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Vivo ने भारत से ₹62476 करोड़ चीन भेजे: ED ने बताया कैसे की टैक्स चोरी, भारतीय एजेंटों पर भी नकेल कसने की तैयारी

चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो (Vivo) को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार (7 जुलाई 2022) को बड़ा खुलासा किया। ईडी ने बताया कि वीवो ने भारत में टैक्स चोरी के लिए 62,476 करोड़ रुपए ‘गैरकानूनी तरीके से’ चीन को भेज दिया। यह रकम वीवो के कुल टर्नओवर 1,25,185 करोड़ रुपए का लगभग आधा है। बताया जा रहा है कि यह रकम 2017 से 2021 के बीच भेजी गई। ईडी ने चीनी कंपनियों और कई भारतीय फर्मों से जुड़े एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले को सुलझाने का दावा किया है।

प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई भारत में 23 कंपनियाँ बनाने में चीन के तीन नागरिकों के शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद की है। इनमें से एक चीनी नागरिक की पहचान वीवो के पूर्व निदेशक बिन लाऊ के रूप में हुई है, जो अप्रैल 2018 में देश छोड़कर चला गया था। अन्य दो चीनी नागरिकों ने साल 2021 में भारत छोड़ा था। इन कंपनियों के गठन में नितिन गर्ग नाम के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने भी मदद की थी।

News18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने एक बयान में कहा, “इन 23 कंपनियों ने वीवो इंडिया को भारी मात्रा में फंड ट्रांसफर किया है। इसके अलावा, 1,25,185 करोड़ रुपए की कुल टर्नओवर में से, वीवो इंडिया ने 62,476 करोड़ रुपए (टर्नओवर का लगभग 50 प्रतिशत) भारत से बाहर भेज दिया। यह रकम मुख्य रूप से चीन भेजी गई। वीवो इंडिया ने भारत में टैक्स भुगतान से बचने के लिए यहाँ गठित कंपनियों में भारी घाटा दिखाने के नाम पर यह राशि विदेश भेजी है।”

इस कार्रवाई को चीनी कंपनियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने और उनके लिए काम करने वाले भारतीय एजेंटों पर नकेल कसने के सरकार के प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। कथित तौर पर ये कंपनियाँ यहाँ अपने व्यवसाय के दौरान टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे बड़े वित्तीय अपराधों में शामिल हैं।

इससे पहले, मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को प्रवर्तन निदेशालय ने चीनी मोबाइल कंपनी वीवो से जुड़े देश भर में 44 स्थानों पर छापे मारे थे। चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी के खिलाफ मनी-लॉन्ड्रिंग जाँच में तलाशी ली गई थी। इस तलाशी अभियान के बाद उनके 66 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट सहित 465 करोड़ रुपए के 119 बैंक खातों को जब्त कर लिया गया। इसके अलावा 73 लाख रुपए की नकदी और दो किलोग्राम सोने की छड़ें भी जब्त की गई।

प्रवर्तन निदेशालय ने यह भी आरोप लगाया है कि वीवो इंडिया के कर्मचारियों ने उनकी तलाशी अभियान के दौरान सहयोग नहीं किया और फरार होने एवं डिजिटल उपकरणों को छिपाने की कोशिश भी की। हालाँकि, एजेंसी की तलाशी टीमें इन डिजिटल सूचनाओं को हासिल करने में सफल रहीं। ईडी ने वीवो की एक सहयोगी कंपनी GPICPL के खिलाफ दिल्ली पुलिस की FIR के आधार पर 3 फरवरी को 2022 अपनी FIR दर्ज की थी। इस कंपनी और उसके शेयरधारकों पर फर्जी पहचान पत्र लगाने एवं गलत पता देने का आरोप था। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने एक पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि कंपनी के दिसंबर 2014 के रजिस्ट्रेशन के दौरान, GPICPL और उसके शेयरधारकों ने झूठे पते और जाली पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया।

ईडी ने कहा, “आरोप (मंत्रालय द्वारा लगाए गए) सही पाए गए क्योंकि जाँच से पता चला कि GPICPL के डायरेक्टरों द्वारा बताए गए पते उनके नहीं, बल्कि सरकारी भवन और एक वरिष्ठ अधिकारी का घर था।” इसमें कहा गया है कि वीवो मोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड को 1 अगस्त 2014 को हांगकांग स्थित कंपनी मल्टी एकॉर्ड लिमिटेड की सहायक कंपनी के रूप में शामिल किया गया था।

आज भी बिस्तर से उठ नहीं पाता 16 साल का शिवम, घर के बाहर पुलिस का पहरा-फिर भी लगता है डर: खरगोन में रामनवमी जुलूस पर हुआ था हमला

मध्य प्रदेश के खरगोन का ​16 साल का शिवम आपको याद है? वही शिवम जो अप्रैल में रामनवमी जुलूस पर हुए हमले की चपेट में आया था। जिसके सिर की हड्डी टूटकर ब्रेन में जा घुसी थी। उस समय डॉक्टर भी नहीं जानते थे कि शिवम को होश में आने में कितना समय लगेगा। लेकिन शिवम अब अपने घर आ चुका है। पर वह आज भी बिस्तर से उठ नहीं पाता। उसके घर के बाहर पुलिस पहरेदारी कर रही है। फिर भी वह डरा-सहमा हुआ है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवम शारीरिक रूप से धीरे-धीरे ठीक जरूर हो रहा है। लेकिन उस हमले ने उसे अंदर से तोड़ दिया है। अपने माता-पिता की इकलौती संतान शिवम पॉलिटेक्निक फर्स्ट ईयर का छात्र है। रामनवमी के दिन जब जुलूस पर हमला हुआ था तो वह सिद्धनाथ मंदिर से दर्शन करके लौट रहा था। उसी दौरान दंगाइयों का एक पत्थर उसके सिर में लगा था। दो दिन बाद ही उसकी बहन की शादी होनी थी।

दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने जब शिवम से पूछा कि वो कब तक ठीक हो जाएगा, तो उसने लड़खड़ाती जुबान में कहा कि डॉक्टर ने कहा है कि वह 6 महीने में ठीक हो जाएगा। शिवम ने बताया, “हाल ही में उसके पॉलिटेक्निक की परीक्षाएँ हुई थीं। लेकिन उसका हाथ ही नहीं काम कर रहा था तो वो एक्जाम नहीं दे पाया।” घर से बाहर निकलने के सवाल पर शिवम कहता है, “डर लगता है, वे लोग फिर न आ जाएँ, पीछे ही तो रहते हैं।”

गौरतलब है कि 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी जुलूस पर पथराव किया गया। 30 से ज्यादा दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई और मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई। मुस्लिम भीड़ को रामनवमी जुलूस में बज रहे डीजे से आपत्ति थी। हालाँकि, ये एक पूर्व नियोजित साजिश थी। उपद्रवियों ने पहले से ही छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम जमा कर रखे थे।

हमले के बाद शिवम के ममेरे भाई नीलेश जोशी ने बताया था कि वे लोग घर के बाहर खड़े थे। उसी दौरान मुस्लिम समुदाय के उपद्रवी आए और पत्थर मारने लगे। शिवम भी वहीं खड़ा था। मुख्य हमलावर टोपी पहनकर आया था। बुर्के में से भी कुछ लोग पत्थर चला रहे थे।

इसी दौरान एक पत्थर आकर शिवम के सिर पर लगा। पत्थर लगते ही वह गिर गया और उसके सिर से खून बहने लगा। शिवम का गाँव खरगोन से 100 किलोमीटर दूर निसरपुर में है और उसके पिता किसान हैं। शिवम खरगोन में अपने मामा के यहाँ रहकर पढ़ाई कर रहा था।

नूपुर शर्मा की गर्दन काटने की धमकी देने वाला नासिर बरेली से गिरफ्तार, PM मोदी के लिए भी की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में यूपी पुलिस ने बरेली से एक शख्स को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान नासिर के रूप में हुई है। नासिर के खिलाफ IT एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है।

बरेली के SSP सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बताया कि एक वायरल वीडियो में निलंबित भाजपा नेता नूपुर शर्मा की गर्दन काटने की धमकी दी गई। इस आधार पर पुलिस ने एक मुकदमा दर्ज़ किया और आरोपित नासिर को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बता दें कि पिछले दिनों नूपुर शर्मा की गर्दन काटने की धमकी देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। बरेली पुलिस ने बताया कि इसको लेकर फरीदपुर में मुकदमा भी दर्ज किया गया। मुकदमे की जाँच के दौरान पुलिस ने फरीदपुर के कसावन मोहल्ला निवासी नासिर (पुत्र- जाकिर हुसैन) को गिरफ्तार किया। नासिर फरीदपुर में ही दर्जी की दुकान चलाता है। उसकी उम्र 28 वर्ष बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि नासिर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A, 504, 506 और आईटी एक्ट 67 के तहत मामला दर्ज हुआ था।

जानकारी के मुताबिक फरीदपुर कस्बा निवासी टेलर नासिर की दुकान पर कुछ लोग अपने कपड़े सिलवाने पहुँचे थे। इस दौरान नूपुर शर्मा को लेकर नासिर से उन लोगों की कहासुनी हो गई, जिसके बाद नासिर ने कहा की नूपुर शर्मा को मेरे सामने ला दो मैं उसकी गर्दन काट दूँगा। नासिर ने कहा था कि नूपुर शर्मा ने नबी की शान में गुस्ताखी की है, जिस वजह से उसे जिंदा रहने का अधिकार नहीं है। इतना ही नहीं नासिर ने नूपुर शर्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बेहद आपत्तिजनक बातें भी कही। दुकान में कपड़े की नाप देने आए लोगों ने नासिर का वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होते ही लोगों कार्रवाई की माँग की। दरोगा नरेश ने खुद वादी बनकर आरोपित नासिर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।

दरगाह के खादिम ने नुपूर शर्मा की हत्या के लिए उकसाया था

इससे पहले अजमेर पुलिस ने दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती को गिरफ्तार किया था। हिस्ट्रीशीटर सलमान चिश्ती ने भी नूपुर शर्मा को जान से मारने की धमकी दी थी। सलमान चिश्ती का जो वीडियो वायरल हो रहा था उसमें वह नूपुर शर्मा का सिर कलम करने वालों को अपना मकान और पैसे देने की बात कर रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद अजमेर पुलिस ने मंगलवार (6 जुलाई, 2022) की रात को सलमान चिश्ती को गिरफ्तार कर लिया। 

छात्रों ने हॉस्टल में पढ़ी हनुमान चालीसा, VIT यूनिवर्सिटी ने लगा दिया जुर्माना: MP के गृहमंत्री ने दिए जाँच के आदेश, कहा- भारत में नहीं पढ़ेंगे तो और कहाँ?

मध्य प्रदेश के सीहोर में VIT यूनिवर्सिटी (वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) के 7 छात्रों पर हनुमान चालीसा पढ़ने के कारण 5-5 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का मामला सामने आया है। बीटेक सेकंड ईयर के ये छात्र कुछ दिन पूर्व हॉस्टल रूम में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। जहाँ यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने सामूहिक पूजा-पाठ के इस तरह के कार्यक्रमों पर रोक लगाने की तैयारी की है वहीं मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मामले का संज्ञान लेते हुए यूनिवर्सिटी के इस फैसले के खिलाफ जाँच शुरू करा दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी छात्र बी टेक सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहे थे। लगभग 20 छात्रों ने कुछ दिन पहले हॉस्टल के एक रूम में एक साथ इकट्ठे होकर हनुमान चालीसा पढ़ी थी। इसकी शिकायत उसी हॉस्टल के दूसरे समुदाय के छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से कर दी थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी जाँच करवाई तो हनुमान चालीसा का पाठ होना सही पाया गया।

इसके बाद इस पाठ को आयोजित करने वाले 7 छात्रों पर जुर्माना लगा कर नोटिस भी जारी की गई। यूनिवर्सिटी प्रबंधन का कहना है कि व्यक्तिगत पूजा की छूट है लेकिन धार्मिक कार्यक्रमों के सामूहिक आयोजन करना मना है, भले ही वो बंद कमरे में ही क्यों न हो। शिकायत करने वाले जूनियर छात्र थे।

प्रदेश सरकार ने निर्णय को बताया गलत

यूनिवर्सिटी के इस फैसले के विरोध में मध्य प्रदेश सरकार ने जाँच बिठा दी है। गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने बयान दिया है कि अगर छात्र हनुमान चलीसा भारत में नहीं पढ़ेंगे तो कहाँ पढ़ेंगे? डॉ मिश्रा के मुताबिक छात्रों को समझाया जा सकता था लेकिन सीधे जुर्माना लगाना गलत है और इसे वापस लिया जाएगा। इस बावत उन्होने सीहोर के DM को जाँच करके आवश्यक कार्रवाई के आदेश भी दिए हैं।

यूनिवर्सिटी के फैसले का हो रहा विरोध

वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। राजस्थान अजमेर के डिप्टी मेयर और भाजपा युवा मोर्चा के नेता नीरज जैन ने लिखा, “किसी की धार्मिक भावना को संतुष्ट करने के लिए किसी की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने का अधिकार VIT को किसने दिया? वो भी तब जब हनुमान चालीसा का पाठ वो अपने कमरे में कर रहे थे ना की किसी सार्वजनिक स्थान पर।” नीरज ने इस ट्वीट में शिवराज चौहान के ऑफिस को भी टैग किया है।

अयोध्या: समीउल्लाह के घर में था बारूद का जखीरा, धमाके से मकान धराशायी; पुलिस ने 9 बोरे विस्फोटक बरामद भी किए

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में एक मकान में जोरदार विस्फोट हुआ। इसके कारण इमरान नाम का एक युवक घायल हो गया है। धमाके की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी। मकान मालिक का नाम समीउल्लाह बताया जा रहा है। पुलिस ने घटनास्थल से पटाखे बनाने वाले विस्फोटक बरामद किए हैं। घटना गुरुवार (7 जुलाई 2022) की है।

घटना हैरिंग्टनगंज क्षेत्र की है। DSP मिल्कीपुर सत्येंद्र भूषण तिवारी ने बताया, “मामला थाना इनायतनगर के गाँव सेमरा का है। रात में लगभग 9:45 पर पुलिस को एक मकान में सिलेंडर में ब्लास्ट की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर पड़ताल की तो पता चला कि वह सलीमुल्लाह का मकान है। उसके बेटे इमरान के चेहरे और कंधे पर चोटें आईं है। घायल को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया है।”

DSP ने आगे कहा, “मौके से पुलिस ने पटाखा और आतिशबाजी बनाने से जुड़ी चीजें बरामद की हैं। घटनास्थल पर फील्ड यूनिट, फायर यूनिट और स्थानीय पुलिस मौजूद थी। मामले में अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटनास्थल पुलिस चौकी से लगभग आधे किलोमीटर दूर है। विस्फोट से एक मकान धराशायी हो गया। पुलिस ने मौके से 9 बोरी विस्फोटक बरामद किया है। दावा किया जा रहा है कि घायल इमरान का परिवार आतिशबाजी बनाने का काम करता है। उसके यहाँ से आतिशबाजी बनाने के औजार भी मिले हैं। इमरान को स्थानीय लोग कल्लू नाम से बुलाते हैं। उसके घर वालों का कहना है कि मिटटी के गड्ढे में पानी भरने के दौरान ये हादसा हुआ था।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक धमाके से आसपास के गाँव के लोग डर गए। धमाके के बाद घटनास्थल पर भारी भीड़ जुट गई। विस्फोट कैसे हुआ इसको ले कर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएँ हैं। फिलहाल पुलिस विस्फोट के सही कारणों का पता लगा रही है।

मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट से मिली 5 दिन की बेल, ट्वीट करने पर पाबंदी: फिर भी पुलिस के पास ही रहेगा, जानिए क्यों

प्रोपगेंडा वेबसाइट AltNews के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को सुनवाई की। दोनों पक्षों के तर्क को सुनने के बाद कोर्ट ने जुबैर को अंतरिम जमानत दे दी।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी के बेंच ने ज़ुबैर को सीतापुर मामले में शर्तों के साथ पाँच दिन की बेल दी है। इस दौरान ज़ुबैर को ट्वीट करने और दिल्ली छोड़ने पर पाबंदी लगाई गई है। वहीं, जमानत मिलने के बाद भी मोहम्मद जुबैर भी पुलिस की हिरासत में ही रहेगा।

जुबैर ने अदालत में कहा कि उसकी जान को खतरा है। उसे इंटरनेट पर जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। उनसे यूपी पुलिस द्वारा दायर एफआईआर को रद्द करने की भी माँग की थी। बता दें कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिट पिटिशन को 13 जून को खारिज कर दिया था।

जुबैर ने अपनी याचिका में इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसने हिंदुओं के खिलाफ अपमानजनक एक ट्वीट के लिए यूपी पुलिस (UP Police) द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था। यूपी पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में यह भी कहा है कि जुबैर ने तीन हिंदू संतों को ‘घृणा फैलाने वाले’ कहा था।

बहस के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कल (7 जुलाई 2022) को जुबैर के वकील ने कहा कि उसकी जान को खतरा है। वह न्यायिक रिमांड में है, उसकी जमानत सीतापुर अदालत ने खारिज कर दी थी और उसे रिमांड पर भेज दिया गया था। इस तथ्य का खुलासा उन्होंने शीर्ष अदालत में नहीं किया था। उन्होंने तथ्यों को जानबूझकर छिपाया है।

एसजी मेहता ने कहा, “तथ्यों को छिपाने के इस तरह के आचरण को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। वह इस अदालत को यह बताए बिना कि सीतापुर अदालत ने कल उसकी जमानत खारिज कर दी थी, वह सुप्रीम कोर्ट से जमानत माँग रहा है।”

इस पर जुबैर की ओर से कोर्ट में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिका में लिखा गया था कि सीतापुर पुलिस जुबैर की पुलिस हिरासत की माँग कर रही है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत में चुनौती दिए गए आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय का है। उन्होंने कहा कि एक ट्वीट के आधार पर आपराधिक मुकदमा नहीं दर्ज किया जा सकता।

गोंजाल्विस ने तर्क दिया कि जुबैर ने अपने ट्वीट में किसी धर्म का नाम नहीं लिया है। उसने सिर्फ घृणा फैलाने वाले लोगों के बारे में कहा है। वह एक सेक्युलर है, फिर भी जेल में है। गोंजाल्विस ने कहा कि जिन्होंने घृणा फैलाई वे आज जेल से बाहर हैं, जुबैर आज जेल में है। उन्होंने AltNews को प्रतिष्ठित और घृणा फैलाने वालों का पता लगाने वाला बताया।

बता देें कि जुबैर के खिलाफ IPC की धारी 295A (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करना) और IT एक्ट की धारा-67 के तहत केस दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने जुबैर को 27 जून को एक ट्वीट के मामले में गिरफ्तार किया था।

अंबे माता का मंदिर, शाहरुख पठान ने बना दिया कहकशां मस्जिद: रतलाम पुलिस ने 3 को पकड़ा, 1 नाबालिग

मध्य प्रदेश के रतलाम में गूगल मैप पर एक मंदिर को मस्जिद के रूप में दिखाने के बाद तनाव फैल गया। यह मंदिर अंबे माता का है। आक्रोशित ग्रामीणों ने कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने IPC 295A के तहत FIR दर्ज कर शाहरुख, आमीन व एक अन्य नाबालिग को हिरासत में लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। घटना 7 जुलाई 2022 (गुरुवार) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गाँव भदवासा का है जो रतलाम के नामली थाना क्षेत्र में आता है। यहाँ अंबेमाता मंदिर गाँव वालों और आस-पास के लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र है। इसी मंदिर को गाँव के ही एक शाहरुख नाम के आरोपित ने कहकशां मस्जिद के रूप एडिट कर दिया। शाहरुख ने इस बदलाव का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया में वायरल भी कर दिया। शाहरुख उसी गाँव का रहने वाला है।

इस बात की जानकारी ग्रामीणों को हुई तो उन्होंने शाहरुख से ऐसा करने को ले कर सवाल किया। इस बीच सूचना पर पुलिस भी गाँव में पहुँच गई और शाहरुख को हिरासत में ले लिया। आरोपित शाहरुख की उम्र 27 साल, आमीन की उम्र 29 साल और नाबालिग की उम्र 17 साल है। इस मामले में शिकायत राजेश पाटीदार ने दर्ज करवाई है।

राजेश के मुताबिक, “मुझे इस बदलाव की जानकारी बुधवार (6 जुलाई) को हुई। इसकी पड़ताल करने पर मुझे शाहरुख पठान नाम के लड़के की ID दिखाई दी। शाहरुख ने ये हरकत जान-बूझकर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत पहुँचाने के लिए की है।” पुलिस ने आमीन को धारा 151 IPC के तहत कार्रवाई कर जेल भेजा है। शाहरुख और नाबालिग आरोपित से पूछताछ की जा रही है। शाहरुख का मोबाइल भी जब्त कर लिया गया है।

रतलाम के SP अभिषेक तिवारी के मुताबिक, “इस मामले में पुलिस ने गूगल को पत्र लिखा है। पत्र में आरोपित द्वारा किए गए बदलाव के प्रमाण माँगे गए हैं। इन सबूतों को अदालत में टेक्निकल साक्ष्यों के तौर पर पेश किया जाएगा।”

अजमेर दरगाह के खादिम कैसे-कैसे: कोई 100+ छात्राओं के रेप में शामिल, कोई कन्हैया के कातिल का ‘साथी’, किसी को चाहिए नूपुर शर्मा की गर्दन

अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह का खादिम गौहर चिश्ती अब चर्चा में है। वजह, उसके कनेक्शन उदयपुर में कन्हैया लाल का गला काटने वालों से सामने आए हैं। वह फरार है। इसी दरगाह का एक खादिम सलमान चिश्ती राजस्थान पुलिस की गिरफ्त में है। वजह- उसे नूपुर शर्मा की गर्दन चाहिए। इतना ही नहीं दरगाह के बाहर सर तन से जुदा के नारे लगने वाले वीडियो भी सामने आए हैं।

वैसे अपराध से दरगाह के खादिमों की संलिप्तता नई नहीं है। देश के सबसे बड़े सेक्स कांड में भी दरगाह के खादिम घेरे में थे। यह घटना करीब 30 साल पुरानी है। 1992 में अजमेर में 100 से ज्यादा हिंदू लड़कियों को फँसा कर रेप किया गया। अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल कर उनसे कहा गया कि वे अन्य लड़की को फँसा कर लाए। इस तरह से पूरा रेप चेन सिस्टम बनाया गया था।

फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती- इस कांड के मुख्य आरोपित थे। तीनों ही यूथ कॉन्ग्रेस के लीडर थे। फारूक उस समय इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस की अजमेर यूनिट का अध्यक्ष था। नफीस चिश्ती कॉन्ग्रेस की अजमेर यूनिट का उपाध्यक्ष था। अनवर चिश्ती अजमेर में पार्टी का ज्वाइंट सेक्रेटरी था। साथ ही तीनों अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम भी थे। इस तरह से उनके पास राजनैतिक और मजहबी, दोनों ही ताकत थी।

बताया जाता है कि आरोपितों ने सबसे पहले एक बिजनेसमैन के बेटे के साथ कुकर्म कर उसकी अश्लील तस्वीर उतारी और उसे अपनी गर्लफ्रेंड को लाने के लिए मजबूर किया। उसकी गर्लफ्रेंड से रेप के बाद उसकी अश्लील तस्वीरें निकाल ली और लड़की को अपनी सहेलियों को लाने के लिए कहा गया। फिर तो यह सिलसिला ही चल पड़ा। बाद में तो पुलिस ने भी माना कि उन्होंने जानबूझकर खादिमों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे सांप्रदायिक तनाव फैल जाएगा।

एक के बाद एक लड़की के साथ रेप करना, न्यूड तस्वीरें लेना, ब्लैकमेल कर उसकी भी बहन/ सहेलियों को लाने के लिए कहना और उन लड़कियों के साथ भी यही घृणित कृत्य करना- इस चेन सिस्टम में 100 से ज्यादा लड़कियों के साथ भी शर्मनाक कृत्य किया।

उस जमाने में आज की तरह डिजिटल कैमरे नहीं थे। रील वाले थे। फोटो निकालने के लिए जिस स्टूडियो में दिया गया वह भी चिश्ती का दोस्त और मुस्लिम समुदाय का ही था। उसने भी एक्स्ट्रा कॉपी निकाल लड़कियों का शोषण किया। ये भी कहा जाता है कि स्कूल की इन लड़कियों के साथ रेप करने में नेता और सरकारी अधिकारी भी शामिल थे। आगे चलकर ब्लैकमैलिंग में और भी लोग जुड़ते गए।

अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम चिश्ती परिवार का खौफ इतना था कि जिन लड़कियों की फोटो खींची गई थीं, उनमें से कइयों ने सुसाइड कर लिया। ये लड़कियाँ किसी गरीब या मिडिल क्लास बेबस घरों से नहीं, बल्कि अजमेर के जाने-माने रसूखदार घरों से आने वाली बच्चियाँ थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत की सरकार ने इसकी जाँच सीबी-सीआईडी को सौंप दी। हालाँकि तब तब तक काफी देर हो चुकी थी। शुरुआत में 18 आरोपितों के खिलाफ जाँच शुरू की गई थी। 30 साल पुराने इस केस में संपूर्ण न्याय मिलना अभी भी बाकी है। सेशन कोर्ट ने 1998 में 8 आरोपितों को आजीवन कारावास की सज़ा तो सुनाई लेकिन इसके 3 सालों बाद 2001 में राजस्थान हाईकोर्ट ने इनमें से 4 को बरी कर दिया। इस कांड से जुड़े 10 दोषी तो जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं, लेकिन कई अभी भी बाहर घूम रहे हैं।

मुख्य आरोपित फारूक चिश्ती को 2007 में सजी सुनाई गई थी, लेकिन उसे सिजोफ्रेनिया की बीमारी के बाद मानसिक रूप से विक्षिप्त घोषित कर दिया गया। नफीस को 2003 में गिरफ्तार किया गया था। इकबाल भाटी भी बेल पर बाहर है। सलीम चिश्ती को उस घटना के 20 साल बाद 2012 में गिरफ्तार किया गया था। वह बुर्के में पकड़ा गया था। सोहेल गनी चिश्ती ने साल 2018 में आत्मसमर्पण किया था। 

अजमेर दरगाह पर भी कन्हैया लाल की खून के छींटे? उदयपुर में हत्यारे से मिला था खादिम गौहर चिश्ती, रिपोर्ट में दावा- सर तन से जुदा के नारे भी लगवाए

उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल का गला मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने काट डाला था। अब इस बर्बर हत्या के तार अजमेर से भी जुड़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती से हत्यारों के कनेक्शन सामने आए हैं। कन्हैया लाल की हत्या के बाद रियाज और गौस भागकर गौहर के पास ही पनाह लेने अजमेर आ रहे थे। लेकिन रास्ते में पकड़े गए थे।

जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार गौहर चिश्ती 17 जून को उदयपुर गया था। उसने सर कलम करने के नारे लगवाए थे। वहाँ उसकी मोहम्मद रियाज से मुलाकात की बात भी कही जा रही है। दिलचस्प यह है कि इसी दिन रियाज ने वह वीडियो शूट किया था, जिसमें नबी की शान में गुस्ताखी करने वालों का सिर काटने की बात कही गई थी। कन्हैया लाल की हत्या के बाद यह वीडियो भी सामने आया था।

उदयपुर जाने से पहले गौहर ने अजमेर में भी सर तन से जुदा वाली नारेबाजी करवाई थी। यह नारेबाजी दरगाह के बाहर ही हुई थी। 25 जून को गौहर चिश्ती के खिलाफ अजमेर पुलिस ने भड़काऊ नारे लगाने का मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद से वह फरार है। वायरल वीडियो में दरगाह के बाहर गौहर ने कहा था, “हम अपने हुजूर की शान में गुस्ताखी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। गुस्ताख ए रसूल की एक सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा। अपने आका की इज्जत के लिए हम सर कटाने को तैयार हैं। नूपुर ने हमारे आका की शान में गुस्ताखी की है, इसलिए उसे जीने का हक नहीं है। नूपुर शर्मा मुर्दाबाद।”

इंडिया TV का दावा है कि कन्हैया की हत्या के बाद दोनों हत्यारे गौहर चिश्ती के पास ही अजमेर आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पकड़े गए। बताया जा रहा है कि गौहर चिश्ती ने ही रियाज और गौस को कन्हैया लाल के कत्ल का वीडियो बनाने को भी कहा था।

गौहर चिश्ती कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI का सक्रिय सदस्य भी बताया जा रहा है। कन्हैयालाल का हत्यारा रियाज अक्सर अजमेर आता-जाता रहता था। यहीं उसकी मुलाक़ात गौहर से हुई। इस मुलाकात में अनवर हुसैन नाम के व्यक्ति ने मध्यस्थता की थी। फिलहाल अनवर हुसैन राजस्थान ATS की हिरासत में है।

अजमेर दरगाह प्रंबधन कमेटी ने एडवोकेट अशोक माथुर के माध्यम से गौहर चिश्ती को कानूनी नोटिस भेज कर दरगाह परिसर का नारेबाजी में इस्तेमाल करने पर जवाब माँगा है। हालाँकि यह नोटिस कन्हैया की हत्या के काफी बाद पुलिस जाँच में गौहर का नाम आने के बाद भेजा गया है।

गौरतलब है कि कन्हैया लाल की हत्या कथित तौर पर नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने को लेकर की गई थी। पिछले दिनों राजस्थान पुलिस ने अजमेर दरगाह के एक और खादिम सलमान चिश्ती को नूपुर की हत्या के लिए उकसाने को लेकर गिरफ्तार किया था। सलमान का जो वीडियो वायरल हुआ था उसमें वह कह रहा था कि नूपुर का गर्दन लाने वाले को वह अपना मकान देगा।

इसके बाद अजमेर की दरगाह शरीफ मैनेजमेंट कमिटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती का भी बयान सामने आया था। उन्होंने नुपूर शर्मा को मिल रहे समर्थन पर एतराज जताया था। कहा था कि मु​सलमान इसे बर्दश्त नहीं करेंगे। हालॉंकि अजमेर दरगाह के बाहर ‘सर तन से जुदा’ की नारेबाजी को उन्होंने गलत बताया था। कहा था कि इस्लाम में इसकी कोई गुंजाइश नहीं है। साथ ही यह भी कहा था कि इसे उदयपुर की घटना से जोड़ना गलत है। लेकिन गौहर चिश्ती से जिस तरह कन्हैया लाल के हत्यारों के लिंक सामने आए हैं, उससे जाहिर हैं कि यह पूरा घटनाक्रम एक ही कड़ी का हिस्सा हैं।

जापान के पूर्व PM शिंजो आबे को मारी गोली, हालत नाजुक: भाषण देते वक्त हुआ हमला, 2021 में भारत ने पद्म विभूषण से किया था सम्मानित

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे पर हमला हुआ है। उन्हें गोली मारी गई है। शिंजो आबे पश्चिमी जापान के नारा शहर में भाषण दे रहे थे, इसी दौरान उन पर हमला हुआ। उनके सीने में गोली लगी है। जापान के NHK वर्ल्ड न्यूज के मुताबिक, आबे घायल हैं। संदिग्ध हमलावर को मौके से पकड़ लिया गया है।

आबे पर हमला शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को स्थानीय समयानुसार दिन में 11:30 बजे हुआ। आबे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। NHK वर्ल्ड न्यूज ने कहा कि गोली चलने जैसी आवाज सुनी गई और एक संदिग्ध को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया। मौके पर मौजूद NHK वर्ल्ड न्यूज के एक रिपोर्टर ने कहा कि आबे के भाषण के दौरान उन्हें लगातार दो धमाके की आवाज सुनाई दी। जापान टाइम्स के अनुसार, शिंजो आबे पर शुक्रवार को नारा की एक सड़क पर भाषण देने के दौरान पीछे से एक व्यक्ति ने हमला किया।

बता दें कि जापान में उच्च सदन के चुनाव होने हैं। इसके लिए शिंजो आबे वहाँ कैंपेनिंग कर रहे थे। हमले के बाद के कुछ वीडियो भी अब सामने आने लगे हैं। इसमें वहाँ भगदड़ की स्थिति साफ देखी जा सकती है। शिंजो आबे सबसे लंबे समय तक जापान के प्रधानमंत्री रहे। आबे ने अगस्त 2020 में खराब स्वास्थ्य के कारण पद छोड़ दिया था। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास दोस्त हैं। कई मौकों पर पीएम और शिंजो एक-दूसरे को याद कर चुके हैं। पिछले साल ही भारत ने शिंजो आबे को पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।