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मथुरा के शाही ईदगाह ढाँचे की 13.37 एकड़ जमीन हिंदुओं की, कोर्ट में दस्तावेज पेश: लाउडस्पीकर से अजान पर रोक की भी माँग

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर एवं शाही ईदगाह ढाँचे (Shri Krishna Janm Sthan And Shahi Idgah) को लेकर कोर्ट में नई याचिका पेश की गई है। याचिका में कहा गया है कि विवादित ईदगाह ढाँचा केशवदेव मंदिर का गर्भगृह है, इसलिए सुबह 4:30 बजे लाउडस्पीकर पर अजान को प्रतिबंधित की जाए। इसके साथ ही जन्मस्थान ट्रस्ट ने ईदगाह सहित 13.37 एकड़ भूमि पर दावा ठोकते हुए, इससे संबंधित कागजात कोर्ट को सौंपा है।

मथुरा सिविल कोर्ट में गुरुवार (26 मई 2022) को सुनवाई के दौरान श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट ने कहा कि शाही ईदगाह ढाँचा की जमीन सहित आसपास के 13.37 एकड़ जमीन मंदिर के हैं। इसके साक्ष्य के रूप में ट्रस्ट ने कोर्ट को दस्तावेज भी सौंपे। ट्रस्ट के वकील मुकेश खंडेलवाल का कहना है कि जमीन का खसरा-खतौनी और नगर निगम के कागज न्यायालय में पेश किए गए हैं।

कोर्ट को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि शाही ईदगाह विवादित ढाँचे पर लाउडस्पीकर से अजान पर रोक लगाई जाए। इसके साथ रिवीजन पीटिशन दाखिल कर मामले में गर्मी की छुट्टियों के पहले शाही ईदगाह विवादित परिसर का सर्वे कराने की माँग की गई। इससे पहले, सिविल जज सीनियर डिविजन ज्योति सिंह ने इस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए 1 जुलाई की तारीख दी थी।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शिवलिंग मिलने के बाद अब मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर नई याचिका दायर कर इसे तत्काल सील करने की माँग की गई थी। आशंका जताई गई थी कि मथुरा के मंदिर में सबूत मिटाए जा सकते हैं, ऐसे में उसे सील करने का आदेश देकर अदालत साक्ष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करे। मुथरा सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने ये याचिका दायर की है, जो लंबे समय से श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति की लड़ाई लड़ रहे हैं।

बता दें कि यह मामला 13.37 एकड़ भूमि के मालिकाना हक का विवाद है। इसमें 10.9 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान के पास और 2.5 एकड़ जमीन शाही ईदगाह मस्जिद के पास है। अब इस मामले में हिंदू पक्ष ने पूरी जमीन पर दावा किया है।

सुप्रीम कोर्ट में भी दायर है याचिका

कृष्ण जन्मभूमि विवाद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में भी एक याचिका दायर की गई है, जिसमें कृष्ण जन्मभूमि की जमीन को समझौते के जरिए मस्जिद को देने का विरोध किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि इस मामले में हिंदुओं के साथ धोखा करके कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की जमीन को बिना किसी समझौते के शाही ईदगाह को दे दी गई थी। अदालत से माँग की गई है कि कोर्ट ये घोषित करे कि श्रीकृष्ण जन्म सेवा संस्थान द्वारा 12 अगस्त 1968 शाही ईदगाह के साथ किया गया समझौता बिना किसी क्षेत्राधिकार के किया गया था।

कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर कोर्ट लगा चुकी है जुर्माना

गौरतलब है कि इससे पहले मथुरा की कोर्ट ने ‘ठाकुर केशवदेव महाराज बनाम शाही मस्जिद ईदगाह इंतजामिया कमेटी’ की सुनवाई को रोकने की माँग पर याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना ठोंका था। सीनियर डिवीजिन की सिविल जज ज्योति सिंह ने याचिकाकर्ताओं को ढाई सौ रुपए जुर्माना लगाया था।

योगी 2.0 सरकार का पहला बजट पेश, महिला सुरक्षा, रोजगार और युवाओं पर विशेष ध्यान, जानें खास घोषणाएँ

उत्तर प्रदेश की योगी आद‍ित्‍यनाथ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए आज गुरुवार (26 मई, 2022) को विधानसभा में करीब 6 लाख 15 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश क‍िया। योगी सरकार 2.0 का यह पहला बजट था, जिसे राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना (Suresh Khanna) ने पेश किया। बजट में यूपी में युवाओं के रोजगार पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। जिसमें बताया गया कि प्रदेश में निजी निवेश के माध्यम से 01 करोड़ 81 लाख युवाओं रोजगार दिया गया है। सरकार ने बताया कि इन्हें निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया गया है। वहीं बजट में प्रदेश की सुरक्षा व्‍यवस्‍था, मह‍िलाओं की सुरक्षा, युवाओं को नौकरी, कृषि, सह‍ित सभी सेक्‍टरों पर ध्यान दिया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट पेश होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेन्स में कहा, “यह बजट प्रदेश की 25 करोड़ जनता की आकांक्षाओं की भावनाओं के अनुरूप है। इसमें गाँव, गरीब, किसान, नौजवान, महिलाएँ, श्रमिक और समाज के प्रत्येक तबके को ध्यान में रखा गया है। यह बजट 05 सालों का एक विजन भी है। जिससे प्रदेश के विकास की रूपरेखा तैयार होगी। यह बजट अगले 5 साल के विकास का लक्ष्‍य दर्शा रहा है। इसे उज्‍ज्‍वल भव‍िष्‍य का ड्राफ्ट बजट कहा जाना चाह‍िए।”

बजट की खास बातें

बजट 2022-23 में युवाओं के लिए खास

  • प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से 25 दिसम्बर 2021 से निःशुल्क टैबलेट/स्मार्टफोन वितरण योजना प्रारम्भ की गई है। इस योजना के अन्तर्गत अब तक लगभग 12 लाख टैबलेट/स्मार्ट फोन वितरण हेतु जनपदों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वहीं लोक कल्याण संकल्प पत्र , 2022 में आगामी 05 वर्षों में 02 करोड़ स्मार्ट फोन / टैबलेट वितरित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तिकरण योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2022-2023 के लिये 1500 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • युवाओं के बीच विभिन्न क्षेत्रों में उद्यमशीलता एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नई उप्र स्टार्टअप नीति -2020 के अन्तर्गत 05 वर्ष में प्रत्येक जनपद में कम से कम से एक तथा कुल 100 इन्क्यूबेटर्स एवं 10,000 स्टार्टअप्स की स्थापना का लक्ष्य है। जिसके सापेक्ष अब तक 47 इन्क्यूबेटर्स कार्यरत हैं तथा 5600 से अधिक स्टार्टअप्स पंजीकृत हो चुके हैं।
  • प्रतियोगी छात्रों को अपने घर के समीप ही कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के उददेश्य से राज्य सरकार द्वारा सभी मण्डल मुख्यालयों में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का संचालन किया गया है। योजना का विस्तार प्रदेश के सभी जनपदों में किया जा रहा है और योजना हेतु 30 करोड़ रूपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • युवा अधिवक्ताओं को कार्य के शुरूआती 03 वर्षों के लिए किताब एवं पत्रिका क्रय करने हेतु आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने के लिये 10 करोड़ रूपयए की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • अन्तर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्तर प्रदेश के मूल निवासी पदक विजेता खिलाड़ियों की सीधी भर्ती के माध्यम से राजपत्रित पदों पर नियुक्ति की व्यवस्था की गई है।
  • जनपद वाराणसी में अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की स्थापना के लिए भूमि क्रय हेतु 95 करोड़ रूपए प्रस्तावित है।
  • खेल के विकास एवं उत्कृष्ट कोटि के खिलाड़ी तैयार करने हेतु जनपद मेरठ में मेजर ध्यानचन्द खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास दिनांक 02 जनवरी, 2022 को प्रधानमंत्री जी द्वारा किया गया जिस पर 700 करोड़ रूपए की धनराशि व्यय होगी। विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु 50 करोड़ रूपए प्रस्तावित है।
  • भारत सरकार की खेलो इण्डिया एक जनपद- एक खेल योजनान्तर्गत प्रदेश के 75 जनपदों में खेलों इण्डिया सेन्टर्स की स्थापना प्रस्तावित है। खेल अवस्थापनाओं एवं अन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराते हुए वित्तीय वर्ष 2021-22 से प्रदेश में 36 अवस्थापनाओं का निर्माण किया जा रहा है तथा 06 अत्याधुनिक जिम विभिन्न जनपदों में स्थापित किए गए हैं।

श्रमिक एवं स्ट्रीट वेण्डर के लिए प्रावधान

  • पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों एवं अनाथ बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान किए जाने हेतु प्रदेश के 18 मण्डलों में प्रत्येक मण्डल में 01-01 अटल आवासीय विद्यालयों की स्थापना कराई जा रही है। इस हेतु 300 करोड रूपए प्रस्तावित है।
  • कामगारों / श्रमिकों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा तथा उनके सर्वांगीण विकास के उद्देश्य को सुनियोजित ढंग से प्राप्त किए जाने हेतु ‘उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक ( सेवायोजन और रोजगार ) आयोग’ का गठन किया गया है।
  • शहरी स्ट्रीट वेण्डर्स को आत्मनिर्भर बनाने हेतु प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेण्डर्स आत्मनिर्भर निधि योजना के अन्तर्गत 08 लाख 45 हजार से अधिक स्ट्रीट वेण्डर्स को ऋण वितरित कर उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश के 10 शहरों में 19 मॉडल स्ट्रीट वेण्डिंग जोन्स का विकास किया जा रहा है। शहरी बेघरों के लिए आश्रय योजना के अन्तर्गत 130 शेल्टर होम क्रियाशील किये जा चुके हैं।

बजट में सामाजिक सुरक्षा के संकल्प

  • वृद्धावस्था पेंशन योजनान्तर्गत प्रत्येक लाभार्थी की पेंशन की राशि को बढ़ाकर 1000 रूपए प्रतिमाह की दर से लगभग 56 लाख वृद्धजन को पेंशन प्रदान की जा रही है। उपरोक्त योजना हेतु 7053 करोड़ 56 लाख रूपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • निराश्रित महिला पेंशन योजनान्तर्गत पात्र लाभार्थियों को देय पेंशन की धनराशि 500 रूपए प्रतिमाह को बढ़ाकर 1000 रूपए प्रतिमाह कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2021-2022 में इस 12 योजना के अन्तर्गत 31 लाख महिलाओं को लाभान्वित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2022-2023 के बजट में इस योजना हेतु 4032 करोड़ रूपए की व्यवस्था है।
  • मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना हेतु 600 करोड़ रूपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान की धनराशि जो वर्ष 2017 के पूर्व मात्र 300 रूपए प्रतिमाह प्रति व्यक्ति थी, को बढ़ाकर 1000 रूपए प्रतिमाह कर दिया गया है। प्रदेश के 11 लाख से अधिक दिव्यांगजन इससे लाभान्वित हो रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2022-2023 के बजट में योजना हेतु 1000 करोड़ रूपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • कुष्ठावस्था विकलांग भरण-पोषण योजना के अन्तर्गत 3000 रूपए प्रति माह की दर से 34 करोड़ 50 लाख रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • मैनुअल स्कॅवेन्जर मृत्यु क्षतिपूर्ति योजना हेतु 01 करोड़ 50 लाख रूपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • बुजुर्ग पुजारियों, सन्तों एवं पुरोहितों के समग्र कल्याण की योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु बोर्ड के गठन हेतु 01 करोड़ रूपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।

इसके आलावा भी बजट में बहुत सी खास बातें हैं

  • पीएम ग्राम सड़क योजना के लिए 7373 करोड़ का बजट
  • कृषि क्षेत्र में 5.1 प्रतिशत विकास दर पाने का लक्ष्य। गन्ना भुगतान के लिए 1 हजार करोड़ का बजट। कान्हा गौशाला और बेसहारा पशु के लिए 100 करोड़ रुपए।
  • योगी आद‍ित्‍यनाथ सरकार के बजट में कुंभ मेला प्रयागराज के लिए 100 करोड़
  • प्रदेश की योगी आद‍ित्‍यनाथ सरकार ने अपने पहले बजट में कुंभ मेला प्रयागराज के लिए 100 करोड़ रुपए की घोषणा की है। स्वच्छ भारत मिशन शहरी के लिए 1353 करोड़ रुपए। बुंदेलखंड की विशेष योजना के लिए 500 करोड़ रुपए की घोषणा की है।

कल्याण सिंह के नाम पर लाई गई उन्नति योजना

कल्याण सिंह के नाम पर ग्राम उन्नति योजना लाई गई है। योजना के तहत गॉँव में सोलर लाइट लगाएगी सरकार।

अयोध्या में होगा सूर्यकुंड विकास, 140 करोड़ मिले

अयोध्या में सूर्यकुंड विकास 140 करोड़ रुपए से होगा। बुंदेलखंड में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर बनाया जाएगा। कानपुर मेट्रो रेल को 747 करोड़ रुपए म‍िले हैं। आगरा मेट्रो रेल को 597 करोड़ रुपए म‍िले है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर को 1306 करोड़ रुपए म‍िले हैं।

काशी विश्वनाथ राजघाट पुल के लिए 500 करोड़ रुपए की घोषणा

बजट में बाढ़ नियंत्रण के लिए 2700 करोड़ रुपए और नमामि गंगे में जल जीवन मिशन को 19500 करोड़ रुपए की घोषणा की गई है। बिजली में रीवैम्प के लिए 31 हजार करोड़ रुपए की घोषणा व‍ित्‍त मंत्री ने की है।

उत्तर प्रदेश में ग्रीन फील्ड और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए 500 करोड़ रुपए की घोषणा

बजट में मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए 695 करोड़ और पीडब्‍लूडी की सड़कों के लिए 18500 करोड़ रुपए की घोषणा की गई है।

यूपी के 14 मेडिकल कॉलेजों को 2100 करोड़ का बजट

प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के लिए 897 करोड़ रुपए

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर के किनारे विकास कार्य होंगे

गौरतलब है कि यह योगी सरकार का छठवाँ और प्रदेश की भाजपा सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट है। बजट के केंद्र में भाजपा का लोक कल्याण संकल्प पत्र है जिसमें किए गए वादों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाकर योगी सरकार वर्ष 2024 में होने वाले लोक सभा चुनाव के लिए पुख्ता जमीन तैयार करने की भी कोशिश की है।

जो हारने के लिए ही लड़ते हैं चुनाव: मिलिए 230वीं बार पर्चा दाखिल करने वाले पद्मराजन से, वाजपेयी-राहुल गाँधी को भी दे चुके हैं चुनौती

चुनाव की बात हो और के पद्मराजन (K Padmarajan) की चर्चा न हो, ऐसा हो नहीं सकता। भले इन्होंने आज तक एक भी चुनाव न जीता हो, लेकिन चुनाव लड़ने की इनकी रफ्तार को इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने 230वीं बार चुनाव के लिए पर्चा भरा है। इस बार राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 10 जून 2022 को तमिलनाडु समेत 15 राज्यों की 57 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। इस चुनाव में पद्मराजन ने तमिलनाडु से उम्मीदवारी पेश की है। उनका कहना है कि हारने के बाद भी वो चुनाव इसलिए लड़ते हैं, ताकि लोगों में इस बात को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके कि एक आम आदमी भी चुनाव लड़ सकता है।

गौरतलब है कि 63 वर्षीय के पद्मराजन तमिलनाडु के सलेम जिले के मेट्टुर के रहने वाले हैं। वो पेशे से एक होम्योपैथी डॉक्टर हैं। 1988 से चुनाव लड़ने के सफर की शुरुआत करने के बाद अब तक वे पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार ये उनका 230वाँ चुनाव होगा। अब तक लड़े गए चुनावों में वो 50 लाख रुपए की धनराशि केवल नॉमिनेशन के पीछे खर्च कर चुके हैं। एक बार वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं।

सबसे अधिक चुनाव लड़ने के मामले में के पद्मराज का नाम लिम्का ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में ऑल इंडिया इलेक्शन किंग के तौर पर दर्ज किया जा चुका है। बता दें कि 2019 लोकसभा चुनावों के दौरान पद्मराजन वायनाड से कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे थे। उन्हें इस चुनाव में 1850 वोट मिले थे, जबकि उन्होंने किसी भी तरह का प्रचार-प्रसार नहीं किया था।

पद्मराजन अब तक राष्ट्रपति चुनाव (5), उपराष्ट्रपति चुनाव (5) लोकसभा चुनाव (32), राज्यसभा चुनाव (50), विधानसभा चुनाव (72), एमएलसी (3), मेयर (1), चेयरमैन (3), पंचायत अध्यक्ष (4), पार्षद (12) जिला पार्षद (2), यूनियन काउंसलर (3), वार्ड मेंबर (6), डायरेक्टर (30) और 1 बार जनरल का चुनाव लड़ चुके हैं। उनका कहना है कि वो अब तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, नरसिम्हा राव, जयललिता, करुणानिधि, एके एंटनी, येदियुरप्पा, बंगारप्पा, एसएम कृष्णा, एडप्पादी पलानीसामी, एमके स्टालिन के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।

‘संघी, भाजपा का आदमी, कट्टरपंथी’: जानिए कैसे अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में हिंदू छात्र को इस्लामोफोबिक बता किया टॉर्चर

कर्नाटक के बेंगलुरु (Bengaluru, Karnataka) स्थित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय (Azim Premji University) के एक छात्र ने आरोप लगाया है कि हिंदू होने के कारण एक समूह द्वारा उसे परेशान किया गया और उसके साथ भेदभाव किया गया। इसके बाद कैंपस में किसी बात को लेकर एक मुस्लिम छात्र से बहस करने के कारण विश्व प्रशासन ने 2 मई 2022 को आगामी शैक्षणिक गतिविधियों से निष्कासित कर दिया।

जिस छात्र को निष्कासित किया गया है, उसका नाम ऋषि तिवारी है। तिवारी उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बल्लान गाँव के रहने वाले हैं और यूनिवर्सिटी में M.A (डेवलपमेंट) के छात्र हैं। तिवारी के अनुसार, संस्थान के प्रोफेसरों और अन्य छात्रों ने उनके पूर्ववर्ती शिक्षण संस्थान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) को निशाना बनाया गया।

इन लोगों का कहना है कि यह विश्वविद्यालय ‘दक्षिणपंथी’ और उनकी आस्था हिंदू धर्म का गढ़ है। तिवारी का कहना है कि इन लोगों ने उन्हें गाली देने के मकसद से ‘संघी’, ‘भाजपा का आदमी’ और ‘कट्टरपंथी हिंदू’ कहा। इस मामले से जुड़ा अधिक विवरण आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

तिवारी का कहना है कि यह तब बढ़ गया, जब छात्रों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। उन्होंने बताया कि एक विवाद के दौरान एक मुस्लिम छात्र के चेहरे पर खाना फेंकने और उस पर थूकने के फर्जी मामले में फँसा दिया गया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद छात्रों के एक वर्ग ने उन पर हमला किया और उनके खिलाफ अभियान चलाया।

तिवारी पर मुस्लिम छात्र को परेशान करने का आरोप लगाया गया है और दावा किया गया विवाद के दौरान ये छात्र अपना रोजा तोड़ रहे थे, उसी दौरान तिवारी ने ये काम किया। हालाँकि, तिवारी के पक्ष पर ध्यान दिए बिना विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने गिरोह बनाकर विरोध करना शुरू कर दिया।

एक मुस्लिम छात्र का कथित तौर पर मजाक उड़ाने को लेकर उन पर ‘इस्लामोफोबिया’ का आरोप लगाया जा रहा है। प्रशासन के सामने दबाव बढ़ने के बाद तिवारी को कैंपस से निष्कासित कर दिया गया और 31 दिसंबर 2022 तक के लिए उन्हें छात्रावास से बाहर कर दिया गया।

विश्वविद्यालय के आधिकारिक ग्रुप में भेजे गए मैसेज में तिवारी को घटना के बाद निलंबन से पहले ही एक अपराधी के रूप में लेबल कर दिया गया था। तिवारी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में उनके पक्ष पर ध्यान नहीं दिया गया। ऋषि तिवारी को विश्वविद्यालय में ना सिर्फ वैचारिक रूप अलग-थलग और निशाना बनाया गया, बल्कि व्हाट्सएप मैसेज के माध्यम से उन्हें बदमाशी, उत्पीड़न और हमले के अपराधी के रूप में चित्रित भी किया गया। इस संबंध में ऑपइंडिया ने यूनिवर्सिटी का पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं मिला।

स्पष्टीकरण के अधिकार से वंचित ऋषि तिवारी के खिलाफ आरोप वैचारिक और धार्मिक आधार पर लगाए गए, जिन्हें अक्सर ‘संघी’ या ‘भाजपा समर्थक’ कहकर निशाना बनाया जाता रहा। ऋषि तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि हाथ में हिंदू पहचान वाला प्रतीक पहनने के कारण उन्हें लगातार अलग-थलग किया जा रहा था। उन्होंने कहा, “अगर मुझे अपनी पहचान और हिंदू धर्म में विश्वास है तो यह कोई अपराध नहीं है। वैचारिक मतभेद होने का मतलब यह नहीं है कि मुझे अपनी डिग्री और नौकरी के रूप में इतना भुगतान करना होगा।”

सोशल मीडिया पर उत्पीड़न

ऑपइंडिया ने सोशल मीडिया पर जब इसका विवरण में खंगाला तो पाया कि ऋषि तिवारी के साथ व्यवस्थित रूप से दुर्व्यवहार किया गया था। यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इंस्टाग्राम स्टोरीज में तिवारी की खुलेआम बदनाम करने की कोशिश की गई। इसके साथ ही उनके अपने सहपाठियों ने तिवारी का समर्थन करने वाले लोगों को भी बदनाम करने की खुली धमकी दी। कॉलेज का एक आंतरिक मामला वामपंथियों से एकतरफा वैचारिक युद्ध में बदल गया और उन्होंने सोशल मीडिया पर खुले तौर पर ऋषि तिवारी को ‘शर्मिंदा’ करने का फैसला कर लिया गया।

तिवारी द्वारा किए गए कथित अपराधों के सबूत के बिना ये लोग सोशल मीडिया ट्रायल में उन्हें अपराधी के रूप में चित्रित करने के स्तर तक चले गए। तिवारी के खिलाफ ‘संघी’ होने लगे आरोप उनकी विचारधारा से संबंधित प्रतीत होता है। उन पर यह आरोप लगाया गया कि ‘संघी विचारधारा मुस्लिमों के खिलाफ नफरत पर आधारित है’ और इसलिए इस धारणा पर उन्हें अपराधी के रूप में चित्रित करना सुविधाजनक था। तिवारी ने जो कहा उसमें इस्लामोफोबिया एंगल बनाया गया, ताकि उन्हें निशाना बनाने के लिए ठोस कहानी बनाई जा सके।

जिन लोगों ने मामले में पक्ष लेने से इनकार कर दिया और जाँच होने की प्रतीक्षा की, उन पर ‘पक्षपात’ का आरोप लगाया गया। पूरे मामले पक्ष लेने की जरूरत थी और वह भी तिवारी के खिलाफ। इसके अलावा, परिसर में उक्त मुस्लिम छात्र के साथ तिवारी के विवाद को कथित ‘घृणा और नरसंहार के आह्वान’ के साथ संदर्भित करने के लिए कहा गया था। विश्वविद्यालय में ओपिनियन की विविधता के लिए कोई स्थान था, इसलिए इसे ‘फासीवाद’ का नाम दे दिया गया।

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के एक फैकल्टी ने बैच की ओर से एक एकजुटता पत्र लिखकर कॉलेज में कट्टरता की घटना की निंदा करने के लिए कहा। उसने घटना के खिलाफ एक बैठक करने को कहा और मामले में तिवारी के खिलाफ खुला स्टैंड लिया। तिवारी ने पहले शिकायत की थी कि शिक्षकों का एक समूह उनकी राजनीतिक विचारों को लेकर उन्हें अलग-थलग कर रहा है।

प्रोफेसर द्वारा क्लास को भेजा गया ईमेल

तिवारी के खिलाफ विरोध का आह्वान

छात्रों के एक गुट ने इस घटना को ‘इस्लामोफोबिया’ करार देते हुए परिसर में ऋषि तिवारी के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। इंस्टाग्राम स्टोरीज के माध्यम से सोशल मीडिया पर उत्पीड़न करने के अलावा छात्रों को इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लामबंद किया गया। दावा किया गया कि तिवारी ने एक अन्य छात्र के मुँह पर थूका है।

जब ऑपइंडिया ने ऋषि तिवारी से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि कॉलेज की अनुशासन समिति द्वारा जाँच पूरी होने तक उन्हें परिसर में किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में शामिल होने से रोक दिया गया है। उन्हें अगली सूचना तक परिसर और उनके छात्रावास में प्रवेश करने से रोक दिया गया है।

हालाँकि, मामले में जाँच होनी बाकी है, फिर भी ऋषि तिवारी को सिर्फ आरोपों के लिए दंडित किया गया। जब उनसे पूछा गया कि सीधे निलंबन का निर्णय क्यों लिया गया, तब उन्होंने कहा कि कैंपस में विरोध का आग भड़काने वाले छात्रों के दबाव में कॉलेज को इस तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। तिवारी को ई-मेल पर भेजे गए निलंबन नोटिस में उल्लेख किया गया है कि उनका निष्कासन ‘सभी छात्रों की सुरक्षा के हित’ में लिया गया कदम है।

शूटिंग के बहाने आतंकियों ने घर पर दी दस्तक, फिर अभिनेत्री को मार दी गोली: बोले विवेक अग्निहोत्री- कश्मीर में कला और कलाकारों के लिए जगह नहीं

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में बुधवार (25 मई 2022) को आतंकवादियों ने टीवी कलाकार अमरीना भट्ट की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। अमरीना के बहनोई जुबैर अहमद ने बताया है कि उसे शूटिंग के लिए बुलाने दो लोग उसके घर आए थे। जब वह घर से बाहर निकली तो उसकी हत्या कर दी। जुबैर ने यह भी पूछा कि आखिर उसने किसी का क्या बिगाड़ा था? 

अमरीना भट्ट के पिता ने बताया, ”कल रात दो लोग उसे शूटिंग के लिए बुलाने हमारे घर आए। जब उसने उन्हें बताया कि वह शूटिंग के लिए नहीं जाएगी तो उसे गोली मार दी। वह मेरे लिए एक बेटे की तरह थी।”

गौरतलब है कि चाडूरा के साथ सटे हुशरू में बुधवार देर शाम करीब आठ बजे खजीर मोहम्मद भट्ट की बेटी अमरीना अपने घर में बैठी हुई थी। इसी दौरान उसके दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। जब उसने दरवाजा खोला तो तीन आतंकी जबरन भीतर दाखिल हो गए। उन्होंने अमरीना भट्ट को देखते ही उस पर गोलियों की बौछार कर दी। अमरीना भट्ट और उसका 10 वर्षीय भतीजा इस हमले में बुरी तरह जख्मी हो गया। दोनों को मरा समझकर आतंकी वहाँ से फरार हो गए।

इसके बाद परिजनों ने घायल अमरीना और उसके भतीजे को तुरंत अस्पताल पहुँचाया। जहाँ डाक्टरों ने अमरीना को मृत घोषित कर दिया, जबकि उसके भतीजे की हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है। 

कश्मीर में इस्लामी आतंकवाद पर चर्चित फिल्म कश्मीर फाइल्स बनाने वाले विवेक अग्निहोत्री ने इस घटना पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि कश्मीर में कला और कलाकारों के लिए कोई जगह नहीं है। अमरीना को ‘गैर-इस्लामी’ होने के कारण मारा गया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि बहुतेरे लिबरल इस घटना को अनदेखा कर देंगे।

बता दें कि आतंकियों ने इससे एक दिन पहले श्रीनगर में भी एक पुलिसकर्मी की उसके घर के बाहर हत्या कर उनकी बेटी को गंभीर रूप से घायल कर दिया था।  पुलिसकर्मी की पहचान सैफुल्ला कादरी (अब्बा का नाम मोहम्मद सैयद कादरी) के रूप में हुई थी। आतंकियों ने इस गोलीबारी की घटना को पुलिसकर्मी के घर के बाहर अंजाम दिया था।

उइगर मुस्लिमों से कुरान और हिजाब छीन रहा चीन, भागने पर गोली मारने का आदेश: लीक दस्तावेजों से खुलासा- डिटेंशन कैंपों में कैद हैं 10 लाख से ज्यादा

चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार से जुड़े दस्तावेज लीक होने से नया खुलासा हुआ है। इन दस्तावेजों में हजारों लोगों की तस्वीरें हैं जिन्हें जबरन कैद किया गया है। वहीं दुनिया ये देखकर हैरान है कि उइगर मुस्लिमों पर किस तरह की हिंसा हो रही है और उन्हें कैसे कैद किया गया है।

अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, शिनजियांग में आधिकारिक डेटाबेस को हैक करने वाले एक अज्ञात स्रोत द्वारा चीन पर शोध कर रहे एक शोधकर्ता एड्रियन ज़ेनज़ को भेजे गए ने इन फ़ाइलों को ऑनलाइन अपलोड करने से दुनियाभर की नजर पड़ी है। इन दस्तावेजों से यह भी खुलासा हुआ है कि चीन मुस्लिमों से कुरान, हिजाब समेत सभी धार्मिक-मजहबी चीजें जब्त कर उनकी पहचान मिटा रहा है।

बता दें कि अमेरिका स्थित एकेडेमिशियन एड्रियन ज़ेनज़ द्वारा हासिल की गई इन फाइलों को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचेलेट के नाम से पब्लिश किया गया है। इन दस्तावेजों में इस बात का सबूत देती भी है कि बड़े पैमाने पर उइगर मुस्लिमों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित बीजिंग के शीर्ष नेता भी शामिल हैं।

10 लाख से अधिक मुस्लिमों को कर रखा है कैद

दस्तावेजों के हवाले से एड्रियन ने खुलासा किया करते हुए कहा कि चीन ने 10 लाख से अधिक उइगर मुसलमानों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को डिटेंशन सेण्टर (नजरबंदी केंद्रों) और जेलों में कैद किया है। वहीं, चीन इसे ट्रेनिंग सेंटर कहता है। फाइलों में शिनजियांग में कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व सचिव चेन क्वांगुओ का 2017 का स्पीच भी शामिल है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर इन हिरासत केंद्रों से भागने की कोशिश करने वालों को गोली मारने का आदेश दिया था।

वहीं, चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री झाओ कीझी का 2018 का एक आतंरिक वार्ता भी शामिल है, जिसमें उल्लेख किया गया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इन डिटेंशन सेंटरों की क्षमता बढ़ाने का आदेश दिया है। जब चीन से इन डिटेंशन सेंटरों की खबर आई तो उसने शुरू में इसका खंडन किया, लेकिन बाद में चीन ने इसके अस्तित्व को स्वीकार किया और दावा किया कि ये वोकेशनल ट्रेनिंग स्कूल हैं, जहाँ धार्मिक कट्टरवाद को रोकने के लिए शिक्षा दी जाती है।

‘देह-व्यापार का शिकार, खिलाता है सूअर का मांस’

गौरतलब है कि इससे पहले अक्टूबर 2021 में खुलासा हुआ था कि चीन उइगर मुस्लिमों के अंगों को बेच रहा है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित अख़बार ‘द हेराल्ड सन’ ने चीन के ऑर्गन ट्रैफिकिंग का खुलासा किया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि उइगर मुस्लिम के स्वस्थ लिवर को चीन 1,60,000 डॉलर्स (1.20 करोड़ रुपए) में बेच रहा है। अख़बार के मुताबिक, इन धंधों से चीन को 1 बिलियन डॉलर (7492 करोड़ रुपयों) की कमाई हो रही है।

2017-19 के बीच 80,000 उइगर मुस्लिमों को देह-व्यापार का शिकार बनाया गया था। खास बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) को भी चीन के इस गोरखधंधे की जानकारी है। उसी साल चीन के शिनजियांग क्षेत्र में आधी रात को गिरफ्तार हुई उइगर महिला हसिएत अहमत (57) को उसके पड़ोस के युवाओं को इस्लामिक शिक्षा देने और कुरान की प्रतियाँ छिपाने के लिए 14 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। ये भी खबर आई थी कि शिनजियांग में मुस्लिम महिलाओं की जबरन नसबंदी कराई जाती है, उन्हें सूअर का मांस खाने और शराब पीने के लिए भी मजबूर किया जाता है।

3 साल में 16000 मजहबी स्थल ध्वस्त

चीन में उइगर मुस्लिमों का होता दमन कई वर्षों से चर्चा में बना हुआ है। उनकी संस्कृति, सभ्यता, मजहबी रिवाज, तौर-तरीके, घर की बनावट, साज-सजावट का तरीका सब बदला जा रहा है। इसके अलावा डिटेंशन कैंप में रख कर महिलाओं के साथ रेप, अबॉर्शन समेत तमाम अमानवीयता की जा रही है। इमाम और मौलवियों को भी कैद में रखा जा रहा है। यही नहीं उइगरों की मस्जिद को गिरा कर होटल बनाने की तैयारी में रहने वाला चीन 3 साल में 16000 मजहबी स्थल ध्वस्त कर चुका है।

दूसरी ओर चीन इन सभी दावों को खारिज करता रहता है। उसका कहना है कि उन्होंने कोई मजहबी स्थल जबरन गिराया ही नहीं, जबकि मीडिया खबरें बताती हैं कि 2017 से 2020 के बीच में शिनजियांग के 900 क्षेत्रों में करीब 16000 मस्जिदें या तो आधी या फिर पूरी ध्वस्त हुई हैं। मीनारों को मस्जिद से हटा दिया गया है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी की मानें तो हाल ऐसा है कि जब उनका पत्रकार रमजान के माह में उइगर गया तो उसने भी मस्जिदों को या तो पूरा गिरा हुआ या फिर आधा ध्वस्त पाया।

‘हिजाब पहनी लड़कियों को जेल’

फरवरी 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उइगर मुस्लिमों के साथ होते अत्याचार की खबरों के बीच ये खबर आई थी कि चीन की नजर अब सान्या क्षेत्र के उत्सुल मुस्लिमों पर भी है। इस क्षेत्र में 10 हजार से भी कम संख्या में ये समुदाय रहता है। मगर, वहाँ ‘चीनी सपने’ को साकार करने की आड़ में इस समुदाय पर अप्रत्यक्ष रूप से हमले होने शुरू हो गए थे। जानकारी के अनुसार, सान्या में अब मुस्लिम घरों व दुकानों के बाहर लिखे मजहबी नारों जैसे अल्लाह-हू-अकबर को स्टिकर्स की मदद से ढका गया था। हलाल खाने के बोर्ड को भी रेस्त्रां आदि से हटाया गया था। इस्लामी स्कूलों को बंद कर दिया गया और हिजाब पहनने वाली लड़कियों को जेल भेजने की कोशिश की गई थी

TikTok से नफरत फैलाने वाला फैजू भी ‘खतरों के खिलाड़ी’ में, साथ होगा हिंदूफोबिक कॉमेडी के लिए कुख्यात मुनव्वर फारूकी भी

एडवेंचर-आधारित रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी सीजन 12 विवादों में है। इसकी वजह हैं दो विवादास्पद ‘सेलिब्रिटी’ का इस शो का हिस्सा होना। इस शो के निर्माताओं ने सीजन 12 के लिए टिकटॉक स्टार फैजल शेख (मिस्टर फैजू) और ‘कॉमेडियन’ मुनवर फारूकी को लिया है। 

बता दें कि फैसल, एक पूर्व टिकटॉक स्टार है, जो अब कथित तौर पर इंस्टाग्राम इन्फ्लूएन्सर (Instaram Influencer) बन गया है। वहीं फारूकी ने हाल ही में रियलिटी शो लॉक अप जीता है। कंगना रनौत इस शो को होस्ट कर रही थी। फारूकी अपने हिंदूफोबिक कॉमेडी के लिए कुख्यात रहा है।

वहीं 2019 में फैजू के एक वीडियो ने देश भर में हलचल मचा दी थी। इस वीडियो में फैजू को उनके चार अन्य इन्फ्लूएन्सर दोस्तों के साथ देखा गया था। वीडियो में फारूकी कहता है, “मार तो दिया तुमने उस बेकसूर तबरेज अंसारी को, लेकिन कल जब उसका औलाद बदला ले, तो ये मत कहना कि मुसलमान आतंकवादी हैं।”

इस वीडियो के बाद फैजू का टिकटॉक अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया था। वीडियो को लेकर फैजू और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। बता दें कि जाँच में यह पाया गया कि झारखंड के तबरेज़ अंसारी की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। अंसारी को कथित तौर पर बाइक चोरी करते हुए पकड़ा गया था। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने उसकी पिटाई कर दी थी। पोस्टमॉर्टम के बाद पुष्टि हुई थी कि उसकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई थी।

खतरों के खिलाड़ी से जुड़ने पर फैजल ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया है जिसमें उसने लिखा है “अपनी नई यात्रा शुरू करने के लिए बेहद उत्साहित हूँ।” फैजल के साथ ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारूकी भी रियलिटी शो का हिस्सा होगा।

मुनव्वर फारूकी का कॉमेडी की आड़ में हिंदुओं का मजाक उड़ाने और उन पर अपमानजनक बयान देने का इतिहास रहा है। ऐसे ही एक स्टैंड-अप कार्यक्रम में उसने 2002 की गोधरा ट्रेन में जलाकर मार डाले गए कारसेवकों का मजाक उड़ाया था। फारूकी ने न केवल पीड़ितों का मजाक उड़ाया बल्कि गुजरात नरसंहार में आरएसएस की भूमिका को हवा देने के लिए भी प्रचार किया। हिंदुओं के प्रति नफरत की वजह से उसे कई बार जनता के विरोध का सामना करना पड़ा। कई राज्यों में शो रद्द करना पड़ा। फिर भी उसे उसे रियलिटी शो लॉक अप में जगह दी गई थी, जिसे उसने जीता था।

खतरों के खिलाड़ी

एडवेंचर-आधारित रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय शो फियर फैक्टर का भारतीय वर्जन है। इस शो को फिल्म निर्माता-निर्देशक रोहित शेट्टी होस्ट करते हैं और इसमें प्रतियोगी के रूप में सेलिब्रिटी शामिल होते हैं। शो का सीजन 12 जल्द ही फ्लोर पर आ जाएगा और इसकी शूटिंग दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में की जाएगी।

केजरीवाल सरकार के स्टेडियम में खिलाड़ियों से VIP कुत्ता: बाहर निकाल दिए जाते हैं एथलीट, क्योंकि कुत्ते के साथ टहलते हैं IAS अफसर

दिल्ली में एक स्टेडियम है। नाम है त्यागराज स्टेडियम। दिल्ली सरकार के अधीन यह स्टेडियम आता है। 2010 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान बना यह स्टेडियम इन दिनों एक कुत्ते के वीआईपी वॉक को लेकर चर्चा में है। एथलीटों और कोच की माने तो उन्हें शाम के सात बजते ही प्रैक्टिस खत्म कर स्टेडियम से ​जाने को मजबूर किया जाता है। वजह इसके बाद आईएएस अधिकारी संजीव खिरवार को यहाँ अपने कुत्ते के साथ टहलना होता है। फिलहाल खिरवार दिल्ली के प्रधान सचिव (राजस्व) है। बताया जा रहा है कि यह सब कुछ पिछले कई महीनों से चल रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस ने एक कोच के हवाले से बताया है, “हम पहले यहाँ 8-8:30 बजे तक ट्रेनिंग कराते थे। लेकिन अब हमें शाम के 7 बजते ही स्टेडियम छोड़ने के लिए कहा जाता है ताकि अधिकारी अपने कुत्ते को टहला सकें। इस वजह से हमारी ट्रेनिंग और प्रैक्टिस पर असर पड़ रहा है।” वहीं 1994 बैच के आईएएस अधिकारी खिरवार ने इन आरोपों को सरासर गलत बताया है। हालाँकि उन्होंने ये माना कि वह ‘कभी-कभी’ अपने पालतू कुत्ते को स्टेडियम में टहलाने के लिए ले जाते हैं। लेकिन इस बात से इनकार किया कि इससे एथलीटों के प्रैक्टिस पर कोई असर पड़ता है।

जानकारी के मुताबिक करीब सात दिनों में तीन दिन शाम 6:30 बजे देखा गया कि गार्ड सीटी बजाते हुए मैदान खाली करा रहे हैं। स्टेडियम के एडमिनिस्ट्रेटर अजीत चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि ट्रेनिंग का आधिकारिक समय शाम 4 बजे से 6 बजे तक है, लेकिन ‘गर्मी को देखते हुए’ वे एथलीटों को शाम 7 बजे तक ट्रेनिंग की अनुमति देते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि कोई सरकारी अधिकारी शाम 7 बजे के बाद स्टेडियम का इस्तेमाल कर रहा है। 

चौधरी ने कहा, “हमें शाम 7 बजे तक स्टेडियम बंद करना होता है। आप सरकारी कार्यालय का समय कहीं भी चेक कर सकते हैं। यह (स्टेडियम) भी दिल्ली सरकार के अधीन एक सरकारी कार्यालय है। मुझे ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं है कि कोई अधिकारी यहाँ कुत्ता टहलाने के लिए आते हैं। मैं शाम सात बजे तक स्टेडियम से निकल जाता हूँ। इसलिए मुझे इसकी जानकारी नहीं है।”

रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार (24 मई 2022) को देखा गया कि खिरवार शाम 7:30 बजे के बाद अपने कुत्ते को लेकर स्टेडियम पहुँचे। पालतू कुत्ते को ट्रैक और फुटबॉल के मैदान में घूमते देखा गया। सिक्योरिटी गार्ड भी आसपास दिखे। वहीं खिरवार ने कहा, “मैं किसी एथलीट को स्टेडियम छोड़ने के लिए कभी नहीं कहूँगा। मैं स्टेडियम के बंद होने के बाद जाता हूँ। हम उसे (कुत्ते) ट्रैक पर नहीं छोड़ते हैं। जब कोई आस-पास नहीं होता है तो हम उसे छोड़ देते हैं। अगर इसमें कुछ आपत्तिजनक है तो मैं इसे रोक दूँगा।”

वहीं कोच और एथलीटों का दावा है ,“पहले, हमने रात 8:30 बजे तक और कभी-कभी रात 9 बजे तक भी ट्रेनिंग की। लेकिन अब हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।” कई एथलीटों ने बताया कि उन्होंने अपनी ट्रेनिंग भारतीय खेल प्राधिकरण के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (JLN) में ट्रांसफर कर ली है, जो सिर्फ 3 किमी दूर है। वहाँ शाम 7:30 बजे के बाद फ्लडलाइट्स चालू हो जाती है। JLN स्टेडियम के एक कोच ने कहा, “बच्चे यहाँ रात 8:30 बजे तक ट्रेनिंग लेते हैं। गर्मी की छुट्टियों के दौरान, हमारे प्रैक्टिस एरिया में जगह की कमी हो जाती है क्योंकि मुख्य स्टेडियम ट्रैक का नवीनीकरण का काम चल रहा है।”

बता दें कि त्यागराज स्टेडियम में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय एथलीटों के साथ ही फुटबॉल खिलाड़ी प्रैक्टिस करते हैं। मीडिया में मामला सामने आने के बाद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर बताया है कि सरकार ने खिलाड़ियों को रात के 10 बजे तक सुविधाएँ मुहैया कराने के निर्देश सभी स्पोर्ट्स सेंटर्स को दिए हैं।

इमरान खान के ‘आजादी मार्च’ से पाकिस्तान में भड़की हिंसा, इस्लामाबाद में मेट्रो स्टेशन फूँका: आगजनी-पत्थरबाजी के बाद सेना की तैनाती

पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालत बन गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के ‘आजादी मार्च’ में हिंसा की खबर है। इमरान समर्थकों ने इस्लामाबाद मेट्रो स्ट्रेशन को फूँक दिया। कुछ अन्य शहरों में हिंसक झड़प की सूचना है। सेना की तैनाती की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हजारों वाहनों के साथ इमरान खान का काफिला इस्लामाबाद पहुँचा है। इसके चलते राजधानी में जाम लग गया। इसे रोकने के लिए पुलिस और सेना ने शहर के बाहर भी काफी प्रयास किए, लेकिन वो नाकाफी रहे। इमरान समर्थकों के प्रवेश के बाद इस्लामाबाद में आग की लपटें देखी जा रही हैं। इस बीच कराची, लाहौर में भी हिंसा भड़कने की खबर है। पुलिस ने हिंसा को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। जवाब में प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस बल पर पथराव किए जाने की खबर है।

इमरान खान का काफिला इस्लामाबाद के D चौक पर जमा हुआ है। पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री राणा सनाउल्लाह खान के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, पाकिस्तान TV मुख्यालय, सचिवालय और मंत्रियों के आवास वाले इलाके को रेड ज़ोन घोषित किया गया है। प्रदर्शनकारियों को रेड ज़ोन में किसी भी हाल में न घुसने की चेतावनी दी गई है। कई इलाकों में इंटरनेट भी बंद करवा दिया है। इमरान की पार्टी के कई सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। झड़प में प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों पक्षों से कई लोग घायल हुए हैं।

Dawn के मुताबिक इमरान खान और उनके समर्थकों ने पुलिस की चेतावनी के बाद भी D चौक से हटने से मना कर दिया है। उन्होंने चुनाव की घोषणा होने तक प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है। इमरान की पार्टी ने पूरे पाकिस्तान से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की है। औरतों और बच्चों से सड़कों पर उतरने की अपील करते हुए इमरान खान ने इसे ‘असली आज़ादी’ की लड़ाई बताया है।

6 घंटे, 30000 का कत्लेआम: जब ईरान से आए नादिर शाह ने दिल्ली में मचाई भयंकर तबाही, हारे हुए मुगलों ने दे दिया पूरा अफगानिस्तान

ईरान में 18वीं शताब्दी के मध्य से पहले एक ऐसा शासक हुआ, जिसकी क्रूरता की कहानियाँ आज तक उन लोगों के रूह कँपा देती है, जहाँ-जहाँ उसने आक्रमण किए। पर्शिया के उस मुस्लिम शासक का नाम था नादिर शाह, जो अफ़्शारिद राजवंश का संस्थापक था। दिल्ली पर हमले के दौरान उसने भयानक कत्लेआम मचाया था। तब कमजोर मुग़ल शासन को पूरा अफगानिस्तान उसे सौंपना पड़ा था। उसे इतिहासकार ‘पर्शिया का नेपोलियन’ भी कहते हैं, उसकी सैन्य सफलताओं के कारण।

नादिर शाह की प्रेरणा थे तैमूर और चंगेज खान, मध्य एशिया के दो सबसे क्रूर शासक जिन्होंने दूर-दूर तक कत्लेआम मचाया। 1736 से 1747 में अपनी हत्या तक ईरान पर शासन करने वाले नादिर शाह ने होताकी पश्तूनों की बगावत का फायदा उठा कर तत्कालीन शासक सुल्तान हुसैन को अपदस्थ कर सत्ता हासिल की थी। उसका साम्राज्य अपने उच्चतम समय में अमेरनिया, अजरबैजान, जॉर्जिया, उत्तरी कॉक्सस, इराक, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान, बहरीन और ओमान तक फैला हुआ था।

नादिर शाह का भारत आक्रमण, दिल्ली में मचाई तबाही

नादिर शाह ने दिल्ली के मुग़ल शासक मुहम्मद शाह के पास अपना एक सन्देश भेजा। उस समय वो अफगानिस्तान में अपना युद्ध अभियान चला रहा था और उसने मुगलों से स्पष्ट कह दिया कि वहाँ के किसी भी भगोड़े को मुग़ल साम्राज्य में शरण नहीं मिलनी चाहिए। कंधार पर नादिर शाह के कब्जे के बाद वहाँ के कई लोग काबुल की तरफ भाग खड़े हुए थे। मुगलों ने पर्शियन शासक को आश्वासन दिया कि उनके कहे अनुसार ही चीजें होंगी।

लेकिन, जब कई अफगानों ने मुग़ल सत्ता के अंदर शरण ली और नादिर शाह को इस बात का पता चला तो उसने इसे धोखे के रूप में लिया। नादिर शाह ने इसके बाद तीसरी बार अपने एक दूत को दिल्ली भेजा और अधिकतम 40 दिन रह कर लौटने को कहा। हालाँकि, वहाँ मुगलों ने उसे कोई भाव नहीं और वापस जाने से भी रोक दिया। जब एक वर्ष बीत गए, तब नादिर शाह ने उसे आदेश भेजा कि वो वापस आए, मुगलों का जवाब मिले या नहीं। नादिर शाह का दिल्ली की तरफ जाने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन इस अपमान को वो सह नहीं पाया

नादिर शाह को काबुल तक पहुँचने में कोई परेशानी नहीं हुई, क्योंकि रास्ते में कोई भी उसे रोकने की हिमाकत नहीं कर सका और डर के मारे उसे रास्ता दिया जाता रहा। काबुल में जरूर हल्का-फुल्का युद्ध हुआ, लेकिन वहाँ की मुग़ल फ़ौज को आत्मसमर्पण करना पड़ा। सन् 1738 की गर्मी तक पर्शियन फ़ौज काबुल से आगे बढ़ चुकी थी। रास्ते में वो मारकाट मचाते चला और अफगानों में से जो हट्टे-कट्टे थे, उन्हें अपनी फ़ौज में भर्ती कर लेता था।

काबुल के सरदार जब नादिर शाह के दूत के साथ उसका सन्देश लेकर दिल्ली के लिए निकले, तो रास्ते में जलालाबाद के गवर्नर मीर अब्बास ने उसे मार डाला। मीर अब्बास को इसका खामियाजा नादिर शाह के हमले के रूप में भुगतना पड़ा, जिसमें उसकी हत्या कर दी गई और उसके परिवार को जंजीरों में जकड़ कर नादिर शाह के सामने पेश किया गया। ये भी जानने लायक बात है कि नादिर शाह जब दिल्ली पहुँचा, तब औरंगजेब की मौत को 32 साल हो चुके थे।

मुगल साम्राज्य लगातार कमजोर हो रहा था, क्योंकि मध्य भारत और पश्चिमी हिस्से में मराठाओं की शक्ति लगातार बढ़ते जा रही थी। मुगलों के अंतर्गत शासन करने वाले कई मुस्लिम सरदारों ने भी अपनी-अपनी आज़ादी का ऐलान कर दिया था। उत्तर में पश्तून बगावत पर उतर आए थे, जिस कारण अफगानिस्तान में मुग़ल शासन की क्षमता कमजोर हो गई थी। ऑटोमन और पर्शियन की तरह मुगलों की अमीरी भी दुनिया भर में प्रसिद्ध थी, तो नादिर शाह को भारी लूटपाट करने का भी मन था।

नादिर शाह सबसे पहले गजनी के दक्षिण में करारबाग में रुका, जहाँ से उसने मुग़ल शासन वाली जमीन पर प्रवेश किया। उसके बेटे नसरुल्लाह ने एक फ़ौज के साथ आगे बढ़ कर नसरुल्लाह और बामियान पर कब्ज़ा जमाया। गजनी का गवर्नर तो भाग खड़ा हुआ, लेकिन वहाँ के अन्य मुस्लिमों ने नादिर शाह का स्वागत किया। नादिर शाह ने काबुल से ही अफगानिस्तान को चलाना शुरू किया और अपने लोग नियुक्त किए। खैबर पास में मुगलों से उसका युद्ध हुआ और पेशावर पर नादिर शाह ने कब्ज़ा कर लिया।

फरवरी 1739 में नादिर शाह ने सिंधु नदी पर एक पुल बनवाया और उसके बाद करनाल के युद्ध में मुगलों को फिर हार झेलनी पड़ी। दिल्ली से 120 किलोमीटर दूर मुहम्मद शाह एक बड़ी फ़ौज के साथ पहुँचा था, जो 3 किलोमीटर की चौड़ाई और 25 किलोमीटर की लंबाई लेकर चल रही थी। पौने 4 लाख की फ़ौज के अलावा हजारों तोपें और हाथी भी उसमें थे, लेकिन अधिकतर सैनिक अप्रशिक्षित थे। ये नादिर शाह की चाल ही थी कि उसने मुहम्मद शाह को अपनी पसंद की जगह पर युद्ध करने को मजबूर कर दिया। उसने पहले ही पूरी रेकी कर रखी थी।

दिल्ली में पर्शियन फ़ौज ने मचाई भयंकर तबाही

नादिर शाह ने 20,000 मुग़ल फौजियों को मौत के घाट उतार दिया और मुहम्मद शाह को आत्मसमर्पण करना पड़ा। पर्शियन सेना में से 500 को भी मुग़ल नहीं मार पाए। मुहम्मद शाह को नादिर शाह के पास पेश होना पड़ा। जब नादिर शाह दिल्ली में घुसा, तब हारे हुए मुगलों ने तोपों और बंदूकों की फायरिंग से उसका स्वागत किया। पर्शियन नया साल ‘नवरोज’ उसने दिल्ली में ही मनाया। लेकिन, दिल्ली की जनता ने नादिर शाह के खिलाफ बगावत कर दिया।

इसे कुचलने के लिए वो भयानक क्रूरता पर उतर आया। पर्शियन सेना ने 6 घंटे के भीतर 30,000 लोगों को मार गिराया। यमुना नदी के किनारे ले जाकर कई लोगों का सिर कलम कर दिया गया। लोगों के घरों में घुस-घुस कर पर्शियन फ़ौज उन्हें मारने लगी। उसके बाद वो घरों को आग के हवाले कर देते। कई लोगों ने परिवार के साथ तो आत्महत्या कर ली, क्योंकि पर्शियन फ़ौज के हाथों मरने से उन्हें यही अच्छा लगा। दो मुग़ल सरदार सैयद नियाज़ खान और शाहनवाज खान बगावत में शामिल थे, उन्हें उनके सैकड़ों समर्थकों के साथ लाकर नादिर शाह के सामने मार डाला गया।

इसके बाद नादिर शाह ने दिल्ली के हर इलाके में टैक्स वसूलने के लिए अपने लोग भेजे। पर्शियन फ़ौज ने मुगलों के ‘पीकॉक थ्रोन’ को भी अपने कब्जे में ले लिया। कोहिनूर और दिया-ए-नूर हीरे भी नादिर शाह को पेश किए गए। शांति तभी हुई, जब मुगलों ने फटाफट नादिर शाह के सामने खुद ही अपने साम्राज्य का एक हिस्सा और धन पेश कर दिया। सिंधु नदी से पश्चिम की सारी जमीनें नादिर शाह के पर्शियन साम्राज्य का हिस्सा बन गईं।

मई 1739 की शुरुआत में नादिर शाह ने वापस पर्शिया जाने की तैयारी शुरू की। कहते हैं, उसने भारत से इतना धन लूटा था कि वापस जाने के बाद अपने मुल्क में उसे अगले तीन वर्षों तक टैक्स वसूलने की जरूरत ही नहीं पड़ी। हजारों हाथी, ऊँट और घोड़े भी वो अपने साथ ले गया। यही वो तबाही थी, जिसके बाद ब्रिटिश को भी मुगलों की कमजोरी का पता चला। अगर ये घटना नहीं होती, तो शायद अंग्रेज भी भारत पर इतनी जल्दी शासन नहीं कर पाते।