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‘मोदी को अंगार लगा सुलगा डालो’: बुर्का के समर्थन में NCP, हिजाबी महिला ने की पीएम की हत्या वाली बात, FIR दर्ज

सोशल मीडिया पर अभी एक वीडियो वायरल है। यह वीडियो बुर्का/हिजाब के समर्थन में पुणे में शरद पवार की राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) द्वारा आयोजित एक ‘विरोध’ प्रदर्शन का है। इसमें एक महिला को कहते हुए सुना जा सकता है, “कर्नाटक में चार दिन से स्कूल, कॉलेज सब बंद हो गए हैं। बहुत बड़ी परेशानी है। यह अचानक कुछ भी निकालता है मोदी कायदा-कानून। ये मोदी को सब अंगार लगा कर सुलगा डालो।”

अब इस मामले में केस दर्ज कराया गया है। यह केस महाराष्ट्र के RSS के सह संयोजक पीयूष जगदीश कश्यप ने करवाई है। उन्होंने पीएम के खिलाफ अपमानजनक और धमकी भरी टिप्पणी करने के लिए महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। सायबर पुलिस स्टेशन में दर्ज अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि महिला ने पीएम मोदी के खिलाफ धमकी भरा और अपमानजक शब्द का इस्तेमाल किया। 

जगदीश ने अपनी शिकायत में उस वीडियो का यूट्यूब लिंक और सीडी भी उपलब्ध कराई है। हालाँकि अब वह वीडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है। RSS कार्यकर्ता ने कहा कि इस तरह की भाषा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उस पोस्ट के खिलाफ भी नफरत पैदा करती है। उन्होंने कहा कि वीडियो देख कर साफ तौर पर उसका इरादा पता चलता है कि वह जनता के बीच पीएम मोदी की अच्छी छवि को धूमिल करना चाहती है। उनका कहना है कि इससे जनता के बीच गलत संदेश जाएगा और वह भी इसी तरह की व्यवहार कर सकते हैं।

बता दें कि गुरुवार (10 फरवरी 2022) को राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी ने कर्नाटक में बुर्का (जिसे लोग हिजाब भी कह रहे हैं, जबकि दोनों में अंतर है) पहनने वाली मुस्लिम लड़कियों के समर्थन में महाराष्ट्र के पुणे जिले में प्रदर्शन किया। एनसीपी की पुणे इकाई के अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने भगवा दुपट्टा डाले उन लड़कों पर निशाना साधा, जिन्होंने बुर्के का विरोध किया था। 

उन्होंने कहा, “कर्नाटक के उडुपी में एक मुस्लिम लड़की का कुछ दिन पहले कई दक्षिणपंथी युवकों ने पीछा किया था। इस घटना से भारतीयों के सिर शर्म से झुक गए हैं।” मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जगताप ने शिक्षण संस्थानों में धर्म और राजनीति लाने के लिए भाजपा सरकार की भी आलोचना की। हालाँकि बीजेपी सरकार की आलोचना करते हुए वह यह भूल गए कि कर्नाटक में बुर्का विवाद की शुरुआत सबसे पहले आठ मुस्लिम लड़कियों ने की थी, जिन्होंने कॉलेज की यूनिफॉर्म के नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया था।

नोट: भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

‘फाँसी दो या बेटे के हत्यारों को मुझे दो… तड़पा-तड़पा मारूँगी’ – रूपेश कुमार पांडेय की माँ, न्याय के लिए जगह-जगह कैंडल मार्च

झारखंड के हजारीबाग में 6 फरवरी (रविवार) को रूपेश कुमार पांडेय नाम के किशोर की हत्या कर दी गई थी। यह हत्या सरस्वती प्रतिमा विसर्जन के समय हुई एक झड़प के दौरान हुई थी। हत्या का मुख्य आरोपित पप्पू असलम बताया जा रहा है। इसके बाद प्रशासन ने हजारीबाग के अलावा उसके सीमावर्ती जिलों तक में इंटरनेट सेवाएँ रोक दीं।

इस घटना के विरोध में ट्विटर पर #JusticeForRupeshPanday ट्रेंड भी चल रहा है। इसी के साथ चतरा में रूपेश कुमार पांडेय को न्याय दिलाने के लिए कैंडल मार्च भी निकाला गया। इस मार्च में सैकड़ों की संख्या में हिन्दू समाज के लोग शामिल हुए।

कैंडल मार्च के दौरान लोगों के हाथों में भगवा ध्वज था। ‘रूपेश को न्याय दो’ के नारे सभी लगा रहे थे। मार्च के बीच में रूपेश की बड़ी सी तस्वीर पर माला डाल कर रखा गया था। यह जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होकर कई जगहों से गुजरा। जुलूस में दिख रहे फुटेज के आधार पर लगभग सभी आयु वर्ग के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।

फाँसी चाहती हैं रूपेश कुमार पांडेय की माँ

एक वीडियो में मृतक रूपेश की माँ को कहते सुना जा सकता है, “हम कुछ नहीं माँगते, हमको मेरा बेटा दीजिए। जैसा बेटा था मेरा, वैसा बेटा चाह रहे हैं। मेरा दीया बुता दिया। पागल हो गए हैं हम। अभी तक कुछ नहीं हुआ है पुलिस द्वारा। पुलिस छानबीन कुछ नहीं कर रही है। मेरे आगे-पीछे कोई नहीं है। मेरा बेटा था, उसी पर भरोसा था। मेरी तबियत खराब रहती है। किसी तरह से हम गुजर-बसर कर रहे थे। हमको एक डॉक्टर ने फोन किया। उसने बताया कि आपका बेटा यहाँ बेहोश पड़ा हुआ है। इधर ही गिर कर बेहोश पड़ गए हैं। हमको दूसरा कोई ले जा कर बताया। वहाँ पुलिस ने हमको हटा दिया। हमको देखने नहीं दिया। या तो उनको फाँसी की सजा दीजिए या तो मेरे हाथ में उन्हें दीजिए। हम उनको मारेंगे। जैसे मेरे बेटे को तड़पा-तड़पा कर मारा गया, वैसे ही मारेंगे।”

रूपेश कुमार पांडेय के परिवार की एक अन्य महिला के मुताबिक, “लग रहा है कि पुलिस ने घूस ले लिया है। कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जैसे मेरे बेटे को मारा गया, वैसे ही उनके घर के भी किसी सदस्य को फाँसी दी जाए। अगर 24 घंटे के अंदर फाँसी न दी गई तो हम सब औरत लोग निकल जाएँगे। कहीं से भी खोजना पड़े, उसे खोज कर लाओ।”

संसद-विधानसभा में रूपेश कुमार पांडेय का मुद्दा

राँची से भाजपा सांसद संजय सेठ ने रूपेश कुमार पांडेय की हत्या को मॉब लिंचिंग बताया है। उन्होंने इस पूरे विषय को संसद में उठाते हुए कहा, “झारखण्ड में मॉब लिंचिंग की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। पूरे राज्य में दहशत का माहौल है। बात-बात पर विरोध जताने वाले और मोमबत्तियाँ जलाने वाले बुद्धिजीवी खामोश हैं। मॉब लिंचिंग का शिकार हुए रूपेश पांडेय को इंसाफ मिले। इसलिए इस मामले की CBI जाँच कराई जाए।”

चतरा से भाजपा सांसद सुनील कुमार सिंह ने लोकसभा में कहा:

“6 फरवरी को सरस्वती पूजा के मूर्ति विसर्जन के समय झारखंड में साम्प्रदायिक भीड़ द्वारा रूपेश पांडेय की हत्या कर दी गई। 17 वर्षीय रूपेश पांडेय जो सिकंदर पांडेय का पुत्र था, वो विसर्जन के जुलूस में जा रहा था। और वहाँ जो साम्प्रदायिक शक्तियाँ, जो धर्मांध लोग थे उन्होंने सरस्वती पूजा के उस विसर्जन जुलूस को घेर कर सरेआम नृशंस हत्या की। उसको बुरी तरह से पीटा गया। अस्पताल जाने पर उसको मृत घोषित कर दिया गया। यह हिंसक हमला मॉब लिंचिंग के अपराध में आता है। राज्य सरकार तुष्टिकरण के आधार पर इसको किसी तरह से समाप्त करना चाह रही है।”

सांसद ने आगे कहा, “इस तरह से गुंडागर्दी मचाई गई कि हजारीबाग, गिरिडीह, चतरा, रामगढ़ जो आस-पास के जिले हैं, वहाँ इंटरनेट सेवाएँ समाप्त कर दी गईं। वो सेवाएँ कल से शुरू हुई हैं। लेकिन मैं आपके माध्यम से सरकार के गृहमंत्रालय से ये आग्रह करना चाहता हूँ कि जो इस देश के बहुसंख्यक हैं, उनको अपने धार्मिक कार्यक्रमों को करने का अधिकार है या नहीं? क्योकि जिस तरह से झारखंड में लगातार नृशंस हत्याएँ हो रहीं हैं, वो साम्प्रदायिकता के आधार पर हो रही हैं। सभापति जी, मैं इसलिए भी ये बात कहना चाह रहा हूँ कि ऐसे दोहरे चरित्र के लोग जो एक तरफ उत्तर प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में गंगा के किनारे जा कर जनेऊ धारण कर के वोट माँग रहे हैं, उनका झारखंड में सत्ता में बैठ कर क्रूर चेहरा सामने आ रहा है। इसको रोक लगाया जाए।”

झारखंड के गिरिडीह में भी रूपेश कुमार पांडेय को न्याय दिलाने के लिए जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में ‘हेमंत सोरेन गद्दी छोड़ो’ के नारे लग रहे थे। साथ ही हत्यारोपितों को फाँसी देने की माँग की जा रही थी।

पत्रकार राणा अयूब की ₹1.77 करोड़ की संपत्ति को ED ने किया जब्त: मदद के नाम पर इकठ्ठा किए धन को खुद खर्चे, पिता और बहन को किया मालामाल

लोगों की मदद के नाम पर धन की उगाही औऱ उस पैसे की गड़बड़ी करने के मामले में प्रोपेगेंडा पत्रकार राणा अयूब (Rana Ayyub) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने अयूब की 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति को कुर्क कर लिया है। ईडी ने कहा है कि राणा अयूब ने एक प्लानिंग के तहत आम जनता को धोखा दिया है।

प्रवर्तन निदेशालय के आदेश में कहा गया है कि राणा अयूब के घोटाले की शुरुआत तभी से शुरू हो गई थी, जब उसने पैसा इकट्ठा करने के बाद उसे अपने और अपने परिवार के सेविंग अकाउंट से विदड्रॉ करना शुरू कर दिया था। ईडी के मुताबिक, अयूब के 50 लाख रुपए के फिक्स्ड अमाउंट नेट बैंकिंग से बुक किए गए और एक अलग करेंट अकाउंट खोला गया। बाद में उसके बचत बैंक खाते और उसकी बहन और पिता के बैंक खाते से फंड का ट्रांसफर किया गया। लेकिन Ketto.org के जरिए जिस उद्देश्य के लिए धन की उगाही की गई थी, उसके लिए इसका इस्तेमाल नहीं हुआ।”

एजेंसी ने अपने आदेश में राणा अयूब द्वारा जुटाए गए फंड और उसको दुरुपयोग को ‘अपराध की आय’ करार दिया औऱ कहा कि इसके (फंड) अधिग्रहण, कब्जे, उपयोग और फिर इसे साफ सुथरी संपत्ति के तौर पर पेश किया है, लेकिन फिर भी यह मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 की धारा 3 के तहत परिभाषित मनी लॉन्ड्रिंग की धारा 4 के अंतर्गत यह एक दंडनीय अपराध है। राणा अयूब के खिलाफ कार्रवाई को PMLA कानून के तहत अनुसूचित अपराध माना जाता है।

हालाँकि, इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अभी तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है। लेकिन, ईडी ने कहा है कि अगर एजेंसी चार्जशीट फाइल करने का इंतजार करती है औऱ राणा अयूब की संपत्ति को ईडी अटैच नहीं करती है तो भी एजेंसी के पास यह मानने का कारण है कि इस पैसे को चुरा लिया जाएगा। ऐसे में बाद में इसे अटैच कर पाना असंभव हो जाएगा।

अटैचमेंट ऑर्डर में कहा गया है, “पूरे मामले को देखने और जाँचने के बाद, मेरे पास यह यकीन करने के पर्याप्त कारण है कि उपरोक्त पैरा 21 के तहत बताई गई राशि अपराध की आय के मूल्य के बराबर है, जैसा कि पीएमएलए, 2002 की धारा 2 (1) (यू) के तहत परिभाषित किया गया है, जिसे राणा अयूब ने, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप प्राप्त किया था, जिसे स्थानांतरित करने या ट्रांसफर के माध्यम से गायब किया जा सकता है, या किसी तीसरे पक्ष के हित के लिए खर्च किया जा सकता है। जिससे पीएमएलए, 2002 के अध्याय III के तहत अपराध की आय के ऐसे मूल्य की जब्ती से संबंधित कार्रवाई में निराशा हो सकती थी और इस प्रकार उपरोक्त राशि तत्काल अनंतिम कुर्की के लिए उत्तरदायी है जैसा कि पीएमएलए की धारा 5 की उप-धारा (1) के तहत शक्ति प्रदान किया गया है।”

प्रवर्तन निदेशालय ने राणा अयूब द्वारा जुटाए गए फंड को अपने आदेश के जारी किए जाने की तारीख से लेकर 180 दिनों तक के लिए अस्थायी तौर पर अटैच कर लिया है।

राणा अयूब के खिलाफ दर्ज किए गए केस

गौरतलब है कि प्रोपागैंडा पत्रकार राणा अयूब के खिलाफ गाजियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में 7 सितंबर 2021 को आईपीसी की धारा 403, 406, 418, 420, आईटी अधिनियम की धारा 66 डी और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट-2002 की धारा 4 के तहत प्राथमिकी दर्ज किया गया था। इसमें अयूब पर ये आरोप लगाया गया था है कि उसने चैरिटी के नाम पर गलत तरीके से आम जनता से धन की वसूली की थी। हिंदू आईटी सेल के विकास शाकृत्यायन ने अगस्त 2021 में ये एफआईआर दर्ज करवाया था।

प्राथमिकी में राणा द्वारा चलाए गए तीन अभियानों का जिक्र किया गया है।

(A) अप्रैल-मई 2020 के दौरान झुग्गीवासियों और किसानों के कल्याण के नाम पर धन की उगाही।

(B) जून-सितंबर 2020 के दौरान असम, बिहार और महाराष्ट्र के लिए राहत कार्य के नाम पर वसूली।

(C) मई-जून 2021 के दौरान भारत में कोविड-19 से प्रभावित लोगों के लिए सहायता के लिए।

प्राथमिकी में उल्लेख किया गया है कि राणा अयूब पेशे से पत्रकार हैं और सरकार से किसी भी प्रकार की अनुमति या रजिस्ट्रेशन के बिना ही वो विदेशी धन प्राप्त कर रही थीं। जबकि, ऐसा करने के लिए विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम 2010 के तहत सरकार की अनुमति या रजिस्ट्रेशन आवश्यक है।

PMLA के तहत ईडी द्वारा की गई जाँच

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय को 11 नवंबर 2021 को शिकायतकर्ता ने इस मामले की जानकारी के साथ एक ईमेल भेजा था। इसमें उसने केटो द्वारा डोनर्स को भेजे गए एक पत्र को भी अटैच किया था। केटो ने दान करने वाले लोगों को बताया कि तीन अभियानों के लिए ₹1.90 करोड़ और 1.09 लाख डॉलर (कुल 2.69 करोड़ रुपए) मिले थे, जिसमें से केवल ₹1.25 करोड़ खर्च किए गए हैं। केटो के पत्र में कहा गया है, “दानदाताओं को उपयोग किए गए धन के विवरण के लिए कैम्पेनर [email protected] से संपर्क करना होगा।”

ईमेल मिलने के बाद जब प्रवर्तन निदेशालय ने मामले की जानकारी के लिए केटो से संपर्क किया। ईडी के एक्शन के बाद 15 नवंबर 2021 को केटो फाउंडेशन के वरुण सेठ ने ईडी को जानकारी दी और कहा:

  1. फंड रेजिंग कैम्पेन को ‘www.ketto.org’ वेबसाइट के जरिए शुरू किया था, जो कि ऑनलाइन माध्यम से शुरू किए गए थे, जो एक निजी कंपनी केटो ऑनलाइन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित किया जा रहा है। वरण सेठ इसके निदेशकों में से एक हैं।
  2. राणा अयूब ने 23 अगस्त 2021 को केटो को एक ईमेल भेजा था, जिसमें उसने जानकारी दी थी कि उसे केटो से कुल ₹2.70 करोड़ रुपए की राशि मिली थी, जिसमें से उन्होंने लगभग ₹1.25 करोड़ खर्च किए और उन्हें कर के रूप में फंड से ₹90 लाख का भुगतान करना बाकी है। जबकि उसने 50 लाख रुपए को छोड़ दिया, जो लाभार्थियों तक पहुँचे ही नहीं।

ईडी को दिया गया वरुण सेठ का बयान

  1. वरुण सेठ ने ईडी को बताया कि वो मैसर्स केटो ऑनलाइन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों में से एक हैं। यह भारत से होने वाले सामाजिक और चिकित्सा के लिए एक ऑनलाइन क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म है।
  2. राणा अयूब ने पिछले 20 महीनों के दौरान Ketto.org पर 3 फंड रेजिंग कैम्पेन शुरू किए थे। जब भी कोई यूजर Ketto.org के जरिए फंड रेजिंग कैम्पेन शुरू करता है तो वो Ketto के उपयोग की शर्तों, गोपनीयता पॉलिसी और प्लेटफॉर्म पर धन जुटाने के लिए डिजिटल समझौते से सहमत होते हैं। इसके अलावा कैम्पेन करने वाला व्यक्ति फंड निकालने के लिए केवाईसी डिटेल्स आधार कार्ड, पैन कार्ड, कैंसल चेक भी जमा करते हैं।
  3. राणा अयूब ने तीन फण्ड रेजिंग कैम्पेन शुरू किया था और तीनों से ही उसने पैसे निकाले थे।

तीनों कैम्पेन के लिए निकाली गई धनराशि

A) अपने पहले अभियान में कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए राणा अयूब ने 82,55,899 रुपए का फंड इकट्ठा किया था, जिसमें से से उसने 79,63,640 रुपए निकाले थे। इस कैम्पेन में डोनर्स को 1,00,983 अमेरिकी डॉलर (7,582,483 रुपए) लौटाए गए। दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान से पैसे खुद राणा अयूब और उसके पिता मोहम्मद अयूब वक्फ के खातों में निकाले गए।

B) अभियान 2 (झुग्गीवासियों और किसानों की मदद के लिए): 71,37,217 रुपए एकत्र किए गए, 68,84,560 रुपए निकाले गए। इसके अतिरिक्त, 75,600 अमरीकी डालर जुटाए गए और 73,332 अमरीकी डालर निकाले गए। राणा अय्यूब के पिता और अय्यूब के परिवार के एक सदस्य इफ्फत शेख (Iffat Shaikh) के खाते में भी राशि निकाली गई।

ग) अभियान 3 (असम, बिहार और महाराष्ट्र के लिए राहत कार्य): 42,01,368 रुपए जुटाए गए, 40,53,640 रुपए निकाले गए। इसके अतिरिक्त, 37,203 अमरीकी डालर जुटाए गए और 36,087 अमरीकी डालर निकाला गया। इस अभियान से राशि राणा अयूब के पिता के खाते में भी ट्रांसफर की गई।

  1. राणा अय्यूब और उनके परिवार के सदस्यों का केवाईसी विवरण देने के बाद पैसे निकाले गए।
  2. केटो ऑनलाइन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड किसी भी विदेशी फंड का प्रबंधन नहीं करता है। किसी भी विदेशी फंड का प्रबंधन केटो ऑनलाइन वेंचर्स इंक (केटो यूएसए) द्वारा किया जाता है। एक कैम्पेनर जो केटो वेबसाइट पर फंड जुटाता है, उसके पास अपनी पसंद से विदेशी फंड स्वीकार करने का विकल्प होता है; केटो कैंपेनर को अपने अभियान के लिए विदेशी धन स्वीकार करने या न करने का विकल्प देता है। केटो फंड निकालने वाले उपयोगकर्ता से यह घोषणा भी लेता है कि उसके पास विदेशी फंड स्वीकार करने के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरी है।

इसके अलावा, 10 दिसंबर 2021 को, वरुण सेठ ने निम्नलिखित खुलासे के साथ विभाग के सवालों का जवाब देते हुए ईडी को एक और ईमेल लिखा:

ईडी ने वरुण सेठ से पूछा है कि क्या मोहम्मद अय्यूब वक्विफ और इफ्फत शेख पैसे निकालने के योग्य हैं। सेठ ने कहा कि वे केवल एक धन इकठ्ठा करने वाला मंच हैं और धन जुटाने वाला व्यक्ति निकासी के लिए लाभार्थियों को जोड़ सकता है और केटो का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

राणा अय्यूब द्वारा मोहम्मद अय्यूब वक्विफ और इफ्फत शेख के बैंक खातों के माध्यम से जुटाई गई धनराशि को वापस लेने के कारणों के बारे में, उन्होंने प्रस्तुत किया कि भुगतान कैंपेनर द्वारा ऑनलाइन अनुरोध पर किया जाता है और केटो द्वारा बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर होता है। केटो आगे कुछ भी जानने की स्थिति में नहीं है।

ईडी ने इफ्फत शेख को समन जारी किया और उनका जवाब:

6 दिसंबर को एक ईमेल में, इफ़्फ़त ने ईडी को बताया कि वह दुबई में थी और अपने पति के खराब स्वास्थ्य और ओमिक्रॉन के कारण लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के कारण, वह सम्मन के जवाब में भारत की यात्रा नहीं कर सकती थी। उसने आगे कहा कि उसकी बहन राणा अयूब को पावर ऑफ अटॉर्नी दी गई थी और आवश्यक दस्तावेज मुंबई में जमा कर दिए गए थे। राणा अयूब द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में कहा गया है कि राणा अयूब ने खर्च का व्योरा दिया था। राहत कार्यों पर 40 लाख; रुपए की राशि, 74.50 लाख पीएम केयर फंड / सीएम केयर फंड में दान दिया। 1.05 करोड़ का आयकर भुगतान किया जा चुका है।

ED द्वारा मोहम्मद अयूब वक़िफ़ को समन और राना अयूब के माध्यम से उनकी प्रतिक्रिया:

राना अयूब ने अपने पिता की ओर से ईमेल पर ED को जवाब देते हुए कहा कि उन्हें दो ब्रेन स्ट्रोक हो चुके हैं और वे व्हीलचेयर पर हैं। उसने कहा कि सितंबर तक उसने पीएम केयर को दान की गई राशि सहित उसे प्राप्त एक-एक पैसा खर्च कर दिया था और उसने 29.09.2021 को ईडी कार्यालय मुंबई को सभी जानकारी/दस्तावेज जमा कर दिए थे। इस दस्तावेज में कहा गया है कि सुश्री राना अयूब ने 40 लाख रुपए राहत कार्यों पर खर्च किए, 74.50 लाख रुपए पीएम केयर फंड/सीएम केयर फंड में दिए और 1.05 करोड़ रुपए का आयकर भुगतान किया।

राना अयूब को ED ने समन भेजा और विभाग को उनका बयान

  1. राना अयूब का दावा है कि उन्हें केवल भारतीय रुपए में राशि मिली, लेकिन केटो द्वारा दिए गए विवरण उनके दावे पर सवाल खड़े करता है।
  2. उनका दावा है कि उसकी बहन और पिता के खाते में हस्तांतरित की गई राशि को बाद में उसके खाते में हस्तांतरित कर दिया गया था, जिसका उपयोग उन उद्देश्यों के लिए किया गया था जिनके लिए उन्हें माँगा गया था।
  3. उन्होंने दानदाताओं की सूची ED को सौंपी है।
  4. विदेशी मुद्रा लेने से संबंधित RBI की गाइडलाइन के तहत ना ही उनके पिता या बहन और ना ही उन्हें पंजीकृत ईमेल पर कोई सूचना मिली कि उनके पास एफसीआरए का पंजीकरण नहीं है, क्योंकि भारतीय मुद्रा में धन प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होती और ना ही केटो द्वारा इस संबंध में कोई मौखिक या लिखित सूचना मिली।
  5. राहत कार्य के लिए उपयोग खाद्यान्न, तिरपाल शीट, कोविड के लिए आवश्यक सामग्री (दस्ताने, मास्क, हैंड सैनिटाइज़र सहित, प्रवासी श्रमिकों को घर भेजना, उनके लिए परिवहन की व्यवस्था) की खरीद और इसके लिए 40 लाख रुपए का भुगतान। तिरपाल शीट, खाद्यान्न आदि का वितरण राहत कार्यों के हिस्सा थे। राहत कार्य में किये गये व्यय के बिलों की मूल प्रतियां आयकर विभाग को दी गईं।

पहला कैम्पेन के बाद पिता के नाम पर 50 लाख रुपए की फिक्स डिपॉजिट पर राना अयूब का बयान

राहत कार्यों के नाम पर जनता से इकट्ठा किए गए फंड में से राना अयूब ने 19 मई 2020 को अपने पिता के नाम पर 50 लाख रुपए की फिक्स डिपॉजिट की। राना अय्यूब ने उल्लासपूर्वक बताया कि उन्होंने अस्पताल के लिए पर्याप्त पैसे जमा किए हैं, लेकिन मौजूदा सरकार की निगरानी के कारण गैर-सरकारी संगठन और वे निर्वाचित सदस्य, जिनसे उन्होंने संपर्क किया था, शांत पड़ गए।

ED को उन्होंने आगे बताया कि उनके “नोबल कॉज” के बारे में जानने वाले बैंक मैनेजर ने उन्हें रुपयों की एफडी करने का सुझाव दिया, ताकि 50 लाख रुपए की एफडी पर मिले ब्याज से अस्पताल के लिए अतिरिक्त पैसा जमा होगा। राना ने दावा किया कि उन्होंने एफडी केवल इसलिए की, ताकि इससे काम में मदद मिले और अस्पताल के लिए रखे पैसे से ब्याज मिले।

दिलचस्प बात यह है कि राना अयूब और केटो के बीच हुए समझौते में इस कैम्पेन का उद्देश्य ‘नासिक और लातूर के 2,000 गरीब किसानों और धारावी एवं नवी मुंबई के गरीब लोगों को तेल, चावल, चीनी, दाल, अस्पताल का बिल आदि देकर मदद करना’ बताया गया था। इसमें अस्पताल बनाने का उद्देश्य नहीं बताया गया था।

इसको लेकर राना अयूब का कहना था कि उनकी याद में इस तरह का कोई समझौता नहीं हुआ था।

‘ये तो बस ट्रेलर है, फिल्म अभी बाकी है’: शरजील इमाम की जमानत का सरकारी वकील ने किया विरोध, कोर्ट को बताई शाहीन बाग की सच्चाई

नागरिक संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर शुरू होकर हिंदू विरोधी दंगों (Anti Hindu Riot) में बदले विरोध प्रदर्शन के मुख्य षडयंत्रकारियों में से एक शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की जमानत याचिका का गुरुवार (10 फरवरी) को सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने विरोध किया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि शाहीन बाग में प्रदर्शन के दौरान शरजील इमाम ने भड़काऊ भाषण देते हुए कहा था, “ये तो अभी ट्रेलर है, फिल्म तो अभी बाकी है।”

शरजील इमाम और खालिद उमर (Khalid Umar) के अलावा 5 अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर कोर्ट सुनवाई कर रहा था। SPP प्रसाद ने इस दौरान शरजील इमाम और उसके भाई मुजम्मिल के बीच हुई बातचीत भी पेश की। उन्होंने बताया कि चैट में शरजील इमाम ने कहा: ‘हम दोनो ही मास्टरमाइंड हैं’ शाहीन बाग के।

इस पर शरजील के वकील ने दलील दी कि उसके मुवक्किल की गिरफ्तारी साजिश रचने को लेकर नहीं, बल्कि गिरफ्तारी से पहले हुए भाषण को लेकर है। इस पर प्रसाद ने कहा कि इस तरह का तर्क देना गलत दिशा में दिया गया तर्क है। क्रिकेट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक टीम जब खेलती है तो हर खिलाड़ी का अपना महत्व होता है। अगर बल्लेबाजी के क्रम में ओपनर का विकेट गिर जाता है तो इसका मतलब यह नहीं कि टीम ने खेल जीतने का इरादा छोड़ दिया।

इस दौरान सरकारी वकील प्रसाद ने चार्जशीट पढ़कर अदालत को बताया कि साजिशकर्ता कानूनी रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते थे और इसके लिए अराजकता फैलाना और हिंसा करना चाहते थे। SPP ने कहा, “मैं पहले ही दिखा चुका हूँ कि उमर खालिद ने शरजील इमाम को और उसने गुलफिशा को क्या निर्देश दिए थे। बैठक में दिए गए निर्देशों में साजिश स्पष्ट है।” उन्होंने कहा कि इसके लिए ‘खिदमत’, ‘संविधान बचाओ’ जैसे व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे।

जमानत याचिका के विरोध में दलील देते हुए उन्होंने आगे कहा कि शरजील इमाम ने जंगपुरा एक्सटेंशन के बेसमेंट में एक सभा के बारे में एक संदेश भेजकर ‘MSJ’ के सदस्यों को भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। शरजील इमाम ने 15 दिसंबर 2019 की सुबह JNU में एक ढाबे पर MSJ कोर कमेटी के साथ मुलाकात की, ताकि उनकी भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जा सके। उन्होंने PFI, जमात ए इस्लामी हिंद और अन्य समूहों की मदद भी ली थी।

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपित शरजील इमाम को जमानत देने के मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

UP के पहले चरण में 59% मतदान: सबसे अधिक कैराना में 65.3% वोटिंग, 623 उम्मीदवारों का भाग्य EVM में कैद

उत्तर प्रदेश में जारी विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) में पहले चरण का मतदान खत्म हो गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों के 58 विधानसभा सीटों पर गुरुवार (10 फरवरी) को हुए मतदान में शाम 6 बजे तक 59.05 प्रतिशत वोटिंग हुई। चुनाव आयोग ने इस बात की जानकारी दी। सबसे अधिक मतदान कैराना में हुआ है।

उत्तर प्रदेश के 18वीं विधानसभा गठन के लिए हुए मतदान में शुरुआत धीमी रही, लेकिन दिन बीतने के साथ इसमें गति आती गई। सुबह 7 बजे शुरू हुए मतदान में इन सीटों पर 11 बजे तक सिर्फ 35.03 प्रतिशत वोटिंग ही हो पाई थी। वहीं, शाम 5 बजे तक कुल मतदान प्रतिशत 57.79 प्रतिशत बताई जा रही थी।

सबसे अधिक मतदान कैराना में हुआ है। वहाँ 65.30 प्रतिशत वोट डाले गए हैं। वहीं, सबसे कम मतदान साहिबाबाद में सिर्फ 38 प्रतिशत हुआ। अगर जिले के अनुसार मतदान की बात करें तो शामली में 69.53 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 62.14 प्रतिशत, बागपत में 61.35 प्रतिशत, बुलंदशहर में 60.52 प्रतिशत, हापुड़ में 60.50 प्रतिशत, मेरठ में 58.52 प्रतिशत, मथुरा में 58.51 प्रतिशत, अलीगढ़ में 57.25 प्रतिशत, आगरा में 56.61 प्रतिशत, गाजियाबाद में 54.78 प्रतिशत और गौतमबुद्ध नगर में 54.77 प्रतिशत मतदान की खबर है।

पहले चरण में  898 मोहल्ले और 5,535 मतदान केंद्रों को संवेदनशील की श्रेणी में रखे गए थे। सुरक्षा के लिए इस दौरान केंद्रीय सुरक्षाबलों की 796 कंपनियाँ तैनात की गई थीं। इनमें 724 कंपनियों को बूथ ड्यूटी, 15 कंपनियों को स्ट्रॉन्ग रूम में, 5 कंपनियाँ EVM सिक्योरिटी के लिए और 66 कंपनियाँ कानून-व्यवस्था में तैनात की गई थीं। इसके अलावा, यूपी की PAC की 27 कंपनियों को भी तैनात किया गया था। इस दौरान लगभग 1.25 लाख पुलिसकर्मियों, होमगार्ड के जवानों और गाँव के चौकीदारों को ड्यूटी पर लगाया गया था।

पहले चरण के मतदान में 2.28 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.24 करोड़ पुरूष, 1.04 करोड़ महिला तथा 1,448 ट्रांसजेंडर वोटर हैं। पहले चरण के 58 सीटों में 9 सीटें सुरक्षित (Reserved) कैटेगरी में हैं। वहीं, इन विधानसभा सीटों पर चुनावों में 623 उम्मीदवार मैदान में थे। ADR के अनुसार, इनमें से 156 उम्मीदवारों (लगभग 25 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों में समाजवादी पार्टी पहले स्थान (75 प्रतिशत), RLD दूसरे स्थान (51 प्रतिशत) और बसपा के तीसरे स्थान (लगभग 31 प्रतिशत) पर हैं।

‘टॉपलेस’ होकर कॉलेज जाती लड़कियाँ पर कोई सवाल नहीं, तो इस्लामिक ड्रेस कोड पर क्यों: कर्नाटक बुर्का विवाद पर बचाव में बोले मौलाना साजिद रशीदी

हिंदुओं और राम मंदिर के खिलाफ भड़काऊ बयान देने के लिए कुख्यात ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। कर्नाटक के कॉलेजों में चल रहे बुर्का और हिजाब विवाद पर बयान देते हुए मौलाना साजिद रशीदी ने 10 फरवरी को कहा कि हिजाब इस्लाम का ड्रेस कोड है और महिलाओं को खुद को सुरक्षित और समाज में संरक्षित रखने के लिए पर्दे में रहना चाहिए। उन्होंने सभी मुस्लिम महिलाओं से बुर्का पहनना जारी रखने की अपील की और मुस्लिम पुरुषों से कुर्ता और जालीदार टोपी (Skull Cap) सहित पारंपरिक मुस्लिम पोशाक अपनाने को कहा।

मौलाना साजिद रशीदी ने कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों पर भारतीय संविधान का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मजहब (इस्लाम) का पालन करना मुस्लिमों का मौलिक अधिकार है और हिजाब पहनना ‘इस्लाम का अभिन्न अंग’ है।

एक्टिविस्ट अंबर जैदी से खास बातचीत में रशीदी ने कहा, “महिलाएँ टॉपलेस होकर कॉलेज, स्कूल जाती हैं तो कोई उनसे सवाल नहीं करता, फिर हिजाब और बुर्का पहनने वाली लड़कियों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।” विवादास्पद मौलवी ने कहा, “जीन्स पहनना, स्कूलों में टॉपलेस होना इस्लाम में अच्छा नहीं माना जाता है। महिलाओं को पर्दा करना चाहिए और पुरुषों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उसे टाइट कपड़े नहीं पहनने चाहिए और समाज में पुरुषों के सामने अपने शरीर के अंगों को उजागर नहीं करना चाहिए।”

जब अंबर जैदी ने पूछा कि स्कूल और कॉलेज में टॉपलेस होकर कौन जाता है, तो रशीदी ने जवाब दिया कि बहुत सारी लड़कियाँ ऐसा करती हैं। उन्होंने कहा कि वह कॉलेज जाकर लड़कियों को टॉपलेस और अभद्र कपड़े, जींस पहनकर घूमते हुए देख सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों को कॉलेजों में जींस पहनने का मौलिक अधिकार है तो उन्हें भी बुर्का पहनने का मौलिक अधिकार है।

मौलाना ने अपने सभी विचार को कुरान पर आधारित बताया। उन्होंने बताया कि इस्लाम का सिद्धांत पूरी तरह से कुरान, हदीस से लिया गया है और जो महिलाएँ हिजाब या बुर्का नहीं पहनती हैं उन्हें इस्लाम का पालन नहीं माना जाता है।

RSS हिजाब की इजाजत नहीं देकर इस्लाम पर हमला कर रहा है: मौलाना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीखी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ‘RSS के गुंडे’ पहले तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाकर और अब हिजाब की अनुमति नहीं देकर इस्लाम पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो में 17:13 मिनट पर मौलाना कहते हैं, “ये लोग (RSS) भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। वे पूरे देश में गुंडागर्दी करना चाहते हैं। तिरंगे की भी इज्जत नहीं करते। वे केवल भगवा ध्वज मानते हैं।”

उन्होंने कर्नाटक के संस्थानों को भी बहस में घसीटा और कहा कि कॉलेजों ने अभी-अभी RSS के रास्ते पर चलना शुरू किया है। उन्होंने आरोप लगाया, “जिन लड़कों ने हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं का विरोध किया, उन्होंने भगवा दुपट्टा पहना था। ये लोग कौन हैं? वे किस तरह की मिसाल कायम कर रहे हैं? वे (RSS) इस देश को मजहब के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं।” हालाँकि यह आरोप लगाते हुए वह यह बात आसानी से भूल गए कि कर्नाटक हिजाब विवाद की शुरुआत आठ मुस्लिम लड़कियों ने की थी, जिन्होंने कॉलेज के सेम यूनिफॉर्म ड्रेस कोड के नियमों का पालन करने से इनकार किया था।

मुस्लिम जहाँ भी जाएँ अपने ‘मजहब’ का पालन करेंगे: मौलाना रशीदी

उन्होंने संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में इंटरव्यू लेने वाली एक्टिविस्ट अंबर जैदी (जो कि एक मुस्लिम भी हैं) के साथ डिबेट किया। उन्होंने उन पर इस्लाम का पालन न करने का आरोप लगाया और कहा कि आजादी का मतलब यह नहीं है कि मुस्लिम महिलाएँ कुरान में वर्णित अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवन के तरीके को भूल जाएँ। उन्होंने अंबर पर स्वतंत्र विचारों को अपनाने का आरोप लगाया और इसे ‘हराम’ कहा।

अपनी इस राय पर कि ‘मुस्लिम महिलाओं को पर्दा करना चाहिए और हिजाब पहनना चाहिए’, उन्होंने कहा कि मुस्लिम जहाँ भी जाएँगे, अपने ‘मजहब’ का पालन करेंगे। वीडियो में 16:40 मिनट में उन्होंने कहा, “जिस समुदाय से मैं संबंध रखता हूँ, वह कॉलेजों, बाजारों और पूरे समाज में इस्लाम का पालन करने में विश्वास करता है। हमें ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता।”

गौरतलब है कि मौलाना रशीदी इससे पहले भी हिंदू विरोधी विवादास्पद बयान दे चुके हैं। अयोध्या में राम मंदिर पर फैसला आने के बाद उन्होंने धमकी देते हुए कहा था कि मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को तोड़ा जा सकता है। उन्होंने इस्लाम के हवाले से कहा था कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगी और उसे तोड़ा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि मस्जिद को ध्वस्त कर मंदिर बनाया गया, अब मंदिर ध्वस्त कर मस्जिद फिर से बनेगा।

साजिद रशीदी ने कहा था, “इस्लाम कहता है कि एक मस्जिद हमेशा एक मस्जिद होगी। इसे कुछ और बनाने के लिए नहीं तोड़ा जा सकता है। हम मानते हैं कि बाबरी मस्जिद थी और हमेशा एक मस्जिद रहेगी। मंदिर को गिराने के बाद मस्जिद की तामीर नहीं की गई थी लेकिन अब मस्जिद बनाने के लिए हो सकता है मंदिर को तोड़ा जाए।”  

‘हिजाब विवाद’ की शुरुआत कैसे हुई?

बता दें कि हिजाब को लेकर विवाद की शुरुआत उडुपी के एक कॉलेज से हुई थी। जहाँ पिछले दिनों हिजाब पर बैन लगा दिया गया था। हिजाब पहने हुई छात्राओं को गेट पर रोक दिया गया था। इसके बाद एक छात्रा ने कर्नाटक हाईकोर्ट में ये कहते हुए याचिका दायर किया था कि हिजाब पहनने की अनुमति न देना असंवैधानिक है। मामले में गुरुवार (10 फरवरी 2022) कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान छात्रों को धार्मिक पोशाक पहनने पर जोर न देने के लिए कहा गया। मामले की अगली सुनवाई सोमवार (14 फरवरी 2022) को होगी।

पहले कहा ‘सड़क का गुंडा’ अब उन्हीं के नाम पर वोट माँग रही कॉन्ग्रेस: उत्तराखंड में बिपिन रावत के नाम के इस्तेमाल पर बोले PM मोदी

उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election-2022) में दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत ( Bipin Rawat) के नाम का सहारा लेकर राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही कॉन्ग्रेस के दोहरे चरित्र का भांडाफोड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने किया। उन्होंने कहा, कॉन्ग्रेस आज सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम से वोट माँग रही है, लेकिन जब सीडीएस के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई थी तो इसी ने जमकर राजनीति की थी।”

दरअसल, उत्तराखंड के चुनाव में बढ़त हासिल करने के लिए कॉन्ग्रेस (Congress) जनरल बिपिन रावत के पोस्टर और कटआउट लगा रही है। पीएम मोदी ने गुरुवार (10 फरवरी 2022) को प्रदेश के श्रीनगर में एक चुनावी जनसभा के दौरान कहा, कॉन्ग्रेस के एक नेता ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत को सड़क का गुंडा करार दिया था। उसने कहा था कि कभी भी कॉन्ग्रेस को सेना पर भरोसा नहीं रहा। पीएम मोदी ने कहा, “जब आतंकी हमलों का इंडियन आर्मी ने मुंहतोड़ जबाव दिया था तो कॉन्ग्रेस ने ही सेना के साहस और शौर्य पर सवाल खड़ा किया था। उसने सेना से हमलों के सबूत माँगे थे।”

इससे पहले 31 जनवरी 2022 को राज्य के पूर्व सीएम और कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत (Harish Rawat) ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए उनकी और दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीर लगाने के लिए कहा था। कॉन्ग्रेस नेता ने दूसरे ऑफिसों में भी यही करने को कहा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीडीएस रावत को याद करते हुए कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने हमेशा एक सजग पहरेदार की तरह से देश की रक्षा की है। उन्होंने आगे कहा, “पौड़ी गढ़वाल के वीर सपूत सीडीएस जनरल बिपिन रावत की यादें आज मुझे भावुक कर रही हैं। उन्होंने ये दिखाया है कि उत्तराखंड के लोगों में न केवल पहाड़ों की तरह साहस है, बल्कि हिमालय की ऊँची सोच भी है।”

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में जब सीडीएस जनरल बिपिन रावत का प्लेन क्रैश हुआ था तो पूरा देश गमगीन था, लेकिन कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी गोवा में आदिवासी नृत्य का मजा ले रही थीं। वो बिपिन रावत के जाने पर संवेदना देने की बजाय गोवा में कॉन्ग्रेस के चुनाव प्रचार की शुरुआत करने के लिए गई थीं।

यहीं नहीं कॉन्ग्रेस के के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड के संपादक एशलिन मैथ्यू ने हेलीकॉप्टर दुर्घटना की घटना को ‘ईश्वरीय हस्तक्षेप’ यानि भगवान के द्वारा किया गया कार्य करार दिया था। हालाँकि, बाद में उन्होंने यह कहकर उस ट्वीट को डिलीट भी कर दिया कि उसका हेलिकॉप्टर दुर्घटना और सीडीएस रावत की मौत की खबर से कोई लेना-देना नहीं था।

इससे पहले 2017 में कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित (Sandeep Dikshit) ने सीडीएस रावत को ‘सड़क का गुंडा’ कहा था। बाद में जब विवाद बढ़ा तो कॉन्ग्रेस ने खुद को इससे अलग कर लिया था, जिसके बाद संदीप दीक्षित ने भी अपनी टिप्पणी को वापस ले लिया था।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों के लिए 14 फरवरी को मतदान होंगे और 10 मार्च को इसके नतीजे घोषित किए जाएँगे।

कॉलेज में धार्मिक पोशाक पहनने पर जोर न दें, अंतिम फैसले का इंतजार करें: बुर्का विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट, अब सोमवार को सुनवाई

कर्नाटक हाई कोर्ट हिजाब मुद्दे पर सोमवार (14 फरवरी 2022) को फिर से सुनवाई करेगी। गुरुवार (10 फरवरी 2022) को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रितू राज अवस्थी की अध्यक्षता में जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। 

इस दौरान कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पीठ कॉलेजों को खोलने का निर्देश देने वाला आदेश पारित करेगी लेकिन जब तक मामला लंबित है, कोई भी छात्र धार्मिक पोशाक पहनने पर जोर न दे। उन्होंने कहा, “हम सुनवाई के दौरान सभी को धार्मिक प्रथाओं को अपनाने से रोकेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने शांति बनाए रखने की भी अपील की और मीडिया को निर्देश दिया कि वह अदालत की मौखिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग न करे, बल्कि फाइनल ऑर्डर आने तक इंतजार करे।

इससे पहले बुधवार (9 फरवरी 2022) को कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान मामले की सुनवाई कर रहे कर्नाटक HC के जज जस्टिस कृष्ण दीक्षित ने मामले को बड़ी बेंच में भेजने का फैसला किया था। जस्टिस दीक्षित ने कहा था, “इस मामले में अंतरिम राहत के सवाल पर भी बड़ी बेंच विचार करेगी।”

क्या है मामला?

कर्नाटक सरकार ने राज्य में Karnataka Education Act-1983 की धारा 133 लागू कर दी है। इस वजह से अब सभी स्कूल-कॉलेज में यूनिफॉर्म को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत सरकारी स्कूल और कॉलेज में तो तय यूनिफॉर्म पहनी ही जाएगी, प्राइवेट स्कूल भी अपनी खुद की एक यूनिफॉर्म चुन सकते हैं।

इस फैसले को लेकर विवाद पिछले महीने जनवरी में तब शुरू हुआ था, जब उडुपी के एक सरकारी कॉलेज में 6 छात्राओं ने हिजाब पहनकर कॉलेज में एंट्री ली थी। विवाद इस बात को लेकर था कि कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं को हिजाब पहनने के लिए मना किया था, लेकिन वे फिर भी पहनकर आ गई थीं। उस विवाद के बाद से ही दूसरे कॉलेजों में भी हिजाब को लेकर बवाल शुरू हो गया। जिसके बाद छात्राओं ने कोर्ट में याचिका दायर किया था।

चीन में कार का निर्माण और बिक्री भारत में, ये नहीं चलेगा: Tesla पर गडकरी की दो टूक, कहा- संयंत्र यहीं लगे

अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनी टेस्ला (Tesla) भारत में आने के लिए तैयार है, लेकिन इसको लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कड़ा और दो टूक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि टेस्ला का भारत में स्वागत है, लेकिन कंपनी की चीन में गाड़ियाँ बनाकर भारत में बेचने की अवधारणा पचने वाली नहीं है। भारत बहुत बड़ा बाजार है और भारत में टेस्ला का संयत्र यहीं स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर भारत में कंपनी के प्रमुख के साथ हाल ही में बातचीत हुई थी।

न्यूज18 के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “टेस्ला का भारत में स्वागत है, हमें कोई समस्या नहीं है। भारतीय बाजार बहुत बड़ा बाजार है। भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का कारोबार 7.5 लाख करोड़ रुपए का है। पूरी दुनिया में सभी प्रतिष्ठित ब्रांड (बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, हुंडई, टोयोटा, वोल्वो, होंडा) यहाँ हैं।”

गडकरी के मुताबिक, एलन मस्क चीन में कार का निर्माण कर उसे भारत में बेचना चाहते हैं। एलन मस्क कार बनाने का अपना संयंत्र यहाँ शुरू कर सकते हैं। इसके लिए यहाँ पर उन्हें सभी तरह के सहायक उपकरण मिलेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर टेस्ला भारत में कारों का निर्माण कर उसे यहाँ बेचती है तो उसे अच्छी बिक्री होगी। उन्होंने कहा, “अगर आप यहाँ से शुरू करते हैं तो आपका स्वागत है, कोई बात नहीं। लेकिन चीन में निर्माण और भारत में बिक्री हम सभी के लिए एक सुपाच्य अवधारणा नहीं है।”

गडकरी के मुताबिक, भारत में टेस्ला के प्रमुख से उनकी 3-4 दिन पहले ही बातचीत हुई थी और उन्होंने टेस्ला को भारत में ही गाड़ियों का निर्माण करने के लिए समझाया था। हालाँकि, आखिरी फैसला उन पर निर्भर है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि टेस्ला ने भारत में अच्छा टैक्स बेनिफिट नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “हमारे पास एक कंपनी नहीं है, हमारे पास भारतीय बाजार में मौजूद सभी वैश्विक दिग्गज हैं। अगर एक कंपनी को लाभ दिया गया तो दूसरी कंपनियों को भी देना होगा। ये एक प्रैक्टिकल समस्या है।”

ग्रीन हाईड्रोजन भविष्य का ईंधन

नितिन गडकरी का कहना है कि अगले दो साल में इलेक्ट्रिक वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोत्तरी होते ही इलेक्ट्रिक टू, थ्री और फोर व्हीलर की कीमतें पेट्रोल गाड़ियों के बराबर हो जाएँगी। दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में ई-गाड़ियों का चलन बढ़ा है। देश में ही लिथियम ऑयन बैट्री भी बन रही है और देश ग्रीन हाइड्रोजन की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यही भविष्य का ईंधन है और इसे ही पूरी दुनिया में निर्यात करना है। भारत 8 लाख करोड़ रुपए के कच्चे तेल, गैस और पेट्रोलियम का आयात कर रहा है। कोशिश ये है कि इसे इथेनॉल, मेथनॉल, बायो-डीजल, सीएनजी, इलेक्ट्रिक, बायो-एलएनजी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधन से बदला जाए।

संसद में उठा किशन भरवाड की हत्या का मामला, BJP सांसद ने बताया- सुरेश चव्हाणके और यति नरसिंहानंद भी इस्लामी कट्टरपंथियों के टारगेट

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद कैलाश सोनी (Kailash Soni) ने गुरुवार (10 फरवरी) को सदन में शून्यकाल के दौरान गुजरात के चर्चित किशन भरवाड़ हत्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने गुजरात ATS की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस हत्याकांड को उत्तर प्रदेश में हुई कमलेश तिवारी की हत्या जैसा ही बताया। इस दौरान कैलाश सोनी ने गुजरात के एक अग्रणी संध्या दैनिक समाचार पत्र ‘गुजरात मिरर’ की रिपोर्ट भी उल्लेख किया।

बता देें कि कमलेश तिवारी की हत्या उनके लखनऊ स्थित आवास पर इस्लामी चरमपंथियों द्वारा 18 अक्टूबर 2019 को ईशनिंदा के आरोप में कर दी थी। वहीं, चरमपंथियों ने किशन भरवाड की हत्या अहमदाबाद के धंधुका में कर दी थी। किशन भरवाड ने मुस्लिमों के पैगंबर मोहम्मद से संबंधित एक पोस्ट की थी। इसको चरमपंथियों ने ईशनिंदा बताया था।

ATS की इस रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना शब्बीर ने किशन की हत्या करने वाले आरोपितों को 11 लोगों की हत्या करने का ठेका दिया था। इनमें सुदर्शन TV चैनल के CMD सुरेश चव्हाणके और यति नरसिंहानन्द शामिल हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पकड़े गए आरोपितों के निशाने पर बीएस पटेल, पंकज शर्मा, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, महेंद्रपाल आर्य, राहुल शर्मा, राधेश्याम आचार्य, उपदेश राणा, उपासना आर्य और रॉ (R&AW) के पूर्व अधिकारी RSN सिंह भी थे।

किशन भरवाड की हत्या 2022 विधानसभा चुनावों से पहले दंगे भड़काने की साजिश

राज्यसभा सांसद ने आगे कहा, “गुजरात ATS ने आरोपित शब्बीर इम्तियाज़ और जमालपुर के मौलाना अय्यूब जावरवाला से पूछताछ की है। उन्होंने बताया कि किशन की हत्या करने का मकसद साम्प्रदयिक तनाव को फैलाना और देश भर में अराजकता फैलाना था। ऐसा 2022 के UP, पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड चुनावों को देखते हुए किया जा रहा था। मैं सुरेश चव्हाणके, यति नरसिंहानन्द और जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व वसीम रिज़वी) की सुरक्षा की माँग करता हूँ। ये सभी इस्लामी चरमपंथियों के निशाने पर हैं।”

ऑपइंडिया ने 7 फरवरी को न्यूज़ 18 गुजराती की रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि जाँच एजेंसियों को 26 लोगों को प्रोफ़ाइल मिली है। इनमें यति नरसिंहानन्द गिरी और जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व वसीम रिज़वी) शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी 26 प्रोफाइल मौलाना अय्यूब के फोन से मिली हैं।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये सभी 26 लोग भी किशन भरवा की ही तरफ रडार पर तो नहीं थे? मौलाना अय्यूब को अहमदाबाद के जमालपुर से आरोपितों को हथियार उपलब्ध करवाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ATS ने पकड़े गए आरोपितों से हथियार और नकद भी बरामद किया है। इन आरोपितों के कनेक्शन दुबई और पाकिस्तान के आतंकियों से भी बताए जा रहे हैं।

किशन भरवाड हत्याकांड

गौरतलब है कि किशन भरवाड़ की हत्या 25 जनवरी 2022 को कर दी गई थी। 2 बाइक सवारों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। हत्या की वजह सोशल मीडिया पर मोहम्मद पैगम्बर को ले कर डाली गई एक पोस्ट थी जिसे हत्यारोपितों ने ईशनिंदा माना था। इस मामले में अब तक कुल 8 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। यह गिरफ्तारियाँ देश के तमाम हिस्सों से की गई हैं। इस केस की गहन जाँच पड़ताल के लिए कई एजेंसियाँ काम पर लगाई गईं हैं।