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दिल्ली दंगों में रिवॉल्वर तानने वाले शाहरुख का जोरदार स्वागत: AIMIM नेताओं ने बताया ‘बहादुर’ और ‘शेर’, बीमार अब्बा से मिलने के लिए मिला था परोल

फरवरी 2020 के दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों (Anti Hindu Riots 2020) के आरोपित शाहरुख़ पठान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वह पुलिसकर्मियों के साथ कहीं जा रहा है और आसपास भीड़ जमा दिखाई दे रही है। जानकारी के मुताबिक, वीडियो 23 मई 2022 (सोमवार) की है। उस दिन उसे 4 घंटे की कस्टडी परोल पर उसके बीमार अब्बा से मिलाने घर लाया गया था। फ़िलहाल शाहरुख़ को वापस जेल भेज दिया गया है।

वायरल वीडियो में दंगे के आरोपित शाहरुख़ का उसके मोहल्ले में जमा भीड़ एक हीरो की तरह स्वागत कर रही है। शाहरुख़ भी मौजूद भीड़ का अभिवादन स्वीकार करता दिखाई दे रहा है। उसे देखने के लिए कुछ लोग छतों पर भी चढ़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि उन्हीं में से किसी ने शाहरुख़ का यह वीडियो बनाया था।

सोशल मीडिया पर भी बनाया गया हीरो

दिल्ली दंगों के आरोपित शाहरुख़ का स्वागत न सिर्फ उसके मोहल्ले वालों ने भीड़ जुटाकर किया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी उसके समर्थन में अभियान चलाया गया। AIMIM के नेता शेख आदिल आज़मी ने तो शाहरुख़ के साथ दिल्ली दंगों के बाकी दंगाइयों को भी बहादुर का ख़िताब दे दिया।

UP AIMIM के महराजगंज के नेता मुराद सिद्दीकी ने शाहरुख़ पठान को शेर कह कर संबोधित किया।

सना नाम के एक ट्विटर हैंडल ने चाँद जैसी बीवी पाने के लिए शाहरुख़ पठान जैसी जुल्फ और दाढ़ी रखने की सलाह दे डाली।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटियाला हाऊस कोर्ट के अतिरिक्त सेशन जज अमिताभ रावत ने 21 मई को शाहरुख़ को उसके बीमार अब्बा से मिलने की इजाजत दी थी। शाहरुख़ पठान के वकीलों ने यह इजाजत मानवता के आधार पर माँगी थी। जफराबाद पुलिस स्टेशन की FIR संख्या 49/2020 में आरोपित शाहरुख़ दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल पर हथियार तानते हुए नजर आया था। इस हिंसा के दौरान कॉन्स्टेबल रोहित शुक्ला को गोली भी लगी थी।

शाहरुख़ के परोल के लिए दी गई याचिका में उसके 65 साल के अब्बा को सीनियर सिटीजन बताते हुए कहा गया था कि वे कई बीमारियों से जुझ रहे हैं। कुछ समय पहले GB पंत अस्पताल में उनकी सर्जरी हुई थी। इस दौरान शाहरुख़ को मार्च के महीने में एक दिन का पेरोल दिया गया था। पेरोल के दौरान उसे अस्पताल तक ले जाया गया, लेकिन उसके अब्बा के स्वास्थ्य की स्थिति के कारण मुलाकात नहीं हो पाई थी।

गौरतलब है कि शाहरुख़ पठान पर लगे आरोपों को कोर्ट गंभीर मान कर उसकी जमानत याचिका कई बार ख़ारिज कर चुका है। शाहरुख़ पठान को 24 फरवरी 2020 को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तब से वह लगातार जेल में है। शाहरुख़ पर IPC की धारा 147, 148, 149, 186, 188, 153A, 283, 353, 332, 323, 307, 505, 120B, 34 के साथ आर्म्स एक्ट में केस दर्ज है। दिसंबर 2021 में कोर्ट ने उस पर से आर्म्स एक्ट हटा दिया था।

भद्दी गालियाँ, महाराष्ट्र में दोबारा हनुमान चालीसा पढ़ने पर हत्या की धमकी: अमरावती की सांसद नवनीत राणा को 20 मिनट में आए 11 फोन कॉल

महाराष्ट्र (Maharashtra) में हनुमान चालीसा विवाद (Hanuman Chalisa Row) के बाद अब अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा (Navneet Rana) को जान से मारने की धमकी देने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में उनकी शिकायत पर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने केस दर्ज किया है। गुरुवार (26 मई 2022) को दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। राणा को 11 कॉल किए गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (24 मई 2022) को सांसद नवनीत राणा के पीए ने दिल्ली पुलिस को बताया कि शाम 5:27 से 5:47 बजे के दौरान राणा के पर्सनल मोबाइल फोन पर 11 बार कॉल किए गए। इस दौरान आरोपित ने हर बार नवनीत राणा के साथ गाली-गलौच की और उन्हें इस बात की धमकी दी कि अगर दोबारा से उन्होंने महाराष्ट्र आकर हनुमान चालीसा का पाठ करने की हिमाकत की तो उनकी हत्या कर दी जाएगी।

सांसद को धमकी के मामले में नई दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस थाने में धारा 506 औऱ 509 के तहत केस दर्ज किया गया है। इस बात की पुष्टि डीसीपी अमृता गुगुलोठ ने की है। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

क्या है हनुमान चालीसा विवाद

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर पर अजान विवाद के बीच पिछले महीने 23 अप्रैल 2022 को अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा ने सीएम उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था। इसके तुरंत बाद हरकत में आई मुंबई पुलिस ने उन्हें और उनके पति रवि राणा को गिरफ्तार कर लिया था। उनके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने और राजद्रोह का केस पुलिस ने दर्ज किया था।

जेल से छूटने के बाद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वो जीत कर दिखाएँ। सांसद ने ये भी कहा था कि अगर हनुमान चालीसा पढ़ना अपराध है तो इसके लिए वो 14 दिन क्या, 14 वर्षों तक भी जेल में रहने के लिए तैयार हैं।

ओवैसी के गढ़ में PM मोदी ने की CM योगी की जमकर तारीफ, कहा- योगी को विज्ञान पर भरोसा, तोड़ दिया अंधविश्वास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में बीजेपी कार्यकर्ताओं की एक रैली को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की है। उन्होंने तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव को ‘अंधविश्वासी’ बताते हुए कहा कि नोएडा के सीएम योगी आदित्यनाथ संत हैं। लेकिन जब उनके सामने एक शहर में न जाने की बात आई, क्योंकि इससे कुर्सी जाने का खतरा है, तो उन्होंने कहा कि वो विज्ञान पर विश्वास करते हैं। वो शहर भी गए और दोबारा मुख्यमंत्री भी बन गए।

बता दें कि पीएम मोदी उत्तर प्रदेश के शहर नोएडा के बारे में जिक्र कर रहे थे जिसके बारे में कहा जाता रहा है कि जो भी सीएम यहाँ आता है उसकी कुर्सी चली जाती। कई वर्षों तक नोएडा के लोग यूपी के मुख्यमंत्रियों का आने का इंतजार करते रहे। लेकिन इस मिथक को योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा और अपने पहले कार्यकाल में ही वो कई बार नोएडा पहुँचे।

हैदराबाद की रैली में पीएम मोदी ने सीएम योगी की इस बात का जिक्र करते हुए तेलंगाना के सीएम पर इशारों-इशारों में निशाना साधा और कहा कि 21वीं सदी में भी जो लोग अंधविश्वास के गुलाम बने हुए हैं वो किसी का भी नुकसान कर सकते हैं। ये अंधविश्वासी लोग तेलंगाना के साथ कभी न्याय नहीं कर सकते हैं। 

पीएम मोदी ने कहा, “जब मैं गुजरात में सीएम था तो भी वहाँ भी कुछ शहरों के नाम के साथ अंधविश्वास जुड़ा था कि जो जाएगा उसकी कुर्सी चली जाएगी। मैं डंके की चोट के साथ-साथ वहाँ बार-बार जाता था। मैं विज्ञान और टेक्नॉलजी पर विश्वास करता हूँ।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “मैं तो आज तेलंगाना की धरती से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी को भी बधाई देता हूँ। वो तो संत और संन्यासी परंपरा से हैं। जब उनके सामने आया कि उस (नोएडा) शहर में नहीं जाना चाहिए तो योगी जी ने कहा कि मैं विज्ञान में विश्वास करता हूँ और वो चले गए और दोबारा मुख्यमंत्री भी बन गए।”  पीएम मोदी ने कहा कि अंधविश्वास के तवज्जो देने वाले लोग उसके भविष्य को कभी संवार नहीं सकते हैं। ऐसे अंधविश्वासी लोगों से हमें तेलंगाना को बचाना है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने इस टिप्पणी से तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव पर निशाना साधा, जिन पर अंधविश्वासी होने के आरोप लगते रहे हैं। पूर्व सांसद के विश्वेश्वर रेड्डी ने उन पर अपने अंधविश्वास के चलते लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया था। दरअसल, 2016 में ये चर्चाएँ चली थीं कि वास्तु को लेकर चिंतित केसीआर ने नए घर में शिफ्ट होने का फैसला लिया था। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी जब हैदाराबाद में थे तो राज्य के सीएम के चंद्रशेखर राव बेंगलुरु में थे और पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा से मीटिंग कर रहे थे। यह लगातार दूसरा मौका था, जब सीएम ने पीएम मोदी की अगवानी न करने का फैसला लिया। इससे पहले भी फरवरी में ऐसा हुआ था, जब वह पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए नहीं पहुँचे थे।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि दशकों तक चले तेलंगाना आंदोलन में हजारों लोगों ने अपना बलिदान दिया था। ये बलिदान तेलंगाना के भविष्य़ के लिए था। ये बलिदान, तेलंगाना की आन-बान-शान के लिए था। तेलंगाना आंदोलन इसलिए नहीं चला था कि कोई एक परिवार तेलंगाना के विकास के सपनों को लगातार कुचलता रहे। परिवारवाद की वजह से देश के युवाओं को, देश की प्रतिभाओं को राजनीति में आने का अवसर भी नहीं मिलता। परिवारवाद उनके हर सपनों को कुचलता है, उनके लिए हर दरवाजा बंद करता है। इसलिए, आज 21वीं सदी के भारत के लिए परिवारवाद से मुक्ति, परिवारवादी पार्टियों से मुक्ति एक संकल्प भी है। 

बकरा मंडी से निकली 300 की भीड़ ने किया पाकिस्तान के शरणार्थी हिन्दू परिवार पर हमला, घर पर बरसाए पत्थर, राजस्थान पुलिस बता रही 2 पक्षों का झगड़ा

राजस्थान के जोधपुर में आज 26 मई 2022 (गुरुवार) को लगभग 300 हमलावरों की एक भीड़ ने पाकिस्तान के एक शरणार्थी हिन्दू परिवार पर हमला बोल दिया। इस हमले में महिला समेत कम से कम 3 लोग घायल हो गए हैं। पीड़ित पक्ष दलित समुदाय से बताया जा रहा है। झगड़े की शुरुआत 2 वाहनों में टक्कर बताई जा रही है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वायरल हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति पुलिस पर भी मुस्लिमों का पक्ष लेने का आरोप लगा रहा है। वीडियो में बोल रहा व्यक्ति हमले के लिए मुस्लिमों को दोषी ठहरा रहा है। दुकान में तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए विजुअल में एक क्षतिग्रस्त मारुति वैन भी दिखाई दे रही है जो पीड़ित परिवार की बताई जा रही है। वहीं पुलिस से उलझते लोगों को ये कहते सुना जा सकता है कि हमसे ही कहा जा रहा है चलो-चलो और उनसे कुछ नहीं कहा जा रहा। इसी वीडियो में महिलाओं और बच्चो को भी रोते हुए सुना जा सकता है।

पुलिस ने इसे सड़क दुर्घटना के चलते 2 पक्षों की झड़प बताया है। DCP जोधपुर पश्चिम के मुताबिक मामले में केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई हो रही है और मौके पर शांति व्यवस्था कायम है।

ऑपइंडिया ने इस हमले में घायल पीड़ित भूरालाल से बात की। उन्होंने बताया, “मैं अभी अस्पताल में मेडिकल करवाने के लिए पुलिस के वाहन से आया हूँ। हम 12 साल पहले पाकिस्तान से भारत आए थे। हम मूल रूप से पाकिस्तान के हैदराबाद के रहने वाले हैं। घटना लगभग 2.30 दोपहर की है। पहले मुस्लिमों ने हमारी मारुति वैन गाडी को अपनी पिकअप से ठोकर मारी। फिर मैंने उन्हें लेडीज का हवाला दे कर मना किया। लेकिन वो लड़ने लगे। हाथापाई के बाद उन्होने बकरा मंडी से लगभग 300 लोगों को बुला लिया। उस भीड़ में मैं किसी को नहीं जानता। मेरे पास हमलावरों की गाड़ियों के नंबर है।”

पीड़ित भूरालाल ने आगे बताया, “हमलावरों की भीड़ हमारे घर में घुस गई थी।। ये मंडी मेरे घर के सामने ही है। पहले घर में घुस कर डंडे मारे गए और बाद में दूर से पथराव किया गया। मेरे भाई और घर की औरतों को भी बुरी तरह से पीटा गया। मेरे भाई और भतीजा के साथ घर की 2-3 लेडीज भी घायल हैं। हमें पत्थर भी लगे हैं। मेरा सिर फोड़ दिया गया है और हाथ में भी फैक्चर है। पुलिस बाद में आई है। इस दौरान मेरा ब्लड प्रेशर हाई हो गया। हमारा थाना बोरानाडा है। पुलिस कुछ देर बाद आई। अभी हमने थाने में तहरीर नहीं दी है। यहाँ से लौट कर जाने के बाद हम इसकी लिखित शिकायत करेंगे।”

जोधपुर में ही रहने वाले एक अन्य पाकिस्तानी हिन्दू रंजीत ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया, “पीड़ित हिन्दू परिवार दलित है और भील समुदाय से है। पीड़ित भूरालाल की किराना की दुकान है जिसका नाम बालाजी किराना एन्ड जनरल स्टोर है।”

अजमेर की दरगाह भी मंदिर ही: महाराणा प्रताप सेना ने बताया- स्वास्तिक और अन्य हिंदू प्रतीक आज भी मौजूद, ASI सर्वे की माँग

हिंदुओं में जागरूकता बढ़ने के साथ ही उन्होंने अपने खोए व ध्वस्त किए गए विरासतों एवं धरोहरों पर दावा करना शुरू कर दिया। वाराणसी के ज्ञानवापी (Gyanvapi, Varanasi) और मथुरा के शाही ईदगाह (Shahi Idgah, Mathura) ढाँचे के बाद अब राजस्थान के अजमेर स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती (Moinuddin Chishti Dargah) की दरगाह को हिंदुओं ने मंदिर होने का दावा किया है।

हिंदू संगठनों का कहना है कि दरगाह असल में एक शिव मंदिर है और इसकी दीवारों पर अभी भी हिंदू प्रतीक मौजूद हैं। इस संबंध में उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) को पत्र लिखा है और उसमें माँग की है कि इसके सत्यापन के लिए पुरातत्व विभाग (ASI) से दरगाह परिसर का सर्वे कराया जाए।

दिल्ली स्थित महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने कहा है कि अजमेर स्थित गरीब नवाज कहलाने वाले मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पहले हिन्दू मंदिर था। उन्होंने पत्र में कहा कि सर्वेक्षण कराने के बाद इसके हिन्दू मंदिर होने के प्रमाणित साक्ष्य मिल जाएँगे।

अपने पत्र में राज्यवर्धन सिंह परमार ने लिखा है कि दरगाह के अंदर कई जगहों पर हिन्दू धार्मिक चिह्न मौजूद हैं। इनमें स्वस्तिक का चिह्न भी शामिल है। सेना प्रमुख परमार ने कहा कि एक हफ्ते में जाँच नहीं हुई तो वे केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद भी अगर समाधान नहीं निकला तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

चिश्ती के दरगाह को लेकर विवाद बढ़ने के बाद अजमेर के ADM (सिटी) भावना गर्ग ने गुरुवार (26 मई 2022) को चिश्ती के दरगाह परिसर का दौरा किया। कहा जा रहा है कि दरगाह पर हिंदुओं द्वारा दावा ठोकने के बाद इस ढाँचे के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।  

इस दरगाह से जुड़े लोगों का कहना है कि यह 900 साल पुराना है। यह वही समय वही 1192 ईस्वी के आसपास का है, जब मुहम्मद गोरी के साथ सम्राट पृथ्वीराज चौहान की दूसरा युद्ध हुआ था। दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की हार हो गई थी। इस बाद हिंदू मंदिरों का विध्वंस शुरू हो गया था।

कौन हैं मोइनुद्दीन चिश्ती

इतिहासकार एमए खान ने अपनी पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’ (Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery) में इस बारे में विस्तार से लिखा है कि मोइनुद्दीन चिश्ती, निज़ामुद्दीन औलिया, नसीरुद्दीन चिराग और शाह जलाल जैसे सूफी संत जब इस्लाम के मुख्य सिद्धांतों की बात करते थे, तो वे वास्तव में रूढ़िवादी और असहिष्णु विचार रखते थे, जो कि मुख्यधारा के जनमत के विपरीत था।

मोइनुद्दीन चिश्ती, मुइज़-दीन मुहम्मद ग़ोरी की सेना के साथ भारत आए और गोरी द्वारा अजमेर को जीतने से पहले वहाँ गोरी की तरफ से अजमेर के राजा पृथ्वीराज चौहान की जासूसी करने के लिए अजमेर में बस गए थे। यहाँ उन्होंने पुष्कर झील के पास अपने ठिकाने स्थापित किए।

खुद मोइनुद्दीन चिश्ती ने तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को पकड़ लिया था और उन्हें ‘इस्लाम की सेना’ को सौंप दिया। लेख में इस बात का प्रमाण है कि चिश्ती ने चेतावनी भी जारी की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था – “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज चौहान) को जिंदा पकड़ लिया है और उसे इस्लाम की सेना को सौंप दिया है।”

मोइनुद्दीन चिश्ती का एक शागिर्द था मलिक ख़ितब। उसने एक हिंदू राजा की बेटी का अपहरण कर लिया और उसे चिश्ती को निकाह के लिए ‘उपहार’ के रूप में प्रस्तुत किया। चिश्ती ने खुशी से ‘उपहार’ स्वीकार किया और उसे ‘बीबी उमिया’ नाम दिया।

ये भी कहा जाता है कि एक दिन अचानक से ‘गरीब नवाज’ चिश्ती को स्वप्न में पैगम्बर मोहम्मद का संदेश मिला कि उसे भारत में उनके दूत के रूप में भेजा जा रहा है। फिर वो भारत आ गया। चिश्ती ने अजमेर आकर आना सागर झील के किनारे डेरा डाला और उसे अपवित्र कर दिया था। उसने अल्लाह और पैगम्बर की मदद से झील के किनारे बसे मंदिरों को जमींदोज करने का ऐलान किया था। साथ ही वो मंदिरों और उसमें स्थित मूर्तियों की पूजा होते देख कर खफा भी था। 

रेडियो जॉकी की हत्या की कोशिश में जसपाल सिंह को जेल: कृषि कानूनों के समर्थन पर किया था हमला, सिर में लगे थे 150 टाँके

न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रेडियो जॉकी हरनेक सिंह पर हुए हमले के मामले में अदालत ने जसपाल सिंह (41) को पाँच साल 3 महीने कैद की सजा सुनाई है। ऑकलैंड हाई कोर्ट ने उसे गुरुवार (26 मई 2022) को हत्या की कोशिश का दोषी पाते हुए सजा सुनाई। अदालत ने हरनेक पर हमले को धार्मिक कट्टरपंथ करार दिया है।

हाई कोर्ट के जस्टिस जेफ्री वेनिंग ने कहा कि ये हमला प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया था। यह हरनेक सिंह का भाग्य था कि वे जिंदा बच गए। उनके शरीर पर चाकू के करीब 40 घाव थे। उन्होंने आगे कहा, “यह सौभाग्य की बात है कि मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में चोट नहीं है। लेकिन प्रभाव दीर्घकालिक और गंभीर हैं।” घटनास्थल से एक धारदार हथियार भी मिला था, जिस पर मिले डीएनए के सबूत प्रतिवादी से मेल खाते हैं।

जसपाल का बचाव कर रहे वकील रॉन मैंन्सफील्ड ने बताया कि जब उसके मुवक्किल को अपने किए पर पछतावा है। वह अब इस बात को स्वीकार करता है कि जो भी हुआ, वो सही नहीं था।

क्या है पूरा मामला

ये घटना दिसंबर 2020 की है। उस दौरान भारत में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ कथित किसानों का आंदोलन चल रहा था। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रेडियो जॉकी हरनेक सिंह ऑफिस खत्म कर लौट रहे थे। उसी दौरान उन पर हमला किया था। हरनेक सिंह के साथी ने बताया था कि हरनेक ने ‘दिल्ली में राजनीतिक रूप से प्रेरित किसान आंदोलन को वापस लेने की अपील की थी’, जिसके कारण उन पर हमला हुआ था।

इस घटना के तीन हफ्ते के बाद जनवरी 2021 में जब वो अस्पताल से छुट्टी लेकर घर लौटे तो पता चला कि उनके सिर में 150 टाँके लगे थे। उनका दाहिना कान तो लगभग कट गया था। हरनेक सिंह पर हमले के मामले में अदालत ने जनवरी 21, 2021 में 6 लोगों पर हत्या की कोशिश के आरोप तय किए थे। अब जसपाल को सजा सुनाई गई है।

आतंकी यासीन मलिक के लिए पत्थरबाजी करने वालों ने कान पकड़कर माँगी माफी, कुपवाड़ा में लश्कर के 3 आतंकी ढेर

टेरर फंडिंग केस में आतंकी यासीन मलिक को बुधवार (25 मई 2022) को सजा सुनाई गई थी। इसके बाद श्रीनगर में सुरक्षाबलों पर पथराव हुआ। पत्थरबाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। श्रीनगर पुलिस ने बताया है कि देश विरोधी नारेबाजी और यासीन मलिक के घर के बाहर पत्थरबाजी के आरोप में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में तीन आतंकियों को मार गिराया गया है।

पुलिस ने बताया है कि यासीन मलिक को दिल्ली में सजा सुनाए जाने के बाद उसके इलाके माइसुमा में हिंसक प्रदर्शन हुआ था। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद पत्थरबाजों की थाने में कान पकड़कर माफी माँगने की तस्वीर सामने आई है।

पुलिस ने कहा कि अभी कुछ और लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है। श्रीनगर पुलिस ने कहा कि अन्य आरोपितों की भी पहचान की जा रही है। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं और यूएपीए के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा हिंसा को भड़काने वाले प्रमुख आरोपितों के खिलाफ जन सुरक्षा कानून (Public Safety Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। वायरल हो रहे एक वीडियो में मुस्लिम महिलाओं को भी ‘हम चाहते आजादी’, ’नारा एक तकबीर अल्लाहु अकबर’ जैसे मजहबी नारेबाजी लगाते देखा गया था। 

बता दें कि यासीन मलिक को सजा के ऐलान के तुरंत बाद श्रीनगर में स्थित उसके घर के बाहर पत्थरबाजी हुई थी। लेकिन पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उपद्रवी तत्वों को खदेड़ दिया था। हिंसा भड़कने के बाद प्रशासन ने कुछ इलाकों में बुधवार (25 मई 2022) शाम को इंटरनेट बंद कर दिया था और सख्ती बढ़ा दी थी। 

इधर जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों ने बृहस्पतिवार (26 मई 2022) को घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी और लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के तीन आतंकवादी मार गिराए। पिछले 24 घंटे में सुरक्षाबलों ने 6 आतंकियों को ढेर किया है। पुलिस ने बताया, ‘‘कुपवाड़ा के जुमागुंड गाँव में आतंकवादियों द्वारा घुसपैठ की कोशिश किए जाने की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके आधार पर सेना और पुलिस ने कार्रवाई की जिसमें तीन आतंकी मारे गए।।’’ इससे पहले बारामूला जिले में मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के तीन पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए थे।

बता दें कि बुधवार को लश्कर के आतंकियों ने टीवी एक्ट्रेस अमरीना भट्ट की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अमरीना ने कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपने गाने अपलोड किए थे। फायरिंग में अमरीन के 10 साल के भतीजे के हाथ में गोली लगी थी। इससे पहले मंगलवार (24 मई 2022) को द रेजिस्टेंस फोर्स (TRF) के आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी सैफुल्ला कादरी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। आतंकी हमले में कादरी की बेटी भी गोली लगने से जख्मी हुई थी।

‘अमरनाथ यात्रा रोकें मुस्लिम’: यासीन मलिक को सजा के बाद खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने उकसाया, सुप्रीम कोर्ट को भी चेताया

आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने कश्मीर के अलगाववादी एवं कट्टरपंथी नेता यासीन मलिक की सजा को लेकर एक बार फिर भड़काऊ बयान दिया है। यासीन मलिक को आइकॉनिक नेता बताते हुए उसकी सजा के विरोध में मुस्लिमों से अमरनाथ यात्रा रोकने की अपील की है।

SFJ के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) के सामने आए वीडियो में वह मुस्लिम से कह रहा है कि यासीन मलिक भारत का संविधान और कानून नहीं मानता। वह आइकॉनिक अलगाववादी नेता है। उसकी विरोध के विरोध में मुस्लिमों को अमरनाथ यात्रा नहीं होने देनी चाहिए। इसमें उन्हें सिखों का समर्थन मिलेगा।

अंग्रेजी में किए गए अपने अपील में पन्नू ने कहा, “कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानियों और पंडितों के लिए संदेश! हमेशा की तरह एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने अल्पसंख्यक मुस्लिमों के प्रति पक्षपात किया है। उसने भारत अधिकृत कश्मीर के आइकॉनिक फ्रीडम फाइटर यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई है।”

सजायाफ्ता कश्मीरी आतंकी के समर्थन में धमकी देते देते हुए पन्नू ने कहा, “यासीन मलिक भारतीय संविधान और भारतीय कानून में विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट को कानून की व्याख्या करने का अधिकार है, लेकिन अलगाववाद के लिए फंडिंग आतंकवाद नहीं है। आपने आतंकवाद के बारे में सुनकर रखा है, लेकिन अभी तक आतंकवाद को देखना नहीं है।”

मुस्लिमों से अमरनाथ यात्रा को रोकने का आह्वान करते हुए खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने कहा, “कश्मीरी फ्रीडम फाइटर्स से मेरा आह्वान है कि वे यासीन मलिक के समर्थन में बाहर आएँ और अमरनाथ यात्रा को रोकें। याद रखें कि अमरनाथ यात्रा को रोकने से कश्मीर की स्वतंत्रता मूवमेंट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाईलाइट होगा। अब आपका (मुस्लिमों का) समय है। घाटी से बाहर निकलो और अमरनाथ यात्रा को रोको, ताकि दुनिया जान सके कि भारत मुस्लिमों, कश्मीरी अलगाववादियों और पंजाब में सिखों के खिलाफ अपराध कर रहा है।”

पन्नू ने कहा कि इस मामले से कश्मीरी पंडित दूर रहें। उसने कहा, “कश्मीरी पंडितों से मेरा आग्रह है कि वे इस मुद्दे से दूर रहें, क्योंकि यह मुद्दा कश्मीरी मुस्लिम और भारत के बीच का है। भारत अमरनाथ यात्रा का प्रयोग कश्मीरियों को आतंकी साबित करने के लिए करता है। हम सिख समुदाय, खालिस्तान समर्थक सिख आपके द्वारा अमरनाथ यात्रा रोके जाने का समर्थन करते हैं।”

कौन है खालिस्तानी आतंकी पन्नू

बता दें कि विदेश में बैठा पन्नू पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी और इस्लामिक आतंकवाद का मास्टरमाइंड ISI के इशारे पर भारत में खालिस्तान आंदोलन को फिर से भड़काने की कोशिश में लगा रहता है। इसके लिए वह मुस्लिम आतंकियों का भी खुलेआम समर्थन करता है और कश्मीर और पंजाब को भारत का हिस्सा मानने से इनकार करता है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू पंजाब के अमृतसर के खानकोट गाँव में पैदा हुआ था। उसके पिता महिंदर सिंह भारत विभाजन के समय पाकिस्तान से खानकोट आए थे। महिंदर सिंह मार्कफैड में नौकरी करते थे। बाद में पन्नू और उसका भाई मंगवंत सिंह विदेश में जाकर बस गए। इसके बाद पन्नू खालिस्तान मूवमेंट से जुड़ गया।

पन्नू के पिता की मौत बहुत पहले हो गई थी। कुछ वर्षों पहले उसकी माँ की भी मौत हो गई। भारत में उसका अब कोई परिवार नहीं है। मौत से पहले उसने अपनी माँ को बताया था कि वह कनाडा में बहुत बड़ा वकील है।

खालिस्तान मूवमेंट को लेकर भारत सरकार ने पन्नू को 1 जुलाई 2020 को संशोधित UAPA कानून के तहत आतंकवादी घोषित कर रखा है। उसके बाद NIA ने इस ऐक्ट की धारा 51A के तहत अमृतसर स्थित उसकी अचल संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया था।

इसके साथ ही उस पर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में राजद्रोह का केस दर्ज है। हाल ही में उसने पंजाब और हरियाणा के कलेक्टर ऑफिस पर खालिस्तान का झंडा फहराने की अपील की थी। इसके पहले लाल किले पर कथित किसानों के उपद्रव के दौरान भी उसका नाम आया था।

’37 साल पहले नहीं थी एक भी मस्जिद, आज हैं 2000+ अवैध मजारें’: स्वामी दर्शन भारती का दावा- ‘कॉन्ग्रेस ने उत्तराखंड में किया महापाप’

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 22 मई 2022 को एक बयान में पहाड़ों पर बनती अवैध मजारों पर चिंता जताई थी। उन्होंने मजारों को कुकुरमुत्तों की तरह बढ़ने और उन्हें अतिक्रमण बताते हुए उन पर कार्रवाई का ऐलान किया था। साथ ही उन्होंने राज्य में अवैध घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को चिन्हित करने के एक अभियान की जानकारी देते हुए उत्तराखंड में हो रहे जनसांख्यिकी बदलाव को चिंता का विषय बताया था।

कुछ ही दिन पहले देहरादून के पॉश इलाके में कैलाश अस्पताल के बगल में बनी मज़ार पर हिन्दू संगठनों ने हंगामा किया था। हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप था कि गली में अंडे बेचने वाले एक आरोपित ने धीरे-धीरे पूरा कुनबा मज़ार के पास जुटा लिया। मामले में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था और मूल रूप से UP के संभल निवासी मज़ार के कथित खादिम को वो जगह छोड़नी पड़ी थी। बाद में वहाँ जमा हुए अतिक्रमण को भी हटाया गया था। हालाँकि, पुलिस के मुताबिक मज़ार अभी भी अपनी ही जगह मौजूद है।

1985 से पहले एक भी नहीं थी मस्जिद: स्वामी दर्शन भारती

अवैध मजारों और नशे के खिलाफ काम कर रहे वयोवृद्ध संत स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया से पहले और अब के हालत पर बात करते हुए कुछ खास जानकारी दी। उन्होंने कहा, “1985 तक यहाँ एक भी मस्जिद नहीं थी। हमारे यहाँ मुस्लिमों को मनिहारी कहा जाता है जो औरतों के साज-श्रृंगार के सामान बेचने का काम करते हैं। अल्मोड़ा में एक स्थानीय स्वर्णकार ने पहली मस्जिद दया भाव से मनिहारियों को बनाने दी थी। उन्हें ये नहीं पता था कि इसके बाद यहाँ मस्जिदों की बाढ़ आ जाएगी। दया दिखाने वाले उस स्वर्णकार के परिजन आज भी देहरादून में रहते हैं जिनका यहाँ नाम बताना उचित नहीं है।”

यही दावा वॉइस फॉर इंडिया की फाउंडर और अमेरिकी एक्टिविस्ट रेनी लिनन व कुछ अन्य लोगों ने भी किया है।

13 वीं सदी में कत्यूर राजा ने बसाया था पहला मुस्लिम परिवार

स्वामी दर्शन भारती के मुताबिक, “बहुत पहले अल्मोड़ा में कत्यूर राजा का शासन हुआ करता था। तब उन्होंने अपने कुछ कामों को करवाने के लिए रामपुर से कुछ मुस्लिमों को बुलवाया था। उनके परिवारों को रहने के लिए कोने में कहीं जगह दे दी गई थी। धीरे-धीरे मुस्लिमों की आबादी बढ़ती चली गई और आज कई ऐसे इलाके बन गए हैं जहाँ जाने के बाद उत्तराखंड लगता ही नहीं। वो जगह देवबंद लगेगी। 1985 तक इन मुस्लिमों ने कभी मस्जिद की बात नहीं की। लेकिन अब कट्टरवाद है। आज उन्हें पहले मस्जिद चाहिए।”

महापाप हुआ एन डी तिवारी की सरकार में

स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया को बताया कि उत्तराखंड में मुस्लिमों को सबसे अधिक बढ़ावा कॉन्ग्रेस की एन डी तिवारी के नेतृत्व में बनी सरकार में मिला था। उन्होंने बताया, “एन डी तिवारी की सरकार में महापाप हुआ है। उनकी ही सरकार में नैनीताल के नैना देवी के मंदिर के ऊपर उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद बना दी गई। मस्जिद पूरी तरह से अतिक्रमण करके सड़क पर बनाई गई है। मस्जिद के आगे मंदिर भी छोटा लगने लगा है।”

उन्होंने आगे कहा, “हिन्दुओं के इस उद्गम स्थल का दुर्भाग्य रहा कि राज्य बनने के बाद पहली सरकार नारायण दत्त तिवारी की बन गई। हमें तो लगा था कि यह प्रदेश दुनिया को हिन्दू धर्म का संदेश देगा लेकिन अब तो यहाँ अस्तित्व पर ही संकट मंडरा रहा है। उत्तराखंड में बनी अधिकांश मस्जिदें नारायण दत्त तिवारी के समय की हैं। श्रीनगर, पौड़ी, दुगड्डा और कोटद्वार में भी मस्जिदों को बनवा दिया गया। बॉर्डर पर पड़ने वाले धारचूला में भी मस्जिद बना दी गई है। कॉन्ग्रेस की सरकार में तो मुस्लिम राज्यमंत्री भी बनाए गए।”

नैनीताल की इस मस्जिद पर कुछ लोगों द्वारा वीडियो भी बनाए गए हैं।

फरवरी 2022 में कॉन्ग्रेस नेता और N D तिवारी के सहयोगी रहे मातबर सिंह कंडारी का वीडियो भी रुद्रप्रयाग में मस्जिद के लिए जमीन देने के वादे के साथ वायरल हुआ था।

7 वर्षों से नहीं बनने दी गई कोई नई मस्जिद

स्वामी दर्शन भारती ने दावा किया कि पिछले 7 सालों से कोई नई मस्जिद उत्तराखंड में नहीं बनने दी गई है। उन्होंने बताया, “कोई बना कर तो दिखाए अब। जो मजारें बनाई गई हैं उन पर हम कार्रवाई करवा रहे हैं। देहरादून-मसूरी मार्ग पर 2 मज़ारें बन गईं हैं। उन्हें भी हटना होगा। हम जोशीमठ और कर्णप्रयाग में मस्जिदों का निर्माण रोक चुके हैं। अब उत्तराखंड का नागरिक धर्म के प्रति जागरूक हो रहा है। यहाँ के हिन्दुओं को पता ही नहीं था कि यहाँ हो क्या रहा है।”

सरकारी जमीनों पर बनी हैं लगभग 2000 अवैध मजारें

स्वामी दर्शन भारती के मुताबिक आज पूरे उत्तराखंड में लगभग 2000 अवैध मजारें हैं। ये मजारें तमाम सरकारी जमीनों को कब्जाए हुए हैं। मज़ारों को सिंचाई विभाग, वन विभाग, PWD आदि जमीनों पर बनाया गया है। देहरादून नगर निगम और जिला पंचायत की 60 से 70 प्रतिशत सरकारी जमीनों पर मुस्लिमों का कब्ज़ा है। देहरादून की आज़ाद नगर कॉलोनी की कई हजार हेक्टेयर जमीनों पर मुस्लिमों का अवैध कब्ज़ा है। आज देहरादून की राजीव नगर से गुजरती रिस्पना नदी और शहर के नालों की जमीनों पर कई मंजिला ऊँची मस्जिदें खड़ी हो गईं हैं। इसके अलावा कई मदरसे भी बन गए हैं। आज ये इलाका मुस्लिम बहुल लगता है। आज मुस्लिम जोशीमठ तक पहुँच गया है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले 4-5 सालों में देवभूमि की संस्कृति खत्म हो जाएगी।”

सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में बन रही अवैध मजारों के वीडियो शेयर किए हैं।

अल्मोड़ा के मनीला साल्ट में भी एक मजार का वीडियो शेयर किया गया है। ये मनिला देवी मंदिर के पास मौजूद है।

IPL से पंजाब के बाहर होने की सजा! शिखर धवन को पड़े थप्पड़, पुलिस-पब्लिक लेकर पहुँचे पिता: देखिए वायरल Video

शिखर धवन (Shikhar Dhawan) का एक मजाकिया वीडियो तेजी से सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति कुछ लोगों के साथ धवन के घर आते हैं और उनकी पिटाई करते हैं। इस बुजुर्ग के साथ पुलिस की वर्दी पहने भी एक शख्स नजर आता है।

दरअसल वीडियो में शिखर धवन को थप्पड़ मारने वाले उनके पिता ही हैं। शिखर ने इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया है। साथ ही लिखा है, “नॉक आउट में न पहुँचने पर मेरे पिता ने ही मुझे नॉक आउट कर दिया।”

वीडियो में आप देख सकते हैं कि धवन को उनके पिता पहले थप्पड़ मारते हैं। फिर उन्हें जमीन पर गिराकर लातों की बौछार कर देते हैं। धवन का ये हश्र उन्होंने IPL से पंजाब किंग्स इलेवन के बाहर होने के कारण किया। इस सीजन में शिखर आईपीएल में पंजाब की ओर से खेल रहे थे।

धवन ने जो वीडियो को शेयर किया है उसमें देखा जा सकता है कि किस तरह से उनके पिता उनके घर में घुसते ही आईपीएल के नॉक आउट में नहीं पहुँचने के कारण उन्हें लात और थप्पड़ों से पीटते हैं। वीडियो में धवन के पिता के साथ आए लोग उन्हें बचाने की कोशिश करते भी नजर आते हैं।

उल्लेखनीय है कि शिखर धवन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वो आए दिन अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मजाकिया वीडियो अपलोड करते रहते हैं। उनका ये रील वीडियो भी इसी का हिस्सा है। इस वीडियो को देखने के बाद कुछ फैंस शिखर के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं तो कुछ उनके मजे लेते दिखे हैं। पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने मजे लेते हुए कहा, “बापू तेरे से भी ऊपर के एक्टर निकले..क्या बात है।”

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

गौरतलब है कि इस बार के आईपीएल में शिखर धवन की टीम पंजाब किंग्स इलेवन सेमीफाइनल में जगह बनाने में कामयाब नहीं रही। खुद शिखर ने आईपीएल के 14 मैचों में 122 से अधिक एक स्ट्राइक रेट के साथ 460 रन बनाए। 88 रन इस आईपीएल में उनका सर्वाधिक स्कोर रहा है।