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मोदी को फँसाने के लिए 5+25 लाख रुपए, सोनिया गाँधी के सलाहकार अहमद पटेल की साजिश: तीस्ता सीतलवाड़ को लेकर SIT का खुलासा

गुजरात दंगों में रची गई साजिश की जाँच कर रही SIT (विशेष जाँच दल) ने बताया कि नरेंद्र मोदी को फँसाने के लिए रची साजिश के सूत्रधार कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल थे। तीस्ता सीतलवाड़, IPS संजीव भट और पूर्व DGP आरबी श्रीकुमार को इस साजिश को अंजाम देने का जिम्मा सौंपा गया था। इस प्लानिंग के तहत गुजरात की तत्कालीन भाजपा सरकार को भी अस्थिर करना था। SIT ने यह जाँच रिपोर्ट अहमदाबाद के एक सेशन कोर्ट में शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को दाखिल की है।

कॉन्ग्रेसी नेता और एक समय सोनिया गाँधी के राजनैतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल की मृत्यु हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साजिश में मुख्य रूप से तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निशाने पर थे। उनके अलावा कई अन्य ऐसे लोगों को भी निशाने पर लिया गया था, जो बेगुनाह थे।

तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका का विरोध करते हुए SIT ने कोर्ट को बताया कि गुजरात की छवि को धूमिल करने के लिए तीस्ता सीतलवाड़ को तत्कालीन राज्यसभा सांसद और तब की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल से निर्देश मिले थे। तीस्ता की जमानत के विरोध में SIT ने कोर्ट में 2 गवाह भी पेश किए हैं। न्यायालय में दिए गए शपथपत्र में SIT ने कहा:

“तीस्ता की अहमद पटेल से मीटिंग हुई थी और पहली किश्त के तौर पर तीस्ता को 5 लाख रुपए मिले थे। अहमद पटेल ने ये रुपए एक गवाह के माध्यम से भिजवाए थे। 2 दिनों बाद तीस्ता सीतलवाड़ और अहमद पटेल फिर से अहमदाबाद के एक सर्किट हाउस में मिले, जहाँ तीस्ता को फिर से 25 लाख रुपए दिए गए। यह पैसा किसी भी राहत कार्य में प्रयोग नहीं हुआ।”

SIT ने कोर्ट को आगे बताया, “तीस्ता सीतलवाड़ ने मीटिंग के सप्ताह भर में ही दंगों के दौरान बने एक राहत कैम्प में राजनैतिक लोगों के साथ मीटिंग की थी। दंगों के 4 महीने बाद तीस्ता सीतलवाड़ और IPS संजीव भट ने अहमद पटेल से उनके दिल्ली आवास पर गुप्त मुलाक़ात की थी।” SIT का दावा है कि बाद में ये दोनों तत्कालीन केंद्र सरकार के कुछ अन्य नेताओं से भी मिले थे। इस मुलाकात का मकसद गुजरात भाजपा के सीनियर नेताओं को फँसाना था।

गुजरात दंगों में रची गई साजिश की जाँच कर रही SIT का दावा है कि 2007 में केंद्र सरकार ने तीस्ता सीतलवाड़ को पद्मश्री सम्मान उनके गुजरात सरकार पर दुर्भावनापूर्ण आरोपों के चलते दिया था। जाँच एजेंसी का ये भी दावा है कि तीस्ता ने ऐसा अपने राजनैतिक करियर को बनाने और राज्यसभा की सीट पाने के लिए किया था।

पेश किए गए गवाह का दावा है कि तीस्ता ने एक बड़े राजनेता से सवाल भी किया था कि जावेद अख्तर और शबाना आज़मी जैसे फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को सांसद बना दिया गया लेकिन उन्हें क्यों नहीं? तीस्ता की राजनैतिक मंशा के लिए SIT ने साल 2006 में उनके पंचमहल में मीडिया को दिए गए बयान को शामिल किया है, जिसमें उन्होंने 3 दिनों के भीतर गुजरात सरकार के इस्तीफे की बात कही थी।

SIT ने अपनी जाँच में गुजरात दंगों में मुख्य चेहरा बनाए गए कुतुबुद्दीन अंसार का भी जिक्र किया, जिनकी मीडिया के आगे परेड करवा कर लोगों से चंदा जुटाया गया था। जाँच एजेंसी के मुताबिक खुद कुतुबुद्दीन को जब लगा कि उनका पैसे जुटाने और राजनीति के लिए दुरूपयोग हो रहा तो वो वापस घर लौट आए थे।

शपथ पत्र के मुताबिक तीस्ता सीतलवाड़ ने दिवंगत पूर्व गृहमंत्री हिरेन पंड्या के पिता को भी सम्पर्क किया था, जिनकी हत्या कर दी गई थी। तीस्ता ने हिरेन के पिता विट्ठलभाई को भी अपने NGO सिटीजन फॉर जस्टिस एन्ड पीस (CJP) में शामिल होने का ऑफर दिया था। इस दौरान तीस्ता ने एडवोकेट सोहैल द्वारा बनाई गई एक शिकायत पर विट्ठलभाई से दस्तखत करने को भी कहा था लेकिन कई बेगुनाहों का नाम देख कर विट्ठलभाई ने मना कर दिया था।

SIT ने तीस्ता सीतलवाड़ पर चंदे से मिले पैसे का निजी कार्यों में उपयोग करने का भी आरोप लगाया है। तीस्ता पर फ़िरोज़ खान पठान नाम के एक व्यक्ति ने FIR भी दर्ज करवा रखी है। फ़िरोज़ के मुताबिक तीस्ता के खातों में लाखों रुपए दंगों में मारे गए लोगों के पुनर्वास और उनके म्यूजियम बनाने के लिए डाले थे लेकिन उन पैसों को कहीं और प्रयोग किया गया। SIT ने तीस्ता सीतलवाड़ पर ज़किया जाफरी को सिखाने-पढ़ाने का भी आरोप लगाया है, जो एक पूछताछ के दौरान निकल कर आए तथ्यों के आधार पर है।

बिहार में हुआ पैदा, परिवार वाले पाकिस्तान में, काम दुबई में… हिंदुओं का सफाया करने का सपना देखने वाले ताहिर की A2Z कहानी

पटना के फुलवारी शरीफ (Phulwari Sharif, Patna) में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ट्रेनिंग कैंप पर छापेमारी के बाद उससे जुड़े संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है। इस मामले में बिहार पुलिस ने गुरुवार (14 जुलाई 2022) को मरगूब अहमद दानिश उर्फ ताहिर उर्फ इलियास को गिरफ्तार किया है।

ताहिर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस को उसकी मोबाइल ऐसी सामग्री मिलीं, जो जाहिर करती हैं कि उसके विदेशों में भी संपर्क हैं। वह न सिर्फ पाकिस्तान स्थित गजवा-ए-हिंद (Ghazwa-E-Hind) से जुड़ा हुआ है, बल्कि उसके तार बांग्लादेश से लेकर यमन तक जुड़े हुए हैं।

ताहिर आतंकी संगठन गजवा-ए-हिंद के WhatsApp ग्रुप से जुड़ा था। इस ग्रुप में कई पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और यमन के कट्टरपंथी जुड़े हुए थे। इस ग्रुप का फैजान नाम का शख्स लगातार उसके संपर्क में था। इस WhatsApp ग्रुप का आइकॉव और चैट देश विरोधी, संप्रदाय विरोधी और आपत्तिजनक हैं।

इसके अलावा, ताहिर पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक के ग्रुप से भी जुड़ा था। इस ग्रुप में 181 लोग जुड़े हुए थे। इस ग्रुप का एडमिन जीशान नाम का एडमिन पाकिस्तानी है और उसने ताहिर को भी एडमिन बनाया था। इसका मकसद था भारत में 2023 में जिहाद के नाम डायरेक्ट एक्शन करना और खिलाफत का ऐलान करना।

पुलिस के अनुसार, ताहिर साल 1996 में फुलवारी शरीफ में पैदा हुआ। हालाँकि, उसका परिवार मूलत: गया जिले के बिठो शरीफ का रहने वाला है। उसके परिवार के कुछ लोग पाकिस्तान के कराची में भी बसे हुए हैं। वह साल 2006 से 2020 तक दुबई में काम करता था। इसने मदरसे से हाफिज बस्तानिया एवं फोकानिया की पढ़ाई की है।

पुलिस सूत्रों के हवाले के से आजतक का कहना है कि जाँच के दौरान यह बात सामने आई है कि ताहिर साल 2016 से ही पाकिस्तान में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के संपर्क में था। वह WhatsApp, ईमेल और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के माध्यम से उनसे जुड़ा हुआ था।

ताहिर के खिलाफ पुलिस भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 121, 121A, 120, 120B, 505 (1) (B), 153 (A) और आईटी एक्ट की धारा 66 के अंतर्गत केस दर्ज करके कार्रवाई कर रही है।

इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) की जाँच में पता चला है कि देश विरोधी साजिश रचने वालों में झारखंड पुलिस में पूर्व दारोगा मोहम्मद जलालुद्दीन, अतहर परवेज, अरमान मलिक, ताहिर अहमद, शब्बीर मलिक और शमीम अख्तर के अलावा और भी कई लोग शामिल हैं।

इस मामले में पुलिस ने रियाज मॉरिफ, सनाउल्लाह, तौसीफ, महबूब आलम, एहसान परवेज, मो. सलमान, मो. रसलान (सचिव, बिहार-बंगाल क्षेत्रीय समिति PFI), महबूब-उर-रहमान, इम्तियाज दाऊद, महबूब आलम, खलीकुर जमा, मो. अमीन आलम (टीचर ट्रेनिंग कॉलेज गोनपुरा फुलवारीशरीफ के कर्मचारी), जीशान अहमद, रियाज अहमद, मंजर परवेज, नुरुद्दीन जंगी उर्फ एडवोकेट नुरुद्दीन, मो. रियाज (PFI का राष्ट्रीय नेता), मो. अंसारुल हक (मिथिलांचल यूनिट का निदेशक प्रभारी), मंजहरुल इस्लाम, अब्दुर्रहमान, मो. मुस्तकीन, अरमान मलिक, परवेज आलम (राज्य कमेटी सदस्य PFI मिथिलांचल) के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

ये सभी फुलवारी शरीफ आते थे और यहाँ मुस्लिमों का ब्रेनवॉश कर उन्हें देश के खिलाफ जिहाद के लिए भड़काते थे और भारत को साल 2047 तक इस्लामिक मुल्क बनाने के लिए PFI से जोड़ने का काम करते थे। FIR में यह भी कहा गया है कि केरल और तमिलनाडु से 12 लोग आए थे, जो तलवार चलाने की ट्रेनिंग देेते थे।

गाँव में मुस्लिमों की आबादी 90%, झारखंड के इस सरकारी विद्यालय में हिन्दू बच्चों को नहीं मिलता प्रवेश, 5 छात्रों का नाम काट कर निकाला: रिपोर्ट

झारखंड (Jharkhand) से एक बार फिर से मुस्लिम बहुल इलाके (Muslim Dominated Area) में हिन्दुओं (Hindus) के साथ भेदभाव और अत्याचार की खबर सामने आई है। इस बार गढ़वा (Garhwa) जिले का है, जहाँ एक गाँव में मुस्लिम आबादी अधिक होने के चलते वहाँ के सरकारी स्कूल ने हिन्दू छात्रों को प्रवेश देना बंद कर दिया है। साथ ही पाँच हिंदू बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना रंका ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले मानपुर गाँव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, हथिया पत्थर का है। यहाँ पर बीते कई साल से स्कूल में हिन्दुओं का नामांकन ही नहीं किया जाता है। स्कूल की मैनेजमेंट कमिटी और प्रिंसिपल का कहना है कि गाँव में मुस्लिमों की जनसंख्या करीब 90 फीसदी से अधिक है, इसलिए यहाँ के स्कूलों में केवल मुस्लिमों का ही नामांकन किया जाएगा।

न्यूज के लिए साभार: प्रभात खबर

करीब चार साल पहले इसी स्कूल के पाँच हिन्दू छात्र-छात्राओं का नाम काटकर उन्हें बाहर निकाल दिया गया था। उसके बाद से स्कूल में किसी भी हिन्दू छात्र को प्रवेश नहीं दिया गया। निकाले गए बच्चों में कक्षा तीन के दिलीप कुमार, पंकज कुमार, रानी, कक्षा 2 की अमृता कुमारी और कक्षा एक की नेहा कुमारी है। स्कूल से बाहर किए जाने के बाद से ये छात्र मानपुर से दूर एक स्कूल में पढ़ने लगे।

मजदूरी करते हैं बच्चों के परिजन

जिन बच्चों का नाम काटकर उन्हें स्कूल से बाहर निकाला गया था, उनके पिता बाहर रहकर मजदूरी करते हैं और उनकी माँ ही अभिवावक के तौर पर घर में बची हैं। इन बच्चों की माँओं का आरोप है कि स्कूल का प्रिंसिपल महताब अंसारी मुस्लिम समुदाय से आते हैं। प्रिंसिपल का कहना है कि यहाँ केवल मुस्लिम ही पढ़ेंगे। इस मामले के सामने आने के बाद प्रखंड के शिक्षा अधिकारी कामता प्रसाद ने मामले की जाँच की बात कही है।

प्रिंसिपल का बयान

उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक महताब अंसारी का कहना है कि जिन छात्रों को बाहर किया गया है, उनकी स्कॉलरशिप आई थी। स्कूल ने इसका इस्तेमाल खराब हैंडपंप को बनवाने के लिए कर लिया। लेकिन बच्चों ने स्कॉलरशिप के लिए हंगामा करना शुरू कर दिया था। इसके बाद उनका नाम काटा गया था।

‘इस्लामी मुल्क बनते ही भारत से हिंदुओं का सफाया’: इराक के यजीदियों की तरह नरसंहार का PFI का इरादा

‘कायर हिंदुओं’ को सबक सिखाने की बात करते हुए कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का 8 पन्नों वाला रोडमैप का दस्तावेज बिहार पुलिस ने बरामद किया है। इसमें भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए चरणबद्ध तरीकों के बारे में बताया गया है।

इन्हीं चरणबद्ध तरीकों में एक है ST/SC/OBC को साथ लेकर देश में मुस्लिमों की सरकार बनाना और फिर सेना और कार्यपालिका में न्यायपालिका पर कब्जा करना। इसके बाद हिंदुओं को पूरी तरह सफाया करना उसका उद्देश्य है।

हमें आतंकी संगठन ISIS (इस्लामिक स्टेट) द्वारा इराक में अल्पसंख्यक समुदाय के यजीदियों के साथ किए गए नरसंहार को याद करना चाहिए। PFI का मंसूबा भी हिंदुओं के लिए यही है और उसने अपने डॉक्यूमेंट में इसका उल्लेख भी किया है।

PFI के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों (यानी हिंदुओं) का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

इस्लामी राष्ट्र की अपनी अवधारणा को अंजाम देने के लिए PFI बड़े पैमाने पर मुस्लिमों को हथियारों और विस्फोटों की ट्रेनिंग दे रहा है। उसके दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि भारत सरकार के फिट इंडिया और ‘स्वस्थ लोग स्वस्थ राष्ट्र’ अभियान का फायदा उठाकर वह जगह-जगह अपने ट्रेनिंग कैंप स्थापित कर रहा है और हथियारों का प्रशिक्षण दे रहा है।

बरामद दस्तावेज में कहा गया है कि भारत का शासक रहा मुस्लिम वर्ग अब दोयम दर्जे का नागरिक बन कर रह गया है। उसमें कहा गया है, “अंग्रेजों के समय में संपत्ति के अधिकार आदि के मामले में पहले मुस्लिमों को प्राप्त विशेषाधिकारों को वापस ले लिया गया था, सरकारी नौकरियों से वंचित कर दिया गया था और व्यापार सुविधाओं को प्रतिबंधित कर दिया गया था।”

उसके दस्तावेज में लिखा है, “दुनिया भारतीय मुस्लिमों को एक मॉडल के रूप में देखती है और भारतीय मुस्लिम समुदाय असहाय होकर किसी चमत्कार का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अभी या बाद में नेतृत्व को समुदाय के भीतर से उभरना होगा।”

दस्तावेज़ में आगे कहा गया है, “हम उस 2047 का सपना देखते हैं, जिसमें राजनीतिक सत्ता मुस्लिम समुदाय के पास लौटकर आती है, जिसे ब्रिटिश राज ने अन्यायपूर्ण तरीके से छीन लिया था।”

दस्तावेज में कहा गया है, “अगर हम इस्लाम के इतिहास में देखें तो मुस्लिम हमेशा अल्पसंख्यक थे और जीत के लिए हमें बहुमत की आवश्यकता नहीं है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को विश्वास है कि अगर कुल मुस्लिम आबादी का 10% उसके साथ आता है तो भी PFI कायर बहुसंख्यक समुदाय को उसके घुटनों पर ला देगा और भारत में इस्लाम के वैभव को वापस ला देगा।”

PFI खुले तौर पर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने की अपील करता है। इसमें कहा गया है कि मुस्लिमों की कष्टों को बार-बार दोहराया और उन्हें याद दिलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही हिंसा का इस्तेमाल ‘चुनिंदा विरोधियों’ (हिंदुओं) को आतंकित करने और उनकी सामूहिक ताकत को देखने के लिए किया जाना चाहिए।

पीएफआई ने अपने कैडरों से इस स्तर पर हथियार जमा करने के लिए कहा है। वह अपने डॉक्यूमेंट में कहता है, “PE विभाग (संभवत: हमलावर विभाग) को अपने सदस्यों को यूनीफॉर्म में मार्च करना चाहिए और जहाँ कहीं भी आवश्यक हो समुदाय की रक्षा के लिए उन्हें हमला करके अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहिए।”

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “जिन लोगों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था, वे इस बिंदु पर (केंद्र में सत्ता हासिल करने के बाद) और अधिक ‘खुलकर’ सामने आ जाएँगे और जो हमारे हित के खिलाफ हैं उन्हें खत्म किया जाएगा। ये PE कैडर हमारे विरोधियों द्वारा सुरक्षा बलों पर प्रभाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी काम करेंगे।”

डॉक्यूमेंट में आगे कहा गया है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों (यानी हिंदुओं) का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

पीएफआई कहता है कि कैडरों को ‘अंतिम शक्ति प्रदर्शन’ यानी सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह से पहले हिंदुओं और हिंदू नेताओं का डिटेल अपने पास रखना चाहिए। PFI के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “अंतिम प्रदर्शन के चरण से पहले हिंदू/आरएसएस नेताओं और उनके कार्यालयों के स्थानों के व्यक्तिगत विवरण के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करना और तैयार रखना अनिवार्य है।”

उसके डॉक्यूमेंट में आगे कहा गया है, “विभिन्न स्तरों पर सूचना विंगों को अपने डेटा-बेस का फॉलोअप और अपडेट करते रहना चाहिए। हिंदू नेताओं की गतिविधियों पर नज़र रखने से हमें उनके खिलाफ कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी। हमारे अंतिम लक्ष्य के रोडमैप में सूचना विंग के महत्व को ध्यान में रखते हुए सभी स्तरों पर विंग के कामकाज को मजबूत और तेज करने की जरूरत है।”

(बिहार के फुलवारी शरीफ में PFI के ट्रेनिंग सेंटर से बरामद ‘इंडिया विज़न 2047’ के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस लिंक को क्लिक करें।)

पटना आतंकी केस में तीसरा आरोपित मारगुव अहमद दानिश गिरफ्तार, ‘गजवा-ए-हिन्द’ से है जुड़ाव, भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की थी साजिश

देश को तोड़ने वाली गतिविधियों में शामिल होने के मामले में 2 आरोपितों को गिरफ्तार किए जाने के बाद शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को बिहार पुलिस ने खुलासा किया कि बिहार आतंकी मॉड्यूल मामले में पटना में एक और आरोपित मारगुव अहमद दानिश उर्फ ​​ताहिर को गिरफ्तार किया गया था। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपित फुलवारीशरीफ का रहने वाला है और गजवा-ए-हिंद समूह से जुड़ा था।

एसएसपी एमएस ढिल्लों के मुताबिक, ताहिर ने 2006 से 2020 तक दुबई में काम किया था। उन्होंने कहा, “हमने फोन नंबर को इंटरसेप्ट किया तो उसमें राष्ट्र विरोधी कंटेंट पाए गए। गिरफ्तार व्यक्ति ने 2 व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। इनमें से एक पाकिस्तान से बनाया गया था और उसे इसका एडमिन बनाया गया था। इसमें खाड़ी देशों के कई लोग थे। दूसरा ग्रुप इसी साल जनवरी में बनाया गया था, जिसमें बांग्लादेशी लोग थे।”

मामले को लेकर आगे जानकारी देते हुए एसएसपी ने कहा कि ये व्हाट्सएप ग्रुप कश्मीर से संबंधित आतंकवाद समर्थक पोस्ट के साथ-साथ राष्ट्र विरोधी कंटेंट को बाँट रहे थे। ढिल्लों का कहना था, “उनकी 2023 में सीधे जिहाद में शामिल होने की योजना थी।” पुलिस अधिकारी ने कहा कि कल पुलिस ने एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, जिसने 12 जुलाई को पीएम मोदी के दोरे के वक्त हमले की योजना बनाई थी।

एएनआई के ट्विटर का स्क्रीनशॉट

पुलिस ने मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज नाम के आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों ने मंगलवार को पटना में पीएम मोदी के कार्यक्रम में हिंसा फैलाने के लिए लगभग 26 लोगों को प्रशिक्षित किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 11 जुलाई को जिस टेरर मॉड्यूल का खुलासा किया था, उसमें शामिल दोनों आऱोपितों में से एक झारखंड का पूर्व पुलिस अधिकारी है। जबकि अतहर परवेज है सिमी का सदस्य रह चुका है और फिलहाल पीएफआई और उसकी राजनीतिक शाखा एसडीपीआई का सदस्य है।

रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है कि दो आरोपी मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज ने लगभग 26 लोगों को आतंकी मिशन के लिए प्रशिक्षित किया था और उन्हें बंदूकें, तलवार और चाकू का इस्तेमाल करना सिखाया था। बिहार पुलिस ने जाँच के दौरान यह भी पाया कि परवेज कई विदेशी संगठनों के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में था और भारत को तोड़ने वाली गतिविधियों को चलाने के लिए फंडिंग की माँग कर रहा था। पीएम मोदी के दौरे से 15 दिन पहले फुलवारी शरीफ में संदिग्ध आतंकी ट्रेनिंग भी शुरू हो गई थी। मामले में 26 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

दरअसल, 11 जुलाई को पीएफआई के खिलाफ कार्रवाई के दौरान भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए ‘इंडिया विजन 2047’ नाम के दस्तावेज तैयार किए गए थे। इसे छापे के दौरान बिहार पुलिस ने 11 जुलाई को बरामद किया था। इसमें डरपोक बहसंख्यक समुदाय (हिन्दू) को काबू में करने और अपने गौरव को फिर से पास करने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, इन आपत्तिजनक दस्तावेजों में ‘भारत में इस्लाम के शासन’ के बारे में बात की गई है। कुमार ने ‘इंडिया विजन 2047’ नामक आठ पेज के लंबे पेपर के एक अंश का हवाला देते हुए कहा, “पीएफआई को यकीन है कि भले ही पूरी मुस्लिम आबादी का 10% इसके पीछे इकट्ठा हो जाए पीएफआई डरपोक बहुसंख्यक समुदाय पर जीत हासिल कर अपने गौरव को वापस लेगा।”

गौरतलब है कि पटना में भारत विरोधी गतिविधियों की योजना बनाने के आरोप में पुलिस ने अब तक मोहम्मद जलालुद्दीन, अतहर परवेज और मारगुव अहमद दानिश उर्फ ​​ताहिर नाम के तीन इस्लामवादियों को गिरफ्तार किया है। हालाँकि 26 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए व्यापक छापेमारी शुरू कर दी है।

सावन के महीने में ज्ञानवापी में मिले ‘शिवलिंग’ की पूजा का मिले अधिकार: सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू पक्ष ने दाखिल की याचिका

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर वजूखाने में मिले शिवलिंग की पूजा-अर्चना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें कोर्ट से शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति माँगी गई है। हिन्दुओं की ओर से ये याचिका श्री कृष्ण जन्म भूमि मुक्ति स्थल के अध्यक्ष राजेश मणि त्रिपाठी ने दायर की थी।

याचिका में त्रिपाठी ने कहा है कि सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है और हिन्दुओं को पूजा करने और अपने अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है, “याचिकाकर्ता को भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदान किए गए हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी धार्मिक प्रथाओं और अनुष्ठानों का प्रचार करने का अधिकार है और यह एक तथ्य है कि श्रावण का महीना शुरू हो रहा है, जिसमें भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसलिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत गारंटी के रूप में श्रावण के महीने में पूजा करने, ‘अंतरात्मा की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पेशे, धर्म के अभ्यास और प्रचार’ के अधिकारों का प्रयोग करने की अनुमति माँगी है।”

याचिका में राजेश मणि त्रिपाठी ने कहा है कि 16 मई को सर्वे का काम पूरा हुआ और 19 मई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई। सर्वे में सामने आया था कि ज्ञानवापी के अंदर शिवलिंग मिला है। अब हम उसकी पूजा-अर्चना करना चाहते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट अपने शिष्यों समेत शिवलिंग की पूजा करने की इजाजत माँगी है।

गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिसर में स्थित माँ श्रृंगार गौरी और अन्य देव विग्रहों की पूजा अर्चना के मामले में मंगलवार (26 अप्रैल, 2022) को सीनियर डिवीजन के सिविल जज रवि कुमार ने फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा था कि इस बार ईद के बाद 10 मई से पहले एडवोकेट कमिश्नर से मौके का मुआयना करा वहाँ की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसके बाद 6 और 7 मई को विवादित ढाँचे की वीडियोग्राफी कराई गई।

‘यासीन मलिक ने किया था मेरा अपहरण’: महबूबा मुफ्ती की बहन रूबैया सईद ने कोर्ट में की अपने 4 अपहरणकर्ताओं की पहचान

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की बहन रुबैया सईद ने आतंकवादी यासीन मलिक (Yasin Malik) को साल 1989 में उनका अपहरण करने वाले अपराधियों में से एक के रूप में की है। रूबैया सईद ने शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को जम्मू की टाडा अदालत (TADA Court) में मामले से जुड़े चार लोगों की पहचान की, जिसमें मलिक भी शामिल है।

रुबैया सईद मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी हैं। जिस समय रूबैया का अपहरण हुआ था, उस समय मुफ्ती मोहम्मद सईद केंद्रीय गृहमंत्री थे। तब रूबैया को सईद को छुड़ाने के लिए खूँखार आतंकियों को रिहा करने का उन्होंने निर्णय लिया था।

सुनवाई में भाग लेने वाले वकीलों ने पुष्टि की कि सईद ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने सीबीआई द्वारा जाँच के दौरान उन्हें उपलब्ध कराई गई तस्वीरों के आधार पर सभी की पहचान की।

सीबीआई की वकील मोनिका कोहली ने बताया कि रुबैया ने यासीन मलिक और तीन अन्य की पहचान कर ली है और सुनवाई की अगली तारीख 23 अगस्त तय की गई है।

इस मामले को लेकर पीडीपी के प्रवक्ता और वकील अनिल सेठी ने कहा, “उन्होंने (रुबैया ने) यासीन मलिक की पहचान कर ली है। उन्होंने सभी अपहरणकर्ताओं की पहचान कर ली है। हाँ, मैं ज्यादा नहीं बता सकता, क्योंकि कार्यवाही जारी है। अगली सुनवाई 23 को है। यासीन मलिक की उपलब्धता के आधार पर उसे उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। वह (रुबैया) सीबीआई को पहले दिए गए अपने बयान पर कायम हैं।”

जनवरी 2021 में टाडा अदालत ने अपहरण के मामले में यासीन मलिक और नौ अन्य के खिलाफ अपराध के 30 साल बाद आरोप तय करने का आदेश दिया था। रुबैया सईद को टाडा अदालत ने अपने ही अपहरण मामले में बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया था। आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे यासीन मलिक को भी कोर्ट ने तलब किया था।

आतंकी यासीन मलिक बुधवार (13 जुलाई 2022) को को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के लिए पेश हुआ। सुनवाई के दौरान उसने कोर्ट से अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का अनुरोध किया था। टाडा कोर्ट उसके खिलाफ दो मामलों की सुनवाई कर रहा है- रुबैया अपहरण का मामला और भारतीय वायु सेना के चार अधिकारियों की हत्या का मामला।

रुबैया सईद का 8 दिसंबर 1989 को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) ने अपहरण कर लिया था। उस समय जेकेएलएफ का नेतृत्व यासीन मलिक कर रहा था। जेकेएलएफ ने अपने पाँच सदस्यों को जेल से रिहा कराने की माँग को लेकर बंदूक की नोक पर रूबैया का अपहरण कर लिया था। 23 वर्षीया रुबैया उस समय लाल डेड मेमोरियल महिला अस्पताल में बतौर मेडिकल इंटर्न कार्यरत थीं।

एक विवादास्पद फैसले में फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार ने उस समय माँगों को मान लिया था और जेल में बंद आतंकवादियों को रिहा कर दिया था। वहीं, मुफ्ती मोहम्मद सईद की दूसरी बेटी महबूबा मुफ्ती सक्रिय राजनीति में शामिल हो गईं और जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री बनीं। रुबैया सईद 13 दिसंबर 1989 को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से रिहा होने के बाद सुर्खियों से दूर हो गई थीं।

अपहरण और उसके बाद सरकार द्वारा पाँच आतंकवादियों की रिहाई कश्मीर में हिंसा के इतिहास की एक ऐतिहासिक घटना थी, क्योंकि इसने क्षेत्र में आतंक में वृद्धि और अलगाववादियों के लिए मंच तैयार किया था। कई लोगों का मानना ​​है कि अगर सरकार सख्त कार्रवाई करती तो राज्य में आतंकवाद इतना नहीं पनपता। उल्लेखनीय है कि फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया था कि केंद्रीय गृह मंत्री की बेटी के बदले जेल में बंद आतंकवादियों को रिहा नहीं करने पर केंद्र सरकार ने उन्हें बर्खास्त करने की धमकी दी थी।

ट्रैफिक पुलिस के जवान को बुर्के वाली महिला ने पीटा, शौहर सोहैल के साथ बीच सड़क हंगामा, इंदौर का वीडियो वायरल: थाने में हाथ जोड़े आए नजर

मध्य प्रदेश (MP) के इंदौर में ट्रैफिक पुलिसकर्मी के साथ उलझते हुए एक बुर्के वाली महिला का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक अन्य युवक भी महिला के साथ पुलिसकर्मी से उलझता दिखाई दे रहा है। आरोपित युवक का नाम सोहैल है और बुर्के वाली महिला उसकी पत्नी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (14 जुलाई 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के दिन शाम लगभग 6:30 पर आरोपित सोहैल अपनी पत्नी के साथ बाइक से भमौरी क्षेत्र में कहीं जा रहा था। उस दौरान उसी क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस स्टाफ रंजीत सिंह अपनी ड्यूटी कर रहे थे। उन्होंने रांग साइड से आ रहे सोहैल और उनकी पत्नी को रोका तो वो दोनों पुलिसकर्मी से हाथापाई पर उतारू हो गए।

बुर्के में दिखाई दे रही सोहैल की पत्नी बार-बार पुलिसकर्मी रंजीत को मारने दौड़ रही थी जिसका कुछ लोग बीच-बचाव कर रहे थे। महिला बार-बार रंजीत सिंह के गिरेबान को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। वो तमाम अपशब्दों का प्रयोग भी कर रही थी। इस हाथापाई के चलते आस-पास भीड़ जमा हो गई थी। इसी दौरान आस-पास से किसी ने ये वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर वायरल का दिया।

वीडियो जब पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के संज्ञान में आई तब उन्होंने दोनों आरोपितों के खिलाफ विजय नगर थाने में केस दर्ज करने के आदेश दिए। इंदौर के ट्रैफिक DCP बंसत कोल ने इस घटना और कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपित इंदौर के रानीपुरा क्षेत्र के साउथ तोडा के रहने वाले हैं। आरोपित सोहैल की उम्र लगभग 27 साल है जिस पर पहले से ही 3 केस दर्ज हैं।

पुलिस हिरासत में सोहैल (चित्र साभार- दैनिक भास्कर)

बताया जा रहा है कि दोनों को लगा कि वो पुलिसकर्मी से बदतमीजी कर के आराम से भाग निकलेंगे लेकिन आख़िरकार पुलिस ने उन दोनों को खोज ही निकाला। पुलिस की हिरासत में आते ही दोनों का बर्ताव बदल गया। थाने में सोहैल की हाथ जोड़ते फोटो सामने आई है जबकि उनकी बीवी के भी व्यवहार में काफी बदलाव देखा गया।

आदिवासी युवक के गुप्तांग में डाला पेट्रोल, सद्दाम, आदिल सहित 4 ने बेरहमी से पिटाई के बाद घटना को दिया अंजाम: इंदौर प्रशासन को NCST का नोटिस, माँगी रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore, Madhya Pradesh) के आदिवासी युवक पंकज को 4 मुस्लिम युवकों द्वारा बाँध कर मारने और उसके गुप्तांग में पेट्रोल डालने के प्रकरण में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इंदौर के DM और कमिश्नर को नोटिस देते हुए इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई की पूरी जानकारी 3 दिनों के अंदर भेजने के लिए कहा है। आयोग ने यह नोटिस 14 जुलाई 2022 (गुरुवार) को जारी की है।

नोटिस भेजने के लिए अनुसूचित जनजाति आयोग ने दैनिक भास्कर की रिपोर्ट का हवाला दिया है। इस नोटिस में जारी निर्देश के अनुसार, “प्रेस क्लिपिंग का आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। अब आयोग अपने स्तर से इस मामले की जाँच करवाएगा। 3 दिनों के अंदर आरोपितों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट हमें प्रस्तुत करें।” इस रिपोर्ट में आरोपितों पर कार्रवाई के साथ पीड़ित को आर्थिक सहायता और अन्य सहूलियतों पर भी जानकारी माँगी गई है।

नोटिस

FIR में IPC की धारा 307 जोड़ने और NSA लगाने की माँग

पंकज की निर्ममता से हुई पिटाई और उनके साथ हुए अमानवीय अत्याचारों के खिलाफ हिन्दू संगठनों ने राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया है। हिन्दू संगठन आरोपितों के खिलाफ दर्ज FIR में धारा 307 बढ़ाने के साथ सभी आरोपितों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

बकरीद के दिन 9 जुलाई 2022 को नाज़िम अपने किराएदार पंकज को बकरा खरीदने के बहाने बाजार ले गया। उसके साथ आदिल भी था। ये लोग एक मकान में गए, जहाँ सद्दाम और सलमान पहले से मौजूद थे।

इसके बाद उन लोगों ने पंकज को बेरहमी से पीटा और उसके गुप्तांग में पेट्रोल डाल दिया था। इस दौरान इन सभी ने आदिवासियों को चोर जैसे आपत्तिजनक शब्द बोले थे। इसके बाद इन्होंने किसी को न बताने की धमकी देकर पंकज को छोड़ दिया था।

इन सभी ने नाज़िम के बेटे का से 50 हजार रुपए लेकर अपने लिए लैपटॉप खरीदने का आरोप लगाया था। दरअसल, कुछ दिन पहले नाजिम का बेटा घर से 50 हजार रुपए लेकर गायब हो गया था। उसके कुछ दिन बाद पंकज ने लैपटॉप खरीदा था। इन लोगों ने आरोप लगाया था कि उसी पैसे से पंकज ने लैपटॉप खरीदा है।

बाद में पंकज ने अपने साथ हुई घटना की जानकारी अपने मित्रों और अपनी बहनों को दी। उन सभी ने पंकज को ले जाकर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने सभी 4 आरोपितों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

जम्मू में एक और हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़… महादेव की मूर्ति के हाथों और पैरों को किया क्षतिग्रस्त… हिन्दू संगठनों का प्रशासन को अल्टीमेटम

जम्मू-कश्मीर के डोडा (Doda, Jammu-Kashmir) क्षेत्र के एक और हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। यह मंदिर महादेव का है, जिसे स्थानीय लोग ‘छोटा मणि महेश’ के नाम से जानते हैं। घटना से नाराज लोगों ने प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। बताया जा रहा है कि ये घटना 14-15 जुलाई की रात की है। पुलिस ने FIR दर्ज कर अज्ञात आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मरमट क्षेत्र की है। तोड़ा गया मंदिर सड़क से लगभग 10 किलोमीटर अंदर है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटो में भगवान शिव की मूर्ति को खंडित करने का प्रयास किया गया है। मूर्ति के हाथों और पैरों को तोड़ा गया है। मंदिर में अन्य सामान बिखरे दिखाई दिए।

घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया और उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्र सरकार के पुतले जलाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा, “2-3 महीनों के ही अंदर 8 से ज्यादा मंदिर जम्मू-कश्मीर के अंदर तोड़े गए। सभी को पता है कि ये मंदिर हमारे आस्था के केंद्र बिंदु हैं। अभी तक किसी भी मंदिर तोड़ने वाले को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। हिन्दुओं में आक्रोश है। केंद्र शासित सरकार हमें उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर न करे। अगर मंदिर तोड़ने वालों की गिरफ्तारियाँ नहीं हुईं तो प्रदर्शन उप-राज्यपाल भवन पर होगा।”

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में जम्मू के कई मंदिरों में मूर्तियों को तोड़ने के मामले सामने आए हैं। इसी माह 8 अप्रैल में सिद्धड़़ा क्षेत्र में आने वाले लक्ष्मी नारायण मंदिर की मूर्तियों को नुकसान पहुँचाया गया था। 5 मई 2022 में डोडा के ही वासुकी मंदिर में तोडफोड़ की गई थी। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने उग्र प्रदर्शन किया था तब प्रशासन ने आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ने का भरोसा दिया था।

इसी 11 जुलाई को जम्मू के कठुआ में एक हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ की थी। इस घटना की जाँच के लिए पुलिस ने SIT का भी गठन किया था। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि उपरोक्त मामलों में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी पुलिस नहीं कर पाई है और यदि यही घटना किसी और वर्ग से जुड़ी होती तो अब तक प्रशासन सक्रिय होता।