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‘8 साल में कोई ऐसा कार्य नहीं किया, जिससे देश का सिर झुके’: गुजरात में दुनिया का पहला ‘नैनो यूरिया प्लांट’, मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल का भी उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (28 मई 2022) को राज्य गुजरात के दौरे पर हैं। यहाँ गाँधीनगर के इफको कलोल में बने देश के पहले नैनो लिक्विड यूरिया प्लांट का उद्धाटन उन्होंने किया। पीएम मोदी ने कहा नैनो यूरिया की आधा लीटर की बोतल एक बोरी यूरिया के जितना काम करेगी। इससे किसानों की खाद की जरूरतें पूरी होंगी। आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर गाँव का होना जरूरी है।

पीएम मोदी ने कहा कि 7-8 साल पहले तक देश में यूरिया की इतनी किल्लत होने के बाद भी खेत तक पहुँचने से पहले ही इसकी कालाबाजारी हो जा रही थी। यूरिया माँगने पर किसानों को लाठियाँ खानी पड़ती थीं, लेकिन जब 2014 में हमारी सरकार आई तो हमने यूरिया के 100% नीम कोटिंग का काम शुरू किया। इससे किसानों को भी पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना में यूरिया के पाँच बड़े प्लांट बंद पड़े हुए थे, जिन्हें हमारी सरकार ने दोबारा से चालू करवाया।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को विदेशों से यूरिया का आयात करना पड़ता है। विदेशों से आयातित यूरिया का 50 किलो का एक बैग 35,00 रुपए का पड़ता है, जिसे किसानों को केवल 300 रुपए में ही उपलब्ध कराया जाता है, बाकी के 3200 रुपए का भार सरकार को ही वहन करना पड़ता है।

गाँधीनगर प्लांट की क्षमता

शनिवार को गाँधीनगर में प्रधानमंत्री ने जिस प्लांट का उद्धाटन किया है, उस प्लांट को 175 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। इस तरह के 8 और प्लांटों को देश के अलग-अलग हिस्सों में लगाया जाएगा।

देश को नीचा दिखाने वाला कोई काम नहीं किया

इससे पहले सुबह करीब 10 बजे गुजरात के राजकोट पहुँचे प्रधानमंत्री ने आटकोट में 50 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि 8 साल पहले गुजरात ने उन्हें विदा किया था, लेकिन आज भी उनके अंदर गुजरातियों द्वारा दी गई शिक्षा और संस्कार हैं। उन्होंने कहा कि बीते 8 सालों में उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे देश को नीचा देखना पड़े। पीएम मोदी ने कहा कि इन 8 सालों में उन्होंने देश को गाँधी का देश बनाने की कोशिशें की हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने अब तक 6 करोड़ परिवारों को नल से जल योजना का लाभ दिया है। इसके साथ ही 3 करोड़ लोगों को घर और किसानों के अकाउंट्स में डायरेक्ट पैसे भेजे हैं। हालाँकि, इस दौरान प्रधानमंत्री विपक्ष पर निशाना साधना नहीं भूले। उन्होंने कहा कि 8 साल पहले तक देश में ऐसी भी सरकार थी, हर फाइल में मोदी दिखता था, जिस कारण उसने हमारी हर फाइल पर ताला लगाया था।

उत्तराखंड में नशाखोरी बनी चिंता का सबब, साधु-संत फैला रहे जागरूकता: यूपी पुलिस ने तस्कर गिरोह की 8 मुस्लिम महिलाओं को गिरफ्तार किया

देवभूमि उत्तराखंड में तेजी से बढ़ती मजारों और बेतहाशा बढ़ती मुस्लिम आबादी के बारे में हमने पिछली रिपोर्ट में बताया। स्थानीय लोगों ने इन 2 समस्याओं के अलावा जिस तीसरे मामले को चिंताजनक बताया, वो है उत्तराखंड में बढ़ते नशे का अवैध कारोबार। इसी माह ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में हमने पाया कि स्थानीय लोगों और हिन्दू एक्टिविस्टों ने सामूहिक रूप से आने वाले भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए नशे के कारोबार पर तत्काल लगाम लगाने की जरूरत पर बल दिया।

ऋषिकेश में शुजाउद्दीन की बाइक और 2 नशेड़ी

स्थानीय लोगों के दावों की पुष्टि के लिए और जमीनी हकीकत जानने के लिए ऑपइंडिया की टीम ने ऋषिकेश के आस-पास जानकारी जुटानी शुरू की। ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव जाने वाली सड़क पर मात्र 3 किलोमीटर ऊपर चढ़ने के बाद व्यस्त सड़क के किनारे एक बाइक खड़ी मिली। उसी बाइक के साथ 2 लोग सड़क के किनारे लेटे दिखाई दिए। एक बार लगा कि शायद उनका एक्सीडेंट हुआ हो पर करीब से जा कर देखने में पाया गया कि किसी को कोई चोट नहीं लगी थी। बाइक भी एकदम सही-सलामत थी। उधर से गुजर रहे एक राहगीर ने बताया कि ये दोनों नशेड़ी हैं।

सड़क के किनारे खड़ी उस बाइक का नंबर UP15-BF-1684 था। यह UP के मेरठ जिले का रजिस्ट्रेशन नंबर है। इस बाइक की जानकारी जुटाने पर यह बाइक नाज़िम के बेटे शुजाउद्दीन के नाम पर पाई गई। जहाँ पर ये दोनों सड़क के किनारे लेते थे उधर से लगातार वाहनों का आना-जाना लगा हुआ था। लगभग 2 किलोमीटर दूर पुलिस पहाड़ो पर चढ़ने और उतरने वालों की चेकिंग भी कर रही थी। लेकिन किसी ने भी उन दोनों पर ध्यान नहीं दिया।

पूरे उत्तराखंड के एक जैसे हालत

ऋषिकेश के हिन्दू कार्यकर्ता और ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ पदाधिकारी अमन पांडेय ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “2019 के लॉकडाउन से पहले हमने हालात गंभीर होता देख कर जन-जागरूकता अभियान चलाया था। उस समय कोई कहीं नशे की हालत में पड़ा मिलता था तो कोई किसी हालात में। ट्यूब चिपकाने वाले कुछ ग्लू भी कुछ लोग सूँघ कर नशा करने लगे थे। हम नशे की लत से लोगों को दूर रखने के लिए गली-गली घूमे थे। हमने प्रशासनिक अधिकारियों को भी नशे के अवैध करोबारियों पर लगाम लगाने की माँग को ले ज्ञापन दिया था।”

अमन ने आगे बताया, “ये बुरे हाल सिर्फ ऋषिकेश के नहीं हैं। कमोबेश पूरे उत्तराखंड के यही हाल हैं। कई लोग इसके खिलाफ संघर्ष भी कर रहे हैं। लेकिन अभी स्थिति चिंताजनक है। इस रैकेट के तस्करों का पता ही नहीं चल पाता। आए दिन पुलिस इस से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी भी करती है।

कुछ स्थानीय न्यूज़ चैनल इस मामले की ग्राउंड रिपोर्टिंग भी कर चुके हैं। उस रिपोर्टिंग में नशे के बाद हो रहा विवाद और स्थानीय लोगों द्वारा फ़ैल रही लत की भयावहता को बताया गया है।

साधु-संत कर रहे नशा मुक्त ऋषिकेश की अपील

साधु-संत और कथावाचक भी उत्तराखंड में नशे के बढ़ते प्रकोप से चिंतित हैं। अक्टूबर 2018 में कथावाचक शत्रुघन महाराज ने अपनी भागवत कथा के माध्यम से ऋषिकेश के लोगों से नशा छोड़ने की अपील की थी।

‘बरेली से आती है नशे की खेप’

उत्तराखंड के प्रसिद्ध हिन्दू एक्टिविस्ट और संत स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होने बताया, “उत्तराखंड में अधिकतर नशे की खेप UP के बरेली से आती है। नशे के इस अवैध कारोबार में अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं। यहाँ अकेले स्मैक का ही कारोबार 15 करोड़ रुपए का है। चाहे देहरादून शहर हो, या धर्म नगरी ऋषिकेश या फिर पहाड़। हर जगह इसकी बढ़ती लत चिंताजनक रूप लेती जा रही है। आए दिन उनकी गिरफ्तारी भी होती है लेकिन वो बाद में छूट जाते हैं।

इसी नशे के बढ़ते प्रकोप से उत्तराखंड में लूट, छिनैती जैसे अपराध बढ़ रहे हैं। आज आने वाली पीढ़ी कॉलेज के अधिकतर छात्र नशा खोजते हुए उत्तराखंड में मिल जाएँगे। उत्तराखंड कभी शिक्षा का हब हुआ करता था। आज वही बच्चे नशा कर रहे हैं। कॉलेज के बाहर झोपड़पट्टियाँ बनी हुई हैं। शाम को तमाम छात्र उन्हीं झोपड़पट्टियों में नशा करने जाते हैं।”

गौरतलब है कि 24 मई, 2022 को उत्तराखंड के नैनीताल के रामनगर थाने की पुलिस ने साजिद नाम के व्यक्ति को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार आरोपित साजिद

‘खुद पर कार्रवाई के डर से पुलिस नहीं दिखाती बहुत बहादुरी’

स्वामी दर्शन भारती ने आगे कहा, “हमारे यहाँ की पुलिस बहुत कमजोर है। उत्तराखंड की पुलिस आए दिन कहीं न कहीं बेइज्जत हो रही है। पहले एनकाउंटर आदि की घटनाओं में कुछ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। इसलिए पुलिस वाले कार्रवाई के बजाए अपनी नौकरी बचाने पर ज्यादा ध्यान देता है। पुलिस का गिरा मनोबल भी एक बड़ा कारण है उत्तराखंड में इस प्रकार के अवैध कार्यों को बढ़ावा मिलने का। कुछ पुलिसकर्मी रणवीर एनकाउंटर केस में आज तक जेल काट रहे हैं। इसलिए तमाम पुलिस वालों ने पिस्टल रख कर पेन उठा लिया है।”

ऑपइंडिया से बात करते स्वामी दर्शन भारती

UP पुलिस ने पकड़ा था उत्तराखंड में नशा सप्लाई करने वालों को

19 मई, 2022 को उत्तराखंड से सटे UP के जिले सहारनपुर की पुलिस ने नशे के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया था। उस रैकेट में मुस्लिम समुदाय की 8 महिलाएँ गिरफ्तार की गईं थीं। आरोपितों के नाम सोनिया, इमराना, चाँदनी, हाजिरा, इशरत, उज़मा, अनम और अफ़साना है। पुलिस ने इनके पास से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 23 लाख मूल्य की 140 ग्राम स्मैक बरामद किया था। इनसे हुई पूछताछ में पता चला था कि उजमा का शौहर भूरा उर्फ़ अब्दुल कादिर मादक द्रव्यों की सप्लाई देहरादून में करता है।

उत्तराखंड पुलिस चला रही ऑपरेशन मर्यादा

उत्तराखंड पुलिस देवभूमि में न सिर्फ नशा बेचने वालों बल्कि नशा कर के अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ लगातार एक्शन ले रही है। इसके लिए पुलिस ने ‘ऑपरेशन मर्यादा’ चला रखा है। 9 मई, 2022 को ऋषिकेश पुलिस ने नशा करके हुड़दंग करने वाले 7 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था।”

उत्तराखंड पुलिस ने नशे और हुड़दंग के खिलाफ अपने ‘ऑपरेशन मर्यादा’ में आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है।

‘रोज खाती हूँ सूअर का मांस, पीती हूँ शराब’: इस्लाम छोड़ने के लिए अदालत पहुँची मुस्लिम महिला, कहा – अम्मी ने जबरन थोपा ये मजहब

इस्लामिक देश मलेशिया से धर्मान्तरण का चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहाँ एक मुस्लिम महिला ने कोर्ट में याचिका दायर कर माँग की है कि कोर्ट ये तय करे कि वो एक मुस्लिम नहीं है। ताकि वो अपनी पसंद से बौद्ध धर्म का पालन कर सके। महिला का कहना है कि भले ही उसे मुस्लिम अम्मी-अब्बू ने जन्म दिया हो, लेकिन उसने कभी इस्लाम को नहीं माना। वो रोज सूअर का मांस खाती है और शराब भी पीती है।

32 वर्षीय महिला के अब्बू ने धर्मान्तरण कर इस्लाम अपनाया था, जबकि उसकी अम्मी पहले से ही मुस्लिम थीं। बहरहाल मलेशियन हाई कोर्ट ने महिला की याचिका पर उसकी दलीलों सुन लिया है और अब वो 15 जून 2022 को इस मामले पर फैसला करेगा कि क्या वह कन्फ्यूशीवाद और बौद्ध धर्म अपनाने के लिए गैर-मुस्लिम बनना चाहती है।

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम महिला ने हाई कोर्ट में यह याचिका इसी साल 4 मार्च को न्यायिक समीक्षा के लिए दायर की थी। इसमें उसने शरिया कोर्ट ऑफ अपील, शरिया हाई कोर्ट, फेडरल टेरिटरीज इस्लामिक रिलीजियस काउंसिल (Maiwp) और मलेशियाई सरकार को प्रतिवादी बनाया था। इस मामले में सुनवाई के दौरान महिला के वकील और अटॉर्नी जनरल के चैंबर्स की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट के जस्टिस दातुक अहमद कमाल मोहम्मद शाहिद ने इसके लिए एक तारीख का ऐलान किया।

इसके साथ ही महिला ने हाई कोर्ट से कम से कम 12 ऐसे फैसलों की भी माँग की है, जिनमें इसका जिक्र हो कि शरिया अदालतों के पास यह घोषित करने का अधिकार है कि वो किसी को इस्लाम से बाहर कर सकें।

करीब दो साल पहले जुलाई 2020 में महिला ने खुद को गैर-मुस्लिम घोषित करने को लेकर शरिया हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसे पिछले साल दिसंबर 2021 में महिला शरिया हाई कोर्ट ने इस्लाम धर्म छोड़ने के उसके फैसले को ठुकरा दिया था। महिला ने कोर्ट से इस अंतरिम आदेश पर भी रोक लगाने और ये फैसला देने की माँग की कि वो बौद्ध धर्म का पालन कर सकती है।

प्रतिदिन खाती है सुअर का मांस

हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में महिला ने दावा किया है कि उसने कभी भी इस्लामी रीति-रिवाजों और उसके सिद्धांतों का पालन नहीं किया। उसे इस्लाम धर्म में कोई विश्वास नहीं है। उसने इस बात को स्वीकार किया को प्रतिदिन सूअर का मांस खाती है और शराब भी पीती है। ये सब इस्लाम में हराम है।

महिला के अब्बू और उसकी अम्मी का तलाक हो चुका है और उसे उसकी अम्मी ने ही पाला था। महिला के वकीलों ने उसकी अम्मी पर जबरन उस पर इस्लाम थोपने का आरोप लगाया है।

सावरकर के सहयोगी कॉन्ग्रेसी अध्यक्ष से लेकर मुस्लिम नेता तक… भगत सिंह के साथी और फिल्म डायरेक्टर भी: इतिहास जो भुला दिया गया

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा बिना वीर सावरकर के संभव ही नहीं है। 1900 के बाद, ऐसा कोई क्रांतिकारी अथवा राजनेता नहीं था जोकि सावरकर के संपर्क में आकर, उनसे प्रभावित न हुआ हो। वास्तव में, उनका वह प्रभाव सिर्फ सांकेतिक नहीं बल्कि किसी के भी जीवन की दिशा बदलने वाला था। दुर्भाग्यवश, भारत विभाजन और स्वतंत्रता के पश्चात बदले राजनैतिक हालातों और तुष्टिकरण के चलते उनका वह योगदान जबरन भुला दिया गया। एक विशेष और लगातार हुए प्रचार के माध्यम से सावरकर को बदनाम करने के षडयंत्र किए गए।

इस लेख के माध्यम से हम सावरकर के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को उनके संपर्क में आए अथवा सहयोगी रहे, उन सभी क्रांतिकारियों और राजनेताओं के माध्यम से समझने की कोशिश करेंगे। हालाँकि, उनमें से कई नाम सावरकर की भाँति ही भुलाए दिए गए हैं।

पांडुरंग महादेव सेनापति – 1904 के आसपास लन्दन के इंडिया हाउस में इन्होंने सावरकर से मुलाकात की। वहीं से यह अभिनव भारत के सदस्य बन गए। सावरकर के निर्देश पर रूस जाकर बम बनाने का तरीका सिखा। 1908 में भारत वापस लौट आए।

हेमचन्द्र दास – सावरकर ने हेमचन्द्र दास को पांडुरंग महादेव सेनापति के साथ रूस में बम बनाने की प्रक्रिया सिखने के लिए भेजा था। 1908 में भारत आकर इन दोनों ने बंगाल के क्रांतिकारियों को बम बनाने का रुसी तरीका समझाया था। बंगाल के क्रांतिकारियों में बरिंदर घोस, प्रफुल्ल चक्रवर्ती और नरेन्द्र गुसाई जैसे नाम शामिल थे।

निरंजन पाल – भारतीय फिल्म उद्योग के सबसे शुरुआती निर्देशकों में से एक रहे पाल अपने जीवन के शुरुआती दिनों में सावरकर के साथ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी शामिल रहे।

भीकाजी कामा – भारत की स्वतंत्रता के लिए 1908 में सावरकर से मुलाकात की। जब सावरकर को फ्रांस में गिरफ्तार किया गया तो कामा ने ही उनकी रिहाई के लिए हरसंभव प्रयास किए थे। दोनों ने मिलकर कई क्रांतिकारियों को भारत की स्वाधीनता के लिए तैयार किया था।

बीजी खेर – 1935 के एक्ट के बाद, खरे बम्बई प्रान्त के मुख्यमंत्री बने थे। वे अपने जीवन के शुरुआती दिनों में सावरकर की अभिनव भारत सोसाइटी के सदस्य भी रहे।

जेबी कृपलानी – भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे कृपलानी भी डेक्कन कॉलेज में पढ़ाई के दिनों में अभिनव भारत से जुड़े थे।

वीरेन्द्रनाथ चटर्जी – सरोजिनी नायडू के भाई, वीरेन्द्रनाथ को उनकी क्रन्तिकारी गतिविधियों के कारण 1910 में लन्दन के एक कॉलेज से निष्काषित कर दिया था। वे सावरकर के संपर्क में रहा करते थे और उनके अनुसार इन मुलाकातें ने उनके जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला था।

राम नारायण चौधरी – राजपूताना में 1914 से 1948 के दौरान, चौधरी राजनैतिक रूप से बेहद सक्रिय रहे। वे हार्डिंग बम केस और बनारस षड्यंत्र से भी अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे। सावरकर द्वारा लिखित ‘वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस’ से वे बहुत प्रभावित थे।

गोपालराव विनायकराव देशमुख – तिलक के अनुयायी और 1885 से 1915 तक कॉन्ग्रेस के अधिवेशनों में हिस्सा लेते रहे। अपने लन्दन दौरे में इन्होंने ‘लन्दन इंडियन सोसायटी’ की चर्चाओं में हिस्सा लिया। वहीं देशमुख, सावरकर के संपर्क में आए। वे होम रुल लीग से 1916 से 1920 तक जुड़े रहे। इन्होंने 1937 में सावरकर की रिहाई के कई प्रयास किए। देशमुख का नाम इसलिए भी याद किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने 1934 से 1937 तक सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में हिन्दू महिलाओं को संपत्ति में अधिकार और हिन्दू मेरिज डिसेबिलिटी एक्ट पारित करवाने में योगदान दिया था।

सरदारसिंह रावाजी राणा – मई 1905 में पेरिस में इंडियन होम रूल की स्थापना की। सावरकर के लगातार संपर्क में थे। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के निर्माण सहित सुभास चंद्र बोस को जर्मनी से संबोधन में भी सहयोग दिया।

मदनलाल धींगरा – लन्दन में धींगरा सावरकर के संपर्क में थे और वहीं से क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि सावरकर ने एक दिन धींगरा के हाथ में एक कील ठोंक दी। धींगरा का खून बहने लगा, लेकिन उन्होंने अपना हाथ नहीं हिलाया और मुस्कुराते रहे। धींगरा के इस समर्पण और दृढ़ संकल्प से सावरकर बेहद प्रभावित हुए। धींगरा ने ही विलियम हट कर्जन वायली नामक एक ब्रिटिश अधिकारी की गोली मारकर हत्या की थी।

एनवी गाडगीळ – कॉन्ग्रेस के सदस्य रहे, गाडगीळ को सावरकार द्वारा लिखित क्रांतिकारी साहित्य पढ़ने का शौक था।

लाला हरदयाल – लन्दन में सावरकर के संपर्क में आए थे। 1908 में भारत लौटे और उसके बाद अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के चलते विदेशी जमीन पर कई बार गिरफ्तार किए गए। उन्होंने अमेरिका में जाकर गदर पार्टी की स्थापना कर प्रवासी भारतीयों के बीच देशभक्ति की भावना जागृत की।

वीवी सुब्रमण्य अय्यर – लन्दन में अय्यर, सावरकर के निकटतम सहयोगियों में से एक थे। वहां वे ‘फ्री इंडिया क्लब’ में शामिल रहे। वकालत की पढ़ाई के दौरान, अय्यर ने महारानी के नाम से शपथ लेने से इनकार कर दिया था। 1910 में भारत लौटने पर वे कई गुप्त क्रांतिकारी संस्थाओं से भी जुड़े रहे।

एमपीटी आचार्य – राजनैतिक रूप से सक्रिय रहे और लन्दन में सावरकर के संपर्क में थे।

डब्लूवी फडके – पढ़ाई करने लन्दन गए लेकिन वहाँ क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ गए। इसी दौरान उनका संपर्क सावरकर से हुआ। देश की स्वतंत्रता के लिए वे आगे अपनी पढ़ाई पूरी न कर सके।

अनन्त लक्ष्मण कान्हेरे – 1891 में जन्मे कान्हेरे का निधन 1910 में मात्र 19 साल की आयु में हो गया। वे सावरकार से बेहद प्रभावित थे और अपनी मात्रभूमि की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध थे। वे नासिक में सावरकर द्वारा संचालित अभिनव मित्र और मित्र मेला जैसे संगठनों से जुड़े रहे। 21 दिसंबर 1909 को उन्होंने एक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, जैक्सन की गोली मारकर हत्या कर दी। जिसके कारण अंग्रेजों द्वारा 11 अप्रैल 1910 को उन्हें और कृष्णा गणेश कर्वे को फाँसी पर चढ़ा दिया गया। इसी केस में सावरकर को भी अंडमान की सजा सुनाई गई थी।

दुर्गादास खन्ना – भगत सिंह और सुखदेव के साथ काम कर चुके, दुर्गादास को सावरकर द्वारा लिखित ‘वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस’ ने प्रभावित किया था।

डॉ सुमंत मेहता – पेशेवर डॉक्टर, मेहता ने गुजरात में बारडोली सत्याग्रह और नमक सत्याग्रह में हिस्सा लिया था। लन्दन में वे श्यामजी कृष्ण वर्मा और कामा के संपर्क में थे। मेहता पहले व्यक्ति थे, जो सावरकर की प्रतिबंधित पुस्तक ‘वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस’ की पहली प्रति भारत लाने में सफल रहे।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी – 1937 में जब सावरकर ने कॉन्ग्रेस से जुड़ने के लिए मना कर दिया तो डॉ. मुखर्जी उनके संपर्क में आए और हिन्दू महासभा से जुड़ गए।

शिवराम महादेव परांजपे – पेशे से पत्रकार रहे परांजपे ने लोकमान्य तिलक और महात्मा गाँधी दोनों के साथ काम किया था। विदेशी कपड़ों को जलाने के सावरकर के अभियान की अध्यक्षता परांजपे ने ही की थी।

श्रीपाद दामोदर सातवलेकर – वैदिक साहित्य के शोधार्थी, सातवलेकर ने महात्मा गाँधी के अहयोग आन्दोलन में हिस्सा लिया था। उन्होंने अस्पृश्यता को समाप्त करने के भी आन्दोलनों में प्रमुख भूमिका निभाई थी। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहे। लाला लाजपत राय, लोकमान्य तिलक सहित वीर सावरकर का इनके जीवन पर गहरा प्रभाव था।

सत्यनारायण वेंनेती – ब्राह्मो समाज से जुड़े। सत्यनारायण को सावरकर की पुस्तक ‘वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस’ ने प्रभावित किया था।

पीएम थेवर – भारत के दक्षिणी राज्यों में राजनैतिक रूप से सक्रिय रहे। थेवर नेताजी सुभासचन्द्र बोस और वीर सावरकर से राजनैतिक रूप से प्रभावित रहे।

हरभाई त्रिवेदी – महात्मा गाँधी के खादी और हरिजन उत्थान में सहयोगी त्रिवेदी को लोकमान्य तिलक और सावरकर दोनों से विशेष लगाव था।

अय्याकी वेंकटरामानैय्या – स्वदेशी आन्दोलन से जुड़े रहे अय्याकी को सावरकर की पुस्तक ‘वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस’ ने प्रभावित किया था।

महात्मा गाँधी – जब वीर सावरकर के भाई गणेश दामोदर सावरकर का निधन 16 मार्च 1945 को हुआ, तो शोक संवेदनाओं वाले पत्रों में से एक पत्र महात्मा गाँधी का भी शामिल था। उन्होंने वह पत्र सेवाग्राम से 22 मार्च को वीर सावरकर को संबोधित करते हुए लिखा, “आपके भाई के निधन का समाचार सुनकर यह पत्र लिख रहा हूँ। उनकी रिहाई के बारे में मैंने कुछ किया था, तब से उनके बारे में मेरी रूचि बनी हुई है।”

मौलाना मोहम्मद अली – साल 1923 में मौलाना कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बने तो उन्होंने अधिवेशन के दौरान सावरकर की रिहाई के लिए स्वयं एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसे पूरी कॉन्ग्रेस ने सर्वसम्मति से पारित किया। उन्होंने कहा था, “विनायक दामोदर सावरकर को सबसे अधिक तिरस्कारपूर्वक जेल में रखा जा रहा है, जबकि वे रिहा होने के हकदार हैं।”

अप्पासाहेब पटवर्धन – सावरकर के जीवनीकार, धनंजय कीर लिखते हैं कि अप्पासाहेब जोकि गाँधी के अनुयायी थे लेकिन सावरकर को अपनी प्रेरणा मानते थे। वे आगे लिखते हैं कि गाँधी ने कभी अप्पासाहेब को सावरकर के साथ काम करने पर ऐतराज नहीं जताया।

आसफ अली – इंडिया हाउस में सावरकर के संपर्क में थे। उनकी यह राष्ट्रवादी गतिविधि कट्टरपंथी मुसलमानों को रास नहीं आई। अतः उन्होंने 1909 में श्यामजी कृष्ण वर्मा को पत्र लिखा, “मेरे कुछ सहयोगी मुसलमानों को मेरा आपसे जुड़ना पसंद नहीं है। इसलिए मैं अब उन्हें ज्यादा नाराज नहीं करना चाहता हूँ।”

इन नामों के अलावा ऐसे कई नाम – ज्ञानचंद वर्मा एमपीटी आचार्य, अब्दुल्ला सुहरावर्दी, सिकंदर हयात खान, उल्लास्कर दत्ता, और कान्ह सिंह नाभा भी अपने जीवन में कभी-न-कभी सावरकर के संपर्क में आए थे। इनमें से कई लोग बाद में वैचारिक रूप से कॉन्ग्रेस से जुड़े और कुछ वामपंथी दलों के साथ चले गए। खास बात यह थी कि वर्तमान कॉन्ग्रेस और वामपंथियों को छोड़ कर इनमें से किसी ने भी कभी सावरकर के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर प्रश्न नहीं उठाया।

सरकारी हो या प्राइवेट… कोई कंपनी महिला कर्मचारी से नहीं करवा सकती नाइट शिफ्ट, नियम उल्लंघन पर मिलेगी सजा: योगी सरकार का फैसला

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने फैसला लिया है कि कोई भी कंपनी महिलाओं से देर रात में ऑफिस में काम नहीं करवा सकती। सरकार ने ये नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर पर लागू करके आदेश दिए हैं कि अगर किसी कारणवश महिला की ड्यूटी रात में लगती है तो इसके लिए अनुमति लेनी होगी।

सरकार के आदेश में कहा गया है कि अगर बिन अनुमति के महिला की नौकरी शाम 7 बजे से अगली सुबह 6 बजे के बीच में लगाई गई तो कार्रवाई निश्चित है। इसके अलावा महिला ने अगर 7 बजे के बाद काम करने से मना किया तो कंपनी को उसे निकालने का कोई अधिकार नहीं है।

योगी सरकार के इस नए फैसले की बाबत अपर मुख्य सचिव श्रम सुरेश चंद्रा ने बताया, “लिखित सहमति के बाद महिला शाम 7 से सुबह 6 बजे तक काम करती सकती है। लेकिन कंपनी को उसे ऑफिस से घर और घर से ऑफिस तक के लिए मुफ्त कैब की सुविधा देनी होगी। कंपनी ने यदि ऐसा नहीं किया तो ये श्रम कानून के उल्लंघन के तौर पर देखा जाएगा और सजा के तौर पर जुर्माने से लेकर जेल तक हो सकती है।”

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार की ओर से इसस आदेश को प्रदेश के हर जिले में सख्ती से लागू कराने के आदेश दिए गए हैं। अधिकतर महिलाएँ कॉल सेंटर, होटल इंडस्ट्री और रेस्टोरेंट आदि में शाम को या देर रात तक काम करती हैं। अगर अब कोई महिला कर्मी शाम 7 बजे के बाद काम करने से मना करे तो उसे जबरन रोका नहीं जा सकता वरना कार्रवाई के तौर पर संस्थान का लाइसेंस कैंसिल हो सकता है।

इसके अलावा नए आदेश में जो महिला कर्मचारियों को सुविधा देने की माँग है वो ये कि संस्थान को उन्हें खाना उपलब्ध कराना होगा। उवके लिए शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य है। महिला रात में तभी काम करेगी जब उस समय कम से कम अन्य चार महिलाएँ भी स्टाफ की ड्यूटी पर हों। सरकार ने फैसला लिया है कि वर्किंग प्लेस पर महिला का उत्पीड़न रोकने के लिए कमेटी का गठन अनिवार्य होगा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं से जुड़ी एनजीओ में काम करने वाले संदीप खरे ने योगी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया और इसे प्राइवेट सेक्टर्स में काम करने वाली महिलाओं के लिए अच्छा बताया। उन्होंने कहा है कि यूपी में लगभग 5 लाख महिलाएँ हैं जो 7 बजे के बाद भी काम करती हैं। इनमें अधिकांश का काम 11 बजे तक खत्म हो जाता है मगर नाइट क्लब, बार, होटल और कॉल सेंटर पर महिलाएँ रात पर काम करती हैं। ऐसे में अगर उन्हें मुफ्त में घर तक छोड़ने की जिम्मेदारी संस्था को मिली है तो इससे उनकी सुरक्षा को खतरा नहीं होगा।

जिस कार्तिक आर्यन को नहीं लेना चाहते थे बड़े-बड़े फिल्ममेकर्स, उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर लगा दी सेंचुरी: नेपोटिज्म वाले बड़े-बड़े हुए फेल

दक्षिण भारतीय सिनेमा की उत्तर भारत में बढ़ती लोकप्रियता के कारण पिछले कुछ समय से बॉलीवुड के सितारे गर्दिश में हैं। बड़े से बड़े फिल्ममेकर्स और सुपरस्टार्स भी अपनी फिल्मों की इज्जत नहीं बचा पाए। साउथ की पैन इंडिया फिल्मों पुष्पा: द राइज, आरआरआर, केजीएफ चैप्टर 2′ और हिंदी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर बहुत बुरा हश्र हुआ है। इसी बीच बॉलीवुड के उभरते सितारे कार्तिक आर्यन ने ‘भूल भुलैया 2’ फिल्म में अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया है।

उनकी फिल्म ने बॉलीवुड के कई महीनों के सूखे को समाप्त करते हुए बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में सेंचुरी मार दी है और दूसरे हफ्ते भी फिल्म की शानदार कमाई जारी है।

‘भूल भुलैया 2’ वर्ष 2007 में रिलीज हुई अक्षय कुमार अभिनीत ‘भूल भुलैया’ का सीक्वल है, जिसे उसकी तुलना में कहीं अधिक पसंद किया जा रहा है। यही कारण है कि फिल्म का कलेक्शन सौ करोड़ का जादुई आँकड़ा पार कर गया है। कार्तिक आर्यन वही कलाकार हैं, जिन्हें बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर्स अपनी फिल्मों में नहीं लेना चाहते थे । यहाँ तक कि वे उनके काम की तारीफ करना भी जरूरी नहीं समझते हैं, लेकिन आज वो कई सुपरस्टार्स को पीछे छोड़ उनसे कहीं आगे निकल गए हैं।

रणवीर सिंह की जयेशभाई जोरदार, टाइगर श्रॉफ की हीरोपंती 2, अजय देवगन, अमिताभ बच्चन की रनवे 34, शाहिद कपूर की जर्सी, जॉन अब्राहम की अटैक, अक्षय कुमार, अरशद वारसी की बच्चन पांडे, अमिताभ बच्चन की झुंड कब आई और कब बॉक्स ऑफिस पर सुस्त रफ्तार के साथ फुस्स हो गईं – पता ही नहीं चला। इन फिल्मों ने अपनी लागत से बेहद कम कमाई की है।

दरअसल, बॉलीवुड में करण जौहर, आदित्य चोपड़ा सहित अन्य कई बड़े फिल्ममेकर्स पर नेपोटिज्म को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है। करण जौहर ने पिछले साल अपनी फिल्म ‘दोस्ताना 2’ से कार्तिक को बाहर कर दिया था। हाल ही में करण जौहर की बर्थडे की ग्रैंड पार्टी में सारा अली खान, जाह्नवी कपूर, अनन्या पांडे, शनाया कपूर, इशान खट्टर, आर्यन खान, इब्राहिम अली खान सहित तमाम नए सितारों ने अपना जलवा दिखाया, लेकिन करण ने अपनी इस पार्टी से कार्तिक आर्यन को इग्नोर कर दिया। जबकि इन दिनों वह बॉक्स ऑफिस पर बड़े से बड़े कलाकार को टक्कर देकर आगे बढ़ रहे हैं।

बॉलीवुड सितारों को अपनी फिल्म से लॉन्च करने वाले करण जौहर की धर्मा प्रोडक्शन जल्द ही शनाया कपूर (संजय कपूर की बेटी) को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में लॉन्च करने वाली है। चंकी पांडे की बेटी अनन्या पांडे को भी उन्होंने ही लॉन्च किया था। निर्माता करण जौहर शनाया कपूर को अपनी फिल्म ‘बेधड़क’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रहे हैं। अच्छे कलाकारों की तारीफ करने से बचने वाले करण जौहर सोशल मीडिया पर अपने फेवरेट लोगों की तारीफों के पुल बाँधते हुए नजर आते हैं। शनाया के लिए करण ने मार्च 2022 में ट्विटर पर लिखा था, “पेश है बेधड़क में निमृत का किरदार निभाने वाली खूबसूरत शनाया कपूर। मैं यह देखने के लिए काफी उत्साहित हूँ कि शनाया कपूर स्क्रीन पर अपना जादू कैसे बिखेरती हैं।”

यहीं नहीं बॉलीवुड में न्यूकमर्स को एंट्री दिलाने वाले सलमान खान का फेवरेटिजम भी समय-समय पर सामने आता रहा है। बिना हिंदी आए सलमान ने कैसे जैक्लीन फर्नांडीज, जरीन खान और कैटरीना कैफ को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस बना दिया, ये किसी से छिपा नहीं है। अपने जीजा आयुष शर्मा, जिनकी सभी फिल्में सुपरफ्लॉप रही हैं, उन्हें फिल्में दिलाने और प्रमोट करने में सलमान खान जी जान लगा देते हैं। फेब्रेटिज्म और नेपोटिज्म (Nepotism) करके बॉलीवुड की बिग लीग ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को अर्श से फर्श तक पहुँचाने का काम किया है।

बॉलीवुड में Nepotism से करोड़ों रुपए कमा रहे हैं नए सितारे

नेपोटिज्म और फेवरेटिज्म के कारण ही आज बिना एक्टिंग आए और फ्लॉप फिल्में देकर भी कई नए सितारे करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। और उनके पास कई आगामी प्रोजेक्ट भी लाइन में हैं। ‘भूल भुलैया 2’ के लिए कियारा आडवाणी से पहले सारा अली खान, श्रद्धा कपूर को ‘रीत’ का रोल ऑफर किया गया था, लेकिन उनके पास पहले से काफी प्रोजेक्ट्स थे। ऐसे में डेट्स की कमी के चलते उन्होंने यह फिल्म ठुकरा दी थी।

हमने यहाँ यह उदाहरण इसलिए दिया है, क्योंकि ज्यादातर फिल्मों के आफॅर पहले बॉलीवुड सितारों के बच्चों के पास ही आते हैं, हाँ जब वो इसे रिजेक्ट कर देते हैं, तब जाकर वह फिल्म किसी बेहतरीन कलाकार की झोली में आती है। वहीं, कार्तिक और कियारा को साउथ फिल्म इंडस्ट्री से ‘भूल भुलैया 2’ फिल्म में बेहतरीन रोल निभाने के लिए जमकर तारीफें मिल रही हैं। साउथ इंडस्ट्री के कलाकारों की बात करें तो वहाँ सभी कलाकार एक-दूसरे के कार्य की सराहना करते हैं, न्यूकमर्स को मोटिवेट करते हैं, जो उनकी एकजुटता को दर्शाता है।

यही कारण है कि तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री (Tollywood) ने बॉलीवुड को पछाड़ते हुए नंबर वन पोजिशन हासिल कर ली है। वहीं वर्ल्ड की टॉप फिल्म इंडस्ट्री में शुमार बॉलीवुड (Bollywood) इस मामले में नंबर 3 पर खिसक गया है। ‘आंध्र बॉक्स ऑफिस’ की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में टॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री ने वर्ल्ड वाइड करीब 1300 करोड़ रुपए की कमाई की है।

दिव्यांग बच्चे को फ्लाइट पर चढ़ने से रोकने के मामले में IndiGo पर ₹5 लाख का जुर्माना: DGCA अपने दिशा-निर्देशों में भी करेगा बदलाव

झारखंड की राजधानी राँची (Ranchi, Jharkhand) में एक दिव्यांग बच्चे को फ्लाइट पर चढ़ने से रोकने के मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इंडिगो एयरलाइन (IndiGo Airlines) पर पाँच लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। DGCA ने कहा कि एयरलाइन कर्मचारियों का बर्ताव बेहद बुरा था, इस कारण स्थिति खराब हुई।

DGCA ने कहा है कि विशेष परिस्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया की जरूरत होती है। भविष्य में ऐसी घटनाएँ ना हों, इसे सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देशों में बदलाव किया जाएगा। DGCA के अनुसार, “अगर इस मामले को सहानुभूति के साथ सँभाला गया होता तो बात इतनी नहीं बढ़ी होती कि यात्री को बोर्डिंग से मना कर दिया जाता।”

DGCA ने यह भी कहा है कि वह दिव्यांग यात्रियों को लेकर नागरिक उड्डयन दिशा-निर्देशों में बदलाव करेगा और सुनिश्चित करेगा कि ऐसा यात्रियों को बोर्डिंग से मना करने से पहले हवाई अड्डे पर डॉक्टर का लिखित कंसल्टेशन और पायलट-इन-कमांड के विचार लिया गया है।

DGCA ने एयरलाइन कंपनी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। जुर्माना लगाने से पहले निदेशालय ने जाँच के आदेश दिए थे। मामला 7 मई का है। इस दिन राँच हवाईअड्डे पर एक दिव्यांग बच्चे को फ्लाइट पर चढ़ने से रोक दिया था। इस मामले ने तूल पकड़ा तो विमानन कंपनी ने कहा कि बच्चा फ्लाइट में चढ़ने से घबरा रहा था।

इंडिगो एयरलाइन के सीईओ रनजॉय दत्ता ने तब कहा था कि बोर्डिंग के समय बच्चा पैनिक में था, इसलिए एयरपोर्ट स्टाफ को यह कदम उठाना पड़ा। एयरलाइन ने कहा था कि उस परिवार को होटल में रुकवाया गया और अगले दिन सुबह की फ्लाइट से उन्हें गंतव्य तक पहुँचाया गया था।

स्थिति को जाँच करने और तथ्यों का पता लगाने के लिए विमानन नियामक एजेंसी DGCA तीन सदस्यीय टीम बनाई थी। इस टीम ने राँची और हैदराबाद जाकर एक सप्ताह के भीतर साक्ष्य एकत्रित किए थे। जाँच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की गई है।

इस मामले का केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी संज्ञान लिया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि इसकी पूरी जाँच उनकी निगरानी में ही होगी। सरकार और नियामक संस्था के कड़े रूख को देखते हुए एयरलाइन कंपनी ने माफी माँग ली थी। 

ज्ञानवापी के शिवलिंग पर चली आरी, आरोपित को पुलिस ने पकड़ा: BJP नेता बोले- ऐसे लोगों के हाथ काट देने चाहिए

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को लेकर जारी विवाद के बीच भाजपा के नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद विनय कटियार ने बड़ा बयान दिया है। उनका दावा है कि ज्ञानवापी के अंदर स्थित शिवलिंग पर आरी चलाई गई है, जिसके बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। भाजपा नेता ने ये भी कहा कि ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने के बजाय उनके दोनों हाथों को काट देना चाहिए।

कटियार ने मामले में कहा है कि वाराणसी की जिला अदालत से देश के सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुँच चुके ज्ञानवापी मामले में सुनवाइयाँ तो होती ही रहेंगी, लेकिन उससे पहले शिवलिंग की सुरक्षा के मद्देनजर विवादित ढाँचे में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए। कभी राम मंदिर आंदोलन में शामिल रहे विनय कटियार का आरोप है कि ज्ञानवापी में हिन्दुओं के प्रतीकों से छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने ऐलान किया है कि जो लोग शिवलिंग की सुरक्षा और मुस्लिमों को वहाँ से निकालने की माँग कर रहे हैं, वो उनका साथ देते रहेंगे

भाजपा नेता के मुताबिक, मुगल आक्रान्ता औरगंजेब ने ताकत के दम पर ज्ञानवापी पर कब्जा किया था, इसलिए मुस्लिमों को इसके अंदर नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी को कहा कि उनका मानसिक संतुलन डगमगा गया है और अब उन्हें देश से बाहर निकाल देना चाहिए।

शिवलिंग में छेद किए जाने का भी मामला आया था सामने

गौरतलब है कि ज्ञानवापी परिसर के अंदर वजूखाने में मिले शिवलिंग को मुस्लिम पक्ष फव्वारा बता रहा है। हालाँकि, उसके ये दावे खोखले साबित होते दिख रहे हैं। इस बीच 25 मई को ज्ञानवापी मामले में हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने ये आरोप लगाया था कि वजूखाने में मौजूद शिवलिंग को तोड़कर उसे फव्वारा बनाने की कोशिश मुस्लिमों ने की थी। विष्णु जैन ने दावा किया था कि अगर स्टोर रूम की वीडियो और फोटोग्राफी हो जाए तो ये साबित हो जाएगा कि कैसे शिवलिंग में ड्रिल घुसा कर उसे फाउंटेन बनाने का प्रयास हुआ। इससे ये भी साबित होगा कि कैसे शिवलिंग में 63 सेंटीमीटर छेद किया गया था।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक तस्वीर ऐसी भी सामने आई थी, जिससे ये पता चला कि ज्ञानवापी के अंदर हनुमान जी की भी मूर्ति थी।

BJP महिला नेता नुपूर शर्मा की हत्या के लिए ट्विटर पर कट्टरपंथी खुलेआम कर रहे चर्चा: सुनें ‘कत्लबाजी’ को जायज ठहराने वाली ऑडियो

भारतीय जनता पार्टी की महिला नेता नुपूर शर्मा की हत्या की बात सरेआम सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों द्वारा की जा रही है। इस बीच उन्हें मारने के लिए ट्विटर पर इस्लामियों के बीच ओपन चर्चा भी हुई है। स्पेस का टाइटल दिया गया- लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और ईशनिंदा। इस चर्चा का हिस्सा बने एक यूजर ने स्क्रीन रिकॉर्डिंग को शेयर किया है। 

शुरुआत में सुना जा सकता है कि चर्चा में शामिल लोग मलाल कर रहे हैं कि भारत में ईशनिंदा की कोई सजा नहीं है इसलिए वो (हिंदू) इस्लाम मजहब का मजाक उड़ाते हैं। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथी को कई इस्लामी स्कॉलर और फतवों का उदाहण देते हुए ईशनिंदा के आरोपित की हत्या को जायज बताया जा रहा है। कट्टरपंथी बताता है, “एक छोटा उदाहरण लो: अगर कोई पैगंबर मोहम्मद के बॉडी कलर को काला कह देता है तो इतने पर भी भी वो गुस्ताख कहलाएगा और उसकी कत्लबाजी हो जाएगी।”

आगे कट्टरपंथी ‘गुस्ताख-ए-रसूल की नंगी तलवार’ किताब का उदाहरण देकर बताता है, “सोचिए कि अगर पैगंबर के रंग की गलत पहचान करने पर हत्या का फतवा है तो सोचिए कि उसके साथ क्या किया जाना चाहिए। किसी को ईशनिंदा के आरोपित के पक्ष में नहीं आना चाहिए वरना वो भी उसी सजा का हकदार होगा।” आगे कट्टरपंथी उन उदार मुस्लिमों का विरोध भी करता सुनाई पड़ता है जो ईशनिंदा आरोपित को बर्बर ढंग से मारे जाने का विरोध करते हैं। कट्टरपंथी कहता है कि अगर उन मुसलमानों में कोई ईमान बचा है तो उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए।

उसने कहा, “पैगंबर साहब के सामने आवाज उठाना भी पाप है। इसका अंदाजा शायद तुम्हें गुनाह करते समय नहीं होगा। पर तुम्हें माफी माँगने या पछताने का मौका भी नहीं मिलेगा। ये वो गुस्ताखी नहीं है जिसे करने पर तौबा कर ली जाए। लेकिन ऐसे गुनाह तौबा करने का समय भी नहीं देता।”

पूरा मामला

बता दें कि 27 फरवरी को टाइम्स नाऊ की एक टीवी डिबेट में नुपूर शर्मा ने हिंदू देवताओं के विरुद्ध की गई टिप्पणी पर सवाल किया था कि क्या वह भी पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करना शुरू कर दें जैसे उनके भगवान को लेकर ये सब कहा जा रहा है। इस डिबेट के बाद ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबेर ने नुपूर की क्लिप को सोशल मीडिया पर साझा किया और उनके सवाल को दंगे भड़काने वाला बताया। इसके बाद कट्टरपंथी उन्हें खुले में मौत की, रेप की धमकियाँ भेजने लगे।

जुनैद ने पूँछ पकड़कर कुत्ते को हवा में घुमाकर दूर फेंका: सोशल मीडिया पर Video वायरल होने के बाद लोगों में रोष, यूपी पुलिस ने मामला दर्ज किया

उत्तर प्रदेश के बदायूँ (Badaun, Uttar Pradesh) में पशु क्रूरता का एक मामला सामने आया है। जुनैद खान नाम के एक शख्स ने कुत्ते की पूँछ को पकड़ा और उसे हवा में घुमाकर फेंक दिया। जुनैद की क्रूरता का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसके बाद पशु प्रेमियों के दबाव में आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

दरअसल, शुक्रवार (27 मई 2022) को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में दिख रहा है कि एक युवक कुत्ते की पूँछ को पकड़कर हवा में घुमा रहा है और फिर उसे पास में स्थित नाले में फेंक देता है। वहीं उसके आसपास बहुत से लोग बैठे हैं, लेकिन ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की।

फेसबुक पर जब यह वीडियो वायरल हुआ तो एक बेजुबान पशु के साथ इस तरह की क्रूरता देखकर पशु प्रेमी ही नहीं, बल्कि आम लोगों में भी रोष फैल गया। इसके बाद आरोपित के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करने की माँग की जाने लगी।

कोतवाली थाना पुलिस जाँच में पता चला कि वीडियो बदायूँ के सहसवान इलाके का है। इसमें जो शख्स कुत्ते के साथ क्रूरता कर रहा था वह जुनैद खान है। उसके अब्बा का नाम हनीफ है और वह चौधरी मोहल्ला में रहता है।

आरोपित की पहचान होने के बाद पुलिस ने खुद वादी बनते हुए आरोपित जुनैद के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। दारोगा प्रमोद कुमार की ओर से यह मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस आरोपित की तलाश कर रही है।