Home Blog Page 2812

KGF Chapter 2 ने रचा इतिहास, पहले दिन ही कमाए ₹134.50 करोड़: RRR भी रह गई पीछे

रॉकिंग स्टार यश (Yash) की फिल्म केजीएफ: चैप्टर 2 (KGF: Chapter 2) ने रिलीज के पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर जलवा बिखेर दिया है। फिल्म ने धमाकेदार कमाई कर इतिहास रच दिया है। यह फिल्म कोविड के बाद के दौर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में से एक बन गई है। केजीएफ: चैप्टर 2 के निर्माताओं ने ओपनिंग डे कलेक्शन के साथ एक नया पोस्टर जारी किया।

पोस्टर के अनुसार, एक्शन फिल्म ने पहले दिन 134.50 करोड़ रुपए की जबरदस्त कमाई की है। चार भाषाओं में डब इस फिल्म के हिंदी वर्जन ने 53.95 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया। यह किसी कन्नड़ फिल्म के लिए एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। प्रशांत नील द्वारा निर्देशित केजीएफ: चैप्टर 2 अब बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है।

खबरों के अनुसार, एक और रिकॉर्ड तोड़ते हुए फिल्म ने बुधवार की रात 9 बजे तक टिकटों की एडवांस बिक्री से कुल 65.10 करोड़ रुपए की कमाई कर ली थी। ‘केजीएफ चैप्टर 2’ की टीम ने फिल्म में हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता संजय दत्त और अभिनेत्री रवीना टंडन को कास्ट किया गया है। इनके अलावा फिल्म में प्रकाश राज, ईश्वरी राव, राव रमेश जैसे कलाकार भी शामिल हैं। 

‘केजीएफ 2’ से राजामौली की फिल्म आरआरआर को काफी टक्कर मिल रही है। फिल्म की कमाई में 20 फीसदी की गिरावट देखी गई है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, फिल्म ‘आरआरआर’ ने हिंदी में अब तक कुल 243.79 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। उन्होंने बताया कि फिल्म ने शुक्रवार को 5 करोड़, शनिवार को 7.50 करोड़, रविवार को 10.50 करोड़, सोमवार को 3.50 करोड़, मंगलवार को 3 करोड़ और बुधवार को 2.70 करोड़ रुपए की कमाई की। फिल्म ने हिंदी बॉक्स ऑफिस पर गुरुवार को 3 करोड़ की कमाई की है।

फिल्म ‘आरआरआर’ ने हिंदी बॉक्स ऑफिस पर 3 दिन में 50 करोड़ रुपए, 5 दिन में 100 करोड़ रुपए 9 दिन में 150 करोड़ रुपए, 13 दिन में 200 करोड़ रुपए और 17 दिन में 225 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार कर लिया था। इस तरह से फिल्म ने 243.79 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है। 

बता दें कि साल 2018 में केजीएफ: चैप्टर वन रिलीज हुई थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी, लेकिन कुछ समय के बाद फिल्म को तगड़ी पब्लिसिटी मिली थी। इसकी वजह से फिल्म के दूसरे पार्ट के लिए दर्शकों में तगड़ा एक्साइटमेंट देखने को मिला था। केजीएफ: चैप्टर 2 ने रिलीज के पहले ही दिन केजीएफ चैप्टर वन के लाइफटाइम कमाई को भी पछाड़ दिया है। केजीएफ वन का लाइफटाइम बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 44.09 करोड़ रुपए है। फिल्म के दूसरे पार्ट की रिलीज के साथ ही अब दर्शक केजीएफ: चैप्टर 3 का इंतजार कर रहे हैं।

₹100000 का कर्जा न चुका पाने पर आदिवासी पिता ने बेटी का TMC नेता से किया सौदा: गैंगरेप केस में 4 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से नाबालिग लड़की से गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ उधार नहीं चुका पाने के कारण एक आदिवासी व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी को बेच दिया। इसके बाद टीएमसी के नेता और उसके साथियों ने मिलकर उसका गैंगरेप किया। मामले में पुलिस ने टीएमसी के नेता दीप्तिमान घोष, पीड़िता के पिता समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गैंगरेप की यह घटना बीरभूम जिले के बोलपुर के सियान मुलुक इलाके की है। आरोपित दीप्तिमान घोष टीएमसी का पंचायत सदस्य है। पीड़िता के परिवार के मुताबिक, उसके पिता नरेश सोरेन (बदला हुआ नाम) ने दीप्तिमान घोष से 1,00,000 रुपए उधार लिए थे। हालाँकि, जब वो कर्ज नहीं चुका पाए तो इसी साल 31 मार्च 2022 को अपनी नाबालिग बेटी को घोष के पास भेज दिया। घोष ने गाँव के ही अन्य लोगों के साथ मिल कर नाबालिग के साथ गैंगरेप किया।

TV9 बांग्ला की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में लड़की के साथ 31 मार्च को स्थानीय युवकों ने गैंगरेप किया और पीड़िता को अपना मुँह बंद रखने के लिए धमकी भी दी। वहीं ABP के मुताबिक, वो स्थानीय युवा कोई और नहीं, बल्कि टीएमसी नेता दीप्तिमान घोष है। इसके बाद पीड़िता अपनी मामी के घर गई और अपना इलाज करवाया, उस दौरान भी वो लोकलाज के डर से चुप रही। लेकिन, जैसे ही बोलपुर वापस आई तो आरोपित टीएमसी नेता और तीन अन्य ने फिर से उसके साथ गैंगरेप किया। TV9 बांग्ला और ABP दोनों ने बताया कि लड़की के पिता भी जघन्य अपराध में शामिल हैं।

पानी सिर से ऊपर जाता देख पीड़िता ने अपने चचेरे भाई को अपनी आपबीती बताई और वो दोनों थाने में शिकायत कराने गए। मामले में बोलपुर थाने में आरोपितों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 376D (सामूहिक बलात्कार), 506 (आपराधिक धमकी), और बाल यौन अपराध निवारण अधिनियम-2012 (POCSO) के तहत केस दर्ज किया गया।

पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर स्थानीय अदालत में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें बुधवार (13 अप्रैल) को पुलिस कस्टडी में भेज दिया। बीरभूम के एसपी नागेंद्रनाथ त्रिपाठी ने मामले में कहा कि केस की जाँच की जा रही है और पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

टीएमसी नेता ने फँसाने का आरोप लगाया

इस बीच दीप्तिमान घोष ने खुद को फँसाए जाने का आरोप लगाया है। उसने कहा, “मुझे मामले में झूठा फँसाया जा रहा है। मैं निर्दोष हूँ और मुझे फँसाया जा रहा है।” वहीं पीड़िता को पहले बोलपुर उप-मंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अब उसे कोलकाता के सेठ सुखलाल करनानी मेमोरियल अस्पताल (SSKM) में ट्रांसफर कर दिया गया है।

Zee24 घंटा की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस वारदात के बाद पीड़िता पूरी तरह से सदमे में है। अस्पताल के सूत्रों के हवाले से चैनल ने बताया कि पीड़िता अपने दर्द को बयाँ नहीं कर पा रही है। यहाँ तक कि उसने दिया हुआ खाना खाने से भी मना कर दिया। अब उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति की जाँच के लिए साइकोलॉजिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की गई है। पीड़िता को हैवी ब्लीडिंग हो रही थी, जिसके कारण मंगलवार (12 अप्रैल) की रात को उसकी सर्जरी की गई थी।

बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों का टीएमसी का है रिकॉर्ड

ये कोई पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में बच्चियों या महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाएँ हुई हों। बुधवार (13 अप्रैल) को पश्चिमी मिदनापुर के कालूखनरा गाँव में तृणमूल कॉन्ग्रेस के पंचायत सदस्य अविजीत मंडल को एक दिव्यांग महिला से छेड़छाड़ और रेप की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पीड़िता कालाखुरा गाँव में अपनी बहन के घर आई थी, जहाँ मंडल ने उसका अपहरण कर उसका यौन शोषण किया।

इससे पहले इसी महीने 4 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के हंसखाली ब्लॉक नंबर- I के श्यामनगर इलाके में एक 14 वर्षीय लड़की के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपित का नाम ब्रजगोपाल है, जो तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) गजना ग्राम पंचायत सदस्य समर गोला का बेटा है। रेप की इस घटना के बाद प्रदेश में राजनीतिक उथल-पुथल पैदा हो गई थी। टीएमसी सुप्रीमो और मौजूदा सीएम ममता बनर्जी, ने भी पीड़िता के चरित्र पर सवाल खड़े किए थे।

PFI पर बैन लगाने की तैयारी में मोदी सरकार, CAA-रामनवमी हिंसा में शामिल रहा है कट्टरपंथी इस्लामी संगठन

केंद्र सरकार जल्द ही संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहने वाले विवादास्पद संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर जल्द ही प्रतिबंध लगा सकती है। पिछले सप्ताह रामनवमी के दौरान भारत के कुछ हिस्सों में हुई हिंसा और सांप्रदायिक तनाव में PFI की भूमिका सामने आई है। बताया जा रहा है कि प्रतिबंध की तैयारी पूरी कर ली गई है और अगले सप्ताह तक एक नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की जा सकती है।

पीएफआई पहले से ही कई राज्यों में गैर-कानूनी घोषित है, मगर सरकार अब इसे एक केंद्रीकृत नोटिफिकेशन के जरिए प्रतिबंधित करना चाहती है। पीएफआई की स्थापना 2006 में की गई थी, तभी से यह विभिन्न असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी कार्यों में संलिप्तता को लेकर जाँच के दायरे में आता रहा है।

विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स में कहा गया है कि गृह मंत्रालय के पास इस संगठन को प्रतिबंधित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अप्रैल 2021 में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि केंद्र पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया में लगा हुआ है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA), दोनों ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करते हुए खुफिया रिपोर्ट दी हैं। NIA डोजियर के अनुसार, पीएफआई स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का ही बदला रूप है। SIMI को संयुक्त राज्य अमेरिका में 9/11 के आतंकी हमलों के बाद 2001 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। एनआईए ने बताया किया कि दोनों संगठनों के बोर्ड में एक ही लोग शामिल रहे हैं। ED की जाँच के अनुसार, इस संगठन ने CAA-NRC विरोधी प्रदर्शनों के लिए धन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

साल 2020 में पीएफआई की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के छह सदस्यों को आरएसएस (RSS) कार्यकर्ता वरुण भूपालम की हत्या के प्रयास के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने एक प्रसिद्ध दक्षिणपंथी विचारक चक्रवर्ती सुलीबेले और बेंगलुरु दक्षिण के सांसद तेजस्वी सूर्या की हत्या करने की भी योजना बनाई थी। ढेर सारे ऐसे सबूत हैं, जो 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों में पीएफआई की स्पष्ट भूमिका की ओर इशारा करते हैं।

इसके अलावा, 14 अप्रैल को जब गोवा, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रामनवमी की शोभा यात्रा के दौरान हिंसा भड़की तो मध्य प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा ने दावा किया कि खरगोन में दंगे और पथराव के लिए पीएफआई जिम्मेदार है।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा गृह मंत्रालय को एक संपूर्ण डोजियर सौंपे जाने के बाद 2017 में PFI पर प्रतिबंध लगाने की माँग को नया बल मिला। इसमें एजेंसी ने इस इस्लामिक समूह के आतंकवाद से संबंध को सूचीबद्ध किया गया था। जाँच एजेंसी ने पीएफआई और उसकी राजनीतिक शाखा SDPI को बेंगलुरू विस्फोट, केरल के प्रोफेसर का हाथ काटने और केरल में लव जिहाद सहित अन्य मामलों में संदिग्ध माना है।

सिग्नेचर नहीं, स्पेलिंग मिस्टेक भी… इसलिए ‘काफिर’ बता कश्मीरी हिंदुओं को दी गई धमकी फेक: फैक्टचेक के नाम पर Altnews ने लिखी नई आयत

14 अप्रैल 2022 को आतंकी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम का एक पत्र सोशल मीडिया पर सामने आया जिसमें उन्होंने कश्मीरी हिंदुओं को धमकी दी हुई थी। पत्र को जारी ही काफिरों के नाम पर किया गया था। इसमें कहा गया था कि या तो वो घाटी को छोड़ें या फिर अंजाम भुगतने को तैयार हों। पत्र में कहा गया कि अगर कश्मीरी पंडितों ने बात नहीं मानी तो उन्हें मार कर जहन्नुम में भेजा जाएगा और न तो प्रधानमंत्री मोदी और न ही अमित शाह उन्हें बचा पाएँगे।

पत्र में हिंदुओं से कहा गया कि उन्हें अल्लाह के नुमाइंदे देख रहे हैं और अगर उन्हें कश्मीर में रहना है तो धर्मांतरण करना होगा। पत्र में लिखा है, “तुम लोगों को अल्लाह के नुमाइंदे देख हे हैं। एक एक करके तुम सब मारकर नर्क में भेजे जाओगे। हर कश्मीरी पंडित मरेगा। कश्मीर सिर्फ उनके लिए है जो अल्लाह को मानेंगे और उनके रास्ते पर चलेंगे।”

अब एक ओर जहाँ सालों से कश्मीरी पंडितों को निशाना बनते देख इस पत्र से एक बार फिर से कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा पर सवाल उठना शुरू हुआ, 90 का वो समय याद किया जाने लगा जब हिंदुओं को ऐसी ही धमकियों के बाद घाटी छोड़ने को मजबूर किया गया था तो ऑल्ट न्यूज मैदान में आया और इस पत्र को झूठा बताने के लिए फैक्ट चेक किया जबकि दिलचस्प बात ये है कि ये पत्र फर्जी है इसके कोई सबूत कहीं और नहीं हैं। मगर ऑल्ट न्यूज ने उन बिंदुओं को खोजा है जो ये बता सकें कि इस्लामी आतताइयों के नाम से जारी ये पत्र उनका नहीं है।

ऑल्टन्यूज का फैक्ट चेक

ऑल्टन्यूज ने अपना फैक्ट चेक विवेक अग्रिहोत्री के ट्वीट से शुरू किया जिसमें उन्होंने इस पत्र को शेयर किया था। इसके बाद उन्होंने अन्य मीडिया प्रकाशनों का नाम अपनी रिपोर्ट में डाला और ये बताने की कोशिश की कि कैसे दक्षिणपंथी विचारधारा वाले संस्थानों ने इस पत्र के बारे में प्रकाशित किया है लेकिन उनके ऊपर विश्वास नहीं किया जा सकता। इसके बाद इस फैक्ट चेक में ऑल्टन्यूज, पत्र की हकीकत को जानने के लिए कुलगाम के सरपंच तक पहुँचा। जहाँ ऑल्ट न्यूज को मानना पड़ गया कि सरपंच ने भी कहा है कि ये पत्र कश्मीरी हिंदुओं को डाक द्वारा प्राप्त हुआ है।

ऑल्ट न्यूज के फैक्ट चेक में कुलजाम के सरपंच विजय रैना का बयान लिखा गया, जिसके मुताबिक उन्होंने कहा कि ये पत्र बारामुला जिले की वीरवन कॉलोनी के स्थानीयों को मिला और उनके मुताबिक इसे डाक द्वारा भेजा गया।

अब किसी सामान्य न्यूज संस्थान के लिए शायद यहाँ बात खत्म हो जाती है जब खुद कश्मीरी पंडित ही इस बात को बता दें कि उन्हें ये पत्र मिले हैं। लेकिन ऑल्ट न्यूज जैसे संस्थान के लिए ये जवाब वो नहीं है जो वो अपने फैक्ट चेक में देना चाहते हैं। उन्होंने अपने पाठकों के दिमाग से खेलने के लिए पूरी जी जान से समझाया कि ये पत्र गलत है और किसी इस्लामी ने हिंदुओं को काफिर कहकर मारने की धमकी नहीं दी।

ऑल्ट न्यूज ने 5 बिंदुओं पर पाठकों को ये समझाया कि कैसे ये पत्र गलत है।

पत्र में कोई हस्ताक्षर नहीं है– सबसे पहले ऑल्ट न्यूज ने ये दिखाया कि कैसे ये पत्र इसलिए फर्जी है क्योंकि इस पर कमांडर के कोई हस्ताक्षर नहीं है। शायद ऑल्ट न्यूज मानता है कि आतंकी संगठन कॉरपोरेट कंपनियों की तरह काम करते हैं और उनके पत्रों में भी वो नियम फॉलो किए जाने चाहिए जो कि किसी भी कंपनी के आधिकारिक पत्र में फॉलो होते हैं।

लश्कर-ए-इस्लाम की स्पेलिंग गलत– अगला बिंदु जो ऑल्ट न्यूज ने पत्र को फर्जी बताने के लिए इस्तेमाल किया वो ये कि उन्हें लश्कर-ए-इस्लाम के पत्र में वर्तनी अशुद्धियाँ मिलीं। ऑल्ट न्यूज मानता है कि लश्कर-ए-इस्लामी अपना ही नाम कैसे गलत लिख सकता है। अपनी बात को समझाने के लिए उन्होंने पाकिस्तानी साइट तक का उदाहरण दिया है और ये कहा है कि संगठन द्वारा स्पेलिंग मिस्टेक की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

पत्र पर गलत लोगो- ऑल्ट न्यूज ने अपने पाठकों का ध्यान उस लोगो पर दिलवाया जो पत्र में नजर आ रहा है उनका कहना है कि ये जो लोगो है वो जमात-उद-दावा का है जो कि पाकिस्तान का एक संगठन है।

लेटरहेड पर संदेह– इसी तरह आगे फैक्ट चेक में ये बताया गया कि कैसे इसी लेटरहेड वाला पत्र 2016 में भी प्रसारित हो रहा था जिसमें इस्लामी आयत को अधूरा छोड़ा गया था। अब ये समझना मुश्किल है कि क्या ऑल्ट न्यूज ये बताना चाहता है कि इस्लामी आतंकी किसी आयत को अधूरा नहीं छोड़ सकते इसलिए 2016 वाला लेटर भी फर्जी था और अब जो शेयर हो रहा वो भी फर्जी है।

तथ्यात्मक गलतियाँ-आखिर में ऑल्ट न्यूज ने जो अपना फैक्ट चेक का बिंदु दिया वो ये है कि पत्र में उन्हें तथ्यात्मक गलतियाँ दिखाई दीं। जैसे इसमें निश्छल ज्वेलर्स और बिंद्रू की हत्या का जिक्र है। अब ऑल्ट न्यूज ये बताता है कि ये दोनों हिंदुओं की हत्या तो हुई पर चूँकि इसका इल्जाम अपने सिर नहीं लिया इसलिए ये उनके पत्र में इसका जिक्र नहीं हो सकता।

गौरतलब है कि ऑल्टन्यूज हमेशा से इस्लामी कट्टरपंथियों को बचाने के लिए अपने फैक्टचेक का इस्तेमाल करते हुए आया है। आज लिबरल अपना प्रोपेगेंडा चलाने के लिए आँख बंद करके इस साइट पर विश्वास करते हैं। सोचिए कि इस पत्र पर इतनी गहनता से जो फैक्टचेक किया गया है उसका बिंदु क्या रहा होगा। इसमें स्पष्ट तौर पर हिंदुओं को मारने की धमकी और देश की पीएम व गृहमंत्री के लिए घृणा दर्शाई गई हैं। फिर भी एक ऐसा फैक्ट चेक सिर्फ इसलिए हुआ ताकि इस्लामी कट्टरपंथियों पर सवाल न उठाया जाए।

अब गुजरात के खंभात में जहाँ हुई थी हिंसा, वहाँ अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर, रामनवमी पर हमले के लिए कब्रिस्तान के पास पत्थरबाजों का हुआ था जमावड़ा

रामनवमी (Ram Navami) के दिन गुजरात के खंभात (Khambhat, Gujarat) में हुई हिंसा के आरोपितों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया गया है। इस कार्रवाई में प्रशासन ने कई अवैध दुकानों को ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई 15 अप्रैल 2022 (शुक्रवार) को हुई है। बुलडोजर की कार्रवाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

न्यूज़ 18 के मुताबिक, खंभात के जिलाधिकारी के आदेश के बाद अवैध निर्माण के खिलाफ यह कार्रवाई शकरपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में की गई है। SDM निरुपा गड़वी ने बताया, “खंभात में अवैध और गैर-कानूनी निर्माणों के खिलाफ हमारी कार्रवाई जारी है। इस अभियान में हमारे साथ पुलिस का भी सहयोग है।”

इस अभियान में शामिल खंभात के एडिशनल SP अभिषेक गुप्ता ने कहा, “हिंसा में शामिल आरोपितों के खिलाफ पुलिस की जाँच जारी है। इस बीच SDM के निर्देश पर शकरपुर विस्तार में उनके द्वारा बनाए गए अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है। इस दौरान सभी संवेदनशील स्थानों को भी चिन्हित किया जा रहा है।”

पत्थरबाजी करने के लिए कब्रिस्तान सबसे बेहतर स्थान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि खंभात हिंसा में मौलवियों द्वारा बाहर से बुलाए गए पत्थरबाजों को शोभा यात्रा के दौरान कब्रिस्तान के पास रहने को कहा गया था। पत्थरबाजी के लिए कब्रिस्तान इसलिए चुना गया था, क्योंकि साजिशकर्ताओं के मुताबिक कब्रिस्तान में पत्थर आसानी से मिल जाते हैं। साथ ही बाहरी पत्थरबाजों को ये विश्वास दिलाया गया था कि अगर वो पकड़े गए तो उनको छुड़वा लिया जाएगा।

मोबाईल से डिलीट कर दी गई थी चैटिंग

अहमदाबाद मिरर के मुताबिक, मामले की जाँच कर रही पुलिस टीम में शामिल एडिशनल SP ने पाया कि आरोपितों ने सबूत छिपाने की काफी कोशिश की थी। हिंसा के बाद आरोपितों द्वारा मोबाईल से हुई चैट को डिलीट किया गया था। डिलीट किए सबूतों में चैटिंग के साथ कॉल रिकार्डिंग भी शामिल है। पुलिस फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ उन सबूतों को दुबारा रिकवर करने का प्रयास कर रही है। हिंसा के आरोपितों द्वारा मोबाईलों पर भड़काऊ वीडियो भी देखे जाते थे।

रणबीर संग आलिया ने फेरे भी नहीं किए पूरे! भाई राहुल ने कहा- पंडित के सामने 4 ही लिए, रिपोर्ट में दावा- महेश भट्ट ने बेटी को वचन देने से रोका

बॉलीवुड (Bollywood) स्टार रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) और आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की 14 अप्रैल 2022 को मुंबई में शादी हुई। इसके बाद से सेलिब्रिटिज और फैंस दोनों को शुभकामना दे रहे हैं। इस बीच मीडिया में शादी के फेरों को लेकर विरोधाभासी बातें आ रही है। आलिया के रिश्ते के भाई राहुल का कहना है कि पंडित के सामने चार ही फेरे लिए गए थे। वहीं एक अन्य रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि महेश भट्ट ने बेटी को सातवाँ वचन देने से रोक दिया।

दिलचस्प यह है कि दोनों ही रिपोर्ट दैनिक भास्कर ने ही प्रकाशित की है। एक रिपोर्ट में राहुल भट्ट के हवाले से कहा गया है कि शादी कराने वाले पंडित के सामने रणबीर और आलिया ने केवल चार फेरे लिए। राहुल के मुताबिक, वो एक ऐसे परिवार से आते हैं, जिसमें कई धर्म और संस्कृति के लोग हैं। इसलिए इसके बारे में उन्हें बहुत पता नहीं है। फेरे की यह सब बात उनके लिए बहुत ही इंट्रेस्टिग थी।

वहीं एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी में सात की जगह केवल 6 वचन ही लिए गए। सूत्रों ने इसकी वजह आलिया के पिता महेश भट्ट को बताया है। बताया गया है कि महेश भट्ट ने बेटी को आखिरी वचन लेने से रोक दिया। उनका कहना था कि उन्होंने अपनी शादी में अपनी पत्नी से ये वचन नहीं लिए थे, तो अपनी बेटी को कैसे लेने दे सकते हैं। हिंदू परंपराओं के अनुसार शादी में 7 फेरे लिए जाते हैं। हर फेरा एक वचन होता है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्टों का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि शादी से पहले आई रिपोर्टों में कहा गया था कि यह जोड़ी हिंदू परंपराओं के अनुसार ही शादी करेगी। हालाँकि ‘कन्यादान’ को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। दरअसल पिछले सान एक विज्ञापन में आलिया ने कन्यादान को पिछड़ी सोच बताया था। आलिया भट्ट के पिता, महेश भट्ट की माँ शिरीन मोहम्मद अली मुस्लिम थीं, तो वहीं पिता नानाभाई भट्ट गुजराती ब्राह्मण थे। इस तरह से महेश भट्ट मुस्लिम और गुजराती ब्राह्मण दोनों ही हैं। ऐसे में यह साफ नहीं है कि शादी में इस्लामिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाएगा या नहीं। इसी तरह, आलिया की माँ, सोनी राजदान कश्मीरी हिंदू होने के साथ-साथ ईसाई भी हैं। उनके पिता नरेंद्र नाथ राजदान कश्मीरी पंडित हैं तो वहीं उनकी माँ गर्ट्रूड होलज़र ब्रिटिश-जर्मन हैं।

बुलडोजर के डर से तोता बन गया वाहन चोर गिरोह का सरगना नासिर: ₹2 करोड़ का माल बरामद करवाया, साथियों के नाम भी उगले

उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद पुलिस ने एक वाहन चोर गिरोह के सरगना को पकड़ा। पूछताछ में वह अपने साथियों और चोरी के सामान की जानकारी नहीं दे रहा था। कुछ देर बाद पुलिस ने उसके घर पर बुलडोजर चलवाने की चेतावनी दी। बुलडोजर का नाम सुनते ही आरोपित ने पुलिस के सामने सारे राज उगल दिए। आरोपित का नाम नसीरुद्दीन उर्फ़ नासिर है। मामला 12 अप्रैल 2022 (मंगलवार) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक SHO इंस्पेक्टर रंजन शर्मा द्वारा बुलडोजर मँगाने की बात सुनते ही नासिर ने 10 कार और 40 वाहनों के कटे हुए पार्ट्स और करीब दो करोड़ रुपए का चोरी का माल बरामद करवा दिया। इसके साथ उससे मिली सूचना पर उसकी गैंग के 6 अन्य सदस्य भी पकड़े गए। अब तक पुलिस ने इस गिरोह के 12 सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। ये सभी आरोपित पेशवर अपराधी हैं। इनके खिलाफ उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कई थानों में FIR दर्ज हैं।

आरोपितों के क्राइम रिकॉर्ड (साभार – मुरादाबाद पुलिस)

इलेक्ट्रिशियन और ड्राइवर बन खोजते थे शिकार

मुरादाबाद पुलिस द्वारा शेयर किए गए समाचार के मुताबिक नासिर इलेक्ट्रिशियन और फुरकान ऑटो ड्राइवर बन शिकार की तलाश करते थे। नासिर घरों में AC सही करने के बहाने जाता था। इस दौरान वो घरों के बाहर खड़ी गाड़ियों को देख कर उसमें अपने द्वारा चुराए गए पार्ट्स सस्ते दामों में लगवाने की सलाह देता था। वहीं फुरकान ऑटो ड्राइवर के रूप में अन्य ड्राइवरों को चोरी के सामान सस्ते दामों में खरीदने का ऑफर देता था।

नासिर 2 वर्षों से गाँव के बाहर जंगल में बनाए गोदाम में चोरी के वाहनों को काटकर बेचता था। नासिर ने पुलिस को अपने गिरोह के मुनवा उर्फ मुन्ना, अली अहमद उर्फ गुप्ता और रिजवान के बारे में बताया। इसी के साथ पुलिस ने जाँच के दौरान अमरोहा जिले के शाहिद, रियाजुल, इमरान, फुरकान और अरमान को गिरफ्तार कर लिया। SP सिटी अखिलेश भदौरिया के मुताबिक इस गिरोह के 6 अन्य सदस्य अभी फरार हैं। उनकी तलाश की जा रही है। फरार आरोपितों के नाम शाने आलम, मुनवा उर्फ़ मुन्ना, अली अहमद उर्फ़ गुप्ता, रिज़वान, सालीम और जुम्मा हैं।

‘राम रामायण के पात्र, मैं भगवान नहीं मानता’: बिहार के पूर्व CM मांझी ने कहा- सवर्ण बाहरी, ब्राह्मणों से पूजा ना कराएँ दलित

बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री रह चुके हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) के चीफ जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया है। उन्होंने भगवान राम को मानने से इनकार करते हुए उन्हें केवल तुलसीदास रचित रामचरितमानस और महर्षि वाल्मीकि की रामायण का एक पात्र मात्र करार दिया है। मांझी ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों से पूजा-पाठ नहीं करने और मांसाहार करने वाले ब्राह्मणों से दूर रहने की अपील की है।

बिहार सरकार में एनडीए के सहयोगी मांझी सुर्खियों में बने रहने के लिए अक्सर इस तरह के बयान देते रहते हैं। वो ब्राह्मणों पर भी विवादित बयान दे चुके हैं। गुरुवार (14 अप्रैल 2022) को संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती थी और जीतन राम मांझी को बिहार के जमुई के एक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। अपना नंबर आते ही मांझी स्टेज से हिंदू सभ्यता और संस्कृति के खिलाफ बयानबाजी करने लगे। उन्होंने भगवान राम को काल्पनिक पात्र करार देते हुए कहा, “मैं राम को भगवान नहीं मानता।”

उन्होंने कहा, “रामायण में राम को लेकर अच्छी बातें लिखी गई हैं, इसलिए मैं उसे मानता हूँ, लेकिन राम को नहीं मानता। राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे, लेकिन हमारे घरों में कोई खाना नहीं खाता है।” उन्होंने अनुसूचित जाति के लोगों से पूजा-पाठ छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि पूजा करने से कोई बड़ा थोड़े हो जाता है।

ब्राह्मणों पर भी दिया विवादित बयान

मांझी ने ब्राह्मणों से पूजा-पाठ नहीं कराने को लेकर कहा कि मांस खाने वाले, शराब पीने वाले और झूठ बोलने वाले ब्राह्मणों से दूर ही रहना चाहिए। ऐसे ब्राह्मणों से पूजा कराना पुण्य नहीं, पाप है। उन्होंने कहा कि भारत के असली लोग केवल अति पिछड़े, दलित और आदिवासी हैं। ऊँची जाति वाले लोग भारत के मूल निवासी नहीं, बल्कि बाहरी हैं।

पहले भी दे चुके हैं बेतुके बयान

हालाँकि, जीतन राम मांझी के बयानों पर आश्चर्य व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है। वह पहले भी इस तरह की विवादित टिप्पणियाँ करते रहे हैं। पिछले साल दिसंबर 2021 में मांझी ने एक भोज आयोजित किया था और कहा था कि इस भोज में वही ब्राह्मण शामिल होगा, जिसने कोई पाप नहीं किया हो।

317 कमरों का महल, सोने का प्लेन, प्राइवेट क्रूज: जानिए कौन हैं एलन मस्क के ‘ट्विटर स्वप्न’ में खलल डाल रहे सऊदी प्रिंस अलवलीद

दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार टेस्ला कंपनी के मालिक एलन मस्क अब ट्विटर को खरीदना चाहते हैं। उन्होंने हाल में ट्विटर में 9.2% फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद कंपनी को अपना ऑफर दिया कि वो ट्विटर के बदले 41.39 अरब डॉलर (3.2 लाख करोड़ रुपए ) देने को तैयार हैं। इस ऑफर के बाद ट्विटर ने अपनी प्रतिक्रिया दी और ऑफर की समीक्षा करने को कहा। इसी बीच सऊदी के प्रिंस जिनके पास ट्विटर में शेयर है उन्होंने मस्क के ऑफर को ठुकरा दिया।

बता दें कि गुरुवार को एलन मस्क ने ट्विटर खरीदने की इच्छा को जगजाहिर किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर कंपनी के शेयरधारकों के लिए बोली लगाते हुए अपना प्रस्ताव रखा था। जिसके बाद ट्विटर की ओर से इस संबंध में बयान जारी किया गया। ट्विटर ने कहा कि ट्विटर का बोर्ड टेस्ला प्रमुख मस्क के सोशल मीडिया कंपनी के अधिग्रहण के लिए अवांछित, गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव का मूल्यांकन करेगा। इसके बाद ही वह इस बारे में विस्तार से कुछ कह सकते हैं।

वहीं सऊदी के प्रिंस अल वलीद बिन तलाल (Al-Waleed bin Tala) ने एलन मस्क के ऑफर को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि मंच के विकास की संभावना देखते हुए, फर्म की लागत बहुत अधिक है। उन्होंने प्रतिक्रिया दी, “मुझे एलन मस्क के प्रस्ताव पर पूरी तरह विश्वास नहीं है, जो कि ट्विटर की आंतरिक वैल्यू 54.20 डॉलर शेयर के साथ आई है।” अल वलीद बिन तलाल ने कहा, “ट्विटर के सबसे बड़े लंबे समय तक रहने वाले शेयरहोल्डर में से एक होने के नाते, @Kingdom_KHC और मैं इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हैं।”

बता दें कि सऊदी प्रिंस अलवलीद बिन तलाल अल सऊद ने 2011 में ट्विटर के कुछ शेयर्स खरीदे थे। बाद में 2015 में इसे 5.2% हिस्सेदारी तक बढ़ा दिया गया। जिसके बाद ट्विटर में उनके ओनरशिप की मार्केट वैल्यू 3.75 बिलियन रियाल (1 बिलियन डॉलर) हो गई। हालाँकि आज के समय में कंपनी में उनके स्टेक बचे हैं या नहीं ये नहीं कहा जा सकता।

जानकारी के अनुसार सऊदी के अरबपति प्रिंस की किंगडम होल्डिंग कंपनी के पास फोर सीजन्स होटल सीरीज, उबेर लिफ्ट और सिटिग्रुप में भी अहम स्टॉक है। उनके द्वारा एलन मस्क का ऑफर ठुकराए जाने के बाद एलन मस्क ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रिंस पर तंज कसते हुए पूछा कि उनका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से ट्विटर में कितना स्वामित्व है। इसके बाद उन्होंने प्रिंस से ये भी कहा कि उनका पत्रकारिता की अभिव्यक्ति की आजादी पर उनका क्या विचार है।

उल्लेखनीय है कि सऊदी प्रिंस और एलन मस्क के बीच ट्विटर पर हुई इस कहासुनी के बीच ये जानना दिलचस्प है कि सऊदी के प्रिंस कौन हैं जिनकी ट्विटर में 5.2 फीसद की हिस्सेदारी है।

कितने अमीर हैं सऊदी प्रिंस अलवलीद?

फोर्ब्स मैग्जीन के मुताबिक अलवलीद दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं। उनके पास लंदन के सेवॉय होटल का मालिकाना अधिकार है। कथिततौर पर उनके पास ट्विटर के अलावा एप्पल, सिटी ग्रुप बैंक, फोर सीजन्स होटल और रूपर्ट मरडॉक के स्टेक हैं। उनकी कंपनियाँ दो तिहाई से ज्यादा महिला कर्मचारियों को नौकरी देने के लिए जानी जाती हैं। 2017 में सऊदी अरब में एक नई भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने 22 राजकुमारों समेत 4 मंत्रियों और दर्जनों पूर्व मंत्रियों को हिरासत में लिया था इसमें अलवलीद बिन तलाल भी शामिल थे। तलाल को लेकर बताया जाता है कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से दुनिया का 65वाँ सबसे लंबा प्राइवेट क्रूज खरीदा था। इस क्रूज की लंबाई 85.9 मीटर है। ट्रंप ने इस क्रूज को ट्रंप प्रिंसेज का नाम दिया था जिसे प्रिंस ने किंगडम 5 केआर कर लिया।

तलाल के पास दुनिया का सबसे महंगा प्लेन है। ये प्लेन सोने का बना है जिसे उड़ता महल कहा जाता है। इसके अलावा उनके पास 321 एयरक्राफ्ट, 300 महंगी गाड़ियाँ भी हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि उनके पास ऐसी मर्सेडीज है जिस पर हीरे जड़े हुए हैं। इसकी कीमत 32 करोड़ रुपए बताई जाती है। तलाल के पास तीन बड़े महल हैं। उनके एक महल का नाम किंग रिजॉर्ट है जो कि 50 लाख वर्ग मीटर में फैला है। महल के अंदर सुंदर बगीचा और तीन झीलें हैं। दूसरे महल का नाम प्रोमोशन पैलेस है जिसकी कीमत 300 मिलियन डॉलर है। इस महल के अंदर 317 कमरे हैं। कथिततौर पर इस महल को तैयार करने में 15 हजार टन इटैलियन मार्बल का इस्तेमाल किया गया। बताया जाता है कि तलाल दुनिया के सबसे बड़े दानदाताओं में से एक हैं। उन्होंने 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का दान सामाजिक संस्थाओं को दिया हुआ है।

उत्तराखंड CM के लिए सीट खाली करेंगे कॉन्ग्रेस के MLA? ऑफर दे बोले हरीश धामी- इस पार्टी में सम्मान नहीं मिलता

उत्तराखंड के हालिया विधानसभा चुनावों में बीजेपी सत्ता बचाने में सफल रही थी। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट से हार गए थे। इस पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर उनका सदन में चुनकर आना जरूरी है। इस बीच कॉन्ग्रेस के ​एक विधायक ने उनके लिए अपनी सीट खाली करने का प्रस्ताव दिया है।

उत्तराखंड के धारचूला से अंसतुष्ट कॉन्ग्रेस विधायक हरीश सिंह धामी ने कहा कि अगर जनता कहेगी तो वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए अपनी सीट छोड़ सकते हैं। कॉन्ग्रेस पर उन्होंने अनदेखी का आरोप लगाया है। नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद हरीश धामी ने बगावती तेवर अख्तियार किए हैं। वे पूर्व सीएम और कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत के करीबी माने जाते हैं।

पार्टी पर वफादार नेताओं और कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने और नए लोगों को तरजीह देने का आरोप लगाते हुए दो बार के कॉन्ग्रेस विधायक धामी ने कहा, “मैं आहत हूँ। मैंने राज्य के विकास के लिए 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत जी के लिए अपनी सीट खाली कर दी थी। अगर मेरे निर्वाचन क्षेत्र के लोग मुझे अनुमति देते हैं, तो मैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए अपनी सीट खाली कर दूँगा।”

दरअसल हरीश धामी की मुख्य शिकायत यह है कि पार्टी के आला अधिकारियों ने चुनाव के दौरान जमीन पर ईमानदार कार्यकर्ताओं की अनदेखी की और चुनाव के बाद पार्टी में सुधार के दौरान योग्यता की उपेक्षा की। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेतृत्व, विशेष रूप से उत्तराखंड के पार्टी प्रभारी देवेंद्र यादव को चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने साफ कहा कि देवेंद्र यादव की वजह से कॉन्ग्रेस चुनाव हारी। आलाकमान को चाहिए था कि जब प्रदेश अध्यक्ष पद से गणेश गोदियाल को हटाया गया तो उससे पहले प्रदेश प्रभारी को हटाया जाता। लेकिन प्रदेश प्रभारी को नहीं हटाया गया। अब जब प्रदेश अध्यक्ष सहित नेता प्रतिपक्ष और विपक्ष के उपनेता की घोषणा हो चुकी है तो हरीश धामी अपनी उपेक्षा से काफी नाराज हैं।

उन्होंने कहा, “पार्टी आलाकमान, विशेषकर यादव की भूमिका पूरे समय आपत्तिजनक रही है। अगर उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए संसाधनों को जमीनी स्तर के उन कार्यकर्ताओं पर लगाया जाता, जिन्होंने पार्टी के लिए अपना पसीना और खून बहाया होता, तो परिणाम कुछ और होता।” इसके साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़ने की तरफ भी इशारा किया। धामी ने करीब 10 विधायकों के कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने की अटकलों से इनकार नहीं किया और कहा, “एक पार्टी जो अपने मेहनती और ईमानदार कार्यकर्ताओं का सम्मान करना नहीं जानती, वह छोड़ने लायक है। हमें उत्तराखंड के लोगों ने उनकी सेवा के लिए चुना है और हम ऐसा करेंगे।” उन्होंने अलग पार्टी बनाने की भी बात कही।

इधर नवनियुक्त प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष करण महरा ने असंतुष्ट गुटों को चेतावनी देते हुए कहा, “इन विधायकों ने कॉन्ग्रेस पार्टी के निशान पर जीत हासिल की है। उन्हें इसे ध्यान में रखना चाहिए और लोगों के जनादेश का सम्मान करना चाहिए।” पिछले दिनों राज्य में हरीश गुट के यशपाल आर्य को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। प्रीतम सिंह भी नेता प्रतिपक्ष की रेस में थे, लेकिन कॉन्ग्रेस के इस फैसले के बाद उन्होंने सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। जिसके बाद राज्य में कॉन्ग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है।

बता दें कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में सीएम पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट से हार गए थे। इसके बाद बीजेपी के छह विधायकों ने सीएम के लिए अपनी सीट खाली करने की पेशकश की है। हालाँकि पार्टी ने इस पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।