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राम मंदिर निर्माण ने पकड़ी रफ्तार: चबूतरे में लगेंगे 17000 ग्रेनाइट पत्थर, 25000 श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन, जानें और क्या-क्या होगा खास

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण का कार्य पूरा होने का इंतजार हर कोई कर रहा है, लेकिन ये काम 2 साल में कहाँ तक पहुँचा है इसकी जानकारी सामान्य जन में कम है। आइए आज आपको शुरू से बताते हैं कि 2020 से आज की तारीख तक राम मंदिर में कब कितना काम हुआ।

5 अगस्त 2020 को पीएम मोदी द्वारा श्रीराम जन्मभूमि पूजन के बाद मंदिर निर्माण का कार्य लार्सेन एंड ट्रुबो और टाटा कंपनी के इंजीनियर, ट्रस्ट की ओर से काम कर रहे स्वतंत्र इंजीनियरों के साथ मिल के कर रहे हैं। सितंबर-अक्टूबर 2020 में l&t ने मंदिर का एक डिजाइन दिया था। लेकिन कुछ कमियों के कारण उसे ड्रॉप कर दिया गया। नवंबर 2020 में आईआईटी दिल्ली के (सेवानिवृत्त) निदेशक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया जिसमें कई प्रोफेसर और नामी कंपनियों के इंजीनियर शामिल हुए। इसके बाद हैदराबाद के नेशनल जियो रिसर्च संस्थान के अनुरोध पर नवंबर-दिसंबर 2020 तक यहाँ जीपीआर सर्वे चला। 

3 महीने तक (जनवरी 2021- मार्च 2021) निर्धारित मंदिर स्थल की 6 एकड़ भूमि तथा उसकी आसपास की जगह से 1.85 लाख क्यूबिक मीटर मलबा और पुरानी मिट्टी हटाई गई। ये जगह विशाल खुली खदान जैसा दिखने लगी थी। गर्भगृह में भी 14 मीटर गहरा गड्ढा और आसपास 12 मीटर गहराई हो गई थी। फिर लगभग 6 माह (अप्रैल 2021-सितंबर 2021) तक इसकी भराई काम हुआ और करीब तीन महीनों तक मंदिर को 1000 वर्ष की मजबूती प्रदान करन के लिए मानव निर्मित चट्टानें लगाई गईं। 

अब इस साल की बात करें तो 24 जनवरी से मंदिर के चबूतरे को ऊँचा करने का काम प्रगति पर है। कर्नाटक और तेलंगाना से आए ग्रेनाइट पत्थर ब्लॉक्स को चबूतरों पर लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया है। एक ब्लॉक लंबाई में 5 फीट, चौड़ाई में 2.5 फीट और ऊँचाई में 3 फीट है। चबूतरा निर्माण में 17000 ग्रेनाइट ब्लॉक इस्तेमाल किए जाएँगे।

उम्मीद है कि ये कार्य सितंबर 2022 तक पूरा हो जाएगा। इसके अलावा गर्भगृह में व उसके आसपास नक्काशीदार पत्थर लगेंगे। मंदिर के निर्माण में राजस्थान के भरतपुर के इलाके बांसी-पहाड़पुर से आए गुलाबी पत्थर प्रयोग में लाए जा रहे हैं। गर्भगृह के भीतर राजस्थान के मकराना पहाड़ियों से सफेद मार्बेल मँगा कर लगाए जाएँगे। इनमें से कुछ पर नक्काशी हो गई है, कुछ में बाकी है। मंदिर के पकरोटा में 8 से 9 लाख क्यूबिक फीट पत्थर लगेंगे जबकि चबूतरे के लिए 6.37 लाख क्यूबिक फीट और मंदिर के लिए 4.70 लाख क्यूबिट फीट इस्तेमाल होंगे। इसी तरह 13 300 क्यूबिक फीट मकराना गर्भगृह निर्माण में प्रयोग में आएँगे और 95,300 स्क्वॉयर फीट का प्रयोग फर्श आदि के लिए होगा।

मंदिर निर्माण के दौरान ये भी ध्यान रखा जा रहा है कि आसपास इलाके को संभावित सरयू बाढ़ से बचाया जा सके। इस काम के लिए पश्चिम, दक्षिण और उत्तर में मजबूत दीवार बनाने का काम चल रहा है। पहले चरण में दर्शनार्थी प्रबंधन ने कम से कम 25000 श्रद्धालुओं के दर्शन का प्रबंध किया है। खास बात ये हैं कि राम मंदिर के ईर्द-गिर्द भगवान वाल्मिकी, ऋषि केवट, माता शबरी, जटायु, माता सीता और शेषावतार लक्ष्मण जी का भी मंदिर योजना में है। हर माह निर्माण समिति इंजीनियर और आर्किटेक्ट्स के साथ मिल कर बैठक करते हैं और छोटी-छोटी बातों पर चर्चा होती है।

जानकारी के मुताबिक, 1 जून से मंदिर की पहली मंजिल का काम शुरू होगा। पंचागानुसार इस दिन दुर्लभ व सर्वसिद्धि योग मिल रहे हैं। 2023 तक पहली मंजिल का काम पूरा होगा जिसके बाद रामलला यहाँ लाए जाएँगे। वहीं मंदिर का पूरा कार्य 2025 तक पूर्ण होने की संभावना है।

CM सरमा के मदरसा वाले बयान से भड़कीं महबूबा मुफ़्ती को आई संविधान की याद, कहा – मुख्यमंत्रियों में मुस्लिमों को ज्यादा परेशान करने की होड़

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने सोमवार (23 मई, 2022) को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) पर निशाना साधा। महबूबा ने असम के सीएम पर मदरसा के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह सांप्रदायिक राजनीति में अपने साथियों से दो कदम आगे रहने की कोशिश कर रहे हैं। मुफ्ती ने यह टिप्पणी हिमंत बिस्वा सरमा के मदरसा पर दिए गए बयान के बाद की है।

दरअसल, हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार (22 मई, 2022) को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अब देश के सभी स्कूलों में एक समान और सामान्य शिक्षा पर जोर देना चाहिए। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर मदरसों को खत्म करने की वकालत की थी। असम (Assam) के मुख्यमंत्री ने साथ ही यह भी कहा था कि मदरसा (Madrasa) शब्द का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म हो जाना चाहिए। अब बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और वैज्ञानिक बनने के लिए पढ़ाई करनी चाहिए।

इस बात पर आगबबूला जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम ने कहा, “प्रतिस्पर्धा चल रही है, क्या वे गुजरात मॉडल, यूपी मॉडल लागू करना चाहते हैं या असम के मुख्यमंत्री ध्रुवीकरण की राजनीति में दो कदम आगे रहना चाहते हैं। वे इस देश की जड़ों को नेस्तनाबूत करने की बात कर रहे हैं। जिस संविधान पर यह देश टिका है, अब इसे अलग किया जा रहा है।”

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने आगे कहा कि मुस्लिमों को परेशान करने के लिए भाजपा के मुख्यमंत्रियों के बीच होड़ लगी हुई है कि कौन इन्हें ज्यादा परेशान कर सकता है, इसलिए मंदिर और मस्जिद का मुद्दा उठाया जा रहा है और देश को गुजरात मॉडल, यूपी मॉडल, असम मॉडल और एमपी मॉडल में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज भाजपा के नेता और मुख्यमंत्री अंग्रेजों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। जिस तरह ब्रिटिश राज में हिंदुओं को मुस्लिमों के खिलाफ खड़ा किया गया था। उसी तरह आज भी लोगों को धर्म के नाम पर लड़ाया जा रहा है। मुस्लिमों को लगातार भड़काया जा रहा है ताकि ये लोग गुजरात या यूपी में उस तरह के एक और कांड को फिर से दोहरा सकें। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सब हालातों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खामोश हैं। वह देश के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उनकी चुप्पी पर उनकी पार्टी भाजपा समझती है कि वह जो कर रहे हैं, सब ठीक कर रहे हैं।

बता दें कि सीएम सरमा ने मदरसों को मानवता का दुश्मन बताते हुए रविवार (22 मई, 2022) को कहा था, “ये मदरसा शब्द ही विलुप्त हो जाना चाहिए। जब तक मदरसा दिमाग में घूमेगा तब तक बच्चा कभी डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाएगा। यदि ये बातें बच्चों को सिखाई जाएँ तो बच्चे खुद ही मदरसे में न जाएँ। मदरसे में बच्चों का दाखिला ही मानवाधिकार के उललंघन के लिए करवाया जाता है। आप खूब कुरान पढ़ाइए, लेकिन सबसे ज्यादा गणित और विज्ञान पढ़ाएँ। बच्चों को आप घर में मजहबी बातें पढ़ाएँ।”

‘पुण्येश्वर और नारायणेश्वर मंदिरों पर बन गए दरगाह’: मुक्ति के लिए MNS ने शुरू किया आंदोलन, खिलजी ने किया था ध्वस्त

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी विवादित ढाँचा विवाद अभी थमा भी नहीं था कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने दावा किया है कि महाराष्ट्र के पुणे शहर में पुण्येश्वर मंदिर की जमीन पर दो दरगाहें बनाई गई हैं। मनसे ने लोगों से अपील की है कि वो राज ठाकरे की पार्टी को समर्थन दे। साथ ही दावा किया कि खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी के एक कमांडर ने पुणे में पुण्येश्वर और नारायणेश्वर मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था और बाद में जमीन पर दरगाहों का निर्माण किया गया था।

मनसे महासचिव अजय शिंदे ने रविवार (22 मई, 2022) को कहा कि उन्होंने ‘पुण्येश्वर मुक्ति’ (मंदिर की भूमि मुक्त) अभियान शुरू किया है और लोगों से मंदिर की भूमि को बहाल करने में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी की लड़ाई का समर्थन करने की अपील की। ज्ञानवापी मस्जिद के हालिया सर्वेक्षण का हवाला देते हुए शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व पर राज ठाकरे के रुख के मद्देनजर सरकार जागी है। उन्होंने कहा, “ज्ञानवापी की तरह हम भी पुणे के पुण्येश्वर मंदिर के लिए लड़ रहे हैं।”

इससे पहले रविवार को पुणे में जनसभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर करने की माँग की थी। राज ठाकरे ने कहा था कि पीएम मोदी से विनती है वे युनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लेकर आएँ। औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर करें, ताकि शिवसेना की सियासत खत्म हो। 

राज ठाकरे ने कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा पढ़ी तो उन पर कार्रवाई हुई। मातोश्री के आगे राणा दम्पति ने हनुमान चालीसा पढ़ी तो उन्हें गिरफ्तार करवा दिया गया। मातोश्री मस्जिद है क्या? क्या शिवसैनिकों ने इसी दिन के लिए वोट दिया था ?”

राज ने कहा कि शिवसेना ने AIMIM को संरक्षण दिया। शिवसेना को यह समझ नहीं आया कि उन्होंने ये गलत किया है। ये लोग यहाँ आकर औरंगजेब की कब्र पर माथा टेकते हैं। इन्हें शर्म आनी चाहिए।

पिछले दिनों AIMIM के प्रमुख हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने MNS प्रमुख राज ठाकरे को कुत्ते की उपमा दे डाली। अकबरुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आयोजित एक जनसभा एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कुत्तों का काम भौंकना है उन्‍हें भौंकने दो, शेर का काम है शांत रहना है।

राज ठाकरे पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए अकबरुद्दीन ने कहा, “मैं यहाँ किसी को जवाब देने या बुरा कहने नहीं आया हूँ। तुम्हारी औकात नहीं है कि मैं तुम्हें जवाब दूँ।” इस दौरान उन्होंने ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ के भड़काऊ नारे जमकर लगाए और सभा में उपस्थित लोगों से भी लगवाए।

PFI की रैली में हिन्दू विरोधी नारे, नाबालिग ने दी हत्या की धमकी: बोला संगठन – ये हिन्दुओं नहीं, ‘हिन्दू आतंकवादियों’ के खिलाफ

सोशल मीडिया पर केरल का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक लड़के को रैली में हिंदुओं और ईसाइयों के खिलाफ नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वीडियो शनिवार (21 मई, 2022) को केरल के अलाप्पुझा में मुस्लिम समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) द्वारा आयोजित एक रैली का है।

वीडियो में लड़के को एक आदमी ने अपने कंधों पर उठाया हुआ है। इस दौरान वह लड़का कहता है, “चावल तैयार रखो। यम (मृत्यु के देवता) आपके घर आएँगे। यदि आप सम्मानपूर्वक रहते हैं, तो आप हमारे स्थान पर रह सकते हैं। अगर नहीं, तो हम नहीं जानते कि क्या होगा।”

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने यह वीडियो सामने आने के बाद कहा, “इस तरह की गतिविधियों में बच्चों को शामिल करना किशोर न्याय अधिनियम के खिलाफ है। हम प्राथमिकी दर्ज करने के लिए संबंधित जिले को लिख रहे हैं। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह एक संज्ञेय अपराध है।”

पीएफआई का बयान

वीडियो सामने आने के बाद, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के प्रवक्ता रउफ पट्टांबी (PFI spokesperson Rauf Pattambi) ने कहा कि नारे संगठन के सम्मेलन में नहीं बल्कि एक रैली के दौरान लगाए गए थे, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि नारे हिंदुओं या ईसाइयों के खिलाफ नहीं थे, बल्कि हिंदुत्व के आतंकवादियों और फासीवादियों के खिलाफ थे।

रऊफ पट्टांबी ने आगे कहा, “कई लोगों ने हिंदुत्व आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए। इस लड़के ने भी नारे लगाए। हमें नारों की कुछ पंक्तियों पर खेद है, जिस पर हम गौर करेंगे। उनके नारे हिंदुओं या ईसाइयों के खिलाफ नहीं थे, बल्कि नरसंहार की योजना बना रहे हिंदुत्व आतंकवादियों के खिलाफ थे।”

उन्होंने कहा, “किसी भी मीडिया ने हमारे कार्यक्रम को कवर नहीं किया, जो देश की रक्षा को लेकर आयोजित किया गया था।” वहीं, अलाप्पुझा की पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

पीएफआई का हिंसा फैलाने का इतिहास

पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा 2020 में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। दिसंबर 2019 में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

दो बच्चों के अब्बा आसिफ खान पठान ने निकाह के 7 साल बाद पत्नी को दिया तीन तलाक, गुजरात पुलिस ने दर्ज की FIR: मारपीट और गाली-गलौज भी

गुजरात पुलिस ने अपनी 27 वर्षीय पत्नी को कथित तौर पर तीन तलाक देने के मामले में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के तहत रविवार (22 मई, 2022) को एक व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज किया है। घटना अहमदाबाद के वेजलपुर की है। वहीं आरोपित का नाम आसिफ खान पठान बताया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, फतेहवाड़ी निवासी आरोपित आसिफ खान पठान पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (हमला), 498 ए (पत्नी के खिलाफ क्रूरता) और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत वेजलपुर पुलिस स्टेशन पर मामला दर्ज किया गया था।

बता दें कि महिला द्वारा वेजलपुर थाने में लिखित शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने अपनी शिकायत में कहा कि 20 मई की शाम को उसे अवैध रूप से तीन तलाक दिया गया था।

महिला अपनी शिकायत में बताया, “मेरा निकाह सात साल पहले आसिफ से हुई थी और अब हमारे दो बच्चे हैं। पिछले सात सालों से मेरा शौहर मेरे साथ मारपीट और गाली-गलौज कर रहा है और करीब डेढ़ साल पहले जब उसने मुझ पर व्यभिचार का गलत आरोप लगाया तो मैंने उनका घर छोड़ दिया और जुहापुरा में अपनी माँ के साथ रहने लगीं। 20 मई को आसिफ मेरी माँ के घर आया और मेरे सभी रिश्तेदारों के सामने उसने मुझे तीन तलाक दे दिया।”

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में लगातार एक साथ में तीन बार तलाक बोलकर एक महिला को तलाक देने की मुस्लिम प्रथा को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। वहीं केंद्र सरकार द्वारा 2019 में महिलाओं को तत्काल तलाक देने को कानूनन अपराध घोषित करते हुए कानून बनाया गया था। फिर भी ऐसे तीन तलाक के मामले आए-दिन सामने आते रहते हैं।

‘हमें माफ़ कर दीजिए महादेव, आप 300 वर्षों तक गंदगी में पड़े रहे’: ज्ञानवापी शिवलिंग की पूजा के लिए याचिका, हिन्दुओं ने कान पकड़ की क्षमा याचना

वाराणसी में गौरी-ज्ञानवापी केस की जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश आज से सुनवाई कर रहे हैं। इस दौरान हिन्दू पक्ष और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की आपत्तियों पर भी सुनवाई होगी। इस बीच काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने भी आज सोमवार (23 मई, 2022) को जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की। उन्होंने ज्ञानवापी में पूजा-पथ और भोग आदि के अधिकार की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत ने याचिका दाखिल करते हुए न्यायिक तौर पर महादेव शिव की पूजा का अधिकार माँगा है। दोनों पक्ष न्यायालय में मौजूद हैं। मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव ने भी खुद को सुनवाई के लिए तैयार बताया है। उन्होंने कहा कि अदालत को पहले ये तय करना होगा कि ज्ञानवापी केस पर उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 तो नहीं लागू होता। अदालत अभी ये तय करेगा कि यह मामला चलने लायक है भी या नहीं।

वहीं हिन्दू पक्ष से माँ श्रृंगार गौरी केस के वकील विष्णु जैन के मुताबिक ज्ञानवापी मामले में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 इसलिए नहीं लागू होता क्योंकि साल 1937 में दीन मोहम्मद के केस में 15 लोगों ने इस बात की गवाही में 1942 तक वहाँ पूजा होना बताया था। इस तथ्य को अदालत के आगे रखा जाएगा। हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में खुद को ज्ञानवापी केस में वादी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। विष्णु गुप्ता के मुताबिक उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार भी कर ली है। वो वाराणसी की अदालत में भी ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में अपनी तरफ से परिवाद दाखिल कर रहे हैं। अपने परिवाद में उन्होंने अब तक मिले सबूतों के आधार पर ज्ञानवापी को वापस हिन्दू समाज को सौंपने की माँग की है।

उधर भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर के मस्जिद कमेटी की अर्जी ख़ारिज करने की माँग की है। याचिका में उन्होंने इस्लामी सिद्धांत का हवाला देते हुए मंदिर तोड़कर बनाई गई मस्जिद को अवैध बताया है।

ज्ञानवापी का केस 1991 में लड़ चुके पंडित सोमनाथ व्यास के नाती शैलेन्द्र कुमार ने भी ज्ञानवापी परिसर में खुद को पूजा का अधिकार देने की याचिका दायर की है। उन्होंने बताया कि ज्ञानवापी परिसर के तहखाने की चाबी अभी भी प्रशासन के पास है। उन्होंने बताया कि ज्ञानवापी स्थित तहखाना साल में 2 बार रामायण पाठ के लिए खोला जाता है। इसी के साथ शैलेन्द्र ने तहखाने में अपने पूर्वजों की वसीयत का दावा किया। साथ ही उन्होंने ज्ञानवापी के पुरातात्विक सर्वे की भी माँग की।

श्रीकाशी विश्वनाथ मुक्ति आंदोलन के प्रमुख सुधीर सिंह के मुखिया सुधीर सिंह ने कान पकड़ कर महादेव शिव से क्षमा याचना की है। यह क्षमा याचना उन्होंने विश्वनाथ धाम के आगे की है। उन्होंने कहा, “300 साल से हम ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा नहीं कर पाए थे। मैं और समस्त काशीवासी भोलेनाथ से माफ़ी माँग रहे हैं। वो बड़े दयालु हैं। आशा है कि शिव हमें माफ़ कर देंगे। हमारे महादेव 300 साल गंदगी में पड़े रहे। वो हमारी रक्षा करते हैं लेकिन हम उनकी रक्षा नहीं कर पाए। हम दंड के भागी हैं।” वहीं रिपोर्ट लीक करने के आरोपों का ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे रिपोर्ट पर कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष सहायक आयुक्त अधिवक्ता विशाल सिंह ने खंडन किया है। उन्होंने रिपोर्ट को पूरी तरह से गोपनीय बताया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट निष्पक्ष है और जो भी पब्लिक में आएगा वो अदालत के माध्यम से ही संभव होगा।

अब तक 10 लोगों को हनीट्रैप में फँसा चुकी है रीया, भारतीय जवानों को निशाना बना रहा पाकिस्तान: आका देते हैं हिन्दू दिखने की ट्रेनिंग

राजस्थान में पिछले कुछ सालों से हनीट्रैप के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। ताजा मामला जोधपुर का है। यहाँ पाकिस्तानी ISI महिला एजेंट द्वारा सेना के जवान को हनीट्रैप में फँसाया गया है। जोधपुर में तैनात गनर प्रदीप कुमार फिलहाल दो दिन की रिमांड पर हैं। जोधपुर सैन्य क्षेत्र से तीन दिन पहले पकड़े प्रदीप कुमार पर आरोप है कि वह पाकिस्तानी महिला एजेंट रिया को देश से जुड़ी सारी सूचनाएँ दे रहे थे।

दै’निक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ये पाकिस्तानी ISI महिला एजेंट जवानों के अपने जाल में फँसाने से पहले पूरा होमवर्क करती हैं। कैप्टन रैंक के अफसरों द्वारा इन्हें मारवाड़ी और पंजाबी में बातें करने और रहन-सहन की ट्रेनिंग दी जाती है। यही नहीं, इन युवतियों को रिया, पूजा, अवनी, अनिका, हरलीन, मुस्कान जैसे नाम देकर हिंदू पहचान दी जाती है। ताकि ये आसानी से सेना का जवान इनके जाल में फँसा सकें। गनर प्रदीप कुमार को अपने जाल में फँसाने वाली मिलिट्री नर्सिंग सर्विस की नर्स बनी रिया अब तक 10 लोगों को फँसा चुकी है।

कई वर्षों से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा खूबसूरत लड़कियों को भारतीय नागरिकों और जवानों के पीछे लगाया जाता रहा है। सोशल मीडिया के जरिए सेना के जवानों को अपने झाँसे में लेकर भारतीय सेना व सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई राज जुटाए जाते हैं और फिर उसे पाकिस्तान पहुँचाया जाता है। मुख्य तौर पर सेना के मूवमेंट और हथियारों के बारे में जानकारियाँ इकट्ठा करना इनकी मुख्य मंशा होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जोधपुर हनीट्रैप मामले में बताया जा रहा है कि भारतीय सेना के जवानों और नए अफसरों को फँसाने के लिए पाक सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस सिंध हैदराबाद में टंडो झानियों के पास आर्मी कैंट से एक मॉड्यूल ऑपरेट कर रही है, जिसे हैदराबाद मॉड्यूल नाम दिया गया है। इस मॉड्यूल में हैदराबाद की स्थानीय वैश्याओं, गरीब लड़कियों, कॉलेज में पढ़ने वाली युवतियों को भर्ती किया गया है।

पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) द्वारा इन्हें ट्रेनिंग दी जाती है। ये महिलाएँ स्थानीय भाषा में बात करती हैं। हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर दिखा खुद को हिंदू साबित कर जवानों को अपने चंगुल में फँसाती हैं। यही नहीं उन्हें शादी करने का झाँसा देती हैं। फिर न्यूड कॉलिंग से जवान की रिकार्डिंग कर उसे खुफिया जानकारियाँ देने के लिए ब्लैकमेल करती हैं।

गौरतलब है कि पिछले साल राजस्थान में हनीट्रैप के 17 मामले सामने आए थे। ISI की ये खूबसूरत लड़कियाँ सोशल मीडिया के जरिए भारतीय नागरिकों और सेना के जवानों को फँसाती हैं। खासकर जिन लोगों ने सेना की वर्दी में तस्वीरें डाल रखी होती हैं, ये सबसे पहले उन्हें अपना निशाना बनाती हैं। इसके बाद चैटिंग की प्रक्रिया शुरू की जाती है। उनके साथ घूमने-फिरने से लेकर शादी तक का झाँसा दिया जाता है। उनके अश्लील वीडियो बनाकर के ब्लैकमेल का तरीका भी आजमाया जाता है। कई मामलों में चीनी कंपनी के गैजेट्स या मोबाइल का प्रयोग कर रहे जवानों को ज्यादा निशाना बनाया गया है।

करण जौहर ने चुरा लिया पाकिस्तानी गायक का गाना? सिंगर ने दी कानूनी कार्रवाई की धमकी, कहा – हर्जाना के लिए कोट जाऊँगा

हाल ही में करण जौहर की फिल्म ‘जुग जुग जियो’ का ट्रेलर रिलीज हुआ है। इस फिल्म में वरुण धवन, कियारा आडवाणी, अनिल कपूर और नीतू कपूर नजर आने वाले हैं। हालाँकि फिल्म का ट्रेलर रिलीज होते ही यह विवादों में घिर गया। फिल्म के प्रोड्यूसर करण जौहर पर ट्रेलर में इस्तेमाल किया गया गाना ‘नच पंजाबन’ के चुराने का आरोप लगा है।

पाकिस्तानी सिंगर अबरार उल हक ने फिल्म के प्रोड्यूसर करण जौहर पर उनका गाना ‘नच पंजाबन’ को चुराने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, गाने के निर्माता ने करण जौहर और उनकी टीम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की धमकी भी दे डाली है। गायक का कहना है कि उनके गाने का इस्तेमाल उन्हें उनका उचित क्रेडिट दिए बिना किया गया है। पाक सिंगर अबरार ने कहा है कि वह ‘धर्मा प्रोडक्शन’ और करण जौहर के खिलाफ लीगल एक्शन लेंगे।  

‘जुग जुग जियो’ के ट्रेलर में ‘नच पंजाबन’ गाने की झलक दिखाई गई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सिंगर ने कहा है कि करण जौहर और ‘धर्मा प्रोडक्शन’ ने उनकी इजाजत के बिना गाने को फिल्म में इस्तेमाल किया है। अबरार ने लिखा, “मैंने किसी भी भारतीय फिल्म को अपना गाना ‘नच पंजाबन’ नहीं बेचा है। इसके राइट्स मेरे पास सुरक्षित हैं ताकि मैं हर्जाने के लिए कोर्ट में जा सकूँ। करण जौहर जैसे निर्माताओं को गाने को कॉपी नहीं करना चाहिए। ये मेरा छठा गाना है, जिसे कॉपी किया गया। मैं इसकी इजाजत नहीं दे सकता।” 

गायक ने अपने अगले ट्वीट में लिखा, “गाना ‘नच पंजाबन’ का किसी को भी लाइसेंस नहीं दिया गया है। अगर कोई दावा कर रहा है तो एग्रीमेंट दिखाएँ, मैं लीगल एक्शन लूँगा।” बता दें कि अबरार ने यह गाना 2000 के दशक की शुरुआत में गाया था और यह पूरे दक्षिण एशिया में काफी फेमस हो गया था। 

इधर सोशल मीडिया पर अबरार के ट्वीट पर यूजर्स करण जौहर को ट्रोल कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “बॉलीवुड ने तो साउथ मूवी और हॉलीवुड की कॉपी को नहीं छोड़ा। तुम्हारा गाना क्यों छोड़ेंगे। बॉलीवुड कॉपी मास्टर।”

इस पूरे विवाद पर अभी तक फिल्ममेकर करण जौहर की तरफ से कोई रिएक्शन सामने नहीं आया है। अगर आप फिल्म ‘जुग जुग जियो’ में नच पंजाबन और अबरार के आइकॉनिक गाने को सुनते हैं तो दोनों में काफी समानता है। ट्यून से लेकर म्यूजिक तक, सब कुछ सेम है। फिल्म जुग जुग जियो की बात करें तो इसे राज मेहता ने डायरेक्ट किया है। ये मूवी 24 जून को रिलीज होगी। इसमें वरुण धवन, कियारा आडवाणी, अनिल कपूर और नीतू कपूर लीड रोल में नजर आएँगे।

दुनिया के सामने अमेरिका ने चीन से ताइवान को बचाने का किया ऐलान, लोगों ने याद दिलाया- US ने समय आने पर यूक्रेन के साथ क्या किया

जापान में आयोजित होने जा रहे क्वाड समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बॉयडेन ने चीन को धमकी दी है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर ड्रैगन को चेताते हुए कहा कि यदि चीन ने ताइवान पर हमला किया तो अमेरिका ताइवान की सैन्य मदद करेगा। हालाँकि, यहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया के सामने ताइवान को बचाने का ऐलान करते नजर आ रहे हैं। यह वैसा ही कुछ मामला है जैसा बयान अमेरिका ने रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के समय दिया था। सोशल मीडिया पर लोग याद दिला रहे हैं कि ऐसे ही समय आने पर अमेरिका ने यूक्रेन के साथ क्या किया था।

जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन को धमकी देते हुए कहा कि चीन खतरे से खेलने का प्रयास कर रहा है। मीडिया को सम्बोधित करते हुए जो बाइडेन ने कहा कि यह हमारा कमिटमेंट है कि ताइवान की रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा, “वन चाइना पॉलिसी को लेकर सहमत हैं, लेकिन किसी भी क्षेत्र पर यदि चीन की ओर से जबरन कब्जा किया जाता है तो फिर उसका जवाब दिया जाएगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस चेतावनी के बाद सोशल मीडिया पर लोग पूछते नजर आ रहे हैं। समवर नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “यूक्रेन को बुरी तरह तबाह करने के बाद अब ताइवान की बारी है। क्या अब वह एक नया युद्ध शुरू करने की तैयारी है। क्या अगला निशाना ताइवान है?”

किसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तंज कस्ते हुए लिखा है, “बायडेन ऐसा कर सकते हैं हमने अफगानिस्तान और यूक्रेन में देखा ही है।”

वहीं सोशल मीडिया पर किसी ने इसे वॉर मोंगरिंग कहते हुए ऐसे युद्दों की पूरी लिस्ट ही जारी कर दी।

बाबो नाम के किसी अंडरग्राउंड पत्रकार ने ट्विटर पर लिखा, “यदि ताइवान सैन्य रूप से अमेरिका पर निर्भर है, तो इसका भी अंत वियतनाम की तरह होगा। हम बीजिंग-वाशिंगटन समझौते में बस बलि का बकरा थे।”

बायडेन ने कहा, “हम वन चाइना पॉलिसी से सहमत हैं। हमने उस पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन बलपूर्वक कुछ भी हथियाने का काम चीन करता है तो वह अच्छा नहीं होगा। इससे पूरे क्षेत्र में अशांति होगी और यहाँ भी वैसा ही ऐक्शन होगा, जैसा यूक्रेन में लिया जा रहा है।”

इस तरह से देखा जाए तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह साफ कर दिया कि कैसे पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को मदद की है और इसके चलते रूस को बड़ा झटका लगा है। वहीं अब इस उथल-पुथल के बीच यदि चीन की ओर से ताइवान को लेकर हमले जैसी स्थिति पैदा की जाती है तो फिर उसके खिलाफ भी ऐसा ही ऐक्शन लिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “यह महत्वपूर्ण है कि यूक्रेन में बर्बरता की कीमत व्लादिमीर पुतिन को चुकानी होगी। रूस को लंबे वक्त तक इसकी कीमत अदा करनी होगी।”

जो बायडेन ने यह भी कहा, “यह बात सिर्फ यूक्रेन को लेकर ही नहीं है। चीन भी यह देख रहा है कि कैसे पश्चिमी देशों के दखल के चलते रूस को पीछे हटना पड़ा है। चीन को इससे ज्यादा क्या संकेत दिया जा सकता है कि यदि उसने ताइवान पर हमला किया तो फिर क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि चीन के पास यह अधिकार नहीं है कि वह ताइवान पर जबरन कब्जा कर ले।

ET ने छापा शिवलिंग का मजाक बनाने वाला कार्टून: लगातार उड़ाया जा रहा हिन्दू आस्थाओं का मजाक, उन्हें पता है FIR से ज्यादा कुछ नहीं होगा

इकोनॉमिक्स टाइम्स (ET) के प्रिंट वर्जन में रविवार (22 मई, 2022) को एक कार्टून के माध्यम से ज्ञानवापी मुद्दे पर हिन्दुओं का मजाक उड़ाया गया। इस कार्टून में भाभा एटॉमिक रिसर्च केंद्र को शिवलिंग के तौर पर दिखाया गया। कार्टून का शीर्षक ‘बम भोलेनाथ’ दिया गया था। यह कार्टून अख़बार के ‘दुनिया’ वाले कॉलम में छपा था।

कार्टून स्क्रीनशॉट

इसी अख़बार में एक अन्य कार्टून में ताज महल के बेसमेंट में लगे दरवाजों को खोलने पर एक कार्टून छापा गया है।

ET कार्टून स्क्रीनशॉट

ज्ञानवापी सर्वे के दौरान शिवलिंग मिलने के बाद कई लोगों ने हिन्दू आस्थाओं पर प्रहार करने वाले कमेंट्स किए। उनमे से कुछ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई है। हाल ही में TMC सांसद महुआ मोइत्रा, पत्रकार सबा नक़वी, रिटायर्ड IAS सूर्य प्रताप सिंह, पीस पार्टी के शादाब चौहान और RJD पार्टी के नेता कुमार दिवाशंकर के खिलाफ हिन्दू आस्थाओं को चोट पहुँचाने की शिकायत दर्ज करवाई गई है। इसी क्रम में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतन लाल को गिरफ्तार भी किया गया, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई थी।

इस कार्टून को प्रकाशित करते हुए इकोनॉमिक टाइम्स ने हिन्दू आस्थाओं का जरा सा भी ध्यान नहीं रखा। अगर यही कार्टून किसी और मज़हब की आस्था से जुड़ा होता तो कोई मेन स्ट्रीम मीडिया इसको छूना भी पसंद नहीं करता। लेकिन, बात हिन्दुओं की हो तो उनकी आस्थाओं का मजाक एक सामान्य बात जैसी हो जाती है।

असल में हिन्दू समाज की आस्था का मजाक उड़ाना आज कल मीडिया संस्थानों की एक आदत ही हो गई है। ऐसा करना सच्चा लिबरल होने की निशानी माना जाने लगा है। इसी के साथ इसका विरोध नहीं किसी के द्वारा न करने पर उन्हें ये सब करना और आसान लगने लगता है। इस बार ज्ञानवापी मामले में भी यह हर कोई जानता है कि काशी विश्वनाथ हिन्दुओं के सबसे अधिक पवित्र धर्मस्थलों में से एक है। लेकिन इसके बाद भी एक राष्ट्रीय दैनिक अख़बार द्वारा उस पर इतना आपत्तिजनक कार्टून बनाया गया।

हिन्दू आस्थाओं का मजाक सिर्फ इकोनॉमिक्स टाइम्स ही नहीं बल्कि कई अन्य मेन स्ट्रीम मीडिया बना रहे हैं। उनके मुताबिक हिन्दू का कुछ भी RSS/BJP है। इसी की आड़ में वो समूचे हिन्दू धर्म का मजाक बनाना शुरू कर देते हैं। कुल मिला कर वो संघ की विचारधारा से सहमत न होने के चलते संघियों की मौत की इच्छा रखना शुरू कर देते हैं। उन सभी को ये भी नहीं पता कि हिन्दुओं की अपनी खुद की भी पहचान है। हिन्दू सिर्फ राजनैतिक पार्टी या संस्थान का प्रतीक नहीं है।

ऐसी हरकतें इसलिए भी की जा रही हैं क्योकि मीडिया संस्थानों के साथ आम लोगों को भी पता है कि इसमें कोई रिस्क नहीं है। उन्हें पता है कि ज्यादा से ज्यादा इस केस में FIR होगी। सबने देखा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतनलाल को अगले ही दिन जमानत मिल गई। रतनलाल ने कोर्ट में खुद को हिन्दू बताया। इस तरह कोई भी हिन्दुओं के आराध्य, उनके त्योहारों और उनके धर्मस्थलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर सकता है और बाद में खुद को भी हिन्दू बताते हुए अभिव्यक्ति की आज़ादी की दुहाई दे सकता है। ऐसे में कई लोग ये सोच कर रिस्क ले लेते हैं कि अदालत से उन्हें कड़ी सजा नहीं मिलेगी।

हर कोई चार्ली हेब्दो की घटना से वाकिफ है। अगर इकोनॉमिक्स टाइम ने यही सब पैगंबर या कुरान से जोड़ कर किया होता तो शायद उन पर सोशल मीडिया और यहाँ तक कि ऑफिस तक में हमले हो रहे होते। मीम बनाने वाले को भी शायद मार दिया गया होता। हिन्दुओं के मामले में ऐसा कुछ नहीं होता जो हिन्दू समाज की सहिष्णुता को दर्शाता है।

टाइम्स ग्रुप के साथ कई अन्य मीडिया संस्थानों ने चार्ली हेब्दो पर हुए हमले की निंदा की थी। लेकिन जब बात हिंदुत्व की आई तब उनका दोहरा चरित्र सामने आ गया। इकोनॉमिक्स टाइम्स के लिए हिन्दुओं के खिलाफ ऐसी हरकत लगातार करना अभिव्यक्ति की आज़ादी है। लेकिन जब बात इस्लाम की आ जाती है तब वो ऐसा साहस नहीं कर पाते। उन्हें इसका अंजाम पता है।

यहाँ हिन्दुओं को भी मीडिया से जुड़े फैक्ट्स जानने होंगे। उन्हें अपनी आस्थाओं पर प्रहार करने वाले कंटेंट को भी समझना होगा। लव जिहाद, धर्म परिवर्तन और कई अन्य मुद्दों में में भी हिन्दुओं को ही निंदा का सामना करना पड़ा है जबकि उन केसों में वही पीड़ित भी होते हैं। हिन्दुओ से ही मिल रहे उत्साह और प्रोत्साहन से ऐसे मामले और अधिक बढ़ रहे हैं।