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ज्ञानवापी विवादित ढाँचा मामले में बड़ा फैसला: नहीं हटाए जाएँगे कोर्ट कमिश्नर, पूरे मस्जिद की होगी वीडियोग्राफी, मुस्लिम पक्ष को झटका

ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मंदिर विवाद में जिला अदालत ने गुरुवार को अपना फैसला सुना दिया है। वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर ने आदेश में कहा कि कोर्ट कमिश्नर नहीं हटाए जाएँगे। वहीं 17 मई, 2022 से पहले सर्वे का काम पूरा करना होगा। बता दें कि अदालत ने मुस्लिम पक्ष की कोर्ट कमिश्नर को हटाने की माँग को खारिज कर दिया है। वहीं कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर के साथ दो नए वकील भी जोड़े हैं।

कोर्ट ने कहा कि जबतक मस्जिद के कमिशन की कार्रवाई पूरी नहीं होती है तबतक सर्वे जारी रहेगा। कोर्ट ने इस कार्रवाई को सख्ती के साथ पूरी करने का आदेश दिया है। वहीं मस्जिद के अंदर सर्वे का मुस्लिम पक्ष ने विरोध किया था।

बता दें कि फैसले से पहले कोर्ट को खाली करा लिया गया था। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर कोर्ट परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी।

गौरतलब है कि ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मंदिर विवाद (Gyanvapi Masjid) में जिला अदालत ने तीन दिनों तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले दो घंटे तक चली सुनवाई में वादी पक्ष के अधिवक्‍ता सुधीर त्रिपाठी ने कोर्ट कमिश्‍नर बदलने पर आपत्ति के साथ इस बात पर जोर दिया था कि ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाने में भी सर्वे और विडियोग्राफी होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने पूर्व में भी अपील की थी, जिसके संदर्भ में सर्वे कमीशन का आदेश जारी है।

उन्‍होंने कहा कि मस्जिद के तहखाने के सर्वे और वीडियोग्राफी से ही पता चलेगा कि अंदर मस्जिद है या मंदिर और शृंगार गौरी के अलावा अन्‍य विग्रह हैं या नहीं। ऐसे में अदालत सर्वे कमीशन को तहखाने तक पहुँचाने में मदद करने का शासन-प्रशासन को आदेश दे।

बता दें कि बुधवार (11 मई, 2022) को दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलील कोर्ट में दी गई थी। इसके साथ ही कोर्ट कमिश्नर ने भी अपना पक्ष रखा। जहाँ वादी पक्ष ने बैरिकेडिंग के भीतर जाने को लेकर कोर्ट से स्पष्ट आदेश की गुहार लगाने के साथ ही कोर्ट कमिश्नर के पक्षपात न करने की बात रखी है। वहीं मुस्लिम पक्ष भी अपनी अर्जी पर अड़ा है।

महिलाओं को दी जाती है रेप की धमकी, भाई का हुआ अपहरण: पाकिस्तान के अत्याचारों से तंग आया एक और हिंदू परिवार, नेपाल के रास्ते भारत में ली एंट्री

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचारों से परेशान हो कर एक और दलित समुदाय के हिन्दू परिवार ने भारत में शरण ली है। परिवार में महिलाओं और बच्चों सहित 10 लोग बताए जा रहे हैं। पाकिस्तान ने इस परिवार को भारत का वीजा नहीं दिया था। इसी के चलते यह परिवार नेपाल के रास्ते भारत आया है। इस परिवार ने राजस्थान के बाड़मेर में शरण ली है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक परिवार के मुखिया का नाम राजेश कुमार है। ये सभी मेघवाल जाति के हैं। ये मूल रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के मीरपुर ख़ास इलाके के रहने वाले हैं। भारत में आने के लिए यह परिवार 9 दिसंबर को ही दुबई चला गया था। दुबई से इन सभी ने भारत का वीजा लगाया जिसे कैंसिल कर दिया गया था। आखिरकार ये सभी नेपाल गए। नेपाल में एक स्थानीय व्यक्ति ने इनको भारत की सीमा में दाखिल करवाने में मदद की।

मिली जानकारी के मुताबिक नेपाल से यह परिवार पहले राजस्थान के जोधपुर पहुँचा था। वहाँ ये सभी अपने रिश्तेदार के गाँव सालोड़ी में रुके थे। इसके बाद ये सभी बाड़मेर के धोरीमना स्थिति रोहिल्ला गाँव आ गए। स्थानीय प्रशसन ने इनके आगे की जानकारी गृह मंत्रालय को दे दी है। वहाँ से किसी निर्देश आने की प्रतीक्षा भी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने इन सभी की तलाशी भी ली जिसमें कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

परिवार के मुखिया राजेश कुमार ने बताया, “हमें पाकिस्तान में लगातार मौत की धमकियाँ दी जाती हैं। हमारी महिलाओं के साथ रेप करने की भी धमकी मिलती है। मेरे छोटे भाई को पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया था। जैसे तैसे वो सितंबर 2021 में रिहा हुआ तो उसके ही साथियों ने उसका अपहरण कर लिया। इसके बदले हमसे फिरौती माँगी जाती रही।”

राजेश मेघवाल ने आगे बताया, “हमारे पास देने के लिए पैसे ही नहीं थे। आखिरकार अपहरणकर्ताओं ने 47 दिनों बाद मेरे भाई को छोड़ा। अब हम पाकिस्तान में नहीं रह सकते थे। अगर हम वहाँ रहते तो न जाने हमारे साथ क्या हो जाता। मेरा भाई हरीश अभी नहीं आ पाया है क्योंकि उसके ऊपर वहाँ केस दर्ज है।”

मदनपुर खादर में अतिक्रमण हटाने पहुँचा बुलडोजर: AAP विधायक अमानतुल्लाह खान आए बीच में, भीड़ लगाने लगी हाय-हाय के नारे

उत्तरी दिल्ली नगर निगम की ओर से लगातार अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इस कड़ी में इस समय केएन काटजू मार्ग, रोहिणी में अस्थाई निर्माण हटाया जा रहा है। मदनपुर खादर में कार्रवाई शुरू भी हो चुकी है, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। बताते चलें कि स्थानीय लोगों के इस विरोध प्रदर्शन में ओखला विधायक अमानतुल्लाह खान भी शामिल हैं। इस अतिक्रमण हटाने के अभियान में दिल्ली पुलिस को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भारी विरोध के बीच खबर आई है कि दिल्ली पुलिस और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और ओखला विधायक अमानतुल्लाह के बीच नोकझोंक हो गई है।

बता दें कि पुलिस और अतिक्रमण स्थल पर मौजूद भीड़ के बीच लगातार​ विवाद सामने आ रहा है। मदनपुर खादर में AAP नेता अमानतुल्लाह खान का दिल्ली पुलिस से विवाद हो गया है। इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस का कहना है कि AAP विधायक भीड़ को उकसाने का काम कर रहे थे। साथ ही वे सरकारी काम में भी बाधा डाल रहे थे। यही कारण है कि पुलिस और उनके बीच नोंकझोंक हुई।

उधर, अमानातुल्लाह ने भड़काऊ बयान देते हुए कहा, “गरीबों के घरों को बचाने के लिए मैं जेल जाने को भी तैयार हूँ। यहाँ कोई अतिक्रमण नहीं है। अगर कोई अतिक्रमण होगा तो मैं खुद ध्वस्त करने में उनका (नागरिक निकाय) साथ दूँगा।”

इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें स्थानीय मुस्लिमों को दिल्ली पुलिस हाय हाय… का नारा लगाते हुए सुना जा सकता है। बुलडोजर को रोकने के लिए सड़क पर पत्थर और लोहे के रॉड रख दिए गए थे।

वहीं दिल्ली के रोहिणी इलाके में केएन काटजू के 2 किलोमीटर लंबे रास्ते पर गैरकानूनी तरीके से जितने भी अतिक्रमण थे उनको हटाया जा रहा है। बुलडोजर की मदद से सड़क के किनारे लगी झुग्गियों को हटाने का काम किया जा रहा है। शुरुआत में MCD के कर्मचारी इन झुग्गियों को हाथों से तोड़कर उसका सामान ट्रक में भर रहे थे। बाद में बुलडोजर आने के बाद बाकी अतिक्रमण को हटाया गया बता दें कि गुरुवार (12 मई 2022) को पटेल नगर के प्रेम नगर इलाके में भी बुलडोजर चला और अवैध अतिक्रमण हटाया गया।

अल कायदा से तारीफ पाने के 1 माह बाद सऊदी अरब पहुँची ‘अल्लाहु अकबर’ वाली मुस्कान खान, पुलिस को नहीं दी जानकारी: हिंदू संगठनों ने उठाई जाँच की माँग

कर्नाटक के बुर्का विवाद से चर्चा में आईं बीबी मुस्कान ज़ैनब खान अब एक नए विवाद में घिरती दिखाई दे रही हैं। बताया जा रहा है कि बिना स्थानीय पुलिस को सूचित किए ही मुस्कान अपने परिवार के साथ सऊदी अरब चली गईं हैं। माना जा रहा है कि मुस्कान पूरे परिवार के साथ मज़हबी यात्रा पर 25 अप्रैल 2022 को निकली हैं। साथ ही कहा जा रहा है कि वो 18 मई 2022 को मक्का की यात्रा करेंगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय पुलिस ने मुस्कान खान की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें अपने कहीं आने-जाने की गतिविधियों की जानकारी देते रहने के लिए कहा था। ऐसे में बिना पुलिस को बताए उनके सऊदी अरब चले जाने से पुलिसकर्मी चिंतित हैं। मुस्कान खान कर्नाटक के मांड्या में PES कॉलेज ऑफ़ आर्ट साइंस और कॉमर्स की छात्रा हैं। इसी कॉलेज में उन्होंने हिजाब विवाद के दौरान अल्लाह हु अक़बर का नारा लगाया था।

मुस्कान की सऊदी अरब यात्रा आतंकी समूह अल कायदा के मुखिया अयमान-अल-जवाहिरी से मिली तारीफ के 1 महीने बाद हुई है। यह तारीफ़ मुस्कान के हिन्दू छात्रों के आगे लगाए गए अल्लाह हु अकबर के नारे के बाद की गई थी। 9 मिनट के वीडियो में अल जवाहिरी ने खुद को मुस्कान से प्रभावित बताया था। जवाहिरी ने मुस्कान को ‘भारत की महान महिला’ बताते हुए उनके समर्थन में एक कविता भी गई थी।

अल कयदा से मिली तारीफ के एक ही माह बाद मुस्कान का बिना स्थानीय पुलिस को सूचित किए उमरा करने जाना कुछ लोगों में संदेह पैदा कर रहा है। हिन्दू संगठनों ने इस मामले में मुस्कान खान के खिलाफ जाँच की माँग की है। हिन्दू समूहों ने अल कयदा से संबंधों के साथ मुस्कान को मिले उपहारों और पैसों की पड़ताल की आवाज उठाई है। मुस्कान की नारेबाजी से यह बात भी निकल कर सामने आई थी कि उनका संबंध चरमपंथी इस्लामी समूह PFI से भी है। इस संबंध में बीच की कड़ी मुस्कान के अब्बा अब्दुल सुकूर रहे थे।

कर्नाटक बुर्का विवाद के दौरान मुस्कान बीबी मुस्लिम समूहों में काफी चर्चित हो गईं थीं। उनको उपहार और गिफ्ट देने वालों की भरमार लग गई थी जिसमें मुंबई से कॉन्ग्रेस के विधायक जीशान सिद्दीकी भी शामिल थे। जीशान ने मुस्कान को आई फोन और स्मार्टवॉच दिया था। वहीं जमीयत उलेमा ने मुस्कान को 5 लाख रुपए कैश देने की घोषणा की थी।

बंगाल में एक और बीजेपी कार्यकर्ता का मिला शव, पार्टी ने टीएमसी के गुंडों पर लगाया हत्या का आरोप: एक सप्ताह में दूसरी वारदात

पश्चिम बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हो रही हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी क्रम में इस बार कृष्ण पात्रा नाम के बीजेपी कार्यकर्ता का बुधवार (11 मई 2022) को शव पाया गया है। बीजेपी ने टीएमसी पर हत्या का आरोप लगाया है। बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया है कि सुकांत को उनके घर से किडनैप कर लिया गया था।

मजूमदार के मुताबिक, टीएमसी के गुंडों ने ही उनकी हत्या की है। इस मामले में सुकांत ने शव की तस्वीर को शेयर करते हुए ट्वीट किया, “पूर्वी मिदनापुर जिले के मैना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा कार्यकर्ता कृष्ण पात्रा को उनके घर से अगवा कर लिया गया और रात के अंधेरे में टीएमसी के बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी।”

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ टीएमसी एक-एक कर भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है। बीजेपी नेता ने ये भी कहा कि ममता के साथ बंगाल में क्रूरता का राज है। बीजेपी ने दावा किया है कि कृष्ण पात्रा की बेरहमी से हत्या करने के बाद उनके शव को गंदे नाले में फेंक दिया गया था।

एक सप्ताह में दूसरी हत्या

इससे पहले 6 मई 2022 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में अर्जुन चौरसिया नाम के बीजेपी नेता का शव फांसी के फंदे से लटका मिला था। उस दौरान भी टीएमसी पर ही अर्जुन की हत्या करने का आरोप लगाया गया था। मृतक अर्जुन भारतीय जनता पार्टी युवा मंडल मोर्चा के वाइस प्रेसिडेंट थे। इस वारदात के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी अर्जुन के घर जाकर उनके परिजनों से मिले थे।

गृह मंत्री ने पत्रकारों के साथ बातचीत में इस घटना को लेकर कहा था, “कल उन्होंने (ममता बनर्जी) पहला साल पूरा किया, ऐसा लगता है कि वो एक तरह का मैसेज देना चाहती हैं कि वो रुकेंगी नहीं। मैंने परिवार के साथ विस्तृत बातचीत की है। वे अपने बेटे को खोने और जिस तरह से उसका शव उनसे छीन लिया गया था, उससे वे निराश हैं। हमारी पार्टी ने कोर्ट का रुख किया है। सीबीआई जाँच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रशासन ने आरोपितों को गिरफ्तार करने की बजाय जबरदस्ती शव को कब्जा लिया है।”

बहरहाल पात्रा की मौत पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उन वास्तविक परिस्थितियों का पता चलेगा जिनकी वजह से उनकी मौत हुई। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल इस तथ्य को छिपा नहीं सकता कि पिछले विधानसभा चुनावों के बाद से उसके कार्यकर्ताओं द्वारा लगभग 50 भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं की हत्या कर दी गई।

मस्जिद के मौलवी के लिए वेतन तो मंदिर के पुजारी के लिए क्यों नहीं: बिहार के कानून मंत्री ने उठाया सवाल, कहा- पुजारियों को भी मिले सरकारी मानदेय

लाउडस्पीकर पर तेज राजनीति के बाद अब बिहार के सियासी गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है। बिहार सरकार के एक मंत्री ने राज्य के पंजीकृत मंदिरों के पुजारियों को वेतन (Salary) देने की माँग उठा कर राजनीति गर्मा दी है। राज्य के कानून मंत्री प्रमोद कुमार (Law Minister Pramod Kumar) ने यह माँग तब उठाई है जब बिहार में बड़ी संख्या में मस्जिदों में एक व्यवस्था के तहत नमाज़ पढ़ाने वाले मौलवी और मोअज्जिनों को अजान देने के लिए पाँच हजार से लेकर अठारह हजार रुपए तक प्रति माह वेतन की व्यवस्था की गई है। 

मंदिर के पुजारियों को वेतन देने के मामले पर मीडिया से बात करते हुए प्रमोद कुमार कहते हैं, “यह सब संचालन समिति के ऊपर निर्भर करता है। संचालन समिति इसकी व्यवस्था करके जो आमदनी होता है, उसके हिसाब से वेतन दे। चाहे वो दैनिक आधार पर दे या मासिक आधार पर दें। जैसे भगवान का भोग लगता है, उसी तरह भगवान की पूजा-अर्चना, आरती व्यवस्थित हो।” मंत्री प्रमोद कुमार के इस बयान का बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल (BJP MLA Hari Bhushan Thakur Bachaul) ने भी समर्थन किया है।

मंत्री प्रमोद कुमार कहते हैं कि बिहार राज्‍य धार्मिक न्यास बोर्ड में करीब चार हजार मंदिर निबंधित हैं और इतने ही प्रक्रियाधीन हैं। इनके पुजारियों को सरकार के तरफ से तो मानदेय देने की व्यवस्था नहीं है। इन्‍हें वेतन या मानदेय दिया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी निबंधित मंदिर की कमेटी को मंदिर की आमदनी से एक निश्चित राशि मंदिर के पुजारी को देनी चाहिए।

वहीं बिहार (Bihar) के सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इरशाद उल्लाह ने बताते हैं कि पटना में ऐसे लगभग सौ से डेढ़ सौ मस्जिद हैं जो शिया वक्फ बोर्ड के अंतर्गत रजिस्टर्ड हैं। इसके अलावा कई ऐसी मस्जिदें है जो वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आते हैं। 

बिहार में मस्जिदों में जहाँ दुकान या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं या फिर कोई दान मिलता हो वहाँ से मौलवी के लिए मानदेय की व्यवस्था होती है। मगर ज्यादातर मस्जिदों के लिए यह वेतनमान की व्यवस्था सुन्नी वक्फ बोर्ड ने की है जिनको हर साल करीब तीन करोड़ रुपए का अनुदान बिहार सरकार देती है। इससे सुन्नी वक्फ बोर्ड के कर्मचारियों को वेतन आदि दिया जाता है।

जाहिर है वक्फ बोर्ड को सरकार की तरफ से अनुदान मिलता है और वक्फ बोर्ड को अपने संसाधन से भी अच्छा खासी आमदनी होती है जिससे मौलवी और इमामों को वेतन दिया जाता है। इन सब को देखते हुए कानून मंत्री प्रमोद कुमार ने यह माँग उठाई है। बिहार में धार्मिक न्यास बोर्ड में लगभग चार हजार मंदिर निबंधित है और लगभग इतने ही प्रक्रियाधीन हैं। प्रमोद कुमार इन्ही मंदिरों के पुजारियों के लिए कहते हैं कि सरकार के तरफ से तो वेतन देने की व्यवस्था नहीं है। लेकिन रजिस्टर्ड मंदिर का जो अपना कमेटी होता है मंदिर से जो आमदनी होती है उसमे से एक निश्चित राशि वेतन के तौर पर मंदिर के पुजारियों को दिया ही जाना चाहिए।

प्रमोद कुमार कहते हैं कि कुछ दिन पहले ही मंदिरों की रजिष्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हुई है और अभी भी काफी काम बाकी है। लेकिन अब उनकी कोशिश रहेगी कि मंदिर जो बड़ी आमदनी देते हैं उनके पुजारियों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता है। मंदिर प्रशासन को उन्हें भी वेतन की व्यवस्था करनी होगी।

अफवाहों की वजह से नहीं हो पा रही कंगना रनौत की शादी, बताया- ‘लोग सोचते हैं मैं लड़के पीटती हूँ’

बॉलीवुड की क्वीन कंगना रनौत इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘धाकड़’ को लेकर चर्चा में हैं। अपनी बेबाक अंदाज से फैंस का दिल जीतने वाली एक्ट्रेस ने हाल ही में खुलासा किया कि उन्होंने अब तक शादी क्यों नहीं की है। अपने तीखे जवाबों के लिए मशहूर ‘धाकड़ गर्ल’ ने सिद्धार्थ कनन के साथ अपने एक लेटेस्ट इंटरव्यू कहा, “वह अभी तक इसलिए शादी नहीं कर पा रही हैं, क्योंकि लोग उनके बारे में ऐसी अफवाहें फैलाते रहते हैं कि वो बहुत लड़ाकू हैं और लोगों से जबरदस्ती लड़ती हैं।”

‘मणि​कर्णिका’ फिल्म की अभिनेत्री ने इंटरव्यू में मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि इस तरह की अफवाहों ने उनके बारे में एक सोच कायम कर दी है, जिसकी वजह से उन्हें परफेक्ट मैच नहीं मिल रहा है। कंगना इन दिनों अपनी एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘धाकड़’ का जोर-शोर से प्रमोशन कर रही हैं। फिल्म का ट्रेलर भी काफी धाँसू रहा है, जिसमें एक्ट्रेस एक्शन करती हुई नजर आईं। ऐसे में टीवी होस्त सिद्धार्थ कनन ने इंटरव्यू में कंगना से पूछा कि क्या वो रियल लाइफ में अपनी फिल्म के कैरेक्टर जितनी धाकड़ हैं? इस पर एक्ट्रेस ने हँसते हुए कहा, “ऐसा नहीं है। असल जिंदगी में मैं किसे मारूँगी। मैं शादी नहीं कर पा रही हूँ, क्योंकि आप जैसे लोग मेरे बारे में इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं।”

इस पर कंगना से एक ओर सवाल किया गया कि क्या वो इस वजह से शादी नहीं कर पा रही हैं, क्योंकि उनके बारे में लोगों ने एक राय कायम कर ली है कि वो बहुत टफ हैं? इस पर नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित अभिनेत्री ने मजाकिया अंदाज में कहा, “हाँ, क्योंकि मेरे बारे में ऐसी चर्चा होती है कि मैं लड़कों को पीटती हूँ।”

इंटरव्यू के दौरान कंगना के साथ उनकी फिल्म ‘धाकड़’ के को-एक्टर अर्जुन रामपाल भी मौजूद थे। ऐसे में जब अर्जुन से कंगना की खूबियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “वो एक बेहतरीन एक्ट्रेस हैं, जो भी करती हैं अपने रोल के लिए करती हैं, लेकिन रियल लाइफ में वो ऐसी नहीं हैं। रियल लाइफ में कंगना काफी स्वीट, लविंग हैं। वह ईश्वर से डरती हैं और बहुत ज्यादा पूजा-पाठ करती हैं और योग करती हैं।” 

बता दें कि एक्ट्रेस की सोशल मीडिया पर लाखों में फैन-फॉलोइंग है। वहीं, कंगना की फिल्म धाकड़ की बात करें तो इसमें अर्जुन रामपाल और उनके अलावा दिव्या दत्ता भी अहम रोल में हैं। रजनीश घई के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म 20 मई को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है।

2 साल में पहली बार नॉर्थ कोरिया से आई कोरोना केस की खबर: तानाशाह किम जोंग ने लगाई ‘सीरियस इमरजेंसी’

उत्तर कोरिया (North Korea) ने दो साल बाद कोरोना संक्रमण के पहले केस की पुष्टि की है और इसके साथ ही देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान भी कर दिया है। इस लॉकडाउन को तानाशाह किम जोंग उन ने ‘सीरियस इमरजेंसी’ का नाम दिया है। इससे पहले उत्तर कोरिया ने अब तक यह मानने से इनकार कर दिया था कि उसके यहाँ कोरोना का कोई केस मिला है। लेकिन अब खुद ही केस की पुष्टि की है और पाबंदियों का भी ऐलान कर दिया है। हालाँकि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि उत्तर कोरिया में पहले भी कोरोना संक्रमण के काफी केस मिले थे। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने बताया कि प्योंगयांग में पाए गए मरीज में बुखार के लक्षण थे और जाँच के बाद ओमिक्रॉन BA.2 वैरिएंट की पुष्टि हुई है।

उत्तर कोरिया ने गुरुवार (12 मई 2022) को अपने यहाँ पहले कोविड-19 केस सामने आने की जानकारी दी। देश के सरकारी मीडिया ने इसे गंभीर राष्ट्रीय आपातकालीन घटना बताया है। कोरोना वायरस को दुनिया में सामने आए दो साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब से पहले तक उत्तर कोरिया ने अपने यहाँ कोरोना के मामलों के सामने आने की जानकारी नहीं दी थी। आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने कहा कि कोविड के रिपोर्ट किए गए नए मामले वायरस के खतरनाक ओमिक्रोन वेरिएंट से जुड़े हुए हैं।

कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने कहा कि ओमिक्रोन वेरिएंट की पुष्टि के बाद किम जोंग उन ने पार्टी के पोलित ब्यूरो और अन्य अधिकारियों की बैठक बुलाई और घोषणा की कि वे कोरोना से बचाव वाले नियमों को सख्ती से लागू करें और लोगों से इसका पालन कराएँ। एजेंसी ने कहा कि बैठक का उद्देश्य कम से कम समय में कोरोना को जड़ से खत्म करना था। उधर, विशेषज्ञों का कहना है कि नॉर्थ कोरिया की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए देश को कोरोना के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि देश में ये सबसे बड़ी आपातकालीन घटना हुई है। फरवरी 2020 से पिछले दो सालों और तीन महीनों में देश को सुरक्षित रूप से रखा गया, लेकिन अब इसमें घुसपैठ हुई है। हालाँकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कोविड-19 की वजह से कितने लोग संक्रमित हुए हैं। उत्तर कोरिया में महामारी की शुरुआत होने के बाद से देश में कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए एक सख्त कोविड पॉलिसी लागू की गई थी। इस बात का भी दावा किया गया है कि देश में स्वास्थ्य सुविधाओं के सीमित होने और वैश्विक स्तर पर अलग-थलग होने की वजह से किम जोंग चिंतित हैं।

राजस्थान: हिंदू युवक की हत्या के बाद हिंदू नेता पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ही पकड़ा, गहलोत सरकार पर उठे सवाल

करौली, जोधपुर और भीलवाड़ा के बाद अब राजस्थान के हनुमानगढ़ में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ पर विश्व हिंदू परिषद के नेता पर हमले की सूचना है। बताया जा रहा है कि हमले में VHP नेता बुरी तरह से घायल हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक मंदिर के पास खड़ी लड़कियों से छेड़छाड़ से मना करने पर उनके ऊपर हमला किया गया है। पुलिस ने 7 हमलावरों पर केस दर्ज किया है। वहीं हमलावरों की गिरफ्तारी की माँग करने वाले 27 लोगों पर कार्रवाई की गई है। घटना बुधवार (11 मई 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में घायल VHP नेता का नाम सतवीर सहारन है। घटना की रात्रि नोहर के रामदेव मंदिर के बगल कुछ युवको द्वारा महिलाओं से छेड़छाड़ की सूचना पर वो मंदिर पहुँचे थे। इस दौरान लगभग आधे दर्जन हमलावरों ने उन पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गए। उन्हें सिर में गहरी चोट आना बताया जा रहा है। उनकी हालत गंभीर होने की वजह से उनको बीकानेर रेफर किया गया है। वहीं VHP नेता पर हुए हमले से नाराज हिंदू समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान नोहर- रावतसर सड़क जाम कर दी गई। मौके पर पहुँचे प्रशासनिक आधिकारियों ने जैसे तैसे जाम खुलवाया।

न्यूज़ 18 से बात करते हुए हनुमानगढ़ के DM ने बताया, “इस घटना में दोनों पक्ष हैं। कुछ लोग मौके का फायदा उठाने का प्रयास करते हैं। यद्द्पि प्रशासन फ़ौरन कार्रवाई करता है। हमने दोनों तरफ से केस दर्ज किया है। 7 हमलावरों को हिरासत में लिया गया है। इसी के साथ तुरंत गिरफ्तारी की माँग करते हुए सड़क जाम करने वाले 27 लोगों को भी हिरासत में लिया गया। एहतियात के तौर पर नाहोर में इंटरनेट बंद किया गया है। हालत सामान्य होने पर इंटरनेट बहाल किया जाएगा। मौके पर पूर्ण शाँति है। हमने कई अधिकरियों के साथ फ्लैग मार्च किया है। जगह – जगह पुलिस बल तैनात किया गया है। आज 2 बजे शाँति कमेटी की बैठक है जिसमें हम दोनों समुदायों के बीच विश्वास का माहौल बनाने का प्रयास करेंगे।”

घटना के बाद पुलिस से आक्रोशित लोगों की नोकझोंक का वीडियो भी वायरल हुआ है।

भाजपा ने गहलोत सरकार पर लगाया तुष्टिकरण का आरोप

बता दें कि इससे पहले राजस्थान के भीलवाड़ा में हिंदू युवक की हत्या को अंजाम दिया गया था। अगले दिन हनुमानगढ़ में VHP नेता पर ये हमला हुआ। इस हमले के बाद भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। केंद्रीय राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने लिखा, “कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति से प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएँ बढ़ रही हैं। साथ ही अपराधियों को शह भी मिल रही है। हनुमानगढ़ जिले के नोहर में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष द्वारा महिलाओं से छेड़छाड़ कर रहे युवकों को रोकने पर उनके साथ की गई मारपीट दुःखद एवं निंदनीय है। इस घटना के सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।”

खरगोन हिंसा में पुलिस अधिकारी को तलवार से मारने वाला इरफान गिरफ्तार: जहाँगीरपुरी में भीड़ को उकसाने वाला अब्दुल भी धराया

दिल्ली के जहाँगीरपुरी और मध्य प्रदेश के खरगोन में पिछले दिनों हुई हिंसा मामले में राज्य पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। ताजा जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जहाँगीरपुरी हिंसा मामले (Jahangirpuri Volence Case) में भीड़ को उकसाने के आरोप में एक और आरोपित अब्दुल उर्फ राजा को गिरफ्तार किया है। वहीं, खरगोन हिंसा के दौरान एसपी सिद्धार्थ चौधरी (Khargone SP Siddarth Chaudhari) पर तलवार से हमला करने वाले इरफान को घटना के 30 दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस इससे पूछताछ कर रही है। इस दौरान कई खुलासे की उम्मीद है।

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में 16 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव शोभा यात्रा पर हमला हुआ था। हमले में पुलिसकर्मियों तक को नहीं बख्शा गया था। कई गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की गई थी। हनुमान जन्मोत्सव की शोभा यात्रा पर हमले के साथ शुरू हुई हिंसा की खबर पाकर जब पुलिस वहाँ पर पहुँची, तो पुलिस पर भी पथराव किया गया। जहाँगीरपुरी हिंसा के 100 से ज्यादा वीडियो व सीसीटीवी फुटेज सामने आए थे। इन्हीं में से एक वीडियो में मोहम्मद सोनू, उर्फ यूनुस सोनू हिंसा में गोली चलाते हुए दिख रहा था। वह हिस्ट्रीशीटर सलीम चिकना का भाई है। वीडियो में देखा गया था कि जब अन्य पत्थरबाज शोभा यात्रा पर पत्थर बरसा रहे थे, उसी बीच एक नीले रंग का कुर्ता और जालीदार टोपी पहना हुआ सोनू चिकना कैसे गोली चला रहा था।

दूसरी ओर खरगोन शहर में 10 अप्रैल को रामनवमी की शोभा यात्रा के दौरान आगजनी और पथराव के बाद कई स्थानों पर भयानक हिंसा भड़की थी। हिंसा में संजय नगर क्षेत्र में खरगोन एसपी सिद्धार्थ चौधरी पर भी हमला हुआ था। तलवार लहराते हुए एसपी पर यह हमला इरफान ने किया था। इसके बाद से इरफान फरार चल रहा था। एसपी पर गोली चलाने वाले आरोपित मोहसिन उर्फ वसीम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के मौके पर निकली शोभायात्रा पर 10 अप्रैल 2022 को जमकर पथराव किया गया था। बताया गया था कि मस्जिद के बाहर डीजे को लेकर मुस्लिमों ने आपत्ति जताई थी, वहीं राम भक्तों पर पथराव के साथ 30 से ज्यादा दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई और मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई थी। इस घटना के कई पुराने वीडियो भी वायरल हुए थे, जिसमें मुस्लिम भीड़ इस्लामी गाने पर कट्टा और हथियार लहराते हुए मंदिर के बाहर डांस करती नजर आई थी।