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पंजाब में CM फेस के ऐलान के बाद भी सिद्धू और चन्नी के बीच रार: चुनाव प्रचार से गायब हैं सिद्धू, पत्नी बोली- विवाद ना हो इसलिए नहीं कर रहे कैंपेन

पंजाब विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly election 2022) में कॉन्ग्रेस का सीएम चेहरा बनने में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (CM Charanjit Singh Channi) से पिछड़ने के बाद प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Siddhu) प्रसार अभियान से गायब हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने पंजाब के लिए अपना ‘मॉडल’ भी पेश किया है। जाहिर है कि सिद्धू सीएम चन्नी को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में चन्नी के नाम की घोषणा करने और सिद्धू द्वारा इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के बावजूद वह प्रचार अभियानों से दूर हैं। इतना ही नहीं, पार्टी ने अभी राज्य के लिए घोषणा पत्र भी जारी नहीं किया है और सिद्धू वैष्णो देवी दर्शन के लिए चले गए हैं। उनकी अनुपस्थिति में पत्नी नवजोत कौर सिद्धू और बेटी राबिया सिद्धू के सीट पर चुनाव प्रचार की कमान संभाल रही हैं। सिद्धू अमृतसर पूर्वी से मैदान में हैं और उनके खिलाफ अकाली दल के बिक्रम सिंह मजीठिया मैदान में हैं।

इस पर सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने एबीपी को बताया कि उन्हें जहाँ प्रचार के लिए कहा जाएगा, वहाँ सिद्धू जाएँगे। इसके अलावा वो अपनी सीट पर प्रचार करेंगे। नवजोत कौर ने आगे बताया कि पार्टी ने चन्नी को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में एलान कर दिया है। ऐसे में CM कुछ और कहें और सिद्धू कुछ और तो विवाद हो जाएगा। इसलिए CM उम्मीदवार को अपने एजेंडे पर प्रचार करना चाहिए। ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री चेहरे के एलान के बाद से सिद्धू अपनी सीट के अलावा कहीं और प्रचार के लिए नहीं गए हैं।

नवजोत कौर ने यह भी उम्मीद जताई कि राज्य में पार्टी की जीत पर चन्नी प्रदेश में सिद्धू का विकास मॉडल लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि कुर्सी पर कौन बैठा है। इसी बीच सिद्धू ने ट्वीट कर पंजाब का अपना मॉडल पेश कर दिया है। इसके बारे में उन्होंने ट्वीट कर जानकारी दी।

सिद्धू ने ट्वीट कर लिखा, “नानक नाम चढ़दी कलां, तेरे भाने सरबत दा भला !! पंजाब को कल्याणकारी राज्य बनाने के लिए ये है पंजाब का माडल, पीपल्स मॉडल।”

सिद्धू ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “उन्होंने लोगों से वादा किया था कि वह पंजाब मॉडल को उनसे साझा करेंगे। श्री गुरु नानक देव जी के ‘तेरा-तेरा’ और ‘सरबत दा भला’ के दर्शन से प्रेरित पंजाब मॉडल लोगों के बीच प्रस्तुत है। इसमें पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए राजीव जी का विजन है। नई व्यवस्था से सभी चोरी पर लगाम, पंजाब से माफिया का सफाया, लोगों के कल्याण के लिए खजाना भरेगा और लोगों पर खर्च होगा।”

योग से होगा मानसिक स्वास्थ्य का इलाज, रिसर्च के लिए आगे आया जामिया मिल्लिया इस्लामिया

दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (JMI) अब योग और उसके मानसिक स्वास्थ्य लाभ को लेकर रिसर्च करेगा। इसमें उसके साथ मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNYI) भी शामिल रहेगा। इस रिसर्च के लिए उसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने फंडिंग की है। इस रिसर्च के जरिए जामिया के शोधकर्ता मॉलिक्यूलर टूल्स और न्यूरॉन्स की एक्टिविटी को रिकॉर्ड करके योग के जरिए होने वाले स्वास्थ्य लाभ को जाँचा जाएगा।

इसको लेकर जारी एक बयान में जामिया के जनसम्पर्क अहमद नजीम ने एक बयान जारी कर कहा, “इस रिसर्च में शोधकर्ता मस्तिष्क इमेजिंग, मस्तिष्क गतिविधि, जैव रासायनिक और न्यूरो-फिजियोलॉजिकल मापदंडों को परखेंगे, जो तनाव, चिंता या अवसाद के प्रति अति संवेदनशील हो सकते हैं। इसके साथ ही इन समस्याओं से निजात के लिए भी इलाज भी किया जाएगा। तीन साल तक चलने वाली इस स्टडी के दौरान इसमें शामिल होने के लिए छात्रों और कर्मचारियों को विश्वविद्यालय से नामांकित किया जाएगा। योग और दूसरे मनोवैज्ञानिक इलाज जामिया और एमडीएनआईवाई दोनों में किए जाएँगे।”

जामिया मिलिया के प्रमुख शोधकर्ता मल्टीडिसिप्लिनरी सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च एंड स्टडीज (MCARS) के डॉ तनवीर अहमद हैं, जो कि इस रिसर्च पर मनोविज्ञान विभाग की डॉ सुषमा सूरी और डॉ मीना उस्मानी व MDNYI से डॉ एस लक्ष्मी कंदन के साथ मिलकर काम करेंगे।

इसको लेकर डॉ तनवीर अहमद का कहना है कि कोरोना महामारी आने के बाद इस तरह का रिसर्च काफी व्यवहारिक हो गया है। क्योंकि कोरोना के कारण दुनियाभर में मेंटल हेल्थ की समस्याओं में तेजी आई है। उन्होंने कहा, “वैज्ञानिक तौर पर यह साबित हो चुका है कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में नई कार्य-संस्कृति के आने के बाद चिंता, तनाव और कभी-कभी डिप्रेसन के शिकार हो जाते हैं। खासतौर पर पिछले साल हुई स्टडीज से ये पता चला है कि जिन लोगों को या उनके परिवारों को कोरोना संक्रमण हुआ था, उनमें मानसिक बीमारियाँ हैं।”

मिले आँकड़ों से भी पता चलता है कि जैसे-जैसे कॉलेजों समेत दूसरे शिक्षण संस्थान खुल रहे हैं छात्रों में तनाव और अवसाद का स्तर काफी बढ़ गया है।

इस रिसर्च को लेकर एमसीएआरएस के उप निदेशक डॉ एसएन काज़िम कहते हैं कि इस रिसर्च के जरिए एक बड़ा मेंटल हेल्थ डेटा बेस तैयार किया जाएगा, जो कि भारत के विश्वविद्यालयों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि हर जगह जल्द ही ऑफलाइन क्लासेज फिर से शुरू होने जा रही हैं।

कॉन्ग्रेस की तीसरी पोस्टर गर्ल भी भाजपा में हुई शामिल: पार्टी नेतृत्व पर भेदभाव का आरोप लगा प्रियंका और वंदना पहले छोड़ चुकी हैं पार्टी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly election 2022) के लिए तैयार किए गए कॉन्ग्रेस (Congress) का स्लोगन ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ (Ladki hun lad sakti hun) की धज्जियाँ उड़ती दिख रही हैं। जिन लड़कियों को इस अभियान का चेहरा बनाकर पार्टी को महिला हितैषी दिखाने का प्रयास पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी के नेतृत्व में किया जा रहा था, वही पोस्टर गर्ल्स पार्टी छोड़ रही हैं और पार्टी तथा इस अभियान की पोल खोल रही हैं। कॉन्ग्रेस के इस अभियान की तीसरी पोस्टर गर्ल और जानी-मानी नेता पल्लवी सिंह (Pallavi Singh) भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया और शनिवार (12 फरवरी 2022) को भाजपा में शामिल हो गईं।

पल्लवी सिंह इस अभियान की प्रमुख चेहरा थीं और ये पिछले लगभग एक महीने में तीसरी महिला हैं, जिन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ दिया। इसके पहले प्रियंका मौर्य (Priyanka Maurya) और वंदना सिंह (Vandana Singh) ने कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। कॉन्ग्रेस की चार प्रमुख पोस्टर गर्ल में से तीन ने भाजपा ज्वॉइन कर ली है।

प्रियंका मौर्य ने कॉन्ग्रेस ये आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी कि कॉन्ग्रेस में धांधली हो रही है। उन्होंने कहा था, ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’, पर टिकट नहीं पा सकी, क्योंकि मैं ओबीसी थी और प्रियंका गाँधी के सचिव को घूस नहीं दे सकी।

तब उन्होंने कहा था, “बात की गई कि लड़की हूँ लड़ सकती हूँ। हमें मेहनत करने और आगे बढ़ने के लिए कहा गया। हमने बहुत मेहनत भी की। जब टिकट देने की बारी आई तो ये पार्टी (कॉन्ग्रेस) महिला और OBC विरोधी पार्टी निकली। सरोजनीनगर से टिकट रूद्रदमन सिंह को देना तय कर लिया गया तब हमें लगा कि ये गलत हुआ है। कैम्पेन के पोस्टर में मेरा चेहरा आगे करना सिर्फ एक लॉलीपॉप जैसा है। मेरे चेहरे का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस ने OBC समाज और महिलाओं को लुभाने के लिए किया। जब पहले से ही टिकट किसी और को देना तय था तब स्क्रीनिंग का ड्रामा क्यों किया गया? 35 लोगों की कमेटी, आब्जर्वर और सर्वे की बातें क्यों कही गई? सर्वे की टीम ने भी सबसे ऊपर मेरा नाम रखा था। फिर मुझ से बूथ की लिस्ट मँगवाई गई।”

प्रियंका मौर्य के पार्टी छोड़ने के कुछ ही दिन बाद वंदना सिंह ने भी कॉन्ग्रेस छोड़ दी। वंदना सिंह ने कॉन्ग्रेस और उसके वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्यकर्ताओं के साथ भेदभाव और उपेक्षा का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि प्रियंका गाँधी पार्टी के पदाधिकारियों से भी मुलाकात नहीं करती हैं।

कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद वंदना सिंह ने कहा था, “मैं 5-6 साल से कॉन्ग्रेस में सक्रिय हूँ। पदाधिकारी हूँ, महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष हूँ। प्रियंका जी ने कहा कि महिलाओं को 40 फीसदी मौका देंगे तो मुझे लगा कि मुझे भी मौका दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यदि इसी तरह पुराने लोगों को नजरअंदाज किया गया तो कोई पार्टी का झंडा उठाने वाला भी नहीं रहेगा।”

‘हिजाब पर हाथ डाला तो काट देंगे हाथ’ : सपा की महिला नेता रुबिना खानुम के बिगड़े बोल, माफी माँगने से भी किया मना

कर्नाटक के पी यू कॉलेज से शुरू हुए हिजाब विवाद पर धीरे-धीरे कट्टरपंथी बयानों का ढेर लगता जा रहा है। समाजवादी पार्टी की नेता रुबिना खानुम (रुबिना खानम) ने हाल में बयान दिया था कि अगर किसी ने हिजाब पर हाथ डालने की कोशिश की तो वह उस व्यक्ति का हाथ काट देंगी।

अपनी वीडियो में उन्होंने कहा था,

“मैं रुबिना खानुम, अलीगढ़ की वरिष्ठ सपा नेता हूँ। कर्नाटक हिजाब प्रकरण का जो मुद्दा है ये हमारे देश की बहन-बेटियों पर हमला है। हमारे हिजाब पर, आंचल पर हाथ डालने वालों के हम हाथ काट देंगे। भारत विभिन्नताओं का देश है। यहाँ पर माथे का तिलक हो, पगड़ी हो, हिजाब हो… ये सब भारत की संस्कृति का हिस्सा हैं। इस पर राजनीति करना मतलबीपन की पराकाष्ठा है। अब ये कलयुगी रावण हमारे आंचल का, हिजाब का चीरहरण करेंगे। मैं इनसे कहना चाहती हूँ महिलाओं को कमजोर समझने की भूल न करें। अरे सरकार जिस पार्टी की भी हो। अगर महिलाओं के आँचल या हिजाब पर हाथ डालने का प्रयास करोगे तो हम झांसी की रानी और रजिया सुल्तान बनकर तुम्हारे हाथ काट डालेंगे।”

माफी माँगने से रुबिना खानुम ने किया मना

अब इन्हीं रुबिना ने टाइम्स नाऊ से बात करते हुए अपने इस विवादित बयान का जमकर समर्थन किया है। रुबिना से जब मीडिया चैनल ने बात की तो एंकर ने उनसे कहा कि ये शब्द उन्होंने आवेश में तो नहीं कहे, लेकिन रुबिना अपनी बात पर कायम रहीं और हिजाब छूने वाले के हाथ को तन से जुदा करने की बात पर डटी रहीं। उन्होंने कहा कि ये सोचा-समझा बयान था।

हालाँकि, जब बाद में एंकर ने रुबिना की बातों को दोहराना शुरू किया तो फौरन वो उससे पलटने लगीं और दावा किया कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैं बस कह रही थी कि अगर हजारों लड़कों की भीड़ ने सिर से पर्दा हटाने का प्रयास किया तो मैं उनके हाथ काटूँगी।” एंकर ने ये सुन फिर से सपा नेत्री को समझाया कि उनके साथ यदि ऐसी कोई घटना हो तो उन्हें थाने जाना चाहिए न कि किसी के तन से उसके हाथ जुदा करने की बातें कहनी चाहिए। इस पर रुबिना ने कहा कि उन्होंने कोई भी गलत बातें नहीं कहीं। उन्होंने सिर्फ भारत की बहन बेटियों की इज्जत और सम्मान में आवाज उठाई है।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद मामला फिलहाल कर्नाटक हाईकोर्ट में है। बहस इस बात को लेकर है कि आखिर शैक्षणिक संस्थान जहाँ पर समानता के गुण सिखाने के लिए एक यूनिफॉर्म को लागू किया जाता है, वहाँ आखिर मजहबी लिबाज में क्लास लेना कितना उचित है कितना नहीं। रुबिना से पहले महाराष्ट्र में एक बुर्काधारी महिला ने पीएम मोदी पर इस मुद्दे को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और कहा था कि उन्हें जिंदा जलाया जाना चाहिए

जयपुर के कॉलेज में बुर्के में आई छात्राएँ, MP में परीक्षा देने आ गई बुर्का में… लुधियाना में मुस्लिम महिलाओं का मार्च

कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी के प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज से शुरू हुआ हिजाब विवाद (Hijab Controversy) राजस्थान (Rajasthan), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और पंजाब (Punjab) तक जा पहुँचा है। मुस्लिम महिलाएँ हिजाब के समर्थन के नाम पर माहौल खराब करने की कोशिश करती नजर आ रही हैं। मुस्लिम छात्राएँ हिजाब और बुर्का पहनकर लगातार शैक्षणिक संस्थानों में आ रही हैं और हर जगह इसका विरोध भी जारी है। कहीं, कॉलेज प्रबंधन ने इन मुस्लिमों को यूनिफॉर्म पहनने की हिदायत दे रहा है तो कहीं चेतावनी दी जा रही है।

राजस्थान: ड्रेस पहनकर आने को कहा तो आराजकतत्वों को बुलाकर नारेबाजी

राजस्थान (Rajasthan) में जयपुर के चाकसू स्थित कस्तूरी देवी कॉलेज में कुछ मुस्लिम छात्राएँ हिजाब और बुर्के (Hijab) में पहुँच गईं। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने सख्ती दिखाते हुए उन्हें कॉलेज में घुसने से रोक दिया। साथ ही यूनिफॉर्म का पालन करने की नसीहत भी दी। जिसके बाद ये मुस्लिम छात्राएँ अपने-अपने घरों से परिजनों को बुलाकर लाईं और कॉलेज मैनेजमेंट के खिलाफ जमकर नारेबाजी कीं। इस बीच मामले को बढ़ता देख कॉलेज प्रबंधन ने कॉलेज के मुख्य गेट को बंद कर दिया।

कर्नाटक के मुस्लिम छात्राओं की ही भाषा बोलते हुए मुस्लिम छात्राओं ने कहा कि संविधान के तहत किसी भी तरह के पहनावे की छूट दी गई है, लेकिन साम्प्रदायिक लोग बेवजह हमें परेशान कर रहे हैं।

अचानक से बुर्के में आने लगीं मुस्लिम छात्राएँ

इस मुद्दे पर कॉलेज के सहायक निदेशक सुमित शर्मा का कहना है कि कुछ दिनों से मुस्लिम छात्राएँ कॉलेज के यूनिफॉर्म की जगह बुर्का और हिजाब पहनकर क्लास में आ रही हैं। इन छात्राओं को लगातार ड्रेस कोड का पालन करने के लिए समझाया जा रहा था, लेकिन ये कॉलेज के निर्देशों को अनदेखा कर रही थीं। इसी कारण से मजबूरन ये एक्शन लेना पड़ा।

मध्य प्रदेश: बुर्के में परीक्षा देने पहुँची छात्रा

दूसरा मामला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिले का है। यहाँ के एक डिग्री कॉलेज में एमकॉम थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाएँ चल रही हैं। इस बीच एक मुस्लिम छात्रा बुर्का पहनकर परीक्षा देने के लिए पहुँच गई, जिसका बाकी के छात्रों ने जमकर विरोध किया। विरोध के बीच कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य शिवेश सिंह ने छात्रा को परीक्षा देने से पहले रोक लिया और उससे प्रवेश पत्र पर ही ये लिखवा लिया कि अब से वह कॉलेज की यूनिफॉर्म में ही परीक्षा देने आएगी, अन्यथा उसे अंदर नहीं घुसने दिया जाएगा। इस पर छात्रा भी राजी हो गई है। इसके बाद उसे परीक्षा देने की अनुमति दी गई।

इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कॉलेज का कहना है कि सभी छात्रों को पहले से ही ड्रेस कोड का पालन करने के आदेश दिए गए हैं। उसी में सभी को आना होगा।

लुधियाना में बुर्का मार्च

कर्नाटक में हिजाब विवाद के बीच पंजाब की मुस्लिम महिलाओं ने शनिवार (12 फरवरी 2022) लुधियाना हिजाब के समर्थन में बुर्का पहनकर मार्च निकाला। ये मार्च सिविल अस्पताल रोड से ब्राउन रोड, सुभानी बिल्डिंग, जामा मस्जिद और जेल रोड होते हुए निकाला गया। इससे पहले जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान लुधियानवी ने अल्लाह-हू-अकबर वाली मुस्कान खान का समर्थन किया था।

भतीजे अभिषेक बनर्जी ने की CM ममता से बगावत, प्रशांत किशोर की कंपनी है वजह? गोवा में ड्रग्स के साथ धराया I-PAC कर्मचारी

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बीच तकरार बढ़ती ही जा रही है। दोनों के समर्थक भी आपस में भिड़ रहे हैं। TMC ने 2021 में ‘वन मैन, वन पोस्ट’ की नीति अपनाई थी, जिसके तहत सरकार और पार्टी संगठन में एक व्यक्ति को एक पद देने की बात की गई थी। अभिषेक बनर्जी के समर्थकों ने इसके लिए सोशल मीडिया अभियान शुरू कर दिया। इन सब के बीच में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कंपनी ‘I-PAC’ का नाम भी सामने आ रहा है।

जून 2021 से ही अभिषेक बनर्जी इस नीति के लिए बोलते रहे हैं, ऐसे में लोगों का मानना है कि उन्होंने अपनी बुआ के खिलाफ बगावत कर दी है। उन्हें TMC का ‘नेशनल जनरल सेक्रेटरी’ का पद दिया गया था। उन्होंने पार्टी के यूथ विंग के अध्यक्ष पद से ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि इसके लिए किसी और युवा व्यक्ति की ज़रूरत है। नवंबर 2021 में ममता बनर्जी ने 6 विधायकों को ‘कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC)’ के लिए नॉमिनेट किया, तभी इस नीति में ढिलाई बरती गई थी।

इनमें से 4 पिछले बोर्ड के भी सदस्य थे। इसमें कोलकाता के मेयर रहे फिरहाद हकीम, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में से एक थे। जीत के बाद उन्हें फिर से कोलकाता का मेयर बनाया गया, जबकि वो राज्य सरकार में मंत्री पहले से ही थे। 4 बड़ी नगरपालिकाओं में चुनाव के मद्देनजर ममता बनर्जी की बैठक में उनके भतीजे अभिषेक भी मौजूद थे। फिरहाद हकीम का कहना है कि ‘वन मैन, वन पोस्ट’ वाली नीति पार्टी की नहीं है और इसे बढ़ावा नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के आधार पर कन्फ्यूजन पैदा किया जा रहा है, जो अपराध है। उन्होंने कहा कि जब ये नीति अपनाई गई थी, तभी स्पष्ट कर दिया गया था कि पार्टी की अध्यक्ष जब चाहे इसे बदल सकती हैं। उन्होंने कहा कि वो नई बैठक बुला कर नई नीति बनाएँगी। अभिषेक बनर्जी के कजंस आकाश बनर्जी, अग्निशा बनर्जी और अदिति गायेन सहित TMC यूथ विंग के कई नेताओं ने इससे जुड़े पोस्ट्स सोशल मीडिया पर शेयर किए थे। वीडियो में ममता बनर्जी को जून 2021 में इस नीति का ऐलान करते हुए दिखाया जा रहा है।

कुछ नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी का निर्णय अंतिम होगा, जबकि कुछ का कहना है कि उन्हें बताए बिना प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC ने ऐसा किया है। गोवा सहित अन्य राज्यों में प्रशांत किशोर ही TMC की रणनीति तैयार कर रहे हैं। जबकि अब I-PAC का कहना है कि वो TMC नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट्स को हैंडल नहीं करता है। कंपनी ने ऐसे दावों को झूठा और अफवाह बताते हुए कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की डिजिटल प्रॉपर्टीज का प्रबंधन वो नहीं करती है।

उधर गोवा पुलिस ने शुक्रवार (11 फरवरी, 2021) की रात को प्रशांत किशोर की कंपनी ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC)’ के एक सदस्य को दबोचा। उसे नारकोटिक्स ड्रग्स के साथ एक ऐसे विला से पकड़ा गया, जिसे प्रशांत किशोर को लीज पर दिया गया था। 28 वर्षीय व्यक्ति को पोरवोरिम से गिरफ्तार किया गया। I-PAC ने वहाँ 8 विला किराए पर लिया है। NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। गोवा में 14 फरवरी, 2021 को चुनाव होने हैं।

Pak के बाद हिजाब विवाद पर अमेरिका ने फैलाया प्रोपगेंडा, भारत ने कहा- आंतरिक मामलों पर नहीं होगी बयानबाजी बर्दाश्त

हिजाब विवाद मामले में पाकिस्तान के बाद अब अमेरिका ने भ्रामक जानकारी की मदद से भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया है। शुक्रवार (11 फरवरी 2022) को यूएस के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता ( International Religious Freedom-IRF) नामक संगठन के राजदूत रशद हुसैन ने बयान में कहा था कि धार्मिक स्वतंत्रता में किसी को अपनी धार्मिक पोशाक चुनने का अधिकार शामिल है। मुद्दे की बारीकियों को समझे बिना, राजदूत ने कहा कि कर्नाटक को मजहबी कपड़ों की अनुमति का निर्धारण नहीं करना चाहिए। अब इस मुद्दे पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। बयान में उन देशों को जवाब दिया गया है जो बेवजह एक ऐसे मुद्दे पर बातें बना रहें हैं जो कि शैक्षणिक संस्थान से जुड़ा है।

अपने ट्वीट में हुसैन ने लिखा था, “धार्मिक स्वतंत्रता में किसी को अपनी धार्मिक पोशाक चुनने का अधिकार शामिल है। भारतीय राज्य कर्नाटक को मजहबी कपड़ों की अनुमति का निर्धारण नहीं करना चाहिए। स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है और महिलाओं और लड़कियों को कलंकित और हाशिए पर रखता है।”

इस ट्वीट के बाद हुसैन को सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने खरी खोटी सुनाई। लोगों ने अमेरिका की हिपोक्रेसी उजागर कर याद दिलाया है कि उनका रवैया अन्य देशों की कार्रवाई पर क्या था। उन्होंने न तो तब मुँह खोला जब तालिबान में हिजाब अनिवार्य किया गया और न ही तब कुछ कहा जब हिजाब को फ्रांस ने प्रतिबंधित कर दिया। कुछ यूजर्स ने उन्हें याद दिलाया कि कैसे अमेरिका में भी यूनिफॉर्म की महत्ता पर जोर दिया गया था। इतना ही नहीं, वहाँ एक मुस्लिम छात्रा को सस्पेंड कर दिया गया था क्योंकि उस लड़की ने लगातार चेतावनी के बाद भी वही कपड़ों को पहनना जारी रखा था जो मना किए गए थे। दिलचस्प बात ये है कि ये पूरा विवाद उस समय चर्चा में आया जब राहुल गाँधी ने अमेरिका से इस मामले पर हस्तक्षेप करने की माँग उठाई थी। इससे पहले पाकिस्तान ने हिजाब विवाद पर अपनी चिंता दिखाते हुए भारत पर धार्मिक असहिष्णुता, नकारात्मक रूढ़िवादिता और मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाया था।

अब इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्रालय ने अपना पक्ष रखा है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने अरिंदम बागची ने भारत की ओर से स्पष्ट तौर पर कहा कि ये मामला अभी कर्नाटक हाईकोर्ट में है। वे लोग इस मुद्दे पर किसी भी प्रेरित टिप्पणी का स्वागत बिलकुल नहीं करेंगे। बयान में कहा गया, “कर्नाटक में कुछ शैक्षणिक संस्थानों में ड्रेस कोड से संबंधित मामले पर कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हमारा संवैधानिक ढाँचा और तंत्र, साथ ही साथ हमारे लोकतांत्रिक लोकाचार और राजनीति, ऐसे संदर्भ हैं जिनमें मुद्दों पर विचार किया जाता है और उनका समाधान किया जाता है। जो लोग भारत को अच्छे से जानते हैं, उन्हें इन वास्तविकताओं की उचित समझ होगी। हमारे आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

विदेश मंत्रालय के अलावा कर्नाटक के राज्य मंत्री डॉ अश्वथनारायण सी एन ने भी इस प्रकार विदेशी हस्तक्षेप की निंदा की। उन्होंने कहा कि बाहरी ताकतें अपने छिपे एजेंडे के तहत तथ्यों को घुमाने और गलत धारणा बनाने का प्रयास कर रही हैं। इन्हें रोका जाना चाहिए।

‘लव जिहाद’ पर बनी फिल्म ‘The Conversion’ को सेंसर बोर्ड ने मंजूर किया, रिलीज रोकने के लिए HC तक गई थी याचिका

लंबे संघर्ष के बाद ‘लव जिहाद’ पर बनी फिल्म ‘The Conversion’ को सेंसर बोर्ड ने UA सर्टिफिकेट दिया है। इसके साथ ही फिल्म के सिनेमाघरों में रिलीज होने के रास्ता साफ़ हो गया है। बता दें कि UA का अर्थ है ‘Unrestricted with Caution’, अर्थात इस फिल्म को बच्चे भी देख सकते हैं। बस 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ये फिल्म देखने के लिए अपने अभिभावकों के दिशानिर्देशन की ज़रूरत पड़ेगी। सामान्यतः फिल्मों को इसी कैटेगरी में सर्टिफिकेट दिए जाते हैं।

बता दें कि भाजपा शासित कई राज्यों में ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध कानून भी बने हैं और कइयों में इसके लिए तैयारी की जा रही है। अपराध के ऐसे मामलों में अक्सर देखा जाता है कि मुस्लिम युवक अपनी पहचान छिपा कर कोई छद्म हिन्दू नाम रख लेते हैं और फिर किसी हिन्दू लड़की को अपने जाल में फँसाते हैं। जब तक लड़की को सच्चाई पता चलती है, सब ख़त्म हो चुका होता है। उनसे निकाह कर के उन्हें इस्लामी धर्मांतरण के लिए प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे मामलों में हत्याएँ तक कर दी जाती हैं।

ये फिल्म इसी संवेदनशील मुद्दे पर बनी है। फिल्म के निर्माताओं का कहना है कि आजकल की बेटियों को ये फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए। इस फिल्म को विनोद तिवारी ने बनाया है और सेंसर बोर्ड से इसे सर्टिफिकेट दिलाने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया। ‘लव जिहाद’ के कारण शोषण, प्रताड़ना और परिवार-समाज पर पड़ने वाले असर को इस फिल्म में दिखाया गया है। 6 महीने से इसकी रिलीज के लिए प्रयास चल रहे थे। संजय भूषण पटियाला फिल्म के प्रचारक हैं।

विनोद तिवारी ने इस फिल्म को सेंसर बोर्ड द्वारा UA सर्टिफिकेट दिए जाने को ‘सत्य की जीत’ बताया है। इसके ट्रेलर को यूट्यूब से हटाने और इसकी रिलीज को रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी। इस फिल्म में ‘लव जिहाद’ का दंश झेलने वाली एक हिन्दू युवती की कहानी दिखाई गई है। विंध्य तिवारी, प्रतीक शुक्ला और रवि भाटिया इस फिल्म में मुख्य किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में सामाजिक सन्देश दिया गया है और जागरूकता फैलाई गई है।

₹12.25 करोड़ में बिके श्रेयस अय्यर, कोलकाता नाइट राइडर्स ने खरीदा: IPL नीलामी के पहले दिन कगीसो रबाडा दूसरे स्थान पर

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 15वें संस्करण के लिए मेगा ऑक्शन बंगलुरू में शुरू हो गया है। इस बार 10 टीमें इसमें शामिल हैं। आईपीएल में नीलामी के लिए सभी टीमें अपने-अपने टेबल पर भी पहुँच चुकी हैं। इस बार पहले 590 खिलाड़ियों को नीलामी के लिए रखा गया था, लेकिन बाद में इसमें 10 अन्य भी जुड़े। इसी के साथ कुल खिलाड़ी 600 हो गए हैं। वहीं टीमों की पर्स की बात करें तो कुल मिलाकर 561.5 करोड़ रुपए बचे हैं, जिसमें से किंग्स इलेवन पंजाब के पास सबसे ज्यादा 72 करोड़ रुपए का फंड बचा हुआ है।

नीलामी की प्रक्रिया लगातार जारी है। खबर लिखे जाने तक ऑक्शन के पहले दिन टीम इंडिया के गब्बर शिखर धवन 8.25 करोड़ रुपए में बिक गए हैं। उन्हें पंजाब किंग्स ने खरीदा है। खास बात ये है कि धवन का बेस प्राइस केवल 2 करोड़ रुपए ही था। उनके बाद ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम के कप्तान पैट कमिंस को कोलकाता नाइट राइडर्स ने 7.25 करोड़ रुपए में खरीद लिया है। वहीं भारतीय स्पिनर रवि चंद्रन अश्विन को राजस्थान रॉयल्स ने 5 करोड़ रुपए में खरीद लिया है। उनका भी बेस प्राइस 2 करोड़ रुपए ही था। साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाद कगीसो रबाड़ा को पंजाब किंग्स ने 9.25 करोड़ रुपए में खरीद लिया है। वहीं श्रेयस अय्यर को 12.25 करोड़ में कोलकाता नाइट राइडर्स ने खरीदा है। वो 10 करोड़ वाले क्लब में शामिल हो गए हैं।

पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने भी आईपीएल को लेकर भविष्यवाणी की है। उन्होंने 12-13 फरवरी को होने वाली नीलामी में 5 ऐसे खिलाड़ी होंगे, जो सबसे महंगे साबित हो सकते हैं। सहवाग के मुताबिक इस बार शिखर धवन, शार्दूल ठाकुर, श्रेयस अय्यर, यजुवेंद्र चहल और ईशान किशन की सबसे अधिक बोली लग सकती है। नीलामी में नंबर एक पर उन्होंने शिखर धवन को रखा। इसके बाद दूसरे नंबर पर शार्दूल ठाकुर और तीसरे पर श्रेयस अय्यर हैं।

इस बार दो नई टीमें आईपीएल में ले रही हिस्सा

आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन बृजेश पटेल के मुताबिक, आईपीएल के 15वें संस्करण में इस बार गुजरात टाइटंस और लखनऊ सुपर जायंट्स भी शामिल हो रही हैं।

आर्यन खान और सुहाना खान भी आईपीएल के ऑक्शन में शामिल

आईपीएल की नीलामी में इस बार कोलकाता नाइट राइडर्स की तरफ से अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान औऱ बेटी सुहाना खान भी शामिल हुईं। दोनों की तस्वीरें भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

‘भाजपा की सरकार बनते ही उत्तराखंड में UCC’: CM धामी का ऐलान, गोवा में मौजूद है ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’, सुप्रीम कोर्ट कर चुका है प्रशंसा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा के सत्ता में लौटने पर राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लाने का वादा किया है। बता दें कि गोवा में पहले से ही ‘Uniform Civil Code’ लागू है, इसीलिए बिना केंद्र सरकार के कानून लाए भी ऐसा संभव है। सीएम धामी ने कहा, “शपथग्रहण के ठीक बाद भाजपा की नई सरकार एक समिति का गठन करेगी, जो राज्य में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ का ड्राफ्ट तैयार करेगी।” बता दें कि पूरे देश में UCC की माँग लंबे समय से चल रही है।

भाजपा के सत्ता में लौटने पर उत्तराखंड में UCC: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ऐलान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि राज्य में आने वाले नए UCC के हिसाब से शादी, तलाक, जमीन-संपत्ति और वसीयत को लेकर समान कानून लागू होंगे। सभी वर्गों के लिए समा कानून होंगे। सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि लोगों का मजहब जो भी हो, उनके लिए कानून समान ही रहेंगे। सीएम धामी ने कहा, “UCC उनलोगों के सपने को साकार करने की तरफ एक कदम होगा, जिन्होंने हमारे संविधान का निर्माण किया। साथ ही ये हमारे संविधान की भावना को और ठोस बनाएगा।”

उधम सिंह नगर से विधानसभा चुनाव लड़ रहे पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ये अनुच्छेद-44 की तरफ भी एक प्रभावशाली कदम होगा, जो सभी नागरिकों के लिए UCC का प्रस्ताव देता है। बताते चलें कि भारत के अनुच्छेद-44 में यह उल्लेख किया गया है कि नागरिकों के लिए देश के पूरे क्षेत्र में एक समान अधिकार हो तथा समान नागरिक संहिता की रक्षा करना राज्य का प्रमुख कर्तव्य है। ऐसे में ‘लैंड जिहाद’ जैसे मुद्दों से जूझ रहे चारधाम वाले आध्यात्मिक और पर्यटन वाले राज्य उत्तराखंड के लिए ये एक बड़ी घोषणा है।

सीएम धामी ने कहा, “मैं जो भी घोषणा कर रहा हूँ, वो मेरी पार्टी का संकल्प है और भाजपा की नई सरकार बनते ही जल्द से जल्द उसे पूरा किया जाएगा। देवभूमि की संस्कृति और विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखना हमारा मुख्य कर्तव्य है। हम इसके लिए प्रतिबद्ध है। UCC के जल्द लागू होने से राज्य के सभी नागरिकों के समान अधिकार को मजबूती मिलेगी। ये सामाजिक सौहार्दता को मजबूती देगा, लैंगिक समानता को ठीक करेगा और और महिला सशक्तिकरण को भी मजबूत करेगा।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और राज्य में भाजपा के चेहरे पुष्कर सिंह धामी का ये भी कहना है कि UCC के आने से इससे राज्य की अभूतपूर्व सांस्कृतिक-आध्यात्मिक पहचान को सुरक्षा मिलेगी और यहाँ के पर्यावरण को भी सुरक्षा मिलेगी। राज्य में 14 फरवरी को चुनाव होने हैं। एक ही चरण में यहाँ मतदान निपटा लिया जाएगा। 10 मार्च को पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आने हैं। इस कार्यकाल में भाजपा को तीन सीएम बदलने पड़े। त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत के बाद पुष्कर सिंह धामी पर भरोसा जताया गया।

गोवा में पहले से है UCC, केंद्र कानून न भी लाए तो राज्य के लिए ऐसा करना संभव

बता दें कि अप्रैल 2021 में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे ने गोवा के UCC की प्रशंसा की थी। ये भारत का अकेला ऐसा राज्य है, जहाँ का ये कानून है। हालाँकि, 2018 में ‘लॉ कमीशन’ का कहना था कि UCC न तो ज़रूरी है और न ही साध्य है। अभी तक केंद्र में UCC के लिए कोई ब्लूप्रिंट नहीं बना है। अमेरिका में हर राज्य के पास अलग संविधान और अपराध कानून होते हैं। CJI ने बुद्धिजीवियों को गोवा के UCC को गंभीरता से पढ़ने की सलाह दी थी।

2019 के एक जजमेंट में भी गोवा के UCC को सुप्रीम कोर्ट ने एक अच्छा उदाहरण बताया था। जमीन की वसीयत सम्बंधित एक फैसले में इस कानून की मदद ली गई थी। सन् 1867 में पुर्तगालियों के समय से ही वहाँ ये कानून चला आ रहा है। मुस्लिमों के लिए यहाँ कोई अलग शरिया कानून नहीं है। गोवा की UCC के 4 भाग हैं, जो सिविल कैपेसिटी, अधिकारों के अर्जन, संपत्ति के अधिकार, ब्रीच ऑफ राइट्स एंड रेमेडीज। इसीलिए, सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी प्रशंसा की थी।