्टर, सेकेंडरी PE कोर्स इंस्ट्रक्टर और PE मास्टर्स बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।”

डॉक्युमेंट में ST/SC/OBC को मिलाकर सत्ता पर कब्जा करना है। उसके बाद सेना, पुलिस, कार्यपालिका और न्यायपालिका में मुस्लिमों की भर्ती की जाएगी। डॉक्यूमेंट कहता है, “एक बार सत्ता में आने के बाद कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ-साथ पुलिस और सेना में सभी महत्वपूर्ण पदों को वफादार कार्यकर्ताओं से भरा जाएगा। सेना और पुलिस सहित सभी सरकारी विभागों के दरवाजे वफादार मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी को भरने के लिए खोले जाएँगे, ताकि पिछली भर्ती में उनके साथ हुए अन्याय और असंतुलन को ठीक किया जा सके।”

दस्तावेज में आगे कहा गया है कि जिन लोगों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था, वे इस समय ‘खुलकर’ सामने आ जाएँगे और जो मुस्लिमों के हितों के विरुद्ध होंगे उन्हें रास्ते से हटा दिया जाएगा। डॉक्यूमेंट के अनुसार, “इस समय हमारे PE विभाग की कार्रवाई अधिक स्पष्ट हो जाएगी और इस स्तर पर कैडरों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। जो हमारे हित के खिलाफ होंगे, उन्हें खत्म किया जाएगा। ये PE कैडर हमारे विरोधियों द्वारा सुरक्षा बलों पर प्रभाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी काम करेंगे।”

अंतिम चरण में हथियारों के भंडार और सशस्त्र कैडरों को प्रशिक्षित करने के बाद एक इस्लामी संविधान की स्थापना करने और इसके रास्ते में बनने वाले लोगों (खासकर हिंदू) को खत्म करना होगा। डॉक्युमेंट कहता है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

(बिहार के फुलवारी शरीफ में PFI के ट्रेनिंग सेंटर से बरामद ‘इंडिया विज़न 2047’ के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस लिंक को क्लिक करें।)

‘तेरे खून के प्यासे बैठे हैं’: नूपुर शर्मा की तस्वीर अपलोड करने पर गुजरात के कारोबारी को हत्या की धमकी, महिला समेत 3 गिरफ्तार

पैगंबर मुहम्मद पर भाजपा से निलंबित नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के कथित बयान को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस्लामिक कट्टरपंथी हर उन व्यक्तियों को लगातार धमकियाँ दे रहे हैं, जो भी उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं या उनकी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। ताजा मामला गुजरात के सूरत शहर का है, जहाँ इंस्टाग्राम पर नूपुर शर्मा की तस्वीर शेयर करने पर एक युवा बिजनेसमैन को हत्या की धमकियाँ देने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में उमरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

पीड़ित व्यापारी शहर में एक मनोरंजन पार्क का संचालन करता है। उसने पार्क के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर नूपुर शर्मा की तस्वीर को अपलोड किया था। इसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथी मानसिकता वाले सात लोगों ने उन्हें हत्या की धमकियाँ दी। पहले तो उन्होंने इन धमकियों को अनदेखा कर दिया, लेकिन जब ये एक सिलसिला बन गया तो बिजनेसमैन ने पुलिस में शिकायत की। केस दर्ज कर तीन को गिरफ्तार भी कर लिया गया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों में मोहम्मद अयान अताशबाजीवाला, राशिद भूरा और आलिया मोहम्मद नाम की महिला भी शामिल है। ये सभी सूरत के ही रहने वाले हैं। इन सभी के खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), 506 और 507 के तहत केस दर्ज किया गया है।

इन सब के अलावा धमकी देने वालों में मुना मलिक, शहजाद कटपीसवाला, फैजान और एक अन्य है। इन सभी ने बिजनेसमैन की पोस्ट पर धमकी देते हुए कहा था, “सूरत में रहना है या जाना है, फिलहाल क्लोज कर के निकल, तेरे खून के प्यासे बैठे हैं, कहीं वहाँ न आ जाएँ।”

शर्मा का समर्थन करने वालों को धमकियाँ

ये कोई पहली बार नहीं है जब नूपुर शर्मा का समर्थन करने वालों को हत्या की धमकियाँ दी गई हैं। इससे पहले हाल ही में अहमदाबाद के एक वकील ने केवल 3 मिनट के लिए अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर नूपुर शर्मा की तस्वीर लगाई थी। जिसके बाद उन्हें लगातार सिर तन से जुदा वाली धमकियाँ दी जाने लगी। बाद में उन्होंने पुलिस केस किया।

इसी तरह से राजस्थान में बाड़मेर से बीजेपी की आईटी सेल के संयोजक भूर सिंह राजपुरोहित को परिवार समेत खत्म करने की धमकियाँ दी गई थीं। उन्होंने जिहादी शब्द का इस्तेमाल किया था।

औरंगाबाद बना छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद हुआ धाराशिव: महाराष्ट्र की शिंदे सरकार की कैबिनेट ने दी मंजूरी, अब केंद्र के पास जाएगा प्रस्ताव

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) ने शनिवार (16 जुलाई 2022) को कहा कि औरंगाबाद (Aurangabad) का नाम छत्रपति संभाजीनगर (Chhatrapati Sambhaji Nagar) और उस्मानाबाद का नाम धाराशिव (Dhara Shiv) करने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

सीएम शिंदे ने कहा कि उनके पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार द्वारा इन दोनों शहरों का नाम बदलने का निर्णय अवैध था, क्योंकि सरकार अल्पमत में थी।

बता दें कि उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले 29 जून 2022 को औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के बड़े बेटे छत्रपति संभाजी के नाम पर ‘संभाजीनगर’ और उस्मानाबाद का नाम बदलकर धाराशिव करने को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम बदलकर डीबी पाटिल करने की मंजूरी दी थी।

जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के बागी गुट और भाजपा के गठबंधन वाली सरकार बनी तो मुख्यमंत्री शिंदे ने इस फैसले को अवैध बताया था और कहा था कि इस फैसले को वे फिर से मंजूर करेंगे। अब महाराष्ट्र सरकार ने इस फैसले को नए सिरे से लागू किया है।

प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम नाम परिवर्तन से संबंधित महाराष्ट्र विधानसभा में एक प्रस्ताव लाएँगे, जिसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।”

बता देें कि औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर करने की माँग शिवसेना लंबे समय से करती आ रही थी। शिवसेना और उद्धव ठाकरे अक्सर औरंगाबाद को संभाजीनगर कहकर ही संबोधित किया करते थे।

उद्धव ठाकरे के इस फैसले का AIMIM नेता और सांसद इम्तियाज जलील ने विरोध किया था। उन्होंने इसके खिलाफ लड़ने के लिए सड़कों पर उतरने की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा था कि किसी के दादाजी की इच्छा के लिए नाम नहीं बदला जाना चाहिए। औरंगाबाद का नाम ‘मेरे मृत्यु प्रमाण पत्र’ पर होना चाहिए।

उन्होंने कहा था, “औरंगाबाद शहर की पूरी दुनिया में एक ऐतिहासिक पहचान है। लेकिन उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व के मुद्दे को दिखाने और बालासाहेब ठाकरे द्वारा किए गए वादे को पूरा करने के लिए ही निर्णय लिया था।”

पुजारियों को भी देते हो क्या वेतन? : तेलंगाना में इमामों-मुअज्जिनों की सैलरी के लिए KCR ने पास किए ₹17 करोड़, हिंदुओं ने उठाए सवाल

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने प्रदेश के मौलवियों और इमामों को बड़ी सौगात दी है। तेलंगाना के वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने बताया है कि सीएम ने प्रदेश के इमामों व मुअज्जिनों की 3 महीने से बकाया सैलरी के लिए 17 करोड़ रुपए पास कर दिए, बाकी बची रकम 18 जुलाई तक मिलेगी।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष मोहम्मद मसीउल्लाह खान ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री केसीआर को शुक्रिया कहता हूँ कि उन्होंने मुअज्जिनों और इमामों की पिछले 3 महीने से बकाया सैलरी के लिए 17 करोड़ रुपए पास किए। 2 महीने की सैलरी के लिए 10 करोड़ रुपए पहले ही रिलीज किए जा चुके हैं। बाकी के पैसे 18 जुलाई तक मिल जाएँगे।”

बता दें कि तेलंगाना सरकार लंबे समय से प्रदेश के इमामों और मुअज्जिनों को मानदेय के तौर पर 5000 हजार रुपए देती है। इससे प्रदेश के हजारों इमाम-मुअज्जिन फायदा पाते हैं। हालाँकि कुछ समय पहले ऑल इंडिया सूफी उलेमा काउंसिल के मौलाना हकीम सूफी खैरुद्दीन ने के चंद्रशेखर राव को पत्र लिखकर इमामों-मुअज्जिनों की बकाया सैलरी देने की गुहार लगाई थी। साथ ही पत्र में माँग की गई थी कि वक्फ बोर्ड के कर्मचारियों के विरुद्ध एक्शन लिया जाए। उनका आरोप था कि उनके साथ बदसलूकी हुई।

प्रदेश में 7000 मौलवियों की सैलरी बकाया: दावा

मौलाना हकीम ने बताया कि 7000 इमाम और मुअज्जिन 3 साल से पेंडिंग पड़ी सैलरी के लिए लगातार बोर्ड कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन बोर्ड अधिकारियों ने उनकी परेशानी का कोई समाधान नहीं दिया। उनकी शिकायत थी कि बोर्ड के कर्मचारी बोर्ड को अपनी निजी संपत्ति मानने लगे हैं और वहाँ भ्रष्टाचार ही फैला हुआ है। उन्होंने कहा था कि अगर 7000 इमामों की सैलरी नहीं दी गई तो वह लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे।

उल्लेखनीय है कि मौलवियों और इमामों के लिए लंबे समय से की जा रही माँग के बाद 16 जुलाई को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने 17 करोड़ की रकम को पास कर दिया है। इस खबर को सुनने के बाद जहाँ कुछ मुस्लिम केसीआर को धन्यवाद दे रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि आखिर मौलाना और इमाम कौन सी नौकरी कर रहे हैं जो देश के करदाताओं का पैसा उन्हें दिया जा रहा है। इसी तरह हिंदुओं का यह खबर पढ़ने का बाद पूछना है कि क्या पुजारी और पंडितों को भी केसीआर सैलरी देते हैं?

एक यूजर पूछता है, “क्या इमाम और मुअज्जिन कोई सरकारी नौकरी कर रह हैं, या मुअज्जिन होना कोई सरकारी पोस्ट है, ये शुद्ध रूप से तुष्टिकरण की राजनीति है जिस पर करदाताओं के पैसे खर्च हो रहे हैं। शर्म आनी चाहिए केसीआर तुम्हें… क्या तुम सैलरी और पेंशन हिंदू पुजारियों को भी दोगे या केवल मंदिरों से पैसा लेकर उन्हें मुस्लिमों को दिया जाएगा।”

‘उन्हें लगता है मुफ्त की रेवड़ी बाँट कर जनता को खरीद लेंगे’: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर बोले PM – ये मोदी है, ये योगी है…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 16 जुलाई 2022 (शनिवार) को उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के दौरे पर हैं। इस अवसर पर उन्होंने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जालौन जिले में उनका स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी ने मंच पर प्रधानमंत्री को सूर्य मंदिर पर आधारित स्मृति चिन्ह दिया।

जालौन में हुई जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बुंदेलखंड के इतिहास को याद दिलाया। उन्होंने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा, “जिस धरती ने अनगिनत शूरवीर पैदा किए। जहाँ के खून में भारतभक्ति बहती है। जहाँ के बेटे-बेटियों के पराक्रम और परिश्रम ने हमेशा देश का नाम रौशन किया है। उस बुंदेलखंड की धरती को आज एक्सप्रेसवे का ये उपहार देते हुए मुझे विशेष खुशी मिल रही है।”

पीएम मोदी ने कहा, “रेवड़ी कल्चर वाले कभी आपके लिए नए एक्सप्रेसवे नहीं बनाएँगे , नए एयरपोर्ट या डिफेंस कॉरिडोर नहीं बनाएँगे। रेवड़ी कल्चर वालों को लगता है कि जनता जनार्दन को मुफ्त की रेवड़ी बांटकर, उन्हें खरीद लेंगे। हमें मिलकर उनकी इस सोच को हराना है, रेवड़ी कल्चर को देश की राजनीति से हटाना है। एक समय था जब माना जाता था कि यातायात के आधुनिक साधनों पर पहला अधिकार सिर्फ बड़े-बड़े शहरों का ही है। लेकिन अब सरकार भी बदली है, मिजाज भी बदला है। ये मोदी है, ये योगी है। पुरानी सोच को पीछे छोड़कर, हम एक नए तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।”

एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद उन्होंने उस से हुए भौगोलिक परिवर्तन की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से चित्रकूट से दिल्ली की दूरी तो 3-4 घंटे कम हुई ही है, लेकिन इसका लाभ इससे भी कहीं ज्यादा है। ये एक्सप्रेसवे यहां सिर्फ वाहनों को गति नहीं देगा, बल्कि ये पूरे बुंदेलखंड की औद्योगिक प्रगति को गति देगा।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “देश विकास की नई ऊँचाईयों को छू रहा है और 296 किलोमीटर लम्बा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे उसी विकास का एक हिस्सा है।” प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश से अपना पुराना रिश्ता बताया।

वहीं UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड के लिए कई मायनों में फायदेमंद बताया। उन्होंने लिखा, “इस एक्सप्रेस-वे से प्रदेश को आर्थिक मजबूती तो प्राप्त होगी ही, वीर भूमि बुंदेलखंड क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत भी समृद्ध होगी। वहां पर्यटन की अपार संभावनाओं को विस्तार मिलेगा।”

योगी ने आगे कहा, “बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को हरा-भरा बनाने हेतु इसके दोनों किनारों पर 7 लाख पौधे लगाए जाएँगे। UP के 7 जिलों से गुजरने वाला यह एक्सप्रेसवे आवागमन में सुधार करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सहायक सिद्ध होगा।”

बांग्लादेश में हिन्दुओं के घरों-दुकानों में तोड़फोड़-पत्थरबाजी, मंदिरों को भी नहीं छोड़ा: फेसबुक पोस्ट से भड़के, हिन्दू युवक के पिता गिरफ्तार

बांग्लादेश में एक बार फिर मुस्लिम भीड़ ने उत्पात मचाया है। नरैल के लोहागारा के सहपारा इलाके में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हिन्दुओं के एक मंदिर, किराने की दुकान और कई घरों को तोड़ दिया। पुलिस का कहना है कि 18 साल के हिन्दू लड़के की फेसबुक पोस्ट ने मुस्लिमों को हिंसा के लिए उकसाया, जिसके बाद जुम्मे (15 जुलाई 2022) की नमाज के बाद इस घटना को अंजाम दिया गया।

हिन्दू लड़के की फेसबुक पोस्ट से नाराज उन्मादी भीड़ ने पहले तो हिन्दुओं के घरों पर पत्थरबाजी की। इसके बाद वे सहपारा मंदिर में घुस गए और अंदर रखे फर्नीचर को तोड़ दिया। इसके बाद मुस्लिमों ने फेसबुक पोस्ट करने वाले किशोर के पिता की किराने की दुकान में तोड़फोड़ की। मुस्लिमों का आरोप था कि फेसबुक पोस्ट से उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। हालाँकि, इतने पर भी इन लोगों का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ। उन्मादी भीड़ ने हिन्दू किशोर के घर और आसपास के कई अन्य लोगों के घरों में तोड़फोड़ की।

मौके पर पहुँची पुलिस ने उन्मादी भीड़ को काबू करने के लिए आँसू गैस के गोले दागे। आखिरकार स्थिति को काबू करने में देर रात तक का समय लगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक पुलिस ने हमला करने वाले मुस्लिमों में से किसी को भी नहीं पकड़ा है और न ही इस्लामवादियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है। जबकि, दूसरी ओर पीड़त हिन्दू युवक पिता को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान सहपारा के अशोक साहा के रूप में हुई है। वहीं कथित तौर पर फेसबुक पोस्ट लिखने वाला उनका बेटा आकाश वहाँ से भाग निकला।

हालात को देखते हुए उपजिला निर्बाही अधिकारी अजगर अली और लोहागरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी हरन चंद्र पॉल ने गाँव का दौरा कर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने कहा कि हिंसा को रोकने के लिए गाँव में अतिरिक्त पुलिसबलों को तैनात किया गया है। इस घटना को लेकर नरैल के एसपी प्रबीर कुमार रॉय ने कहा, “हम घटना की जाँच कर रहे हैं। हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल स्थिति सामान्य है।”

बांग्लादेशी हिन्दू खतरे में रहने को मजबूर

ये कोई पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले हुए। इसी साल अप्रैल में कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान के मामले में मुंशीगंज में एक हिन्दू शिक्षक हृदय चंद्र मंडल को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्होंने मुस्लिमों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। पिछले साल कथित तौर पर कुरान के अपमान का आरोप लगाकर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने कई हिन्दू घरों को जला दिया था।

मुफ्ती मोहम्मद नहीं चाहते थे, जल्दी रिहा हो बेटी रूबैया, सरकार गिराने के लिए रची थी साजिश: अपहरण कांड की कहानी

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की बहन और केंद्रीय गृहमंत्री रह चुके दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद (Mufti Mohammad Sayeed) की बेटी डॉक्टर रूबैया सईद (Dr. Rubaiya Sayeed) ने 32 साल पुराने अपने चार अपहरणकर्ताओं को कोर्ट में पहचान लिया है। रूबैया के अपहरणकर्ताओं में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) से जुड़ा यासीन मलिक (Yasin Malik) भी था।

साल 1989 के इस हाई प्रोफाइल अपहरण कांड ने देश को झकझोर कर रखा दिया था और सरकार घुटने पर आकर पाँच खूंखार आतंकियों को इसके बदले में रिहा कर रूबैया सईद को छुड़ाया था। इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के हौसले इस कदर बुलंद हुए कि घाटी के हिंदुओं का खुलेआम नरसंहार हुआ और लाखों लोगों को अपनी घर-संपत्ति घाटी में ही छोड़कर जान बचाने के लिए पलायन करना पड़ा।

इस अपहरण कांड को लेकर शुरू से सवाल उठाए जाते रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री की बेटी का खुलेआम अपहरण हो जाना कोई साधारण बात नहीं थी। जिस राज्य में आतंकवाद अपना सिर उठा रहा था, वहाँ केंद्रीय गृहमंत्री की बेटी अकेली घूमे, इस पर भी सवाल उठाए गए और इसके पीछे गहरी साजिश बताया गया।

ऐसे ही एक राजनेता और लेखक ने अपनी किताब में इस साजिश के बारे में विस्तार से लिखा है। इंजीनियर हिलाल वार के आरोप को थोथा इसलिए नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वे हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख घटकों में शामिल रहे हैं।

पीपुल्स पोलिटिकल पार्टी के चेयरमैन इंजीनियर हिलाल वार ने अपनी किताब ‘द ग्रेट डिस्क्लोजर, सीक्रेट अनमास्क्ड’ (The Great Disclosure, Secret Unmasked) में लिखा है कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में फारूक अब्दुल्ला को कमजोर करने के लिए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के नेता और तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने अलगाववादी यासीन मलिक के साथ मिलकर अपनी ही बेटी के अपहरण की कहानी रची थी।

दरअसल, भाजपा के सहयोग से विश्वनाथ प्रताप सिंह (Vishwanath Pratap Singh) की सरकार को सत्ता सँभाले हफ्ता भी नहीं बीता था। 8 दिसंबर 1989 की दोपहर गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद मंत्रालय में पहली बार अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। ठीक उसी वक्त उनकी बेटी रूबैया सईद अपनी मेडिकल इंटर्नशिप की ड्यूटी खत्म कर एलडी हॉस्पिटल से अकेली बस स्टॉप पर पहुँची और एक मिनी बस में सवार हो गई।

वैन लाल चौक से श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम की तरफ जा रही थी और वह चानपूरा चौक के पास जैसे ही पहुँची, वैन में सवार तीन लोगों ने गन प्वॉइंट पर वैन को रोकने के बाद रूबैया सईद को नीचे उतारकर मारुति कार में बैठा लिया। इस कार में JKLF का डॉ. गुरु पहले से बैठा था। उसके बाद मारुति कार रूबैया को लेकर चली गई। वह कहाँ गई, ये किसी को नहीं पता। उस दौरान प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया था कि गन प्वॉइंट पर होने के बाद बावजूद रूबैया के चेहरे पर डर या घबराहट के कोई निशान नहीं थे।

इंजीनियर हिलाल वार कहना है कि अपहरण के बाद रुबैया सईद को कहाँ रखना इसके बारे में तत्कालीन डीजीपी और मुफ्ती मोहम्मद सईद को पता था। दिसंबर 1989 की शुरुआत में मुफ्ती मोहम्मद सईद ने JKLF के कमांडर मियाँ सरवर की तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) गुलाम जिलानी पंडित के मकान पर एक गुप्त बैठक कराई थी। इस बैठक में ही रुबैया सईद के अपहरण साजिश रची गई।

हिलाल वार का सवाल वाजिब है कि जिस समय कश्मीर में आतंकी हिंसा लगातार बढ़ रही थी, उस समय देश के गृहमंत्री की बेटी बिना किसी सुरक्षा के अकेली ही अस्पताल से पैदल बस स्टॉप जाती है। मिनी बस में बैठती है और फिर कुछ आगे जाकर उसे अगवा कर लिया जाता है। यह सब प्री-प्लान्ड था।

जब रूबैया सईद रास्ते से गायब हुईं तो बवाल मच गया। अपहरण का आरोप JKLF के यासीन मलिक और एथलिट से चरमपंथी बने अशफाक वानी पर लगा। बाद में जावेद मीर नाम के चरमपंथी ने स्थानीय मीडिया को फोन कर अपहरण की जिम्मेदारी ली। उसने 20 आतंकियों को छोड़ने के बदले रूबैया को रिहा करने की माँग रखी।

इस दौरान हर तरफ चिंता और बेचैनी थी, लेकिन मुफ्ती मोहम्मद सईद के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। वह शांत रहते थे और कुछ भी नहीं बोलते थे। लोगों में इस बाद को लेकर खुसर-फुसर भी थी कि सईद जानते थे कि उनकी बेटी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा और उसका अच्छे से ख्याल रखा जाएगा।

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के पूर्व मेजर जनरल ओपी कौशिक ने भी साल 2012 में कहा था कि मुफ्ती मोहम्मद सईद नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी जल्द रिहा हो। कौशिक ने दावा किया था कि अपहरण की सूचना मिलने के पाँच मिनट के भीतर एनएसजी ने मालूम कर लिया था कि रूबैया को कहाँ रखा गया है।

जब कौशिक ने सईद को बताया था कि रूबैया को कुछ ही देर में सुरक्षित रिहा करा लिया जाएगा तो सईद भड़क गए और उन्हें तुरंत मीटिंग से बाहर निकलने के लिए कह दिया। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले से एनएसजी को अलग रखने को कहा।

दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने रूबैया को रिहा कराने के लिए डॉ. गुरु को एक चैनल बनाया। इसके अलावा भी कई माध्यमों से JKLF के आतंकियों से मध्यस्थता जारी रही। केंद्र की सरकार ने जम्मू-कश्मीर के फारूक सरकार पर आतंकियों को छोड़ने का दबाव बनाया।

इंजीनियर हिलाल वार कहना है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद जम्मू-कश्मीर की फारूक अब्दुल्ला सरकार गिराने को किसी भी कीमत पर गिराना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जगमोहन (Jagmohan) को राज्यपाल भी बनवाया। अब वह अपनी बेटी के अपहरण की साजिश को मोहरा बना रहे थे। फारूक अब्दुल्ला कई मौकों पर कह चुके हैं कि अगर उस समय वे आतंकियों को नहीं छोड़ते तो उनकी सरकार गिरा दी जाती।

बाद में लगभग सप्ताह भर विभिन्न मध्यस्थों के माध्यम से हुए समझौतों में JKLF पाँच आतंकियों की रिहाई पर राजी हुआ। जम्मू-कश्मीर की फारूक अब्दुल्ला सरकार ने पाँच आतंकियों को छोड़ दिया। इधर, 5 आतंकियों को रिहा किया और उधर रूबैया दिल्ली पहुँच गईं।

उधर मुफ्ती परिवार भी खुश और आतंकी भी खुश, लेकिन अब्दुल्ला पर इस रिहाई के दाग लग गए। आतंकियों की रिहाई का जश्न श्रीनगर में जमकर मनाया गया। लोग उन्माद में सड़कों पर उतर आए और घाटी अलगाववाद और देश विरोधी नारों से गूँज उठी। सड़कों पर खुलेआम नारे लगाए जा रहे थे- “हम क्या चाहते! आजादी” और “जो करे खुदा का खौफ, वो उठा ले क्लाश्निकोव”।

हिलाल वार का कहना है कि अपहरण में सहयोग के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने यासीन मलिक को प्रमुख अलगाववादी नेता के रूप मे प्रचारित कराया और बरसों तक इस मामले को अदालत में लटकाए रखा। उन्होंने कहा कि मुफ्ती मोहम्मद दो बार राज्य के मुख्यमंत्री बने, लेकिन इस कार्रवाई करने की कभी जहमत नहीं उठाई।

सूअर को खोजने में लापरवाही, कलकत्ता HC ने बंगाल पुलिस को फटकारा: जाँच अधिकारी पर कार्रवाई का आदेश, कहा – SP खुद देखें मामला

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार (15 जुलाई, 2022) को कल्याणी कोर्ट परिसर से गायब हुए सूअर को खोजने के आदेश नडिया जिला पुलिस को दिए हैं। इस सूअर का नाम घाना है जिसको खोजने की याचिका कल्याणी कोर्ट के कुछ वकीलों ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी। वकीलों के मुताबिक अदालत कैम्पस में रहने वाली इस सुअर को 25 मार्च, 2022 की सुबह 6 बजे किसी ने चुरा लिया था तबसे उसका कोई अता-पता नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से याचिकाकर्ताओं में से एक एडवोकेट शिवाजी ने बताया, “हम सब ग़ायब हुई घाना (सूअर) से बेहद प्यार करते थे। हम उसका पूरा ध्यान भी रखते थे और उसको खाना भी खिलाते थे। वो हमेशा कोर्ट कैम्पस में ही रहती थी और कभी बाहर नहीं जाती थी। एक सफाईकर्मी ने उसे चोरी होते देखा है। कोई सफ़ेद कार में आया और उसे ले कर भाग गया। स्वीपर द्वारा बनाए गए वीडियो में कार का नंबर भी दिखाई दे रहा है।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक घाना नाम की यह सुअर स्थाई तौर पर ACJM कोर्ट के ही आस-पास रहती थी। वहाँ पर कुछ कुत्ते भी रहा करते थे। 25 मार्च को घाना के गायब होते थी वकीलों और आस-पास के स्थानीय लोगों ने कल्याणी थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। कोर्ट की रात्रि ड्यूटी पर तैनात गार्डों में भी पुलिस को बताया कि घाना को कुछ अनजान लोग कार में लाद कर ले गए। कार का नंबर प्लेट पीले रंग में था।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने इस शिकायत पर कुछ नहीं किया। इसके बाद वकीलों का एक समूह अनुमिता भद्रा के नेतृत्व में सुअर की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाया। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। वकीलों का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। आखिरकार वकीलों ने हाईकोर्ट में घाना सूअर को खोजने की याचिका दाखिल कर दी।

वकीलों की इस याचिका पर जस्टिस शंपा शंकर ने नडिया पुलिस को उसकी लापरवाही पर लताड़ लगाई। जजों ने पुलिस से सवाल किया कि क्या वो उस कार को अब तक नहीं तलाश पाए जिस से घाना का अपहरण किया गया था। जज ने रानाघाट के SP को खुद इस मामले को गंभीरता से लेने के साथ कल्याणी थाना पुलिस के उस जाँच अधिकारी पर कार्रवाई करने को भी कहा जिन्होंने केस में पशु क्रूरता की धारा नहीं लगाई थी। हाईकोर्ट ने ACJM कोर्ट की सुरक्षा बढ़ाने के भी आदेश दिए। इस मुद्दे पर कल्याणी थाना पुलिस ने बिना कोर्ट का आदेश देखे किसी भी टिप्पणी से इंकार कर दिया।

‘तौहीद जमात’ के 7 सदस्यों को HC से अंतरिम जमानत, बुर्का जजमेंट के बाद जजों को दी थी हत्या की धमकी: हाईकोर्ट ने कहा – सभ्यता के दायरे में करें टिप्पणी

कर्नाटक में बुर्का विवाद के दौरान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने और जजों को मौत की धमकी देने वाले ‘तौहीद जमात’ के 7 सदस्यों को मद्रास हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। अभियोजन पक्ष ने उनकी जमानत का विरोध ये कहते हुए किया कि उन्होंने जजों को धमकी दी थी। लेकिन उच्च न्यायालय ने बचाव पक्ष की इस दलील को स्वीकार कर लिया कि वो फिर से जजों के खिलाफ आंदोलन नहीं करेंगे। यह अंतरिम जमानत 15 जुलाई 2022 (शुक्रवार) को दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरिम जमानत मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने दी है। सभी आरोपितों पर कर्नाटक बुर्का मामला में फैसला देने वाले हाईकोर्ट के जज पर अभद्र और धमकी भर्ती टिप्पणी करने का केस दर्ज था। यह टिप्पणी न सिर्फ हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ की गई थी बल्कि उस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ भी अशोभनीय बातें कही गईं थीं।

बताया जा रहा है कि सभी 7 आरोपित तमिलनाडु तौहीद जमात (TNTJ) से जुड़े हुए हैं। इन सभी आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस के मुरली शंकर ने कहा, “इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि कोई भी व्यक्ति अपनी भावनाओं और विचार को रखने के लिए स्वतंत्र है। यहाँ तक कि वो कोर्ट के फैसलों पर भी टिप्पणी कर सकता है। लेकिन वह टिप्पणी सभ्यता के दायरे में होनी चाहिए। इस सभ्यता के दायरे से बाहर निकलने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती है।”

फैसले में कहा गया, “इस मामले में मुख्य आरोपित पहले ही जमानत पा चुका है। बाकी अन्य आरोपित लिखित तौर पर बिना शर्त माफ़ी माँगने और आगे से फिर ऐसी गलती कभी न करने के लिए लिखित तौर पर आवेदन पेश कर रहे हैं। इसी के साथ आरोपित भविष्य में दुबारा ऐसी किसी भी मीटिंग या प्रदर्शन में हिस्सा न लेने का भी संकल्प दिखा रहे हैं। ऐसे में अदालत सभी आरोपितों की अंतरिम जमानत तमाम शर्तों के अधीन स्वीकार करती है।”

जिन आरोपितों की अंतरिम जमानत मंजूर हुई उनके नाम असन बाशा, हबीबुल्लाह, अल मलिक बैज़ुल, सैयद नैना, यासर अरबाथ, सीनी उमर और अल्ताफ उसैन हैं। जमानत के साथ इन सभी को शहर न छोड़ने और अपने लोकल पुलिस स्टेशन में नियमित रूप से हाजिरी लगाने के आदेश दिए गए।

गौरतलब है कि 17 मार्च 2022 को तमिलनाडु तौहीद जमात (TMTJ) नाम के संगठन ने मदुरै में एक आयोजन के दौरान जजों को मौत तक की धमकी दी थी। इस वीडियो में रहमतुल्लाह नाम के आरोपित ने धमकाते हुए कहा, “अगर हिजाब मामले में जज की हत्या हो जाती है तो वो अपनी मौत के खुद जिम्मेदार होंगे। कर्नाटक हाईकोर्ट ने ये आदेश अमित शाह के इशारे पर दिया है। फैसला देने वाले जज को अपने फैसले पर शर्म आनी चाहिए।”

इस दौरान धनबाद में मार्निंग वॉक पर निकले एक जज की ऑटो द्वारा धक्का दे कर की गई हत्या का भी जिक्र किया गया था। पुलिस ने इसी मामले में FIR दर्ज कर के आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

भगत सिंह ‘आतंकवादी’: एक सिख सांसद ने कही ये बात, वो सांसद खालिस्तान का समर्थक है, भिंडरावाले को आदर्श मानता है

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के सांसद सिमरनजीत सिंह मान द्वारा भगत सिंह को ‘आतंकवादी’ कहने के बाद कड़ा विरोध जताया जा रहा है। पंजाब सरकार में मंत्री गुरमीत सिंह मीत ने संगरूर सांसद से अपने बयान पर बिना शर्त माफ़ी माँगने को कहा है। भगत सिंह के त्याग को सर्वोच्च बलिदान बताते हुए भगवंत मान सरकार द्वारा उन्हें शहीद का दर्ज देने का भी एलान किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री गुरमीत सिंह ने कहा, “शिरोमणि अकाली दल के सांसद ने उन भगत सिंह के बलिदान का अपमान किया है, जिन्होंने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। भगत सिंह मेरे भी आदर्श हैं। भगत सिंह के साथ राजगुरु और सुखदेव का भी बलिदान पूरे देश के युवाओं को गर्व की अनुभूति करवाता है।”

इसी बयान में मंत्री गुरमीत ने आगे कहा, “मैं स्पष्ट करता हूँ कि हमारी सरकार सरदार भगत सिंह को शहीद का दर्ज देगी। अगर जरूरत पड़ी तो हम शिरोमणि अकाली दल के सांसद के इस बेहद अपमानजनक और आपत्तिजनक बयान पर कानूनी कार्रवाई भी करवाएँगे।”

शिरोमणि अकाली दल के सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने 14 जुलाई (गुरुवार) को यह बयान दिया था। उनके बयान का खुद उनकी ही पार्टी में विरोध हो रहा है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने अपनी ही पार्टी के इस सांसद के बयान की आलोचना की है।

गौरतलब है कि अकाली दल के सांसद सिमरनजीत सिंह हरियाणा के करनाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेस में हिस्सा ले रहे थे। इस दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि देश के लिए बलिदान हुए भगत सिंह को इतिहास में आतंकी क्यों कहा जाता है? इसका जवाब देते हुए सांसद ने कहा, “भगत सिंह ने न सिर्फ जवान अंग्रेज अफसर की हत्या की थी बल्कि उसी के साथ उन्होंने एक अमृतधारी सिख सिपाही चन्नन सिंह को भी मार डाला था। बाद में उन्होंने संसद में बम फेंका। आप ही बताओ वो आतंकी हुए या नहीं?”

सांसद सिमरनजीत सिंह और खालिस्तान

सिमरनजीत सिंह मान की प्रोफाइल देखें तो पता चलेगा कि वो हमेशा से खालिस्तानी समर्थक रहे हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार के कारण उन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़ दी थी। इतना ही नहीं उनकी पार्टी के ऊपर ब्लू स्टार की बरसी पर स्वर्ण मंदिर में खालिस्तानी नारे लगाने के इल्जाम भी लगते रहे हैं। उनके कई सोशल मीडिया पोस्ट में खुलेआम खालिस्तान की माँग की गई है।

एक सोशल मीडियो पोस्ट में तो सांसद सिमरनजीत ने ये भी दिखाने का प्रयास किया कि हिंदू राष्ट्र में सिखों के हाल बुरे हैं। उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को लगता है कि वह सिखों को मशीन गन से डरा देंगे और इससे वह खालिस्तान की माँग नहीं करेंगे। लोकसभा उपचुनावों में संगरूर से जीत हासिल करने के बाद सांसद सिमरनजीत ने कहा था कि ये खालिस्तानी जरनैल सिंह भिंडरावाले की दी गई सीख की जीत है।