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करण जौहर पर गाना के बाद अब कहानी चोरी के आरोप, लेखक ने शेयर किए स्क्रीनशॉट्स: कहा – ‘धर्मा’ को भेजी थी ‘जुग जुग जियो’ की कहानी

फिल्म निर्माता-निर्देशक करण जौहर पर आरोप लगा है कि उन्होंने ‘जुग जुग जियो’ की कहानी चोरी की है। इससे पहले पाकिस्तान के एक गायक ने उनका चुराया हुआ गाना इस फिल्म में डालने का आरोप लगाया था। रविवार (22 मार्च, 2022) को इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ, जिसके बाद से ही ये विवादों में है। विशाल ए सिंह नामक लेखक ने उनकी कहानी चोरी कर के इस फिल्म को बनाने का आरोप लगाया है।

विशाल ने बताया कि उन्होंने ‘बन्नी रानी’ नाम से एक स्क्रिप्ट लिखा था, जिसका इस्तेमाल करण जौहर की ‘धर्मा प्रोडक्शंस’ ने ‘जुग जुग जियो’ फिल्म के लिए बिना अनुमति लिए कर लिया है। इस दौरान उन्होंने सबूत के रूप में ईमेल की कॉपी भी पेश की, जिसमें देखा जा सकता है कि उन्होंने कंपनी को स्क्रिप्ट के कुछ हिस्से भेजे थे। उन्हें कंपनी की तरफ से एक प्रतिक्रिया भी मिली थी। विशाल ए सिंह ने जनवरी 2020 में इस कहानी को ‘स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन इंडिया (SWAI)’ में रजिस्टर कराया था।

इसके अगले महीने उन्होंने इसके कुछ हिस्से ‘धर्मा’ को भेजे थे। वो इसे एक फिल्म में तब्दील करना चाहते थे और इसके लिए मौका माँग रहे थे। उनके अनुसार, ये एक मध्यमवर्गीय जोड़े की कहानी है, जो रोज रुपए बचाता है और अपने बच्चों को सफल बनाने के लिए त्याग करता है। हालाँकि, बच्चों की शिक्षा, नौकरी और शादी हो जाने से बाद अचानक से दोनों होने रिश्ते तोड़ने का ऐलान कर देते हैं और तलाक फाइल कर देते हैं। वो बच्चों के सेटल होने का भी इंतजार कर रहे होते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर वो ये सब पब्लिसिटी के लिए कह रहे होते तो आज जितने भी पब्लिकेशंस ने उनसे संपर्क किया, वो उन सभी को बयान दे रहे होते। उन्होंने कहा कि वो सार्वजनिक रूप से तथ्य डाल कर लोगों से कह रहे हैं कि वो सही-गलत का निर्णय करें। उन्होंने कहा कि कहानी अच्छी लगे तो बात करो और हाथ मिलाओ, साथ मिल कर बनाओ। उन्होंने कहा कि ‘चोरी-चकारी’ एक प्रतिष्ठित बैनर को शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा कइयों के साथ हो रहा है।

इस फिल्म में वरुण धवन, कियारा आडवाणी, अनिल कपूर और नीतू कपूर नजर आने वाले हैं। पाकिस्तानी सिंगर अबरार उल हक ने फिल्म के प्रोड्यूसर करण जौहर पर उनका गाना ‘नच पंजाबन’ को चुराने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, गाने के निर्माता ने करण जौहर और उनकी टीम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की धमकी भी दे डाली है। गायक का कहना है कि उनके गाने का इस्तेमाल उन्हें उनका उचित क्रेडिट दिए बिना किया गया है।

जितेंद्र त्यागी ने जताई संन्यास की इच्छा, नरसिंहानंद ने भी सार्वजनिक जीवन को कह चुके हैं अलविदा: अब नहीं होगी कोई ‘धर्म संसद’?

जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी ने अब संन्यास लेने की इच्छा जताई है। इस्लाम छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाने वाले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन रिजवी ने हरिद्वार के शांभवी धाम के पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप के सामने अपनी इस इच्छा को रखा है। स्वामी आनंद स्वरूप के साथ ही जितेंद्र त्यागी ने रविवार (22 मई, 2022) को रुद्राभिषेक किया था।

बता दें कि धर्म ससंद में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जितेंद्र नारायण त्यागी पिछले चार माह चार दिन से हरिद्वार जेल में थे। वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा जितेंद्र नारायण त्यागी को फिर से कोई भड़काऊ भाषण न देने की शर्त पर जमानत दी गई है। कहा जा रहा है कि जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद त्यागी ने हरिद्वार स्थित शांभवी धाम में काली सेना प्रमुख स्वामी दिनेशानंद भारती के साथ भगवान शंकर का रुद्राभिषेक किया था। इस दौरान ही उन्होंने संन्यास की इच्छा जताई।

वसीम रिजवी उर्फ़ त्यागी ने कहा कि अब हिन्दू धर्म में आने के बाद वह सभी मोह माया से दूर होकर संन्यास परंपरा धारण करना चाहते हैं। वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह भी कहा जा रहा है कि मंगलवार (24 मई, 2022) को स्वामी आनंद स्वरूप अखाड़ा परिषद के अलावा सभी 13 अखाड़ों से इस संबंध में बातचीत करेंगे।

हालाँकि, अभी उनको अखाड़े में शामिल किया जाएगा या नहीं इस पर विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है अखाड़े में उनके सन्यास की बाबत बड़े संतों से भी राय ली जाएगी। वहीं इस बात पपर गहन विचार-विमर्श के बाद ही इस बात का निर्णय होगा कि परंपरा में ऐसा हो सकता है या नहीं, उसके बाद उन्हें दीक्षा दिलाई जाएगी।

इस मामले में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी का कहना है कि चूँकि अब उन्होंने हिन्दू धर्म धारण कर लिया है, इसलिए वह संन्यास धारण कर सकते हैं। यदि उन्होंने इच्छा जताई है तो कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

गौरतलब है कि हाल ही में गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के महंत और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने भी एक चौंकाने वाली घोषणा की थी। उन्होंने सार्वजानिक जीवन से संन्यास लेकर पूरी तरह अपना जीवन धार्मिक कार्यों में लगाने की बात कही है। उन्होंने इस्लामी जिहाद के खिलाफ अपनी लड़ाई और धर्म संसद के आयोजन से खुद को अलग करने की भी घोषणा की थी। इस तरह से देखा जाए तो अदालत के निर्देशानुसार दोनों लोगों ने भड़काऊ भाषणों से दूरी बना ली है।

बता दें कि यति नरसिंहानंद ने ये बातें 19 मई 2022 (गुरुवार) को कही। अपने बयान में उन्होंने जितेंद्र नारायण त्यागी के खिलाफ हुई कार्रवाई के लिए भी खुद को दोषी बताया है। एक वीडियो जारी कर यति नरसिंहानंद ने कहा था, “हम सभी जितेंद्र नारायण त्यागी को जेल में से लेने आए थे। उनकी रिहाई हो गई है। वे हमसे मिलने से पहले ही चले गए हैं। उनसे हमारा यहीं तक का साथ था। उनके साथ हमारे सुखद या दुखद अनुभव का पूर्णतया दोषी मैं हूँ। उनकी कोई गलती नहीं है। उन्होंने केवल सच बोला। मेरी कमजोरी के चलते उन्हें 4 महीने से ज्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा। इसके लिए मैं उनसे क्षमाप्रार्थी हूँ।”

मस्जिद के इमाम ने 8 महीने की गर्भवती बीवी को मार डाला, मस्जिद की छत से दे दिया धक्का: बेटा चाहता था, लेकिन बेटी होने का था शक

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ कुतुबशेर थानाक्षेत्र के 62 फुटा रोड पर स्थित एक मस्जिद में अपनी गर्भवती बीवी की हत्या करने वाले इमाम को गिरफ्तार कर लिया गया है। कुतुबशेर थाना प्रभारी पीयूष दीक्षित ने बताया कि मस्जिद के इमाम उस्मान (अब्बा का नाम हुसैन) को पुलिस ने रविवार (22 मई, 2022) दोपहर को मस्जिद के पास से गिरफ्तार किया था।

आरोपित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उस्मान ने पुलिस को बताया कि उसकी बीवी हिना आठ माह की गर्भवती थी। वह बेटा चाहता था। इसलिए उसने अपने ‘जादू-टोने’ से पता किया कि उसकी बीवी के गर्भ में क्या है। जब उसे ‘पता चला’ कि उसके गर्भ में बेटी है, तो उसने हिना को कई बार गर्भपात करने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं मानी। इसके बाद उसने 12 मई को अपनी बीवी को मस्जिद की छत से धक्का देकर उसकी हत्या कर दी। सराहनपुर पुलिस ने रविवार को महिला का शव कब्र से निकलवा कर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।

पुलिस ने बताया कि मस्जिद से गिरने के कारण हिना की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद इमाम ने हिना की माँ खुर्शीदा को ‘जादू-टोने’ की प्रक्रिया का बहाना बताकर उसकी मौत होना बताया। जिसके बाद खुर्शीदा ने कहीं भी उसकी शिकायत नहीं की और शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया था। लेकिन जब उसे इस बात का पता चला कि उस्मान ही उसकी बेटी का कातिल है, तब खुर्शीदा (हिना की अम्मी) ने उस्मान और उसके दो अन्य साथियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने जब इस मामले में जाँच की तो उस्मान को दोषी पाया

बता दें कि उस्मान मूल रूप से बंदरजूड़ मुजाहिदपुर सतीवाला जिला हरिद्वार उत्तराखंड का रहने वाला है। हिना से 10 साल पहले उसका निकाह हुआ था। बाकी दो साथियों की तलाश की जा रही है। वहीं, कुतुबशेर थाना प्रभारी का कहना है कि अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है।

‘अकाल तख़्त’ के जत्थेदार ने सिखों को दी आधुनिक हथियार रखने की सलाह, कहा – ये हालात की ज़रूरत: CM मान ने जताई आपत्ति

पंजाब के अमृतसर स्थित ‘श्री अकाल तख़्त’ का जत्थेदार ग्यानी हरप्रीत सिंह ने सिखों से आधुनिक हथियार रखने की अपील की है। हालाँकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनके बयान पर आपत्ति जताई है। ग्यानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि हर सिख आधुनिक हथियार का लाइसेंस रखने की कोशिश करे। उन्होंने मीरी-पीरी के संस्थापक गुरु हरगोबिंद साहिब के गुरुता गद्दी दिवस पर संगत के नाम जारी संदेश में इस तरह की अपील की।

उन्होंने दावा किया कि गुरु हरगोविंद ने चार युद्ध लड़े और चारों में ही उन्होंने जीत दर्ज की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब सिख बाणी पढ़ कर बलवान बनें और हर सिख शस्त्रधारी भी बने। उन्होंने मीरी-पीरी के सन्देश को आज भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि सिखों को आधुनिकतम गतका, तलवारबाजी, तीरंदाजी का अभ्यास करने के साथ गुरुओं का नाम जपने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने हथियार को समय की जरूरत करार दिया।

बता दें कि हरगोविंद जी का ‘गुरुता गद्दी दिवस’ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में मनाया जा रहा है। इसी मौके पर ‘श्री अकाल तख़्त’ के जत्थेदार ने कानूनी रूप से लाइसेंसी आधुनिक हथियार रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे ही बन गए हैं। इस दौरान उन्होंने नशे के खिलाफ भी बात की और नशा मुक्ति के लिए सिखों को गुरबाणी की तरफ झुकाव बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नशा घर को तबाह कर रहा है।

हालाँकि, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को जत्थेदार ग्यानी हरप्रीत सिंह का ये बयान पसंद नहीं आया और उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस पर आपत्ति जता दी। उन्होंने लिखा, “सम्मानित जत्थेदार ‘श्री अकाल तख़्त साहिब’ जी, हथियारों को लेकर अपने बयान को सुना। आप ‘सरबत दा भला’ माँगने वाली गुरबाणी को घर-घर पहुँचाने का सन्देश दीजिए, हथियार रखने का नहीं। पंजाब में शांति-भाईचारा और आधुनिक विकास का संदेश देना है, आधुनिक हथियारों का नहीं।”

मार कर पेड़ से टाँग दिया गया राजपूत का शव, शाहजहाँ ने दी काशी विश्वनाथ की रक्षा की सज़ा: अंग्रेज यात्री ने देखा और लिखा

इससे पहले हमने बताया था कि कैसे जिस रजिया सुल्ताना को महिला सशक्तिकरण की मिसाल बता कर पढ़ाया गया, उसने ही काशी में विश्वेश्वर मंदिर तुड़वा कर मस्जिद बनवा दिया। बाद में जगद्गुरु नारायण भट्ट की प्रेरणा पर अकबर के नवरत्नों में से एक राजा टोडरमल ने मंदिर का निर्माण करवाया। काशी विश्वनाथ मंदिर को सबसे पहले मुहम्मद गोरी और कुतुबुद्दीन ऐबक ने तोड़ा था, जिसके बाद 14वीं शताब्दी के अंत तक वाराणसी पुनः अपने गौरव की तरफ लौट रहा था। लेकिन, मुगलों को ये मंजूर नहीं रहा।

आपने अक्सर फर्जी इतिहासकारों को ये बताते हुए देखा होगा कि कैसे अकबर उदार था और उसने कई मंदिरों का निर्माण कराया। वो ये बताते हुए भी नहीं थकते कि मुग़ल शासक अकबर ने काशी में विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। हालाँकि, कहानी इसके एकदम उलट है। ये काम अकबर ने नहीं, बल्कि उसकी हिन्दू रानियों ने करवाया था – राजकोष से अपने स्तर से रुपए निकाल कर। जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा ‘तुजुक-ए-जहाँगीरी’ में इसका जिक्र किया है।

अकबर के शासनकाल की ही बात है, जब राल्फ फीच नामक एक अंग्रेज यात्री भारत आया था और उसने अपना संस्मरण भी लिखा है। उसने इस दौरान एक ‘वापी’ (कुएँ) का उल्लेख किया है, जिसमें नीचे जाने के लिए सीढियाँ बनी हुई थीं। ये ‘वापी’ पत्थर का बना हुआ था। उसने लिखा है कि कुएँ के भीतर काफी पानी भी है और उसमें लोग फूल डालते हैं, जिस कारण उससे बदबू आती है। उसने ये भी जिक्र किया है कि लोग यहाँ स्नान करने के लिए भी आते हैं और उनका मानना है कि इससे उनके पाप धुल जाएँगे।

उसने अपने विवरण में लिखा है कि यहाँ हमेशा लोग जमा रहते हैं, इसके तल में जाकर लोग खड़े होते हैं। उसने पानी से लोगों के नहाने और पूजा करने का जिक्र करते हुए लिखा है कि इसे वो अपने घर भी लेकर जाते हैं, जहाँ स्थित देवी-देवताओं की मूर्तियों को ये चढ़ाया जाता है। कैसे जमीन साफ़ कर के दंडवत होकर लोग प्रार्थना करते हैं, ये भी उसने लिखा है। इससे पता चलता है कि वहाँ पूजा तो होती थी, लेकिन मंदिर की अवस्था का जिक्र नहीं है।

राजा टोडरमल को भी मंदिर का पुनर्निर्माण करवाने में 5 वर्ष लगे थे, ऐसे में हो सकता है कि तब तक पुराने जीर्ण-शीर्ण मंदिर में ही पूजा-पाठ होती रही है। गोस्वामी तुलसीदास ने भी ज्ञानवापी में जाकर साष्टांग पूजा की थी। शाहजहाँ के काल की भी बात कर लेते हैं, जिसके समय में काशी के सभी मंदिर ध्वस्त करने के आदेश दिए गए थे। उसके आदेश पर वाराणसी के 76 मंदिरों को नुकसान पहुँचाया गया। पीटर मुंडी नाम का एक ब्रिटिश व्यापारी उन दिनों में भारत दौरे पर था।

उसने लिखा है कि काशी में एक जगह उसे पेड़ पर एक लाश लटकी हुई दिखी। उसके हिसाब से ये 3 दिसंबर, 1632 ईस्वी की बात थी। वो लिखता है, “शाहजहाँ ने सभी हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। उसने गवर्नर (इलाहाबाद के सूबेदार हैदर बेग) ने अपने चचेरे भाइयों को एक फ़ौज के साथ इस मंदिर को तोड़ने के लिए भेजा। लेकिन, इस राजपूत व्यक्ति ने उन्हें देख लिया और धनुष-तीर लेकर वो वहाँ पर छिप गया।”

पीटर मुंडी आगे लिखता है, “उस राजपूत व्यक्ति ने लगातार वार कर के गवर्नर के चचेरे भाई को मार गिराया। इसके अलावा कुछ अन्य फौजियों को भी उसने मार डाला। अचानक हुए हमले में 3-4 मुग़ल मारे गए। जब उसे फौजी पकड़ने गए, तो उसने कटार निकाल कर एकाध अन्य को भी चित कर दिया। अंत में उसकी हत्या कर दी गई और उसकी लाश को पेड़ से लटका दिया गया।” उसने वाराणसी में कई जोगियों के साथ-साथ मुस्लिम फकीरों को भी देखा।

काशी में ब्रिटिश यात्री पीटर मुंडी ने जो देखा, उसे उसने अपने संस्मरण में लिखा है

पीटर मुंडी ने काशी के ब्राह्मणों, वैश्य समाज के लोगों और खत्री समुदाय के लोगों का जिक्र भी किया है। उन लिखा है कि यहाँ के हिन्दू गंगा नदी को पवित्र मानते हैं। उसने लिखा है कि मंदिर में शिवलिंग है और उस पर जल-दूध चढ़ाया जाता है और ब्राह्मण मंत्र पढ़ते हैं। हालाँकि, पीटर मुंडी के संस्मरण में ज्ञानवापी का जिक्र नहीं है, लेकिन काशी विश्वनाथ का है। शाहजहाँ के आदेश के बाद इस मंदिर का क्या हुआ, इसका कोई खास विवरण नहीं मिलता।

यहाँ तक कि सुब्रमण्यन स्वामी जैसे लोग भी लिखते रहे हैं कि अकबर ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए धन दिया था, जब ऐसा कुछ भी नहीं था। टोडरमल के पास ही अकबर का राजस्व विभाग था, ऐसे में मंदिर का निर्माण उन्होंने करवाया। हालाँकि, इसके बाद जब शाहजहाँ ने काशी के मंदिरों को तोड़ने के आदेश दिए थे तो हिन्दुओं ने इसका कड़ा प्रतिरोध किया था। विश्वनाथ मंदिर न तोड़ पाने की खुन्नस में ही काशी के बाक़ी मंदिरों को निशाना बनाया गया था।

इतिहास में दर्ज है कि कैसे वाराणसी की भव्यता देख कर मुग़ल शासक शाहजहाँ बौखला गया था। आज इन्हीं मुगलों को भारत की GDP, विकास और समृद्धि के लिए क्रेडिट देते फिरते हैं, वो अगर अपने ही राज में किसी शहर की समृद्धि से बौखला कर उसे तबाह कर दे, फिर क्या उसे कभी भारतीय माना जा सकता है? उसी शाहजहाँ द्वारा भेजी गई फ़ौज का हिन्दुओं ने जम कर विरोध किया। आज ताजमहल के लिए उसका गुणगान किया जाता है, जिसके किसी हिन्दू मंदिर की नींव पर खड़े होने की बात कही जाती है अक्सर।

ज्ञानवापी इतिहास सीरीज के पहले लेख में ही हमने बताया था कि कैसे काशी में 10वीं और 11वीं शताब्दी में गहड़वाल वंश का शासन था, जिसके चंद्रदेव और गोविंदचंद्र ने बाबा की नगरी की रक्षा की। जयचंद की युद्ध में मृत्यु के बाद ऐसी तबाही मचाई गई कि मुहम्मद गोरी 1400 ऊँट से लूट का माल लेकर गया। जैन मंत्री वास्तुपाल ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए 1 लाख रुपए भेजे थे। गोरी-ऐबक की मौत के बाद भी दिल्ली सल्तनत काशी पर हमला करते रहे।

काशी में बिंदु माधव का मंदिर को तोड़कर औरंगजेब ने बनवाई थी धरहरा मस्जिद, जहाँ होती थी भगवान विष्णु की पूजा: जानें इस प्राचीन धरोहर को

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के मुद्दे के बीच इतिहासकारों ने एक और बड़ा दावा किया है। उनका दावा है कि काशी में एक और विवादित ढाँचा है, जिसे मुगल शासक औरंगजेब ने प्राचीन विख्यात बिंदु माधव मंदिर को तोड़कर बनवाया था। उसका नाम ‘धरहरा मस्जिद’ है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि पहले इस मस्जिद के स्थान भगवान विष्णु का मंदिर हुआ करता था​।

इतिहासकारों का दावा है कि औरंगजेब ने न केवल ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को बनाया, बल्कि इसी तरह उसने हिंदुओं के दो बड़े मंदिरों समेत अन्य कई सनातन आस्था के केंद्रों को भी गिराया था और वहाँ मस्जिदें बनवाई थी। भगवान शिव की नगरी काशी के पंचगंगा घाट पर स्थित ‘बिंदु माधव का मंदिर’ अब ‘धरहरा मस्जिद’ के नाम से जाना जाता है। औरंगजेब ने सन 1669 के आसपास बिंदु माधव का प्राचीन मंदिर तोड़कर यहाँ धरहरा मस्जिद बनवाई थी, जिसके बाद औंध नरेश ने मंदिर से बिंदु माधव की मूर्ति को बगल में एक अन्य जगह स्थानांतरित करा दिया था। यहाँ पर अभी भी उनकी (भगवान विष्णु) पूजा की जाती है। अब इसे आलमगीर मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है।

आज तक के मुताबिक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर माधव जनार्दन रटाटे का कहना है कि औरंगजेब ने काशी को काफी नुकसान पहुँचाया था। उसने यहाँ के कृतिवाशेश्वर, बिंदु माधव और विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया था। इसके अलावा ओंकारेश्वर और लाटभैरव मंदिर को भी उसने नष्ट कर दिया था। साथ ही ओंकारेश्वर मंदिर के आसपास भी कई मंदिरों को नुकसान पहुँचाकर उन्हें पूरी तरह लुप्त कर दिया।

धरहरा मस्जिद को लेकर प्रो. जनार्दन रटाटे कहते हैं कि इस मस्जिद के घाट वाले हिस्से में जाने पर मंदिर के अवशेष दिखाई पड़ेंगे। यहाँ कभी एक शिलालेख हुआ करता था, जिस पर लिखा हुआ था कि मंदिर को तोड़कर औरंगजेब ने मस्जिद का निर्माण करवाया है, लेकिन अब यह शिलालेख दिखाई नहीं पड़ता है।

उन्होंने बताया कि धरहरा मस्जिद के नीचे मौजूद तहखाने की अगर जाँच की जाए तो वहाँ से बहुत सारे शिवलिंग और विष्णु भगवान की मूर्तियाँ मिलेंगी। पहले यहाँ बिंदु माधव यानी भगवान विष्णु के रूप की पूजा होती थी और बहुत विशाल मंदिर था। उन्होंने यह भी बताया कि यह बनारस की सबसे ऊँची इमारत थी, क्योंकि इसमें दो सबसे ऊँची मीनारें थीं। लेकिन इसे कमजोर हो जाने के चलते लगभग 100 साल पहले गिरा दिया गया था। ऐसा कहा जाता है कि उन मीनारों से दिल्ली का कुतुब मीनार तक दिखाई पड़ता था।

प्रो. रटाटे के अलावा बनारस हिंदू विवि में इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद जायसवाल ने बताया कि जहाँ बिंदु माधव का मंदिर है उसे विष्णु क्षेत्र भी कहा जाता है और जिस घाट पर यह है उसे पंचनद तीर्थ कहा जाता है। बिंदु माधव के मंदिर को 1580 में रघुनाथ टंडन ने बनवाया था, जिसे औरंगजेब ने 1669 में तोड़कर आलमगीर मस्जिद बना दिया। बिंदु माधव मंदिर का जिक्र मत्स्य पुराण में भी मिलता है। वहीं, पेशे से वकील इंद्र प्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि धरहरा मस्जिद के बगल में ही बिंदु माधव का मंदिर है, हम इसे बचपन से देखते चले आ रहे हैं। मंदिर को तोड़कर ही मस्जिद बनवाई गई है।

टोक्यो में ‘भारत माँ की जय’ के उद्घोष से PM मोदी ने प्रवासी भारतीयों में भरी ऊर्जा, बोले- ‘मुझे मक्खन पर नहीं, पत्थर पर लकीर खींचना पसंद है’

जापान की राजधानी टोक्यो में एयरपोर्ट पर प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वागत किए जाने से अभिभूत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (मई 23, 2022) एक कार्यक्रम में अपने देश के लोगों का अभिवादन किया। उन्होंने ‘भारत माता की जय’ के साथ संबोधन शुरू किया और जापानियों की देशभक्ति, आत्मविश्वास, स्वच्छता, जागरूकता की खुलकर प्रशंसा की। साथ ही बताया कि शिकागो में ऐतिहासिक भाषण देने से पहले स्वामी विवेकानंद जापान होकर गए थे। इस जगह ने उनके मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ा था।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में जापान के हर युवा से कहा कि वो जीवन में एक बार कम से कम भारत की यात्रा करें। उन्होंने प्रवासी भारतीयों की तारीफ करते हुए कहा, “जापान की भाषा, वेशभूषा, संस्कृति और खानपान एक प्रकार से आपके जीवन का भी हिस्सा बन गया है। ये हम लोगों की विशेषता है कि हम कर्मभूमि से तन मन से जुड़ जाते हैं, खप जाते हैं। लेकिन मातृभूमि की जड़ों से जो जुड़ाव है, उससे कभी दूरी नहीं बनने देते हैं।”

अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान और भारत के रिश्तों पर बात की। उन्होंने समझाया कैसे दोनों देश सांस्कृतिक तौर पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “भारत और जापान स्वभाविक ढंग से साथ हैं। भारत की विकास यात्रा में जापान की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। जापान से हमारा रिश्ता आत्मीयता का है, आध्यात्म का है, सहयोग का है, अपनेपन का है।”

उन्होंने कहा कि दुनिया में जब कोरोना आया तो लोग सोच रहे थे कि वैक्सीन आएगी या नहीं लेकिन भारत ने उस वक्त में भी कई देशों को दवाइयाँ भेजीं। आज WHO ने आशा वर्कर्स को डायरेक्टर जनरल-ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड से सम्मानित किया है। पीएम ने चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा, “आजादी का ये अमृत काल भारत की समृद्धि का, भारत की संपन्नता का एक बुलंद इतिहास लिखने वाला है। मुझे जो संस्कार मिले हैं, जिन-जिन लोगों ने मुझे गढ़ा है उसके कारण मेरी भी एक आदत बन गई है। मुझे मक्खन पर लखीर खींचना नहीं पसंद आता, मैं पत्थर पर लकीर खींचता हूँ।”

पीएम बोले कि आज भारत जितना अपने अतीत पर गौरवान्वित महसूस करता है उतना ही तकनीक, विज्ञान, इनोवेशन, टैलेंट के नेतृत्व वाले भविष्य को लेकर भी आशावान है। पीएम के अनुसार, देश की क्षमता के निर्माण में जापान एक अहम भागीदारी निभा रहा है। फिर चाहे वो मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल हो, दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियर कॉरिडोर हो या डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर हो…ये सभी भारत जापान सहयोग के बड़े उदाहरण हैं।

देवी-देवताओं को अश्लील गालियाँ, भगवान राम और माँ काली पर आपत्तिजनक वीडियो: YouTube चैनलों की हिन्दूफोबिया, कार्रवाई की माँग

वीडियो प्लेटफॉर्म यू ट्यूब पर आए दिन कई ऐसे चैनल बनाए जाते हैं जिनपर धड़ल्ले से हिन्दू विरोधी या देवी-देवताओं, भगवानों को गाली देते हुए अभद्र और अश्लील सामग्री पोस्ट की जाती है। लेकिन अक्सर उनपर कोई भी प्लेटफॉर्म उतनी तीव्रता से एक्शन नहीं लेता जितना दूसरे मजहबों या धर्मों के मामले में ये प्लेटफॉर्म करते आए हैं।

अभी ट्विटर यूजर अंशुल सक्सेना ने जिन दो यू ट्यूब चैनलों की तरफ इशारा किया है उनके नाम में ही हिन्दुओं के खिलाफ घृणा और देवी-देवताओं को गाली दी गई है। एक चैनल का नाम जहाँ L&da Ra%d c$ud gaa& वहीं दूसरे चैनल का नाम RA*DI M*A K*LI OFFC*AL है। हालाँकि, यहाँ रिपोर्ट में दोनों नामों में गाली होने की वजह से उन्हें बीप किया गया है।

वहीं इन दोनों चैनलों की शिकायत करते हुए अंशुल सक्सेना ने यू ट्यूब चैनल को ट्विटर पर टैग करते हुए लिखा, “डियर @टीमयूट्यूब, ये 2 यूट्यूब चैनल हिंदुत्व के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। इन चैनलों के नाम भी हिंदू देवी-देवताओं को गाली दे रहे हैं।”

वहीं अंशुल सक्सेना के ट्वीट का यू ट्यूब ने जवाब देते हुए लिखा है, “संपर्क करने के लिए धन्यवाद – धर्म के आधार पर व्यक्तियों/समूहों के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देना हमारी हेट स्पीच नीति में शामिल है। साथ ही यू ट्यूब ने अपने ऑटोमेटेड सा फील होते जवाब में आगे लिखा है कि किसी भी चैनल को फ्लैग करने के लिए https://yt.be/help/Hjx4, उनके अबाउट टू टैब > रिपोर्ट यूजर > में जाना है फिर संरक्षित समूह के विरुद्ध हेट स्पीच जाएँ: https://yt.be/help/report-content . ऐसा करके यू ट्यूब ने पूरी प्रक्रिया तो जरूर बताई है लेकिन अभी वो दोनों चैनल प्लेटफॉर्म से हटाएँ नहीं गए हैं।

बता दें कि इन दोनों चैनलों पर भगवन राम, शिव, हनुमान और माँ काली के साथ बहुत से देवी-देवताओं और यहाँ कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ी अभद्र और एडिटेड कंटेंट खुलेआम मौजूद है।

वहीं यू ट्यूब को उसकी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कपिल पांडेय नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा है, “सबसे पहले, आपके प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट को मॉडरेट करना आपका व्यवसाय है। आपकी टीम को आपके इस प्लेटफॉर्म को और अधिक लोगों के अनुकूल बनाने के लिए पहले से ही ऐसा एक्शन लेते रहना चाहिए।”

बता दें कई दूसरे लोगों ने भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आधार पर सोशल मीडिया के वीडियो प्लेटफॉर्म यू ट्यूब से एक्शन की माँग की है।

दूसरे, यह रिपोर्टिंग आपके लिए उठाई गई चिंताओं पर गौर करने के लिए पर्याप्त क्यों नहीं है? और इस तरह से केवल ऑटोमेटेड जवाब भेजने के बजाय अपनी कमेंट्स और पॉलिसी के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करें।

वहीं अंशुल सक्सेना द्वारा इस शिकायत के बाद कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने दूसरे गालीबाज, हिन्दूफोबिया से ग्रसित और देवी देवताओं को गाली देने वाले या ऐसा ही अभद्र कंटेंट परोसने वाले कई चैनलों की काली करतूतों को उजागर किया है।

‘शाही ईदगाह के अंदर ही केशव देव मंदिर का गर्भगृह, पवित्र नदियों के जल से हो शुद्धिकरण’: मथुरा कोर्ट में नई याचिका, 1 जुलाई को सुनवाई

UP के मथुरा में बनी शाही ईदगाह मस्जिद के अंदर गर्भगृह होने का दावा किया गया है। एक वकील द्वारा याचिका दायर कर के शाही ईदगाह के शुद्धिकरण की भी माँग की है। यह याचिका 19 मई, 2022 (गुरुवार) को दायर हुई है। फिलहाल सिविल जज सीनियर डिवीजन ने इस याचिका पर अभी कोई फैसला नहीं सुनाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, याचिका दाखिल करने वाले व्यक्ति का नाम दिनेश कौशिक है। अपनी याचिका में उन्होंने शाही ईदगाह में गर्भगृह होने के दावे के साथ भगवान लड्डू गोपाल के अभिषेक की अनुमति माँगी है। इस से पहले 26 फरवरी 2021 को सिविल जज सीनियर डिवीजन की ही अदालत में वादी ने अपने वकील दीपक शर्मा के माध्यम से शाही ईदगाह को श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की जमीन पर बना बताते हुए हटाने की माँग की थी।

वादी दिनेश ने अपनी याचिका में यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड, इंतजामिया कमेटी शाही मस्जिद ईदगाह, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया गया है। इस याचिका में शाही ईदगाह के अंदर कटरा केशवदेव मंदिर बताया गया है। साथ ही उसके गर्भगृह को गंगा और यमुना के जल से शुद्ध करने की भी माँग रखी गई है। अदालत ने इस केस की अगली सुनवाई 1 जुलाई, 2022 को रखी है।

गौरतलब है कि इसी मई महीने में मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थली के पास स्थित प्रसिद्ध शाही ईदगाह मस्जिद को सील करने की याचिका सिविल कोर्ट ने स्वीकार कर ली थी। याचिका में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटी शाही ईदगाह मस्जिद की सुरक्षा बढ़ाए जाने के साथ ही वहाँ आने-जाने पर रोक और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की माँग की गई थी। बाद में इसी याचिका में माँग की गई है कि न सिर्फ शाही ईदगाह मस्जिद में सुरक्षा कड़ी की जाए, बल्कि अंदर आने-जाने पर भी रोक लगे और इसके लिए एक विशेष सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति की जाए।

वादी महेंद्र प्रताप का कहना था कि अगर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के अवशेषों के साथ छेड़छाड़ की गई तो इस स्थल का चरित्र बदल जाएगा और फिर इसकी मुक्ति के लिए जो मामला न्यायालय में चल रहा है, उसका कोई आधार ही नहीं रह जाएगा।

जाँच के लिए राजस्थान पुलिस के समक्ष पेश हों पत्रकार अमन चोपड़ा: HC का आदेश, मंदिर पर चला था बुलडोजर तो किया था शो

राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने ‘न्यूज18’  के पत्रकार अमन चोपड़ा (Aman Chopra) को 27 मई 2022 को जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। उनसे ‘देश झुकने नहीं देंगे’ नामक शो प्रसारित करने और बाद में ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट के लिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर से संबंधित पूछताछ की जाएगी।

‘लाइव लॉ’ वेबपोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने आदेश दिया है कि अमन चोपड़ा को सुबह 10:30 से शाम 5:00 बजे के बीच होने वाली पूछताछ के बीच लंच आदि के लिए 45 मिनट का ब्रेक दिया जाएगा। राजस्थान पुलिस का आरोप है कि कि अमन के ‘देश झुकने नहीं देंगे’ शो के बाद 22 अप्रैल को अलवर में कथित तौर पर सांप्रदायिक वैमनस्य और सांप्रदायिक दंगे हुए थे।

गौरतलब है कि इससे पहले 11 मई को राजस्थान हाई कोर्ट ने पत्रकार अमन चोपड़ा को राजस्थान के जोधपुर हाई कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा था कि अगले आदेश तक अमन चोपड़ा की गिरफ्तारी नहीं हो सकती। बता दें कि उनके खिलाफ राजस्थान में धार्मिक भावनाएँ भड़काने का मामला दर्ज किया गया है। राजस्थान के अलवर में जिस तरह से मंदिरों पर बुलडोजर चलाया गया और प्रतिमाएँ फेंक दी गईं, उस पर शो करने के कारण उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। शिकायत में कहा गया कि अमन चोपड़ा ने अपने शो में झूठ और काल्पनिक जानकारी देकर यह साबित करना चाहा था कि अलवर में जो मंदिर गिराया गया, उसके पीछे राज्य सरकार का हाथ था और ऐसा जहाँगीरपुरी हिंसा का बदला लेने के लिए किया गया था।

बता दें कि अमन चोपड़ा के प्रोग्राम को लेकर उनके खिलाफ लेकर तीन अलग-अलग जिलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। ये एफआईआर अलवर के कोतवाली, बूंदी के सदर और डूंगरपुर के बिछवाड़ा थाने में दर्ज की गई थी। इनमें अलवर और बूंदी थाने में दर्ज एफआईआर के खिलाफ पेश याचिका पर सुनवाई करते हुए जयपुर बेंच कोर्ट ने अमन चोपड़ा को राहत देते हुए अग्रिम आदेश तक पहले ही गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। तीसरी एफआईआर में भी अमन चोपड़ा को राहत मिल गई थी।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान पुलिस रविवार (8 मई, 2022) को अमन चोपड़ा को गिरफ्तार करने नोएडा पहुँची थी। इससे पहले शनिवार (7 मई 2022) को राजस्थान पुलिस उस सोसाइटी में घुस गई, जहाँ अमन चोपड़ा रहते हैं और उनके दरवाजे पर वॉरंट चिपका दिया। ये सब तब हुआ, जब राजस्थान उच्च-न्यायालय ने ‘न्यूज़ 18’ के एडिटर अमन चोपड़ा के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से पुलिस को रोक रखा था। उनके घर के दरवाजे पर गिरफ़्तारी का वॉरंट चिपकाने के बाद राजस्थान पुलिस को यूपी पुलिस थाने लेकर गई। इस दौरान अमन चोपड़ा के घर का ताला बंद था।

इससे पहले राजस्थान पुलिस ने ‘न्यूज़ 18’ के दफ्तर में जाकर भी इस तरह की हरकतें की थीं और बाद में बयान दिया था कि अमन चोपड़ा उन्हें नहीं मिले। उनके खिलाफ राजस्थान में धार्मिक भावनाएँ भड़काने का मामला दर्ज किया गया है।