Home Blog Page 2983

‘शांतिदूतों’ के रडार पर जावेद अख्तर: कहा- हिजाब खुदा का आदेश, जिसे हराम और हलाल का पता नहीं वो क्या जाने पर्दे की अहमियत

विवादास्पद गीतकार जावेद अख्तर ने कर्नाटक के कॉलेजों में हिजाब को लेकर छिड़े विवाद पर गुरुवार (10 फरवरी 2022) को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कर्नाटक से हाल ही में सामने आई घटनाओं पर नाराजगी जताई। इसके बाद वह एक बार फिर आलोचनाओं का शिकार हो गए। इस बार इस्लामवादी उन्हें इस्लाम की ‘मूल’ बातें सिखा रहे हैं।

जावेद अख्तर ने लिखा, “मैं कभी भी हिजाब या बुर्का के पक्ष में नहीं रहा। मैं अब भी उस पर कायम हूँ, लेकिन साथ ही मुझे गुंडों की इन भीड़ पर गुस्सा आता है जो लड़कियों के एक छोटे समूह को डराने की कोशिश कर रहे हैं और वह भी असफल रूप से। क्या ये मर्दानगी है। कितने अफ़सोस की बात है।” 

इस ट्वीट के करते ही जावेद अख्तर मिनटों में इस्लामवादियों के रडार पर आ गए। हर एक इस्लामवादी उन्हें इस्लाम की शिक्षा देते देखा गया। aamadmi29 के एक ट्विटर हैंडल ने कहा, “हिजाब महिलाओं के लिए खुदा का आदेश है और उन्हें इसका पालन करना होगा।”

‘Pakisdani’ नाम के एक अन्य ट्विटर यूजर ने जावेद अख्तर के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “हिजाब और बुर्का को आपकी मँजूरी की जरूरत नहीं है। यह एक च्वाइस है, बस इसे स्वीकार करें। यह एक सार्वभौमिक अधिकार है। भारत में कुछ लोगों को और अधिक परिपक्व और सहनशील बनने की आवश्यकता है। दूसरों को जीने दो और अपनी विचारधारा उन पर मत थोपो!”

आकिब अंसारी ने लिखा, “इस्लाम में बुर्का या हिजाब सबसे महत्वपूर्ण प्रथा है।”

एक अन्य इस्लामवादी ट्विटर हैंडल @Zraar640 ने लिखा, “अल्लाह आप पर रहम करे। मुस्लिम हो कर हज़रत मुहम्मद के फ़रमान से इनकार कर रहे हो।”

नईम खान ने पोस्ट करते हुए लिखा, “कुछ लोग होते हैं जो अपने हिसाब से इस्लाम को फॉलो करते हैं। उन्हें कुुरान और हदीस से सिर्फ वो बातें चाहिए होती है तो उनके मतलब की हो। लेकिन इमान वाला वही है जो पूरे इस्लाम को माने। अगर एक भी बात कुरान और हदीस की नहीं मानोगे तो तुम मुसलमान नहीं हो।”

आयशा सिकंदर ने जावेद अख्तर को जवाब देते हुए कहा, “आप एक प्रसिद्ध लेखक हैं, कवि हैं और न जाने क्या-क्या… लेकिन आप कुरान में जो लिखा है, उसे पढ़ने और समझने में विफल रहे हैं। विडंबना… कभी-कभी इतना ज्ञान प्राप्त करने के बाद आपको कुछ भी नहीं मिलता है।”

एम इदरीस खत्री ने कहा, “जिसे हराम और हलाल का पता नहीं वो क्या जाने इस्लाम में पर्दे की अहमियत को।”

जावेद अख्तर की ट्विटर टाइमलाइन पर इस्लामवादियों के ऐसे ट्वीट्स की बाढ़ आ गई है, जिनमें हिजाब का समर्थन नहीं करने के लिए उनकी आलोचना की गई है और इस्लाम के बारे में ‘उनके ज्ञान की कमी’ को लेकर शिक्षा दी गई है।

‘BJP को मुस्लिम बहनों के खुलेआम समर्थन से ठेकेदार बेचैन’: सहारनपुर में PM मोदी ने ट्रिपल तलाक से मुक्ति का किया जिक्र, दंगावादियों से किया आगाह

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election-2022) के लिए जारी वोटिंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गुरुवार (10 फरवरी 2022) को सहारनपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि तीन तलाक कानून और दंगामुक्त सरकार देने के कारण मुस्लिम वोटों के ठेकेदार बेचैन हो गए हैं। इसलिए वे मुस्लिम बहनों को बरगला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार ना हो, इसलिए यूपी में योगी सरकार जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मुस्लिम बहन-बेटियाँ हमारी साफ नियत को भली-भाँति समझती हैं। हमने उन्हें तीन तलाक से मुक्ति दिलाई है। हमने जो तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया है, उसने मुस्लिम बहनों में सुरक्षा का विश्वास जगाया है। मुस्लिम बेटियों का समर्थन भाजपा को मिलने लगा। वे छोटे-छोटे वीडियो डालकर भाजपा को समर्थन जताने लगी तो वोटों के ये ठेकेदार बेचैन हो उठे। कहने लगे कि हमारी ही बेटी मोदी-मोदी करने लग गई। उनके पेट में दर्द होने लगा।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “मोदी की तारीफ में मुस्लिम बहनों के बयान, उनके वीडियो देखकर इन ठेकेदारों को लगा कि इन बेटियों को रोकना होगा। ये मोदी की तरफ चली गईं तो घर में भी उनका राज आ जाएगा। वे मुस्लिम बहनों को बरगला रहे हैं, ताकि उनका जीवन हमेशा पीछे रहे। मुस्लिम महिलाओं पर कोई जुल्म ना कर सके इसलिए यूपी में योगी सरकार जरूरी है।”

सहारनपुर की लकड़ी के नक्काशी उद्योग का जिक्र कर प्रधानमंत्री ने कहा कि सहारनपुर की नक्काशी का विश्व में डंका बज रहा है। इस कुटीर उद्योग से अनेकों परिवार, नौजवान जुड़े हुए हैं। इस नक्काशी को एक बड़े ब्रांड के तौर पर आगे बढ़ाने औऱ जीआई टैग दिलाने का काम भाजपा ने किया है।

समाजवादी पार्टी पर तंज

जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 41 मिनट का भाषण दिया। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा, “अगर ये घोर परिवारवादी लोग सत्ता में होते तो वैक्सीन कहीं रास्ते में ही बिक जाती और आप जीवन-मृत्यु की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर हो जाते। डबल इंजन की सरकार जो यूनिवर्सिटी बना रही है, सहारनपुर को आधुनिक सड़कों द्वारा दिल्ली-उत्तराखंड से जोड़ने का काम कर रही है, इसके लिए यूपी में भाजपा सरकार जरूरी है।”

समाजवादी पार्टी का नाम लिए बगैर उस पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजकल घोर परिवारवादी पार्टी लगातार जनता से खोखले वायदे कर रही है। यूपी की जनता ने उनको नकार दिया है। इसलिए बड़बोले वचन दे रहे हैं, क्योंकि उनको आना तो है नहीं। न लोगों ने शहरों को 22 और गाँवों को घंटे बिजली देने का वादा किया था, लेकिन दिया नहीं। परिवारवादी सोच बिजली पर भी वहीं अटक गई। जब ये लोग सत्ता में थे तो सहारनपुर के शहरी इलाकों में 500 गरीबों के लिए घर बनाने की बात की, लेकिन बनाए केवल 200 घर। लेकिन 2017 में योगी सरकार बनी तो सहारनपुर में 31 हजार घरों का लक्ष्य रखा था और इनमें से अब तक 18,000 घरों का काम पूरा हो चुका है।

राशन माफिया का किया जिक्र

राशन माफियाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इनके राशन माफिया गरीब भाइयों-बहनों का राशन भी खा जाते थे। लेकिन डबल इंजन की सरकार ने इनके कारनामों को बंद करवाकर 100 साल के सबसे बड़े संकटकाल में भी गरीबों को भूखा नहीं सोने दिया। आज उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन का डबल बेनिफिट मिल रहा है।

योगी सरकार की तारीफ

योगी सरकार की तारीफ करते हुए पीएम ने कहा कि भारत सरकार के हर काम में योगी जी कंधा से कंधा मिलाकर चले। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा को लेकर जब योगी जी काम कर रहे हैं तो विपक्षी कहते हैं कि योगी जी ने उसको जेल डाल दिया… उसको जेल में डाल दिया। जेल में नहीं डालें तो महल में भेजें? प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधरने से निवेशकों में औद्योगिक विकास का विश्वास एक बार फिर से पैदा हुआ है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोजेक्ट का जिक्र कर पीएम ने बताया कि सरकार हर जिले और क्षेत्र की विशेषता की पहचान कर उसे बढ़ाने के लिए काम कर रही है।

योगी सरकार के कामकाज की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, योगी सरकार यूपी अलग-अलग जिलों को सड़कों से कनेक्ट कर रही है। गंगा एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे, दिल्ली-सहारनपुर फोरलेन, सहारनपुर एयरपोर्ट, यूपी में इतनी तेजी से, इतने बड़े-बड़े काम पहले कभी नहीं हुए। भाजपा सरकार की ये परंपरा है कि जो भी संकल्प लेती है, उसे पूरा करती है। गन्ना किसानों को जितना पैसा पिछली सरकारों ने 10 साल में दिया उससे अधिक पैसा योगी सरकार ने दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गन्ना उत्पादक किसानों के सामने अक्सर एक समस्या आती है कि अगर चीनी की कीमत कम हो या फिर मिल बंद हो या फिर विश्व के बाजारों में चीनी का उत्पादन अधिक हो जाए तो गन्ना किसान और चीनी मिलों को डर लगने लगता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए स्थायी उपाय किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जरूरी नहीं कि गन्ने से केवल चीनी ही बने। जरूरत पड़ने पर इससे इथेनॉल भी बनाया जाएगा। गन्ना किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। पीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश को केवल गन्ने से बने इथेनॉल से 12 हजार करोड़ रुपए मिले हैं।

‘कोई हिजाब तो कोई टोपी के लिए कर रहा आंदोलन’: मद्रास HC ने ड्रेस कोड पर पूछा- देश बड़ा या धर्म

कर्नाटक हिजाब को लेकर विवाद जारी है। जहाँ कर्नाटक में हिजाब पहनने के अधिकार की माँग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद मामले को बड़े बेंच के पास भेज दिया गया है वहीं मद्रास हाई कोर्ट ने गुरुवार (10 फरवरी, 2022) को देश के कुछ हिस्सों में चल रहे ड्रेस कोड विवाद पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए गंभीर टिप्पणी की है।

दरअसल, तमिलनाडु में मंदिरों में गैर-हिंदुओं और विदेशियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की माँग वाली याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। त्रिची स्थित एक्टिविस्ट रंगराजन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि गैर-हिंदुओं और विदेशियों की उपस्थिति मंदिरों की शुद्धता को दूषित करती है।

याचिकाकर्ता ने यह भी माँग की कि मंदिरों में एक सख्त ड्रेस कोड लागू किया जाना चाहिए और हिंदुओं को बिंदी, भस्म, धोती, साड़ी और सलवार कमीज पहननी चाहिए जो जिससे नास्तिकों को मंदिर में प्रवेश से रोका जा सके।

जिस पर टिप्पणी करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) मुनीश्वर नाथ भंडारी की अध्यक्षता वाली मद्रास हाई कोर्ट की पीठ ने पूछा, “सर्वोपरि क्या है? यह देश है या धर्म?”

उन्होंने कहा, “मेरा मतलब है, (यह) वास्तव में चौंकाने वाला है, कोई हिजाब के लिए आंदोलन कर रहा है, कोई टोपी के लिए, कोई अन्य चीजों के लिए जा रहा है।” इस तरह की चीजों के पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आगे पूछा, “क्या यह एक देश है या धर्मों से विभाजित है या ऐसा ही कुछ है। यह काफी आश्चर्यजनक है।”

इस तथ्य की ओर इशारा करते हुए कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ भंडारी ने कहा, “हालिया मामलों से जो पता लग रहा है वह देश को मजहबी रूप से विभाजित करने के प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है।”

एसीजे ने श्रीरंगम-आधारित एक्टिविस्ट रंगराजन नरसिम्हन द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जो चाहते थे कि अदालत भक्तों के लिए ड्रेस कोड को सख्ती से लागू करने का आदेश दे, और गैर-हिंदुओं को पूरे तमिलनाडु में मंदिरों में प्रवेश करने से रोके।

हालाँकि, पीठ ने उनसे धार्मिक अनुष्ठान में प्रयोग किए जाने वाले ड्रेस कोड के रिवाज को दिखाने के लिए उदाहरण प्रस्तुत करने को कहा और यह स्पष्ट किया कि यह प्रथा अलग-अलग मंदिरों के लिए अलग-अलग है।

बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा, जब कोई विशेष ड्रेस कोड नहीं है, तो उस पर डिस्प्ले बोर्ड लगाने का सवाल ही कैसे उठता है।

वहीं जब याचिकाकर्ता ने आदेश माँगा, तो पीठ ने उनसे यह दिखाने के लिए कहा कि अगमास (अगम शास्त्र) के किस हिस्से में पैंट और शर्ट का उल्लेख है।

पीठ ने तब चेतावनी दी कि उन्हें अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने से रोका जा सकता है और उन्हें उचित शब्दों का इस्तेमाल करने और इस तरह के विवाद और झगड़े से दूर रहने का निर्देश दिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाधिवक्ता आर षणमुगसुंदरम ने अदालत को सूचित किया कि प्रत्येक मंदिर अपने स्वयं के रिवाज का पालन कर रहा है और दूसरे धर्म से संबंधित लोगों को केवल ‘कोडी मारम’ (फ्लैग मास्ट-जहाँ तक मंदिर का ध्वज लगा होता है) तक जाने की अनुमति है।

उन्होंने याद किया कि मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने पहले ही एक एकल न्यायाधीश के एक आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें ड्रेस कोड निर्धारित किया गया था क्योंकि यह रिट याचिका के दायरे से बाहर था और इसके अलावा, आदेश ने व्यापक आक्रोश और बहस शुरू कर दी थी।

उन्होंने पीठ से कहा, “हर मंदिर की अपनी प्रथा है। कुछ मंदिर गैर-हिंदुओं को कुछ क्षेत्रों में जाने की अनुमति देते हैं। गैर-हिंदू कोडी मारम (जहाँ तक मंदिर का ध्वज होता है) से आगे प्रवेश नहीं कर सकते। यही प्रथा है।”

अंत में, पीठ ने याचिकाकर्ता को मंदिरों में ड्रेस कोड के उल्लंघन को दिखाते हुए उनकी तस्वीरों के साथ एक हलफनामा दायर करने को कहा है।

बस जिंदा है तनिष्का शर्मा, शरीर में अब भी फँसी हैं 6 गोलियाँ-अंदरूनी अंगों को भारी क्षति: जा रही थी ससुराल, मोहम्मद साहिल ने किया था हमला

हरियाणा के रोहतक जिले के गाँव भाली में 1 दिसंबर 2021 को ससुराल जा रही दुल्हन तनिष्का शर्मा को मोहम्मद साहिल ने गोलियों से भून दिया गया था। गंभीर हालत में तनिष्का शर्मा को अस्पताल भर्ती करवाया गया था। लम्बे जद्दोजहद के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन उनके आंतरिक अंगों पर बुरा असर पड़ा है। तनिष्का के शरीर में अभी भी 6 गोलियाँ मौजूद हैं। उन्हें निकाला नहीं जा सका है। वो ठीक से चलने में भी असमर्थ हैं।

जनसहयोग से हुआ तनिष्का का इलाज

इस घटनाक्रम को लेकर ऑपइंडिया ने तनिष्का के पिता ओम प्रकाश से बात की। ओम प्रकाश ने बताया, “तनिष्का खुद से जैसे-तैसे उठ-बैठ रही है। वो अपनी नित्य क्रिया आदि भर के लिए ही ठीक हो पाई है, लेकिन चोटों से अभी पूरी तरह से उबर नहीं पाई है। उसका इलाज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चल रहा है। बीच में कोरोना के चलते इलाज में देरी हुई। तब डॉक्टरों ने घर पर ही सेवा आदि करने के लिए कहा था। अब अगले हफ्ते तनिष्का को फिर से अस्पताल के डाक्टरों ने बुलाया है। इस बार जाँच होगी, तभी वे बता पाएँगे कि वो कब तक स्वस्थ होगी। इलाज में जो भी खर्च हुआ वो जन सहयोग से आया है। दीपेंद्र हुड्डा की माता आशा हुड्डा ने भी इलाज में हमें आर्थिक सहयोग दिया है।”

ओम प्रकाश ने आगे बताया, “मुख्य आरोपित अभी भी जेल में है। यह केस रोहतक के बहू थाने में दर्ज हुआ था। पुलिस ने इस केस में 5 हमलावरों को पकड़ा था, जिनमें 3 नाबालिग बताए गए थे। मैंने तो हमलावरों को आज तक देखा भी नहीं है। आरोपित तेली था, जो मुस्लिमों में भी होते हैं।” उन्होंने बताया कि उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है।

पुलिस अधिकारी बनना चाहती हैं तनिष्का

ऑपइंडिया ने इस मामले की जानकारी के लिए तनिष्का के पति मोहन से बात की। मोहन ने बताया, “तनिष्का का सपना पुलिस अधिकारी बनने का है। तनिष्का के शरीर में अभी भी गोलियाँ मौजूद हैं। हालाँकि अभी तनिष्का खतरे से बाहर हैं, लेकिन उनकी हालत पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है। पुलिस कार्रवाई की पूरी जानकारी मुझे नहीं है। पुलिस अपना काम कर रही है। जिसने गोली मारी थी वो अभी तक जेल में है।”

ऑपइंडिया ने इस संबंध में बहू थाने के SHO से भी बात की। SHO ने बताया, “इस केस में 5 आरोपित थे। इनमें से 3 नाबालिग थे। 3 लड़कों पर धारा 307, 389 B, 341, 506 और आर्म्स एक्ट लगाया गया है। बाकी 2 अन्य आरोपितों पर 120B के तहत केस दर्ज किया गया है। इन पाँचों आरोपितों की अभी तक जमानत नहीं हो पाई है। इस केस की विवेचना समाप्त हो गई है। चार्जशीट अगले सप्ताह तक लगा दी जाएगी।”

तनिष्का केस को कहा गया था निकिता तोमर पार्ट 2

गौरतलब है कि इस घटना को निकिता तोमर पार्ट 2 कहा जाने लगा था। दुल्हन अपने मायके सांपला से विदा होकर ससुराल भाली जा रही थी। इसी दौरान हमलावर कार से आए और भाली गाँव के शिव मंदिर के पास घटना को अंजाम दिया था। जाते समय हमलावरों ने दूल्हे के भाई की सोने की चेन भी छीन ली थी। मुख्य आरोपित साहिल पेशेवर अपराधी है। उस पर लूट, स्नैचिंग, बाइक चोरी समेत लगभग आधे दर्जन केस दर्ज हैं। एक केस में वह अदालत से भगोड़ा भी घोषित था। घटना की वजह एकतरफा प्रेम प्रसंग बताई गई थी।

कर्नाटक की बुर्के वाली लड़कियों को तालिबान का समर्थन: ‘अल्लाह हू अकबर’ वाली का तस्वीर किया शेयर, ‘इस्लाम’ को बताया ‘मुल्क’ से ऊपर

कर्नाटक (Karanataka) के स्कूलों में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब (Hijab) पहनने को लेकर जारी विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँच चुका है। इस मुद्दे पर शांति नोबेल पुरस्कार पाने वाली मलाला यूसुफजई (Malala Yousafzai) के बाद अब तालिबान (Taliban) की भी एंट्री हो गई है। गुरुवार (10 फरवरी 2022) को कट्टरपंथी संगठन तालिबान ने कर्नाटक में हिजाब पहनने वाली मुस्लिम लड़कियों का समर्थन करते हुए ‘इस्लामी मूल्यों’ की रक्षा के लिए डटकर खड़े रहने के लिए उनकी तारीफ की।

अफगानिस्तान के तालिबानी नेता और उप-प्रवक्ता इनामुल्लाह समांगानी ने ट्वीट किया, “भारतीय मुस्लिम लड़कियों का हिजाब के लिए संघर्ष यह दिखाता है कि हिजाब अरब, ईरानी, ​​मिस्र या पाकिस्तानी संस्कृति नहीं है, बल्कि ‘इस्लामिक मूल्य’ है। इसके लिए विश्व भर में, खासकर ‘सेक्युलर दुनिया’ में मुस्लिम लड़कियाँ कई तरह से अपना बलिदान देती हैं और अपने धार्मिक मूल्य की रक्षा करती हैं।”

इसके साथ ही समांगनी ने कर्नाटक के स्कूल में ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाने वाली मुस्लिम लड़की ‘मुस्कान’ की तस्वीर को भी ट्विटर पर शेयर किया। बता दें कि तालिबान का यह ट्वीट मुस्लिम लड़कियों के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके लिए ‘हिजाब पहली प्राथमिकता है और एजुकेशन सेकेंडरी।’

इमानुल्ला समांगनी का ट्वीट

उधर सलीम जावेद नाम के एक यूजर ने कहा कि विरोध करने वाली मुस्लिम लड़कियाँ दरअसल ‘सेक्युलरिज्म’ के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के तहत धर्मनिरपेक्षता का समर्थन कर रही हैं। इस पर तालिबानी नेता समांगनी जावेद पर भड़क उठे। उन्होंने सलीम को ‘फेक सेक्युलरिस्ट’ और इस्लाम से दुश्मनी दिखाने वाला करार दिया। समांगानी ने इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक में मुस्लिम लड़कियाँ ‘धर्मनिरपेक्षता’ का विरोध कर रही हैं।

इमानुल्ला समांगनी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

बुर्का विवाद पर मुस्लिम लड़की की तारीफ करने के मामले में इनामुल्ला समांगानी का कतर स्थित इस्लामिक अमीरात के आधिकारिक प्रवक्ता और तालिबान के अधिकारी सुहैल शाहीन समेत कई लोगों ने समर्थन किया।

इमानुल्ला समांगनी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

तालिबान में महिलाओं को नहीं है आजादी

खास बात ये है कि अगस्त 2021 में अफगानिस्तान में हथियारों के दम पर कब्जा करने के साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों का दमन शुरू कर दिया था। तालिबान ने वहाँ बुर्का या हिजाब को महिलाओं के लिए अनिवार्य कर दिया था। इसके अलावा इस्लामिक संगठन ने टीवी पर महिला कलाकारों को भी एक्टिंग से रोक दिया था।

तालिबान के खिलाफ जब कई अफगान महिलाओं ने रंगीन कपड़ों में शरिया लॉ के खिलाफ प्रदर्शन किया तो तालिबान के लड़ाकों ने महिलाओं के घरों पर छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। दिलचस्प बात ये है कि तालिबान की तरह ही कथित ‘वाम-उदारवादी’ भी महिलाओं को ढँका हुआ देखना चाहते हैं।

कर्नाटक हिजाब विवाद

कर्नाटक के उडुपी जिले के पीयू कॉलेज में हिजाब का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। बाद में इसके विरोध में मुस्लिम महिलाओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हिजाब को अपना मौलिक अधिकार बताते हुए कक्षाओं में इस पहनने की छूट माँगी। बहरहाल मामला अभी अदालत में है।

10 जनपथ का सोनिया गाँधी ने 18 महीने से नहीं दिया भाड़ा: RTI से खुलासा, कॉन्ग्रेस के कब्जे वाली अन्य कोठियों का भी 10 साल से किराया बाकी

विधानसभा चुनावों के बीच कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी द्वारा अपने लुटियन स्थित बंगलो का लम्बे समय से किराया न देने का मामला सामने आया है। एक RTI के अनुसार यह खुलासा हुआ है कि गाँधी परिवार दिल्ली के अपने तीन आवंटित बंगलो का किराया काफी समय से नहीं दिया है।

ये तीन बंगले हैं- 26 अकबर रोड, 10 जनपथ और चाणक्यपुरी में। बता दें कि 26 अकबर रोड और चाणक्यपुरी वाले बंगले में कॉन्ग्रेस ने ऑफिस बना रखा है वहीं 10 जनपथ सोनिया गाँधी का घर है। गुजरात के सुजीत पटेल के 7 फरवरी 2022 को दिए गए RTI के जवाब में शहरी हाउसिंग मंत्रालय ने बकाया किराए के बारे में सूचना दी है। 26 अकबर रोड के बंगले का जहाँ दिसंबर 2012 के बाद से 1269902 रुपया किराया बाकी है वहीं चाणक्यपुरी के बंगले का किराया अगस्त 2013 के बाद से बाकी है, जिसकी सरकारी राशि 507911 रूपया है। वहीं सोनिया गाँधी के आधिकारिक निवास 10 जनपथ का भी सितम्बर 2020 के बाद से किराया नहीं दिया गया है।

बीजेपी मुंबई के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने तंज करते हुए ट्वीट किया, “एंटोनिया माइनो उर्फ ​​सोनिया गाँधी प्रवासी श्रमिकों के टिकट के भुगतान को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कर रही थीं। कम से कम पहले अपने मकान का किराया तो चुकाया होता, जो डेढ़ साल से बकाया है।”

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को आवंटित घर देश के अन्य नेताओं के मुकाबले सबसे बड़ा घर है। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री निवास 7 रेस कोर्स से भी बड़ा है। सेंट्रल पब्लिक डिपार्टमेंट के अनुसार प्रधानमंत्री निवास 14,101 वर्ग मीटर में बना है वहीं सोनिया गाँधी का निवास 15,181 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला है जो 7RCR के मुकाबले काफी बड़ा है।

राजधानी दिल्ली में कॉन्ग्रेस ने अपने कब्जे में कई बंगलो को ले रखा था। जिसे खाली कराने के लिए मोदी सरकार में कई नोटिस भेजे गए थे। निवास स्थान के अलावा कॉन्ग्रेस के कब्जे में जो तीन अन्य बंगले 5 रायसीना रोड, 26 अकबर रोड और सी-2/109 चाणक्यपुरी हैं। इनमें से रायसीना रोड वाला बंगला यूथ कॉन्ग्रेस के पास है, जबकि 26 अकबर रोड और चाणक्यपुरी वाला बंगला पार्टी के कामकाज के लिए इस्तेमाल होता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक पुराने RTI के हवाले से बताया गया है कि शहरी विकास मंत्रालय के तहत आने वाले संपदा निदेशालय ने इनका आवंटन 26 जून, 2013 को रद्द कर दिया गया था। बता दें कि कॉन्ग्रेस को दिल्ली में अपना कार्यालय भवन बनाने के लिए 2010 में जमीन दी गई थी।

गौरतलब है कि जमीन आवंटन के तीन साल के अंदर कॉन्ग्रेस को भवन का निर्माण करवा लेना था और चार बंगलों को 2013 तक खाली कर देना था। आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी ने तीन साल का अतिरिक्त समय देने का निवेदन किया था। जिसके बाद 2017 में भी कॉन्ग्रेस को नोटिस भेजा गया था। फिलहाल अभी भी ये बंगले कॉन्ग्रेस के कब्जे में है और इनका किराया मार्किट रेट से बहुत कम होने के बाद भी कॉन्ग्रेस ने लम्बे समय से चुकता नहीं किया है। जिसे लेकर सोशल मीडिया कॉन्ग्रेस को घेरा जा रहा है।

‘देवर भगवंत मान के लिए वोट माँगने जा रही हूँ’: पंजाब के चुनाव प्रचार में केजरीवाल ने पत्नी और बेटी को भी उतारा

पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Elections 2022) में आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए अरविंद केजरीवाल की पत्नी और बेटी भी प्रचार करेंगी। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल और बेटी हर्षिता पंजाब जाएँगी। दोनों पंजाब में AAP के मुख्यमंत्री चेहरा भगवंत मान (Bhagwant Mann) के लिए प्रचार करेंगी।

सुनीता केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, “कल बेटी के साथ अपने देवर भगवंत मान के लिए वोट माँगने धूरी जा रही हूँ।” सुनीता केजरीवाल 11 फरवरी को धूरी पहुँचेंगी। वह बेटी संग संगरूर जिले के धूरी क्षेत्र में मान की जनसभा में शामिल होंगी। इस दौरान सुनीता केजरीवाल महिलाओं से बातचीत करेंगी और उनके वोटों को AAP के पाले में करने का प्रयास करेंगी। 

इसे सुनीता केजरीवाल के सक्रिय राजनीति में प्रवेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्हें अपने पति के साथ देखा गया था। लेकिन यह पहला मौका होगा जब वह पार्टी के किसी अन्य उम्मीदवार का प्रचार करेंगी। अपने पति की तरह सुनीता भी भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी रही हैं। उन्होंने 2014 में सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली था। आईआरएस अधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नई दिल्ली के आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल में कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स का पद सँभाला था।

AAP ने भगवंत मान को धूरी सीट से मैदान में उतारा है। वह संगरूर से दो बार सांसद भी चुने जा चुके हैं। बता दें कि धूरी विधानसभा क्षेत्र में अधिकतर ग्रामीण इलाका है। इस विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ धूरी ही छोटा सा शहर है। इसके अलावा 74 गाँव आते हैं। धूरी विधानसभा क्षेत्र में किसान आंदोलन बड़ा मुद्दा है। यहाँ के लोगों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया था। इस क्षेत्र में कुल 1,64,322 वोटर्स हैं।

पंजाब में महिलाओं की भागीदारी

पंजाब में कुल 2,12,75,067 मतदाता हैं। इनमें महिला मतदाताओं की संख्या 1,00,86,514 है। पिछले दो विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों के आँकड़ों पर नजर डालें तो सरकार बनाने में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा रही है। 2012 विधानसभा चुनाव में 78.90 महिला मतदाताओं ने मतदान किया था, जबकि पुरुष वोटिंग प्रतिशत 77.58 रहा। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी 79.2 प्रतिशत महिलाओं ने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि 78.5 प्रतिशत पुरुषों ने वोट डाले। 2019 लोकसभा चुनाव में 79.2 प्रतिशत महिला और 78.5 प्रतिशत पुरुष मतदाताओं ने मताधिकारी का प्रयोग किया था।

बता दें कि आम आदमी पार्टी गोवा, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ रही है। पंजाब में 20 फरवरी को वोट डाले जाएँगे। नतीजे अन्य चुनावी राज्यों के साथ 10 मार्च को आएँगे।

मौलाना ने कहा- हजरत आदम हिंदुओं के पिता… फिर फेसबुक पर Video किया अपलोड: हाई कोर्ट का FIR रद्द करने से इनकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने मंगलवार (8 फरवरी, 2022) को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया। कथित तौर पर इस वीडियो में एक गुमनाम मौलाना ने हिंदुओं के खिलाफ घृणित और अपमानजनक बयान दिया था। मौलाना ने टिप्पणी की थी कि ‘हज़रत आदम हिंदुओं के पिता’ हैं।

जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस अजय त्यागी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं के इस दावे को खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ आरोप फर्जी थे और ऐसा कोई वीडियो कभी प्रसारित नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के वायरल वीडियो में कोई आपत्तिजनक सामग्री है या नहीं, इसकी जाँच एजेंसियों द्वारा कराए जाने की जरूरत है, क्योंकि पहली नजर में यह अपराध की श्रेणी में आता है।

मामले में महेश पांडे नाम के शख्स ने FIR दर्ज करवाई थी। उनकी शिकायत के आधार पर तत्काल याचिकाकर्ता शकील खान सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पांडे ने आरोप लगाया था कि 23 अक्टूबर, 2021 को फेसबुक चलाते समय उनकी नजर एक वीडियो पर पड़ी। इसमें एक मौलाना द्वारा हिंदू समुदाय के लोगों के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक बयान दिए गए थे।

पांडे के अनुसार, उक्त वायरल वीडियो में, मौलाना ने टिप्पणी की थी कि ‘हज़रत आदम हिंदुओं के पिता हैं’। पांडे ने आरोप लगाया था कि इस तरह की टिप्पणियाँ उनके और अन्य हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाली हैं। 

कथित तौर पर, यह वीडियो उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के रायपुर गाँव में जाबिर खान द्वारा आयोजित कार्यक्रम का था। वीडियो 5 अक्टूबर को फेसबुक पर अपलोड किया गया था। पांडे की शिकायत के अनुसार, ऐसा हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने और उन्हें अपमानित करने के इरादे से ऐसा किया गया। FIR में यह भी उल्लेख है कि इस वीडियो की वजह से हिंदुओं में काफी आक्रोश है। मामले में खान सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295-ए, 505 (2) और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 66 के तहत केस दर्ज किया गया है।

‘तालिबान से सीखना होगा, दिल्ली की सड़कों पर उतरना होगा’: बुर्के पर मुस्लिमों को भड़काने की प्लानिंग, CAA विरोधी दंगाई गैंग का ऑडियो वायरल

दिल्ली दंगों के आरोपित आसिफ इकबाल तन्हा (Asif Iqbal Tanha) का एक ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह कर्नाटक में शुरू हुए हिज़ाब विवाद को लेकर भड़काऊ बयान देता सुनाई दे रहा है। यह बातचीत मुस्लिम संगठनों के साथ हो रही थी। वायरल ऑडियो ट्विटर स्पेस की एक रिकॉर्डिंग का बताया जा रहा है। इस ऑडियो को वीडियो फॉर्मेट में @TheAngryLord नाम के ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया है।

इस स्पेस का टाइटल ‘कर्नाटक हिजाब रो, क्या हाईकोर्ट न्याय देगा?’ था। इसे जमात-ए-इस्लामी हिन्द की छात्र शाखा स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन (SIO) द्वारा होस्ट किया गया था। इस स्पेस में कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद को लेकर चर्चा हो रही थी। इसमें पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) और उसकी स्टूडेंट विंग कैम्पस फ्रंट ऑफ़ इंडिया (CFI) के सदस्य मौजूद थे।

इसमें स्पीकर के तौर पर तन्हा कह रहा था, “हम इसे (हिजाब विवाद को) सिर्फ कर्नाटक का इश्यू न बना करके इस पूरे इंडिया में फैलाना है। दिल्ली को सेेंटर ऑफ एजिटेशन बनाना है। आज सुबह जब से वह वीडियो (कर्नाटक में पुलिस कार्रवाई का) वायरल हुआ है, तब से काफी डिस्टर्बिंग रहा है। उस वक्त से मैं कई मुस्लिम संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से लगातार बात कर रहा हूँ कि आखिर हम लोग दिल्ली में क्या कर सकते हैं इस इश्यू को लेकर के। मुझे सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं कि इस पर हमें भी कुछ करना चाहिए और जल्दी ही हम लोग उनके समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे।”

आसिफ ने आगे कहा, “आज पूरे दिन ट्विटर पर अल्लाह-हु-अकबर ट्रेंड हुआ है, लेकिन आप अभी भी कहीं चलें जाएँ…. मैं खुद ओखला में रह रहा हूँ तो बहुत सारे लोग मिले हैं, बहुत सारे स्टूडेंट ऐसे मिले हैं, जिन्हें वीडियो वायरल होने से पहले पता ही नहीं है कि कर्नाटक में क्या हो रहा है। यहाँ की मुस्लिम आबादी को पता ही नहीं है कि कर्नाटक में हिजाब का क्या इश्यू है। हमें इस इश्यू को कम-से-कम घर-घर तक ले जाने की जरूरत है। यह हमारे अधिकारों और हमारी पहचान की बात है। CAA और तीन तलाक के मामलों में भी हमने ये कहा था कि ये मुस्लिम महिलाओं के अधिकार, उनकी पहचान और शरिया पर सीधे अटैक है। इसी तरह यह हिजाब का मुद्दा है, जो आज कर्नाटक में है, कल कहीं और होगा।”

दिल्ली दंगों के आरोपित ने आगे कहा, “SIO (स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन) के छात्र और मुस्लिम के जिम्मेदारान लोग पहले से ही इस इश्यू को लेकर जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। हमारे GIO के छात्र लगातार सड़कों पर हैं। दूसरे स्टेट में भी, मुंबई में भी हमारी मुस्लिम बहनों ने प्रोटेस्ट की है। एक मुस्लिम संस्था का होने के नाते हम इस मामले को बहुत ही गंभीरता से ले रहे हैं।”

पहले भी कर चुका है तालिबान का समर्थन

15 अगस्त 2021 को होस्ट किए गए एक अन्य स्पेस में तन्हा को तालिबान का समर्थन करते सुना जा सकता है। उस स्पेस का नाम ‘क्या देश का मुसलमान आजाद है?” था। उस स्पेस में भी तन्हा ने कहा था, “मैं आप सभी को एक शुभ समाचार देता हूँ। अशरफ गनी ने इस्तीफा दे दिया है। अल्लाह का शुक्रिया है कि तालिबान इमारत-ए-इस्लामिया स्थापित कर रहा है। अल्हम्दुलिल्लाह! हमें तालिबान से सीखना चाहिए कि आजादी हासिल करने के लिए किस तरह की जद्दोजहद और कोशिश करनी चाहिए।” बता दें कि इसी दिन तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्ज़ा किया था।

फरवरी 2020 के दंगों में आसिफ इक़बाल की भूमिका

शाहीन बाग का करहने वाला आसिफ इक़बाल तन्हा दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (JMI) का छात्र है। वह साल 2014 से SIO से जुड़ा हुआ है। उसे मई 2020 में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों में पुलिस को उसकी बड़ी भूमिका का पता चला था। आसिफ ने दिल्ली दंगों में अपनी भूमिका को कबूला था। उसने 12 दिसंबर 2019 को जामिया के गेट नंबर 7 से लगभग 3000 लोगों का एक मार्च भी निकाला था। वह जेल में बंद शरजील इमाम का सहयोग भी बताया जा रहा है।

पूछताछ में तन्हा ने पुलिस को बताया था कि शरजील इमाम ने एक भड़काऊ भाषण के दौरान 13 दिसंबर को चक्का जाम करने को कहा था। आसिफ ने 15 दिसम्बर को निकले गाँधी शांति मार्च के भी आयोजन को कबूला था। इस मार्च का नाम गाँधी के नाम पर इसलिए रखा गया था, जिससे बाकी लोग भी इसमें शामिल हो सकें। इस मार्च को रोकने के लिए लगाई गई पुलिस बैरिकेट को भी तोड़ने के लिए लोगों को भड़काने का आरोप आसिफ़ पर लगा था।

गफूर हुसैन ने ‘बहन’ से की निकाह, 8 बच्चे हुए-3 जेनेटिक डिसऑर्डर से पीड़ित: रिश्तेदारी में शादी से बढ़ रही बीमारी, इलाज में ‘मजहब’ की अड़चन

बढ़ती आनुवांशिक बीमारियों ने पाकिस्तानियों की चिंता बढ़ा दी है। इसकी सबसे बड़ी वजह रिश्तेदारी में निकाह (Cousin Marriage) का चलन है। इसके कारण जेनेटिक डिसऑर्डर (Genetic Disorder) से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह समस्या पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के पाकिस्तानियों के बीच एक चिंता का विषय है। 

हाल ही में DW में एस खान ने एक लेख लिखा है। इसमें लेखक ने बताया है कि कैसे कजन मैरेज की उच्च दर के कारण पाकिस्तान कई चिकित्सा चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके बावजूद देश में कई समुदायों में कजन मैरेज अभी भी आदर्श माना जाता है।

खतरे को समझाने के लिए लेख में 56 वर्षीय गफूर हुसैन शाह का हवाला दिया गया है। वे शिक्षक हैं। उनके आठ बच्चे हैं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रहने वाले शाह का निकाह 1987 में ममेरी बहन से हुआ। उनके आठ बच्चों में से तीन जेनेटिक डिसऑर्डर से पीड़ित हैं। उनके एक बेटे का मस्तिष्क सामान्य रूप से विकसित नहीं हो सका। उनकी एक बेटी को सुनने में दिक्कत है, जबकि दूसरी बेटी को बोलने में दिक्कत है।

शाह कहते हैं, “मुझे सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि वे पढ़-लिख नहीं सके।” पत्नी और अपनी ढलती उम्र का जिक्र करते हुए वह कहते हैं, “मुझे हमेशा उनकी चिंता लगी रहती है। मेरी पत्नी और मेरे जाने के बाद उनकी देखभाल कौन करेगा?”

ऐसी शादियों की वजह से होने वाली जीन संबंधी बीमारियों के बारे में जानते हुए भी शाह खुद को मजबूर महसूस करते हैं। वह कहते हैं कि बच्चों की शादी रिश्तेदारी में कराने को लेकर उन पर समाज का बहुत दबाव है। पारिवारिक दायरे के भीतर बच्चों की शादी से इनकार करने वाले अकसर बहिष्कृत से कर दिए जाते हैं। शाह कहते हैं कि एक बेटे और दो बेटियों की शादी उन्हें करीबी रिश्तेदारी में करनी पड़ी। शाह के परिवार की मेडिकल हिस्ट्री में रक्त संबंधी बीमारियाँ (ब्लड डिसऑर्डर), सीखने की क्षमता संबंधी दोष, अंधापन व बहरेपन के मामले सामने आ चुके हैं। डॉक्टर इसके लिए करीबी दायरे के भीतर प्रजनन को जिम्मेदार ठहराते हैं।

पाकिस्तान में जेनेटिक म्यूटेशन की समस्या

पाकिस्तान में जेनेटिक म्यूटेशन को लेकर 2017 में एक रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की जनसंख्या की हेट्रोजिनस कंपोजिशन में एक ही विरासत वाली संतानों का स्तर बहुत ऊँचा है। इसी के कारण जीन संबंधी बीमारियाँ सामने आ रही हैं। कोहाट यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी जैसे पाकिस्तानी संस्थान पाकिस्तान के जेनेटिक म्यूटेशन (Genetic Mutation) डेटाबेस मेंटेन करते हैं। यह मुख्य रूप से पाकिस्तानी बच्चों में इनब्रीडिंग के कारण होने वाले विभिन्न प्रकार के म्यूटेशन और डिसऑर्डर की पहचान करता है और उन्हें ट्रैक करता है। पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, सिंध, गिलगित बाल्टिस्तान, फाटा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर सहित विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाने वाले 130 विभिन्न प्रकार के जेनेटिक डिसऑर्डरों के मामले में 1,000 से ज्यादा म्यूटेशनों का पता चला है।

मजहबी नेताओं ने मेडिकल एक्सपर्टों का समर्थन करने से किया इनकार

कराची में रहने वाले हेल्थ एक्सपर्ट शिराज उद दौलाह के मुताबिक परिवार के भीतर शादियों का रिश्ता इस्लाम की परंपराओं से जुड़ा है। उन्होंने बताया, “मैंने मौलवियों से कहा कि वे जीन संबंधी बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाने में मदद करें, लोगों को समझाएँ कि चचेरे या ममेरे भाई-बहन के साथ होने वाली शादियाँ जेनेटिक बीमारियों को बढ़ाने में भूमिका निभा रही हैं।”

दौलाह के मुताबिक मौलवियों ने मदद करने से साफ इनकार कर दिया। मौलवियों ने दावा किया कि ऐसी शादियाँ इस्लाम के शरिया कानून और पैंगबर मोहम्मद की परंपराओं के मुताबिक होती हैं। दौलाह के मुताबिक जरूरत लोगों की मानसिकता बदलने की है। उन्होंने कहा, “धार्मिक मामलों में लोग आँख बंद करके भरोसा करते हैं और वे कोई भी तर्क सुनना नहीं चाहते हैं। अगर सरकार सारे मौलवियों से कहे कि वे बढ़ती जीन संबंधी बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाएँ और उसे कजन के साथ शादी से जोड़े तो शायद ज्यादा पाकिस्तानी ध्यान देंगे।”

वहीं अपने परिवार में ऐसी बीमारियों से जूझने वाले टीचर शाह कहते हैं कि ज्यादातर परिवार ऐसी शादियाँ इसीलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका मजहब ये कहता है। शाह के मुताबिक अगर सरकार भी ऐसी शादियों को गैरकानूनी घोषित करे, तो उसे भी तीखे विरोध का सामना करना पड़ेगा।

पाकिस्तान के पश्चिमी सूबे बलूचिस्तान में कबाइली सिस्टम बहुत मजबूत है। गुलाम हुसैन बलोच, बलूचिस्तान के रहने वाले हैं। हुसैन के मुताबिक अपने कबीले के बाहर शादी करना एक बड़ा सामाजिक गुनाह सा है। सिंध प्रांत में भी कबीले के बाहर शादी करने पर हत्याएँ तक हो जाती हैं।

पाकिस्तान में ऐसे कई मामले

पाकिस्तान में शाह जैसे कई मामले हैं। डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में मियाँ कलाय नाम का एक गाँव है, जहाँ इनब्रीडिंग आम बात है। यहाँ पर रहने वाले मोहम्मद गुल की 36 साल की बेटी सलमा बीबी है। जब उसका जन्म हुुआ था, तो वह बेहोश थी। वह बहुत कमजोर है। सलमा न तो ठीक से चल पाती है और न ही अपना कोई काम सही से कर पाती है। उसे इसके लिए परिवार के सदस्यों की आवश्यकता होती है। पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल के डॉ. काशिफ अली खान ने डॉन को बताया कि सलमा जैसे मामलों का इलाज करना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि यह दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर होता है।