कर्नाटक (Karnataka) में हिजाब (Hijab controversy) को लेकर मुस्लिम लड़कियों के प्रदर्शन के बीच इस्लामवादियों की दंगाई सोच भी सामने आने लगी है। इसी क्रम में राज्य के दावणगेरे जिले के मालेबेन्नूर कस्बे में बुधवार को हिजाब के खिलाफ व्हाट्सऐप स्टेटस लगाने पर मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने एक व्यक्ति को उसके घर से बाहर खीचकर पीटा और चाकू से गोद दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित हिंदू व्यक्ति का नाम दिलीप मालागिमाने है। वो मालेबेन्नूर शहर के गिगाली सर्कल के पास एक स्टोर चलाते हैं। बुधवार को 300 से अधिक मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ उनके दुकान पर आई और उसने उन्हें हिजाब बैन का समर्थन करने को लेकर स्टोर से बाहर खींच लिया और बेरहमी से पीटा। उन्हें चाकू से भी गोद दिया।
इस बीच जब पुलिस हिंदू व्यक्ति को बचाने के लिए आगे आई तो उन्मादी मुस्लिमों ने पुलिस अधिकारियों को भी नहीं बक्शा और उनके साथ भी मारपीट की। घटना के बाद पुलिस इस मामले में केस दर्ज कर कुछ दंगाइयों को गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस ने शुक्रवार आधी रात तक के लिए मालेबेन्नूर समेत हरिहर तालुका में निषेधाज्ञा जारी किया है।
हिजाब पर सोशल मीडिया (Social Media Post) पोस्ट, बेटे और माँ को पीटा
इसी तरह की एक अन्य घटना दावणगेरे जिले के नल्लूर गाँव में भी हुई। नल्लूर गाँव के रहने वाले नवीन (25) ने हिजाब विवाद को लेकर कथित तौर पर एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया था। इसी को लेकर कट्टरपंथियों की भीड़ ने नवीन और उसकी 60 वर्षीय माँ सरोजम्मा पर हमला कर उनके घर में तोड़फोड़ की।
कट्टरपंथियों की हिंसा की यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसमें स्पष्ट तौर से देखा जा सकता है कि किस तरह से उन्मादी मुस्लिमों की भीड़ हथियारों के साथ नवीन के घर की ओर जा रही है।
बहरहाल, गंभीर रूप से घायल हालत में माँ-बेटे को शिमोगा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गाँव के हालात तनावपूर्ण हैं। वहीं स्थानीय विधायक और पुलिस अधिकारियों ने गाँव का दौरा कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
थाने पर पथराव और पुलिस की गाड़ी तोड़ा
कथित तौर पर मुस्लिमों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में व्यक्ति की गिरफ्तारी की माँग को लेकर मुस्लिमों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। इस बीच इन शांतिदूतों ने पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। इसके बाद से हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिस्टों की भीड़ ने नगर थाने के सामने प्रदर्शन किया था। बाद में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, बाद में मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने भीड़ से वापस लौटने की अपील की।
लेकिन, मुस्लिम भीड़ ने प्रदर्शन करना बंद नहीं किया, बल्कि भीड़ ने थाने पर पत्थरबाजी की, जिसमें पुलिस की गाड़ियाँ भी क्षतिग्रस्त हुईं। दंगाइयों की भीड़ पुलिस से आरोपित को उन्हें सौंपने की माँग कर रही थी।
इस बीच जिले के डिप्टी एसपी बसवराज ने लोगों से कानून हाथ में नहीं लेने और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ एक्शन लेने की बात कही है। हालात को देखते हुए सुरक्षाबलों की टीम को तैनात कर दिया गया है।
अवैध तरीके से रेत खनन करने के मामले में गिरफ्तार किए गए पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) के भतीजे भूपिंदर सिंह उर्फ हनी (Bhupinder Singh) को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 2018 में अवैध खनन के मामले की जाँच के दौरान हनी प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) की रडार पर आया था।
जाँच एजेंसी ने शुक्रवार (11 फरवरी 2022) को हनी को जालंधर की कोर्ट में पेश किया। इससे पहले की दो सुनवाइयों में अदालत ने हनी को ईडी की हिरासत में भेज दिया था। वो 8 फरवरी से 11 फरवरी तक ईडी की ही हिरासत में था। ED ने इसी साल जनवरी 2022 में भूपिंदर सिंह हनी के घर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें 10 करोड़ की नकदी, 21 लाख रुपए के गहने और रोलैक्स घड़ी मिली थी।
हनी कबूल चुका है अपना गुनाह
गौरतलब है कि अवैध रेत खनन के मामले में हनी को 3 फरवरी 2022 को जालंधर से गिरफ्तार किया गया था। 7 फरवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बयान जारी कर बताया था कि सीमावर्ती राज्य में बालू खनन से जुड़ी गतिविधियों, अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले में मदद करने के बदले 10 करोड़ रुपए नकद प्राप्त होने की बात भूपिंदर सिंह ने कबूल कर ली थी।
जाँच एजेंसी ने अपने बयान में कहा था कि हनी को कुछ दस्तावेजों के साथ तीन फरवरी को एजेंसी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया गया था। हनी आया और उसने अपने बयान दिए। उसने ये स्वीकार किया कि वह खनन संबंधी गतिविधियों में शामिल है, लेकिन दोष साबित करने वाला डाटा सामने रखे जाने पर वह टालमटोल करने लगा था।
वहीं अब हमेशा की तरह कॉन्ग्रेस अपने कारनामों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए आरोप-प्रत्यारोप पर उतर आई है। जहाँ कॉन्ग्रेस इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रही है, तो वहीं पंजाब के सीएम चन्नी कह रहे हैं कि कानून अपना काम कर रहा है और उन्हें उस पर कोई आपत्ति नहीं है।
झारखंड के हजारीबाग में हुई किशोर रुपेश पांडेय की हत्या के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी शुक्रवार, 11 फरवरी, 2022 को पीड़ित परिवार से मिलकर न्याय का भरोसा दिलाया। इस दौरान उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाया है।
रूपेश पांडे की मॉब लिंचिंग साजिश रच कर की गई। उनके परिजनों से मिलकर उनका दुख बांटा।
रूपेश को न्याय दिलाए बिना भाजपा का कोई कार्यकर्ता चैन से नहीं बैठेगा।
रघुबर दास ने रुपेश की हत्या को एक साजिश करार दिया। उन्होंने लिखा, “रूपेश पांडे की मॉब लिंचिंग साजिश रच कर की गई। उनके परिजनों से मिलकर उनका दुख बाँटा। रूपेश को न्याय दिलाए बिना भाजपा का कोई कार्यकर्ता चैन से नहीं बैठेगा। हेमंत सरकार ये समझ ले कि राज्य का हिंदू समुदाय कमजोर नहीं है। हम किसी कीमत पर डरने वाले नहीं हैं।”
परिजनों ने सरस्वती प्रतिमा विसर्जन में हत्या की बात नकारी
रघुबर दास द्वारा ट्वीट किए गए वीडियो में मृतक रुपेश के परिजनों ने मीडिया रिपोर्ट में चल रही सरस्वती प्रतिमा विसर्जन में हत्या की बात नकारी है। उनका कहना है, “फोन करके उनको बुलाया गया। मोहम्मडन का लड़का फोन से बुलाया। गाडी से बिठा कर जबरदस्ती ले गए उनको। ये जो मूर्ति वाली बात झूठ मूठ के दे रहे हैं कि ये सब मूर्ति विसर्जन में हुआ है, ये सब कुछ नहीं है। ये गलत खबर है। वो मोबाइल की दुकान पर काम कर रहा था।” मौके पर किसी मोबाइल दुकानदार उदय का नाम लिया गया।
पंजाब केसरी की रिपोर्ट के मुताबिक हजारीबाग पुलिस अधीक्षक मनोज रतन चौथे ने भी सरस्वती प्रतिमा विसर्जन जुलूस और रुपेश पांडेय की हत्या का आपस में संबंध होने से इंकार किया है।
SP ने नहीं उठाया फोन और थाना प्रभारी ने जाँच पूरी होने तक कुछ भी कहने से किया इनकार
गौरतलब है कि ऑपइंडिया की पूर्व की रिपोर्ट भी मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर प्रकाशित हुई हैं। इसमें रुपेश के साथ हुए विवाद और मौत की वजह सरस्वती प्रतिमा विसर्जन की घटना को बताया गया है। ऑपइंडिया ने रुपेश के परिजनों के दावे की पुष्टि के लिए हजारीबाग़ के पुलिस अधीक्षक मनोज रतन चौथे से को कॉल किया तो उनके द्वारा फोन उठाया नहीं गया। इसी के साथ बरही थाना प्रभारी ने इस मामले की जाँच चलने और जाँच पूरी होने तक कुछ भी न बता पाने की बात कही।
ऑपइंडिया ने की पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास से बात
ऑपइंडिया से बातचीत में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कहा, “इस घटना को ले कर लोगों में काफी आक्रोश है। घर के एकलौते चिराग 16 वर्ष के युवक को कुछ उपद्रवी समुदाय विशेष के लोगों द्वारा मॉबलिंचिंग कर उनकी हत्या कर दी गई। जब से झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM, कॉन्ग्रेस और RJD के गठबंधन की सरकार बनी है तब से जिहादी और राष्ट्रविरोधी मानसिकता वाली शक्तियों का मनोबल काफी बढ़ा है। पिछले 26 महीने में ये 10 वीं मॉबलिंचिंग की घटना है।”
रघुबर दास ने आगे बताया, “हमारी सरकार से माँग है फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए हर दिन सुनवाई हो और अपराधी को जल्द से जल्द दंडित किया जाए। ये सरकार का कर्तव्य भी है। यही बच्चा पढ़ता भी था और दुकान में काम भी करता था। इसलिए उसके परिवार को 50 लाख रुपए का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी दी जाए। आरोपितों द्वारा गाँव वालों पर भी केस किया गया है। जाँच करके उस केस को वापस लेने का काम किया जाए। दोषियों को तुरंत दंडित किया जाए जिससे इस घटना की पुनरावृत्ति न हो। ये तब हो रहा है जब झारखंड सरकार मॉबलिंचिंग कानून लाई है। शासन और कानून का कहीं डर नहीं है। आज शाम 5 बजे हम लोग BJP के प्रतिनिधि मंडल के साथ राज्यपाल से मिलने वाले हैं। उन्हें सारी स्थिति बताएँगे।”
रघुबर दास ने बताया, “लड़के (मृतक रूपेश) की माँ ने कहा कि जुलूस तो बहुत आगे निकल गया था। ये लड़का दुकान में था। दुकान से बुला कर इसकी मॉब लिंचिंग की गई। इसको मारा गया।”
पीड़ित परिवार के साथ रघुबर दास
रघुबर दास के साथ स्थानीय और प्रदेश के तमाम भाजपा और हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता भी मौजूद थे। मौके पर मौजूद भाजपा नेता सुमन सौरव ने जानकारी दी कि मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री मृतक रुपेश पांडेय के गाँव दोपहर लगभग 12:45 पर पहुँच गए थे।
स्थानीय प्रतिनिधि रघुबर दस को घटना से अवगत करवाते हुए
मृतक मृतक रुपेश के संबंधी सुमन सौरभ ने की ऑपइंडिया से बात
ऑपइंडिया से बात करते हुए झारखंड भाजपा युवा मोर्चा IT सेल के प्रदेश संयोजक सुमन सौरभ ने बताया, “मैं रघुबर दास के पूरे दौरे के दौरान उनके साथ ही हूँ। मैं मृतक रुपेश के रिश्ते में भी आता हूँ। मैंने ही इस मुद्दे को सबसे पहले उठाया था। मृतक रुपेश के गाँव का नाम नईटांड है। अब तक इस मामले में कुल 5 लोगों को पकड़ा गया है। मृतक के परिवार वालों ने अपनी माँगों में बाकी 21 दोषियों को गिरफ्तार करना, फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाना, 1 साल के अंदर सभी आरोपितों को फाँसी की सज़ा देना, पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपए का मुआवजा देना, बगल के गाँव करियातपुर में रुपेश की एक प्रतिमा लगाना प्रमुख है।”
सुमन सौरभ ने आगे कहा, “रघुबर दास ने अपनी तरफ से मृतक के परिवार को 51 हजार रुपए देने की घोषणा की है। हेमंत सोरेन का आज तक कोई भी बयान नहीं आया इस मामले में।” सुमन सौरभ के मुताबिक झारखंड की सरकार के किसी मंत्री और यहाँ तक कि किसी विधायक का भी बयान अब तक इस मामले में नहीं आया है।
रूपेश की माँ ने कहा, “मियाँ का बच्चा पकड़ कर ले गया”
इस मौके पर मृतक की माँ ने बताया, “मेरा बेटा दुकान पर रहता था। 9 बजे घर से जाता था। खाना खाने 2 बजे आया। फिर साढ़े तीन बजे यहाँ से गया। साढ़े 5 बजे खबर आ गया कि आपका बेटा वहाँ बेहोश पड़ा हुआ है। मियाँ के बच्चा पकड़ कर ले गया। वहाँ जान से मार दिया। पप्पू मियाँ मारा है। पुलिस छानबीन अब तक नहीं कर पाई है।”
मियां का बच्चा ले कर गया पकड़ कर और मेरा बेटा के जान मार दिया..
फिर अपना घर खुद ही तोड़ कर हमें फंसा दिया..
झारखंड में मृत किशोर “रूपेश पांडेय” की मां और परिवार वालों की हृदयविरादक पुकार.. pic.twitter.com/K42BTj0f45
भीड़ में मौजूद अन्य महिलाओं ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए अपने बयान में दावा किया, “पप्पू मियाँ छाती पर चढ़ गया। फिर उल्टा हम लोगों पर ही आरोप लगा रहा है। अपनी बस्ती में आग भी लगा लिया। अपने से गाड़ी भी जला लिए। अपने से घर तोड़ डाला। कोई आ कर पूछा भी नहीं घर में कि आपके बेटे को क्या हुआ। फाँसी की सजा होनी चाहिए। अभी तक कुछ नहीं हुआ। अब हम लोग सड़क जाम करेंगे। जिससे सरकार को भी मालूम हो कि क्या हो रहा है।”
केंद्रीय मंत्री ने उठाए हेमंत सरकार पर सवाल
भारत सरकार में शिक्षा राजयमंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस घटना पर लिखा, “झारखण्ड सरकार की चुप्पी, कार्रवाई के नाम पर पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता इनके जख्मों पर नमक छिड़क रही है। जनाक्रोश उबल रहा है। हम चुप नहीं बैठेंगे। मासूम रूपेश के बर्बर हत्यारों को सख्त सजा दिलाने की पहल करे झारखण्ड सरकार।”
झारखण्ड सरकार की चुप्पी, कार्रवाई के नाम पर आईवाश और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता इनके जख्मों पर नमक छिड़क रही है। जनाक्रोश उबल रहा है। हम चुप नहीं बैठेंगे। मासूम रूपेश के बर्बर हत्यारों को सख्त सजा दिलाने की पहल करे झारखण्ड सरकार।@BJP4Jharkhand@BJP4HZB@Manishjhzb@BJP4Giridihpic.twitter.com/Y8IdXXavL2
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के लॉ एन्ड आर्डर को बताया लाचार
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने लिखा, “बीती रात बरही के लखना दुलमुंहा में एक युवक की निर्ममतापूर्वक पिटाई से मौत झारखंड की बदतर कानून व्यवस्था की जीवंत तस्वीर है। मृतक रूपेश अपने घर का इकलौता सदस्य था। अब कल्पना कीजिए कि लाचार प्रशासन और निक्कमी सरकार लोगों को सुरक्षा देने में कितनी सक्षम है? प्रशासन सभी दोषियों को चिह्नित कर मॉबलिंचिंग निवारण अधि. एक्ट के तहत कार्रवाई करें और सरकार रूपेश के परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपए का मुआवजा दें।”
अब कल्पना कीजिये कि लाचार प्रशासन और निक्कमी सरकार लोगों को सुरक्षा देने में कितनी सक्षम है? प्रशासन सभी दोषियों को चिह्नित कर मॉब निवारण अधि. एक्ट के तहत कार्रवाई करें और सरकार रूपेश के परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपए का मुआवजा दें।@HemantSorenJMM@dgpjh@DigHazaribagh
हजारीबाग पुलिस ने सोशल मीडिया पर भ्रामक खबर प्रचारित करने वालों पर दर्ज किए केस
हजारीबाग पुलिस ने इस घटना के संबंध में 15 व्यक्तियों पर केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, “सोशल मीडिया पर झूठे, भ्रामक वीडियो से अफवाह फैलाने, समाज में विद्वेष उत्पन्न करने के आरोप में निम्नांकित 15 व्यक्तियों के विरुद्ध सदर थाना द्वारा कार्रवाई की गई है। कई पुराने, एडिटेड वीडियो को हजारीबाग जिला का बताकर सोशल मीडिया पर दुर्भावना से पोस्ट करने वाले लोगों पर भी कार्रवाई होगी।” पुलिस ने नामजद लोगों की सूची को भी प्रकाशित किया है।
सोशल मीडिया पर झूठे,भ्रामक वीडियो से अफवाह फैलाने,समाज में विद्वेष उत्पन्न करने के आरोप में निम्नांकित 15 व्यक्तियों के विरुद्ध सदर थाना द्वारा कार्रवाई की गई है.कई पुराने,एडिटेड वीडियो को हजारीबाग जिला के बताकर सोशल मीडिया पर दुर्भावनासे पोस्ट करनेवाले लोगों पर भी कार्रवाई होगी. pic.twitter.com/3698qUmpfZ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (10 फरवरी 2022) को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जनसभा को संबोधित किया। इसमें पीएम मोदी ने सपा, कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। साथ ही कहा कि जनता ने उनको जितना प्यार दिया है, उसे वह विकास करके ब्याज समेत लौटाएँगे। इस बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि पीएम मोदी के काफिले के कारण एक व्यक्ति की एंबुलेंस में ही मौत हो गई।
सोशल मीडिया पर किया गया दावा
एक ट्वीट में दावा किया गया, “आज सहारनपुर में मोदी जी के कारण एक व्यक्ति की एंबुलेंस में ही मौत हो गई। उसकी बेटी चीखती-चिल्लाती रही, पुलिस के आगे मिन्नतें करती रही, मगर एंबुलेंस को जाने नहीं दिया और मरीज ने एंबुलेंस में ही तड़प-तड़प कर जान दे दी।”
#FactCheck-A tweet alleging the death of a person in an ambulance during the Honb’le Prime minister’s visit to Saharanpur is baseless. A girl informed the Policemen on duty about her mother’s dead body in the ambulance & requested passage for it which was promptly facilitated. https://t.co/76vCpSbzY2
यूपी पुलिस ने इसका खंडन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के सहारनपुर दौरे के दौरान एंबुलेंस में एक व्यक्ति की मौत का आरोप लगाने वाला ट्वीट निराधार है। एक लड़की ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को एम्बुलेंस में अपनी माँ के डेड बॉडी की सूचना दी और इसके लिए रास्ता देने का अनुरोध किया, जिसे तुरंत सुविधा प्रदान की गई।
यूपी पुलिस ने जारी किया बयान
पुलिस ने ट्वीट का फैक्ट चेक करते हुए बयान जारी किया। इसमें कहा गया, “अवगत कराना है कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहारनपुर आगमन पर उनकी सुरक्षा हेतु लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी देहरादून चौक पर लगी थी। तभी एक लड़की एंबुलेंस से उतर कर आई और उसने बताया कि उसकी माँ की अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई है, उसको जाना है। इस पर तत्काल मौके पर उपस्थित पुलिस बल द्वारा भीड़ से उसकी एंबुलेंस को निकलवा कर रवाना किया। अत: उक्त ट्वीट भ्रामक एवं असत्य है, जिसका सहारनपुर पुलिस पूर्णरुप से खंडन करती है। और अनुरोध करती है कि बिना सत्यता की जाँच किए इस प्रकार का ट्वीट/खबरें प्रकाशित न करें।”
चप्पे-चप्पे पर थी पुलिस
PM की जनसभा को लेकर दो ADG, दो DIG, पाँच SP, 12 एडिशनल SP, 21 डिप्टी SP, 18 थानों के प्रभारी, 35 निरीक्षक, 235 उपनिरीक्षक, 1150 कॉन्स्टेबल, 16 यातायात पुलिस के उपनिरीक्षक, पाँच कंपनी PAC तैनात थे। ADG राजीव सभरवाल, जिलाधिकारी अखिलेश सिंह, SSP आकाश तोमर के साथ एसपी सिटी राजेश कुमार ने भी रिमाउंट डिपो मैदान में डेरा डाले रखा था।
जनसथा स्थल पर चार हेलिपैड बनाए गए थे। बुधवार सुबह से ही SPG ने सहारनपुर में डेरा डाल दिया था। जनसभा स्थल पर मंच के पास सुरक्षा की कमान SPG के हाथों में थी, जबकि अन्य व्यवस्था अर्द्धसैनिक बलों और PAC के जवानों के अलावा पुलिस संभाल रही थी। प्रधानमंत्री के साथ तीन हेलिकॉप्टर आए थे। इसके अलावा CM योगी आदित्यनाथ के लिए अलग से हेलिपैड बनाया गया था।
पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा (West Bengal Post Poll violence) के लिए भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने गुरुवार (10 फरवरी 2022) को टीएमसी के नेता शेख सूफियान को पिछले साल विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में हुई हिंसा के लिए दोषी ठहराया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में हिंदुओं को खतरे में बताते हुए कहा कि ममता बनर्जी के शासनकाल में राज्य के हालात जम्मू-कश्मीर से भी बदतर हो गए हैं।
समाचार एजेंसी एएनआई को सुवेंदु ने बताया कि टीएमसी ने निकाय चुनावों में “हेरफेर” करने के लिए पश्चिम बंगाल में “लोकतंत्र के लिए गैस चैंबर” जैसा माहौल बनाया है। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम में ममता बनर्जी के पोलिंग एजेंट शेख सूफियान ने ही सारा अपराध किया है।
राज्य चुनाव आयोग के साथ बैठक में सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में हम राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) से मिले थे। टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में ‘लोकतंत्र के लिए गैस चैंबर’ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। हमने राज्य चुनाव आयोग को प्रदेश में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) को तैनात करने की सलाह दी है।”
पश्चिम बंगाल में हिंदू खतरे में: सुवेंदु अधिकारी
भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के बाद की हिंसा के चलते अब तक एक लाख से अधिक हिंदुओं ने राज्य छोड़ दिया है। पश्चिम बंगाल के हालात जम्मू-कश्मीर से भी बदतर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “टीएमसी का शेख सूफियान राज्य में चुनाव बाद की हिंसा के लिए जिम्मेदार है, उसी ने महिलाओं पर भी अत्याचार किए। बंगाल में जम्मू-कश्मीर से बुरे हालात हैं। हिंदू खतरे में हैं। हिंसा के कारण 1 लाख से अधिक हिंदू राज्य छोड़ चुके हैं। प्रदेश में घुसपैठिए घुस आए हैं, जो राज्य की जनसांख्यिकी को बदलने की कोशिशें कर रहे हैं।”
TMC’s Sheikh Sufiyan responsible for post-poll violence&atrocities meted out to women.Situation in Bengal is worse than Kashmir. Hindus in danger.Over 1 lakh Hindus left state in post-poll violence.Intruders have entered, attempt to change state’s demography: Suvendu Adhikari,BJP pic.twitter.com/J3kv95xZMi
बता दें कि टीएमसी नेता शेख सूफियान ही भाजपा कार्यकर्ता देवव्रत मैती की हत्या का आरोपित भी है। नंदीग्राम में 3 मई 2021 को मैती पर जानलेवा हमला किया गया था। बाद में 13 मई को उनकी मौत हो गई थी।
बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक टीम नंदीग्राम के दौरे पर गई औऱ वहाँ उसने टीएमसी कार्यकर्ताओं व सूफियान के खिलाफ सबूत इकट्ठे किए। 31 अगस्त को सीबीआई ने मैती की हत्या के मामले में आरोप तय किया और तीन दिन बाद उसके परिवार का भी बयान दर्ज किया। बाद में सुफियान और दो अन्य लोगों को सीबीआई के सामने गवाही के लिए भी बुलाया गया था।
उल्लेखनीय है कि नंदीग्राम सीट से बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी ने ही ममता बनर्जी को हराया था।
कर्नाटक बुर्का विवाद मामले पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मीडिया चैनल न्यूज 18 से बात करते हुए अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जिन लोगों को शैक्षिक संस्थानों में यूनिफॉर्म पहन कर आना पसंद नहीं है वो बाहर जा सकते हैं। उनके मुताबिक स्कूल और कॉलेज में अनुशासन बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने कहा, “अगर किसी को यूनिफॉर्म पसंद नहीं है तो उसे संस्थान छोड़ देना चाहिए, अनुशासन का पालन करना चाहिए और अनुशासन को तोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अनुशासन संस्थानों की नींव है। अनुशासन के बगैर तो जिंदगी नहीं चल सकती। जब आपकी शिक्षा पूरी हो जाए और जब आप बाहर निकल जाएँ तब आपकी मर्जी है कि आप जो भी ड्रेस पहनना चाहें पहने।”
आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि छात्रों को ड्रेस कोड के बारे में जानकारी थी। इसके बाद भी जानबूझकर शिक्षण संस्थानों में उन्होंने प्रवेश लिया था। अचानक इसके खिलाफ विद्रोह नहीं कर सकते थे। उन्होंने कहा, “छात्रों को कुछ राजनीतिक, गुप्त उद्देश्यों को हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।”
सभ्यता और संस्कृत जरूरी
आरिफ मोहम्मद खान ने आगे कहा, “मेरा ये मानना है कि कौन क्या पहनता है ये कभी भी विवाद का विषय नहीं होना चाहिए। यह हर व्यक्ति का अपना अधिकार है। शर्त सिर्फ इतनी है कि शालीनता होनी चाहिए, सभ्यता होनी चाहिए, संस्कृति होनी चाहिए। जो आर्मी में है वो ये नहीं कह सकता कि मैं जो चाहूँगा वह पहन लूँगा पुलिसवाला यह नहीं कह सकता कि जो मैं चाहूँगा वह पहन लूँगा।”
इस दौरान उन्होंने कहा कि कई चीजें जबरन धर्म से जोड़ी गई हैं। तीन तलाक को भी धर्म से जोड़ा गया। इसके साथ ही उन्होंने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि हिजाब शब्द का इस्तेमाल पर्दे के लिए किया गया है, पहनावे के लिए नहीं। पहनावे के लिए स्कार्फ होता है। हिजाब का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। यह किसी धर्म की पहचान नहीं है। यब बातें वीडियो में 5:40 से 7:24 मिनट के बीच सुनी जा सकती हैं।
आरिफ खान ने कहा कि पिछली सरकारें नियम, अनुशासन तोड़ने वाले लोगों के सामने झुकती थीं। लेकिन वर्तमान सरकार ऐसा नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, ये कुछ वक्त चलने दीजिए। आदतें बदलने में थोड़ा वक्त लगता है। इसी सरकार ने घुटने टेकने बंद किए हैं। थोड़ा सा वक्त लगेगा, फिर लोगों में हिम्मत आ जाएगी। इसे आप वीडियो में 22:12 से 22:36 मिनट के बीच सुन सकते हैं।
आगे वह कहते हैं, ये लोग उन बातों पर लड़ेंगे, जिनका कुरान में कोई जिक्र नहीं है। उदाहरण के लिए- तीन तलाक। जो असल गुनाह है- जो बताया गया है, उसे छोड़ कर अपनी ख्वाहिशों को पूरा करना। ये वो लोग हैं जो मानते सब कुछ हैं लेकिन कहते हैं कि हम इनके मुताबिक आचरण नहीं करेंगे। हम तो अपनी मर्जी करेंगे।
आरिफ खान ने कहा, “मैं आपको एक मिसाल देता हूँ। एक बच्ची है। पैगंबर साहब की पत्नी की सगी भांजी के औलाद नहीं है। हजरत आयशा के औलाद नहीं है। लिहाजा वह अपने सगे भाई की बेटी को एक तरह से गोद ले लेती है और खुद पालती है सारी जिंदगी। वह बच्ची बहुुत खूबसूरत होती है। उसकी शादी गवर्नर से होती है। उसका शौहर उससे कहता है कि तुम अपना चेहरा ढँको, पर्दा करो। वह अपने शौहर को जवाब देती है- “पर्दा और मैं? खुदा ने मुझे खूबसूरत बनाया है। मैं चाहती हूँ कि लोग मुझे देखें और मेरी खूबसूरती में अल्लाह की शान का एहसास करें और अल्लाह का शुक्र अदा करें।” उन्होंने प्रदर्शन करने वालों को निशाने पर लेते हुए कहा कि ये लोग शायद उनसे ज्यादा इस्लाम जानते हैं। यह बातें 25:00 से 27:32 के बीच सुन सकते हैं।
जब एंकर ने उनसे पूछा कि क्या ये बातें मुस्लिम धर्मगुरुओं (मौलानाओं) को मालूम नहीं है या फिर वो बताना नहीं चाहते हैं, या फिर समझना नहीं चाहते। इस पर उन्होंने कहा, “उनको सब कुछ पता है। कुरान में दो आयतें हैं- वो बच्ची जिसे जिंदा दफन कर दिया गया था, सिर्फ लड़की होने की वजह से। कोई आज पूछेगा कि उसका जुर्म क्या था। पैगंबर साहब ने उसके बारे में बहुत सख्त रवैया अपनाया। वो रूक गया। लेकिन आप कानून बना लीजिए, आदतें बड़ी मुश्किल से बदलती हैं। अगर उसको जिंदा गाड़ना बंद हो गया तो उसको कपड़े में गाड़ना शुरू हो गया। उन्होंने तीन तलाक करके उनको दबाना शुरू कर दिया। पहले जमीन में दफनाते थे, अब उसे घर की चारदीवारी में बंद कर दो। घर के बाहर निकले तो उसे ऐसे कर दो कि पता ही न चले कि कौन है और शादी हो जाए तो उसे तीन तलाक के नाम से ऐसे डरा कर रखो कि वह आजाद इंसान के हैसियत से जिंदा न रह सके।” वीडियो में यह बातें आप 27: 37 से 29:17 के बीच सुन सकते हैं।
बुर्का विवाद पर कर्नाटक HC के खिलाफ दायर याचिका को SC ने किया खारिज
बता दें कि एक दिन पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्कूल- कॉलेज में धार्मिक कपड़े पहनने पर रोक लगाई थी और स्कूल कॉलेज को खोलने का आदेश दिया था। वहीं इसके खिलाफ यूथ कॉन्ग्रेस प्रेसिडेंट श्रीनिवास बीवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और तत्काल सुनवाई की बात कही थी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय बनाने की जरूरत नहीं है। बता दें कि श्रीनिवास की याचिका पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा उचित समय पर इस मामले पर सुनवाई होगी।
नोट: भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव तक। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, लेकिन ये बुर्का के लिए हो रहा है।
कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित पीयू कॉलेज में हिजाब पहनने को लेकर मुस्लिम लड़कियों द्वारा शुरू किए गए विवाद (karnataka Hijab Controversy) में तालिबान के बाद अब खालिस्तान की एंट्री हो गई है। खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने इस मामले में कूदते हुए मुस्लिमों को एक ‘नया मुस्लिम मुल्क’ बनाने और ‘हिजाब’ के लिए देश में जनमत संग्रह कराने की माँग के लिए भड़काया है।
हिजाब विवाद को हवा देते हुए SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो के जरिए झूठ फैलाया कि भारत सरकार देश में हिजाब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने जा रही है। उसने कहा कि आज हिजाब पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश हो रही है, उसके बाद अजान और फिर नमाज व कुरान पर पूरी तरह से बैन लगा दिया जाएगा। हालाँकि, यह वीडियो अब डिलीट हो चुका है।
अपने वीडियो में पन्नू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को बदनाम करने की कोशिश करते हुए कहा, “मोदी का भारत हिंदू राष्ट्र बनना चाहता है। भारत के 20 करोड़ मुस्लिमों को क्या करना चाहिए? हिजाब जनमत संग्रह आंदोलन शुरू करो। भारत को तोड़ो। भारतीय संघ से अलग एक नया मुस्लिम मुल्क बनाना चाहिए, जिसका नाम ‘उर्दिस्तान’ हो।”
अपने दुष्प्रचार को आगे बढ़ाते हुए पन्नू वीडियो में आगे कहता है, “1992 में उन्होंने बाबरी मस्जिद को तोड़ा, मुस्लिम चुप रहे। गुजरात में मुस्लिमों की निर्मम हत्या हुई, फिर भी मुस्लिम चुप रहे। उन्होंने कश्मीर पर कब्जा कर लिया और मुस्लिम चुप रहे। जब कोई आपके धार्मिक प्रतीकों और विश्वासों पर हमला करे तो आपको चुप नहीं रहना चाहिए।”
खालिस्तानी चरमपंथी पन्नू कहता है कि हिजाब मुस्लिमों का मौलिक और जन्मसिद्ध अधिकार है। वह आगे कहता है, “पंजाब को भारत के कब्जे से मुक्त कराने के लिए सिख खालिस्तान जनमत संग्रह की ओर बढ़ रहे हैं। हम आपका (इस्लामवादियों) मार्गदर्शन करेंगे, आपको संगठित करेंगे और फंड भी देंगे। आप भारतीय संघ को तोड़कर एक ‘नया मुस्लिम देश उर्दिस्तान’ बनाने के लिए जनमत संग्रह करो।” इसके साथ ही उसने भारत के मुस्लिमों को पाकिस्तान से सीखने की भी सलाह दी है।
हिजाब पर जनमत संग्रह वाली वेबसाइट का स्क्रीनशॉट
SFJ प्रमुख ने अपने चरमपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए ‘हिजाब रेफरेंडम’ के नाम से एक वेबसाइट भी बना ली है, जो अब ऐक्टिव नहीं है। उसने कट्टरपंथी इस्लामवादियों से वेबसाइट पर अपना नाम, व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी साझा करने को कहा। इतना ही नहीं, पन्नू ने ‘उर्दिस्तान’ का नक्शा भी बना लिया है। उसकी कोरी कल्पना से भरे मुल्क में राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ हिजाब विवाद शुरू हुआ, उस कर्नाटक को कथित उर्दिस्तान में जगह नहीं मिला है।
इससे पहले जनवरी 2021 में पन्नू ने सिख युवकों से इंडिया गेट पर खालिस्तानी झंडा फहराने और दिल्ली में अन्य जगहों से भारतीय ध्वज को हटाने के लिए उकसाया था। पन्नू ने इंडिया गेट पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार देने की घोषणा की। उसने भारत सरकार को धमकी देते हुए कहा था कि अगर शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति नहीं दी गई तो भारत के सिख खालिस्तान के सशस्त्र विद्रोह में शामिल होने से नहीं हिचकिचाएँगे।
कर्नाटक हिजाब मामला
कर्नाटक के उडुपी जिले के पीयू कॉलेज में हिजाब का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। बाद में इसके विरोध में मुस्लिम महिलाओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हिजाब को अपना मौलिक अधिकार बताते हुए कक्षाओं में इसे पहनने की छूट माँगी थी। हालाँकि, हिजाब पहनने पर अड़ी मुस्लिम छात्राओं के विरोध में हिंदू छात्र भी भगवा स्कार्फ लेकर कॉलेज जाने लगे।
कर्नाटक (Karnataka) के कॉलेज में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब (Hijab) पहनने की जिद का मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुँच गया है। हिजाब के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट (High Court) के अंतरिम फैसले पर रोक लगाने की माँग वाली याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया औऱ कहा कि इस मामले को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है। SC ने कहा है कि अदालत इस पर पहले से ही तत्काल आधार पर सुनवाई कर रही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मसले पर अभी तक हाई कोर्ट का फैसला तक नहीं आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट पहले से ही मामले पर सुनवाई कर रहा है। हमें सभी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करनी है।
BREAKING:#SupremeCourt refuses to interfere in the #HijabBan matters as #KarnatakaHighCourt is already hearing. Devadatt Kamat, Senior Advocate mentions it. CJI says “We can’t do anything now, don’t spread it to larger levels. We will interfere at appropriate time.” #HijabRow
याचिका पर टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस एनवी रमणा ने कहा, “हम जानते हैं कि राज्य में क्या हो रहा है, क्या आपको लगता है कि हमें इन मुद्दों को उच्च स्तर पर ले जाना चाहिए। हम इसे उचित समय पर उठाएँगे। इस तरह के सभी मामलों के लिए यही आदेश है।”
Hijab Ban – ‘We Also Know What Is Happening In The State, We Will Hear At Appropriate Time’ : CJI On Plea For Urgent Hearing @Shrutikakkhttps://t.co/57hpO0Rw2W
कर्नाटक हाई कोर्ट ने गुरुवार (10 फरवरी 2022) को अपने अंतरिम आदेश में फैसला आने तक शैक्षिक संस्थानों में किसी भी तरह का धार्मिक पहनावा पहनने पर रोक लगाते हुए ड्रेस कोड का पालन करने का आदेश दिया था। इसी के खिलाफ एक छात्र ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश से मुस्लिम छात्रों के अधिकार दबाए गए हैं।
Karnataka High Court’s February 10 interim order to restrain students from wearing hijab or any religious attire till the matter is pending with the court has been challenged in the Supreme Court.#HijabRowpic.twitter.com/5ttKnI4zN9
याचिका में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के साथ ही उसके अंतरिम आदेश पर स्टे लगाने की भी माँग की गई है। याचिका में हाई कोर्ट पर ही मुस्लिम छात्रों व महिलाओं की हिजाब पहनने की आजादी पर अंकुश लगाने का आरोप लगाया गया है।
क्या था कर्नाटक उच्च न्यायालय का आदेश
गुरुवार (10 फरवरी 2022) को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रितू राज अवस्थी की अध्यक्षता में जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने हिजाब प्रतिबंध मामले में अंतरिम फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि जब तक कोर्ट के अंतिम फैसला नहीं आ जाता है तक कोई भी पक्ष कुछ भी धार्मिक पहनने से बचें। अब सोमवार को कर्नाटक हाई कोर्ट इस मसले पर आगे की सुनवाई करेगा।
वहीं दूसरी ओर कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में खींचने की कोशिश करते हुए मामले को कर्नाटक हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। हालाँकि, इस मसले की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमणा ने इसे खारिज कर दिया।
कब से चल रहा ये मामला
कर्नाटक के उडुपी जिले के पीयू कॉलेज में हिजाब का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। बाद में इसके विरोध में मुस्लिम महिलाओं ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर हिजाब को अपना मौलिक अधिकार बताते हुए कक्षाओं में इस पहनने की छूट माँगी थी।
UP के लखनऊ में अखिलेश यादव की गाड़ी के आगे आत्मदाह करने का प्रयास करने वाली दलित महिला की बेटी की लाश समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यमंत्री के उन्नाव आश्रम से बरामद कर ली गई है। शव को शहर के दोस्तीनगर स्थित कब्बाखेड़ा दिव्यानंद आश्रम के पीछे सेप्टिक टैंक में कंबल में लपेटकर दफनाया गया था। इस मामले में आरोपित समाजवादी पार्टी की सरकार में राज्यमंत्री रहे दिवंगत फतेहबहादुर सिंह के बेटे रजोल सिंह (राजू सिंह) हैं। उन पर युवती को गायब करने की रिपोर्ट 8 दिसम्बर 2021 को दर्ज करवाई गई थी। शव की बरामदगी 10 फरवरी 2022 को की गई है।
आज दिनांक 10.02.2022 को थाना कोतवाली सदर क्षेत्रांतर्गत कब्बाखेड़ा में बरामद युवती के शव के संदर्भ में अपर पुलिस अधीक्षक उन्नाव द्वारा दी गई बाइट pic.twitter.com/QJeiKWwlp3
उन्नाव के एडिशनल SP ने इस मामले में बयान देते हुए बताया, “पिछले 8 दिसम्बर को एक युवती की गुमशुदगी दर्ज की गई थी। उसी की डेड बॉडी आज यहाँ से बरामद हुई है। इसमें बाद में FIR दर्ज कर ली गई थी। इसकी विवेचना CO सिटी (DSP नगर) द्वारा की जा रही थी। इसमें जिस पर संदेह था, उसको हमने गिरफ्तार किया था। साथ ही हम कुछ अन्य सूत्रों के अनुसार अपनी जानकारी कर रहे थे। उन्हीं के निष्कर्ष से आज यहाँ डेड बॉडी बरामद की गई है। इसमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद हम आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे। जो लोग भी इस घटना में शामिल होंगे, उनको हम निश्चित तौर पर सज़ा दिलाएँगे।”
24 जनवरी को लखनऊ में उन्नाव से आई महिला ने अखिलेश यादव की गाड़ी के सामने आत्मदाह की कोशिश की थी। आरोप था कि उसकी बेटी को उन्नाव के सपा नेता रजोल सिंह ने अगवा कर लिया है। आज उस बेटी का शव रजोल सिंह के भाई दिव्यानंद आश्रम के बगल में खाली पड़ी जमीन में गड़ी मिली।#Threadspic.twitter.com/YS85puOuUy
शव की बरामदगी के बाद पीड़िता की माँ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वो रोते हुए मीडिया से बात कर रही हैं।
उन्नाव जिले में सपा नेता के खेत में दलित युवती का दफनाया हुआ शव बरामद होना अति-दुःखद व गंभीर मामला। परिवार वाले पहले से ही उसके अपहरण व हत्या को लेकर सपा नेता पर शक कर रहे थे। राज्य सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दोषियों के खिलाफ तुरन्त सख्त कानूनी कार्रवाई करे।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस घटना को दुखद बताया है। उन्होंने लिखा, “उन्नाव जिले में सपा नेता के खेत में दलित युवती का दफनाया हुआ शव बरामद होना अति-दुःखद व गंभीर मामला। परिवार वाले पहले से ही उसके अपहरण व हत्या को लेकर सपा नेता पर शक कर रहे थे। राज्य सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दोषियों के खिलाफ तुरन्त सख्त कानूनी कार्रवाई करे।”
सपा नेता का बेटा, दलित लड़की की गुमशुदगी, अब लाश
फ़तेहबहादुर सपा सरकार में सहकारी विभाग के चेयरमैन भी थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 8 दिसम्बर से बेटी के गायब होने के बाद पीड़ित माँ लगातार उसे तलाश कर रही थीं। इस मामले में आरोपित हाईप्रोफाइल था, जिसके कारण पुलिस भी काफी सतर्कता से आगे बढ़ रही थी। गुमशुदगी की शिकायत 11 जनवरी को FIR में बदल दी गई थी। इस केस में SC/ST एक्ट भी लगाया गया था।
न्याय में देरी होती देख कर पीड़ित माँ 24 जनवरी को लखनऊ में अखिलेश यादव की गाड़ी के आगे कूद गई थीं। पीड़ित महिला को पेट्रोल डालते हुए अखिलेश यादव ने भी देखा था, ध्यान नहीं दिया। इसके बाद उनकी गाड़ी चली गई। वहाँ पर मौजूद यूपी पुलिसकर्मियों ने तब पीड़िता महिला को रोका था और किनारे ले आई थी। इसी के बाद पुलिस ने 25 जनवरी को सपा नेता के बेटे राजोल सिंह को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था।
रजोल सिंह को 4 फरवरी के दिन पुलिस रिमांड पर लिया गया था। काफी प्रयासों के बाद भी उसने पुलिस को कुछ भी नहीं बताया। इस बीच पुलिस ने अपने सूत्रों से शव का पता लगा लिया। पुलिस टीम ने मौके पर जा कर खुदाई करवाई। युवती का शव लगभग 4 फीट नीचे दबा मिला। लड़की की माँ ने पुलिस पर शुरुआत में ढिलाई का आरोप लगाया। हालाँकि पुलिस ने इस आरोपों को ख़ारिज किया है।
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक उन्नाव के पुलिस अधीक्षक दिनेश त्रिवेदी ने बताया, “रजोल ने घटना के दिन लड़की को झाँसा दे कर आश्रम में बुलवाया था। वहाँ उसके और भी साथी मौजूद थे। उन सभी ने मिल कर मृतका का गला घोंटा। मृत्यु हो जाने के बाद आरोपितों ने शव को कंबल में लपेट कर टैंक में दफना दिया। इस केस में अब हत्या समेत कई और धाराएँ भी बढ़ेंगी। जाँच के उपरान्त जो भी शामिल मिला, उस पर कठोर एक्शन लिया जाएगा।”
श्री अखिलेश यादव जी सपा नेता के खेत में दलित बेटी का शव बरामद,जब बेटी की माँ आपकी गाड़ी के सामने गिड़गिड़ा रही थी तो उनकी बात नहीं सुनना और सपा नेता का संरक्षण करोगे,नई सपा में सपाइयों का हर घिनौना अपराध माफ करोगे,जाँचकर दोषी को दंड पीड़ित को न्याय दिलाने कसर नहीं छोड़ेंगे
इस मामले में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने ट्विटर पर लिखा, “अखिलेश यादव जी, सपा नेता के खेत में दलित बेटी का शव बरामद। जब बेटी की माँ आपकी गाड़ी के सामने गिड़गिड़ा रही थी तो उनकी बात नहीं सुनी। और सपा नेता का संरक्षण करोगे? नई सपा में सपाइयों का हर घिनौना अपराध माफ करोगे? जाँच कर दोषी को दंड और पीड़ित को न्याय दिलाने में कसर नहीं छोड़ेंगे।”
स्किन टू स्किन टच मामले (skin to skin touch) में विवादित फैसला देकर चर्चा में आईं एडिशनल जज पुष्पा गनेडीवाला (pushpa ganediwala) ने इस्तीफा दे दिया है। जस्टिस गनेडीवाला ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) को अपना इस्तीफा सौंप दिया और इसी के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना (CJI N V Ramana) और बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता (Bombay HC Chief Justice Dipankar Datta) को भी एक-एक प्रति भेजा है।
खास बात यह है कि उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से एक दिन पहले ही इस्तीफा दे दिया। हाईकोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर 12 फरवरी को उनके सेवाकाल का अंतिम दिन है, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। पुष्पा गनेडीवाला 11 फरवरी को आखिरी दिन हाईकोर्ट आएँगी। बताया जा रहा है कि एडिशनल जज के रूप में सेवा विस्तार नहीं मिलने और सर्वोच्च न्यायालय के कोलेजियम में स्थान नहीं मिल पाने की वजह से यह इस्तीफा आया है। उम्मीद जताई जा रही है कि अब वह उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करेंगी।
गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की महिला अतिरिक्त जज जस्टिस पुष्पा वी गनेडीवाला (Justice Pushpa V Ganediwala) को स्थायी जज के रूप में सिफारिश नहीं करने का फैसला किया था। हालाँकि इसके पहले भी, केंद्र सरकार ने अतिरिक्त जज के रूप में उन्हें दो साल का विस्तार देने के कॉलेजियम के फैसले को लेकर असहमति जताई थी। इसने यौन शोषण का सामना करने वाले बच्चों के प्रति उनकी असंवेदनशीलता के आधार पर केवल एक साल का विस्तार दिया था।
जस्टिस गनेडीवाला ने ही ‘स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट (Skin-to-Skin Contact)’ वाला विवादित फैसला दिया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पलटा था। इस फैसले में उन्होंने कहा था, “12 वर्ष की लड़की का स्तन दबाया जाता है। लेकिन इसकी जानकारी नहीं है कि आरोपित ने उसका टॉप हटाया था या नहीं? ना ही यह पक्का है कि उसने टॉप के अंदर हाथ डाल कर स्तन दबाया था! ऐसी सूचनाओं के अभाव में इसे यौन शोषण नहीं माना जाएगा। यह आईपीसी की धारा 354 के दायरे में ज़रूर आएगा, जो स्त्रियों की लज्जा के साथ खिलवाड़ करने के आरोप में सज़ा की बात करता है।”
इसके बाद जस्टिस गनेडीवाला का एक और फैसला आया था। उनकी अगुवाई वाली बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की एकल पीठ ने यह फैसला दिया था कि किसी लड़की का हाथ पकड़ना और आरोपित का पैंट की जिप खोलना प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज ऐक्ट, 2012 (POCSO) के तहत यौन हमले की श्रेणी में नहीं आता।
मुँह दबाना, कपड़े खोलना, फिर रेप करना… अकेला युवक नहीं कर सकता
इसके अलावा जस्टिस का एक और फैसला सामने आया। ये भी रेप से जुड़ा मामला था। इस मामले में भी निचली अदालत ने 26 साल के आरोपित को रेप का दोषी पाया था, लेकिन जस्टिस पुष्पा ने उसे बरी कर दिया। जस्टिस पुष्पा ने तर्क दिया, “बिना हाथापाई किए युवती का मुँह दबाना, कपड़े उतारना और फिर रेप करना एक अकेले आदमी के लिए बेहद असंभव लगता है।”
2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनीं
1969 में महाराष्ट्र के अमरावती जिले में जन्मीं पुष्पा गनेडीवाला ने बीकॉम, एलएलबी और फिर एलएलएम की पढ़ाई की है। वो 2007 में डिस्ट्रिक्ट जज अपॉइंट हुई थीं। वो मुंबई सिविल कोर्ट और नागपुर की डिस्ट्रिक्ट और फैमिली कोर्ट में रहीं। फिर बाद में वो बॉम्बे हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल रहीं। 2019 में वो बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनीं।