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सुमैया से प्रेम करने पर मिथुन ठाकुर की निर्मम हत्या: भाई साकिर ने घर जाकर इतना पीटा, ब्रेन हैमरेज से हो गई मौत

गुजरात के राजकोट में एक हिंदू युवक को मुस्लिम लड़की से प्यार करने की खौफनाक सजा मिली है। यहाँ 22 वर्षीय मिथुन ठाकुर की प्रेमिका सुमैया के भाई और घरवाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे, जिसके चलते उन्होंने युवक को बेरहमी से पीट-पीट कर मार डाला। वहीं सुमैया को जब अपने प्रेमी की मौत की खबर मिली तो उसने भी अपने हाथ की नस काटकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। हालाँकि, उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी जान बच गई है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मिथुन ठाकुर बिहार के रहने वाले थे। वह एक स्थानीय कारखाने में काम करते थे। ठाकुर पिछले कुछ महीनों से 18 वर्षीय लड़की सुमैया कादिवार के साथ रिश्ते में थे। वे जंगलेश्वर मेन रोड स्थित राधा कृष्ण सोसाइटी में एक ही मोहल्ले में रहते थे। इसी दौरान दोनों नजदीक आए और दोनों को प्यार हो गया। उन्होंने शादी करने का फैसला भी लिया था।

बताया जा रहा है कि सोमवार (9 मई 2022) को मिथुन ठाकुर ने सुबह करीब 10 बजे सुमैया को उसके मोबाइल फोन पर कॉल किया, तभी उसके भाई साकिर ने फोन उठाया। उसने फोन पर ठाकुर को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और कहा कि वह उसकी बहन सुमैया से दूर रहे।

धमकी देने के बाद साकिर अपने साथ तीन और लोगों को लेकर मिथुन के घर पहुँचा और उसको बेरहमी से पीटा। पड़ोसियों में से एक ने उसे घर में बेहोश पड़ा देखा, तो वे उसे राजकोट सिविल अस्पताल ले गए। जहाँ उसकी गंभीर हालत को देखते हुए और ब्रेन हेमरेज के कारण अहमदाबाद रेफर कर दिया गया। ठाकुर ने बुधवार (11 मई 2022) को अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में दम तोड़ दिया।

सुमैया को जब ठाकुर की मौत की जानकारी हुई तो उसने भी अपनी कलाई काट कर आत्महत्या करने की कोशिश की, जिसके बाद उसे भी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी जान बच गई।

बता दें कि सुमैया के अम्मी-अब्बू का तलाक हो चुका है। उनकी अम्मी भी एक निजी कंपनी में मजदूरी करती हैं। मिथुन ठाकुर और उनके पिता बिपिन राजकोट में रहते थे और एक कारखाने में काम करते थे। भक्तिनगर थाने के निरीक्षक एलएल चावड़ा ने कहा, “हमने युवक के पिता की शिकायत पर साकिर और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया है।”

IPL के इस सीजन में अब तक 3 गोल्डन डक लगा चुके हैं विराट कोहली, कहा – ‘आलोचकों से निपटने के लिए TV म्यूट कर देता हूँ’

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मौजूदा सीज़न में आरसीबी के खिलाड़ी विराट कोहली के रनों की रफ्तार कछुए से भी धीमी है। आउट ऑफ फॉर्म चल रहे कोहली ने आईपीएल में अब तक 12 मैचों में कुल 216 रन ही बनाए हैं। वहीं एक सप्ताह के अंदर ही सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ खेलते हुए तीसरा गोल्डन डक (कोई खिलाड़ी पहली गेंद पर ही आउट हो जाता है तो वो गोल्डन डक होता है।) हासिल किया। वहीं इस टूर्नामेंट में ये उनका छठा गोल्डन डक था।

अब तक केवल एक बार इस सीजन में कोहली ने 50 रनों की पारी खेली है। हालाँकि, सीमित ओवरों में इस प्रारूप में वो 10,000 रनों के साथ भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक हैं। इससे पहले, कोहली 2008 में मुंबई इंडियंस के खिलाफ, 2014 में पंजाब किंग्स के खिलाफ, 2017 में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ, 2022 में लखनऊ सुपर जायंट्स और सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ गोल्डन डक रिकॉर्ड किया था।

इस आईपीएल के सीजन में तीसरी बार गोल्डन डक का रिकॉर्ड बनाने वाले 13वें खिलाड़ी हैं। इस लिस्ट में अमित मिश्रा, आशीष नेहरा, सुरेश रैना, राशिद खान, रोहित शर्मा और नीतीश राणा समेत कई अन्य भी शामिल हैं। इस बीच भारतीय टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने पूर्व कप्तान विराट कोहली (33) को कुछ समय के लिए क्रिकेट से ब्रेक लेने का सुझाव दिया है, ताकि वो फिर से खुद को एक्टिवेट कर सकें।

इसी तरह से इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज केविन पीटरसन ने कहा कि कोहली को खुद को फिर से सक्रिय करने के लिए सोशल मीडिया से अपना ध्यान हटाने की सलाह दे डाली है।

आलोचकों से बचने के लिए टीवी म्यूट कर देते हैं कोहली

आउट-ऑफ-फॉर्म विराट कोहली को लेकर कमेंटेटर्स का कहना है कि आमतौर पर अगर कोई बल्लेबाज ‘ओवरकुक’ हो जाता है तो उसे एक ब्रेक देने की जरूरत होती है।

उनका विश्लेषकों के बारे में कहना है, “वे मेरे जूते में नहीं हो सकते हैं, वे वो महसूस नहीं कर सकते कि मैं क्या महसूस करता हूँ, वो मेरी जिंदगी नहीं जी सकते हैं, वे उन पलों को नहीं जी सकते हैं।” कोहली ने आलोचकों को लेकर कहा, “आप शोर से कैसे निपटते हैं? आप या तो टीवी को म्यूट कर देते हैं या लोग जो कह रहे हैं उस पर ध्यान नहीं देते। मैं ये दोनों चीजें करता हूँ।”

हालाँकि, इस तरीके से गोल्डन के शिकार हो रहे कोहली का कहना है कि इससे पहले उनके करियर में ऐसा कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है। मैंने अब सब कुछ देखा है। यह बहुत लंबा रहा है, मैंने इस खेल में सब कुछ देखा है।”

चलती विमान में बेहोश हो गया पायलट, फिर एक यात्री ने उड़ाई फ्लाइट: लैंड कराने में भी हुआ सफल, कहा था- मुझे नहीं आता प्लेन उड़ाने

बिना उड़ान के अनुभव वाले एक विमान यात्री के द्वारा हवाई जहाज उतारने का एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है। मामला फ्लोरिडा का है जहाँ बहमास से फ्लोरिडा के लिए सेसना 208 कारवां नामक हलके विमान को एक यात्री ने हवाई यातायात नियंत्रक की मदद से सुरक्षित रूप से उतारा, ऐसा तब करना पड़ा जब पायलट को एक चिकित्सा आपात स्थिति का सामना करना पड़ा और वह बेहोश हो गया था। मामला मंगलवार (10 मई, 2022) का है।

मेल ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, यात्री को एयर ट्रैफिक कंट्रोल को कहते हुए सुना जा सकता है, “यहाँ मेरी स्थिति गंभीर है। मेरा पायलट असंगत हो गया है। मुझे नहीं पता कि हवाई जहाज कैसे उड़ाया जाता है।”

इसके जवाब में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने उत्तर दिया, “रोजर, आपकी स्थिति क्या है?”

अनाम यात्री ने कहा, “मुझे नहीं पता। मैं अपने सामने फ्लोरिडा का तट देख सकता हूँ। और मुझे कोई अंदाजा नहीं है।”

फोर्ट पियर्स में हैरान अधिकारी ने यात्री से कहा कि वह उसे लोकेट करने की कोशिश कर रहे हैं।

आगे उन्होंने कहा, “पंखों के स्तर को बनाए रखें और उत्तर या दक्षिण की ओर, तट की दिशा को फॉलो करते रहें। हम आपका पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।”

करीब चार मिनट के ऑडियो में पूरा वार्तालाप है। जिसे ट्वीट में सुना जा सकता है।

आगे अनाम यात्री पूछता है, “क्या आप लोगों ने मुझे अभी तक लोकेट कर लिया है।”

‘मुझे अपनी एनएवी स्क्रीन चालू करने के लिए नहीं दिख रहा है। आप लोगों के पास इसकी पूरी जानकारी है।’

मजेदार बात यह है कि पायलट बने उस अनाम आदमी यात्री को अंततः बोका रैटन के तट से उड़ते हुए लोकेट कर लिया गया, और पाम बीच हवाई अड्डे पर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने उससे बात करने में कामयाबी हासिल की, जिससे उसे आगे विमान को कैसे उतारा जाए। यह समझाया गया।

वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एबीसी न्यूज के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि इसमें शामिल नियंत्रक एक प्रमाणित फ्लाइट इंस्ट्रक्टर था, जिसे सेसना एयरक्राफ्ट के साथ काम करने का अनुभव था, जिसने कॉकपिट का एक लेआउट प्रिंट किया, और इसका इस्तेमाल यात्री को विमान के उड़ान और लैंडिंग की पूरी प्रणाली को समझाने के लिए किया।

कुलमिलाकर कहा जा रहा है कि थोड़ी सी सूझबूझ और समझदारी की वजह से लैंडिंग बेशक थोड़ी लड़खड़ाने वाली थी, लेकिन सुरक्षित रही।

वहीं विमान के लैंड करते ही पायलट को अस्पताल ले जाया गया, हालाँकि उसकी स्थिति के बारे में अभी कोई नई सूचना नहीं है।

देशद्रोह कानून पर राहुल गाँधी ने अलापा राग तो रिजिजू ने दिया करारा जवाब – ‘FOE को कुचलने में इंदिरा गाँधी थीं गोल्ड मेडलिस्ट’

सर्वोच्च न्यायालय ने देशद्रोह कानून के इस्तेमाल पर रोक लगा दिया है। इसको लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। इसी क्रम में बुधवार (11 मई, 2022) को शीर्ष अदालत के फैसले पर एक ट्वीट कर राहुल गाँधी ने लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और देशभक्ति की बात की। इसके जरिए उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने लिखा, “सच बोलना देशभक्ति है, देशद्रोह नहीं। सच कहना देश प्रेम है देशद्रोह नहीं। सच सुनना राजधर्म है, सच को कुचलना राजहठ है। डरो मत!” इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशद्रोह कानून पर रोक लगाने वाला टीओआई का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया।

राहुल गाँधी के लोकतंत्र पर इस ज्ञान के बाद केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने उनपर करार पलटवार किया। रिजिजू ने कई सारे ट्विटर थ्रेड शेयर कर कहा, “राहुल गाँधी के खोखले शब्द। अगर कोई एक पार्टी है जो स्वतंत्रता, लोकतंत्र और संस्थानों के सम्मान की विरोधी है, तो वह भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस है। यह पार्टी हमेशा भारत को तोड़ने वाली ताकतों के साथ खड़ी रही है और भारत को विभाजित करने का कोई मौका नहीं छोड़ा है।”

अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “पहला संशोधन कौन लाया? पंडित जवाहरलाल नेहरू के अलावा कोई नहीं! यह श्यामा प्रसाद मुखर्जी और जनसंघ थे जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कम करने के उनके उद्देश्यों के खिलाफ खड़े थे। नेहरू जी ने केरल में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को भी बर्खास्त कर दिया था।”

इंदिरा गाँधी का जिक्र कर दिया करारा जबाव

रिजिजू यहीं नहीं रुके, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर राहुल के लेक्चर पर उन्हें उनकी दादी इंदिरा गाँधी द्वारा देश पर थोपे गए आपातकाल की याद दिला दी। रिजिजू ने कहा कि जहाँ तक फ्रीडम ऑफ स्पीच को कुचलने की बात है तो इसमें श्रीमती इंदिरा गाँधी तो गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। आपातकाल के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं उन्होंने 50 से भी ज्यादा बार अनुच्छेद 356 लगाया था और वो संविधान के तीसरे स्तंभ न्यायपालिका को कमजोर करने के इरादे से ही आई थीं।

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, वो शख्स इंदिरा गाँधी ही थीं, जिन्होंने देश के इतिहास में पहली बार धारा 124ए को संज्ञेय अपराध बनाया था। ये एक नई आईपीसी थी, जो कि 1973 में अस्तित्व में आई और 1974 में लागू हो गई। बीजेपी नेता के मुताबिक, कॉन्ग्रेस का देशद्रोह का केस दर्ज कराने में सबसे घटिया रिकॉर्ड रहा है। 2012 में पी चिदंबरम के मंत्री रहते हुए हजारों लोगों पर देशद्रोह के केस दर्ज किए गए थे।

अमिताभ बच्चन ने शेयर कर के डिलीट किया ‘धाकड़’ का वीडियो, कंगना रनौत ने पूछा – इतने बड़े कद के व्यक्ति पर किसका दबाव?

अमिताभ बच्चन ने ‘धाकड़’ दिलम का ट्रेलर शेयर करने के बाद इसे डिलीट कर लिया। कंगना रनौत ने इसके पीछे का कारण असुरक्षा की भावना और बॉयकॉट का डर को करार दिया। सोशल मीडिया पर अमिताभ बच्चन का वो ट्वीट वायरल भी हो रहा है, जिसमें उन्होंने ‘धाकड़’ के ट्रेलर का यूट्यूब लिंक शेयर कर के फिल्म से जुड़े ढेर सारे हैशटैग्स लगाए हैं और ‘ऑल द बेस्ट’ लिखा है। लेकिन, बाद में उन्होंने इसे डिलीट कर लिया।

बुजुर्ग अभिनेता द्वारा ऐसा किए जाने पर अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में संपन्न हुए ‘ALT Balaji’ और ‘MX Player’ पर प्रसारित शो ‘Lock Upp’ की होस्ट रहीं कंगना रनौत ने कहा कि बॉलीवुड में कुछ व्यक्तिगत असुरक्षा की भावनाएँ हैं, और सभी इस बात के पीछे छिपने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें बॉयकॉट किया जाएगा। कंगना रनौत से पूछा गया था कि ‘धाकड़’ ट्रेलर को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिलने के बावजूद बॉलीवुड सेलेब्स इसकी तारीफ़ क्यों नहीं कर रहे हैं।

खबर लिखे जाने तक ‘धाकड़’ के ट्रेलर को 3.53 करोड़ लोग देख चुके थे। इसे 29 अप्रैल, 2022 को रिलीज किया गया था। वहीं यूट्यूब पर रिलीज किए गए फिल्म के गाने ‘She’s On Fire’ को भी ढाई करोड़ से अधिक लोगों ने देखा है। इस गाने में रैपर बादशाह भी हैं। ‘धाकड़’ में अर्जुन रामपाल भी मुख्य भूमिका में हैं। उनके अलावा दिव्या दत्ता और महाअक्षय चक्रवर्ती जैसे कलाकार भी फिल्म में नजर आएँगे। फिल्म 20 मई, 2022 को रिलीज होगी।

कंगना रनौत ने अमिताभ बच्चन द्वारा ‘धाकड़’ का टीजर ट्रेलर शेयर कर के डिलीट किए जाने पर पूछा कि इतने बड़े कद के व्यक्ति पर आखिर किसका दबाव है? उन्होंने कहा कि उन्हें इसके बारे में नहीं पता है, लेकिन ये हैरान करने वाला वाकया है। कंगना रनौत ने कहा कि अमिताभ बच्चन जैसे सुपरस्टार पर किसका दबाव होगा, ये समझना काफी कॉम्पिकेटेड है। उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन ने सिर्फ 5-10 मिनट में ही इसे शेयर कर के डिलीट कर दिया था।

‘जयपुर राजघराने की जमीन पर बना है ताजमहल’: राजकुमारी दीया कुमारी बोलीं- ‘सारे दस्तावेज मौजूद हैं, कोर्ट ने माँगा तो सौपेंगे’

ताजमहल को लंबे वक्त से मंदिर बताया जाता रहा है। वहीं इसके गेट को खोलने के लिए एक याचिका दायर की गई है। इस बीच आगरा के ताजमहल को लेकर जयपुर के राजघराने की सदस्य और बीजेपी से सांसद दीया कुमारी ने दावा किया है कि जिस जगह पर ताजमहल स्थित है वो जमीन उनकी थी। बीजेपी सांसद का कहना है कि ताजमहल वाली जगह पर उनका महल था।

दीया कुमारी ने ताजमहल के बंद दरवाजों को खोलने के लिए दायर की गई याचिका की तारीफ करते हुए कहा कि इससे सच निकलकर बाहर आएगा। इसके साथ ही उन्होंने ये भी दावा किया है कि उनके पास ऐसे डॉक्यूमेंट्स हैं, जिससे ये साबित होता है कि ताजमहल जयपुर के पुराने शाही परिवार का पैलेस था। इस पर मुगल आक्रान्ता ने कब्जा कर लिया था, लेकिन उस दौरान मुगल शासन के कारण राज परिवार इसका विरोध नहीं कर पाया।

बीजेपी सांसद कहती हैं कि वो ये तो नहीं कहेंगी कि ताजमहल को तोड़ देना चाहिए। लेकिन ताजमहल के बंद कमरों को खोलना चाहिए। इसके कुछ हिस्से लंबे वक्त से सील हैं, जिनकी जाँच होनी चाहिए। इनके कमरों को खोलना चाहिए, ताकि सच का पता चल सके कि वहाँ पर क्या था और क्या नहीं। जब इसकी सही तरीके से जाँच होगी तो सभी तथ्य इस्टैब्लिश हो सकेंगे।

पोथी खाने में मौजूद हैं डॉक्यूमेंट्स

दीया कुमारी ने कहा है कि उनके डॉक्यूमेंट्स ट्रस्ट के पोथी खाने में ताजमहल को लेकर सारे डॉक्यूमेंट्स अभी भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों से ये स्पष्ट होता है कि वो जमीन जयपुर राजघराने की थी। मुगल शासन के दौरान वो पैलेस शाहजहाँ को पसंद आ गया था, जिसके बाद उसने उसपर कब्जा कर लिया था। हालाँकि, वहाँ पर मंदिर था या नहीं इसको लेकर उनका कहना है कि अभी तक सारे दस्तावेजों को पढ़ा नहीं गया है। उन्होंने ये भी कहा कि अगर कोर्ट इन दस्तावेजों को माँगेगा तो वो उन्हें वो सबूत देंगी।

ऐसा ही बयान 2017 में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने दिया था। उन्होंने दावा किया था कि जयपुर के महाराजा को शाहजहाँ ने मजबूर किया था।

क्या है ये विवाद

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में डॉ रजनीश ने ताजमहल के बंद दरवाजों को खोलने को लेकर य़ाचिका दायर की थी। रजनीश अयोध्या जिले में बीजेपी के मीडिया इंचार्ज हैं।

मुश्किल से मिलती थी दो वक्त की रोटी, आज दुनिया ‘किसान चाची’ के नाम से जानती है: मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक कर चुके हैं तारीफ

बिहार की किसान चाची आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। लाखों महिलाओं की रोल मॉडल हैं। तो चलिए आज आपको किसान चाची की ही कहानी बताते हैं। ये कहानी आपको निजी जीवन में बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को झेलने की प्रेरणा देगी। इसके अलावा आपके अंदर एक आत्मविश्वास भी भर देगी। किसान चाची जिनका असली नाम राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) है। लेकिन आज पूरा देश उन्हें किसान चाची के नाम से जानता है। किसान चाची मूल रूप से मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड के आनंदपुर की रहने वाली हैं। किसान चाची ने महिलाओं के बीच स्वावलंबन की ऐसी अलख जगाई है कि आज पूरे देश में उनके चर्चे हैं।

बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली राजकुमारी देवी ने अपने बुलंद हौसले के दम पर न सिर्फ सामाजिक बंधनों का विरोध किया, बल्कि उन्होंने अपनी मेहनत से बड़ी संख्या में महिलाओं की तकदीर को भी बदलने का काम किया। मुजफ्फरपुर के सरैया ब्लॉक से अपने सफर की शुरुआत करने वाली किसान चाची के नाम से मशहूर राजकुमारी देवी को उनके कामों के लिए सरकार ने पद्मश्री से भी सम्मानित किया।

इस सफर को तय करने के लिए ‘किसान चाची’ को काफी सामाजिक और पारिवारिक बाधाओं का सामना करना पड़ा, जहाँ एक वक्त पराए तो दूर अपनों ने भी उन्हें अकेला छोड़ दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने सामाजिक बंधन की खिलाफत करते हुए अपने जमीन पर खेती करने का निश्चय किया और समाज व परिवार के सारे लोगों के विरोध के बाद भी वो निरंतर आगे बढ़ती रहीं।

कच्ची पगडंडियों पर मीलों साइकिल चलाकर किसानों के बीच जागरूकता की अलख जगाने वाली राजकुमारी ने अब तक पुरुषों का कार्यक्षेत्र माने जाने वाले कृषि में एक नई क्रांति का आगाज किया है। उन्नत तकनीक एवं मिट्टी की गुणवत्ता की अच्छी परख रखने वाली किसान चाची आज सफल खेती का दूसरा नाम और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। चेहरे पर उम्र के निशान, लेकिन हाथ में हिम्मत की लाठी और दिल में कुछ नया करने का जज्बा लिए आज जब वह पीछे मुडक़र देखती हैं, तो उन्हें हजारों सफल किसानों एवं आत्मनिर्भर महिलाओं के मुस्कुराते चेहरे नजर आते हैं। 

उन्होंने सैकड़ों महिलाओं को न केवल खेती में उतारा, बल्कि उन्हें यह जानकारी दी कि खेती को लाभकारी कैसे बनाया जाए। नई तकनीक की जानकारी हासिल कर उन्हें दूसरे किसानों के साथ साझा करने के लिए वह कहीं भी जाने को तैयार रहती हैं। राजकुमारी की उपलब्धियों को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें 2006 में ‘किसान श्री’ सम्मान से नवाजा और एक लाख रुपए की धनराशि प्रदान की। वह सरैया कृषि विज्ञान केंद्र की सलाहकार समिति एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन की सदस्य हैं। किसान चाची अब तक दर्जनों पुरस्कार पा चुकी हैं। उन पर केंद्र सरकार के कृषि विभाग द्वारा डॉक्यूमेंट्री भी बनाया जा चुका है। यहीं से उनका नाम ‘किसान चाची’ पड़ा। वह वाइब्रेंट गुजरात-2013 में आमंत्रित की गईं और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर उनका फूड प्रोसेसिंग मॉडल सरकारी वेबसाइट पर डाला गया। 2015 और 2016 में अमिताभ बच्चन ने उन्हें केबीसी में भी बुलाया था।

किसान चाची का जन्म शिक्षक पिता के घर में हुआ था। उस समय कम उम्र में शादी हो जाती थी, इसलिए मैट्रिक पास होते ही 1974 में उनकी शादी एक किसान परिवार में अवधेश कुमार चौधरी से कर दी गई। शादी के बाद वह अपने परिवार के साथ आनंदपुर-सरैया गाँव में रहने लगीं। राजकुमारी शिक्षक बनना चाहती थीं, 1980 में उन्होंने बाकायदा इसकी ट्रेनिंग भी ली, लेकिन परिवार और समाज के विरोध के चलते वह नौकरी नहीं कर सकीं। शादी के नौ साल तक संतान न होने और पति की बेरोजगारी के चलते घर की दहलीज से बाहर कदम रखने वाली राजकुमारी परिवार एवं समाज से बहिष्कृत कर दी गईं।

वह कहती हैं कि करीब 15 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी। शिक्षक पिता ने प्यार से पाला था, लेकिन ससुराल में स्थिति ठीक उलट थी। जब तक कुछ समझते, परिवार ने हमें अलग कर दिया। केवल जमीन से परिवार चलाना संभव नहीं था। 1983 में जब बेटी का जन्म हुआ, तब भी ताने मिले। 1990 में चौधरी के चार भाइयों में बंटवारा हुआ और हमारे हिस्से में केवल ढाई बीघा जमीन आई। परिवार में तंबाकू की खेती करने की परंपरा थी, जिसे तोड़ते हुए उन्होंने आर्थिक तंगी की हालत में कुछ नया करने की ठानी।

वर्ष 1990 में परंपरागत तरीके से खेती करते हुए वैज्ञनिक तरीके को अपनाकर अपनी खेती-बाड़ी को उन्नत किया। इसके बाद उन्होंने अचार बनाने की शुरुआत की। साल 2000 से उन्होंने घर से ही अचार बनाना शुरू किया जो आज किसान चाची की अचार के नाम से पूरे देश में प्रसिद्ध हैं।

उन्होंने खुद को खड़ा करने के बाद अन्य महिलाओं की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के लायक बनने के लिए तैयार किया। शुरुआती दौर में उन्होंने आस-पास की महिलाओं के साथ जुड़कर खेती उपज से आम, बेल, निम्बू और आंवला आदि के आचार को बाजार में बेचना शुरू किया। इसके बाद धीरे-धीरे समहू में महिलाओं की संख्या बढ़ी और उनका क्षेत्र बढ़ता चला गया। अब तक वह 40 स्वयं सहायता समूहों का गठन कर चुकी हैं।

इस क्षेत्र में अपने पहल और योगदान के लिए उन्हें कई बार सामाजिक संगठनों, राज्य और केंद्र सरकार से भी समान्नित किया गया। वर्ष 2019 में उन्हें पद्मश्री सम्मान भी मिला। पद्मश्री राजकुमारी देवी (किसान चाची) ने बताया, “वर्ष 1990 में खेती करना शुरू किए फिर वर्ष 2000 से ब्लॉक में ट्रेनिंग हुआ तो हमने देखा कि कम पैसे में तो अचार बनाना ही बेहतर होगा इसलिए हम अचार बनाने के लिए ट्रेनिंग लिए। इसके बाद ‘ज्योति जीविका’ स्वयं सहायता समूह बनाकर 160 महिलाओं को जोड़ा और घर पर ही महिलाओं को काम मिलने लगा।”

वो बताती हैं कि अब वो 20 से ज्यादा किस्मों की आचार बनाती हैं, जिसकी सप्लाई दिल्ली के प्रगति मैदान, पटना खादी मॉल, विस्कॉमान सहकारिता विभाग तक होती है। वहीं इनके आचारों को लोकल बाजार और कई प्रदर्शनियों में भी देखा गया है। किसान चाची ने कहा, “महिलाओं को यही कहेंगी कि कोई काम छोटा नहीं होता है और उसमें बेहतर करने से एक दिन वही काम बड़ा हो जाता है।”

राजकुमारी ने अपने जैसी उन महिलाओं को साथ लिया, जो गरीब थीं, लेकिन कुछ करना चाहती थीं। उन्होंने अपने घर पर उन्हें खेती करने और अचार बनाने के तरीके सिखाए। समय के साथ उनके अचार और अन्य फूड प्रोडक्ट्स का व्यापार बढ़ता गया। आज भी उनके घर पर 10 महिलाएँ नियमित रूप से काम करके धनोपार्जन कर रही हैं। 

उनके समूह में काम करने वाली ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि पहले घर में रहते थे आज इनसे जुड़कर पैसा कमा रहे हैं। पहले घर पर थे, घर से बाहर नहीं निकलते थे। बाहर निकले तो यहाँ काम मिला जिसके बाद मोरब्बा अचार बनाने लगे, जिससे आमदनी होने लगी। वहीं, एक दूसरी महिला ने बताया कि घर में रहकर काम करते हुए अच्छी आमदनी होती है। कोई जरूरी नहीं कि बाहर गए तो काम मिल ही जाए और यहाँ तो निश्चित रूप से काम मिलता है।

बकौल राजकुमारी, महिलाएँ केवल खेत में मजदूरी करते हुए नजर आती थीं, उन्हें कृषि तकनीक का ज्ञान नहीं था और वे पुरुषों के बताए अनुसार ही काम करती थीं। उन्होंने सोचा कि जब हम महिलाएँ खेत में मेहनत करती ही हैं, तो क्यों न बेहतर कृषि तकनीक अपनाई जाए। किसान चाची की वजह से असंख्य महिलाओं की जिंदगी में बदलाव आया।

शुरुआती दिनों में जब वह साइकिल पर सवार होकर गाँव से बाहर निकलतीं, तो लोग आपस में कानाफूसी करते और उन्हें पागल करार देते। शादी के कई सालों तक संतान न होने के कारण वह पहले ही तिरस्कार झेल रही थीं, उस पर खेती और शुरू कर दी। परिवार और समाज ने उन्हें बहिष्कृत कर दिया, लेकिन उनके कदम नहीं रुके। उन्होंने खेती के साथ ही छोटे-मोटे कृषि उत्पाद बनाने शुरू किए। साइकिल उठाई और मेलों-बाजारों में एवं घर-घर जाकर उनकी बिक्री शुरू की। भूखे रहने पर न पूछने वाला समाज दो रोटी कमाने के इस तरीके पर और भी सख्त हो गया। पति भी नाराज। अवधेश चौधरी ने कहा कि साइकिल से सामान बेचना उन्हें अच्छा नहीं लगा।

आज स्थिति बहुत बदल गई है। गाँव के अलावा जिले और बाहर के लोग भी खेती के गुर सीखने के लिए उन्हें बुलाते हैं। 2003 के किसान मेले में उनके उत्पाद को पुरस्कार मिला। जनवरी 2010 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वैशाली प्रवास के दौरान उन्हें आमंत्रित किया और ‘रोल मॉडल’ की संज्ञा देते हुए कहा कि उनके जैसी महिला समाज में जागृति ला रही है। 14 मार्च 2010 को जब नीतीश सरैया प्रखंड में जैविक खाद प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने आए, तो  उन्होंने राजकुमारी के घर जाकर उनके उत्पादों एवं जैविक खेती का जायजा लिया। किसान चाची के यहाँ ओल, लीची, बेर, नींबू, आम, लहसुन, गोभी व गाजर का सुखौता, ओल की सेंवई, आलू चिप्स, गुलाब सीरप, ऑरेंज सीरप, पपीता जैम एवं आँवले का मुरब्बा देखकर उन्होंने उनके प्रयासों की प्रशंसा की। 

किसान चाची बताती हैं कि खेती-किसानी में महिलाएँ पुरुषों से ज्यादा काम करती हैं, इसके बाद भी महिलाओं को किसान का दर्जा नहीं मिलता। कृषि भूमि उनके नाम न होने से सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिलता। जिस दिन महिला किसान समृद्ध हो गईं, किसान परिवार खुशहाल हो जाएँगे। घरेलू उत्पादों की बिक्री और निर्यात को बढ़ावा मिले, बाजार उपलब्ध हो। पद्मश्री की घोषणा होने पर उनके घर बधाई देने वालों का ताँता लगा रहा। कोई खुद पहुँचा, तो कई लोगों ने फोन किए। उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी बधाई दी और कहा कि उन्हें पद्मश्री मिलने से पूरा बिहार गौरवांवित है।

किसान चाची ने देश के कई राज्यों में किसान महोत्सवों में अपने स्टॉल लगाए। उनकी सफलता कि कहानी अब पूरे देश को पता चल चुकी है और यही वजह है कि आज बिहार के सीएम से लेकर देश के पीएम और राष्ट्रपति तक किसान चाची की तारीफे करते हैं। किसान चाची ने वर्षों तक मेहनत करके बिहार समेत देश भर की बेटियों और महिलाओं को एक रास्ता दिया है, जो तमाम मुश्किलों से आपको निकाल सफलता के रास्ते पर ले जा सकता है।

Adidas ने ब्रा के विज्ञापन में 24 महिलाओं के नंगे स्तन दिखाए, बोला – ‘ये न्यूडिटी नहीं’: UK में किया गया बैन

जर्मनी की स्पोर्ट्स के सामान बनाने वाले कंपनी एडिडास (Adidas) अपने प्रचार के तरीकों को लेकर विवादों में घिर गई है। एडिडास ने स्पोर्ट्स ब्रा का विज्ञापन लॉन्च किया है, जिसमें कंपनी ने इसके प्रचार के लिए महिलाओं के नंगे स्तनों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया है। इस पर विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के इस प्रचार को यूके में बैन कर दिया गया है।

इसी साल फरवरी में पोस्ट किए गए एक ट्विटर थ्रेड में अलग-अलग रंगों वाली त्वचा, उनकी साइज और आकार के साथ 24 महिलाओं के स्तनों को दिखाया गया था। एडिडास ने विज्ञापन में कहा था, “हमारा मानना ​​है कि सभी साइज और आकार की महिलाओं के स्तनों को सपोर्ट और आराम की आवश्यकता है। इसीलिए हमारी नई स्पोर्ट्स ब्रा रेंज 43 तरीके में है, ताकि हर कोई अपने लिए सही फिट ढूँढ सके।”

फोटो साभार: डेली मेल

इसके साथ ही दो अन्य पोस्टरों में महिलाओं के स्तनों की इमेज को क्रॉप कर दिखाया गया है। इसके पीछे कंपनी तरफ से तर्क दिया गया है कि इसी कारण उसने केवल एक नई स्पोर्ट्स ब्रा नहीं बनाई।

एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी का फैसला

यूके की एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (ASA) ने कहा है कि इसे इस मामले में 24 शिकायतें मिलीं हैं, जिनमें ये कहा गया है कि इन विज्ञापनों में बेवजह महिलाओं की नग्नता को दिखाया गया है, ये उनका यौन शोषण है। ऐसा करके उनका अपमान किया गया है। हालाँकि, एएसए का कहना है कि वो ये नहीं मानता कि जिस तरह से महिलाओं को दिखाया गया है, वो यौन शोषण या अपमानजनक है। हालाँकि, इसे स्पष्ट रूप से न्यूडिटी को बढ़ावा देने के रूप में देखा जा सकता है।

अथॉरिटी ने दो पोस्टरों का जिक्र करते हुए कहा, “हम ये मानते हैं कि ये इमेज टार्गेट की गई मीडिया के लिए सही नहीं है। क्योंकि इसे बच्चे भी देख सकते थे। हमने निष्कर्ष निकाला कि (पोस्टर) अनुपयुक्त रूप से टार्गेटेड थे औऱ इससे अपराध होने की आशंका थी।” एएसए ने एडिडास के इन विज्ञापनों को नियमों के खिलाफ बताया है। हमने एडिडास यूके को कहा है कि अब ये विज्ञापन दोबारा से शिकायत वाले रूप में नहीं दिखना चाहिए।”

एडिडास यौन हिंसा मानने से कर रहा इनकार

हालाँकि, एडिडास ने इसे किसी भी तरह से न्यूडिटी अथवा महिलाओं का अपमान मानने से इनकार कर दिया है। उसने एक बयान में कहा कि स्तनों की यै गैलरी ये क्रिएटिव करने और ये दिखाई के लिए लगाई गई कि अलग-अलग साइज और आकार के स्तन कितने विवध हैं। कंपनी ने ये भी कहा कि इसमें जिन किसी भी मॉडल्स को शामिल किया गया है, उनकी पहचान और उनकी सुरक्षा के मद्देनजर इमेज को क्रॉप किया गया है। एडिडास का दावा है कि सभी मॉडल्स अपनी स्वेच्छा से इस विज्ञापन में शामिल हुई थीं औऱ वो इसके उद्देश्य का समर्थन करती हैं।

इसे सेक्सुअल या अश्लील मानने से इनकार करते हुए एडिडास ने कहा कि वो केवल एक महिला के शरीर के हिस्से के रूप में स्तनों को दिखाना चाहता था। वहीं ट्विटर ने भी महिलाओं के स्तनों को दिखाने वाले विज्ञापन को शर्तों का उल्लंघन नहीं माना है।

मैरिटल रेप पर नहीं आ सका फैसला, दो फाड़ हुए HC के जज: ‘वेश्या’ वाली दलील पर भी हुई थी सुनवाई, गेंद अब SC के पाले

मैरिटल रेप को अपराधिक बनाने के लिए आज (11 मई 2022) दिल्ली हाईकोर्ट से फैसला आने वाला था, लेकिन न्यायधीशों के अलग-अलग मत होने की वजह से ऐसा नहीं संभव हो पाया। जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस हरिशंकर ने इस मुद्दे पर अलग-अलग राय दीं। अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश राजीव शकधर ने कहा– “ये IPC की धारा 375 और आर्टिकल 14 का उल्लंघन है। इसलिए पत्नी से जबरन संबंध बनाने पर पति को सजा दी जानी चाहिए।” वहीं जस्टिस सी हरिशंकर ने इस मुद्दे पर कहा वो राजीव शकधर से सहमत नहीं है और नहीं मानते हैं कि ये अपवाद असंवैधानिक है।

बता दें कि दोनों जजों की राय अलग-अलग होने के कारण इस विवाद पर कोई फैसला नहीं आ सका। अब आगे याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में अपील डाल सकते हैं।

मैरिटल रेप को लेकर माँग

मैरिटल रेप को आपराधिक घोषित किए जाने के लिए 2015 से आवाज उठती रहीं। माँग की गई कि मैरिटल रेप को आपराधिक घोषित करने के लिए धारा 375 के उस अपवाद को खत्म किया जाए, जो कहता है कि अगर पत्नी 15 साल से ऊपर है तो मैरिटल रेप अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा।

दिल्ली कोर्ट ने ऐसी याचिकाओं पर गौर करते हुए इसी वर्ष की शुरुआत में आरआईटी फांउडेशन और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन्स एसोसिएशन की याचिकाओं पर संज्ञान लिया था। कोर्ट ने कहा था कि आखिर विवाहित महिलाओं को अपने पति को न कहने के अधिकार से कैसे वंचित रखा जा सकता है जबकि अन्य सभी गैर-सहमति वाले मामले में रेप का केस दर्ज हो सकता है।

सुनवाई के दौरान भी नहीं मिला था जजों का मत

केस की सुनवाई के शुरुआत में ही जस्टिस राजीव शकधर ने इस दलील को माना था कि एक वेश्या को भी हक होता है कि वो अपने ग्राहक को मना करे तो आखिर महिला जो कि पत्नी है उसे पति को मना करने के अधिकार से कैसे दूर किया जा सकता है। जबकि जस्टिस सी हरि शंकर ने एक वेश्या और ग्राहक के रिश्ते की तुलना पति-पत्नी के रिश्ते से करने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि ग्राहक की जो उम्मीद सेक्स वर्कर से होती है उसे वैवाहिक रिश्ते के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो ये आप बहुत गलत है। इस मामले पर सुनवाई पूरी होने के बाद 21 फरवरी को फैसला पीठ ने सुरक्षित रखा था।

महिला को पटक कर चाकू से ताबड़तोड़ वार, स्कूल यूनिफॉर्म में था हमलावर: लंदन में चिकन शॉप के बाहर घटना, काफी देर पड़ी रही बेसुध

लंदन से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ बीच सड़क पर स्कूल की ड्रेस पहने एक लड़के ने दिन-दहाड़े महिला को चाकू घोंपकर घायल कर दिया। हमले के बाद महिला काफी देर तक बेसुध सड़क पर ही पड़ी रही। घटना के समय आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन किसी की भी हिम्मत नहीं हुई कि वह इस कातिल को रोक सकें। लड़के ने जिस वक्त इस घटना को अंजाम दिया, उस समय स्कूल के बच्चे भी वहाँ पर मौजूद थे। सड़क के बीचोंबीच यह सब देखकर वह काफी डर गए थे। ‘द सन’ की रिपोर्ट के अनुसार, लड़का चिकन की दुकान के बाहर दिन-दहाड़े इस घटना को अंजाम देने के बाद भाग गया था।

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि लंदन के साउथ नॉरवुड में हमले से कुछ क्षण पहले ही पीड़िता और एक लड़की के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे महिला को स्कूल की वर्दी में हमलावर ने डराया और उसे सड़क पर गिरा कर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए।

घटनास्थल पर मौजूद एक माँ ने कहा, “एक महिला 7 साल की एक लड़की के साथ बहस कर रही थी।” वीडियो में स्कूली बच्चे चिकन की दुकान के बाहर खड़े होकर हमलावर और पीड़ित महिला को देखते हुए नजर आ रहे हैं। इसके अलावा लड़कियों को अपने सिर पर ड्रिंक डालते हुए देखा गया, जबकि एक शख्स स्थिति को नियं​त्रित करने की कोशिश करता हुआ दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि महिला अपना सामान उठा रही थी, तभी स्कूली बच्चों के सामने उस पर हमला कर दिया गया। हमलावार ने महिला को पहले सड़क पर धक्का देकर गिरा दिया फिर इसके बाद वह बेरहमी से महिला पर चाकू से ताबड़तोड़ वार करता रहा।

एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने बताया, “एक 11 साल के लड़के ने इस महिला को चाकू मार दिया। मैंने उस भयावह वीडियो को देखा है कि कैसे वह लड़का उस महिला पर ता​बड़तोड़ चाकू से वार कर रहा है।”

लंदन एम्बुलेंस सर्विस के प्रवक्ता ने कहा, “हमें साउथ नॉरवुड हाई स्ट्रीट, SE25 में एक घटना की रिपोर्ट के लिए मंगलवार (10 मई, 2022) को शाम 4.39 बजे बुलाया गया था। हमने घटनास्थल पर एक एम्बुलेंस भेजी और महिला को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया।” बता दें कि वीडियो में चाकू मारने वाले को बाद में अन्य लड़कें खींचते हुए दिखाई दे रहे हैं।