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माँ भद्रकाली मंदिर: देवी की बाईं आँख का क्या है ‘कोहिनूर’ कनेक्शन, जानिए वारंगल का यह हीरा कैसे बना ब्रिटिश साम्राज्य के पतन का कारण

ज्येष्ठ मास की एकादशी को भद्रकाली एकादशी भी कहा जाता है और इस वर्ष यह आज गुरुवार (26 मई, 2022) को मनाया जा रहा है। एक मान्यता के अनुसार, भद्रकाली देवी पार्वती की ही सबसे शक्तिशाली रूपों में से एक है। भद्रकाली की पूजा खासतौर से दक्षिण भारत में होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माँ काली के दक्षिणा काली, महाकाली, श्मशान काली, मातृ काली, श्यामा काली, भद्रकाली, अष्टकाली आदि अनेक रूप भी हैं। सभी की पूजा और उपासना पद्धतियाँ भी अलग हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि आज ही की तिथि पर माता भद्रकाली देवी सती की मृत्यु के पश्चात् भगवान शिव की जटाओं से प्रकट हुई थीं। वहीं महाभारत के युद्ध से पहले अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर माँ भद्रकाली की पूजा की थी, जिसके बाद उन्हें युद्ध में विजय प्राप्त हुई। महाभारत में इसका वर्णन भी मिलता है।

आइए आज भद्रकाली जयंती पर आपको दक्षिण भारत के वारंगल में स्थित माता भद्रकाली के एक ऐसे मंदिर ले चलते हैं जो न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि उससे एक दिलचस्प घटना भी जुड़ी है। जिसने भी कोहिनूर हीरे के बारे में थोड़ा-बहुत सुना है, वह इसके बारे में जानकर चकित होगा।

भद्रकाली मंदिर आंध्र प्रदेश के हनमकोंडा और वारंगल शहरों के बीच एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है। जहाँ मंदिर की अधिष्ठात्री देवी काली अपने उग्र रूप में हैं- बड़ी आँखें, गंभीर चेहरा, और आठ भुजाएँ जो विभिन्न हथियारों को धारण करती हैं। प्रतिमा पत्थर की बनी है और वह अपने वाहन सिंह पर विराजमान हैं।

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

मंदिर के इतिहास की बात करें तो 625 ईस्वी में चालुक्य वंश के राजा पुलकेशिन द्वितीय द्वारा आंध्र देशम के वेंगी क्षेत्र पर अपनी जीत के उपलक्ष्य में बनाया गया था। काकतीय राजाओं ने बाद में मंदिर को अपनाया और देवी भद्रकाली को अपना ‘कुल देवता’ माना। कहते हैं कि काकतीय राजाओं ने ही दुर्लभ कोहिनूर हीरे को देवी की बाईं आँख में जड़वा दिया। आकर्षक कोहिनूर हीरा का कोल्लूर खानों (गोलकोंडा खानों) से खनन किया गया था।

बाद में दिल्ली के मुस्लिम शासकों के हाथों काकतीय वंश के पतन के कारण मंदिर ने अपनी प्रमुखता खो दी। वहीं काकतीय राजाओं ने आक्रमण न करने के बदले में कोहिनूर हीरे की पेशकश करके अलाउद्दीन खिलजी के साथ एक समझौता किया। उसने भी अपने दास और निजी विश्वासपात्र मलिक कुफूर को व्यक्तिगत रूप से कोहिनूर लेने के लिए भेजा।

कहते हैं कि 1310 ईस्वी में, अलाउद्दीन खिलजी के अधीन दिल्ली सल्तनत ने काकतीयों के साम्राज्य को अपने शासन में मिला लिया और भद्रकाली मंदिर को नष्ट कर दिया। लेकिन बेशकीमती कोहिनूर को अपनी लूट के माल के रूप में दिल्ली ले गया। फिर आगे, कोहिनूर हीरा एक हाथ से दूसरे हाथ में होते हुए बाबर, हुमायूँ, शेर शाह सूरी से लेकर शाहजहाँ, औरंगजेब और पटियाला के महाराजा रणजीत सिंह तक भी पहुँचा।

कहते हैं कि जब महाराजा रणजीत सिंह अपनी मृत्यु के करीब थे, तब उन्होंने इच्छा जताई कि जगन्नाथ मंदिर में प्रतिष्ठित कोहिनूर हीरे का स्वामित्व देवता को दे दिया जाए। हालाँकि, ब्रिटिश अधिकारियों ने राजा की इच्छा को नज़रअंदाज़ कर दिया, और इसके बजाय, इसे अपनी रानी को उपहार के रूप में देने के लिए इंग्लैंड ले गए।

लेकिन, 1306 से कोहिनूर हीरे द्वारा तय की गई लम्बी ऐतिहासिक यात्रा को देखते हुए, यह भी कहा जाता है कि कोहिनूर जिस भी राजा के पास यह था, उसकी अकाल मृत्यु हो गई। अब ऐसा क्यों हुआ यह कोई नहीं जानता लेकिन यह लोकश्रुति है कि पत्थर धारण करने वाले पुरुषों के लिए दुर्भाग्य का कारण है। केवल भगवान, देवी या एक महिला ही इसे बिना किसी नुकसान के पहन सकती है।

ऐसे में वारंगल मंदिर में स्थापित देवी भद्रकाली के बाद, केवल ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ही बिना किसी गंभीर नुकसान के इसे धारण कर सकीं। हालाँकि, यहाँ भी यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हीरा अंग्रेजों के कब्जे में जाने के कुछ साल बाद ही ब्रिटिश साम्राज्य को लगातार अपने पतन का सामना करना पड़ा। इसलिए बाद में कहा जाता है कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए और हीरे के अभिशाप को अच्छी तरह से जानते हुए, महारानी कोहिनूर हीरे से जड़ा मुकुट पहनने से आज भी बचती हैं।

कई बार लूटा गया मंदिर

जहाँ तक ​​भद्रकाली मंदिर का सवाल है, पिछली शताब्दियों में बहुत लूटपाट और क्षति का सामना करने के बाद, मंदिर को 1950 के दशक में एक उत्साही भक्त और कुछ परोपकारी संपन्न व्यापारियों द्वारा बहाल किया गया था। बताते हैं कि 1950 में, गुजराती बिजनेस मैन श्री मगनलाल के साथ देवी उपासक श्री गणेश राव शास्त्री द्वारा भद्रकाली मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।

वारंगल के भद्रकाली मंदिर को दक्षिण भारत के स्वर्ण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। वहीं मंदिर की चालुक्य शैली की वास्तुकला भी प्रशंसनीय है। मंदिर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय एक सुनहरा रंग धारण करता है, इसलिए, इसे ‘दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर’ भी कहा जाता है।

मंदिर के बगल में भद्रकाली झील है जिसकी तीर्थयात्रियों द्वारा पूजा की जाती है, लेकिन इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए किसी को भी इसके पानी में डुबकी लगाने या कदम रखने की अनुमति नहीं है।

कैसे पहुँचे मंदिर

वारंगल के भद्रकाली मंदिर तक टीएसआरटीसी या वारंगल रेलवे स्टेशन या काजीपेट रेलवे स्टेशन से ऑटो-रिक्शा सेवाओं के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। वहीं वारंगल हवाई अड्डे के लिए भारत के विभिन्न शहरों से उड़ानें उपलब्ध हैं। वारंगल को देश के सुदूर स्थानों से जोड़ने वाली रेल सेवाएँ भी हैं।

मंदिरों की मुक्ति से पाठ्यक्रमों की शुद्धि तक: 2024 से पहले जो काम मोदी सरकार को करने चाहिए पूर्ण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी- भाजपा (BJP) ने केंद्र में 8 साल पूरे कर लिए हैं। इन वर्षों में मोदी सरकार ने देश की नीति-निर्धारण के तरीके को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। सामाजिक जागरूकता से लेकर आधारभूत संरचना के निर्माण और विदेश नीति तक कई बड़े बदलाव हुए हैं। इन वर्षों में ऐसे मामलों का भी निपटारा हुआ है, जिसे तुष्टिकरण के कारण किसी भी सरकार ने हाथ लगाने की कोशिश नहीं की।

विश्व का हर देश भारत को एक बड़ी और उभरती आर्थिक और सामरिक ताकत मान रहा है। आज हम चर्चा करेंगे मोदी सरकार द्वारा उठाए गए उन कदमों की, जिसने देश को बेहद प्रभावित किया। इसके साथ ही हम उन मुद्दों की भी चर्चा करेंगे, जिसे निपटाने की उम्मीद देश का हर नागरिक साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले करता है।

मोदी सरकार की उपलब्धियाँ

कॉन्ग्रेस एवं अन्य सरकारों की तुलना में मोदी सरकार में विदेश नीति बेहद आक्रामक और राष्ट्रहित को लेकर है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का कद कितना बड़ा हुआ है, इसका अंदाजा अमेरिका के हालिया रुख से पता चलता है। यूक्रेन में हमले के बाद अमेरिका ने भारत से उम्मीद की थी कि वह रुस के खिलाफ उसका साथ दे, लेकिन भारत ने अपनी स्वतंत्र नीति और हित का हवाला देकर किसी भी पक्ष के साथ जाने से इनकार कर दिया। रुस के खिलाफ UN में मतदान नहीं करने के बावजूद अमेरिका ने भारत पर किसी तरह की पाबंदी लगाने की हिम्मत नहीं की।

मोदी सरकार की विदेश नीति का परिणाम है कि हिंदुओं की विरासत का हिस्सा और उनकी अमूल्य धरोहर के रूप में रखे प्राचीन मूर्तियों को विदेशी सरकार वापस करने लगी। मोदी सरकार के शासन में कनाडा और अमेरिका सहित कई देशों से प्राचीन मूर्तियों को भारत लाया गया है।

मोदी सरकार के शासन में सैकड़ों सालों से चली आ रही अयोध्या के श्रीराम मंदिर-बाबरी ढाँचा मामले का निपटान हो गया। तीन तलाक जैसी सामाजिक कुरीति और कश्मीर के अलगाववादियों को शह देने वाले आर्टिकल 370, जिसे किसी भी सरकार ने वोटबैंक की राजनीति के कारण छूने की हिम्मत नहीं की, उसे भी मोदी सरकार ने एक झटके में खत्म कर दिया।

इसके अलावा, सरकार ने आतंकवाद पर जीरो टोलरेंस की नीति अपनाकर देश में आतंकवाद को मृतप्राय सा कर दिया है। भाजपा के शासन में कई खूंखार आतंकियों का एनकाउंटर हुआ और दर्जनों को गिरफ्तार किया गया। इसके कारण देश में कई बड़े हमलों की साजिश को नेस्तनाबूद कर दिया गया।

इसके अलावा, मोदी सरकार ने पड़ोसी खतरों को देखते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पद का सृजन किया और कई कमानों की स्थापना की। राफेल जैसे फाइटर जेटों का बेड़ा बनाया गया और कई स्वदेशी लड़ाकू विमानों एवं तकनीकों विकसित कर देश की सीमा को सुरक्षित रखना सुनिश्चित किया गया।

मलेरिया जैसी बीमारी को संभालने में जिस देश में चार दशक लग गए, वहाँ कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को अमेरिका और यूरोप जैसे कथित विकसित देशों की अपेक्षा बेहतर तरीके से प्रबंधित किया गया। सरकार ने तीव्र कार्रवाई करते हुए कोरोना का स्वदेशी टीका विकसित और देश की अधिकतम आबादी का टीकाकरण कर दिया। यह भी अपने आप में किसी विकाशील देश के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।

इन 8 सालों में केंद्र की भाजपा सरकार ने जनधन, उज्ज्वला, सुकन्या समृद्धि जैसी ना सिर्फ जन कल्याणकारी योजनाएँ शुरू कीं, बल्कि स्वच्छ भारत और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी सामाजिक जागरूकता वाले अभियानों को भी मूर्त रूप दिया। सरकार ने वन रैंक, वन पेंशन जैसी दशकों पुरानी माँग को भी सफलतापूर्वक पूरा किया।

इतना ही नहीं, विनिवेश (Disinvestment), विदेशी निवेश (FI), आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं के जरिए भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी गई। वहीं, इस दौरान देश भर में सड़कों का जाल बिछाया गया। नए IIT-IIM, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खोले गए। उड़ान अभियान के तहत देश भर में नए हवाई अड्डों का निर्माण लगातार जारी है।

उपरोक्त तमाम उपलब्धियों के बावजूद केंद्र की मोदी सरकार से लोगों को कुछ मुद्दों पर विशेष उम्मीद है। ये मुद्दे भाजपा की चुनावी घोषणा-पत्र की प्रत्यक्ष या परोक्ष हिस्सा भी रही हैं। साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा को निम्नलिखित मुद्दों पर भी कदम उठाने की जरूरत है। आइए, इन मुद्दों को जानने की कोशिश करते हैं:

पूजास्थल (विशेष प्रावधान)-1991 का खात्मा

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर एवं ज्ञानवापी विवादित परिसर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह विवादित ढाँचे को लेकर अदालती जंग जारी है। इन मामलों में मुस्लिम पक्ष तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव (PV Narsimha Rao) के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा लाए गए पूजास्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम-1991 को हवाला दे रहा है। हालाँकि, हिंदू पक्ष और अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून की दखलअंदाजी को नकारा है।

लेकिन, यह कानून देश में सैकड़ों मंदिरों को तोड़कर बनाए गए मस्जिदों एवं अन्य इस्लामिक ढाँचों पर हिंदू दावों को कमजोर करता है। इसके साथ ही यह कानून हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख समुदाय के धार्मिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि इस कानून को बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है ही नहीं। यह न्यायिक समीक्षा पर प्रतिबंध लगाकर संविधान के मूल तत्वों का उल्लंघन करता है।

हालाँकि, इस कानून को निरस्त करने के लिए एडवोकेट उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल किया है। यदि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक लंबित रहता है तो केंद्र की भाजपा सरकार को इस पर कदम उठाना होगा और उसे संसद में बिल के माध्यम से निरस्त करना होगा।

पाठ्यक्रमों से इस्लामी आक्रांताओं का महिमामंडन हटा तथ्यात्मक जानकारी

भारत में इतिहास के पाठ्यक्रमों में मुगलों और इस्लामी आक्रांताओं का महिमामंडन एक बड़ा मुद्दा है। इसको हटाकर सटीक तथ्यों को शामिल करने की माँग हमेशा से उठती रही है। टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी बताना, अकबर को महान बताना, हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप सिंह की अकबर से हार आदि ऐसे हजारों तथ्य हैं, जो आज भारत के स्कूली पाठ्यक्रमों का हिस्सा हैं। NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एड्यूकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) खुद कई बार RTI में यह स्वीकार कर चुका है कि पाठ्यपुस्तकों में बहुत से ऐतिहासिक तथ्यों और घटनाओं को वह बिना किसी सबूत के पढ़ाता है।

मोदी सरकार पर दबाव है कि वह इन पाठ्यक्रमों में बदलाव करें, ताकि इतिहास की सही जानकारी देशवासियों को पढ़ाई जा सके। हालाँकि, इसको लेकर सरकार ने प्रयास किया है, लेकिन वामपंथी और कथित सेक्युलर गैंग के दबाव में सरकार फूँक-फूँक कर कदम आगे बढ़ा रही है। प्रचंड बहुमत प्राप्त भाजपा सरकार को आगामी लोकसभा चुनावों से पहले इस पर तेजी से काम करना होगा। यह लोगों की ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भी माँग है।

नौकरशाही को जवाबदेह और पारदर्शी बनाना

साल 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार आने से पहले के कॉन्ग्रेस शासन को लकवाग्रस्त नीतियों के जाना जाता है। इस दौरान सरकार ने देशहित में कोई ऐसा बड़ा कदम नहीं उठाया, जिसकी विशेष रूप से देश में चर्चा हो। यही नौकरशाही भाजपा के सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार की सख्ती के बाद ऐक्टिव हो गई। इसलिए सरकार को नौकरशाही व्यवस्था को पारदर्शी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाना होगा। जवाबदेही की कमी के कारण नीतियों के क्रियान्वयन में दशकों लग जाते हैं।

इसके साथ ही, नौकरशाहों को सेवा में बहाली को लेकर भी कुछ सख्त नियम तय करने की जरूरत है। इसका उदाहरण कश्मीर कैडर के IAS शाह फैसल हैं। शाह फैसल ने सेवा के दौरान सरकार विरोधी और देश विरोधी बयानबाजी की। इसके बाद त्याग-पत्र देकर कश्मीर की अलगाववादी और कट्टरपंथी राजनीति का हिस्सा बन गए। जब धारा 370 खत्म हुआ और उनकी राजनीतिक पारी असफल हो गई तो वे वापस अपनी सेवा में आ गए। ऐसे मामलों में सरकार को एक स्पष्ट नीति बनाने की भी जरूरत है।

भ्रष्ट और सार्वजनिक आचरण के विरुद्ध कार्य करने वाले नौकरशाहों को लेकर भी सरकार की नीति बहुत स्पष्ट नहीं है। यही हाल, ईमानदार अधिकारियों को लेकर है। भ्रष्ट सरकारों में ऐसे ईमानदार अधिकारी प्रताड़ना का शिकार बन जाते हैं। देश में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए इस पर सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरूरत होगी।

CAA और NRC का को लागू करना

देश अवैध शरणार्थियों का स्वर्ग बना हुआ है। आए दिन ऐसे लोग पकड़े जा रहे हैं जो दशकों से देश में अवैध रूप से रह रहे हैं। इनके पास सारे दस्तावेज भी होते हैं और ये सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ भी लेते हैं। ऐसे लोगों की पहचान के लिए सरकार को कड़ाई के साथ पूरे देश में CAA और NRC लागू करने की जरूरत है।

देश में विपक्षी राजनीतिक दलों के लिए ऐसे अवैध तत्व एक मजबूत वोटबैंक का काम करते हैं। इसलिए विपक्षी दल भी CAA और NRC का खुलेआम विरोध करते हैं। वहीं, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे कट्टरपंथी देशों में फँसे हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख एवं ईसाई लोगों के लिए मददगार बना यह कानून अधर में लटक कर रह गया है। ऐसे में सरकार पर आम लोगों का दबाव रहेगा कि लोकसभा चुनाव से पहले इस कानून को सख्ती के साथ पूरे देश में लागू करे।

मंदिरों का सरकारी नियंत्रण से मुक्ति

देश में स्थित मंदिर हिंदुओं के धरोहर हैं। इन्हें सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की जरूरत है। सरकार भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर प्रबंधन के नाम पर लंबे तक इसे अपने कब्जे में नहीं रख सकती। इसको लेकर हिंदू संगठनों के साथ-साथ आम लोग भी सजग हो रहे हैं। ऐसे में सरकार को इन्हें सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाना होगा।

सरकार इसके लिए एक ऐसी प्रणाली बना सकती है, जिसमें मंदिरों के प्रबंधन में हिंदुओं के हर समुदाय की भागीदारी हो और उसके कार्य-प्रणाली पर समाज की नजर रहे। इसके लिए सरकार अपने नियंत्रण से मुक्त करने के साथ कानूनी प्रावधान कर सकती है। इससे हिंदू समाज स्कूल, अस्पताल आदि बनाने में अपने भगवान की संपत्ति का प्रयोग कर सकता है और गरीबी का दंश झेल रहे हिंदुओं के कुछ तबकों के लिए राहत का काम किया जा सकता है।

धर्मांतरण में संलिप्त संस्थानों पर कठोर निगाह

देश में धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा है। सामाजिक कार्यों के नाम पर विदेशी संस्थान कई माध्यमों से इस्लामी और क्रिश्चियन संस्थानों को पैसे भेजते हैं, जिनका इस्तेमाल हिंदुओं के धर्मांतरण के लिए किया जाता है। देश में धर्मांतरण के लिए वित्तीय सहायता मुहैया कराने वाले संस्थानों पर सरकार को कठोर लगाम लगाने की जरूरत होगी।

सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे संस्थान, जो संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं, उन्हें FCRA का लाइसेंस ना मिले। इसके साथ ही इससे जुड़े लोगों को वीसा आदि देने पर रोके जैसे कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, देश में ऐसे संस्थानों को किसी भी तरह से मदद करने वाले विदेशी व्यक्तियों एवं संस्थानों को भारत में घुसने पर पाबंदी लगाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। ऐसे कठोर कदमों से धर्मांतरण करने वाले संस्थानों के रीढ़ तोड़ी जा सकती है। लेकिन, हवाला भी एक महत्वपूर्ण कारक है। ऐसे में हवाला कारोबारियों के लिए भी कठोर दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए।

न्यायिक एवं पुलिस सुधार

इस देश में न्यायिक सुधार की बहुत आवश्यकता है। पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर निर्णय देने वाले जजों के खिलाफ कार्रवाई की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मैहर के मैहर के अतिरिक्त जिला जज को पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर निर्णय देने के लिए चेतावनी दी थी। ऐसे मामलों में सिर्फ चेतावनी कानून व्यवस्था का सबसे बड़ा लूपहोल है। संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति के लिए इस तरह पद के दुरुपयोग पर सर्विस से बर्खास्तगी और इसके साथ कठोर दंड का भी प्रावधान होना चाहिए।

इसके अलावा, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति में पारदर्शिता की घोर कमी है। इसको लेकर लगातार आलोचना होती रहती है। हालाँकि, मोदी सरकार ने ज्यूडिशियल बिल के जरिए इसमें सुधार करने की कोशिश की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायपालिका में हस्तक्षेप बताकर खारिज कर दिया था। लेकिन, मोदी सरकार को ऐसे सुधारों की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इसी उम्मीद के साथ देश की जनता ने उन्हें प्रचंड बहुमत भी दिया था।

ऐसी ही स्थिति पुलिस सुधार को लेकर भी है। पुलिस की भूमिका सहयोगी की होनी चाहिए, जो कि नहीं है। ब्रिटिश काल में बने पुलिस कानून और दंड संहिता इसमें बड़े अवरोधक का काम कर रहे हैं। देश में आम लोगों को जितना डर अपराधियों से लगता है, उससे कहीं अधिक डर पुलिस से लगता है। ऐसे में पुलिस की भूमिका में बदलाव की सख्त जरूरत है। इसके साथ ही साइबर अपराध, वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक अन्वेषण जैसे विषयों में भी इन्हें प्रशिक्षित करने की जरूरत है।

ये कुछ ऐसे ज्वलंत मुद्दे हैं, जिनमें से कुछ को लेकर देश की जनता को साल भाजपा से उम्मीदें थीं। सत्ता में आए हुए भाजपा को अब 8 साल हो चुके हैं। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि जन कल्याण के लिए इन मुद्दों पर भाजपा सरकार काम करेगी। साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार को इन मुद्दों पर काम करना होगा, तभी उसकी लोकप्रियता बरकरार रहेगी, अन्यथा बदलते घटनाक्रमों के साथ जनता का मूड और रूख दोनों इस राजनीति में बदलते देखा गया है।

भारतीय सेना की ‘अभिलाषा’: एविएशन कॉर्प्स में शामिल होने वाली पहली महिला, अमेरिका में नौकरी छोड़ देश को चुना

भारतीय सेना के एविएशन कॉर्प्स में अभिलाषा बराक (Abhilasha Barak) को कॉम्बैट एविएशन के रूप में शामिल किया गया है। इसी के साथ अभिलाषा इस प्रतिष्ठित विंग में शामिल होने वाली देश की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। इस अवसर पर सेना ने बुधवार (25 मई 2022) को उन्हें सम्मानित किया है। इस कॉर्प्स में शामिल होने के लिए 15 महिला अधिकारियों ने इच्छा जताई थी, लेकिन 2 अधिकारी ही टेस्ट में सफल हो पाई थीं।

सेना ने बताया कि पायलट एप्टीट्यूड बैटरी टेस्ट और मेडिकल के बाद चयन होने के बाद अभिलाषा ने सफलतापूर्वक अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। पिछले साल जून में पहली बार टेस्ट में सफल होने वाली दोनों महिला अधिकारियों को हेलिकॉप्टर पायलट ट्रेनिंग के लिए नासिक के कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल में भेजा गया था।  

फिलहाल, इससे पहले एविएशन विंग में महिलाओं को पायलट की जिम्मेदारी नहीं दी जाती थी। उन्हें एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और ग्राउंड ड्यूटी (DG) का काम करना होता था। हालाँकि, अब स्थिति बदल गई है। इससे पहले, साल 2018 में फ्लाइंग ऑफिसर अवनि चतुर्वेदी भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) की लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं।

हरियाणा की रहने वाली 26 वर्षीया अभिलाषा बराक ने अपनी स्कूली शिक्षा द लॉरेंस स्कूल, सनावर की पूरी की है। उन्होंने साल 2016 में दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की और उसके बाद अमेरिका के डेलॉइट में प्लेसमेंट हो गया।

साल 2018 में अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी, चेन्नई के माध्यम से वह भारतीय सेना में शामिल हुईं। यहाँ से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने आर्मी एविएशन कॉर्प को चुना। अभिलाषा का कहना है कि वह शुरू से सेना में शामिल होना चाहती थीं। उनके पिताजी सेना के इसी विंग से साल 2011 में सेवानिवृत हुए थे। इसके बाद 2013 में उनके भाई ने भारतीय सेना ज्वॉइन की थी।

जोधपुर में ईसाई धर्मान्तरण, भोले-भाले लोग बन रहे निशाना: अब चर्च के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे हिन्दू संगठन

ईसाई मिशनरियों के धर्मान्तरण किए जाने कि समस्या दिन प्रतिदिन बड़ी होती जा रही है। पंजाब की ही तरह से राजस्थान के जोधपुर में हाल ही में एक चर्च ने कुछ हिन्दू परिवारों का धर्मान्तरण कराया था। इसके विरोध में अब विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल ने 5 जून को उसी चर्च के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में वीएचपी और बजरंगदल का आरोप है कि चर्च के मिशनरी गरीब और भोले-भाले लोगों को बरगला कर लगातार उनका धर्मान्तरण करा रहे हैं। विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा है कि 5 जून को संबंधित चर्च के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की रणनीति तैयार की गई है। इसके बाद वीएचपी का एक प्रतिनिधि मंडल राजस्थान के सभी विधायकों से जाकर मिलेगा \और उनको एक पत्र देकर उनसे राजस्थान विधानसभा में धर्मान्तरण के मामले को उठाने और इसके विरोध में अन्य राज्यों की तर्ज पर राज्य सरकार भी एक कानून बनाए। ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

वीएचपी नेता ने दो दिन पहले चर्च के मिशनरियों द्वारा कराए गए धर्मान्तरण पर पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल खड़ा किया। साथ ही दावा किया कि ईसाई मिशनरियों को सरकार का संरक्षण मिला हुआ है। इसी तरह से वीएचपी के ही एक अन्य नेता ने आरोप लगाया कि ईशाई मिशनरी और मुस्लिम लगातार देश को तोड़ने की साजिशें रच रहे हैं। इसके साथ ही लोगों में धर्मान्तरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए वीएचपी घर-घर जाकर जनजागरण का कार्य करेगा।

संजय अग्रवाल के मुताबिक, वीएचपी ने कुड़ी हाउसिंग बोर्ड में 15 से अधिक परिवारों से बातचीत की है, जिससे ये पता चला है कि इलाके के करीब 150 से अधिक परिवार ईसाई मिशनरियों के संपर्क में हैं। प्रत्येक रविवार को सेवा बस्ती से लोगों को ईसाई मिशनरी बसों के जरिए ले जाते हैं और उनको लालच देकर लगातार धर्मान्तरण की कोशिशें की जा रही हैं।

आतंकियों ने कश्मीरी अभिनेत्री की गोली मार कर हत्या की, 10 साल का भतीजा भी घायल: यासीन मलिक को सज़ा मिलने के बाद वारदात

जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने कश्मीरी अभिनेत्री अमरीना भट्ट की गोली मार कर हत्या कर दी है। ये वारदात केंद्र शासित प्रदेश के चाडूरा इलाके में हुई, बडगाम जिले में स्थित है। जब उन पर हाला हुआ, तब वो अपने घर में ही थीं। उन्हें नजदीकी अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहाँ उन्हें डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित कर दिया गया। उनके 10 साल के भतीजे को भी बाँह में गोली लगी है। वो घायल है और उसका इलाज भी अस्पताल में चल रहा है।

एक दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के सौरा इलाके में मंगलवार (24 मई, 2022) को आतंकवादियों ने एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी थी। उनकी पहचान सैफुल्ला कादरी (अब्बा का नाम मोहम्मद सैयद कादरी) के रूप में हुई थी। इस हमले में पुलिसकर्मी की सात साल की बेटी भी घायल हो गई थी। अंचर सौरा के पास आतंकवादियों ने पुलिसकर्मी पर गोलीबारी की। गंभीर हालत में उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

ये सब तब हो रहा है, जब आतंकी यासीन मलिक को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है।उसके श्रीनगर स्थित घर के बाहर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भारी भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने मुस्लिमों पर जमकर पत्थरबाजी भी की। इस दौरान भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागे। यासीन मलिक का घर श्रीनगर के मायसुमा इलाके में स्थित है। ये इलाका लाल चौक के पास ही स्थित है। वायरल हो रहे वीडियो में मुस्लिम महिलाओं ने भी ‘हम चाहते आजादी’,’ नारा एक तकबीर अल्लाहु अकबर’ जैसे मजहबी नारेबाजी करती दिखीं

AAP के मंत्री ने रिश्वतखोरी के लिए रिश्तेदारों का बनाया था नेटवर्क, भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने और घोटालों को छुपाने का भी आरोप

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री (Punjab Health Minister) विजय सिंगला (Vijay Singla) को रिश्वतखोरी के आरोप में पद से हटाने और एंटी-करप्शन सेल द्वारा गिरफ्तार करने के बाद अब उनके OSD को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। OSD (विशेष कार्य अधिकारी) का नाम प्रदीप कुमार है।

जाँच अधिकारियों को यह पता चला है कि सिंगला विभिन्न तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इसके लिए उन्होंने अप्रैल 2022 में अपने नजदीकी रिश्तेदारों का गिरोह बनाया था। उन्हीं के माध्यम से सिंगला विभिन्न भ्रष्टाचारों को अंजाम देते थे। यही नहीं, सिंगला ने मंत्रालय के भ्रष्ट अधिकारियों को भी बचाने और घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की।

कैसे हुआ मामले का खुलासा?

दरअसल, यह कहानी मोहाली स्थित पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉरपोरेशन (PHSC) में डेप्युटेशन पर निगरानी इंजीनियर (SE) के पद कार्यरत राजिंदर सिंह से शुरू होती है। करीब एक महीना पहले राजिंदर सिंह अपने कार्यालय में थे, तभी एक दिन फोन आया और कहा गया कि मंत्री सिंगला उनसे मिलना चाहते हैं। फोन करने वाले व्यक्ति OSD प्रदीप कुमार ही थे।

राजिंदर सिंह जब पंजाब भवन के कमरा नंबर 203 में पहुँचे तो वहाँ मंत्री सिंगला और प्रदीप कुमार बैठे थे। सिंगला ने कहा कि प्रदीप कुमार जो कुछ कहेंगे उसे सुन लीजिए और इसे मंत्री का ही कहा गया मान लीजिए। यह कहकर सिंगला वहाँ से निकल गए।

काम की बात करते हुए प्रदीप कुमार ने कहा कि करीब 41 करोड़ रुपए का निर्माण कार्य आवंटित किया गया है। इसके लिए लगभग 17 करोड़ रुपए ठेकेदारों को मार्च में ही दे दिए गए हैं। इस तरह कुल 58 करोड़ रुपए के लिए प्रदीप कुमार ने 2 प्रतिशत के हिसाब से 16 लाख रुपए कमीशन के रूप में माँग की।

इसके बाद राजिंदर सिंह ने यह काम करने से मना कर दिया। राजिंदर सिंह के इनकार को देखते हुए प्रदीप कुमार ने 20 मई को कहा कि 16 लाख नहीं तो 10 लाख रुपए ही दे देना। इसके बाद उन्होंने ठेकेदारों के हर पेमेंट पर एक प्रतिशत कमीशन की माँग रखी। स्थिति को भाँपते हुए राजिंदर सिंह 5 लाख रुपए तक देने के बात कही।

इसके बाद 23 मई को प्रदीप कुमार ने राजिंदर सिंह को फिर फोन कर सचिवालय बुलाया। यहाँ पर सिंगला ने पाँच लाख रुपए प्रदीप कुमार को देने के लिए कहा। राजिंदर सिंह ने इसकी रिकॉर्डिंग कर ली। इस रिकॉर्डिंग को लेकर वह मुख्यमंत्री भवगवंत मान (CM Bhagwant Mann) को दे दी।

इसके बाद भगवंत मान ने विजय सिंगला को उनके पद से हटा दिया। सीएम मान ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री भ्रष्टाचार में संलिप्त थे और पुलिस-प्रशासन के पास इसके सबूत भी हैं। विजय सिंगला पर आरोप है कि वो राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए जा रहे टेंडरों में 1% कमीशन ले रहे थे।

भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने और घोटालों को छिपाने का आरोप

रिश्वतखोरी के इस खुलासे के बाद यह बात भी सामने आई है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद विजय सिंगला भ्रष्टाचार में आकंठ डूब गए। मंत्रालय में आते ही उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का काम शुरू कर दिया। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि स्वास्थ्य विभाग में मनपसंद पदस्थापना की माँग करने वाले अधिकारियों को अपना एक महीने का वेतन सिंगला के नेटवर्क को देने के लिए कहा गया था।

इतना ही नहीं, सिंगला ने कॉन्ग्रेस शासन में हुए घोटालों पर भी पर्दा डालने की कोशिश की। सिंगला के नेटवर्क और नशामुक्ति केंद्रों के मालिकों के बीच एक कथित डील भी सामने आई है। कहा जा रहा है कि यह सौदा सिंगला के एक रिश्तेदार के माध्यम से यह सौदा किया गया था। सिंगला का यह रिश्तेदार भी नशामुक्ति केंद्र चलाता है।

इसके अलावा, इसके अलावा, सिंगला के कार्यकाल में बनी बूप्रेनोर्फिन (ऑपिओइड विकारों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा) के अलावा कुछ दवाओं की आपूर्ति की भी जाँच की जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा आवंटित 198 करोड़ रुपए के आपातकालीन सेवा और स्वास्थ्य प्रणाली पैकेज के उपयोग की भी जाँच होने की संभावना है।

सिंगला ने अपने कार्यकाल के दौरान 60 से अधिक टेंडर निकाले थे। इसमें प्रस्तावित मोहल्ला क्लीनिक के लिए उपकरण खरीदने के टेंडर भी शामिल हैं। अब सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के जाँच के आदेश दिए हैं।

यासीन मलिक के घर के बाहर जमा हुई मुस्लिम भीड़, ‘अल्लाहु अकबर’ नारे के साथ सुरक्षा बलों पर हमला, पत्थरबाजी: श्रीनगर में बढ़ाई गई गश्ती

टेरर फंडिंग के मामले में उम्रकैद की सजा पाने के बाद आतंकवादी यासीन मलिक (Yasin Malik) के समर्थकों ने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में हिंसा और उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। उसके श्रीनगर स्थित घर के बाहर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भारी भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने मुस्लिमों पर जमकर पत्थरबाजी भी की। इस दौरान भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागे।

यासीन मलिक का घर श्रीनगर के मायसुमा इलाके में स्थित है। ये इलाका लाल चौक के पास ही स्थित है। वायरल हो रहे वीडियो में मुस्लिम महिलाओं ने भी ‘हम चाहते आजादी’,’ नारा एक तकबीर अल्लाहु अकबर’ जैसे मजहबी नारेबाजी की। इस बीच हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए प्रशासन ने एहतियातन इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया है। बड़ी संख्या में पुलिस के साथ ही सीआरपीएफ के भी जवानों को डिप्लॉय किया गया है।

इसके साथ ही सुरक्षाबलों ने किसी भी वारदात को रोकने के लिए पहले से अधिक सतर्कता के साथ घाटी में गश्ती शुरू कर दिया है। श्रीनगर के सभी थाना प्रभारियों को खुद हर इलाके में गश्त करने पर लगा दिया गया है। जगह-जगह नाकाबंदी कर संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद कर दिया गया है। यासीन मलिक को सजा के चलते बुधवार को श्रीनगर के अधिकतर भागों में बाजार बंद रहे। हालाँकि, प्रशासन ने लोगों की आवाजाही को बंद नहीं किया है। केवल चेकिंग बढ़ा दी गई है।

मलिक को सजा से तड़पा पाकिस्तान

‘जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’ के सरगना आतंकी यासीन मलिक को एनआईए कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ गई है। पाकिस्तान के कट्टरपंथी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन बताते हुए यूएन से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की थी। इसके अलावा अफरीदी ने मोदी सरकार को फासिस्ट बताया था।

वहीं पाकिस्तानी नागरिक और यासीन मलिक की बीवी ने शौहर मलिक को मासूम करार देते हुए पाकिस्तान की संसद में एक प्रस्ताव पारित करने की माँग की थी। उसने भारत पर उसे टॉर्चर करने का आरोप लगाया था।

आतंकी यासीन मलिक को इन 8 अपराधों में मिली सज़ा, पढ़िए उसकी करतूतों का काला चिट्ठा: अब जीवन भर रहेगा सलाखों के पीछे

जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के प्रमुख आतंकी यासीन मलिक को दिल्ली की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने आज (25 मई, 2022) 2017 टेरर फंडिंग मामले में उम्र कैद की सजा सुना दी है। हालाँकि, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने कोर्ट से यासीन मलिक को फाँसी की सजा दिए जाने की माँग की थी। बता दें कि यासीन लंबे समय से कश्मीर में रहते हुए भारत के खिलाफ साजिश रचता रहा है। कोर्ट ने 19 मई, 2022 को टेरर फंडिंग मामले में उसे दोषी ठहराया था।

आज बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट ने यासीन मलिक को टेरर फंडिंग मामले में सजा सुनाई है। यासीन मलिक को टेरर फंडिंग के दो मामलों में उम्रकैद की सजा मिली है। साथ ही 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं यासीन मलिक पर 4 एयरफोर्स जवानों की हत्या समेत कई गंभीर आरोप हैं जिंपपर हम आगे बात करेंगे। यासीन मलिक का नाम पूर्व में कश्मीर में हिंसा की तमाम साजिशों में शामिल रहा है। इसके अलावा उसे 1990 में कश्मीरी हिन्दुओं के पलायन के प्रमुख जिम्मेदार के रूप में जाना जाता है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष न्यायाधीश परवीन सिंह ने 19 मई, 2022 को ही यासीन मलिक को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में प्रदान किए गए भारत के खिलाफ साजिश और देशद्रोह के अपराधों के लिए दोषी ठहराया था।

यासीन मलिक को कुल 8 मामलों में अपराधों के लिए दी गई सजा

  • धारा 120 बी आईपीसी – 10 साल कैद और ₹10,000 जुर्माना;
  • धारा 121 ए आईपीसी – 10 साल कैद और ₹10,000 जुर्माना;
  • धारा 13 यूएपीए – 5 साल कारावास;
  • धारा 15 यूएपीए – 10 साल कारावास;
  • धारा 17 यूएपीए – आजीवन कारावास और ₹10 लाख जुर्माना;
  • धारा 18 यूएपीए – 10 साल कैद और ₹10,000 जुर्माना;
  • धारा 20 यूएपीए – 10 साल कैद और ₹10,000 जुर्माना;
  • धारा 38, 39 यूएपीए – 5 साल कैद और ₹5,000 जुर्माना।

यासीन मलिक के मामले में यह सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी।

मलिक ने नहीं किया सजा का विरोध

मलिक ने अदालत में कहा था कि वह खुद के खिलाफ लगाए आरोपों का विरोध नहीं करता। इन आरोपों में यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य), 17 (आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाना), 18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश) और धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) और 124-ए (राजद्रोह) शामिल हैं।

यासीन मलिक को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121, 121ए और यूएपीए की धारा 13 और 15 के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 17, 18, 20, 38 और 39 के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 17, 18, 20, 38 और 39 के तहत अपराधों का दोषी ठहराया गया था।

बता दें अदालत ने पूर्व में, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, शब्बीर शाह, मसरत आलम, मोहम्मद युसूफ शाह, आफताब अहमद शाह, अल्ताफ अहमद शाह, नईम खान, मोहम्मद अकबर खांडे, राजा मेहराजुद्दीन कलवल, बशीर अहमद भट, जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, अब्दुल राशिद शेख तथा नवल किशोर कपूर समेत कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे।

लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया गया, जिन्हें मामले में भगोड़ा अपराधी बताया गया है।

वहीं लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, कहा जा रहा है कि न्याय मित्र ने सजा सुनाए जाने से पहले जेल में यासीन मलिक से कानूनी सलाह लेने के लिए मुलाकात की थी ताकि आरोपित को अधिकतम सजा से अवगत कराया जा सकता है, जो उसे दिया जा सकता है। लेकिन कहा जा रहा है कि इसके बाद भी मलिक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया।

अदालत ने कहा था कि मलिक ने स्वेच्छा से और उचित कानूनी परामर्श और परिणामों की पूरी जानकारी के बाद, अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को स्वीकार किया था। वहीं कोर्ट ने अपने दोषसिद्धि आदेश में कहा था, “उनकी याचिका उनकी इच्छा के आधार पर ही स्वीकार की जाती है।”

बता दें कि इससे पहले, कोर्ट ने मार्च, 2022 में आरोप तय किए थे, प्रथम दृष्टया यह स्थापित किया गया था कि मलिक, शब्बीर शाह, राशिद इंजीनियर, अल्ताफ फंतोश, मसरत और हुर्रियत/संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व (जेआरएल) सीधे आतंकी फंड के हासिल करने वाले आरोपितों में शामिल थे।

यासीन मलिक इन मामलों में भी रहा है शामिल

  • 11 फरवरी 1984 को आतंकवादी मकबूल भट्ट को देश विरोधी गतिविधियों और आतंकी घटनाओं में शामिल होने के आरोप में फाँसी पर चढ़ा दिया गया। तब यासीन मलिक ने जगह-जगह मकबूल भट्ट के समर्थन में पोस्टर लगाए। इस मामले में यासीन को पुलिस ने गिरफ्तार किया और वह चार महीने तक जेल में रहा।
  • 1980 दशक से ही कश्मीर में हिंदुओं पर हमले होने लगे थे। इसमें यासीन मलिक और उसके साथियों का नाम आता था। बढ़ती हिंसात्मक घटनाओं को देखते हुए सात मार्च 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जम्मू कश्मीर की गुलाम मोहम्मद शेख सरकार को बर्खास्त कर दिया। राज्य में राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया। इसके बाद कॉन्ग्रेस ने फारूख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ हाथ मिला लिया।
  • 1987 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में कश्मीरी आतंकी गतिविधियों से जुड़े नेताओं ने मिलकर एक नया गठबंधन किया। इसमें जमात-ए-इस्लामी और इत्तेहादुल-उल-मुसलमीन जैसी पार्टियाँ साथ आईं और मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट (एमयूएफ) बनाया। यासीन मलिक ने इस गठबंधन के प्रत्याशी मोहम्मद युसुफ शाह के लिए प्रचार किया। बाद में इसी युसुफ शाह ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का गठन किया। आज युसुफ शाह को सैयद सलाहुद्दीन के नाम से जाना जाता है।
  • 1987 में कॉन्ग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस से मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट (एमयूएफ) चुनाव हार गई। इसके बाद पूरे कश्मीर में हिंसा बढ़ गईं। कहा जाता है कि यासीन मलिक ने पूरे कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया।
  • 1988 में यासीन मलिक जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ से जुड़ गया। वह एरिया कमांडर था। इसके जरिए यासीन मलिक ने कश्मीरी युवाओं को देश के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया।
  • 1988 में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ से जुड़ने के कुछ दिनों बाद ही वह पाकिस्तान चला गया। यहाँ ट्रेनिंग लेने के बाद 1989 में वह वापस भारत आया। इसके बाद उसने गैर मुसलमानों को मारना शुरू कर दिया।
  • 8 दिसंबर 1989 को देश के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण हो गया। इस अपहरण कांड का मास्टरमाइंड अशफाक वानी था। कहा जाता था कि ये अपहरण कांड भी यासीन मलिक के इशारे पर ही हुआ था। इसमें शामिल सारे आतंकवादी जेकेएलएफ से जुड़े थे। टाडा कोर्ट ने इस मामले में यासीन मलिक, अशफाक वानी, जावेद मीर, मोहम्मद सलीम, याकूब पंडित और अमानतुल्लाह खान को आरोपी बनाया है।
  • 1990 में सुरक्षाबल के जवानों ने अशफाक वानी को मार गिराया था। वहीं गृहमंत्री की बेटी के अपहरण के कुछ समय बाद 1990 में कश्मीर में वायुसेना के चार जवानों की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में भी यासीन मलिक ही आरोपित बनाया गया।

कब-कब गिरफ्तार हुआ यासीन मलिक

  • अगस्त 1990 में यासीन मलिक दूसरी बार गिरफ्तार हुआ था। तब उसकी गिरफ्तारी के बाद सुरक्षाबल के जवानों ने जेकेएलएफ के कई आतंकियों को मार गिराया था। लेकिन मई 1994 में उसे रिहा कर दिया गया था।
  • 1999 में यासीन मलिक को फिर से पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वह जेल से कई बार अंदर-बाहर होता रहा। इस दौरान वह देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से भी मिलता रहा। 2005 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाकात की थी। जिसकी तस्वीरें कई बार वायरल हो चुकी हैं।
  • 2017 में यासीन मलिक के खिलाफ टेरर फंडिंग मामले में एनआईए ने केस दर्ज किया था। जिसके बाद एक बार फिर 2019 में यासीन मलिक को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी केस में 19 मई 2022 को कोर्ट ने यासीन मलिक को टेरर फंडिंग के मामले में दोषी ठहराया था और आज उम्रकैद की सजा सुनाई है।

‘4 फीट का था, सहलाया तो 12 फीट का हो गया’: जयपुर की कंपनी संचालक ने शिवलिंग पर की भद्दी टिप्पणी, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

राजस्थान की राजधानी जयपुर की रहने वाली एक महिला द्वारा भगवान शिव पर भद्दी टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में ‘हिन्दू आईटी सेल’ की तरफ से शशांक शेखर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसे FIR में तब्दील कर दिया गया है। हालाँकि, अब तक राजस्थान पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। काशी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शिवलिंग मिलने के बाद विनीता शर्मा ने सोशल मीडिया पर ये टिप्पणी की थी।

शशांक शेखर सिंह ने ट्वीट कर के भी इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने FIR की प्रति साझा करते हुए लिखा, “भगवान शिव का अपमान कर के करोड़ों लोगों की धार्मिक भावना के साथ खिलवाड़ करने वाली विनीता शर्मा (ट्विटर हैंडल: @vinitasharmaavi) के खिलाफ FIR दर्ज करवाया। उम्मीद करता हूँ कि जयपुर पुलिस जल्द से जल्द मोहतरमा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी, जिससे भविष्य में कोई भी कुछ ऐसा करने से पहले सौ बार सोचे।”

सबसे पहले आपको बताते हैं कि विनीता शर्मा ने अपनी ट्वीट में क्या लिखा था। जिस ट्वीट को लेकर बवाल हो रहा है, उसमें विनीता शर्मा ने लिखा था, “कुएँ में नाउम्मीद पड़ा था तो 4 फ़ीट का था। मीडिया में सच्चे हिन्दू ने सहलाया तो 12 फ़ीट का हो गया। प्यार मिलते ही जिस तेज़ी से लंबाई बढ़ी, अब तो मान लो कि लिंग है।” बता दें कि ये टिप्पणी तब की गई थी, जब मीडिया में ज्ञानवापी ढाँचे में शिवलिंग मिलने से हिन्दू उत्साहित थे।

विनीता शर्मा का ट्वीट, जिसे लेकर ‘हिन्दू आईटी सेल’ ने दर्ज कराया मामला

अभी भी अदालत में इस पर सुनवाई चल रही है। हिन्दुओं की माँग है कि अब जब बाबा विश्वनाथ का शिवलिंग मिल गया है तो ज्ञानवापी में मुस्लिमों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर के इसे हिन्दुओं को सौंप दिया जाना चाहिए, ताकि पूजा-पाठ किया जा सके। इस दौरान कई कट्टर मुस्लिमों और वामपंथियों द्वारा भगवान शिव का अपमान करने की बात सोशल मीडिया पर सामने आई। कई जगह गिरफ्तरियाँ भी हुईं। हालाँकि, राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार है।

विनीता शर्मा जयपुर में ‘Super SEO Team’ नाम की कंपनी चलाती हैं। इस कंपनी का पता गूगल पर ‘115, जनपथ, नक्षत्र विला रेल नगर, निर्माण नगर, श्याम नगर, जयपुर, राजस्थान, पिन कोड – 302019’ दिखाया जा रहा है। ये एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी है, जो इंटरनेट पर प्रचार-प्रसार का काम करती है। साथ ही ये वेब डिजाइनिंग का काम भी करती है। एक ट्वीट में विनीता शर्मा ने बताया था कि ये उनकी ही कंपनी है।

साइबर क्राइम की FIR में दर्ज शिकायत में लिखा गया है, “ये एक पूर्णरूपेण ईशनिंदा वाला कार्य है और हिन्दू भावनाओं को आहत करने वाला है। ये हिन्दू विचारों और मूल्यों के विरुद्ध भी है। साथ ही ये हिन्दू देवी-देवताओं के प्रति घोर अपमान और और अनादर भी है। इस राष्ट्र को न तो ऐसे लोगों और न ही घृणा फैलाने वाले ऐसे अकाउंट्स की जरूरत है। हम इस व्यक्ति के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं।”

शशांक शेखर सिंह ने अपनी शिकायत में खुद को ‘हिन्दू आईटी सेल’ का वॉलंटियर बताते हुए लिखा है कि विनीता शर्मा ने शिवलिंग की तुलना मानव गुप्तांग से की है, जिससे हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि ये न सिर्फ हिन्दुओं, बल्कि न्यायपालिका की भी अवहेलना है क्योंकि अदालत के आदेश से ही ज्ञानवापी में सर्वे और वीडियोग्राफ़ी हुई। चूँकि इस टिप्पणी से दंगे भड़के की आशंका है, इसीलिए उन्होंने कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की।

जब हमने इस मामले में विनीता शर्मा की प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो उन्होंने ऑपइंडिया से कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था की शिव जी के बारे में लेकर इसे समझा जाएगा। मीडिया के विभिन्न चैनलों में खुदाई में मिले स्ट्रक्चर की अलग-अलग साइज बताई जा रही थी और वो शायद उसको लिंग प्रमाणित करने की कोशिश कर रहे थे। जबकि सर्वे में क्या मिला, क्या नहीं मिला – ये सब सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के पास जमा हो गया।

विनीता शर्मा मामले में दर्ज कराई गई शिकायत

विनीता शर्मा ने अपने कमेंट्स को जायज ठहराते हुए कहा, “किसी को कुछ बताया ही नहीं गया तो ये चैनल वाले क्यों उछल रहे थे? मेरा कमेंट कहीं से भी शिवलिंग पर नहीं, मीडिया पर किया गया तंज मात्र था।ऐसे तो लोग किसी भी बात से भावना आहत कर सकते है। मैंने जो सोचा तक नहीं, लिखा तक नहीं – वो सब उन्होंने लिखा और सोचा जिनको मेरे ट्वीट से आपत्ति थी। भारतीयों में सोच और समझ नकारात्मक है। हिंदुत्व और हिन्दू धर्म को वो ही लोग बदनाम कर रहे है जो स्वयंभू कट्टर हिन्दू है। फिर क्या फर्क रह जाएगा मुस्लिम और हिन्दुओं में? लोगों को पहले शिव पुराण पढ़ना चाहिए।”

‘मेरे पति को मार कर 32 साल तक घूमता रहा’: यासीन मलिक पर बोलीं स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की पत्नी – फाँसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं

जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार करने वाले आतंकवादी यासीन मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। टेरर फंडिंग के मामले में उसे मलिक को उम्रकैद के साथ ही उस पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इस बीच वीर बलिदानी स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना ने मलिक को फाँसी देने की माँग की है। उन्होंने कहा कि इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

उन्होंने कहा कि वो मेरे पति को मारकर 32 साल 4 महीने तक घूमता रहा, और क्या चाहेगा? इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वो पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह को अपना प्रेरणास्त्रोत मानती थीं, लेकिन जब मनमोहन सिंह यासीन मलिक से मिले और दोनों ने ठहाके लगाए तो उन्हें इसका दुःख हुआ। निर्मल खन्ना के मुताबिक, ये तो टेरर फंडिंग के मामले में सजा सुनाई गई है। हमारा जो केस है वो हत्या का है और उसमें फाँसी से कम कुछ भी स्वीकार नहीं है।

वायुसेना अधिकारी की पत्नी ने कहा, “उसने तो उनके पति को केवल 28 गोलियाँ मारी थी, लेकिन हुकूमतों ने तो 32 साल 4 महीने तक मारा। देशद्रोही कोई भी हो, उसे वही सजा देनी चाहिए जो देशद्रोह के मामले में देनी चाहिए। लेकिन, मेरे केस में मैं तो यही कहूँगी ‘खून का बदला खून’ होना चाहिए।”

इससे पहले मलिक को दोषी करार दिए जाने के बाद उन्होंने कहा था कि रवि खन्ना का खून उसका पीछा कर रहा है। वो बचेगा नहीं।

क्या था पूरा मामला

गौरतलब है कि वर्ष 1990 में जम्मू-कश्मीर में भारतीय वायुसेना के 4 निहत्थे जवानों की हत्या कर दी गई थी। इनमें स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना भी शामिल थे। जिन आतंकियों ने जवानों की हत्या की थी, वे यासीन मलिक द्वारा संचालित आतंकी संगठन के सदस्य थे। यह घटना जनवरी 25 1990 को हुई थी।

स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना अपने पति के हत्यारों को सज़ा दिलाने के लिए लड़ रही हैं। भारतीय वायुसेना के इन जवानों की हत्या तब की गई थी, जब उनके पास कोई भी हथियार नहीं था। वे एयरपोर्ट जाने के लिए बस का इन्तजार कर रहे थे।