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हैदराबाद गैंगरेप का 5 वाँ आरोपित ओमैर खान ‘गिरफ्तार’ : पुलिस को वीर्य रिपोर्ट आने का है इंतजार, पीड़िता का नाम बताने वाले चैनलों पर हो रही कार्रवाई

हैदराबाद के जुबली हिल्स में नाबालिग लड़की के साथ हुए गैंगरेप मामले में पुलिस द्वारा अब पाँचवे आरोपित को गिरफ्तार करने की खबर है। हालाँकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। पकड़े गए आरोपित का नाम ओमैर खान बताया जा रहा है। दावे के मुताबिक ओमैर खान की गिरफ्तारी सोमवार (6 जून 2022) को कर्नाटक के बीदर से हुई है।

पाँचवे आरोपित की गिरफ्तारी का दावा करने वाले डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक पुलिस ने ओमैर खान के पता चलने का दावा किया है। अब तक इस केस में चार आरोपित गिरफ्तार किए गए थे। इन आरोपितों में सदुद्दीन मालिक को छोड़ कर बाकी सभी नाबालिग बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी आरोपितों ने गैंगरेप वाले दिन पब में एक अन्य लड़की से भी दुर्व्यवहार किया था। वह लड़की भी नाबालिग बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक 17 साल की नाबालिग पीड़िता के बयान सोमवार (6 जून 2022) को मजिस्ट्रेट के आगे दर्ज हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि इस बयान की कॉपी पुलिस को मिल चुकी है। आगे की कार्रवाई पीड़िता के कोर्ट में दिए गए बयानों के मद्देनजर की जाएगी। इसी के साथ पुलिस टीम वारदात में प्रयुक्त इनोवा कार की पिछली सीट पर मिले वीर्य व अन्य सबूतों की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा कर रही हैं।

वहीं पुलिस ने नाबालिग पीड़िता के वीडियो वायरल करने और उसकी पहचान उजागर करने वाले कुछ यूट्यूब चैनल संचालकों पर FIR दर्ज की है। पुलिस ने इसको सुप्रीम कोर्ट की नियामवली का उललंघन बताया है।

क्या है पूरा मामला

गौतलब है कि यह घटना 28 मई 2022 की है। तब 17 साल की पीड़िता पार्टी के बाद अपने घर लौट रही थी। उसी वक्त हैदरबाद जुबली हिल्स इलाके में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 323 और पॉक्सो एक्ट की धार 9 और 10 के तहत मामला दर्ज किया।

रिपोर्ट की मानें तो आरोपितों ने पहले पीड़िता से उसके घर छोड़ने की बात कही। बाद में एक पार्क की हुई कार के अंदर उसके साथ मारपीट की गई और फिर बारी-बारी से सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान दूसरे आरोपित कार के बाहर पहरा दे रहे थे। भाजपा प्रवक्ता के कृष्णसागर राव ने हैदराबाद पुलिस पर AIMIM और TRS के राजनीतिक दबाव में जाँच करने का आरोप लगाया था।

पैगंबर के बाद अब गरीब नवाज की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं: ह₹@#! शब्द पर BJP विधायक राजा सिंह की गिरफ्तारी की माँग

तेलंगाना प्रदेश के BJP विधायक दल के नेता टी. राजा सिंह द्वारा अजमेर शरीफ दरगाह पर की गई टिप्प्पणी से विवाद खड़ा हो गया है। हैदराबाद गोशमहल से विधायक राजा सिंह ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को ‘अपशब्द’ कहे थे और बताया था कि कैसे पृथ्वीराज चौहान की पत्नी का गैंगरेप करवाया गया। मुस्लिम संगठनों ने MLA राजा सिंह की गिरफ्तारी की माँग करते हुए पुलिस में शिकायत की है। एक थाने के आगे नारेबाजी भी की गई है। राजा सिंह ने यह बयान 2 जून 2022 (गुरुवार) को महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर दिया था।

महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर राजा सिंह ने कहा, “आपने फिल्म के माध्यम से जाना कि कश्मीर में हिन्दुओं पर कितना अत्याचार हुआ। आप सब पृथ्वीराज चौहान फिल्म देखने जाना। पृथ्वीराज के समय में भी मुग़लों का बहुत अत्याचार था लेकिन उन्होंने अपना सिर कभी नहीं झुकाया। आज कई हिन्दू अजमेर दरगाह जाते हैं। लेकिन अगर कोई उस दरगाह का सही इतिहास जान ले तो चैलेन्ज है कि कोई दुबारा वहाँ नहीं जाएगा। ये ऐसे ह$^& की दरगाह (कब्र) है जिसने पृथ्वीराज चौहान की पत्नी को बलात्कार के लिए सिपाहियों के आगे फेंक दिया था। आज के हर व्यक्ति को अपना इतिहास जानने की जरूरत है।”

वहीं इस बयान के बाद राजा सिंह के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए उनकी गिरफ्तारी की मुहिम चलाई जाने लगी। दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस सेवा दल ने राजा सिंह की गिरफ्तारी की माँग की है।

राजा सिंह के खिलाफ सूफियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने हैदराबाद पुलिस में राजा सिंह के खिलाफ तहरीर दी। उन्होंने कहा, “हम गरीब नवाज की शान में गुस्ताखी नहीं सह सकते। भाजपा नूपुर शर्मा की तरह राजा सिंह को भी पार्टी से निकाले। साथ ही पुलिस राजा सिंह को गिरफ्तार करे।”

वहीं राजा सिंह की गिरफ्तारी की माँग को ले कर मुस्लिम संगठन के कई लोगों ने हैदराबाद के बहादुरपुरा इलाके में सड़क जाम की। इस दौरान उनकी पुलिस से नोकझोंक भी हुई।

‘इतिहास बताना कौन सी गलत बात’ : राजा सिंह MLA

ऑपइंडिया ने इस मुद्दे पर विधायक राजा सिंह से बात की। राजा सिंह ने कहा, “मैंने हिन्दुओं को उनके सच्चे इतिहास को बताया है। इतिहास बताना कोई गलत बात नहीं। विरोधियों की पुरानी आदत है कि जब भी कोई राष्ट्र या धर्म की बात सच्चे रूप में करने लगे तो उसके खिलाफ हंगामा शुरू कर दो। मेरे खिलाफ नांदेड़ और हैदराबाद में FIR दर्ज होने की जानकारी आ रही है। लेकिन यही FIR करवाने वाले लोग तब कहाँ थे जब माँ कौशल्या और भगवान राम का अपमान इसी हैदराबाद में हुआ था। तब यही लोग सड़कों पर उतरते तो हमें भी लगता कि सेक्युलरिज़्म जिन्दा है। माफ़ी या बयान वापसी जैसा शब्द मेरी हिस्ट्री में नहीं है और न ही मुझे सत्य बताने के लिए इस हंगामे से कोई फर्क पड़ने वाला।”

‘इतिहास की गलतियाँ कोर्ट में नहीं हो सकती ठीक’ : जमीयत ने खटखटाया SC का दरवाजा, याचिका में देश भर के मस्जिदों के लिए जताई चिंता

ज्ञानवापी मुद्दे पर दायर याचिकाओं के बाद अब मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991, को संवैधानिक चुनौती देने वाली अश्विनी उपाध्याय की याचिका मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया।

अपनी याचिका में जमीयत ने कहा कि उपाध्याय की याचिका में वह मुद्दे उठाए गए हैं जिन पर पहले से कोर्ट द्वारा विचार किया जा चुका है। ऐसे में अगर याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सहीं माना भी जाए तो ये इतिहास की गलतियाँ सुधारने के अलावा कुछ भी नहीं।

बता दें कि अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 को संवैधानिक चुनौती देते हुए उन मंदिरों को पुनर्स्थापित करने की माँग उठाई थी जिन्हें मुगल राज के दौरान मंदिरों में तब्दील किया गया। इसी याचिका में हस्तक्षेप का आग्रह करते हुए जमीयत ने एजाज मकबूल से याचिका दायर करवाई और कहा कि इतिहास में हुई गलतियों को न्यायिक प्रक्रिया से ठीक नहीं किया जा सकता।

अपनी बात को साबित करने के लिए जमीयत ने अयोध्या फैसले का हवाला दिया जिसमें सुप्रीम कोर्ट 9 नवंबर 2019 में कहा था, “कानून का प्रयोग, बीते समय में जाने और इतिहास में हुई घटना से असहमत लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराने के लिए, उपकरण की तरह नहीं किया जा सकता।” कोर्ट ने कहा था कि आज की अदालतें ऐतिहासिक अधिकारों को लेकर तब तक संज्ञान नहीं ले सकतीं, जब तक कि यह नहीं दिखाया जाता है कि उनके कानूनी परिणाम वर्तमान में लागू करने योग्य हैं।

इसमें कहा गया था कि अदालत उन दावों पर आज के कानूनों के हिसाब से विचार नहीं कर सकती जो मुगल शासकों के दौर में हिंदू पूजा स्थलों के साथ किया गया था। मुस्लिम संगठन ने अपनी याचिका में वक्फ अधिनियम और पूजा स्थल अधिनियम 1991 के बीच कोई गतिरोध नहीं है जैसा कि अश्विनी उपाध्याय ने आरोप लगाया है क्योंकि 1991 के अधिनियम की धार 7 इसे अन्य अधिनियमों पर एक ओवरराइडिंग इफेक्ट देती है। याचिका के मुताबिक देश में कई मस्जिदों की सूची है जो सोशल मीडिया पर लगातार चल रही है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मस्जिदों को कथित तौर हिंदू पूजा स्थलों को न्ष्ट करके बनाया गया था। इसलिए यह कहने की जरूरत नहीं है कि यदि वर्तमान याचिका पर विचार किया जाता है तो देश में अनगिनत मुकदमेबाजी की बाढ़ आ जाएगी और अयोध्या विवाद के बाद देश जिस धार्मिक विभाजन से गुजर रहा है, वे केवल और ज्यादा बढ़ेगा।

कोरोना की ‘सुपर स्प्रेडर’ बनी करण जौहर की पार्टी: अब तक 55 सेलेब्रिटी चपेट में, SRK, सैफ, कार्तिक और कैटरीना भी कोविड+

हाल ही में फिल्म निर्माता करण जौहर की जन्मदिन की पार्टी में शामिल कई फ़िल्मी स्टार कोरोना के नए वैरिएंट से संक्रमित पाए गए हैं। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने सोमवार (6 जून, 2022) को कहा कि करण जौहर की जन्मदिन की पार्टी में शामिल हुए कई लोग कोरोना की चपेट में आ गए हैं। उन्होंने बताया कि जौहर की पार्टी में लोग ओमाइक्रोन के वेरिएंट बी5 और बी6 से संक्रमित हुए हैं जो इस समय तेजी से फैल रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, शाहरुख खान, कैटरीना कैफ, सैफ अली खान, आदित्य रॉय कपूर और कार्तिक आर्यन जैसे सितारे भी करण जौहर की जन्मदिन की पार्टी में भाग लेने के बाद कोविड -19 वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। ऐसी खबरें आ रही हैं कि पार्टी में शामिल हुए 50 से 55 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं।

वहीं मीडिया से बात करते हुए, राजेश टोपे ने कहा कि राज्य में कोरोना के सकारात्मकता दर में वृद्धि हुई है और लोगों से मास्क पहनने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा, “मैंने सीएम उद्धव ठाकरे से भी बूस्टर खुराक को अनिवार्य बनाने पर विचार करने का अनुरोध किया है क्योंकि यह अभी के लिए वैकल्पिक है।”

राजेश टोपे के अनुसार, मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पालघर सहित 6 जिलों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन जिलों में टेस्टिंग बढा दी गई है। लोगों से मास्क पहनने और कोरोना का टीका लगवाने की भी अपील की जा रही है।

गौरतलब है कि रविवार को मुंबई में कोरोना के 961 मामले मामले सामने आए थे। इस दौरान एक शख्स की मौत भी हुई थी। इसके साथ ही महाराष्ट्र में कोविड -19 के आँकड़े इस प्रकार थे- सकारात्मक मामले 78,93,197, मृत्यु 1,47,866, ठीक 77,38,564, सक्रिय मामले 6,767, कुल परीक्षण 8,10,61,270, वहीं आज हुए परीक्षणों की संख्या 25,994।

महाराष्ट्र में शिवसेना ने फिर शुरू की ‘होटल पॉलिटिक्स’: तीन दिन के लिए बंद किए जा रहे पार्टी के विधायक, होने हैं राज्यसभा चुनाव

महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव से पहले शिवसेना के विधायकों को एक होटल में शिफ्ट करने की खबर सामने आई है। यह होटल मुंबई के मलाड में स्थित है। समाचार एजेंसी एएनआई ने इसकी कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं। इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि एक टूरिस्ट बस में पुलिस की निगरानी में उन विधायकों को होटल ले जाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र में 10 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की महा विकास आघाड़ी ने 7 जून को मुंबई में अपने सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। शिवसेना, राकांपा और कॉन्ग्रेस के विधायकों के साथ-साथ छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों के मंगलवार (7 जून 2022) को मुंबई के ट्राइडेंट होटल में बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। ये विधायक अगले तीन दिन होटल में बिताएँगे। सूत्रों के अनुसार, कॉन्ग्रेस और एनसीपी भी क्रॉस वोटिंग के डर से अपने सभी विधायकों के साथ-साथ निर्दलीय और सहयोगी दलों के विधायकों को एक साथ रखने की योजना बना रही है।

शिवसेना नेता और राज्य सरकार में मंत्री उदय सामंत ने रविवार (5 जून, 2022) को मीडियाकर्मियों से बातचीत में दावा किया कि महा विकास आघाड़ी के सभी चार उम्मीदवार आराम से चुनाव जीतेंगे। उन्होंने कहा था, “चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मुझे नहीं पता कि भाजपा में तीन उम्मीदवार उतारने की हिम्मत कहाँ से आ रही है।”

मालूम हो कि महाराष्ट्र से छठी राज्यसभा सीट के लिए चुनावी मुकाबला भाजपा के धनंजय महादिक और शिवसेना के संजय पवार के बीच है। राज्य में कुल छह सीटों के लिए हो रहे चुनाव में भाजपा ने तीन, शिवसेना ने दो और कॉन्ग्रेस व एनसीपी ने एक-एक उम्मीदवार उतारे हैं।

बता दें कि चुनाव होने तक शिवसेना (55), एनसीपी (52) और कॉन्ग्रेस (44) के सभी विधायक मुंबई में एक साथ रहेंगे। चार प्रमुख दलों के अलावा राज्य विधानसभा में निर्दलीय और छोटे दलों के 25 विधायक हैं।

2 साल में 5 गुना बढ़ा भारत में क़तर का निवेश, भारत के 15000 व्यवसाय क़तर में सक्रिय: उप-राष्ट्रपति के दौरे में स्टार्टअप ब्रिज समझौता

भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu) रविवार (5 जून, 2022) को कतर पहुँचे। यहाँ उन्होंने कतर (Qatar) के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री शेख खालिद बिन खलीफा बिन अब्दुल अजीज अल सानी (Sheikh Khalid bin Khalifa bin Abdulaziz Al Thani) से मुलाकात की। इस दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भारत-कतर बिजनेस फोरम में भारत-कतर स्टार्टअप ब्रिज का शुभारंभ किया।

नई पहल भारत और कतर के स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ेगी और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को आगे ले जाने में मदद करेगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, नायडू ने भारत-कतर के मजबूत संबंधों पर बात की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आपसी लाभ के लिए, दोनों देशों को एक-दूसरे को सहयोग करना बेहद जरूरी है। नायडू और शेख खालिद ने इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की और व्यापार, निवेश, आर्थिक, सुरक्षा सहयोग समेत द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की।

उपराष्ट्रपति ने इस बात की भी सराहना की कि मार्च, 2020 से भारत में कतर का निवेश पाँच गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा, “यह अभी भी क्षमता से काफी कम है इसे और बढ़ाया जा सकता है।”

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “लोगों का आपसी संपर्क भारत और कतर के बीच ऐतिहासिक रिश्ते के केंद्र में हैं। कतर में 7,50,000 से अधिक भारतीय हैं। दोनों पक्षों के बीच बहुआयामी सहयोग ने आर्थिक, ऊर्जा, निवेश, शिक्षा, रक्षा और सांस्कृतिक रिश्तों में अहम वृद्धि देखी है। नायडू ने कहा कि 2021-22 के दौरान भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय व्यापार 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है (1.167 लाख करोड़ रुपए)। व्यापार में ऊर्जा का बोलबाला है। हमारा ध्यान अब व्यापार का विस्तार और विविधता लाने पर है। कतर में 15,000 से अधिक भारतीय व्यवसाय रजिस्टर्ड हैं।

इस अवसर पर नायडू ने कतर में एक प्रार्थना कक्ष और एक श्मशान के लिए भारतीय समुदाय के लंबे समय से किए जा रहे अनुरोध को भी दोहराया। उन्होंने उल्लेख किया कि कतर केवल उच्चतम प्रति व्यक्ति आय वाले देशों में ही नहीं है, बल्कि विश्व में शीर्ष गैस आपूर्तिकर्ता भी है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे कतर के अपनी विकास यात्रा में उठाए जा रहे कदमों से बहुत प्रभावित हैं।

उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि भारत को पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में कतर के साथ काम करने में भी प्रसन्नता होगी। हमारी लगभग 40 फीसदी गैस जरूरतें कतर से पूरी होती हैं, इसका उल्लेख करते हुए नायडू ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा में कतर की भूमिका को काफी महत्व देता है और खरीदार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़कर एक व्यापक ऊर्जा साझेदारी में आगे बढ़ने की जरूरत को रेखांकित करता है।

धर्म की रक्षा के लिए जरूरी है भीड़तंत्र

गरीब रैला याद है? या लाठी रैला? लालू यादव का नाम तो जानते होंगे? रैली को रैला में लालू नाम के इसी अपराधी ने बदला था। इसको समझने-बूझने के लिए 20-30 साल पहले जाना होगा। अब का अपराधी लालू तब बिहार की राजनीति का स्टार हुआ करता था। उस लालू यादव ने अपनी राजनीतिक हनक के लिए जब-जब जो-जो दिल में आया, वो किया।

राजनीतिक चश्मे से देखें तो अपने प्रयोगों में लालू यादव सफल भी रहा। सिवाय खुद के अपराधी कहलाने के अभी तक वो और उसका खानदान सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते ही जा रहा है। आखिर कारण क्या है? जवाब है – भीड़ को साध लेना।

लालू बिहार का पाइड पाइपर था। लेकिन क्या देश में सिर्फ बिहार ही है? नहीं। मतलब पाइड पाइपर और भी हैं। तभी हर जगह की भीड़ को साधा जा रहा है। इसको सिर्फ रैली/रैला जैसे शब्दों में बाँट कर देखेंगे तो धोखा खाएँगे। भीड़ की उर्जा कभी वोट बन कर तो कभी बवाली बन कर समाज को दशा-दिशा देती आई है। इसकी शक्ति इतनी है कि यह सर्वशक्तिमान संविधान को भी बदल डालती है। मतलब भीड़ > संविधान।

चौंकिए मत। संविधान एक किताब है, अच्छी किताब है लेकिन एकमात्र किताब नहीं। देश के चुनिंदा पाइड पाइपर इस सच्चाई को बखूबी समझ गए हैं। जाट आंदोलन में भीड़ की उर्जा पर 2-4 बलात्कार के आरोप (जिसे बाद में SIT ने नकारा) भी लगे तो क्या हुआ… आरक्षण वाला संविधान तो बदल कर ही रहेगा। गुर्जर आंदोलन में करोड़ों-अरबों की संपत्ति (सरकारी भी और आम लोगों की भी) का नुकसान हो तो हो… आरक्षण वाला संविधान तो बदलना ही पड़ेगा। पूरे देश के किसान खेतों में हाड़-मांस गलाएँ, दिल्ली में एसी टेंट/ट्रैक्टरों में बैठा चंद हजार किसान संविधान तो बदल ही डालेगा ना!

मतलब भीड़ > संविधान। सत्ता में बैठे लोग इस सच को जानते जरूर हैं बस बोलते या लिखते नहीं। संसद में भेजे गए माननीय शब्दों और प्रतीकों को बखूबी समझते हैं, इनसे खेलते हैं। यही कारण है कि ये बात-बात में दुहाई लोकतंत्र की देते हैं लेकिन झुकते भीड़तंत्र के सामने हैं। भीड़तंत्र के सामने लोकतंत्र झुक जाता है, क्या यह सच है? ऊपर के सारे उदाहरण इसी प्रश्न के उत्तर हैं।

इस्लाम एक मजहब (धर्म) है। कुछ इंसान इस मजहब को मानते हैं। शब्द पर ध्यान दीजिए। इंसान मानते हैं, गाय-बैल-कुत्ते-बिल्ली नहीं। इसी तरह बौद्ध, जैन, सिख आदि-इत्यादि भी धर्म हैं। इन धर्मों को भी इंसान ही मानते हैं… गाय-बैल-कुत्ते-बिल्ली नहीं। आप सोच रहे होंगे भीड़ की बात करके धर्म क्यों घुसा दिया? घुसा दिया क्योंकि भीड़ भी इंसानों का ही समूह होता है। जिस भीड़ की ऊर्जा की बात ऊपर की गई है, वही धर्म में भी लागू होती है। यहाँ वाली भीड़ संविधान में बदलाव कर पाती है या नहीं, यह भीड़-विशेष पर निर्भर करता है।

एक मजहबी संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कुछ महीनों पहले भीड़ को हाँक-हाँक कर भारत में ईशनिंदा कानून बनाने की माँग रख दी थी। ईशनिंदा कानून मतलब इनके मजहब से जुड़े प्रतीकों को लेकर कुछ बोला तो जिंदगी खत्म। इनके लिए आसान भी है पाइड पाइपर बनना। इनकी भीड़ “सर तन से जुदा” वाली भीड़ है। पत्थर बरसाती भीड़ है। मीडिया में अक्सर लोग इन्हें ‘शांतिप्रिय’ भीड़ बताते हैं।

“शिवलिंग 4 इंच का था, सहलाने से 12 इंच का हो गया। शिवलिंग क्या है, लिंग तो सबके पास होता है। फुटपाथ पर निकल आए एकसाथ कई शिवलिंग। शिवलिंग पर कंडोम। रेप के बाद सीता की योनि से रक्तस्राव…” – गुस्सा आया क्या? एकबार फिर पढ़िए। ये सारी खबरें हैं। इन खबरों को पढ़ कर भारत में ही भीड़ के दूसरे पहलू को देखिए-बुझिए। यह वो भीड़ है, जो “सर तन से जुदा” नहीं करती, बहुत हुआ तो कोर्ट-कचहरी चली जाती है।

अब देखते हैं नुपुर शर्मा मामले को। “सर तन से जुदा” वाली भीड़ भारत तो छोड़िए, विदेशों में भी एक्टिव हो गई। पार्टी ने क्या किया? भीड़ की सुनी, सस्पेंड कर दिया। सवाल उठता है कि शिवलिंग पर किन-किन पार्टियों/ऑफिस/संस्थानों आदि ने किन-किन को सस्पेंड किया था? खबरों की दुनिया से ऐसी कोई खबर मुझ तक तो नहीं पहुँची।

नुपुर शर्मा से एक और नाम याद आया। कमलेश तिवारी नाम के एक इंसान थे। अब वो सिर्फ एक नाम हैं। देश के कानून-संविधान के तहत वो जेल गए थे क्योंकि किसी ने कुछ आरोप लगाया होगा, पुलिस-वकील ने उन्हीं आरोपों पर जज के सामने पेश कर उन्हें जेल भेज दिया। उसके बाद क्या? “सर तन से जुदा” वाली भीड़ शांत हो गई? जिस कानून ने जेल भेजा, उसको मान लिया? नहीं। हत्या कर दी। हत्यारे को तो कानून-पुलिस ने पकड़ भी लिया लेकिन “सर तन से जुदा” वाली हत्यारी भीड़ पर कानून ने क्या किया? नील बटे सन्नाटा… मतलब भीड़ > संविधान।

महात्मा बुद्ध के बारे में बोला तो नाखून नोंच लेंगे… जैन तीर्थंकरों पर कुछ कहा तो आँखें निकाल लेंगे… सिख गुरुओं पर आपत्तिजनक बात की तो ओंठ सील देंगे… हिंदू देवी-देवताओं पर कॉमेंट किया तो नाक काट दिया जाएगा… आदि-इत्यादि जैसे आंदोलन इस देश में क्यों नहीं किए जा सकते? संविधान बदलने में सक्षम भीड़ आखिर इस ओर क्यों नहीं सोचती? ईशनिंदा के साथ-साथ ऐसे कानूनों के होने से इस देश का भला बिगड़ क्या जाएगा? और हाँ, भीड़ भला कानून मानती कहाँ है?

अब सवाल यह है कि धर्म वाली भीड़ को हाँके कौन? कौन बनेगा इनका पाइड पाइपर? मजहबी भीड़ को अपना लक्ष्य पता है, वो तो कानून बनाने की माँग के लेवल तक पहुँच गए हैं। गैर-कानूनी ही सही, संविधान बदल डालने को ही सही… हे धर्म के रक्षक, आप कब जागेंगे?

‘भगवान शिव का *#@ जहाँ-जहाँ गिरा होगा वो गल गया होगा’: सपा नेता की शिवलिंग पर अश्लील टिप्पणी, पूछा- वो आदमी थे या पत्थर?

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष एवं सपा एमएलसी लाल बिहारी यादव ने ज्ञानवापी मामले में भगवान शिव पर टिप्पणी करते हुए विवादित बयान दिया है। जिसका वीडियो सामने आने से लोग भड़के हुए हैं। सपा नेता ने जहाँ ज्ञानवापी में मिले ‘शिवलिंग’ को खारिज करते हुए कहा, “भगवान शिव आदमी थे या पत्थर? वहाँ शिव का &% मिला था कि पत्थर। शिव लिंग तो गल गया होता कि पत्थर का होता। भगवान शिव का *** जहाँ-जहाँ गिरा होगा, वो मांस और हड्डी का रहा होगा, वहीं गल गया होगा कि पत्थर का होगा कि वहीं पड़ा होगा।”

आजतक के न्यूज़ पत्रकार शुभंकर मिश्रा ने समाजवादी पार्टी के नेता लाल बिहारी यादव का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “सपा के MLC लाल बिहारी यादव की ‘भगवान शिव’ पर चौंकाने वाली घृणित टिप्पणी। ऐसी टिप्पणी जो करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर चोट करती है। क्या ऐसे गंदे व्यक्ति को अखिलेश यादव पार्टी से निकालेंगे?”

वहीं उनके इस विवादित और बेहद अशोभनीय बयान को हिन्दू धर्म का अपमान मानते हुए उन पर कार्रवाई की माँग की जा रही है। वहीं उनके इस बयान का विरोध भी शुरू हो गया है। उनके घृणित बयान के विरोध में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने जिला संयोजक अमित श्रीनेत के नेतृत्व में सपा एमएलसी लाल बिहारी यादव का पुतला भी दहन किया है।

आज टाइम्स नाउ में उन्होंने सफाई देने की कोशिश की है। लेकिन लोग कार्रवाई पर अड़े हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिन्दू युवा वाहिनी का कहना है कि विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। वह इसके लिए माफी माँगे। अगर उन्होंने माफी नहीं माँगी तो हिदू युवा वाहिनी व्यापक प्रदर्शन कर विरोध जारी रखेगी।

बता दें कि लाल बिहारी यादव ने कानपुर की घटना का भी बचाव किया और हिंसा का कारण भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा का भड़काऊ भाषण को बताया है। रिपोर्ट के अनुसार आगे यह भी कहा, “भाजपा के लोग इसी तरह से बोलकर दंगे कराते हैं। भाजपा सरकार का मुद्दा हिदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद है, उनको विकास से कोई लेना-देना नहीं है।” यह बातें उन्होंने रविवार (4 जून, 2022) को डाक बंगले में पत्रकारों से बातचीत में कही।

जुमे के दिन जामा मस्जिद में मौलवियों से शास्त्रार्थ करेंगे महंत यति नरसिंहानंद, कहा – ‘उनकी किताब में लिखा है, बताने पर सर तन से जुदा का फतवा’

गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के महंत और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी (Yati Narsinghanand) ने नूपुर शर्मा मामले में जामा मस्जिद जाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वे अगले जुमे पर कुरान और इस्लाम की अन्य किताबें लेकर जामा मस्जिद मस्जिद जाएँगे और वहाँ सभी मौलानाओं को इन्हें दिखाकर उनसे सर तन से जुदा करने की वजह पूछेंगे। नरसिंहानंद गिरी ने कहा किबीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) द्वारा कही गई बातें उन्हीं की हदीस और कुरान में लिखी हुई हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में वह कह रहे हैं, “लाखों लोग जामा मस्जिद में नमाज के लिए इकट्ठे होते हैं। मैं वहाँ उन लोगों को दिखाना चाहता हूँ कि जिस बात के लिए वह हम पर ​सर तन से जुदा का फतवा जारी करते हैं, वो सारी की सारी बातें उनकी अपनी किताबों में लिखी हुई हैं।”

उन्होंने कहा, “हाल ही में जो नूपुर शर्मा के साथ किया गया, इसमें उनकी गलती नहीं है। ये भारत के कायर नेता हैं, कुछ उस बात को लेकर डर रहे हैं और कुछ बिगड़ रहे हैं। उन्हीं के कारण आज हमारी ये दुर्दशा है। हम कुछ भी गलत या झूठ नहीं बोल रहे हैं। हम तो केवल वही बातें बोल रहे हैं, जो इस्लामी किताबों में लिखी हुई हैं। उनकी किताबें हमने नहीं लिखी हैं। उन्होंने अपनी किताबें खुद लिखी हैं, मुहम्मद के बारे में, इस्लाम के बारे में और कुरान के बारे में। हम जब उन बातों को ​कहते हैं, तो वे कहते हैं कि वे हमारा सिर काट देंगे।”

गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के महंत ने आगे कहा, “जिस तरह से वे पूरी दुनिया में जिहाद यानी इस्लामिक आतंकवाद फैला रहे हैं, ये उनकी किताबों में लिखा है। मैं पूरी दुनिया के मौलानाओं को चुनौती देता हूँ कि वे 17 जून, 2022 को दिल्ली की जामा मस्जिद में आएँ। मैं वहाँ बिल्कुल अकेला आऊँगा। केवल मोबाइल, किताबें और कुछ सी​डी लेकर आऊँगा, ताकि मैं उन्हें दिखा सकूँ कि उनके मौलाना क्या बोलते हैं। मैं उन्हें दिखा सकूँ कि मुसलमान क्या बोलते हैं। उन बातों के बारे में जिनको लेकर वो आप पर फतवा लगा रहे हैं।”

उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “ऐसा लगता है कि इस देश में इस्लाम की गुलामी आ गई है। कोई भी इसे स्वीकार कर सकता है, लेकिन मैं नरसिंहानंद गिरी इसे स्वीकार नहीं करूँगा। मैं जानता हूँ कि वो मुझे वहाँ जान से मार देंगे, लेकिन इस अपमानजनक जीवन जीने से अच्छा वहाँ जाकर मर जाना है। ताकि लोगों को समझ आ सके कि नूपुर शर्मा और हम जैसे लोग सच बोल रहे हैं। हिंदुओं मैं तुम्हारा साथ नहीं चाहता हूँ। मैं वहाँ अकेला ही जाऊँगा। अगर मैं अकेला नहीं गया तो ये सरकारें हम पर झूठा मुकदमा लगा देंगी। मैं वहाँ शांतिपूर्वक तरीके से अपनी बात रखूँगा और उनकी बात सुनूँगा, जो भी होगा देखा जाएगा।”

अब नूपुर शर्मा को पूछताछ के लिए समन करेगी मुंबई पुलिस, BJP से निलंबन के बाद बढ़ी मुश्किलें: ‘रज़ा अकादमी’ वालों ने दर्ज कराई है FIR

पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के आरोप में भाजपा ने प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया। वहीं अब मुंबई पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजेगी। मुंबई के पायधुनी पुलिस थाने में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। महाराष्ट्र की राजधानी के पुलिस कमिश्नर संजय पांडे ने कहा कि मुंबई पुलिस जल्द नूपुर शर्मा को समन कर के बयान दर्ज कराने के लिए पेश होने को कहेगी। उन पर एक टीवी डिबेट में पैगंबर मुहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप हैं।

मुस्लिम संगठन ‘रजा अकादमी’ के इरफ़ान शेख ने नूपुर शर्मा पर मामला दर्ज कराया है। उन्हें IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-295 (किसी उपासना स्थल या किसी समुदाय द्वारा पवित्र मानी जाने वाली वस्तु को नष्ट करना, नुकसान पहुँचाना या फिर किसी समुदाय का अपमान करना) के साथ-साथ 153A (धर्म, भाषा ये नस्ल के आधार पर नफरत फैलाना) और धारा-505(2) (अपने कथन या हरकत से दो समुदायों के बीच घृणा पैदा करना) के तहत आरोपित बनाया गया है।

मुंबई के CP ने स्पष्ट किया है कि इस सम्बन्ध में जो भी कार्रवाई ज़रूरी होगी, उनकी पुलिस करेगी। आरोप है कि ज्ञानवापी मामले पर टीवी डिबेट के दौरान उन्होंने ये बात कही थी। शिकायतकर्ता इरफ़ान शेख ‘रज़ा अकादमी’ के जॉइंट सेक्रेटरी हैं। साध्वी प्राची ने नूपुर शर्मा का समर्थन करते हुए कहा कि हिन्दू देवी-देवताओं की नग्न तस्वीरें बनाने वाले एमएफ हुसैन को क़तर नागरिकता देता है, जबकि शिवलिंग को फव्वारा बताने वालों को जवाब दिया गया तो उसने भारतीय राजदूत को समन कर दिया।

जहाँ क़तर, ईरान और कुवैत ने इस मामले में भारतीय राजदूत को तलब कर के आपत्ति जताई, वहीं पाकिस्तान ने भी भारत की आलोचना की। अफगानिस्तान तक इस मामले में भारत के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा रहा है। मुस्लिम देशों के संगठन ने भी बयान जारी किया। दिल्ली भाजपा के कई नेताओं ने भी नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के निलंबन पर आपत्ति जताई है। कॉन्ग्रेस पार्टी भी इस मामले में भाजपा पर लगातार हमलावर है।