वामपंथी पोर्टल द वायर की रिपोर्ट के आधार पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुयान सरमा के खिलाफ पीपीई किट में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने पर सीएम सरमा ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर पलटवार किया है। सीएम सरमा ने मनीष सिसोदिया को आपराधिक मानहानि केस मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही उन्होंने उपदेश नहीं देने को कहा है।
बुधवार (1 जून 2022) को विवादित पोर्टल ने एक रिपोर्ट पब्लिश की, जिसमें उसने आरोप लगाया कि कथित तौर पर रिंकी भुयान के मालिकाना हक वाली वाली एक कपंनी को कोरोना से निपटने के लिए पीपीई किट और दूसरे कोविड से जुड़े सामानों की आपूर्ति का ऑर्डर मिला था। रिपोर्ट के मुताबिक, असम में जब सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री थे और हिमंता बिस्वा सरमा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे, तो उनकी पत्नी रिंकी भुयान सरमा की कंपनी को बिना किसी अनुभव के ही 5,000 पीपीई किट, मेडिकल उपकरण और अन्य सुरक्षा के सामानों की आपूर्ति करने का ऑर्डर दिया गया था।
बाद में रिंकी भुयान सरमा ने द वायर की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का खंडन किया और कहा कि ये पूरी तरह से फ्री था। बावजूद इसके 4 जून 2022 को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और हिमंत बिस्वा सरमा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
पलटवार करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया, “ऐसे समय में जब पूरा देश 100 से अधिक वर्षों में सबसे खराब महामारी का सामना कर रहा था, असम के पास शायद ही कोई पीपीई किट थी, मेरी पत्नी ने आगे आने और लगभग 1500 दान करने का साहस किया। जान बचाने के लिए सरकार को मुफ्त में उसने एक पैसा भी नहीं लिया।” उन्होंने पीपीई किट दान करने के रिंकी भुयान सरमा के स्वामित्व वाली कंपनी के पदाधिकारियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन असम के निदेशक द्वारा लिखित प्रशंसा पत्र भी संलग्न किया।
At a time when the entire country was facing the worst pandemic in over 100 years , Assam hardly had any PPE Kits
My wife took the courage of coming forward and donating around 1500 free of cost to the govt to save lives
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) June 4, 2022
हिमंता बिस्वा सरमा ने आगे ट्वीट किया, “मनीष सिसोदिया ने उस समय बिल्कुल अलग पक्ष दिखाया था। आपने दिल्ली में फंसे असमिया लोगों की मदद के लिए मेरे कई कॉल्स को ठुकरा दिया। मैं एक उदाहरण कभी नहीं भूल सकता, जब मुझे दिल्ली के मुर्दाघर से एक असमिया कोविड पीड़ित का शव लेने के लिए सिर्फ 7 दिन इंतजार करना पड़ा।”
While you Mr Manish Sisodia at that point of time showed a completely different side. You refused my multiple calls to help Assamese people stuck in Delhi. I can never forget one instance when I had to wait 7 days just to get a Assamese covid victim’s body from Delhi’s mortuary.
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) June 4, 2022
इसके साथ ही उन्होंने मनीष सिसोदिया को कोर्ट में अपने आरोप को साबित करने की चुनौती दी। सरमा ने कहा, “उपदेश देना बंद करो और मैं आपको जल्द ही गुवाहाटी में देखूँगा, क्योंकि आप आपराधिक मानहानि का सामना करेंगे।”
Stop sermonising and I will see you soon in Guwahati as you will face criminal defamation.
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) June 4, 2022
हिमंत बिस्वा सरमा को जवाब देते हुए AAP नेता मनीष सिसोदिया ने 18 मार्च 2020 को एक ‘रद्द किए गए खरीद आदेश’ की एक तस्वीर ट्वीट की। मनीष सिसोदिया ने अपने ट्वीट में लिखा, “माननीय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जी ये रहा आपकी पत्नी का खरीदने का अनुबंध। जेसीबी इंडस्ट्रीज के नाम पर 5000 किट 990/- रुपये प्रति किट। बताइए क्या यह पेपर झूठा है? जब आप स्वास्थ्य मंत्री थे तो क्या अपनी पत्नी की कंपनी को बिना किसी टेंडर के खरीद आदेश देना भ्रष्टाचार नहीं है?”
माननीय मुख्यमंत्री @himantabiswa जी! यह रहा आपकी पत्नी की JCB इंडस्ट्रीज के नाम 990/- प्रति किट के हिसाब से 5000 किट ख़रीदने का contract… बताइए क्या यह काग़ज़ झूँठा है?
हाल में हैदराबाद में 17 साल की नाबालिग के साथ हुए दुष्कर्म केस में आपका एक बयान सुना और आपको ये लघु पत्र लिखने का फैसला किया। मुझे नहीं मालूम आपने किस फ्लो में एक रेप केस पर बात करते हुए मीडिया के सामने ये कहा कि एडवांस जमाने के कारण गलतियाँ हो रही हैं जिसका आपको दुख है। लेकिन मुझे ये जरूर पता है कि जब आपके इस बयान पर सवाल होगा तो आप किसी न किसी ढंग से इसे जस्टिफाई कर ही देंगे।
साल 2019 में भी ऐसा ही हुआ था। प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) का केस शायद आपको याद होगा। एक डॉक्टर जिसे देर रात शमशाबाद में 4 हैवान उठाकर ले गए और दुष्कर्म के बाद उन्हें जलाकर मार डाला गया। अगले दिन उनके अंतर्वस्त्रों से उनकी शिनाख्त हुई थी। जब घटना का विरोध हुआ और मीडिया आपके पास दौड़ी-दौड़ी सवाल पूछने आई तो आपने जवाब दिया, “वो पढ़ी लिखी थी उसने बहन को क्यों कॉल किया, पुलिस को फोन करना चाहिए था।”
सच कहूँ तो इस नाबालिग रेप केस पर आपने जो मुँह पर दर्द भरे हाव-भाव के साथ संवेदनहीन बयान दिया है, उसे सुन मुझे कोई हैरानी नहीं हुई। साल 2019 में प्रीति रेड्डी पर जब आपकी राय सुनी थी तभी समझ आ गया था कि समाज के उन लोगों से इंसाफ माँगने की अपेक्षा क्यों जिन्हें रेप जैसे अपराध की गुनहगार पीड़िता ही लगे। घटना के तीन साल बाद आपने उस सोच को सही साबित किया। आज आपका फिर एक बयान आया है जिसमें आपने रेप केस को एडवांस जमाने से जोड़कर गलती दिखाने का प्रयास किया है।
बताइए आपसे आपके राज्य की जनता, खासकर महिलाएँ या लड़कियाँ क्या उम्मीद करें अपनी सुरक्षा को लेकर? क्या उम्मीद करें वो माता-पिता जिनकी बच्चियों को हैवान अपना निशाना बनाते हैं और वो चाहते हैं कि प्रशासन उन्हें न्याय दिलाए!
लड़कियों ने समय-समय पर अपने साथ हुई बर्बरता के बाद समाज के तमाम लांछन झेले। अभी भी हम उस मानसिकता से लड़ रहे हैं जहाँ रेप या दुष्कर्म के बाद लड़की के छोटे कपड़ों को दोषी बता दिया जाता है और लड़कों के किए गए अपराध को गलती से तोलकर कम दिखाने की कोशिश होती है। ऐसे समाज में लड़कियाँ अपनी सरकार, अपने नेताओं से अपेक्षा करती हैं कि उनके पक्ष में ऐसा स्टैंड लिया जाएगा जहाँ पर वो अपनी बात रख पाएँगी या अपने लिए न्याय की गुहार लगा पाएँगी। मगर सोचिए कि आप जैसे राजनेता उनको कौन सा माहौल देने पर आमादा है। वो माहौल जहाँ न केवल आधुनिकता के नाम पर लड़की को कोसा जाए बल्कि आधुनिकता के नाम पर लड़की के साथ हुए दुष्कर्म को जस्टिफाई करने की भी कोशिश हो।
दुख इस बात का है कि भारत में लड़कियों की सवाल पूछने की यह लड़ाई सिर्फ आपसे नहीं है। ऐसे कई राजनेता हैं जिन्हें दुष्कर्म एक गलती की तरह प्रतीत होता है और लड़की की आपबीती केवल कोई कहानी जैसी लगती है। रेप मामले में एडवांस जमाने को कोसना बिलकुल ऐसा है कि प्रत्यक्ष तौर पर लड़की पर सवाल न उठाकर अप्रत्यक्ष तौर से उसे जलील करने का प्रयास किया जा रहा हो।
आगे अगर ये सब चलते ही रहना है तो जवाब दे दीजिए कि उस 21वीं सदी में जब जमाना सोच से भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है तो लड़कियाँ कहाँ खुद को सिर्फ इसलिए पीछे ढकेलती जाएँ कि आप जैसे लोग उनके कपड़ों पर, उनके चरित्र पर, वो जिस माहौल में रहती है उस पर, सवाल न खड़ा करके सीधे तौर पर अपराधी को दंड देने की बात करें।
मैं आखिर में ये याद दिलाना चाहती हूँ कि समाज द्वारा शब्दों के गढ़े गए मायाजाल में सालों से लड़कियाँ बदनाम हुई हैं, उनकी सीमाएँ तय हुई हैं, उन पर दबाव बने हैं। लेकिन माननीय मंत्री जी आपसे सवाल इसलिए है क्योंकि आपके ऊपर एक राज्य की जिम्मेदारी है। संविधान से चलने वाले देश में आप जनता के हर वर्ग के प्रतिनिधि हैं। व्यक्ति विशेष की अपनी मानसिकता किस गड्ढे में है इससे सामान्य जन का वास्ता नहीं है लेकिन संवैधानिक पद पर विराजमान आपकी सोच से हमारा लेनादेना है। इसलिए उम्मीद करते हैं कि आपको जल्द से जल्द उस पद की गरिमा का एहसास हो जहाँ आपकी जनता पर अत्याचार करने वाला आपको दंड के काबिल लगे न कि सहानुभूति के।
तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मदुरै में 29 मई 2022 को एक रैली के दौरान राजनीतिक पार्टी द्रविण कड़गम (Dravid Kadgam) ने हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिपप्णी की थी। इस मामले में शनिवार (4 मई 2022) को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIDMK) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी आलोचना की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को तमिलनाडु में पेरियार-वादी संगठनों जैसे द्रविड़ विदुथलाई कजगम (DVK), थोल थिरुमावलवन के विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK), पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) समेत कई अन्य संगठनों ने मदुरै में एक रैली आयोजित की। इस रैली को ‘सेन्सट्टई रैली’ बताया गया। रैली के दौरान हिन्दू देवताओं को गाली दी गई और भगवान कृष्ण, देवी अम्मन और भगवान अय्यप्पन की पूजा के खिलाफ नारेबाजी की गई।
सियासी रैली के दौरान लोग चिल्ला रहे थे, “बकरियों और सूअरों की बलि माँगने वाली मारी (अम्मन देवी) एक भगवान है? महिलाओं का बलात्कार करने वाला कन्नन (भगवान कृष्ण) एक भगवान है? अगर एक आदमी एक आदमी से सेक्स करेगा तो क्या एक बच्चा पैदा? क्या अय्यप्पन को भगवान कहना सही है?”
इसमें शामिल लोगों ने हिन्दू देवी देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हुए सवाल किया, “भक्तों जो शरीर में छेद करके नाचता हुआ आता है, वो अपनी छाती में छेद क्यों नहीं कर लेता? अरे भक्तों तुम जबड़े में छेद कर नाचते हो, इससे तुम लोग अपने गले को क्यों नहीं छेद लेते। अरे भक्तों, सुई से अपनी जीभ में छेद करके आते हो, अपनी आँखों में छेद क्यों नहीं कर लेते।”
हिन्दू देवी देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में अन्ना द्रमुक के प्रवक्ता कोवई सत्यन ने द्रविड़ कड़गम (डीके) की आलोचना की। सत्यन ने कहा कि हिन्दुओं को गाली देना द्रविड़ कड़गम की संस्कृति रही है। उन्होंने कहा, “डीएमके का कहना है कि वे किसी भी धर्म या हिन्दुओं के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन फिर वो कार्रवाई क्यों नहीं करती। वे हिन्दुओं के अपमान पर मूकदर्शक बने रहते हैं।”
इसी तरह से भाजपा प्रवक्ता नारायणन तिरुपति (Narayan Tirupati) ने आरोप लगाया कि पहले भी इस तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं और सरकार हमेशा से मूकदर्शक बनी रही है। उन्होंने कहा, “हम सांसद वेंकटेशन के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हैं। अगर ये ऐसा ही करते हैं तो DK को तमिलनाडु में बैन कर देना चाहिए।” वहीं इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने पर केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन ने भी DMK सरकार पर निशाना साधा।
इस बीच हिन्दू मक्कल काची के एक मेंबर अर्जुन संपत ने आरोप लगाया कि इस तरह के नारेबाजी करके हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। इस मामले में 2 जून को हिंदू मक्कल काची ने मदुरै स्थित SS कॉलोनी पुलिस थाने में DK के खिलाफ शिकायत की। मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
कथित तौर पर तमिलनाडु पुलिस ने DK के कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने के मामले में आधिकारिक मामला दर्ज किया है। इस मामले में तीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
मद्रास हाई कोर्ट (Madrass High Court) ने पालननकुप्पम स्थित रामनादेश्वर मंदिर की जमीन पर किए गए अवैध अतिक्रमण (Encroachment On Temple Land) को लेकर तमिलनाडु सरकार (Tamil Nadu Government) के हिन्दू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने विभाग को मंदिर की अतिक्रमण की गई जमीन को वापस लेने के लिए कार्यवाही करने का आदेश दिया है।
लॉ बीट की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने श्री रामनादेश्वर मंदिर के एक भक्त की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने मंदिर की साढ़े तीन एकड़ की जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने के लिए मानव संसाधन और सीई के आयुक्त को आदेश देने की माँग की थी। मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस सुब्रमण्यम ने कहा कि हिन्दू धार्मिक धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग मंदिर की संपत्तियों और उसके सामान की रक्षा करने के लिए बाध्य है।
कोर्ट ने कहा, “याचिकाकर्ता ने शिकायत की कि मंदिर की संपत्तियों पर बिना किराया दिए भी अतिक्रमण किया जा रहा है और इसकी संपत्तियों को इससे अलग किया जा रहा है। ऐसे में अधिकारी मंदिर की संपत्तियों की जाँच कर सुरक्षा के उद्देश्य से सभी उचित कार्रवाई करने के लिए बाध्य हैं।”
शिकायतकर्ता के हलफनामे से इसका पता चलता है कि कुछ लेनदेन को अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया था। इसी को देखते हुए अदालत ने मानव संसाधन और सीई के आयुक्त को कानून के मुताबिक, मंदिर की संपत्तियों की रक्षा और अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने और मंदिर की संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कमिश्नर को आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 12 सप्ताह की डेडलाइन भी दे दी है।
कोर्ट का आदेश
मद्रास हाई कोर्ट में दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने अदालत को ये आरोप लगाया है कि मंदिर को कोई किराया दिए बिना मंदिर की संपत्ति पर कब्जा किया जा रहा है और अतिक्रमणकर्ता मंदिर की जमीन को अवैध रूप से बेचने का कोशिशें भी कर रहे थे। इसके साथ ही राजस्व के रिकॉर्ड में भी हेरफेर की कोशिशें की जा रही थीं। कोर्ट को बताया गया कि इसकी शिकायत एचआर एंड सीई सहित अधिकारियों की गई थी। हालाँकि, कमिश्नर ने कोई एक्शन नहीं लिया।
याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के मानव संसाधन और सीई विभाग को फटकार लगाते एक्शन लेने का आदेश दिया।
राज्य सरकार को दी कड़ी चेतावनी
गौरतलब है कि इससे पहले पिछले साल भी मद्रास हाई कोर्ट ने मानव संसाधन और सीई विभाग को मंदिर की संपत्तियों के दुरुपयोग के बारे में अदालत में बढ़ती शिकायतों पर कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर विभाग एक्शन नहीं लेता है तो फिर अदालत को खुद जमीन पर उतरना पड़ेगा। उस दौरान मुख्य न्यायधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति ने सीनियर अधिकारियों के खिलाफ नुंगमबक्कम में अगथेश्वर मंदिर की अतिक्रमित भूमि को फिर से हासिल करने में विफल रहने के लिए दायर अदालत की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियाँ की थी।
मशहूर गायक कृष्णकुमार कुन्नथ उर्फ केके (singer KK) की मौत 31 मई 2022 की रात को हुई, लेकिन इस मामले में नित नए खुलासे हो रहे हैं। कोलकाता के नजरूल सभागार में 31 मई को केके के साथ प्रस्तुति देने वाली सुभलक्ष्मी डे ने खुलासा किया है कि कार्यक्रम स्थल के बाहर भीड़ को देखकर दिवंगत गायक ने अपनी कार से बाहर आने से इनकार कर दिया था।
सुभलक्ष्मी के मुताबिक, शो से पहले वो ग्रीन रूम में केके से मिली थीं। इस दौरान वो बिल्कुल ठीक थे। दोनों ने सेल्फी भी ली थी। महिला सिंगर ने कहा, “केके के आने के वक्त ऑडिटोरियम के बाहर काफी भीड़ थी। केके शाम 5.30 बजे वहाँ पहुँचे थे। भीड़ को देखकर उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि अगर आयोजक भीड़ को क्लियर नहीं कर पाए तो वे अपनी कार से बाहर ही नहीं आएँगे।”
सिंगर ने कहा कि जब हाल में भीड़-भाड़ होती है तो पसीना आना आम बात होती है। अपने परफॉर्मेंस के दौरान केके ने आयोजकों से एक बार लाइट को बंद करने के लिए भी कहा था।
कुछ और ही कह रही कोलकाता पुलिस
हालाँकि, कोलकाता पुलिस (Kolkata Police) ने आयोजन स्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति से इनकार किया है। कोलकाता के पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल ने कहा, “उस दिन वहाँ पर तैनात हमारे पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि वहाँ भगदड़ जैसी कोई स्थिति नहीं थी। आयोजकों ने कभी भी हमें इस तरह की कोई सूचना नहीं दी।”
उन्होंने आगे कहा, “केके 6:22 बजे पहुँचे और 7:05 पर अपना शो शुरू किया। मुझे नहीं लगता कि वहाँ किसी भी समय भीड़ थी। उनके आने से पहले हमारे पास पर्याप्त पुलिस व्यवस्था थी। हमारे पास दिखाने के लिए इसके विजुअल्स हैं कि वहाँ पर भीड़ नहीं थी। हमारी जानकारी के मुताबिक, एसी भी काम कर रहा था।”
जबकि, ऐसी कई खबरें सामने आ चुकी हैं कि भीड़ से बरे बंद ऑडिटोरियम में किसी एसी का इंतजाम नहीं था। केके ने इसे लेकर शिकायत भी की थी। मगर फिर भी कार्यक्रम प्रबंधकों ने इंतजाम नहीं किया। इसके वीडियोज भी सामने आए थे, जिसमें केके बार-बार टॉवेल से पसीना पोछ रहे थे।
UP के कानपुर में 3 जून 2022 (शुक्रवार) को हुई हिंसा के मुख्य आरोपित हयात जफर हाशमी की गिरफ्तारी के बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की है। 4 जून 2022 (शनिवार) को हुई इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान उन्होंने बताया कि आरोपितों ने लखनऊ के एक यूट्यूब चैनल पर शरण ली थी। साथ ही उन्होंने हिंसा में शामिल आरोपितों पर NSA लगाते हुए उनके बैंक खातों की जाँच करवाए जाने का भी ऐलान किया है। दंगाइयों के PFI से जुड़े होने की भी आशंका जताई जा रही है।
इन सब के ख़िलाफ़ गैंगस्टर और NSA एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी और उनकी संपत्तियों को ज़ब्त किया जाएगा। कल 18 लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी और आज 6 लोगों को गिरफ़्तार किया है: कानुपर पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा pic.twitter.com/M6KpKL05RB
IPS विजय सिंह मीणा के मुताबिक, “हिंसा में शामिल आरोपितों पर गैंगस्टर और NSA लगाया जाएगा। आरोपितों की सम्पत्तियों को जब्त किया जाएगा। कल से आज तक कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार हुए लोगों के बैंक खातों की जाँच की जाएगी। उनके PFI या किसी अन्य संस्था से जुड़े होने के की भी पड़ताल की जाएगी। सभी को अदालत में पेश कर के 14 दिनों की पुलिस रिमांड ली जाएगी। अब तक की पूछताछ में आरोपितों ने अपने 5-6 सहयोगियों के नाम बता दिए हैं।”
सभी अभियुक्त मुकदमा दर्ज़ होने के बाद और गिरफ़्तारी से बचने के लिए लखनऊ में एक न्यूज़ चैनल के यूट्यूब ऑफिस में जाकर छिप गए थे। इनके पास से 6 मोबाइल फोन और कुछ दस्तावेज बरामद हुए हैं जिसकी जांच कराई जा रही है: कानुपर पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा pic.twitter.com/frXDhmdJEi
पुलिस कमिश्नर कानपुर ने आगे बताया, “हिंसा के बाद आरोपित शहर छोड़ कर भाग गए थे। इसकी सूचना हमें मिली लेकिन हमने अपनी तलाश जारी रखी। सभी आरोपित FIR दर्ज हो जाने के बाद लखनऊ के एक न्यूज़ के यूट्यूब ऑफिस में छिप गए थे। हयात जफर को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने वहाँ छापेमारी कर के इन सभी को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से आधे दर्जन मोबाइल फोन और कुछ कागजात मिले हैं। फोन और दस्तावेजों की जाँच की जा रही है।”
कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने आगे कहा, “हमें PFI से जुड़े कुछ लिंक मिले हैं। PFI ने मणिपुर और पश्चिम बंगाल में 3-6 का कुछ कॉल किया था। हमें यह सूचना मिली है कि PFI से कानपुर के आरोपितों का भी कोई लिंक है। हम इस पर जाँच कर रहे हैं। कुछ समय पहले CAA हिंसा में PFI के 5 लोग शामिल थे जिन पर भी हम जाँच कर रहे हैं। अगर उनकी कोई संलिप्तता पाई गई तो उन पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। हम आरोपितों की फंडिंग स्रोत की तलाश कर रहे हैं।”
इंस्पेभीड़ ने रोक दिया था अस्पताल जा रहे मरीजों का रास्ता
कानपुर हिंसा की FIR पुलिस इंस्पेक्टर नवाब अहमद की तहरीर पर दर्ज हुई है। FIR में 38 आरोपित किए गए हैं। पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा दी गई तहरीर के मुताबिक हयात जफर हाशमी द्वारा जाम किए गए रास्ते पर भीड़ ने अस्पताल में जाने वाले बीमार व्यक्तियों को भी रोक दिया गया था।
वामपंथी पोर्टल द वायर पर दिल्ली के जहांगीरपुरी हिंसा को लेकर एक खबर प्रकाशित हुई 2 जून 2022 (गुरुवार) को। इस खबर में स्थानीय लोगों के हवाले से बताने का दावा किया गया कि जहाँगीरपुरी से मुस्लिम समुदाय के लोगों का पलायन हो रहा है।
द वायर की रिपोर्ट में पलायन का आधार पुलिस की एकतरफा कार्रवाई को बताने की कोशिश की गई। सारांश में यह समझाने की कोशिश हुई कि पुलिस की वजह से जहाँगीरपुरी में डर का माहौल बना है और पुलिस बेगुनाह मुस्लिमों को पैसे वसूलने के कारण परेशान कर रही है।
ऑपइंडिया ने इन दावों की जमीनी पड़ताल की। द वायर की रिपोर्ट प्रकाशित होने के ठीक अगले दिन 3 जून 2022 (शुक्रवार) को ऑपइंडिया की टीम जहाँगीरपुरी पहुँची। वहाँ स्थानीय लोगों से रिपोर्ट में प्रकाशित दावों की जानकारी ली गई। स्थानीय लोगों से हुई बातचीत के बाद अधिकतर लोगों ने रिपोर्ट में किए गए दावों को सिरे से ख़ारिज किया। इसी के साथ मौके पर जमीनी हालात भी द वायर में कही गई बातों से मेल खाते नहीं दिख रहे थे।
ऑपइंडिया की टीम जहाँगीरपुरी के उस हिस्से में पहुँची, जहाँ से हिंसा शुरू हुई और जिस तरफ हिंसक भीड़ ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया। समय करीब शाम से 4 बज रहे होंगे। बाजार में चहल पहल थी। दुकानें सामान्य रूप से खुल गईं थीं। पुलिस बल की तैनाती न के बराबर थी। रास्तों से बैरिकेड हटा लिए गए थे। घटना में चर्चा में रही मस्जिद के सामने वाली सड़क पर केवल पुलिस के बैरिकेड मंदिर से जूस की दुकान तक लगे थे। इसके अलावे लोग रोजमर्रा के कामों में व्यस्त दिखे।
जहाँ चला था बुलडोजर, वहाँ फिर से सड़कों पर कब्ज़ा
द वायर की रिपोर्ट में बुलडोजर द्वारा अतिक्रमण हटाने के बाद के माहौल का जिक्र किया गया है। उसमें बताया गया है कि तब से स्थानीय लोग विशेषकर मुस्लिम समुदाय के लोग डरे हुए हैं। लेकिन मौके पर हालात एकदम अलग दिखे। सड़कों पर फिर से अतिक्रमण कर लिया गया है। C ब्लॉक की सड़कों के किनारे पहले की तरह कबाड़ जमा दिखा।
सड़कों पर फिर से जमा हुआ कबाड़
शोहराब की दुकान सड़क पर
सड़क पर कबाड़ के अलावा बिना टैक्स या GST वाली तमाम इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम और कपड़े आदि बेचती दुकानें दिखीं। ये वही सड़क है, जहाँ हनुमान यात्रा पर पथराव की शुरुआत हुई थी। स्थानीय लोगों ने उन सभी को मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले दुकानदार बताया। हालात ये थे कि उस राह से कोई चार पहिया वाहन आराम से नहीं निकल सकता था। यदि बात कथित ‘डर’ की हो तो सड़कों पर लोगों में वो कहीं नहीं दिखी।
सड़क पर लगी दुकानें
मस्जिद के आगे सामान्य चहल-पहल
हिन्दू संगठनों ने जिस मस्जिद से पहला पत्थर फेंके जाने की शुरुआत होना बताया था, उस मस्जिद के आस-पास चहल-पहल थी। एक लाइन से आस-पास की तमाम दुकानें खुली थीं। मौके पर बाइकें और कुछ इलेक्ट्रॉनिक रिक्शे भी खड़े थे, जो लोगों को ला और ले जा रहे थे।
मस्जिद के सामने सामान्य चहल-पहल
कबाड़ की चल रही लोडिंग-अनलोडिंग
द वायर की रिपोर्ट में जिस जगह बुलडोजर चलने के बाद लोगों के भविष्य को लेकर भय बताया गया है, वहाँ पर बिना किसी अधिकारी या प्रशासन के डर के कबाड़ की लोडिंग-अनलोडिंग चल रही थी। अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान जो सारा कबाड़ G ब्लॉक धोबीघाट में शिफ्ट किया गया था, उसे फिर वापस ले आया गया है।
मौके पर कबाड़ से लदे ट्रक खड़े दिखाई दिए। इसके अलावा बहुत कम उम्र के लड़कों को कबाड़ की दुकान पर बिना किसी रोक-टोक के काम करते देखा गया। ट्रक से उतरे सामान को आस-पास पहुँचाने व अन्य कामों को करने के लिए सड़कों पर ही कई ठेले की पार्किंग बना दी गई थी।
कबाड़ से लोड ट्रक, काम करते बच्चे और सड़क पर खड़े ठेले
फ़िलहाल अतिक्रमण मामले में सुनवाई अभी अदालत में लंबित है।
राजस्थान में उदयपुर (Udaypur, Rajasthan) के पास स्थित नागदा (Nagda) में एक बेहद प्राचीन मंदिर है, जिसे सास-बहू का मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। कहा जाता है कि इस्लामिक आक्रांता शम्सुद्दीन इल्तुत्मिश (Shamsuddin Iltutmish) ने नागदा शहर को बर्बाद कर इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। इस मंदिर को उसने चूना और बालू भरवा कर एक टीले में तब्दील करवा दिया था। उसने मंदिर और उसके आसपास के इलाकों में पूजा-पाठ पर पूरी तरह रोक भी लगा दी थी।
सास-बहू मंदिर का असली नाम सहस्रबाहु मंदिर है, जो भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक राजा कार्तवीर्य अर्जुन उर्फ सहस्त्रबाहु को समर्पित है। यह मंदिर 1100 साल से अधिक पुराना है, जो कालांतर में अपभ्रंश होकर सहस्त्रबाहु की जगह सास-बहू का मंदिर कहलाने लगा। इस मंदिर में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश की छवियाँ हैं। वहीं दूसरी तरफ भगवान राम, लक्ष्मण और परशुराम की कलाकृतियाँ हैं। इसकी दीवारों पर रामायण का सचित्र वर्णन किया गया है।
सास-बहू मंदिर का इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार, गहलोत या गुहिलोत वंश से संबंधित मेवाड़ राजघराने की राजमाता ने मंदिर भगवान विष्णु के अवतार सहस्त्रबाहु को और बहू ने शिव को समर्पित किया था। राजमाता भगवान सहस्त्रबाहु की अनन्य भक्त थीं। जब उनकी बहू आईं तो शिव की परम भक्त थीं। इसलिए इसी परिसर में मुख्य मंदिर के बगल में एक शिव मंदिर बनवा दिया। इस तरह यह मंदिर सहस्त्रबाहु से कालांतर में अपभ्रंश होकर सास-बहू का मंदिर बन गया।
कुछ इतिहाकारों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण कच्छावा राजवंश के राजा महिपाल और राजा रत्नपाल ने करवाया था। इसको लेकर विद्वानों का कहना है कि राजा महिपाल ने ग्वालियर में सहस्त्रबाहु मंदिर बनवाया है। बता दें कि नागदा के अलावा, ग्वालियर में भगवान विष्णु के अवतार सहस्त्रबाहु को समर्पित एक प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर है।
नागदा स्थित मंदिर में भगवान सहस्त्रबाहु की 32 मीटर ऊँची और 22 मीटर चौड़ी प्रतिमा थी। आज यह मंदिर खंडहर बन चुका है। हालाँकि, मंदिर की दीवारें और इन पर बनीं कलाकृतियाँ इसकी भव्यता को आज भी प्रदर्शित करती हैं। मंदिर ऊँचे जगत पर बना हुआ है, जिसमें प्रवेश के लिए पूर्व में मकरतोरण द्वार है। मंदिर आकर्षक पंचायतन वास्तु शैली में बनाया गया है।
सहस्त्रबाहु मंदिर (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
यह मंदिर मेवाड़ राजवंश के कुलदेवता एकलिंगजी (भगवान शिव) मंदिर के रास्ते में स्थित है। सास-बहू मंदिर पाँच छोटे-छोटे मंदिरों से घिरा हुआ है। इसके तीन दरवाजे तीन दिशाओं में हैं, जबकि चौथा दरवाजा एक ऐसे कमरे में स्थित है, जहाँ लोग नहीं जा सकते। मंदिर के प्रवेश द्वार पर देवी सरस्वती, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु की मूर्तियाँ स्थित हैं।
मुख्य मंदिर के चारों तरफ देवताओं के कुल (परिवार) को बेहद उत्कृष्ट ढंग से उत्कीर्ण किया गया है। हर मंदिर में पंचरथ गर्भगृह और खूबसूरत रंगमंडप बने हैं। मंदिर के प्रमुख देवता हजार हाथों वाले सहस्रबाहु हैं। वहीं, मंदिर परिसर में दूसरा प्रमुख मंदिर भगवान शिव का है। मंदिर की दीवारों पर खजुराहो की तर्ज पर असंख्य मूर्तियाँ बनी हैं। यह राजस्थान के अत्यंत प्राचीन मंदिरों में से एक है।
ओमेंद्र रत्नू द्वारा लिखित ‘महाराणा: सहस्त्र वर्षों के इतिहास’ के अनुसार, नागदा और उसके आसपास के इलाकों में 999 शैव, वैष्णव और जैन मंदिर थे। इन मंदिरों को क्रूर इस्लामी आक्रांता इल्तुत्मिश ने नष्ट कर, इनकी मूर्तियों को खंडित करने के बाद पूरे शहर को जला दिया था।
इस्लामी आक्रांता इल्तुत्मिश ने मंदिर में भरवा दिया रेत
साल 1226 में मेवाड़ पर आक्रमण के दौरान इल्तुत्मिश ने न सिर्फ इन मंदिरों और उनमें स्थापित मूर्तियों को तोड़ा, बल्कि उसने सहस्त्रबाहु मंदिर को बालू और चूना से भरवा दिया। इसके बाद यह टीला का रूप ले लिया।
जब अंग्रेजों ने इलाके पर कब्जा किया और नागदा में बिखरी कलाकृतियों को देखा तो उसने इस टीले की खुदाई करवाई। इस खुदाई में हिंदुओं का 1000 साल पुराना इतिहास निकलकर सामने आया। इसके बाद हिंदुओं ने सैकड़ों वर्षों बाद इस मंदिर में पूजा शुरू की।
सहस्त्रबाहु मंदिर (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
इस तरह प्राचीन नागदा शहर बप्पा रावल के काल में एक भव्य शहर हुआ करता था। इतिहासकार डॉ. राजशेखर व्यास के अनुसार, इस कस्बे में सहस्रबाहु मंदिर, महाराणा खुमाण रावल देवल तथा परकोटे के अवशेष मेवाड़ के तेरह सौ साल के गौरवमयी इतिहास के गवाह हैं।
यहाँ सहस्त्रबाहु मंदिर के अलावा, शिव मंदिर, आदिबुद्ध मंदिर जिसे अद्भुतजी कहते हैं, स्थित है। इसके परिसर में कई मूल्यवान मूर्तियाँ आज भी बेतरतीब ढंग से बिखरी पड़ी हुई हैं। यह क्षेत्र बौद्ध, जैन और सनातन संस्कृतियों को लेकर विश्वविख्यात रहा है।
नागदा और मेवाड़ वंश का इतिहास
जिस नागदा में यह सहस्त्रबाहु मंदिर स्थित है, वहीं 8वीं शताब्दी में गहलोत वंश के संस्थापक बप्पा रावल (Bappa Rawal) ने मेवाड़ वंश की स्थापना की थी, जिसमें आगे चलकर महाराणा खुमाण, महाराणा हम्मीर, महाराणा सांगा, महाराणा लाखा, महाराणा प्रताप सिंह आदि जैसे शूरवीर पैदा हुए। उदयपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर नागदा मेवाड़ राजवंश की पहली राजधानी थी। बाद में यह वैकल्पिक राजधानी बनी और चितौड़गढ़ के अलावा यहाँ से भी शासन का काम देखा जाता था।
मेवाड़ के संस्थापक बप्पा रावल (फोटो साभार: राजपूत विकी)
बप्पा रावल का बचपन का नाम कालभोज (Kaalbhoj) था। इन्होंने सिंध के ब्राह्मण राजा दाहिर सेन की मुहम्मद बिन कासिम से हार का बदला अरब के खलीफा से लिया था। दाहिर सेन के पुत्र को शरण देते हुए बप्पा रावल ने मंडोवर के युद्ध में अरब सैनिकों को हराते हुए जुन्नैद का वध कर दिया था। यही नहीं, अफगानिस्तान के गजनी में मोहम्मद बिन कासिम द्वारा तैनात जागीरदार को हराकर गजनी को मुक्त कराया। गजनी और कोह-ए-दामाँ में अपना दुर्ग स्थापित किया और ईरान तक पहुँचकर अरब आक्रांताओं को खदेड़ा।
कौन हैं सहस्त्रबाहु
शास्त्रों के अनुसार, सहस्त्रबाहु भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों में से एक हैं। इन्हीं सहस्त्रबाहु के वध का जिक्र परशुराम द्वारा करने वर्णन शास्त्रों में मिलता है। हालाँकि, भगवान के एक अवतार द्वारा अपने दी दूसरे अवतार का वध करना कुछ विद्वानों द्वारा स्वीकृति योग्य नहीं लगता है। शास्त्रों के अनुसार, सहस्त्रबाहु भगवान परशुराम के मौसा थे। परशुराम की माँ और सहस्त्रबाहु की पत्नी सगी बहनें थीं।
कहा जाता है कि जब दमदग्नि ऋषि ने अपनी पत्नी रेणुका का सिर काटने के लिए अपने पुत्रों को कहा तो पुत्रों ने मना कर दिया। उस समय तक परशुराम वहाँ नहीं थे। यह बात जब रेणुका की बहन यानी सहस्त्रबाहु की पत्नी तो पता लगी तो वह विचलित हो गईं। उन्होंने सहस्त्रबाहु से कहा कि राजा होने के कारण ऐसा अन्याय नहीं होने देना चाहिए। इस पर सहस्त्रबाहु ने जमदग्नि को ऋषि बातकर उन्हें दंड नहीं देने की बात कही। लेकिन पत्नी की जिद पर वह ऋषि के आश्रम को उजाड़कर दंड दिया। यही से शत्रुता बढ़ी, जो सर्वविदित है।
भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक भगवान सहस्त्रबाहु प्राचीन महिष्मती नगर, जिसे आज महेश्वर कहते हैं, के राजा थे और हैहय कुल के क्षत्रिय शासक थे। उनके पिता का नाम राजा कार्तवीर्य और माता का नाम रानी कौशिक था। उनका का वास्तविक नाम अर्जुन था। भगवान दत्तात्रेय और फिर शिव के नीलंकठ रूप को प्रसन्न करके उन्होंने एक हजार हाथ होने का वर माँगा था। इसके बाद से उनका नाम अर्जुन से सहस्त्रार्जुन पड़ गया।
शास्त्रों के अनुसार, एक बार रावण ने सहस्त्रबाहु को युद्ध के लिए ललकारा, जिसमें उन्होंने रावण को बंदी बना लिया। बाद में रावण के दादा पुलस्त्य मुनि के आग्रह पर उन्होंने रावण को मुक्त दिया और दोनों मित्र बन बन गए। तीनों लोकों और सप्त द्वीपों को जीतने के कारण सहस्त्रबाहु को ‘राजराजेश्वर’ भी कहा जाता है।
भगवान सहस्त्रबाहु (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)
हरिवंश पुराण के अध्याय 33 में वैशम्पायन जी द्वारा महाराज जन्मेजय को बताया गया कि कार्तवीर्य के समान कोई बलशाली नहीं हुआ। वैशम्पायन कहते हैं, “सहस्त्रबाहु को दत्तात्रेय ने वरदान दिए, जिसमें पहला हजार भुजा, दूसरा सज्जनों को अधर्म से निवारण करना, तीसरा पृथ्वी जीतकर राजधर्म से प्रजा को प्रसन्न रखना था।”
सहस्त्रबाहु को लेकर नारद जी कहते हैं, “जो यज्ञ, दान, तप, पराक्रम तथा ज्ञान कार्तवीर्य अर्जुन ने किया, वैसा कोई दूसरा राजा नहीं कर सकता। धर्म से प्रजा की रक्षा करने वाले इस राजा के धर्म के प्रभाव से कभी द्रव्य (संपत्ति) नष्ट नहीं होता था। वह पचासी हजार वर्ष तक सब रत्नों से युक्त होकर चक्रवर्ती सम्राट थे। योग के बल से वह स्वयं यज्ञपाल एवं क्षेत्रपाल थे। वह स्वयं मेघ बनकर प्रजा की रक्षा करते थे।”
भागवत पुराण में भगवान विष्णु व लक्ष्मी द्वारा भगवान सहस्त्रबाहु की उत्पत्ति की कथा वर्णन किया गया है। सहस्त्रबाहु ने विष्णु भगवान की 10 हजार वर्ष तक कठोर तपस्या करके 10 वरदान प्राप्त किए और चक्रवर्ती सम्राट की उपाधि धारण की।
भगवान सहस्त्रबाहु के विषय में शास्त्रों और पुराणों में अनेकानेक कथाएँ हैं। राजा सहस्त्रबाहु ने एक बार संकल्प लेकर शिव तपस्या प्रारंभ की एवं इस घोर तप के समय वे प्रति दिन अपनी एक भुजा काटकर भगवान शिव को अर्पित करते थे। इस तपस्या से खुश होकर भगवान नीलकंठ रूप में प्रकट होकर सहस्त्रबाहु को अनेकों दिव्य, चमत्कारिक और शक्तिशाली वरदान दिए।
पौराणिक ग्रंथों एवं पुराणों के अनुसार, कार्तवीर्य अर्जुन के व्याधिपति, सहस्रार्जुन, दषग्रीविजयी, सुदर्शन, चक्रावतार, सप्तद्रवीपाधि, कृतवीर्यनंदन, राजराजेश्वर आदि कई नाम हैं। पुराणों के अनुसार, प्रतिवर्ष सहस्त्रबाहु जयंती कार्तिक शुक्ल सप्तमी को दीपावली के ठीक बाद मनाई जाती है। देश भर में इनके कई मंदिर हैं और उन्हें बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।
कौन था इस्लामिक आक्रांता इल्तुत्मिश
लगातार हार का मुँह देखने के बाद सन 1192 में तराईन की द्वितीय युद्ध में मुस्लिम आक्रांता मुहम्मद घोरी (Muhammad Ghouri) क्षत्रिय सम्राट पृथ्वीराज चौहान को हराने में सफल रहा। इसके बाद उसने अपने गुलाम कुतुबद्दीन ऐबक को भारत का जागीरदार नियुक्त कर वापस लौट गया। इसकी वजह ये थी कि मुहम्मद घोरी का कोई पुत्र नहीं था। उसकी एकमात्र संतान लड़की थी। इसलिए उसने अपने सबसे विश्वसनीय व्यक्ति और दास को जागीरदार बनाया।
घोड़े से गिरकर साल 1210 में ऐबक की मौत होने के बाद शम्सुद्दीन इल्तुत्मिश को उसके राज्य का भार मिला। इल्तुत्मिश बेहद कट्टर और धर्मांध प्रवृति का था। उसने सुल्तान बनते ही सबसे पहले सेना तैयार की और राजस्थान के रणथंभौर और मंडोर के शासकों पर आक्रमण शुरू कर दिया। इस दौरान हारने वाले राजा की वह हत्या कर देता था और नगरों को लूटकर जला देता था।
इसके साथ ही वह उन नगरों में स्थित मंदिरों को ध्वस्त करना नहीं भूलता था। वह मंदिरों को तोड़ने के साथ-साथ मूर्तियों को पूरी तरह खंडित कर देता था, ताकि हिंदू उनकी दोबारा पूजा ना कर सकें। इसके साथ वह प्राचीन शिलालेखों को भी नष्ट कर देता था, ताकि हिंदू अपने इतिहास को कभी जान न पाएँ। अति सुंदर और प्राचीन नगर नागदा को भी उसने इसी तरह बर्बाद किया था।
मेवाड़ के महाराणा जैत्र सिंह के नेतृत्व में हिंदू राजाओं ने एकजुट होकर इल्तुत्मिश 1234 ईस्वी में ललकारा तुमुल के युद्ध में इल्तुत्मिश को बुरी तरह परास्त किया। आठ महीने तक चले इस युद्ध में पराजय से इल्तुत्मिश इतना सदमा लगा कि 1236 ईस्वी में उसकी मौत हो गई। ओमेंद्र रत्नू की किताब के अनुसार, इस युद्ध को लेकर ‘चीड़वा के आलेख’ में लिखा है, “राजा जैत्र सिंह ने पृथ्वी को बचा लिया और ऋषि अगस्त्य (जिन्होंने समुद्र पी लिया था) की भाँति तुर्कों के प्राण पी लिए।”
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का जनजातीय समाज के प्रति घटिया सोच सामने आई है। दरअसल राघव चड्ढा का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वह आदिवासी जनजाति के लिए अपमान भरे लहजे का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसमें वह कह रहे हैं कि घटिया अफसरों को आदिवासी मंत्रालय भेजा जाए।
भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने इसका वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “यह देखिए आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की जनजातीय समाज के खिलाफ ओछी मानसिकता।”
— BJP Scheduled Tribe Morcha (@BJPSTMORCHA) June 4, 2022
इस वीडियो में राघव चड्ढा कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, “आप किसी बाबू (अधिकारी) को नौकरी से तो निकाल नहीं सकते। ट्रांसफर-पोस्टिंग ही कर सकते हो। अगर कोई बहुत अच्छा काम कर रहा है तो उसे अच्छा विभाग दो… जैसे कि उसे स्वास्थ्य सचिव बनाओ, गृह सचिव बनाओ और जो खराब काम कर रहा है उसे भेजो जनजातीय विभाग में। ये पनिशमेंट पोस्टिंग है उसका। उसे या तो बागवानी या फिर पशुपालन विभाग में भेजो।”
why do you think tribals are inferior @ArvindKejriwal ji..!! ??? why do you hate them..?? kya bigada hai innocent tribals ne aapka..?? ?
इस पर लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दी हैं। राघव चड्ढा के इस बयान पर लोग आपत्ति जता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “आप आदिवासी को हीन भावना से क्यों देखते हो अरविंद केजरीवाल जी..!! आप उनसे नफरत क्यों करते हो..?? क्या बिगाड़ा है इन निर्दोष जनजातियों ने आपका।”
His statement is insult to Tribal department,which is very important department.He should apologise for his casual remark.
— Manish Kumar, A proud HindU (@Manish59328934) June 4, 2022
एक यूजर ने इस पर हैरानी जताई कि आखिर राघव चड्ढा इस तरह से कैसे बोल सकते हैं।
AAP की प्रेस कॉन्फ्रेंस और ‘राघव चड्ढा चोर है’
गौरतलब है कि पिछले दिनों पंजाब चुनाव से पहले AAP नेता टिकट बँटवारे को लेकर आपस में भिड़ गए थे। इस दौरान खूब लात-घूँसे चले थे। आम आदमी पार्टी में इस अंदरूनी बवाल से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किए गए थे। वायरल हो रहे वीडियो में पार्टी के नेताओं को जालंधर प्रेस क्लब में एक-दूसरे को धक्का देते और मारपीट करते देखा गया था।
दरअसल प्रेस क्लब में राघव चड्ढा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कॉन्ग्रेस के पूर्व पार्षद दिनेश ढल को पार्टी में शामिल करवाया जाना था, लेकिन टिकट बँटवारे को लेकर विवाद हो गया। इस दौरान पंजाब के सह-प्रभारी के खिलाफ ‘राघव चड्ढा चोर है’ के नारे लगाए गए। बात यहीं तक रहती तो गनीमत होती, लेकिन मामला इतना बढ़ गया कि लोगों के बीच जमकर मारपीट भी हो गई। टिकट बँटवारे को लेकर करीब 45-50 मिनट हुए बवाल के बाद राघव चड्ढा को पिछले दरवाजे से बाहर भागना पड़ा था।
किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) एक बार फिर से संगठन को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि फ्री बिजली देने का वादा करके अब नलकूपों पर मीटर लगाकर किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है। 10 साल से अधिक के हो चुके ट्रैक्टरों को रोका जा रहा है और अब ये ट्रैक्टर इस बार दिल्ली के बजाय लखनऊ की तरफ मुड़ सकते हैं। टिकैत ने एक बार फिर से किसानों से संगठन को आगे बढ़ाने की अपील की है।
टिकैत शुक्रवार (3 मई 2022) को मेरठ के जंगेठी गाँव में स्थित धर्मेश्वरी फॉर्म हाउस पर भारतीय किसान यूनियन की समीक्षा बैठक में बोल रहे थे। उसी दौरान उन्होंने ये बयान दिया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर उनकी हत्या कराने की साजिश रचने का आरोप लगाया। इसके साथ ही टिकैत ने भाकियू के पदाधिकारियों से संगठन को मजबूत बनाने के लिए इसका विस्तार करने को कहा। उन्होंने सरकार पर भाकियू को कमजोर करने का आरोप लगाया और दावा किया, “अगर आपस में उलझ गए तो सरकार हमें मरवा देगी।”
किसान नेता का मानना है कि एकजुट रहेंगे तो ही ताकतवर रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक में उन पर हुए हमले को साजिश करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उन्हें कुछ होता है तो संगठन के लाखों टिकैत इंकलाबी झंडे उठाएँगे।
गौरतलब है कि पिछले महीने 15 मई 2022 को भारतीय किसान यूनियन से राकेश टिकैत को बाहर निकाल दिया गया था। इसके साथ ही उनके भाई नरेश टिकैत को भी भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। उनके स्थान पर राजेश सिंह चौहान को नया अध्यक्ष बनाया गया था।
क्या हुआ था राकेश टिकैत के साथ
भारतीय किसान यूनियन से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद राकेश टिकैत ने 30 मई 2022 को कर्नाटक के बेंगलुरू में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान एक शख्स ने माइक से राकेश टिकैत को पीट दिया। इसके साथ ही उनके चेहरे पर काली स्याही भी फेंकी गई।