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जुबेर पर एक और फंदा: 10 महीने पहले भारत के खिलाफ दुनिया भर के मुस्लिमों को भड़काया, एक्शन में UP पुलिस… दाखिल किया वारंट B

फैक्ट चेक के नाम पर हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाले ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबेर एक और एफआईआर अब चर्चा में। यह FIR उत्तर प्रदेश की लखीमपुर खीरी पुलिस द्वारा दर्ज की गई है। यह FIR सुदर्शन न्यूज़ के लखीमपुर खीरी ब्यूरो आशीष कुमार कटियार ने 18 सितम्बर 2021 को कोर्ट के माध्यम से दर्ज करवाई थी।

शिकायतकर्ता आशीष कुमार कटियार का दावा है कि UP पुलिस ने जुबेर को अपनी कस्टडी में लेने की औपचारिकताएँ शुरू कर दीं हैं। आशीष कटियार ने इस FIR में ट्विटर को भी आरोपित बनाया है। आशीष ने अपनी शिकायत में लिखा है:

“जुबेर ने 14 और 15 मई 2021 को सुदर्शन न्यूज़ पर चले एक ग्राफिक्स को मदीना की अल-नवाबी मस्जिद बता कर पूरे देश में साम्प्रदायिकता फैलाने का प्रयास किया। यह ग्राफिक्स सुदर्शन न्यूज़ पर इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध 2021 पर आधारित एक शो के दौरान एक प्रतीकत्मक चित्र के तौर पर प्रयोग किया गया था जिसका जुबेर द्वारा दावा किया गया कि मस्जिद से कोई संबंध नहीं था। जुबेर ने ऐसा कर के दुनिया भर में भारत की छवि को भी धूमिल करने का प्रयास किया है।”

आशीष कटियार की इस शिकायत में जुबेर पर पूरी दुनिया के मुसलमानों को भारत के विरुद्ध एकजुट करने और कोरोना जैसे संकट काल में भी साम्प्रदयिक उन्माद फ़ैलाने का आरोप लगा है। आशीष के मुताबिक मई 2021 में लखीमपुर खीरी पुलिस ने उनकी शिकायत को दर्ज करने से मना किया।

यूपी पुलिस को दी गई शिकायत की कॉपी

पुलिस के मना करने के बाद आशीष ने जुबेर पर कार्रवाई के लिए सितंबर 2021 में कोर्ट से गुहार लगाई। आख़िरकार अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ये FIR दर्ज हुई, जिसमें जुबेर पर IPC की धारा 153-A के तहत थाना मोहम्मदी में केस दर्ज किया गया।

FIR कॉपी

ऑपइंडिया से बात करते हुए शिकायतकर्ता आशीष कटियार ने कहा, “लगभग 10 महीने से केस पेंडिंग पड़ा रहा। आखिरकार दिल्ली पुलिस और सीतापुर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब लखीमपुर पुलिस ने भी जुबेर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। खीरी पुलिस ने मुझे बताया कि उसने जुबेर की कस्टडी संबंधी कागजात संबंधित अधिकारियों और अदालत तक जमा करवा दिए हैं। जल्द ही जुबेर को खीरी में आना होगा।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए खीरी पुलिस के SHO मोहम्मदी ने कहा, “हमने सीतापुर जेल में वारंट B दाखिल कर दिया है। आगे की नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।” (वारंट B उस मुल्जिम को अपने मुकदमे में शामिल करने को कहा जाता है, जिस पर कई अन्य थानों, जिलों या प्रदेशों में केस दर्ज हों।)

गौरतलब है कि हिन्दू संतों को आपत्तिजनक शब्द ‘हेट मोंगर्स’ बोलने के आरोप में मोहम्मद जुबेर पर सीतापुर के खैराबाद थाने में FIR दर्ज हुई है। इस FIR में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जुबेर को 7 जुलाई 2022 को तमाम शर्तों के अधीन 5 दिनों की आंतरिम जमानत मिली है।

दूसरे धर्म के व्यक्ति को मंदिर जाने से नहीं रोका जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट, ईसाई गायक येसुदास के भजन का दिया उदाहरण

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि यदि किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति की हिंदू धर्म के किसी विशेष देवता में आस्था है और वह उनके दर्शन करना चाहता है तो उसे उस देवता के मंदिर में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता और ना ही उसे प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति पीएन प्रकाश और न्यायमूर्ति आर हेमलता की खंडपीठ ने यह फैसला एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के मामले में दी। याचिका में कोर्ट से यह निर्देश देने का आग्रह किया गया था कि गैर-हिंदुओं को तिरुवत्तर के अरुल्मिघू आदिकेसव पेरुमल तिरुकोविल के कुंबाबीशेगम उत्सव में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

याचिका सी सोमन नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी। दरअसल, कुंबाबीशेगम उत्सव के आयोजन के लिए प्रसारित एक निमंत्रण पत्र में एक मंत्री के नाम का भी उल्लेख है, जो एक ईसाई हैं। इसी को आधार बनाकर यह याचिका दायर की गई थी।

कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि जन्म से ईसाई डॉ केजे येसुदास के गाए भक्ति गीत विभिन्न हिंदू मंदिरों में बजाए जाते हैं। यहाँ तक कि नागौर दरगाह और वेलंकन्नी चर्च में बिना किसी आपत्ति के बड़ी संख्या में हिंदू उपासक नियमित तौर पर जाते रहते हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जब इस तरह के बड़े धार्मिक उत्सव होते हैं तब यह अधिकारियों के असंभव है कि वह हर व्यक्ति की धार्मिक पहचान की जाँच करे और फिर उसे मंदिर में आने की अनुमति दे।

कोर्ट ने कहा, “हमारी राय में जब किसी मंदिर का कुंबाबिशेगम जैसा सार्वजनिक उत्सव मनाया जाता है तो अधिकारियों के लिए मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने के लिए प्रत्येक भक्त की धार्मिक पहचान की जाँच करना असंभव हो जाता है। इसके अलावा, यदि कोई दूसरे धर्म से संबंधित व्यक्ति एक विशेष हिंदू देवता में विश्वास रखता है तो उसे रोका नहीं जा सकता है और न ही किसी मंदिर में उसके प्रवेश को प्रतिबंधित किया जा सकता है।”

Twitter को अब नहीं खरीदेंगे एलन मस्क: कहा- कंपनी बार-बार छुपा रही सूचनाएँ, ₹79 अरब का लग सकता है चूना

टेस्ला (Tesla) कंपनी के मालिक और दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क (Elon Musk) ने शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को सोशल मीडिया साइट ट्विटर (Twitter) की डील को रद्द करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कंपनी ने विलय (Merger) के कई प्रावधानों का उल्लंघन किया है। वहीं, ट्विटर ने इस पर कानूनी कार्रवाई करने की बता कही है।

मस्क ने कहा कि वह सौदे से इसलिए भी अलग हो रहे हैं, क्योंकि ट्विटर ने कंपनी के उच्च अधिकारियों और एक तिहाई प्रतिभा अधिग्रहण टीम को निकाल दिया, जो कि ‘वर्तमान व्यावसायिक संगठन के भौतिक घटकों को काफी हद तक संरक्षित करने’ के अपने दायित्व का ट्विटर द्वारा उल्लंघन है।

बता दें कि मस्क ने अप्रैल 2022 में माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के 100% शेयर खरीदने के लिए $54.20 (करीब 4000 रुपए) प्रति शेयर के हिसाब से भुगतान करने का ऑफर दिया था, जिसकी कुल कीमत करीब 44 बिलियन डॉलर (करीब 3400 अरब रुपए) है। बाद में यह सौदा तय हो गया था।

मस्क द्वारा विलय से पीछे हटने के बाद ट्विटर के चेयरमैन ब्रेट टेलर ने माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर कहा कि बोर्ड ने विलय समझौते को लागू करने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा, “ट्विटर बोर्ड श्री मस्क के साथ सहमत मूल्य और शर्तों पर लेनदेन को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और विलय समझौते को लागू करने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रहा है। हमें विश्वास है कि हम डेलावेयर कोर्ट ऑफ चांसरी में जीत हासिल करेंगे।”

एक फाइलिंग में मस्क के वकीलों ने कहा कि ट्विटर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नकली या स्पैम खातों की जानकारी के लिए कई अनुरोधों का जवाब देने में विफल रहा या मना कर दिया। यह किसी भी कंपनी के व्यवसायिक प्रदर्शन के लिए प्रमुख है।

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, फाइलिंग में कहा गया है, “ट्विटर उस समझौते के कई प्रावधानों का उल्लंघन कर रहा है। ऐसा लगता है कि उस गलत और भ्रामक जानकारियों पर विश्वास करके मस्क ने विलय समझौता किया था।”

मस्क की घोषणा के बाद ट्विटर के शेयर में गिरावट जारी है। कारोबार के दिन ट्विटर के शेयर 6% गिरकर 34.58 डॉलर पर पहुँच गए। यह मस्क द्वारा अप्रैल में प्रति शेयर $54.20 भुगतान करने की सहमत मूल्य से 36% कम है। हालाँकि, जब मस्क द्वारा ट्विटर के अधिग्रहण की खबर आई तो शेयरों में उछाल देखने को मिला, लेकिन जल्दी ही इस सौदे पर छाए ग्रहण को लेकर शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई।

मई में मस्क में ट्विटर के अधिग्रहण के डील को होल्ड कर दिया था। मस्क का कहना था कि यह डील तब तक होल्ड पर रहेगा, जब तक कि कंपनी यह साबित नहीं कर देती कि प्लेटफॉर्म के कुल यूजर में स्पैम बोट 5 प्रतिशत से कम हैं।

मस्क द्वारा सौदे से पीछे हटने के बाद उन्हें 1 बिलियन डॉलर (लगभग 79.33 अरब रुपए) की पेनाल्टी देनी पड़ सकती है। विलय समझौता पत्र के अनुसार, अगर मस्क इस सौदे पर पूरा नहीं करते हैं या उससे अलग होते हैं तो उन्हें ट्विटर को 79.33 अरब रुपए देना होगा।

अब TMC नेता वसीम रजा ने रखा नूपुर शर्मा का सिर काटकर लाने वाले के लिए ₹5 लाख का ईनाम, सोशल मीडिया पर किया ऐलान

पैगंबर मुहम्मद पर कथित बयान को लेकर नूपुर शर्मा को लेकर लगातार कट्टरपंथी धमकियाँ दे रहे हैं और उनकी हत्या करने पर ईनाम घोषित कर रहे हैं। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल के कोलकाता से टीएमसी नेता वसीम रजा का वीडियो सामने आया है। इसमें रजा ने नूपुर शर्मा का सिर काटकर लाने वाले को 5,00,000 रुपए का इनाम देने की घोषणा की है।

ट्विटर यूजर अंशुल सक्सेना ने वसीम रजा के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीन शॉट शेयर किया है। इसमें वसीम रजा ने कहा, “मैं वसीम रजा पूरी जिम्मेदारी के साथ गुस्ताख-ए-रसूल की सजा के तौर पर नूपुर शर्मा का सिर काटकर लाने वाले के लिए 5 लाख रुपए का बाउंटी रखता हूँ। भाईयों हमारे पैगंबर मुहम्मद सल्लाहो अलैहिवसल्लम के प्यार में इस पोस्ट को शेयर करो।”

इस बीच वसीम रजा का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो सीएम ममता बनर्जी के साथ दिखाई दे रहा है।

उल्लेखनीय है कि इस्लामिक कट्टरपंथियों ने अब तक नूपुर शर्मा को एक हजार से अधिक धमकियाँ दी हैं। उनका समर्थन करने वालों का सिर कलम कर दिया गया है।

पहले भी रखे गए थे इनाम

हालाँकि, ये कोई पहली बार नहीं है जब इस्लामिक कट्टरपंथियों ने नूपुर शर्मा पर ईनाम रखा हो। इससे पहले देश ही नहीं पाकिस्तान के चरमपंथी संगठन टीटीपी ने भी नूपुर शर्मा की हत्या करने वाले को करीब 20 लाख रुपए देने का ऐलान किया था। इसी तरह से 30 मई को हैदराबाद की स्थानीय पार्टी AIMIM (इंकलाब) ने नूपुर शर्मा की हत्या करने वाले को 1,00,00,000 रुपए का इनाम देने का ऐलान किया था। इसके नेता कवी अब्बासी ने शर्मा को ‘सफेदपोश वेश्या’ कहा था।

8 जून 2022 को सूरत में भीम सेना ने शर्मा की जुबान काटने पर 1 करोड़ रुपए का ऐलान किया था। मिनी पाकिस्तान कहे जाने वाले हरियाणा के मेवात में एक इस्लामिस्ट ने नूपुर शर्मा की जुबान काटने वाले को 2 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था।

आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार रखें हिंदू, दिलाने में हम करेंगे मदद: हरियाणा VHP, हेल्पलाइन नंबर भी जारी

हरियाणा विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि जिहादी खतरों को देखते हुए आत्मरक्षा के लिए हथियारों के लाइसेंस दिलाने में वह हिंदुओं को सलाह और मदद उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही उसने बजरंग दल का क्षेत्रीय हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया। इस नंबर पर कोई भी हिंदू मदद माँग सकेगा।

विहिप हरियाणा प्रांत अध्यक्ष व रिटायर्ड जस्टिस पवन कुमार ने कहा कि राष्ट्र विरोधी ताकतें देश को कमजोर करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि पथराव, तोड़फोड़, मजहबी कट्टरता और जेहादियों द्वारा हिन्दुओं की हत्याएँ अब स्वीकार्य नहीं हैं। भारत की अखण्डता, सहिष्णुता, सम्प्रभुता, हिन्दू देवी-देवताओं, धार्मिक आस्थाओं पर निरंतर प्रहार पर अब पूर्ण विराम लगाना आवश्यक है। 

वहीं, विहिप ने देश के विभिन्न राज्यों के लिए बजरंग दल का हेल्पलाइन नंबरों की सूची शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को जारी की। संगठन ने यह भी कहा कि वह जल्द ही हेल्पलाइन नंबरों की एक और सूची जारी करेगा, जो देश के उन शेष क्षेत्रों को कवर करेगा जो पहली सूची में शामिल नहीं हैं।

अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से विश्व हिंदू परिषद ने ट्वीट किया, “जिहादी ताकतों के खतरों से पीड़ित हिंदू अपने संबंधित क्षेत्रों के हमारे बजरंग दल हेल्पलाइन नंबर से संपर्क कर सकते हैं। बाकी राज्यों के नंबर जल्द ही जारी किए जाएँगे।”

इस सूची में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, लद्दाख, कर्नाटक, बिहार, ओडिशा, झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित भारत के विभिन्न राज्यों के बजरंग दल हेल्पलाइन नंबर शामिल हैं। इससे पहले, विहिप ने संबंधित क्षेत्रों में बजरंग दल के सदस्यों के नामों के साथ सूची प्रकाशित की थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से सूची में संशोधन कर नामों को हटा दिया गया।

विहिप के डॉ. सुरेंद्र जैन ने 6 जुलाई को एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि बजरंग दल के सदस्य उन हिंदुओं की मदद करेंगे, जिन्हें इस्लामिक जिहादियों से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि विहिप हेल्पलाइन नंबर जारी करेगी। इसी को लेकर विहिप ने 8 जुलाई 2022 को सूची साझा की।

बता दें कि इस्लामवादियों द्वारा भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद देश में सांप्रदायिक द्वेष की स्थिति पैदा हो गई है। सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा का समर्थन करने वालों को इस्लामवादियों से जान से मारने की धमकी मिल रही है।

राजस्थान के उदयपुर में 28 जून को हिंदू व्यक्ति कन्हैया लाल का सिर काट दिया गया था। अमरावती में फर्मासिस्ट उमेश कोल्हे को 21 जून को सिर कलम कर दिया गया था। इस्लामी जिहादी नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर देश के कई अन्य हिंदुओं को धमकी दे रहे हैं। खतरे में पड़े ऐसे हिंदुओं की मदद के लिए बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद आगे आए हैं।

जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की हत्या पर भी कॉन्ग्रेस ने की ओछी राजनीति, अग्निपथ से जोड़ झूठ फैलाने की कोशिश, बीजेपी ने लगाई लताड़

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की दुर्भाग्यपूर्ण हत्या का सहारा लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी अपने राजनीतिक हितों को साधने की कोशिश कर रही है। दरअसल, जापान के नारा शहर में एक व्यक्ति द्वारा आबे को गोली मारने के बाद कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट सुरेंद्र राजपूत ने ट्विटर के जरिए दावा किया कि आबे का हत्यारा जापानी आत्मरक्षा बलों (एसडीएफ) का सदस्य था। इसी के साथ ही उन्होंने इसे भारत सरकार की अग्निपथ योजना से जोड़ने की कोशिश की।

ट्वीट में राजपूत ने कहा, “शिंजो आबे को शूटर तेत्सूयायागामी ने गोली मार दी। उसने जापान के एसडीएफ यानी सेना में बिना पेंशन के काम किया था।”

कॉन्ग्रेस नेता का ट्वीट

उल्लेखनीय है कि जापानी आत्मरक्षा बल जापान के वो सैन्य बल हैं, जिसमें जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स, जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स शामिल हैं। जापानी रक्षा बलों के कर्मियों को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद एकमुश्त भुगतान मिलता है, लेकिन उनके लिए नियमित पेंशन योजना नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने एसडीएफ की तुलना अग्निपथ से करने की कोशिश की, ताकि इस हत्या पर अपने लिए पॉलिटिकल प्वाइंट हासिल कर सकें। जबकि, दुनियाभर के नेताओं ने इसकी निंदा की है।

इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत के इस बयान की निंदा की है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कॉन्ग्रेस आधिकारिक प्रवक्ता ने शिंजो आबे की दर्दनाक हत्या को अपनी क्षुद्र राजनीति की पूर्ति के लिए इस्तेमाल किया।

शहजाद पूनावाला ने कहा, “एक लिमिट होनी चाहिए। यह शर्मनाक और काफी निंदनीय है। यह न केवल तथ्यों से रहित है, बल्कि एक महान वैश्विक नेता और भारत के सच्चे मित्र की मृत्यु का राजनीतिकरण करने के लिए नैतिकता की भावना से भी रहित है। मुझे उम्मीद है कि कॉन्ग्रेस बिना देर किए उन पर कार्रवाई करेगी।”

बता दें कि जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की शुक्रवार को नारा शहर में एक बदमाश ने गोली मारकर हत्या कर दी। पश्चिमी जापान में एक रैली को संबोधित करते हुए आबे को पीछे से गोली मार दी गई। जिसके बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना को लॉन्च किया है। इसका कॉन्ग्रेस समेत विपक्षी पार्टियाँ लगातार विरोध कर रही हैं।

कश्मीर में अमरनाथ गुफा के पास बादल फटा, कैंप के बीच से गुजरा सैलाब, NDRF ने बताया- 10 लोगों की मौत, सामने आए दहलाने वाले वीडियो

जम्मू-कश्मीर में पवित्र अमरनाथ गुफा से कुछ दूरी पर बादल फटने के कारण मची तबाही में कई लोगों के मारे जाने की खबर है। बताया जा है कि शुक्रवार (8 जुलाई 2022) की शाम 5:30 बजे के आसपास बादल फटा, जिसमें कई टेंट और लंगर बह गए हैं। इस आपदा में 10 लोगों के मारे जाने की खबर है।

NDRF के DG अतुल करवाल ने बताया, “हमारी 1 टीम गुफा के पास तैनात रहती है, वो टीम तत्काल बचाव कार्य में जुट गई थी। 2 टीम पास में है जिसमें से 1 वहाँ पहुँचकर काम पर लग गई है। एक टीम शामिल होने वाली है। वहाँ मौजूद हमारे लोगों के मुताबिक, 10 लोगों के मौत की खबर है और 3 को वहाँ से जीवित निकाला गया है।”

घटना के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य संबद्ध एजेंसियाँ बचाव अभियान में लग गई हैं। घायल लोगों को एयरलिफ्ट कर अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। वहीं, लापता लोगों की जोरशोर से तलाश शुरू कर दी गई है। बता दें कि कुछ दिन पहले मौसम विभाग ने अमरनाथ गुफा के पास मौसम खराब रहने का अनुमान जताया था।

बादल फटने की यह इस घटना अमरनाथ गुफा से 2 किलोमीटर दूर हुई है, जिसमें 25 टेंट और 2 लंगर बहने की बात कही जा रही है। अमरनाथ गुफा से दो किलोमीटर दूर बादल फटने की घटना हुई है। उसके बाद पानी का तेज बहाव आया, जहाँ टेंटों में ठहरे लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

ITBP के अनुसार, भारी बारिश और भूस्खलन के कारण पानी की तेज धार बालटाल में ठहरे तीर्थयात्रियों की टेंटों की तरफ आई, जिसमें कई लोग बह गए। हालाँकि, इलाके में अब बारिश रूक चुकी है और बचाव अभियान को तेज कर दिया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से फोन पर बात की। जानकारी के अनुसार, प्रशासन की टीम बादल फटने के बाद की स्थिति का आकलन कर रही है। फिलहाल नुकसान की आधिकारिक सूचना नहीं है।

गौरतलब है कि अमरनाथ गुफा में शिवलिंग का दर्शन करने के लिए शुक्रवार को करीब 8-10 हजार लोग यात्रा में शामिल थे। हालाँकि, तीर्थयात्रियों का यह समूह अलग-अलग जगहों पर ठहरा है। यात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

बता दें कि अमरनाथ यात्रा कोरोना के कारण पिछले दो वर्षों से स्थगित थी। इस साल यह यात्रा 30 जून से शुरू हुई है, जो 43 दिन बाद 11 अगस्त को समाप्त होगी। माना जा रहा है कि इस साल की यात्रा में करीब तीन लाख शामिल होंगे।

इस साल की अमरनाथ यात्रा में अब तक 65,000 से अधिक तीर्थयात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए हैं। हालाँकि, मौसम खराब होने के कारण बीच में 2-3 दिन यात्रा को रोकना भी पड़ा था।  

राजस्थान के एक गाँव में 51 हिंदुओं ने ली भू समाधि, गहलोत सरकार के ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ के खिलाफ 16 दिन से चल रहा आंदोलन

राजस्थान में भरतपुर की डीग तहसील में गहलोत सरकार द्वारा कराए जा रहे परिसीमन के विरोध में 51 हिन्दू ग्रामीणों ने भूमि समाधि ले ली है। हिन्दू ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसा करके गहलोत सरकार मुस्लिमों को फायदा पहुँचाना चाहती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी माँगों को सरकार ने नहीं माना तो वे रेलवे ट्रैक को जाम करेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलनरत किसानों ने जहाँ पर भू समाधि ली है, वो जगह भरतपुर-अलवर राजमार्ग के पास स्थित है। बीते 16 दिनों से ग्रामीण सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार या उसके किसी अधिकारी के कानों में जूँ तक नहीं रेंगी है। इससे पहले 29 जून को ये ग्रामीण अलवर-भरतपुर स्टेट हाईवे को भी जाम कर चुके हैं, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका। गहलोत सरकार है कि ग्रामीणों की सुनने का नाम ही नहीं ले रही।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि गहलोत सरकार डीग पंचायत समिति की 9 पंचायतों का परिसीमन करके उसे सीकरी पंचायत समिति और नगर पंचायत से जोड़ रही है। ग्रामीण इसी का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन 9 पंचायतों का परिसीमन किया जा रहा है, वो पहले से ही डीग से जुड़ी हुई हैं। लेकिन अगर परिसीमन हुआ तो सीकरी काफी दूर हो जाएगा। ऐसे में उन्हें सरकारी कामकाज के लिए परेशान होना पड़ेगा। जबकि अभी तक डीग पंचायत समिति पास में होने के कारण वो आसानी से अपना काम करवा पाते थे।

इस बीच इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता नेम सिंह ने आरोप लगाया कि ऐसा करके राजस्थान सरकार मुस्लिमों को फायदा पहुँचाना चाहती है। अगर परिसीमन हुआ तो थाना और सरकारी दफ्तर सबकुछ ग्रामीणों की पहुँच से दूर निकल जाएँगें।

आंदोलनकारियों का कहना है कि वो अभी गाँधीवादी तरीके से अपनी माँगें मनवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अगर माँगें नहीं मानी तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

केरल के सरकारी मेडिकल कॉलेज में तालिबानी मॉडल, लैगिंक राजनीति पर इस्लामिक संगठन का कार्यक्रम, पर्दा डाल कर मेल-फीमेल छात्रों के बीच बनाई दीवार

केरल के त्रिशुर मेडिकल कॉलेज द्वारा एक इस्लामिक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस सभा में तालिबानी तरीके से पुरुष और महिला छात्राओं को एक पर्दा लगाकर अलग कर दिया गया। ताकि कोई एक-दूसरे को न देख सके। इस सभा की खास बात ये रही कि इसका मुद्दा ‘लैंगिक राजनीति’ थी। ऑर्गनाइजर वीकली की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आयोजन विवादित इस्लामिस्ट अब्दुल्ला बेसिल ने कट्टरपंथी संगठन विजडम (Wisdom) के बैनर तले किया था।

इस कार्यक्रम का शीर्षक था ‘द लाइव्स एंड आइडियल्स बिहाइंड जेंडर पॉलिटिक्स।’ इसमें लैंगिक राजनीति और भेदभाव पर कई लेक्चर्स दिए गए, जिसमें मेडिकल कॉलेज के पुरुष और महिला छात्राएँ शामिल हुईं। ये मामला शायद दब गया होता, लेकिन इस कार्यक्रम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे इसका खुलासा हुआ। उल्लेखनीय है कि तालिबानी मॉडल में भी इसी तरह से कक्षाओं में छात्र और छात्राओं को अलग-अलग करने के लिए पर्दे का सहारा लिया जाता है।

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद सितंबर 2021 में तालिबान इन्हीं कारणों को लेकर सुर्खियों में था। उसने भी देश में कक्षाओं में पर्दों का इस्तेमाल करके लड़के-लड़कियों को अलग किया था। लैंगिक भेदभाव भरा फैसला होने के कारण कई सोशल मीडिया यूजर्स ने तालिबान के इस फैसले की आलोचना की थी।

इस्लामिक संगठन के द्वारा सरकारी मेडिकल कॉलेज में आयोजित किया गया कार्यक्रम (फोटो साभार: हिन्दू पोस्ट)

इधर केरल में कार्यक्रम के आयोजक अब्दुल्ला बासिल ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में ‘लैंगिक राजनीति’ पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित की गई थी। बासिल ने तंज कसते हुए कहा कि मुझे उन लोगों के लिए दया आती है, लैंगिक डिस्कोर्स में धार्मिक दृष्टिकोण को नहीं पचा पा रहे हैं। ये उदारवाद से काफी अलग है।

हाल में पर्दा डालकर पुरुष और महिलाओं को किया अलग (फोटो साभार: हिन्दू पोस्ट)

दरअसल, इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले संगठन के ही एक पदाधिकारी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरों को शेयर किया था। जब लैंगिक आधार पर अलगाव किए जाने पर नेटिजन्स ने खिंचाई की तो संगठन के पदाधिकारी ने कुतर्क देते हुए कहा कि लोग केवल अपनी हताशा को दिखा रहे हैं। संगठन का कहना था कि लैंगिक आधार पर अलग करने के लिए पर्दा डालना कोई गलत बात नहीं है।

इस बीच कॉलेज प्रशासन ने यह कहते हुए इस मामले से खुद को अलग कर लिया है कि उसका इससे कोई लेना-देना है। कॉलेज यूनियन ने कहा, “ऐसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना हमारे कॉलेज का स्टैंड नहीं है। यह कॉलेज हमेशा प्रगतिशील विचारों के साथ खड़ा है।”

गौरतलब है कि केरल में लगातार इस्लामिक कट्टरपंथ अपना पैर पसारता जा रहा है, जो कि चिंता का विषय है। पिछले साल सितंबर 2021 में एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें राज्य में सक्रिय इस्लामिक स्टेट स्लीपर सेल के अस्तित्व को लेकर संदेह को बल दिया था। केरल की मेडिकल एजुकेशन पॉलिसी भारत विरोधी एजेंडे का प्रचार करने में लिप्त है। दो साल पहले अक्टूबर 2020 में केरल राज्य चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ रामला बीवी ने एक तालिबानी फरमान जारी किया था कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रक्षा बंधन त्योहार नहीं मनाया जाएगा।

UP पुलिस के हत्थे चढ़ गए वकील परवेज अली, पड़ोसी सदर पठान के नाम से स्पीड पोस्ट भेज हिंदू व्यापारी को दी थी हत्या की धमकी

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने एक ऐसे वकील को पकड़ा है, जिसने अपने पड़ोसी के नाम से एक हिंदू व्यापारी को हत्या करने की धमकी दी थी। इस वकील का नाम परवेज अली है। उसने हिंदू व्यापारी को अपने पड़ोसी सदर पठान के नाम से स्पीड पोस्ट भेजकर धमकी दी थी। परवेज को गुरुवार (7 जुलाई 2022) को गिरफ्तार किया गया।

गाजियाबाद के SP (देहात) ईरज राजा ने बताया, “4 जुलाई 2022 को थाना लोनी बॉर्डर क्षेत्र में रहने वाले देवेंद्र ढाका नाम के व्यक्ति को स्पीड पोस्ट से भेजे गए एक पत्र के माध्यम से जान से मारने की धमकी मिली थी। इसे गंभीरता से लेते हुए देवेंद्र को सुरक्षा मुहैया कराई।” उन्होंने बताया, “हमने परवेज नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो लोनी बॉर्डर इलाके में रहता है। इसने यह लेटर अपने पड़ोसी को फँसाने के लिए लिखा था। वह अपने पड़ोसी पर FIR और पुलिस कार्रवाई चाहता था। हमने CCTV और अन्य इलेक्ट्रानिक सबूतों की जाँच के बाद पाया कि उस लेटर को सदर पठान ने नहीं, बल्कि परवेज ने लिखा था।”

परवेज ने सदर पठान के नाम से जो धमकी भरा पत्र भेजा था, उसमें लिखा था, “उदयपुर में कन्हैया लाल के बाद अब तू मरने को तैयार हो जा। तू मुसलमानों के खिलाफ बहुत पोस्ट डालता है। मैं तुझे खुला चैलेंज देकर मारूँगा। फिर मैं शहीद भी हो जाऊँ या गिरफ्तार भी हो सकता हूँ, लेकिन हम पठान छिपकर वार नहीं करते। आज से अपनी और अपने पुत्र रचित की उल्टी गिनती शुरू कर दे। मैं जामिया से पढ़ा हूँ और तेरे खिलाफ वहाँ मैंने पूरी फौज बना दी है। अब तू मेरा नाम भी सुन ले और नंबर भी। मुझे सनकी यूँ ही नहीं कहते हैं। तेरी मौत। सदर पठान पुत्र शाहिद, खेकड़ा, ऊपरकोट।”

धमकी भरा पत्र (साभार- दैनिक भस्कर)

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन देवेंद्र ढाका को धमकी दी गई वे व्यापारी नेता भी हैं। पुलिस के मुताबिक परवेज उस डाकघर की CCTV में दिखाई दिया, जहाँ से धमकी वाली चिट्ठी भेजी गई थी। पुलिस पूछताछ में परवेज ने बताया कि कुछ दिनों पहले उसका सदर खान से झगड़ा हुआ था और तब से वह बदला लेना चाह रहा था।