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गा^%*डू, नामर्द, दलाल, चप्पल मारेंगे… संजय राउत की भाषा सुनी आपने

बीजेपी नेताओं को जेल भेजने की धमकी देने वाले शिवसेना नेता संजय राउत आज (15 फरवरी 2022) प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आपा खो बैठे और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर डाला। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना कभी भी उन लोगों से नहीं डरती जो लोग नामर्दों की तरह वार करते हैं। बालासाहेब ठाकरे के नाम पर राउत ने कहा, “अगर तुमने कोई पाप नहीं किया है, अगर तुम्हारा मन साफ है तो किसी के बाप से मत डरो। आज के इस पत्रकार परिषद से हम संदेश देना चाहते हैं कि महाराष्ट्र गा^%* की औलाद नहीं है। मराठी मानुस ईमानदार है और हम आपसे डरने वाले नहीं हैं।”

बीबीसी द्वारा साझा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस की वीडियो में 7 मिनट के बाद राउत के मुँह से गालियों को सुना जा सकता है। इस कॉन्फ्रेंस में राउत ने केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर अपना गुस्सा निकाला। वह बोले, “पिछले कई दिनों से शिवसेना, ठाकरे परिवार, आनंदराव अडसुल, रविंद्र वायकर, अनिल परब, भावना गवली, एनसीपी प्रमुख शरद पवार के परिवार समेत कई लोगों पर केंद्रीय एजेंसियों का हमला हो रहा है। यह चिंता की बात है।”

सरकार गिराए जाने की बात से बौखलाए राउत ने बंगाल और महाराष्ट्र की स्थिति की तुलना की। बीजेपी पर निशाना साधने के लिए उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र की सरकार उन्हें गिरानी है और इसलिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। झूठे आरोप लगाकर दबाव देने की कोशिश हो रही है।” राउत ने कहा कि कुछ बीजेपी नेताओं की ओर से उनको सरकार गिराने की तारीख दी जा रही है। वह पूछते हैं कि बीजेपी नेताओं ने कहा कि 10 मार्च को यह सरकार गिरेगी, ये बात उन्होंने किस आधार पर कही है।

वैंकया नायडू को लिखा पत्र, बीजेपी नेता को गाली

कॉन्फ्रेंस में राउत ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में वैंकया नायडू को पत्र लिखा है। उन्होंने दावा किया कि 20 दिन पहले बीजेपी के कुछ प्रमुख लोग उन्हें 3 बार मिले और बार-बार यह बताना चाहा कि वो इस सरकार से निकल जाएँ क्योंकि राष्ट्रपति शासन आने वाला है। राउत ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं ने उनसे कहा था कि अगर वो साथ नहीं देते, मदद नहीं करते तो केंद्रीय एजेंसियों से उन्हें टाइट करवाया जाएगा। राउत ने कॉन्फ्रेंस में बिन किसी भाजपा नेता का नाम लिए कहा, “मैं उन लोगों का नाम अभी नहीं ले रहा, भविष्य में लूँगा। उनसे मैंने कह दिया है कि ठाकरे सरकार को कुछ नहीं होगा। आप देखिए, उसी समय पवार परिवार पर भी दबाव बनाया जा रहा है।”

बाला साहेब ठाकरे का नाम लेकर राउत ने कहा कि उन्होंने शिवसेना को झुकना नहीं सिखाया। राउत बोले, “मुझपर दबाव बनाने के लिए बार बार मेरे परिवार पर प्रेशर बनाया गया। मराठी मानुस को यह कोई काम नहीं करने देना चाहते। मेरे बच्चों को फोन करके कहा गया कि ईडी कल सुबह 4 बजे तुम्हारे घर आएगी और तुम्हारे पिता को अरेस्ट करेगी। ऐसी राजनीति कभी महाराष्ट्र में नहीं हुई लेकिन अब बीजेपी कर रही है। पिछले कुछ सालों से शिवसेना और उद्धव ठाकरे पर लगातार हमला हो रहा है।” अपनी कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने भाजपा नेता किरीट सोमैया को दलाल तक कहा और कहा कि जो सोमैया ने ठाकरे परिवार के अलीबाग में 19 बंगले होने के आरोप लगाए हैं, अगर वहाँ जाकर वो झूठे निकले तो वो राजनीति छोड़ देंगे और उस ‘दलाल’ को चप्पल से मारेंगे।

जब कंगना रनौत को कहा ‘हरामखोर’

यह पहला मौका नहीं है जब शिवसेना सांसद ने सार्वजनिक तौर पर इतनी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया हो। सितंबर 2020 में उन्होंने अभिनेत्री कंगना रनौत को ‘हरामखोर’ तक कह दिया था। राउत ने कहा था, “क्या होता है कानून? उस लड़की ने जिस तरह से बात किया, क्या वह कानून के लिए सम्मान था? आप क्या उस ‘हरामखोर’ लड़की की वकीली कर रहे हैं। जिसने शिवाजी महाराज का अपमान किया, जिसने महाराष्ट्र का अपमान किया है, आपका चैनल उसकी तरफदारी कर रहा है।” हालॉंकि विवाद बढ़ने पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि कंगना रनौत को हरामखोर इसलिए बोला था, क्योंकि इसके मायने महाराष्ट्र में अलग हैं। राउत ने कहा था, “मेरा हरामखोर कहने से वो मतलब नहीं था। हमारे महाराष्ट्र में ‘तू हरामखोर है’ का मतलब है कि नॉटी है, बेईमान है। कंगना दोनों है। मेरे हिसाब से वे नॉटी गर्ल हैं। मैंने देखा है कि वो मजा-मजाक करती हैं। और कोई भी लड़की मुंबई में रहती है, अगर देश के साथ ऐसा करती है। तो मैं कहता हूँ कि वो बेईमान है।”

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के 10 ठिकानों पर ED ने की छापेमारी, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र के वरिष्ठ राजनेता भी रडार पर

केंद्रीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दक्षिण मुंबई में 10 ठिकानों पर छापेमारी की। जानकारी के मुताबिक ईडी ने दाऊद इब्राहिम की दिवंगत बहन हसीना पारकर और भाई इकबाल कासकर के आवासों सहित मुंबई में 9 और ठाणे में 1 जगहों पर छापे मारे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कई न्यूज सोर्स ने बताया है कि चल रही छापेमारी में महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ राजनेता से संबंधित एक प्रॉपर्टी डील की जाँच भी शामिल है। बताया गया कि दाऊद के एक सहयोगी के साथ कथित तौर पर सौदा करने वाला एक स्थानीय राजनेता भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की जाँच के दायरे में है। उसकी भी जाँच की जा रही है।

मराठी समाचार एजेंसी एबीपी माझा ने बताया कि ईडी की जाँच मुख्य रूप से हसीना और इकबाल द्वारा महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ राजनेता के साथ किए गए सौदों की जाँच पर आधारित है। ईडी आगे की जाँच के लिए आने वाले दिनों में इकबाल कासकर को हिरासत में ले सकती है। इकबाल फिलहाल जेल में है।

हाल ही में, ईडी ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज एक FIR के आधार पर भगोड़े दाऊद इब्राहिम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। ईडी ने जिन परिसरों पर छापा मारा, उनमें से कुछ नागपाड़ा इलाके में हैं जो कभी दाऊद का गढ़ हुआ करता था।

ईडी कथित तौर पर हवाला एंगल की भी जाँच कर रहा है, जिसके माध्यम से दाऊद ने आतंकवाद फैलाने, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने और भारत में धार्मिक समूहों के बीच दरार पैदा करने के लिए अपने अवैध धन का इस्तेमाल किया। दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है।

फडणवीस के आरोप के बाद ED की जाँच?

इससे पहले नवंबर 2021 में, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि उनके पास एनसीपी के मौजूदा मंत्री नवाब मलिक और उनके परिवार के खिलाफ सबूत हैं, जो 2005 में मुंबई 1993 बम धमाकों के दोषियों के साथ लैंड डील में शामिल थे। फडणवीस ने बताया कि मलिक और उनके परिवार ने कंपनी ‘सॉलिडस’ के नाम पर मुंबई के कुर्ला में मालिक सरदार शाह वली खान और सलीम पटेल से जमीन खरीदी थी।

उल्लेखनीय है कि सरदार शाह वली खान को 1993 के मुंबई विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया था और सलीम पटेल को हसीना पारकर का करीबी सहयोगी भी कहा जाता है। मामले के बारे में बात करते हुए फडणवीस ने कहा, “नवाब मलिक का अंडरवर्ल्ड से सीधा संबंध है। मेरे पास पाँच संपत्ति सौदों के दस्तावेज हैं। अंडरवर्ल्ड से जुड़ी चार संपत्तियाँ खरीदी गईं। मैं उपयुक्त अधिकारी, चाहे वह पुलिस, ईडी, एनआईए हो, को उन्हें सौंप दूँगा।”

गुरुग्राम में बुर्के वाली ने कैब ड्राइवर को मारा चाकू, पुलिस से भी भिड़ी: सामने आया वीडियो

हिजाब को लेकर जारी विवाद के बीच मंगलवार (15 फरवरी, 2022) को हरियाणा के गुरुग्राम (Gurugram) में बुर्का पहने हुई एक विदेशी महिला ने एक कैब ड्राइवर को चाकू मारकर घायल कर दिया। जिससे अफरातफरी मच गई। वहीं घायल कैब ड्राइवर को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसकी हालत फ़िलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई है।

बवाल बढ़ने पर जब महिला पुलिसकर्मी ने जब बुर्का पहनी महिला को किनारे ले जाने की कोशिश की तो वह पुलिस से भी हाथापाई पर उतर आई। हालाँकि गुरुग्राम पुलिस आरोपित महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। महिला मिस्र की नागरिक बताई जा रही है। वहीं सेक्टर 15 सिविल लाइन के इंस्पेक्टर वेद प्रकाश ने बताया कि अभी तक विदेशी महिला पुलिस को जाँच में सहयोग नहीं कर रही है। महिला की भाषा पुलिस समझ नहीं पा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम के राजीव चौक पर मंगलवार सुबह करीब 11 बजे बुर्का और हिजाब पहने हुई एक विदेशी महिला ने चौक पर खड़े कैब ड्राइवर को चाकू मारकर घायल कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद महिला वहाँ से भागने लगी। वहीं घायल कैब चालक भी महिला के पीछे दौड़ा। जैसे चौक के पास तैनात पुलिसकर्मियों को घटना की जानकारी मिली तो वह भी मौके पर पहुँच कर बड़ी मुश्किल से महिला को काबू किया। वह पुलिस कर्मियों से भी हाथापाई करने लगी थी।

वहीं पीड़ित कैब ड्राइवर रघुराज ने बताया, “मैं गाड़ी चलाता हूँ। मैंने सवारी बैठा ली। ये महिला पीछे से आई तो मैंने इससे पूछा कि क्या काम है तो इसने मुझे चाकू मारा और गायब हो गई। इसने मुझसे कुछ बात भी नहीं की। मुझे कुछ नहीं पता कि कौन है क्या करती है।”

घटना के बारें में कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि महिला ने कैब ड्राइवर को रोका और जैसे ही कैब ड्राइवर ने पूछा कि आपको कहाँ जाना है? तो महिला ने चाकू निकालकर उसके कंधे पर वार कर दिया। वार करने के बाद महिला भागने लगी। कैब ड्राइवर ने भागती हुई महिला को पकड़ने की कोशिश की। तभी कैब ड्राइवर को आसपास के लोगों ने पकड़ लिया। फिलहाल हमले की वजह अभी पता नहीं चल सकी है। पुलिस की एक टीम महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

गाय के साथ रेप, वीडियो भी बनाया: जुबेर और चुन्ना गिरफ्तार, यूजर्स बोले- गाय की गलती, हिजाब नहीं पहनी थी

मानसिक विकृति क्या होती है, उसे समझना हो तो उस खबर को पढ़कर समझा जा सकता है। राजस्थान के भिवाड़ी में कुछ लोगों ने एक गाय/बछिया के साथ दुष्कर्म किया और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सोमवार (14 फरवरी 2022) को मामला सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जुबेर और मोहम्मद चुन्ना को गिरफ्तार किया है। वहीं, वारिस और तालीम की तलाश जारी है।

मामला राजस्थान के भिवाड़ी के चुहड़पुर का है। यहाँ सोमवार को एक वायरल वीडियो सामने आया, जिसमें कुछ युवक एक गाय के साथ दुष्कर्म कर रहे थे। वीडियो में दिख रहा है कि एक युवक गाय के मुँह पर पैर रखकर खड़ा है और दूसरा उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है। वहीँ, उनका एक साथ उसका वीडियो बना रहा था। यह घटना 10 फरवरी की बताई जा रही है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर

वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जाँच शुरू कर दी। जाँच के दौरान पता चला कि घटना चौपानकी थाना क्षेत्र का है। इस मामले को लेकर ASP विपिन शर्मा ने बताया कि चुहड़पुर निवासी फतेह मोहम्मद ने चार लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। इसमें चुहड़पुर के रहने वाले आसम का 21 वर्षीय बेटा जुबेर, महबूब का बेटा चुन्ना, वारिस और तालीम को नामजद आरोपित बनाया गया है।

भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि मामला सामने आते ही पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इस मामले में दो आरोपितों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।

वहीं, इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर ने कटाक्ष भी किया है। @Spoof_Junkey नाम के एक ट्विटर हैंडल ने इस खबर को साझा करते हुए कहा, “गलती गाय की है, गाय बिना हिजाब पहने घूम रही थी उसी की गलती का नतीजा है।”

बता दें कि कर्नाटक के हुबली में कॉन्ग्रेस के नेता जमीर अहमद ने कहा था कि जो हिजाब या बुर्का नहीं पहनती है, उसका रेप हो जाता है। जमीर ने कहा था, “इस्‍लाम में हिजाब का मतलब पर्दा है, जिसे घर में औरतें और लड़कियाँ पहनती हैं। यह महिलाओं की खूबसूरती को छिपाने के लिए होता है। आज भारत में रेप रेट सबसे अधिक है तो उसकी वजह भी यही है कि खूबसूरती को पर्दे में नहीं रखा जाता।” जमीर के इस बयान के बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी।

‘बुर्का पहनना होगा या जॉब छोड़ो’: जब बंगाल के कॉलेज में महिला प्रोफेसर पर डाला दवाब, केरल में मुस्लिम सोसायटी ने ही किया था ‘हिजाब बैन’

कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। बात शिक्षा से हटकर मजहब पर इस कद्र आ गई है कि विपक्षी नेता अपनी राजनीति साधने के लिए भी शैक्षणिक संस्थानों में बुर्के का समर्थन कर रहे हैं। वैसे ये पहली बार नहीं है जब शिक्षा के नाम पर कहीं मजहब को प्रमोट किया गया हो और कहीं इसका विरोध हुआ हो। बीते समय में भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं जहाँ बुर्के को शैक्षणिक संस्थान पर हावी करने की कोशिश की गई और ये बात मीडिया सुर्खियों में आईं।

महिला टीचर्स पर बनाया गया बुर्का पहनने का दबाव

साल 2010 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता के आलिया यूनिवर्सिटी में 8 टीचरों पर बुर्का पहनने के लिए दबाव बनाया गया था। इनमें 7 महिला टीचरें थीं जिन्होंने नौकरी के लिए ये शर्त मान ली थी, लेकिन इनमें एक ने इसका विरोध किया था। उसका कहना था कि अगर बुर्का पहनना होगा तो वो मर्जी से पहनेगी जबरदस्ती से नहीं। लेकिन कट्टरपंथी दबाव के चलते इस 1 महिला टीचर को उस कॉलेज परिसर से ही बाहर कर दिया गया।

रिपोर्ट बताती है कि ये घटना उस समय की है जब कोलकाता की आलिया यूनिवर्सिटी में शिरिन निद्या नाम की टीचर ने बंगाली लिटरेचर पढ़ाना शुरू किया था और स्टूडेंट यूनियन इस जिद्द पर अड़ गया कि हर महिला प्रोफेसर को बुर्का पहनना होगा। शिरिन ने अपने साथ घटित घटना पर बताया था, “अप्रैल के मध्य, छात्र संघ ने हम 8 टीचरों को बुलाया और बुर्का पहनने को कहा। छात्र संघ ने कहा कि इस मामले पर प्रशासन के साथ हमने डिस्कस कर लिया है। बस तुम्हें बुर्का पहनना है और अगर ऐसा नहीं किया तो जॉब छोड़ दो।” शिरिन ने इस मामले पर बाद में सरकार से गुहाई लगाई। जिसके बाद सरकार ने कहा था कि ये मामला गंभीर हैं और अगर मामले में कोई दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

एनडीटीवी में प्रकाशित संबंधित खबर का स्क्रीनशॉट

मुस्लिम सोसायटी ने किया था बुर्का प्रतिबंधित

इसी तरह साल 2019 में एक घटना एक खबर आई थी जब केरल की मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष पी फजल गफूर ने एक नोटिस जारी किया था। इसके अंतर्गत  सभी कॉलेज और स्कूलों में बुर्के पर प्रतिबंध लगाया गया था। यह नोटिस सभी संबंधित संस्था प्रमुख और अधिकारियों को जारी किया गया था। उन्होंने इस  निर्णय को शैक्षणिक वर्ष  2019-20 से इस आदेश से लागू करने के निर्देश दिए थे। अपने निर्णय के दौरान उन्होंने कहा था कि विद्यार्थियों, अध्यापकों और  कर्मचारियों को भी इस आदेश का पालन करना अनिवार्य था। उन्होंने कहा था कि इस्लाम का अनुसरण करना गलत नहीं है, लेकिन मध्यकाल की इस्लाम पद्धतियों का अनुसरण सही नहीं है। पी फजल के फैसले के बाद कट्टरपंथी इतना बिदके कि उन्होंने केरल में मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ पीए फजल गफूर को अज्ञात व्यक्ति ने फोन पर जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने जानकारी दी थी कि आरोपितों ने उन्हें जुमे वाले दिन अंतरराष्ट्री नंबर से फोन पर गालियाँ देते हुए जान से मारने की धमकी थी।

‘हिजाब पहनकर कॉलेज में प्रवेश न करें’: मध्य प्रदेश के कॉलेज की दो टूक, कर्नाटक में बुर्के के नाम पर परीक्षा से काटी कन्नी

कर्नाटक में शुरू हुआ हिजाब विवाद (Hijab Controversy) का असर देश के तमाम कोनों तक दिखने लगा है। अब मध्य प्रदेश के दतिया की एक कॉलेज ने अपने छात्र-छात्राओं से कॉलेज में समुदाय विशेष की पोशाक और हिजाब नहीं पहनकर आने के लिए कहा है। उधर, कर्नाटक के शिवमोगा जिले के एक सरकारी हाईस्कूल द्वारा हिजाब पहनकर आने से मना करने पर 13 छात्राओं ने कक्षा 10 की प्रारंभिक परीक्षा देने से इनकार कर दिया।

मध्य के दतिया के पीजी गर्वनमेंट कॉलेज ने परिसर में हिजाब को लेकर एक सूचना जारी किया है। कॉलेज में हिजाब पहने दो छात्राओं का एक वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने प्रदर्शन किया था। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने इस सूचना को जारी किया। कॉलेज द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “महाविद्यालय में समस्त प्रवेशित छात्र/छात्राओं छात्र/छात्राओं को सूचित किया जाता है कि किसी समुदाय विशेष से संबंधित अथवा किसी अन्य विशेष वेश-भूषा जैसे हिजाब आदि में प्रवेश ना करें। समस्त छात्र/छात्राएँ शिक्षा के इस मंदिर में शालीन एवं सभ्य वेशभूषा में प्रवेश लें।”

इस मामले पर प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दतिया के पीजी कॉलेज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रिंसिपल द्वारा निकाले गए आदेश की जाँच के लिए दतिया के कलेक्टर को निर्देश दिया गया है। मिश्रा ने कहा, “प्रदेश सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है #Hijab पर बैन को लेकर सरकार के पास कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है इसलिए कोई भ्रम ना फैलाएँ।”

उधर कर्नाटक के शिवमोगा जिले के गवर्नमेंट पब्लिक स्कूल के शिक्षकों ने परीक्षा के दौरान स्कूल की मुस्लिम लड़कियों को उनके हिजाब उतारने का आदेश दिया, लेकिन लड़कियों ने इससे साफ मना कर दिया और परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर उन पर हिजाब उतारने के लिए दबाव डाला गया तो वे स्कूल छोड़ देंगी। उनका कहना है कि उन्हें उनकी इस्लामिक पोशाक में ही परीक्षा देने की अनुमति दी जाए।

एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों और स्कूल प्रशासन ने इस छात्राओं को एक अलग कमरे में परीक्षा देने के लिए मनाने की कोशिश की, ताकि वहाँ उन्हें हिजाब पहनने की आवश्यकता ना पड़े, लेकिन छात्राओं ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और परीक्षा छोड़ दिया। वहीं स्कूल की इन मुस्लिम लड़कियों के परिजनों ने भी अपने बच्चों का समर्थन किया और यह कहते हुए उन्हें घर ले गए कि वे स्कूल नहीं आएँगी।

हिजाब के लिए परीक्षा का बहिष्कार करने वाली छात्रा आलिया महत का कहना है, “अदालत ने अभी तक आदेश नहीं दिया है। इसलिए, जो भी हो हम हिजाब नहीं उतारेंगे। हम परीक्षा न भी दें तो कोई बात नहीं। मेरे लिए परीक्षा नहीं, धर्म महत्वपूर्ण है। अगर हिजाब अनिवार्य नहीं किया गया तो हम स्कूल नहीं आएँगे। मेरे माता-पिता ने मुझसे कहा है कि अगर हिजाब उतारने के लिए कहा जाए तो मैं घर वापस आ जाऊँ।”

खबर फैलते ही DDPI रमेश आनन-फानन में स्कूल पहुँचकर छात्राओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं मानीं। रमेश ने कहा कि स्कूल विकास निगरानी समिति और माता-पिता समस्या समाधान खोजने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, “परीक्षा का बहिष्कार करने वाली छात्राओं की परीक्षा के लिए फिर से व्यवस्था की जाएगी।”

वहीं, इस्लामवादी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसकी छात्र शाखा कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) ने इन विरोधों का समर्थन किया। उन्होंने स्कूल में यूनिफॉर्म के नियम होने के बावजूद स्कूलों में हिजाब/बुर्का की अनुमति देने की माँग की है। एक अन्य इस्लामिक संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद ने भी इसका समर्थन किया है।

संसद टीवी के YouTube चैनल को हैकरों ने बनाया निशाना, नाम बदलकर किया ‘Etherium’: साइबर टीम ने लिया एक्शन

संसद टीवी का YouTube अकाउंट, जो लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण करता है, इसे हैक किए जाने के बाद अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। हैकरों ने इसका नाम बदलकर “एथेरियम” कर दिया था, जो एक क्रिप्टोकरेंसी है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय की वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, “अलर्ट! @sansad_tv संसद टीवी @YouTube चैनल को हैक किए जाने और छेड़छाड़ के बाद अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। चैनल पर 15 फरवरी की सुबह अनधिकृत और अनुचित गतिविधि देखी गई थी। चैनल का नाम बदलकर ‘एथेरियम’ कर दिया गया था। क्रिप्टो हैकर्स का हाथ होने का संदेह है। जाँच जारी है।”

वहीं संसद टीवी के यूट्यूब अकाउंट से यह मैसेज दिखा रहा है, “यूट्यूब के कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने पर इस अकाउंट को बंद कर दिया गया है।”

घटना के बाद संसद टीवी ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। अपने बयान में संसद टीवी ने कहा:

संसद टीवी द्वारा जारी बयान

15 फरवरी 2022 (मंगलवार 01:00 AM) इस चैनल पर लाइव स्ट्रीमिंग सहित हैकरों द्वारा चैनल का नाम बदलकर “एथेरियम” कर दिया गया था। संसद टीवी की सोशल मीडिया टीम ने तुरंत इस पर काम किया और सुबह करीब साढ़े तीन बजकर 45 मिनट पर संसद टीवी चैनल को बहाल कर दिया।

भारत में साइबर सुरक्षा बनाई गई नोडल एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT4n) ने भी उपरोक्त घटना की सूचना दी है और संसद टीवी को सतर्क कर दिया है। हालाँकि बाद में, YouTube ने सुरक्षा खतरों को स्थायी रूप से ठीक करना शुरू कर दिया है और इसे जल्द से जल्द बहाल कर दिया जाएगा

वहीं अधिकारियों ने कहा कि Google को समस्या की सूचना दी गई थी, जो इस मामले में शिकायत की जाँच कर रही है।

03 साल, 1.15 लाख किलोमीटर, 144 घर: बलिदानियों के आँगन की मिट्टी इकट्ठा करने की एक म्यूजिशियन की यात्रा

बेंगलुरु के उमेश गोपीनाथ जाधव (Umesh Gopinath Jadhav) फार्मेसी के प्रोफेसर रहे हैं। म्यूजिशियन हैं। परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं। लेकिन पुलवामा में आतंकी हमले ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। इसके बाद वो सब कुछ छोड़कर एक ऐसी यात्रा पर निकल गए जो देशभक्ति और जज्बे की अनूठी मिसाल है।

करीब 1.15 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर जाधव फिर से बेंगलुरू पहुँच गए हैं। उन्होंने 14 फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के बारे में जानकारी मिलने के बाद नौकरी छोड़ दी। बलिदानियों के परिवार से मिलने और उनके घरों की मिट्टी इकट्ठा करने का फैसला किया था। 9 अप्रैल 2019 को वह अपनी इस यात्रा पर निकले थे। जाधव के अनुसार इस यात्रा के दौरान बलिदानियों के परिवारों और नागरिकों के साथ बातचीत से उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि बिना वर्दी पहने भी कोई देश के लिए बहुत कुछ कर सकता है।

1.15 लाख किलोमीटर की यात्रा

उमेश गोपीनाथ जाधव सड़क मार्ग से 1.15 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर सोमवार (14 फरवरी 2022) को बेंगलुरू पहुँचे। अपनी इस यात्रा में उन्होंने न केवल पुलवामा बलिदानियों के परिवार से मुलाकात की, बल्कि पहले और दूसरे विश्व युद्ध, कारगिल युद्ध, उरी हमला, पठानकोट हमाला, ऑपरेशन रक्षक, गलवान संघर्ष और हाल ही में कुन्नूर हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों से भी मुलाकात की। इस तरह उमेश गोपीनाथ ने कुल 144 जवानों के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की।

उन्होंने सोमवार को द हिंदू से बात करते हुए मांड्या में सीआरपीएफ जवान एच गुरु के परिवार को याद किया। उन्होंने कहा, “परिवार का दु:ख असहनीय था। उनकी माँ ने कहा कि तुम एक बेटे की तरह आए हो और मुझे मिट्टी सौंप दी। वे शब्द आज भी मेरे दिल में हैं। हर परिवार ने अपने बेटे की तस्वीरें और यादें साझा की। मैं उनके साथ बैठा और उनके साथ रोया।”

जाधव ने जिस कार से यह यात्रा की, उस पर देशभक्ति के नारे लिखे हुए थे। वह उस कार का इस्तेमाल रात में सोने के लिए भी करते थे, क्योंकि वह होटल का बिल भरने में असमर्थ थे। उन्होंने कहा, “मेरी यात्रा स्पॉन्सर्ड नहीं है और मैं देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले देशवासियों के प्रति अपनी देशभक्ति और सम्मान दिखा रहा हूँ।”

बदल गया जीने का मकसद

जाधव की इस यात्रा के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। अजमेर में एक म्यूजिक कंसर्ट के बाद पिछले साल 14 फरवरी को वे बेंगलुरु के अपने घर लौट रहे थे। जयपुर एयरपोर्ट पर टीवी स्क्रीन में यह न्यूज लगातार चल रही थी कि आत्मघाती हमलावरों ने सीआरपीएफ काफिले पर हमला कर दिया। जैसे ही वह विचलित कर देनेवाला दृश्य टीवी पर चलने लगा, तब उन्होंने अपने मन में कहा कि उन्हें बलिदानी के परिवारों के लिए कुछ करना है। फिर उन्होंने वीरों के घरों से मिट्टी इकट्टा करने का फैसला किया। फरवरी 2020 में उन्होंने पुलवामा के वीरों के घर से एकत्र की गई मिट्टी को सेना को सौंपा था। अब वे अन्य बलिदानियों के घरों की मिट्टी दिल्ली में एक और स्मारक बनाने के लिए रक्षा बलों को सौंपेंगे।

भावुक कर देने वाले पल

उमेश गोपीनाथ जाधव का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले मांड्या में सीआरपीएफ जवान एच गुरु के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि सभी बलिदानियों के परिवार से मिलना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने देश के हर राज्य से कम से कम दो लोगों से मिलने की कोशिश की। लेकिन नासिक में चार अलग-अलग परिवार उनसे मिलने आए और सभी ने अपने-अपने घरों की मिट्टी को चार की जगह एक कलश में मिला दिया था। वह कहते हैं, “यह बेहद ही भावुक पल था। किसी भी बलिदानी के परिवार ने मुझसे मिलने से इनकार नहीं किया। कई लोगों ने मुझे अपने घर पर ठहराया। हालाँकि लॉकडाउन की वजह से इस काम में कुछ देरी हुई।”

डॉक्यूमेंट्री की बना रहे योजना

गोपीनाथ जाधव ने अपनी यात्रा के दौरान दो फील्ड मार्शल जनरल केएम करियप्पा और जनरल सैम मानेकशॉ एवं 26/11 हमले में वीरगति को प्राप्त हुए मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के घरों से से भी मिट्टी इकट्ठा की। अब जाधव और उनके दोस्त बलिदानियों के परिवारवालों से बातचीत और अपनी यात्रा के संबंध में एक डाक्यूमेंट्री बनाने की योजना बना रहे हैं।

‘सब l*nd भक्त है ब्रो’: हिजाब के बहाने सपा नेता आजमी ने जैन संत का उड़ाया मजाक, इस्लामी गालीबाज भी टूट पड़े

हिजाब के बहाने महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के नेता अबू फरहान आज़मी ने इंस्टाग्राम पर जैन साधु तरुण सागर की एक तस्वीर शेयर करते हुए हरियाणा विधानसभा को अपने सन्यासी स्वरूप (नग्न रूप) में संबोधित करने के लिए उनका मजाक उड़ाया। उसने कहा कि अगर एक सार्वजनिक समारोह में एक ‘हिंदू’ को नग्न होने की अनुमति है, तो कर्नाटक में एक मुस्लिम महिला स्कूल जाने के लिए हेडस्कार्फ़ (Hijab) क्यों नहीं पहन सकती है?

फरहान द्वारा किए गए पोस्ट में लिखा है, “इस हिंदू साधु ने विधान सभा के अंदर नग्न प्रवचन दिया! और एक भी मुस्लिम ने यह माँग नहीं की कि वह कुछ कपड़े पहन ले, फिर कर्नाटक सरकार कौन है या भारतीय मुस्लिमों के अधिकारों को फिर से लिखने वाला कोई है। आप जो चाहें करें ????#WeWontGiveupHijab ️??”

फरहान आज़मी का पोस्ट

बता दें कि दिगंबर जैन साधु तरुण सागर ने 2016 में हरियाणा विधानसभा को संबोधित किया था। दिगंबर जैन समुदाय के सन्यासी कपड़े नहीं पहनते हैं।

पोस्ट पर की गई टिप्पणियाँ पोस्ट की तुलना में कहीं अधिक वाहियात है। हालाँकि, वहाँ यह स्पष्ट करने वाले ट्वीट भी थे कि वह हिंदू नहीं बल्कि जैन है, और मुस्लिमों ने झुण्ड बनाकर जैन भिक्षु का मज़ाक उड़ाया।

साकिब शेख (saqiiiib__1y1) नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा “सब l*nd भक्त हैं ब्रो”

फरहान आज़मी के पोस्ट पर कमेंट

Moviz Shaikh (moviz_shaikh) नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा, “Fuc* देयर लाइफ।”

फरहान आज़मी के पोस्ट पर कमेंट

अमीर हमजा शेख (_amirsaik) ने ट्वीट किया, “सर हम समझते हैं कि यह हिजाब के बारे में नहीं है बल्कि यह इस्लाम के बारे में है और मुस्लिमों के लिए अब सलाहुद्दीन अय्यूबी जैसा कोई मुस्लिम नेता नहीं है, हर कोई अपने लाभ के लिए काम नहीं कर रहा है… और अब हम अल्लाह के साथ ज़्यादा जुड़े हैं।”

फरहान आज़मी के पोस्ट पर कमेंट

बता दें कि समाजवादी पार्टी के फरहान आजमी ने जो फोटो शेयर की है वह जैन मुनि तरुण सागर की हरियाणा विधानसभा को संबोधित करने की है। तरुण सागर दिगंबर समुदाय के जैन साधु थे और जैन समुदाय के यह सन्यासी वस्त्र नहीं पहनते हैं। पहले भी 2019 में, संगीतकार विशाल ददलानी और रॉबर्ट वाड्रा के बहनोई तहसीन पूनावाला के खिलाफ जैन भिक्षु का मज़ाक उड़ाकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले दर्ज किए गए थे।

कौन है सपा नेता फरहान आज़मी

गौरतलब है कि फरहान आजमी महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी प्रमुख अबू आजमी के बेटे हैं। पिछले साल जून में उन्होंने इलाहाबाद नाम की आलोचना करने के लिए योग गुरु बाबा रामदेव की गिरफ्तारी की माँग की थी। 2020 में, आज़मी ने अयोध्या की यात्रा से ठीक पहले शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे को धमकी दी थी। उन्होंने राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद बनाने की भी कसम खाई थी।

उनके पिता विभाजनकारी सेक्सिस्ट टिप्पणी करने के लिए भी जाने जाते हैं और उन्होंने अक्सर राजनीति में एक रूढ़िवादी इस्लामिक लाइन का पालन किया है।

आजमी ने पिछले महीने पीएम मोदी की सौ साल की माँ हीराबेन मोदी का भी अपमान किया था। 4 जनवरी को, उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक राजनीतिक सभा में बोलते हुए, आजमी ने कहा, “मोदीजी, मुझे अपनी माँ का प्रमाण पत्र दिखाओ, वह कहाँ पैदा हुई थी?” अपने संबोधन के दौरान, आजमी को यह झूठ फैलाते हुए भी देखा गया कि सीएए और एनआरसी भारतीय मुसलमानों की नागरिकता की स्थिति को खतरे में डालते हैं।

पंजाब में मतदान से पहले कॉन्ग्रेस का एक और विकेट गिरा: मनमोहन सरकार में मंत्री रहे अश्विनी कुमार का इस्तीफा, ‘राष्ट्रीय हितों’ का दिया हवाला

पाँच राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों (Assembly Election 2022) के बीच कॉन्ग्रेस (Congress) पर एक के बाद एक मसीबतें आ रही हैं। पार्टी की पोस्टर गर्ल्स से लेकर वरिष्ठ नेता तक कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़ रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह (RPN Singh) के बाद अब पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार (Ashwini Kumar) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी (Soniya Gandhi) को सौंपे इस्तीफे में अश्विनी कुमार ने कहा कि वह पार्टी के बाहर रहकर राष्ट्रीय हितों की बेहतर सेवा कर पाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कहा जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा और गुलाम नबी आजाद को पद्म भूषण देने के बाद जो विवाद हुआ, उसके बाद से ही उन्होंने पद छोड़ने का मन बना लिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा, “इस मामले पर विचार करने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि वर्तमान हालात और अपनी गरिमा को ध्यान में रखते हुए मैं पार्टी के बाहर रहकर बड़ी राष्ट्रीय समस्याओं की अच्छी तरह से सेवा कर सकूँगा।”

अपने त्याग-पत्र में उन्होंने आगे लिखा, “पार्टी के साथ अपने 46 वर्षों के लंबे जुड़ाव को विराम देते हुए पार्टी को छोड़ रहा हूँ और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा परिकल्पित उदार लोकतंत्र के वादे के आधार पर परिवर्तनकारी नेतृत्व के विचार से प्रेरित सार्वजनिक मुद्दों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने की उम्मीद करता हूँ।”

अश्विनी कुमार का परिवार दो पीढ़ियों से कॉन्ग्रेस से जुड़ा रहा है। वह साल 2002, 2004 और 2010 में पंजाब से राज्यसभा सांसद रहे। मनमोहन सिंह की सरकार में अश्विनी कुमार केंद्रीय कानून मंत्री थे। इस्तीफे के बाद किसी अन्य पार्टी में शामिल होने को लेकर उनकी अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई नहीं है। इधर उनके इस्तीफे पर भी कॉन्ग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पंजाब में 20 फरवरी को सभी 117 सीटों पर मतदान होने हैं। ऐसे में अश्विनी कुमार के इस्तीफे का असर वहाँ देखने को मिल सकता है।

इसके पहले 25 जनवरी को कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुँवर रंजीत नारायण प्रताप सिंह (RPN Singh) ने इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान उन्होंने लिखा था, “आज जब पूरा राष्ट्र गणतंत्र दिवस का उत्सव मना रहा है, मैं अपने राजनैतिक जीवन में नया अध्याय आरंभ कर रहा हूँ। जय हिंद।” आरपीएन सिंह ने बाद में भाजपा ज्वॉइन कर ली थी।